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श्रीकृष्ण जन्मभूमि के सर्वे वाली माँग पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर मारा हथौड़ा: लगी रहेगी रोक, याचिका लेकर पहुँचा था वक्फ बोर्ड

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में एडवोकेट कमिश्नर द्वारा सर्वे पर लगाई गई रोक को और आगे बढ़ा दिया है। यह रोक इलाहाबाद हाई कोर्ट के सर्वे को अनुमति देने वाले निर्णय पर लगाई गई थी। अब इस पर अप्रैल में फैसला होगा। अप्रैल में इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं की सुनवाई भी होगी।

यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपंकर दत्ता कर रहे थे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से सम्बंधित अन्य याचिकाओं की भी सुनवाई की। यह याचिकाएँ उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमिटी ने डाली थी। वक्फ बोर्ड ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक निर्णय के खिलाफ अपील की थी।

मई 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शाही ईदगाह विवादित ढाँचे से जुड़े जमीन विवाद को लेकर दाखिल किए गए मुकदमे अपने पास हस्तांतरित कर दिए गए थे। यह याचिका इसी के विरुद्ध डाली गई थी। वहीं शाही ईदगाह विवादित ढाँचा की मस्जिद कमिटी ने दिसम्बर 2023 के एक आदेश को चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा में एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करके सर्वे किए जाने के जिला अदालत के निर्णय को बरकरार रखा था। इन सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने अब अप्रैल 2024 में सुनने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा सर्वे को लेकर दी गई अनुमति पर रोक को भी आगे बढ़ा दिया। यह सर्वे अब अप्रैल तक नहीं हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह रोक 16 जनवरी, 2024 को अग्रिम सुनवाई तक लगाई थी। यह रोक शाही ईदगाह मस्जिद कमिटी की याचिका के आधार पर लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले से सम्बंधित याचिकाएँ यहाँ लंबित हैं इसलिए सर्वे को अनुमति नहीं दी जा सकती।

श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर खड़ा किया गया ढाँचा

बता दें कि मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि से सटी शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर लम्बे समय से विवाद चलता आया है। यहाँ मुकदमा लड़ रहे हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बगल में बनी शाही ईदगाह ढाँचा को जबरन वहीं बना दिया गया, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। हिन्दू पक्ष का कहना है कि इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे।

मथुरा का मुद्दा नया नहीं है। इस मामले में अदालत में कई याचिकाएँ दाखिल की गई हैं और उन पर सुनवाई हो रही है। लगभग 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू पक्ष यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की लगातार माँग करते रहे हैं। सन 1935 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के हिन्दू राजा को इसकी भूमि के अधिकार सौंपे थे।

‘मेरी ब्लाउज के बारे में बात करते थे कॉन्ग्रेस के बड़े-बड़े नेता’: असम की पूर्व महिला मंत्री ने बताया राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में क्या हुआ, छोड़ी पार्टी

असम में कॉन्ग्रेस की एक महिला नेता ने अपनी ही पार्टी में महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर आवाज़ उठाई है। कलियाबोर के खुमतई से कॉन्ग्रेस विधायक रहीं बिस्मिता गोगोई ने जब कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उनके ब्लाउज पर टिप्पणी की गई, जिसका उनके जीवन पर नकारात्मक रूप से गहरा असर पड़ा। बिस्मिता गोगोई अब भाजपा में शामिल हो गई हैं। उन्होंने बताया कि ये वाकया तब का है, जब वो कमल के फूल की डिजाइन वाला ब्लाउज पहनी हुई थीं।

उन्होंने बताया, “मैंने कभी इस बारे में कि मेरा ब्लाउज की डिजाइन कमल के फूल वाली है। इस डिजाइन के ब्लाउज पहनना एक सामान्य बात है। मैं यहाँ सार्वजनिक रूप से ब्लाउज के बारे में बात करने में भी कठिनाई महसूस कर रही हूँ। ये घटना ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान की है, जब राज्य स्तर पर खुमतई में इसका आयोजन हुआ था। उसी दौरान मैंने ये ड्रेस पहनी थी। कॉन्ग्रेस नेताओं ने ये देख कर सोचा कि मैं भाजपा में शामिल होने जा रही हूँ।”

