अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह (22 जनवरी, 2024) में दिल्ली के एक प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने भाग लिया। इस समारोह में शामिल होने के लिए इलियासी को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने आमंत्रित किया था। इलियासी ने इस समारोह में भाग लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सद्भाव और भाईचारे की मिसाल पेश की थी।
हालाँकि, इलियासी के इस कदम को कुछ मुस्लिम संगठनों ने पसंद नहीं किया। इन संगठनों ने इलियासी के खिलाफ फतवा जारी कर दिया। वे मानते हैं कि एक मुस्लिम को किसी अन्य धर्म के मंदिर में नहीं जाना चाहिए। इलियासी के राम मंदिर में जाने से इन संगठनों को लगा कि इलियासी ने इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। इन संगठनों का कहना है कि इलियासी का अयोध्या जाना इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने वाले दिल्ली के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी के खिलाफ एक फतवा भी जारी किया गया है। फतवा में इलियासी को ‘देशद्रोही’ बताया गया है और कहा गया है कि उन्होंने इस्लाम के खिलाफ काम किया है।
फतवा में इलियासी को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने भविष्य में ऐसा कोई कार्य किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इलियासी ने फतवा जारी होने के बाद कहा, “जो लोग मुझसे नफरत करते हैं, उन्हें पाकिस्तान जाना चाहिए। मैं एक भारतीय नागरिक हूँ और मैं अपने देश की संस्कृति और धर्मों का सम्मान करता हूँ।”
अपने खिलाफ जारी फतवा को लेकर उमेर अहमद ने कहा, “मुख्य इमाम के रूप में मुझे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट से निमंत्रण मिला था। दो दिन तक विचार करने के बाद मैंने अयोध्या जाने का फैसला किया था। फतवा भले ही अब जारी किया गया हो, लेकिन मुझे 22 जनवरी की शाम से धमकी भरे कॉल आ रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने कुछ कॉल रिकॉर्ड किए हैं, जिनमें कॉल करने वालों ने मुझे जान से मारने की धमकियाँ दी हैं। जो लोग मुझे और देश से प्यार करते हैं, वो मेरा समर्थन करेंगे। जो लोग समारोह में शामिल होने की वजह से मुझसे नफरत करते हैं, वो पाकिस्तान चले जाएँ। मैंने प्यार का पैगाम दिया है। कोई गुनाह नहीं किया। मैं माफी नहीं माँगूँगा और न ही इस्तीफा दूँगा। धमकी देने वाले जो चाहें कर सकते हैं।”
वीएचपी ने की फतवे की आलोचना
इस मामले में वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इलयासी के खिलाफ फतवा जारी करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होना कुछ जिहादी कट्टरपंथी मुफ्तियों को रास नहीं आया। उन्होंने कहा कि मुफ्तियों के एक ग्रुप द्वारा उनके विरुद्ध फतवा जारी किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व निंदनीय दुष्कृत्य है।
मध्य प्रदेश के भोपाल में कॉन्ग्रेस कार्यालय में दो गुटों के बीच झड़प हो गई। एक गुट दिग्विजय सिंह का समर्थन करता है, जबकि दूसरा गुट कमलनाथ का समर्थन करता है। दोनों गुटों के नेता और कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। झड़प के दौरान दोनों गुटों के नेताओं ने एक-दूसरे को धक्का-मुक्की की और गालियाँ दीं। कुछ नेताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियाँ भी फेंक दीं। इस झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
घटना के अनुसार, राज्य कॉन्ग्रेस के दो वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के समर्थकों के बीच झगड़ा हुआ। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के नेता एक-दूसरे पर गाली-गलौज करने लगे। झगड़े के दौरान एक नेता ने दूसरे नेता पर कुर्सियाँ फेंकी। जानकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार (29 जनवरी, 2024) को हुई। भोपाल के कॉन्ग्रेस कार्यालय में कॉन्ग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शहरयार खान और अनुसूचित जाति विभाग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के बीच झड़प हो गई। दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ धक्का-मुक्की की और जमकर गलियाँ बकी। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया।
