उत्तर प्रदेश के बहराइच में 1 साल की हिन्दू बच्ची से बलात्कार का मामला सामने आया है। पीड़िता को गंभीर हालात में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। भोंदू रहमान नाम के आरोपित की उम्र 50 वर्ष है। पुलिस ने रहमान को गिरफ्तार कर लिया है। प्रशासन द्वारा मामले को फास्ट ट्रैक में चलवाने का भी ऐलान किया गया है। घटना शनिवार (17 फरवरी, 2024) की है। रेप के बाद उसने पीड़िता की माँ को गालियाँ भी बकीं, उन्हें मारने लगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बहराइच के थाना क्षेत्र नानपारा का है। यहाँ शनिवार को पीड़ित परिवार ने पुलिस में अपनी 1 साल की मासूम से रेप किए जाने की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में बच्ची की माँ ने बताया कि वो दूधमुँही बेटी के साथ सरसों के खेत गई थीं। पीड़िता खेत के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला 50 साल का भोंदू रहमान वहाँ आया। भोंदू ने बदनीयती से बच्ची का मुँह दबा कर उस से जबरन रेप किया। बाद में बच्ची के चीखने की आवाज पर पीड़िता की माँ वहाँ पहुँची।
पीड़िता की माँ को देख कर भोंदू रहमान मौके से भाग निकला। बच्ची लहूलुहान हालात में थी। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँच पर बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया। पुलिस अधीक्षिका बहराइच वृंदा शुक्ला के निर्देश पर बच्ची को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया है। इधर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट व अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर के फरार चल रहे भोंदू रहमान की तलाश शुरू कर दी। रविवार (18 फरवरी) को भोंदू रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया। जिले के तमाम सीनियर अधिकारी पीड़िता के घर पहुँचे।
प्रकरण का संज्ञान लेकर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर अभियुक्त की गिरफ्तारी की गई। पुलिस अधीक्षक द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर, बच्ची के समुचित उपचार के साथ अभियोग में शीघ्र वैधानिक कार्यवाही कर आरोप पत्र दाखिल करके अभियुक्त को सजा दिलाने हेतु निर्देशित किया गया। pic.twitter.com/ptTQSxtSwr
पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने ऐलान किया है कि आरोपित का केस फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलवाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बच्ची की हालत खतरे से बाहर है। घटनास्थल से सबूत जुटाए जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपित से पुलिस की पूछताछ जारी है।
ऑपइंडिया ने बच्ची के बाबा से बात की। उन्होंने बताया कि गाँव में सैकड़ों मुस्लिमों के परिवार में महज कुछ घर दलित और OBC समुदाय के हिन्दुओं के बचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उन सबको परेशान किया जाता रहा है। मूर्तियाँ ले जाने पर ईंटों से मारा जाता है और कुछ मौकों पर तो दरवाजे तक से निकलने पर आपत्ति जताई जाती है। पीड़िता के बाबा ने हमें यह भी बताया कि योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद गाँव के मुस्लिम उनसे कहते हैं, “जब तक बाबा की सरकार है तब तक चाहे हो कर लो।”
गुजरात के मेहसाणा में वालीनाथ महादेव के भव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा 22 फरवरी 2024 के शुभ दिन गुरुपुष्य अमृत सिद्धि योग में प्रधानमंत्री मोदी के हाथों होगी। इस दौरान देश के कई साधू-संत वहाँ मौजूद रहेंगे। वालीनाथ महादेव मंदिर का इतिहास हमेशा से बहुत ही रोचक और भव्य माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महाभारत काल से लेकर अब तक यहाँ भगवान वालीनाथ की पूजा हो रही है। इस धाम से श्रद्धालुओं की काफी आस्था जुड़ी हुई है।
ऑपइंडिया ने मेहसाणा के वालीनाथ मंदिर का गौरवशाली इतिहास जानने के लिए स्थानीय लोगों से संपर्क किया। रबारी समुदाय की वालीनाथ महादेव के प्रति विशेष आस्था है। साथ ही वहाँ के स्थानीय हिंदू भी वालीनाथ महादेव की पूजा करते हैं। ऑपइंडिया ने स्थानीय राजदीपभाई रबारी से संपर्क किया। राजदीप भाई रबारी के साथ-साथ उनका पूरा परिवार वालीनाथ महादेव को अपना आदर्श मानता है। साथ ही रबारी समुदाय ही इस मंदिर की विशेष देखभाल करता है। राजदीप भाई रबारी ने ऑपइंडिया को बताया वालीनाथ महादेव मंदिर का गौरवशाली इतिहास है।
शिव प्रतिमा की स्थापना भगवान कृष्ण ने की थी
राजदीप भाई के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण जब द्वारका में आकर बसे थे, उस समय वे गुजरात में कई स्थानों और जंगलों का भ्रमण किए थे। एक बार वह उत्तरी गुजरात में दरभा (हाल में वालीनाथ मंदिर का क्षेत्र) के जंगलों में भटक गए। भगवान श्रीकृष्ण ससंघ सहित वहीं ठहरे। तब उन्होंने वहाँ गोपियों के साथ भव्य रासलीला रचाई। इस रासलीला में किसी बाहरी व्यक्ति का आना निषेध था। उस समय महादेव को भगवान श्री कृष्ण की रासलीला के दिव्य दर्शन की इच्छा हुई। परंतु पुरुष वर्जित होने के कारण उन्होंने गोपी के रूप में ऐसी रासलीला में भाग लिया।
वालीनाथ महादेव की मूर्ति
गोपियाँ और महादेव स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के साथ रासलीला कर रहे थे। लेकिन इसी बीच भगवान श्रीकृष्ण ने महादेव को पहचान लिया और शिवजी से कहा, “आप देवों के देव महादेव हैं, हम सभी के आराध्य हैं। आपकी उपस्थिति हमारे लिए सौभाग्य की बात है। आपको इस रासलीला में आने से कैसे रोका जा सकता है? आप अपने मूल रूप में दर्शन दीजिए।” भगवान श्रीकृष्ण के वचन सुनकर महादेव अपने शाश्वत स्वरूप में प्रकट हो जाते हैं। लेकिन गोपी के रूप में पहनी गई वाली (कान का आभूषण) वह कानों में पहने रखते हैं, तब भगवान कृष्ण उन्हें वालीनाथ कहकर संबोधित करते है।
भगवान श्रीकृष्ण को महादेव का स्वरूप अलौकिक एवं दिव्य प्रतीत होता है, जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण स्वयं महादेव की वेशभूषा धारण कर वहाँ एक मूर्ति स्थापित करते हैं। तब से लेकर आज तक भगवान शिव की उस मूर्ति को वालीनाथ महादेव के नाम से जाना जाता है। यह शायद भारत का पहला मंदिर है जहाँ शिवलिंग के स्थान पर शिव मूर्ति की पूजा की जाती है।
रबारी समाज से क्या है रिश्ता?
