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4 निकाह पर रोक, 18 साल से कम उम्र की मुस्लिम लड़कियों की भी नहीं होगी शादी: उत्तराखंड में आ गया UCC ड्राफ्ट, बोले CM धामी- विधानसभा में लाएँगे बिल

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत जस्टिस जस्टिस रंजना देसाई की अगुवाई में बनाई गई कमिटी ने ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया है। माना जा रहा है कि धामी की सरकार 6 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। इसके लिए सरकार ने 5 से 8 फरवरी तक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है।  

इस विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले शनिवार (3 फरवरी 2024) को होने वाली पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी। विधानसभा से मंजूरी दिए जाने के बाद इस विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

कमिटी द्वारा ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हम सभी लंबे समय से ड्राफ्ट का इंतजार कर रहे थे। आज हमें ड्राफ्ट मिल गया है। UCC कमिटी ने अपनी रिपोर्ट हमें सौंप दी है। अब हम इस मामले में आगे बढ़ेंगे। मसौदे का परीक्षण करेंगे और सभी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद इसे विधानसभा के दौरान रखेंगे। इस पर आगे चर्चा की जाएगी।”

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विभिन्न धर्मों के सिविल कानूनोें में एकरूपता आ जाएगी। महिलाओं, खास करके मुस्लिम समाज की महिलाओं को हिंदू महिलाओं की तरह अधिकार मिल जाएँगे। वहीं, राज्य में बहुविवाह पर रोक लगेगी। महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा एवं बच्चों को गोद लेने का भी अधिकार मिल सकता है। सभी धर्मों में लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होगी।

वर्तमान में मुस्लिम समाज शरिया पर आधारित पर्सनल लॉ के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिम पुरुषों को चार विवाह की इजाजत है। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम लड़कियों को भी लड़कों के बराबर अधिकार दिया जाएगा। इसके अलावा, मुस्लिम समुदाय में इद्दत और हलाला जैसी प्रथा पर प्रतिबंध लग सकता है। तलाक के मामले में शौहर और बीवी को बराबर अधिकार मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, समान नागरिक संहिता में सभी धर्म के लोगों को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी किया जाएगा। इसमें महिला और पुरुष की पूरी जानकारी होगी। ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को अपने माता-पिता को भी जानकारी देनी होगी। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य किया जा सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन विवाह अमान्य माने जाएँगे।

समान नागरिक संहिता में नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु की स्थिति में पत्नी को मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही बेटे के बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी पर होगी। अगर पति की मृत्यु के बाद पत्नी दोबारा शादी करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा माता-पिता को दिया जाएगा। पत्नी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी पति पर होगी।

इसमें अनाथ बच्चों के लिए संरक्षण की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा। पति-पत्नी के बीच विवाद की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उसके दादा-दादी को दिए जाने का प्रावधान किया जा सकता है। बच्चों की संख्या निर्धारित करने जैसी व्यवस्था भी UCC में की जा सकती है। समान नागरिक संहिता में इन प्रावधानों से जनजातीय समुदाय के लोगों को छूट मिल सकती है।

बता दें कि विधानसभा चुनाव 2022 में जीत मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। इसका ड्राफ्ट बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने समिति का कार्यकाल तीन बार बढ़ाया था। इस दौरान समिति ने समान नागरिक संहिता पर लोगों से ऑनलाइन और ऑफलाइन सुझाव भी माँगे थे।

इसके अलावा, कमिटी ने उपसमिति बनाकर हर समाज के विशिष्ट लोगों, समाजसेवियों, धार्मिक नेताओं और जागरूक नागरिकों के साथ चर्चा की और सुझाव लिए। कमिटी ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का भी दौरान किया था। UCC पर कमिटी को ढाई लाख से अधिक सुझाव मिले थे। इसके बाद समिति ने केंद्रीय विधि आयोग के साथ भी समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा की थी।

पूनम पांडे का शौहर था सैम अहमद, शराब पीकर दिन-रात मारता था… अस्पताल में होना पड़ा था एडमिट: सर्वाइकल कैंसर से मौत के बाद चर्चा में प्रताड़ना

पूनम पांडे जीवित हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है। वह और उनकी टीम ने अपनी मौत का नाटक रचा था। इससे संबंधित रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। पुरानी रिपोर्ट (उनकी टीम द्वारा झूठ पर आधारित) नीचे है।

फिल्म अभिनेत्री पूनम पांडे का आज 2 फरवरी 2024 को सर्वाइकल कैंसर निधन हो गया। मात्र 32 साल की उम्र में दुनिया छोड़ने वाली पूनम पांडे पिछले कुछ सालों से काफी विवादों से घिरी थीं। उनका शादी-शुदा जीवन में तो दिक्कत शादी के 11 दिन बाद से ही आने लगी थी। बाद में उन्होंने लॉक अप में जाकर खुलासा भी किया था कि उनका शौहर उन्हें सुबह से शाम तक मारता था। जानने वाली बात ये है कि एक एब्यूसिव रिलेशन (जहाँ महिला परेशान होकर गर्भनिरोधक पिल्स लेने लगे) भी इस बीमारी का एक कारण बनता है। यह शोध में भी साबित हुआ है।

सैम अहमद और पूनम पांडे

सैम अहमद से पूनम पांडे ने गुपचुप ढंग से सितंबर 2020 में शादी की थी और 22 सितंबर को खबर आई कि घरेलू हिंसा मामले में गोवा पुलिस ने सैम अहमद को गिरफ्तार किया है। पूनम ने आरोप लगाया था कि सैम ने उन्हें मारा और फिर अंजाम भुगतने की भी दी। साल 2022 में खबर आई कि उन्होंने सैम से तलाक ले लिया है और 5 साल तक किसी के साथ रिश्ते में नहीं रहना चाहतीं थीं। उन्होंने लॉक अप में आने के वक्त यह खुलासा किया था कि उनका शौहर उन्हें सुबह से शाम तक मारता था, उन्हें कंट्रोल करता था, अकेले रहने की इजाजत नहीं देता था, फोन भी इस्तेमाल करने पर गुस्सा होता था।

