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‘राहुल चोर है, मुँह छिपा के चल दिए, सामने कहाँ आए… हम लोग ‘गोस्सा’ हो गए उनसे’: रोती महिला कार्यकर्ता ने पूछा, काहे चले गए, कैसे जुटेगा भारत?

राहुल गाँधी की न्याय यात्रा कॉन्ग्रेस पार्टी और खुद उनके लिए पनौती बनती जा रही है। यात्रा के दौरान राहुल गाँधी के काफिले की गाड़ी का शीशा तो टूट ही, उनके सहयोगी भी साथ छोड़ रहे हैं। अब कार्यकर्ता भी काफी गुस्से में हैं। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ही राहुल गाँधी को चोर बोल रहे हैं। यही नहीं, मंच से कार्यकर्ता सामूहिक इस्तीफे भी दे रहे हैं। जिस न्याय यात्रा पर राहुल गाँधी को इतना भरोसा था कि उन्हें राजनीतिक फायदा मिलेगा, वो न्याय यात्रा उनके लिए पनौती बनती जा रही है।

राहुल गाँधी की न्याय यात्रा बिहार के कटिहार में पहुँची उनसे मिलने की आस लगाकर बैठे कार्यकर्ताओं को मायूसी ही हाथ लगी। ये मायूसी गुस्से में बदल गई। वही कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता राहुल गाँधी को चोर कह दे रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारी तक कॉन्ग्रेस से नाराज हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में उनकी मायूसी और उनका गुस्सा साफ झलकता है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में एक महिला कहती है, “राहुल चोर है। चोर नहीं तो और क्या? मुँह छिपाकर चले गए। सामने कहाँ आए। सामने आते तब न जानते कि सामने आते।”

एक अन्य कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ने कहा, “हम सारे कार्यकर्ता रात भर जग करके, रात-दिन एक करके राहुल जी के दीदार के लिए बेचैन थे। एक महिला रो रही थी। उसकी भी आवाज उन तक नहीं पहुँची। तारिक अनवर यहाँ से सांसद का चुनाव लड़ते हैं, शकील साहब हैं। तौकीर जी हैं। तमाम लोगों के रहते हुए भी जब कार्यकर्ता का ही मान-सम्मान नहीं है तो कैसे जुटेगा भारत। पहले कार्यकर्ताओं को सम्मान दें। हम लोग बहुत मायूस हैं। जो पॉकेट से पार्टी को चलाने का काम करते हैं, वैसे लोगों को मैं कहना चाहता हूँ कि जनता और कार्यकर्ता से अगर नेता को दूर कीजिएगा तो उसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।”

एक अन्य महिला ने कहा, “राहुल गाँधी कहते हैं कि महिला के लिए ये करेंगे… वो करेंगे… क्या करेंगे? हम लोग रात से मेहनत कर रहे थे। झाड़ू मार रहे थे। सोच रहे थे कि सर आएँगे तो मुलाकात करेंगे। यहाँ से काफिला गुजरा तो हमलोगों से बात तक नहीं किया। हम लोग गुस्सा हो गए हैं।”

बता दें कि राहुल गाँधी की न्याय यात्रा असम से गुजरी तो पार्टी के कई नेता एक साथ पार्टी से निकल लिए। यात्रा पश्चिम बंगाल पहुँचती, तभी ममता बनर्जी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। वो पश्चिम बंगाल को पार करके बिहार पहुँचने पहले ही इंडी गठबंधन बनाने वाले नीतीश कुमार ने साथ छोड़ दिया। जिस महागठबंधन की तर्ज पर इंडी गठबंधन को बनाया गया था, वो भी धराशायी हो गया। पंजाब में आम आदमी पार्टी पहले ही ऐलान कर चुकी है कि कॉन्ग्रेस को यहाँ कुछ नहीं मिलेगा और रही-सही कसर अब कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं का गुस्सा पूरा कर दे रहा है।

राहुल गाँधी के काफिले की गाड़ी का शीशा टूटा

खबर है कि बिहार के कटिहार में राहुल गाँधी के काफिले में चल रही एक गाड़ी का शीशा टूट गया, जिससे अफरा-तफरी की नौबत आ गई। पश्चिम बंगाल से होकर बिहार में यात्रा कर रहे राहुल गाँधी बुधवार को फिर से पश्चिम बंगाल चले गए, लेकिन उससे पहले कटिहार में यह घटना हो गई। जिस समय ये घटना हुई, उस समय उनका काफिला डीएस कॉलेज के पास से गुजर रहा था।

कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा, “ग़लत खबर का स्पष्टीकरण ज़रूरी है। राहुल जी से मिलने अपार जनसमूह आया हुआ था। एक महिला उनसे मिलने के लिए जब एकदम से आगे आ गई, तब कार को अचानक रोकना पड़ा। सुरक्षा घेरे में इस्तेमाल किए जाने वाले रस्से से कार की विंडशील्ड टूट गई। राहुल जी न्याय की लड़ाई मुस्तैदी से लड़ रहे हैं और यह देश ना सिर्फ उनके साथ खड़ा है, बल्कि उनको सुरक्षित भी रखे रहेगा। ?”

