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कुँई-कुँई करता है तो ठीक नहीं…: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए अपनी ही पार्टी का बूथ एजेंट ‘कुत्ता’, कहा – जो भौंकता है उसे लो

कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी पार्टी के बूथ एजेंटों की तुलना कुत्ते से की है। इसको लेकर भाजपा ने कॉन्ग्रेस और खड़गे पर हमला बोला है। भाजपा ने बयान को शर्मनाक बताते हुए कहा कि जिस पार्टी का अध्यक्ष अपने संगठन की सबसे मज़बूत और महत्वपूर्ण कड़ी ‘बूथ एजेंट’ की तुलना कुत्ते से करता है, उस पार्टी की दुर्गति होनी तय है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने दिल्ली के रामलीला मैदान में शनिवार (3 फरवरी 2024) को ‘न्याय संकल्प रैली’ का आयोजन किया। इस रैली में पार्टी के बूथ लेवल के कार्यकर्ता से लेकर वरिष्ठ नेता तक शामिल हुए। इसी दौरान कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनकी तुलना कुत्ते से कर दी।

खड़गे ने कहा, आप बूथ एजेंट जो बनाते हैं, वो भी जरा सोच के बनाओ। बहुत से लोग ऐन इलेक्शन के वक्त गायब हो जाते हैं। एक हमारे पास कहावत है। जब आप बाजार में जाते हो तब अच्छा और काला कुत्ता खरीदना है या किसी प्राणी को लेना है… किसी जानवर को लेना है तो लोग जानवर के बाजार में जाके सब छानबीन करते हैं।”

कुत्ते की विशेषता बताते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे कहा, “अगर ईमानदार एक प्राणी को भी लेना है तो उसका कान पकड़ के ऊपर की ओर उठाते हैं। ऊपर उठाने के बाद अगर वो भौंकता है तो ठीक है और अगर कुँई-कुँई करता है तो ठीक नहीं… कोई लेता नहीं उसको।”

कॉन्ग्रेस नेताओं को पाठ पढ़ाते हुए खड़गे ने कहा, “आप भी (बूथ एजेंट का) सेलेक्शन करते वक्त जो भौंकता है, जो लड़ता है, जो आपके साथ रहता है, उसको ले लो। उसको बूथ लेवल कमिटी का एजेंट बनाओ। जब बूथ में कोई बैठता है तो ऐसे आदमी को बैठाओ कि अगर वो सुबह सात बजे जाता है तो जब वहाँ पेटी बंद होती है उस वक्त साइन करके वो बाहर आ जाए।”

मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान की भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आलोचना की है। भाजपा ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर लिखा, “जिस पार्टी का अध्यक्ष अपने संगठन की सबसे मज़बूत और महत्वपूर्ण कड़ी “बूथ एजेंट” की तुलना कुत्ते से करता है, उस पार्टी की दुर्गति होनी तय है। शर्मनाक।”

नाटक में माता सीता को सिगरेट फूँकते हुए दिखाया, वीडियो वायरल होने पर लोगों में गुस्सा: पुणे विश्वविद्यालय में ABVP ने दर्ज कराई FIR, कई गिरफ्तार

भगवान राम और देवी सीता का मजाक उड़ाने वाले नाटक का मंचन करने विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय में प्रदर्शन किया है। इस मामले में दोनों पक्षों की तरफ से शिकायत दी गई है। नाटक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद से लोगों में गुस्सा है। इस मामले में पुलिस ने फैकल्टी और विद्यार्थियों को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) का है। वहाँ शुक्रवार (1 फरवरी 2024) को भगवान राम और देवी सीता का मजाक उड़ाने वाले एक नाटक का मंचन किया गया। इन नाटक का नाम ‘जब वी मेट’ था। इसका मंचन ललित कला केंद्र के मंच पर किया गया। इसमें माता सीता को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया था।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने भगवान राम और माता सीता को अपमानजनक ढंग से दिखाने पर कड़ी आपत्ति जताई। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने नाटक रोक दिया और तीखी बहस शुरू हो गई। इस दौरान विवाद में दो छात्रों को चोटें भी आई हैं।

एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने रामायण और भगवान राम एवं माता सीता का मजाक उड़ाने वालों को जवाब दिया कि रामायण पौराणिक कथा नहीं, बल्कि इतिहास है। इसलिए भगवान राम और माता सीता का मजाक उड़ाने की अनुमति किसी को नहीं है।

इस अपमानजनक वीडियो में माता सीता का किरदार निभा रही छात्रा को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया था। बताया जा रहा है कि ये वीडियो नाटक के रिहर्सल के दौरान का है। एबीवीपी पुणे ने एक वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के ललित कला केंद्र विभाग द्वारा प्रस्तुत नाटक में प्रभु श्रीराम और सीता माता को जोकरों की तरह दिखाया जा रहा था।”

