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BJP के साथ बिहार में सरकार बनाएँगे नीतीश कुमार, सुशील मोदी होंगे डिप्टी सीएम: रिपोर्ट्स में दावा, लालू ने 5 बार किया कॉल, लेकिन नहीं दिया जवाब

बिहार की राजनीति में फिर से परिवर्तन की सुगबुगाहट है। नीतीश कुमार पहले से ही मुख्यमंत्री हैं, लेकिन वे फिर से मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। इसके कयास लगाए जा रहे हैं। ये नौवाँ मौका होगा, जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। ये अलग बात है कि उनके साथी वक्त के साथ बदलते रहते हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि वे 28 जनवरी 2024 को एक बार फिर से भाजपा के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाएँगे। खबर ये भी है कि नीतीश कुमार को मनाने के लिए उनके सहयोगी राजद के सुप्रीमो लालू यादव ने उन्हें पाँच बार फोन किया, लेकिन उन्होंने बात करने से साफ मना कर दिया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट की मानें तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 28 जनवरी 2024 को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं। इस बार वे जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के साथ सरकार बनाएँगे। इस गठबंधन सरकार में भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी उप-मुख्यमंत्री बनेंगे। भाजपा-जदयू की गठबंधन सरकार में सुशील मोदी पहले भी उपमुख्यमंत्री रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नीतीश कुमार महागठबंधन से बाहर निकलने का फैसला कर लिया है। इसके पीछे मतभेद बड़ा कारण बताया जा रहा है। INDI गठबंधन में राष्ट्रीय संयोजक नहीं बनाए जाने से वे नाराज बताए जा रहे हैं।

जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार कॉन्ग्रेस से सुलह के मूड में नहीं हैं। उनकी नाराजगी की बड़ी वजह इंडी गठबंधन में उन्हें संयोजक पद नहीं मिलने के अलावा सीटों के बँटवारे में देरी भी शामिल है। जेडीयू की नजर इंडी गठबंधन के 17 (16+1) लोकसभा सीटों पर है। इस मामले में कॉन्ग्रेस ढील नहीं दे रही है। वहीं, इंडी गठबंधन का संयोजक पद भी कॉन्ग्रेस के पास जा चुका है। विधानसभा में पहले से ही कम विधायकों की वजह से नीतीश कुमार में छटपटाहट है। ऐसे में सांसदों की कमी के बाद वे अपनी राजनीतिक ताकत कम नहीं होने देना चाहते। लोकसभा चुनाव के साल भर बाद ही बिहार विधानसभा का भी चुनाव है।

नीतीश कुमार और उनकी पार्टी हर जगह ये संकेत दे रही है कि नीतीश कुमार महागठबंधन से दूर जा रहे हैं। राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में भी तेजस्वी यादव नदारद दिखे। तेजस्वी यादव के नाम की पर्ची लगी कुर्सी पर बैठने के लिए अशोक चौधरी ने उसे हटा दी और फिर वो नीतीश कुमार के साथ गुफ्तगू करते देखे गए। वहीं, बाद में पत्रकारों ने नीतीश कुमार से पूछा कि तेजस्वी यादव कार्यक्रम में क्यों नहीं आए तो नीतीश कुमार ने कहा कि ये तो उन्हीं से पूछा जाना चाहिए, जो कार्यक्रम में नहीं आए। जाहिर है कि नीतीश कुमार अब तेजस्वी का नाम भी नहीं ले रहे हैं।

इस बीच अपने बेटे की कुर्सी बचाने के लिए राजद सुप्रीमो लालू यादव सीधे मैदान में आ गए। उन्होंने नीतीश कुमार से बात करने के लिए पाँच बार फोन मिलाया, लेकिन नीतीश कुमार ने उनसे बात करने से साफ इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि लालू यादव ने नीतीश कुमार को लैंडलाइन से भी फोन किया, लेकिन उस पर भी बात नहीं हुई है। दरअसल, लालू यादव इस पूरे मामले में नीतीश कुमार से बात करना चाह रहे थे, लेकिन नीतीश कुमार ने साफ संकेत दे दिया कि वे अब किसी से सुलह के मूड में नहीं हैं।

