अहमदाबाद में महजबीन मोहसिन नाम की मुस्लिम महिला ने अपने पूर्व हिंदू प्रेमी पर एसिड अटैक कर दिया, क्योंकि वो अब उस महिला से रिश्ता नहीं रखना चाहता था। ये रिश्ता करीब 4 साल तक चला था, लेकिन घर वालों की वजह से दोनों अलग हो गए थे। पर गुस्साई महजबीन ने बदले के लिए हर हद को पार कर दिया और अपने पूर्व प्रेमी को रास्ते में रोक कर उस पर तेजाब फेंक दिया। इस काम में उसकी एक सहेली ने भी साथ दिया।
ये मामला अहमदाबाद के बापूनगर इलाके का है। यहाँ 51 साल के राकेश ब्रह्मभट्ट पर उनकी पूर्व प्रेमिका महजबीन मोहसिन ने अपनी सहेली की मदद से तेजाब फेंक दिया। इस हमले में वो बुरी तरह से झुलस गए। उनके चेहरे, उनकी दाहिनी आँख, पीठ और प्राइवेट पार्ट वाला हिस्सा बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, राकेश अहमदाबाद में एएमटीएस में कंट्रोलर के पद पर काम करते हैं। वो पहले कंडक्टर के तौर पर काम करते थे, जहाँ 5 साल पहले उनकी पहचान महजबीन मोहसिनभाई चुवारा से हो गई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध भी स्थापित हो गए थे। महजबीन जुहापुरा में आयशा मस्जिद के पास अंजुम पार्की की रहने वाली है। दोनों के बीच 4 साल तक रिश्ता रहा, लेकिन घर वालों को पता चल गया। जिसकी वजह से एक 1 साल से दोनों अलग हो गए थे। हालाँकि महजबीन लगातार राकेश और उसके घरवालों को धमकाती रहती थी। वो एक दिन उसकी बेटी के घर भी धमक गई थी। और आखिरकार उसने एसिड से हमला कर ही दिया।
ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, शनिवार (27 जनवरी, 2024) को रात करीब 8:30 बजे राकेश पर अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन के पास हमला हुआ। राकेश उस समय एएमटीएस कंट्रोल केबिन नंबर 7 पर ड्यूटी पर थे। उस दौरान महजबीन अपनी एक सहेली के साथ वहाँ पहुँची और उसने ‘तुम मुझसे रिश्ता क्यों नहीं रखते’ कहकर तेजाब से भरी केन राकेश के ऊपर फेंक दिया। तेजाब फेंकने से राकेश की दाहिनी आँख, पीठ और प्राइवेट पार्ट गंभीर रूप से झुलस गए। उसके चिल्लाने पर आसपास के लोग भी वहाँ जमा हो गए, जिसके बाद महजबीन और उसकी सहेली फरार हो गए। वहीं, स्थानीय लोगों ने राकेश को जीसीएस अस्पताल पहुँचाया।
राकेश ब्रह्मभट्ट की पत्नी ने ऑपइंडिया को बताया, “उनकी (राकेश ब्रह्मभट्ट) आँख में बहुत गंभीर चोट लगी है, हम प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी आँख बच जाए। अब उन्हें जीसीएस अस्पताल से सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।” पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 326(ए), 333 और 114 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जाँच शुरू कर दी है। कालूपुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है।
धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया
भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित राकेश ब्रह्मभट्ट ने बताया कि महजबीं ने उन्हें काफी परेशान किया। अब उसे अपनी आंखों से कुछ दिखाई भी नहीं देता। उन्होंने यह भी कहा कि महज़बीन ने पहले उनकी बेटी के घर में घुसने की कोशिश की थी और राकेश और उसके परिवार ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उसने यह भी आरोप लगाया है कि महजबीन उस पर धर्म परिवर्तन के लिए भी दबाव बना रही थी।
कर्नाटक में 108 फुट ऊँचे खंबे से हनुमान जी का झंडा उतारने के विरोध में ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया है। उनका साथ बीजेपी और जेडीएस कार्यकर्ता भी दे रहे हैं, जिसके बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है। बीजेपी-जेडीएस कार्यकर्ताओं को पुलिस-प्रशासन ने हिरासत में भी लिया है। ये मामला कर्नाटक के मंड्या जिले का है। जहाँ केरागोडू गाँव में हनुमान जी की ध्वजा 108 फुट ऊँचे खंबे पर लहराया गया था।
हनुमान जी की इस ध्वजा को लहराने की अनुमति मंड्या जिले के केरागोडू ग्राम पंचायत बोर्ड ने ही दी थी। इसके बावजूद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने झंडे को नीचे उतारा। प्रशासन के इस काम का स्थानीय लोगों ने तीखा विरोध किया है, जिनका साथ बीजेपी और जेडीएस के कार्यकर्ता भी दे रहे हैं। इस बीच, बीजेपी और जेडीएस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में भी लिया है। वहीं, स्थानीय महिलाओं पर भी पुलिस बल ने कार्रवाई की है और उन्हें झंडे के नीचे से बलपूर्वक हटा दिया है। इस दौरान स्थानीय लोगों द्वारा बुलाए गए बंद को प्रशासन से निर्दयता से कुचला है।
#WATCH | Mandya: Karnataka Police force detained BJP-JDS workers protesting after the Hanuman flag hoisted by the Gram Panchayat Board of Mandya district on a 108-foot flagpole in the village of Keragodu was brought down by the district administration. pic.twitter.com/2JslLJS4Tj
जानकारी के अनुसार, मंड्या जिले के केरागोडू गाँव में ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा करके एक 108 फीट लंबा पोल स्थापित किया था। इस पर भगवा ध्वज लगा था और आंजनेय (हनुमान जी को यहाँ आंजनेय कहा जाता है) की छवि थी। इसे गाँव के रंगमंदिर के पास लगाया गया था। बताया जा रहा है कि इसके लिए ग्राम पंचायत की भी अनुमति ले ली गई थी।