इस घरेलू हिंसा के कारण वो ब्रेन हैमरेज का भी शिकार हुईं थीं। उन्होंने लॉक अप में करणवीर से बात करते हुए कहा था, “सैम ने मेरे साथ बस 1 बार मारपीट नहीं की, मेरी ब्रेन इंजरी (अपने सिर के बाएँ तरफ इशारा करते हुए) अभी तक ठीक नहीं हुई है, क्योंकि वो मुझे उसी जगह पर बार-बार पीटते थे। मैं लोगों के सामने मेकअप, ग्लॉस लगाती थी और हँसती थी। मैं उनके सामने काफी कूल बनती थी।”

पायरल रोहतगी को उन्होंने बताया था कि उन्हें कभी नहीं पता चला कि सैम उनको क्यों मारता था। इस दौरान उन्होंने सैम अहमद की शराब पीने की गंदी लत का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, “अगर कोई इंसान सुबह 10 बजे से शराब पीना शुरू कर देता है और देर रात तक पीता रहता है और रात में आपको बचाने के लिए कोई नहीं है तो आप क्या कर सकते हैं। स्टाफ तक डर कर भाग जाता था।”

पूनम पांडे, सर्वाइकल कैंसर और कारण

पूनम पांडे को कुछ समय पहले ही पता चला था कि वो सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हैं। लेकिन उनके अपने एक्स-हस्बैंड सैम अहमद से बुरे रिश्ते पहले से चर्चा में थे। ऐसे में उनके निधन के बाद उन्हें शादीशुदा जीवन में दी गई प्रताड़ना चर्चा में हैं। दरअसल, खराब और प्रताड़ित वैवाहिक जीवन के कारण महिलाओं को बहुत कुछ झेलना पड़ता है। इस कारण उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ता है।

वैवाहिक जीवन जब सामान्य के बजाय प्रताड़ित हो तो महिलाएँ जबरन गर्भपात, गर्भनिरोधक गोलियाँ या मॉर्निंग आफ्टर पिल्स (सामान्य गर्भनिरोधक गोलियों से अलग, ज्यादा हानिकारक) का शिकार होती हैं, आदत पड़ जाती है। इससे उनके शरीर पर असर पड़ता है। यह सर्वाइकल कैंसर का कारण भी बनता है।

इंग्लैंड की कैंसर रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकी रिसर्च संस्था गटमाशेर का शोध भी सर्वाइकल कैंसर को बढ़ाने की एक वजह गर्भनिरोधक गोलियों को मानता है। इन शोधों से पता चलता है कि अगर किसी ने लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियाँ खाई हैं, तो उसे सर्वाइकल कैंसर होने के चांस ज्यादा हैं।

पूर्व IAS अधिकारी हर्ष मंदर के घर और ऑफिस पर CBI की रेड, एनजीओ में विदेशी फंडिंग से जुड़ा है मामला: यूपीए सरकार में NAC के थे सदस्य

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को FCRA उल्लंघन के मामले में IAS से कथित सामाजिक कार्यकर्ता बने हर्ष मंदर के आवास और कार्यालय पर छापेमारी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले में कई लोगों से पूछताछ भी की है। हर्ष मंदर यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य भी थे।

दरअसल, सितंबर 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हर्ष मंदर के एनजीओ ‘अमन बिरादरी’ से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच शुरू की थी। उस दौरान भी हर्ष मंदर के आवास पर छापा मारा गया था। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय की शिकायत के बाद विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन के लिए अमन बिरादरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

नियम के मुताबिक, विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले सभी एनजीओ को गृह मंत्रालय के एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। एनजीओ की वेबसाइट के अनुसार, अमन बिरादरी एक ‘जमीनी स्तर का आंदोलन’ है जो एक धर्मनिरपेक्ष, शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और दयालु दुनिया बनाने के लिए समर्पित है।

वेबसाइट का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गाँव और जिला स्तर पर समुदाय-आधारित संगठनों की स्थापना करना था, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि और धर्मों के युवा एवं महिलाएँ शामिल हों। इसमें आगे कहा गया है कि इन संगठनों का लक्ष्य विभिन्न धर्मों, जातियों और भाषाई समूहों के व्यक्तियों के बीच सहिष्णुता, भाईचारा, सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना है।

गृह मंत्रालय ने साल 2023 में एफसीआरए उल्लंघन को लेकर हर्ष मंदर की एनजीओ के खिलाफ सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। हर्ष मंदर खुद को वामपंथी ‘कार्यकर्ता’ बताते हैं। भारत की न्यायपालिका को बदनाम करने और देश के खिलाफ मुस्लिम भीड़ को उकसाने का उनका इतिहास रहा है।

हर्ष मंदर का मार्च 2020 में भारत और देश की न्यायपालिका के खिलाफ मुस्लिम भीड़ को उकसाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद वे विवादों में आ गए थे। इस वीडियो में मंदर ने कहा था कि भारत के मामलों से संबंधित निर्णय सुप्रीम कोर्ट या संसद द्वारा नहीं, बल्कि सड़कों पर दिए जाएँगे।

इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने हर्ष मंदर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इस हलफनामे में हर्ष मंदर पर न केवल हिंसा भड़काने, बल्कि न्यायपालिका को बदनाम करने का आरोप लगाया था। हर्ष मंदर के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की भी माँग की गई थी।

कौन हैं हर्ष मंदर

हर्ष मंदर ने लगभग दो दशकों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में काम किया था। साल 2002 में गुजरात में उन्होंने ‘राज्य प्रायोजित दंगों’ का आरोप लगाकर सेवा छोड़ दी थी। आईएएस छोड़ने के बाद से हर्ष मंदर ने ‘सिविल सोसायटी’ संगठनों में काफी रंगीन जीवन बिताया। उन्होंने अपने कई योगदानों में से एक, उन्होंने एक्शनएड इंडिया के कंट्री डायरेक्टर के रूप में काम किया है।

आगे चलकर हर्ष मंदिर कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए शासन में महत्वपूर्ण भूमिका में आ गए। यूपीए शासन के दौरान तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) की स्थापना की गई थी। हर्ष मंदर इसके सदस्य थे। इस दौरान अपनी सेवा के लिए सबसे प्रसिद्ध हुए। NAC ने ही हिंदू विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया था।

दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले अक्टूबर 2022 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने FCRA कानूनों के उल्लंघन के लिए कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी की अध्यक्षता वाले दो गैर-सरकारी संगठनों- राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) और राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट (RGCT) का एफसीआरए पंजीकरण रद्द कर दिया था।