राजद के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि भाजपा के दफ़्तर के चपरासी ने भी कह दिया है नीतीश कुमार को पार्टी में नहीं लेंगे, फिर कैसे वो जा सकते है। तिवारी ने आगे कहा, “नीतीश कुमार से मिलने के लिए मैंने कल समय माँगा था, लेकिन अभी तक नहीं समय मिला है। हमने नीतीश से कहा भी कि बात क्या है कि मेरे लिए समय नहीं है। इस पर उन्होंने कहा कि वे आज (26 जनवरी को) बताते हैं। हमें अभी भी भरोसा नहीं है कि नीतीश कुमार इधर से उधर चले जाएँगे।”

लालू यादव भी चल रहे अपनी चाल

सूत्रों की मानें तो लालू यादव अब नीतीश कुमार से अलगाव की सूरत में किसी भी शर्त पर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाना चाहेंगे। इसके लिए नीतीश कुमार के पूर्व साथी जीतनराम माँझी, कॉन्ग्रेस, वाम दलों, एआईएमआईएम के एक विधायक के अलावा एक निर्दलीय विधायक को भी अपनी ओर करना चाहेंगे। वहीं, दूसरी ओर चर्चा ये भी है कि कॉन्ग्रेस के 19 में से 10 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। वो कॉन्ग्रेस के भीतर ही अलग गुट भी बना सकते हैं। ऐसे में अगले दो दिन सभी दल अपनी जोर-आजमाइश करने वाले हैं।

‘माँ का दूध पीया है तो आकर दिखाए पन्नू, औकात बता दूँगी’: दुर्ग्याणा मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी पर बिफरीं पंजाब की पूर्व मंत्री, बोलीं- मैं गुरु तेगबहादुर की बेटी

पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और दुर्ग्याणा मंदिर कमिटी की अध्यक्ष लक्ष्मी कांता चावला ने खालिस्तानी आतंकी और अलगाववादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। 26 जनवरी को एक बार फिर मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी भरा कॉल आने के बाद भाजपा नेता चावला ने कहा कि अगर पन्नू में हिम्मत है तो वह दुर्ग्याणा मंदिर आकर दिखाए।

दरअसल दुर्ग्याणा मंदिर कमिटी के प्रबंधक राम पाठक ने कहा कि 25 जनवरी 2024 को धमकी भरे दो फोन कॉल आए। पाठक ने मीडिया को बताया कि कॉल करने वाले ने मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। इसके साथ ही कमिटी की अध्यक्ष लक्ष्मी कांता चावला और सचिव अरुण खन्ना को गोली मारने की भी बात कही गई।

इस धमकी का जवाब अब अयोध्या राम मंदिर से लौटकर आई लक्ष्मी कांता चावला ने दिया है। उन्होंने कहा है कि खालिस्तानी आतंकी पन्नू की धमकियों पर उन्हें तरस आता है। वह लाइमलाइट में रहने के लिए ये सब करता है। उन्होंने कहा, “हमारा देश इतना मजबूत है कि उसे उसकी औकात बताने में देर नहीं करेंगे, बस एक बार वो भारत आ तो जाए।”

चावला ने आगे कहा कि गुरपतवंत का अर्थ ‘गुरु के उपदेश का मान रखने वाला’ होता है। उन्होंने कहा, “पन्नू सिख भी नहीं है। अगर वह सिख होता तो युवाओं को गुमराह कर और पैसों का लालच देकर गलत काम नहीं करवाता। उसे पैसे मिल रहे हैं। कोई विदेशी एजेंसी उससे ये करवा रही है। विदेश में बैठ वो देश का माहौल खराब करना चाहता है।”

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, चावला ने कहा कि अगर पन्नू ने माँ का दूध पीया है तो एक बार दुर्ग्याणा आ जाए। उसे प्रसाद चखाया जाएगा। उससे पूछा जाएगा कि किसके कहने पर ये आग लगाने वाली बातें कर रहा है। उन्होंने कहा कि बीते 40 साल से ऐसी धमकियाँ आ रही हैं, लेकिन वे इससे डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने सलाह दी कि पन्नू को अपना नाम बदल लेना चाहिए।

लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि वो खुद को गुरु तेगबहादुर की बेटी कहती हैं और वो डरने वाली नहीं हैं। पंजाब ने कई साल संताप झेला है। उन्होंने कहा कि पन्नू को अब समझ जाना चाहिए कि पंजाब में सांप्रदायिक माहौल नहीं खराब किया जा सकता। उन्होंने देश और पंजाब के युवाओं से गलत कदम नहीं उठाने का भी आग्रह किया।

बता दें कि इससे पहले 22 जनवरी 2024 को खालिस्तान समर्थक पन्नू ने एक वीडियो जारी कर दुर्ग्याणा मंदिर बंद करके इसकी चाबियाँ हरमंदिर साहिब को सौंपने की बात कही थी। इसके बाद अमृतसर पुलिस ने पन्नू के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने पन्नू के खिलाफ देश की एकता, अखंडता और माहौल खराब करने की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट में भी केस दर्ज किया है।

कौन है लक्ष्मी कांता चावला

बता दें कि 83 साल की लक्ष्मी कांता चावला पंजाब सरकार की पूर्व कैबिनेट मंत्री रही हैं। अभी वह बीजेपी की सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक कॉलेज लेक्चरर थीं। साल 2022 में 496 वोट पाकर वह श्री दुर्ग्याणा मंदिर की पहली महिला प्रधान बनी थीं। उनके प्रतिद्वंद्वी कॉन्ग्रेस पार्टी के समर्थक रमेश शर्मा को सिर्फ 350 वोट मिले थे।

‘जब वक्त हमारा आएगा, तब सिर धड़ से अलग किए जाएँगे…’: धमकी दे रहा था मोहम्मद कैफ, राम मंदिर तोड़ने की बात कर रहा था इरशाद: यूपी पुलिस ने दबोचा

अयोध्या में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी बाबरी का विलाप जारी है और ऐसा करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। हालाँकि, बाबरी के नाम पर समाज में द्वेष फैलाने के खिलाफ यूपी पुलिस त्वरित कार्रवाई भी कर रही है। इस बीच अयोध्या के राम मंदिर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले इरशाद अहमद को बिजनौर और मोहम्मद कैफ को गोंडा से गिरफ्तार किया गया है।

इरशाद ने बाबरी के नाम पर एक वीडियो बनाकर वायरल किया था। इसमें उसने राम मंदिर को तोड़कर फिर से बाबरी खड़ा करने की बात कही थी। इस मामले में बिजनौर पुलिस ने इरशाद के साथ-साथ उसके दो साथियों को भी गिरफ्तार किया है। वहीं, गोंडा का मोहम्मद कैफ बाबरी को लेकर आतंकी संगठन आईएसआईएस की तर्ज पर ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दे रहा था।

दरअसल, ये उन कट्टरपंथियों के बीच के कुछ नमूने हैं जो अदालत के आदेश के बाद बने राम मंदिर को तोड़कर फिर से बाबरी ढाँचा खड़ा करने का सपना पाले बैठे हैं। इसके लिए वे हिंदुओं को खुलेआम धमकी भी दे रहे हैं। हालाँकि, इनके सपनों के साथ ही इन्हें भी यूपी पुलिस जेल की चहारदीवारी के पीछे भेज रही है।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनौर में एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में इरशाद नाम का युवक बोल रहा है, “हम राम मंदिर तोड़ेंगे और फिर से बाबरी मस्जिद बनाएँगे।” इसके अलावा भी इरशाद ने अपने वीडियो में काफी कुछ कहा है। वो हिंदुओं को ललकारता भी दिख रहा है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर आया तो लोग भड़क उठे।

पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को भाँपते हुए तुरंत कार्रवाई की और इरशाद अहमद को गिरफ्तार कर लिया। इरशाद बिजनौर के धामपुर स्थित नई सराय का रहने वाला है। पुलिस ने उसके दो साथियों- भूरा और अजमल को भी गिरफ्तार किया है। तीनों के खिलाफ धारा 153 ए/295ए/505 (1) सी 502 और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया गया है।

वहीं, मोहम्मद कैफ गोंडा जिले के नवाबगंज स्थित चाईटोला मोहल्ले का रहना वाला है। वह कैफ_नवाबजादा नाम से इंस्ट्राग्राम आईडी चलाता है। मोहम्मद कैफ ने अपनी आईडी से 23 जनवरी 2024 को बाबरी ढाँचे की एक तस्वीर लगाई गई थी। इसके साथ ही हिंदुओं को धमकाया था, “सब्र… जब वक्त हमारा आएगा, तब सिर धड़ से अलग किए जाएँगे।”

