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‘जज अंकल, मुझे भी मम्मी-पापा के साथ नहीं रहना, तलाक चाहिए’: 11 साल के बेटे के आँसू से पसीजा माता-पिता का दिल, 9 साल चले विवाद के बाद साथ रहने का किया फैसला

एक बच्चे के मासूम से सवाल ने पति-पत्नी के बीच 9 साल से जारी विवाद का पटाक्षेप हो गया। दोनों ने एक-दूसरे पर कई केस कर रखे थे और दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में दोनों के बीच तलाक का केस भी अंतिम चरण में था। कोर्ट में 11 साल के बच्चे ने जो कहा, उसे सुनकर उसके माता-पिता ने न केवल तलाक लेने का फैसला छोड़ दिया, बल्कि वे साथ रहने को भी तैयार हो गए।

दरअसल, तलाक के एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थता केंद्र में पति-पत्नी के बीच अंतिम सुनवाई थी। पति मनोज (परिवर्तित नाम) और पत्नी मनीषा (परिवर्तित नाम) वहाँ दोनों मौजूद थे। मनीष के साथ उसका 11 साल का बेटा भी आया था। तीनों मध्यस्थ के पास बैठे थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के सामने ही मनोज और मनीषा से मध्यस्थ ने अंतिम बार साथ रहने को लेकर सवाल पूछा। मध्यस्थ ने कहा कि अगर वे साथ रहने के लिए तैयार नहीं होंगे तो तलाक का अंतिम निर्णय के लिए केस को फैमिली कोर्ट में भेज दिया जाएगा। इस दौरान दोनों ने कहा कि वे अब साथ रहने के लिए तैयार नहीं हैं।

जब बच्चे ने अपने माता-पिता को देखा कि वे अब साथ नहीं रहेंगे तो उसके आँखों से आँसू आ गए। आँखों में आँसू देखकर वहाँ मौजूद जज ने पूछा, “क्या हुआ बेटा? आप दोनों में से किसके साथ रहना चाहते हो?” तब बच्चे ने कहा कि उसे अपने मम्मी-पापा दोनों के साथ रहना है। इस पर जज ने कहा कि दोनों साथ नहीं रहना चाहते। इसलिए वे तलाक ले रहे हैं।

इस बच्चे ने कहा, “जज अंकल, अगर ये साथ नहीं रह सकते तो मुझे भी इन दोनों से तलाक दे दीजिए। मैं रहूँगा तो दोनों के साथ नहीं तो किसी के साथ भी नहीं। मुझे कहीं और भेज दीजिए।” इसके बाद बच्चा रोने लगा। इस दौरान उसके माता-पिता ने उसे चुप कराने की कोशिश की, लेकिन उसने दोनों ने नाराजगी दिखाते हुए मध्यस्थ जज के पास चला गया।

इस घटना ने पति-पत्नी के मन पर गहरा प्रभाव डाला। दोनों पति-पत्नी आधे घंटे तक बाहर जाकर बातें कीं और फिर जज के सामने आकर बोले कि वे अब तलाक लेना नहीं चाहते हैं और साथ रहेंगे। वे एक साथ अपने बेटे के पास ही रहेंगे। दोनों ने कहा कि वे आपसी झगड़े में बच्चे का भविष्य भूल गए। दोनों पति-पत्नी ने एक-दूसरे के खिलाफ दायर किए गए सभी मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है।

दरअसल, दिल्ली के लक्ष्मी नगर के व्यवसायी मनोज की शादी रोहिणी निवासी मनीषा से 21 जनवरी 2011 को हुई थी। इस शादी से उन्हें 8 जनवरी 2013 को लड़का हुआ। इसके बाद पति-पत्नी के बीच झगड़े होने लगे। 20 मार्च 2015 से दोनों अलग रहने लगे। लड़का अपनी माँ के पास रहने लगा। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे पर घरेलू हिंसा सहित तलाक के केस दायर किए थे।

नेशनल हाइवे पर ट्रक-टैक्सी ड्राइवरों के लिए रेस्ट रूम बनाएगी मोदी सरकार, खाने से लेकर सोने तक की होगी व्यवस्था: भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो में PM का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2024 कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत को साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने में मोबिलिटी सेक्टर अहम भूमिका निभा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हमारी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत का दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना तय है। आज का भारत भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियाँ बना रहा है। इसमें मोबिलिटी सेक्टर के लिए विशेष जगह है। कल जो बजट पेश हुआ है, उसमें भी आप इसका विजन देख पाते होंगे।”