हर्ष मंदर द्वारा न्यायिक हस्तक्षेप

हर्ष मंदर लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी इशरत जहाँ के समर्थक थे। इशरत को गुजरात में अपराध शाखा के अधिकारियों ने तीन अन्य लोगों के साथ एक मुठभेड़ में मार गिराया था। हर्ष मंदर उन व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने मुंबई हमले के आतंकवादी याकूब मेमन के लिए दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। वह उन 203 व्यक्तियों में से थे जिन्होंने पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब के लिए दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे।

इतना ही नहीं, हर्ष मंदर ने संसद पर आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरु के लिए भी दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। बाद में अजफल को फाँसी दे दी गई थी। मंदर ने कई मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप भी किए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को डिटेंशन की स्थिति और असम से अवैध प्रवासियों के निर्वासन से संबंधित मामले की सुनवाई से अलग करने की माँग की थी।

हर्ष मंदर उन 40 ‘कार्यकर्ताओं’ में से एक थे, जिन्होंने अयोध्या फैसले के खिलाफ अदालत में समीक्षा याचिका दायर की थी। सुप्रीम के इस फैसले से ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ था। वह उस मंडली का भी हिस्सा थे, जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ याचिका दायर की थी। हर्ष मंदर ने यह सब कुछ विदेशी वित्त पोषित एनजीओ से जुड़े रहते हुए किया।

CAA को लेकर हुए बवाल में हर्ष मंदर की भूमिका

हर्ष मंदर ने अपने संगठन ‘कारवां-ए-मोहब्बत’ के साथ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में हुई हिंसा पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें वहाँ के छात्रों को सभी दोषों से मुक्त कर दिया गया था और उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाफ कई झूठ फैलाए गए थे। बाद में यह पूरी रिपोर्ट ही झूठी निकली।

हर्ष मंदर ने CAB पारित होने पर खुद को मुस्लिम के रूप में पंजीकृत करने का वादा किया था, लेकिन ऑपइंडिया अभी तक इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है कि CAB के CAA बनने के बाद उन्होंने अपना वादा पूरा किया है या नहीं। उन्होंने अतीत में एनआरसी और असम में विदेशी न्यायाधिकरण के बारे में भी बड़ा झूठ फैलाया है।

इससे पहले हर्ष मंदर उस मंडली का हिस्सा थे, जिसने CAB के खिलाफ पत्र लिखा था। हर्ष मंदर और उनका एनजीओ ‘कारवां-ए-मोहब्बत’ शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन में सक्रिय थे। CAA विरोधी प्रदर्शन का मास्टरमाइंड कुख्यात कट्टरपंथी शरजील इमाम था। दिलचस्प बात यह है कि हर्ष मंदर के कारवां-ए-मोहब्बत ने लोगों से कुख्यात शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का भी आग्रह किया था।

‘आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा आएगा’: मुफ्ती सलमान ने उगला जहर, कहा- बुत रखने से मस्जिद नहीं बनेगा बुतखाना…

ज्ञानवापी में पूजा पाठ शुरू होने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने जहर उगलना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सलमान अजहरी नाम के एक मुफ्ती का भाषण वायरल हुआ है। ये भाषण जूनागढ़ के एक कार्यक्रम का है। वीडियो में अजहरी कहता है, “अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है…कुछ देर की खामोशी है, फिर किनारा आएगा…आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

22 सेकेंड का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग इसे शेयर करके कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। ऑपइंडिया ने जब इस वीडियो की पड़ताल की तो हमें भाषण का 53 मिनट का असली वीडियो मिला।

इसमें मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही हुई हैं। इस वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया है। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर है, जबकि जगह जूनागढ़, गुजरात है। कार्यक्रम 31 जनवरी को हुआ था और वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया।

भाषण की शुरुआत में अजहरी जूनागढ़ के इतिहास का जिक्र कर कहता है, “जूनागढ़ के लोग जल्दी किसी के हाथ नहीं लगे। उन्हें अंदर लाने के लिए कई प्रयास करने पड़े। जैसे तब आप जल्दी ही किसी के हाथ नहीं आए, मैं चाहता हूँ कि आज आप किसी और की पट्टा अपने गले में न पहनें, हमारे में तो सिर्फ ताजदार-ए-मदीना की ही गुलामी करना कहा गया है।”

इसके बाद कार्यक्रम में “गुलाम हैं गुलाम हैं, रसूल के गुलाम हैं” के नारे भी सुनाई दिए। वीडियो में उसने कहा, “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

आगे उसने मुसलमानों को भड़काने के लिए यहूदी व्यक्ति का हवाला दिया। उसने कहा कि समय-समय पर मुसलमानों पर अत्याचार हुए लेकिन फिर वह हरियाली की तरह खड़े हो गए। उसने कहा कि मुसलमानों को कोई नेता एकजुट नहीं करता बल्कि ये सिर्फ मुहम्मद के नाम पर इकट्ठा होते हैं। इन्हें सिर्फ ताजदार-ए-मदीना ही इकट्ठा कर सकता है।

आगे वह यह भी बताता है कि फिलिस्तीन, ईरान, बर्मा में हर जगह मुस्लिमों को मारा जा रहा है। लेकिन मुसलमानों के मरने से इस्लाम नहीं खत्म होगा।

अपने भाषण में उसने कहा मुसलमानों को खुद उठना होगा कोई नेता-विपक्षी दल उनके लिए नहीं आएगा। उसने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा…आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

इसके बाद फिर लब्बैक या रसूल अल्लाह के नारे लगवाए जाते हैं।

पुलिस ने लिया संज्ञान

बता दें कि इस मामले को लेकर ऑपइंडिया ने जूनागढ़ पुलिस से संपर्क किया तो पता चला कि पुलिस ने वीडियो पर संज्ञान ले लिया है और बयान भी जारी करेगी। हालाँकि, बाद में पुनः प्रयास करने पर कनेक्शन स्थापित नहीं हो सका। लेकिन, जूनागढ़ के शीर्ष पुलिस अधिकारी डीएसपी हितेश ढांडालिया ने दिव्य भास्कर से खास बातचीत में कहा, “हमने पूरा भाषण प्राप्त कर लिया है और इसे कानूनी विशेषज्ञों की राय के लिए भेज दिया है। उग्रता दिखाने पर कार्रवाई की जाएगी।”

हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका, ED गिरफ्तारी को दी थी चुनौती: शीर्ष अदालत ने कहा- सीधे यहाँ क्यों आए, हाई कोर्ट जाएँ

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्हें पहले हाई कोर्ट जाने को कहा है। सोरेन ने याचिका में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा खुद की गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।

जाँच एजेंसी ने 31 जनवरी 2024 की रात सोरेन को लैंड स्कैम में गिरफ्तार किया था। उससे पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। शुक्रवार को ही उनकी जगह चंपई सोरेन राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर पर शपथ लेने जा रहे हैं।

नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए पूछा कि हाई कोर्ट जाने की बजाए वे सीधे शीर्ष अदालत में क्यों आ गए? जस्टिस संजीव खन्ना, एमएम सुंद्रेश और बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने कहा कि इस तरह यदि एक व्यक्ति को अनुमति दी गई तो सभी लोगों को देनी पड़ेगी।

हेमंत सोरेन के वकील कपिल सिब्बल ने बेंच के सामने उनके मुख्यमंत्री रहने की दलील दी। इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा कि अदालत हर किसी के लिए है। यदि इस तरह एक व्यक्ति को रियायत दी गई तो वही रियायत सभी को देनी होगी। इसके बाद बेंच ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा।

हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी करीब सात घंटे की लंबी पूछताछ के बाद बुधवार देर रात को हुई थी। इसके अगले दिन ईडी ने उन्हें कोर्ट में पेश कर 10 दिनों की रिमांड माँगी थी। एजेंसी ने पीएमएलए कोर्ट में बताया था कि सोरेन से अभी कई जानकारियाँ नहीं मिल पाई है। लिहाजा पूछताछ के लिए उन्हें रिमांड पर लेना जरूरी है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दूसरी ओर हाई कोर्ट ने भी तकनीकी आधार पर सोरेन को राहत देने से इनकार किया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने की बात करते हुए हाई कोर्ट से याचिका वापस ले ली थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि यह मामला सेना की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में 2022 में रांची नगर निगम के टैक्स कलेक्टर दिलीप शर्मा ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद जब मामले की जाँच शुरू हुई तो इसकी आँच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुँची। इस मामले में ईडी छापेमारी की कई कार्रवाई कर चुकी है। साथ ही सोरेन से पहले कई अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।

पूनम पांडे का निधन, सर्वाइकल कैंसर से हुई मौत, ऑफिशिअल इंस्टाग्राम पर दी जानकारी: फैंस को नहीं हो रहा विश्वास

पूनम पांडे जीवित हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है। वह और उनकी टीम ने अपनी मौत का नाटक रचा था। इससे संबंधित रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। पुरानी रिपोर्ट (उनकी टीम द्वारा झूठ पर आधारित) नीचे है।

बॉलीवुड हिरोइन और मॉडल पूनम पांडे का निधन हो गया है। उन्हें सर्वाइकल कैंसर था। उनके ऑफिशिअल इंस्टाग्राम अकाउंट पर इसकी जानकारी दी गई है। पूनम पांडे की उम्र सिर्फ 32 साल थी। इतनी कम उम्र में मौत से उनके फैंस सदमे में हैं।

पूनम पांडे की मौत की खबर को लेकर इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा गया: “यह सुबह हमारे लिए दुखदायी है। आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि हमने अपनी प्यारी पूनम को सर्वाइकल कैंसर के कारण खो दिया है। हर व्यक्ति जो कभी भी उनसे मिला, उसे उनका प्रेम मिला। दुख के इस समय में, हम अपनी गोपनीयता का अनुरोध करते हैं। हम उनके द्वारा शेयर की गई हर बात के लिए उन्हें प्यार से याद करेंगे।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार पूनम पांडे के मैनेजर ने उनकी मौत की जानकारी दी है। मैनेजेर ने बताया कि 1 फरवरी की रात को सर्वाइकल कैंसर के कारण पूनम पांडे की मौत हो गई। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूनम पांडे का निधन उनके पैतृक शहर कानपुर में हुआ है।

पूनम पांडे के निधन वाले पोस्ट पर उनके फैंस को भरोसा नहीं हो रहा है। कोई लिख रहा कि काश यह खबर झूठ हो, कोई कह रहा कि पूनम शायद किसी और का नाम होगा।

अश्लील वीडियो देखता था बेटा, लड़कियों को छेड़ता था… पिता विजय बट्टू ने कोल्डड्रिंक में जहर देकर मार डाला, महाराष्ट्र पुलिस ने पकड़ा

महाराष्ट्र में एक शख्स ने अपने ही 14 साल के बेटे को जहर देकर मार दिया क्योंकि बेटे को अश्लील वीडियोज देखने की लत लगी हुई थी। पिता का यह भी कहना है कि बेटा, स्कूल में बच्चियों को परेशान करता था, उन्हें छेड़ता था और इसकी वजह से प्रिंसिपल उन्हें कई बार तलब कर चुकी थी।

विजय बट्टू नाम के इस शख्स का कहना है कि वो अपने बेटे की गंदी आदतों से परेशान था। इसलिए उसने बेटे को कोल्डड्रिंक में जहर पिलाकर मार डाला। घटना महाराष्ट्र के सोलापुर की है।

पुलिस ने बताया कि उन्हें जनवरी माह में एक लड़के के लापता होने की सूचना मिली थी। उसके बाद उन्हें लड़के का शव सोलापुर में मिला। जब उन्होंने अपनी जाँच की तो पता चला कि लड़के को जहर देकर मारा गया है।

पुलिस ने लापता लड़के की रिपोर्ट की जगह इस केस को हत्या का मामला करके दर्ज किया। धीरे-धीरे पुलिस ने परिवार से पूछताछ की और उन्हें शक होना शुरू हुआ। पुलिस ने पिता को अपने कॉन्फिडेंस में लेकर जब पूछना शुरू किया तो पता चला कि उसी ने बेटे को जहर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिता ने बताया कि बेटा पढ़ाई नहीं करता था, लड़कियों को छेड़ता था, अश्लील वीडियोज देखता था। परिवार ने कई बार उसे समझाया था कि वो अपने आप में सुधार कर ले लेकिन वो घरवालों की एक नहीं सुनता था। उसके बर्ताव के कारण स्कूल में कई बार परिवार को बुलाया भी जाता था।

