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राम मंदिर पर दहशत फैलाने के लिए ISIS स्टाइल में काट दिया गोसेवक का गला, छतीसगढ़ में UAPA के तहत FIR: कश्मीर से लौटा था अयाज खान

गोसेवक साधराम यादव की हत्या के मामले में आरोपितों पर छत्तीसगढ़ में गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कश्मीर से लौटने के बाद अयाज खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के स्टाइल में गोसेवक का गला रेत दिया था। ऐसा अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले दहशत फैलाने के इरादे से किया गया था।

20 जनवरी 2024 को छत्तीसगढ़ के कवर्धा में लालपुर गाँव में अयाज, इदरीश, मेहताब और शेख रफीक समेत 6 ने मिलकर गोसेवक साधराम यादव (50) की ISIS आतंकियो की तरह गला रेत कर हत्या कर दी थी। राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हुई थी।

पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपितों पर UAPA की धारा 16 लगाई है। अयाज और इदरीश का आतंकी कनेक्शन भी सामने आया है। अयाज के कश्मीर जाने और इदरीश के संदिग्ध के लोगों से मिलने की जानकारी भी मिली है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है राज्य में नक्सलियों के अलावा किसी मामले में पहली बार UAPA का उपयोग किया गया है।

आरोपितों ने साधराम यादव से पहले भी जान-बूझकर विवाद किया था और ‘सर तन से जुदा’ करके हत्या कर दी। उनकी हत्या के बाद कवर्धा में लोगों का गुस्सा भड़क उठा था। प्रशासन ने आरोपितों को पकड़ने के साथ ही इनके घरों पर बुलडोजर भी चलाया था।

पुलिस ने जाँच के बाद आरोपितों के खिलाफ UAPA की धारा भी जोड़ी है। कवर्धा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया है हत्या करने वाले आरोपितों में से अयाज का कश्मीर आना-जाना लगा रहता था, वहीं इदरीश के संदिग्ध लोगों से बात करने के सबूत मिले हैं।

उन्होंने बताया है कि अयाज खान को गिरफ्तार कर उसके मोबाइल की जाँच की गई तो उसके लगातार कई बार जम्मू-कश्मीर जाने की जानकारी सामने आई। जब छत्तीसगढ़ से टीम जम्मू-कश्मीर भेजी गई तो आतंकवादियों से कनेक्शन सामने आए। एक अन्य आरोपित इदरीश खान के संदिग्धों से बात करने सम्बंधित जानकारी मिली है।

उधर हिन्दू संगठन लगातार इस मामले में जल्दी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। गोसेवक साधराम यादव की पत्नी ने हाल ही में सरकार से मिले ₹5 लाख का चेक भी लौटा दिया था। साधराम यादव की पत्नी ने कहा था कि उन्हें सहायता राशि नहीं, बल्कि हत्यारों पर कड़ी कार्रवाई चाहिए।

‘बेगम हलाला के बाद तुरंत वापस कर दी जाती है’: फिर वायरल हुआ खतना एक्सपर्ट हाजी लल्लू का विजिटिंग कार्ड, जानिए सच

सोशल मीडिया में एक विजटिंग कार्ड वायरल हो रहा है। इस पर लिखा है ‘हमारे यहाँ बेगम हलाला करने के बाद तुरंत वापस कर दी जाती है’। कार्ड पर मोबाइल नंबर के साथ एक तस्वीर भी छपी है। तस्वीर में दिख रहे शख्स कानपुर के रहने वाले हाजी लल्लू हैं जो ‘खतना एक्सपर्ट’ बताए जा रहे हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब सोशल मीडिया में यह विजटिंग कार्ड वायरल हुआ है। हाजी लल्लू ने ऑपइंडिया से बातचीत में इसे किसी की किसी की शरारत करार दिया है। उन्होंने बताया है कि उनके खतने वाले विजिटिंग कार्ड को किसी ने एडिट कर उस पर हलाला वाली लाइन लिख वायरल कर दी है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस से शिकायत करने की बात भी कही है।

हाजी लल्लू ने ऑपइंडिया को बताया कि वे मूल रूप से कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनका खानदानी काम खतना करना है। लगभग 70 साल के हो चुके हाजी लल्लू को खतना करते हुए 50 साल हो चुके हैं। वे अब तक हजारों लोगों का खतना कर चुके हैं। ऐसे लोग भी हैं जिनकी 3 पीढ़ियों का खतना हाजी लल्लू ने किया है। साल 2012 में हाजी लल्लू ने अपना विजिटिंग कार्ड छपवाया था।

खतना स्पेशलिस्ट को बना दिया हलाला एक्सपर्ट

हाजी लल्लू के अनुसार लगभग 1 साल पहले किसी ने उनके विजिटिंग कार्ड को एडिट कर दिया। एडिटेड कार्ड में ऊपर की तरफ एक लाइन बढ़ा दी गई। इस लाइन में ‘हमारे यहाँ बेगम हलाला करने के बाद तुरंत वापस कर दी जाती हैं’ लिख दिया गया। हाजी लल्लू बताया कि यह एडिटेड कार्ड वायरल होने के बाद उन्हें लगातार फोन कॉल देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे हैं।