इस दौरान मौके पर मौजूद दूसरे नेताओं ने दोनों नेताओं को अलग किया। बताया जा रहा है कि पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को लेकर विवाद हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुसूचित जाति विभाग अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार को कमलनाथ समर्थक बताया जाता है वहीं कॉन्ग्रेस प्रवक्ता शहरयार खान को दिग्विजय समर्थक माना जाता है। दोनों के बीच दिग्विजय सिंह को गाली देने को लेकर हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि मामला मारपीट तक पहुँच गया।
बीजेपी नेता नरेंद्र सलूजा ने इस घटना का वीडियो एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “कमलनाथ जी समर्थक द्वारा दिग्विजय सिंह जी को गाली बकने को लेकर PCC में जमकर चले लात-ठूँसे कुर्सियाँ चली , जमकर एक दूसरे को गालियाँ बकी गईं। बीच-बचाव करने आए कमलनाथ समर्थक एक नेता को भी लात-घूसे पड़े।”
कमलनाथ जी समर्थक द्वारा दिग्विजय सिंह जी को गाली बकने को लेकर पीसीसी में जमकर चले लात-ठूँसे…
ये घटना मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी बड़ी है। ऐसे में इन दोनों नेताओं के बीच मतभेद कॉन्ग्रेस के लिए घातक साबित हो सकते हैं। इस घटना के बाद कॉन्ग्रेस को अपने नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। अगर कॉन्ग्रेस इस घटना को गंभीरता से नहीं लेती है, तो इससे पार्टी को चुनावों में नुकसान हो सकता है।
अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को रामलला अपने भव्य मंदिर में स्थापित किए जा चुके हैं। इस अवसर पर जहाँ देश और दुनिया भर के हिन्दू दीवाली जैसा पर्व मना रहे हैं तो वहीं उन बलिदानियों को भी याद किया जा रहा है जिन्होंने 500 साल चले संघर्ष में राम के नाम पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इन बलिदानियों में सबसे पहला नाम भीटी के तत्कालीन राजा महताब सिंह का लिया जाता है। 1526-27 में उन्होंने मंदिर तोड़ने आए मीर बाकी के कई फौजियों को मार कर वीरगति पाई थी।
हालाँकि, इस रामभक्ति का गुस्सा मुगल बादशाहों ने उनकी प्रजा और भीटी के मंदिरों पर उतारा था। मुगल क्रूरता के चिह्न आज भी अम्बेडकरनगर जिले के भीटी तहसील क्षेत्र में जा कर देखे जा सकते हैं।
अपना पूरा जीवन क्रूर और मतांध मुगल बादशाहों के गुणगान में बिताने वाले वामपंथी इतिहासकारों में सम्भवतः अधिकतर भीटी गए भी नहीं होंगे। यहाँ न सिर्फ मंदिरों में घुस कर मूर्तियाँ तोड़ी गईं बल्कि महिलाओं व राजमहल के सेवकों का भी नरसंहार हुआ था। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि बाबर की मौत के सैकड़ों साल बाद औरंगज़ेब ने भीटी को रामभक्तों का गढ़ मान कर हमला किया था। ऑपइंडिया की टीम ने उन इलाकों का दौरा कर के तमाम साक्ष्यों को संकलित किया।
औरंगज़ेब को याद थे अपने पुरखों के दुश्मन
ऑपइंडिया ने सबसे पहले राजा महताब सिंह के महल का दौरा किया। महल में कई स्थानों पर टूट-फूट दिखी। महल के बाहर खड़े कुछ बुजुर्गों ने बताया कि वो मूलतः भीटी के रहने वाले हैं। उन्होंने हमें बताया कि महल के कई हिस्सों में हुई तोड़फोड़ मुगलों के समय की है। राजा महताब सिंह ने बाबर के कई फौजियों को रामजन्मभूमि की रक्षा करते हुए मार गिराया था। जन्मभूमि के लिए 1527 में हुए संघर्ष के लगभग 130 साल बाद बाबर का वंशज औरंगज़ेब गद्दी पर बैठा। उसने मंदिरों को ध्वस्त करना शुरू किया जिसमें पवित्र काशी विश्वनाथ भी शामिल था।
राजकुमार जयदत्त के महल में आज भी मौजूद हैं हमले के निशान
आसपास खड़े बुजुर्गों ने हमें बताया कि उसने उन हिन्दू राजाओं की भी लिस्ट बनाई थी जो उसके पूर्वजों से किसी भी समय काल में लड़े थे। इन नामों में भीटी नरेश महताब सिंह का नाम उसकी हिस्टलिस्ट में टॉप पर था। साल 1669 में जब औरंगज़ेब की फौजें काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने निकलीं थी तब रास्ते के बनाए नक़्शे में उसने भीटी को भी शामिल किया था। दिल्ली से निकली फौजों ने रास्ते में पड़ने वाले तमाम गाँव लूटे, हिन्दू महिलाओं से बलात्कार किए और मंदिरों को ध्वस्त किया।
झारखंडी महादेव मंदिर भीटी
शिवलिंग पर अभी भी मौजूद हैं चले आरे के निशान