इन्हीं सबकी वजह से पिता को अपने बेटे से परेशानी होनी शुरू हुई। 13 जनवरी को विजय अपने बेटे विशाल को अपने साथ बाइक पर बैठाकर ले गए। वहाँ उसे थम्स अप में सोडियम नाइट्रेट और जहरीला पाउडर मिलाकर पिला दिया, फिर घर आ गए। बाद में शाम को विजय ने बेटे की तलाश करने का नाटक किया। पत्नी के साथ जाकर उसके गायब होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने विजय द्वारा जुर्म कबूले जाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मीडिया में ये खबर आने के बाद लोग हैरान हैं कि आखिर एक पिता ऐसा कैसे कर सकता है।

₹280955 करोड़ का डिफेंस डील, पर ‘द वायर’ ने लिखा- भारत को ड्रोन्स देने से मना किया: अमेरिका ने 24 घंटे में खोल दी वामपंथी पोर्टल के ‘झूठ’ की पोल

वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल और फेक न्यूज फैलाने वाले ‘द वायर’ ने 31 जनवरी 2024 को दावा किया कि अमेरिका ने भारत को बेचे जाने वाले ड्रोन्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। आर्टिकल लिखने वाला और कोई नहीं बल्कि अजय शुक्ला है, जिसे रक्षा मामलों से जुड़े कई प्रोपगेंडे फैलाने के लिए जाना जाता है। इस बार भी उसने कुछ ऐसा ही किया जिसके कारण फिर उसकी और द वायर की अमेरिका तक में फजीहत हुई है।

लेख में दावा किया गया कि अमेरिकी सरकार ने भारत को 31 प्रीडेटर ड्रोन की बिक्री रोक दी। लेख के अनुसार अमेरिकी सरकार ने “MQ-9A सी गार्जियन और स्काई गार्जियन ड्रोन की डिलीवरी को तब तक रोक दिया है जब तक कि भारत सरकार खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या के मामले में जाँच में सहयोग नहीं करती।”

अजय शुक्ला ने 31 जनवरी को जहाँ अपने लेख में वाशिंगटन में बड़े पद पर बैठे सूत्र के हवाले से इस खबर में यह भी दावा किया कि अमेरिका ने भारतीय नौसेना को छह और बोइंग पी-8आई पोसीडॉन विमान बेचने के प्रस्ताव को भी रोक दिया है। वहीं एक दिन बाद हिंदुस्तान टाइम्स ने भी इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की और बताया कि अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने भारत को ड्रोन बेचने की मंजूरी दे दी है।

एचटी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रीडेटर ड्रोन निर्माता जनरल एटॉमिक्स को सूचित किया कि अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने भारत को 31 एमक्यू9बी ड्रोन बिक्री की ‘स्तरीय समीक्षा’ को मंजूरी दे दी है। आगे रिपोर्ट आधिकारिक कॉन्ग्रेस को प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल एटॉमिक्स ने इसकी जानकारी भारत सरकार को दी।

अब हिंदुस्तान की रिपोर्ट को देखें तो द वायर की पूरी खबर फेक है क्योंकि हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार तो अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने तो इस डील की मंजूरी दे दी है। एचटी के अलावा पत्रकार शिव अरूर ने भी एक डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्पोरेशन एजेंसी की न्यूज रिलीज को शेयर किया है। इस रिलीज ने द वायर के फर्जी पोल खोल दी। इसमें साफ साफ लिखा गया कि अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने बिक्री को अप्रूव कर दिया है। ये डील 3.99 बिलियन डॉलर यानी 280955 करोड़ रुपए के लगभग की है।

अब चूँकि इस मामले को लेकर दो-दो तरह की रिपोर्ट्स सामने आ रही थी। ऐसे में अमेरिकी विदेश विभाग की नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह मामला उठाया गया। इस दौरान प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने स्पष्ट किया कि उन रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है कि इस सौदे को अमेरिकी सरकार ने रोक दिया है। जब एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि द वायर की रिपोर्ट सच है या नकली, तो प्रवक्ता ने हँसते हुए कहा – “I love, nice try.”

इस दौरान पत्रकार ने पूछा, “एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पन्नू की हत्या से जुड़े मामले की जाँच होने तक संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत को 3 बिलियन डॉलर की ड्रोन बिक्री से जुड़ा नुकसान हुआ? क्या यह सच है या सिर्फ एक फर्जी खबर है?” इस पर मैथ्यू मिलर ने कहा कि सौदे के संबंध में ऑफिसियल सूचना कब जारी होगी, इस पर उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी है। उन्होंने कहा कि हथियारों सौदों से जुड़े फैसले अमेरिकी कॉन्ग्रेस लेती है।

बता दें कि इस फर्जी खबर के फैलने की शुरुआत जिस अजय शुक्ला के लेख से हुई, उसपर पहले भी फेक न्यूज फैलाने के न सिर्फ आरोप लगे हैं, बल्कि कई मामलों में वो फेक न्यूज फैलाता भी पकड़ा जा चुका है। उसने भारत-चीन के सैनिकों के बीच झड़प को लेकर भी फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की थी, जिसका ऑपइंडिया ने पर्दाफाश किया था। उस पर इटली की महिला पत्रकार ने भी गंभीर आरोप लगाए थे।

ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है, उसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

ED ने हेमंत सोरेन को किया गिरफ्तार, विधायकों को टूट से बचाने के लिए JMM नेता चंपई सोरेन चले हैदराबाद: राँची में भाजपा नेताओं की बैठक

झारखंड में 1 फरवरी 2024 का दिन राजनीतिक रूप से काफी उथल-पुथल भरा रहा। हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन घोटाले में गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया, जहाँ उन्हें ईडी की हिरासत में भेज दिया गया। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री पद से हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) विधायक दल के नेता चंपई सोरेन ने सरकार बनाने का दावा पेश को लेकर राज्यपाल से मुलाकात की।

इस मुलाकात के बाद हेमंत के उत्तराधिकारी के रूप में चुने गए चंपई सोरेन समर्थक विधायकों के साथ हैदराबाद रवाना होने के लिए एयरपोर्ट पहुँचे, लेकिन कोहरे के कारण उनकी चार्टर्ड फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी और यात्रा बीच में ही रुक गई। खबर लिखे जाने तक उनकी उड़ान के रवाना होने की खबर नहीं थी।