हाजी लल्लू के मुताबिक उनको फोन करने वालों में हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग हैं। वो हाजी से हलाला के बावत सवाल भी करते हैं। हाजी लल्लू के मुताबिक जब वो जवाब दे कर थक गए तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने का फैसला किया। उन्होंने दावा किया कि 17 फरवरी 2024 को उन्होंने बाबूपुरवा थाना जाकर SHO से अपना कार्ड एडिट करने वाले पर कार्रवाई की माँग की।

बच्चों से ले कर 75 साल तक के बुजुर्ग का भी खतना

हाजी लल्लू ने हमें बताया कि वो बच्चों से ले कर 75 साल तक के वृद्ध व्यक्ति तक का खतना कर चुके हैं। गरीबों से हाजी लल्लू खतने का 100 रुपए और अमीरों से वो 1500 रुपए तक चार्ज करते हैं। उनका दावा है कि उनकी प्रसिद्धि के चलते शहर में अक्सर लोग उनके यहाँ ही खतना करवाने आते हैं। 18 फरवरी 2024 को भी हाजी ने 4 लोगों का खतना करने का दावा किया। उन्होंने यह भी कहा कि खतने को ले कर उनकी प्रसिद्धि अल्लाह की देन है।

मनमोहन सिंह के मंच से दे चुके हैं सम्बोधन

हाजी लल्लू ने बताया कि वे पार्षदी का चुनाव बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ चुके हैं। उनका यह भी कहना है कि एक बार वे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ भी मंच साझा कर चुके हैं। तब मनमोहन सिंह चुनाव प्रचार के लिए कानपुर आए थे। हाजी खुद को कानपुर से कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल का करीबी बताते हैं। बकौल हाजी लल्लू उनका दिल्ली भी अक्सर आना-जाना लगा रहता है। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके बढ़ते राजनैतिक कद और रसूख से जलन रखने वाले किसी शख्स ने ही उनका कार्ड एडिट कर वायरल किया है।

हाजी पहलवान के नाम से भी जानते हैं लोग

खतने के अलावा हाजी लल्लू जड़ी-बूटी बेचने का भी काम करते हैं। उनको हाजी पहलवान नाम से भी जाना जाता है। हाजी लल्लू का दावा है कि जवानी में उन्होंने खूब कुश्ती लड़ी है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि कई बड़े-बड़े डॉक्टर भी उनसे खतना संबंधी मामलों में सलाह लेते हैं। हालाँकि हाजी लल्लू का कहना है कि बढ़ती उम्र की वजह से वे अब बहुत ज्यादा कहीं आते-जाते नहीं हैं।

5 साल का कॉन्ट्रैक्ट, 4 फसलों पर MSP की गारंटी, बिना किसी लिमिट के खरीद: मोदी सरकार ने पेश किया फॉर्मूला, किसानों ने माँगा समय

केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रस्ताव लाने के बाद किसान प्रदर्शनकारी थोड़े शांत हुए हैं। उन्होंने सरकार से चौथे दौर की बातचीत के बाद अपना प्रदर्शन कुछ समय रोकने का ऐलान किया। ये प्रस्ताव सरकार रविवार (18 फरवरी 2024) को लेकर आई।

इसमें कहा गया कि एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल का कॉन्ट्रैक्ट किया जाएगा। ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ होगा। इसमें खरीद की लिमिट नहीं होगी। जिन उपजों को लेकर यह प्रस्ताव दिया दया है उनमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास आदि शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बातचीत को बताया सकारात्मक

बता दें कि केंद्र सरकार और किसानों के बीच रविवार को बातचीत हुई थी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि नए विचारों और सुझावों के साथ हमने भारतीय किसान मजदूर संघ और अन्य किसान नेताओं के साथ सकारात्मक चर्चा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के सामने फसलों के विविधीकरण का प्रस्ताव रखा जिसके तहत अलग-अलग फसलें उगाने पर बिन किसी लिमिट के उन्हें एमएसपी पर खरीदा जाएगा।

वह बोले– “नेशनल कोऑपरेटिव कंज़्यूमर्स फ़ेडरेशन (एनसीसीएफ़) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फे़डरेशन ऑफ़ इंडिया (नेफ़ेड) जैसी कोऑपरेटिव सोसाइटियाँ उन किसानों के साथ समझौता करेंगी, जो तूर, उड़द, मसूर दाल या मक्का उगाएँगे और फिर उनसे अगले पाँच साल तक एमएसपी पर फसलें खरीदी जाएँगी। वहीं कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के माध्यम से किसानों से 5 साल तक एमएसपी पर कपास की खरीद की जाएगी। इन खरीद की कोई सीमा नहीं होगी और इन सबके लिए एक पोर्टल तैयार किया जाएगा।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार के इस प्रस्वताव से भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा और पहले से खराब हो रही जमीन को बंजर होने से रोका जा सकेगा।

किसान नेताओं ने बैठक के बाद लिया सोचने का फैसला

इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा इस बैठक पंजाब के मुख्य मंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। किसान नेताओं ने सरकार के इस प्रस्वात के ऊपर कहा कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे। उनका यह भी कहना है कि अभी सिर्फ एमएसपी के मुद्दे पर चर्चा हुई है। बाकी माँगे नहीं मानी गई हई हैं।

