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‘मुस्लिम पक्ष ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपे और मस्जिद दूसरी जगह ले जाए’: VHP बोली- ASI रिपोर्ट में मंदिर तोड़ने की बात, शिवलिंग पूजा की मिले अनुमति

काशी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे की ASI रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद मुस्लिम पक्ष पर नैतिक दबाव बन गया है। रिपोर्ट में हिंदुओं की धार्मिक चिह्नों, कलाकृतियों और देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियाँ मिलने की बात सामने आई है। अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने साफ शब्दों में कहा है कि मुस्लिम पक्ष को ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंप देना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा कि ज्ञानवापी ढाँचे से ASI द्वारा जुटाए गए सबूत से पुष्टि होती है कि मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद बनवाया गया है। उन्होंने कहा कि मंदिर की प्राचीन संरचना का एक हिस्सा आज भी मौजूद है।

आलोक कुमार ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने उस पूरे ढाँचे का वैज्ञानिक और पूरी गहराई से अध्ययन करके अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में ASI ने ढाँचे से सारे प्रमाण इकट्ठा किए हैं और उन सबका अध्ययन करके वे इस निर्णय पर पहुँचे हैं कि एक मंदिर को तोड़ करके उसके ऊपर ये मस्जिद बनाई गई थी।

आलोक कुमार ने कहा कि उस मंदिर का एक हिस्सा, खासकर पश्चिमी दिवार, मस्जिद बनाने में इस्तेमाल की गई है और पुराने मंदिर के पिलर्स एवं अन्य चीजों को उस मस्जिद को बनाने में लगाया गया है। उन्होंने ज्ञानवापी ढाँचे में मिले शिवलिंग की पूजा करने की भी अनुमति माँगी है। बता दें कि जिस जगह पर शिवलिंग मिला है, उसे मुस्लिम पक्ष वजूखाना कहता है।

विश्व हिंदू परिषद के अनुसार, ज्ञानवापी सर्वे में जो शिलालेख मिले हैं, उनमें जनार्दन, रुद्र, उमेश्वर आदि नाम लिखे हुए मिले हैं। इसलिए ज्ञानवापी की प्रकृति अभी भी एक मंदिर की है। आलोक कुमार ने आगे कहा कि 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्सिप ऐक्ट कहता है कि धार्मिक स्थान की जो प्रकृति होगी वो बदली नहीं जाएगी और ASI रिपोर्ट से साबित हो चुकी है कि उस स्थान की प्रकृति एक मस्जिद की नहीं, अभी भी एक मंदिर की है।

आलोक कुमार ने हिंदू समाज को कथित वजूखाने में मिले शिवलिंग की सेवा और पूजा की अनुमति करने के साथ ही मुस्लिम पक्ष से ज्ञानवापी को हिंदुओं को सौंपने की माँग की। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद की जगह मुस्लिम पक्ष जमीन लेकर दूसरी जगह अपनी मस्जिद बना लें।

आलोक कुमार ने कहा, “हम मस्जिद इंतजामिया कमिटी से आग्रह करते हैं कि सब प्रमाण सामने आने के बाद अच्छा होगा कि वे स्वयं ये कहें कि इस मस्जिद को किसी दूसरे एवं उपयुक्त स्थान पर आदरपूर्वक स्थानांतरित करने के लिए तैयार हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो भारत के दोनों समुदायों के बीच में एक सदभावना का निर्माण होगा, शांति स्थापित होगी और मस्जिद भी अपने विस्थापित स्थान पर आदरपूर्वक रह सकेगी।”

‘मार सकते, गालियाँ दे सकते… राहत फतेह बाप की तरह हैं’ – नौकर ने लात-जूते खाकर भी पाकिस्तानी गायक को ‘दारू बोतल कांड’ में बचाया

पाकिस्तानी सूफी गायक राहत फतेह अली खान ने मात्र एक दारू की बोतल को लेकर अपने नौकर को बुरी तरीके से पीटा। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में राहत फ़तेह अली खान अपने नौकर को थप्पड़-घूंसे मारते, जूतों से पीटते हुए दिखे हैं। इस दौरान नौकर उनसे दया की गुहार लगाता रहा, लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा।

पाकिस्तानी समाचार टीवी चैनल समा टीवी के अनुसार, राहत फ़तेह अली खान ने इस नौकर को इसलिए पीटा क्योंकि उनके घर से शराब की एक बोतल गायब हो गई थी। राहत फ़तेह अली खान नौकर पर बोतल गायब करने का शक करते हुए उसे पीटने के दौरान पूछ रहे थे कि बोतल कहाँ गई।

वीडियो में देखा जा सकता है, वह पूछते हैं, “कहाँ गई मेरी बोतल?” इसके बाद वह नौकर पर थप्पड़ों और लातों की बरसात कर देते हैं। इस दौरान नौकर को किसी ने नहीं बचाया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यह कोई नई बात नहीं है, इससे पहले भी खान अपने घर में काम करने वालों के साथ बदतमीजी करते रहे हैं। रिपोर्ट का कहना है कि जहाँ वह एक दो घंटे के अपने शो में अपनी रूहानी तस्वीर पेश करते हैं, वह स्टेज से उतरते ही बदल जाते हैं। चैनल का कहना है कि मारपीट की कई ऐसी फुटेज हैं, जिनको दिखाया तक नहीं जा सकता।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और राहत फ़तेह अली खान की हुज्जत होने के बाद उन्होंने अपने नौकर से एक बयान जारी करवाया। राहेत फ़तेह अली खान के इन्स्टाग्राम पर पीड़ित नौकर की चार वीडियो सफाई देते हुए डाली गई। इसमें पीड़ित नौकर कहता है कि यह वीडियो गायक को ब्लैकमेल करने के उद्देश्य से बनाई गई थी।