एयरपोर्ट पर अटके चंपई और साथी विधायक

कहा जा रहा है कि विधायकों को टूट से बचाने के लिए चंपई सोरेन अपने साथी विधायकों को लेकर हैदराबाद रवाना होने के लिए राँची एयरपोर्ट पर गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खराब मौसम की वजह से उनकी चार्टर्ड प्लेन उड़ान नहीं भर पाई। बताया जा रहा है कि राँची एयरपोर्ट पर दो प्राइवेट प्लेन हैं। वहीं, हैदराबाद में दो बसें इन विधायकों का इंतजार कर रही हैं। इन विधायकों में जेएमएम और कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायक शामिल हैं।

चंपई सोरेन ने की राज्यपाल से मुलाकात

इससे पहले, जेएमएम और गठबंधन के विधायक दल के नए चुने गए नेता चंपई सोरेन ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। इस दौरान आलमगीर आलम, प्रदीप यादव, सत्यानंद भोक्ता और विनोद सिंह मौजूद रहे। राज्यपाल ने ही इन पाँच नेताओं को मिलने का वक्त दिया था। झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात के बाद झामुमो विधायक दल के नेता चंपई सोरेन ने कहा, “हमने राज्यपाल से माँग की है कि सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। उन्होंने (राज्यपाल) कहा कि प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी…।”

इससे पहले, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें सभी 43 विधायक दिख रहे हैं। ये वही 43 विधायक हैं जिन्होंने चंपई सोरेन को समर्थन दिया है।

हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी झारखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। झारखंड में राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल है। बता दें कि राज्य की प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को लगभग डेढ़ बजे अपने विधायकों की बैठक बुलाई है।

3000 नारी सेना संग रानी जयराज कुमारी ने मुगलों को चटाई धूल, शुरू करवाई थी रामजन्मभूमि पर पूजा: जहाँ पति और भाई ने पाई वीरगति, वहीं हुईं बलिदान

अयोध्या में 500 साल तक चले रक्तरंजित संघर्ष के बाद आखिरकार 22 जनवरी 2024 को भगवान राम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा उनके जन्मभूमि पर विधि-विधान से हो गई। इस अवसर पर देश और दुनिया भर के हिन्दुओं ने ना सिर्फ दीपावली मनाई, बल्कि उन तमाम रामभक्तों को भी याद किया जिन्होंने मुगल से लेकर मुलायम सिंह यादव के काल के बीच खुद को राम के नाम पर बलिदान कर दिया।

उन अनगिनत ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों में तमाम नारी शक्तियाँ भी हैं, जिन्हें वामपंथी कलमकारों ने साजिशन इतिहास के पन्नों से विस्मृत कर दिया। उन्हीं नारी शक्तियों में एक थीं रानी जयराज कँवर (जयराज कुमारी) और उनके साथ लड़कर वीरगति पाईं 3 हजार से अधिक महिलाओं की सेना। ऑपइंडिया ने रानी जयराज कुमारी के हंसवर स्थित महल पहुँचकर इतिहास और वर्तमान की जानकारी जुटाई।

राम मंदिर के लिए पति, भाई, देवर ने दिया था बलिदान

उत्तर प्रदेश के जिला अम्बेडकरनगर के हंसवर राजघराने की रानी जयराज कँवर के पति राजा रणविजय सिंह मुगल आक्रांता बाबर की फ़ौज से लड़कर रामजन्मभूमि पर वीरगति पा गए थे। इसी युद्ध में रानी के भाई एवं गोरखपुर के पास स्थित जयराज नगर के राजकुमार वीरभानु प्रताप सिंह भी बलिदान हुए थे। इसके साथ ही रानी जयराज कँवर के देवर और उनके के युवा भी राम मंदिर की रक्षा के लिए सन 1526-27 में वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

अपने पति राजा रणविजय सिंह और प्रजा के बलिदानियों के अंतिम संस्कार के बाद रानी जयराज कुमारी ने अपने साथ 3,000 नारियों की सेना लेकर रणक्षेत्र में कूद पड़ीं और रामजन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए आक्रमण कर दिया था। हमने अपनी पिछली रिपोर्ट में इस युद्ध के बारे में विस्तार से बताया था। साथ ही यह भी बताया था कि किस प्रकार से अभी हंसवर का ऐतिहासिक राजमहल जर्जर हालत में है।

बचपन से ही थीं युद्ध कौशल में पारंगत

अम्बेडकरनगर के इतिहासकार और हंसवर राजघराने से जुड़े बलराम मिश्र ऑपइंडिया को बताते हैं कि रानी जयराज कुमारी बचपन से ही युद्ध कला में निपुण थीं। उन्होंने अपने मायके जयराज नगर में घुड़सवारी और तलवारबाजी जैसी युद्ध कलाएँ सीखी थीं। हंसवर के राजा रणविजय सिंह से शादी होने के बाद भी रानी जयराज कँवर ने अपने युद्ध कौशल की प्रैक्टिस नहीं छोड़ी थी।

रानी जयराज कुमारी के बारे में बलराम मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने अपनी एक खास सेना बनाई थी, जो राजा की नियमित फ़ौज से अलग थी। लगभग 3 हजार की संख्या वाली इस सेना में सिर्फ महिलाएँ थीं। हंसवर राज्य की ये महिलाएँ सभी जातियों से थीं। इन्हें बराबर का सम्मान मिलता था।

महल के बाहर इसी हिस्से में दी जाती थी महिला सैनिकों को युद्ध की ट्रेनिंग

महिला सैनिकों की ट्रेनिंग आदि की जिम्मेदारी खुद रानी जयराज कुमारी सँभालती थीं। कुछ ही समय में ये सभी महिलाएँ युद्ध कला में प्रवीण हो गईं। इन महिलाओं के परिवार में बच्चों की शिक्षा-दीक्षा आदि भार राजपरिवार स्वयं उठाता था और इस पर विशेष ध्यान देता था।

डाकुओं के गिरोह को बाँधकर नगर में लाईं

इतिहास की एक घटना का जिक्र करते हुए बलराम मिश्र बताते हैं कि एक समय हंसवर राज्य के बाहरी हिस्से में कई डाकू सक्रिय थे। वो न सिर्फ घरों में लूटपाट करते, बल्कि लोगों की हत्या भी कर देते थे। राज्य की नियमित सेना काफी कोशिशों के बाद भी उनको पकड़ नहीं पा रही थी, क्योंकि डकैती डालने के बाद सभी डाकू नदी पार करके दूसरे राज्य की सीमा में घुस जाते थे।