उत्तर गुजरात के रबारी समुदाय की वालीनाथ महादेव में गहरी आस्था है। जिसके पीछे भी वालीनाथ महादेव मंदिर का भव्य इतिहास छिपा हुआ है। श्रीकृष्ण द्वारा मूर्ति स्थापित करने के बाद कई शताब्दियाँ बीत गईं। कालचक्र की दुर्गम अवस्था में वालीनाथ महादेव का मंदिर धीरे-धीरे जीर्ण-शीर्ण हो गया और एक समय ऐसा आया जब इस मंदिर को पृथ्वी ने अपने में समाहित कर लिया। लेकिन जहाँ सत्य शक्ति और दिव्यता है, वह कैसे जागृत नहीं होता।
9 शताब्दी पहले तारभोवन मोयदाव नाम के एक रबारी दरभा के जंगलों के पास रूपेन नदी के तट पर गायों को चरा रहे थे। इसी बीच उन्हें अचानक नींद आ जाती है और वह प्रकृति के बीच एक नदी के किनारे एक पेड़ के तने के पास आराम करने लगते हैं।
तारभोवन रबारी सो रहे थे। इसी बीच उनके स्वप्न में किसी दैवीय शक्ति ने उनकी चेतना को भर दिया और उन्हें पूरे मंदिर और उसके स्थान के बारे में जानकारी दी। स्वप्न में यह भी कहा कि वह उस स्थान पर एक वृक्ष के नीचे बैठे साधु को इसकी सूचना दें।
तारभोवन रबारी ने उन संत को सपने के बारे में बताया। बाद में वह संत वालीनाथ गादी के प्रथम गादीपति महंत वीरमगिरि बापू के नाम से जाने गए। तारभोवन रबारी ने वीरमगिरि को सपने के बारे में बताया, जिसके बाद वहाँ खुदाई की गई तो प्राचीन मंदिर के खंडहर और वालीनाथ महादेव की मूर्ति मिली।
तारभोवन रबारी ने वालीनाथ महादेव की उस मूर्ति को वहीं स्थापित कर दिया। उसी समय रबारी ने वहाँ एक मंदिर बनवाया और इसे संतों के आश्रय स्थल के रूप में स्थापित किया। रबारी ने वीरमगिरी बापू को वालीनाथ गादी के पहले महंत और गुरु के रूप में स्थापित किया। तारभोवन रबारी ने वलीनाथ क्षेत्र में गुरुगादी सेवा शुरू की और वहीं एक गाँव बसाकर रहने लगे। वह गाँव है मेहसाणा का तरब, जिसे 900 साल पहले तरभोवन रबारी ने बसाया था। यही कारण है कि रबारी समाज के लोगों में वालीनाथ महादेव के प्रति विशेष आस्था है।
प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है मंदिर का उल्लेख
रबारियों के गुरुगादी के रूप में स्थापित पवित्र वालीनाथ गादी के गादीपति महंतो अक्सर गिरनार आते थे। इस बीच वे सौराष्ट्र के काठी में आतिथ्य सत्कार का आनंद लेते थे और वहाँ उपदेश देते थे। इसलिए वर्षों पहले सौराष्ट्र के काठी समाज की भी वलीनाथ महादेव में उतनी ही आस्था थी जितनी रबारी समाज की। एक काठी ने गादीपति महंत को ‘रेमी घोड़ी’ उपहार में दी थी, जिसकी वंशावली आज भी जीवित है। श्री कृष्ण द्वारा स्थापित वालीनाथ मंदिर में समय के साथ बदलाव आया है। खुदाई के बाद भी हर गादीपति महंत ने अपने समय में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे नया आकार दिया है।
आज भी पूर्व शासक बालादेवबापू ने करोड़ों की लागत से भव्य और दिव्य वालीनाथ मंदिर का निर्माण शुरू कराया था। जिसे अब वर्तमान गादीपति जयरामगिरि बापू ने पूरा किया है। भले ही वालीनाथ रबारी समुदाय के गुरुगादी के रूप में स्थापित हैं, लेकिन प्राचीन काल से ही यह मंदिर हर समुदाय के लिए आस्था का केंद्र और सामाजिक सद्भाव का एक बड़ा उदाहरण रहा है। हर गादीपति अपने अच्छे कर्मों की खुशबू हर समाज में फैलाता रहा है। इस परिसर में कई साधु-सतियों ने जीवित समाधि ली है। प्राचीन काल में न केवल सनातन धर्म बल्कि अनेक मुसलमानों की भी वलीनाथ महादेव में अगाध आस्था थी। 12 साल की मुस्लिम लड़की नाथीबाई को मंदिर में जिंदा दफनाया गया था। सबूत आज भी मौजूद हैं।
वालीनाथ मंदिर में रुद्राक्ष का शिवलिंग
सदियों पहले लिखे गए पद्मनाथ के कान्हड़दे प्रबंध नामक प्राचीन ग्रंथ में रूपेण कंठ के दरभा वन में वालीनाथ महादेव के एक मंदिर का भी उल्लेख है। स्थानीय लोगों के अनुसार सभी जातियों के लिए आस्था का केंद्र वालीनाथ महादेव के मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को आजादी के बाद भी हर शासक और हर मुख्यमंत्री ने बरकरार रखा है। वालीनाथ उत्तरी गुजरात का एकमात्र बड़ा खाद्य क्षेत्र है जो वर्षों से चला आ रहा है। इसके अलावा वालीनाथ को भारत के 13 सबसे पवित्र दशनामी अखाड़ों में स्थान दिया गया है। ये 13 अखाड़े कुंभ मेले में शाही स्नान करते हैं और उन्हें शाही सम्मान भी दिया जाता है।
मंदिर के पुजारी के रूप में रबारी समुदाय के महंत कर्तव्य निभाते हैं
गौरतलब है कि गुजरात के कई मंदिरों और देवस्थानों में अलग-अलग जातियों के पुजारी पाए जाते हैं। गुजरात के मंदिर सदियों से इस मिथक को तोड़ रहे हैं कि केवल ब्राह्मण पुजारी ही पुजारी हो सकते हैं। वालीनाथ मंदिर के हाल के गादीपति जयरामगिरि बापू का जन्म भी रबारी समुदाय में हुआ था। हालाँकि, उसके बाद उन्होंने दशनामी अखाड़े के महंत के रूप में संन्यास ले लिया, लेकिन वह जन्म से ब्राह्मण नहीं हैं बल्कि वालीनाथ महादेव मंदिर के पुजारी और महंत के रूप में काम करते हैं। जो सामाजिक समरसता को और बढ़ावा देता है।
केवल वालीनाथ महादेव मंदिर ही नहीं बल्कि गुजरात में ऐसे सैकड़ों मंदिर हैं जहाँ पुजारी पूरे हिंदू समुदाय से चुने जाते हैं। यहाँ तक कि गुजरात के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गुरु आश्रम बगदाना में भी कोई ब्राह्मण पुजारी नहीं है। वहाँ रामानंदी परंपरा के व्यक्ति को पुजारी का दर्जा दिया गया है।
मेहसाणा के तारभा में स्थित वलीनाथ महादेव मंदिर का गौरवशाली इतिहास बहुत ही रोचक और लोकप्रिय है। इस इतिहास का उल्लेख कई प्राचीन पुस्तकों में भी मिलता है। स्थानीय लोगों के अनुसार भगवान वालीनाथ हर समाज के आराध्य हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ रबारी समुदाय के पास ही मंदिर है। हर जाति के भक्त भगवान को प्रणाम करते हैं। साथ ही, वलिनाथ महादेव के मंदिर से कई लोककथाएँ और लोक संस्कृतियाँ भी जुड़ी हुई हैं।
नोट: वालीनाथ महादेव मंदिर के इतिहास पर यह लेख मूल रूप से गुजराती में भारगव राज्यगुरू ने लिखा है। आप इसे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (19 फरवरी, 2024) को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को संबोधित किया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। समारोह का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आज हम यहाँ विकसित भारत के लिए, विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण के संकल्प के साथ एकजुट हुए हैं, जिसमें तकनीक के माध्यम से यूपी की 400 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर लाखों लोग इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि यूपी में डबल इंजन की सरकार बने 7 वर्ष हो रहे हैं, बीते 7 वर्षों में प्रदेश में रेड टेप कल्चर, रेड कार्पेट कल्चर बन गया है। उन्होंने कहा कि बीते 7 वर्षों में यूपी में क्राइम कम हुआ तो बिजनेस कल्चर का विस्तार हुआ है। साथ ही बताया कि बीते 7 वर्षों में यूपी में व्यापार, विकास और विश्वास का माहौल बना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 7-8 वर्ष पहले हम सोच भी नहीं सकते थे कि उत्तर प्रदेश में भी निवेश और नौकरियों को लेकर ऐसा माहौल बनेगा।
उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे तब यूपी में चारों तरफ अपराध, दंगे, छीना-झपटी जैसी खबरें आती रहती थीं और उस दौरान अगर कोई कहता कि यूपी को विकसित बनाएँगे तो कोई सुनने को भी तैयार नहीं होता, लेकिन आज देखिए लाखों-करोड़ का निवेश उत्तर प्रदेश की धरती पर उतर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज यूपी वो राज्य है, जहाँ देश के सबसे ज्यादा एक्सप्रेस-वे हैं। आज यूपी वो राज्य है, जहां देश में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स हैं। आज यूपी वो राज्य है, जहां देश की पहली रैपिड रेल चल रही है।
पीएम मोदी ने कहा, “आज आप दुनिया में कहीं भी जाएँ, भारत को लेकर अभूतपूर्व सकारात्मकता दिख रही है। हर देश, भारत की ग्रोथ स्टोरी को लेकर आश्वस्त है, भरोसे से भरा हुआ है। आज देश में मोदी की गारंटी की बहुत चर्चा है, लेकिन आज पूरी दुनिया, भारत को बेहतर रिटर्न की गारंटी मान रही है। अक्सर हमने देखा है कि चुनाव के नजदीक नए निवेश से लोग बचते हैं, लेकिन आज भारत ने ये धारणा भी तोड़ दी है। आज दुनियाभर के इन्वेस्टर्स को भारत में सरकार की पॉलिसी की स्टेबिलिटी पर पूरा भरोसा है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ के समारोह में उद्योगपतियों की मौजूदगी में कहा कि हमने यूपी में Ease Of Living और Ease Of Doing Business पर समान बल दिया है। डबल इंजन सरकार का मकसद है कि कोई भी लाभार्थी, किसी भी सरकारी योजना से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में लोगों को अपने ही लाभ पाने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगानी पड़ती थी और एक खिड़की से दूसरी खिड़की तक भागदौड़ करनी पड़ती थी, लेकिन अब हमारी सरकार खुद गरीब के दरवाजे पर आ रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक हर लाभार्थी को उसका हक नहीं मिल जाता, हमारी सरकार शांत नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि मोदी, आज उनको भी पूछ रहा है, जिनको पहले किसी ने नहीं पूछा। बकौल पीएम मोदी, शहरों में जो हमारे रेहड़ी-पटरी वाले भाई बहन होते हैं, उनके बारे में पहले किसी ने नहीं सोचा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे उनकी सरकार इन लोगों के लिए पीएम स्वनिधि योजना लेकर आई, अब तक देश भर के रेहड़ी-पटरी वालों को 10 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपी में भारत का सबसे बड़ा टूरिज्म हब बनने का सामर्थ्य है, आज देश का हर व्यक्ति वाराणसी और अयोध्या आना चाहता है। उन्होंने बताया कि हर दिन लाखों लोग इन स्थानों पर दर्शन के लिए आ रहे हैं। इस कारण यूपी में छोटे उद्यमियों, एयरलाइन्स कंपनियों, होटल, रेस्टॉरेंट वालों के लिए अभूतपूर्व अवसर बन रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यटकों से आग्रह किया कि आप जब टूर पर जाने के लिए बजट बनाएँ, तो उसमें से 10% बजट जिस जगह पर जा रहे हैं, वहाँ से कुछ न कुछ खरीदने के लिए रखें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2025 में कुंभ मेले का आयोजन भी होने वाला है, ये भी यूपी की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में यहाँ बहुत बड़ी संख्या में रोजगार बनने वाले हैं। उन्होंने याद किया कि अभी कुछ दिन पहले किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह जी को ‘भारत रत्न’ देने का सौभाग्य मिला। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती के बेटे चौधरी साहब का सम्मान करना, देश के करोड़ों मजदूरों व करोड़ों किसानों का सम्मान है।
लेकिन दुर्भाग्य से ये बात कॉंग्रेस और उसके सहयोगियों को समझ नहीं आती। इन्होंने चौधरी चरण सिंह के बारे में संसद में बोलना तक मुश्किल कर दिया था। उन्होंने फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्यमियों से भी विशेष आग्रह किया कि उन्हें जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट के मंत्र पर ही काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, “आपको एक ही ध्येय के साथ काम करना चाहिए कि दुनिया भर के देशों के डायनिंग टेबल पर कोई न कोई ‘मेड इन इंडिया’ फूड पैकेट ज़रूर हो।”
उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ‘भारत रत्न’ पर एक ही परिवार का हक समझती थी, इसलिए दशकों तक बाबा साहब अंबेडकर को भी ‘भारत रत्न’ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ये लोग अपने ही परिवार को ‘भारत रत्न’ देते रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस किसान, मजदूर, गरीब, दलित, पिछड़े का सम्मान करना ही नहीं चाहती। बता दें कि यूपी दुनिया भर के निवेशकों के लिए एक नया अवसर लेकर आ रहा है, उद्योग का हब बन कर उभर रहा है।
कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भारत के सामने कहीं नहीं ठहरती। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वर्तमान में भारत के दसवें हिस्से के बराबर भी नहीं है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत इतनी पतली है कि उससे ज्यादा मार्केट कैप भारतीय कारोबारी टाटा समूह की है।
भारतीय कारोबारी टाटा समूह का कुल बाजार पूँजीकरण (Market Capitalization) अब 360 बिलियन डॉलर (लगभग ₹30 लाख करोड़) हो चुका है। टाटा समूह की सबसे बड़ी कम्पनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) जिसका अकेले का बाजार पूँजीकरण 170 बिलियन डॉलर (लगभग ₹14 लाख करोड़) है। टाटा समूह की 29 कम्पनियाँ शेयर बाजार में अधिसूचित हैं।
वहीं अगर पाकिस्तान को देखा जाए तो इसकी पूरी अर्थव्यवस्था का आकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, 340 बिलियन डॉलर (₹28 लाख करोड़) है। यानी पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था और टाटा समूह के बाजार पूँजीकरण में ₹2 लाख करोड़ का फर्क है।
भारत की पूरी अर्थव्यवस्था की तुलना में तो पाकिस्तान कहीं भी नहीं ठहरता। पाकिस्तान की जनसंख्या भारत के मुकाबले पाँच गुना कम है, लेकिन अगर अर्थव्यवस्था की तुलना की जाए तो वह भारत के मुकाबले 10 गुने से भी कम है। भारत की अर्थव्यवस्था IMF के अनुसार, 4.11 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹34118137 करोड़) है। यह विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसकी तुलना में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मात्र 340 बिलियन डॉलर है, जो भारत के मुकाबले दसवाँ हिस्सा भी नहीं है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान लम्बे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वर्तमान में उसकी हालत काफी खराब है। पाकिस्तान का काम IMF से उधार लेकर चल रहा है। इसके अलावा उसके पास विदेशी मुद्रा भण्डार भी काफी कम है। जहाँ भारत के पास 617 बिलियन डॉलर (लगभग ₹51 लाख करोड़) के विदेशी मुद्रा का भण्डार है, वहीं पाकिस्तान में यह आँकड़ा 9-10 बिलियन डॉलर है।