राहत फ़तेह अली खान के इन्स्टाग्राम पर डाले गए एक वीडियो में पीड़ित नौकर, जिसका नाम नावेद उस्मान है, कहता है कि यह एक गायब बोतल का मसला था और रहत फतेह अली खान ने उसे पीटकर उसके साथ कुछ भी गलत नहीं किया।

राहत भी एक वीडियो में पीड़ित और उसके पिता के साथ सामने आए और बताया कि यह नौकर और उनका आपसी मसला है। इसे कुछ लोग अलग ही तरीके से पेश कर रहे हैं। राहत ने यह भी दावा किया कि नौकर को पीटने के बाद उन्होंने माफ़ी माँग ली थी।

पीड़ित नौकर के पिता ने भी राहत फ़तेह अली खान का ही पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि खान ने उनके लिए बहुत कुछ किया है और यह एक छोटी घटना थी। राहत ने ड्राईवर को भी इस वीडियो में पेश किया, जिसमें वह कहता है कि खान ने उसके साथ कभी बदतमीजी नहीं की।

एक अन्य वीडियो में राहत फतेह अली खान ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपने नौकर से माफ़ी माँग ली है और अब सबके सामने माफ़ी माँग रहे हैं। इस पर उनका नौकर कहता है कि राहत फतेह अली खान उसके लिए बाप की तरह हैं और वह जो चाहें, उसके साथ कर सकते हैं।

नौकर ने कहा कि गायब हुई शराब की बोतल के कारण राहत फतेह अली खान थोड़ा गुस्सा हो गए थे, इसको किसी ने उनको ब्लैकमेल करने के लिए रिकॉर्ड करके लीक कर दिया। उसका उद्देश्य खान की छवि धूमिल करना था।

उनके नौकर ने कहा कि वह राहत फतेह अली खान के लिए 40 साल से काम कर रहा है और वह उसे हमेशा प्यार करते हैं। राहत ने नौकर को दो अन्य वीडियो में पेश किया। इन वीडियो में वह कहता है कि एक बोतल गायब हुई, जिसके कारण यह घटना हुई। उसने कहा कि राहत फतेह अली खान उसके उस्ताद हैं, इसलिए वह उसे मारपीट सकते हैं, गालियाँ दे सकते हैं, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। नौकर ने कहा जिसने भी वीडियो ने बनाया वह एक ब्लैकमेलर है।

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अकबर बन गया सत्यम, शमीम ने भी की घर वापसी: छत्तीसगढ़ में 251 परिवार के 1000 लोगों ने अपनाया सनातन, धीरेंद्र शास्त्री ने ओढ़ाया भगवा, प्रबल प्रताप ने पखारे पाँव

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री की हनुमत कथा के अंतिम दिन शनिवार (27 जनवरी 2024) को 1000 लोगों घर वापसी की। इस दौरान जशपुर राजपरिवार के प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भी मौजूद थे। जनजातीय समुदाय के बीच बेहद लोकप्रिय भाजपा नेता प्रबल प्रताप सिंह धर्मांतरण करने वाले लोगों के पाँव धोकर घर वापसी कराते रहे हैं।

राजधानी रायपुर के कोटा गुढ़ियारी इलाके में इस समय धीरेंद्र शास्त्री की श्री हनुमंत कथा चल रही थी। यह कथा 23 जनवरी से 27 जनवरी 2024 तक चली। कथा के अंतिम दिन 251 परिवार के 1000 धर्मांतरित लोगों ने घर वापसी की। घर वापसी करने वाले लोगों में 2 मुस्लिम परिवार सहित ईसाई धर्म को मानने वाले लोग शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के रहने वाले मोहम्मद अकबर ने भी हिन्दू धर्म में वापसी की। धीरेंद्र शास्त्री ने अकबर का नाम बदलकर सत्यम रखा है। वहीं, रायपुर के चंगोराभाठा में रहने वाले शेख समीम ने भी सनातन धर्म अपनाया है। इस दौरान गरीब परिवारों के 21 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया गया और उन्हें घर-गृहस्थी का जरूरत का सामान भी दिया गया।

भाजपा नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इस लोगों के पैर धोकर इनकी घर वापसी करवाया। इस दौरान हवन-पूजन का भी आयोजन किया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घर वापसी करने वाले सभी लोग सगुजां संभाग के रहने वाले हैं। इस दौरान जूदेव ने कहा कि वे सभी लोगों को सनातन में वापस लाएँगे। घर वापसी को उन्होंने राष्ट्र निर्माण का काम बताया।

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा,  इनका धर्मांतरण बहुत ही गलत तरीके से कराया गया था। इनसे झूठ बोलकर और हिंदू देवताओं के बारे में अपमानजनक बातें बोलकर इनका धर्मांतरण कराया गया था।” उन्होंने कहा कि घर वापसी का कार्यक्रम वे लंबे समय से कराते आ रहे हैं। उनके दिवंगत पिता दिलीप सिंह जूदेव भी कराते रहे थे।