दरअसल, कटिहार में रोड शो के दौरान शहीद चौक पर स्थित महात्मा गाँधी के प्रतिमा पर बिना माल्यार्पण किए ही राहुल गाँधी आगे बढ़ गए। वहाँ राहुल गाँधी बस से उतरकर अपनी काले रंग की एक्सयूवी के ऊपर सवार होकर आगे बढ़े। डीएस कॉलेज चौक के समीप युवा कार्यकर्ता मंच सजाकर राहुल गाँधी का इंतजार कर रहे थे।

मंच से युवा कार्यकर्ता इजहार अली, निक्कू सिंह सहित सैकड़ों महिला और पुरुष कार्यकर्ता राहुल गाँधी को माइक से आवाज लगाकर बुलाते रह गए। हालाँकि, राहुल गाँधी वहाँ नहीं रूके और ना ही मंच पर आए। इस बात से कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता काफी नाराज हो गए। राहुल गाँधी के लिए जिस मंच को सजाया गया था, उसी मंच से दर्जनों कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।

वैसे, राहुल गाँधी कितनी मुस्तैदी से न्याय यात्रा पूरी कर रहे हैं, वो दिख भी रहा है। असम में पूर्व महिला विधायक के ब्लॉउज पर कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता मजे ले रहे हैं तो उत्पीड़न के दोषी लोग यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद पर निडर होकर जमे बैठे हैं। भले ही इसके लिए कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं-नेताओं को पार्टी छोड़नी पड़ रही है।

बैंक अकाउंट में ₹41, ठाठ लूटे लग्जरी: दिल्ली के होटल को महिला ने लगाया 6 लाख का चूना, ₹2 लाख के स्पा का भी लिया मजा

दिल्ली के एक लग्जरी होटल से फर्जीवाड़े के आरोप में आंध्र प्रदेश की एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। महिला ने 15 दिन तक होटल के स्टाफ को बेवकूफ बनाया और सभी सुविधाओं का लाभ लेती रही। जब पुलिस ने उसकी जाँच की तो पता चला कि उसके खाते में मात्र 41 रुपए हैं।

जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश की रहने वाली महिला झाँसी रानी सैमुअल ने दिल्ली के एरोसिटी स्थित पुलमैन होटल में 13 दिसम्बर 2023 को एक कमरा लिया। उसने यह कमरा लेने के लिए एक फर्जी पहचान-पत्र दिखाया, जिस पर ईशा दवे नाम लिखा हुआ था। वह इस कमरे में 15 दिन तक रुकी रही।

इस दौरान वह होटल में मौजूद स्पा जैसी लग्जरी सुविधाओं का भी लाभ उठाती रही। उसने यहाँ ₹2.11 लाख की स्पा सुविधाओं का लाभ लिया। इस होटल में उसका कुल बिल लगभग ₹6 लाख पहुँच गया। इस दौरान जब भी उससे पैसे माँगे गए तो उसने ICICI बैंक के एप में भुगतान दिखा दिया।

होटल स्टाफ ने जब बाद में जाँच की तो पता चला कि उनके खाते में कोई पैसा नहीं आया है। इसके बाद उन्होंने इस महिला से पूरी जानकारी ली और शक होने पर पुलिस बुलाई। इसके बाद पता चला कि महिला जिस एप से भुगतान दिखा रही थी, वह फर्जी था।

जब पुलिस ने महिला को गिरफ्तार किया तो सामने आया कि उसके खाते में मात्र ₹41 थे। उसने पुलिस को बताया कि वह एक डॉक्टर है और उसका अमेरिका के न्यूयॉर्क में रहने वाला पति भी डॉक्टर है। पुलिस उसकी असली पहचान का पता लगा रही है।

महिला 13 जनवरी 2024 से पुलिस की गिरफ्त में है। बताया जा रहा है कि जाँच में वह दिल्ली पुलिस के साथ कोई सहयोग नहीं कर रही है। उससे पुलिस ने उसकी बैंक की जानकारी दिखाने को भी कहा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उसके बारे में पता लगाने के लिए आंध्र प्रदेश पुलिस से मदद माँगी है। उनसे आरोपित महिला के परिवार या उसके पति के बारे में जानकारी माँगी है।

गौरतलब है कि आरोपित महिला जिस होटल में रुकी थी, वह दिल्ली एयरपोर्ट के पास स्थित एक लग्जरी होटल है। यहाँ पर सामान्य तौर पर एक दिन का किराया लगभग ₹20,000 रहता है। इस होटल में स्पा और जिम जैसी महँगी सुविधाएँ भी उपलब्ध होती हैं।

‘माफ़ी माँगो या सोसाइटी छोड़ कर जाओ’: राम मंदिर के खिलाफ अनशन करने वाली मणिशंकर अय्यर की बेटी को RWA का नोटिस, कहा – घृणा मत फैलाओ, हमारा नाम खराब हो रहा

कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी सुरन्या ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के विरोध में अनशन रखा था, जिसके बाद अब वो मुसीबतों में घिर गई हैं। उन्होंने 3 दिनों का अनशन किया था और सनातन धर्म के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किए थे। अब वो जहाँ रहती हैं उसी सोसाइटी ने उनका विरोध किया है। सोसाइटी ने उन्हें पत्र लिख कर कहा कि या तो वो अपनी हरकत के लिए माफ़ी माँगें, या फिर सोसाइटी छोड़ कर चली जाएँ। सरन्या अय्यर दिल्ली के जंगपुरा इलाके में रहती हैं।

हालाँकि, सुरन्या अय्यर ने फेसबुक पर सफाई देते हुए कहा है कि जिस रेसिडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी (RWA)’ की बात हो रही है, वहाँ वो रहती ही नहीं हैं। साथ ही उन्होंने मीडिया से बात न करने का ऐलान करते हुए कहा कि मीडिया भारत में और विदेश में ज़हर व भ्रम फैलाने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि वो पिछले 50 वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दृष्टिकोणों के बीच पली-बढ़ी हैं, और एक्टिविज्म किया है। उन्होंने कहा कि वो सोशल मीडिया के माध्यम से ही अपनी बात रखेंगी।