स्थानीय निवासियों ने हमें भीटी महल से लगभग 2 किलोमीटर दूर उमराँवा रोड स्थित झारखंडी महादेव मंदिर के बारे में बताया। हम महादेव मंदिर पहुँचे तो वहाँ कुछ श्रद्धालु और मंदिर के पुजारी मौजूद मिले। मंदिर के पुजारी मुन्ना मिश्रा ने हमें बताया कि लगभग 250 साल पहले वह मंदिर औरंगज़ेब की क्रूरता का शिकार हो चुका है। हमें गर्भगृह ले जाया गया। गर्भगृह में एक अति प्राचीन शिवलिंग है जिसकी उम्र 1000 वर्ष से अधिक बताई जा रही है। शिवलिंग पर कई खरोंच के साथ तमाम जगहों पर काटे जाने के निशान मौजूद हैं। आज भी यह मंदिर स्थानीय हिन्दुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। महाशिवरात्रि को यहाँ बड़ा मेला लगता है।
इसी शिवलिंग को तोड़ने पहुँचा था औरंगज़ेब
मंदिर के पुजारी ने हमें आगे बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी मुगल फ़ौज शिवलिंग को काट नहीं पाई थी। इस से नाराज हो कर औरंगज़ेब के फरमान पर उसके फौजियों ने पूरे मंदिर को अपवित्र किया, दीवारों को गिराया और मूर्तियों को तोड़ डाला। बकौल पुजारी, महज कुछ वर्षों पहले तक औरंगज़ेब के हमले में तोड़ी गई मूर्तियाँ क्षत-विक्षत हालात में मंदिर के एक कोने में पड़ी थीं। पशु-पक्षियों द्वारा उन मूर्तियों पर गंदगी फैलाने से दुखी कुछ ग्रामीणों ने उसका विसर्जन अयोध्या ले जा कर सरयू नदी में कर दिया। इनमें लक्ष्मी, पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियाँ शामिल थीं।
आरे से काटा गया शिवलिंग
डीह पर कत्ल हुआ रानियों का, मार डाले गए सेवक
मंदिर के पुजारी ने दावा किया कि धर्मस्थल को तोड़ कर मुगल फ़ौज पास ही मौजूद गाँव (लगभग 1 किलोमीटर दूर) सोनारपुरवा की तरफ मुड़ी। यहाँ भीटी राजपरिवार के लिए सोने-चाँदी का काम करने वाले स्वर्णकार रहते थे। बताया गया कि तब रानियाँ मुगल फ़ौज से बचने के लिए इसी इलाके में छिपी हुई थीं। यहाँ पहुँच कर औरंगज़ेब के हमराहों ने पहले सोनारपुरवा को लूटा और फिर रानियों का उनके सेवकों सहित सिर काट डाला। बकौल पुजारी, कुछ समय पहले तक डीह की खुदाई में एक कुएँ के अंदर से नरमुंड मिले थे जो उसी औरंगज़ेब के हमले के समय के है।
ऑपइंडिया से बात करते झारखंडी शिव मंदिर के पुजारी और स्थानीय ग्रामीण
चंदापुर डीह पर तोड़ी गईं मूर्तियाँ
झारखंडी मंदिर के पुजारी ने हमसे बातचीत में आगे दावा किया कि वहाँ से लगभग 3 किलोमीटर दूर कभी चंदापुर डीह पर भी हिन्दू देवी-देवता पूजे जाते थे। पहले से ही सारी जानकारी ले कर आई मुगल फ़ौज भीटी महल, झारखंडी मंदिर, सोनारपुरवा के बाद चंदापुर डीह की तरफ मुड़ी। यहाँ मौजूद धर्मस्थलों को तोड़ डाला गया। अभी कुछ ही दिन पहले खेती करने गए कुछ किसानों को मिट्टी में दबी भगवान विष्णु की एक मूर्ति मिली थी। हजारों वर्ष पुरानी यह मूर्ति एक निषाद परिवार में मौजूद बताई जा रही है। इस ऐतिहासिक जगह को अब किसानों को पट्टे पर दे दिया गया है। हालाँकि, दावा किया गया कि अगर उस जगह की विधिवत खुदाई तो तो और भी ऐतिहासिक चीजें मिल सकती हैं।
हमारे पुरखे लड़े और बलिदान हुए
मंदिर पर मौजूद स्थानीय ग्रामीण अजीत कुमार दुबे ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने दावा किया कि उनके बड़े-बुजुर्ग औरंगज़ेब के इस हमले के बारे में बताते हैं। तब न सिर्फ भीटी राजपरिवार के सैनिक बल्कि आसपास के ग्रामीणों ने भी मुगल फ़ौज से मुकाबला किया था। इस मुकाबले में कई ग्रामीण बलिदान हुए थे। तब औरंगज़ेब के भी कई हमलावर फौजी भी मारे गए थे। जिस झारखंडी मंदिर पर हमला हुआ था वहाँ भीटी राजपरिवार अक्सर पूजा-पाठ करने आया करता था। भीटी राजपरिवार ने बिसुही नदी के किनारे भी एक मंदिर बनवाया था।
अजीत ने दावा किया कि औरंगज़ेब के हमले की मुख्य वजह भीटी निवासियों द्वारा सवा सौ साल पहले राम के लिए दिखाया गया प्रेम और अपने राजा के साथ अयोध्या में किया किया गया बलिदान ही था। झारखंडी महादेव मंदिर के पास मौजूद भीटी बाजार, गाँव उमराँवा, दुखी दुबे का पुरवा और दुबाने का पुरवा गाँव के कई श्रद्धालु हमारे इंटरवियु के दौरान मंदिर परिस्सर में आए। उन सभी ने बताया कि मंदिर पर औरंगजेब द्वारा दिखाई गई क्रूरता से आज भी उनके मन में पीड़ा होती है। इस मंदिर के लिए स्थानीय भाजपा नेता ने टिन शेड और श्रद्धालुओं के बैठने आदि की भी व्यवस्था करवाई है।
औरंगजेब की क्रूरता के शिकार झारखंडी मंदिर के नंदी