जूदेव ने कहा, “मेरा मानना है जहाँ हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ है या अल्पमत में आए हैं, वह क्षेत्र भारत से कटता गया। एक समय था जब अफगानिस्तान से लेकर इंडोनेशिया तक सारे हिंदू ही थे। हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ और वे क्षेत्र भारत से अलग हो गए। जहाँ हिंदू घटा है, वहाँ देश बँटा है।” उन्होंने मंच से छत्तीसगढ़ में 101 मंदिर बनवाने की भी शपथ ली। 

वहीं, कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि वे किसी धर्म के विरोधी नहीं हैं और ना ही वे धर्मांतरण में यकीन रखते हैं, लेकिन बहला-फुसलाकर धर्मांतरित कराए गए लोगों की घर वापसी में उन्हें विश्वास है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने घर वापसी की है, वे हनुमान जी की मर्जी से आए हैं। उन्होंने प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के प्रयासों की भी जमकर सराहना की।

‘तुम मजहब की बेइज्जती करवा रही हो’: रामलला के दर्शन के लिए मुंबई से पैदल निकली शबनम तो मुस्लिम महिलाओं ने घेरा, बोली पीड़िता – बचपन में श्रीराम में विश्वास

मुंबई से अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए पैदल निकली शबनम शेख के साथ उत्तर प्रदेश के अमेठी में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने दुर्व्यवहार किया। मुस्लिम महिलाओं ने उनके पहनावे को लेकर टिप्पणियाँ की और काफी सारी बातें कहीं। शबनम को परेशान करने वाली महिलाओं पर पुलिस ने कार्रवाई कर दी है।

जानकारी के अनुसार, मुंबई की रहने वाली शबनम शेख 37 दिन पहले अपने दो दोस्तों के साथ पैदल रामलला के दर्शन के लिए निकली थीं। इस यात्रा में वह बुर्का पहनकर चल रही हैं और हाथ में भगवा झंडा लिया हुआ है। शनिवार (27 जनवरी, 2024) को वह अमेठी के जगदीशपुर पहुँची थी।

यहीं पर अयोध्या की तरफ जाते समय एक सफ़ेद रंग की कार में सवार कुछ मुस्लिम महिलाएँ आकर उनसे झगड़ने लगीं। इन महिलाओं ने कहा कि शबनम मजहब की बेइज्जती करवा रही हैं। उन्होंने शबनम के बुर्का पहनने पर भी टिप्पणियाँ की। कार सवार महिलाओं को शबनम से जवाब भी दिया। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि क्या वह बुर्का उतार कर साड़ी पहन लें।

शबनम के साथ हुए इस दुर्व्यवहार की वीडियो भी सामने आई है। शबनम ने यह वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर भी अपलोड की है। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो वायरल होने बाद पुलिस ने शबनम को परेशान करने वाली महिलाओं पर कार्रवाई की है। उनके परेशान करने वाली महिला का पुलिस ने चालान कर दिया है जबकि उस गाड़ी को सीज कर दिया।

गौरतलब है कि मुंबई की रहने वाली शबनम अब अयोध्या से मात्र 70 किलोमीटर दूर हैं। वह एक दिन में लगभग 35 किलोमीटर चलती हैं। वह अपने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जानकारी देती हैं कि वह कहाँ पहुँचने वाली हैं। रास्ते में हिन्दू संगठन उनका सम्मान भी कर रहे हैं। वह ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए चल रही हैं।

शबनम ने इससे पहले मीडिया को बताया था कि वह रामजी में बचपन से ही विश्वास रखती थीं। शबनम ने बताया था कि वह मुस्लिम परिवार से हैं लेकिन उनकी सभी धर्मों में आस्था है। शबनम ने अपने विषय में बताया था कि वह बीकॉम की छात्रा हैं और बचपन से ही हिन्दू इलाके में पली बढ़ी हैं।

अयोध्या को पैदल जाने वाली शबनम बताती हैं कि उनकी भाषा और जीवनशैली सब हिन्दुओं जैसी ही है क्योंकि वह हिन्दुओं के साथ ही बचपन से रह रही हैं। गौरतलब है कि शबनम के खिलाफ फतवा भी जारी किया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वह डरेगी नहीं।

ईरान में 9 पकिस्तामियों को गोलियों से भून डाला, ‘अज्ञात’ हत्यारे का अब तक कोई अता-पता नहीं

ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान प्रांत में 9 पाकिस्तानियों की एक अज्ञात बंदूकधारी ने हत्या कर दी है। इसके अलावा इस हमले में कई लोग घायल हैं। पाकिस्तानियों की मौत की पुष्टि ईरान में पाक राजदूत ने भी कर दी है। अभी तक हत्यारे का पता नहीं लग पाया है।

जानकारी के अनुसार, ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान के सरावान शहर में आज (27 जनवरी, 2024) को एक अज्ञात बन्दूकधारी ने घुस कर पाकिस्तानियों पर गोलियाँ बरसाईं। यह घटना सारवान शहर के सिरकान इलाके में स्थित एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में हुई। इसमें मौके पर ही 9 लोग हताहत हो गए जबकि 3 लोग अभी घायल बताए जा रहे हैं।

जानकारी सामने आई है कि सभी मृतक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शहरों के रहने वाले थे और इस वर्कशॉप में काम करते थे। अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है। सुरक्षा एजेंसियाँ भी हमलावरों की जानकारी नहीं जुटा सकी हैं। गौरतलब है कि जिस शहर में यह हमला हुआ वह पाकिस्तान-ईरान सीमा से लगभग 100 किलोमीटर दूर है।

