भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बातचीत के दौरान भारतीयों को श्रीलंका में जाकर छुट्टियाँ बिताने की सलाह दी, जिसके बाद उनका ये वीडियो वायरल हो गया और उनकी सलाह श्रीलंका के अखबारों की सुर्खियाँ बन गई। ये खबर देखने के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने भी भारत के विदेश मंत्री जयशंकर को धन्यवाद दिया।
विदेश मंत्री जयशंकर ने भारतीय प्रबंध संस्थान मुंबई (IIM-B) में एक बातचीत के एक सवाल का उत्तर देते हुए कहा, “मैं सबसे पहले आपको सलाह देना चाहूँगा कि अगर आप अगली बार छुट्टियाँ बिताना चाहते हैं तो श्रीलंका जाएँ। मैं आपसे गंभीरता से कह रहा हूँ कि श्रीलंका जाकर छुट्टियाँ बताएँ और वहाँ के लोगों में घुल-मिलकर पूछें कि वह भारत के बारे में क्या सोचते हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आप अपने आप को सातवें आसमान पर पाएँगे।”
इसके पश्चात विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत द्वारा श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान पहुँचाई गई सहायता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “एक औसत श्रीलंकाई के लिए जब पूरी दुनिया ने पीठ दिखा दी थी, मैं खुद कोलम्बो में था, लोग गाड़ियों को धक्का लगा रहे थे। पूरा देश समस्याओं से घिरा था। ऐसे समय में भारत अकेला देश था जो आगे आया। हमने 4.5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹37,000 करोड़) श्रीलंका को दिए। और आपको उदाहरण के लिए बता दूँ, श्रीलंका ने लम्बे समय तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बातचीत मात्र 3 बिलियन डॉलर(लगभग ₹25,000 करोड़) के लिए की।”
"When the rest of the world turned its back on Sri Lanka, the only country that came forward (was India)…we committed $4 1/2 bn to Sri Lanka.." says EAM Jaishankar @DrSJaishankar. Adds,'what we did was 50% bigger than IMF..' pic.twitter.com/O72YtS0VVy
उन्होंने बताया, “यह हमारे द्वारा दी गई सहायता से आधा है। आदर्श रूप से उन्हें IMF से पहले सबसे सहायता मिलनी चाहिए थी। कोई भी देश आगे नहीं आया। ऐसे में मुझे लगता है कि कुछ पड़ोसी देश हमारे खिलाफ हो रहे हैं यह हमारी विफलता है, हमें अपने में अधिक आत्मविश्वास रखना होगा। हमें यह सच्चाई स्वीकार करना होगा कि चीन भी पड़ोसी देश है और वह भी इन पर प्रभाव डालेगा ही।”
गौरतलब है कि श्रीलंका 2022 में भारी आर्थिक संकट में फँस गया था और भारत ने उसे तेल और दवाइयों समेत तमाम मदद पहुँचाई थी।
“My first advice to you, the next time you want to take a holiday, go to Sri Lanka. I’m serious" Indian External Affairs Minister Dr. Jaishankar speaks about India's support for Sri Lanka pic.twitter.com/4juDRSmMw8
विदेश मंत्री जयशंकर का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल है। यह श्रीलंका के अखबारों में भी सुर्खी बना है। श्रीलंका की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी न्यूज वायर ने इसे श्रीलंका में प्रमुखता से दिखाया है। उसके द्वारा एक्स (पहले ट्विटर) पर डाला गया यह वीडियो अब तक लगभग 9 लाख लोगों द्वारा देखा जा चुका है। इसके अलावा श्रीलंका ट्वीट और डेली मिरर जैसी वेबसाइट ने भी इसे प्रचारित किया है। भारत के श्रीलंका के टूरिज्म को बढ़ावा देने और संकट सहायता देने को श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने भी सराहा।
Special thanks to His excellency Indian External Affairs Minister @DrSJaishankar for your support during our darkest time by words and deeds. Also India's support to Sri Lanka Tourism is priceless to us. https://t.co/CZNbHn8hry
पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर सनत जयसूर्या ने एक्स पर लिखा, “भारतीय विदेश मंत्री माननीय एस जयशंकर को हमारे सबसे बुरे समय में सहायता करने के लिए धन्यवाद। आपके द्वारा श्रीलंका टूरिज्म का समर्थन भी हमारे लिए अमूल्य है।” उनके अलावा अमेरिका की बड़ी सॉफ्टवेयर कम्पनी WSO2 के संस्थापक संजीवा वीरवर्णा ने भी भारत को धन्यवाद कहा।
India's help for Sri Lanka in its moment of need will never be forgotten. Thank you @DrSJaishankar and @narendramodi.