बिस्मिता गोगोई ने यहाँ तक बताया कि कॉन्ग्रेस का आलाकमान भी ‘राजीव भवन’ में इसी मुद्दे पर बात कर रहा था। असम सरकार में मंत्री रहीं बिस्मिता गोगोई ने बताया कि ये घटना उनके लिए काफी अपमानजनक थी, जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो वो रो पड़ीं। बिस्मिता गोगोई ने बताया कि उन्हें न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि पार्टी की आंतरिक बैठकों से भी दूर रखा गया। उन्होंने बताया कि ये एक महिला का अपमान था, इससे मुझे वास्तव में ठेस पहुँची थी।

बिस्मिता गोगोई ने कहा कि उस दिन उनकी प्रतिष्ठा ख़त्म कर दी गई थी। उन्होंने पूछा कि जिस दल में महिला विरोधी बातें होती हों, वहाँ लोग कैसे रोक सकते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि हर कदम पर उनकी मानसिक प्रताड़ना की गई है। बिस्मिता गोगोई ने बताया कि कॉन्ग्रेस नहीं चाहती थी कि वो उसके कामकाज में शामिल हों। महत्वपूर्ण फैसले लेने में उनकी सहभागिता खत्म कर दी गई। कॉन्ग्रेस और ‘ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU)’ के 150 से अधिक नेता रविवार (28 जनवरी, 2024) को भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

असम की ही एक अन्य महिला नेता अंगकिता दत्ता भी यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास BV पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था। इसके बाद काॅन्ग्रेस ने डॉ अंगकिता दत्ता को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था, “श्रीनिवास पिछले छह महीनों से उन्हें परेशान और प्रताड़ित कर रहे हैं। लैंगिक टिप्पणी करते हैं। अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।”

पत्नी ने मुँह से काटा पति का गुप्तांग, बच्चों ने आकर बचाया: पीड़ित अस्पताल में भर्ती, महिला बोली- जबड़ा बंद हो गया था

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में एक महिला ने अपने ही पति का गुप्तांग काट लिया। उसका आरोप है कि वह पति उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता था। घटना के बाद घायल शख्स अपना इलाज अस्पताल में करवा रहा है। उसकी हालत गंभीर है। वहीं पत्नी को घर भेज दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, हमीरपुर के टिकरौली गाँव में रहने वाले रामू निषाद की पत्नी ने शुक्रवार (26 जनवरी, 2024) रात को अपने पति का गुप्तांग काट लिया। इसके बाद पीड़ित रामू निषाद अपनी माँ के साथ रात में ही हमीरपुर के जिला अपस्ताल पहुँचा। यहाँ उसने डॉक्टरों को बताया कि उसके गुप्तांग में चोट लग गई।

डॉक्टरों ने उसका शुरुआती इलाज करके जब असली वजह जानी तो उसे आगे कानपुर इलाज के लिए रेफर कर दिया। इस दौरान पीड़ित की पत्नी भी अस्पताल पहुँच कर बवाल काटने लगी। यहाँ उसने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना था कि उसका पति उसके साथ अप्राकृतिक सम्बन्ध बनाता था।

महिला ने कहा कि उसका पति उसको सम्बन्ध बनाने के दौरान प्रताड़ित करता था। उसने बताया कि शुक्रवार रात को जब यह घटना हुई तो पति का गुप्तांग मुँह में था और इस दौरान वह बेहोश हो गई, इससे उसके जबड़े बँध गए और यह दुर्घटना हो गई। इसके बाद बच्चों ने उन्हें अलग किया और घायल शख्स अस्पताल की ओर इलाज के लिए भागा। गुप्तांग पर काटने के कारण उसके गुप्तांग से रक्तस्राव होने लगा था।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पत्नी ने उसका गुप्तांग इसलिए काटा था क्योंकि उसे अपने पति के अवैध सम्बन्ध होने का शक था। इसके अलावा पति-पत्नी के बीच झगड़े की खबर भी आई है। पत्नी बताया है कि उसका पति शराब पीकर झगड़ता था और अप्राकृतिक सम्बन्ध बनाता था। पुलिस ने महिला को समझा कर घर भेज दिया है और पति का इलाज जारी है।