किसान नेताओं का कहना है कि वो अपने मंचों पर सरकार के प्रस्ताव पर अगले दो दिन तक चर्चा करेंगे और उसके बाद भविष्य की रणनीति तय होगी। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा, “हम 19-20 फ़रवरी तक इस मामले पर अलग-अलग मंचों पर चर्चा करेंगे और विशेषज्ञों की राय लेंगे। उसके बाद ही इस मामले पर कोई फैसला लिया जाएगा।” किसानों का कहना है कि अगर इन दो दिनों में प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी तो 21 फरवरी दिल्ली कूच करेंगे।

पंजाब सीएम भी थे बैठक में शामिल

इस बैठक में पंजाब सीएम भगवंत सिंह मान ने भी किसानों के हितों की रक्षा के लिए फसलों के लिए एमएसपी को कानूनी रूप देने की वकालत की। उन्होंने बैठक के दौरान मोजाम्बिक और कोलंबिया से दालों के आयात का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा यह आयात 2 अरब डॉलर से अधिक है, मान ने कहा कि अगर इस फसल के लिए एमएसपी दिया जाता है तो पंजाब दालों के उत्पादन में देश का नेतृत्व कर सकता है और यह दूसरी हरित क्रांति होगी।

बता दें कि किसानों के इस आंदोलन में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने की माँग, किसानों को पेंशन सुनिश्चित करने की माँग और उनकी कर्जमाफी और पिछले किसान आंदोलन के समय जो हिंसा में केस किसानों पर दर्ज हुए थे उन सबको रद्द करने की माँग थी। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार अभी सिर्फ एमएसपी पर ही प्रस्ताव लाई है। वो विचार करके बताएँगे अब आगे क्या होगा।

अखिलेश यादव ने राहुल गाँधी की यात्रा से बनाई दूरी, स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद सलीम शेरवानी ने सपा से दिया इस्तीफा: टुकड़ों में बिखर रहा I.N.D.I. गठबंधन

बिखर रहे INDI गठबंधन को समेटने के प्रयास में जुटी कॉन्ग्रेस को अब नया झटका समाजवादी पार्टी ने दिया है। समाजवादी पार्टी ने कॉन्ग्रेस से पहले सीटों का बँटवारे अंतिम निर्णय लेने के लिए कहा है। इसी के साथ अब इस बात पर भी संशय के बादल छाने लगे हैं कि अखिलेश यादव अपने सहयोगी राहुल गाँधी की न्याय यात्रा में शामिल होंगे भी या नहीं। राहुल गाँधी अपनी यात्रा के साथ सोमवार (19 फरवरी 2024) को अमेठी पहुँच सकते हैं।

इंडिया टीवी ने सूत्रों के हवाले से खबर प्रकाशित की है कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में राहुल गाँधी की न्याय यात्रा में शामिल नहीं होंगे। समाजवादी पार्टी ने कॉन्ग्रेस से साफ कहा है कि सबसे पहले शीट शेयरिंग पर बात तय हो। सोमवार (19 फरवरी) को राहुल गाँधी की यह यात्रा अमेठी और रायबरेली से निकलेगी। पहले माना जा रहा था कि इस यात्रा में अखिलेश और राहुल गाँधी एक साथ दिखेंगे। अब मिल रही जानकारी के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से भी कहा है कि वो फ़िलहाल इस यात्रा से दूरी बनाएँ।

मिल रही जानकारी के मुताबिक सपा ने अभी तक अमेठी और रायबरेली के अपने जिलाध्यक्षों को अखिलेश यादव के आने का कोई भी कार्यक्रम नहीं भेजा है। साथ ही इन्हें किसी भी प्रकार की तैयारी करते भी नहीं देखा जा रहा है। हालाँकि इन जिलों में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता जोर-शोर से राहुल गाँधी के स्वागत की तैयारियाँ कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सोमवार (19 फरवरी) की दोपहर तक दोनों पार्टियों के बीच सीटों का बँटवारा हो जाएगा। हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी भी पार्टी ने नहीं की है।

रिपब्लिक भारत का दावा है कि लखनऊ या रायबरेली में स्वामी प्रसाद मौर्य राहुल गाँधी की न्याय यात्रा में शामिल हो सकते हैं। हाल ही में स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी में अपने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे भी पहली बार न्याय यात्रा में शामिल होंगे। सलीम शेरवानी ने भी सपा के पद से इस्तीफा दे दिया है।

बताते चलें कि आगामी 2024 लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी कॉन्ग्रेस को 15 से 16 सीटें ही देना चाहती है। हालाँकि कॉन्ग्रेस पार्टी कम से कम 21 से 22 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारना चाहती है। इस गतिरोध को दूर करने के लिए कई बार दोनों पार्टियों के नेता आपस में चर्चा कर चुके हैं जिसका अभी तक कोई स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है। सबसे ज्यादा खींचतान उन सीटों पर बताई जा रही है जो कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हैं।

हल्द्वानी में जिन दंगाइयों ने दलितों को पीटा, उनका केस वापस लेने की माँग पर अड़ी ‘भीम आर्मी’, वाल्मीकि-सोनकर परिवारों की बजाए मुस्लिमों के लिए माँगा मुआवजा

उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को हिंसा भड़क गई थी। पुलिस और नगर निगम स्टाफ के खिलाफ भड़की यह हिंसा अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई थी। अब तक 58 दंगाइयों की गिरफ्तारी हो चुकी जबकि बाकियों की धरपकड़ के प्रयासों के साथ कुर्की जैसी कानूनी प्रक्रियाएँ जारी हैं। विगत 10 दिनों में प्रशासन के प्रयासों से हालात तेजी से सामान्य होते जा रहे हैं। हालाँकि इस बीच कुछ समूह और गिरोह अस्थिरता फ़ैलाने की फ़िराक में लगे हैं।

जहाँ 2 दिन पहले एक कथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने जा कर भ्रामक रिपोर्ट तैयार की तो वहीं अब ‘भीम आर्मी’ भी हिंसा पीड़ित मुस्लिमों से न मिलने देने पर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जता रही है। सबसे खास बात तो यह है कि दलितों के हितों के नाम पर राजनीति कर रही भीम आर्मी नगर निगम के उन दलित स्टाफ के घर नहीं जा रही जिन्हे हिंसक भीड़ ने बेरहमी से मारा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार (17 फरवरी, 2024) को ‘भीम आर्मी’ का 60 सदस्यीय प्रतिनिध मंडल वनभूलपुरा के मुस्लिमों से मिलने निकला। इस प्रतिनिधि मंडल में राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत नौटियाल के अलावा सोनू लाठी आदि मौजूद थे। प्रतिनिधि मंडल को उत्तराखंड पुलिस ने वनभूलपुरा क्षेत्र से काफी पहले ही हाईवे पर रोक दिया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लागू होने की जानकारी दी और हालत सामान्य करने में उनसे सहयोग की अपील की। हालाँकि प्रतिनिधि मंडल ने प्रशासन की बात नहीं मानी। तब प्रशासन ने इस समूह को थोड़े समय तक एहतियातन थाने में रोका और बाद में वापस लौटा दिया।

भीम आर्मी के अन्य सदस्य इस बात को ले कर सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। वापस लौटाए जाने से भड़के मनजीत नौटियाल ने अपनी माँगों के न माने जाने पर आंदोलन तक का ऐलान कर दिया। उनकी माँगों में बेगुनाह मुस्लिमों के मुकदमे वापस लेना और वनभूलपुरा के पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर 60 लाख रुपए देना शामिल है। ‘भीम आर्मी’ राष्ट्रीय अध्यक्ष यह भी चाहते हैं कि नैनीताल प्रशासन ध्वस्त किए गए अवैध मदरसे और मस्जिद के लिए फिर से जमीन दिलाए।

दंगाइयों के हमले में सबसे अधिक दलित ही पीड़ित

हल्द्वानी हिंसा में सबसे अधिक नुकसान पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों को उठाना पड़ा है। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात निकल कर सामने आई थी कि हिंसा के शिकार नगर निगम के अधिकतर स्टाफ अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से हैं। इनमें से मनोज और मिथुन वाल्मीकि के अलावा सागर सोनकर ने तो ऑपइंडिया से बात करते हुए हिंसक भीड़ की करतूत बताई थी। मनोज, मिथुन और सागर के हाथों और पैरों में फैक्चर तब हैं जिसका इलाज सरकार करवा रही है। इन सभी ने बताया कि उस दिन दंगाइयों ने उन्हें मार कर जिन्दा जलाने के लिए रास्ते में कँटीले तार तक बिछा कर रखे हुए थे।

वहीं SC वर्ग से ही आने वाले कॉन्ग्रेस नेता गब्बर वाल्मीकि ने भी माना कि वनभूलपुरा की हिंसक भीड़ ने कानून को तोडा था। गब्बर वाल्मीकि ने दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई की भी माँग प्रशासन से की थी। इन सभी के अलावा वनभूलपुरा से निकली हिंसक भीड़ जिस रिहायशी बस्ती गांधीनगर में घुसना चाह रही थी, वहाँ भी अधिकतर परिवार दलित समुदाय के ही हैं। इन परिवारों के तमाम सदस्य दंगाइयों के हमले में पुलिसकर्मियों, नगर निगम स्टाफ और अपने खुद के परिवार की रक्षा करते हुए घायल हुए हैं।

घायलों में अनुसूचित जाति के अमरदीप सोनकर को गंभीर चोटें आईं हैं और वो अभी तक बिस्तर पर ही हैं। उनके अलावा मनीष सोनकर का सिर फट गया, ऋतिक सोनकर के चेहरे पर कई घाव लगे और आर्यन सोनकर का हाथ टूट गया है। इन सभी के अलावा गाँधीनगर की SC वर्ग की महिलाओं ने हमें बताया कि आज भी उनके मन में हिंसक भीड़ का उन्मादी रूप घूमता है। यह सारा मोहल्ला पुलिस के साथ अपनी खुद की रक्षा के लिए एकजुट हो गया था। इसी मोहल्ले पर न सिर्फ गोलियाँ चलाई गईं बल्कि पत्थरों के साथ पेट्रोल बम भी फेंके गए थे।

घायलों की जानकारी ऑपइंडिया सहित कई अन्य मीडिया संस्थानों पर प्रकाशित की गई है। हालाँकि भीम आर्मी का प्रतिनिधि मंडल वनभूलपुरा क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिमों के लिए संघर्ष कर रहा है। अभी तक उनके माँग पत्र में दलित वर्ग से आने वाले नगर निगम के स्टाफ व इसी वर्ग के गाँधीनगर के घायलों के लिए कोई स्थान नहीं दिया गया है।