इससे पहले मणिशंकर अय्यर की बेटी ने एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें उनकी माँ उन्हें शहद पिला कर उनका अनशन तुड़वाते हुए दिख रही हैं। इससे सोसाइटी के लोगों में नाराज़गी का माहौल पनप आया। लोग कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस नेता की बेटी माफ़ी माँगे। कुछ दिनों पहले मणिशंकर अय्यर की दूसरी बेटी यामिनी से जुड़े थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR)’ का अवैध गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था।

RWA सुरन्या अय्यर को भेजे गए पत्र में कहा है कि वहाँ के सभी बाशिंदे शांति से रहें और उनकी भावनाओं को ठेस न पहुँचे, ये ध्यान रखना उनकी जिम्मेदारी है। RWA ने सुरन्या अय्यर के फेसबुक पोस्ट की निंदा करते हुए कहा कि सुरन्या अय्यर को पता होना चाहिए कि ये मंदिर 500 वर्षों के संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5-0 से दिए गए फैसले के बाद बन रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच अविश्वास और घृणा नहीं फैलाया जाना चाहिए, इससे कॉलोनी का नाम खराब हो रहा है।

इससे पहले अनशन की सूचना देते हुए फेसबुक पर सुरन्या ने लिखा था, “दिल्ली सल्तनत ने भी भारत को बेशकीमती चीजें दी हैं, क्योंकि सूफी और अमीर खुसरो के अब्बा उनके साथ ही आए थे। उत्तर भारत की भाषा और संस्कृति खुसरो की एहसानमंद है। मुग़ल यहाँ मुस्लिमों को ही हरा कर आए थे। बाबर ने पंजाब में दौलत खान और दिल्ली में इब्राहिम लोदी को हराया। मुगलों ने राजपूतों के साथ वैवाहिक संबंध बनाए। मुगलों की नीति मंदिर तोड़ने की नहीं थी, उन्होंने तो मंदिर बनवाए। झूठ, हिंसा, द्वेष और प्रतिशोध पर बने मंदिर पर कोई कैसे ख़ुशी बना सकता है?”

‘बचपन से सुन रही गरीबी हटाओ का नारा, अब साकार होते देखा’: संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर का भी किया जिक्र, बजट सत्र शुरू

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बुधवार (31 जनवरी 2024) को संसद के आखिरी बजट सत्र की शुरुआत हो गई। सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों को संबोधित किया और सरकार के कामों को संसद को बताया। राष्ट्रपति ने कहा, “हमने बचपन से गरीबी हटाओ का नारा सुना था, लेकिन अब इसे साकार होते देख रहे हैं।” अगले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगी।

अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि नए सदन में यह उनका पहला संबोधन है। उन्होंने कहा, “आज़ादी के अमृतकाल की शुरुआत में यह भव्य भवन बना है। यहाँ एक भारत श्रेष्ठ भारत की महक भी है। भारत की सभ्यता और संस्कृति की चेतना भी है। इसमें हमारी लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं के सम्मान का प्रण भी है। आजादी के अमृतकाल उत्सव के दौरान मेरी माटी मेरा देश अभियान के तहत गाँवों की मिट्टी की अमृत कलश यात्रा निकाली गईं।”

राष्ट्रपति ने आगे कहा, “सत्तर हजार अमृत सरोवर बनाए हैं। दो करोड़ से ज्यादा पेड़ लगवाए। कर्त्तव्यपथ को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित की गई। पीएम स्मारक खोला गया है। तमाम संकटों के बीच भारत एक अग्रणी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर झंडा फहराने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। हमने अनुच्छेद 370 हटा दिया। हमने बचपन से गरीबी हटाओ का नारा सुना था, अब हम इसे साकार होते देख रहे हैं।”

आजादी के अमृत महोत्सव में हुए अभूतपूर्व काम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “यह हमारे संविधान के लागू होने का भी 75वाँ वर्ष है। इसी कालखंड में आजादी के 75 वर्ष का उत्सव, अमृत महोत्सव भी संपन्न हुआ है। इस दौरान देश भर में अनेक कार्यक्रम हुए। देश ने अपने गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। 75 साल बाद युवा पीढ़ी ने फिर स्वतन्त्रता संग्राम के उस कालखंड को जिया।” राष्ट्रपति ने कहा, “इस उत्सव के दौरान 2 लाख से ज्यादा शिला-फलकम स्थापित किए गए। 3 करोड़ से ज्यादा लोगों ने पंच प्राण की शपथ ली।”

उन्होंने आगे कहा, ” 70 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर बने। 2 लाख से ज्यादा अमृत वाटिकाओं का निर्माण हुआ। 16 करोड़ से ज्यादा लोगों ने तिरंगे के साथ सेल्फी अपलोड की। शांति निकेतन और होयसला मंदिर वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल हुए। साहिबज़ादों की याद में वीर बाल दिवस घोषित हुआ। भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया गया। विभाजन की विभीषिका को याद करते हुए 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस घोषित किया गया।”

सरकार ने किए कई अहम बदलाव

राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में सरकार द्वारा लाए गए महत्वपूर्ण विधेयकों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “बीते 12 महीनों में मेरी सरकार अनेक महत्वपूर्ण विधेयक लेकर भी आई। ये विधेयक, आप सभी संसद सदस्यों के सहयोग से आज कानून बन चुके हैं। ये ऐसे कानून हैं जो विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के मजबूत आधार हैं। 3 दशक बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करने के लिए मैं आपकी सराहना करती हूँ। इससे लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित हुई है। यह वीमेन लेड डेवलपमेंट के मेरी सरकार के संकल्प को मजबूत करता है। रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के अपने कमिटमेंट को मेरी सरकार ने लगातार जारी रखा है।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “सभ्यताओं के कालखंड में ऐसे पड़ाव आते हैं, जो सदियों का भविष्य तय करते हैं। भारत के इतिहास में भी ऐसे अनेक पड़ाव आए हैं। इस वर्ष 22 जनवरी 2024 को भी देश ऐसे ही एक पड़ाव का साक्षी बना है। सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो गए हैं। ये करोड़ों देशवासियों की आस्था है।” इस दौरान सांसदों ने सदन की मेज थपथपाकर स्वागत किया।