ईरान में पाकिस्तानियों के मारे जाने की पुष्टि तेहरान में मौजूद पाकिस्तानी राजदूत मुदस्सिर टीपू ने भी कर दी है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “सरावान में 9 पाकिस्तानियों की भयावह हत्या से मैं हैरान हूँ। पाकिस्तानी दूतावास पीड़ित परिवारों की पूरी मदद करेगा। जाहेदान में मौजूद राजदूत पहले से ही घटना स्थल और अस्पताल के लिए निकल चुके हैं जहाँ घायलों का इलाज चल रहा है। हमने ईरान से इस मामले में पूरा सहयोग देने की अपील की है।”

गौरतलब है कि ईरान और पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध इस समय काफी निचले स्तर पर हैं। 16 जनवरी, 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के भीतर घुस कर हवाई हमले किए थे। ईरान ने कहा था कि उसने पाकिस्तान के भीतर कुछ आतंकी कैम्प तबाह किए हैं। इसके बाद पाकिस्तान ने भी ईरान के भीतर हमले करने का दावा किया था। रिश्ते बिगड़ने पर राजदूतों को भी दोनों देशों ने वापस बुला लिया था। हालाँकि, हाल ही में हुई बातचीत के बाद दोनों देश राजदूत वापस भेजने पर राजी हो गए थे।

इसी चलते इस घटना से एक दिन पहले ही (26 जनवरी, 2024) को ईरान में पाकिस्तान के राजदूत पहुँचे थे। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को यहाँ पहुँचने के बाद अपनी जानकारी भी पेश की थी। इसके कुछ ही समय बाद यह हमला हो गया।

नीतीश ‘सबके क्यों हैं?’ – ‘पलटूराम’ की वर्तमान छवि में नहीं, इतिहास में है ‘सुशासन बाबू’ को लेकर इस सवाल का जवाब, जो दूध कब का उबला आज तक चाभ रहे उसकी मलाई

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर से पाला बदल लिया है और उनकी पार्टी जदयू राजद छोड़ कर भाजपा के साथ आ गई है। जहाँ कई भाजपा समर्थक नाराज़ हैं कि बार-बार धोखा खाने के बावजूद भाजपा आखिर नीतीश कुमार को क्यों स्वीकार कर रही है। वहीं I.N.D.I. गठबंधन के समर्थक सोच ही नहीं पा रहे हैं कि नीतीश कुमार की आलोचना करें या प्रशंसा, क्योंकि कुछ दिनों पहले तक नीतीश कुमार ही राया-राज्य घूम कर गठबंधन बनाने की कोशिशों में लगे थे, लगातार सक्रिय थे।

आखिर क्या कारण है कि राजद हो या भाजपा, नीतीश कुमार को साथ लेने में कोई नहीं हिचकता और खुद नीतीश कुमार भी किसी के साथ भी जाने में नहीं हिचकते। इसका जवाब नीतीश कुमार की वर्तमान ‘पलटूराम’ वाली छवि नहीं, बल्कि इतिहास में है। उस इतिहास में, जब लालू यादव और रामविलास पासवान एक साथ सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे। उस इतिहास में, जब लालू यादव गाँव-जवार के पिछड़ों के नेता के रूप में उभर रहे थे, और उनका साथ दे रहे थे नीतीश कुमार।

न सिर्फ पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ का अध्यक्ष बनने में, बल्कि 1988 में कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद नेता प्रतिपक्ष बनने में, और 1990 में मुख्यमंत्री बनने में भी नीतीश कुमार ने लालू यादव की मदद की थी। ये वो दौर था, जब नीतीश कुमार मानते थे कि लालू यादव को आगे बढ़ाने में ही समाजवादी विचारधारा वाले धरे की भलाई है। लालू यादव ट्रांसफर-पोस्टिंग वाले हिसाब-किताब में दक्ष थे (जिससे उन दिनों विधायकों की कमाई होती थी), ड्रामा करने में उनका कोई सानी नहीं था और दिल्ली से लेकर पटना तक सेटिंग करने में भी उनकी दक्षता थी।

इसे एक वाकये से समझिए। एक बार लालू यादव एक श्रद्धांजलि सभा में गए। वहाँ रोना-धोना किया, शोक जताया, परिवार को ढाँढस बँधाया और फिर वापस जाने लगे। तभी वहाँ कुछ पत्रकार आ गए। लालू यादव उन्हें देख कर वापस गए और हूबहू अपना वही ड्रामा दोहरा दिया। जबकि नीतीश कुमार की छवि एक पढ़े-लिखे नौजवान की थी, एक सज्जन की थी, अच्छी वेशभूषा में रहने वाले एक युवा नेता की थी, विचारधारा पर चलने वाले व्यक्ति की थी।

इसके उलट लालू यादव की कोई विचारधारा ही नहीं थी। ‘नीतीश सबके हैं’, इसका एक कारण ये भी है कि लालू यादव, भाजपा और नीतीश कुमार – शुरू में इन सबका ‘दुश्मन’ एक ही हुआ करता था। JP आंदोलन से निकले लालू-नीतीश का ‘दुश्मन’ थी कॉन्ग्रेस। कॉन्ग्रेस पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए ही जनसंघ का जन्म हुआ था, जो बाद में भाजपा में परिवर्तित हो गई। इस तरह 1990 के वर्ष को उदाहरण लें तो बिहार में ये सारी शक्तियाँ एक थीं।

