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जिसे I.N.D.I. गठबंधन ने बताया अपना पहला चुनाव, उसे ही बुरी तरह हार बैठा: चंडीगढ़ में बन गया BJP का मेयर, कॉन्ग्रेस-AAP की फजीहत

चंडीगढ़ शहर के लिए मेयर पद का चुनाव भाजपा के प्रत्याशी मनोज सोनकर ने जीत लिया है। उन्होंने I.N.D.I गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस और आप के संयुक्त उम्मीदवार कुलदीप ढलोर को हरा दिया। इस चुनाव को AAP और कॉन्ग्रेस ने विपक्षी I.N.D.I गठबंधन और भाजपा की पहली लड़ाई बताया था।

इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार मनोज सोनकर को जहाँ 16 वोट मिले तो वहीं INDI गठबंधन के उम्मीदवार को 12 वोट ही मिल सके।

गौरतलब है कि चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल एक वर्ष का ही होता है। इसलिए यहाँ हर साल चुनाव होते हैं। 2023-24 के एकवर्षीय कार्यकाल के लिए हुए चुनावों में भी भाजपा के अनूप गुप्ता ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में रहे। इसे देख AAP और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने खूब हंगामा काटा।

दरअसल, INDI गठबंधन के उम्मीदवार को यहाँ 12 ही वोट मिले लेकिन विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि उन्हें 20 वोट मिले थे जिनमें से 8 वोट को जानबूझकर अवैध करार दे दिया गया। उन्होंने चुनाव अधिकारी अनिल मसीह पर वोटों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद की कुल 45 सीट है। इनमें से 9 सदस्य नामित किए जाते हैं और बाकी 35 के लिए चुनाव होते हैं। इसमें एक सदस्य चंडीगढ़ का सांसद भी होता है। यही 36 सदस्य मिलकर ही मेयर चुनते हैं। वर्तमान में चंडीगढ़ में 16 सीट भाजपा के पास जबकि 13 सीट AAP के पास हैं। कॉन्ग्रेस के पास 7 सीट हैं। 1 सीट शिरोमणी अकाली दल के पास है।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव को पहला मैच बता रहा था INDI गठबंधन

गौरतलब है कि इन चुनावों को विपक्ष ने भाजपा और INDI गठबंधन के बीच का पहला मैच करार दिया था। AAP नेता राघव चड्ढा ने इस चुनाव को देश की दशा और दिशा बदलने वाला चुनाव बताया था।

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “यह चुनाव आगामी 2024 लोकसभा चुनाव की नींव रखेगा। INDI गठबंधन बतौर गठबंधन, पहली बार भाजपा का सामना करने जा रहा है। यह चुनाव INDI गठबंधन बनाम भाजपा के पहले मैच के रूप में जाना जाएगा।” उन्होंने इसमें INDI गठबंधन की जीत पक्की बताई थी।

चंडीगढ़ चुनाव में इस जीत पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी बधाई दी है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “भाजपा चंडीगढ़ को मेयर का चुनाव जीतने के लिए बधाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रशासित प्रदेशों का रिकॉर्ड विकास हुआ है। INDI गठबंधन ने पहला चुनाव भाजपा से लड़ा और हार गए, यह दिखाता है कि ना ही उनकी गणित सही काम करती है और ना ही केमिस्ट्री।”

उत्तराखंड में UCC की आहट: CM धामी की सरकार ने बुलाया विशेष सत्र, कैबिनेट के सामने भी रखी जाएगी समान नागरिक संहिता की रिपोर्ट

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी की सरकार 6 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। मुख्यमंत्री धामी ने 5 फरवरी से 8 फरवरी 2024 तक उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा है कि उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उत्तराखंड विधानसभा में इस विशेष सत्र के दूसरे दिन यानी 6 फरवरी को UCC विधेयक पेश किया जाएगा। इसके बाद इस पर चर्चा होगी। विधेयक पेश होने से पहले इसे उत्तराखंड की कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। उत्तराखंड सरकार में मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल ने भी 6 फरवरी को UCC लाए जाने की पुष्टि की है।

मुख्यमंत्री धामी ने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि राज्य में UCC कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी 2 फरवरी 2024 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी। यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनाई गई है। पाँच सदस्यों वाली इस कमेटी का गठन मई 2022 में गठित गया था।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सोमवार (29 जनवरी 2024) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित कमेटी 2 फरवरी को ड्राफ्ट प्रदेश सरकार को सौंपेगी। हम देवभूमि उत्तराखण्ड के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए संकल्पित हैं।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड में लम्बे समय से UCC लागू की बात चल रही है। भाजपा ने उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में भी UCC को अपने मैनिफेस्टो में शामिल किया था। राज्य में सरकार बनने के तुरंत बाद मई 2022 में कमेटी बनाई थी। इस कमेटी को नवम्बर 2022 में अपनी रिपोर्ट देना था, लेकिन इसकी तारीख आगे बढ़ती रही।