We've had sooooo much song and dance for $3B from IMF (and still going) while India forked out $4.5B in no time to keep us going in 2022. And it wasn't at all… https://t.co/Hh8HCalI5u
उन्होंने एक्स पर लिखा, “भारत द्वारा श्रीलंका की उसके बुरे समय में सहायता कभी भुलाई नहीं जाएगी। धन्यवाद विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। हमने IMF से मिली 3 बिलियन की सहायता पर खूब शोर मचाया था और मचा रहे हैं जबकि भारत ने 2022 में हमें बिना समय गँवाए 4.5 बिलियन डॉलर दिए ताकि हमारा देश चलता रहे। मुश्किल के दौर में सहायता करने वाला ही एक सच्चा मित्र होता है।”
हैदरबाद में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर महिला ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। महिला का नाम अदिति भारद्वाज था। वह कुछ समय पहले से मोहम्मद अली नाम के अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव-इन रिलेशन में रह रही थी। बताया जा रहा है अली ने महिला का धर्मांतरण करवाकर उसका नाम आजिया फातिमा कर दिया था और उसे प्रेगनेंट करने के बाद अपने मजहब की महिला से निकाह कर लिया था।
सुसाइड की घटना 28 जनवरी 2024 की है। मूलत: बिहार की रहने वाली अदिति भारद्वाज हैदराबाद में सालों से सॉफ्ट इंजीनियरिंग का काम करती थी। एक रिपोर्ट दावा कर रही है कि अदिति की पहले शादी हो चुकी थी, लेकिन उसने अपने पति से तलाक ले लिया था और हैदराबाद में वह मोहम्मद अली से 12 फरवरी को निकाह करने वाली थी। मगर अली ने उसे आखिर समय में निकाह से पहले ही धोखा दे दिया। ये धोखा अदिति से बर्दाश्त नहीं हुआ और वह धीरे-धीरे वह डिप्रेशन में चली गई।
#Interfaith: Aditi Bhardwaj (32), a software engineer committed suicide in Hyderabad on January 28. She was in a live-in relationship with Mohammad Ali.
Ali converted her & changed her name to Aziya Fatima, after impregnating her he married another woman from his religion + pic.twitter.com/h0kkqkaucL
डिप्रेशन का एक कारण जहाँ मोहम्मद अली से धोखा मिलना था, तो वहीं दूसरा इसी बीच अदिति का प्रेगनेंट होना भी था। कुछ रिपोर्ट बता रही हैं कि थोड़े समय पहले अदिति की तबीयत बिगड़ी थी, जिसके कारण उसे अस्पताल जाना पड़ा। अस्पताल में जब अदिति का चेक अप हुआ तो उसमें निकल कर आया कि वो गर्भवती है।
Woman's name – Aditi Bhardwaj (divorced from Hindu husband) , Live In relationship with a Muslim man Mohammad Ali ! pic.twitter.com/IoctgiqMbr
अदिति यह रिपोर्ट देख काफी घबरा गईं। उसने इस संबंध में फोन करके मोहम्मद अली को जानकारी दी। जब हल नहीं निकला तो 28 जनवरी को खबर आई कि उसने फाँसी लगाकर अपनी जान दे दी है। आत्महत्या का यह केस सामने आने के बाद पुलिस इस संबंध में अपनी पड़ताल कर रही है। उन्होंने मामला दर्ज करके जाँच भी शुरू कर दी है।
अयोध्या में रामलला अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो गए हैं। रामलला की मूर्ति को बनाया है मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने। अरुण योगीराज ने बताया है कि रामलला की मूर्ति को बनाने की प्रेरणा उन्हें अयोध्या में ही मिली। उन्होंने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर देने वाली रामलला की आँखों को बनाने में उन्हें सिर्फ 20 मिनट का समय लगा। दरअसल, उन्होंने एक खास मुहूर्त में रामलला की आँखों को बनाया था।
मीडिया चैनल विओन के साथ बातचीत में अरुण योगीराज ने मूर्ति के निर्माण की पूरी कहानी बयान की। अरुण योगीराज ने बताया, “शुरू के दो माह मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं रामलला का चेहरा किस तरह बनाऊँ। ये दीपावली का दिन था, और मैं अयोध्या में था। मैंने यहाँ त्यौहार मनाते हुए बच्चों को देखा, उनके चेहरों को देखकर ही मुझे रामलला का चेहरा बनाने की प्रेरणा मिली।”
अरुण योगीराज ने आगे कहा, “रामलला की आँखों के लिए मेरे पास सिर्फ 20 मिनट का समय था। ये समय मुहूर्त के हिसाब से था।” उन्होंने बताया कि आँखों को बनाने के लिए उन्होंने पवित्र अनुष्ठान भी किए। उन्होंने कहा, “आँखों को गढ़ने का काम शुरू करने से पहले मुझे सरयू नदी में स्नान करना पड़ा और हनुमान गढ़ी और कनक भवन में पूजा के लिए जाना पड़ा। इसके अलावा, मुझे काम के लिए एक सोने की चिनाई वाली कैंची और एक चाँदी का हथौड़ा दिया गया। मैं बहुत उलझन में था क्योंकि मुझे पता था कि 10 तरह की आँखें कैसे बनाई जाती हैं। फिर मैंने उनकी आँखों को बनाया, जिसमें चमक दिखती है।”
एक बंदर हर रोज रामलला को देखने आता
अरुण योगीराज ने बताया कि जब मैं मूर्ति बना रहा था, तब एक माह तक एक बंदर हर दिन एक ही समय पर स्टूडियो आता था। वो मूर्ति को बनाने का काम देखता था और फिर चुपचाप वहाँ से चला जाता था। वो हर शाम 4 से 5 बजे के बीच आता था।