पकिस्तान की आम जनता भी इस खराब आर्थिक हालत से परेशान है। पाकिस्तान में महँगाई का स्तर इस समय 30% से ऊपर बना हुआ है, जिससे आम आदमी कमर टूट रही है। सरकार बिजली और तेल के दाम लगातार बढ़ा रही है जिससे और भी परेशानियाँ आ रही हैं।
पाकिस्तान की सरकारें आर्थिक सुधार ना करके पहले अमेरिका और फिर चीन से मदद लेकर अपना काम चलाती रही हैं। हालाँकि, बदले समय में अब इन देशों से भी मदद मिलनी बंद हो गई है तो समस्याएँ बढ़ रही हैं। अरब देश भी अब पाकिस्तान की आर्थिक सहायता पहले की तरह नहीं कर रहे हैं।
हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस-प्रशासन की टीम पर हुए हमले और मुस्लिमों द्वारा किए गए दंगों के बाद अब वामपंथी उनके बचाव में उतर आए हैं। इसी क्रम में ‘न्यूजलॉन्ड्री’ ने शनिवार (17 फरवरी, 2024) को इस्लामी कट्टरपंथी दंगाइयों द्वारा मचाए गए उत्पात को ढँकने और दंगाई मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने का प्रयास किया। उनके साथ कुछ और वामपंथी पत्रकार इस मुहिम में जुट गए। यह सब उन्होंने न्यूजलॉन्ड्री पर होने एक पॉडकास्ट में किया।
इसी पॉडकास्ट में 14:55 पर सुमेधा मित्तल ने अपना प्रोपेगंडा आगे रखते हुए बताया, “प्रशांत और मैं वहाँ पर 5 दिनों के लिए गए हुए थे। हमें नहीं लगता है कि हम दंगे की असल तस्वीर बना पाए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वहाँ हमें जाने ही नहीं दिया जा रहा था।”
आगे सुमेधा ने अपना प्रोपेगंडा जारी रखा, “8 फरवरी को जिस रात हिंसा चालू हुई, पूरे शहर भर में कर्फ्यू लगा दिया गय था। जैसे जैसे समय आगे बढ़ा, बाकी शहर में कर्फ्यू में हट गया लेकिन जिस बनभूलपुरा में अवैध मदरसा और मस्जिद गिराए गए थे, वहाँ ऐसा नहीं किया गया।” सुमेधा पूरे समय यह दावा करती रही कि हल्द्वानी में लोगों को जानकारियाँ नहीं दी जा रही थी कि दंगा कैसे चालू हुआ और यह रोकने का काम प्रशासन ने किया। हालाँकि, सुमेधा ने एक बार भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि बनभूलपुरा में इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ के दंगे के कारण ही यहाँ कर्फ्यू लगाने की नौबत आई थी।
मनीषा पांडे ने दंगाइयों को बताया ‘भीड़’, पीड़ित दिखाने का प्रयास
इस प्रोपेगंडा में न्यूजलॉन्ड्री का कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं रहना चाहता था। इसी क्रम में न्यूजलॉन्ड्री की मैनेजिंग एडिटर मनीषा पांडे ने एक नया शिगूफा छोड़ा। मनीषा पांडे ने यह तो स्वीकार किया कि हल्द्वानी में दंगा-फसाद हुआ, लेकिन यह नहीं बताया कि यह दंगा मुस्लिमों ने किया और भीड़ बता कर किनारे हो गई।
मनीषा ने बताया, “मुझे लगता है हल्द्वानी में भीड़ नियन्त्रण से बाहर हो गई और यह सब हुआ। लगता है कि वह गुस्सा कर हमलावर हो गए और पुलिस पर हमला कर दिया। लेकिन, आप उनको इस तरह से परेशान करोगे तो फिर…।”
मनीषा पांडे ने इसके बाद भी अपना एजेंडा जारी रखा। मनीषा ने आगे बताया, “आप उनके घर गिराने आ रहे हो, मस्जिद, स्कूल गिराने के लिए बिना किसी नोटिस के आ रहे हो, आपको पता है विवाद तो होगा ही।” मनीषा की इस बात में सच्चाई का 1% हिस्सा भी नहीं था। दरअसल, जो मस्जिद और मदरसा गिराया गया था वह अवैध था और उसके लिए पहले ही नोटिस दी जा चुकी थी। इसके लिए अनुमति भी ली जा चुकी थी। हालाँकि, मनीषा ने मुस्लिमों के दंगों को सही ठहराने के लिए हिंसा को भी जायज ठहरा दिया।
येन-केन प्रकारेण, हल्द्वानी के दंगाइयो को बचाता दिखा ‘न्यूजलॉन्ड्री’
जब न्यूजलॉन्ड्री के सभी प्रोपगैंडाबाज थक हार कर भी हल्द्वानी में मुस्लिमों के दंगे का बचाव नहीं कर पाए तो उनके मुखिया रमन कृपाल ने मोर्चा संभाला। रमन कृपाल न्यूजलॉन्ड्री के एडिटर इन चीफ हैं। इन्होने अपना निशाना नैनीताल की डीएम वन्दना सिंह को बनाया। कृपाल ने दंगाइयों पर गोली मारने के आदेश देने को लेकर वन्दना सिंह के खिलाफ प्रलाप किया।
कृपाल ने कहा, “पहले फायरिंग बड़ी बात हुआ करती थी लेकिन अब तो इसके विषय में कोई बात ही नहीं कर रहा।” हालाँकि, कृपाल यह भूल गए कि भीड़ कितनी अराजक थी जिसके कारण प्रशासन को फायरिंग करनी पड़ी। यदि वह ऐसा नहीं करते तो और भी नुकसान होता। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी। ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल पाण्डेय ने हल्द्वानी में ग्राउंड पर जाकर बताया था कि वहाँ कैसे हालात थे।
न्यूजलॉन्ड्री की ही जयाश्री अरुणाचलम ने दावा किया कि मुस्लिम भीड़ को सरकार ने भड़काया था। अरुणाचलम ने कहा, “ये एक पैटर्न है, आप मुस्लिमों पर खूब हमले करो और फिर जब वह जवाब दें तो बल प्रयोग को सही ठहराओ।”
हल्द्वानी दंगे
8 फरवरी को उत्तराखंड के हल्द्वानी के एक इलाके बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम और प्रशासन की टीम पर मुस्लिम भीड़ ने हमला बोल दिया था। मुस्लिमों ने पुलिस को घेर कर पथराव किया जिसमें बड़ी सँख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए। उन्होंने पुलिस को जलाने तक का प्रयास किया। इसके बाद जब पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की तो पेट्रोल बम भी फेंके गए। इस पूरी कार्रवाई में 6 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद हल्द्वानी में कर्फ्यू लगा दिया गया था।
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम के मंदिर में विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा हुई। इस अवसर पर 500 वर्षों के संघर्ष में बलिदान हुए रामभक्तों को दुनिया भर के हिन्दुओं ने याद किया। कई कारसवकों के परिजनों ने मुलायम के करीबी सफेदपोश मुन्नन खाँ पर पुलिस की वर्दी में नरसंहार करने का आरोप लगाया है। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गोंडा जिले में मुन्नन खाँ के नाम पर चौराहा, गाँव, पेट्रोल पम्प के साथ-साथ खेल प्रतियोगिता भी आयोजित होती है। अब गोंडा के स्थानीय निवासियों ने मुन्नन खाँ चौराहे का नाम बदलने की माँग उठाई है। यह माँग उठाने वालों में हिन्दू संगठन के पदाधिकारी, व्यापारी और कॉन्ग्रेस पार्टी तक के नेता शामिल हैं। हालाँकि कुछ मुन्नन खाँ समर्थक मुस्लिमों का एलान है कि चौराहे का नाम नहीं बदलने दिया जाएगा।
