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डेयरी वाले ने निकाल दिया, टेंट में रहे, स्ट्रीट फूड बेचने वालों के साथ काम किया: केविन पीटरसन भी हुए यशस्वी जायसवाल के संघर्ष के कायल, 22 की उम्र में ठोका दोहरा शतक

भारत और इंग्लैंड के बीच चल रहे टेस्ट सीरीज के दूसरे मैच में सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने दोहरा शतक ठोक दिया है। जहाँ कोई और बल्लेबाज पचासा भी नहीं लगा पाया, यशस्वी जायसवाल ने 277 गेंदों पर अपना दोहरा शतक पूरा किया। जहाँ पहले दिन उन्होंने छक्के के साथ शतक पूरा किया था, दूसरे दिन एक छक्का और अगली ही गेंद पर चौका जड़ कर उन्होंने 200 रन पूरे किए। सौरभ गंगगुली, विनोद कांबली और गौतम गंभीर के बाद वो टेस्ट में दोहरा शतक ठोकने वाले चौथे बाएँ हाथ के बल्लेबाज हैं।

वहीं सबसे कम उम्र में दोहरा शतक ठोकने वाले बल्लेबाजों में वो विनोद कांबली और सुनील गावस्कर के बाद तीसरे हैं। इस सूची में पहले और दूसरे स्थान पर कांबली ही हैं। वहीं जायसवाल ने 22 साल 37 दिन की उम्र में ये कारनामा किया है। 290 गेंदों पर 209 रनों तक की पारी में उन्होंने 19 चौके और 7 छक्के लगाए। यशस्वी जायसवाल काफी साधारण परिवार से आते हैं। जब यशस्वी जायसवाल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में भी शतक लगाया था, उसके बाद उनके पिता काँवर लेकर वैद्यनाथ बाबा को जल चढ़ाने देवघर के लिए निकले थे।

यशस्वी जायसवाल के जीवन और उनके संघर्षों के बारे में ‘स्काई स्पोर्ट्स न्यूज़’ के एसोसिएट एडिटर नकुल पांडे ने एक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) थ्रेड के जरिए बताया है, जिसे केवल पीटरसन ने भी आगे बढ़ाया है। इसमें बताया गया है कि कैसे मात्र 10 वर्ष की उम्र में ही यशस्वी जायसवाल क्रिकेटर बनने के लिए उत्तर प्रदेश से मुंबई के लिए निकल गए थे और वहाँ वो कुछ दिन अपने चाचा के पास रहे। उनके चाचा दादर में रहते थे, यशस्वी को रोज यात्रा करने में घंटों लग जाते थे।

इसके बाद मात्र 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक डेयरी की दुकान में काम करना शुरू कर दिया, बदले में उन्हें रहने के लिए जगह मिली। हालाँकि, डेयरी मालिक ने उन्हें निकाल दिया। फिर वो ‘मुस्लिम यूनाइटेड क्लब’ के ग्राउंडस्टाफ के टेंट में आज़ाद मैदान में रहने लगे। परिवार द्वारा वापस बुलाए जाने के बावजूद उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। 3 साल वो टेंट में ही रहे। कोच ज्वाला सिंह को उन्होंने प्रभावित किया। ज्वाला खुद यूपी से मुंबई आए थे, ऐसे में उन्होंने प्रतिभा और संघर्ष को पहचाना।

ज्वाला सिंह ने न सिर्फ यशस्वी जायसवाल को अपने पास रखा, बल्कि उनके कानूनी अभिभावक भी बन गए। यशस्वी जायसवाल स्ट्रीट फ़ूड बेचने वालों का भी हाथ बँटाते थे। लेकिन, उनका ध्यान क्रिकेट पर ही था। इसके बाद यशस्वी जायसवाल अपनी मेहनत के दम पर मुंबई अंडर 19 क्रिकेट का हिस्सा बने और मात्र 17 वर्षों की उम्र में घेरलू क्रिकेट में डेब्यू किया। इस तरह एक ग्राउंड कर्मचारी के टेंट से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक का सफर तय किया और विश्व स्तर पर नाम कमाया।

IPL में यशस्वी जायसवाल ‘राजस्थान रॉयल्स’ की तरफ से खेलते हैं। पूर्व क्रिकेटर एवं कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने यशस्वी जायसवाल की तारीफ करते हुए यहाँ तक कह दिया कि मौजूदा समय में वो ऑस्ट्रेलिया के दिवंगत क्रिकेटर सर डॉन ब्रैडमैन से भी बेहतर हैं। उन्होंने बताया कि कैसे जेम्स एंडरसन की गेंदों को वो छोड़ते रहे। फिर जब स्पिन आया तो उन्होंने मारना शुरू किया। वहीं पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने भी कहा कि ये यशस्वी जायसवाल की परिपक्वता दर्शाता है कि उन्होंने एंडरसन की गेंदों को छोड़ा, उन्हें पता था कि वो मारने वाली गेंदें नहीं देंगे।