हालाँकि, गाँव के कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने इसके विरुद्ध शिकायत कर दी। इस शिकायत के आधार पर मंड्या के प्रशासन ने शनिवार (27 जनवरी, 2024) को यहाँ पहुँच कर पोल से ध्वज हटा दिया था। यहाँ ध्वज हटाने के लिए प्रशासन भारी संख्या में पुलिस बल लाया था। इस दौरान गाँव के लोग प्रदर्शन करते रहे और प्रशासन से अपील करते रहे कि यह ध्वज उन्होंने आपसी सहमति से लगाया है, इसके बाद भी प्रशासन नहीं माना। अजब ग्रामीणों ने अधिक प्रदर्शन किया तो उनको यहाँ से हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज तक कर दिया।
एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ध्वज हटाने के लिए रात का समय चुना गया। ध्वज शनिवार रात को हटाया गया। यहाँ हिन्दू रात से ही इकट्ठा होने लगे थे और आज सुबह (28 जनवरी, 2024) को यहाँ माहौल और तनावपूर्ण हो गया। प्रशासन के इस निर्णय से गुस्साए ग्रामीणों ने केरागोडू को बंद रखने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने विरोध में स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक रविंद्रकुमार के पोस्टर भी फाड़ दिए। कुछ लोगों ने उनके इस पूरे मामले के पीछे होने का आरोप लगाया। मौके पर मौजूद बजरंग दल, भाजपा और जेडीएस कार्यकर्ता भगवा ध्वज को दोबारा लगाए जाने की माँग कर रहे हैं।
‘विश्व टेस्ट चैंपियनशिप’ (WTC) में टॉप की दोनों टीमों ऑस्ट्रेलिया और भारत को एक ही दिन हार मिली है। भारत अपने सबसे मजबूत घरेलू मैदानों में से एक हैदराबाद की पिच पर इंग्लैंड से मैच हार गया, तो दूसरी तरफ वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम को उसके ही घर में घुसकर वेस्टइंडीज के नए नवेले-खिलाड़ियों ने बुरी तरह से हरा दिया। वो भी ऑस्ट्रेलिया के सबसे मजबूत मैदान गाबा में। ऑस्ट्रेलिया को वेस्टइंडीज के हाथों में 8 रनों से मात झेलनी पड़ी, तो भारतीय टीम को 28 रनों से हार झेलनी पड़ी। खास बात ये है कि दोनों ही टीमों में ऐसे खिलाड़ियों ने टीम को जीत दिलाई, जिन्हें बेहद कम करके आँका जा रहा था।
हैदराबाद की स्पिन पिच पर ही ढेर हुए भारतीय शेर
भारत ने इंग्लैंड की टीम का स्वागत किया था हैदराबाद की सूखी पिच पर। ये पिच स्पिनरों की मददगार पिच थी। इसका फायदा घरेलू टीम को मिलना था, हालाँकि, इंग्लैंड की टीम ने भी इसकी खूब तैयारी की थी। भारतीय टीम ने दो तेज गेंदबाजों को अंतिम एकादश में शामिल किया, तो इंग्लैंड ने सिर्फ एक तेज गेंदबाज को मैच में खिलाया। इस बीच पूरे मैच में भारतीय टीम भारी पड़ती नजर आई, लेकिन इंग्लैंड की टीम जिस बैजबाल क्रिकेट के लिए जानी जाती है, उसकी वजह से उसे ही जीत मिली।
इसमें इंग्लैंड के उन स्पिनरों का योगदान काफी ज्यादा रहा, जिन्हें शुरू की दो पारियों में खारिज किया जाता रहा। वहीं, इंग्लैंड की दूसरी पारी में महज 278 गेंदों पर शानदार 196 रनों की पारी खेलने वाले ओली पोप को मैन ऑफ द मैच चुना गया।
ऐसा रहा मैच का हाल
इस मैच की शुरुआत में इंग्लैंड ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। इंग्लैंड की पूरी टीम पहले ही दिन 246 रनों पर सिमट गई। महज 64.3 ओवरों में 3.81 रन रेट से इंग्लैंड ने ये रन बनाए। कप्तान बेन स्टोक्स ने 88 गेंदों पर तेज तर्रार 70 रन बनाए। भारत की तरफ से जसप्रीत बुमराह ने 2 विकेट लिए, तो अक्षर पटेल ने भी दो विकेट लिए. वहीं रविंद्र जडेजा और आर अश्विन ने 3-3 विकेट लिए। इस तरह से भारतीय स्पिनरों ने 8 विकेट चटकाए।
भारतीय टीम ने पहली पारी में जोरदार शुरुआत की। यशस्वी जायसवाल ने 74 गेंदों पर 80 रन बनाए। केएल राहुल ने 86, रविंद्र जडेजा ने 87, श्रीकर भरत ने 41 और अक्षर पटेल ने 44 रन बनाए। भारतीय टीम ने कुल 436 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 190 रनों की बढ़त हासिल की। इंग्लैंड की तरफ से जो रुट ने पार्ट टाइम स्पिनर से कहीं बड़ी जिम्मेदारी निभाते हुए 4 विकेट झटके। वहीं, बाकी के स्पिनर महंगे साबित हुए। रेहान अहमद को 2, टॉम हर्टली को 2 विकेट मिले तो जैक लीच को एक विकेट मिला।
इसके बाद मैच में आया बदलाव
भारतीय टीम से 190 रनों से पिछड़ी इंग्लैंड की टीम ने दूसरी पारी में जोरदार बल्लेबाजी की और 102 ओवरों में 420 रन जोड़ दिए। ओली पोप ने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ अहम साझेदारियाँ करते हुए टीम के स्कोर को 420 रनों तक पहुँचाया। इसी स्कोर पर कुल 196 रन बनाकर ओली पोप आउट हो गए। इस तरह से भारतीय टीम के सामने कुल 231 रनों का लक्ष्य था।
स्पिन के जाल में फंसी भारतीय टीम
भारतीय टीम के लिए 231 रनों का लक्ष्य भारी साबित हुआ। कुल 8 बल्लेबाजों ने दोहरे अंक का आंकड़ा छुआ, लेकिन कोई भी बल्लेबाज 40 का आंकड़ा नहीं पार कर पाया। पूरी भारतीय टीम 202 रनों पर सिमट गई। जिस हर्टले को खतरा नहीं माना जा रहा था, उसने 7 विकेट लिए और भारतीय टीम को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। जो रूट और जैक लीच को एक-एक विकेट मिला। इस तरह से जिस स्पिन बॉलिंग पिच का जाल भारतीय टीम ने बुना, उसे उसी के घर में अंग्रेज टीम ने मात दे दी, वो भी टॉम हर्टली, रेहान अहमद जैसे नए स्पिनरों के दम पर, तो जैक लीच के घायल होने के बावजूद। हाँ, जो रूट ने अपने अनुभव का खूब फायदा उठाया और 5 विकेट लेकर इंग्लैंड की टीम को हमेशा मैच में बनाए रखा।
ऑस्ट्रेलिया को भी अपने घर में मिली हार