मोहम्मद कैफ कैफ ने अपनी पोस्ट में लोगों को जान से मारने की भी धमकी दी थी। उसके तेवर और भाषा से साफ है कि वह ‘सर तन से जुदा’ गैंग से सिर्फ प्रेरित है। ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी में उसकी धमकियों के साथ ही उसके इंस्टाग्राम पर लगाए गए पोस्ट के बारे में भी बताया गया है।

बंगाल में पहले ममता बनर्जी ने हाथ झटका, अब राहुल गाँधी की यात्रा पर लगाया ब्रेक: सिलीगुड़ी में घुसने से रोका, कहा- मुझे इसके बारे में बताया तक नहीं

I.N.D.I गठबंधन को बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जोरदार झटका दिया है। सीएम ममता बनर्जी ने राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को सिलीगुड़ी में प्रवेश नहीं देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही साफ किया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) इस यात्रा में शामिल नहीं होगी।

इसके पीछे ममता बनर्जी ने तर्क दिया है कि भारत जोड़ो यात्रा के बारे में बंगाल की सरकार को सूचित तक नहीं किया गया। खैर, ममता बनर्जी की कॉन्ग्रेस से किस बात को लेकर नाराजगी है, ये तो जगजाहिर है। दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर पश्चिम बंगाल में दोनों पार्टियों के बीच सीट बँटवारे पर एकराय नहीं बन पाई है।

बता दें कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के 12वें दिन असम से उत्तरी पश्चिम बंगाल के कूच बिहार क्षेत्र में बसीरहाट पहुँचने पर इस यात्रा को रोक दिया गया। इसके बाद फिर राहुल गाँधी दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दरअसल, राहुल गाँधी 25 जनवरी 2024 की सुबह यात्रा का नेतृत्व करते हुए बसीरहाट पहुँचे थे।

अब यह यात्रा 26 और 27 जनवरी 2024 को आगे नहीं बढ़ेगी। इसके बाद 28 जनवरी 2024 को यह यात्रा बंगाल के सिलीगुड़ी से होकर गुजरने वाली थी, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार ने इसकी इजाजत देने से मना कर दिया। बता दें कि राहुल गाँधी की यह यात्रा मणिपुर से शुरू हुई है और यह मुंबई तक चलेगी। इस दौरान 6700 किलोमीटर से अधिक का सफर तय किया जाएगा।

राहुल गाँधी की न्याय यात्रा रोकने को लेकर बंगाल प्रशासन ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि उसी तारीख को विद्यार्थियों की परीक्षा होनी है। दरअसल, 25 जनवरी को राहुल गाँधी के ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के लिए पूरे दिन के कार्यक्रम का ऐलान किया था। हालाँकि, राहुल गाँधी ने बसीरहाट में एक छोटी बैठक और जिला मुख्यालय पर एक रोड शो करने के बाद दिल्ली के लिए रवाना हो गए। .

इन कार्यक्रमों में राहुल गाँधी ने TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने के ऐलान के बारे में बातें कीं। बंगाल में राहुल गाँधी की यात्रा बीरभूम, उत्तर दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और अलीपुरद्वार जिले में प्रस्तावित है। 29 जनवरी 2024 को पड़ोसी राज्य बिहार में प्रवेश करने से पहले इस यात्रा में थोड़ा बदलाव किया गया है।

‘मुझे बताने की जहमत नहीं उठाई’

बता दें कि सीएम बनर्जी ने लोकसभा चुनाव में विपक्षी I.N.D.I गठबंधन से अलग अकेले उतरने का फैसला किया। अगले कुछ महीनों में होने जा रहे आम चुनाव के लिए सीट बँटवारे पर सहमति नहीं बन पाने के बाद दोनों दलों के रिश्तों में खटास दिखने लगी है। ममता बनर्जी ने यहाँ तक कह दिया कि उनकी पार्टी INDI गठबंधन में रहने का पुनर्मूल्यांकन कर रही है।