एबीवीपी ने इस घटना के बारे में आगे बताया, “एबीवीपी पुणे महानगर के कार्यकर्ताओं ने इस आपत्तिजनक नाटक को रोक दिया। एबीवीपी पुणे ने यह रुख अपनाया है कि हिंदू देवी-देवताओं के बारे में ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।”

सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय के सुरक्षा विभाग से जुड़े सुरेश भोंसले ने बताया, “हमें इस नाटक के मंचन से जुड़ी सूचना नहीं दी गई थी। इस घटनाक्रम के बाद हमें पता चला।” बहरहाल, इस मामले में दोनों ही पक्षों ने चतुहश्रुंगी पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं।

पुलिस का कहना है कि जाँच के बाद नाटक के आयोजकों के खिलाफ हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाने का मामला दर्ज किया जाएगा। अब इस मामले में पुणे पुलिस ने ललित कला संकाय के प्रोफेसर और पाँच छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है।

वो यात्रा, जो न होती तो राम-राम कहना भी होता अपराध… जब ‘अधर्म’ वाले कानूनों के खिलाफ मैसूर से निकले थे आडवाणी, नक्सलियों के गढ़ में लहराया था भगवा

भारत सरकार ने पूर्व उप-प्रधानमंत्री एवं भाजपा के अध्यक्ष रहे लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने का निर्णय लिया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि उनके साथ काम करना और सीखना उनके लिए सौभाग्य की बात है। लालकृष्ण आडवाणी 96 वर्ष के हैं, उनका राजनीतिक और समाजिक करियर कई दशकों का रहा है। 8 नवंबर, 1927 को सिंध (अब पाकिस्तान में) के कराची शहर में जन्मे लालकृष्ण अडवाणी विभाजन के बाद विस्थापित होकर भारत आए और 90 के दशक में यहाँ की राजनीति के शिखर पुरुष बन कर उभरे।

लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ दिया जाना इस सम्मान का भी सम्मान है। मात्र 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने RSS की सदस्यता ले ली थी और जिस साल भारत को स्वतंत्रता मिली, उस साल वो कराची शहर में संगठन के सेक्रेटरी बन चुके थे, शाखा संचालित करते थे। भारत की आज़ादी के बाद उन्हें राजस्थान की जिम्मेदारी मिली, जहाँ उन्होंने 1952 तक अलवर, भरतपुर, कोटा, बूंदी और झालावाड़ में बतौर प्रचारक काम किया। 1967 में हुए ‘दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल’ के अध्यक्ष बने।

राम रथ यात्रा देश में लेकर आई सांस्कृतिक पुनरुत्थान का युग

लालकृष्ण आडवाणी को सामान्यतः सितंबर-अक्टूबर 1990 में आयोजित राम रथ यात्रा के लिए जाना जाता है। इस यात्रा ने न सिर्फ भारतीय राजनीति को बदल दिया, बल्कि हर एक हिन्दू के भीतर स्वाभिमान जगा दिया। ऐसे ही पीएम मोदी ने उन्हें ‘भारत रत्न’ मिलने की बधाई देते हुए देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान में अद्वितीय योगदान देने वाले नहीं बता दिया। बिहार के समस्तीपुर में लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ़्तारी के बाद पूरे देश की राजनीति में भूचाल आ गया था, केंद्र में सरकार तक गिर गई थी।

राम रथ यात्रा अगर न हुई होती तो शायद आज हम अयोध्या में भव्य राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी न बनते। गुजरात के सोमनाथ से शुरू हुई इस रथ यात्रा में प्रतिदिन लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय की जाती थी और आडवाणी एक दिन में आधा दर्जन रैलियों को संबोधित करते थे। गुजरात के बाद यात्रा महाराष्ट्र, अब के तेलंगाना, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी गई। गाँव-गाँव में हजारों लोग यात्रा का स्वागत करते, ‘गर्व से कहो हम हिन्दू हैं’ के नारे लगते और लोग कई किलोमीटर तक यात्रा के साथ पैदल चलते।

हालाँकि, बिहार के समस्तीपुर में यात्रा के पहुँचते ही तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने तब के प्रधानमंत्री VP सिंह की सलाह पर लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करवा दिया। मुस्लिम वोटों के लिए ये सब किया गया। उधर यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने कारसेवकों पर गोली चलवाई। डेढ़ लालः लोग गिरफ्तार किए गए। ‘समाजवादी’ कहलाने वाले नेताओं में मुस्लिम तुष्टिकरण की होड़ लग गई थी। आडवाणी की गिरफ़्तारी से भाजपा के लिए लोगों के मन में सहानुभूति बढ़ी और 1991 के आम चुनावों में वो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी, उसी साल यूपी में भी पार्टी की सरकार बनी।