पहले था ब्राह्मण बाहुल्य इलाका
जब ऑपइंडिया की टीम मुन्नन खाँ चौराहे पर पहुँची तो वहाँ हिन्दुओं की आबादी न के बराबर थी। हमने अमरुद और मूंगफली आदि की रेहड़ी लगाने वालों से बात करने का प्रयास किया तो वो मुन्नन खाँ का नाम आते ही खामोश हो गए। हालाँकि फरवरी 2017 की FIR में खुद गोंडा पुलिस का कहना है कि मुन्नन के बेटे कासिम का इलाके में खौफ है और कोई उसके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। एक व्यक्ति ने कैमरे के आगे न आने की शर्त पर हमें बताया कि जिस मुस्लिम बाहुल्य जगह आज मुन्नन खाँ चौराहा है, वहाँ कभी हिन्दुओं की ब्राह्मण बिरादरी के लोग बहुतायत में थे।
आज भी पोस्ट है बुधई का पुरवा
हमें बताया गया कि धीरे-धीरे मुस्लिम आबादी बढ़ती चली गई। इसी के चलते गोंडा के चौक से लेकर कई किलोमीटर दूर खोरहसा बाजार और दर्जी कुआँ तक का सड़क के किनारे वाला क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य हो गया। आज भी मुन्नन खाँ चौराहे के आसपास डाकघर का पोस्ट बुधई का पुरवा लगता है। बुधई का पुरवा आज भी हिन्दू बाहुल्य गाँव है, जहाँ ब्राह्मण वर्ग के लोग ज्यादा रहते हैं। जिस ख़ास जगह को अब मुन्नन खाँ चौराहा बोलते हैं, वो 1990 से पहले कमल टंकी नाम से जानी जाती थी। तब कमल नाम का पेट्रोल पम्प उसी जगह हुआ करता था।
नाम बदलने गए भाजपा विधायक के बैनर फाड़े
योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने मुन्नन खाँ चौराहे का नाम बदलने का प्रयास किया था। वो इस चौराहे का नाम ‘महर्षि पतंजलि चौक’ रखना चाहते थे। तब प्रतीक ने मुन्नन खाँ चौराहे पर महर्षि पतंजलि के नाम और तस्वीर वाले बैनर भी लगवाए थे।
गोंडा के विश्व हिन्दू परिषद पदाधिकारी राकेश वर्मा गुड्डू बताते हैं कि इस प्रयास से कट्टरपंथी मुस्लिम नाराज हो गए थे। तब उन्होंने मुन्नन खाँ चौराहे पर लगे बैनरों को फाड़ डाला था। हालाँकि तब उस जगह का नाम महर्षि पतंजलि चौराहा न होने की वजह से आरोपितों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई थी। महर्षि पतंजलि के नाम पर लगाए गए इस बोर्ड को अराजक तत्वों द्वारा गिराए जाने की पुष्टि गोंडा के समाजसेवी धीरेन्द्र पांडेय ने भी की है।
पुलिस चौकी का नाम सद्भावना रखने पर हुआ था विरोध
ऑपइंडिया ने साल 2017 में गोंडा जिले में बतौर DSP तैनात रहे रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भरत यादव से बात की। उन्होंने बताया कि मुन्नन खाँ चौराहे पर उनके प्रयास से ही पुलिस चौकी स्थापित हुई थी। यह पुलिस चौकी क्षेत्र में होने वाले अपराधों के दमन के लिए जरूरी थी। इस पुलिस चौकी का 22 अक्टूबर 2017 को जनसहयोग से लोकार्पण हुआ था। VHP पदाधिकारी राकेश वर्मा बताते हैं कि तब आसपास के निवासी मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने इस पुलिस चौकी का विरोध किया था।
मुन्नन खाँ चौराहे पर बनी सद्भावना पुलिस चौकी
राकेश वर्मा ने मुस्लिम समुदाय द्वारा पुलिस चौकी के विरोध के खासतौर पर 2 कारण गिनाए। पहला कारण था कि असामाजिक तत्वों द्वारा आए दिन होने वाले अपराधों पर नियंत्रण लगना। राकेश ने विरोध की दूसरी वजह पुलिस चौकी मुन्नन खाँ के नाम पर न होना बताया।
DSP भरत यादव के साथ-साथ SP उमेश कुमार सिंह को भी विरोध झेलना पड़ा था। 2017 में हुए उस विरोध की बात खुद पूर्व DSP भरत यादव ने भी स्वीकारी। हालाँकि उन्होंने इस मामले पर कहा, “कुछ को अँधेरा पसंद होता है तो कुछ को उजाला।” गोंडा के स्थानीय व्यापारी चंदन गुप्ता ने भी बताया कि मुन्नन खाँ चौराहे पर पुलिस चौकी बनने का विरोध कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा किया गया था।
ऑपइंडिया से बात करने वाले गोंडा के तत्कालीन DSP भरत यादव
कॉन्ग्रेस नेता सहित हर वर्ग ने उठाई नाम बदलने की माँग
ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हमें कई स्थानीय नागरिक मिले। गोंडा शहर में रहने वाला लगभग हर स्थाई और अस्थाई निवासी मुन्नन खाँ चौराहे के बारे में जानते हैं। इनमें से अधिकतर इस पक्ष में हैं कि चौराहे का नाम मुन्नन खाँ के बजाय कुछ और रखा जाए। इन्ही में से कॉन्ग्रेस पार्टी के जिला उपाध्यक्ष दिलीप शुक्ला भी शामिल हैं। दिलीप ने हमसे बात करते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि मुन्नन खाँ चौराहे का नाम ऐसे व्यक्ति पर रखा जाए, जिसका देश की आज़ादी और तरक्की में योगदान रहा हो।
कॉन्ग्रेस नेता दिलीप शुक्ला
उदाहरण के तौर पर कॉन्ग्रेस नेता दिलीप शुक्ला ने गोंडा नरेश राजा देवीबख्श सिंह का नाम लिया। राजा देवीबख्श वही सम्राट थे, जिन्होंने 1850 के आसपास वाजिद अली शाह को हराकर रामजन्मभूमि परिसर पर अधिपत्य जमा लिया था। दिलीप शुक्ला ने मुन्नन खाँ के बारे में बताया कि उन्होंने अपने समय का उपयोग किया और चौराहों के नाम अपनी पहचान पर रखवा लिए। कॉन्ग्रेस नेता ने मुन्नन को तत्कालीन दबंग छवि वाला नेता माना।
गोंडा के व्यापारी चंदन गुप्ता ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में मुन्नन खाँ चौराहे का नाम बदलने की माँग उठाई। चंदन गुप्ता ने इसे एक नया नाम बताया और दावा किया कि पूर्व सांसद मुन्नन खाँ को कोई सभ्य व्यक्ति पसंद नहीं करता क्योंकि उन्होंने दंगे करवाए थे।
बकौल चंदन अगर यही चौराहा किसी क्रांतिकारी या महापुरुष के नाम पर होता तो लोगों को एक अच्छा और सकारात्मक संदेश भी जाता। अंत में चंदन ने आशा जताई कि योगी सरकार इस चौराहे का नाम जल्द ही बदलेगी।
मुन्नन खाँ चौराहे पर लगा PWD का बोर्ड
गोंडा जिले के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश गुप्ता ने भी ऑपइंडिया से बात की। सुरेश गुप्ता ने हमें बताया कि जब वो मुन्नन खाँ चौराहे से गुजरते हैं, तब उन्हें बोर्ड पढ़ कर मन में बड़ी पीड़ा होती है। सुरेश ने बताया कि पहले मुन्नन खाँ और अब उनके परिवार के कुछ लोग आपराधिक कार्यों में लिप्त हैं। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि पहले उस चौराहे पर आसपास के भी आपराधिक तत्वों का जमावड़ा रहता था।
सुरेश गुप्ता ने कुछ इलाकों ने नाम भी गिनाए, जहाँ के गिने-चुने बदमाश वहाँ आकर डेरा डाले रहते थे। तब वहाँ गुंडई भी चरम सीमा पर होती थी। उन्होंने कहा कि अगर मुन्नन खाँ चौराहे का नाम योगी सरकार में नहीं बदला गया तो शायद ये बदलाव कभी नहीं हो पाएगा। विकल्प के तौर पर उन्होंने किसी क्रांतिकारी या महापुरुष का नाम रखने की सलाह दी।