BJP का अधिवेशन, कार्यकर्ताओं संग जमीन पर बैठे तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष K अन्नामलाई: तस्वीर देख लोगों को आई नरेंद्र मोदी के पुराने दिनों की याद

तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष K अन्नामलाई की सोशल मीडिया पर जम कर तारीफ़ हो रही है। बता दें कि दिल्ली में भाजपा का 2 दिवसीय अधिवेशन शनिवार (17 फ़रवरी, 2024) और रविवार को संपन्न हुआ। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर देश भर से भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं एवं नेताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई को कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठे हुए देखा गया। लोग उनके समर्पण की तारीफ कर रहे हैं।

के अन्नामलाई के लिए कुर्सी आरक्षित थी, क्योंकि वो प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठना चुना। लोगों ने कहा कि उनसे एक कार्यकर्ता के रूप में प्रेरणा ली जा सकती है। इतना ही नहीं, उनकी तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हो रही है, जिनकी कई ऐसी पुरानी तस्वीरें सामने आती हैं जिनमें वो जमीन पर बैठे दिखते हैं। एक तस्वीर में लालकृष्ण आडवाणी को कुर्सी पर और आगे नरेन्द्र मोदी को साथी कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठे देखा जा सकता है।

भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी के बाद मालदीव के 3 मंत्रियों की बतख़ास्तगी के बाद चर्चा में आए ‘मिस्टर सिन्हा’ ने लिखा कि अन्नामलाई की यही चीज बाकियों से अलग करती है। पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने लिखा, “इस व्यक्ति का भविष्य शानदार दिखता है।” कइयों ने तो उन्हें ‘साउथ का मोदी’ भी कह कर संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बताया कि कैसे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले अपने 11 दिवसीय अनुष्ठान के दौरान उन्होंने दक्षिण भारत का दौरा किया और उस दौरान उन्हें जो प्यार मिला उसे वो शब्दों में बयाँ नहीं कर सकते।

के अन्नामलाई के बारे में सोशल मीडिया पर लोग यहाँ तक कह रहे हैं कि वो भविष्य में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तो बनेंगे ही, उनमें प्रधानमंत्री बनने की भी सारी काबिलियत मौजूद है। हाल ही में उन्होंने पूरा राज्य में पदयात्रा निकाली है, जिसमें उन्हें भरपूर जनसमर्थन मिला। उनकी सादगी की अक्सर चर्चा होती रहती है। अन्नामलाई पहले पुलिस अधिकारी थे, त्याग-पत्र देकर उन्होंने भाजपा का दामन थामा। तमिलनाडु द्रविड़ राजनीति का गढ़ है, जहाँ कमल खिलाना उनके लिए चुनौती मानी जा रही है।

हर मौसम में बिना गद्दा-चादर के सोना, 24 घंटे में अंजुल भर पानी पीना: जानिए कौन हैं जैन धर्मगुरु आचार्य विद्यासागर जी महाराज, जिन्होंने ली महासमाधि

जैन धर्म के प्रमुख गुरु जैन मुनि विद्यासागर जी महाराज ने शनिवार की रात करीब 2:30 बजे छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़-राजनंदगाँव में अपना देह त्याग दिया। रविवार (18 फरवरी 2024) को उनका अंतिम संस्कार पूरा हो गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ में आचार्य पद का त्याग करने के बाद 3 दिन का उपवास और मौन धारण कर लिया था।

मुनि जी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा के दिन कर्नाटक के बेलगाँव जिले के सदलगा गाँव में हुआ था। दीक्षा के पहले भी उनका नाम विद्यासागर ही था। उन्होंने 22 साल की उम्र में घर-परिवार छोड़ दी थी। इसके बाद 30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर में अपने गुरु आचार्य श्रीज्ञानसागर जी महाराज से दीक्षा ली थी। दीक्षा के बाद उन्होंने कठोर तपस्या की।

मुनि जी दिन भर में सिर्फ एक बार एक अंजुली पानी पीते थे। वे खाने में सीमित मात्रा में सादी दाल और रोटी लेते थे। उन्होंने आजीवन नमक, चीनी, फल, हरी सब्जियाँ, दूध, दही, सूखे मेव, अंग्रेजी दवाई, तेल, चटाई का त्याग किया। इसके अलावा उन्होंने थूकने का भी त्याग रखा। उन्होंने आजीवन सांसारिक एवं भौतिक पदार्थों का त्याग कर दिया। वे हर मौसम में बिना चादर, गद्दे, तकिए के शख्त तख्त पर सिर्फ एक करवट में शयन करते थे।

मुनि जी ने पैदल ही पूरे देश में भ्रमण किया। उनकी तपस्या को देखते हुए श्रीज्ञानसागर जी महाराज ने 22 नवम्बर 1972 को उन्हें आचार्य पद सौंपा था। आचार्य विद्यासागर के पिता का नाम श्री मल्लप्पा था, जो बाद में संन्यास लेकर मुनि मल्लिसागर बने। उनकी माता का नाम श्रीमंती था, जो आगे चलकर संन्यास ले लीं और आर्यिका समयमति बनीं। मुनि उत्कृष्ट सागर जी दिवंगत विद्यासागर जी के बड़े भाई हैं।