अब मदरसों में भी गूँजेगा राम-राम, सिलेबस से बाहर होगा औरंगजेब: उत्तराखंड में बोर्ड के अध्यक्ष का ऐलान – मजहब बदल सकते हैं, पूर्वज नहीं

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने हाल ही में एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारतीय मुस्लिमों को भगवान राम का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय मुस्लिम अरब नहीं हैं, बल्कि वे इस देश के मूल निवासी हैं जिनका धर्म परिवर्तन हुआ है। इसलिए, उन्हें अपने पूर्वजों की विरासत को नहीं भूलना चाहिए। शम्स ने कहा कि भारतीय मुस्लिमों ने पूजा की पद्धति बदल ली है, लेकिन वे अपने पूर्वजों की विरासत को नहीं बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम भारतीय संस्कृति और इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उत्तराखंड के मदरसों में भगवान रामलला के बारे में पढ़ाने की शुरुआत चार मदरसों से की जाएगी और फिर धीरे-धीरे सभी मदरसों में इसे लागू किया जाएगा। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इसका ऐलान करते हुए कहा, “हम सभी भारतीय मुस्लिम यहाँ के स्थानीय निवासी हैं। हम कोई अरबी नहीं हैं। हम भले ही अपना मजहब बदल लें, पूजा पाठ के तरीके बदल लें, लेकिन अपने पूर्वजों को नहीं बदल सकते।” शादाब शम्स ने ऐलानिया तौर पर कहा कि मदरसों में भगवान राम के बारे में पढ़ाया जाएगा, औरंगजेब के बारे में नहीं, क्योंकि भगवान राम पूरी दुनिया के लिए आदर्श हैं।

शम्स ने कहा, “श्रीराम हम सभी के लिए प्रेरणा हैं। वो अपने पिता के मान-सम्मान के लिए 14 साल तक वन में रहे। वो सबके हैं। हर कोई राम जैसा बेटा चाहता है। उन्होंने पिता का वादा पूरा करने के लिए सबकुछ त्याग दिया। कौन लक्ष्मण जैसा भाई या सीता जैसी पत्नी नहीं चाहता। एक तरफ हमारे सामने ऐसे (भगवान राम) चरित्र हैं, तो दूसरी तरफ औरंगजेब जैसे चरित्र, जिसने अपने भाई की हत्या कर दी और पिता को जेल में डाल दिया। हम किसी भी कीमत पर औरंगजेब के बारे में नहीं पढ़ाएँगे, बल्कि नबी और श्रीराम के बारे में पढ़ाएँगे।”

शादाब शम्स ने कहा कि उत्तराखंड के मदरसों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू है। चूँकि शिक्षा विभाग भी एनसीईआरटी की कितानों में भगवान राम की जीवनी को शामिल कर रहा है। ऐसे में स्वाभाविक सी बात है कि मदरसों में भी भगवान राम के बारे में पढ़ाया ही जाएगा। शम्स ने कहा कि विकसित भारत की तर्ज पर मदरसों में भी बदलाव लाने का काम किया जा रहा है, ताकि सभी धर्म-जाति-समूह के बच्चे शिक्षा ले सकें। मदरसों में रामायण का पाठ पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी।

इससे पहले, शम्स ने कहा था कि मदरसों में संस्कृत की पढ़ाई भी कराई जाएगी। इस बारे में मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष समूह काजमी ने कहा था कि बच्चों को मदरसों में वेदों का ज्ञान दिया जाएगा। बता दें कि उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड के अधीन 117 मदरसे आते हैं।

फरार हो गए झारखंड के CM हेमंत सोरेन, या हो गया अपहरण? दिल्ली आवास पर डेरा डाल कर बैठी है ED, भाजपा बोली – संज्ञान लें राज्यपाल