अरुण योगीराज ने दावा किया, “मुझे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद एक बंदर गर्भगृह में आया और कुछ मिनट तक वहाँ बैठा और फिर चला गया।” उन्होंने कहा, “मैं प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति के साथ बैठा था और इसे देख रहा था और मुझे लगा कि यह बहुत अलग दिखाई दे रही है और ऐसा नहीं लग रहा है कि मैंने ही इसे बनाया है।”
योगीराज ने कहा कि पहले दिन से उनका लक्ष्य एक ऐसी मूर्ति बनाने का था, जो भारत के लोगों से जुड़ सके और उन्हें मंदिर की समिति द्वारा चुने जाने की चिंता नहीं थी। अरुण योगीराज ने कहा कि वे चाहते थे कि मूर्ति बहुत ही सुंदर और भव्य हो।
“मैं चाहता था कि मूर्ति देखकर लोगों को भगवान राम की याद आ जाए।”
उन्होंने बताया कि भगवान राम की मूर्ति का चेहरा बनाने के लिए उन्होंने अयोध्या में बच्चों के चेहरे से प्रेरणा पाई थी। योगीराज की मेहनत का नतीजा यह हुआ कि रामलला की मूर्ति बहुत ही सुंदर और भव्य बनी है। मूर्ति की आँखें बहुत ही आकर्षक हैं। लोगों ने मूर्ति की आँखों की तारीफ की है।
उस देश में, जहाँ प्रभु श्री राम सर्वत्र पूजनीय हैं, उनकी मूर्ति बनाने के लिए चुने गए मूर्तिकारों में से एक होना अपने आप में एक उपलब्धि है। मूर्तिकार अरुण योगीराज ने निश्चित तौर पर इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया है।
वाराणसी के जिला न्यायालय द्वारा हिन्दू श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति दिए जाने के बाद ज्ञानवापी परिसर घंटे-घड़ियाल की ध्वनि से गुंजायमान हो गया। ज्ञानवापी के विवादित ढाँचे में कल (31 जनवरी, 2024) से हिन्दू श्रद्धालुओं ने पूजा चालू कर दी। कल रात 10 बजे के बाद चालू हुई पूजा 1 फरवरी की सुबह 2 बजे तक चली।
वाराणसी के जिला न्यायालय ने कल हिन्दू पक्ष की माँग पर व्यास तहखाने में पूजा की इजाजत दी थी। हिन्दू पक्ष ने तर्क दिया था कि यहाँ वर्ष 1993 तक नियमित रूप से पूजा होती थी और इस पर तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सरकार ने बिना किसी वैधानिक आधार के रोक लगा दी थी। जिला न्यायालय ने यहाँ पश्चिमी दीवाल का इलाका हिन्दुओं को पूजा के लिए सौंपने का आदेश जिला प्रशासन को दिया था। साथ ही इसके लिए सभी इंतजाम करवाने का आदेश दिया था।
कोर्ट के कल के आदेश के बाद रात 10 बजे यहाँ वाराणसी के डीआईजी और डीएम पहुँचे तथा यहाँ लगे हुए बैरिकेड हटाए गए। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के पुजारी ने यहाँ मूर्तियाँ स्थापित की और भगवान की शयन आरती की। यहाँ भगवान के सामने अखंड ज्योति भी जलाई गई। इस दौरान यहाँ व्यास परिवार भी मौजूद रहा और पूजा में शामिल हुआ जो कि 1993 तक इस तहखाने में पूजा किया करता था। हालाँकि, यह तहखाना अभी सामान्य श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला गया है।
वाराणसी के जिला प्रशासन ने बताया है कि यहाँ न्यायालय के आदेशानुसार सभी प्रबंध कर दिए गए हैं। यहाँ बैरिकेड हटाने, रास्ते तैयार करने और सुरक्षा सम्बन्धी कामों को पूरा कर लिया गया है। वाराणसी के जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने कहा है कि आदेश का पालन किया गया है।
ज्ञानवापी में पूजा शुरू किए जाने को लेकर हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया, “राज्य सरकार ने न्यायालय के निर्देश का पालन किया है। काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के एक पुजारी द्वारा मूर्तियाँ स्थापित करने के बाद शयन आरती की गई है। अखंड ज्योति भी उनके सामने जला दी गई है। अब इन देवी-देवताओं के लिए रोज सभी आरतियाँ और भोग प्रसाद होगा।”
The SG has complied with the orders of the court. Shayan arti done by a pujari of KVM Trust after putting up idols. An Akhand Jyoti started in front of them. Daily Arti of all above deities- Morning Mangla Arti, Bhog Arti, evening arti, late sunset evening arti, Shayan arti.
इस सम्बन्ध में कल न्यायालय ने हिन्दू पक्ष के शैलेन्द्र पाठक की याचिका पर यह निर्णय सुनाया था। याचिका में कहा गया था कि उक्त तहखाने में मूर्तिपूजा की जाती थी। न्यायालय ने माना कि दिसंबर 1993 में पुजारी सोमनाथ व्यास को तहखाने में घुसने से रोक दिया गया था और इसकी बैरिकेडिंग कर दी गई थी। ब्रिटिश काल से ही वो वहाँ पूजा करते आ रहे थे। उन्हें रोके जाने के बाद राग-भोग आदि संस्कार भी रुक गए। बाद में तहखाने का दरवाजा रोक दिया गया।
न्यायालय ने ये भी माना कि हिन्दू धर्म से संबंधित कई सामग्रियाँ एवं प्रतिमाएँ आज भी उक्त तहखाने में मौजूद हैं। मूर्तियों की नियमित रूप से पूजा की जानी आवश्यक है। न्यायालय ने बड़ी बात कही कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने बिना किसी विधिक अधिकार के दिसंबर 1993 में पूजा बंद करवा दी थी। उसी महीने में मुलायम सिंह यादव ने बसपा सुप्रीमो कांशीराम के समर्थन से सरकार बनाई थी और मुख्यमंत्री बने थे। ‘मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम’ का नारा लगाया गया था।
