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राहुल गाँधी ने माँझी को फोन कर के दिया CM बनाने का ऑफर, राबड़ी देवी को कोर्ट का समन: बिहार में पल-पल बदल रही राजनीति, कॉन्ग्रेस की बैठक से कई MLA रहे गायब

बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम पल-पल बदल रहा है। जहाँ नीतीश कुमार इस्तीफा देने की तैयारी कर रहे हैं और शनिवार (27 जनवरी, 2024) को शाम 7 बजे जदयू के विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस्तीफे के फैसले पर अंतिम मुहर लग जाएगी। अगले ही दिन शपथग्रहण भी हो जाएगा, ऐसा मीडिया में चल रहा है। उधर अब खबर आई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने बिहार के मुख्यमंत्री रहे जीतन राम माँझी को फोन कॉल किया है।

राहुल गाँधी ने ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर)’ के अध्यक्ष माँझी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर दिया है। HAM के पास 4 विधायक हैं, जबकि जबकि राजद के पास 79 और कॉन्ग्रेस के 19 विधायक हैं। वैसे तो भाजपा और जदयू मिल जाएँ तो बहुमत का आँकड़ा आसानी से पार हो जाता है। बिहार में बहुमत के लिए 122 विधायक चाहिए, भाजपा-जदयू के पास इससे एक ज़्यादा हैं। लेकिन, वामपंथी दलों के 16 विधायकों और HAM को जोड़ कर राजद-कॉन्ग्रेस सरकार बनाने की जुगत में है।

यही कारण है कि पहले लालू यादव ने जीतन राम माँझी को डिप्टी CM बनाने का ऑफर दिया था, अब उन्हें सीधा मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर दिया जा रहा है। हालाँकि, ये तभी संभव है जब जदयू के विधायकों में से एकाध वोटिंग से अनुपस्थित रहे जाएँ। उधर पूर्णिया में होने वाली कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक टाल दी गई है, क्योंकि पार्टी के सभी विधायक तय समय पर पहुँचे ही नहीं। अब ये बैठक अगले दिन होगी। उधर ‘जमीं के बदले नौकरी’ घोटाले में कोर्ट ने पूर्व सीएम राबड़ी देवी को समन भेजा है।

कोर्ट ने व्यवसायी अमित कात्याल के खिलाफ प्रोडक्शन वॉरंट भी जारी किया है, जो पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं। जीतन राम माँझी I.N.D.I. गठबंधन में आने के न्योते पर क्या फैसला लेते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। AIMIM, HAM और एक निर्दलीय को मिला कर राजद-कॉन्ग्रेस-लेफ्ट गठबंधन 120 के आँकड़े को छू सकता है। राजद राज्यपाल को समर्थन-वापसी का पत्र देने का भी विचार कर रही है, क्योंकि उसे आशंका है कि नीतीश कुमार विधानसभा भंग कर सकते हैं। राजद सरकार बनाने का दावा पेश करेगी।

उधर RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि बिहार में अभी खेला होना बाकी है, उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार आदरणीय थे और हैं, कई चीजें उनके नियंत्रण में नहीं हैं। वहीं अब कॉन्ग्रेस व राजद नेताओं ने भी महागठबंधन के टूटने की बातें स्वीकार करना शुरू कर दिया है।

‘तेरा राम बचाने आएगा क्या?’: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन पर कट्टरपंथियों ने ठाणे में की थी पत्थरबाजी, हुसैन और अख्तर पर FIR

महाराष्ट्र में ठाणे के मीरा रोड भायंदर इलाके में अभी भी तनाव का माहौल बना हुआ है। इस इलाके में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से एक दिन पहले हिंदुओं पर हुए हमले के बाद यहाँ मुस्लिमों की हिंसा में कोई कमी नहीं आई है। इस मामले में पुलिस ने भयंदर इलाके के मोहम्मद हुसैन शमी मोहम्मद शेख और अख्तर नाम के दो आरोपितों पर मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने मोहम्मद हुसैन शमी मोहम्मद शेख और अख्तर के खिलाफ पुलिस ने IPC की धारा 153A, 504, 506 और 34 के तहत केस दर्ज किया है। दोनों पर ये केस 25 जनवरी 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह मना रहे हिंदू समुदाय के लोगों पर पथराव करने को लेकर दर्ज हुआ है।

घटना की FIR कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। प्राथमिकी के अनुसार, 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर जश्न मनाने के लिए स्थानीय स्तर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें आरोपित घुस गए और वलोगों पर पथराव कर दिया। आरोपितों ने हिंदू धर्म और भगवान राम को भी अपशब्द कहे।

शिकायतकर्ता ने कहा, “हमने हिंदू समारोह का जश्न मनाने के लिए एक छोटा-सा कार्यक्रम आयोजित किया था और इस मौके पर भंडारा कर रहे थे। 22 जनवरी को शमी और अख्तर कार्यक्रम में घुस आए और हिंदुओं पर पथराव शुरू कर दिया। इसकी वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि वो सिर्फ इस पर नजर रख रहे थे कि स्थानीय मस्जिद पर कौन पथराव कर रहा है।”

हिंदू शिकायतकर्ता ने कहा है, “बाद में हिंदुओं की एक रैली पास की स्थानीय मस्जिद के पास से गुजरी और हमारे कार्यक्रम में घुसे दोनों आरोपितों ने रैली में भाग लेने वालों पर पथराव करना शुरू कर दिया।” इसके बाद शिकायतकर्ता ने वहाँ तैनात स्थानीय पुलिस को सूचित किया था, लेकिन तब तक आरोपित फरार हो चुके थे।