वहीं, उनके भाई अनंतनाथ और शांतिनाथ ने भी आचार्य विद्यासागर जी से दीक्षा ग्रहण कर लिया है। शांतिनाथ जी अब मुनि योगसागर जी हैं और शांतिनाथ जी अब मुनि समयसागर जी के नाम से जाने जाते हैं। आचार्य विद्यासागर के चार भाई और दो बहने भी थीं। विद्यासागर जी महाराज पूरे भारत के संभवत: ऐसे अकेले आचार्य रहे, जिनका पूरा परिवार संन्यास ले चुका है।

आचार्य जी संस्कृत, प्राकृत, हिन्दी, मराठी और कन्नड़ में पारंगत थे। उन्होंने जैन धर्म एवं दर्शन का गहन अध्ययन किया। उन्होंने हिन्दी और संस्कृत में कई ग्रंथ लिखे हैं। 100 से अधिक शोधार्थियों ने उनके कार्य पर PhD किया है। उनके कार्यों में निरंजना शतक, भावना शतक, परीषह जाया शतक, सुनीति शतक और शरमाना शतक शामिल हैं। उन्होंने काव्य मूकमाटी की भी रचना की है। इसे कई संस्थानों में स्नातकोत्तर के हिन्दी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है।

वे कभी भी और कहीं भी यात्रा के लिए निकल पड़ते थे। इसके लिए उन्होंने पहले से योजना नहीं बनाई। वे अक्सर नदी, झील, पहाड़ जैसे प्राकृतिक जगहों पर ठहरते और वहाँ साधना करते थे। यहीं, आचार्य विद्यासागर महाराज अकेले ऐसे मुनि हैं, जिन्होंने संभवत: पूरे भारत में अकेले सबसे अधिक दीक्षा दी है। उन्होंने 350 से अधिक लोगों को दीक्षा दी है।

आचार्य विद्यासागर जी धन संचय करने के खिलाफ थे। उन्होंने दान-दक्षिणा में भी कभी किसी से पैसे नहीं लिए। उन्होंने आज तक ना ही कोई बैंक अकाउंट खुलवाया और ना ही कोई ट्रस्ट भी नहीं बनाया। लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि आचार्य ने पैसे को कभी हाथ भी नहीं लगाया। उनके नाम पर यदि कोई दान देता भी था तो उसे वे समाज सेवा के लिए दे देते थे।

आचार्यश्री ने भारत के पिछड़े बुन्देलखण्ड क्षेत्र में शिक्षा एवं सामाजिक कल्याण हेतु कई कार्यों को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से इन सूखे इलाके में स्कूलों, अस्पतालों और सामुदायिक केंद्रों की स्थापना हुई। इसके कारण वहाँ के अनगिनत व्यक्तियों के जीवन में बदलाव आया।

बता दें कि साल 2023 में छत्तीसगढ़ चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के राजनांदगाँव जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल डोंगरगढ़ का दौरा किया था। यहाँ उन्होंने माँ बम्लेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की थी और जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज से के दर्शन किए थे। पीएम मोदी ने आचार्यश्री का चरण छूकर उनसे आशीर्वाद लिया था। इसकी तस्वीरें भी खूब वायरल हुई थीं।

जानिए कमलनाथ की कॉन्ग्रेस से नाराज़गी की वजहें: अब समर्थक पूर्व मंत्री ने लिखा ‘जय श्री राम’, कई विधायक और महापौर भी छोड़ेंगे पार्टी?

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ के कॉन्ग्रेस से मोहभंग होने और बीजेपी में शामिल होने की संभावनाएं मीडिया में जताई जा रही हैं। हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। इस बीच, अंदरखाने कमलनाथ की नाराजगी की वजहों पर भी चर्चाएँ चल रही हैं। माना जाता है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार के बाद ही कमलनाथ और राहुल गाँधी के बीच में दूरियाँ आई हैं।

कॉन्ग्रेस चुनाव हारी, ठीकरा कमलनाथ पर?

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को प्रबल दावेदार माना जा रहा था। ये कहा जा रहा था कि कॉन्ग्रेस किसी भी अन्य राज्य की तुलना में मध्य प्रदेश में कहीं ज्यादा मजबूत है। लेकिन कॉन्ग्रेस को हार झेलनी पड़ी। इस चुनाव में रणदीप सुरजेवाला को पर्यवेक्षक बनाया गया था। उन्होंने रिपोर्ट सौंपी कि कमलनाथ का सॉफ्ट हिंदुत्व बीजेपी का मुकाबला नहीं कर पाया। इसके अलावा कॉन्ग्रेस की गुटबाजी भी इसकी वजह बनी।

कॉन्ग्रेस की हार हुई, तो सारा ठीकरा कमलनाथ के सिर पर फोड़ दिया गया। उन्हें तुरंत ही प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। यही नहीं, कॉन्ग्रेस ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष भी नहीं बनाया। वो भी तब, जब लोकसभा चुनाव 2024 सिर पर है। यही नहीं, उनके भगवान भक्त होने पर भी सवाल उठाए गए, उनकी आस्था का भी मजाक उड़ाने की कोशिश की गई। इस बीच, राहुल गाँधी का व्यवहार भी रुखा रहा। ऐसे में माना जा रहा है कि कमलनाथ ने अब फैसला ले लिया है।