ट्रक ड्राइवरों की चिंता को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “ट्रक-टैक्सी ड्राइवर्स को बीच सफर में आराम देने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई योजना पर काम शुरू किया है। इस योजना के तहत सभी नेशनल हाईवेज पर ड्राइवरों के लिए नई सुविधाओं वाले आधुनिक भवनों का निर्माण होगा। इन भवनों में ड्राइवर के लिए भोजन, साफ पानी, शौचालय, पार्किंग आदि सारी सुविधाएँ होंगी।”

मीडिल क्लास को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में बड़ी संख्या में नियो मिडिल क्लास बना है, जिसकी अपनी आशा एवं अपनी आकांक्षाएँ हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत में मिडिल क्लास का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही मिडिल क्लास की इनकम भी बढ़ रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले 10 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकला है।

पीएम ने कहा कि साल 2014 के पहले पिछले दस सालों में भारत में 12 करोड़ के आसपास गाड़ियों की बिक्री हुई थी, जबकि 2014 के बाद से देश में 21 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों की बिक्री हो चुकी है। भारत में अब सालाना 12 लाख इलेक्ट्रिक कारें बिक रही हैं। पिछले 10 साल में पैसेंजर सेक्‍टर में 60% और टू व्हीलर सेक्‍टर में 70% बढ़ोतरी हुई।

ऑटो सेक्टर के बढ़ते बाजार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जनवरी में कारों की बिक्री ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि कहा कि भारत के मोबिलिटी सेक्टर के लिए गोल्डन पीरियड भी शुरू हो गया है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “इनकम टैक्स वाले नहीं सुन रहे हैं। आप घबराएँ मत। आपको आगे बढ़कर इसका लाभ उठाना है।”

पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014 में कैपिटल एक्सपेंडिचर दो लाख करोड़ रुपए से भी कम था। अब यह बढ़कर 11 लाख करोड़ रुपए से भी ज्‍यादा हो गया है। उन्होंने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 11 लाख करोड़ रुपए खर्च का ऐलान मोबिलिटी सेक्‍टर के लिए अवसर लेकर आया है। यह न सिर्फ अर्थव्‍यवस्‍था को फायदा देगा, बल्कि इससे रोजगार के भी नए रास्‍ते खुलेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम समुद्र और पहाड़ों को चुनौती देते हुए एक के बाद एक इंजीनियरिंग मार्वेल तैयार कर रहे हैं, वो भी रिकॉर्ड समय में।” उन्होंने कहा कि अटल टनल से लेकर अटल सेतु तक, भारत ढांचागत विकास में नए रिकॉर्ड बना रहा है। दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2024 में उन्होंने कई उद्योगपतियों से भी मुलाकात की। 

पूनम पांडे की मौत की खबर देने वाली बहन ‘गायब’, परिवार के अन्य सदस्यों के फोन भी बंद: रिपोर्ट से गहराया सस्पेंस, आखिरी दिनों का Video वायरल

पूनम पांडे जीवित हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है। वह और उनकी टीम ने अपनी मौत का नाटक रचा था। इससे संबंधित रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। पुरानी रिपोर्ट (उनकी टीम द्वारा झूठ पर आधारित) नीचे है।

बॉलीवुड हिरोइन और मॉडल पूनम पांडे की मौत की खबर ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को सबको झकझोर कर रख दिया। सर्वाइकल कैंसर से उनकी मौत की बात कही जा रही है। लेकिन एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि मौत की खबर देने के बाद से पूनम पांडे की बहन का पता नहीं चल पा रहा है। रिपोर्ट में परिवार के अन्य सदस्यों के फोन भी बंद होने की बात कही गई है।

इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि पूनम पांडे की मौत की खबर वायरल होने के बाद से उनका परिवार पहुँच से बाहर है। पूनम पांडे से जुड़े एक करीबी सूत्र के अनुसार शुक्रवार की सुबह बहन ने फोन कर मौत की जानकारी दी थी। बहन ने बताया था कि पूनम की मौत सर्वाइकल कैंसर की वजह से हुई। इसके बाद पूनम पांडे की टीम ने मौत की खबर को उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से साझा किया। फिर दुनिया को इसके बारे में पता चला।