राम मंदिर पर BBC की कवरेज भड़काऊ, ब्रिटिश संसद में ही इसके खिलाफ उठी माँग – इसकी निष्पक्षता पर हो बहस: बाबरी का रोना रो छिपाया था 1527 वाला इतिहास

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर UK (यूनाइटेड किंगडम) के सरकारी मीडिया संस्थान BBC (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन) की नकारात्मक कवरेज को लेकर उसका उसके ही देश में विरोध शुरू हो गया है। ब्रिटेन के सांसद ने 22 जनवरी, 2024 को हुए इस कार्यक्रम को लेकर BBC की कवरेज को पक्षपाती, भेदभावपूर्ण और भड़काऊ करार दिया है। सांसद बॉब ब्लैकमैन ने गुरुवार (1 फरवरी, 2024) को ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स में ‘BBC की निष्पक्षता पर बहस की माँग उठाई है।

कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से दुनिया भर के हिन्दू खुश हैं। उन्होंने इस पर दुःख जताया कि BBC ने इसे एक मस्जिद को तबाह कर के उस स्थल पर बनी हुई संरचना बता दिया, और मीडिया संस्थान ये भूल गया है कि 2000 वर्षों से भी अधिक समय पहले तक वहाँ भव्य मंदिर हुआ करता था। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए शहर में ही 5 एकड़ जमीन आवंटित की गई है।

सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि दुनिया भर में क्या चल रहा है, इस पर बीबीसी की कवरेज कितनी निष्पक्ष है इसका रिकॉर्ड लाया जाना चाहिए और इस पर बहस होनी चाहिए। ‘हॉउस ऑफ कॉमन्स’ की नेता पोनी पैनी मॉर्डौंट ने कहा कि BBC की समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। BBC को अपनी इस रिपोर्ट को लेकर सफाई भी प्रकाशित करनी पड़ी थी। इसमें उसने कहा था कि कुछ पाठकों को ने महसूस किया कि ये लेख पक्षपाती है और इसमें भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

BBC ने सफाई में आगे कहा कि जो कुछ हुआ उसका सटीक और निष्पक्ष विवरण बताया जाना चाहिए। मीडिया संस्थान ने इससे असहमति जताई कि ये लेख हिन्दुओं का अपमान कर रहा है। उसने बड़ी चालाकी से दिसंबर 1992 के बाबरी विध्वंस का तो जिक्र किया, लेकिन मीर बाक़ी द्वारा राम मंदिर को सन् 1527 में ध्वस्त किए जाने की घटना का जिक्र नहीं किया। बीबीसी लेस्टर और बर्मिंघम में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा में भी इस्लामी भीड़ का पक्ष लेकर हिन्दुओं को बदनाम करने वाली रिपोर्टिंग कर चुका है।

ब्रिटिश हिन्दुओं के अभियान ‘इनसाइट यूके’ ने भी बीबीसी को एक खुला पत्र लिखते हुए उसके कवरेज पर आपत्ति जताई। साथ ही लिखा कि मीडिया संस्थान ने ये छिपा लिया कि एक मुस्लिम आर्कियोलॉजिस्ट (KK मुहम्मद) ने बाबरी ढाँचे के नीचे राम मंदिर होने का पता लगाया, और सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाने वाले जजों में भी एक मुस्लिम जज (जस्टिस अब्दुल नज़ीर) थे। तमाम आलोचनाओं के बावजूद BBC अपनी सफाई में अपनी बात पर अड़ा रहा।

जिस खबर को लेकर आपत्ति जताई जा रही है, उसे गीता पांडेय और योगिता लिमये ने लिखा था। इस खबर का भड़काऊ शीर्षक था – “अयोध्या राम मंदिर: भारत के पीएम मोदी ने ढहाई गई बाबरी मस्जिद वाले स्थल पर हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया”। इस खबर में लिखा गया था कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से मुस्लिम डरे हुए हैं, इस कार्यक्रम ने उनकी ‘दर्दनाक यादें’ ताज़ा कर दी हैं। वहीं बाबरी ढाँचे के निर्माण को लेकर लिखा गया कि ‘हिन्दू ऐसा यकीन करते हैं’ कि राम मंदिर ढाह कर इसे बनाया गया था। जबकि, इसके साक्ष्य हर रूप में मौजूद हैं।

‘AAP विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही बीजेपी’: अरविंद केजरीवाल के दावे पर अब दिल्ली पुलिस ने माँगे सबूत, घर पहुँची क्राइम ब्रांच की टीम

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर पहुँची। दरअसल, आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया था कि बीजेपी (BJP) उसके विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही है। इसी सिलसिले में दिल्ली पुलिस उन्हें नोटिस देने पहुँची थी। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने उनके दावे के बारे में सबूत देने को कहा है।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाए थे कि बीजेपी उनकी पार्टी के विधायकों को खरीदकर उनकी सरकार गिराने की कोशिश कर रही है। उनके इस दावे की जाँच के लिए दिल्ली पुलिस ने उनसे सबूत माँगे है, ताकि इस दावे को लेकर कार्रवाई की जा सके। वहीं, शराब घोटाले में ईडी ने अरविंद केजरीवाल को समन जारी किया था, लेकिन वे पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए।

एएनआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि दिल्ली पुलिस की टीम अरविंद केजरीवाल के घर पहुँची। हालाँकि, आजतक ने दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि क्राइम ब्रांच ने उन्हें नोटिस नहीं दिया, जबकि वहाँ मौजूद अधिकारी नोटिस लेने के लिए तैयार थी।

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि उनके विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है। वह बीजेपी का जिक्र कर रहे थे। केजरीवाल का दावा है कि उनके 21 विधायकों को तोड़ने की योजना चल रही है। उसके साथ ही उनके सात विधायकों से संपर्क किया गया है।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा था, “पिछले दिनों इन्होंने हमारे दिल्ली के 7 MLA से संपर्क कर कहा कि कुछ दिन बाद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लेंगे। उसके बाद MLA को तोड़ेंगे। 21 MLA से बात हो गई है, औरों से भी बात कर रहे हैं। उसके बाद दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार गिरा देंगे। आप भी आ जाओ। 25 करोड़ रुपये देंगे और बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़वा देंगे।’

केजरीवाल ने आगे लिखा, “हालाँकि उनका दावा है कि उन्होंने 21 MLA से संपर्क किया है लेकिन हमारी जानकारी के मुताबिक़ उन्होंने अभी तक 7 MLA को ही संपर्क किया है और सबने मना कर दिया। इसका मतलब किसी शराब घोटाले की जाँच के लिए मुझे गिरफ़्तार नहीं किया जा रहा बल्कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार गिराने के लिए षड्यंत्र कर रहे हैं। पिछले नौ सालों में हमारी सरकार गिराने के लिए इन्होंने कई षड्यंत्र किए। लेकिन इन्हें कोई सफलता नहीं मिली। भगवान ने और जनता ने हमेशा हमारा साथ दिया। हमारे सभी MLA भी मज़बूती से साथ हैं। इस बार भी ये लोग अपने नापाक इरादों में फेल होंगे।”

अरविंद केजरीवाल ने आगे लिखा, “ये लोग जानते हैं कि दिल्ली की जनता के लिए हमारी सरकार ने कितने काम किए हैं। इनकी पैदा की गई तमाम अड़चनों के बावजूद हमने इतने काम किए हैं। दिल्ली की जनता ‘आप’ से बेइंतहा प्यार करती है। इसलिए चुनावों में ‘आप’ को हराना इनके बस की बात नहीं। तो एक फ़र्ज़ी शराब घोटाले के बहाने गिरफ़्तार करके सरकार गिराना चाहते हैं।”

इस मामले में दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि आम आदमी पार्टी के विधायकों को 25 करोड़ रुपए बीजेपी दे रही है। आम आदमी पार्टी उचित समय पर इस बारे में ऑडियो क्लिप जारी करेगी। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस अरविंद केजरीवाल के साथ ही आतिशी को भी नोटिस दे सकती है।

‘पूनम पांडेय के शव का हो पोस्टमॉर्टम, पता चले मौत के कारण’: हैरान दोस्त ने की माँग, एक और दोस्त बोलीं – कभी नहीं बताया कि उन्हें कैंसर हैं

पूनम पांडे जीवित हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है। वह और उनकी टीम ने अपनी मौत का नाटक रचा था। इससे संबंधित रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। पुरानी रिपोर्ट (उनकी टीम द्वारा झूठ पर आधारित) नीचे है।

अभिनेत्री एवं मॉडल पूनम पांडेय की अचानक हुई मौत के कारण बॉलीवुड के कई लोग सदमे में हैं। इंस्टाग्राम के माध्यम से जानकारी दी गई कि सर्वाइकल कैंसर की वजह से पूनम पांडेय की मौत हो गई है। अब उनके मित्र एजाज खान ने उनकी मौत पर हैरानी जताते हुए पोस्टमॉर्टम की माँग की है। अभिनेता एजाज खान ने बताया कि मौत से 2 दिन पहले ही पूनम पांडेय से उनकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया कि अभिनेत्री ने कभी उन्हें कैंसर होने की बात नहीं बताई थी।

एजाज खान ने NDTV से बात करते हुए कहा कि लगभग एक दशक से पूनम पांडेय से उनकी दोस्ती थी। उन्होंने शव के पोस्टमॉर्टम की माँग करते हुए कहा कि पूनम पांडेय की मौत का कारण क्या था, ये पता चलना चाहिए। एजाज खान ने बताया कि मौत से 2 दिन पहले तक पूनम पांडेय बहुत खुश थीं, वो सब कुछ उनसे शेयर करती थीं। लेकिन, सर्वाइकल कैंसर के बारे में उन्होंने एजाज खान को कुछ नहीं बताया। एजाज खान ने उनलोगों की निंदा की, जो पूनम पांडेय की मौत के बाद उन पर भद्दे कमेंट्स कर रहे हैं।

