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विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी बिहार के नए डिप्टी CM, 2 आक्रामक चेहरों को BJP ने किया आगे: सामान्य वर्ग को भी साधा, ‘लव-कुश’ भी पाले में

बिहार में एक बार फिर से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। वहीं उप-मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा ने इस बार 2 चौंकाने वाले चेहरों के नाम आगे किए हैं। विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष रहे विजय कुमार सिन्हा को डिप्टी CM बनाया गया है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी भी डिप्टी CM बनने जा रहे हैं। साफ़ है, 2 आक्रामक चेहरों को आगे कर के भाजपा नीतीश कुमार का भी नकेल कस के रखेगी। दोनों ही नेता अपनी सक्रियता और जनता से कनेक्शन के कारण भी जाने जाते हैं।

बता दें कि नीतीश कुमार ने राजद का साथ छोड़ कर भाजपा के साथ हाथ मिलाया है। इस्तीफा देकर उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री पद का शपथ लेने की योजना बनाई। वो अपने पुरानी साथी भाजपा के पास लौट आए हैं। उधर राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने ‘कूड़ा फिर से गया कूड़ेदानी में’ लिख कर नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। शाम के 5 बजे शपथग्रहण समारोह होगा। वहीं जदयू नेता KC त्यागी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस ने I.N.D.I. गठबंधन को हड़पने की कोशिश की।

विजय कुमार सिन्हा 2010 से लखीसराय विधानसभा क्षेत्र से जीतते रहे हैं और वहाँ उनका खासा प्रभाव है। भूमिहार समाज से आने वाले विजय सिन्हा को उप-मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही भाजपा सवर्णों को भी साधेगी। पिछड़ों के लिए चल रहीं मोदी सरकार की योजनाओं का भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा। विजय कुमार सिन्हा इससे पहले भी मंत्री रहे हैं। तिलकपुर में जन्मे विजय सिन्हा 56 वर्ष के हैं। बतौर स्पीकर भी सदन में उनके रुख की अक्सर चर्चा होती रहती थी।

वहीं सम्राट चौधरी के जरिए भाजपा लव-कुश समीकरण को अपने पक्ष में करेगी। कुर्मी समाज से आने वाले नीतीश कुमार और कोइरी समाज के उपेंद्र कुशवाहा भी भाजपा के साथ हैं। इसी समाज से सम्राट चौधरी भी आते हैं, जिनके पिता शकुनि चौधरी का मुंगेर और खगड़िया जिलों में कई दशकों तक प्रभाव रहा है। सम्राट चौधरी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। उससे पहले वो राबड़ी देवी की सरकार और नीतीश कुमार की सरकार में भी मंत्री रहे हैं।

बिहार की गिर गई डेढ़ साल पुरानी सरकार, नीतीश कुमार ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा: भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की तैयारी, 9वीं बार लेंगे सीएम पद की शपथ

बिहार में पिछले तीन दिनों से जारी उठा-पटक के बाद अब राजनीतिक स्थिति लगभग साफ हो गई है। महागठबंधन से अलग होने का निर्णय ले चुके नीतीश कुमार राजभवन पहुँचे और वहाँ राज्यपाल से मुलाकात करके उन्होंने आज रविवार (28 जनवरी 2024) को अपना इस्तीफा सौंप दिया। कहा जा रहा है कि वे भाजपा के साथ मिलकर आज ही राज्य में सरकार बनाएँगे।

इस्तीफा देने के नीतीश कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं काम कर रहा था, लेकिन मुझे काम नहीं करने दिया जा रहा था। इससे लोगों को दुख हो रहा था। हमने अपने लोगों, पार्टी की राय को सुना और इसलिए आज इस्तीफा दे दिया। जो सरकार थी, वो समाप्त कर दिया।” उन्होंने आगे कहा, “आज अन्य पार्टियाँ जो पहले साथ में थीं वो तय करेंगी। आगे जो होगा वो देखिएगा।”

बिहार के राजभवन से राज्यपाल के साथ नीतीश कुमार की एक तस्वीर जारी की गई है। इसके साथ ही लिखा गया है, “माननीय राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया तथा वैकल्पिक व्यवस्था होने तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करने को कहा।”

नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के नई सरकार के गठन की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि JDU विधायक दल की बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने भाजपा के एक शीर्ष नेता से फोन पर बात की। इस बीच राजभवन में शपथ ग्रहण की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। नीतीश कुमार आज ही नौंवी बार बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे।

सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायकों की बैठक में कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ रहना अब मुश्किल है और इस्तीफे का वक्त है। नीतीश कुमार के इस फैसले से राजद में अफरा-तफरी का माहौल है।

उधर, नीतीश कुमार को समर्थन देकर साथ में सरकार बनाने जा रही भाजपा ने अपने विधायकों के साथ बैठक शुरू कर दी है। इसमें भाजपा के विधायकों से समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। थोड़ी देर में भाजपा के विधायकों को मुख्यमंत्री आवास ले जाया जाएगा और वहाँ NDA विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को नेता चुना जाएगा।

इस घटनाक्रम से राजद हक्का-बक्का है। राजद के मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “अब तो जनता भी कह रही है कि देखा है पहली बार ऐसी पलटीमार सरकार। नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी यादव जब सरकार में उपमुख्यमंत्री बनें तो इन 15 महीनों के कामों को कोई नहीं भुला सकता। यह हमारी उपलब्धि है। आगे जो भी होगा, उसका सामना किया जाएगा।”