लेकिन अब सूत्र का कहना है कि पूनम पांडे की टीम के सदस्यों और उनके परिवार से संपर्क नहीं हो पा रहा है। न तो पूनम पांडे की बहन का फोन लग रहा है और न ही परिवार के किसी अन्य सदस्य का। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है, “पूनम पांडे की बहन से हमारी बात सुबह में हुई थी। उन्होंने ही मौत की खबर दी थी। उसके बाद से जब भी उनकी बहन को हम लोग कॉल करने की कोशिश कर रहे हैं, उनका फोन स्विचऑफ जा रहा है। पूनम के परिवार के अन्य सदस्य भी पहुँच से बाहर हैं। पूनम की टीम के 2-3 लोगों से बात करने की कोशिश की तो हर किसी का फोन स्विचऑफ जा रहा है। हम लोग इस समय कन्फ्यूज हैं औऱ सोच रहे हैं कि आखिर मामला क्या है।”

इस बीच पूनम पांडे के आखिरी दिनों के वीडियो वायरल हैं। इन वीडियो में उनके हँसते-मुस्कुराते चेहरे को देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वे किस दर्द में जी रही थीं।

उनका आखिरी वीडियो एक पार्टी का है। ये वीडियो वायरल भयानी के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया है।

बता दें कि पूनम पांडे की मौत की खबर सामने आने के बाद से सर्वाइवल कैंसर जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा छिड़ गई है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार पूनम पांडे का निधन उनके पैतृक शहर कानपुर में हुआ है। बहरहाल, उनके परिवार के लापता होने के बाद तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

मंदिरों को तोड़कर नहीं बनी एक भी मस्जिद, मुस्लिम शासक चाहते तो एक भी मंदिर नहीं बचता: ज्ञानवापी पर AIMPLB ने उगला जहर, संत समिति ने चेताया

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के तहखाने में हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार देने पर मुस्लिम पक्ष खफा है। उन्होंने ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को अपनी-अपनी दुकानें बंद करके इसका विरोध किया। वहीं, लगभग 1700 मुस्लिम जुमे की नमाज पढ़ने के लिए ज्ञानवापी परिसर में पहुँचे। स्थिति को देखते हुए वाराणसी के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में पूजा रोकने की मुस्लिम पक्ष द्वारा दी गई याचिका खारिज होने के बाद इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने मीडिया को संबोधित किया। बोर्ड ने कहा कि अगर मुस्लिमों की सोच सभी मंदिरों को तोड़ने की होते तो एक भी मंदिर नहीं बचता। इस बयान पर बनारस के संतों ने नाराजगी जाहिर की है। इसको लेकर लगभग 300 संतों ने बैठक बुलाई है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ज्ञानवापी तहखाने में पूजा शुरू होने पर कड़ा ऐतराज जताया है। बोर्ड के प्रवक्ता मलिक मोहतशिम ने कहा, “कोर्ट ने इस वक्त जिस जल्दबाजी में फैसला किया और उसमें पूजा की इजाजत दी, उसमें दूसरे पक्ष को बहस का मौका ही नहीं दिया गया। इसकी वजह से अदालतों और इंसाफ देने वाली संस्थानों के भरोसे को चोट पहुँची है।” AIMPLB के एक सदस्य ने कहा कि मुस्लिमों के सब्र की परीक्षा ना ली जाए।

उन्होंने कहा, “माइनॉरिटी महसूस कर रही है कि अदालतों ने बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक के लिए अलग-अलग पैमाने बना लिए हैं। इसकी मिसाल बाबरी मस्जिद का फैसला है। कोर्ट का काम आस्था पर नहीं, बल्कि दलील की बुनियाद पर फैसला सुनाना है। अदालत ने माना है कि बाबरी मस्जिद मंदिर तोड़कर नहीं बनाई गई। उसके नीचे मंदिर नहीं था। हमारी अदालतें भी ऐसी रास्ते पर चल रही हैं, जिससे लोगों का भरोसा टूट रहा है।”

मोतशिम ने कहा, “वर्ष 1991 के वर्शिप एक्ट में कहा गया कि 1947 में जो धार्मिक स्थल जिस तरह से थे, वे उसी रूप में बने रहेंगे। उसके बावजूद देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। हम देश की अदालतों से यह रिक्वेस्ट करते हैं कि कानून को सख्ती के लागू करने की कोशिश करें।” उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुस्लिमों के दरम्यां नफरत पैदा करने के लिए एक अफसाना गढ़ा गया है।”

उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान में जितने पुराने मंदिर हैं, वो हजारों साल से हैं। कई मुसलमान खानदानों की हुकुमतें आईं और गईं, लेकिन कभी किसी ने उसकी एक ईंट खुरचने की कोशिश नहीं की। अगर मुसलमानों की ये सोच होती कि हम दूसरों की ईबादतगाह पर जबरदस्ती कब्जा करके उसे मस्जिद बना लें तो क्या ये मंदिर मौजूद होते? ये ऐसा इतिहास है जिसे लोगों ने गढ़ा है।”

ज्ञानवापी मामले को लेकर काशी में हुई लगभग 300 संतों की बैठक में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई गई। संतों ने आरोप लगाया कि ज्ञानवापी परिसर में बाहर से नमाजियों को बुलाकर नमाज पढ़ाने की कोशिश की गई। संत समिति ने माँग की है कि पूरे ज्ञानवापी परिसर को हिन्दुओं कों सौंपा जाए। संतों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी माँग नहीं मानी गई तो संत समाज अपने तरीके से ज्ञानवापी लेगा।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि AIMPLB ने गैर-जिम्मेदार की तरह बयान दिया है। उन्होंने कहा, “यह देश संविधान से चलेगा। हमने राम जन्मभूमि संविधान के जरिए ली है और ज्ञानवापी भी ऐसे ही लेंगे। AIMPLB इस तरह के बयान देने से बचे।”

‘नुकसान की जिम्मेदार सरकार होगी’: उत्तराखंड में UCC पर देहरादून के शहर काजी ने दी धमकी, कॉन्ग्रेस भी तुष्टिकरण में जुटी

समान नागरिक संहिता (UCC) पर उत्तराखंड सरकार विधानसभा में बिल लाने वाली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जल्द ही इस संबंध में कानून लागू करने की बात कही है। शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को जस्टिस रंजना देसाई की कमेटी ने इसका ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंपा। इसके बाद राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। देहरादून के शहर काजी ने धमकी देते हुए इस पर आपत्ति जताई है। वहीं कॉन्ग्रेस भी तुष्टिकरण की राजनीति में जुट गई है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार देहरादून के शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी ने यूसीसी लागू किए जाने पर नुकसान की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि सरकार जो चाहे वह फैसला ले सकती है। उनके हाथ में प्रदेश की बागडोर है। लेकिन, इस फैसले को लागू किए जाने के बाद आगे जो भी नुकसान होगा, उसकी भी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

वहीं इस्लामी तुष्टिकरण की अपनी लाइन पर चलते हुए कॉन्ग्रेस भी इस फैसले पर सवाल उठा रही है। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पार्टी ने कहा है कि इस तरह की नीति से उत्तराखंड को कोई फायदा नहीं होने वाला। भाजपा सिर्फ लोकसभा चुनाव में फायदा उठाने की कोशिश के लिए ऐसे काम कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने बीजेपी पर ध्रुवीकरण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यूसीसी पर किन लोगों की राय ली है, वो बताए। सिविल लॉ के किन प्रावधानों को बदले जाने की जरूरत महसूस हुई, सरकार वो भी सामने रखे। धस्माना ने कहा कि हमें यूसीसी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इससे उत्तराखंड में किसी भी तबके को कोई लाभ नहीं होने वाला है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सारा ठीकरा तो केंद्र सरकार पर फोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने यूसीसी के मुद्दे पर राज्य सरकार को मोहरा बनाया है। हरीश रावत ने कहा कि पहले तो केंद्र सरकार को ही यूसीसी लाने की जरूरत है, इसके बाद ये काम राज्य सरकारों पर छोड़ा जाए।

बता दें कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत जस्टिस जस्टिस रंजना देसाई की अगुवाई में बनाई गई कमिटी ने ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया है। माना जा रहा है कि धामी सरकार 6 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। सरकार ने 5 से 8 फरवरी तक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है।  

इस विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले शनिवार (3 फरवरी 2024) को होने वाली पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी। विधानसभा से मंजूरी दिए जाने के बाद इस विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

कमिटी द्वारा ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हम सभी लंबे समय से ड्राफ्ट का इंतजार कर रहे थे। आज हमें ड्राफ्ट मिल गया है। UCC कमिटी ने अपनी रिपोर्ट हमें सौंप दी है। अब हम इस मामले में आगे बढ़ेंगे। मसौदे का परीक्षण करेंगे और सभी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद इसे विधानसभा के दौरान रखेंगे। इस पर आगे चर्चा की जाएगी।”