उत्तराखंड में UCC लागू करने से लोकसभा चुनावों में भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। UCC को लागू करने के लिए उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य को पहले चुना गया है। उत्तराखंड के बाद भाजपा इसे अन्य राज्यों में भी लागू करने पर विचार कर सकती है। केन्द्रीय स्तर पर भी इसको लेकर चर्चा चलती आई है।

क्या समान नागरिक संहिता (UCC)

समान नागरिक संहिता के अंतर्गत पर्सनल कानून अर्थात विवाह, तलाक, सम्पत्ति का बँटवारा और विरासत जैसे मुद्दे आते हैं। अलग-अलग धर्मों में इन मुद्दों को सुलझाने के लिए अलग-अलग कानून हैं। जहाँ देश की हिन्दू आबादी पर हिन्दू कोड बिल (हिन्दुओं के यह मुद्दे सुलझाने के लिए लाए गए कानून) लागू होते हैं तो वहीं मुस्लिमों में उनका निर्धारण शरियत कानून से होता है। ऐसे में कई बार विवादपूर्ण स्थिति पैदा होती है।

1 दिन में 6 बच्चियों का यौन शोषण संदेहास्पद: केरल HC ने हिमायतुल इस्लाम स्कूल के टीचर को दी बेल, छात्राओं ने लगाया था गुप्तांग छूने का आरोप

केरल हाई कोर्ट ने कोझिकोड के एक शिक्षक को जमानत दे दी है। उस पर 6 नाबालिग छात्राओं का यौन शोषण करने का आरोप है। केरल हाई कोर्ट ने आरोपित शिक्षक को बेल देते हुए कहा है कि 1 दिन के भीतर 6 बच्चियों का यौन शोषण संदेहास्पद बात लगती है।

केरल हाई कोर्ट ने हिमायतुल इस्लाम स्कूल में कला विषय पढ़ाने वाले एक शिक्षक की जमानत याचिका पर यह निर्णय दिया है। हाई कोर्ट में शिक्षक की याचिका सुनते हुए जज सोफी थॉमस ने कहा,

“यह सच है कि पीड़ित बालिकाओं द्वारा शिकायत दर्ज करने में 6 दिन की देरी की गई है। इसके अलावा, यह बात भी संदेहास्पद लगती है कि आरोपित ने एक ही दिन में एक ही कक्षा की 6 लड़कियों के साथ यौन शोषण किया होगा। आरोपित दिसम्बर, 2023 से पुलिस हिरासत में है और जाँच आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में यह कोर्ट शिक्षक को जमानत देने का निर्णय ले रहा है।”

जमानत पाने वाले शिक्षक पर आरोप है कि उसने 12 दिसम्बर, 2023 को सुबह 11:20 बजे से 12 बजे के बीच अपनी छात्राओं का यौन शोषण किया। बालिकाओं ने आरोप लगाया था कि शिक्षक ने उनके गुप्तांग छुए। यह सभी पीड़िताएँ कक्षा पाँच की छात्रा हैं। इसी को लेकर उसके खिलाफ POCSO समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ कोझिकोड के टाउन पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया गया था जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

हिमायतुल इस्लाम स्कूल के इस शिक्षक के इस मामले की सुनवाई केरल हाई कोर्ट ने 11 जनवरी को सबसे पहले की थी। शिक्षक के वकील ने कोर्ट के सामने दावा किया कि बच्चियों की तरफ से शिकायत करने में देरी की गई है और साथ ही शिक्षक को पुलिस हिरासत में लम्बा समय हो गया है ऐसे में उसे जमानत दी जानी चाहिए।

बता दें कि पुलिस ने शिक्षक की जमानत का विरोध किया था। हालाँकि, फिर भी कोर्ट ने शिक्षक को जमानत दे दी। लेकिन साथ में कई पाबंदियाँ भी लगाईं।

कोर्ट ने कहा कि बेल के दौरान हर दूसरे शनिवार को शिक्षक को अपने नजदीकी थाने में हाजिरी देनी होगी और साथ ही वह किसी भी प्रकार से पीड़िताओं के परिवार से सम्पर्क करने की कोशिश नहीं करेगा। कोर्ट ने उसके हिमायातुल इस्लाम स्कूल के आसपास ना जाने और केरल ना छोड़ने का आदेश भी दिया है।

गौरतलब है कि केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में एक सैनिक की याचिका ठुकरा दी थी जिस पर आरोप था कि उसने एक बच्चे को सेक्स के लिए पैसे की पेशकश की। सैनिक का नाम अनवर आलम था और वह लक्षद्वीप का रहने वाला था।