जनादेश यात्रा: ‘अधर्म’ के खिलाफ लालकृष्ण आडवाणी की हुंकार

लालकृष्ण आडवाणी ने अपने राजनीतिक जीवन में कुछ अन्य यात्राएँ भी निकाली, लेकिन राम रथ यात्रा के आगे उनकी अधिक चर्चा नहीं होती। जैसे – सुराज यात्रा (मार्च 1996), स्वर्ण जयंती रथ यात्रा (मई 1997), भारत उदय यात्रा (2004), भारत सुरक्षा यात्रा (अप्रैल 2006) उन्हीं में से एक है – ‘जनादेश यात्रा’। असल में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव की सरकार 1993 में 2 बिल लेकर आई थी – 80वाँ संविधान संशोधन और ‘रिप्रजेंटेटिव्स ऑफ पीपल (अमेंडमेंट) बिल।’

लालकृष्ण आडवाणी ने इन विधेयकों के खिलाफ देश में 4 स्थानों से यात्रा की योजना बनाई। असल में ये दोनों ही विधेयक मार्क्सवादियों के प्रभाव में लाए गए थे, भारत को वामपंथी राष्ट्र बनाने के मकसद से लाए गए थे। इसके तहत सार्वजनिक रूप से धर्म के प्रदर्शन को अपराध ठहराया जाना था। मुस्लिम तुष्टिकरण ही इनका लक्ष्य था। भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इन्हें लाया गया था। संसद में लालकृष्ण आडवाणी ने इन विधेयकों का तगड़ा विरोध किया।

उन्होंने कहा, “हम ईश्वर भक्ति को धर्म का नाम देने के सख्त विरोध में हैं – सभी भारतीयों के लिए, चाहे वो हिन्दू हों, मुस्लिम हों, सिख हों, या ईसाई हों। उनका धर्म उन्हें सही कार्य करने के लिए प्रेरणा देता है। राजनीति को अगर धर्म से हटाया गया तो इससे जनता के जीवन का नैतिक आधार कम हो जाएगा। राजनीति से अधर्म को हटाया जाना चाहिए, धर्म को नहीं। राजनीति से भ्रष्टाचार और अपराध को हटाइए।” भाजपा का आरोप था कि इन विधेयकों के जरिए कॉन्ग्रेस सरकार देश में चुनावी प्रथा समाप्त कर अन्य दलों की मान्यताएँ रद्द करने की साजिश रच रही थी।

अतः, 11 सितंबर, 1993 को स्वामी विवेकानंद की जन्म-जयंती पर 4 यात्राएँ शुरू की गईं। मैसूर से स्वयं लालकृष्ण आडवाणी, जम्मू से भैरों सिंह शेखावत, पोरबंदर से मुरली मनोहर जोशी और कोलकाता से कल्याण सिंह यात्रा लेकर निकले। इन यात्राओं के जरिए 14 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों को कवर किया गया। 25 सितंबर को भोपाल में एक विशाल रैली हुई, जिसमें चारों यात्राओं का मिलन और समापन हुआ। ‘जनादेश यात्रा’ ने कॉन्ग्रेस की चूलें हिला दीं।

जो तेलंगाना (तब आंध्र प्रदेश का हिस्सा) नक्सलियों के कारण कुख्यात हो चला था, वहाँ लालकृष्ण आडवाणी को तगड़ी प्रतिक्रिया मिली। कोलकाता में कल्याण सिंह का ऐसा स्वागत हुआ कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने ‘लाल शहर हुआ भगवा’ वाले शीर्षक के साथ खबर छापी। इसमें लिखा गया कि शायद ये शहर अब पहले जैसा नहीं रहेगा। पंजाब में भैरों सिंह शेखावत की यात्रा से खालिस्तानी आतंक से पीड़ित इलाके में प्रशासन को मजबूती मिली, काम करने के लिए प्रोत्साहन मिला।

इसका नतीजा ये हुआ कि दोनों ‘अधर्म’ वाले बिल संसद में पास नहीं हुए। अगर वो विधेयक कानून बन गए होते तो शायद राम-राम कह कर एक-दूसरे का अभिवादन करने पर भी जेल हो जाती। लोकतंत्र की रक्षा और धर्मचक्र के परिवर्तन के क्रम में इस यात्रा ने हिन्दुओं को अपने ही देश में अपराधी बनाने से बचा लिया। आज भी राम मंदिर के खिलाफ ‘राजनीति को धर्म से अलग रखने’ की बातें की जाती हैं, लेकिन ऐसा कहने वाले ये भूल जाते हैं कि धर्म के हिसाब से न चलने वालों का पतन हो जाता है, धर्म है तभी नीति है और नीति है तभी सुराज है।

लालकृष्ण आडवाणी पहले से ही ‘भारत के रत्न’

अगर केंद्र में मोदी सरकार नहीं बनती और लालकृष्ण आडवाणी को अगर ‘भारत रत्न’ न मिलता, तब भी देशसेवा में उनके योगदान का प्रभाव कम नहीं होता। आपातकाल के दौरान भी इंदिरा गाँधी की तानाशाह कॉन्ग्रेस सरकार ने उन्हें 16 जून, 1975 से लेकर 18 जनवरी, 1977 तक जेल में बंद रखा। 1977 में इंदिरा गाँधी के खिलाफ जनता पार्टी सरकार के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी, तभी इस सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया।