शिकायत में आगे कहा गया है कि आरोपित उन्हें लगातार धमकाते रहे हैं। 23 जनवरी को मुख्य आरोपित ने धमकाते हुए कहा था, “हमने देखा कि तुमने पुलिस को सूचना दी है। तुम कुछ ज़्यादा नहीं कर रहे हो? क्या रे तेरे को बहुत चर्बी आया है क्या? मैं तुम्हें मार डालूँगा, देखते हैं तुम्हारा राम तुम्हें बचाने आता है क्या।”

इसके बाद भी शिकायकर्ता को कई दिनों तक धमकी दी जाती रही। आखिरकार उन्होंने 25 जनवरी 2024 को शिकायत दर्ज करा दी। ये घटना राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन 22 जनवरी को हुई थी। इससे पहले 21 जनवरी 2024 की रात को भायंदर इलाके में मीरा रोड पर हिदुओं की शोभायात्रा पर 50-60 मुस्लिमों ने हमला कर दिया था।

इस दौरान मुस्लिम उपद्रवियों ने गाड़ियों में तोड़फोड़ की और यात्रा में शामिल महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता की। जिहादियों ने भगवान हनुमान की तस्वीर वाले झंडे भी फाड़ दिए थे। इस मामले में पुलिस ने ऑपइंडिया को बताया था कि 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए IO दिलीप राख ने आरोपितों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मुंबई प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की और आरोपितों की लगभग 15 अवैध संपत्तियों को जमींदोज कर दिया। BMC ने मुंबई में मोहम्मद अली रोड पर 40 और अवैध अतिक्रमणों को भी ध्वस्त कर दिया।

जिन लोगों की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी, उनमें इब्राहिम मोहम्मद की दुकान भी शामिल थी। इब्राहिम मोहम्मद की मर्चेंट रोड की दुकानें और फेरीवालों के स्टॉल पर भी कार्रवाई की गई थी। मीरा रोड, कल्याण, ठाणे और भयंदर में हिंसा के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। आगे की जाँच जारी है।

यह खबर सिद्धि सोमानी ने लिखी है। आप इसे ऑपइंडिया की अंग्रेजी वेबसाइट पर विस्तार से पढ़ सकते हैं।

महिलाओं का वोट माँगना हराम, फतवे को 400+ मौलानाओं का समर्थन: कहा – ये शरिया कानून के खिलाफ है, जो फतवे का विरोध करेंगे वो इस्लाम के खिलाफ

महिलाओं का घर-घर जाकर वोट माँगना और किसी के लिए चुनाव प्रचार करना इस्लाम में हराम है और शरिया तथा इस्लामी क़ानूनों के खिलाफ है। चुनाव में भाग लेने वाली पार्टियों को महिलाओं को चुनाव प्रचार के लिए नहीं भेजने दिया जाएगा। यह फतवा एक मौलाना ने पाकिस्तान चुनावों के लिए दिया है।

यह फतवा पाकिस्तान के ख़ैबर पख्तूनख्वा राज्य में कोहिस्तान के मुफ़्ती गुल शहजादा समेत तमाम मौलानाओं ने दिया है। इनमें से अधिकांश मौलाना ‘जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल)’ से सम्बन्ध रखते हैं। इन्होंने पाकिस्तान में 8 फरवरी, 2024 को होने वाले आगामी आम चुनावों के लिए महिलाओं के वोट माँगने पर रोक लगा दी है। कोहिस्तान में मौलानाओं की एक बैठक में मुफ़्ती गुल शहजाद ने कहा, “महिलाओं को वोट मँगाने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे ले जाना गैर इस्लामी और शरिया के विरुद्ध है। अगर कोई भी इस्लामी सोच के खिलाफ वोट देता है, इसका मतलब है कि वह झूठे बयानों पर विश्वास कर रहा है। यह इस्लामी शरिया के विरुद्ध है और कुफ्र है।”

मुफ़्ती गुल शहज़ाद के इस फतवे को 400 से अधिक मौलानाओं का समर्थन मिला है। इसके अलावा इसे 30 मौलानाओं के समूह ने इसको सर्वसम्मति से पारित किया है। मौलानाओं ने यह भी कहा है कि जो भी फतवे का विरोध करेंगे वह इस्लाम के खिलाफ माने जाएँगे। मौलानाओं ने यह भी कहा है कि कुरान पर हाथ रखवा कर लोगों को वोट के लिए राजी करना इस्लाम के विरुद्ध है और अपराध है।

पाकिस्तानी समाचार वेबसाइट ‘डॉन‘ ने बताया है कि इस बार के पाकिस्तान के आम चुनावों में कोहिस्तान से दो महिलाएँ भी चुनाव लड़ रही हैं। इन दोनों महिलाओं को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ‘तहरीक ए इंसाफ’ पाकिस्तान का समर्थन मिला है। यह फतवा इन्हीं को निशाने पर लेकर जारी किया गया है, ऐसा माना जा रहा है।