मुस्लिम पक्ष का दावा है कि व्यास द्वारा उक्त तहखाने में कभी पूजा की ही नहीं गई। साथ ही वहाँ कोई मूर्ति होने की बात भी नकार दी गई। न्यायालय ने आदेश दिया कि 7 दिनों के भीतर वहाँ लोहे के बाड़ में पूजा-पाठ की व्यवस्था की जाए। कोर्ट को ये भी बताया गया था कि परिक्रमा वाले मार्ग पर मस्जिद कमिटी वालों ने लोहे की बैरिकेडिंग कर रखी है। साथ ही कोर्ट ने व्यास परिवार की वंशावली और वसीयत का भी जिक्र किया। इस फैसले के बाद काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में महादेव का दर्शन करने जाने वाले भक्त ज्ञानवापी में भी पूजा-पाठ कर सकेंगे।
केंद्र सरकार द्वारा 1 फरवरी 2024 को पेश किए जाने वाले बजट से पहले सोशल मीडिया पर एक खबर फैली है जिसमें कहा गया है कि इस बार सरकार 2 वीक ऑफ का ट्रेंड खत्म करके, हफ्ते में 3 दिन ऑफ देने का नियम लेकर आने वाली है।
इस पोस्ट के साथ दावा है कि केंद्रीय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में कई बदलाव कर सकती हैं। इन्हीं बदलावों में एक बदलाव ये भी होगा कि जॉब पर जाने वाले लोगों को जहाँ अब तक सिर्फ 2 दिन का वीक ऑफ मिलता था, उन्हें 1 जुलाई के बाद से हफ्ते में 3 दिन का ऑफ मिलेगा।
तस्वीर साभार: TOI
इसके साथ इसमें दावा है कि कर्मचारियों को इस पॉलिसी के तहत छुट्टी के लिए 10-12 घंटे प्रतिदिन काम करना होगा। इसके अलावा हो सकता पैसा जो हाथ में मिलेगा वो शायद कम हो लेकिन पीएफ बढ़ा दिया जाएगा। इस पोस्ट के साथ दावा है कि मोदी सरकार लेबर लॉ रेगुलेशन के तहत इसे लागू करने की सोच रही है।
क्या है 3 दिन छुट्टी मिलने का सच
अब बता दें कि ये पूरा दावा सोशल मीडिया पर जो फैलाया जा रहा पूर्णत: गलत है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के फैक्ट चेक अकॉउंट ने इस दावे का फैक्ट चेक किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही इस तरह की जानकारी बिलकुल झूठी है। सरकार बिलकुल हफ्ते में 3 दिन छुट्टी देने की प्लानिंग नहीं कर रही है।
An image circulating on social media claims that the Union Finance Minister @nsitharaman will announce a 3-day week off policy in the next #Budget#PIBFactCheck
पीआईबी ने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। केंद्रीय वित्तीय मंत्रीय निर्मला सीतामण ने अगले बजट में 3 दिन छुट्टी की पॉलिसी पर कोई विचार नहीं किया। मतलब वायरल दावा सरासर गलत है। ऐसा कोई प्रस्ताव वित्तीय मंत्री द्वारा नहीं लाया गया है।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी इस तरह की अफवाहें फैलाई जाती रही हैं। दिसंबर में भी इस तरह की खबर आई थी और अब बजट से पहले भी इसे प्रासंगिक बनाकर फैलाने का प्रयास हुआ है, लेकिन इस पर सरकार ने इस पर खुद संज्ञान ले लिया और झूठ की पोल खोल दी।
दिल्ली हाईकोर्ट में 2 रोहिंग्या मुस्लिमों ने याचिका दायर की थी कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं से नफरत दिखाने वाले वीडियो और कंटेंट के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाया जाए, क्योंकि फेसबुक इसको बढ़ावा देकर पैसे कमाता है। इसके लिए कोर्ट आदेश दे कि ऐसे कंटेंट को प्रसारित करने की अनुमति न दी जाए। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि फेसबुक पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण को बढ़ावा दिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने माँग की है कि फेसबुक को इस नफरत भरे भाषण को हटाने और रोहिंग्या समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया जाए।
याचिका में कहा गया था कि फेसबुक पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण के कई उदाहरण हैं। इनमें रोहिंग्याओं को ‘आतंकवादी’, ‘घुसपैठिए’ और ‘भारतीयों के लिए खतरा’ कहा गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के भाषण रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे सकते हैं। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की।
‘लाइव लॉ’ की खबर के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने कहा कि यह सुझाव कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं पर किसी भी कंटेंट के पब्लिश होने से पहले सेंसरशिप होनी चाहिए, ये ‘एक ऐसे उपचार का उदाहरण है जो बीमारी से भी बदतर है।’ इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फेसबुक इंडिया को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ ‘घृणित और हानिकारक सामग्री’ को बढ़ावा देने से रोकने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है।
हाई कोर्ट ने कहा, ‘आईटी नियम, 2021 के अनुसार सभी लोगों के पास किसी भी शिकायत की अनुमति है, इसके अनुसार सरकार कार्रवाई करती है। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने कंटेंट के प्रकाशित होने से पहले ही रोक लगाने की माँग की है, जो नियमों के अनुसार गलत है। ये तो किसी बीमारी से भी बदतर उसके इलाज जैसी बात है।” कोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसी शक्ति मिल जाने से समस्याएँ ही बढ़ेंगी।