हालाँकि, औरंगज़ेब के द्वारा दिखाई गई यह क्रूरता भीटी राजपरिवार को विचलित नहीं कर पाई। औरंगज़ेब के हमले के लगभग 200 साल बाद भीटी के राजकुमार जयदत्त सिंह रामजन्मभूमि पर हमला करने निकले जिहादी मौलवी अमीर अली से संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस युद्ध में अमीर अली भी अपने तमाम साथियों सहित ढेर हो गया था।
हरियाणा के सोनीपत जिले में बंबीहा गैंग ने लॉरेंस बिश्नोई के खास शूटर राजन को गोलियों से भूनकर मार डाला। राजन कुरुक्षेत्र का रहने वाला था। उसे लॉरेंस बिश्नोई का खास शूटर माना जाता था। बंबीहा गैंग के शूटर्स ने हरियाणा के यमुना नगर में पहले उसे गोलियाँ मारी, फिर शव को आग के हवाले कर दिया। कहा जा रहा है कि आतंकी गैंगस्टर अर्श डल्ला के इशारे पर इस वारदात को अंजाम दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, यमुनानगर में गुलाबगढ़ नहर के पास जला हुआ शव मिला। युवक के हाथ-पाँव पूरी तरह से बँधे हुए थे। शव पूरी तरह से जला हुआ था, आधा हिस्सा शरीर का गायब था। युवक की पहचान लाडवा के रहने वाले राजन के रूप में हुई है, जो मेहरा गाँव का रहने वाला है। हत्या की सूचना मिलते ही यमुनानगर सदर थाने की पुलिस और फॉरेंसिक टीम समेत सीआईए की टीम मौके पर पहुँची।
बंबीहा गैंग ने कहा है कि यह हत्या लॉरेंस बिश्नोई के गैंग के खिलाफ बदला लेने के लिए की गई है। बंबीहा गैंग ने लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी को चैलेंज करते हुए पोस्ट में लिखा है – सिद्धू मूसेवाला को बिना कसूर के मारा। कनाडा में सुक्खा दुनुके को भरोसे में लेकर उसकी हत्या करवाई। हमने सुक्खा के मर्डर का बदला ले लिया। जल्द सबका हिसाब होगा।
कहा जा रहा है कि विदेश में बैठकर बंबीहा गैंग की कमान संभाल रहे गैंगस्टर लकी पटियाल और कनाडा में बैठे गैंगस्टर और खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला ने बिश्नोई गैंग के शूटर राजन की हत्या करवाई है। इस गैंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर हत्या करने की जिम्मेदारी भी ली है। राजन को लॉरेंस बिश्नोई का खास शूटर माना जाता था। बंबीहा गैंग के शूटर्स ने हरियाणा के यमुना नगर में पहले उसे गोलियाँ मारी, फिर शव को आग के हवाले कर दिया। कहा जा रहा है कि आतंकी गैंगस्टर अर्श डल्ला के इशारे पर इस वारदात को अंजाम दिया गया है। राजन पर कई हत्याओं और अपहरण के आरोप थे। इस हत्या से दोनों गैंगों के बीच गैंगवार तेज होने की संभावना है।
जालंधर में पकड़े गए थे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो बदमाश
बता दें कि 20 जनवरी 2024 को जालंधर में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो बदमाश मुठभेड़ के बाद पकड़े गए थे। ये बदमाश हत्या, सुपारी किलिंग और ड्रग तस्करी की कई घटनाओं में शामिल थे। पकड़े गए बदमाशों मेम पहला नितिन जालंधर का रहने वाला है और दूसरा अश्वनी गांव बुलोवाल का रहने वाला है। ये दोनों बदमाश दो वारदातों को अंजाम देने के लिए अपनी योजना के मुताबिक 2 लोगों की रेकी कर रहे थे और पुलिस ने इसकी जानकारी प्राप्त होने के बाद से अपना जाल बिछा रखा था।
जानकारी के मुताबिक, जालंधर में नाखा वाले बाग नजदीक वडाला चौक पर दो गैंगस्टर और सीआईए स्टाफ के बीच गोलियाँ चली थी। इस दौरान दोनों बदमाश गंभीर रूप से घायल हो गए। काबू किए गए आरोपी हत्या, सुपारी किलिंग और ड्रग तस्करी के मामलों में शामिल थे। वहीं इस मुठभेड़ के दौरान एक पुलिसकर्मी की बाल-बाल जान बच गई। बताया जा रहा है कि गोली उनकी पगड़ी में फँस गई, जिसके चलते वह बच गए और उन्हें कोई चोट नहीं आई।
पुलिस अधिकारी ने बताया था कि ये दोनों अमेरिका में बैठे जसमीत उर्फ लकी के साथ लॉरेंस बिश्नोई के संपर्क में थे। लकी ने ही इन दोनों बदमाशों को जालंधर में किसी व्यक्ति की रेकी करने के लिए भेजा था। बताया जा रहा है कि देर रात से सीआईए स्टाफ की टीम इन आरोपियों की तलाश कर रही थी। आरोपियों से पिस्टल और कार भी पुलिस ने जब्त की थी।
भारतीय नौसेना ने अरब सागर में एक और सफल अभियान चलाया है। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सुमित्रा ने सोमाली समुद्री लुटेरों से ईरानी जहाज एमवी इमाम को बचाया है। घटना 28 जनवरी, 2024 को हुई थी। ईरानी जहाज एमवी इमाम अरब सागर में सोमालिया के तट के पास से गुजर रहा था। उस समय सोमाली समुद्री लुटेरों ने जहाज पर हमला कर दिया और उसे अपने कब्जे में ले लिया।
