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‘देश प्रेम की वजह से मुस्लिमों ने किया है सब्र… अगर कंट्रोल से बाहर हुए तो हिंदुस्तान में जंग का माहौल’ – भारत रत्न पर मौलाना तौकीर रजा की धमकी

भारत सरकार की ओर से बीजेपी के वयोवृद्ध नेता लाल कृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने के फैसले के बाद भारत में इस्लामी कट्टरपंथियों की ओर से जहर उगलने का सिलसिला शुरू हो गया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता के बाद अब इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने भी जमकर जहर उगला है। मौलाना तौकीर रजा ने कहा है कि हिन्दुस्तान में आज जो राजनीति चल रही है, नफरतों का बाजार गर्म है, बेईमानी नइंसाफी, भूखमरी, बेरोजगारी इन सबके लिए जिम्मेदार लाल कृष्ण आडवाणी हैं। ये भारत रत्न का घोर अपमान है।

तौकीर रजा ने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि लाल कृष्ण आडवाणी ने देश को बाँटने और नफरत फ़ैलाने का काम किया है। उन्होंने कहा:

“देश प्रेम की वजह से मुस्लिमों ने सब्र किया हुआ है, हमारे नौजवान अगर कंट्रोल से बाहर हो गए तो हिंदुस्तान में जंग का माहौल हो जाएगा।”

मौलाना तौकीर रज़ा ने लाल कृष्ण आडवाणी और मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह भारत रत्न का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि जिसने अच्छे काम किए हों, उन्हें भारत रत्न दिया जाता है। लेकिन लाल कृष्ण आडवाणी ने कोई अच्छा काम नहीं किया है।

मौलाना तौकीर रजा खान ने कहा कि मुसलमान डरा हुआ नहीं है। मुसलमान नहीं चाहता कि मुल्क में फिरका परस्ती का माहौल बने। मुसलमान नहीं चाहता कि देश में जंग का माहौल बने, मस्जिद तोड़ दी जाए, मुसलमान की लिंचिंग कर दी जाए, उनकी बेइज्जती कर दी जाए, उनकी बेटियों को गुमराह कर दिया जाए। उनके अनुसार सभी मुस्लिम अपने देश से प्यार करते हैं, वो किसी से डरते नहीं हैं और ये सब देश प्रेम की वजह से सब्र कर रहे हैं।

इससे पहले जमात-ए-इस्लामी हिंद के सचिव मलिक मोहतसिम खान ने कहा कि मौजूदा सरकार से ऐसे ही लोगों को सम्मानित करने की उम्मीद की जा सकती है, जिन्होंने बाबरी ढाँचे को तोड़ा है। मोहतसिम खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार नफरत के बलबूते अपनी राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती है। मौजूदा सरकार ऐसे लोगों को इनाम देगी, जो अमन और शांति नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ये देश के लोगों को सोचना चाहिए कि क्या मौजूदा सरकार कानून के हिसाब से काम कर रही है।

बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ सम्मान से नवाज़ा जाएगा। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिए ये घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उन्हें ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। पीएम मोदी ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता से बात करके उन्हें इसके लिए बधाई भी दी।

भगवान राम का मजाक और देवी सीता को सिगरेट पीते हुए दिखाने के मामले में प्रोफेसर सहित 6 गिरफ्तार, कोर्ट से मिली जमानत: पुणे यूनिवर्सिटी ने माँगी माफी

पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय में रामलीला पर आधारित नाटक के मंचन के दौरान भगवान राम और देवी सीता का मजाक उड़ाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने माफी माँगी है। वहीं, नाटक के आपत्तिजनक मंचन के जरिए हिंदुओं की धार्मिक भावना को आहत करने पर पुलिस ने विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और पाँच विद्यार्थियों को गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, बाद में सबको बेल मिल गई।

दरअसल, शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को विश्वविद्यालय परिसर में ललित कला विभाग की ओर से नाटक ‘जब वी मेट’ का मंचन किया था। इसमें भगवान राम, माता सीता और भगवान बजरंग बली का मजाक बनाया गया था। इस में माता सीता को सिगरेट पीते हुए भी दिखाया गया था। इसके बाद ABVP के छात्रों ने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद ABVP के छात्रों ने थाने में जाकर शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने ललित कला केंद्र के प्रमुख और विश्वविद्यालय में थिएटर आर्ट्स के प्रोफेसर डॉक्टर प्रवीण दत्तात्रेय भोले और पाँच छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। जिन छात्रों को गिरफ्तार किया गया, उनके नाम हैं- भावेश राजेंद्र पाटिल, जय पेडणेकर, प्रथमेश सावंत, हृषिकेश दलवी और यश चिखले। पाटिल ने नाटक लिखा और निर्देशित किया था, जबकि अन्य छात्रों ने अभिनय किया था।