क्या झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन घोटाला कर के फरार हो गए हैं? कम से कम मीडिया में तो यही चल रहा है। साथ ही भाजपा का भी यही आरोप है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) जमीन घोटाले में उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच चल रही है। अब ED उनसे दोबारा पूछताछ करने के लिए उन्हें खोज रही है। खबर है कि वो मिल ही नहीं रहे हैं। उन्हें पेश होने के लिए बुधवार (31 जनवरी, 2024) तक का समय दिया गया है। उनके दिल्ली स्थित आवास पर एजेंसी के अधिकारी डेरा डाले हुए हैं।

झारखंड में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने भी इसे लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “ED अधिकारियों के डर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लापता होने की सूचना समाचार चैनलों के माध्यम से प्राप्त हो रही है। अगर इस खबर में सत्यता है तो यह झारखंड के लिए संवैधानिक संकट की स्थिति है। महामहिम CP राधाकृष्णन से निवेदन है कि वो मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को तलब कर जाँच एजेंसी से भागने का कारण पूछें।”

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड की साख और प्रतिष्ठा दाँव पर है। उन्होंने कहा कि अपनी इन हरकतों से हेमंत ने उनके जनजातीय समाज की प्रतिष्ठा और गौरव को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। साथ ही उन्होंने झारखंड के DGP से जवाब माँगा कि CM हेमंत सोरेन सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़कर रात को कैसे बाहर निकल कर भाग सकते हैं? उन्होंने की सुरक्षा में लगे कर्मियों को बर्खास्त करने की माँग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत सुरक्षित रूप से पेश किया जाना चाहिए।

बाबूलाल मरांडी ने पूछा कि आखिर एक राज्य का मुख्यमंत्री भगोड़ा कहलाने का पाप कैसे कर सकता है? उन्होंने इसे शर्मनाक करार दिया। वहीं गोड्डा के सांसद एवं भाजपा नेता निशिकांत दुबे भी इस मामले में मुखर हैं। डॉ दुबे ने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि झारखंड सरकार का महाधिवक्ता मेरे झारखंड की आन बान और शान वीर शिबू सोरेन जी के बेटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को भगोड़ा घोषित कर देगा। आज मेरी बात सही साबित होती दिख रही है।”

निशिकांत दुबे ने कहा कि मीडिया के ख़बरों के अनुसार या तो हेमंत सोरेन जी भाग गए दिल्ली से या तो बीमार हो गए या तो अपहरण हो गया। उन्होंने झारखंड के राज्यपाल CP राधाकृष्णन से माँग की कि सीएम के सुरक्षा अधिकारी को बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड का नाक कट गया। हेमंत सोरेन को अब तक 10 बार समन भेजा जा चुका है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके साथ पूछताछ जारी होने की बात भी कही जा रही है।

केरल में अनवर करता था 10वीं क्लास की बच्ची का रेप, ‘गंदी फोटो’ दिखाकर ब्लैकमेल: चूहा मारने वाला जहर खा मर गई छात्रा

केरल के कासरगोड में एक नाबालिग छात्रा ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। उसका अनवर नाम का एक 24 वर्षीय युवक लम्बे समय से यौन शोषण कर रहा था। वह उसे उसके निजी फोटो लीक करने की धमकी भी देता था। लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर नाबालिग ने आत्महत्या कर ली।

जानकारी के अनुसार, कासरगोड के बदियाद्का इलाके में रहने वाली नाबालिग छात्रा, जो कि कक्षा 10 की छात्रा थी, उसने चूहे मारने वाला जहर खाकर आत्महत्या कर ली। उसकी आत्महत्या के पीछे का कारण तो सामने आया ही है। इसके अलावा नाबालिग ने मृत्यु से पहले ही पुलिस को अपना बयान भी दर्ज करवा दिया था।