राष्ट्रपति बोलीं- 10 वर्ष की साधना का विस्तार हैं ये उपलब्धियाँ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “ये उपलब्धियाँ जो आज दिख रही हैं, वे बीते 10 वर्षों की साधना का विस्तार हैं। हम सभी बचपन से गरीबी हटाओ के नारे सुनते आ रहे थे। अब हम जीवन में पहली बार बड़े पैमाने पर गरीबी को दूर होते देख रहे हैं। नीति आयोग के अनुसार, मेरी सरकार के एक दशक के कार्यकाल में करीब 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं। यह प्रत्येक गरीब में नया विश्वास जगाने वाली बात है। जब 25 करोड़ लोगों की गरीबी दूर हो सकती है तो उसकी भी गरीबी दूर हो सकती है। आज अर्थव्यवस्था के विभिन्न आयामों को देखें तो यह विश्वास बढ़ता है कि भारत सही दिशा में है तथा सही निर्णय लेते हुए आगे बढ़ रहा है।”

डिजिटल इंडिया से जीवन और बिजनेस दोनों हुए आसान

अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने लगभग प्रत्येक मुद्दे को जगह दी। उन्होंने कहा, “मेरी सरकार का एक और बड़ा रिफॉर्म, डिजिटल इंडिया का निर्माण है। डिजिटल इंडिया ने भारत में जीवन और बिजनेस, दोनों को बहुत आसान बना दिया है। आज पूरी दुनिया मानती है कि यह भारत की बहुत बड़ी उपलब्धि है। विकसित देशों में भी भारत जैसा डिजिटल सिस्टम नहीं है। गाँवों में भी सामान्य खरीद-बिक्री डिजिटल तरीके से होगी, यह कुछ लोगों की कल्पना से भी परे था। आज दुनिया के कुल रियल टाइम डिजिटल लेनदेन का 46 प्रतिशत भारत में होता है। पिछले महीने UPI से रिकॉर्ड 1200 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए। इसके तहत 18 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड लेनदेन हुआ है।”

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले इस सरकार का ये आखिरी बजट सत्र है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2024 को सरकार का अंतरिम बजट पेश करेंगी। चूँकि कुछ समय बाद ही लोकसभा चुनाव हैं, ऐसे में पूर्ण बजट नहीं पेश होगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर दोनों सदनों में 2 फरवरी 2024 से चर्चा शुरू होगी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 फरवरी 2024 को दोपहर 2 बजे राज्यसभा में चर्चा का जवाब देंगे।

हिंदू महिला को फेसबुक पर फँसाया, फिर नशीला पदार्थ खिलाकर रेप किया: लखनऊ का अब्दुल वीडियो वायरल करने की धमकी देकर इस्लाम अपनाने का बनाने लगा दबाव

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक हिन्दू महिला के साथ सैयद अब्दुल आलिम जाफरी ने नशीला पदार्थ खिलाकर बलात्कार किया है। इतना ही नहीं, अब्दुल महिला के ऊपर इस्लाम में धर्मान्तरित होने और उसके साथ निकाह करने का भी दबाव बनाता था। पीड़िता ने जब विरोध किया तो उसका अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। आरोपित इंजीनियर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ की रहने वाली एक हिन्दू महिला से अब्दुल आलिम जाफरी ने साल 2020 में फेसबुक के माध्यम से जान पहचान बढ़ाई थी। अब्दुल ने अपना नाम निहाल बताया था। एक दिन अब्दुल ने महिला को मिलने के लिए बुलाया और नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान अब्दुल ने महिला का अश्लील वीडियो भी बना लिया। इसके बाद उसका लगातार शोषण करता रहा।

इसके कुछ दिनों के बाद अब्दुल इस हिन्दू महिला को इस्लाम कबूल कर निकाह करने का दबाव बनाने लगा। पीड़िता के अनुसार, अब्दुल गिफ्ट्स का लालच देकर इस्लाम अपनाने के लिए कहता था। हालाँकि, पीड़िता इसके लिए तैयार नहीं हुई। जब पीड़िता नहीं मानी तो अब्दुल धमकाने लगा। वह महिला को जान से मारने की धमकी भी देता था।

अब्दुल ने इस्लाम कबूल करके उसके साथ निकाह नहीं करने पर हिंदू को उसका निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। पीड़िता का कहना है कि अब्दुल जब भी लखनऊ आता था तो वह उसको मस्जिद और मदरसा ले जाने और नमाज पढ़वाने की कोशिश करता था। हिन्दू महिला ने उसकी प्रताड़ना से तंग आकर अपने रहने की जगह बदल दी, लेकिन अब्दुल ने उसका पीछा नहीं छोड़ा।