भाजपा नेता रंजीत के 15 हत्यारों को मौत की सजा, आतंक फैलाने के लिए PFI के इन आतंकियों ने परिजनों के सामने हथोड़े से कर दी हत्या

केरल की एक स्थानीय अदालत ने भाजपा नेता रंजीत श्रीनिवास की हत्या के मामले में आतंकी संगठन PFI के 15 दोषियों को मौत की सजा दी है। इसके पहले अदालत ने 21 जनवरी 2024 को इन्हें हत्या एवं अन्य आरोपों में दोषी ठहराया था। इन दोषियों ने साल 2021 में भाजपा के पिछड़ा वर्ग के नेता श्रीनिवास की बेरहमी से हत्या उनकी पत्नी और बेटी के सामने कर दी थी।

मवेलिकारा के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय-I की न्यायाधीश वीजी श्रीदेवी ने 30 जनवरी 2024 (मंगलवार) को सजा सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले में सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं। आरोपितों को भारी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया गया। कोर्ट के बाहर भी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। विरोधी पक्ष ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए अदालत से अधिकतम सजा देने का आग्रह किया था।

रंजीत श्रीनिवास को उनके घर में घुसकर 19 दिसम्बर 2021 को उनके परिजनों के सामने ही हत्या कर दी गई थी। इस मामले में केरल के अलप्पुझा जिले की मवेलिकारा कोर्ट ने नईम, मोहम्मद असलम, अनूप, अजमल, अब्दुल कलाम उर्फ़ सलाम, अब्दुल कलाम, सफरुद्दीन, मनषद, जसीब राजा, नवास, समीर, नज़ीर, जाकिर हुसैन, शाजी और शेरनस अशरफ को हत्या का दोषी पाया था।

ये सभी अलप्पुझा के ही रहने वाले हैं और प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन PFI और इसकी राजनीतिक शाखा SDPI से जुड़े हुए हैं। इन दोषियों में शुरुआती 8 को रंजीत की हत्या में सीधे तौर पर दोषी माना गया है। इन पर कोर्ट ने धारा 302 समेत चार और धाराएँ लगाई हैं।

दोषी नम्बर 9 से 12 को लेकर यह तथ्य सामने आया है कि बाकी जब 8 आरोपित रंजीत की हत्या कर रहे थे, तब ये दोषी उनके घर के बाहर खतरनाक हथियारों के साथ पहरा दे रहे थे। इसके अलावा 13वें, 14वें और 15वें दोषी को इस हत्या की साजिश रचने और हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया है।

कोर्ट के सामने इस मामले में पुलिस ने आरोपित अनूप के फ़ोन से बरामद एक हिटलिस्ट रखी थी। इस केस में यह बहुत बड़ा सबूत बना। इस हिटलिस्ट में रंजीत श्रीनिवास समेत 150 से अधिक लोगों के नाम थे। इनमें भाजपा और हिंदू संगठनों के कई नेताओं के नाम भी शामिल थे। कोर्ट के इस फैसले पर भाजपा ने खुशी जताई है।

रंजीत को हथौड़े से मारा, पैर अलग कर दिए, चेहरा बिगाड़ा कर की हत्या

भाजपा नेता के भाई अभिजीत ने बताया था, “भाई को कोच्चि में ओबीसी मोर्चा की समिति की पहली बैठक में शामिल होना था। हमारे परिवार के लिए यह दिन पवित्र था। दोनों भाई रविवार सुबह बेटी भाग्या को ट्यूशन छोड़कर घर लौटे, तब तक सब ठीक था। रंजीत के पास कोई वजह नहीं थी कि वो तंग हों। मगर SDPI नेता शान की कथित हत्या के बाद गैंग ने बदला लेने के लिए नेता की तलाश शुरू की।” 

अभिजीत ने बताया था कि उनके भाई के सिर में हथौड़े से वार हुआ और बीवी, माँ और छोटी बेटी के सामने उनका चेहरा कूच दिया गया। छोटी बेटी जब भागकर बचाने आगे आई तो गैंग ने उसके सामने तलवार निकाल ली। माँ को जमीन में गिराकर उन्हें कुर्सी से दबा दिया गया। उन्होंने बताया कि गुंडों ने उनके भाई रंजीत के पहले पैर काट दिए, ताकि वो भाग न सकें। इसके बाद उनकी बाइक तोड़ी गई। उनसे उनकी धोती ले ली गई।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के कुछ देर पहले ही रंजीत की 71 वर्षीय माँ विनोदिनी अपने बेटे के लिए पूजा करके मंदिर से घर लौटी थीं। विनोदिनी ने बताया था, “घर की सीढ़ियाँ चढ़ते समय मुझे कुछ आवाज सुनाई दी। मुझे लगा कि कोई जबरदस्ती घर का दरवाजा खोलकर अंदर आ रहा है। उनके पास तलवारें थीं, हथौड़े थे। उन्होंने धक्का देकर दरवाजा खोला और घर में रखे टेबल का शीशा हथौड़े से तोड़ दिया। रंजीत आवाज सुनकर जैसे ही बाहर आया। उन्होंने उसके सिर पर हथौड़ा मार दिया।”