इनके एक होने की फिर वही वजह थी – कॉन्ग्रेस। लालू यादव जब पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब उन्हें न सिर्फ नीतीश कुमार बल्कि भाजपा का समर्थन भी हासिल था। भले ही ये अल्प समय के लिए ही था। इसके बाद राम मंदिर वाला मुद्दा जोर पकड़ा, लालकृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली और तत्कालीन प्रधानमंत्री VP सिंह के कहने पर लालू यादव ने आडवाणी को समस्तीपुर में गिरफ्तार करवा दिया। मुलायम सिंह यादव कहीं क्रेडिट न लूट ले जाएँ, इस डर ने ऐसा किया गया था।

ऊपर से लालू यादव इसके बाद सेक्युलरिज्म के मसीहा बने सो अलग। लालू यादव हमेशा से महत्वाकांक्षी रहे थे, एक बार एक बड़े नेता का इंतज़ार करने के लिए जब मीडिया से लेकर छोटे-छोटे नेतागण एयरपोर्ट पर खड़े थे तभी लालू यादव ने कहा था कि एक दिन उनका भी ऐसे ही इंतज़ार किया जाएगा। राजनीति का खून जो उन्होंने चखा था, सत्ता का खुमार जो उन्होंने सूँघा था, वो उन्हें मतवाला किए जा रहा था। नीतीश कुमार तब ऐसे नहीं हुआ करते थे।

1994 ने जॉर्ज फर्नांडिस समता पार्टी का गठन करते हैं। भाजपा को भी समाजवाद वाली लहर की आवश्यकता थी। ऐसे समय में जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेता को वो साथ लेना चाहती थी और इस तरह लालू यादव के खिलाफ एक गठबंधन बनता है। जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार के साथ भाजपा की साझेदारी की शुरुआत होती है। विपक्ष की राजनीति तब न तो भाजपा के लिए नई बात थी, न ही जॉर्ज-नीतीश के लिए। विपक्षी राजनीति उन्हें सूट करती थी, वो इसके आदी भी हो चले थे।

चूँकि लालू यादव 1990 में ही सत्ता में पहुँच गए और नीतीश कुमार को इसके बाद 15 वर्ष और इंतज़ार करना पड़ा, उनकी छवि एक जुझारू नेता की बन गई। एक ऐसे नेता की, जो लगातार चुनावों में हार के बावजूद रुका नहीं, एक ऐसा नेता जिसने एक साथी को पकड़ा तो लंबे समय तक उसका साथ निभाया, एक ऐसा नेता जो नब्बे के दशक में अंग्रेजी बोल सकता था, एक ऐसा नेता जो एक दुर्घटना के बाद केंद्रीय रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे सकता था, एक ऐसा नेता जो जंगलराज के खिलाफ सबसे बड़ा चेहरा बन कर उभरा।

नीतीश कुमार को कभी किसी भाषण में चिल्लाते हुए, ड्रामा करते हुए या फिर उग्र होते हुए नहीं देखा गया। इस ‘सज्जन शहरी बाबू’ ने जब सत्ता सँभाली तो पहले 5 वर्ष में बहुत कुछ बदल गया। नक्सली वारदातों पर लगाम लगी, सड़कों का निर्माण शुरू हुआ, साइकिल योजना के कारण लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा में तेज़ी आई, गाँवों में कैबिनेट बैठक होने लगी, जिले-जिले में CM की यात्राएँ निकलने लगीं, जनता दरबार तक आम लोगों की पहुँच बनी और नेताओं की दबंगई की जगह ब्यूरोक्रेसी ताकतवर हुई।

2013 तक सब ठीक-ठाक चला और आज भी नीतीश कुमार विपक्ष में किए गए संघर्षों और 8 साल किए गए काम की ही मलाई खा रहे हैं। यही कारण है कि इसके एक दशक बाद भी वो ‘सबके’ हैं। 2013 में वो राजद द्वारा बाहर से समर्थन लेकर सरकार बनाते हैं, 2014 के लोकसभा चुनावों में बुरी तरह पटखनी खाते हैं, जीतन राम माँझी को CM बना कर हार की जिम्मेदार लेकर सहानुभूति लहर का फायदा उठाना चाहते हैं, 2015 में राजद के साथ विधानसभा चुनाव जीतते हैं, 2017 में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर राजद से गठबंधन तोड़ देते हैं, 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ मिल कर बंपर सीटें जीतते हैं, 2020 के विधानसभा चुनाव में फिर भाजपा के साथ मिल कर सत्ता पर काबिज होते हैं, 2022 में वापस लालू की पार्टी के साथ जाते हैं और 2024 में उनका फिर से मोहभंग होता है और वो भाजपा के साथ आ जाते हैं।

अतः, नीतीश कुमार के सबके साथ चले जाने और सहज हो जाने के पीछे कारण यही है कि वो उस दौर में संघर्षों में रत रहे हैं जब इसी भाजपा के कई नेता उनके मित्र हुआ करते थे और ‘कॉमन एनिमी’ से लड़ रहे थे। खुद लालू यादव उनके जवानी के मित्र हैं। सुशील मोदी जैसे भाजपा नेता कॉलेज के दिनों के मित्र हैं। उस समय की उनकी सज्जन, सौम्य और फिर बाद में सुशासन वाली छवि आज तक उनके काम आ रही है। जो सोशल इंजीनियरिंग उन्होंने पहले की थी और ‘महादलित’ समुदाय वाला दर्जा कई तबकों को दिया, वो आज तक उनके काम आ रहा है।