अब्दुल ने महिला के गाजीपुर स्थित नए घर का पता लगा लिया और वहाँ पर भी जाकर महिला को परेशान करता रहा। अब्दुल के डर से हिंदू महिला ने अपने घर से निकलना बंद कर दिया। इसके बावजूद भी अब्दुल ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे धमकाता रहा। आखिरकार तंग आकर महिला ने अब्दुल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने उसे नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपित अब्दुल लखनऊ के मडियाँव थाना क्षेत्र के शिवानी नगर का रहने वाला है और नोएडा में रहकर एक निजी सॉफ्टवेयर कम्पनी में काम करता है। वहीं, हिंदू महिला लखनऊ के गुडंबा थाना क्षेत्र की में रहती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का पति गुजरात में रहकर नौकरी करता है। इस मामले में पुलिस आगे की जाँच कर रही है।

‘राबड़ी मॉडल’ पर झारखंड में झगड़ा: पत्नी को CM बनाने चले हेमंत सोरेन पर भड़कीं सीता भाभी, कहा- पति ने JMM के लिए किया संघर्ष, अब नहीं करूँगी त्याग

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गिरफ्तार की तलवार लटक रही है। जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग में फँसे हेमंत सोरेन को ED (प्रवर्तन निदेशालय) 10 बार समन भेज चुकी है। 2 दिनों तक वो गायब भी रहे, दिल्ली से निकले तो राँची में प्रकट हुए। इसके बाद उन्होंने विधायकों संग बैठक बुलाई। चर्चा है कि वो अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को CM बना सकते हैं। हालाँकि, JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के संस्थापक शिबू सोरेन के घर में ही अब बगावत हो गया है, सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोक दिया है।

हेमंत सोरेन के राँची लौटने के बाद सत्ताधारी गठबंधन में शामिल झामुमो, कॉन्ग्रेस और राजद विधायकों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। ऐसे में चर्चा है कि हेमंत सोरेन सत्ता की बागडोर अपने हाथ में बनाए रखने के लिए ये सब कर रहे हैं। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन विधायक दल की नेता बन सकती हैं और राजभवन जाकर राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती हैं। कॉन्ग्रेस और राजद नेतृत्व ने हेमंत सोरेन के फैसले के समर्थन की बात कही है।

हालाँकि, चम्पई सोरेन और झाबा माँझी का नाम भी सामने आया है। सोरेन परिवार में आपसी विरोध बढ़ने की स्थिति में इन दोनों में से किसी एक पर भरोसा जताया जा सकता है। खबर है कि कल्पना सोरेन के नाम पर हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन और भाभी सीता सोरेन ने भी विरोध किया है। सीता सोरेन, शिबू सोरेन के बड़े बेटे दुर्गा सोरेन की पत्नी हैं। दुर्गा सोरेन की संदिग्ध मौत हो गई थी। अगर सोरेन परिवार आपस में लड़ा तो पार्टी में टूट का भी खतरा है।

सीता सोरेन ने स्पष्ट कह दिया है कि कल्पना सोरेन उन्हें सीएम के रूप में स्वीकार नहीं है। वो दुमका के जमा से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। यहीं से 1985 में उनके ससुर शिबू सोरेन और उनके दिवंगत पारी दुर्गा सोरेन भी 1995 व 2000 में विधायक चुने जा चुके हैं। नाराज़ सीता सोरेन अब विधायक दल की बैठक में भी नहीं पहुँची हैं। सीता सोरेन ने कहा कि उनके पति ने झामुमो की स्थापना के लिए काफी संघर्ष किया है, ऐसे में वो उपेक्षा होने पर चुप नहीं बैठेंगी।

दुर्गा सोरेन ने ये भी कहा कि उन्होंने अपनी 2 बच्चियों को काफी तकलीफ से पाला है। उन्होंने कहा कि वो घर की बड़ी बहू हैं और इस हिसाब से उनका हक़ बनता है। बकौल सीता सोरेन, उनकी बच्चियाँ अब बड़ी हो गई हैं और हेमंत सोरेन को उनसे स्नेह है तो उन्हें आशीर्वाद दें। इधर हेमंत सोरेन ने 43 विधायकों से समर्थन पत्र भी लिया है। सीता सोरेन का कहना है कि वो पार्टी को एकजुट रखना चाहती हैं, लेकिन वो अब और त्याग नहीं करेंगी। विधायकों की बैठक में कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं।

‘मजहब के लिए किया बलात्कार, उसे इस्लाम ना मानने की सजा देनी थी’: हावेरी में होटल से उठा कर किया था मुस्लिम महिला का बलात्कार, अब कोई अफ़सोस नहीं

कर्नाटक के होटल से हिंदू साथी के साथ ठहरी एक मुस्लिम महिला को उठाकर ले जाने वाले मुस्लिम लड़कों को उसका सामूहिक बलात्कार करने का कोई अफ़सोस नहीं है। आरोपितों ने पुलिस को बताया है कि यह बलात्कार उन्होंने अपने मजहब के लिए किया था, क्योंकि पीड़िता इस्लाम के रास्ते से भटक रही थी। पुलिस जाँच में और भी कई तथ्य सामने आए हैं।

पुलिस ने बताया, “पूछताछ के दौरान जिन सात आरोपितों ने पीड़िता से बलात्कार किया था, उन्होंने कोई अफ़सोस जाहिर नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह सब उन्होंने मजहब के लिए किया है। उन्होंने बताया कि महिला को पहले भी मुस्लिम छोड़कर अन्य धर्म के लोगों से मिलने-जुलने पर चेतावनी दी गई थी, लेकिन वह नहीं मानी। इसलिए उसका बलात्कार करके उसे सजा दी।”

घटना 7 जनवरी 2024 की है। कुछ मुस्लिम युवकों ने हावेरी के हनागल के एक होटल में हिन्दू व्यक्ति के साथ रुकी मुस्लिम महिला का यहाँ से अपहरण करके जंगल में लेकर गए थे और वहाँ अलग-अलग जगहों पर उससे सामूहिक बलात्कार किया था। उन्होंने हिन्दू पुरुष से भी मारपीट की थी। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। बाद में महिला ने मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में अब तक 18 मुस्लिमों युवकों को गिरफ्तार किया गया है।