एजाज खान ‘ये ममोह मोह के धागे’ सीरियल और ‘सिटी ऑफ ड्रीम्स’ वेब सीरीज के लिए जाने जाते हैं। बता दें कि पूनम पांडेय की PR टीम ने उनकी बहन के हवाले से उनकी मौत की खबर की जानकारी दी थी। पूनम पांडेय की एक अन्य दोस्त संभावना सेठ ने भी कहा है कि अभिनेत्री ने उन्हें कभी कैंसर के बारे में नहीं बताया। ‘न्यूज़ 18’ से बात करते हुए संभावना सेठ ने कहा कि पूनम पांडेय ने उनसे कभी नहीं बताया कि वो किसी प्रकार की समस्या से जूझ रही हैं।

कई भोजपुरी आइटम सॉन्ग्स में दिख चुकीं संभावना सेठ ‘डांसिंग क्वीन’ रियलिटी शो की विजेता रह चुकी हैं। ‘खतरों के खिलाड़ी’ में उन्होंने पूनम पांडेय के साथ काम किया था। अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि पूनम पांडेय की मौत कहाँ हुई, उनका इलाज कहाँ चल रहा था, उनका परिवार कहाँ है और उनका पार्थिव शरीर इस समय कहाँ है। कानपुर में उनकी मौत की बात कही गई, लेकिन ‘ABP News’ की मानें तो कानपुर में कैंसर की 2 मरीज ‘पूनम पांडेय’ नाम की मिलीं, एक की उम्र 36 वर्ष है और एक की उम्र 65 वर्ष, लेकिन दोनों ये वाली पूनम पांडेय नहीं हैं।

संभावना सेठ ने कहा, “पिछले साल हम मिले थे। सामाजिक रूप से कार्यक्रमों में हम मिलते रहते थे। वो काफी युवा थीं, 30-32 साल की। ये खबर विश्वास लायक नहीं है, मैं इसे पचा नहीं पा रही हूँ। वो एक सकारात्मक व्यक्ति थीं। वो खुश रहती थीं। मुझे याद है उनके पास एक कुत्ता भी था। सोचिए, वो कितनी मजबूत थीं कि उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में किसी को नहीं बताया। मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि वो इस वक्त जहाँ भी हो, खुश हो।”

जिंदा हैं पूनम पांडे? ड्राइवर से लेकर को-स्टार तक बता रहे अलग कहानी, मीडिया में मौत पर चल रही किसिम-किसिम की थ्योरी

पूनम पांडे जीवित हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है। वह और उनकी टीम ने अपनी मौत का नाटक रचा था। इससे संबंधित रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। पुरानी रिपोर्ट (उनकी टीम द्वारा झूठ पर आधारित) नीचे है।

बॉलीवुड हिरोइन और मॉडल पूनम पांडे की मौत को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं। उनके ड्राइवर से लेकर को-स्टार तक के बयानों का हवाला देकर मौत की खबर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनके परिवार के लापता होने से लेकर ड्रग ओवरडोज के कारण मौत होने तक के दावे किए जा रहे हैं।

कैसे आई पूनम पांडे की मौत की खबर

शुक्रवार 2 फरवरी 2024 की सुबह 32 साल के पूनम पांडे की मौत की खबर उनके ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर दी गई। पोस्ट में लिखा गया: “यह सुबह हमारे लिए दुखदायी है। आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि हमने अपनी प्यारी पूनम को सर्वाइकल कैंसर के कारण खो दिया है। हर व्यक्ति जो कभी भी उनसे मिला, उसे उनका प्रेम मिला। दुख के इस समय में, हम अपनी गोपनीयता का अनुरोध करते हैं। हम उनके द्वारा शेयर की गई हर बात के लिए उन्हें प्यार से याद करेंगे।”

इसके बाद न्यूज 18 ने पूनम पांडे के कथित मैनेजर के हवाले से मौत की पुष्टि की। मैनेजर के हवाले से बताया कि सर्वाइकल कैंसर के कारण पूनम पांडे की मौत उनके पैतृक शहर कानपुर में हुई है। पूनम पांडे की मौत की खबर आते ही वायरल हो गई। इसने उनके कुछ फैन्स को झकझोर दिया तो कई न इस तरह मौत पर सवाल उठाए।

पूनम पांडे की मौत की खबर झूठी

पूनम पांडे के को स्टार विनीत कक्कड़ के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में मौत की खबर को फेक बताया गया है। साथ ही कक्कड़ ने कहा है कि यह पब्लिसिटी स्टंट भी नहीं है, जैसा कुछ मीडिया रिपोर्टों में आशंका जाहिर की गई है। उनके अनुसार पूनम का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर लिया गया है।

