छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के टेकलगुड़ेम पुलिस कैंप पर नक्सलियों ने बड़ा हमला किया है। इस हमले में 3 जवान बलिदान हो गए हैं, जबकि लगभग 14 जवान घायल हैं। घायलों को जगदलपुर रायपुर ले जाया गया है। इनमें 4 जवानों की हालत गंभीर है, जबकि अन्य खतरे से बाहर हैं। बता दें कि साल 2021 में टेकलगुड़ेम में ही नक्सलियों ने हमला किया था, जिसमें 23 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (30 जनवरी 2024) को जोनागुड़ा-अलीगुड़ा क्षेत्र में सुरक्षाबलों की टीम सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इस टीम में सीआरपीएफ की कोबरा, एसटीएफ और डीआरजी के जवान शामिल थे। दोपहर 3 बजे के करीब घात लगाए नक्सलियों ने सुरक्षाबलों की टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी अपनी पोजिशन सँभाल ली और दोनों तरफ से फायरिंग हो ने लगी।
दरअसल, पुलिस और नक्सलियों के बीच यह मुठभेड़ जगरगुंडा थाना क्षेत्र के टेकलगुड़ेम गाँव में हुई है। टेकलगुड़ेम गाँव में एक नया पुलिस कैंप खोला गया है। इसी कैंप से सुरक्षाबल सर्च ऑपरेशन के लिए निकले थे। इसके बाद टीम पर माओवादियों ने हमला कर दिया। चार घंटों तक चली मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को भारी पड़ता देख नक्सली जंगल की आड़ लेकर भागने में कामयाब हो गए हैं।
गौरतलब है कि टेकलगुड़ा में ही 3 अप्रैल 2021 में सुरक्षाबलों और नक्सली की मुठभेड़ में 23 जवान बलिदान हो गए थे, जबकि 35 से ज्यादा घायल हो गए थे। इस मुठभेड़ में करीब 350 से 400 नक्सली शामिल थे। इनमें माओवादियों के बड़े लीडर भी मौजूद थे। जवानों पर BGL (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) दागा गया था।
इतना ही नहीं, इस दौरान नकस्लियों ने DRG, CRPF और कोबरा बटालियन के जवानों से हथियार भी लूट कर ले गए थे। नक्सलियों ने कोबरा बटालियन के एक जवान राकेश्वर सिंह मन्हास का अपहरण भी कर लिया था। हालाँकि, छह दिन तक कब्जे में रखने के बाद नक्सलियों ने बस्तर के गाँधी कहलाने वाले स्वतंत्रता सेनानी धर्मपाल सैनी की मध्यस्थता के बाद राकेश्वर सिंह को छोड़ दिया था।
बताते चलें कि तीन दिन पहले चिंतागुफा क्षेत्र में सक्रिय रहे दो महिलाओं और एक पुरुष नक्सली ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया था। इनमें से एक महिला नक्सली पर एक लाख रुपए का इनाम रखा गया था। शनिवार (27 जनवरी 2024) की शाम को सीआरपीएफ के 50वीं बटालियन के अधिकारियों के समक्ष नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
सीआरपीएफ के द्वितीय कमान के अधिकारी दुर्गाराम ने बताया कि पुलिस के पूना नर्कोम अभियान से प्रभावित होकर दूधी सुकड़ी (53), दूधी देवे (38) और माड़वी हड़मा (26) ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से दूधी देवे पर एक लाख रुपए का इनाम था। तीनों को प्रोत्साहन राशि दी गई। इसके अलावा, इन्हें राज्य सरकार की पुनर्वास नीति योजना का लाभ दिया जाएगा।
पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का दौर अब भी थमता हुआ नहीं दिख रहा है। पार्टी के सूचना एवं तकनीक विभाग के इंचार्ज एवं बंगाल भाजपा के प्रभारी अमित मालवीय ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें भाजपा कार्यकर्ता मिथुन खामरुई का शव जमीन पर पड़ा हुआ दिख रहा है। साथ ही आसपास कई लोग भी जमा हुए दिख रहे हैं। उन्होंने TMC के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये पार्टी हिंसा को लेकर हंगामा कर रही थी, जिस पर राज्य में इसी का पेटेंट है।
मामला पश्चिमी मेदिनीपुर जिले का है। मिथुन खामरुई सालबोनी प्रखंड के करनगर क्षेत्र स्थित मोहनपुर गाँव में बूथ संख्या 28 पर पार्टी के प्रभारी थे। अमित मालवीय ने बताया है कि पिछले कुछ महीनों से सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडे उन्हें धमकी दे रहे थे। उन्हें उनके घर में भी नहीं घुसने दिया जा रहा था। 2018 में मिथुन खामरुई की माँ ने भाजपा के टिकट पर पंचायत चुनाव लड़ा था। सिर्फ अभी ही नहीं, बल्कि 2021 में विधानसभा चुनाव के बाद भी हिंसा हुई थी जिसमें उनके घर पर भी कई बार हमले किए गए थे।
अमित मालवीय ने कहा, “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की TMC गुंडों से भरी हुई है। ये गुंडे फलते-फूलते हैं, क्योंकि राज्य की गृह मंत्री के रूप में ममता बनर्जी वो उन्हें संरक्षण देती है। मिथुन खामरुई जैसे सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं के खून से उनके हाथ रंगे हुए हैं। मिथुन खामरुई का पोस्टमॉर्टम मेदिनीपुर अस्पताल में हुआ है और उनके पिता ने FIR भी दर्ज करा दी है। भाजपा परिवार की पूरी मदद कर रही है।” मिथुन का शव एक खेत के पास पड़ा हुआ मिला, जहाँ कई ग्रामीण जमा हो गए।
Yesterday, TMC was whining about culture of violence, which they have a patent on, in West Bengal.