पीएम मोदी ने उनके इस कार्यकाल को भी याद किया है। इसका कारण है कि जिस भाजपा को मीडिया विरोध कह कर कोसा जाता है, उसी के संस्थापक ने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए मंत्री के रूप में कई कदम उठाए। जब लालकृष्ण आडवाणी ‘जनादेश यात्रा’ निकाल रहे थे, उसी दौर में नरेंद्र मोदी भी एक कुशल संगठन प्रशासक के रूप में उभर रहे थे। राम रथ यात्रा के आयोजन और मीडिया कवरेज में भागीदारी निभा कर उन्होंने खुद को साबित कर दिया था।

तभी उन्हें 1993 में गुजरात में पार्टी का महासचिव बनाया गया। जब कुछ विधायकों ने विरोध किया तो लालकृष्ण अडवाणी उनके समर्थन में खड़े हुए। अटल बिहारी वाजपेयी अगर प्रधानमंत्री बन पाए, इसमें भी लालकृष्ण आडवाणी का बड़ा हाथ था। 1995 में मुंबई में हुए भाजपा के अधिवेशन में उन्होंने ही वाजपेयी को पीएम उम्मीदवार घोषित किया, वरना दोनों नेता ‘आप पीएम प्रत्याशी’ की रट लगा कर एक-दूसरे का सम्मान किए जा रहे थे।

लालकृष्ण आडवाणी उस समय 90 के दशक में अटल बिहारी वाजपेयी से अधिक लोकप्रिय थे और अधिक सक्रिय थे, लेकिन उन्हें पता था कि पार्टी को एक रखने के लिए और गठबंधन बनाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी का चेहरा आवश्यक है। 1986 में वाजपेयी की जगह आडवाणी ने कमान ली और अपना काम कर के एक दशक बाद कमान फिर उन्हें सौंप दिया। 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। उस दौरान कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए वाजपेयी ने नरेंद्र मोदी को गले भी लगाया था, जिसका वीडियो भी है।

बंगाल में केंद्रीय पुलिस में भर्ती हो गए पाकिस्तानी! फर्जी निवास प्रमाण पत्र के जरिए ‘खेला’: 8 जगहों पर CBI की रेड

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में भर्ती कराने वाले सरगनाओं के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पश्चिम बंगाल के दो जिलों के 8 जगहों पर छापेमारी की। केंद्रीय एजेंसी ने शनिवार (3 फरवरी 2024) को यह छापेमारी राजधानी कोलकाता और 24 परगना जिलों में की।

दरअसल, सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भर्ती में लाभ देने का प्रावधान किया गया था। इस लाभ को पाने के लिए कई लोगों ने फर्जी अधिवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate) बनवाकर लिया। लाभ पाने वाले लोगों में कुछ पाकिस्तानी नागरिक भी थे।

इस तरह कई उम्मीदवारों को सशस्त्र बलों और सीएपीएफ में फर्जी अधिवास प्रमाण पत्रों के माध्यम से अवैध रूप से भर्ती किया गया था। इसमें उन्होंने खुद को सीमावर्ती क्षेत्र का दिखाया था, जिसके कारण उन्हें कम अंक पर भर्ती कर लिया गया। इस मामले में कई लोग संलिप्त थे। इसके बाद इस मामले में FIR दर्ज की गई।

इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसकी जाँच CBI को सौंपने के लिए कहा। इसके बाद सीबीआई ने पिछले साल अगस्त में इसकी जाँच अपने हाथ में ली। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को की गई छापेमारी भर्ती रैकेट चलाने वाले लोगों के परिसरों में की गई। ये लोग जाली अधिवास प्रमाण पत्र बनाने में शामिल थे।

सीबीआई की प्रारंभिक जाँच के निष्कर्षों से गुजरते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने कहा था कि सशस्त्र बलों की भर्ती में कोई अनियमितता नहीं पाई गई, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में चार उदाहरण पाए गए हैं। जज ने कहा था कि सीमावर्ती राज्य होने के नाते पश्चिम बंगाल केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भर्ती की परीक्षाओं में कम कट-ऑफ अंक की अनुमति देता है।

न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने डिप्टी सॉलिसिटर जनरल की दलीलों का हवाला देते हुए कहा था, “ऐसा लगता है कि इसने अन्य राज्यों, विशेष रूप से देश के उत्तरी भाग के लोगों को यह दिखाने के लिए जाली दस्तावेज़ बनाने के लिए प्रेरित किया है कि वे पश्चिम बंगाल राज्य में रहते हैं।”

उन्होंने कहा था, “निवास प्रमाण पत्र, मैट्रिकुलेशन प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जाली हैं। यह अधिक गहन जाँच का विषय है कि क्या विदेशी नागरिकों ने भी भारतीय बलों में नौकरियों के लिए आवेदन करने के लिए इसी पद्धति का सहारा लिया है।” .