यह फतवा जिन मौलानाओं ने जारी किया है वह ‘जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल)’ से सम्बन्ध रखते हैं। यह पार्टी पाकिस्तान के बड़े मौलाना और नेता फ़ज़लुर्रहमान की पार्टी है। यह भी इन चुनावों में हिस्सा ले रही है। यह सुन्नी इस्लाम के बल पर जीतने का दावा करती है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में आगामी 8 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। इसके लिए सारी पार्टियाँ अपना जोर लगा रही हैं। इस चुनाव में पाकिस्तान की सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ‘तहरीक-ए-इंसाफ’ का चुनाव चिन्ह बल्ला छीन लिया है। उनके सारे उम्मीदवार अब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

ऐसा फतवा पहली बार नहीं आया है, इससे पहले भी मौलाना कई अजीब फतवे जारी करते रहे हैं। इससे पहले मौलाना जाकिर नाईक ने नवंबर 23, 2020 को उसने इस्लाम और हस्तमैथुन पर अपनी व्याख्या दी थी। उससे व्हाट्सएप्प के जरिए किसी ने पूछा था कि इस्लाम में हस्तमैथुन हराम है या हलाल। मौलाना ने इस पर बताया था कि अगर किसी व्यक्ति की बीवी नहीं है और वो उसके बारे में सोचते हुए हस्तमैथुन करता है तो ये हराम नहीं है। पोर्न देखते हुए अगर किसी ने हस्तमैथुन किया है तो ये हराम है।

मौलाना जाकिर नाइक ने बताया था, “पैगंबर मुहम्मद ने लोगों को अपने प्राइवेट पार्ट्स को जब तक उसकी इच्छा हो, तब तक छूने की अनुमति दी है, बशर्ते वो बाएँ हाथ से किया गया हो। पैगंबर मुहम्मद ने कहा है कि ये आपका द्रव है और आप जब चाहें तब उसे निकाल सकते हैं।”

वो लोग जिनके रक्त का गारा बना कर जोड़ी गई बाबरी की ईंटें, 80000 सैनिकों के साथ बलिदान हुए थे भीटी नरेश महताब सिंह: 2 फकीरों ने की थी मुखबिरी

धर्मनगरी अयोध्या में भगवान राम अपने निर्माणाधीन मंदिर के गर्भगृह में 22 जनवरी 2024 को विराजमान हो गए। देश और दुनिया भर के हिन्दू इस अवसर पर भक्तिभाव से अपने आराध्य भगवान राम की पूजा करते हुए दीपावली जैसा पर्व मना रहे हैं। ऑपइंडिया ने इस अवसर पर अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में तमाम ऐसे बलिदानियों से देश को परिचित करवाया, जिन्होंने मुलायम सिंह यादव की सरकार द्वारा की गई फायरिंग में अपने प्राणों की आहुति दी।

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हमें 4 बड़े युद्धों के बारे में जानकारी मिली। ये युद्ध उस दौरान हुए जब आक्रांता बाबर की क्रूर फ़ौज मंदिर को तोड़ रही थी और उनसे लड़ते हुए क्षत्रिय योद्धा अपने प्राणों की आहुति दे रहे थे। इन सभी में सबसे पहले अपना बलिदान देने वालों में तत्कालीन भीटी नरेश महताब सिंह थे। हमने राजा महताब सिंह के महल में जाकर वर्तमान हालातों की जानकारी जुटाई।

ऑपइंडिया की टीम राजा महताब सिंह के महल पहुँची। यह महल अब अम्बेडकरनगर जिले के भीटी थाना क्षेत्र में तहसील कार्यालय के ठीक बगल है। महल अब बेहद जर्जर हालत में है। प्लास्टर उखड़ चुके हैं और छत कई जगहों से गिर चुकी है। महल के ऊपर आज भी भगवा ध्वज लहराता है। दीवालों पर भगवान गणेश और महादेव शिव के चित्र आज भी उकेरे हुए हैं।

महल को देखकर ऐसा लगता है कि इसके बाहरी और आंतरिक हिस्से की साफ़-सफाई और रंग-रोगन एक जमाने से नहीं हुई है। दरवाजे भी उखड़े हुए मिले। महल के एक हिस्से में दुधारु जानवर बँधे हुए मिले। हमें कुछ स्थानीय लोगों ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर यह भी बताया कि महल का अधिकतर हिस्सा अब बिक चुका है।

राजा महताब सिंह महल भीटी, अम्बेडकरनगर

महल के बाहर राजा अजय प्रताप सिंह के नाम से एक इंटर कॉलेज मौजूद है। इसका संचालन राजा महताब सिंह के वंशजों द्वारा किया जाता है। मैदान में टहल रहे लोगों ने बताया कि जहाँ आज इण्टर कॉलेज है, वहाँ कभी राजा साहब की अदालत लगा करती थी। इसमें वे जनता की समस्याओं का बेहद न्यायप्रिय ढंग से समाधान करते थे। राजा महताब सिंह के अधिकतर परिजन लखनऊ और काशी में बस चुके हैं। महज कुछ दूर के परिजन हवेली की देखरेख के लिए मौजूद मिले, जिनमें से एक थे विनय प्रताप सिंह।

महल के अंदर मौजूद धार्मिक चिन्ह

लोग भूल चुके हैं हमें

महल में मौजूद विनय प्रताप सिंह ने हमें बताया कि भले ही उनके पूर्वजों ने जन्मभूमि बचाने के लिए बाबर के खिलाफ पहला संघर्ष किया हो, लेकिन आज लोग उन्हें लोग भूल चुके हैं। उन्होंने हमें बताया कि राजा महताब सिंह के बलिदान पर पहले एक किताब भी छपी थी, लेकिन ना जाने क्यों और किसने उसने बाजार से गायब कर दिया।