Today, dead body of BJP karyakarta Mithun Khamrui of Mohanpur village, Booth No. 28, Karnagar area of Salboni Block was found. Local TMC goons were threatening him for last few… pic.twitter.com/74kblARVwI
भाजपा की बंगाल यूनिट ने कहा कि ये सब तृणमूल कॉन्ग्रेस के क्रूर हथकंडे को उजागर करता है। पार्टी ने TMC के स्थानीय मंडल अध्यक्ष बाबुल घोष पर मिथुन खामरुई की हत्या का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है। उनका शव उनके घर से कुछ ही किलोमीटर दूर एक पुलिया के पास बरामद किया गया। उनकी उम्र मात्र 35 वर्ष थी। पहले वो TMC के सक्रिय कार्यकर्ता हुआ करते थे, लेकिन फिर भाजपा में आ गए थे। सोमवार (29 जनवरी, 2024) को उनके न मिलने से परिवार वाले उनकी तलाश कर रहे थे। पुलिस इसे शराब पीने से हुई मौत बता रही है।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने राज्य के सभी स्कूलों में माँ सरस्वती की मूर्ति स्थापित और ड्रेस कोड लागू करने का आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में माँ सरस्वती की मूर्ति लगाना अनिवार्य होगा और यह मूर्ति स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाई जाएगी। इसके अलावा सभी स्कूलों में छात्रों के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाएगा। यह ड्रेस कोड छात्रों की उम्र और लिंग के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का कहना है कि वर्तमान में स्कूल में जो हालात बने हुए हैं उसके लिए वे जाँच के आदेश देंगे। शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि वे स्कूलों में वे धर्मांतरण नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि जिस स्कूल में माँ सरस्वती की तस्वीर नहीं होगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि स्कूलों में ड्रेस कोड ही लागू होंगे।
इससे पहले राजस्थान सरकार में मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने भी स्कूलों में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनकर जाने का विरोध किया था। उन्होंने कहा था, “कई देशों में हिजाब पर प्रतिबंध है तो यहाँ भी हिजाब पर प्रतिबंध होना चाहिए। अनुशासन के लिए जरूरी है कि स्कूलों में सभी को एक ही ड्रेस में आएँ। ऐसे तो कोई कुछ भी पहनकर आ जाएगा। कोई थानेदार ही कह देगा कि मैं तो कुर्ते पायजामे में आऊँगा।”
बता दें कि जयपुर के गंगापोल इलाके में स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं ने आरोप है कि उनके स्कूल के वार्षिक समारोह के दौरान हवामहल के विधायक बालमुकुंद आचार्य को बुलाया गया था। मुस्लिम छात्राओं का आरोप है कि भाजपा विधायक ने स्कूल में आकर हिजाब को लेकर बातें कीं और इस दौरान धार्मिक नारे भी लगवाए। इसके बाद मुस्लिम छात्राओं ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन भी किया था।
इस मामले को कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान ने विधानसभा में भी उठाया था। इसके बाद विधानसभा में हंगामा भी हुआ। इस पर बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि बच्चियों को ‘भारत माता की जय’ बोलने को कहा गया। सरस्वती माता की जय बोलने को कहा गया। उन्होंने पूछा कि इसमें गलत क्या है? सरस्वती माता की जय बोलना गलत है?
बालमुकुंद आचार्य ने आगे कहा, “मैंने विद्यालय की प्रिंसिपल से पूछा था कि विद्यालय में दो तरह के ड्रेस कोड हैं क्या? मुझे दो तरह का माहौल नजर आया। एक हिजाब में और एक बिना हिजाब के। कल को हमारे बच्चे भी लहंगा-चुन्नी या अलग-अलग रंग के ड्रेस में आएँगे तो स्कूल में कैसे चलेगा?”