नीतीश कुमार को पता है कि ये वोट बैंक ऐसा नहीं है कि अकेले 240 सीटों में लड़ कर वो CM बन जाएँ, लेकिन इतना ज़रूर है कि अगर वो किसी के साथ जुड़ जाते हैं तो उनका मुख्यमंत्री पद बरकरार रहे। नीतीश कुमार आज ‘मोदी लहर’ को स्वीकार कर रहे हैं, तभी लोकसभा चुनाव से ऐन पहने पाला बदल रहे हैं। ‘नीतीश सबके हैं’ – क्योंकि I.N.D.I. गठबंधन में उन्हें भाव नहीं मिला, संयोजक का पद नहीं मिला। ‘सबके’ बन कर रहना आज उनकी मजबूरी भी बन गई है।

‘नीतीश सबके हैं’, क्योंकि लालू यादव की ‘गँवार’ वाली छवि के विकल्प के रूप में लोगों ने उनमें एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति दिखा। क्योंकि मंच पर ड्रामेबाजी के विकल्प के रूप में आम जनता ने सामान्य तरीके से दिल की बात करने वाले एक नेता के रूप में उन्हें देखा। क्योंकि एक पार्टी विशेष के गुंडों की दबंगई से त्रस्त जनता ने उनमें एक ‘सुशासन बाबू’ को देखा। क्योंकि लोगों ने इतने बुरे दौर देखे हैं कि ‘सामान्य’ भी बेहतर लगता है। नीतीश पहले विकल्प थे, अब मजबूरी हैं। उनकी राजनीति का ये अंतिम अध्याय है, शायद इसका अंत किसी संवैधानिक पद पर हो!

‘इस्लाम कबूल कर वरना तुझे और तेरे परिवार को ठिकाने लगा देंगे’: यूपी में वाल्मीकि समाज के परिवार को मिल रही धमकी, बताया – मुस्लिम बहुल गाँव में हम अकेले हिन्दू

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक दलित परिवार को इस्लाम कबूलने की धमकी दी जा रही है। उसको आसपास के दबंग मुस्लिम धमकी दे रहे हैं कि वह जमीन खाली कर दे या फिर इस्लाम अपना ले। पीड़ित ने इसको लेकर सहारनपुर पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया है। जानकारी के अनुसार, सहारनपुर के गंगोह थाना क्षेत्र के कुंडाकला गाँव में वाल्मीकि जाति के साधूराम के परिवार को यह धमकियाँ मिल रही हैं। साधूराम के परिवार को असलम, नियाज, एजाज, सोनू, आमिर, कामिल, सलीम और काला जमीन खाली करने के लिए धमका रहे हैं।

साधूराम ने इस सम्बन्ध में पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत में साधूराम ने बताया है कि वह 1967 से ढलावली कस्बे में रह रहा है। यहाँ वह अपने गाँव से इसलिए आया था क्योंकि वहाँ बाढ़ आ गई थी। साधूराम ने पुलिस को बताया है कि यहाँ वह जिस जमीन पर रह रहा है, उसे कब्जाने की नीयत से यह सभी मुस्लिम दबंग उसे धमकी दे रहे हैं। साधूराम द्वारा दिया गया प्रार्थना पत्र ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

साधूराम ने प्रार्थना पत्र में बताया है, “वो धमकाते हैं – या तो तू अपने परिवार सहित इस्लाम मजहब कबूल कर ले वरना तुझे और तेरे परिवार को ठिकाने लगाकर सारी जमीन पर अपना कब्जा कर लेंगे।” पीड़ित ने कहा है कि इन मुस्लिम दबंगों की दबंगई की वजह से उसके बाकी परिवारीजन पहले ही घर छोड़ कर अलग अलग शहरों में जा चुके हैं। साधूराम ने यह भी आरोप लगाया है इनकी जमीनें कब्जाने के अलावा मुस्लिम दबंगों ने ग्राम समाज की भी जमीन कब्जा रखी है।

पीड़ितों ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “कुंडाकला गाँव से हैं हम, हमारा अकेला घर वहाँ वाल्मीकियों का है। बाकी पूरा गाँव मुस्लिमों का है। पहले मुझसे मारपीट की अब मेरा घर छीनना चाह रहे हैं। हमसे कहते हैं कि यहाँ से भाग जाओ या फिर मुसलमान बन जाओ। हमें उनसे बहुत खतरा है।”

साधूराम ने यह भी बताया है कि यहाँ पर यह मुस्लिम दबंग हिन्दुओं का धर्मांतरण कराते हैं और उनकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करते हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि हिन्दू परिवारों की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की जाती है। इस मुस्लिम दबंगों पर साधूराम ने हथियार तस्करी का भी आरोप लगाया है। साधूराम ने इन मुस्लिम दबंगों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग पुलिस प्रशासन से की है।

यूपी पुलिस को देखते ही राशिद ने किया हवाई फायर, फिर अपनी ही कनपटी से लगा दिया तमंचा: आत्महत्या की दे रहा था धमकी, दबोचा गया

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक जानलेवा हमले के आरोपित ने पुलिस के सामने खूब ड्रामा किया। आरोपित राशिद ने उसे पकड़ने आई पुलिस को आत्महत्या की धमकी दी और कनपटी पर तमंचा सटा लिया। इस दौरान वह पुलिस वालों को फायर करने की धमकी देता रहा। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