हावेरी में बन गए हैं मुस्लिम गैंग

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि हावेरी में मुस्लिम युवकों ने दूसरे धर्म के लोगों के साथ सम्बन्ध रखने वाली मुस्लिम महिलाओं को परेशान करने के लिए कई ग्रुप बना लिए हैं। ये लोग व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े हैं और कोडवर्ड में बात करते हैं। ये ग्रुप आसपास के होटल, बस स्टैंडों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सक्रिय रहते हैं। ईगल, X, Y और Z आदि नाम के ऐसे ग्रुप सक्रिय हैं।

यह जब भी कोई अलग-अलग धर्मों के महिला पुरुष को साथ में देखते हैं तो उनको निशाना बनाते हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों के फ़ोन को जब्त करके फोरेंसिक जाँच के लिए भेजे गए हैं। उनसे डाटा रिकवर किया जा रहा है। एक आरोपित ने इस मामले में जमानत याचिका भी दायर की है। हालाँकि, पुलिस का कहना है वह पूरी कोशिश करेगी कि किसी भी आरोपित को जमानत ना मिले।

क्या थी घटना?

मामला कर्नाटक के हावेरी जिले का है और 7 जनवरी 2024 की है। उत्तर कन्नड़ जिले के रहने वाले एक हिन्दू युवक और एक मुस्लिम महिला होटल के एक कमरे में ठहरे थे। इसकी जानकारी मिलने पर अक्कीलुर के कुछ मुस्लिम युवक होटल पहुँच गए। वहाँ वीडियो बनाते हुए कमरे का नम्बर रिकॉर्ड किया। इसके बाद ये लोग कमरा खोलने को कहते हुए धमकियाँ दीं।

जब कपल ने होटल स्थित अपने कमरे को खोला तो आरोपितों ने कमरे में घुसकर उनके साथ मारपीट की। इनलोगों को हिंदू पुरुष की बुरी तरह पिटाई की। इसके साथ ही मुस्लिम महिला के साथ भी जमकर मारपीट की। इसके बाद ये मुस्लिम युवक महिला को उठाकर अपने ले गए थे और जंगल में तीन बार उसके साथ गैंगरेप किया था।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद यहाँ काफी बवाल मचा था। इस मामले में भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार से SIT जाँच की माँग की थी। पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में जाँच आगे बढ़ने पर पूरे गैंग का खुलासा हुआ और अब गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़कर 18 हो चुकी है।

‘बंगाल में कॉन्ग्रेस और CPIM को हराना है’ – ममता बनर्जी ने INDI गठबंधन के साथ किया ‘खेला’, UP में अखिलेश यादव ने दिखाई औकात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हराने के लिए बनाया गया INDI गठबंधन दिन प्रतिदिन तार-तार हो रहा है। अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भांजे अभिषेक बनर्जी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ यलगार का ऐलान कर दिया है। उधर अखिलेश यादव ने भी लोकसभा चुनाव के लिए पहली सूची जारी करके साफ़ कर दिया है कि वह उत्तर प्रदेश में कोई बड़ा समझौता कॉन्ग्रेस नेतृत्व के सामने नहीं करना चाहेंगे। 

ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कॉन्ग्रेस से बिना कोई समझौता किए हुए ही बंगाल के उत्तर हिस्से में एक पदयात्रा चालू कर दी है। यह पदयात्रा भी उन जिलों में हो रही है, जहाँ से कुछ ही समय पहले राहुल गाँधी गुजरे हैं। यहाँ वह यात्रा करने के साथ ही कॉन्ग्रेस पर हमला भी कर रही हैं। वह यहाँ कूचबिहार क्षेत्र में पदयात्राएँ कर रही हैं। 

बंगाल में बनर्जी & कम्पनी vs अधीर रंजन चौधरी

ममता बनर्जी ने बंगाल के इस्लामपुर में इस यात्रा के दौरान कहा, “तृणमूल कॉन्ग्रेस ही वह पार्टी है, जो आपके अधिकारों के लिए लड़ती है। हमें बंगाल में कॉन्ग्रेस और सीपीआईएम को हराने के लिए साथ आना होगा और एकजुट होना होगा।”

ममता बनर्जी ही नहीं बल्कि उनके भांजे सांसद अभिषेक बनर्जी भी कॉन्ग्रेस पर हमलावर हैं। वह बंगाल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी पर हमला बोल रहे हैं। 

उन्होंने अधीर रंजन के रवैये पर कहा, “अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वह बंगाल में राष्ट्रपति शासन चाहते हैं। वह कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं और इंडिया ब्लॉक के सदस्य होने के नाते, वह ममता बनर्जी को कैसे चुनौती दे सकते हैं? हमने कॉन्ग्रेस पर हमला नहीं किया। मैंने इस विषय में कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन वह कॉन्ग्रेस के भीतर एक ट्रोजन हॉर्स हैं।” 

अभिषेक बनर्जी यहाँ ही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, “पिछले 7 महीनों में, आपने देखा है कि अधीर रंजन ने क्या-क्या कहा है। वह ममता बनर्जी को चुनौती दे रहे हैं, जिन्हें कॉन्ग्रेस INDI गठबंधन के सबसे मजबूत सहयोगी बनाने का दावा कर रही है। आखिर, आप किसकी मदद कर रहे हैं? क्या आप कॉन्ग्रेस को मजबूत कर रहे हैं या बीजेपी को ?” 