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ED से बचते बचाते दिल्ली में ना मिलने के बाद अब राँची में सामने आए हैं। उनके विषय में सोमवार (29 जनवरी, 2024) से कोई सूचना नहीं मिल रही थी। अब वह राँची में दिखाई पड़े हैं। उन्होंने अपने विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठक भी की है।
उनकी इस बैठक की तस्वीरें झारखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी जारी की हैं। इस बैठक में उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी शामिल हैं। इसके अलावा उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक भी इसमें मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि इस बैठक में कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।
— Office of Chief Minister, Jharkhand (@JharkhandCMO) January 30, 2024
गौरतलब है कि 29 जनवरी को सुबह उनके दिल्ली स्थित आवास पर होने की जानकारी मिलने के कारण जाँच एजेंसी ED उनसे पूछताछ करने पहुँची थी। ED को वह यहाँ नहीं मिले थे। बताया गया था कि ED के आने के कुछ ही समय पहले हेमंत सोरेन यहाँ से निकल गए थे। उनके दिल्ली स्थित आवास पर ED ने कई घंटों तक जाँच की थी और यहाँ से एक BMW गाड़ी और ₹36 लाख बरामद किए थे। ED उनके ड्राईवर को भी अपने साथ ले गई थी।
ED हेमंत सोरेन से यहाँ जमीन घोटाला मामले में पूछताछ करने पहुँची थी। इससे पहले ED ने उनसे इस मामले में 20 जनवरी, 2024 को पूछताछ की थी। ED का कहना था कि कुछ प्रश्नों के उत्तर बाकी हैं इसलिए उन्हें दोबारा जाँच एजेंसी के सामने आना होगा। ED ने उन्हें 29 या 31 जनवरी को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालाँकि, जब एजेंसी 29 जनवरी को उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुँची तो वह यहाँ नहीं मिले। उन्होंने 29 जनवरी को ही शाम को अपनी राँची की फ्लाइट भी रद्द करवा दी थी।
ED ने हेमंत सोरेन जानकारी जुटाने के लिए सभी एयरपोर्ट को अलर्ट कर दिया था। ED ने दिल्ली पुलिस समेत आसपास के राज्यों की पुलिस से भी उनके विषय में सूचना माँगी थी। इसके बाद वह आज (30 जनवरी) को सड़क मार्ग से राँची पहुँचे। यहाँ वह अब विधायकों की बैठक कर रहे हैं। बताया गया है कि उन्होंने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से भी मिलने का समय माँगा है।
अटकलें लग रही हैं कि वह अपनी गिरफ्तारी के डर से पहले ही CM पद छोड़ कर अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बना देंगे। उन्होंने कल (31 जनवरी) को ED को पूछताछ का समय भी दिया है। उन्होंने कल भेजे गए इमेल में ED से राँची में दोपहर 1 बजे पूछताछ के लिए आने को कहा था। उनकी विधायक दल की बैठक से ही तय होगा कि उनका अगला कदम क्या होता है।
बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र में एक महिला और उसके बेटे की हत्या के मामले में राशिद नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया है। राशिद टाइल्स का मिस्त्री है, जिसे जेल भेज दिया गया है। उसके पास से हथौड़ा भी मिला है, जिसका इस्तेमाल कर के उसने माँ-बेटे की हत्या की थी। महिला की बेटी के साथ उसका प्रेम-प्रसंग चल रहा था। साथ ही वो उस लड़की से शादी भी करना चाहता था। पूछताछ में पुलिस को ये भी पता चला है कि वारदात से कुछ दिनों पहले राशिद ने अपनी पूर्व प्रेमिका से कहा था – “तुम्हारे भाई को निपटा दूँगा।”
मृतक बारादरी गाँव के रहने वाले थे। जहाँ महिला की उम्र 44 साल थी, जबकि बेटे की उम्र 20 साल थी। दोनों इज्जतनगर थाना क्षेत्र में बाईपास के किनारे एक नर्सरी का संचालन करते थे। शुक्रवार (26 जनवरी, 2024) को रात के करीब साढ़े 10 बजे दोनों का शव उनकी नर्सरी में ही पड़े हुए मिले। दोनों के शरीर से खून बह रहा था। हालाँकि, यूपी पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर राशिद को दबोच लिया। रविवार को उसे जेल भेज दिया गया।
टाइल्स मिस्त्री राशिद ने बताया कि वो 2018 में उक्त महिला के घर में टाइल्स लगाने गया था, तभी उनकी बेटी से उसकी दोस्ती हो गई थी। फिर दोनों प्यार में पड़ गए। इंटरनेट चैटिंग और कॉलिंग के माध्यम से वो आपस में बातें करने लगे। युवती पार्लर चलाती थी और ये जानने के बावजूद राशिद से शादी को तैयार थी कि वो शादीशुदा है। हालाँकि, परिजनों ने युवती की शादी कहीं और तय कर दी। राशिद ने ये बात घर में भी बता दी। राशिद ने युवती के माँ और भाई को बता दिया कि वो किसी और से प्यार करती है।