गोंडा के स्थानीय निवासी व समाजसेवी धीरेन्द्र प्रताप पांडेय ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि मुन्नन खाँ के नाम पर चौराहे का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि इसे उन्होंने अपनी सांसदी के प्रभुत्व के चलते खुद ही रखवा दिया था। धीरेन्द्र ने योगी सरकार से माँग की है कि मुन्नन खाँ चौराहे को किसी क्रांतिकारी के नाम से रखा जाए। इन सभी में उन्होंने 1857 क्रान्ति के नायक राजा देवीबख्श सिंह को बेहतर विकल्प माना। धीरेन्द्र के मुताबिक मंगल पांडेय चौराहा भी एक विकल्प हो सकता है क्योंकि मुन्नन राजनैतिक नहीं उद्दंड और अराजक विचारधारा के थे।
गोंडा का बिजली विभाग भी आधिकारिक तौर पर प्रयोग करता है मुन्नन खाँ चौराहा नाम
गोंडा जिला अदालत के वकील अरविन्द शुक्ला ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने हमें बताया कि गोंडा जिले में तमाम क्रांतिकारी हुए हैं और बेहतर होगा कि मुन्नन खाँ चौराहे का नामकरण उन्ही में से किसी एक के नाम पर हो जाए। बताते चलें कि ब्रिटिश काल में हुए काकोरी कांड के महानायक राजेंद्र लहड़ी को गोंडा जेल में ही 17 दिसंबर 1927 को फाँसी दी गई थी। यह जेल कथित मुन्नन खाँ चौराहे से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है।
विश्व हिन्दू परिषद पदाधिकारी राकेश वर्मा उर्फ़ गुड्डू ने भी हमसे बातचीत में आशा जताई है कि जल्द ही योगी सरकार सभी सरकारी कागजातों से मुन्नन खाँ के नाम पर मौजूद स्थानों को हटवाने का आदेश जारी करेगी। उन्होंने मुन्नन खाँ के नाम पर चौराहे या अन्य स्थलों के नाम को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। बकौल राकेश वर्मा मुन्नन खाँ का जीवन सिर्फ और सिर्फ अपनी कौम के कट्टरपंथी तत्वों की साम्प्रदायिक राजनीति करने में बीता है, ऐसे में उनके नाम पर गाँव या चैराहा होना सभ्य समाज को सही संदेश नहीं देता।
मुन्नन खाँ चौराहा था और रहेगा भी
ऑपइंडिया ने मुन्नन खाँ चौराहे पर मौजूद गुटका-सिगरेट आदि बेचने की दुकान चला रहे एक व्यक्ति से बात की। दुकान पर चाँद-तारे वाली झालर लटक रही थी। हमने दुकानदार से पूछा कि क्या इस चौराहे का नाम बदल गया? तब दुकानदार का जवाब था, “यह मुन्नन खाँ चौराहे के नाम से मशहूर है और मुन्नन खाँ के ही नाम से रहेगा। कोई कुछ भी कहे, उससे क्या फर्क। कहने को कोई कुछ भी कहता रहेगा।”
मुन्नन खाँ के घर के ठीक सामने पंचर बनाने वाले एक अन्य दुकानदार ने हमें बताया कि मुन्नन खाँ चौराहे का नाम बदलने की बातें अफवाह हैं और ये जगह अभी भी मुन्नन खाँ चौराहा ही है।
गुटका सिगरेट बेचने वाले दुकानदार के मुताबिक नहीं बदल सकता मुन्नन खाँ चौराहे का नाम
मुस्लिम वर्ग के लोग भी मुन्नन को मानते हैं अपराधी
मुन्नन खाँ चौराहा पर ऑपइंडिया को मुस्लिम समाज के 2 लोग अलग-अलग समय पर मिले। इसमें से एक का नाम इकबाल है। उन दोनों ने बताया कि मुन्नन खाँ अच्छे आदमी नहीं थे। दोनों ने मुन्नन को आपराधिक छवि वाला बताया।
दोनों ने हालाँकि अपनी सुरक्षा की चिंता दिखाते हुए अपनी पहचान उजागर न करने की अपील की। इकबाल ने कहा, “हम रात में घर जाते हैं। क्या पता किस के मन में क्या चल रहा हो।” इक़बाल ने यह भी माना कि समाजवादी पार्टी की सत्ता में उस क्षेत्र में खूब गुंडागर्दी थी, जिसे योगी सरकार ने खत्म किया है।
बिहार के पूर्णिया जिले में एक मदरसा टीचर पर छात्राओं के साथ छेड़खानी और सहकर्मी महिला शिक्षिका से रेप का आरोप लगा है। आरोपित टीचर का नाम मोहम्मद तहसीन है। तहसीन पर कड़ी कार्रवाई की माँग को ले कर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया है। मोहम्मद तहसीन मदरसे में बने एक कमरे में छात्राओं को ले जा कर मालिश भी करवाता था। इन आरोपों के उलट मदरसे के हेड मौलवी मोहम्मद तहसीन की हिमायत कर रहे हैं। हालाँकि, तहसीन और हेड मौलवी रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।
‘न्यूज़ 18’ के मुताबिक, मामला पूर्णिया के श्रीखंड प्रखंड का है। यहाँ के रहीकपुर में मदरसा मिफ्ताऊल ऊलूम है जहाँ मोहम्मद तहसीन सहायक शिक्षक के तौर पर काम करता है। अब इस मदरसे की महिला रसोइया और गाँव के दर्जनों निवासियों ने तहसीन के खिलाफ कार्रवाई की आवाज बुलंद की है। ग्रामीणों का आरोप है कि मोहम्मद तहसीन का मदरसे में ही पढ़ाने वाली एक महिला शिक्षिका के साथ गलत संबंध है। तहसीन के किसी आपत्तिजनक वीडियो के भी वायरल होने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मदरसे में बड़ी उम्र की लड़कियाँ पढ़ने जाती हैं। पढ़ाई के दौरान ही सहायक टीचर मोहम्मद तहसीन उन लड़कियों को मदरसे के ऊपर बने कमरे में ले जाता है और वहाँ उनसे मालिश करवाता है। कई ग्रामीण इसकी शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी, मदरसा बोर्ड और मदरसे के हेड मौलवी तक को कर चुके हैं। शिकायत में उन्होंने मोहम्मद तहसीन को फ़ौरन हटाने और कानूनी कार्रवाई की माँग उठाई है।
गाँव के मरकूब आलम के मुताबिक, तहसीन की छात्राओं से गलत हरकत की 4-5 बार शिकायतें मिल चुकी हैं। उनका कहना है कि मोहम्मद तहसीन की हरकतों से पढ़ाई का माहौल बिगड़ रहा है और अगर हालत न सुधरे तो लड़कियाँ पढ़ने ही आना बंद कर देंगी।
पूर्णियाँ: मदरसे के शिक्षक पर लड़कियों से छेड़खानी और महिला से दुष्कर्म का आरोप, मदरसा शिक्षक के खिलाफ ग्रामीणों ने जमकर किया हंगामा। #PURNEApic.twitter.com/XIcmQ9jzrO
वहीं अपने ऊपर लगे आरोपों को मोहम्मद तहसीन ने झूठा करार दिया है। वो ग्रामीणों के विरोध को खुद को हटाने की साजिश बता रहे हैं। मदरसे के हेड मौलवी मोहम्मद एजाजुल भी लगाए गए आरोपों को सही नहीं मानते। हालाँकि, उन्होंने मिले शिकायती पत्र पर जाँच कर के कार्रवाई की बात कही है। वहीं कुछ ग्रामीणों का कहना है कि हेड मौलवी द्वारा तहसीन का पक्ष लेने की वजह दोनों की आपस में रिश्तेदारी होना है।
बंगाल की संदेशखाली घटना पर संसदीय विशेषाधिकार समिति की कार्रवाई को रोकने के लिए ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजाा खटखटाया था। आज (19 फरवरी 2023) उस पर सुनवाई हुई और सुनवाई के बाद कोर्ट ने कमेटी की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी। साथ ही लोकसभा सचिवालय को इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया। अब मामले की सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी।
इस मामले की सुनवाई भारत के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला व न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने की। वहीं बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी पेश हुए। सिब्बल ने कहा कि राजनीति गतिविधियाँ कभी भी विशेषाधिकार का हिस्सा नहीं हो सकतीं। दलीलों पर गौर देते हुए पीठ ने संसदीय एथिक्स कमेटी के नोटिस पर ही रोक लगा दी।
Senior Advocate Kapil Sibal mentions before the Supreme Court the WB Govt's plea against Parliament Ethics Committee notices relating to the Sandeshkhali incident in West Bengal.