उसने बताया था कि अनवर लगातार उसका यौन शोषण कर रहा था। अनवर उसको स्कूल के रास्ते में परेशान करता था, वह उसके निजी फोटो लीक करने की धमकी भी देता था। अनवर नाबालिग को मारने की धमकी भी देता था। उसने यहाँ तक धमकी भी दी थी कि यदि वह उसके साथ रिश्ता नहीं रखेगी तो वह पिता की हत्या कर देगा। उसने बालिका को इतना परेशान किया कि उसने तंग आकर जहर पी लिया।

यह भी सामने आया है कि यह नाबालिग अनवर से 6 माह पहले इंस्टाग्राम के माध्यम से मिली थी। इसके बाद दोनों की कुछ दिन बातचीत हुई। जब नाबालिग ने बातचीत बंद की तो अनवर उसे धमकाने लगा। उसे रास्ते में आते-जाते रोक कर धमकियाँ देने लगा। इन्हीं सब कारणों से परेशान होकर बालिका ने 23 जनवरी, 2024 को अपने घर में जहर खा लिया।

उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस ने अस्पताल में ही उसका बयान दर्ज कर लिया। आरोपित अनवर के खिलाफ पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और POCSO के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अनवर घटना के बाद से फरार हो गया था। उसे कर्नाटक के बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया है।

कोझिकोड में भी एक नाबालिग का यौन शोषण

केरल से ही एक और नाबालिग के यौन शोषण का मामला सामने आया है। कोझिकोड के पेरुवान्नामुझी में एक शिक्षक पर ही कक्षा 10 में पढ़ने वाली छात्रा के यौन शोषण का आरोप लगा है। नाबालिग बच्ची को यौन शोषण के कारण बीमार भी हो गई। डॉक्टर ने इसके बाद पुलिस को जानकारी दी। बच्ची से आगे जानकारी लेने पर शिक्षक के खिलाफ POCSO के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया गया। अभी आरोपित शिक्षक फरार है। मामले की आगे जाँच चल रही है।

मालदीव की संसद में लत्तम-जुत्तम, एक-दूसरे को पटक कर पीटने लगे सांसद: सबसे बड़ी पार्टी ने मोहम्मद मुइज्जु को हटाने के लिए जुटा लिए हस्ताक्षर

मालदीव की संसद में फ़िलहाल ‘मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP)’ सबसे बड़ी पार्टी है। अब उसने वहाँ के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए अभियान छेड़ दिया है। इतना ही नहीं, उसने इसकी प्रक्रिया शुरू करते हुए उतने सांसदों के हस्ताक्षर भी जुटा लिए हैं जितने की ज़रूरत है। MDP के एक नेता ने बताया कि एक अन्य विपक्षी दल ‘द डेमोक्रेट्स’ की सहायता से उसने महाभियोग प्रस्ताव के लिए हस्ताक्षर जुटा लिए हैं। अब इसे स्पीकर के समक्ष पेश किया जाना बाकी है।

मोहम्मद मुइज्जु की सरकार चीन के हाथों की कठपुतली बन गई है। चीन को फायदा पहुँचाने के लिए वहाँ की सरकार 4 नए कानून लेकर आई है। इस पर पक्ष-विपक्ष के सांसदों के बीच संसद में लत्तम-जुत्तम भी हुई। सरकार समर्थक सांसदों ने इसके बाद प्रदर्शन किया, जिससे संसद का कामकाज भी बाधित हुआ। कंडीथीमु के सांसद अब्दुल्ला शाहीन अब्दुल हकीम ने केंदिकूलहूधु के सांसद अहमद ईशा को ठोकर मार कर गिरा दिया, जिसके बाद दोनों के बीच लड़ाई हुई

दोनों सांसद चैंबर में ही गिर पड़े। इस दौरान शाहीन के सिर में भी चोटें आई हैं। अल्पसंख्यक नेता मूसा सिराज ने इस झगड़े को रोकने का प्रयास किया। असल में विपक्ष ने मोहम्मद मुइज्जु के कुछ मंत्रियों को मान्यता नहीं दी, जिससे ‘प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (PPM)’ और ‘पीपल्स नेशनल कॉन्ग्रेस (PNC)’ के नेता भड़क गए। वीडियो में भी देखा जा सकता है कि कैसे स्पीकर की कुर्सी के पास सांसद आपस में लड़ पड़े। सरकार का कहना है कि विपक्ष द्वारा नए मंत्रियों को मान्यता न देना नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है।