इसी के साथ हाईकोर्ट ने फेसबुक के खिलाफ 2 रोहिंग्या शरणार्थियों मोहम्मद हमीम और कौसर मोहम्मद की याचिका का निपटान कर दिया। इसमें फेसबुक के एल्गोरिदम की शिकायत करते हुए कहा गया था कि फेसबुक पैसा बनाने के लिए रोहिंग्या लोगों के खिलाफ कंटेंट को बढ़ावा देता है। लेकिन, कोर्ट ने कहा कि फेसबुक के खिलाफ माँगी गई राहतें बरकरार रखने योग्य नहीं हैं, क्योंकि रिट याचिका में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि अधिकारी आईटी नियम 2021 के तहत अपने वैधानिक दायित्वों का पालन करने में विफल रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि फेसबुक एक बड़ी सोशल मीडिया कंपनी है। इसकी पहुँच दुनिया भर में है। ऐसे में, फेसबुक पर नफरत फैलाने वाले भाषण का असर भी बहुत बड़ा होता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फेसबुक को नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।
वहीं, फेसबुक का कहना है कि उनकी कंपनी नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के पास नफरत फैलाने वाले भाषण को पहचानने और हटाने के लिए तकनीक है। हालाँकि, कंपनी का कहना है कि यह पूरी तरह से नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकना संभव नहीं है। फेसबुक ने यह कहते हुए याचिका खारिज करने की माँग की थि कि इसमें इस बात का कोई संदर्भ नहीं दिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा लगाए गए दिशानिर्देश कैसे अप्रभावी हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता ने एक भी ऐसा उदाहरण नहीं दिया।
झारखंड में चम्पई सोरेन को सत्ताधारी विधायक दल का नेता चुना गया है। वो राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। वहीं हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। पहले चर्चा थी कि वो अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को CM बना सकते हैं, लेकिन उनकी भाभी और 3 बार की विधायक सीता सोरेन ने बगावत कर दी थी। हेमंत सोरेन ने राजभवन पहुँच कर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। चर्चा है कि ED (प्रवर्तन निदेशालय) उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।
उससे पहले JMM, RJD और कॉन्ग्रेस के विधायक भी राजभवन पहुँचे। राजद और कॉन्ग्रेस ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि वो हेमंत सोरेन के फैसले का समर्थन करेंगे। चम्पई सोरेन सरायकेला से विधायक हैं। चम्पई सोरेन अब तक हेमंत कैबिनेट में परिवहन के अलावा SC-ST, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा कल्याण मंत्री थे। उन्होंने सरायकेला से 2019 में लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। एक दिन पहले ही सत्ताधारी विधायकों के हस्ताक्षर एक खली कागज पर ले लिए गए थे।
हेमंत सोरेन को विधायकों ने नए CM के नाम पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया था। चम्पई के पिता का नाम सिमल सोरेन था, जो सरायकेला-खरसावाँ जिले के जिलिंगगोड़ा गाँव में किसान थे। उनके बड़े बेटे चम्पई ने भी कई दिनों तक खेती-किसानी में उनका हाथ बँटाया। चम्पई सोरेन की शादी कम उम्र में ही हो गई थी। उनके 4 बेटे और 3 बेटियाँ हैं। उन्होंने सरकारी स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की है। उन्होंने 90 के दशक में अलग झारखंड के लिए तत्कालीन बिहार में शिबू सोरेन के साथ मिल कर आंदोलन चलाया था।
चंपई सोरेन होंगे झारखंड के नए मुख्यमंत्री, हेमंत सोरेन ने दिया इस्तीफा
उसके बाद उन्हें कई लोग ‘झारखंड टाइगर’ भी कहा जाने लगा था। अर्जुन मुंडा की भाजपा-JMM गठबंधन सरकार में भी वो मंत्री हुआ करते थे। वहीं जब पहली बार हेमंत सोरेन की सरकार बनी तो उन्हें फ़ूड एन्ड सिविल सप्लाइज के अलावा ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री दी गई। हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चल रहा है। JMM सांसद महुआ माजी का कहना है कि हेमंत सोरेन ED की हिरासत में हैं और वो जाँच एजेंसी की टीम के साथ ही इस्तीफा देने गए थे।
‘भारतीय रिजर्व बैंक’ (RBI) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक (PPBL) पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत, Paytm पेमेंट्स बैंक अब नए ग्राहकों को जोड़ नहीं पाएगी, किसी भी ग्राहक के खाते में जमा नहीं ले पाएगी, मोबाइल रिचार्ज, वॉलेट सेवाओं और फास्टैग टॉप-अप जैसी सेवाओं को प्रदान नहीं कर पाएगी। इन प्रतिबंधों से पेटीएम पेमेंट्स बैंक को काफी नुकसान होगा। कंपनी के नए ग्राहक आधार में वृद्धि रुक जाएगी और मौजूदा ग्राहकों को भी कई सेवाओं से वंचित होना पड़ेगा।