वहीं, NDA के सहयोगी और राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD) के प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा, “आज बिहार के लिए खास दिन है। नीतीश कुमार को आरजेडी को तरफ से गालियाँ दी जा रही थीं। मैंने कहा था की नीतीश कुमार अगर ज्यादा दिन आरजेडी के साथ रहे तो उनकी उम्र कम हो जाएगी। हम एनडीए के साथ हैं।”

 

रामलला की मूर्ति के लिए पत्थर भेजने वाले पर जुर्माना, हिंदुओं ने की कई गुने भरपाई, भाजपा सांसद प्रताप सिंह भी करेंगे सहायता

रामलला की प्रतिमा के लिए पत्थर भेजने वाले ठेकेदार श्रीनिवास नटराज पर कर्नाटक सरकार ने जुर्माना लगा दिया था। उनको यह जुर्माना भरने के लिए पत्नी के गहने भी गिरवी रखने पड़े थे। अब श्रीनिवास की कई लोगों ने मदद की है। उन्हें इस जुर्माने का 4-5 गुना ज्यादा पैसा मिल गया है। मैसुरु के सांसद प्रताप सिम्हा ने बताया है कि वह भी एक-दो दिन के भीतर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से ₹80,000 की सहायता ठेकेदार श्रीनिवास को देंगे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए मैसुरु सांसद प्रताप सिम्हा ने बताया, “ठेकेदार श्रीनिवास ने पत्थर अयोध्या में रामलला की मूर्ति बनाने के लिए भेजा था। इसके लिए उनके पास मैसुरु के खनन और भूगर्भ विभाग की अनुमति नहीं थी। उन्होंने पत्थर दलित किसान रामदास के खेत से निकलवा कर सीधा अयोध्या भेज दिया था। मैसुरु के खनन और भूगर्भ विभाग ने इस कारण से उन पर ₹80,000 का जुर्माना लगाया था जो कि उन्होंने भर दिया था।”

आगे सांसद प्रताप सिम्हा ने बताया, “उन पर लगे जुर्माने की खबर सामने आने के बाद कई लोगों ने ठेकदार श्रीनिवास की सहायता की है। श्रीनिवास को अब तक लगभग ₹4-5 लाख स्वेच्छा से लोगों ने दिए हैं। उन्हें कन्नड़ भाषा के लिए काम करने वाले एक संस्थान ने सम्मानित भी किया और उन्हें धनराशि भी दी। इसके अलावा लोगों ने आपस में पैसा मिलाकर भी श्रीनिवास को हुए नुकसान की पूर्ति कर दी है।” सांसद प्रताप सिम्हा ने भाजपा द्वारा भी ठेकेदार श्रीनिवास की सहायता किए जाने को लेकर जानकारी दी है।

ऑपइंडिया ने उनसे पूछा कि क्या वह निजी स्तर पर भी श्रीनिवास की सहायता कर रहे हैं? इस पर उन्होंने कहा, “हाँ, उन्हें पार्टी (भाजपा) की तरफ से भी जुर्माने की राशि को लेकर सहायता दी जा रही है। हम उन्हें एक-दो दिन के भीतर ₹80,000 की सहायता पार्टी की तरफ से देंगे।”

गौरतलब है कि अयोध्या के राम मंदिर में स्थापित की गई रामलला की श्यामल प्रतिमा के लिए कर्नाटक के मैसुरु के हरोहल्ली-गुज्जेगौदानपुरा गाँव के एक दलित किसान रामदास के खेत से पत्थर भेजा गया था। यह पत्थर स्थानीय ठेकेदार श्रीनिवास ने यहाँ से खनन करके मूर्तिकारों को भेजा था। यह पत्थर मूर्तिकार अरुण योगिराज को पसंद आया था।

हाल ही में यह खबर आई थी कि श्रीनिवास पर मैसुरु के खनन और भूगर्भ विभाग ने पत्थर के खनन करने के सम्बन्ध में अनुमति ना लेने के कारण ₹80,000 का जुर्माना लगा दिया था। श्रीनिवास को यह जुर्माना भरने के लिए अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखने पड़े थे। यह खबर जब बाहर आई तो लोगों ने कर्नाटक सरकार की आलोचना की और श्रीनिवास की सहायता करने का निर्णय लिया। मैसुरु के सांसद प्रताप सिम्हा ने भी ऐलान किया कि वह श्रीनिवास की सहायता करेंगे। इसके बाद से लगातार श्रीनिवास को सहायता पहुँचाई जा रही है।

जिन किसान रामदास के खेत से यह पत्थर निकला था, वह किसान रामदास अब अपने ही खेत में रामलला का एक मंदिर बनवा रहे हैं। उन्होंने इसके लिए अपने खेत का एक हिस्सा दान कर दिया था। इस मंदिर का शिलान्यास 22 जनवरी, 2024 (राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा) के दिन ही किया गया था।

‘मुस्लिम पक्ष ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपे और मस्जिद दूसरी जगह ले जाए’: VHP बोली- ASI रिपोर्ट में मंदिर तोड़ने की बात, शिवलिंग पूजा की मिले अनुमति