ऑस्ट्रेलियाई तेज गेदबाजी का खौफ सारी दुनिया में है। ऑस्ट्रेलियाई मैदानों में सबसे खतरनाक पिच गाबा की पिच को माना जाता है, जिस पर तेज गेंदबाजों की तूती बोलती है। इस मैदान पर मेहमान टीमों का शिकार अबतक ऑस्ट्रेलियाई टीम करती रही है। हालाँकि इस बार उसकी दवा उसे ही वेस्टइंडीज ने चखा दी। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के सामने चौथी पारी में जीत के लिए 216 रनों का लक्ष्य था। उसके बल्लेबाज एक समय 2 विकेट के नुकसान पर 113 रन बना चुके थे। यहाँ से अबतक चोट की वजह से बाहर रहे नए गेदबाज शेमार जोसेफ मैदान में आए और लगातार 11.5 ओवर की गेंदबाजी में 68 रन देकर 7 विकेट चटका लिए। ओपनर स्टीवन स्मिथ 91 रन बनाकर नाबाद रहे, लेकिन दूसरी ओर से सभी 10 विकेट गिर गए और ऑस्ट्रेलियाई टीम 8 रनों से पीछे रह गई।
भारत और ऑस्ट्रेलिया का हारना ये बताता है कि खेल के मैदान में कई बार अपनी ताकत ही अपनी हार की वजह बन जाती है, खासकर तब जब सामने वाली टीम आपकी टैक्टिस को जानती हो। एक तरफ इंग्लैंड ने भारतीय टीम के सामने 4 स्पिनर मैदान में उतारे, तो दूसरी तरफ वेस्टइंडीज ने अपने सभी तेज गेदबाजों को।
राजस्थान के अजमेर में स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पहले हिंदू मंदिर था, इसकी जाँच में असलियत सामने आ जाएगी। ‘महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष’ ने इसके लिए पत्र लिखा है। महाराणा प्रताप सेना का कहना है कि ये दरगाह हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया है, जिसकी ASI सर्वे बहुत जरूरी है। इस सर्वे से सारा दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। संगठन के अध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी जाँच की माँग की थी और यही माँग हमने मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी की है।
महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने ये पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया है। साथ ही अपना एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वो इस बारे में बता रहे हैं। राजवर्धन कहते हैं, “अजमेर दरगाह कोई दरगाह नहीं बल्कि एक हिंदू मंदिर है।” परमान ने दावा किया कि ‘महाराणा प्रताप सेना’ ने पहले इसे राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार के संज्ञान में लाया था। ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेसी सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। हाँ, अब बीजेपी सरकार से कार्रवाई की उम्मीद में ये पत्र फिर से लिखा जा रहा है।
राजवर्धन सिंह परमार ने कहा कि राजस्थान के कई जिलों में निकाली गई ‘जन जागरण यात्रा’ के दौरान कई लोगों ने इस माँग का समर्थन किया है। उन्होंने सीएम से अनुरोध किया कि वे आवश्यक निर्देश जारी करें और अयोध्या में बाबरी ढाँचे और वाराणसी में ज्ञानवापी ढाँचे की जाँच की तरह अजमेर के दरगाह की भी जाँच करवाएँ।
बता दें कि अजमेर में चिश्ती की दरगाह से कुछ सौ मीटर दूरी पर स्थित ढाई दिन के झोपड़ा को लेकर भी ऐसी ही माँग चल रही है। बीजेपी सांसद रामचरण बोहरा ने ढाई दिन का झोपड़ा को मूल स्वरूप में लाने के लिए केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन व पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जी किशन रेड्डी जी को पत्र भी लिखा था। ढाई दिन का झोपड़ा मूल रूप से विशालकाय संस्कृत महाविद्यालय (सरस्वती कंठभरन महाविद्यालय) हुआ करता था। यह ज्ञान और बुद्धि की हिंदू देवी माता सरस्वती को समर्पित मंदिर था।
जयपुर के सांसद रामचरण बोहरा ने केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी को लिखे पत्र में कहा, “ढाई दिन का झोपड़ा जो कि 12वीं सदी में महाराज विग्रहराज चौहान द्वारा देवालय और संस्कृत शिक्षण केंद्र के रूप में स्थापित किया गया था, उसे 1294 ई. में मोहम्मद गौरी के कहने पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने तोड़ दिया था। यह केंद्र वेद पुराणों का प्रसारक होने के साथ ही संस्कृति शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि वह जल्द ही कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के बॉडी डबल की जानकारी साझा करेंगे। इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गाँधी ने असम में अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान एक बॉडी डबल का इस्तेमाल किया था, जो बस में बैठा रहता है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोनितपुर जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, “मैं सिर्फ बोलता नहीं हूँ, मैं कुछ ही दिनों में बॉडी डबल का नाम, पता सब सामने लाऊँगा। बस कुछ दिन इन्तजार कीजिए।” उन्होंने कहा कि वह दो दिन के लिए डिब्रूगढ़ जा रहे हैं और वापस गुवाहाटी आकर राहुल गाँधी के बॉडी डबल के विषय में जानकारी देंगे।
हिमंता बिस्वा सरमा ने 25 जनवरी 2024 को आरोप लगाया था कि राहुल गाँधी अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा में एक बॉडी डबल लेकर चल रहे हैं, जिसका हुलिया और पहनावा उनके जैसा है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था, “जो व्यक्ति बस में सबसे आगे बैठा है और लोगों की ओर देख रहा है, वह शायद राहुल गाँधी नहीं है। बस के अंदर आठ लोगों के बैठने का एक कमरा है, राहुल गाँधी उसमें बैठते हैं।”
मोबाइल पर इंडिया टुडे एनई का ट्वीट दिखाते हुए उन्होंने कहा था, “जो सामने बैठा है वह राहुल गाँधी नहीं लगता है। वह दूर से राहुल गाँधी लगता है। मैंने यह देखा नहीं है, पर आप ट्वीट देख लीजिए। मुझे काॅन्ग्रेस के लोगों ने बताया है कि बस के अंदर आठ लोगों के बैठने का बहुत ज्यादा स्पेस है। ज्यादातर समय वे वहीं रहते हैं। तो बस के सामने कौन रहता है?”
हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गाँधी की न्याय यात्रा को लेकर और भी हमले किए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “जहाँ से राहुल गुजरेंगे वहाँ से कॉन्ग्रेस खत्म हो जाएगी, क्योंकि उनमें नेतृत्व करने वाला कोई गुण नहीं है। उनमें बहुत घमंड है। जहाँ पर वो पाँव रखेंगे, वह स्थान भाजपा के लिए सबसे बढ़िया हो जाएगा। वह भाजपा के स्टार प्रचारक हैं।”
उन्होंने नीतीश कुमार के इंडी गठबंधन से निकलने पर कहा, “हमने कहा था कि यह गठबंधन कम दिनों का है। यह ज्यादा दिन नहीं टिकेगा। इसमें वैचारिक मतभेद है और इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हराने के लिए बनाया गया था। आप एक गठबंधन सिर्फ इसी आधार पर नहीं बना सकते कि किसी का विरोध करना है।”
INDI गठबंधन का विसर्जन अब तय है। इस गठबंधन का कोई वैचारिक आधार नहीं था। इन लोगों का एक ही उद्देश्य था, आदरणीय मोदी जी को हराना। इनकी नकारात्मक राजनीति के बावजूद, माननीय प्रधान मंत्री श्री @narendramodi जी आज एक विश्व नेता बन गये हैं। pic.twitter.com/xzfECZhvQf
बता दें कि राहुल गाँधी इस समय भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाल रहे हैं। यह यात्रा मणिपुर से शुरू हुई है। राहुल की यह यात्रा 15 राज्यों में 80 जिलों से होते हुए गुजरेगी। अभी यह यात्रा असम से पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर चुकी है। इसके बाद बिहार जाएगी। इसका समापन 20 मार्च 2023 को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में होगा।
बिहार में तीन दिन से चल रही सियासी हलचल का रविवार (28 जनवरी, 2024) को अंत हो गया। जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है। राजभवन में बिहार के राज्यपाल राजेन्द्र आर्लेकर ने उन्हें मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
#WATCH | Nitish Kumar takes oath as Bihar CM for the 9th time after he along with his party joined the BJP-led NDA bloc. pic.twitter.com/ePGsqvusM3
नीतीश कुमार के साथ ही सरकार में शामिल हुई भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और विधायक विजय सिन्हा ने उप-मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। दोनों को भाजपा विधायक दल की तरफ से क्रमशः नेता एवं उपनेता चुना गया था। इनके अलावा कुछ मंत्रियों ने भी शपथ ली है। विजेंद्र यादव और सुमित सिंह राजपूत को भी मंत्री बनाया गया।
गठबंधन की सरकार में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी की पार्टी ‘हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा’ (HAM) भी शामिल हुई है। मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्रियों के अलावा भाजपा की तरफ से डॉ प्रेम कुमार ने भी बिहार सरकार में मंत्री के तौर पर शपथ ली है। जदयू के कोटे से विजय चौधरी और श्रवण कुमार ने मंत्रिपद की शपथ ली है। जीतन राम माँझी के बेटे संतोष सुमन को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। इसके अलावा निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ ली है।
#WATCH | Bihar: JDU's Vijay Kumar Chaudhary takes oath as a minister in new Nitish Kumar-led government pic.twitter.com/DZu3WkfXqw
नीतीश कुमार ने 9वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। वह पहली बार वर्ष 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन यह कार्यकाल मात्र 7 दिनों तक रहा था। इसके बाद वह वर्ष 2005 में सत्ता में आए थे। वह 2014 तक मुख्यमंत्री रहे थे। 2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था। हालाँकि, 2015 में वह वापस से मुख्यमंत्री बन गए थे। तब से लगातार वह मुख्यमंत्री हैं। वह 2005 से अब तक भाजपा और राजद, दोनों के समर्थन से मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा और लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान भी शामिल हुए। इसके अलावा बिहार के भी कई बड़े नेता भी इस शपथग्रहण समारोह में शामिल हुए। गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने आज ही सुबह राजद की सरकार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था। उन्होंने राज्यपाल को भंग करने की सिफारिश भी की थी। नीतीश कुमार ने इसके बाद भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई है।
बिहार में बनी एनडीए सरकार राज्य के विकास और यहां के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। @NitishKumar जी को मुख्यमंत्री और सम्राट चौधरी जी एवं विजय सिन्हा जी को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर मेरी बहुत-बहुत बधाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नई सरकार को बधाई देते हुए कहा, “बिहार में बनी NDA सरकार राज्य के विकास और यहाँ के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री और सम्राट चौधरी एवं विजय सिन्हा को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर मेरी बहुत-बहुत बधाई। मुझे विश्वास है कि यह टीम पूरे समर्पण भाव से राज्य के मेरे परिवारजनों की सेवा करेगी।”