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, 29 फरवरी 2024 के बाद किसी भी ग्राहक खाते, प्रीपेड उपकरण, वॉलेट, फास्टैग, एनसीएमसी कार्ड इत्यादि में किसी भी ब्याज, कैशबैक के अलावा कोई और जमा या क्रेडिट लेनदेन या टॉप अप की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालाँकि, इसके ग्राहकों द्वारा बचत बैंक खाते, चालू खाते, प्रीपेड उपकरण, FASTags, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड आदि सहित अपने खातों से शेष राशि की निकासी या उपयोग की अनुमति उनके उपलब्ध शेष राशि तक बिना किसी प्रतिबंध के दी जाएगी। इसके अलावा, कोई भी अन्य बैंकिंग सेवाएँ, जैसे फंड ट्रांसफर, BBPOU और UPI सुविधा 29 फरवरी, 2024 के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक द्वारा प्रदान नहीं की जा सकेंगी।
Action against Paytm Payments Bank Ltd under Section 35A of the Banking Regulation Act, 1949https://t.co/bswaWHSxtk
आरबीआई ने वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड और पेटीएम पेमेंट्स सर्विसेज लिमिटेड के नोडल खातों को जल्द से जल्द समाप्त करने का भी निर्देश दिया, जो 29 फरवरी से पहले किया जाना चाहिए। RBI के बयान में कहा गया है, “सभी पाइपलाइन लेनदेन और नोडल खातों (29 फरवरी, 2024 को या उससे पहले शुरू किए गए सभी लेनदेन के संबंध में) का निपटान 15 मार्च, 2024 तक पूरा किया जाएगा और उसके बाद किसी और लेनदेन की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ ये एक्शन बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट-1949 के सेक्शन 35A के तहत लिया है। यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने PPBL पर प्रतिबंध लगाए हैं। मार्च 2022 में भी आरबीआई ने PPBL पर नए ग्राहकों को जोड़ने पर रोक लगा दी थी।
अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को एक भव्य समारोह के बीच भगवान राम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा उनकी जन्मभूमि पर बन रहे मंदिर के गर्भगृह में हो गई। इस अवसर पर देश और दुनिया भर के हिन्दू समाज ने उन तमाम ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों को शीश नवाया जिन्होंने राम मंदिर के लिए मुगल से मुलायम काल तक चले संघर्ष में अपने आप को स्वाहा कर दिया। इन तमाम अमर बलिदानियों में अम्बेडकरनगर के हंसवर राजपरिवार का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
यहाँ के राजा रणविजय सिंह ने मुगल फ़ौज से लोहा लिया था और वीरगति पाई थी। ऑपइंडिया की टीम हंसवर के उस महल तक पहुँची जहाँ बलिदानी राजा अपनी सेना के साथ जन्मभूमि बचाने निकले तो लेकिन लौट कर वापस नहीं आ पाए।
खंडहर में तब्दील हो चुका है महल
हंसवर पहुँच कर ऑपइंडिया ने यह पाया कि राजा रणविजय सिंह का महल खँडहर जैसा हो चुका है। लम्बे समय से यहाँ रंग-रोशन नहीं हुआ। बाहर की दीवालों में भी दरारें आ चुकी हैं। महल के आसपास मुस्लिम आबादी बहुलता में बस चुकी है। जहाँ कभी महल की बाउंड्री थी, वहाँ अब तमाम दुकानें खुल चुकी हैं। मैदान में आसपास के बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। बाहरी हिस्से में चारों तरफ गंदगी का अम्बार दिखा। एक हिस्से पर तो कालिख भी पुती हुई है। महल के आंतरिक हिस्से में वो चबूतरा अभी भी मौजूद है जहाँ कभी राजा रणविजय पूजा-पाठ करते थे।
राजा रणविजय सिंह का महल
राजा रणविजय सिंह के वंशज संजय फ़िलहाल भारतीय जनता पार्टी के नेता है। वो इस समय हंसवर के ब्लॉक प्रमुख हैं। जब हम पहुँचे तब वो महल पर मौजूद नहीं थे। राम जन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा में संजय सिंह भी मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किए गए थे। संजय सिंह राजा रणविजय की 7वीं पीढ़ी हैं।
महताब सिंह और देवीदीन के बाद तीसरा आक्रमण रणविजय सिंह का
अम्बेडकरनगर के इतिहासकार और सामाजिक कार्यकर्ता बलराम मिश्रा हमें हंसवर महल पर ही मिल गए। वो राम जन्मभूमि के लिए किए गए हिन्दुओं के संघर्ष पर लम्बे समय से शोध कर रहे हैं। बलराम मिश्रा ने हमें बताया कि महाराज रणविजय सिंह बाबर की फ़ौज द्वारा हिन्दुओं के नरसंहार, राम मंदिर पर हमला और राजा महताब के साथ पंडित देवीदीन की हत्या से काफी व्यथित थे। इसी बीच अयोध्या से स्वामी महेश्वरनंद हंसवर आए और उन्होंने राजा रणविजय सिंह से तब तक युद्ध न छेड़ने को ले कर सवाल किया।
राजा रणविजय सिंह के महल के भीतर का दृश्य
इस पर राजा रणविजय सिंह ने आँखों में आँसू भर के कहा, “महात्मा जी। मैं मुगल फ़ौज के खिलाफ पूरी तैयारी में जुटा हूँ क्योंकि मैं कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता।” यह समय काल सन 1526-27 का था।
भाई और साले भी थे संघर्ष में शामिल
बलराम मिश्रा आगे बताते हैं कि आखिरकार राजा रणविजय सिंह अपनी सेना के साथ अयोध्या की तरफ कूच कर गए। राजा रणविजय सिंह की सेना में उनकी ससुराल के सैनिक ले कर उनके साले कुँवर वीरभानु प्रताप भी शामिल हुए थे। राजा रणविजय की ससुराल गोरखपुर के पास जयराज नगर में थी। तब यह स्थान एक छोटा सा रजवाड़ा हुआ करता था। इसी जगह के नाम पर राजा रणविजय सिंह की पत्नी का नाम रानी जयराज कुँवर पड़ा था।
राजा रणविजय सिंह की कहानी बताते बलराम मिश्रा