काशी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे की ASI रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद मुस्लिम पक्ष पर नैतिक दबाव बन गया है। रिपोर्ट में हिंदुओं की धार्मिक चिह्नों, कलाकृतियों और देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियाँ मिलने की बात सामने आई है। अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने साफ शब्दों में कहा है कि मुस्लिम पक्ष को ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंप देना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने कहा कि ज्ञानवापी ढाँचे से ASI द्वारा जुटाए गए सबूत से पुष्टि होती है कि मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद बनवाया गया है। उन्होंने कहा कि मंदिर की प्राचीन संरचना का एक हिस्सा आज भी मौजूद है।

आलोक कुमार ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने उस पूरे ढाँचे का वैज्ञानिक और पूरी गहराई से अध्ययन करके अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में ASI ने ढाँचे से सारे प्रमाण इकट्ठा किए हैं और उन सबका अध्ययन करके वे इस निर्णय पर पहुँचे हैं कि एक मंदिर को तोड़ करके उसके ऊपर ये मस्जिद बनाई गई थी।

आलोक कुमार ने कहा कि उस मंदिर का एक हिस्सा, खासकर पश्चिमी दिवार, मस्जिद बनाने में इस्तेमाल की गई है और पुराने मंदिर के पिलर्स एवं अन्य चीजों को उस मस्जिद को बनाने में लगाया गया है। उन्होंने ज्ञानवापी ढाँचे में मिले शिवलिंग की पूजा करने की भी अनुमति माँगी है। बता दें कि जिस जगह पर शिवलिंग मिला है, उसे मुस्लिम पक्ष वजूखाना कहता है।

विश्व हिंदू परिषद के अनुसार, ज्ञानवापी सर्वे में जो शिलालेख मिले हैं, उनमें जनार्दन, रुद्र, उमेश्वर आदि नाम लिखे हुए मिले हैं। इसलिए ज्ञानवापी की प्रकृति अभी भी एक मंदिर की है। आलोक कुमार ने आगे कहा कि 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्सिप ऐक्ट कहता है कि धार्मिक स्थान की जो प्रकृति होगी वो बदली नहीं जाएगी और ASI रिपोर्ट से साबित हो चुकी है कि उस स्थान की प्रकृति एक मस्जिद की नहीं, अभी भी एक मंदिर की है।

आलोक कुमार ने हिंदू समाज को कथित वजूखाने में मिले शिवलिंग की सेवा और पूजा की अनुमति करने के साथ ही मुस्लिम पक्ष से ज्ञानवापी को हिंदुओं को सौंपने की माँग की। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद की जगह मुस्लिम पक्ष जमीन लेकर दूसरी जगह अपनी मस्जिद बना लें।

आलोक कुमार ने कहा, “हम मस्जिद इंतजामिया कमिटी से आग्रह करते हैं कि सब प्रमाण सामने आने के बाद अच्छा होगा कि वे स्वयं ये कहें कि इस मस्जिद को किसी दूसरे एवं उपयुक्त स्थान पर आदरपूर्वक स्थानांतरित करने के लिए तैयार हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो भारत के दोनों समुदायों के बीच में एक सदभावना का निर्माण होगा, शांति स्थापित होगी और मस्जिद भी अपने विस्थापित स्थान पर आदरपूर्वक रह सकेगी।”

‘मार सकते, गालियाँ दे सकते… राहत फतेह बाप की तरह हैं’ – नौकर ने लात-जूते खाकर भी पाकिस्तानी गायक को ‘दारू बोतल कांड’ में बचाया

पाकिस्तानी सूफी गायक राहत फतेह अली खान ने मात्र एक दारू की बोतल को लेकर अपने नौकर को बुरी तरीके से पीटा। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में राहत फ़तेह अली खान अपने नौकर को थप्पड़-घूंसे मारते, जूतों से पीटते हुए दिखे हैं। इस दौरान नौकर उनसे दया की गुहार लगाता रहा, लेकिन उनका दिल नहीं पसीजा।

पाकिस्तानी समाचार टीवी चैनल समा टीवी के अनुसार, राहत फ़तेह अली खान ने इस नौकर को इसलिए पीटा क्योंकि उनके घर से शराब की एक बोतल गायब हो गई थी। राहत फ़तेह अली खान नौकर पर बोतल गायब करने का शक करते हुए उसे पीटने के दौरान पूछ रहे थे कि बोतल कहाँ गई।

वीडियो में देखा जा सकता है, वह पूछते हैं, “कहाँ गई मेरी बोतल?” इसके बाद वह नौकर पर थप्पड़ों और लातों की बरसात कर देते हैं। इस दौरान नौकर को किसी ने नहीं बचाया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि यह कोई नई बात नहीं है, इससे पहले भी खान अपने घर में काम करने वालों के साथ बदतमीजी करते रहे हैं। रिपोर्ट का कहना है कि जहाँ वह एक दो घंटे के अपने शो में अपनी रूहानी तस्वीर पेश करते हैं, वह स्टेज से उतरते ही बदल जाते हैं। चैनल का कहना है कि मारपीट की कई ऐसी फुटेज हैं, जिनको दिखाया तक नहीं जा सकता।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और राहत फ़तेह अली खान की हुज्जत होने के बाद उन्होंने अपने नौकर से एक बयान जारी करवाया। राहेत फ़तेह अली खान के इन्स्टाग्राम पर पीड़ित नौकर की चार वीडियो सफाई देते हुए डाली गई। इसमें पीड़ित नौकर कहता है कि यह वीडियो गायक को ब्लैकमेल करने के उद्देश्य से बनाई गई थी।