यह घटना मेरठ के कोतवाली क्षेत्र में हुई। यहाँ शनिवार (27 जनवरी, 2024) को एक जानलेवा हमले के आरोपित को पकड़ने पहुँची थी, इसके खिलाफ एक व्यक्ति ने मामला दर्ज करवाया था। पीड़ित ने बताया था कि राशिद और दानिश ने उसे तमंचा दिखाकर हत्या की धमकी दी थी।

इस मामले में पहले ही दानिश को गिरफ्तार कर लिया गया था। मेरठ पुलिस राशिद को इसके बाद पकड़ने पहुँची थी। जब राशिद घटनास्थल से भाग नहीं पाया तो उसने पुलिस को देखते हुए पहले हवाई फायर किया और फिर जब खुदको घिरता देखा तो खुद की कनपटी पर तमंचा लगा लिया।

इसने इस दौरान पुलिस वालों को आत्महत्या की धमकी दी और दानिश को छोड़ने की माँग करने लगा। इस दौरान वह यहाँ मौजूद बाकी लोगों को भी धमकाता रहा। पुलिस उसे इस दौरान समझाती रही। हालाँकि, उसने अपने ड्रामा जारी रखा। जब उसके पास एक पुलिसकर्मी पहुँचा तो राशिद ने उसका कॉलर पकड़ लिया।

राशिद को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने उसके जानने वालों को भी बुलाया और आत्मसमर्पण के बाद उसकी जमानत की बात भी कहलवाई लेकिन वह नहीं माना। इस दौरान राशिद के परिवार वाले भी उसे समझाते रहे लेकिन वह कहता रहा कि तीन तक गिनते खुद को गोली मार लगा।

इस पूरे ड्रामे के बीच यहाँ काफी भीड़ इकट्ठा हो गई। बाद में राशिद को पकड़ने के लिए और भी फ़ोर्स बुलाई गई। किसी तरह से उससे तमंचा छीन कर उसे नियंत्रित किया और गिरफ्तार किया। पुलिस ने इस संबंध में एक बयान भी जारी किया है।

पुलिस ने बयान जारी करके कहा है, “थाना देहली गेट के अंतर्गत वादी मनीष प्रजापति के द्वारा एक 307 आईपीसी का मुकदमा प्रतिवादी राशिद, दानिश आदि के विरुद्ध पंजीकृत कराया गया था। इसमें वादी को तमंचा दिखाकर प्रतिवादियों द्वारा होटल में धमकाया गया था।”

मेरठ में राशिद के सम्बन्ध में पुलिस का बयान

आगे पुलिस ने बताया, “आज देहली गेट थाने की पुलिस राशिद को पकड़ने गई थी, जिसमें राशिद द्वारा अपने ऊपर तमंचा लगाकर आत्महत्या की धमकी देने लगा और हवाई फायर भी किया तथा सह अभियुक्त दानिश जो पुलिस द्वारा पहले से ही गिरफ़्तार किया गया है उसको छोड़ने की शर्त रखने लगा । पुलिस द्वारा तमंचा छीनकर राशिद को पकड़ लिया गया है और गिरफ्तार किया जा रहा है। राशिद के पास 32 बोर के दो तमंचे और कारतूस मिले हैं।”

केरल के राज्यपाल को अब Z+ सिक्योरिटी, SFI के गुंडों ने दिखाए थे काले झंडे: बोले आरिफ मोहम्मद खान – अराजकता को बढ़ावा दे रहे CM पिनाराई विजयन

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को Z+ सिक्योरिटी देने का फैसला किया है। दरअसल केंद्र सरकार का ये फैसला राज्यपाल को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के गुंडों के शनिवार (27 जनवरी, 2024) को काले झंडे दिखाए जाने के बाद आया है।

राज्यपाल के आधिकारिक एक्स हैंडल पर केरल राजभवन PRO के हवाले से पोस्ट किया गया, “केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल राजभवन को सूचित किया है कि सीआरपीएफ का जेड+ सुरक्षा कवर माननीय राज्यपाल और केरल राजभवन तक बढ़ाया जा रहा है।” राज्यपाल ने सबसे लिए सीएम को जिम्मेदार ठहराया है।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मीडिया से कहा, “मुझे 11 बजे स्वामी सदानंद आश्रम में सुबह 11 बजे एक बैठक में जाना था। जब मैं यहाँ पहुँचा तो कुछ लोगों ने मेरी कार को हिट करने की कोशिश की। मैंने पहले ही कहा मुझे कोई परेशानी नहीं है, किसी ने काले झंडे दिखाए, लेकिन अगर कोई मेरी कार के नजदीक आता है। तब मैं नीचे उतरूँगा।”

उन्होंने आगे कहा,”जो मैंने देखा वो अहम नहीं है, लेकिन ये महत्वपूर्ण है वहाँ 70 पुलिस वाले थे और आप यहाँ पर खड़े पुलिसवालों को गिन सकते हैं यहाँ कितने पुलिस वाले हैं। मेरा केवल एक सवाल है कि अगर चीफ मिनिस्टर इस रोड से जा रहे होते तो क्या पुलिस उन लोगों के साथ जाकर खड़ी होती तो हाथों में काले झंडे लिए थे और उन्हें कार को हिट करने की इजाजत देती। मैं पुलिस को दोष नहीं दे रहा, क्योंकि उनको आदेश सुप्रीम ऑथिरीटी से मिलते हैं और वो राज्य के चीफ मिनिस्टर हैं।”