पुलिस ने कहा कि इन छह लोगों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295A (धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना), 294 (अश्लील कृत्य और गाने), 143/149 (गैरकानूनी सभा), 147 (दंगा करने की सजा), 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाना) सहित सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए) 2003 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद शनिवार को पुणे की एक अदालत में पेश किया। अदालत ने उन्हें मजिस्ट्रेट हिरासत में भेज दिया। इसके बाद आरोपितों ने जमानत के लिए आवेदन किया। इसके बाद कोर्ट ने आरोपितों को जमानत दे दी। हालाँकि, आरोपियों को सप्ताह में दो बार पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने के लिए कोर्ट ने कहा है।

उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके माफी माँगी है। इसके साथ ही मामले की जाँच के लिए सेवानिवृत्त एक जिला जज की अध्यक्षता में एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया है। विश्वविद्यालय ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “किसी भी व्यक्ति, किंवदंती या ऐतिहासिक शख्सियत की पैरोडी पूरी तरह से गलत और निषिद्ध है।”

वहीं, शनिवार की शाम को भाजपा एवं हिंदू संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स के साइन-बोर्ड पर स्याही पोतकर अपना विरोध जताया। विश्वविद्यालय परिसर में किसी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति ना बिगड़े, इसके लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रो वाइस चांसलर पराग कालकर ने कहा कि विश्वविद्यालय विभाग प्रमुख से स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमें अभी तक नहीं पता कि यह अभ्यास था या व्यवहारिक। हमें यह भी पता लगाना होगा कि इस सत्र के लिए इतने सारे लोगों को क्यों आमंत्रित किया गया था।”

ताजमहल में रोको उर्स का आयोजन, न्यायालय में याचिका: न नमाज का ऐतिहासिक प्रमाण, ना ASI से अनुमति – कोर्ट में दिया सारे सबूत

उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित ताजमहल में मुग़ल शासक शाहजहाँ का सालाना उर्स मनाने के विरुद्ध आगरा के एक न्यायालय में याचिका डाली गई है। हिन्दू महासभा ने कहा है कि ताजमहल में होने वाले उर्स के लिए सरकार की अनुमति नहीं है, फिर भी इसका आयोजन किया जा रहा है।

अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं मीना देवी दिवाकर और सौरभ शर्मा ने शुक्रवार (2 फरवरी, 2024) को आगरा के जिला न्यायालय के समक्ष एक याचिका लगाई। इसमें आगामी 6-8 फरवरी के बीच ताजमहल में होने वाले शाहजहाँ के उर्स पर रोक लगाने की माँग की गई है।

6-8 फरवरी के बीच आगरा की ताजगंज कमिटी मुग़ल शासक शाहजहाँ की मौत का 369वाँ उर्स मनाएगी। इस्लाम का सूफी मत मानने वाले उर्स का आयोजन किसी बड़ी हस्ती की बरसी पर करते हैं। आगरा के ताजमहल में इसका आयोजन ताजगंज कमिटी के सैयद इब्राहिम जैदी करवा रहे हैं।

इब्राहिम जैदी को हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इस याचिका में प्रतिवादी बनाया है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि ताजमहल ASI संरक्षित है। इसके अंदर उर्स मनाने के लिए अनुमति ASI से नहीं ली गई है। उनका कहना है कि ASI के उर्स को अनुमति ना देने के सम्बन्ध में उन्हें एक RTI से जानकारी प्राप्त हुई है।

हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं ने कहा है कि इस उर्स का आयोजन करवाने वाले जैदी का किसी भी प्रकार से ताजमहल से कोई सम्बन्ध नहीं है। ना ही वह ताजमहल में कर्मचारी हैं और ना ही वह स्मारक से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनके उर्स आयोजित करने का कोई तुक नहीं बनता है।

हिन्दू महासभा के जिलाध्यक्ष और इस मामले में याचिकाकर्ता सौरभ शर्मा ने कहा है कि ASI संरक्षित स्मारकों में कोई मजहबी काम नहीं हो सकते हैं, ऐसे में यह उर्स मनाया जाना अवैध है। हिन्दू महासभा ने इस उर्स के दौरान ताजमहल में प्रवेश निशुल्क किए जाने को भी चुनौती दी है।

अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के प्रवक्ता संजय जाट के अनुसार न तो मुगलों, न ही अंग्रेजों और न ही कभी केंद्र सरकार ने ताज महल परिसर के अंदर उर्स की इजाजत दी थी। उन्होंने बताया:

“यह याचिका आगरा के इतिहासकार राज किशोर राजे द्वारा आरटीआई से प्राप्त एक जानकारी के आधार पर दायर की गई है। आरटीआई में, उन्होंने ASI से पूछा कि ताज महल परिसर में ‘उर्स’ समारोह और ‘नमाज़’ की अनुमति किसने दी। इस पर ASI ने जवाब दिया था, ”न तो मुगलों, न ही ब्रिटिश सरकार या भारत सरकार ने ताज महल में ‘उर्स’ मनाने की अनुमति दी है।”

यह याचिका कोर्ट में डालने वाले संगठन हिन्दू महासभा के प्रवक्ता संजय जाट ने बताया कि वह ताजमहल के सर्वे के लिए भी याचिका डालेंगे।

औरंगजेब ने ही तुड़वाया था केशवदेव मंदिर, बनवा दिया था ईदगाह ढाँचा: ASI ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड से दिया जवाब, हिंदू पक्ष कोर्ट में सबूत के तौर पर करेगा पेश

मुस्लिम समाज चाहे कितना भी दावा करे कि किसी भी मुस्लिम शासक ने हिंदू मंदिरों को नहीं तोड़ा, लेकिन सच्चाई इससे अलग है और ऐतिहासिक रिकॉर्ड इसकी पुष्टि भी करते हैं। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि को तोड़कर वहाँ मुगल आक्रांता औरंगजेब ने शाही ईदगाह ढाँचा खड़ा करवाया था। एक आरटीआई के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर यह बात कही है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले अजय प्रताप सिंह ने देश भर के मंदिरों के बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से आरटीआई के तहत जानकारी माँगी थी। इसमें मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बारे में भी पूछा गया था। इसी जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, आगरा ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हवाला दिया है।

आरटीआई में दिए गए जवाब में कहा गया है कि अंग्रेजों के शासन के दौरान सन 1920 में इलाहाबाद से प्रकाशित गजट में यूपी के विभिन्न जिलों के 39 स्मारकों की सूची दी गई है। इसमें 37 नंबर पर कटरा केशवदेव भूमि पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख है। उसमें कहा गया है कि मस्जिद के स्थान पर पहले कटरा टीले पर केशवदेव मंदिर था, जिसे ध्वस्त करके मस्जिद बनाया गया है।

पुरातत्व विभाग की पुष्टि के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्षकार और कृष्ण जन्मभूमि के वादी एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह इस महत्वपूर्ण साक्ष्‍य को 22 फरवरी 2024 को हाई कोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि यह सरकार का गजट है। इससे स्थिति एकदम साफ हो गई है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने आगे बताया कि आगे अगर मंदिर का ASI सर्वे होता है तो आरटीआई में मिला यह जवाब उसमें बड़ा सबूत साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा खुद सूचना दी गई है।

बता दें कि मथुरा का केशवदेव मंदिर अति प्राचीन मंदिर है, लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना। कहा जाता है कि जिस जगह पर कंस के कारागार में देवकी के गर्भ से भगवान विष्णु के परमावतार श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, कालांतर में वहीं पर केशवदेव मंदिर का निर्माण हुआ था। श्रीकृष्ण के प्रपौत्र व्रज और व्रजनाभ ने राजा परीक्षित के सहयोग से इस मंदिर का निर्माण कराया था। जिसे समय-समय पर अन्य राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार कराया।

हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल आक्रांता औरंगजेब ने 1670 में फरमान जारी करके मथुरा में भगवा केशवदेव के मंदिर को तोड़ने के लिए फरमान जारी किया था। इसके बाद वहाँ शाही ईदगाह मस्जिद बना दी गई। कहा जाता है कि इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए औरंगजेब खुद भी आया था।

मथुरा का यह विवाद 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थानभूमि के पास 10.9 एकड़ जमीन का मालिकाना हक है, जबकि ढाई एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है। हिंदू पक्ष इस पूरी जमीन पर अपना दावा करता है। हिंदू पक्ष ईदगाह ढाँचे को हटाकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर बनाने की भी माँग करता है।

गुजरात में कन्हैया लाल की तरह हत्या का प्रयास: हिंदू दर्जी ने कहा- हनुमान चालीसा को लेकर जानलेवा हमला, पुलिस बोली- शिकायत में इसका जिक्र नहीं