राहत फ़तेह अली खान के इन्स्टाग्राम पर डाले गए एक वीडियो में पीड़ित नौकर, जिसका नाम नावेद उस्मान है, कहता है कि यह एक गायब बोतल का मसला था और रहत फतेह अली खान ने उसे पीटकर उसके साथ कुछ भी गलत नहीं किया।

राहत भी एक वीडियो में पीड़ित और उसके पिता के साथ सामने आए और बताया कि यह नौकर और उनका आपसी मसला है। इसे कुछ लोग अलग ही तरीके से पेश कर रहे हैं। राहत ने यह भी दावा किया कि नौकर को पीटने के बाद उन्होंने माफ़ी माँग ली थी।

पीड़ित नौकर के पिता ने भी राहत फ़तेह अली खान का ही पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि खान ने उनके लिए बहुत कुछ किया है और यह एक छोटी घटना थी। राहत ने ड्राईवर को भी इस वीडियो में पेश किया, जिसमें वह कहता है कि खान ने उसके साथ कभी बदतमीजी नहीं की।

एक अन्य वीडियो में राहत फतेह अली खान ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपने नौकर से माफ़ी माँग ली है और अब सबके सामने माफ़ी माँग रहे हैं। इस पर उनका नौकर कहता है कि राहत फतेह अली खान उसके लिए बाप की तरह हैं और वह जो चाहें, उसके साथ कर सकते हैं।

नौकर ने कहा कि गायब हुई शराब की बोतल के कारण राहत फतेह अली खान थोड़ा गुस्सा हो गए थे, इसको किसी ने उनको ब्लैकमेल करने के लिए रिकॉर्ड करके लीक कर दिया। उसका उद्देश्य खान की छवि धूमिल करना था।

उनके नौकर ने कहा कि वह राहत फतेह अली खान के लिए 40 साल से काम कर रहा है और वह उसे हमेशा प्यार करते हैं। राहत ने नौकर को दो अन्य वीडियो में पेश किया। इन वीडियो में वह कहता है कि एक बोतल गायब हुई, जिसके कारण यह घटना हुई। उसने कहा कि राहत फतेह अली खान उसके उस्ताद हैं, इसलिए वह उसे मारपीट सकते हैं, गालियाँ दे सकते हैं, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। नौकर ने कहा जिसने भी वीडियो ने बनाया वह एक ब्लैकमेलर है।

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अकबर बन गया सत्यम, शमीम ने भी की घर वापसी: छत्तीसगढ़ में 251 परिवार के 1000 लोगों ने अपनाया सनातन, धीरेंद्र शास्त्री ने ओढ़ाया भगवा, प्रबल प्रताप ने पखारे पाँव

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री की हनुमत कथा के अंतिम दिन शनिवार (27 जनवरी 2024) को 1000 लोगों घर वापसी की। इस दौरान जशपुर राजपरिवार के प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भी मौजूद थे। जनजातीय समुदाय के बीच बेहद लोकप्रिय भाजपा नेता प्रबल प्रताप सिंह धर्मांतरण करने वाले लोगों के पाँव धोकर घर वापसी कराते रहे हैं।

राजधानी रायपुर के कोटा गुढ़ियारी इलाके में इस समय धीरेंद्र शास्त्री की श्री हनुमंत कथा चल रही थी। यह कथा 23 जनवरी से 27 जनवरी 2024 तक चली। कथा के अंतिम दिन 251 परिवार के 1000 धर्मांतरित लोगों ने घर वापसी की। घर वापसी करने वाले लोगों में 2 मुस्लिम परिवार सहित ईसाई धर्म को मानने वाले लोग शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के रहने वाले मोहम्मद अकबर ने भी हिन्दू धर्म में वापसी की। धीरेंद्र शास्त्री ने अकबर का नाम बदलकर सत्यम रखा है। वहीं, रायपुर के चंगोराभाठा में रहने वाले शेख समीम ने भी सनातन धर्म अपनाया है। इस दौरान गरीब परिवारों के 21 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया गया और उन्हें घर-गृहस्थी का जरूरत का सामान भी दिया गया।

भाजपा नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इस लोगों के पैर धोकर इनकी घर वापसी करवाया। इस दौरान हवन-पूजन का भी आयोजन किया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घर वापसी करने वाले सभी लोग सगुजां संभाग के रहने वाले हैं। इस दौरान जूदेव ने कहा कि वे सभी लोगों को सनातन में वापस लाएँगे। घर वापसी को उन्होंने राष्ट्र निर्माण का काम बताया।

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा,  इनका धर्मांतरण बहुत ही गलत तरीके से कराया गया था। इनसे झूठ बोलकर और हिंदू देवताओं के बारे में अपमानजनक बातें बोलकर इनका धर्मांतरण कराया गया था।” उन्होंने कहा कि घर वापसी का कार्यक्रम वे लंबे समय से कराते आ रहे हैं। उनके दिवंगत पिता दिलीप सिंह जूदेव भी कराते रहे थे।