रंजीत की माँ के ऊपर भी हमला हुआ। उन्होंने बताया, “उपद्रवियों ने उसकी धोती उतारकर उसे मारा और जब मैं उनके पास रोते-रोते गई तो उन्होंने मुझे भी धक्का देकर नीचे गिरा दिया। उसकी बीवी लीशा आई तो उसे भी नीचे गिरा दिया। जब हृदया (रंजीत की छोटी बेटी) रोते आई तो उन लोगों ने तलवार निकाल ली। उन लोगों ने मेरी गर्दन पर भी तलवार रखकर मुझे डराया। इतनी सी देर में इन लोगों ने मेरे बेटे को बहुत बर्बरता से मार दिया।”

दरअसल, केरल में भाजपा नेता की हत्या से पूर्व अलाप्पुझा जिले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के प्रदेश सचिव केएस शान की मृत्यु हो गई थी। बताया गया था कि 18 दिसंबर 2021 की शाम सात बजे के करीब शान बाइक से अपने घर जा रहा था, तभी मन्नानचेरी के पास एक तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी थी। इससे शान गंभीर रूप से घायल हो गया था और बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

कर्नाटक में जिस कर्मचारी के रहते फहराया गया हनुमान ध्वज, उसे ऑफिसर शेख तनवीर ने किया सस्पेंड: कहा- सिर्फ तिरंगा लगाने की इजाजत दी थी

कर्नाटक के मांड्या में 108 फीट ऊँचे हनुमान ध्वज को हटाने के मामले में जहाँ हिंदूवादी संगठन सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं इस बीच खबर है कि केरागोडु ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (PDO) को निलंबित कर दिया गया। मांड्या जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेख तनवीर आसिफ ने यह आदेश सोमवार (30 जनवरी 2024) को जारी किया।

तनवीर आसिफ ने इस आदेश में कहा कि उनकी ओर से अनुमति सिर्फ केरागोडु गाँव में भारतीय तिरंगा फहराने की दी गई थी। लेकिन पीडीओ ने लोगों को हनुमान ध्वज फहराने का मौका दिया और जब उन्होंने इसे लगा लिया तो उन्होंने उसे हटाने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मुताबिक तो हनुमान ध्वज को उतारने के कारण जो समस्या पैदा हुई उसके पीछे पीडीओ जिम्मेदार है। न वह हनुमान ध्वज खंभे पर लगने देता और न ही उसे उतारे जाने पर इतना बवाल होता। इसलिए उन्होंने पीडिओ को ही निलंबित कर दिया है।

बता दें कि 28 नवंबर 2024 को 108 फीट ऊँचे खंभे से हनुमान ध्वज उतारने के मामले के कारण बहुत विवाद हुआ था। हनुमान ध्वज को हटाने के खिलाफ भाजपा और हिंदूवादी संगठनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि जिस राज्य में टीपू सुल्तान के पोस्टर लगे दिखते हैं वहाँ अगर हनुमान ध्वज फहराया जाए तो क्या दिक्कत है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार की धर्मनिरपेक्षता पर भी सवाल खड़ा किया था।

इसके अलावा जिस गाँव में ध्वज हटाया गया वहाँ भी भीड़ इकट्ठा हो गई थी और उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया था और बाद में प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में हनुमान ध्वज हटाकर वहाँ राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया गया। इस दौरान वहाँ भीड़ भगवा ध्वज लेकर जयश्रीराम का नारा लगाती रही। हनुमान ध्वज हटाने के विरोध में भीड़ ने केरागोडु से मांड्या के जिला मुख्यालय में उपायुक्त कार्यालय तक लगभग 14 किमी की दूरी तय करते हुए मार्च किया। इसमें सीटी रवि और प्रीतम गौड़ा और जद (एस) नेता सुरेश गौड़ा और के अन्नदानी प्रदर्शनकारी भी शामिल हुए।

‘कानून से ऊपर कोई नहीं’: फरार हुए CM हेमंत सोरेन तो राज्यपाल ने DGP और मुख्य सचिव को तलब किया, राँची में कई जगहों पर धारा-144 लागू

जमीन घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग में फँसे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 2 दिनों से गायब हैं। राँची से लेकर दिल्ली तक ED उनकी खोजबीन कर रही है। झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झामुमो एक बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। वहीं राँची में कई जगहों पर इसे देखते हुए धारा-144 लागू कर दी गई है। धरना-प्रदर्शन और जुलूस निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्यपाल CP राधाकृष्णन ने राज्य के मुख्य सचिव, DGP और गृह सचिव को राजभवन तलब कर उनके साथ बैठक की है।