सूचना मिलने पर भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सुमित्रा ने घटनास्थल पर पहुँचकर समुद्री लुटेरों को खदेड़ दिया। जहाज पर सवार सभी 17 नाविक सुरक्षित हैं। यह भारतीय नौसेना का सोमाली समुद्री लुटेरों के खिलाफ लगातार दूसरा सफल अभियान है। इससे पहले, भारतीय नौसेना ने 25 जनवरी, 2024 को भी एक सोमाली समुद्री लुटेरों के जहाज को नष्ट किया था। भारतीय नौसेना अरब सागर में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। भारतीय नौसेना के अभियानों से सोमाली समुद्री लुटेरों के हौसले बुझ रहे हैं।
नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने बताया, “आईएनएस सुमित्रा, सोमालिया के पूर्वी तट और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती विरोधी अभियानों पर थी, तभी एक ईरानी झंडे वाले मछली पकड़ने वाले जहाज की हाईजैकिंग की सूचना मिली। इस आपात सूचना को पाते ही आईएनएस सुमित्रा ने बचाव अभियान शुरू किया। इस जहाज पर 17 नाविक सवार थे, उन्हें बंधक बना लिया गया था। आईएनएस सुमित्रा ने तुरंत कार्रवाई की और अपने हेलीकॉप्टर भेजकर डाकुओं को भागने पर मजबूर कर दिया।’
7 अक्टूबर, 2023 को शुरू हुए इस्राइल-हमास युद्ध के बाद लाल सागर में ईरान समर्थित यमन के हौथी मिलिशिया द्वारा कई व्यापारिक जहाजों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया है। हौथी विद्रोहियों के लगातार हमलों ने कई शिपिंग कंपनियों को या तो निलंबित करने या निलंबित करने के लिए मजबूर किया है। व्यापारिक जहाजों पर हाल के हमलों के मद्देनजर भारतीय नौसेना ने फ्रंटलाइन विध्वंसक और फ्रिगेट तैनात करके अरब सागर और अदन की खाड़ी में अपने निगरानी तंत्र को काफी बढ़ा दिया है।
यह घटना एक बार फिर से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा में सक्रिय भूमिका को दर्शाती है। भारतीय नौसेना लगातार अरब सागर और हिंद महासागर में गश्त कर रही है ताकि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और समुद्री लुटेरों से व्यापार जहाजों की रक्षा की जा सके। इस घटना से यह स्पष्ट है कि भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा में अपनी भूमिका को गंभीरता से ले रही है और समुद्री लुटेरों से व्यापार जहाजों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है।
लालू प्रसाद यादव से पटना में ED की टीम ने पूछताछ की। इस दौरान उन्हें जाँच एजेंसी के दफ्तर में जाना पड़ा। प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी बेटी मीसा भारती को पूछताछ के दौरान अंदर आने की इजाजत नहीं दी थी। इस बात से रोहिणी आचार्य काफी खफा दिखीं। उन्होंने बाकायदा धमकी भी दी कि अगर उनके पापा को कुछ हुआ, तो वो किसी को भी नहीं छोड़ेंगी। रोहिणी आचार्य लालू प्रसाद यादव की बेटी हैं और सिंगापुर में रहती हैं। उन्होंने ही लालू प्रसाद यादव को अपनी किडनी दी थी।
सोमवार (29 जनवरी, 2024) को RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पूछताछ के लिए ईडी ऑफिस बुलाया गया। इस दौरान मीसा भारती को अंदर एंट्री नहीं दी गई, वो लालू यादव के साथ रहना चाहती थी। इस बात पर रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खूब धमकी बाजी की। रोहिणी ने लिखा, “मेरे पापा को आज कुछ हुआ तो इसका ज़िम्मेदार गिरगिट के साथ साथ CBI, ED और इनके मालिक होंगे। सबको मालूम है पापा की क्या हालात है बिना मदद के चल नहीं सकते फिर भी कितना गिरोगे गीदड़ो, ये गुदड़ी का लाल लालू है। शेर अकेला है कमजोर नहीं। अगर मेरे पापा को खरोंच आई तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा – मेरे शब्दों को नोट कर लो।’
अगर मेरे पापा को खरोच आया तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा mark my words
इसके अलावा उन्होंने एक पोस्ट और किया। इसमें उन्होंने लिखा, “सब को मालूम है पापा की क्या हालात है। बिना मदद के चल नहीं सकते, फिर भी कितना गिरोगे गीदड़ो, ये गुदड़ी का लाल लालू है शेर अकेला है कमजोर नहीं।”
उनके इस ट्वीट के बाद लोगों ने लालू यादव को लेकर रोहिणी और उनके पूरे परिवार को एक्सपोज करना शुरू कर दिया। मोनू कुमार लिखते हैं, “बैडमिंटन खेलने में तो कोई दिक्कत नहीं। यादाश्त चली गई है बोल सकती हो लेकिन, अकेले चल नहीं सकते वाला बहाना तो सीबीआई वाले नहीं मानेंगेl”