युवती ने भी अपने मंगेतर संजीव को कॉल कर के कह दिया कि वो अगर शादी कर भी लेती है तो उसे तलाक दे देगी या मर जाएगी। मंगेतर ने इसके बाद बात कर के शादी रद्द कर दी और सामान का जो लेनदेन हुआ था वो भी लौटा दिया गया। राशिद ने बताया कि वो इस बात से गुस्सा था कि युवती का भाई उसकी शादी ठीक करने के लिए कहीं-कहीं बात कर रहा था। फिर राशिद ने युवती से कहा कि वो उसके भाई को रास्ते से हटा देगा। घटना वाले दिन वो नर्सरी गया था।
राशिद का कहना है कि वहाँ उसने जब युवती से शादी की बात की तो भाई ने भड़क कर उस पर हमला कर दिया। वो साथ में एक भारी-भड़कम हथौड़ा लेकर गया था। उसने उसी हथौड़े से लड़के पर हमला कर दिया। उसने सिर पर पीछे से हथौड़े से वार किया। बेटे पर हमला होते देख महिला राशिद को खींचने लगी। बेटे के जमीन पर गिरते ही राशिद ने माँ के सिर पर ताबड़तोड़ हथौड़े मारे। इसके बाद युवक का मोबाइल और हथौड़ा छिपा कर वो वहाँ से निकल गया।
उत्तरप्रदेश के बरेली से डरावनी खबर,
– मिलिए मोहम्मद राशिद से, जो पहले से शादीशुदा है, उसने एक हिंदू लड़की को रिश्ते में फंसाया।
– जब लड़की के परिवार को पता चला तो उन्होंने उसकी शादी कहीं और तय कर दी और उसे जेहादी से दूर कर दिया।
पुलिस के पास दर्ज कराई गई FIR में इस मामले में संजीव को नामित किया गया था। हालाँकि, उसकी लोकेशन पंजाब में दिखा रही थी। पुलिस को शक हुआ कि हत्या कर के कोई इतनी जल्दी पंजाब कैसे भाग सकता है। फिर पुलिस ने काल रिकार्ड्स खँगाले और सच्चाई का पता लगाया। लड़की के भाई ने राशिद से कहा था, “तुम मुस्लिम हो और शादीशुदा हो, इसीलिए अपने जीते-जी तुमसे बहन की शादी नहीं करूँगा।” इसके बाद से ही राशिद उसकी हत्या की साजिश रचने लगा था।
हिन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचा परिसर में मिले शिवलिंग का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से विस्तृत सर्वे कराने की माँग की है। याचिका में कहा गया है कि जहाँ से यह शिवलिंग मिला है, उसके आसपास नई दीवालें बना दी गई हैं। ये दीवालें असल इमारत के साथ मेल नहीं खाती हैं और मुख्य इमारत से जुड़ी हुई नहीं हैं।
हिन्दू पक्ष ने कहा कि शिवलिंग के आसपास का निर्माण उसकी विशेषताओं को छुपाने के लिए जानबूझकर किया गया है। इससे शिवलिंग की पीठिका जैसी विशेषताएँ दबा दी गई हैं। याचिका में आगे कहा गया है कि यह शिवलिंग कहाँ से आया, इसका पता लगाया जाए। हिंदू पक्ष का कहना है कि मुस्लिमों के लिए इस शिवलिंग का कोई महत्व नहीं है और वह इसे लगातार एक फव्वारा बताते आए हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अभी जिस ASI सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है, वह सील इलाके को छोड़कर किया गया है। यह सील इलाका वजूखाना कहलाता है। यहाँ नमाजी हाथ-पैर धोते थे। हिन्दू पक्ष का कहना है कि यहाँ भी सर्वे किया जाए, जिससे पूरी सच्चाई बाहर आए। बिना उसकी जाँच के अभी की रिपोर्ट का कोई महत्व नहीं है।
गौरतलब है मई 2022 में ज्ञानवापी के सर्वे में शिवलिंग निकला था। इसके बाद पूरे परिसर की ASI जाँच की माँग की गई थी। ASI ने अपनी जाँच पूरी करके रिपोर्ट हाल ही में सार्वजनिक की है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यहाँ कभी एक बड़ा हिन्दू मंदिर हुआ करता था। अवशेष पर ढाँचा खड़ा है। परिसर के अंदर हिन्दू मंदिर मौजूद होने के भी कई सबूत मिले हैं।
ASI की रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्ञानवापी ढाँचे के भीतर मंदिर का अस्तित्व प्रमाणित करने वाली कई कृतियों को जानबूझकर छुपाकर रखा गया था। ये सभी कृतियाँ (मूर्तियाँ, शिलाएँ, शिलालेख) उन तहखानों की जाँच में मिले हैं, जिन्हें जानबूझकर दीवालों और मलबों के सहारे बंद कर दिया गया था।
ASI की टीम जब एक तहखाने में पहुँची तो उसे पता लगा कि इसके प्रवेश को जानबूझ कर ईंटों और मलबे से भरा गया था। इस मलबे को यहाँ की छतों में छेद करके भरा गया था। यह भी बताया गया कि दूसरे तहखाने को भरने के लिए यहाँ पाई गईं कलाकृतियों का इस्तेमाल किया गया। इन तहखानों में एक छोटा मंदिर, भगवान विष्णु के विग्रह, शैव द्वारपाल और बजरंग बली की मूर्तियाँ मिली हैं।
ASI ने अपनी खोज में यहाँ कई शिवलिंग और भगवान विष्णु के विग्रह भी मिलने की भी बात कही है। यहाँ से कृष्ण भगवान की एक प्रतिमा और भगवान गणेश का पत्थर से निर्मित एक सिर भी मिला है। नंदी की भी दो तोड़ी हुई मूर्तियाँ भी बरामद की गई हैं। यहाँ कई अन्य प्रतीक भी मिले हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाई, क्योंकि वे काफी क्षत-विक्षत अवस्था में थे।