झामुमो कह रही है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लापता नहीं हैं, वो जहाँ भी हैं सही-सलामत हैं। वहीं कॉन्ग्रेस के एक विधायक का कहना है कि सीएम मंगलवार (30 जनवरी, 2024) को सबके सामने आएँगे। हालाँकि, अब तक उनका कोई अता-पता नहीं है। दिल्ली में हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन के आवास पर भी ED ने दबिश दी थी। देर रात तक ED की टीम वहाँ रही। उसके बाद उनकी BMW कार और कुछ कागजात भी लेकर गई। मंगलवार को दोपहर 2 बजे सत्ता पक्ष गठबंधन के विधायकों की बैठक भी बुलाई गई है।

उधर झारखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने ऐलान किया है कि जो भी ‘होनहार’ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खोज निकालेगा, उसे 11,000 रुपए इनाम के रूप में दिया जाएगा। झारखंड के लोगों से उन्होंने ये ‘मार्मिक अपील’ की। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य के मुख्यमंत्री केन्द्रीय एजेंसियों के डर के मारे पिछले क़रीब चालीस घंटे से लोकलाज त्याग कर लापता हैं और चेहरा छिपाकर भागे-भागे फिर रहे हैं। बकौल बाबूलाल मरांडी, यह न सिर्फ़ मुख्यमंत्री की निजी सुरक्षा के लिए ख़तरा है बल्कि झारखंड की साढ़े तीन करोड़ जनता की सुरक्षा, इज़्ज़त, मान-सम्मान भी ख़तरे में है।

ख़बरों में बताया गया है कि 2 गाड़ियों और 36 लाख रुपए के अलावा ED ने हेमंत सोरेन के ठिकानों से जब्त की है। जब्त किए गए कागजातों में क्या है, ये अभी खुलासा नहीं किया गया है। राँची में हेमंत सोरेन के आवास, राजभवन और ED दफ्तर के 100 मीटर के आसपास धारा-144 लागू की गई है। झारखंड के राज्यपाल ने कहा कि मीडिया की तरह वो भी मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, हम संविधान के हिसाब से काम करते हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होगी।

राम शराबी थे, हजारों महिलाओं के साथ रहते थे… कर ली थी आत्महत्या: मुख्यमंत्री स्टालिन की करीबी उमा इलक्किया की हिंदू घृणा, वीडियो वायरल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की करीबी कही जाने वाली एंकर और एक द्रविड़ संगठन की महासचिव उमा इलैक्किया ने भगवान राम पर आपतिजनक टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने भगवान राम के चरित्र को लेकर अभद्र बातें कहीं और साथ ही राम मंदिर के विषय में भी आपत्तिजनक बातें बोली।

तमिल संगठन द्रविड़ कझगम तमिजार पेरिवाई की महासचिव उमा इलैक्किया ने एक सभा के दौरान 13 जनवरी 2024 को यह अपमानजनक बातें कही। उनका यह तमिल भाषा में दिया गया बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और हिन्दू इस पर गुस्सा जता रहे हैं।

द कम्यून मैग के अनुसार, उमा ने कहा, “वाल्मिकी रामायण के अनुसार, राम महल में हजारों महिलाओं के साथ रहते थे और शराब भी पीते थे। क्या आप उन्हें अपने बच्चों के लिए एक उदाहरण के रूप में पेश करेंगे? उनमें जीने का साहस नहीं था, इसलिए उन्होंने सरयू में छलाँग लगा कर आत्महत्या कर ली। क्या आप अपने बच्चों को उनके उदाहरण के साथ पालेंगे-पोसेंगे? ये कैसी मूर्खता है? राम ने अपनी ही पत्नी पर शक किया और उन्हें जंगल भेज दिया, क्या आप लोग इसे उदाहरण की तरह दिखाएँगे?”

उमा इलैक्किया यहीं नहीं रुकी। उन्होंने आगे भी करोड़ों लोगों के आराध्य प्रभु राम पर हमले जारी रखे। उन्होंने कहा, “राम एक हत्यारा था। उन्होंने खुद को छिपाकर बाली को मार डाला और जब शम्बूक ध्यान कर रहा था तो उसने बिना कारण पूछे उसका सिर काट दिया। क्या इस तरह का व्यक्ति आपके बच्चों के लिए आदर्श है?”