बैडमिंटन खेलने में तो कोई दिक्कत नहीं l यादाश्त चली गई है बोल सकती हो लेकिन, अकेले चल नहीं सकते वाला बहाना तो CBI वाले नहीं मानेंगे l pic.twitter.com/KzFWc4qvN1
मनीष बघेल नाम के एक्स यूजर ने रोहिणी को जवाब दिया, “जैसे ही सत्ता गई, जेल जाने का समय आया है तो अभी लालू कमजोर और बीमार हो गया? अभी तक तो खूब खेल-कूद रहा था, खूब राजनीति कर रहा था? बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था? अब कोर्ट के सामने बीमारी और किडनी का बहाना बनाओगे? खूब बड़े मक्कार और चालबाज़ हो सारा परिवार।”
जैसे ही सत्ता गई , जेल जाने का समय आया है तो अभी लालू कमजोर और बीमार हो गया ?
अभी तक तो खूब खेल कूद रहा था , खूब राजनीति कर रहा था ? बड़ी बड़ी बातें कर रहा था ?
अब court के सामने बीमारी और किडनी का बहाना बनाओगे ?
अभिषेक श्रीवास्तव ने लिखा, “मोहतरमा, जिसको आप शेर कह रही हैं वो सज़ायाफ्ता मुजरिम हैं, चारा घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से सजा पाए हुए हैं। आपके हीरो हो सकते हैं लेकिन पूरे बिहार के नहीं, जहाँ तक बात रही बीमार होने की, तो अभी पूरी दुनिया के सामने राहुल गाँधी को मटन बनाना सिखा रहे थे, बैडमिंटन खेल रहे थे।”
मोहतरमा, जिसको आप शेर कह रही हैं हैं वो सज़ायाफ्ता मुजरिम हैं, चारा घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से सजा पायी हुई है।आपके हीरो हो सकते हैं लेकिन पूरे बिहार के नहीं, जहाँ तक बात रही बीमार होने की तो अभी पूरी दुनिया क सामने राहुल गाँधी की मटन बनाना सीखा रहे थे , बैडमिंटन खेल रहे थे।
बता दें कि सीबीआई ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, उनकी बेटी मीसा भारती और 13 अन्य के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में आरोप पत्र दायर किया था। सीबीआई के अनुसार, लोगों को पहले रेलवे में ग्रुप डी पदों पर स्थानापन्न के रूप में भर्ती किया गया था और जब उनके परिवारों ने जमीन का सौदा किया तो उन्हें नियमित कर दिया गया। रेलवे में नौकरी के बदले रिश्वत लेकर जमीन लेने के आरोप की जाँच सीबीआई कर रही है। वहीं, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच कर रही है। इस मामले में सीबीआई ने आरोप पत्र भी दाखिल किया था। इसी मामले में ईडी लालू प्रसाद यादव से पूछताछ कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में एडवोकेट कमिश्नर द्वारा सर्वे पर लगाई गई रोक को और आगे बढ़ा दिया है। यह रोक इलाहाबाद हाई कोर्ट के सर्वे को अनुमति देने वाले निर्णय पर लगाई गई थी। अब इस पर अप्रैल में फैसला होगा। अप्रैल में इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं की सुनवाई भी होगी।
यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपंकर दत्ता कर रहे थे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से सम्बंधित अन्य याचिकाओं की भी सुनवाई की। यह याचिकाएँ उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमिटी ने डाली थी। वक्फ बोर्ड ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक निर्णय के खिलाफ अपील की थी।
मई 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शाही ईदगाह विवादित ढाँचे से जुड़े जमीन विवाद को लेकर दाखिल किए गए मुकदमे अपने पास हस्तांतरित कर दिए गए थे। यह याचिका इसी के विरुद्ध डाली गई थी। वहीं शाही ईदगाह विवादित ढाँचा की मस्जिद कमिटी ने दिसम्बर 2023 के एक आदेश को चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा में एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करके सर्वे किए जाने के जिला अदालत के निर्णय को बरकरार रखा था। इन सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने अब अप्रैल 2024 में सुनने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा सर्वे को लेकर दी गई अनुमति पर रोक को भी आगे बढ़ा दिया। यह सर्वे अब अप्रैल तक नहीं हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह रोक 16 जनवरी, 2024 को अग्रिम सुनवाई तक लगाई थी। यह रोक शाही ईदगाह मस्जिद कमिटी की याचिका के आधार पर लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले से सम्बंधित याचिकाएँ यहाँ लंबित हैं इसलिए सर्वे को अनुमति नहीं दी जा सकती।
श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर खड़ा किया गया ढाँचा