गुजरात के भावनगर में राजस्थान के दर्जी कन्हैयालाल हत्याकांड जैसी वारदात को दोहराने की कोशिश की गई है। पीड़ित विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े यहाँ के एक हिंदू दुकानदार की हत्या करने की कोशिश की गई। हमलावरों की पहचान साहिल, शौकत और मुन्ना के रूप में हुई है। पीड़ित का आरोप है कि हनुमान चालीसा बजाने पर पहले भी उन पर हमला किया जा चुका है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, भावनगर के कुंभरवाड़ा में राजेंद्र भाई चौहान दर्जी का काम करते हैं। उन्होंने बोरातलाव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है कि 01 फरवरी 2024 की शाम करीब सात बजे वो अपनी दुकान में काम कर रहे थे। उसी समय पड़ोस में रहने वाले साहिल पादर्शी और शौकत माँकड़ वहाँ आ गए।

शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि उस समय साहिल के हाथ में लोहे का पाइप था। दुकान पर आने के बाद दोनों ने उनके साथ गाली-गलौच शुरू कर दी। इस दौरान साहिल ने कहा, “तुमने मेरे दादा बिलाल भाई के खिलाफ शिकायत क्यों की है?” इतना कहकर साहिल ने लोहे की पाइप से हमला कर दिया। इस हमले में उनके दाहिने कान के ऊपर सिर में चोट लगी। इससे उनके सिर से खून निकलने लगा।

इसके बाद राजेंद्र भाई चिल्लाने लगे और शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुँचे। लोगों को आता देख हमलावर वहाँ से भाग खड़े हुए। साहिल और शौकत के हमले में घायल राजेंद्र भाई चौहान को इलाज के लिए लोगों ने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद उनका इलाज शुरू किया या। यह घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

शिकायत में कहा गया है कि कुछ दिन पहले साहिल का अब्बू मुन्ना बिलाल पदर्षी उनकी दुकान पर आया था। वहाँ पहुँचकर उसने राजेंद्र भाई चौहान को धमकाते हुए पूछा था कि उन्होंने उसके बेटे साहिल के खिलाफ शिकायत क्यों करवाई है। मुन्ना बिलाल ने धमकी दी कि अगर राजेंद्र भाई ने उसके बेटे के खिलाफ दी गई शिकायत वापस नहीं ली तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

हनुमान चालीसा बजाने को लेकर अक्सर धमकी देते थे: पीड़ित ने ऑपइंडिया से बातचीत की 

राजेंद्र भाई चौहान से ऑपइंडिया ने संपर्क किया और इस पूरे घटना क्रम की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले पड़ोस में रहने वाले शौकत से उनका विवाद हो गया था। इसके बाद बिलाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी। राजेंद्र भाई ने बताया कि यह हमला हनुमान चालीसा बजाने के मुद्दे पर हुई झड़प के जवाब में किया गया था।

उन्होंने ऑपइंडिया से बताया, ”मैं अपनी दुकान में हनुमान चालीसा बजाता रहता हूँ, जिसे लेकर 6-7 महीने पहले आरोपियों से हमारी झड़प हो गई थी। एक बार जब हनुमान चालीसा चल रही थी तो आरोपितों ने आकर टेप बंद कर दिया था।” उन्होंने कहा कि आसपास हिंदू-मुस्लिम, दोनों समुदायों के घर हैं, लेकिन हनुमान चालीसा का विरोध सिर्फ यही परिवार करता है। बाकी किसी को कोई आपत्ति नहीं थी।

हनुमान चालीसा की वजह से ही 31 जनवरी 2024 को भी झगड़ा हुआ था। इसको लेकर दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत की थी। पुलिस में शिकायत दर्ज करा कर लौटे राजेंद्र भाई अपने दुकान के पास सीसीटीवी कैमरा लगवा रहे थे, तभी उसके साथ यह मारपीट हुई। उनका कहना है कि यह पिटाई हनुमान चालीसा के मुद्दे पर चल रहे झगड़े में ही की गई है।

भारत-पाक मैच के दौरान भी हुआ था हंगामा

राजेंद्रभाई चौहान ने आगे बताया कि अक्टूबर में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट वर्ल्ड कप मैच के दौरान जब लड़के चौक पर पटाखे फोड़ रहे थे तो बिलाल के परिवार का दामाद उनसे भिड़ गया था। उसने जान से मारने की धमकी भी दी थी। इसके बाद राजेंद्र भाई ने शिकायत दर्ज कराई थी।