एक सांसद तो सीटी बजा आकर स्पीकर को डिस्टर्ब करते हुए देखा गया। माथीवेरी के सांसद हसन ज़हीर को भी चोटें आई हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद मालदीव के 3 मंत्रियों ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उसके बाद तीनों को इस्तीफा देना पड़ा था। लक्षद्वीप के प्रमोशन से भड़के मालदीव को चीन का साथ मिला। लेकिन, वहाँ के आम लोग और विपक्षी दल भारत के प्रति अच्छा रुख रखते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने वहाँ के राजदूत को भी तलब किया था।

‘एक हफ्ते के भीतर लिखकर दो कि तुम्हें खेद है’: तेजस्वी यादव को सुप्रीम कोर्ट का आदेश, लालू के बेटे ने गुजरातियों को कहा था ‘ठग’

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से कहा है कि वह एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट रूप से यह लिखकर दें कि उन्हें गुजरातियों पर दिए गए बयान पर खेद है और अपना वक्तव्य वापस लें। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी उनके खिलाफ दायर किए गए एक मानहानि के मामले में दी है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने इस मामले को सुना। तेजस्वी इस मामले को खत्म करने को लेकर 22 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने एक शपथपत्र दायर करके जानकारी दी थी कि वह गुजरातियों के खिलाफ दिया गया अपना बयान वापस लेना चाहते हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तेजस्वी यादव को एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट शब्दों में यह लिखना होगा कि गुजरातियों पर दिए गए बयान पर उन्हें खेद है। वह अपने इस बयान को वापस लेते हैं। इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होनी है, ऐसे में उन्हें यह कहते हुए शपथ पत्र एक सप्ताह भीतर दाखिल करना होगा। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले में तेजस्वी के खिलाफ मामला दर्ज करवाने वाले गुजराती सामाजिक कार्यकर्ता हरेश मेहता के वकील से कहा कि वह उनसे पूछें कि वह इस मामले में आगे क्या चाहते हैं।

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने 22 मार्च 2023 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुजरातियों के खिलाफ बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “सिर्फ गुजराती ही ठग हो सकते हैं और उनका अपराध माफ भी कर दिया जाएगा। अगर वह देश से फरार भी हो जाएँ तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?”

इसको लेकर हरेश मेहता ने उनके खिलाफ गुजरात में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करवाया था। इसमें कहा गया था कि तेजस्वी यादव ने पूरे गुजराती समाज का अपमान किया है। अहमदाबाद में इस मामले में उन्हें समन भी जारी किया गया था लेकिन वह यहाँ पेश होने नहीं पहुँचे थे और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

तेजस्वी यादव अभी पटना में हैं। उन्होंने यह बयान बिहार के उपमुख्यमंत्री रहते हुए दिया था। अब उनकी कुर्सी भी चली गई है। 28 जनवरी, 2024 को बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राजद से समर्थन वापस लेकर NDA के साथ मिलकर सरकार बना ली है। तेजस्वी यादव से कल (30 दिसम्बर, 2024) को पटना में जमीन के बदले नौकरी मामले में ED पूछताछ भी करने वाली है। आज उनके पिता लालू प्रसाद यादव से पूछताछ हो रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले एक ऐसा ही मामला कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी के विरुद्ध दर्ज करवाया गया था। राहुल गाँधी ने 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जाति मोदी को लेकर कहा था कि ‘सारे मोदी चोर’ होते हैं। इस पर उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला चला था। इस मामले में उन्हें 2 वर्ष की सजा अहमदबाद की अदालत ने सुनाई थी।

खाना-पानी-दवा लेकर लालू प्रसाद यादव पहुँचे ED दफ्तर, जॉब स्कैम मामले में चल रही पूछताछ: झारखंड CM हेमंत सोरेन के भी दिल्ली आवास पर पहुँची टीम

राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद से ‘नौकरी के बदले जमीन घोटाला’ मामले में पूछताछ करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम आज (29 जनवरी 2024) बिहार की राजधानी पटना पहुँची है। यहाँ लालू प्रसाद यादव से पूछताछ चालू हो गई है। यह पूछताछ पटना स्थित ED दफ्तर में हो रही है। उनकी दवा-खाना-पानी भी यहाँ भिजवाया गया है।

इससे पहले लालू यादव को आज (29 जनवरी, 2024) के पूछताछ के लिए समन भेजा गया था। लालू प्रसाद यादव अभी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर जमानत पर जेल से बाहर हैं। वह चारा घोटाले के मामले में जेल में बंद थे। लालू प्रसाद यादव से पूछताछ करने पहुँची ED की टीम का राजद के कार्यकर्ताओं ने घेराव भी किया और हंगामा काटा।

तेजस्वी यादव से भी होगी पूछताछ

गौरतलब है कि लालू यादव के बाद कल (30 जनवरी, 2024) को उनके बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से भी पूछताछ होगी। इसके लिए भी ED ने पहले ही समन भेज दिया था। लालू यादव से होने वाली सुनवाई में उनके साथ उनकी बेटी मीसा भारती भी पहुँची हैं।

ED की पूछताछ के लिए भले ही पहले से तारीख तय थी लेकिन यह ऐसे समय में हो रही है जब एक ही दिन पहले बिहार में राजद की सरकार गिरी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी पार्टी से समर्थन वापस ले लिया था और एनडीए के साथ मिलकर सरकार बना ली है।

इससे पहले 9 जनवरी, 2024 को इस मामले में ED ने एक 4,800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव का नाम शामिल है। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए गए थे।

इस घोटाले की सीबीआई जाँच कर रही है लेकिन इसमें जुड़े पैसे के लेनदेन में गडबडी गड़बड़ी की जाँच ED को मिली है। ED ने मार्च 2023 में इस मामले में छापेमारी भी की थी। ED की जाँच में सामने आया है कि नौकरी के बदले लिए गए पैसे से कई जमीनें औने पौने दामों पर खरीदीं गईं।

इनमें से कुछ जमीनें पटना और एक मकान दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में भी खरीदा गया। दिल्ली के इस बंगले की कीमत ₹150 करोड़ है, सामने आया था कि यह मकान एक ऐसी कम्पनी के नाम पर था जिसे तेजस्वी यादव ने मात्र ₹4 लाख में खरीदा था।

हेमंत सोरेन के आवास पर पूछताछ के लिए पहुँची ED

जहाँ एक और लालू प्रसाद यादव से ED पूछताछ कर रही है वहीं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिल्ली स्थित आवास पर भी एक टीम पहुँची है। ED के साथ यहाँ दिल्ली पुलिस की टीम भी पहुँची है। उनसे ED जमीन घोटाला मामले में पूछताछ करना चाहती है। इसको लेकर उन्हें कई समन भेजे जा चुके हैं। हेमंत सोरेन से इससे पहले 20 जनवरी, 2024 को पूछताछ की गई थी। इस दिन पूछताछ पूरी ना होने के कारण 29 या 31 जनवरी को उनसे पेश होने को कहा गया था।

इस बीच इस चर्चा ने भी जोर पकड़ा था कि ED हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर सकती है। इसको लेकर यह भी कयास लगाए गए थे कि वह अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को भी मुख्यमंत्री बना सकते हैं। झारखंड के एक निर्दलीय विधायक ने भी सीट खाली की थी। कहा गया था कि इस सीट से ही चुनाव लड़ेंगी।