घर में पिता के साथ सो रहा था एक साल का बच्चा, रात में आवारा कुत्ते आए और उठाकर ले गए: नोंच-नोंच कर खा गए

तेलंगाना से एक दहलाने वाला मामला सामने आया है। हैदराबाद से सटे शमशाबाद में अपने पिता के साथ एक झोपड़ी में सो रहे साल भर के एक बच्चे को आवारा कुत्ते उठा ले गए और नोंचकर उसका मांस खा गए। बच्चे की मौत हो गई है। घटना बुधवार-गुरुवार (31 जनवरी – 1 फरवरी 2024) की रात की है। कुत्ते जब बच्चे को उठा ले गए तो पिता को पता नहीं चल पाया।

स्थानीय लोगों ने देखा कि कुत्तों का एक झुंड एक छोटे बच्चे को नोंच-नोंच कर खा रहा है। इसके बाद लोगों ने इसकी सूचना बच्चे के पिता को दी। इसके साथ ही फोन करके घटना की जानकारी पुलिस को भी दी गई। RGI एयरपोर्ट के इंस्पेक्टर बाला राजू ने कहा है कि बच्चे के पिता सूर्य कुमार की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच शुरू कर दी गई है।

बच्चे के पिता सूर्य कुमार एक दिहाड़ी मजदूर हैं। वह शमशाबाद शहर के राजीव गृहकल्प परिसर के पास एक अस्थायी झोपड़ी में रहते हैं। बुधवार की रात वह अपने एक साल के बेटे नागराजू और 20 दिन के एक नवजात के साथ झोपड़ी में सोये हुए थे। इसी दौरान दबे पाँव एक कुत्ता झोपड़ी में घुस आया और उनके बड़े बेटे नागराजू को उठाकर ले गया। इसके बाद आवारा कुत्तों ने मिलकर उसके मार दिया।

बुधवार-गुरुवार की रात लगभग 1.30 बजे कुछ लोग सूर्य कुमार की झोपड़ी के पास आए और उन्हें जगाया। लोगों ने बताया कि आवारा कुत्तों का एक झुंड बच्चे को खा रहा है। सूर्य कुमार जब जगे तो देखा कि उनका बेटा उनके पास नहीं है। उन्होंने बाहर निकलकर देखा तो बच्चा मृत पड़ा हुआ था। वहीं आसपास कुत्तों का एक झुंड घुम रहा था।

सूर्य कुमार ने पुलिस ने बताया कि बच्चा रात में दूध पीकर सो गया था। रात करीब 12 बजे के आसपास वे भी सो गए थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब कुत्ते आए और उनके बच्चे को उठाकर ले गए। घटना के वक्त बच्चे की माँ वहाँ मौजूद नहीं थी। इस घटना से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है।

बता दें कि हैदराबाद में कुत्तों का आतंक चरम पर है। पिछले मार्च से कुत्तों द्वारा आक्रमण का यह नौवाँ मामला है। इससे पहले फरवरी 2023 में अंबरपेट में चार साल के एक बच्चे को आवारा कुत्तों ने नोंच-नोंच कर मार डाला था। जून 2023 में कामारेड्डी में आवारा कुत्तों ने 3 साल के मासूम बच्चे को अपना शिकार बनाया लिया। इस बच्चे को गंभीर चोटें आई थीं।

मई 2023 में हनामकोंडा जिले में काजीपेट रेलवे क्वार्टर के पास एक बच्चे को नोंच-नोंच कर मार डाला था। बच्चा पेड़ के नीचे अकेले सो रहा था और उसके परिजन शौच के लिए गए हुए थे। इसी दौरान आवारा कुत्तों के एक झुंड ने बच्चे पर हमला कर दिया। मासूम बच नहीं सका और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

5 दिन के लिए ED के ​हवाले हेमंत, झारखंड के नए CM बने चंपई सोरेन: शपथ के बाद हैदराबाद के लिए उड़े JMM-कॉन्ग्रेस के MLA

चंपई सोरेन झारखंड के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्हें शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद सत्ताधारी गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कॉन्ग्रेस के विधायक हैदराबाद चले गए हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पीएमएलए कोर्ट ने 5 दिनों की रिमांड पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दिया है।