कक्कड़ ने कहा है, “मुझे यह खबर झूठी लग रही है। मैं पूनम को जानता हूँ। वह काफी मजबूत महिला है। मैंने उसके साथ लॉक अप में दो सप्ताह बिताए हैं। मैं उसके व्यक्तित्व और चरित्र से बखूबी परिचित हूँ। वह बेहद मजबूत महिला है।” उल्लेखनीय है कि पूनम के साथ कक्कड़ भी लॉक अप में प्रतिभागी थी। इसकी होस्ट हिरोइन कंगना रनौत थीं।

पूनम पांडे का परिवार गायब, नंबर फर्जी

इंडिया टुडे ने पूनम पांडे से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया है कि हिरोइन की मौत की खबर उनकी बहन ने दी थी। लेकिन इसके बाद से उनकी बहन से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उनके परिवार के अन्य सदस्यों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। दैनिक भास्कर का कहना है कि पूनम की मौत की खबर का प्रेस नोट निकिता शर्मा नाम की एक महिला ने खुद को उनका मैनेजर बताते हुए जारी किया था। इस पर एक नंबर भी था। लेकिन जब इस नंबर पर कॉल किया गया तो इसे पश्चिम बंगाल के किसी व्यक्ति ने उठाया। कथित तौर पर उन्होंने बताया कि उनका पूनम पांडे से कोई संबंध नहीं है और शुक्रवार सुबह से ही उनके पास सैकड़ों फोन आ चुके हैं।

क्या ड्रग्स ओवरडोज से हुई मौत, कहां है शव

टाइम्स नाउ ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पूनम पांडे की मौत सर्वाइकल कैंसर की वजह से नहीं हुई है। इस सूत्र के अनुसार ड्रग्स ओवरडोज से उनकी जान गई है। यदि पूनम पांडे की मौत हुई है तो सवाल यह भी उठता है कि उनका शव कहाँ है? दैनिक भास्कर ने पूनम पांडे के कथित ड्राइवर महबूब के हवाले से बताया है कि हिरोइन दो दिन पहले स्वस्थ थीं। वह 30 जनवरी को पूनम से मिला था। उसके बाद वह दो दिनों की छुट्टी पर चला गया था।

मीडिया में सूत्रों और पूनम पांडे के कथित करीबियों के हवाले से किए जा रहे इन दावों की ऑपइंडिया पुष्टि नहीं करता। लेकिन इससे कई तरह के सवाल पैदा हो रहे हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर अवेयरनेस डे है। लिहाजा जागरुकता पैदा करने के लिए यह खबर फैलाई गई हो।

40 सीटें भी कॉन्ग्रेस जीत जाए तो बड़ी बात: ममता बनर्जी ने बता दी INDI गठबंधन की औकात, राहुल गाँधी की यात्रा को बताया फोटोशूट

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राहुल गाँधी और उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने चुनौती दी कि राहुल गाँधी वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराकर दिखाएँ। ममता ने कहा कि वे I.N.D.I गठबंधन की हिस्सा हैं, लेकिन राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा बंगाल आई थी तो उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। । 

दरअसल, ममता बनर्जी शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को मुर्शिदाबाद में एक रैली को संबोधित कर रही थीं। इस रैली में उन्होंने राहुल गाँधी पर जमकर हमला बोला और कहा, “मुझे नहीं पता कि कॉन्ग्रेस 300 में से 40 सीटें भी जीतेगी या नहीं, फिर भी ये अहंकार क्यों है? आप बंगाल आए, मगर मुझे बताया भी नहीं। हम तो इंडी गठबंधन का हिस्सा हैं। अगर आपमें हिम्मत है तो वाराणसी में बीजेपी को हराकर दिखाइए। आप उन जगहों पर भी हार गए, जहाँ पहले जीतते थे।”

ममता बनर्जी ने राहुल गाँधी के ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान बीड़ी मजदूरों से मुलाकात को लेकर भी निशाना साधा। ममता बनर्जी ने कहा कि यह कोई नया स्टाइल चल पड़ा है… फोटोशूट कराने का। जो लोग कभी चाय की दुकान पर भी नहीं गए, अब वे बीड़ी श्रमिकों के साथ बैठने का दिखावा कर रहे हैं। ये सभी प्रवासी पक्षी की तरह हैं।

ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक से बाहर निकलने को तैयार: सीपीएम

इस बीच, राहुल गाँधी से रघुनाथपुर में वामपंथी नेताओं ने भी मुलाकात की। राहुल गाँधी से मुलाकात के बाद सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा, “ममता बनर्जी भी इंडी गठबंधन की ट्रेन से उतरने के लिए तैयार हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम आरएसएस-भाजपा के खिलाफ लड़ रहे हैं। आरएसएस-बीजेपी से मुकाबले के लिए राहुल गाँधी भी भारत जोड़ो न्याय यात्रा लेकर निकले हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हम भारत में लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। हम इस यात्रा के प्रति अपनी एकजुटता दिखाने के लिए यहाँ आए हैं। बहुत सारे लोग शुरुआती स्टेशन से ट्रेन में चढ़े, लेकिन कोई यह नहीं कह सकता कि कौन भाजपा के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बना रहेगा और कौन उतरेगा रास्ते में। ममता बनर्जी अब ट्रेन से उतरना चाहती हैं और हम इसका स्वागत करते हैं।”