जब उनसे एफआईआर में हनुमान चालीसा मुद्दे का जिक्र नहीं होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैंने पुलिस को सारी जानकारी दी, लेकिन उन्होंने एफआईआर में इसका जिक्र नहीं किया तो मैं क्या कर सकता हूँ? मैंने सारी जानकारी पुलिस को दे दी थी।” इस मामले में कुछ समय पहले ही कुछ पुलिस अधिकारी उनके घर आकर बयान ले गए थे।

राजेंद्रभाई ने बताया कि वो विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। पिछले 2 वर्षों से वे प्रत्येक हनुमान जयंती के दिन शोभा यात्रा निकालने के क्रम में सक्रिय रहते हैं। इसके साथ ही वो आसपास के हिंदुओं को लेकर काँवड़ यात्रा भी निकालते हैं। इसके अलावा भी वह कई हिंदूवादी गतिविधियों में शामिल रहते हैं।

भावनगर पुलिस बोली- जाँच जारी है

ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस से भी संपर्क किया। पूरे मामले की जाँच का जिम्मा संभाल रहे अधिकारी और बोरतलाव थाने के पीएसआई केसी रेहवार ने हमें बताया, “एफआईआर मौजूदा घटना के आधार पर दर्ज की गई है। इसलिए इसमें हनुमान चालीसा का कोई जिक्र नहीं है। दोनों पक्षों में आमना-सामना हुआ, जिसमें याचिका दायर होने के बाद एहतियाती कदम उठाए गए। हम जाँच कर रहे हैं जाँच के बाद ही पूरी जानकारी सामने आएगी।” 

‘यह मेरे आदर्शों और सिद्धांतों का सम्मान’: देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ मिलने पर भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने PM मोदी का जताया आभार

पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की घोषणा के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि उन आदर्शों और सिद्धांतों के लिए भी है, जिनकी उन्होंने जीवन भर सेवा की है। इस सम्मान के लिए भारत सरकार का आभार जताते हुए उन्होंने कहा ये उनके लिए अत्यंत गौरव की बात है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (3 फरवरी 2024) को BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की घोषणा की। इस सम्मान की घोषणा के बाद भाजपा एवं अन्य दलों के नेताओं ने लालकृष्ण आडवाणी को बधाई दी।

खुद को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने पर लालकृष्ण आडवाणी ने पत्र के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में शामिल होने के बाद से जीवन में मुझे जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे निभाते हुए अपने प्रिय देश की समर्पित और निस्वार्थ सेवा करने में ही मुझे खुशी मिली। मुझे भारत रत्न देने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को हार्दिक धन्यवाद देता हूँ।”

लालकृष्ण आडवाणी ने आगे लिखा, “14 साल की उम्र में जबसे मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में स्वयंसेवक के रूप में शामिल हुआ, तब से मैंने केवल एक ही चीज की चाह की। वह है – जीवन में मुझे जो भी कार्य सौंपा गया है, उसमें अपने प्यारे देश की समर्पित और निस्वार्थ सेवा करना। जिस चीज ने मेरे जीवन को प्रेरित किया है, वह आदर्श वाक्य है इदं न मम- यह जीवन मेरा नहीं है। मेरा जीवन मेरे राष्ट्र के लिए है।”

इस अवसर पर उन्होंने पंडित दीन दयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। इस सम्मान के लिए उन्होंने देश के लोगों, भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं और आरएसएस के स्वयंसेवकों को दिया, जिनके साथ उन्होंने अपने जीवनकाल में काम किया। उन्होंने अपने परिवार, खासकर अपनी दिवंगत पत्नी कमला का भी आभार जताया। उन्होंने अपनी पत्नी को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिए उन्हें भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। पीएम मोदी ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता से बात करके उन्हें बधाई भी दी। प्रधानमंत्री ने आडवाणी को इस समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक बताया और कहा कि भारत के विकास में उनका योगदान चिरस्मरणीय है।

लालकृष्ण आडवाणी को मिला भारत रत्न तो बौखलाया जमात-ए-इस्लामी, बोला- बाबरी तोड़ने वालों को ईनाम दे रही सरकार, नफरत की कर रही है राजनीति

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिए जाने के बाद जमात-ए-इस्लामी हिंद की प्रतिक्रिया सामने आई है। जमात के सचिव मलिक मोहतसिम खान ने कहा है कि मौजूदा सरकार से ऐसे ही लोगों को सम्मानित करने की उम्मीद की जा सकती है, जिन्होंने बाबरी ढाँचे को तोड़ा है।

मोहतसिम खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार नफरत के बलबूते अपनी राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती है। मौजूदा सरकार ऐसे लोगों को इनाम देगी, जो अमन और शांति नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ये देश के लोगों को सोचना चाहिए कि क्या मौजूदा सरकार कानून के हिसाब से काम कर रही है।

बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के मुद्दे पर मोहतसिम खान ने आगे कहा कि इस सरकार से सवाल पूछने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि वो नफरत की बुनियाद पर ही अपना काम चलाना चाहती है। उन्होंने देश की जनता से अपील की है कि देश का जो माहौल बन रहा है, उसे बदलना चाहिए। जमात ने कहा कि अब न्यायालयों पर से विश्वास उठ रहा है।

ज्ञानवापी और मथुरा का भी किया जिक्र

ज्ञानवापी में पूजा-पाठ शुरू होने और कोर्ट से जुड़े मामलों को लेकर यह प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई थी। मोहतसिम खान ने कहा, “500-600 साल से यह मस्जिद वहाँ है और आज भी नमाज़ों का सिलसिला है। पड़ोस में वहाँ मंदिर होने पर मुस्लिम भाइयों को कोई शिकायत नहीं है। पड़ोस में मस्जिद होने पर हिन्दू भाइयों को भी कोई शिकायत नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “एएसआई की रिपोर्ट पर कोर्ट में बहस नहीं हुई है। यह रिपोर्ट सही भी हो सकती है, गलत भी हो सकती है। इंतजामिया कमेटी हाई कोर्ट में जाना चाहती थी, लेकिन सुबह होते ही प्रशासन ने फैसला इम्पलीमेंट कर दिया गया।” उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट और जिला कोर्ट जो मज़लूम है, उसका इंसाफ करे।

मोहतसिम खान ने कहा, “जामा मस्जिद बनारस के मामले में जो कोर्ट का रवैया है वह सही नहीं है। महरौली में एक मस्जिद थी, वह जमींदोज कर दी गई, सुनहरी मस्जिद को हटाने का मामला सामने आया। यह बात हमें परेशान कर रही है। आज काशी की बात हो रही है और कल मथुरा का आएगा।”

बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ सम्मान से नवाज़ा जाएगा। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिए ये घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उन्हें ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। पीएम मोदी ने भाजपा के वयोवृद्ध नेता से बात करके उन्हें इसके लिए बधाई भी दी।

‘शैक्षणिक संस्थान शिक्षा के लिए, धर्म प्रचार के नहीं’: राजस्थान के स्कूलों में हिजाब बैन की माँग को लेकर अनशन पर बैठी मुस्लिम लड़की, कहा- CAA और UCC भी लागू हो

कर्नाटक के बाद अब राजस्थान में हिजाब का हिजाब गर्म है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी कह चुके हैं कि स्कूलों में ड्रेस कोड लागू होगा। अब स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लागने की माँग को लेकर मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाली गुजरात की तंजिम मेरानी अपने पिता के साथ पिछले तीन दिनों से जयपुर सांगनेर में अनशन पर बैठी हैं।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, तंजिम मेरानी वही महिला हैं, जो कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहरा चुकी हैं। अब वो स्कूलों में हिजाब पहनने की खिलाफत कर रही हैं। तंजिम का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में लोग शिक्षा के लिए जाते हैं, न कि धर्म का प्रचार करने के लिए। इसलिए स्कूल-कॉलेज में हिजाब पर पाबंदी लगी चाहिए। इसको लेकर तंजिम उन्हें धमकियाँ भी मिल रही हैं।

तंजिम का कहना है कि भले ही कट्टरपंथी उन्हें धमकियाँ दें, लेकिन उन्हें इन धमकियों से डर नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी उनके खिलाफ कई फतवे जारी हुए हैं। तंजिम ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लागू करने तक आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने भाजपा सरकार से प्रदेश के सभी स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही राज्य में नागरिक संशोधन कानून और समान नागरिक संहिता जल्द-से-जल्द लागू करने की माँग की है। उन्होंने कहा, “मैं मुस्लिम समाज से आती हूँ। इसका मतलब ये नहीं कि मैं स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में हिजाब पहनूँ। इसलिए राजस्थान से हिजाब के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है, जो पूरे देश में चलेगा।”

तंजिम के पिता अमीर मेरानी भी अपनी बेटी की बातों से इत्तेफाक रखते हैं। अमीर ने कहा कि जो गलत है, वो गलत है। उसका विरोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तंजीम के खिलाफ कई फतवे जारी हुए हैं, लेकिन डरने से बदलाव नहीं आएगा। इसलिए वो भी अपनी बेटी के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर खड़े हैं। उन्होंने पूछा, “कल कोई मुस्लिम लड़की कलेक्टर बन जाएगी तो क्या कुर्सी पर हिजाब पहनकर बैठेगी?”