गौरतलब है कि हाल ही में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने ऐलान किया था कि बंगाल में वह अकेले चुनाव लड़ने वाली है। उधर अधीर रंजन चौधरी ने भी ममता बनर्जी पर हमले जारी रखे हैं। उन्होंने कल (30 जनवरी, 2024) को बंगाल की ममता सरकार पर आरोप लगाया कि वह राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को इजाजत नहीं दे रही है। गौरतलब है कि यात्रा आज (31 जनवरी) को बिहार से बंगाल में प्रवेश करेगी। उन्होंने आरोप लगाया है कि यहाँ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली को भी इजाजत नहीं दी जा रही।

अधीर रंजन चौधरी बंगाल की कानून व्यवस्था को लेकर लगातार ममता बनर्जी की सरकार पर सवाल उठाते आए हैं। उन्होंने हाल ही में जब ED की टीम पर TMC नेता के घर पहुँचने पर हमला हुआ था तो भी बंगाल में राष्ट्रपति शासन की माँग की थी। उन्होंने पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया था।

यूपी में भी INDI गठबंधन को तगड़ा झटका

ऐसा नहीं है कि INDI गठबंधन की राह बंगाल में ही मुश्किल हो रही है। उत्तर प्रदेश में भी उनके सामने समस्याओं का अम्बार है। हाल ही में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि वह कॉन्ग्रेस को राज्य में 11 सीट देंगे। इस पर कॉन्ग्रेस ने आपत्ति जताई थी।

अब सपा ने एक कदम और आगे बढ़कर लोकसभा चुनावों के लिए 16 प्रत्याशियों की एक सूची भी जारी कर दी।  सपा ने इस सूची में फर्रुखाबाद का टिकट भी घोषित किया है। गौरतलब है कि यहाँ से पूर्व में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद सांसद रहे हैं।

वहीं इसके अलावा खीरी लोकसभा सीट पर भी पेंच फँसेगा। दरअसल, यहाँ से सपा ने उत्कर्ष वर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। उत्कर्ष वर्मा यहाँ खीरी की सदर विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे हैं। वह कौशल किशोर वर्मा के पोते हैं, जो कि इस सीट से तीन बार विधायक रहे।

दूसरी तरफ से कॉन्ग्रेस से इस सीट से रवि प्रकाश वर्मा अपनी बेटी पूर्वी वर्मा के लिए दावा ठोंक रहे हैं। उन्होंने हाल ही में सपा छोड़कर कॉन्ग्रेस का दामन थामा है। वह यहाँ से खुद तीन बार सांसद रहे हैं। यह उनके परिवार की परम्परागत सीट है। उनका परिवार इस लोकसभा सीट को 10 बार जीत चुका है।

पंजाब-केरल में कैसे राह निकालेगा INDI गठबंधन

कॉन्ग्रेस के सामने पंजाब की भी चुनौती है। यहाँ आम आदमी पार्टी उससे समझौता करने के मूड में नहीं है। कॉन्ग्रेस का भी लोकल नेतृत्व यहाँ आप के साथ कोई डील नहीं करना चाहता है। दोनों पार्टियाँ कह रही हैं कि वह अपने दम पर 12 लोकसभा सीटों पर लड़ेंगे। उधर केरल में वामपंथी सरकार पर कॉन्ग्रेस का स्थानीय नेतृत्व रोज नए हमले कर रहा। यहाँ भी आपस में समझौता होगा, इसकी समभावना कम नजर आ रही है।

‘गैर-हिन्दुओं को घुसने की अनुमति नहीं – मंदिर के गेट पर लगाओ बोर्ड’: स्टालिन सरकार को हाईकोर्ट का आदेश, कहा- ये पिकनिक मनाने की जगह नहीं

हिंदू मंदिर सिर्फ हिंदुओं का है। हिंदुओं के मंदिर में गैर-हिंदुओं का क्या काम? कुछ इसी अर्थ वाली टिप्पणी के साथ मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पलानी मंदिर के एंट्री गेट पर ऐसे बोर्ड लगाए जाएँ, जिसमें लिखा हो कि इस मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। किसी को अगर मंदिर में एंट्री चाहिए तो उसे मंदिर के निर्धारित ड्रेस कोड और आस्था की जानकारी देनी होगी।

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि मंदिर संविधान के अनुच्छेद 15 के अंतर्गत नहीं आते। इसलिए किसी मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को रोकने को गलत नहीं कहा जा सकता। यही नहीं, कोर्ट ने अधिकारियों को रीति-रिवाजों और प्रथाओं के अनुसार मंदिर का रखरखाव करने का भी निर्देश दिया। जस्टिस एस श्रीमती ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा है कि मंदिर पर्यटक स्थल का पिकनिक स्पॉट नहीं है। अगर कोई मंदिर की बिल्डिंग को देखना चाहता है तो वो मंदिर के एंट्री गेट से ही देख सकता है या फिर इन लोगों की पहुँच ध्वज स्तंभ यानी ‘कोडिमारन’ तक ही सीमित रखना चाहिए।

मद्रास हाई कोर्ट में पलानी हिल टेंपल डिवोटीज ऑर्गनाइजेशन के संयोजक डी सेंथिलकुमार ने याचिका दाखिल कर मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की माँग की थी। इस याचिका में मंदिरों में गैर-हिंदुओं के कई अनुचित कामों की जानकारी दी गई थी, जिसमें बताया गया कि कुछ समय पहले तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर में मुस्लिमों के एक गुट ने माँस खाया था। वहीं, हंपी के मशहूर मंदिर में भी एक ग्रुप माँस करता पकड़ा गया था। यही नहीं, उत्तर प्रदेश के एक मंदिर में एक मुस्लिम युवक ने नमाज पढ़ी थी, जिसके बाद वो गिरफ्तार हुआ था।