उमा इलैक्किया ने राम मंदिर पर भी अपने भाषण के जरिए हमले किए। उन्होंने कहा, “राम मंदिर राम के बाल रूप के लिए बना है। ये मंदिर बिलकुल कोरे झूठ पर बना है कि यह मंदिर उनके जन्मस्थान पर बना है। उन्होंने इसके लिए कोर्ट से आदेश भी जारी करवा दिया। इस मंदिर का पता क्या होगा? राम मंदिर या राम जन्मभूमि जो कि बाबरी मस्जिद पर बना हुआ है। आपने मंदिर वहाँ बनाया है, जहाँ कभी मस्जिद हुआ करती थी।”

उमा इलैक्किया ने यह सारे बयान आरएसएस और भाजपा के विरोध करने की आड़ में दिए। उनके इन बयानों पर लोग कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

उमा इलैक्किया स्टालिन परिवार द्वारा चलाए जाने वाले कलैनार सेथिगल में एंकर हैं। उनकी कई फोटो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयानिधि स्टालिन के साथ भी सामने आई हैं। गौरतलब है कि उदयानिधि भी सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया बता चुके हैं। उन पर भी कोई कार्रवाई तमिलनाडु सरकार ने नहीं की थी।

जिससे उठवाया गोबर, उसी नौकर को रेलवे जॉब के बदले जमीन… फिर वही जमीन लालू की बेटी को ट्रांसफर: ED ने समझाया कैसे खेला गया यह खेल

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान हुए ‘जॉब फॉर लैंड स्कैम’ की जाँच में ईडी ने एक नया खुलासा किया है। जाँच एजेंसी ने बताया है कि इस जॉब स्कैम में लालू की पत्नी राबड़ी देवी की गौशाला का एक कर्मचारी भी शामिल था। ईडी के मुताबिक, उस कर्मचारी ने एक अभ्यर्थी से रेलवे में नौकरी का वादा कर उसकी जमीन अपने नाम कराई और बाद में वो जमीन लालू प्रसाद यादव की बेटी हेमा यादव को स्थानांतरित कर दी गई। इस कर्मचारी का नाम हृदयानंद चौधरी था।

ईडी ने बताया कि उन्होंने इस मामले में 8 जनवरी 2024 को अपनी शिकायत स्पेशल कोर्ट में दायर की थी। शिकायत में अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हीमा यादव, हृदयानंद चौधरी का नाम है। इसके अलावा दो फर्जी कंपनियों को भी इस शिकायत में नामजद किया गया है। इनके नाम एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड और एबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड हैं। इन्हें लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों के लिए अपराध के लिए प्राप्त धन प्राप्त होता था।

केंद्रीय जाँच एजेंसी ने ये भी बताया कि इन फर्जी कंपनियों में प्रमुख लोगों द्वारा अचल संपत्तियाँ अर्जित की गईं और फिर नाममात्र राशि लेकर इसके शेयर लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों को ट्रांसफर कर दिए गए। बताया जा रहा है कि अमित कात्याल नाम का शख्स लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए इन फर्जी कंपनियों का मैनेजमेंट देखता था।

ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज (तस्वीर साभार: ED)

ये चार्जशीट दाखिल होने के बाद दिल्ली की कोर्ट ने इस मामले में पिछले हफ्ते संज्ञान लिया और आरोपितों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा शुरू करने के लिए 9 फरवरी 2024 को उनके सामने पेश होने के लिए नोटिस जारी किया। इनमें से कात्याल पहले से ही ईडी की हिरासत में है। उसे पिछले वर्ष नवंबर में गिरफ्तार करके जेल में डाला गया था। 11 नवंबर 2023 को उसकी गिरफ्तारी हुई थी

गौरतलब है कि लैंड फॉर जॉब केस में चल रही ईडी की जाँच का आधार वही आरोप हैं जिनमें कहा गया है कि लालू प्रसाद ने रेल मंत्री रहते हुए ग्रुप-डी वाले पदों पर नियुक्तियों में भ्रष्टाचार किया। ईडी का दावा है कि सीबीआई की प्राथमिकी और आरोप पत्र के अनुसार, अभ्यर्थियों को रेलवे में नौकरी के बदले रिश्वत के रूप में अपनी जमीन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया था।

बता दें कल (29 जनवरी 2024) लालू प्रसाद यादव से इस केस को लेकर ईडी ने 10 घंटे पूछताछ की थी। इस दौरान उनसे 70 सवाल किए गए। उन्हें हर जवाब देने में डेढ़ से 2 मिनट लगे। इस दौरान उनके कितने लोगों के नौकरी के बदले जमीन लेने की बात पूछी गई और साथ ही जमीन को कम दर पर खरीदने के भी सवाल किए गए। रात के 9 बजे राजद प्रमुख ईडी दफ्तर से निकले। मीडिया के आगे उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। वहीं जाँच अधिकारी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत लालू प्रसाद यादव का बयान दर्दज कर लिया।

झारखंड CM हेमंत सोरेन गायब: सड़क से लेकर एयरपोर्ट तक अलर्ट, दिल्ली पुलिस और आसपास के राज्यों की पुलिस एक्शन मोड में