चंपई सोरेन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

चंपई सोरेन ने गुरुवार (01 फरवरी 2024) को राज्यपाल से मुलाकात की थी। राज्यपाल ने शुक्रवार को उन्हें शपथ दिलाई। बहुमत साबित करने के लिए उन्हें 10 दिन का समय दिया गया है। चंपई सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। वे जेएमएम संस्थापक शिबू सोरेन और उनके बेटे हेमंत सोरेन के करीबी माने जाते हैं।

चंपई ने की पहली कैबिनेट बैठक

कॉन्ग्रेस कोटे से आलमगीर आलम और राजद कोटे से सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। मुख्यमंत्री बनने के बाद चंपई सोरेन ने पहली कैबिनेट बैठक बुलाई। इसमें कैबिनेट मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण अधिकारी शामिल हुए। चंपई सोरेन ने बैठक के बाद कहा कि वे हेमंत सोरेन द्वारा किए गए कार्यों को जारी रखेंगे। मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने बताया कि वे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल होंगे। इसके अलावा जेएमएम स्थापना दिवस में भी शामिल होंगे।

हैदराबाद गए सत्ताधारी गठबंधन के विधायक

इस बीच झारखंड के सत्ताधारी गठबंधन के 35 विधायक हैदराबाद चले गए हैं। नई सरकार के गठन को लेकर चंपई सोरेन ने राज्यपाल को 43 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था। इसमें चंपई सोरेन, कैबिनेट मंत्री आलमगीर आलम और सत्यानंद भोक्ता का नाम भी शामिल था। ये तीनों नेता राँची में ही रुके हैं। बता दें कि सत्तारूढ़ गठबंधन में जेएमएम के 29 विधायक हैं। कॉन्ग्रेस के 17, आरजेडी और लेफ्ट से एक-एक विधायक हैं। बताया जा रहा है कि इन विधायकों को किसी तरह की टूट से बचाने के लिए हैदराबाद भेजने का फैसला लिया गया है।

ED को मिली हेमंत सोरेन की कस्टडी

हेमंत सोरेन को ईडी ने 31 जनवरी की रात गिरफ्तार किया था। अगले दिन कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज कर ईडी रिमांड पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 2 फरवरी को कोर्ट ने उन्हें 5 दिन के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया। झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया है, “ईडी ने 10 दिनों की रिमांड की प्रार्थना की थी। हमने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद कोर्ट ने ईडी को केवल 5 दिनों की रिमांड की अनुमति दी। इस मामले में अभी कोर्ट का आदेश अपलोड होना बाकी है। हमारी मुख्य चिंता सुरक्षा (हेमंत सोरेन की) है। ये मामला फर्जी है और गिरफ्तारी अवैध है।”

गौरतलब है कि 31 जनवरी को करीब सात घंटे की पूछताछ के बाद हेमंत सोरेन गिरफ्तार किए गए थे। उससे पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद गठबंधन ने चंपई सोरेन को नेता चुनते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया था। अब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है।

बॉलीवुड में आ रहा फिर से पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम, 7 साल बाद कमबैक से भारतीय नाराज: अनुच्छेद 370 पर उगला था जहर

पाकिस्तानी गायक आतिफ असलम 7 साल बाद फिर से बॉलीवुड में कमबैक करने जा रहे हैं। वह लव स्टोरी ऑफ 90’s फिल्म के साथ बॉलीवुड में वापसी करेंगे। उनके लौटने को लेकर फिल्म से जुड़े निर्देशक, प्रोड्यूसर सब लोग बेहद खुश हैं। उन्होंने इस वापसी को बहुत बड़ी बात कहा है और दावा कर रहे हैं कि पाकिस्तानी गायक के गाने से फिर झूम मचेगी।

दिलचस्प बात ये है कि एक तरफ जहाँ भारतीय निर्देशक, प्रोड्यूसर सब पाकिस्तानी सिंगर के ट्रैक को लेकर इतने उत्साहित हैं उनके अपने मुल्क में बॉलीवुड फिल्मों और विज्ञापनों पर बैन लगा दिया जाता है। शाहिद अफ्रीदी जैसे पाकिस्तान के नामी लोग खुले में कहते हैं कि टीवी पर हिंदुस्तानी सीरियल देख लड़की आरती की तरह हाथ घुमाने लगी थी, इसलिए गुस्से में उन्होंने टीवी तोड़ दी थी।