‘बच्चों को नहीं दें नया पेन’: जानिए ‘परीक्षा पे चर्चा’ में अभिभावकों को PM मोदी ने क्यों दी ये सलाह, बोले – 2 बच्चों के बीच तुलना न करें माता-पिता, बढ़ती है नफरत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सातवीं बार ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम को संबोधित किया। बोर्ड परीक्षा से पहले प्रधानमंत्री देश भर के छात्रों में हौसला भरते हैं और उनका उत्साहवर्धन करते हैं। इस दौरान हर बार वो स्कूली बच्चों के माता-पिता के लिए भी सकारात्मक संदेश देते हैं। इस बार प्रधानमंत्री ने बच्चों के माता-पिता से अनुरोध किया है कि वो बच्चों की दूसरों के साथ तुलना न करें।

पीएम मोदी ने दिया तनाव से बचने का मंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव से बचने का मंत्र दिया। पीएम मोदी ने कहा, “परीक्षा से पहले आराम से बैठें, हँसी-मजाक में 5-10 मिनट बिता दीजिए। खुद में खो जाइए, एग्जाम से बाहर निकल जाएँगे, फिर जब आपके हाथ में प्रश्न पत्र आएगा तो आप आराम से कर पाएँगे। हम बाकी चीजों में लटके रहते हैं, वो बिना कारण हमारी शक्ति बर्बाद करता है। हमें खुद में ही खोए रहना चाहिए। बचपन से अर्जुन और पक्षी की आँख वाली कथा सुनते हैं, इन्हें अपने जीवन में भी लागू भी करें। घबराहट का कारण है कि परीक्षा के समय सोचना कि कहीं समय कम ना पड़ जाए, अच्छा होता मैं पहले वे प्रश्न कर लेता, ऐसे में पहले पूरा पेपर पढ़ लीजिए फिर देखिए कि आपको कैसे करना है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “कुछ माता पिता को लगता है कि आज एग्जाम है कि बच्चे को नई पेन लाकर दें, लेकिन मेरा आग्रह है कि जो पेन रोज यूज करता है, वही ले जाने दीजिए। न उसे कपड़ों पर टोकिए, जो पहन रहा है उसे पहनने दीजिए। एग्जाम पर उसे कंफर्ट फील कराइए।”

पूरी नींद जरूरी

पीएम मोदी ने परीक्षा के समय बच्चों को पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा, “जैसे मोबाइल को कार्य करने के लिए चार्जिंग की आवश्यकता होती है, उसी तरह बॉडी को भी रिचार्ज रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि स्वस्थ मन के लिए शरीर को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए प्रॉपर नींद लेना भी बहुत आवश्यक है।”

बच्चों के बीच तुलना न करें माता-पिता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और छात्रों के माता-पिता के साथ चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि अगर जीवन में चुनौतियाँ न हों तो जीवन बहुत ही चेतनाहीन बन जाएगा। ऐसे में प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, लेकिन यह स्वस्थ तरीके की होनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि माता-पिता को दो बच्चों के बीच तुलना नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इससे नफरत पैदा होती है, जो आगे चलकर जहरीले वृक्ष में बदल सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों के रिपोर्ट कार्ड को माता-पिता अपने विजिटिंग कार्ड की तरह इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे बच्चों के मन-मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

शिक्षक का काम नौकरी नहीं, बल्कि जीवन बदलना

बच्चों के तनाव को कम करने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। इसलिए शिक्षक और छात्रों के बीच हमेशा सकारात्मक रिश्ता रहना चाहिए। शिक्षक का काम सिर्फ जॉब करना नहीं, बल्कि जिंदगी को संवारना है, जिंदगी को सामर्थ्य देना है, यही परिवर्तन लाता है।

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी को देखा। उन्होंने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम की शुरुआत में ही प्रदर्शन की तारीफ की और लोगों से प्रदर्शनी को देखने की भी अपील की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत में शिक्षकों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने शिक्षकों से मुखातिब होते हुए कहा कि वो नए बच्चों को पुरानी कक्षाओं के बारे में बताएँ। बच्चों का हौसला बढ़ाएँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छात्र तो हर कक्षा में बदलते रहते हैं, लेकिन शिक्षक वहीं पर रहते हैं। वो छात्रों को प्रेरणा दे सकते हैं। छात्रों को समस्याओं का हल बता सकते हैं।