TMC पहले ही कह चुकी है कि वह बंगाल में कॉन्ग्रेस की यात्रा का हिस्सा नहीं बनेगी। TMC सुप्रीमो ने आरोप लगाया, “उन्होंने मुझे शिष्टाचार के नाते भी यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि वे पश्चिम बंगाल आ रहे हैं, भले ही मैं I.N.D.I गठबंधन हिस्सा हूँ। इसलिए जहाँ तक बंगाल का सवाल है, मेरे साथ उनका कोई संबंध नहीं है।”

ये भी माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस के राज्य अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की लगातार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की आलोचना के परिणामस्वरूप TMC ने कॉन्ग्रेस से किनारा कर लिया है। वहीं, दिलचस्प बात यह है कि राज्य में विपक्षी गठबंधन में शामिल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सहित वामपंथी दल इस यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं।

इस न्याय यात्रा के बीच I.N.D.I गठबंधन में बिखराव का सफर शुरू हो चुका है। इसके तुरंत बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी पंजाब में अकेले चुनाव लड़ेगी। वहीं, I.N.D.I गठबंधन को खड़ा करने वाले नीतीश कुमार अब भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन की ओर झुकते दिखाई दे रहे हैं।

ज्ञानवापी को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर हिंदुओं को दे देना चाहिए: ASI सर्वे रिपोर्ट का हवाला दे बोले वकील हरिशंकर जैन, कहा- कानून बनाए सरकार, जाएँगे सुप्रीम कोर्ट

ज्ञानवापी की ASI रिपोर्ट आने के बाद हिंदू पक्ष के वकील हरि शंकर जैन ने कहा है कि वो लोग अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उनका कहना है कि रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि उस ढाँचे की जगह हिंदू मंदिर था। सरकार को उसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना चाहिए।

वकील हरि शंकर जैन ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि (ज्ञानवापी मस्जिद) स्थल पर एक मंदिर मौजूद था। भारत सरकार को इस मामले में आगे कदम उठाते हुए इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करना चाहिए और कानून पारित कर पूरा क्षेत्र हिंदुओं को सौंप देना चाहिए।”

वहीं वकील विष्णु जैन एएसआई की रिपोर्ट की मुख्य लाइनें पढ़कर पूछते हैं कि क्या एएसआई ने जो अपनी रिपोर्ट दी है, जिसमें साफ तौर पर लिखा है कि मंदिर तोड़कर उस ढाँचे को खड़ा किया गया था और उसी का मलबा उस ढाँचे में लगा था, तो क्या कोई इस्लामिक स्कॉलर ये बात कह सकता है कि ये सही हुआ था?

वह कहते हैं कि मस्जिद तो वक्फ की जमीन पर बनता है और वक्फ की जमीन वो होती है जो मुस्लिमों ने अपने पैसों से खरीदी हो। वहीं हिंदू धर्म के अनुसार ये बात साफ है कि एक बार अगर बार मंदिर के लिए बनाई जगह हमेशा मंदिर की ही जगह रहेगी और अंत तक सिर्फ ये मंदिर की ही प्रॉपर्टी होगी।

विष्णु जैन इस मामले में हिंदू पक्ष का पाला भारी बताते हुए कहते हैं कि राम मंदिर के समय तो खुदाई के बाद सबूत मिले कि वो जगह राम जन्मभूमि ही है लेकिन यहाँ तो ढाँचा खुद ही गवाही दे रहा है कि वो हिंदू मंदिर है। ढाँचे की पश्चिमी दीवार पर लगे हिंदू चिह्न भी यही बता रहे हैं कि हिंदू मंदिर की दीवार है किसी उस ढाँचे का भाग नहीं। खंभे भी यही कह रहे हैं कि वो हिंदू मंदिर के खंभे हैं।

विष्णु जैन कहते हैं, “सारे सबूत हमारे केस को मजबूत बनाते हैं कि हमारे धर्मस्थल पर, हमारे मंदिर पर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी द्वारा कब्जा किया गया है। हमारे मंदिर को मस्जिद की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है।”

उन्होंने कहा कि एएसआई का जो सर्वे हुआ है वो वजू खाने को छोड़कर हुआ है। उनकी यह माँग कि वजू खाने का भी एएसआई सर्वे हो, अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। अंजुमन इंतेजामिया ने जाकर कोर्ट में कहा है कि वजू खाने के सर्वे पर रोक लगे। उन्होंने कहा कि इसी सर्वे में ढाँचे से बहुत सारे देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिली हैं।

क्या-क्या प्रमाण मिले सर्वे में?