अब ऐसे मुल्क के सिंगर के नए गाने को लेकर बॉलीवुड में उत्साह बढ़ रहा है। इसे देख भारतीय नाराज हैं। बॉलीवुड की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा जा रहा है एक तरफ भारतीय सैनिक इन्हीं लोगों से लड़कर अपनी जान दे रहे हैं और दूसरी ओर कला के नाम पर बॉलीवुड को स्वागत मिलेगा।

बॉलीवुड के लोगों का कहना ये भी है कि बॉलीवुड आतिफ इस्लाम की वापसी को लेकर खुश है। वो यहाँ आकर कॉन्सर्ट करेगा, फिर भारत की ऑडियंस उसकी टिकट लेगी और वो पैसे से पाकिस्तान सरकार को टैक्स भरेगा। बाद में वही टैक्स भारत के खिलाफ हथियार खरीदने में प्रयोग किया जाएगा। आदि-आदि।

मालूम हो कि साल 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत में पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने की माँग उठी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तब बैन की याचिका को खारिज कर दिया था लेकिन उसके बाद से पाकिस्तानी कलाकारों ने भारत में काम नहीं किया। कई मौके आए जब पाकिस्तानी सितारों को भारत के मुद्दों पर बोलते देखा गया।

6 अगस्त 2019 को किया गया पोस्ट

जैसे आतिफ असलम ने आर्टिकल 370 खत्म होने पर कहा था कि वह कश्मीर के मुद्दे पर कहा था, कश्मीरियों के खिलाफ की जा रही हिंसा और अत्याचार की कड़ी निंदा करते हैं और अल्लाह से कश्मीर और पूरी दुनिया में निर्दोष लोगों के जीवन देने की दुआ माँगते हैं। उनके इस ट्वीट के बाद वो बहुत ट्रोल हुए थे। लोगों ने उनसे कहा था कि वो कभी बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों पर मुँह क्यों नहीं खोलते।

ज्ञानवापी ढाँचे के ‘व्यास जी तहखाना’ में होती रहेगी पूजा, हाई कोर्ट का रोक लगाने से इनकार: जुमे पर बंद का आह्वान, चप्पे-चप्पे पर पुलिस

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचे में हिंदू पक्ष को दिए गए पूजा के अधिकार पर रोक लगाने से मना करते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी। दरअसल, वाराणसी की जिला अदालत ने 31 जनवरी को 2024 पर हिंदू पक्ष की अपील पर सुनवाई करते हुए यह अधिकार दिया था। इसके बाद से वहाँ पूजा शुरू हो गई है। वहीं, इसके विरोध में मुस्लिम पक्ष ने वाराणसी बंद का आह्वान किया है।

दरअसल, वाराणसी की अदालत ने 31 जनवरी 2024 ढाँचे के नीचे हिंदुओं को पूजा करने का आदेश दिया था। जिला अदालत के इस आदेश को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ही ज्ञानवापी ढाँचे का प्रबंधन करती है।

मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा कि मुस्लिम पक्षों ने 17 जनवरी को पारित आदेश को अभी तक चुनौती नहीं दी है, जिसके तहत एक जिला मजिस्ट्रेट को रिसीवर के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में इस रिसीवर को 31 जनवरी 2024 को मस्जिद के तहखाने में हिंदुओं को प्रार्थना करने का आदेश दिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि जब तक 17 जनवरी के आदेश को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक मस्जिद कमिटी की चुनौती पर सुनवाई करना संभव नहीं होगा। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को जिला अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में संशोधन करने के लिए 6 फरवरी 2024 तक का समय दिया है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञानवापी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा गया है।

मस्जिद समिति की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने कहा, “मामले में अतिशीघ्रता है। उन्होंने (हिंदू पक्ष) पहले ही व्यास तहखाना (दक्षिणी तहखाने) में पूजा शुरू कर दी है।” नकवी ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट को तहखाने में पूजा शुरू कराने के लिए सात दिन का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने 7 घंटे में पूजा शुरू करवा दी।

नकवी के तर्क का विरोध हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने किया। उन्होंने कहा कि जब तक मुस्लिम पक्ष 17 जनवरी के आदेश को चुनौती नहीं देता, तब तक 31 जनवरी के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती है। इसके बाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को राहत देने से इनकार कर दिया।

मुस्लिम पक्ष को हाई कोर्ट से झटका लगने से दो पहले सुप्रीम कोर्ट ने झटका दिया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के दक्षिणी तहखाने में स्थित व्यास जी का तहखाना में हिंदुओं को पूजा की अनुमति देने के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था।