Parliament Ethics Committee has issued notices to West Bengal senior officials including the Chief…
बता दें कि लोकसभा सांसद सुकांत मजूमदार की शिकायत पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी हुआ था। मजूमदार ने शिकायत की थी कि उन्हें संदेशखाली जाने से रोका गया। इसके बाद संसद की आचार समिति ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, राज्य पुलिस के डीजीपी समेत कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। बंगाल सरकार ने इसी एक्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कार्रवाई रोने की माँग की थी।
SC issues notice to Lok Sabha Secretariat and others on WB govt plea against Parliament Ethics Committee summons to WB senior officials in the matter relating to Sandeshkhali incident in West Bengal
SC also stays the further proceedings in the matter.
कोर्ट ने जब संसदीय एथिक्स कमेटी के नोटिस पर अस्थायी रोक लगाई तो लोकसभा सचिवालय की ओर से पेश अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, “इन लोगों पर कोई आरोप नहीं लगाया जा रहा। यह एक नियमित प्रक्रिया है। एक बार जब कोई सांसद नोटिस भेजता है और अध्यक्ष को लगता है कि मामले पर गौर करने लायक कुछ है तो नोटिस जारी किया जाता है।”
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव भगवती प्रसाद गोपालिका और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार को लोकसभा सचिवालय ने सोमवार को पेश होने के लिए नोटिस जारी किया था।
राजस्थान के अलवर में बीफ मंडी का खुलासा होने के बाद पूरे थाने को लाइन हाजिर कर दिया गया है। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली बीजेपी की प्रदेश सरकार ने 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया है। जयपुर रेंज के आईजी उमेश चंद्र दत्त ने खुद मौके पर जाकर पड़ताल की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मंडी में हर महीने करीब 600 गाय काटी जाती थी। एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए करीब 50 गाँवों में गोमांस की होम डिलिवरी हो रही थी। करीब 300 दुकानों में भी गोमांस की सप्लाई होती थी।
बीफ मंडी का खुलासा दैनिक भास्कर के पत्रकार राजकुमार जैन और राधेश्याम तिवारी ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए किया था। बताया था कि रोजाना 20 गाय काटकर होम डिलीवरी की जा रही है। इसमें पुलिस की मिलीभगत की बात भी कही गई थी। इस खुलासे के बाद जब पुलिस ने दबिश दी तो गोतस्कर फरार हो गए। उनके वाहनों को जब्त कर लिया गया है। घटनास्थल से कई गायों की खाल और हड्डियाँ बरामद हुई हैं।
दैनिक भास्कर ने रविवार (18 फरवरी 2024) को अलवर के बास थाना क्षेत्र में चल रही इस बीफ मंडी का खुलासा किया था। खुलासे में ऐसे वीडियो सामने आए थे जिसमें बिरसंगपुर के पास रुंध गिदवडा के बीहड़ों में गायों को बेरहमी से मार कर उनकी खाल उतारी जा रही थी। व्हाट्सएप पर मांस के ऑर्डर लेकर घर तक सप्लाई की जाती थी। इस मंडी में सैकड़ों की तादाद में खरीदार भी आते थे। गोकशी की यह मंडी करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।
यह खबर हिंदू सनातनी भाइयों के लिए पीड़ादायक है। विधायक कह रहे है कि पुलिस पैसे लेती है। विधायक कांग्रेस से जुड़े होने के कारण इस मुद्दे को विधानसभा में नहीं उठाया गया क्योंकि उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता थी। इन गोवंश को काटकर बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो।#alwarpic.twitter.com/mdEl94PPXl
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि बीफ मंडी की जानकारी होने के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। खुलासे के बाद भजनलाल सरकार ने संज्ञान लिया। जयपुर रेंज के IG उमेश चंद्र दत्त के नेतृत्व में बास इलाके के उन बीहड़ों में छापेमारी की गई, जहाँ गोकशी होने का दावा किया गया था। सूचना सही पाई गई। पुलिस को देख कर गोतस्कर अपने वाहन छोड़ फरार हो गए।
IG ने ASI ज्ञानचंद, बीट सिपाही स्वयं प्रकाश और रविकांत के साथ हेड कॉन्स्टेबल रघुवीर को सस्पेंड कर दिया गया है। इसी के साथ थाना प्रभारी दिनेश मीणा सहित बास थाने के 38 स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया गया।है कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अलवर के 60 किलोमीटर के इलाके में कई जगहों पर बीफ बिरयानी बेची जा रही थी। गोतस्कर गायों का माँस, हड्डी और खाल बेच कर हर माह लगभग 4 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे थे।
अब बीफ मंडी चलाने वालों को चिन्हित कर कर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 25 आरोपितों को गोकशी की FIR में नामजद किया गया है। बीफ मंडी में मिली लगभग 1 दर्जन बाइकों सहित 1 पिकअप जीप को बरामद कर सीज कर दिया गया है।
भारत की मीडिया की एक विशेषता है, जब भी किसी आतंकी के बारे में कुछ खबर आती है तो उसके ‘मानवीय पक्ष’ को ज़रूर खँगाला जाता है। बड़े से बड़े आतंकवादी को व्हाइटवॉश करने की कला भारत की मीडिया के पास है। ‘The Quint’ के लिए अलकायदा का संस्थापक ओसामा बिन लादेन ‘एक अच्छा पिता और पति’ बन जाता है, तो वहीं बरखा दत्त के लिए कश्मीर के आतंकी बुरहान वानी ‘प्रधानाध्यापक का बेटा’ हो जाता है। हर आतंकी के इस पक्ष को बेचने की कला भारत की मीडिया के पास है।
वैसे ये ट्रेंड नया नहीं है। हमने फिल्मों में देखा है कि कैसे कोई पुलिस अधिकारी किसी बड़े आतंकी के पीछे लगा रहता है, आतंकी एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देता चला जाता है, फिर उसके इतिहास को सामने लाया जाता है कि आखिर वो आतंकी कैसे बना, इसके लिए सरकार या हिन्दू समाज को दोषी ठहरा दिया जाता है और उन्हें पश्चाताप से भरने की कोशिश की जाती है, फिर वो पुलिस अधिकारी भी ये कहानी सुन कर रोता है – इस तरह आतंकी के व्हाइटवॉश की प्रक्रिया पूरी होती है।
ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश का है और इस बार किसी आतंकी के ‘दर्द’ को दिखाने का बीड़ा देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में से एक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ ने उठाया है। हुआ यूँ कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने इमराना बेगम नाम की एक 60 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया। गिरफ़्तारी का कारण – वो पूरे शहर को दहलाना चाहती थी और इसके लिए उसने जावेद नामक एक शख्स के पास कई टाइम बम भी रखे हुए थे। उसने बड़ी मात्रा में टाइम बम का ऑर्डर दिया था। आइए, बताते हैं कि मामला क्या है।
मुजफ्फरनगर: इमराना बेगम ने ऑर्डर किया टाइम बम
इमराना बेगम को रविवार (18 फरवरी, 2024) को गिरफ्तार किया गया था। इमराना बेगम शामली की रहने वाली है। उसने जावेद नामक शख्स को टाइम बम बनाने का टास्क दिया था। जावेद ने यूट्यूब पर वीडियो देख-देख कर टाइम बम बनाना सीखा और फिर उसने कई बम बना डाले। बम के साथ टाइमर भी उसने बनाया था। लेकिन, गुरुवार (15 फरवरी, 2024) को मजफ्फरनगर की काली नदी के पास से यूपी STF (स्पेशल टास्क फ़ोर्स) को उसे दबोचने में कामयाबी मिली।
जावेद इमराना के किसी परिचित का बेटा था और इमराना को पता था कि वो विस्फोटक बना सकता है। जावेद पहले भी ये काम कर चुका था। इमराना का कहना है वो भविष्य में अगर कोई दंगा हो तो अपनी सुरक्षा के लिए ये सब कर रही थी। IED बनाने के लिए उसने जावेद को 10,000 रुपए एडवांस में दिए थे। डिलीवरी के समय 40,000 रुपए और भुगतान करने का वादा किया गया था। हालाँकि, डिलीवरी के दौरान ही वो पकड़ा गया।
इमराना बेगम को IPC की धारा 286 और विस्फोटक अधिनियम की धारा 4/5 के तहत जेल भेज दिया गया है। आगे की पूछताछ के लिए उसे पुलिस की हिरासत में लिया जाएगा। क्योंकि, टाइम बम बनाने के पीछे क्या मकसद था इस संबंध में उसने जो कुछ भी बताया है उसकी पुष्टि करनी आवश्यक है। जावेद और उसका बेटा जरीफ पटाखा बनाने का काम करते थे। उसने 10 बम का ऑर्डर दिया था, लेकिन 5 ही बन सके थे। एक दशक पहले भी इमराना ने बम बनाने का ऑर्डर दिया था।
TOI को दिखा इमराना का ‘घाव’
अब इस घटना पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ की खबर का शीर्षक देखिए, ‘2013 के दंगों से आहत 60 वर्षीय महिला ने टाइम बम का ऑर्डर दिया, गिरफ्तार’। TOI ने अपने शीर्षक में ये बताना ज़रूरी समझा कि उक्त महिला ‘घाव से पीड़ित’ है और वो ‘घाव’ है 2013 के दंगों का। महिला का कहना है कि उन दंगों में उसका घर जला दिया गया था और इसीलिए वो अपनी सुरक्षा के लिए ये बम बनवा रही थी। जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि वो हिन्दुओं से बदला लेना चाहती थी।
जावेद के कुछ रिश्तेदार नेपाल में भी रहते हैं, ऐसे में आतंकनिरोधी दस्ता (ATS) भी इस मामले की जाँच कर रहा है। इसके तार कहाँ से जुड़ेंगे, अभी जाँच में सामने आएगा। लेकिन, मीडिया एक बार फिर से अपने धंधे की विशेषता दिखाने में लग गया है। कहने का तात्पर्य ये है – ‘हिन्दुओं ने महिला का घर जलाया, इसीलिए पीड़ित महिला अपनी सुरक्षा के लिए टाइम बम बनवा रही थी।’ क्या टाइम बम आत्मरक्षा का हथियार है? IED जैसे खतरनाक विस्फोटक का आत्मरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने का कोई उदाहरण है अपने पास?
TOI को दिखा इमराना का ‘घाव’
खासकर के इस खतरनाक विस्फोटक का इस्तेमाल कर के 10 टाइम बम बनाने का ऑर्डर देना, ये तो कहीं से भी आत्मरक्षा के लिए किया गया काम नहीं लगता। जाँच में चीजें सामने आएँगी, लेकिन अभी तो ऐसा ही लगता है कि इमराना बेगम हिन्दुओं से बदला लेना चाहती थी, खुन्नस पाले बैठी थी। हल्द्वानी में हमने देखा कि कैसे मुस्लिमों के छतों से पत्थर चले, पत्थरबाजों में बच्चों से लेकर महिलाएँ तक शामिल थीं। जाँच तो इसकी भी होनी चाहिए कि मुजफ्फरनगर दंगों में इमराना बेगम की क्या भूमिका थी, कहीं उसका घर लॉन्चपैड तो नहीं था?
मुजफ्फरनगर दंगों में क्या हुआ था
अगस्त-सितंबर 2013 में हुए मुजफ्फरनगर के दंगों से उत्तर प्रदेश में हालात ऐसे बिगड़े थे कि भारतीय सेना को तैनात करना पड़ा था। तब राज्य में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इस घटना में अधिकतर जाट हिन्दू समाज के लोग ही पीड़ित थे। कवाल गाँव में मुस्लिमों द्वारा जाट लड़कियों से छेड़खानी के बाद ही ये मामला शुरू हुआ था। ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के साथ दंगे भड़के थे, इसमें हिन्दू समाज का क्या दोष था?
क्या आपको पता है कि जहाँ सचिन के शरीर पर पोस्टमॉर्टम के दौरान 17 और गौरव के शरीर पर 15 गहरे घाव मिले थे? उनकी हत्या निर्मम तरीके से की गई थी। गोली या धारदार हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि लाठी-डंडों से पीटा गया था, सिर और मुँह को पत्थरों से कुचला गया था और सरिये से मार-मार कर मौत के घाट उतार दिया गया था। जाहिर है, फिर दो पक्ष दंगों में भिड़ते हैं तो क्षति हर तरफ से होती है। मुजफ्फरनगर हो, मेवात हो, या हल्द्वानी हो – हर जगह हमने इस्लामी भीड़ को समान पैटर्न पर काम करते देखा है।
90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ, उसके बाद उनमें से एक भी आतंकी क्यों नहीं बना? उनकी महिलाओं से बलात्कार हुआ, निर्मम हत्याएँ हुईं और पलायन के बाद वो अपने ही देश में शरणार्थी बन गए, लेकिन उनके पास से टाइम बम क्यों नहीं मिलते? मीडिया आखिर हर आतंकी, पत्थरबाज, बमबाज या अपराधी को व्हाइटवॉश करने के लिए कहानियाँ लेकर क्यों आता है? क्या इसका मकसद होता है कि लोगों में उसके प्रति सहानुभूति पैदा की जाए।