बच्चा था मानसिक रूप से परेशान, माँ कर रही थी होटल में ‘सेक्स पार्टी’: अमेरिका के स्कूल में 4 बच्चों की हत्या करने वाले नाबालिग की माँ पर केस, 60 साल की हो सकती है सजा

अमेरिका के मिशिगन राज्य में एक ऐतिहासिक मुकदमा शुरू हुआ है, जिसमें एक स्कूली लड़के द्वारा किए गए जघन्य अपराध के लिए उसके माता-पिता को दोषी माना जा सकता है। अमेरिका में 15 साल के एथन क्रम्बली ने 30 नवंबर 2021 को मिशिगन के ऑक्सफोर्ड हाई स्कूल में चार छात्रों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में उसकी माँ को 60 साल तक की सजा हो सकती है।

इस मामले में अब एथन क्रम्बली की 45 वर्षीय माता जेनिफर और 47 वर्षीय पिता जेम्स क्रम्बली पर लापरवाही समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट में ये बात भी कही गई कि एथन से ज्यादा इन हत्याओं के लिए उसके माता-पिता जिम्मेदार हैं। एथन ने ऑक्सफोर्ड हाई स्कूल में 11 लोगों को गोली मारी थी, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई थी।

सेक्स पार्टीज के चक्कर में बेटे का नहीं रखा ध्यान!

बहस के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि भले ही एथन ने गोली चलाई हो, लेकिन ट्रिगर पर उंगलियाँ उसके माता-पिता की थीं। उन्होंने एथन की छोटी-मोटी बातों का भी ध्यान नहीं रखा। एथन मानसिक रूप से परेशान था, फिर भी उसे स्कूल जाने दिया गया। उसके पिता जेम्स पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने गन का लॉक खुला रखा था। इस मामले में जेम्स के खिलाफ इस साल मार्च में अलग से ट्रायल चलेगा।

इस मुकदमे की बहस के दौरान ब्रायन मेलोची नाम शख्स ने गवाही दी कि घटना के समय वह एथन की माँ जेनिफर के साथ होटल में ‘सेक्स पार्टी’ कर रहा था। उसकी जेनिफर से मुलाकात एक एडल्ट डेटिंग ऐप ‘एडल्ट फ्रेंड फाइंडर’ जरिए हुई थी। हालाँकि, जेनिफर ने कहा कि वो बिजनेस के सिलसिले में होटल गई थी। वहीं, उसकी मुलाकात हुई।

जेनिफर के वकील ने कहा कि उसकी क्लाइंट को ये नहीं पता था कि वो बच्चों को मारने के लिए स्कूल गया है या वो ऐसा कोई कदम भी उठा सकता था। वो सिर्फ 15 साल के लड़के की माँ थी, जिसे ये नहीं पता था कि उसके बेटे के दिमाग में क्या चल रहा है। जेनिफर ने कोर्ट में कहा कि उसके बेटे ने 4 बच्चों की जगह अपने माता-पिता यानी उन्हें ही मार देता। उसकी वजह से सब कुछ नष्ट हो गया।

इस मामले में एथन क्रम्बले को पहले ही हत्या का दोषी ठहराया जा चुका है। उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। नाबालिग होते हुए भी उसे इस जघन्य नरसंहार का दोषी माना गया। उम्रकैद के दौरान उसे परोल मिलने की संभावना भी बेहद कम है। उसने जब वारदात को अंजाम दिया था, तब उसकी उम्र 15 वर्ष थी और 17 साल की उम्र में उसे सजा सुनाई गई।

यह मुकदमा अमेरिका में एक बड़ा उदाहरण स्थापित कर सकता है। यदि जेनिफर और जेम्स क्रम्बली को दोषी ठहराया जाता है तो यह अन्य माता-पिता के लिए भी एक चेतावनी होगी, जो अपने बच्चों का ध्यान नहीं रखते और उसकी हिंसक प्रवृत्तियों को नजरअंदाज करते हैं। इस मुकदमे का परिणाम अमेरिका में बंदूक नियंत्रण और बाल सुरक्षा नीतियों को प्रभावित कर सकता है।

कनाडा में मारे गए आतंकी निज्जर के दोस्त के घर फायरिंग, अमेरिका में भारत विरोधी आयोजन में लड़ पड़े 2 खालिस्तानी गुट

कनाडा के दक्षिण सरे स्थित सिमरनजीत सिंह नाम के एक खालिस्तान समर्थक के घर पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया। पुलिस का कहना है कि रात भर गोलीबारी हुई है। सिमरनजीत सिंह पिछले साल मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर का दोस्त था। यह हमला ड्रग्स तस्करी को लेकर गैंगवार भी बताई जा रही है। वहीं, अमेरिका में खालिस्तान समर्थक दो गुटों में झड़प हो गई है।