राम के नाम पर संघर्ष करने के लिए हंसवर से सटे मकरही रजवाड़े के राजा संग्राम सिंह भी रणविजय सिंह के साथ अपने सैनिक ले कर महल छोड़ कर निकल चल पड़े थे। संग्राम सिंह राजा रणविजय के ही पारिवारिक सदस्य थे।
मकरही राजमहल, जहाँ के राजा ने युद्ध में दिया था रणविजय सिंह का साथ
8 दिनों तक चले युद्ध में वापस ली थी रामजन्मभूमि
बलराम मिश्रा के साथ स्वर्गीय राम गोपाल ‘शरद’ द्वारा लिखी गई पुस्तक में भी राजा रणविजय सिंह के बलिदान का उल्लेख मिलता है। अयोध्या से हंसवर की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। जब तक राजा रणविजय सिंह अपनी सेना के साथ अयोध्या धर्मक्षेत्र की सीमाओं पर पहुँचे तब तक वहाँ मुगल फ़ौज रामजन्मभूमि पर अपनी छावनी बना चुकी थी। अयोध्या पहुँच कर राजा रणविजय ने जन्मभूमि पर काबिज़ मुगल फ़ौज पर हमला किया। यह युद्ध लगभग 7 दिनों तक चला था।
8वें दिन राजा रणविजय सिंह की सेना ने जन्मभूमि परिसर पर अपना अधिकार जमा लिया था। तब मुगल फ़ौज को पीछे खिसकना पड़ा था। मुगल सेनापति मीर बाकी तब भाग खड़ा हुआ था।
राजा रणविजय जन्मभूमि को बनाना चाहते थे अभेद्य
इतिहासकार बलराम मिश्रा जब हमें यह इतिहास बता रहे थे तब वहाँ आसपास हंसवर के तमाम हिन्दू संगठन के लोग भी जमा हो गए थे। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अशोक कुमार भी शामिल हैं। हंसवर महल से जुड़े कई अन्य लोग भी वहाँ मौजूद थे। वो सभी इन ऐतिहासिक तथ्यों से पूरी तरह से सहमत थे। बलराम मिश्रा ने आगे बताया कि जन्मभूमि को वापस पाने के बाद राजा रणविजय सिंह और उनके साथ हिन्दू योद्धाओं की सेना ने वहाँ आसपास के संतों-महंतों को बुलवाया। इस जगह फिर पूजा-पाठ शुरू हो गई।
हालाँकि राजा रणविजय सिंह को मुगलों की क्रूरता और धूर्तता का पूरा आभास पहले से था। रणविजय सिंह रामजन्मभूमि को अभेद्य बनाना चाहते थे। उन्होंने परिसर के चारों तरफ बाड़ बनवाई। गहरी खाइयाँ भी खुदवानी शुरू कर दी। कम समय और संसाधन में उन्होंने अधिकतम प्रयास किए कि मीर बाकी फिर से जन्मभूमि के आसपास न फटक सके।
मुगलों फ़ौज ने फिर किया तोपों से हमला
इतिहासकार बलराम मिश्रा बताते हैं कि राजा रणविजय सिंह का अनुमान सही साबित हुआ। 10 दिनों बाद ही मुगल फ़ौज फिर से लौट कर आई। दिल्ली से भी बैकअप सिपाही भेजे गए जो कहीं अधिक क्रूर थे। मुगल फ़ौज ने तोपों से सबसे पहले बाउंड्री बाड़ों को तोड़ा। फिर जन्मभूमि परिसर में घुस गई। महाराजा रणविजय सिंह अपने रिश्तेदारों और सैनिकों के साथ अधिकतम सामर्थ्य से इस हमले का मुकाबला करते रहे। आखिरकार संख्या बल अधिक होने और अधर्म पूर्वक से लड़ने की वजह से मुगल फ़ौज की जीत हुई।
गर्भगृह पर ही मिला था राजा रणविजय का पार्थिव शव
बलराम मिश्रा बताते हैं कि गर्भगृह के जिस स्थान पर आज रामलला विराजमान हैं उसी जगह राजा रणविजय सिंह का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला था। उनके साले वीरभानु प्रताप और भाई संग्राम सिंह को पहले ही वीरगति मिल गई थी। भगवान राम से अत्यधिक प्रेम करने की वजह से राजा रणविजय सिंह ने गर्भगृह की रखवाली के लिए खुद को तैनात किया था। यहीं पर उन्होंने अंतिम साँस ली थी। हालाँकि, वीरगति से पहले राजा और उनके साथियों ने कई मुगल कमांडर और सैनिक मार गिराए थे।
मुगल फ़ौज छीनना चाहती थी राजा की लाश
राजा रणविजय सिंह के बलिदान का उल्लेख अयोध्या के उस स्थान पर भी मिलता है जहाँ राम मंदिर निर्माण के लिए तराशे गए पत्थरों की कार्यशाला मौजूद है। तमाम गुमनाम बलिदानियों की याद दिलाने वाली इस कार्यशाला का संचालन ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) द्वारा किया जाता है। राजा की वीरगति के बाद मुगल फ़ौज ने वहाँ बने पूजा स्थल को छिन्न-भिन्न कर डाला। मंदिर क्षेत्र को पाशविक हरकतों से अपवित्र भी किया गया। इसी के साथ एक बार फिर से हिन्दुओं के इस तीर्थस्थल पर पूजा-पाठ बंद हो गई।
राजा रणविजय सिंह के महल के कुछ हिस्से अब हैं बदहाल
इतिहासकार बलराम मिश्रा आगे बताते हैं कि मुगल फ़ौज किसी भी हालत में राजा रणविजय सिंह के शव को छीनना चाहती थी। ऐसा करने के पीछे उनका मकसद शव के साथ निर्ममता कर के उसकी प्रदर्शनी बना कर हिन्दुओं का मनोबल गिराने की थी। साथ ही वो लगातार लड़ कर मारी जा रही अपनी फ़ौज को नई ताकत देना चाहते थे।
सरयू नदी में कूद गए अपने राजा शव ले कर बचे-खुचे सैनिक
इतिहासकार बलराम मिश्रा भी जल्द ही अयोध्या रामजन्मभूमि पर लिखी अपनी एक नई पुस्तक को सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने ऑपइंडिया को आगे बताया कि हंसवर से युद्ध करने गए राजा के महज मुट्ठी भर सैनिक वापस अपने राज्य लौट पाए थे। अपने राजा के बलिदान के बाद हंसवर राज्य के सैनिकों ने उनके शव की तरफ मुगल फ़ौज को बढ़ते देखा। बहुत कम संख्या में बचे होने के बावजूद उन सैनिकों में से कुछ ने मुगलों को थोड़े समय के लिए रोका। कुछ सैनिकों ने इतना समय पा कर अपने राजा का शव ले कर सरयू नदी में छलाँग लगा दी। वो काफी दूर तक तैर कर गए और बाद में कहीं किनारे सुरक्षित स्थान पर निकले।