विनय प्रताप सिंह का कहना है कि यह किताब कभी अयोध्या के सभी पुस्तक स्टॉल पर बिका करती थी। राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से बेहद खुश विनय प्रताप सिंह चाहते हैं कि लोग इस मौके पर राजा महताब सिंह को भी याद रखें। इसके साथ ही उनकी यह इच्छा है कि जर्जर होते जा रहे इस महल को भारत सरकार संरक्षित करे।

महल में मौजूद विनय प्रताप सिंह

दोगुने मुगलों से लड़ी थी 80 हजार की सेना

राजा महताब के एक अन्य वंशज प्रणव प्रताप सिंह ने ऑपइंडिया से बात की। प्रणव प्रताप सिंह ने हमें बताया कि सन 1527-28 के आसपास बाबर के आदेश पर उसका कमांडर मीर बाकी लाखों की मुगल फ़ौज लेकर अयोध्या के रामजन्मभूमि मंदिर पर हमला बोला था। तब भीटी नरेश राजा महताब सिंह बद्रीनाथ की तीर्थयात्रा पर निकले थे।

जन्मभूमि पर हमले की खबर सुनकर वृद्ध हो चले राजा साहब ने अपनी यात्रा रद्द कर दी और अयोध्या की तरफ कूच कर गए। उन्होंने अपने राज्य में संदेश भेजवाया और खुद भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को जमा करने में जुट गए। इस तरफ लगभग 80 हजार हिन्दुओं की फ़ौज रामजन्मभूमि को बचाने के लिए अयोध्या की तरफ निकल पड़ी।

17 दिन चली लड़ाई, राजा साहब और सैनिक सभी बलिदान हुए

प्रणव प्रताप सिंह ने हमें बताया कि मीर बाकी अयोध्या में घुसकर रामजन्मभूमि के नजदीक पहुँच चुका था। सारे सैनिकों ने जन्मभूमि पर घेरा बना लिया था। लगभग 17 दिनों तक मीरबाकी और उसकी फ़ौज मंदिर में नहीं घुस पाई। इस बीच हिन्दू सैनिक एक-एक कर के बलिदान होते गए। आखिरकार 17वें दिन की समाप्ति पर अंतिम योद्धा के तौर पर राजा महताब सिंह जन्मभूमि को बचाते हुए बलिदान हो गए।

प्रणव प्रताप सिंह के अनुसार, इसी युद्ध में राजा महताब सिंह के सहयोगी वयोवृद्ध केहरी सिंह भी बलिदान हुए थे। राजा महताब सिंह के बलिदान होने के बाद ही मुगल फ़ौज मंदिर प्रांगण में घुस पाई। तब के तमाम गायकों ने राजा महताब सिंह के बलिदान पर लोकगीत बनाए थे। इन लोकगीतों में कुछ गाने आज भी भीटी क्षेत्र के बड़े बुजुर्ग गाते हैं। राजा साहब की हार का मुख्य कारण उन्नत हथियार न होना था।

बकौल प्रणव प्रताप सिंह, राजा साहब के सैनिकों के पास भाला और तलवारें थीं, जबकि मुगलों के पास तोपें थीं। कहा जाता है कि मीर बाकी ने राजा महताब सिंह और उनकी 80 हजार फ़ौज को मारकर उनके खून का गारा बनाया था और बाबरी की पहली दीवाल उसी से तामीर की थी। इन दीवारों की तामीर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा खून सोखने के लिए लखौरी ईंटों का इस्तेमाल किया गया था।

जिन मुगल फकीरों को दी शरण उन्होंने ही की मुखबिरी

अंबेडकरनगर के इतिहासकार बलराम मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए इतिहास के पन्नों को पलटा। बलराम मिश्रा ने हमें बताया कि 2 मुगल फकीरों को राम मंदिर के तत्कालीन पुजारी श्यामानन्द ने आश्रय दिया था। इनमें से पहले फकीर का नाम कज़ल अब्बास मूसा और दूसरे का नाम जलाल शाह था। इन फकीरों ने खुद को हिन्दू धर्म से प्रभावित बताया और मंदिर परिसर में ही रहने लगे थे।

इन दोनों ने मंदिर में मौजूद न सिर्फ सोने-चाँदी की जानकारी जुटाई, बल्कि उसकी सुरक्षा से संबंधित सारे राज जान गए। दोनों ने यह भी पता लगाया कि उत्तर भारत में हिन्दुओं की सबसे अधिक आस्था राम में थी। उस आस्था का केंद्र जन्मभूमि पर बना मंदिर था। बाद में इन्हीं दोनों फकीरों ने सारी मुखबिरी बाबर को की और मतान्ध बाबर ने सोमनाथ की तर्ज पर राम मंदिर को लूटने और ध्वस्त करने के लिए अपनी फ़ौज भेज दी थी।

हमने राजा महताब सिंह के महल के आसपास मौजूद लोगों से भी बातचीत की। महल के पास अनुसूचित जाति के लोगों की बस्ती है। उन्होंने बताया कि खुद राजा साहब ने उन्हें वहाँ बसाया था और महल के अंदर उनके साथ जाति आदि के नाम पर कभी भी भेदभाव नहीं किया गया। भीटी बाजार के वयोवृद्ध रामयज्ञ तिवारी ने कहा कि यह क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि ऐसे ऐतिहासिक व्यक्ति की तस्वीर तक मौजूद नहीं है।