बता दें कि मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि से सटी शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर लम्बे समय से विवाद चलता आया है। यहाँ मुकदमा लड़ रहे हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बगल में बनी शाही ईदगाह ढाँचा को जबरन वहीं बना दिया गया, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। हिन्दू पक्ष का कहना है कि इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले मंदिर हुआ करता था।
हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे।
मथुरा का मुद्दा नया नहीं है। इस मामले में अदालत में कई याचिकाएँ दाखिल की गई हैं और उन पर सुनवाई हो रही है। लगभग 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू पक्ष यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की लगातार माँग करते रहे हैं। सन 1935 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के हिन्दू राजा को इसकी भूमि के अधिकार सौंपे थे।
असम में कॉन्ग्रेस की एक महिला नेता ने अपनी ही पार्टी में महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर आवाज़ उठाई है। कलियाबोर के खुमतई से कॉन्ग्रेस विधायक रहीं बिस्मिता गोगोई ने जब कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उनके ब्लाउज पर टिप्पणी की गई, जिसका उनके जीवन पर नकारात्मक रूप से गहरा असर पड़ा। बिस्मिता गोगोई अब भाजपा में शामिल हो गई हैं। उन्होंने बताया कि ये वाकया तब का है, जब वो कमल के फूल की डिजाइन वाला ब्लाउज पहनी हुई थीं।
उन्होंने बताया, “मैंने कभी इस बारे में कि मेरा ब्लाउज की डिजाइन कमल के फूल वाली है। इस डिजाइन के ब्लाउज पहनना एक सामान्य बात है। मैं यहाँ सार्वजनिक रूप से ब्लाउज के बारे में बात करने में भी कठिनाई महसूस कर रही हूँ। ये घटना ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान की है, जब राज्य स्तर पर खुमतई में इसका आयोजन हुआ था। उसी दौरान मैंने ये ड्रेस पहनी थी। कॉन्ग्रेस नेताओं ने ये देख कर सोचा कि मैं भाजपा में शामिल होने जा रही हूँ।”
बिस्मिता गोगोई ने यहाँ तक बताया कि कॉन्ग्रेस का आलाकमान भी ‘राजीव भवन’ में इसी मुद्दे पर बात कर रहा था। असम सरकार में मंत्री रहीं बिस्मिता गोगोई ने बताया कि ये घटना उनके लिए काफी अपमानजनक थी, जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो वो रो पड़ीं। बिस्मिता गोगोई ने बताया कि उन्हें न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि पार्टी की आंतरिक बैठकों से भी दूर रखा गया। उन्होंने बताया कि ये एक महिला का अपमान था, इससे मुझे वास्तव में ठेस पहुँची थी।
"कांग्रेस में लोग मेरे ब्लाउज पर कमल को लेकर बात करते थे"
◆ असम में कांग्रेस का साथ छोड़ने वाली पूर्व विधायक बिस्मिता गोगाई का बयान
बिस्मिता गोगोई ने कहा कि उस दिन उनकी प्रतिष्ठा ख़त्म कर दी गई थी। उन्होंने पूछा कि जिस दल में महिला विरोधी बातें होती हों, वहाँ लोग कैसे रोक सकते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि हर कदम पर उनकी मानसिक प्रताड़ना की गई है। बिस्मिता गोगोई ने बताया कि कॉन्ग्रेस नहीं चाहती थी कि वो उसके कामकाज में शामिल हों। महत्वपूर्ण फैसले लेने में उनकी सहभागिता खत्म कर दी गई। कॉन्ग्रेस और ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU)’ के 150 से अधिक नेता रविवार (28 जनवरी, 2024) को भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
असम की ही एक अन्य महिला नेता अंगकिता दत्ता भी यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास BV पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। इसके बाद काॅन्ग्रेस ने डॉ अंगकिता दत्ता को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था, “श्रीनिवास पिछले छह महीनों से उन्हें परेशान और प्रताड़ित कर रहे हैं। लैंगिक टिप्पणी करते हैं। अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।”
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में एक महिला ने अपने ही पति का गुप्तांग काट लिया। उसका आरोप है कि वह पति उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता था। घटना के बाद घायल शख्स अपना इलाज अस्पताल में करवा रहा है। उसकी हालत गंभीर है। वहीं पत्नी को घर भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, हमीरपुर के टिकरौली गाँव में रहने वाले रामू निषाद की पत्नी ने शुक्रवार (26 जनवरी, 2024) रात को अपने पति का गुप्तांग काट लिया। इसके बाद पीड़ित रामू निषाद अपनी माँ के साथ रात में ही हमीरपुर के जिला अपस्ताल पहुँचा। यहाँ उसने डॉक्टरों को बताया कि उसके गुप्तांग में चोट लग गई।