ऐसे में इन डाकुओं को पकड़ने का जिम्मा खुद रानी ने अपनी सेना के साथ उठाया था। डाकुओं की तलाश में रानी जयराज कुमारी कई दिनों तक अपनी नारी सेना की चुनिंदा सैनिकों के साथ वेश बदलकर सीमाओं पर घूमती रहीं। वो नदी के तट पर ही छिपकर रूकती थीं। आखिरकार एक दिन उनकी तलाश पूरी हुई।

एक दिन डाकुओं के गिरोह ने वेश बदली हुई रानी जयराज और उनकी सैनिकों को देखा तो उन्हें महिला समझकर उन पर हमला कर दिया। आमने-सामने के इस युद्ध में रानी जयराज कुमारी और उनकी सैनिक भारी पड़ीं और कई डाकुओं को मौत के घाट उतार दिया। जो डाकू बच गए थे, उन्हें बाँधकर नगर में लाया गया और राज्य के कानून के हिसाब से दंडित किया गया था।

आज भी गूँजता है रानी का गुणगान

रानी जयराज कुमारी की वीरता का गुणगान आज भी हंसवर के कुछ विद्वान गाकर बताते हैं। उनकी वीरता को लेकर संस्कृत में लिखे तमाम किताबों में एक किताब में एक पंक्ति है, “जयराज कुमारी राख्या भार्या युद्ध विशारद:, पतिव्रताः तपोमूर्तिः सौंदर्यो देवताः नताः”। इस श्लोकों का हिंदी में अर्थ है कि राजा रणविजय की धर्मपत्नी रानी जयराज कुमारी युद्ध विशारद, तपस्वी, पतिव्रता और सुंदरता में देवांगनाओं को भी लज्जित करने वाली थीं। हालाँकि समय के साथ ये सभी श्रुतियाँ लोग भूलते जा रहे हैं।

महल के इसी हिस्से में रहती थीं रानी जयराज कुमारी

पति के बलिदान के बाद बुलाई थी राजसभा

रानी जयराज कुमारी के बारे में बलराम मिश्रा आगे बताते हैं कि जन्मभूमि पर बलिदान हुए अपने पति के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने राज्य के सभी मंत्रियों की एक सभा बुलवाई थी। इस सभा में उन्होंने मंत्रियों को राज्य चलाने और बचे पुरुष सैनिकों को वहाँ की सुरक्षा की जिम्मेदारी दे दी। इसी सभा में उन्होंने अपनी 3000 नारी सेना के साथ रामजन्मभूमि कब्जाए मुगलों पर हमले का एलान कर दिया।

बलराम मिश्र बताते हैं कि इस सभा में कई राज्यों के व्यापारी भी थे। उन्होंने धन देकर सहयोग किया। महाजनों द्वारा मिले दान को रानी ने मीर बाकी से युद्ध में बलिदान हुए परिवारों को आर्थिक मदद देने के लिए बाँट दिया। राजकोष में बचे धन का एक हिस्सा लेकर रानी जयराज कुमारी अपनी सेना के साथ अयोध्या कूच कर गईं। वो बलिदानी हुए अपने पति द्वारा छेड़े गए अभियान को पूरा करना चाहती थीं।

छापामार युद्ध करके मार डाले कई मुगल फौजी

बलराम मिश्र ने हमसे यह बातचीत रानी जयराज कुमारी के हंसवर स्थित महल के प्रांगण में की। उन्होंने हमें आगे बताया कि रानी के मुकाबले मुगलों के पास सैन्य बल और संसाधन कहीं अधिक थे। इसलिए रानी ने छापामार युद्ध का सहारा लिया। उन्होंने साल 1528 से 1530 तक अयोध्या की सीमा पर मौजूद आसपास के गाँवों में छिपकर कई मुगल फौजियों का वध किया था।

उनकी नारी सेना भी अलग-अलग टुकड़ियों में रहती थी। उन्हें अलग-अलग कामों में लगाया गया था। इन कामों में दुश्मन के रसद भंडार को जलाना, उनकी सैन्य स्थिति की जासूसी करना तथा मुगल सेना की मूवमेंट पर नजर रखने सहित कई काम शामिल थे। ये सभी महिला सैनिक दिन भर गाँव की कामकाजी महिलाओं के रूप में रहती थीं।

ये सैनिक महिलाएँ लकड़ियाँ बीनने और खेतों में काम करने के बहाने गाँवों में समय बिताती थीं और मौका देखकर मुगल सैनिकों पर हमला कर देती थीं। कई बार तो उन्हें भूखे भी रहना पड़ता था। हालाँकि, भूख पर भी विजय पाना उन सैनिकों को ट्रेनिंग में सिखाया गया था। इन 3 वर्षों में रानी जयराज ने अपने राज का हाल-चाल भले लेती रहीं पर वो लौटकर हंसवर नहीं गईं।

बाबर की मौत के बाद मुगल फ़ौज पर किया आक्रमण

इतिहासकार बलराम मिश्रा द्वारा रानी जयराज कुँवर के बारे में दी गई तमाम बातों की तश्दीक अयोध्या में रामजन्मभूमि पत्थर निर्माण कार्यशाला में विहिप द्वारा लगाया गया बोर्ड भी करता है। इसमें रानी जयराज कुमारी के बारे में संक्षेप में जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि रानी ने एक बार रामजन्मभूमि को मुगल सेना से छुड़ा भी लिया था।

अयोध्या में VHP द्वारा संचालित मंदिर निर्माण कार्यशाला पर लगा रानी जयराज कुमारी  का चित्र व उनका इतिहास

बलराम मिश्रा ने हमें आगे बताया कि 26 दिसंबर 1530 को आगरा में बाबर की मौत होने की घटना के बाद रानी जयराज कुमारी ने मुगल फ़ौज को थोड़ा कमजोर महसूस किया। हालाँकि बाबर के मरते ही हुमायूँ की ताजपोशी नए बादशाह के तौर पर हो गई थी। इस बदलाव को रानी ने रामजन्मभूमि पर कब्जा किए मुगलों पर हमले के लिए उचित समझा।