आरोप है कि ‘छत्रपति सम्भाजी’ फिल्म को सेंसर बोर्ड के अधिकारी सईद रबी हाशमी ने प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया है। यह फिल्म 26 जनवरी, 2024 को रिलीज होनी थी लेकिन इसे सेंसर बोर्ड ने प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया। इसको लेकर अब निर्माता ने सेंसर बोर्ड पर आरोप लगाए हैं कि लिखित सबूत दिए जाने के बाद भी प्रमाण पत्र नहीं दिया गया।
छत्रपति सम्भाजी फिल्म के निर्माता निर्देशक राकेश सुबेसिंह दुलगज ने कहा है कि उन्होंने सेंसर बोर्ड के सामने अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग भी करवा दी थी लेकिन इसके बाद भी उन्हें 26 जनवरी तक प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। इसके लिए सेंसर बोर्ड के मुंबई क्षेत्राधिकारी सईद रबी हाशमी ने औरंगजेब के खिलाफ सबूत दिखाने की बात कही।
दुलगज ने बताया है कि यह फिल्म पिछले 8 साल से बन रही है। फिल्म मराठा शासक छत्रपति सम्भाजी के जीवन के ऊपर बनी है। यह फिल्म मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज होनी थी। इसको लेकर दुलगज ने सेंसर बोर्ड के समक्ष अपनी फिल्म के प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिया था। उन्होंने बताया कि 12 जनवरी, 2024 को सेंसर बोर्ड से फ़ोन आया कि अगले दिन उनकी फिल्म की स्क्रीनिंग रखी गई है। इसके बाद 13 जनवरी की सुबह उन्होंने पूरी फिल्म अधिकारियों को दिखा दी।
फिल्म देखने के बाद यहाँ के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें यू/ए प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। उनसे कहा गया कि 25 जनवरी, 2024 तक उन्हें प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा। इसको लेकर दुलगज ने अपनी फिल्म की रिलीज डेट 26 जनवरी, 2024 को रख दी। हालाँकि, उन्हें प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। दुलगज ने कहा कि उनसे जो बदलाव के लिए कहा गया था वह उन्होंने कर दिए थे लेकिन फिर भी उनकी फिल्म को रोका गया।
दुलगज ने कहा कि मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय में नए आए अधिकारी सईद रबी हाशमी ने इस बात को लेकर सबूत दिखाने की माँग की कि क्या औरंगजेब ने छत्रपति सम्भाजी पर इस्लाम कबूलने का दबाव डाला था। इसको प्रमाणित करने वाली किताबें दुलगज से सेंसर बोर्ड में जमा कराने को कहा गया है।
गौरतलब है कि मुग़ल शासक औरंगजेब ने मराठा छत्रपति सम्भाजी महाराज को बंधक बनाकर कई दिनों तक यातनाएं दी थी और उन पर इस्लाम कबूलने का दबाव डाला था। जब उन्होंने इस्लाम कबूलने से मना कर दिया तो उन्हें मार दिया गया था। छत्रपति सम्भाजी के साथ हुई बर्बरता के विषय में यहाँ क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा उनकी जन्मभूमि पर बनी मंदिर में हो गई। इसको लेकर दुनिया भर के हिन्दू उल्लासित हैं। उन रामभक्तों की आत्मा को भी शांति मिल रही होगी, जिन्होंने मुगल से लेकर मुलायम सिंह यादव के काल तक इसके लिए अपने प्राणों की आहुति दी। ऑपइंडिया की टीम ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में कई ऐसे बलिदानियों और घटनाओं से दुनिया को परिचित कराया, जिन्हें लोग या तो भूल चुके थे या वामपंथी इतिहासकारों ने साजिशन उन्हें स्थान नहीं दिया।
अयोध्या और उसके आसपास के क्षेत्र में अपने ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान ऑपइंडिया ने जब रामजन्मभूमि और इसे जुड़े मामलों की पड़ताल शुरू की तो हमें कई ऐसी जानकारियाँ मिलीं, जो लोगों को नहीं पता थीं। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हमें मुगलों की क्रूरता कई जानकारियाँ मिलीं। इनमें गोंडा नरेश राजा देवीबख्श सिंह और भीटी के राजा जयदत्त सिंह के बलिदान के साथ-साथ मौलाना अमीर अली द्वारा छेड़ा गया जेहाद और 1850 के आसपास अयोध्या में हुआ अभूतपूर्व दंगा भी शामिल है।
राजा देवीबख्स ने ब्रिटिश काल में छेड़ा युद्ध
इसके पहले वाली स्टोरी में हमने रामजन्मभूमि की रक्षा में अपने 80 हजार सैनिकों के साथ बलिदान हुए भीटी नरेश महताब सिंह के बारे में बताया था। उस स्टोरी में हमने यह भी बताया था कि मीर बाकी ने राजा महताब सिंह और उनके सैनिकों के खून से गारे बनाकर मस्जिद की नींव रखी थी। राजा महताब सिंह के बारे में और जानकारी जुटाई तो पता चला कि उनकी अगली पीढ़ी भी रामजन्मभूमि की रक्षा में वीरगति को प्राप्त हो गई थी।
भीटी नरेश राजा महताब सिंह राम मंदिर को बचाते हुए सन 1527-28 के आसपास वीरगति को प्राप्त हो गए थे। राजा महताब सिंह की वीरगति प्राप्त करने के लगभग 300 साल बाद उन्हीं के वंशज राजा जयदत्त सिंह रामजन्मभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए थे। यह लड़ाई 1847 से 1857 के बीच हुई थी। इसी दौरान गोंडा के राजा देवीबख्श सिंह भी राम मंदिर के लिए लड़े और वहाँ राम चबूतरा बनवाया।