जूदेव ने कहा, “मेरा मानना है जहाँ हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ है या अल्पमत में आए हैं, वह क्षेत्र भारत से कटता गया। एक समय था जब अफगानिस्तान से लेकर इंडोनेशिया तक सारे हिंदू ही थे। हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ और वे क्षेत्र भारत से अलग हो गए। जहाँ हिंदू घटा है, वहाँ देश बँटा है।” उन्होंने मंच से छत्तीसगढ़ में 101 मंदिर बनवाने की भी शपथ ली। 

वहीं, कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि वे किसी धर्म के विरोधी नहीं हैं और ना ही वे धर्मांतरण में यकीन रखते हैं, लेकिन बहला-फुसलाकर धर्मांतरित कराए गए लोगों की घर वापसी में उन्हें विश्वास है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने घर वापसी की है, वे हनुमान जी की मर्जी से आए हैं। उन्होंने प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के प्रयासों की भी जमकर सराहना की।

‘तुम मजहब की बेइज्जती करवा रही हो’: रामलला के दर्शन के लिए मुंबई से पैदल निकली शबनम तो मुस्लिम महिलाओं ने घेरा, बोली पीड़िता – बचपन में श्रीराम में विश्वास

मुंबई से अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए पैदल निकली शबनम शेख के साथ उत्तर प्रदेश के अमेठी में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने दुर्व्यवहार किया। मुस्लिम महिलाओं ने उनके पहनावे को लेकर टिप्पणियाँ की और काफी सारी बातें कहीं। शबनम को परेशान करने वाली महिलाओं पर पुलिस ने कार्रवाई कर दी है।

जानकारी के अनुसार, मुंबई की रहने वाली शबनम शेख 37 दिन पहले अपने दो दोस्तों के साथ पैदल रामलला के दर्शन के लिए निकली थीं। इस यात्रा में वह बुर्का पहनकर चल रही हैं और हाथ में भगवा झंडा लिया हुआ है। शनिवार (27 जनवरी, 2024) को वह अमेठी के जगदीशपुर पहुँची थी।

यहीं पर अयोध्या की तरफ जाते समय एक सफ़ेद रंग की कार में सवार कुछ मुस्लिम महिलाएँ आकर उनसे झगड़ने लगीं। इन महिलाओं ने कहा कि शबनम मजहब की बेइज्जती करवा रही हैं। उन्होंने शबनम के बुर्का पहनने पर भी टिप्पणियाँ की। कार सवार महिलाओं को शबनम से जवाब भी दिया। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि क्या वह बुर्का उतार कर साड़ी पहन लें।

शबनम के साथ हुए इस दुर्व्यवहार की वीडियो भी सामने आई है। शबनम ने यह वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर भी अपलोड की है। जानकारी के अनुसार, यह वीडियो वायरल होने बाद पुलिस ने शबनम को परेशान करने वाली महिलाओं पर कार्रवाई की है। उनके परेशान करने वाली महिला का पुलिस ने चालान कर दिया है जबकि उस गाड़ी को सीज कर दिया।

गौरतलब है कि मुंबई की रहने वाली शबनम अब अयोध्या से मात्र 70 किलोमीटर दूर हैं। वह एक दिन में लगभग 35 किलोमीटर चलती हैं। वह अपने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जानकारी देती हैं कि वह कहाँ पहुँचने वाली हैं। रास्ते में हिन्दू संगठन उनका सम्मान भी कर रहे हैं। वह ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए चल रही हैं।

शबनम ने इससे पहले मीडिया को बताया था कि वह रामजी में बचपन से ही विश्वास रखती थीं। शबनम ने बताया था कि वह मुस्लिम परिवार से हैं लेकिन उनकी सभी धर्मों में आस्था है। शबनम ने अपने विषय में बताया था कि वह बीकॉम की छात्रा हैं और बचपन से ही हिन्दू इलाके में पली बढ़ी हैं।

अयोध्या को पैदल जाने वाली शबनम बताती हैं कि उनकी भाषा और जीवनशैली सब हिन्दुओं जैसी ही है क्योंकि वह हिन्दुओं के साथ ही बचपन से रह रही हैं। गौरतलब है कि शबनम के खिलाफ फतवा भी जारी किया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वह डरेगी नहीं।

ईरान में 9 पकिस्तामियों को गोलियों से भून डाला, ‘अज्ञात’ हत्यारे का अब तक कोई अता-पता नहीं

ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान प्रांत में 9 पाकिस्तानियों की एक अज्ञात बंदूकधारी ने हत्या कर दी है। इसके अलावा इस हमले में कई लोग घायल हैं। पाकिस्तानियों की मौत की पुष्टि ईरान में पाक राजदूत ने भी कर दी है। अभी तक हत्यारे का पता नहीं लग पाया है।

जानकारी के अनुसार, ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान के सरावान शहर में आज (27 जनवरी, 2024) को एक अज्ञात बन्दूकधारी ने घुस कर पाकिस्तानियों पर गोलियाँ बरसाईं। यह घटना सारवान शहर के सिरकान इलाके में स्थित एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में हुई। इसमें मौके पर ही 9 लोग हताहत हो गए जबकि 3 लोग अभी घायल बताए जा रहे हैं।

जानकारी सामने आई है कि सभी मृतक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शहरों के रहने वाले थे और इस वर्कशॉप में काम करते थे। अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है। सुरक्षा एजेंसियाँ भी हमलावरों की जानकारी नहीं जुटा सकी हैं। गौरतलब है कि जिस शहर में यह हमला हुआ वह पाकिस्तान-ईरान सीमा से लगभग 100 किलोमीटर दूर है।