यूपी में अखिलेश यादव ने की कॉन्ग्रेस को मात्र 11 सीटें देने की घोषणा, पार्टी ने नकारा… दक्षिण में DMK ने कहा – जनता की सेवा नहीं, सिर्फ सीट की राजनीति कर रही कॉन्ग्रेस

जहाँ एक तरफ बिहार में I.N.D.I. गठबंधन टूट गया है, वहीं उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में भी कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए स्थिति ठीक नहीं है। पहले मीडिया में खबर आई कि अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस को 11 सीटें देकर उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए गठबंधन फाइनल कर लिया है। अखिलेश यादव ने इसकी घोषणा कर डाली, लेकिन फिर कॉन्ग्रेस ने इसे नकार दिया। उधर तमिलनाडु में गठबंधन साथी DMK ने भी कॉन्ग्रेस पार्टी को गीदड़-भभकी देनी शुरू कर दी है।

अखिलेश यादव की डील कॉन्ग्रेस को मंजूर नहीं

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने शनिवार (27 जनवरी, 2024) को घोषणा कर दी कि कॉन्ग्रेस यूपी में 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालाँकि, अब ‘इंडिया टुडे’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने इस फॉर्मूले को नकार दिया है। अखिलेश यादव ने गठबंधन का ऐलान करने हुए जीत का दावा किया है। यूपी में कॉन्ग्रेस की यूनिट ने इस डील को नकारते हुए कहा है कि ये निर्णय अखिलेश यादव का है, कॉन्ग्रेस पार्टी का नहीं। यूपी में सबसे ज़्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में NDA ने 62 सीटें अपने नाम की थी। वहीं सपा-बसपा गठबंधन जहाँ 15 सीटों पर सिमट गई थी, कॉन्ग्रेस को मात्र 1 सीट से संतोष करना पड़ा था। 1 दिन पहले ही एक इंटरव्यू में अखिलेश यादव ने I.N.D.I. गठबंधन में स्थिति ठीक न होने के लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था। कॉन्ग्रेस यूपी में 50 लोकसभा सीटों पर लड़ने का दावा करती आई है। अब सपा कह रही है कि 11 सीटों वाली बात सिर्फ प्रस्ताव थी, कॉन्ग्रेस अगर जिताऊ उम्मीदवारों के बारे में बताए तो सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

तमिलनाडु में DMK ने भी दिखाया धौंस

उधर तमिलनाडु में डीएमके ने कहा है कि कॉन्ग्रेस सिर्फ लोकसभा चुनाव में अधिक सीटों के लिए पार्टी चला रही है। मंत्री राजा कन्नप्पन ने कहा कि कॉन्ग्रेस एक बड़ी और पुरानी पार्टी है, लेकिन उसने अब अपनी ताकत खो दी है। उन्होंने पूछा कि केवल चुनाव लड़ने के लिए सीटें लेने का क्या फायदा है? उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस इसीलिए काम नहीं करती कि जनता का अच्छा हो, जब चुनाव आता है तो वो आ जाते हैं। लोगों के बीच ये सब काम नहीं करता।”

उन्होंने गुरुवार (24 जनवरी, 2024) को पुडुचेरी में भाषा संघर्ष में मरे लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने हुए ये बातें कही। मंत्री ने कहा कि भाजपा को हम देख लेंगे। बता दें कि रविवार को DMK-कॉन्ग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत होनी है। उधर पश्चिम बंगाल में TMC और पंजाब में AAP ने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया है। बिहार में JDU छिटक गई है। जुलाई 2023 में बना ये गठबंधन अब लगभग बिखर गया है।

अम्बेडकर पूजा में नहीं लिया हिस्सा तो छात्र को नंगा घुमाया, मारा पीटा, गालियाँ दी, वीडियो बनाकर किया वायरल, कॉन्ग्रेस राज वाले कर्नाटक की घटना

कर्नाटक के कलबुर्गी में एक छात्र को अम्बेडकर पूजा में हिस्सा नहीं लेने पर नंगा करके शहर भर में घुमाया गया है। इस दौरान उसके हाथ में डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर पकड़ाया था। नंगा परेड निकालने के दौरान नारे लगाए गए और उसे मारने-पीटने के साथ-साथ बेइज्जत भी किया गया। बाद में इसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, कलबुर्गी के एक कॉलेज में पढ़ने वाले हॉस्टल के कुछ छात्रों ने बृहस्पतिवार (25 जनवरी 2024) को अम्बेडकर पूजा का आयोजन किया था। इसी हॉस्टल में पीड़ित छात्र भी रहता था। छात्र एनवी कॉलेज में विज्ञान की पढ़ता करता है। उसे अम्बेडकर पूजा में शामिल होने के लिए कहा गया था। हालाँकि, छात्र ने निजी कारणों के चलते इसमें भाग लेने से मना कर दिया।

इसके बाद पूजा का आयोजन करने वाले छात्रों ने अन्य छात्रों के साथ मिलकर उसकी पिटाई कर दी। इस दौरान उसे गालियाँ भी दी गईं। इससे भी जब आरोपित छात्रों का मन नहीं भरा तो उन्होंने छात्र को नंगा करके कलबुर्गी की सड़कों पर परेड निकाली। इस दौरान पीड़ित के हाथ में अम्बेडकर की तस्वीर भी पकड़ा दी। नग्न परेड निकालने के दौरान जब आरोपित छात्रों ने पुलिस को देखा तो पीड़ित को छोड़कर भाग गए।