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया गुरुद्वारा परिषद के प्रवक्ता मोनिंदर सिंह ने बताया कि यह घर सिमरनजीत सिंह का है और वह मृतक हरदीप सिंह निज्जर का दोस्त था। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के सदस्यों का मानना है कि हरदीप सिंह निज्जर के साथ संबंध होने के चलते मकान मालिक सिमरनजीत सिंह के घर पर गोलीबारी हुई है।

पुलिस का कहना है कि वह पड़ोसियों से जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही गोलीबारी को लेकर आसपास के सीसीटीवी फुटेज की भी जाँच की जा रही है। हालाँकि, इस गोलीबारी में कोई घायल नहीं हुआ है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इलाके में गोलियों से छलनी हुई एक कार मिली है। इसके साथ ही घर में गोली लगने के भी कई निशान भी मिले हैं।

बता दें कि पिछले साल जून में सरे शहर में हरदीप सिंह निज्जर की अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्या का आरोप कनाडा ने भारत पर लगाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद पैदा हो गया था। भारत ने कनाडा के इन आरोपों को बेतुका बताते हुए कहा था कि अगर इससे संबंधित कोई सबूत हो तो दे।

दरअसल, कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी आई थी कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या ड्रग्स की तस्करी में वर्चस्व को लेकर हुई थी। कहा जाता है कि कनाडा में ड्रग्स तस्करी में खालिस्तान समर्थकों और पाकिस्तानी मूल के लोगों का नियंत्रण है। ड्रग्स के कारोबार पर नियंत्रण को लेकर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI के दो एजेंट- राहत राव और तारिक कियानी ने निज्जर की हत्या कर दी थी।

बता दें कि कनाडा में 29 साल के ट्रक ड्राइवर कोमलप्रीत सिद्धू को 406 किलो मेथामफेटामाइन (एक प्रकार का ड्रग्स) के साथ गिरफ्तार किया गया है। विनिपेग के कोमलप्रीत सिद्धू को मैनिटोबा रायल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क के तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

मेक्सिको और उत्तरी अमेरिकी देशों के बीच ड्रग्स की तस्करी करने वाले नेटवर्क से जुड़े ब्रैम्पटन से 25 वर्षीय आयुष शर्मा और 60 वर्षीय गुरअमृत सिद्धू और कैलगरी से 29 वर्षीय सुभम कुमार को अंतरराष्ट्रीय वारंट के तहत कनाडा की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अब इन्हें अमेरिका को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

सिर्फ ड्रग्स की तस्करी ही नहीं, बल्कि खालिस्तान के नाम पर भी गुटबाजी और पैसे बनाने का खेल भी सामने आया है। इसको लेकर अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में खालिस्तान समर्थक दो गुटों में झड़प भी हो गई है। सैन फ्रांसिस्को में तथाकथित ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ के दौरान दो प्रतिद्वंद्वी गिरोहों में हिंसक झड़प हो गई। इस दौरान भारत विरोधी पोस्टर भी लगाए गए थे।

दरअसल, आरोप है कि आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने मेजर सिंह निज्जर के समूह को किनारे कर दिया है और सरबजीत सिंह सबी गिरोह को बढ़ावा दिया है। इसी को लेकर दोनों गिरोहों में हिंसक झड़प हो गई। 28 जनवरी 2024 की इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि दोनों गुटों के समर्थक एक-दूसरे पर लात-घूँसे चला रहे हैं। 

अब यूपी में ही मिल रहा काम, तमिलनाडु से लौट रहे मजदूर: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद कारोबार की बल्ले-बल्ले, सुधरी हुई कानून व्यवस्था भी एक कारण

तमिलनाडु के तिरुप्पुर ने बने हुए कपड़ों के निर्यात के हब के रूप में अपनी जगह बनाई। न सिर्फ आसपास के जिलों, बल्कि देशों के अन्य हिस्सों में भी यहाँ के बने हुए कपड़ों की सप्लाई होती है। यहाँ असम, बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल से बड़ी संख्या में मजदूर आते हैं। 2018 तक यहाँ अप्रवासी मजदूरों की संख्या 40,000 से भी अधिक पहुँच गई थी। चूँकि वहाँ स्थानीय मजदूरों की कमी है, कुछ ने तो बिहार और ओडिशा में मजदूरों को हायर कर के वहाँ से लाने के लिए एजेंसी तक खोल ली।

अब तिरुप्पुर की कपड़ा इंडस्ट्री संकट में है। कारण – उत्तर प्रदेश के मजदूर बड़ी संख्या में वापस लौट रहे हैं। इसका कारण है – उत्तर प्रदेश में विकास की रफ़्तार बढ़ने के साथ ही अब उन्हें गृह राज्य में ही काम के मौके मिल रहे हैं। खासकर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या और आसपास के इलाकों में कई बड़ी प्राइवेट कंपनियाँ निवेश कर रही हैं। तमिलनाडु की कपड़ा इंडस्ट्री में लगभग 6 लाख अप्रवासी मजदूर हैं, जिनमें से 10% अब वापस लौट चुके हैं।