ईरान में पाकिस्तानियों के मारे जाने की पुष्टि तेहरान में मौजूद पाकिस्तानी राजदूत मुदस्सिर टीपू ने भी कर दी है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “सरावान में 9 पाकिस्तानियों की भयावह हत्या से मैं हैरान हूँ। पाकिस्तानी दूतावास पीड़ित परिवारों की पूरी मदद करेगा। जाहेदान में मौजूद राजदूत पहले से ही घटना स्थल और अस्पताल के लिए निकल चुके हैं जहाँ घायलों का इलाज चल रहा है। हमने ईरान से इस मामले में पूरा सहयोग देने की अपील की है।”

गौरतलब है कि ईरान और पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध इस समय काफी निचले स्तर पर हैं। 16 जनवरी, 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के भीतर घुस कर हवाई हमले किए थे। ईरान ने कहा था कि उसने पाकिस्तान के भीतर कुछ आतंकी कैम्प तबाह किए हैं। इसके बाद पाकिस्तान ने भी ईरान के भीतर हमले करने का दावा किया था। रिश्ते बिगड़ने पर राजदूतों को भी दोनों देशों ने वापस बुला लिया था। हालाँकि, हाल ही में हुई बातचीत के बाद दोनों देश राजदूत वापस भेजने पर राजी हो गए थे।

इसी चलते इस घटना से एक दिन पहले ही (26 जनवरी, 2024) को ईरान में पाकिस्तान के राजदूत पहुँचे थे। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को यहाँ पहुँचने के बाद अपनी जानकारी भी पेश की थी। इसके कुछ ही समय बाद यह हमला हो गया।

नीतीश ‘सबके क्यों हैं?’ – ‘पलटूराम’ की वर्तमान छवि में नहीं, इतिहास में है ‘सुशासन बाबू’ को लेकर इस सवाल का जवाब, जो दूध कब का उबला आज तक चाभ रहे उसकी मलाई

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर से पाला बदल लिया है और उनकी पार्टी जदयू राजद छोड़ कर भाजपा के साथ आ गई है। जहाँ कई भाजपा समर्थक नाराज़ हैं कि बार-बार धोखा खाने के बावजूद भाजपा आखिर नीतीश कुमार को क्यों स्वीकार कर रही है। वहीं I.N.D.I. गठबंधन के समर्थक सोच ही नहीं पा रहे हैं कि नीतीश कुमार की आलोचना करें या प्रशंसा, क्योंकि कुछ दिनों पहले तक नीतीश कुमार ही राया-राज्य घूम कर गठबंधन बनाने की कोशिशों में लगे थे, लगातार सक्रिय थे।

आखिर क्या कारण है कि राजद हो या भाजपा, नीतीश कुमार को साथ लेने में कोई नहीं हिचकता और खुद नीतीश कुमार भी किसी के साथ भी जाने में नहीं हिचकते। इसका जवाब नीतीश कुमार की वर्तमान ‘पलटूराम’ वाली छवि नहीं, बल्कि इतिहास में है। उस इतिहास में, जब लालू यादव और रामविलास पासवान एक साथ सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे। उस इतिहास में, जब लालू यादव गाँव-जवार के पिछड़ों के नेता के रूप में उभर रहे थे, और उनका साथ दे रहे थे नीतीश कुमार।

न सिर्फ पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ का अध्यक्ष बनने में, बल्कि 1988 में कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद नेता प्रतिपक्ष बनने में, और 1990 में मुख्यमंत्री बनने में भी नीतीश कुमार ने लालू यादव की मदद की थी। ये वो दौर था, जब नीतीश कुमार मानते थे कि लालू यादव को आगे बढ़ाने में ही समाजवादी विचारधारा वाले धरे की भलाई है। लालू यादव ट्रांसफर-पोस्टिंग वाले हिसाब-किताब में दक्ष थे (जिससे उन दिनों विधायकों की कमाई होती थी), ड्रामा करने में उनका कोई सानी नहीं था और दिल्ली से लेकर पटना तक सेटिंग करने में भी उनकी दक्षता थी।

इसे एक वाकये से समझिए। एक बार लालू यादव एक श्रद्धांजलि सभा में गए। वहाँ रोना-धोना किया, शोक जताया, परिवार को ढाँढस बँधाया और फिर वापस जाने लगे। तभी वहाँ कुछ पत्रकार आ गए। लालू यादव उन्हें देख कर वापस गए और हूबहू अपना वही ड्रामा दोहरा दिया। जबकि नीतीश कुमार की छवि एक पढ़े-लिखे नौजवान की थी, एक सज्जन की थी, अच्छी वेशभूषा में रहने वाले एक युवा नेता की थी, विचारधारा पर चलने वाले व्यक्ति की थी।

इसके उलट लालू यादव की कोई विचारधारा ही नहीं थी। ‘नीतीश सबके हैं’, इसका एक कारण ये भी है कि लालू यादव, भाजपा और नीतीश कुमार – शुरू में इन सबका ‘दुश्मन’ एक ही हुआ करता था। JP आंदोलन से निकले लालू-नीतीश का ‘दुश्मन’ थी कॉन्ग्रेस। कॉन्ग्रेस पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए ही जनसंघ का जन्म हुआ था, जो बाद में भाजपा में परिवर्तित हो गई। इस तरह 1990 के वर्ष को उदाहरण लें तो बिहार में ये सारी शक्तियाँ एक थीं।