इस दौरान आरोपित पीड़ित छात्र का वीडियो भी बनाते रहे। बाद में उन्होंने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बताया जा रहा है कि 12वीं में पढ़ने वाला 19 वर्षीय पीड़ित छात्र जिस हॉस्टल में रहता था, वह सरकार द्वारा संचालित है। पीड़ित छात्र लम्बानी समुदाय से ताल्लुक रखता है। यह समुदाय बंजारा श्रेणी में आता है। उसके पिता काम करने के लिए मुंबई में रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्टर अम्बेडकर की साप्ताहिक पूजा आयोजित करने वाले जितने भी छात्रों ने पीड़ित के साथ मारपीट की और उसकी नग्न परेड निकाली, वे सभी नाबालिग हैं। कुछ रिपोर्ट में पीड़ित छात्र को भी नाबालिग बताया गया है। इस घटना के बाद पीड़ित छात्र के पिता नीलकंठ राठौड़ ने कर्नाटक के कलबुर्गी पहुँचकर अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

पीड़ित के पिता नीलकंठ राठौड़ की शिकातय पर आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। है। आरोपितों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 341, 323, 504, 505 , 506 और 149 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। अभी तक इन आरोपितों की गिरफ्तारी के विषय में कोई जानकारी नहीं सामने आई है।

बता दें कि बीते कुछ समय में कर्नाटक में हिंसा की कई घटनाएँ हुई हैं। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में इन घटनाओं पर रोक लगाने में विफल रही है। इससे पहले बेलगावी में एक महिला को भी नग्न परेड करवाई गई थी। वहीं, हाल ही में एक हिन्दू पुरुष के साथ दिखने पर एक मुस्लिम महिला के साथ 7 मुस्लिम युवकों ने उसके साथ बलात्कार किया था।

₹3570 करोड़ की लागत से बनेगा 68 km का बाईपास, रामलला के भक्तों के लिए NHAI का प्लान: अयोध्या ही नहीं, लखनऊ, बस्ती और गोंडा को भी फायदा

अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही श्रद्धा का सैलाब आया हुआ है, बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। ऐसे में रामलला की जन्मभूमि आने वाले भक्तों को कोई तकलीफ हो और न ही वहाँ रहने वालों को भी सुविधाएँ मिले, इसके लिए ‘सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय’ (NHAI) ने 68 किलोमीटर बाईपास का प्लान बनाया है।

इस बाईपास के बनने से अयोध्या और आसपास के इलाकों में भीड़भाड़ कम होगी और ये इलाका जाम से फ्री रहेगा। NHAI ने 3570 करोड़ रुपए की लागत वाले इस 68 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास के निर्माण के लिए केंद्र से खास मंजूरी माँगी है। इस कड़ी में NHAI ने इस लखनऊ, बस्ती और गोंडा जिलों को कवर करने जा रहे इस 4/6 लेन राजमार्ग के लिए बिड्स आमंत्रित की हैं। इस प्रोजेक्ट को उत्तरी अयोध्या बाईपास और दक्षिण अयोध्या बाईपास नामक दो भागों में बाँटा गया है। ये बाईपास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मोड पर बनेगा।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद क्षेत्र में यात्री और मालवाहक वाहनों की आवाजाही में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए इस बाईपास को बनाने के बारे में सोचा गया है। अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में हर रोज के मौजूदा ट्रैफिक 2023 ,इ 89,023 तक बढ़कर हर रोज 2.17 लाख पहुँचने की संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बाईपास प्रोजेक्ट के लिए खास मंजूरी माँगी गई है। बता दें कि वित्त मंत्रालय ने परिवहन मंत्रालय से फिलहाल भारतमाला के तहत किसी भी नए प्रोजेक्ट पर कुछ वक्त तक आगे नहीं बढ़ने को कहा था।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय का कहना है चूँकि प्रोजेक्ट की लागत 1000 करोड़ रुपए से अधिक हैं, इसलिए मंत्रालय को PPP प्रोजेक्ट का मूल्यांकन करने वाली शीर्ष कमेटी से मंजूरी लेने की जरूरत है। वहीं NHAI ढाई साल में इस बाईपास का निर्माण पूरा करना चाहता है। अगर NHAI का ये प्रोजेक्ट तय समयसीमा यानी ढाई साल में पूरा हो जाता है तो लखनऊ, बस्ती और गोंडा इन तीन जिलों में पर्यटक और तीर्थ स्थलों सहित आर्थिक, सामाजिक और आर्थिक सप्लाई चेन मैनेजमेंट के केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी में सुविधा होगी।

अयोध्या बाईपास प्रोजेक्ट अयोध्या रेलवे स्टेशन, सोहवाल रेलवे स्टेशन, एएन देव नगर रेलवे स्टेशन और अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ ही अयोध्या एयरपोर्ट जैसे इंटीग्रेटेड बुनियादी ढाँचे के साथ मल्टी-मॉडलिटी को बढ़ाएगा।

बता दें कि अयोध्या उत्तर प्रदेश के 2 आर्थिक केंद्रों लखनऊ और गोरखपुर के बीच में है। चमड़ा, इंजीनियरिंग के सामान, भवन निर्माण सामग्री, लोहा और स्टील जैसे जरूरी सामान अयोध्या से होकर गुजरते हैं, इसलिए इस बाईपास के बनने से माल की आपूर्ति बगैर बाधा के हो पाएगी।