उधर मुगलों को रोके सैनिक एक-एक कर के बलिदान हो गए। अपने राजा के शव के साथ नदी में कूदे सैनिकों ने किसी सुरक्षित जगह पहुँच कर एक नाव का प्रबंध किया। यहाँ से वो जल मार्ग से अधिक से अधिक दूरी तक राज रणविजय सिंह का शव ले कर गए। बाद में वो सड़क मार्ग से कई खतरों को मोल लेते हुए हंसवर पहुँचे। उनके शव को देखते ही प्रजा में थोड़े समय के लिए कोहराम मच गया था। बाद में परिजनों ने शव का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।
हंसवर के हर परिवार से बलिदान हुआ था एक रामभक्त सिपाही
हंसवर महल पर मौजूद हिन्दू संगठन के सदस्यों ने हमें बताया कि राजा रणविजय के शव को देखते ही पूरे हंसवर में पहले दुःख और बाद में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। इस आक्रोश की वजह यह थी कि अपने राजा के साथ रामजन्मभूमि की रक्षा के लिए हंसवर के हर घर से कम से कम एक जवान सैनिक अयोध्या गया था। इस युद्ध के चलते हर घर से एक चिराग बुझा था। हंसवर के निवासियों ने वामपंथी इतिहासकारों द्वारा गढ़े गए जातिवाद के जाल को भी साजिश बताया।
उन्होंने कहा कि राजा रणविजय के सैनिक सभी जातियों के साथ जिन्हें एक साथ एक तरह का सम्मान मिलता था। उन सभी ने सामूहिक तौर पर बताया कि तब जातिगत या वर्णगत घृणा जैसा कभी कुछ भी नहीं था।
आज भी हंसवर के कुछ लोग पुराने श्लोकों की पंक्तियों को याद करते हैं। इन्ही में से एक श्लोक है, “हंसवरराज्ये राजा सिद्धिरामो यद्धिती राजत, चिंतने रामो रामराज्यम वय वीर प्रज्ञा समन्वितः”। (सम्भवतः श्लोक सुनने में कुछ सुधार सम्भव)। अर्थात, “हंसवर राजा के हृदय में स्वयं भगवान राम विराजते थे। उन प्रज्ञावान राजा रणविजय के चिंतन में रामराज्य था।” यह पंक्तियाँ 500 साल पहले की हैं जब किसी समकालीन विद्वान ने राजा रणविजय सिंह के लिए लिखीं थीं।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) अधिकारियों के खिलाफ ST/SC एक्ट में एफआईआर दर्ज कराई है। सोरेन ने उन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी है, जिन्होंने दिल्ली स्थित उनके आवास पर छापेरमारी की थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि ईडी के अधिकारियों ने उनके दिल्ली स्थित घर में छापेमारी के दौरान बवाल किया और कर्मचारियों के साथ बदतमीजी की।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हेमंत सोरेन ने ईडी अधिकारी कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, “अधिकारियों ने 29 जनवरी 2024 को दिल्ली स्थिति मेरे आवास पर छापेमारी करके मुझे और मेरे पूरे समुदाय को परेशान एवं बदनाम करने की कोशिश की।”
जानकारी के मुताबिक, हेमंत सोरेन ने ईमेल से राजधानी राँची के धुर्वा थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत दी थी। इस शिकायत के आधार पर एसटी-एससी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। मीडिया से बातचीत में राँची के एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा ने इस एफआईआर की पुष्टि की है। हेमंत सोरेन का कहना है कि ईडी के अधिकारी शारीरिक और मानसिक रूप से लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं।
बीजेपी ने दी ये प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी नेता और झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा, “हेमंत सोरेन ने ईडी के अधिकारियों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत एससी-एसटी थाने में खुद ही मुकदमा दर्ज कराया है। एससी/एसटी एक्ट का इससे बड़ा दुरुपयोग और मजाक का दूसरा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है। अपने ‘कर्मों’ से हेमंत सोरेन अपनी एवं सोरेन परिवार की प्रतिष्ठा पहले ही धूमिल कर चुके हैं। अब भगवान उन्हें कुछ सुबुद्धि दें।”
हेमंत सोरेन ने ईडी के अधिकारियों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत एससी-एसटी थाने में खुद ही मुकदमा दर्ज कराया है।
एससी/एसटी एक्ट का इससे बड़ा दुरुपयोग और मजाक का दूसरा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है।
अपने “कर्मों” से हेमंत सोरेन अपनी एवं सोरेन परिवार की प्रतिष्ठा पहले ही धूमिल कर चुके… pic.twitter.com/Ysaf6bxByI
सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख हैं और झारखंड के मुख्यमंत्री हैं। हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी की जाँच एवं कार्रवाई जमीन घोटाले से संबंधित है। ईडी ने आरोप लगाया है कि हेमंत सोरेन ने अपने परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के साथ मिलकर जमीनों को अवैध रूप से हड़प लिया।
हालाँकि, हेमंत सोरेन ने बाबूलाल मरांडी ने इन आरोपों से इनकार किया है। सोरेन के खिलाफ ईडी की जाँच और उनके द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी, दोनों ही झारखंड की राजनीति में नए तनाव पैदा कर सकती हैं। यह देखना होगा कि इस मामले का आगे क्या होता है।