इनके एक होने की फिर वही वजह थी – कॉन्ग्रेस। लालू यादव जब पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब उन्हें न सिर्फ नीतीश कुमार बल्कि भाजपा का समर्थन भी हासिल था। भले ही ये अल्प समय के लिए ही था। इसके बाद राम मंदिर वाला मुद्दा जोर पकड़ा, लालकृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली और तत्कालीन प्रधानमंत्री VP सिंह के कहने पर लालू यादव ने आडवाणी को समस्तीपुर में गिरफ्तार करवा दिया। मुलायम सिंह यादव कहीं क्रेडिट न लूट ले जाएँ, इस डर ने ऐसा किया गया था।

ऊपर से लालू यादव इसके बाद सेक्युलरिज्म के मसीहा बने सो अलग। लालू यादव हमेशा से महत्वाकांक्षी रहे थे, एक बार एक बड़े नेता का इंतज़ार करने के लिए जब मीडिया से लेकर छोटे-छोटे नेतागण एयरपोर्ट पर खड़े थे तभी लालू यादव ने कहा था कि एक दिन उनका भी ऐसे ही इंतज़ार किया जाएगा। राजनीति का खून जो उन्होंने चखा था, सत्ता का खुमार जो उन्होंने सूँघा था, वो उन्हें मतवाला किए जा रहा था। नीतीश कुमार तब ऐसे नहीं हुआ करते थे।

1994 ने जॉर्ज फर्नांडिस समता पार्टी का गठन करते हैं। भाजपा को भी समाजवाद वाली लहर की आवश्यकता थी। ऐसे समय में जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेता को वो साथ लेना चाहती थी और इस तरह लालू यादव के खिलाफ एक गठबंधन बनता है। जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार के साथ भाजपा की साझेदारी की शुरुआत होती है। विपक्ष की राजनीति तब न तो भाजपा के लिए नई बात थी, न ही जॉर्ज-नीतीश के लिए। विपक्षी राजनीति उन्हें सूट करती थी, वो इसके आदी भी हो चले थे।

चूँकि लालू यादव 1990 में ही सत्ता में पहुँच गए और नीतीश कुमार को इसके बाद 15 वर्ष और इंतज़ार करना पड़ा, उनकी छवि एक जुझारू नेता की बन गई। एक ऐसे नेता की, जो लगातार चुनावों में हार के बावजूद रुका नहीं, एक ऐसा नेता जिसने एक साथी को पकड़ा तो लंबे समय तक उसका साथ निभाया, एक ऐसा नेता जो नब्बे के दशक में अंग्रेजी बोल सकता था, एक ऐसा नेता जो एक दुर्घटना के बाद केंद्रीय रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे सकता था, एक ऐसा नेता जो जंगलराज के खिलाफ सबसे बड़ा चेहरा बन कर उभरा।

नीतीश कुमार को कभी किसी भाषण में चिल्लाते हुए, ड्रामा करते हुए या फिर उग्र होते हुए नहीं देखा गया। इस ‘सज्जन शहरी बाबू’ ने जब सत्ता सँभाली तो पहले 5 वर्ष में बहुत कुछ बदल गया। नक्सली वारदातों पर लगाम लगी, सड़कों का निर्माण शुरू हुआ, साइकिल योजना के कारण लड़कियों की शिक्षा-दीक्षा में तेज़ी आई, गाँवों में कैबिनेट बैठक होने लगी, जिले-जिले में CM की यात्राएँ निकलने लगीं, जनता दरबार तक आम लोगों की पहुँच बनी और नेताओं की दबंगई की जगह ब्यूरोक्रेसी ताकतवर हुई।

2013 तक सब ठीक-ठाक चला और आज भी नीतीश कुमार विपक्ष में किए गए संघर्षों और 8 साल किए गए काम की ही मलाई खा रहे हैं। यही कारण है कि इसके एक दशक बाद भी वो ‘सबके’ हैं। 2013 में वो राजद द्वारा बाहर से समर्थन लेकर सरकार बनाते हैं, 2014 के लोकसभा चुनावों में बुरी तरह पटखनी खाते हैं, जीतन राम माँझी को CM बना कर हार की जिम्मेदार लेकर सहानुभूति लहर का फायदा उठाना चाहते हैं, 2015 में राजद के साथ विधानसभा चुनाव जीतते हैं, 2017 में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर राजद से गठबंधन तोड़ देते हैं, 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ मिल कर बंपर सीटें जीतते हैं, 2020 के विधानसभा चुनाव में फिर भाजपा के साथ मिल कर सत्ता पर काबिज होते हैं, 2022 में वापस लालू की पार्टी के साथ जाते हैं और 2024 में उनका फिर से मोहभंग होता है और वो भाजपा के साथ आ जाते हैं।