बता दें कि अहमदाबाद शहर की न्यू ट्यूलिप इंटरनैशनल स्कूल की छात्रा तंजिम मेरानी अगस्त 2017 में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया था। इसके साथ ही उन्होंने वहाँ रक्षाबंधन का त्यौहार भी मनाया था। तंजिम साल 2016 में 15 अगस्त को भी तिरंगा फहराने श्रीनगर पहुँची थीं, लेकिन सिक्योरिटी के मद्देनजर उन्हें श्रीनगर एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया था।

राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने 30 जनवरी 2024 को राज्य के सभी स्कूलों में माँ सरस्वती की मूर्ति स्थापित और ड्रेस कोड लागू करने का आदेश दिया था। आदेश में कहा गया था कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में माँ सरस्वती की मूर्ति लगाना अनिवार्य होगा और यह मूर्ति स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाई जाएगी। इसके अलावा सभी स्कूलों में छात्रों के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाएगा। यह ड्रेस कोड छात्रों की उम्र और लिंग के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना था कि वर्तमान में स्कूल में जो हालात बने हुए हैं उसके लिए वे जाँच के आदेश देंगे। शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि वे स्कूलों में वे धर्मांतरण नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि जिस स्कूल में माँ सरस्वती की तस्वीर नहीं होगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि स्कूलों में ड्रेस कोड ही लागू होंगे।

पुराना हिस्ट्रीशीटर है 3 लोगों का हत्यारा 70 साल का लल्लन खान: कभी घोड़े पर चलता और खुद को कहता ‘गब्बर खान’, घर से बरामद हुए थे 30 माउजर

लखनऊ में ट्रिपल मर्डर केस के मुख्य आरोपित लल्लन खान पुराना हिस्ट्रीशीटर है। इसके बावजूद उसके पास लाइसेंसी हथियार है। हत्यारा लल्लन खान 70 साल का है, लेकिन पूरे ठाठ से रहता है। अभी वो और उसका बेटा फरार है। इस मामले में 4 लोगों में से सिर्फ एक आरोपित, उसका ड्राइवर ही गिरफ्तार हुआ है। बता दें कि शुक्रवार (02 फरवरी 2024) को लखनऊ के मलिहाबाद में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या कर दी गई। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।

पुराना अपराधी रहा है लल्लन खान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लल्लन खान पर 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वो मलिहाबाद थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है। इतने लंबे आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद उनके पास न सिर्फ लाइसेंसी राइफल है, बल्कि उसका पासपोर्ट भी है और वो विदेश भी जा चुका है। पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि वो खुद को गब्बर खान कहलाना पसंद करता है। उसे हथियारों का शौक था।

वहीं, एक रिपोर्ट के मुताबिक, लल्लन खान पर कभी 24 केस दर्ज हुआ करते थे। बताया जाता है कि 80 के दशक में लखनऊ में लल्लन खान की तूती बोलती थी। वह घोड़े से चला करता था और खुद को गब्बर खान कहलाना पसंद करता था। लल्लन के खिलाफ आखिरी FIR साल 1999 में दर्ज हुई थी। हालाँकि, वो अपने पैसों और पहुँच के दम पर तमाम केसों से बचा रहता था।

यूपी तक के मुताबिक, पूर्व डीजीपी बृजलाल ने बताया, “साल 1985 में पुलिस ने इसके घर पर दबिश दी थी। इस दौरान लल्लन खान के घर से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे। एक ही लाइसेंस पर कई हथियार रखे थे। उसके घर से इस दौरान करीब 30 माउजर मिले थी। उस दौरान लल्लन खान के घर से बरामद हुए हथियारों को देखकर पुलिस भी हैरान रह गई थी।”

साल 2010 में बना पासपोर्ट, पोलैंड भी जा चुका है

मलिहाबाद के रहने वाले लल्लन खान के तीन बेटे हैं। उसके दो बेटे पोलैंड में बस चुके हैं। वहीं, तीसरा बेटा सिराज लखनऊ में ही रहता है। वह अपने अब्बू के साथ हत्याकांड को अंजाम दिया था। लल्लन खान खुद भी पोलैंड घूम चुका है। उसका पासपोर्ट कैसे बना, अब पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है। वैसे, लल्लन खान करीब 24 साल से एकदम खामोश था।