महाराष्ट्र से एक 6 साल की दलित बच्ची के बलात्कार का मामला सामने आया है। बच्ची का बलात्कार करने वाले आफताब महबूब कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया गया है। बच्ची के बलात्कार के कारण ग्रामीणों में काफी रोष है। पुलिस मामले की आगे जाँच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, लातूर के देवनी पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले वलान्दी गाँव में एक 6 वर्षीय दलित नाबालिग के साथ उसी गाँव के रहने वाले आफताब महबूब कुरैशी ने बलात्कार किया। बच्ची का कहना है कि कुरैशी ने कई दिन तक उसका बलात्कार किया। महबूब कुरैशी ने बच्ची को धमकाया भी कि अगर वह किसी को कुछ बताएगी तो वह उसकी हत्या कर देगा।
इस घटना का खुलासा तब हुआ जब बच्ची ने पूरी घटना अपनी माँ को बताई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महबूब कुरैशी बच्ची को शैम्पू दिलाने के बहाने बुला रहा था, इस दौरान वह डरी सहमी सी नजर आई। जब उसके परिजनों ने उससे पूछा तो बच्ची ने बताया कि आफ़ताब उसके साथ गन्दी हरकत कर रहा है।
बच्ची की बातें सुनने के बाद परिजनों ने आफ़ताब महबूब कुरैशी के खिलाफ थाने में शिकायत दी और उसके खिलाफ देवनी पुलिस थाने में POCSO, बलात्कार और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने अब मामले की जाँच करने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची का भी मेडिकल करवा लिया है। बताया गया है कि बच्ची के पिता की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है और वह अपनी माँ के साथ रहती है।
गाँव में बलात्कार की वारदात होने के बाद से ग्रामीणों में काफी गुस्सा है। उन्होंने वलान्दी गाँव के बाजार को बंद रखा। बच्ची के साथ बलात्कार करने की घटना की खबर आसपास के गाँवों में भी पहुँच गई और यहाँ के निवासियों ने भी प्रदर्शन किया। महिलाओं ने बलात्कार के विरोध में कैंडल मार्च निकाला है। गुस्साए ग्रामीण आफताब महबूब कुरैशी को जल्द से जल्द फाँसी की सजा देने की माँग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के औरैया में एक 12 साल की बच्ची की खेलते-खेलते अचानक आए हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई। बिलख-बिलख कर रोते पिता का वीडियो भी सामने आया है। सोमवार (29 जनवरी, 2024) को शाम को बच्ची छत पर खेल रही थी। साथ में और भी बच्चे थे। अचानक वो खेलते-खेलते मुँह के बल गिर गई। अन्य बच्चों ने उसे उठाने की कोशिश की, जो नाकाम साबित हुई। बच्चों ने घरवालों को बताया, जो उसे आनन-फानन में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुँचे।
वहाँ डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। हालाँकि, परिवार को यकीन नहीं हुआ कि बच्ची की अचानक से मौत हो गई है। वो उसे लेकर दूसरे अस्पताल में गए। वहाँ डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया। वहाँ भी बताया गया कि वो मर चुकी है। साथ ही हार्ट अटैक के लक्षण की बात भी कही गई। दिबियापुर के स्टेशन रोड ककराही में ये घटना हुई। बच्ची के पिता संजय मिश्रा मिठाई की दुकान चलाते हैं। उनकी बेटी परी मदर इंडिया कन्वेंट स्कूल में 5वीं कक्षा में पढ़ती थी।
उन्होंने बताया कि परी छत पर खेल रही थी और अचानक गिर गई, जिसके बाद उसके दोस्तों ने नीचे आकर घर वालों को बताया। उन्होंने बताया कि बेसुध बच्ची को उसी हालत में लेकर परिवार CHC पहुँचा। उसके बाद चिचोली स्थित अस्पताल में ले जाया गया। वहाँ भी डॉक्टरों ने वही बात कही। उसके बाद पिता अपनी बेटी के शव को सीने से लगा कर रोने लगे। वो बार-बार कह रहे थे कि अभी तो ये खेल रही थी, अचानक क्या हो गया, उठ जा। अस्पताल के कर्मचारी उन्हें समझाते रहे।
बच्ची के पिता पोस्टमॉर्टम कराने को लेकर भी जारी नहीं थे, क्योंकि उनका कहना था कि वो अपनी बेटी के शरीर में चीरा नहीं लगने देंगे। संजय की 2 बेटियों और एक बेटे में परी सबसे बड़ी थी। परी का 8 साल का जुड़वाँ भाई-बहन भी है। तीनों बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ते थे। स्कूल की छुट्टी से लौट कर तीनों ने खाना खाया, होमवर्क पूरा किया और छत पर खेलने चले गए। पिछले कुछ महीनों में हार्ट अटैक की कई घटनाएँ सामने आई हैं और कई डराने वाले वीडियो भी वायरल हुए हैं।
लाहौर की एक विशेष अदालत ने 30 जनवरी 2024 को साइफर केस में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। इस मामले में इमरान खान के सहयोगी एवं पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को भी 10 साल की जेल की सजा मिली है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इमरान खान और शाह महमूद कुरैशी ने पाकिस्तान की सुरक्षा को खतरे में डाला।