बता दें कि ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला लिया है। तृणूमल कॉन्ग्रेस के इस फैसले को विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस बीच, ममता ने एक बार फिर से कॉन्ग्रेस को अपने तेवर दिखा दिए हैं।

‘जज अंकल, मुझे भी मम्मी-पापा के साथ नहीं रहना, तलाक चाहिए’: 11 साल के बेटे के आँसू से पसीजा माता-पिता का दिल, 9 साल चले विवाद के बाद साथ रहने का किया फैसला

एक बच्चे के मासूम से सवाल ने पति-पत्नी के बीच 9 साल से जारी विवाद का पटाक्षेप हो गया। दोनों ने एक-दूसरे पर कई केस कर रखे थे और दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में दोनों के बीच तलाक का केस भी अंतिम चरण में था। कोर्ट में 11 साल के बच्चे ने जो कहा, उसे सुनकर उसके माता-पिता ने न केवल तलाक लेने का फैसला छोड़ दिया, बल्कि वे साथ रहने को भी तैयार हो गए।

दरअसल, तलाक के एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थता केंद्र में पति-पत्नी के बीच अंतिम सुनवाई थी। पति मनोज (परिवर्तित नाम) और पत्नी मनीषा (परिवर्तित नाम) वहाँ दोनों मौजूद थे। मनीष के साथ उसका 11 साल का बेटा भी आया था। तीनों मध्यस्थ के पास बैठे थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के सामने ही मनोज और मनीषा से मध्यस्थ ने अंतिम बार साथ रहने को लेकर सवाल पूछा। मध्यस्थ ने कहा कि अगर वे साथ रहने के लिए तैयार नहीं होंगे तो तलाक का अंतिम निर्णय के लिए केस को फैमिली कोर्ट में भेज दिया जाएगा। इस दौरान दोनों ने कहा कि वे अब साथ रहने के लिए तैयार नहीं हैं।

जब बच्चे ने अपने माता-पिता को देखा कि वे अब साथ नहीं रहेंगे तो उसके आँखों से आँसू आ गए। आँखों में आँसू देखकर वहाँ मौजूद जज ने पूछा, “क्या हुआ बेटा? आप दोनों में से किसके साथ रहना चाहते हो?” तब बच्चे ने कहा कि उसे अपने मम्मी-पापा दोनों के साथ रहना है। इस पर जज ने कहा कि दोनों साथ नहीं रहना चाहते। इसलिए वे तलाक ले रहे हैं।

इस बच्चे ने कहा, “जज अंकल, अगर ये साथ नहीं रह सकते तो मुझे भी इन दोनों से तलाक दे दीजिए। मैं रहूँगा तो दोनों के साथ नहीं तो किसी के साथ भी नहीं। मुझे कहीं और भेज दीजिए।” इसके बाद बच्चा रोने लगा। इस दौरान उसके माता-पिता ने उसे चुप कराने की कोशिश की, लेकिन उसने दोनों ने नाराजगी दिखाते हुए मध्यस्थ जज के पास चला गया।

इस घटना ने पति-पत्नी के मन पर गहरा प्रभाव डाला। दोनों पति-पत्नी आधे घंटे तक बाहर जाकर बातें कीं और फिर जज के सामने आकर बोले कि वे अब तलाक लेना नहीं चाहते हैं और साथ रहेंगे। वे एक साथ अपने बेटे के पास ही रहेंगे। दोनों ने कहा कि वे आपसी झगड़े में बच्चे का भविष्य भूल गए। दोनों पति-पत्नी ने एक-दूसरे के खिलाफ दायर किए गए सभी मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है।

दरअसल, दिल्ली के लक्ष्मी नगर के व्यवसायी मनोज की शादी रोहिणी निवासी मनीषा से 21 जनवरी 2011 को हुई थी। इस शादी से उन्हें 8 जनवरी 2013 को लड़का हुआ। इसके बाद पति-पत्नी के बीच झगड़े होने लगे। 20 मार्च 2015 से दोनों अलग रहने लगे। लड़का अपनी माँ के पास रहने लगा। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे पर घरेलू हिंसा सहित तलाक के केस दायर किए थे।

नेशनल हाइवे पर ट्रक-टैक्सी ड्राइवरों के लिए रेस्ट रूम बनाएगी मोदी सरकार, खाने से लेकर सोने तक की होगी व्यवस्था: भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो में PM का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2024 कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत को साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने में मोबिलिटी सेक्टर अहम भूमिका निभा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। हमारी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत का दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना तय है। आज का भारत भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियाँ बना रहा है। इसमें मोबिलिटी सेक्टर के लिए विशेष जगह है। कल जो बजट पेश हुआ है, उसमें भी आप इसका विजन देख पाते होंगे।”