दरअसल, शुक्रवार (02 फरवरी 2024) को मलिहाबाद में एक जमीनी विवाद में लल्लन खान ने उसके बेटे सिराज, ड्राइवर एवं एक अन्य शख्स को लेकर अपने भतीजे फरीद खान के घर पर धावा बोल दिया। लल्लन खान और उसके साथियों ने पड़ोसी परिवार के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। लल्लन खान ने टेलीस्कोप लगी अपनी लाइसेंसी राइफल से पाँच गोलियाँ मारीं।

घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित वहाँ से फरार हो गए। ये वारदात मलिहाबाद के मोहम्मदनगर तालुकेदारी में हुई। मृतकों में फरहीन नाम की महिला, उसका बेटा और ताज नाम का उसका देवर शामिल हैं। लल्लन खान मृतक फरहीन का चचिया ससुर है। ये विवाद पुश्तैनी जमीन के एक टुकड़े को लेकर हुआ, जिसकी कीमत लगभग चार करोड़ रुपए बताई जा रही है। विवादित जमीन मीठेनगर में है।

इस वारदात की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से अपराधियों की पहचान की। फुटेज में 70 साल का लल्लन खान हाथ में हथियार लेकर फायरिंग करता नजर आ रहा है। इसके आधार पर पुलिस ने लल्लन, उसके बेटे, ड्राइवर और एक अन्य शख्स के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। इस मामले में मुख्य आरोपित समेत अन्य की तलाश में पाँच टीमें लगाई गई हैं।

‘गिरी हुई हरकत, शर्म आनी चाहिए’: ‘मौत’ के बाद इंस्टाग्राम पर प्रकट हुईं पूनम पांडेय तो सेलेब्स ने लताड़ा, कहा – कलियुग में स्वागत है

अभिनेत्री एवं मॉडल पूनम पांडेय की टीम द्वारा उनके इंस्टाग्राम हैंडल से बताया गया कि सर्वाइकल कैंसर से उनकी मौत हो चुकी है, लेकिन एक दिन बाद ही पूनम पांडेय ने एक वीडियो डाल आकर बताया कि उन्होंने बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ऐसा किया था। इसी बीच कई सेलेब्स ने उन्हें श्रद्धांजलि भी दे दी। अब इनमें से कई उनकी आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि ये सब पब्लिसिटी के लिए किया गया है। ये लोग कह रहे हैं कि चर्चा में बने रहने के लिए पूनम पांडेय ने ये सब किया है।

‘लॉकअप’ शो में कंटेस्टेंट रहीं डिजाइनर सायशा शिंदे ने कहा कि पूनम पांडेय को शर्म आनी चाहिए, उन्हें घोर निराशा हुई है। सायशा शिंदे ने भी पूनम पांडेय की मौत वाली खबर पर शोक जताते हुए पोस्ट किया था। अब उन्होंने कहा है, “तुम दोस्त बनाने लायक नहीं हो। तुम इसे जागरूकता कहती हो? बकवास बंद करो। मेरी माँ की ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी हुई है। किडनी फेल होने से मेरी बहन का निधन हो गया। मानसिक बीमारी से मेरी चाची चल बसीं। तुम्हारी तरह वो सब कभी वापस नहीं आ सकतीं।”

सायशा शिंदे ने कहा कि मौत न कोई मजाक है, न पब्लिसिटी स्टंट। उन्होंने कहा कि वो पूनम पांडेय को कभी माफ़ नहीं करेंगी। वहीं अभिनेत्री पूजा भट्ट ने भी पूनम पांडेय के लिए शोक जताने वाला ट्वीट अब डिलीट कर लिया है। उन्होंने कहा कि ये बीमारी से जूझ रहे लोगों का अपमान है। वहीं एक्टर अली गोनी ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताते हुए पूछा कि क्या ये आपको मजाकिया लगता है? उन्होंने कहा कि पूनम पांडेय और उनकी PR टीम का बॉयकॉट होना चाहिए, शर्म आती है।

गायक राहुल वैद्य ने पहले ही शक जताया था कि पूनम पांडेय की मौत नहीं हुई है और पूछा था कि क्या वो अकेले हैं जो ऐसा सोचते हैं? अब उन्होंने कहा है कि सनसनी मचाने के लिए इतनी गिरी हुई हरकत की गई है, कलियुग में स्वागत है। सोफी चौधरी, कुशा कपिला और रिद्धि डोगरा का भी नाम आपत्ति जताने वालों में शामिल है। शार्दुल पंडित ने कहा कि ये बिलकुल भी ‘कूल’ नहीं है। सोनल चौहान ने इसे शर्मनाक करार दिया। श्रेनु पारेख ने कहा कि अब क्या देखना बाकी रह गया? राखी सावंत ने पूछा कि ऐसा प्रैंक कौन करता है।