पाकिस्तान की मीडिया संस्थान एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, साइफर मामले की सुनवाई के दौरान विशेष अदालत के जज अबुल हसनात जुल्करनैन ने धारा 342 के तहत दोनों आरोपितों के बयान दर्ज किए। इसके बाद उनकी सजा का ऐलान कर दिया। जज ने कहा कि इमरान खान और शाह महमूद कुरैशी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं।
इमरान खान ने सत्ता से हटने के बाद एक रैली की थी, जिसमें उन्होंने भीड़ के सामने एक पत्र को लहराते हुए दावा किया था कि विदेशी ताकतों ने उन्हें सत्ता से हटाने के लिए साजिश रची थी। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने साजिश के तहत पीटीआई सरकार को उखाड़ फेंका है। इसे साइफर मामला कहते हैं। मामला पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और डिप्लोमेटिक डॉक्यूमेंट से जुड़ा है।
पाकिस्तान में चल रही चुनावी तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना दिया था। साइफर का मतलब होता है सीक्रेट कीवर्ड में लिखा गया कोई संदेश। डिप्लोमेटिक मामलों से संबधित कम्युनिकेशन के लिए इसका इस्तेमाल होता है, ताकि ये लीक न हो। वहीं, इमरान खान ने दावा किया था कि उन्होंने केबल के हिस्से को लोगों के सामने दिखाया था।
इस मामले में पिछले साल 15 अगस्त को पहली एफआईआर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत दर्ज की गई थी। ये रिपोर्ट गृह सचिव की शिकायत के आधार दर्ज की दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। कहा गया है कि इमरान खान ने राजनीतिक फायदे के लिए झूठे गुप्त संदेश जारी किए और कई गुप्त बातों को सार्वजनिक किया
वहीं, पूर्व प्रमुख सचिव आजम खान और पूर्व योजना मंत्री असद उमर के नामों का भी जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को लगा कि आजम खान और असद उमर भी गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग में शामिल थे तो इन दोनों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह विवाद तब सामने आया था जब इमरान ने एक अमेरिकी राजनयिक पर पाकिस्तानी राजनयिक को धमकी देने का आरोप लगाया था, जिसकी सूचना एक साइफर के जरिए दी गई थी।
पीटीआई ने कार्यकर्ताओं से की शांति की अपील
इस बीच, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सेक्रेटरी जनरल उमर अयूब खान ने कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने पीटीआई के कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील भी की है। उमर अयूब कहा कि पीटीआई के सभी सदस्य और कार्यकर्ता 8 फरवरी को होने वाले आम चुनाव पर ध्यान दें। उन्होंने पीटीआई के उम्मीदवारों के लिए वोट की अपील की।
IMPORTANT!! ATTENTION!!
Pakistan Tehreek-e-Insaf has always espoused the principle of 'Rule of Law'. The current kangroo court ruling will not deter us from foregoing this principle come what may.
PTI workers should remain calm & not indulge in any activity that undermines our…
जनता की सहानुभूति मिलेगी या ये आखिरी उम्मीद भी टूटेगी?
इस सजा के पाकिस्तान की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं। इमरान खान अभी भी पाकिस्तान की एक बड़ी राजनीतिक ताकत हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) अभी भी पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय राजनीतिक दलों में से एक है। इस सजा से पीटीआई के समर्थकों में आक्रोश बढ़ सकता है। यह आक्रोश पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा सकता है।
वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि इस सजा से संसदीय चुनाव में पीटीआई को जनता की सहानुभूति मिल सकती है। इमरान खान अभी भी पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। यह आक्रोश संसदीय चुनाव में पीटीआई के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालाँकि पीटीआई ने कहा है कि इमरान खान इस सजा के खिलाफ इस्लामाबाद हाई कोर्ट में अपील करेंगे। इमरान खान अभी जेल में हैं।
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को रामजन्मभूमि पर रामलला की विग्रह पूरे विधि-विधान से स्थापित हो गई। इस अवसर पर दुनिया भर के हिन्दू उन तमाम ज्ञात-अज्ञात रामभक्तों के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं, जिन्होंने बाबर से लेकर मुलायम सिंह यादव तक काल के बीच हुए संघर्षों में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। मुगल काल में संघर्ष करने वाले उन तमाम योद्धाओं में एक नाम देवीदीन पांडेय का भी है। रामजन्मभूमि के लिए वीरगति पाने वाले भीटी नरेश महताब सिंह के बाद देवीदीन पांडेय दूसरे योद्धा थे। ऑपइंडिया की टीम ने उनके घर जाकर इतिहास और वर्तमान की जानकारी जुटाई।