अकेले तिरुप्पुर से 20% मजदूर बाहर चले गए हैं। यहाँ कपड़ों के कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। ‘तिरुप्पुर एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष KM सुब्रमण्यन ने कहा कि मजदूरों का पलायन चिंता का विषय है। अब एसोसिएशन मजदूरों की सुविधाएँ बढ़ाने में लग गया है। हॉउसिंग सोसाइटी में रहने की व्यवस्था, मेडिकल सुविधाएँ, मेहनताने में बढ़ोतरी और समय पर वेतन – ये सब तरकीबें आजमाई जा रही हैं। TEA के पूर्व अध्यक्ष और ‘Warshaw इंटरनेशनल’ कंपनी के मालिक राजा शानमुगम ने कहा कि पीएम मोदी ने अयोध्या में अगले 2 वर्षों में 60,000 करोड़ रुपए के निवेश का ऐलान किया है, इससे मजदूरों में ये भावना आई है कि वो वापस लौट कर अपने परिजनों के करीब रहें और साथ ही रोजी-रोटी भी कमाएँ।

बता दें कि पिछले साल तिरुप्पुर से कपड़ों का निर्यात 34,350 करोड़ रुपए का रहा। तिरुप्पुर से मजदूरों के पलायन के कारण नोएडा के कपड़ा इंडस्ट्री की चल निकली है। ‘नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट्स क्लस्टर’ के मालिक ललित ठुकराल ने कहा कि यहाँ अब मजदूरों की कमी नहीं है, जो पहले थी। मजदूर वापस आ रहे हैं। नोएडा अपैरल क्लस्टर के 3000 यूनिट्स हैं, इसका निर्णय राजस्व 40,000 करोड़ रुपए का है। गोरखपुर और बुंदेलखंड में इसके नए यूनिट्स लगने हैं।

ठुकराल ने बताया कि दूसरे राज्यों से कपड़ा मैन्युफैक्चरर यूपी के इलाकों में आ रहे हैं, ऐसे में यहाँ मजदूरों को नौकरी मिलने में आसानी हो रही है। साथ ही बिहार-ओडिशा के मजदूरों को भी फायदा है, जिनके लिए आने-जाने का समय बचेगा। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि यूपी में कानून-व्यवस्था में सुधार भी एक बड़ा कारण है कि उद्योग पनप रहा है, मजदूर लौट रहे हैं। तिरुप्पुर से लौट रहे मजदूरों को अपने ही राज्य में काम मिल रहा है। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

जिंदा हैं पूनम पांडेय, सर्वाइकल कैंसर वाली बात झूठ: ‘मरने’ के बाद खुद वीडियो बना कर आईं सामने

अभिनेत्री एवं मॉडल पूनम पांडेय ज़िंदा हैं। हमें ये इसीलिए बताना पड़ रहा है, क्योंकि उनके ही इंस्टाग्राम के माध्यम से खबर दी गई कि पूनम पांडेय की सर्वाइकल कैंसर की वजह से मौत हो गई है। अब उन्होंने खुद इंस्टाग्राम पर वीडियो डाल कर बताया है कि वो जीवित हैं। यहाँ तक कि भारतीय मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि भी दे दी थी। पूनम पांडेय ने कहा कि वो जीवित हैं, लेकिन उन हजारों महिलाओं के बारे में वो दुर्भाग्य से ऐसा नहीं कह सकतीं जिन्होंने सर्वाइकल कैंसर की वजह से जीवन गँवा दिया।

पूनम पांडेय ने कहा, “ऐसा नहीं है कि सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित वो महिलाएँ कुछ नहीं कर सकती थीं, बल्कि उन्हें पता ही नहीं था कि क्या किया जाना चाहिए। मैं आपको यहाँ ये बताने आई हूँ कि बाकी कैंसर के उल्ट सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है। आपको सिर्फ ये करना है कि टेस्ट्स कराने हैं और HPV वैक्सीन लेना है।” साथ ही अभिनेत्री ने ‘Poonam Pandey Is Alive’ नामक वेक वेबसाइट का भी प्रचार कर के लॉगिन करने के लिए कहा।

इंस्टाग्राम पर पूनम पांडेय ने लिखा कि वो सबको ये बताने के लिए बाध्य हो रही हैं कि वो यहीं हैं, जीवित हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान की कमी के कारण कई महिलाओं की मौत हो गई जो सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित थीं। उन्होंने कहा कि हमारे पास ये सुनिश्चित करने के लिए समय है कि इससे किसी और की जान न जाए। पूनम पांडेय ने ये भी लिखा कि हमें जागरूकता फैला कर एक-दूसरे को सजग करना चाहिए। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम बायो में ‘www.poonampandeyisalive.com‘ वेबसाइट का लिंक भी डाला।