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रवर्तन निदेशालय से बचने के लिए फरार हो गए हैं। उनसे जमीन घोटाला मामले में ED, दिल्ली पुलिस के साथ कल (29 जनवरी, 2024) को पूछताछ करने पहुँची थी। यह पूछताछ उनके दिल्ली स्थित आवास पर होनी थी। पूछताछ टीम के पहुँचने पर वह यहाँ से नदारद मिले। उनका पता लगाने के लिए ED एयरपोर्ट से लेकर सड़क तक, सब जगह खोज अभियान चला रही है। दिल्ली की सीमाओं पर भी गाड़ियों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।

आसपास की राज्यों की पुलिस को भी ED ने कहा है कि वह हेमंत सोरेन के विषय में जानकारी होने पर तुरंत बताएँ। हेमंत सोरेन कल दिल्ली स्थित आवास से राँची जाने वाले थे। राँची के लिए एक स्पेशल चार्टर्ड फ्लाइट भी बुक थी। यह फ्लाइट शाम 6 बजे रवाना होनी थी। ED ने जब इस बारे में जानकारी ली तो पता चला कि यह फ्लाइट भी रद्द कर दी गई है। हेमंत सोरेन के सभी फ़ोन नम्बर भी बंद आ रहे हैं। ED दिल्ली अलावा राँची में भी उनकी तलाश में लगी हुई है।

पूरे दिन ED ने ली तलाशी, हेमंत सोरेन का कोई सुराग नहीं

29 जनवरी को दिल्ली में हेमंत सोरेन के आवास पर पहुँची ED ने लगभग 13 घंटे तक जाँच की। यहाँ ED की टीम सुबह 9 बजे पहुँची थी और जाँच करने के बाद रात 11 बजे निकली। ED टीम अपने साथ हेमंत सोरेन की गाड़ी और उनके ड्राईवर को भी ले गई। यह गाड़ी BMW कम्पनी की है और हरियाणा में रजिस्टर्ड है।

बताया जा रहा है कि ED टीम के पहुँचने से कुछ ही देर पहले हेमंत सोरेन यहाँ से निकल गए थे। ED ने अब दिल्ली पुलिस से कहा है कि वह दिल्ली की सीमाओं पर नजर रखे और हाइवे पर लगी पुलिस को सचेत करके हेमंत सोरेन की जानकारी मिलने पर सूचित करें। ED ने प्रमुख एयरपोर्ट को भी अलर्ट भेजकर हेमंत सोरेन के विषय में जानकारी मिलने पर बताने को कहा है।

ED को मेल भेजा, कहा- 31 जनवरी को आना

हेमंत सोरेन ने दिल्ली से निकलने के बाद 29 जनवरी की शाम ED को एक इमेल भेजा है। उन्होंने कहा है कि ED उनसे पूछताछ के लिए 31 जनवरी को दोपहर 1 बजे उनके राँची स्थित आवास पर आ सकती है। उन्होंने इस इमेल में ED की जाँच को राजनीतिक तौर पर प्रेरित बताया है। उन्होंने यह भी कहा है ED को 20 जनवरी को हुई पूछताछ की वीडियो भी सम्भाल कर रखनी चाहिए। यह पूछताछ सात घंटे चली थी। ED का कहना था 20 जनवरी की जाँच को और आगे बढ़ाने के लिए हेमंत सोरेन से उन्हें फिर पूछताछ करनी है।

इसी को लेकर हेमंत सोरेन को समन भी भेजा गया था। इस मामले में अब तक हेमंत सोरेन को 10 समन भेजे जा चुके हैं। हेमंत सोरेन लगातार ED के समन का जवाब देने से बचते आए हैं। उनके परिवार के एक व्यक्ति ने मीडिया से कहा है कि सोरेन दिल्ली स्थित आवास पर नहीं मिले, इसका मतलब यह नहीं है कि वह फरार हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि ED उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुँच कर उनकी छवि धूमिल करना चाहती है। उनकी पार्टी के नेताओं ने कहा है कि वह व्यक्तिगत कार्य से दिल्ली गए थे।

यह जानकारी सामने आई है कि हेमंत सोरेन 27 जनवरी को राँची से दिल्ली आए थे। वह दिल्ली एक स्पेशल चार्टर्ड फ्लाइट से आए थे। यहाँ उन्हें इस मामले में कानूनी सलाह लेनी थी और साथ ही कुछ राजनीतिक मुलाक़ात भी करनी थी। ED ने उन्हें पूछताछ के लिए पहले ही समन भेज दिया था। वह उनसे दिल्ली में इसलिए पूछताछ करना चाहती थी क्योंकि 20 जनवरी को राँची में हुई पूछताछ के दौरान उनकी पार्टी झामुमो के कार्यकर्ताओं ने खूब हंगामा काटा था।