ऑपइंडिया ने राजा देवीबख्श सिंह के सेनापति रहे गुलाब सिंह बिसेन की 5वीं पीढ़ी के वंशज जितेंद्र सिंह बिसेन से बात की। जितेंद्र सिंह बिसेन के मुताबिक, ब्रिटिश फ़ौज में वो तमाम लड़ाके शामिल हो चुके थे, जो कभी मुगल फ़ौज के लिए मार-काट करते थे। मुगलों की कमजोरी को भाँपते हुए तत्कालीन गोंडा नरेश राजा देवीबख्श सिंह द्वारा विवादित ढाँचे पर हमला कर दिया गया था। इस समय तक रामजन्मभूमि पूरी तरह से मुगलों के कब्ज़े में थी।
हालाँकि, रामभक्त छिटपुट हमले जारी रखे हुए थे और जन्मभूमि को वापस लेने के प्रयास कर रहे थे। इस दौरान अवध की गद्दी पर नवाब वाजिद अली शाह बैठा था। राजा देवीबख्श सिंह के हमले से वाजिद अली और उसकी फ़ौज बुरी तरह से पराजित हुई थी। आखिरकार राजा देवीबख्श सिंह की सेना ने रामजन्मभूमि के अंदर घुसने का रास्ता बना लिया। साथ ही विजय स्वरूप विवादित ढाँचे के पास एक राम चबूतरा बनवा दिया था।
जेहाद के लिए निकला था मौलवी अमीर अली
जितेंद्र सिंह आगे बताते हैं कि राम चबूतरा बनने और वाजिद अली शाह के हार की जानकारी मिलते ही आसपास के मुस्लिम जमींदार नाराज हो गए। इन्हीं में से एक था अमेठी का मौलवी अमीर अली। अमीर अली अपने साथ मुगलों की एक टुकड़ी लेकर अयोध्या कूच कर गया। वह रामजन्मभूमि से हिन्दुओं को पूरी तरह से बेदखल करते हुए राम चबूतरे को ध्वस्त करना चाहता था। इस समय तक हिन्दू भी रामजन्मभूमि पर पूजा-पाठ शुरू कर चुके थे।
मौलवी अमीर अली किसी भी हाल में ये पूजा-पाठ बंद करवाना चाहता था। उसके साथ कुछ और मुस्लिम जमींदार भी मिलकर अयोध्या की तरफ बढ़ चले। इधर राजा देवीबख्श सिंह अंग्रेजों से लड़ाई लड़ते हुए नेपाल सीमा की ओर तराई तक चले गए थे। वो जीवन भर अंग्रेजों के हाथ नहीं लगे और अंतिम सांस उन्होंने नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहकर युद्ध लड़ते हुए ली थी।
अंग्रेजों ने उनके ठिकानों और सहयोगियों को खोज-खोज कर खत्म करना शुरू कर दिया था। आज भी राजा देवीबख्श सिंह के नाम पर गोंडा में क्रांति उपवन पार्क बना हुआ है। इस पार्क में उनका और उनके साथ 1857 की क्रान्ति में बलिदान हुए अन्य योद्धाओं का स्मारक बना हुआ है। इसी स्मारक में जितेंद्र सिंह बिसेन के पूर्वज गुलाब सिंह का भी नाम लिखा हुआ है।
गोंडा का क्रांति उपवन, जहाँ बना है राजा देवी बख्श सिंह और गुलाब सिंह का स्मारक
जितेंद्र सिंह बिसेन आगे चलकर हिन्दू महासभा से जुड़ गए और अयोध्या के राम मंदिर की लड़ाई लड़ी। रामलला विराजमान का केस हिन्दू महासभा ने ही लड़ा था। जितेंद्र सिंह बिसेन इसे अपना सौभाग्य बताते हैं कि उनके पुरखों द्वारा जलाई गई अलख का समापन होते हुए उन्होंने न सिर्फ स्वयं देखा, बल्कि उसमें अपने पूर्वजों की तरह अधिकतम सहयोग भी किया।
भीटी के राजा जयदत्त हुए बलिदान
राजा जयदत्त के वंशज प्रणव प्रताप सिंह ऑपइंडिया को बताते हैं कि जब मुगल रियासतदारों और मौलवियों की फ़ौज अयोध्या की तरफ बढ़ी तब इसकी जानकारी मिलते ही आसपास के हिन्दू राजा भी एकजुट होने लगे। उन्होंने अयोध्या धर्मक्षेत्र से दूर घेरा बना लिया। यह समय काल 1850 के आसपास का बताया जा रहा है। उस समय तक भारत पर अंग्रेजों ने पूरी तरह आधिपत्य स्थापित कर लिया था।
इस घेरे को तोड़ने का प्रयास मौलवी अमीर अली ने रौनाही के पास किया। यहाँ मोर्चा मीर बाकी से लड़कर राम मंदिर के लिए पहला बलिदान देने वाले भीटी नरेश राजा महताब सिंह के वंशज राजा जयदत्त सिंह ने सँभाल रखा था। राजा जयदत्त सिंह ने अमीर अली का सामना बहादुरी से किया और युद्धभूमि में वीरगति को प्राप्त हो गए। कहा जाता है कि इसमें अमीर अली भी अपनी फ़ौज सहित ढेर हो गया था।
राजा जयदत्त की वीरता पर आज भी अवध क्षेत्र में लोकगीत गाए जाते हैं। कवीन्द्र लक्ष्मण दास ने लिखा है- अवध विगारन हेतु जब, जवन जुरे चहुँ आय। छोड़ि यात्रा कर लियो, कीन्हों समर सुभाय। कुश पैंती सब छाँड़ि लिए, खड्ग भवानी दत्त। अली अमारे सो भिरयो, समर सूर जयदत्त।
अर्थात – जब अयोध्या को बर्बाद करने के लिए भीड़ जुटी थी, तब हिन्दू राजा तीर्थयात्रा आदि को छोड़कर युद्ध के मैदान में आ गए थे। हाथ में ली हुई पूजा-पाठ की सामग्री को एकतरफ रखकर तब सम्राटों ने तलवारें उठा ली थीं। इन्हीं में से एक राजा योद्धा जयदत्त थे, जो अमीर अली से लड़े थे और शहीद हो गए थे।
राजा जयदत्त के जर्जर महल में आज भी दिखती है धार्मिकता
बाहर लड़ रहीं थीं सेनाएँ, अंदर हो रहा था दंगा
फैज़ाबाद गजेटियर के मुताबिक, जब मुस्लिम जमींदार और मौलवियों के साथ क्षत्रिय राजाओं की सेनाएँ लड़ रही थीं, ठीक उसी समय फैज़ाबाद शहर और राम मंदिर के आसपास हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच दंगा हो गया था। इतिहासकार कनिंघम बताते हैं कि अवध क्षेत्र में तब तक इतना बड़ा दंगा नहीं हुआ था। इस दंगे में हजारों लोगों की जान चली गई थीं।
कट्टरपंथी मुस्लिम किसी भी हाल में राम चबूतरे को तोड़ने पर आमादा थे। वहीं, हिन्दू पक्ष हर हाल में जन्मभूमि पर अपने पूजास्थल की रक्षा करने में जुटा था। दंगों के दौरान मुस्लिमों ने हिंदुओं महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी निशाना बनाया, जबकि हिंदुओं ने मुस्लिम महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को हाथ तक नहीं लगाया। दंगों में अयोध्या के संतों को भी निशाना बनाया गया था। हिंसा का यह दौर 1853 से 1859 तक चला था।