बता दें कि ढाँचे के तहखाने में हिंदू पक्ष को मिले पूजा के अधिकार से मुस्लिम समाज नाराज है। मुस्लिम पक्ष ने शुक्रवार को वाराणसी बंद रखने का आह्वान किया है। मुस्लिम व्यापारियों से अपने दुकान-व्यवसाय बंद रखने के लिए कहा गया है। मुस्लिमों ने जुमे की नमाज के दौरान मस्जिदों मे दुआ पढ़ने की बात कही है। इसको देखते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस को तैनात किया गया है।

मोहम्मद जुबैर ने फर्जी लेटर शेयर किया, लिखा- प्रमोद कृष्णम को कॉन्ग्रेस से निकाला: झूठ पकड़ाते ही ट्वीट डिलीट कर भागा, फैक्टचेकर होने का करता है दावा

फैक्टचेक के नाम पर फेक न्यूज फैलाने वाले मोहम्मद जुबैर की बदमाशी फिर से सामने आई है। उसने एक फर्जी लेटर एक्स/ट्विटर पर शेयर कर दावा किया कि आचार्य प्रमोद कृष्णम को कॉन्ग्रेस ने पार्टी से निकाल दिया है। अपने झूठ का पर्दाफाश होते ही उसने बिना किसी स्पष्टीकरण के ट्वीट डिलीट कर दिया।

शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने कॉन्ग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णम को निकाले जाने का दावा एक्स पर किया। मोहम्मद जुबैर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया, “आखिरकार कॉन्ग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को निलंबित कर दिया। कम से कम 2 साल की देर कर दी। ये एएनआई के लिए भी दुख की बात है जो नियमित रूप से कॉन्ग्रेस विरोधी कोट के लिए उनके पास जाता है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से से कल्कि धाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम की मुलाकात के बाद यह दावा किया गया।

जुबैर का फैलाया फेक न्यूज (फोटो साभार X/Zoo_bear)

खुद के फैक्टचेकर होने का दावा करने वाले जुबैर ने इस पोस्ट के साथ जो लेटर शेयर किया है, उसमें बहुत निचले स्तर की गलतियाँ हैं। ऐसी गलतियाँ जिसे कोई आम इंसान भी पहली नजर में पकड़ ले। लेकिन जुबैर ने उन्हें देखना जरूरी नहीं समझा, क्योंकि उसे फेक न्यूज फैलाने की जल्दी थी। यह लेटर ‘राव साहब’ के नाम से जारी किया गया था। ‘राव साहब’कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि हरियाणा में सामान्य संबोधन का एक शब्द है।

फैक्ट चेक के धंधे के नाम पर मोहम्मद जुबैर आम लोगों से पैसे माँगता है, लेकिन उसने इस बात को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया कि यह लेटर 10 डाउनिंग स्ट्रीट लिखे पते से जारी हुआ है। यह लंदन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का आधिकारिक पता है। फैक्ट चेक के सामान्य दिशा-निर्देशों को पूरी तरह से दरकिनार कर मोहम्मद जुबैर ने फर्जी लेटर के दम पर दावा कर दिया कि अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस स्वयंसेवक समिति के CWC मेंबर कथित ‘राव साहब’ ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को कॉन्ग्रेस पार्टी से निलंबित कर दिया है। लेकिन ऐसा न तो कोई पद है और न ही ऐसा कोई व्यक्ति।

दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के नाम से वायरल लेटर के फर्जी होने का खुलासा एक दिन पहले गुरुवार (1 फरवरी) को पत्रकार सचिन गुप्ता ने किया था। उन्होंने बताया था कि आचार्य प्रमोद कृष्णम के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने इस दावे को खारिज किया है।

बहरहाल, इस बात ने मोहम्मद जुबैर को दुष्प्रचार को फैलाने और आगे बढ़ाने से नहीं रोका। बाद में झूठ पकड़े जाने पर उसने बिना किसी माफी या स्पष्टीकरण के बेशर्मी से ट्वीट डिलीट कर दिया।

सनातन विरोधी तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने किया था सम्मानित

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी 2024 को तमिलनाडु सरकार ने मोहम्मद जुबैर को कोट्टई अमीर सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार से सम्मानित किया था। ये सम्मान उसे फैक्ट चेकिंग के नाम पर दिया गया था, जबकि हकीकत सामने है।