राँची में सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए गए, विपक्ष ने किया हमला

हेमंत सोरेन से पूछताछ और उनकी गिरफ्तारी की कयासों के बीच राँची में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। राँची में मुख्यमंत्री आवास समेत भाजपा कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। झारखंड सरकार ने 29 जनवरी को एक आदेश जारी करके 14 अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की तैनाती राँची में कर दी है। इन अधिकारियों को अगले आदेश तक राँची में मौजूद रहने को कहा गया है। भाजपा नेताओं ने हेमंत सोरेन के गायब होने को लेकर हमला बोला है।

झारखंड के भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने उन पर तंज कसा है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “ED के डर के मारे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले अठारह घंटे से दिल्ली वाले मुख्यमंत्री आवास से फ़रार हो कर भूमिगत हो गए हैं। मीडिया सूत्रों के मुताबिक़ देर रात हेमंत जी हवाई चप्पल पहने हुए चादर से मुँह ढँककर चोर की तरह आवास से पैदल निकल कर भागे हैं। उनके साथ दिल्ली गया स्पेशल ब्रांच का सुरक्षाकर्मी अजय सिंह भी ग़ायब है। इन दोनों का मोबाइल भी बंद, तब से उन्हें ईडी और दिल्ली पुलिस ढूँढ रही है।”

वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाए जाने का प्लान चला रहा है। उन्होंने लिखा, “हेमंत सोरेन जी ने अपने यानि झामुमो व कॉन्ग्रेस तथा सहयोगी विधायकों को राँची सामान तथा बैग के साथ बुलाया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “सूचना के अनुसार कल्पना सोरेन जी को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने सूचना दी है कि ED के पूछताछ के डर से वे सड़क मार्ग से राँची पहुँचकर अपने अवतरित होने की घोषणा करेंगे।”

सरकारी स्कूल में हेडमास्टर ने बच्चों को दिलाई कसम – ‘हिन्दू धर्म मत मानो, ब्रह्मा-विष्णु-महेश में विश्वास ना करो’: छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार, सस्पेंड भी हुआ

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में अपने छात्रों को ब्रह्मा-विष्णु-महेश में विश्वास ना करने और हिन्दू धर्म ना मानने की कसम दिलाने वाला हेडमास्टर गिरफ्तार कर लिया गया है। नाबालिगों का धर्मांतरण कराने वाले इस हेडमास्टर को शिक्षा विभाग द्वारा निलंबित भी कर दिया गया है। उसके इस कृत्य का वीडियो भी वायरल हुआ है।

जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के रतनपुर थाना क्षेत्र में एक शासकीय विद्यालय (मतलब सरकारी स्कूल) में हेडमास्टर रतनलाल सरोवर ने यहाँ पढ़ने वाले बच्चों को हिन्दू धर्म के खिलाफ कसम दिलवाई। यह कसम राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन दिलवाई गई। हिन्दू धर्म के खिलाफ कसम दिलवा कर उन्हें बौद्ध मत में धर्मान्तरित किया गया।

इस दौरान हेडमास्टर रतनलाल सरोवर ने बच्चों को ब्रह्मा-विष्णु-महेश को भगवान ना मानने की कसम दिलाई और प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ भी बातें कहीं। सरोवर ने भगवान राम और कृष्ण समेत हिन्दू धर्म के किसी भी देवता में विश्वास ना रखने को लेकर इन्हें कसम दिलवाई और यह भी कहा कि वह लोग यह ना मानें कि कोई भी देवता अवतार थे।

वीडियो में दिखता है कि सरोवर ने हिन्दू धर्म के रीति रिवाजों के खिलाफ लोगों को भड़काया और बौद्ध धर्म की आलोचना ना करने को लेकर उन्हें शपथ दिलवाई। रतनलाल सरोवर जिन बच्चों को शपथ दिलवा रहे हैं, वह सभी नाबालिग हैं। शपथ लेने वालों में कुछ वयस्क भी दिखते हैं। यह जानकारी सामने आई है कि यह पूरा कार्यक्रम तब आयोजित किया गया, जब 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी।

यह पूरा कार्यक्रम सरकारी स्कूल में ही आयोजित किया गया। रतनलाल सरोवर का हिन्दू धर्म के खिलाफ शपथ दिलाने और बौद्ध धर्म में धर्मान्तरित करने का यह वीडियो वायरल होने के बाद हिन्दू संगठन भड़क गए और उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग की। उन्होंने रतनलाल सरोवर का पुतला भी फूँका।

लोगों के गुस्से के देखते हुए सरकारी शिक्षक रतनलाल सरोवर को शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है। उसके खिलाफ वीडियो वायरल होने के बाद मामला भी दर्ज कर लिया गया है और उसे छत्तीसगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ धार्मिक भावनाएँ आहत करने का मामला दर्ज किया है।