तब अंग्रेेज 1857 की क्रान्ति के दमन में लगे थे, इस मामले से दूर रहे। जब उन्होंने राष्ट्रव्यापी स्वतंत्रता संग्राम का दमन कर लिया, तब उन्होंने अयोध्या में हस्तक्षेप किया। तब तत्कालीन अंग्रेज अधिकारियों ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। जन्मभूमि के आसपास ब्रिटिश फौज तैनात कर दी गईं। अंत में राजाओं और हिन्दू जनता के बलिदान से राम चबूतरा सुरक्षित बचा रहा और वहाँ पूजा-पाठ जारी रहा।
अगली रिपोर्ट में हम आपको बताएँगे कि किस प्रकार से भीटी नरेश राजा महताब सिंह द्वारा राम मंदिर की रक्षा के लिए किए गए पहले बलिदान से नाराज होकर मुगल फ़ौज ने उनके राज्य में अत्याचार किया था।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए भक्तों का अगाध प्रेम और भक्ति देखते ही बन रही है। अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए जब से भूमि पूजन हुआ है, सिर्फ तब से अब तक रामलला को 4500 करोड़ रुपए से अधिक का दान मिल चुका है। भक्तों ने देश-दुनिया से रामलला के लिए जमकर प्यार लुटाया है। मंदिर खुलने के बाद महज कुछ दिनों में ही अब तक करोड़ों की संपत्ति रामलला को मिल चुकी है।
श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि मंदिर खुलने के बाद से तो रामलला के प्रति भक्तों का प्रेम और भी बढ़ गया है। हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। मंदिर के खुलने के पहले जहाँ प्रतिदिन औसतन 20-30 हजार श्रद्धालु आते थे, वहीं अब यह संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है। रामलला के लिए आए दान में बड़ी राशि ऑनलाइन दान के माध्यम से दी गई है। इसके अलावा, भक्तों ने चेक, नकद और सोने-चाँदी के रूप में भी दान दिया है।
भूमि पूजन के महज एक माह में 3550 करोड़ की राशि
प्रकाश गुप्ता ने बताया कि राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद में जो निधि समर्पण अभियान चलाया गया था, उस एक महीने के अभियान में लगभग 3550 करोड़ रुपये का दान आ गया था। उसी दान से बहुत सारे निर्माण कार्य हो रहे हैं। रामलला के लिए आए दान का उपयोग मंदिर के निर्माण, मंदिर के पास यात्री सुविधाओं के विकास और रामायण सर्किट के विकास के लिए किया जाएगा।
शुरुआती चार दिनों में करोड़ का दान
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही आम लोगों के लिए खोले जाने के बाद से ही राम मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। शुरुआती सिर्फ चार दिनों में ही 7 करोड़ 8 लाख रुपए दान में आए। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, रामलला दर्शन के प्रथम दिन 2 करोड़ 90 लाख, 24 जनवरी को 2 करोड़ 43 लाख, 25 जनवरी को 8 लाख 50 हजार वहीं गणतंत्र दिन 26 जनवरी के दिन एक करोड़ 15 लाख रुपए दान में मिले हैं।
भक्तों का मानना है कि रामलला के मंदिर निर्माण से देश में अमन, शांति और समृद्धि आएगी। इसलिए वे अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दे रहे हैं। रामलला के दान से प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर निर्माण, मंदिर के आसपास के विकास कार्यों और मंदिर के रखरखाव के लिए किया जाएगा। यह दान भक्तों के प्रेम और आस्था का एक अनूठा उदाहरण है। इस दान से रामलला के प्रति भक्तों के प्रेम और भक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है। रामलला के भक्तों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि भगवान राम भारत के लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर निकले हुए हैं। इस यात्रा के साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी का दुर्भाग्य भी खुलकर सामने आ गया है। जिस I.N.D.I. गठबंधन के सहारे सत्ताप्राप्ति का सपना कॉन्ग्रेस देखने लगी थी, उस सपने को ग्रहण भी लग चुका है। पश्चिम बंगाल में यात्रा घुसी ही थी कि दीदी ने आँख दिखा दी और पश्चिम बंगाल में लगभग एकतरफा तरीके से चुनाव लड़ने का इशारा कर दिया, तो अगले पड़ाव बिहार में जिस गठबंधन को बेस बनाने की कोशिश हुई, उसका प्लेटफार्म ही उखड़ गया।
जी हाँ, जिस नीतीश कुमार ने बीजेपी के खिलाफ इस गठबंधन को खड़ा करने में पूरी ताकत झोंक दी थी, वही नीतीश कुमार इस गठबंधन से निकल गए हैं। बिहार मे NDA की सरकार आ गई है। पर इतने बड़े बदलाव आखिर हुए कैसे? अब जो जानकारियाँ निकल कर सामने आ रही हैं, वो बता रही हैं कि इन सबके पीछे राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी की अपरिपक्वता है।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ में कूमी कपूर का एक लेख छपा है। इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि कैसे राहुल गाँधी का ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ ही कॉन्ग्रेस की जड़ में मट्ठा साबित हुआ। उसमें भी कॉन्ग्रेस के रणनीतिकारों ने ऐसी गलतियाँ की कि पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी को ही शर्मिंदा होना पड़ा।