देवीदीन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में ही पड़ने वाले गाँव रहीमपुर दुगवा के रहने वाले थे। उनका मूल काम धर्म का प्रचार था। उनकी यजमानी सरायरसी, राजेपुर और सनेथू गाँवों में थी। यहाँ वो लोगों के घर भागवत कथा आदि का पाठ करते थे। थोड़े समय बाद वो अपने पैतृक गाँव दुगवा रहीमपुर से लगभग 8 किलोमीटर दूर सनेथू के पास बस गए। उनके ही नाम पर अब उस जगह को पंडित का पुरवा कहा जाता है। इस पुरवा में घुसते ही गाँव के बाहर एक देवस्थान बना हुआ है। इस जगह हिन्दू अपने घर में पड़ने वाले शुभकर्म में मत्था टेकते हैं।
देवीदीन पांडेय का वर्तमान घर
घर में आज भी चारों तरफ धार्मिकता
जब ऑपइंडिया की टीम देवीदीन पांडेय के वंशजों के घर पहुँची, तब उनमें से कई दरवाजे पर ही मौजूद मिले। घर के गेट पर स्वस्तिक चिह्न, दोनों तरफ महादेव शिव और बजरंग बली के चित्र बने हुए हैं। घर के अंदर घुसते ही एक बड़ा मंदिर बना हुआ है। परिवार वालों ने बताया कि उस जगह पर मंदिर देवीदीन पांडेय के समय से ही बना हुआ था। बीच में जर्जर होने के चलते वर्तमान पीढ़ी ने नए रूप में उसका जीर्णोद्धार करवाया है। मंदिर के ऊपर कई भगवा ध्वज लगे हुए हैं। अंदर तमाम देवताओं की मूर्तियों के साथ राम दरबार बना हुआ है।
आज भी उस मंदिर में विधि-विधान से पूजा होती है, जिसे कभी देवीदीन पांडेय ने बनवाया था। उनका पुराना पारम्परिक पूजा-पाठ का काम आज भी देवीदीन की 7वीं पीढ़ी करती है। इस परिवार के यजमान भी वही हैं जिनके पूर्वज कभी देवीदीन के साथ रामजन्मभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए थे।
घर में स्थपित इसी मंदिर में कभी पूजा करते थे देवीदीन पांडेय
राममंदिर पर हमले से दुखी होकर उठा लिया था शस्त्र
घर पर मौजूद राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने खुद को देवीदीन पांडेय की 7वीं पीढ़ी बताया। इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज मूल रूप से शास्त्रों की शिक्षा आसपास के गाँवों में देते थे। हालाँकि वो शस्त्र चलाने में भी पारंगत थे। सन 1526-27 में जब पंडित देवीदीन को पता चला कि बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राम मंदिर को तोड़ दिया तो वो बेहद दुखी हो गए। इसी बीच उन्हें मंदिर के लिए लड़कर बलिदान हुए राजा महताब सिंह के बारे में भी पता चला। तब उन्होंने शास्त्र त्याग कर शस्त्र उठा लिया और अयोध्या के लिए निकल पड़े। अयोध्या उनके घर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है।
ऑपइंडिया को जानकारी देते देवीदीन पांडेय के वंशज राजेंद्र प्रसाद
आसपास के ग्रामीणों को जमाकर के बनाई सेना
स्वर्गीय रामगोपाल शारद द्वारा कई दशक पहले लिखी गई और अब लगभग विलुप्त हो चुकी पुस्तक ‘श्रीरामजन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास’ में पंडित देवीदीन का उल्लेख मिलता है। इस पुस्तक के मुताबिक, पंडित देवीदीन ने अपने साथ लगभग 10 हजार हिंदुओं की सेना तैयार की थी। इस सेना में पंडित का पुरवा के आसपास के गाँव सरायरसी, राजेपुर और सनेथू आदि के निवासी थे। इनमें से अधिकतर पंडित देवीदीन के यजमान थे। सभी सैनिक रामजन्मभूमि पर मीर बाक़ी के हमले से आक्रोशित थे। जैसे ही ये लोग रामजन्मभूमि के पास पहुँचे, वहाँ मौजूद मुगल फौजों से इनका युद्ध शुरू हो गया।
बाबर के समय से ही पत्थरबाजी करते थे मुगल
स्थानीय इतिहासकार बलराम मिश्रा ने ऑपइंडिया को बताया कि लाखों की तादाद में मौजूद मुगल फ़ौज से महज 10 हजार सैनिकों के साथ भिड़ने वाले देवीदीन पांडेय शुरू में भारी पड़ रहे थे। इसी बीच मुगल फ़ौज ने बाबरी बनवाने के लिए जमा की गईं ईंटों और आसपास से रोड़े उठाकर पत्थरबाजी शुरू कर दी। अचानक हुए इस पथराव से देवीदीन पांडेय कुछ समय के लिए रणनीति नहीं बदल पाए। इसी बीच एक पत्थर उनके सिर पर लगा और खून बहने लगा। देवीदीन पांडेय ने अपनी पगड़ी से बहते खून को रोका और लड़ाई जारी रखी।
मार डाला था मीर बाकी के हाथी और माहवत को
इतिहासकार रामगोपाल शारद अपनी पुस्तक ‘श्रीरामजन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास’ में लिखते हैं कि सिर फट जाने के बाद देवीदीन पांडेय मुगल फ़ौज पर और अधिक आक्रामक हो गए थे। वो अपने घोड़े पर सवार होकर सीधे हाथी पर बैठे मुगल सेनापति मीर बाक़ी के सामने आ गए। उनके ताबड़तोड़ हमलों से मीर बाक़ी का हाथी घायल होकर गिर पड़ा। इसे नियंत्रित करता महावत भी नीचे गिरकर मर गया। हाथी की पीठ पर बंधे हौदे की वजह से मीर बाकी घायल तो हुआ पर वो बच गया। उसने हौदे से ही छिपकर बंदूक से देवीदीन पांडेय पर गोली चला दी।