कमलनाथ को कभी इंदिरा गाँधी का तीसरा बेटा तक कहा जाता था। वो हमेशा पार्टी के लिए खड़े रहे। जब पार्टी के बहुत बड़े नेताओं ने भी साथ छोड़ दिया, तब भी उन्होंने कॉन्ग्रेस को संभाले रखा। लेकिन इस समय जो चर्चाएँ चल रही हैं, वो ये बता रही हैं कि कमलनाथ अब आगे का रास्ता कॉन्ग्रेस के बगैर ही तय करने वाले हैं।

बता दें कि सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं। दोनों ही इन दिनों दिल्ली में हैं। बताया जा रहा है कि वो बीजेपी आलाकमान के संपर्क में है। जल्द ही इस बात की घोषणा की जा सकती है। नकुलनाथ अभी छिंदवाड़ा से लोकसभा सांसद हैं। ये सीट कमलनाथ की पारंपरिक सीट मानी जाती है। वो दशकों तक इस सीट से लोकसभा चुनाव जीतते आए हैं, उनके बाद उनके बेटे नकुलनाथ ने विरासत को थाम रखा है।

कॉन्ग्रेस के कई विधायक भी छोड़ सकते हैं पार्टी

कमलनाथ-नकुलनाथ एपिसोड के साथ ही एक बार फिर से मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में टूट हो सकती है। कॉन्ग्रेस के कई विधायक कमलनाथ के साथ ही पार्टी बदल सकते हैं। रिपोर्ट की मानें, तो कमलनाथ के साथ ही सुनील उईके (जुन्नारदेव), सोहन वाल्मीकि (परासिया), विजय चौरे (सौंसर), निलेश उईके (पांढुर्णा), सुजीत चौधरी (चौरई), कमलेश शाह (अमरवाड़ा), दिनेश गुर्जर (मुरैना), संजय उईके (बैहर), मधु भगत (परसवाड़ा) और विवेक पटेल (वारासिवनी) जैसे विधायक कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं। वहीं, कमलनाथ समर्थक मुरैना और छिंदवाड़ा के महापौर भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं।

कमलनाथ के समर्थक पूर्व मंत्री ने लिखा ‘जय श्री राम’, पटवारी खेमे में खामोशी

कमलनाथ के समर्थक पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सज्जन सिंह वर्मा ने एक्स पर जय श्री राम पोस्ट किया। कमलनाथ-नकुलनाथ की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के समय ये पोस्ट बहुत कुछ कह रही है। उन्होंने इस बात का ऐलान कर दिया है कि जहाँ भी कमलनाथ होंगे, वहाँ वो खड़े मिलेंगे।

ब्रांडेड परफ्यूम, महँगी घड़ियाँ, विदेशी पैसे… हल्द्वानी के दंगाई अब्दुल मलिक के घर से 6 ट्रकों में सामान भर कर ले गई पुलिस, घर में जिम भी बना रखा था

उत्तरखंड के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को हुई हिंसा के मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक के घर की पुलिस ने कुर्की की है। इस कार्रवाई की जद में उसके फरार चल रहे बेटे मोईद का भी मकान आया। शनिवार (17 फरवरी, 2024) को हुई कुर्की के बाद दोनों के घरों से लगभग 6 ट्रकों में सामान जब्त हुआ है। जब्त हुए सामानों को अर्धसैनिक बलों की निगरानी में रखा गया है। प्रशासन हिंसा में शामिल अन्य फरार आरोपितों के घर की भी कुर्की की तैयारियों में जुटा हुआ है।

हल्द्वानी प्रशासन के मुताबिक कुर्की की कार्रवाई शुक्रवार (16 फरवरी 2024) से शुरू हुई थी। हालाँकि, ये एक दिन बाद शनिवार को जा कर पूरी हुई। इस मौके पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त थे। बताया जा रहा है कि 13 घंटे तक चली इस कार्रवाई में अब्दुल मलिक और उसके बेटे मोईद के घर का चप्पा-चप्पा छाना गया। इस दौरान दरवाजे के पास रखे गए डोरमैट, गीजर, सीलिंग फैन आदि तक जब्त किए गए। दंगा आरोपित बाप-बेटे के घर से जब्त सामान लगभग 6 ट्रकों में आए। इनको पैरामिलिट्री की अभिरक्षा में रखा गया है।

बरामद हुए सामान की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। इनमें से विदेशी घड़ियाँ, महंगे परफ्यूम, कीमती फर्नीचर के अलावा क्रॉकरी और गाड़ियाँ शामिल हैं। हिंदुस्तान ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कुर्की में अब्दुल मलिक के घर से विदेशी मुद्राएँ भी मिली हैं। ये मुद्राएँ बांग्लादेश, नेपाल और सऊदी अरब की बताई जा रही हैं। मलिक और उसके बेटे ने घर में कसरत के लिए जिम भी बना रखा था। इस जिम में मौजूद तमाम सामान भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

इसी दिन शनिवार को ही पुलिस ने हिंसा में शामिल फरार चल रहे वसीम, रईस और तस्लीम के घरों की भी कुर्की की है। अब पुलिस नीलामी योग्य सामानों की भी लिस्ट बना रही है। साथ ही इस बरामदगी की सूची अदालत में भी जमा की जाएगी। पुलिस जब्त की गई सम्पत्तियों की अनुमानित वैल्यू पता करने में भी जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर अन्य दंगाइयों को चिन्हित करने में जुटी हुई है।