इसके साथ ही इससे रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या राम मंदिर आने वाले भक्तों को भी सुविधा होगी, क्योंकि यहाँ भक्तों के आने की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। उत्तर प्रदेश अयोध्या जोन के आईजी प्रवीण कुमार ने कहा, “यहाँ भारी संख्या में लोग आ रहे हैं। कल भी 3 लाख से अधिक लोगों ने दर्शन किए हैं। हम सभी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करा रहे हैं। प्रशासन द्वारा भी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं।”

2 डिप्टी CM, विधानसभा स्पीकर भी… रात तक नीतीश को पहुँचेगा समर्थन पत्र: बिहार में BJP की ‘जीत’ पर मीडिया रिपोर्ट – कल 3 बजे शपथग्रहण

बिहार में सरकार बदलने वाली है, लेकिन नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहेंगे। अंतर सिर्फ इतना होगा कि जदयू-राजद की जगह अब सत्ता में भाजपा-जदयू गठबंधन आ जाएगा। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की है। हालाँकि, उन्होंने बताया है कि वो राज्यपाल को मोतिहारी के वार्षिक कृषि मेले में आमंत्रित करने के लिए गए थे। ये भी सामने आया है कि शनिवार (27 जनवरी, 2024) को रात तक नीतीश कुमार को भाजपा अपना समर्थन पत्र सौंप देगी।

भाजपा विधानसभा अध्यक्ष का पद अपने पास रहेगी। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पूर्व में बिहार की ही तर्ज पर 2 उप-मुख्यमंत्री बनाए जाएँगे। उधर लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा भी अमित शाह से मिले हैं। वहीं बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े राजधानी पटना पहुँचे हैं, जहाँ उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की ‘न्याय यात्रा’ ‘I.N.D.I. गठबंधन तोड़ो’ यात्रा है।

बिहार के स्थानीय नेताओं के साथ भाजपा शीर्ष नेतृत्व की जो बैठक हुई है, उसमें तय किया गया कि 2020 के फॉर्मूले पर ही भाजपा सरकार में शामिल होगी। यानी, नीतीश कुमार बिहार में अगले विधानसभा चुनाव तक CM बने रहेंगे। उधर राजद कोटे के मंत्रियों ने अपने तय कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। सभी मंत्री जल्दी-जल्दी अपने विभागीय कार्य निपटा रहे हैं। उधर कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने 20 भाजपा विधायकों के अपने संपर्क में होने का दावा किया है।

वेटनरी ग्राउंड में अग्निशमन विभाग के एक कार्यक्रम में फायर ब्रिग्रेड की गाड़ियों को सीएम नीतीश कुमार ने हरी झंडी दिखाई, जिसमें राजद कोटे के मंत्री शाहनवाज़ नहीं पहुँचे। वहीं जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि राजद के मन में पाप है। उन्होंने कहा कि जदयू के सभी विधायक एकजुट हैं। वहीं RJD नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। उधर बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने HAM (सेक्युलर) के अध्यक्ष जीतन राम माँझी से मुलाकात की है

नीतीश कुमार ने कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राजद सुप्रीमो लालू यादव के फोन कॉल तक उठाने बंद कर दिए हैं। बिहार के हालत पर खड़गे-लालू में बातचीत हुई है। उधर बक्सर के एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और नीतीश कुमार खुल कर बात करते हुए दिखे। राजद ने अपने विधायकों को बैठक के लिए बुलाया। ताज़ा सूचना है कि रविवार को दोपहर के 3 बजे नीतीश कुमार का शपथग्रहण होगा।

‘PM मोदी + गाय का गोबर’ से उड़ाया मजाक, केरल हाईकोर्ट के 2 कर्मचारी को किया गया सस्पेंड

केरल हाई कोर्ट ने अपने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। इन दोनों ने 26 जनवरी 2024 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर कोर्ट के ही सभागार में किए गए एक नाटक में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार का मखौल उड़ाया था। हाई कोर्ट ने इन दोनों को तुरंत निलंबित करने के साथ ही इसे लेकर जाँच बैठा दी है। कोर्ट ने कहा है कि जाँच पूरी होने तक दोनों कर्मचारी निलंबित ही रहेंगे। केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एजे देसाई के आदेश पर सहायक रजिस्ट्रार सुधीश टीए और कोर्ट कीपर सुधीश पीएम को निलंबित कर दिया गया है।

हाईकोर्ट ने शुक्रवार (26 जनवरी 2024) को दिए अपने आदेश में कहा कि इस नाटक की सामग्री ‘अपमानजनक’ थी और इसमें सरकार की आलोचना की गई थी। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक, “हाईकोर्ट ने जनहित में यह जरूरी समझा है कि सुधीश टीए, सहायक रजिस्ट्रार एचआर ग्रेड और सुधीश पीएम, कोर्ट कीपर (हायर ग्रेड) को लंबित जाँच और अनुशासनात्मक कार्रवाई तक हाई कोर्ट सेवा से निलंबित किया जाना चाहिए। ये मामला गणतंत्र दिवस समारोह, 2024 के दौरान हाई कोर्ट सभागार में किए गए स्टेज शो में सरकार के खिलाफ अपमानजनक सामग्री और आलोचना से संबंधित है।”

केरल हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी फोटो साभार: वर्डिक्टम

इसके साथ ही रजिस्ट्रार (प्रशासन) को यह भी निर्देश दिया गया है कि उन हालातों के बारे में विस्तृत ब्यौरा पेश करें, जिनमें ये घटना हुई। हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार (सतर्कता) को घटना की जाँच करने और जल्द से जल्द एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