ऑपइंडिया के पास हाई कोर्ट के फैसले की कॉपी मौजूद है। इस याचिका में सेंथिलकुमार ने एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पलानी मंदिर में बुर्काधारी महिलाओं और मुस्लिम युवक ने टिकट खरीदा। जब कर्मचारियों ने मना किया तो वह बदतमीजी करते हुए कहा कि पहाड़ एक पर्यटन स्थल है और वहाँ कोई भी घुमने जा सकता है। चूँकि ऐसे मामले पहले सामने आ चुके हैं, इसलिए कोर्ट को इस पर दिशा-निर्देश जारी करते हुए गैर-हिंदुओं को हिंदू मंदिरों में घुसने से रोका जाना चाहिए।

डी सेंथिलकुमार ने याचिका में हिल मंदिर परिसर और उसके उप-मंदिरों में केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति देने और मंदिर में डिस्प्ले बोर्ड सुनिश्चित करने का निर्देश देने की भी माँग की थी। हालाँकि अदालत ने पहले इस पर स्टे ऑर्डर दिया था और गैर-हिंदुओं की एंट्री को रोकने से जुड़ा बोर्ड लगाने के लिए कहा था। वहीं, अधिकारियों ने सेंथिलकुमार की याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि भगवान मुरुगन के तीसरे निवास की पहचान रखने वाले पलानी मंदिर में न सिर्फ हिंदू पूजा करते थे, बल्कि उन्हें मानने वाले गैर-हिंदू भी पूजा करते थे।

इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस श्रीमती ने अपने फैसले में कहा, “मंदिर प्रदेश अधिनियम 1947 को हिंदू समुदाय के अंदर व्याप्त भेदभाव को खत्म करने के लिए बनाया गया था। इसका गैर-हिंदुओं के मंदिर में प्रवेश से कोई लेना देना नहीं था।” कोर्ट ने संविधान सभा की बहसों पर गौर करने के बाद पाया कि मंदिरों को जानबूझकर अनुच्छेद 15 के दायरे में शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में गैर-हिंदुओं को इस मामले से दूर रखा गया।

हालाँकि अधिकारियों ने जब सुझाव दिया कि देवता में विश्वास रखने वाले और हिंदू धर्म में पालन किए जाने वाले रीति-रिवाजों और प्रथाओं को स्वीकार करने वाले गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति दी जाए। इसके बाद अदालत ने मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर में अपनाई जाने वाली प्रथा पर ध्यान देते हुए निर्देश दिया कि अधिकारी ऐसा कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों से एक शपथ पत्र लें और ऐसे लोगों को मंदिर में एंट्री देने से पहले उनकी एंट्री रजिस्टर में दर्ज करें।

लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, अदालत ने यह भी कहा कि संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने और उसे मानने का अधिकार देता है, लेकिन उनसे जुड़े धार्मिक रीति-रिवाजों और प्रथाओं में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य धर्मों के बीच धार्मिक सद्भाव तभी कायम रहेगा जब विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे की आस्था और भावनाओं का सम्मान करेंगे।

अपहरण, बलात्कार, जबरन निकाह, मुस्लिम बना कर नाम रख दिया ‘शबनम’: हिन्दू किशोरी के साथ दरिंदगी करने वाले को ‘बजरंग दल’ ने दबोचा, पुलिस को सौंपा

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार, उसके इस्लामी धर्मांतरण और जबरन निकाह का मामला का सामने आया है। गैर-मुस्लिम लड़की को न सिर्फ घर से बहला-फुसला कर ले जाया गया, बल्कि उसे मुस्लिम बना कर उसका नया नाम ‘शबनम’ भी रख दिया गया। आरोपित ने बिना सहमति लिए किशोरी से निकाह भी कर लिया। ‘नारी उत्थान केंद्र’ की सदस्य उषा शर्मा ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर युवक और उसके साथी के विरुद्ध FIR दर्ज कर ली गई है।

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है। आरोपित का चालान भी कर दिया गया है। आरोपित का नाम चाँद है, जो हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के शाहपुर कलाँ गाँव का रहने वाला है। वहीं पीड़िता का परिवार संभल जिले के रजपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली है। शनिवार (27 जनवरी, 2024) को दोपहर में किशोरी को भगा कर अमरोहा ले गया। उसका इरादा था कि वो एक वकील को माध्यम बना कर उक्त किशोरी के साथ कचहरी में निकाह कर ले।

हालाँकि, हिन्दू कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लग गई। ‘बजरंग दल’ के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने जोया रोड पर ही उक्त युवक को धर-दबोचा। संगठन के जिला संयोजक कुशल चौधरी और सह-संयोजक वीरेंद्र कुमार ने इसके बाद इस पूरे प्रकरण की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी। मौके पर भीड़ लग गई तो इसका फायदा उठा कर युवक भागने लगा था, लेकिन उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया गया। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता को ‘बाल कल्याण समिति’ के समक्ष पेश किया।

इसके बाद किशोरी का मेडिकल कराया गया। युवक के विरुद्ध बलात्कार, पॉक्सो एक्ट और धर्म संपरिवर्तन की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। किशोरी को फ़िलहाल सेफ हाउस में रखा गया है। कोर्ट में उसका बयान दर्ज कराए जाने के बाद उसे उसके परिजनों को सौंप दिया जाएगा। युवक के साथी की तलाश की जा रही है। उत्तर प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ योगी सरकार ने सख्त कानून बना रखा है। धर्मांतरण के लिए वहाँ बड़ी विदेशी फंडिंग की बात भी सामने आई थी।