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड का चेयरमैन अब्दुल रहमान करता है पैसों की हेराफेरी, विदेश से लाता है फंडिंग: ED की कार्रवाई के लिए पत्र

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अब्दुल रहमान पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर अपने पद के दुरुपयोग करने और संदिग्ध गतिविधियों के भी आरोप लगे हैं। राज्य के सूफी इस्लामिक बोर्ड ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय की जाँच एजेंडी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्र लिखकर जाँच की माँग की है। तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के चेयरमैन पर आरोप हैं कि वो बिना किसी एनओसी के विदेश जाते हैं और विदेशी पैसों की भी हेर फेर करते हैं। सूफी इस्लामिक बोर्ड ने उनके खिलाफ चल रहे कई गंभीर एफआईआर का भी जिक्र किया है।

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने आरोप लगाया है कि चेयरमैन की अगुवाई में ‘संदिग्ध काम’ हो रहे हैं। बोर्ड ने उनपर एक मेडिकल कॉलेज के निर्माण में अपने पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। सूफी इस्लामिक बोर्ड ने अपनी शिकायत में कहा है, “साल 2022 की शुरुआत से इस बारे में जानकारी सार्वजनिक है कि अब्दुल रहमान की अगुवाई में तिरुची के वेप्पुर में एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। अब्दुल रहमान इस मेडिकल कॉलेज के नाम फंड (पैसा) लाने के लिए अपने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।”

इस्लामिक सूफी बोर्ड ने आरोप लगाए हैं कि ये ‘उगाही’ के पैसे हैं, जो करीब 300 करोड़ हैं। इसके लिए रहमान ने राज्य में कई जगहों पर बैठकें की। शिकायत में कहा गया है कि रहमान ने विदेशों से भी पैसे इकट्ठे किए हैं। शिकायत में बताया गया है कि “अब्दुल रहमान को पता है कि उसे ‘चंदा उगाही’ के लिए विदेश जाने के लिए जरूरी एनओसी नहीं मिलेगा, ऐसे में उसने 27 अक्टूबर 2022 को सऊदी अरबा में उमरा की योजना बनाई। उमरा के नाम पर ही उसने 22-11-2022 को एनओसी प्राप्त किया, जो सरकार के प्रमुख सचिव ने दी। लेकिन वो इस यात्रा पर फंड पाने के लिए काम करता रहा।”

ऐसे किया रहमान ने खेल

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने बताया, “अब्दुल रहमान को उमराह के लिए सिर्फ मक्का और मदीना की यात्रा की इजाजत थी, इसके बावजूद वो 3 दिसंबर 2022 को यूएई गया। इसके बाद इसने सऊदी अरब की राजधानी जेद्दा की यात्रा की। उसने 14 दिसंबर 2022 को जेड्डा में प्रपोज्ड मेडिकल कॉलेज के लिए फंडिंग माँगी। इस बारे में सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया गया, ये कहकर कि मेडिकल कॉलेज के लिए बैठक आयोजित की गई। इन पोस्ट में बताया गया कि काफी काम हो चुका है। अब्दुल रहमान का ये काम साफ करता है कि उसने उमरा के लिए मिली एनओसी का गलत इस्तेमाल किया और फर्जी तरीके से वो फंडिंग बटोरने का काम कर रहा था।”

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने आरोप लगाए कि अब्दुल रहमान ने सिर्फ मक्का के लिए मिली यात्रा अनुमति को तोड़ा और उसने जेद्दा और यूएई की भी यात्रा की। अब्दुल रहमान पर तिरंगे के अपमान का भी आरोप है। उसके खिलाफ 339/2022 एफआईआर भी दर्ज है। जो चेन्नई के नॉर्थ बीच पुलिस स्टेशन में दर्ज है। ऐसा व्यक्ति, जो देश के तिरंगे का अपमान करता हो, वो विदेशों में भारत का क्या सम्मान बढ़ाएगा? बोर्ड ने अब्दुल रहमान के खिलाफ एनओसी के उल्लंघन और 420 यानी धोखाधड़ी का मुकदमा चलाने की भी माँग की। बता दें कि सितंबर 2022 में भी अब्दुल रहमान के खिलाफ तिरंगे के अपमान के मामले में केस दर्ज हुआ था। ये शिकायत अजमल खान ने दर्ज कराई थी।

इस्लामिक बोर्ड ने बताया है कि अब्दुल रहमान सार्वजनिक पद पर रहते हुए विदेशी मदद भी नहीं ले सकता है। इसके अलावा उस पर फेमा के उल्लंघन का भी मामला बनता है। सूफी बोर्ड का आरोप है कि अब्दुल रहमान राजनीतिक पार्टियों के लिए पैसों की दलाली का भी काम करता है। वो लायजनिंग करता है, ताकि राजनीतिक पार्टियों को काला धन मिले और वो उसे सफेद करा दे। उसके लिए वो ‘कायदे मिल्लत तमिल पेरावई’ नाम के एनजीओ को चलाया है। उसके मलेशिया व साउथ-ईस्ट के कई देशों में अच्छे कॉन्टैक्ट्स हैं।

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