लीगल सेल और भारतीय अभिभाषक परिषद ने इस नाटक की शिकायत भारत के मुख्य न्यायाधीश, केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री और खुद प्रधानमंत्री से की थी। बता दें कि 26 जनवरी, 2024 को गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर नाटक का मंचन हुआ था।

कहा जा रहा है कि इस नाटक के डायलॉग्स हाईकोर्ट सहायक रजिस्ट्रार सुधीश ने लिखे थे। एक स्वतंत्र कानूनी न्यूज वेबसाइट वर्डिक्टम के मुताबिक, मलयालम नाटक में पीएम मोदी से मिलते-जुलते किरदार का इस्तेमाल कर उनका मजाक उड़ाया गया। पीएम मोदी से मिलता-जुलता किरदार इसमें कहता है, “अगर मैं कहूँ कि इसका औषधीय महत्व है, तो मेरे अनुयायी गाय का गोबर भी खाएँगे। यही मेरी ताकत है।”

इसी नाटक में एक किरदार कहता है, “मैं ‘प्यारा’ कहता हूँ, लेकिन जनता ‘पोरा’ (मलयालम में काफी नहीं) सुनती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे अपने देश से प्यार नहीं करते। गद्दार।” बताते चलें कि पीए मोदी अक्सर जनता को ‘मेरे प्यारे देशवासियों’ कहकर संबोधित करते हैं। इसके अलावा पीएम मोदी बना किरदार का एक जगह यह डायलॉग भी है – “मैंने दुनिया घुमने की खातिर परिवार तक को छोड़ दिया, फिर भी लोग मेरे लिए कृतज्ञ नहीं हैं।”

बिहार में हर तरफ राजनीतिक चक्रव्यूह: नीतीश कुमार ने राजद कोटे के मंत्रियों के निर्णय पर लगाई रोक, तेजस्वी के मंत्री ने रद्द किए कार्यक्रम

बिहार में राजनीतिक ड्रामा अपने चरम पर है। कहा जा रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज शनिवार (27 जनवरी 2024) को कभी भी अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं, राजद के नेता एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि वे बिहार में आसानी से तख्ता पलट नहीं होने देंगे। उधर, विधायकों को टूट के आसार के बीच कॉन्ग्रेस के 13 विधायकों के मोबाइल बंद हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार कभी महागठबंधन से औपचारिक नाता तोड़ सकते हैं। वहीं, राजद ने राजभवन में अपने सरकार के समर्थन में विधायकों की परेड कराने की बात कही है। इसको लेकर राजभवन के सामने बैरेकेडिंग शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, जदयू, राजद और भाजपा ने अपने-अपने नेताओं के साथ आज बैठक रखी है।

उधर, नीतीश कुमार बक्सर जिले के ब्रह्मपुर में भगवान शिव के मंदिर के विकास के लिए शिलान्यास कार्यक्रम में पहुँचे हैं। वहाँ लगाए गए पोस्टर में तेजस्वी की तस्वीर भी नदारद है। इससे पहले शुक्रवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में तेजस्वी यादव अनुपस्थित रहे थे। इसके बाद एक कुर्सी पर तेजस्वी के नाम की लगी पर्ची को हटाकर अशोक चौधरी बैठ गए थे।

सरकार गिरने की आशंका के बीच RJD कोटे के मंत्रियों ने अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और अपने विभागीय कामों को जल्दी-जल्दी निपटाने में लगे हैं। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने नीतीश कैबिनेट में राजद कोटे के मंत्रियों के विभाग के किसी भी फाइल पर किसी भी तरह के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

उधर, कॉन्ग्रेस के विधायकों में भी फूट की खबर आ रही है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने इन खबर को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा, “हमारे विधायक पार्टी के साथ चट्टानी एकता के साथ खड़े हैं। कॉन्ग्रेस विधायकों में फूट की खबर सूरज के पश्चिम में उगने की तरह है। इससे पहले खबर आई थी कि कॉन्ग्रेस के 13 विधायकों के मोबाइल फोन स्वीच ऑफ हैं।

बिहार कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने बीती रात हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतनराम माँझी से गोपनीय मुलाकात की थी। सूत्रों ने हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि उन्हें महागठबंधन में शामिल होने पर उपमुख्यमंत्री पद और दो मंत्री पद देने का प्रस्ताव दिया गया है। अखिलेश ने माँझी के सामने नीतीश द्वारा विधानसभा में उनके अपमान का भी मुद्दा उठाया।

अखिलेश सिंह ने दावा किया कि भाजपा के 20 विधायक उनके संपर्क में हैं। वहीं, जेडीयू सांसद सुनील कुमार पिंटू ने कहा कि बिहार के विकास के लिए पीएम मोदी और सीएम नीतीश की जोड़ी जरूरी है।  उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को राजद के साथ काम करने की आजादी नहीं थी, इसलिए वो भाजपा के साथ आ रहे हैं। उन्होंने इस बार के गठबंधन को स्थाई बताया।

उधर, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने दावा किया कि बहुमत का आँकड़ा उनके पास है। उन्होंने कहा, “बिहार में हम सबसे बड़ी पार्टी हैं और आज राजद विधायक दल की बैठक में फैसला लिया जाएगा।” मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आरजेडी आज अपने विधायकों को राज्यपाल के सामने परेड करा सकती है।