बलिदान से पहले मारे 700 मुगल फौजी
देवीदीन पांडेय के परिजनों ने हमें बताया कि उनके पूर्वज को वीरगति मीर बाक़ी द्वारा छिपकर चलाई गई गोली से हुई थी। हिन्दू पक्ष की हार का कारण उन्होंने मुगल फ़ौज जैसे उन्नत हथियार न होना और विपक्षी द्वारा युद्ध में नीति का नहीं अपनाना बताया। वंशजों का दावा है कि वीरगति से पहले कई दिनों तक युद्ध चला था। इस युद्ध में अकेले देवीदीन के हाथों सात सौ (700) मुगल फौजियों का वध हुआ था। इतिहासकार स्वर्गीय रामगोपाल शारद भी अपनी किताब में इस आँकड़े की पुष्टि करते हैं। उन्होंने दावा किया है कि यही आँकड़ा बाबर के समकालीन पुस्तक ‘तुजुक बाबरी’ में भी लिखा हुआ है।
स्वर्गीय रामगोपाल शारद द्वारा लिखित पुस्तक ‘रामजन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास’ के अंश
देवीदीन पांडेय के साथ गए कुछ को छोड़कर लगभग 10 हजार हिन्दू इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए। परिजन बताते हैं कि देवीदीन का पार्थिव शव उसी जगह पड़ा था, जहाँ आज राम मंदिर का गर्भगृह है। बलिदानी सैनिकों के शवों के साथ भी क्रूरता हुई थी। इस बलिदान से आसपास के क्षत्रिय राजाओं में आक्रोश फैल गया था। देवीदीन पांडेय के बलिदान के बाद रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए क्षत्रिय नरेशों ने लगातार हमले किए। तभी से सरायरसी, राजेपुर और सनेथू आदि क्षेत्रों के तमाम क्षत्रियों ने पगड़ी का त्याग कर दिया था और हर पीढ़ी में रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए संघर्ष का संकल्प लिया था।
आज भी घर पर रखी है देवीदीन की तलवार
देवीदीन के परिजनों ने हमें काफी सहेजकर रखी गई एक तलवार दिखाई। यह तलवार काफी पुरानी है और इस पर जंग लग गया है। इसे एक बेहद पुरानी लकड़ी के खोल में रखा गया है। ऊपर से भगवा कपड़ा लपेटा गया है। इस तलवार पर जगह-जगह खरोंच के निशान बने हैं। नीचे मूँठ बनी हुई है, जो अब हिलती है। युद्ध में बचे गिने-चुने हिन्दू सैनिक इस तलवार को बचाकर गाँव लाए थे। इस परिवार का दावा है कि हनुमानगढ़ी के अंदर अभी भी एक जगह युद्ध में प्रयोग हुआ देवीदीन पांडेय का भाला गड़ा हुआ है। यह जगह हनुमानगढ़ी के मुख्य द्वार पर है, जहाँ आज भी लोग श्रद्धा से शीश झुकाते हैं।
आज तक सहेज कर रखी गई है देवीदीन पांडेय की तलवार
अयोध्या जिले के अधिकतर मुगल बाबर के जमाने के
देवीदीन के परिजन सुनील पांडेय ऑपइंडिया से बात करते हुए दावा करते हैं कि अयोध्या जनपद और आसपास की सीमाओं के अंदर मौजूद तमाम मुस्लिम बाबर के समय में जबरन धर्मांतरित किए गए हिन्दू हैं। उदाहरण के लिए उन्होंने अपने गाँव के बगल सिरसिंडा में एक धर्मांतरित क्षत्रिय परिवार का जिक्र किया। यह क्षत्रिय परिवार खुद को 7 पीढ़ी पहले हिन्दू बताता है। यह वही समय था, जब बाबर का सेनापति मीर बाकी अयोध्या में घुस पर मंदिरों को तोड़ रहा था।
ऑपइंडिया को अपने पूर्वज देवीदीन का इतिहास बताते सुनील पांडेय (सफेद शर्ट में)
सुनील का दावा है कि बाबर के हमले के समय में अयोध्या सोने की नगरी हुआ करती थी। मुगल फौजों ने पहले मंदिरों को तोड़ा, फिर ग्रामीण इलाकों में घुसकर लूटपाट की। दावा है कि इसी दौरान मुगल फ़ौज ने कई हिंदुओं को तलवार के जोर पर इस्लाम कबूल करवाया। सुनील पांडेय ने अयोध्या के पास मौजूद टांडा जैसे इलाकों का जिक्र किया, जहाँ अब मुस्लिम आबादी बहुलता में है। देवीदीन पांडेय का परिवार ऐसे मुस्लिमों से अपने मूल धर्म में भी लौटने की अपील करता मिला, जिन्हें यह पता है कि उनके पूर्वजों को अत्याचार करके मतांतरित किया गया था।
आज भी तैयार हैं राम के नाम पर बलिदान के लिए
देवीदीन के वंशज सुनील पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके पूर्वज की शिक्षा आज भी दिलो-दिमाग में मौजूद है। यह परिवार आज भी राम के नाम पर बलिदान होने के लिए तैयार है। इस परिवार के सदस्यों ने मुलायम सिंह यादव द्वारा साल 1990 में कराए गए गोलीकांड को एक आक्रांता के कुकृत्य की संज्ञा दी। नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को ईश्वर द्वारा भेजे गए दूत बताते हुए इस परिवार ने राम मंदिर बनने पर बेहद ख़ुशी जताई है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में इस परिवार को निमंत्रण भी दिया गया था। देवीदीन पांडेय का एक वंशज इस प्राण प्रतिष्ठा में शामिल भी हुआ था।