ट्रक ड्राइवरों की चिंता को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “ट्रक-टैक्सी ड्राइवर्स को बीच सफर में आराम देने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई योजना पर काम शुरू किया है। इस योजना के तहत सभी नेशनल हाईवेज पर ड्राइवरों के लिए नई सुविधाओं वाले आधुनिक भवनों का निर्माण होगा। इन भवनों में ड्राइवर के लिए भोजन, साफ पानी, शौचालय, पार्किंग आदि सारी सुविधाएँ होंगी।”

मीडिल क्लास को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में बड़ी संख्या में नियो मिडिल क्लास बना है, जिसकी अपनी आशा एवं अपनी आकांक्षाएँ हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत में मिडिल क्लास का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही मिडिल क्लास की इनकम भी बढ़ रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले 10 वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकला है।

पीएम ने कहा कि साल 2014 के पहले पिछले दस सालों में भारत में 12 करोड़ के आसपास गाड़ियों की बिक्री हुई थी, जबकि 2014 के बाद से देश में 21 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों की बिक्री हो चुकी है। भारत में अब सालाना 12 लाख इलेक्ट्रिक कारें बिक रही हैं। पिछले 10 साल में पैसेंजर सेक्‍टर में 60% और टू व्हीलर सेक्‍टर में 70% बढ़ोतरी हुई।

ऑटो सेक्टर के बढ़ते बाजार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जनवरी में कारों की बिक्री ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि कहा कि भारत के मोबिलिटी सेक्टर के लिए गोल्डन पीरियड भी शुरू हो गया है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “इनकम टैक्स वाले नहीं सुन रहे हैं। आप घबराएँ मत। आपको आगे बढ़कर इसका लाभ उठाना है।”

पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014 में कैपिटल एक्सपेंडिचर दो लाख करोड़ रुपए से भी कम था। अब यह बढ़कर 11 लाख करोड़ रुपए से भी ज्‍यादा हो गया है। उन्होंने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर पर 11 लाख करोड़ रुपए खर्च का ऐलान मोबिलिटी सेक्‍टर के लिए अवसर लेकर आया है। यह न सिर्फ अर्थव्‍यवस्‍था को फायदा देगा, बल्कि इससे रोजगार के भी नए रास्‍ते खुलेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम समुद्र और पहाड़ों को चुनौती देते हुए एक के बाद एक इंजीनियरिंग मार्वेल तैयार कर रहे हैं, वो भी रिकॉर्ड समय में।” उन्होंने कहा कि अटल टनल से लेकर अटल सेतु तक, भारत ढांचागत विकास में नए रिकॉर्ड बना रहा है। दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2024 में उन्होंने कई उद्योगपतियों से भी मुलाकात की। 

पूनम पांडे की मौत की खबर देने वाली बहन ‘गायब’, परिवार के अन्य सदस्यों के फोन भी बंद: रिपोर्ट से गहराया सस्पेंस, आखिरी दिनों का Video वायरल

पूनम पांडे जीवित हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है। वह और उनकी टीम ने अपनी मौत का नाटक रचा था। इससे संबंधित रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। पुरानी रिपोर्ट (उनकी टीम द्वारा झूठ पर आधारित) नीचे है।

बॉलीवुड हिरोइन और मॉडल पूनम पांडे की मौत की खबर ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को सबको झकझोर कर रख दिया। सर्वाइकल कैंसर से उनकी मौत की बात कही जा रही है। लेकिन एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि मौत की खबर देने के बाद से पूनम पांडे की बहन का पता नहीं चल पा रहा है। रिपोर्ट में परिवार के अन्य सदस्यों के फोन भी बंद होने की बात कही गई है।

इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि पूनम पांडे की मौत की खबर वायरल होने के बाद से उनका परिवार पहुँच से बाहर है। पूनम पांडे से जुड़े एक करीबी सूत्र के अनुसार शुक्रवार की सुबह बहन ने फोन कर मौत की जानकारी दी थी। बहन ने बताया था कि पूनम की मौत सर्वाइकल कैंसर की वजह से हुई। इसके बाद पूनम पांडे की टीम ने मौत की खबर को उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से साझा किया। फिर दुनिया को इसके बारे में पता चला।

लेकिन अब सूत्र का कहना है कि पूनम पांडे की टीम के सदस्यों और उनके परिवार से संपर्क नहीं हो पा रहा है। न तो पूनम पांडे की बहन का फोन लग रहा है और न ही परिवार के किसी अन्य सदस्य का। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है, “पूनम पांडे की बहन से हमारी बात सुबह में हुई थी। उन्होंने ही मौत की खबर दी थी। उसके बाद से जब भी उनकी बहन को हम लोग कॉल करने की कोशिश कर रहे हैं, उनका फोन स्विचऑफ जा रहा है। पूनम के परिवार के अन्य सदस्य भी पहुँच से बाहर हैं। पूनम की टीम के 2-3 लोगों से बात करने की कोशिश की तो हर किसी का फोन स्विचऑफ जा रहा है। हम लोग इस समय कन्फ्यूज हैं औऱ सोच रहे हैं कि आखिर मामला क्या है।”