गर्भगृह को लिया कब्ज़े में और शुरू करवाई पूजा

आखिरकार रानी जयराज कुमारी ने जनवरी 1531 में रामजन्मभूमि पर अपनी नारी शक्ति और आसपास के कुछ रामभक्त ग्रामीणों के साथ हमला कर दिया। इस हमले के लिए मुगल फ़ौज तैयार नहीं थी और उसके कई फौजी मारे गए। रानी जयराज कुमारी का हमला इतना भीषण था कि मुगल फ़ौज को भारी नुकसान उठाते हुए रामजन्मभूमि से पीछे हटना पड़ा।

रानी ने अपने पति की तरह ही रामजन्मभूमि को फिर से अपने कब्ज़े में लिया। उन्होंने अयोध्या के संतों को बुलवाकर वहाँ फिर से पूजा-पाठ भी शुरू करवा दिया। पूजा-पाठ के लिए गर्भगृह पर एक अस्थाई छोटा-सा मंदिर भी बनवा दिया। बड़े मंदिर का निर्माण करने लायक समय रानी जयराज कुमारी के पास नहीं था, क्योंकि उन्हें पता था कि मुगल फ़ौज पलट कर जरूर आएगी।

नाराज हुमायूँ ने दिया कत्लेआम का फरमान

रानी जयराज कुमारी की वीरगाथा प्राचीन समय के इतिहासकार रामगोपाल शारद द्वारा लिखी पुस्तक ‘रामजन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास’ नामक पुस्तक में भी मिलती है। बलराम मिश्रा ने हमें आगे बताया कि अपनी फौजों की हार सुनकर अपने अब्बा की राह चल रहा हुमायूँ नाराज हो गया। उसने अप्रैल 1531 के अंत में एक बड़ी फ़ौज फिर से अयोध्या के लिए भेजी।

लुप्तप्राय प्रचीन ऐतिहासिक पुस्तकों में भी मिलता है रानी जयराज कुमारी की वीरता का उल्लेख

इस बीच रानी चाहतीं तो वो भाग भी सकती थीं, लेकिन उन्होंने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए अपने पति की तरह अंतिम साँस तक रामजन्मभूमि की रक्षा का संकल्प लिया था। दरबरे अकबरी ने भी इस लड़ाई का जिक्र अपनी भाषा में किया है। तब उसने लिखा कि रानी जयराज ने 3 हजार महिलाओं की फ़ौज लेकर 10 हमले किए और सबसे अंतिम वाले में उन्हें कामयाबी हासिल हुई थी।

जहाँ वीरगति पाए थे राजा वहीं बलिदान हुईं रानी भी

बलराम मिश्र ने हमें आगे बताया कि अप्रैल 1531 में हुमायूँ ने तोपों और बंदूकों के साथ अयोध्या में भारी-भरकम मुगल फ़ौज भेजी। अयोध्या रामजन्मभूमि पर तब लगभग 3 महीने तक लगातार पूजा-पाठ हुई थी और वहाँ कब्ज़ा हिन्दुओं का था। खुद रानी और उनकी नारी सेना मंदिर परिसर की रखवाली करती थीं। उनका साथ स्वामी महेश्वरानंद दे रहे थे। उन्होंने आसपास के गाँवों से योद्धाओं को जमा किया था।

मुगल फ़ौज ने हमला करके पहले पहली पंक्ति में मौजूद हिन्दू योद्धाओं की हत्या की। इसी संघर्ष में स्वामी महेश्वरानंद भी बलिदान हो गए। फिर जन्मभूमि परिसर में नारी सैनिकों के साथ घनघोर युद्ध हुआ। युद्ध में बारी-बारी से सभी सैनिक वीरगति को प्राप्त होती रहीं। जवाबी हमले में कई मुगल सैनिक और उनके कमांडर भी ढेर कर दिए गए थे। अंत में मुगल फ़ौज गर्भगृह पहुँची। यहाँ रानी जयराज कुमारी ने कई घाव खाने के बाद भी अंतिम साँस तक युद्ध किया।

अंत में मंदिर के गर्भगृह में ही रानी जयराज कुमारी भी अपने पति की भाँति वीरगति को प्राप्त हो गईं। बताया जाता है कि उनका भी पार्थिव शव उसी जगह मिला था, जहाँ पर उनके पति राजा रणविजय सिंह बलिदान हुए थे। रानी जयराज कुमारी के बलिदान के साथ ही एक बार फिर से अप्रैल 1531 में मुगल फ़ौज रामजन्मभूमि पर काबिज़ हो गई। वहाँ बने अस्थाई मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया और पूजा-पाठ बंद करवा दी गई।

एक भी महिला सैनिक को जिन्दा नहीं पकड़ पाए मुगल

इतिहासकार बलराम मिश्र के साथ हंसवर राजमहल में हिन्दू संगठन से जुड़े कई अन्य लोग भी जमा हो गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी में रानी जयराज कुमारी दुनिया की एकलौती ऐसी नारी शक्ति थीं, जिन्होंने 3 हजार महिलाओं की सेना बनाकर लाखों मुगलों से लगभग 4 वर्ष तक युद्ध किया।

विश्व हिंदू परिषद के अशोक कुमार ने हमें बताया कि उन्हें पता चला था कि उन सभी नारी सैनिकों को ऐसी ट्रेनिंग दी गई थी कि वो किसी विधर्मी के हाथ पड़ने से पहले खुद को समाप्त कर लें। रानी जयराज कुमारी के साथ बलिदान हुईं सभी महिला सैनिकों में से कोई एक महिला मुगल सैनिकों के हाथ जिन्दा नहीं लगी थी।

हंसवर राजमहल के प्रवेश द्वारा पर आज भी मौजूद है भगवान गणेश की मूर्ति

बलिदान होने के समय रानी के 2 बच्चे थे, जिन्हें राजपरिवार के बचे हुए सदस्यों ने पाले थे। आज भी हंसवर क्षेत्र के सभी सदस्य रानी जयराज कुमारी द्वारा रामजन्मभूमि के लिए किए गए बलिदान को याद करते हैं। स्थानीय हिन्दू संगठनों की इच्छा है कि हंसवर के महल को एक धरोहर के रूप में विकसित किया जाए, ताकि नई पीढ़ी को धर्म की रक्षा के लिए लड़ने और त्याग की प्रेरणा मिले।