अतः, नीतीश कुमार के सबके साथ चले जाने और सहज हो जाने के पीछे कारण यही है कि वो उस दौर में संघर्षों में रत रहे हैं जब इसी भाजपा के कई नेता उनके मित्र हुआ करते थे और ‘कॉमन एनिमी’ से लड़ रहे थे। खुद लालू यादव उनके जवानी के मित्र हैं। सुशील मोदी जैसे भाजपा नेता कॉलेज के दिनों के मित्र हैं। उस समय की उनकी सज्जन, सौम्य और फिर बाद में सुशासन वाली छवि आज तक उनके काम आ रही है। जो सोशल इंजीनियरिंग उन्होंने पहले की थी और ‘महादलित’ समुदाय वाला दर्जा कई तबकों को दिया, वो आज तक उनके काम आ रहा है।

नीतीश कुमार को पता है कि ये वोट बैंक ऐसा नहीं है कि अकेले 240 सीटों में लड़ कर वो CM बन जाएँ, लेकिन इतना ज़रूर है कि अगर वो किसी के साथ जुड़ जाते हैं तो उनका मुख्यमंत्री पद बरकरार रहे। नीतीश कुमार आज ‘मोदी लहर’ को स्वीकार कर रहे हैं, तभी लोकसभा चुनाव से ऐन पहने पाला बदल रहे हैं। ‘नीतीश सबके हैं’ – क्योंकि I.N.D.I. गठबंधन में उन्हें भाव नहीं मिला, संयोजक का पद नहीं मिला। ‘सबके’ बन कर रहना आज उनकी मजबूरी भी बन गई है।

‘नीतीश सबके हैं’, क्योंकि लालू यादव की ‘गँवार’ वाली छवि के विकल्प के रूप में लोगों ने उनमें एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति दिखा। क्योंकि मंच पर ड्रामेबाजी के विकल्प के रूप में आम जनता ने सामान्य तरीके से दिल की बात करने वाले एक नेता के रूप में उन्हें देखा। क्योंकि एक पार्टी विशेष के गुंडों की दबंगई से त्रस्त जनता ने उनमें एक ‘सुशासन बाबू’ को देखा। क्योंकि लोगों ने इतने बुरे दौर देखे हैं कि ‘सामान्य’ भी बेहतर लगता है। नीतीश पहले विकल्प थे, अब मजबूरी हैं। उनकी राजनीति का ये अंतिम अध्याय है, शायद इसका अंत किसी संवैधानिक पद पर हो!

‘इस्लाम कबूल कर वरना तुझे और तेरे परिवार को ठिकाने लगा देंगे’: यूपी में वाल्मीकि समाज के परिवार को मिल रही धमकी, बताया – मुस्लिम बहुल गाँव में हम अकेले हिन्दू

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक दलित परिवार को इस्लाम कबूलने की धमकी दी जा रही है। उसको आसपास के दबंग मुस्लिम धमकी दे रहे हैं कि वह जमीन खाली कर दे या फिर इस्लाम अपना ले। पीड़ित ने इसको लेकर सहारनपुर पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया है। जानकारी के अनुसार, सहारनपुर के गंगोह थाना क्षेत्र के कुंडाकला गाँव में वाल्मीकि जाति के साधूराम के परिवार को यह धमकियाँ मिल रही हैं। साधूराम के परिवार को असलम, नियाज, एजाज, सोनू, आमिर, कामिल, सलीम और काला जमीन खाली करने के लिए धमका रहे हैं।

साधूराम ने इस सम्बन्ध में पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत में साधूराम ने बताया है कि वह 1967 से ढलावली कस्बे में रह रहा है। यहाँ वह अपने गाँव से इसलिए आया था क्योंकि वहाँ बाढ़ आ गई थी। साधूराम ने पुलिस को बताया है कि यहाँ वह जिस जमीन पर रह रहा है, उसे कब्जाने की नीयत से यह सभी मुस्लिम दबंग उसे धमकी दे रहे हैं। साधूराम द्वारा दिया गया प्रार्थना पत्र ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

साधूराम ने प्रार्थना पत्र में बताया है, “वो धमकाते हैं – या तो तू अपने परिवार सहित इस्लाम मजहब कबूल कर ले वरना तुझे और तेरे परिवार को ठिकाने लगाकर सारी जमीन पर अपना कब्जा कर लेंगे।” पीड़ित ने कहा है कि इन मुस्लिम दबंगों की दबंगई की वजह से उसके बाकी परिवारीजन पहले ही घर छोड़ कर अलग अलग शहरों में जा चुके हैं। साधूराम ने यह भी आरोप लगाया है इनकी जमीनें कब्जाने के अलावा मुस्लिम दबंगों ने ग्राम समाज की भी जमीन कब्जा रखी है।

पीड़ितों ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “कुंडाकला गाँव से हैं हम, हमारा अकेला घर वहाँ वाल्मीकियों का है। बाकी पूरा गाँव मुस्लिमों का है। पहले मुझसे मारपीट की अब मेरा घर छीनना चाह रहे हैं। हमसे कहते हैं कि यहाँ से भाग जाओ या फिर मुसलमान बन जाओ। हमें उनसे बहुत खतरा है।”

साधूराम ने यह भी बताया है कि यहाँ पर यह मुस्लिम दबंग हिन्दुओं का धर्मांतरण कराते हैं और उनकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करते हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि हिन्दू परिवारों की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की जाती है। इस मुस्लिम दबंगों पर साधूराम ने हथियार तस्करी का भी आरोप लगाया है। साधूराम ने इन मुस्लिम दबंगों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग पुलिस प्रशासन से की है।