इस बीच पूनम पांडे के आखिरी दिनों के वीडियो वायरल हैं। इन वीडियो में उनके हँसते-मुस्कुराते चेहरे को देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वे किस दर्द में जी रही थीं।

उनका आखिरी वीडियो एक पार्टी का है। ये वीडियो वायरल भयानी के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया है।

बता दें कि पूनम पांडे की मौत की खबर सामने आने के बाद से सर्वाइवल कैंसर जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा छिड़ गई है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार पूनम पांडे का निधन उनके पैतृक शहर कानपुर में हुआ है। बहरहाल, उनके परिवार के लापता होने के बाद तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

मंदिरों को तोड़कर नहीं बनी एक भी मस्जिद, मुस्लिम शासक चाहते तो एक भी मंदिर नहीं बचता: ज्ञानवापी पर AIMPLB ने उगला जहर, संत समिति ने चेताया

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के तहखाने में हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार देने पर मुस्लिम पक्ष खफा है। उन्होंने ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को अपनी-अपनी दुकानें बंद करके इसका विरोध किया। वहीं, लगभग 1700 मुस्लिम जुमे की नमाज पढ़ने के लिए ज्ञानवापी परिसर में पहुँचे। स्थिति को देखते हुए वाराणसी के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में पूजा रोकने की मुस्लिम पक्ष द्वारा दी गई याचिका खारिज होने के बाद इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने मीडिया को संबोधित किया। बोर्ड ने कहा कि अगर मुस्लिमों की सोच सभी मंदिरों को तोड़ने की होते तो एक भी मंदिर नहीं बचता। इस बयान पर बनारस के संतों ने नाराजगी जाहिर की है। इसको लेकर लगभग 300 संतों ने बैठक बुलाई है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ज्ञानवापी तहखाने में पूजा शुरू होने पर कड़ा ऐतराज जताया है। बोर्ड के प्रवक्ता मलिक मोहतशिम ने कहा, “कोर्ट ने इस वक्त जिस जल्दबाजी में फैसला किया और उसमें पूजा की इजाजत दी, उसमें दूसरे पक्ष को बहस का मौका ही नहीं दिया गया। इसकी वजह से अदालतों और इंसाफ देने वाली संस्थानों के भरोसे को चोट पहुँची है।” AIMPLB के एक सदस्य ने कहा कि मुस्लिमों के सब्र की परीक्षा ना ली जाए।

उन्होंने कहा, “माइनॉरिटी महसूस कर रही है कि अदालतों ने बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक के लिए अलग-अलग पैमाने बना लिए हैं। इसकी मिसाल बाबरी मस्जिद का फैसला है। कोर्ट का काम आस्था पर नहीं, बल्कि दलील की बुनियाद पर फैसला सुनाना है। अदालत ने माना है कि बाबरी मस्जिद मंदिर तोड़कर नहीं बनाई गई। उसके नीचे मंदिर नहीं था। हमारी अदालतें भी ऐसी रास्ते पर चल रही हैं, जिससे लोगों का भरोसा टूट रहा है।”

मोतशिम ने कहा, “वर्ष 1991 के वर्शिप एक्ट में कहा गया कि 1947 में जो धार्मिक स्थल जिस तरह से थे, वे उसी रूप में बने रहेंगे। उसके बावजूद देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। हम देश की अदालतों से यह रिक्वेस्ट करते हैं कि कानून को सख्ती के लागू करने की कोशिश करें।” उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुस्लिमों के दरम्यां नफरत पैदा करने के लिए एक अफसाना गढ़ा गया है।”

उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान में जितने पुराने मंदिर हैं, वो हजारों साल से हैं। कई मुसलमान खानदानों की हुकुमतें आईं और गईं, लेकिन कभी किसी ने उसकी एक ईंट खुरचने की कोशिश नहीं की। अगर मुसलमानों की ये सोच होती कि हम दूसरों की ईबादतगाह पर जबरदस्ती कब्जा करके उसे मस्जिद बना लें तो क्या ये मंदिर मौजूद होते? ये ऐसा इतिहास है जिसे लोगों ने गढ़ा है।”

ज्ञानवापी मामले को लेकर काशी में हुई लगभग 300 संतों की बैठक में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई गई। संतों ने आरोप लगाया कि ज्ञानवापी परिसर में बाहर से नमाजियों को बुलाकर नमाज पढ़ाने की कोशिश की गई। संत समिति ने माँग की है कि पूरे ज्ञानवापी परिसर को हिन्दुओं कों सौंपा जाए। संतों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी माँग नहीं मानी गई तो संत समाज अपने तरीके से ज्ञानवापी लेगा।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि AIMPLB ने गैर-जिम्मेदार की तरह बयान दिया है। उन्होंने कहा, “यह देश संविधान से चलेगा। हमने राम जन्मभूमि संविधान के जरिए ली है और ज्ञानवापी भी ऐसे ही लेंगे। AIMPLB इस तरह के बयान देने से बचे।”