डॉक्टरों ने उसका शुरुआती इलाज करके जब असली वजह जानी तो उसे आगे कानपुर इलाज के लिए रेफर कर दिया। इस दौरान पीड़ित की पत्नी भी अस्पताल पहुँच कर बवाल काटने लगी। यहाँ उसने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना था कि उसका पति उसके साथ अप्राकृतिक सम्बन्ध बनाता था।
महिला ने कहा कि उसका पति उसको सम्बन्ध बनाने के दौरान प्रताड़ित करता था। उसने बताया कि शुक्रवार रात को जब यह घटना हुई तो पति का गुप्तांग मुँह में था और इस दौरान वह बेहोश हो गई, इससे उसके जबड़े बँध गए और यह दुर्घटना हो गई। इसके बाद बच्चों ने उन्हें अलग किया और घायल शख्स अस्पताल की ओर इलाज के लिए भागा। गुप्तांग पर काटने के कारण उसके गुप्तांग से रक्तस्राव होने लगा था।
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पत्नी ने उसका गुप्तांग इसलिए काटा था क्योंकि उसे अपने पति के अवैध सम्बन्ध होने का शक था। इसके अलावा पति-पत्नी के बीच झगड़े की खबर भी आई है। पत्नी बताया है कि उसका पति शराब पीकर झगड़ता था और अप्राकृतिक सम्बन्ध बनाता था। पुलिस ने महिला को समझा कर घर भेज दिया है और पति का इलाज जारी है।
उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने हाल ही में एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारतीय मुस्लिमों को भगवान राम का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय मुस्लिम अरब नहीं हैं, बल्कि वे इस देश के मूल निवासी हैं जिनका धर्म परिवर्तन हुआ है। इसलिए, उन्हें अपने पूर्वजों की विरासत को नहीं भूलना चाहिए। शम्स ने कहा कि भारतीय मुस्लिमों ने पूजा की पद्धति बदल ली है, लेकिन वे अपने पूर्वजों की विरासत को नहीं बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम भारतीय संस्कृति और इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उत्तराखंड के मदरसों में भगवान रामलला के बारे में पढ़ाने की शुरुआत चार मदरसों से की जाएगी और फिर धीरे-धीरे सभी मदरसों में इसे लागू किया जाएगा। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इसका ऐलान करते हुए कहा, “हम सभी भारतीय मुस्लिम यहाँ के स्थानीय निवासी हैं। हम कोई अरबी नहीं हैं। हम भले ही अपना मजहब बदल लें, पूजा पाठ के तरीके बदल लें, लेकिन अपने पूर्वजों को नहीं बदल सकते।” शादाब शम्स ने ऐलानिया तौर पर कहा कि मदरसों में भगवान राम के बारे में पढ़ाया जाएगा, औरंगजेब के बारे में नहीं, क्योंकि भगवान राम पूरी दुनिया के लिए आदर्श हैं।
शम्स ने कहा, “श्रीराम हम सभी के लिए प्रेरणा हैं। वो अपने पिता के मान-सम्मान के लिए 14 साल तक वन में रहे। वो सबके हैं। हर कोई राम जैसा बेटा चाहता है। उन्होंने पिता का वादा पूरा करने के लिए सबकुछ त्याग दिया। कौन लक्ष्मण जैसा भाई या सीता जैसी पत्नी नहीं चाहता। एक तरफ हमारे सामने ऐसे (भगवान राम) चरित्र हैं, तो दूसरी तरफ औरंगजेब जैसे चरित्र, जिसने अपने भाई की हत्या कर दी और पिता को जेल में डाल दिया। हम किसी भी कीमत पर औरंगजेब के बारे में नहीं पढ़ाएँगे, बल्कि नबी और श्रीराम के बारे में पढ़ाएँगे।”
शादाब शम्स ने कहा कि उत्तराखंड के मदरसों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू है। चूँकि शिक्षा विभाग भी एनसीईआरटी की कितानों में भगवान राम की जीवनी को शामिल कर रहा है। ऐसे में स्वाभाविक सी बात है कि मदरसों में भी भगवान राम के बारे में पढ़ाया ही जाएगा। शम्स ने कहा कि विकसित भारत की तर्ज पर मदरसों में भी बदलाव लाने का काम किया जा रहा है, ताकि सभी धर्म-जाति-समूह के बच्चे शिक्षा ले सकें। मदरसों में रामायण का पाठ पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी।
इससे पहले, शम्स ने कहा था कि मदरसों में संस्कृत की पढ़ाई भी कराई जाएगी। इस बारे में मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष समूह काजमी ने कहा था कि बच्चों को मदरसों में वेदों का ज्ञान दिया जाएगा। बता दें कि उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड के अधीन 117 मदरसे आते हैं।