राज्यपाल खान ने आरोप लगाया हैं, “यह राज्य के मुख्यमंत्री हैं जो राज्य में अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं। वह पुलिस को इन कानून तोड़ने वालों को संरक्षण देने का निर्देश दे रहे हैं। उनमें से कई ऐसे हैं जिनके खिलाफ कई आपराधिक मामले अदालत में लंबित हैं। वही इन लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। पुलिस ने 17 लोगों पर केस दर्ज किया है। हालाँकि मैंने देखा कि वहाँ 50 से ज्यादा लोग थे।”

दरअसल मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की पार्टी सीपीआई (एम) की स्टूडेंट ब्रॉन्च SFI के गुंडों ने राज्यपाल आरिफ के शनिवार कोट्टाराक्करा जिले में एक समारोह में जाने के दौरान काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया।

इससे राज्यपाल गुस्से में आ गए और SFI के गुड़ों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर सड़क किनारे एक दुकान पर धरने पर जा बैठे। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल हैं।

इनमें राज्यपाल को कोल्लम जिले के निलामेल इलाके में एक व्यस्त एमसी रोड पर कार से बाहर निकलते हुए देखा जा सकता है। यहाँ वो एक स्थानीय दुकान से कुर्सी लेते हुए और सड़क के किनारे बैठकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते दिखते हैं।

राज्यपाल को ऐसे सड़क किनारे बैठे देख मौके पर कई लोग इकट्ठा हो गए। इससे राज्यपाल का पारा और चढ़ गया और उनका सारा गुस्सा पुलिसकर्मियों पर निकला। उन्हें वीडियो में पुलिसकर्मियों से सख्ती से बात करते हुए भी देखा जा सकता है। वो गुस्से में कहते दिखते हैं कि पुलिस ही कानून तोड़ेगी तो कानून का पालन कौन करवाएगा। बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ SFI के गुंडों ने मोर्चा खोला है।

इससे पहले दिसंबर, 2023 में राज्यपाल खान के काफिले पर राजधानी तिरुवनंतपुरम में SFI ने हमला किया था। तब राज्य खुफिया विभाग ने कहा था कि हमारी राज्यपाल के खिलाफ SFI के विरोध प्रदर्शन को लेकर चेतावनियाँ जारी करने के बाद उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा नहीं दी गई। पुलिस के आला अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

यही नहीं CM पिनाराई विजयन के दामाद PA मोहम्मद रियास ने राज्यपाल खान को लेकर 17 दिसंबर, 2023 को तीखा बयान दिया था। राज्य के पयर्टन मंत्री रियास ने कहा था CPM राज्यपाल खान को उनकी बकवास को बंद करने के लिए नहीं कह रही, क्योंकि वो उनके पद की इज्जत करती है।

‘ईश्वर की देन है दारू, देता है मजा’: वेटिकन से पोप फ्रांसिस का सन्देश

ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने कहा है कि दारू भगवान की देन है और यह आनंद का असली स्रोत है। पोप फ्रांसिस ने यह बयान वेटिकन सिटी में दिया है, जो ईसाइयों की धर्मनगरी है। उन्होंने इसके पहले भी शराब के समर्थन में कई बयान दिए हैं।

पोप फ्रांसिस ने यह बयान एक समारोह में दिया, जिसमें इटली से आए हुए तमाम शराब निर्माता शामिल थे। यह समारोह इतालवी शहर वेरोना के बिशप डोमेनिको पोम्पिली द्वारा आयोजित किया गया था। यह समारोह वेरोना में हर साल अप्रैल माह में होने वाली वाइन प्रतियोगिता के पहले आयोजित किया जाता है।

पोप फ्रांसिस ने इस सभा में कहा, “यह ऐसा लगेगा जैसे पोप नशे में बोल रहे हैं। शराब, जमीन, कृषि का कौशल और व्यापारिक कौशल भगवान के उपहार हैं। सृष्टि निर्माता ने इन्हें हमें इसलिए दिए हैं, क्योंकि हम संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ इन्हें अपने आनंद का असली स्रोत बनाते हैं।”

पोप फ्रांसिस ने शराब बनाने वालों से कहा कि वह इससे सम्बंधित नैतिक जिम्मेदारियों का वहन करें और साथ ही पीने की सही आदतों को बढ़ावा दें। इस कार्यक्रम के आयोजक दूसरे ईसाई धर्मगुरु डोमेनिको पोम्पेली ने कहा कि संत पॉल ने कहा है कि शराब का एक ग्लास उत्साह बढ़ाने के लिए है, अगर इसे संभल कर लिया जाए।”

बता दें कि पोप फ्रांसिस इससे पहले भी शराब का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में भी शराब के समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने शराब को शादी समारोह का प्रमुख अंग कहा था। उन्होंने कहा था, “नवविवाहित जोड़े की शादी में शराब ना हो तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है, जैसे आपने चाय पीकर आपने शादी समारोह पूरा कर लिया।”

गौरतलब है कि इटली विश्व में दूसरा सबसे बड़ा शराब उत्पादक देश है। बीते कुछ वर्षों से यूरोप में शराब की बोतलों पर स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चेतावनी जारी की माँग यूरोपीय यूनियन से की जा रही है। हालाँकि, इटली के शराब उत्पादक इसके खिलाफ रहे हैं। पोप फ्रांसिस के इस बयान का इन शराब उत्पादकों ने स्वागत किया है।