उत्तर प्रदेश में 13 साल पहले स्वर्ग सिधारे नेता के नाम पर सीट की माँग
कॉन्ग्रेस पार्टी की नजर यूपी फतह पर थी। यहाँ वो समाजवादी पार्टी के साथ I.N.D.I. गठबंधन में है। इसके विस्तार की कोशिश में वो BSP से भी गठबंधन करना चाहती थी। समाजवादी पार्टी ने इसके लिए दो-टूक मना कर दिया। इसके बाद समाजवादी पार्टी पर दबाव बनाने के लिए कॉन्ग्रेस की तरफ से पहले तो 40 सीटों की माँग की गई, फिर मामला तीस पर आया और आखिर में बीस पर। यहाँ पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक ऐसी सीट पर दावेदारी उस नेता के नाम पर कर दी, जिसे दुनिया से गए 13 साल का लंबा वक्त बीत चुका है।
फिर क्या था, सपा ने इसके बाद कॉन्ग्रेस को 11 सीटों का झुनझुना थमाने का ऐलान कर दिया। बताइए, कि जिस नेता के निधन पर कॉन्ग्रेस की हरियाणा सरकार ने 3 दिनों का राजकीय शोक 2010 में घोषित किया था, उसके नाम पर लोकसभा सीट माँगते समय कॉन्ग्रेस को कुछ याद भी नहीं था? इस घटना ने सपा को ये साबित करने का मौका दे दिया कि कॉन्ग्रेस पार्टी न तो जमीन पर है और न ही उसके नेता जमीन पर रहते हैं।
इस लेख को एक्स पर साझा कर वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने बताने की कोशिश की है कि कैसे कॉग्रेस पार्टी को यूपी, बिहार, पंजाब और दिल्ली में लग रहे झटकों के पीछे खुद कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी का ‘हाथ’ ही नहीं, सबकुछ है। उन्होंने लिखा, “दस साल पहले स्वर्ग सिधारे नेता के लिए कॉन्ग्रेस समाजवादी पार्टी से माँग रही थी सीट? ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में कूमी कपूर ने अपने पाक्षिक स्तंभ ‘इनसाइड ट्रैक’ में लिखा है कि कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश की बांसगाँव सीट से महावीर प्रसाद को खड़ा करना चाहती थी। शुरुआती बातचीत में कॉन्ग्रेस की ओर से उनका नाम रखा गया। इस पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने याद दिलाया कि महावीर प्रसाद जी का दस साल पहले निधन हो चुका है। इसके बाद बातचीत वहीं ख़त्म हो गई और अब सपा ने कॉन्ग्रेस को ग्यारह सीटें देने का एकतरफ़ा ऐलान कर दिया। इसी तरह राहुल गाँधी ने अरविंद केजरीवाल से कहा कि इससे पहले कि वे न्याय यात्रा पर जाएँ और केजरीवाल जेल, कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी को सीटों का बँटवारा कर लेना चाहिए।“
दस साल पहले स्वर्ग सिधारे नेता के लिए कॉंग्रेस समाजवादी पार्टी से माँग रही थी सीट?
आज इंडियन एक्सप्रेस में कूमी कपूर ने अपने पाक्षिक स्तंभ इनसाइड ट्रैक में लिखा है कि कॉंग्रेस उत्तर प्रदेश की बांसगांव सीट से महावीर प्रसाद को खड़ा करना चाहती थी।
I.N.D.I. गठबंधन की आखिरी बैठक के बाद से इस गठबंधन में दरार काफी चौड़ी हो गई। दरअसल, नीतीश कुमार, जिन्होंने इस गठबंधन को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई, अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी की वजह से कॉन्ग्रेस ने उन्हें किनारे लगा दिया। उन्हें संयोजक पद पर तब बैठाने की पेशकश की गई, जब अध्यक्ष पद पर पहले से ही मल्लिकार्जुन खड़गे की नियुक्ति कर दी गई। मायने साफ है, नीतीश कुमार जिस उम्मीद के साथ इस गठबंधन को खड़ा कर रहे थे, उसी में उन्हें ‘छोटा’ बना दिया गया। वहीं, अरविंद केजरीवाल के सामने राहुल गाँधी ने ऐसा मजाक कर दिया कि अरविंद केजरीवाल उखड़ ही गए।
इस लेख के मुताबिक, राहुल गाँधी ने ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) के साथ सीट समझौते में ये कहकर तेजी लाना चाहते थे कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर निकलने और ‘अरविंद केजरीवाल के जेल जाने’ से पहले ही सीटों का समझौता हो जाए। ये बात अरविंद केजरीवाल को नागवार गुजरी। हालाँकि, राहुल गाँधी ने अपने कथित ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ की आड़ में ये सब बोला, लेकिन संदेश जहाँ जाना था, वो चला ही गया। इस बात को ANI की शेफ एडिटर स्मिता प्रकाश ने अपने ट्वीट में हाईलाइट भी किया है।
नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल.. ये ऐसे नेता हैं, जो बीजेपी विरोध की धुरी बन सकते थे। ये नेता अपने राज्यों में बेहद मजबूत भी हैं। हालाँकि ये साफ है कि ये नेता धीरे-धीरे इस इंडी गठबंधन से बाहर निकल ही चुके हैं। ऐसे में यदि अन्य दलों ने भी INDI गठबंधन छोड़ने का निर्णय लिया, तो यह भाजपा के लिए 2024 के लोकसभा चुनावों में फायदेमंद साबित हो सकता है। हालाँकि इससे क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ भी सकता है, लेकिन एनडीए के एकजुट और ताकतवर रहकर चुनाव जीतने की सूरत में उनके लिए भी आगे की डगर चुनौतीपूर्ण होगी।
ऐसे में जिन राज्यों में हाल-फिलहाल विधानसभा चुनाव होने हैं, वहाँ भी क्षेत्रीय पार्टियों को दबदबा बरकरार रखने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।