इस वीडियो में पूनम पांडेय ने ये भी कहा कि हम सबको मिल कर सर्वाइकल कैंसर को ही खात्मे की तरफ ले जाना चाहिए। उन्होंने जिस वेबसाइट का लिंक दिया है, उसमें ‘डेथ टू सर्वाइकल कैंसर’ लिखा हुआ है। साथ ही इसमें लिखा गया है कि एशिया में इस रोग से सबसे ज्यादा पीड़ित भारत में हैं और 99% मामलों को रोका जा सकता है। साथ ही संगीता नाम की एक महिला का इंटरव्यू भी है, जिसने सर्वाइकल कैंसर को मात दी। हालाँकि, कई लोग पूनम पांडेय के इस कदम की आलोचना भी कर रहे हैं।

‘मस्जिद में बुत रखने से बुतखाना नहीं बन जाती… आज कुत्तों का वक्त है’ – जहर उगल रहा था मुफ्ती सलमान, ऑपइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट पर FIR दर्ज

जूनागढ़ पुलिस ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुफ्ती सलमान अज़हरी और दो आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में जूनागढ़ बी डिविजन पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर मुफ्ती अज़हरी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। वीडियो में अजहरी कहता है, “अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है…कुछ देर की खामोशी है, फिर किनारा आएगा…आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

31 जनवरी 2024 को जूनागढ़ कोर्ट के पास नरसिंह विद्या मंदिर के मैदान में मुस्लिम समुदाय का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें मुफ्ती सलमान अज़हरी ने बहुत ही भड़काऊ भाषण दिया था। उस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। अब पुलिस ने इस मामले में 2 आयोजकों और मुफ्ती के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

एफआईआर में आयोजक मुहम्मद यूसुफ मालेक और अजीम हबीब ओडेदरा के साथ-साथ मुफ्ती सलमान अज़हरी को आरोपी बनाया गया है। तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153(बी), 505(2), 188 और 114 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण देने के साथ-साथ अनुमति के बिना देर तक कार्यक्रम जारी रखने पर उल्लंघन संबंधी धाराएँ जोड़ी गई हैं। इस मामले में फिलहाल जाँच चल रही है।

मुफ्ती सलमान अज़हरी के वीडियो में क्या-क्या

ऑपइंडिया ने सबसे पहले इस मामले की रिपोर्ट की। 20 सेकंड के वायरल वीडियो को सर्च करने पर हमें मुफ्ती सलमान अज़हरी का वो भाषण मिला, जो 53 मिनट का था। वायरल वीडियो इसी भाषण का एक छोटा सा हिस्सा है।

इस भाषण में मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही हैं। इस वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया है। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर है। यह कार्यक्रम गुजरात के जूनागढ़ में किया गया। कार्यक्रम 31 जनवरी को हुआ था जबकि वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया।

मुफ्ती सलमान अज़हरी अपने भाषण में कहता है – “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

अपने भाषण में मुफ्ती ने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न: PM मोदी बोले – राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में उनका प्रयास अद्वितीय, उनके साथ काम करना मेरा सौभाग्य

लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ सम्मान से नवाज़ा जाएगा। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिए ये घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उन्हें ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। पीएम मोदी ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता से बात कर के उन्हें इसके लिए बधाई भी दी। प्रधानमंत्री ने आडवाणी को हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक बताते हुए कहा कि भारत के विकास में उनका योगदान चिरस्मरणीय है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी के साथ अपनी 2 तस्वीरें पोस्ट करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “लालकृष्ण आडवाणी का जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू हुआ और उप-प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक पहुँचा। हमारे गृह एवं सूचना-प्रसारण मंत्री के रूप में भी उन्होंने छाप छोड़ी। संसद में उनके संबोधन हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतःदृष्टि से परिपूर्ण रहे।” लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के अध्यक्ष भी रहे हैं और उन्होंने ही राम मंदिर रथ यात्रा के जरिए आंदोलन में जान फूँकी थी।

लालकृष्ण आडवाणी द्वारा कई दशकों तक देश की सेवा किए जाने का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता उनकी पहचान रही, उन्होंने राजनीतिक शुचिता का एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया। पीएम ने कहा कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में उन्होंने अद्वितीय प्रयास किए। पीएम मोदी ने इसे एक भावुक क्षण करार दिया। लालकृष्ण आडवाणी के संपर्क में रह कर उनके साथ बातचीत करने, काम करने और सीखने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लिए सौभाग्य बताया।

96 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी उम्र और स्वास्थ्य के कारण अब सार्वजनिक जगहों पर नहीं दिखते हैं, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में भी आमंत्रण के बावजूद वो नहीं आ पाए थे। हालाँकि, उन्होंने बयान जारी कर के कार्यक्रम का स्वागत किया था। हाल ही में मोदी सरकार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘जननायक’ कहे जाने वाले दिवंगत नेता कर्पूरी ठाकुर को भी ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया है। नाई समाज से आने वाले कर्पूरी ठाकुर ने बिहार में पिछड़ों के उत्थान के लिए काम किया था।