गौरतलब है कि ज्ञानवापी ढाँचे पर ASI की 839 पेज की रिपोर्ट से साफ हुआ है कि ज्ञानवापी ढाँचे की जगह कभी बड़ा हिंदू मंदिर था। इसके प्रमाण वहाँ के खंभों, दीवारों और शिलापट से मिले हैं।

दीवारों पर कन्नड़, तेलुगु, देवनागरी और ग्रंथा भाषाओं में लेखनी मिली है। वहीं भगवान शिव के 3 नाम दीवारों पर लिखे मिले हैं- जनार्दन, रुद्र और ओमेश्वर।ढाँचे के सारे खंभे भी गवाही दे रहे हैं कि वह पहले मंदिर का हिस्सा थे उन्हें मॉडिफाई करके वहाँ नए ढाँचे में शामिल किया गया। ढाँचे की पश्चिमी दीवार से भी पता चलता है कि वो मंदिर की दीवार है। दीवार के नीचे 1 हजार साल पुराने अवशेष भी मिले हैं। कुछ खंबों से हिंदू चिह्नों को मिटाने के भी प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा हनुमान जी और गणेश जी की खंडित मूर्तियाँ, दीवार पर त्रिशूल की आकृति भी मिली हैं। साथ ही तहखाने में भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिलीं।

1 ओवर में 3 नो बाॅल, टी-20 मैच में 6 गेंद पर सिर्फ 5 रन… क्या शोएब मलिक ने की फिक्सिंग? BPL टीम ने काॅन्ट्रैक्ट खत्म कर क्यों लिया यू टर्न, जानिए सब कुछ

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शोएब मलिक की यूँ तो गिनती टी-20 के टाॅप प्लेयरों में होती है, लेकिन एक मैच में उनके ‘प्रदर्शन’ ने उनको कठघरे में खड़ा कर दिया है। मलिक के मैच फिक्सिंग में शामिल होने के संदेह जताए जा रहे हैं। बांग्लादेश प्रीम‍ियर लीग (BPL) में इस ‘प्रदर्शन’ के बाद टीम ने पहले उनका कांट्रैक्ट खत्म करने की घोषणा की। हालाँकि बाद में मलिक को ‘महान’ बताते हुए उनका अनुबंध रद्द करने से टीम ने इनकार कर दिया है।

बीपीएल में शोएब मलिक फॉर्च्युन बार‍िशल टीम के लिए खेलते हैं। जिस मैच के बाद वे फैंस के निशाने पर आए हैं और उन पर फिक्सिंग के आरोप लग रहे हैं वह 22 जनवरी 2024 को मीरपुर में खुलना टाइगर्स के खिलाफ खेला गया था। इस मैच में मलिक ने एक ओवर में तीन नो बाॅल फेंकी थी। छह गेंद में 5 रन बनाए थे।

चूँकि शोएब मलिक एक स्पिनर हैं, ऐसे में एक ही ओवर में 3-3 नो बॉल फेंकना कहीं से भी उनके जैसे कद के खिलाड़ी के लिए सामान्य नहीं है। खास बात ये है कि शोएब मलिक ने जिस ओवर में 3 नो-बॉल फेंकी, वो 18 रनों का गया। इसमें नो-बॉल पर भी चौका और छक्का लगा था। यही कारण है कि उन पर फिक्सिंग के आरोप लग रहे हैं।

फिक्सिंग के संदेहों के बीच फॉर्चून बारिशल के मालिक मिनाजुर रहमान ने मलिक का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की बात कही थी। लेकिन बाद में उन्होंने इसका खंडन कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने अनुबंध समाप्त करने को अफवाह करार दिया। मलिक को महान खिलाड़ी बताते हुए कहा कि उन्होंने टीम को अपना बेस्ट दिया है। रहमान ने कहा कि टीम के लगातार दो मैच हारने के कारण यह विवाद हो रहा है। ऐसे में आगे के मैचों पर पलटवार करने को लेकर टीम को ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले शोएब मलिक पाकिस्तानी मॉडल-एक्ट्रेस सना से निकाह करने को लेकर चर्चा में थे। यह उनका तीसरा निकाह है। इससे पहले उन्होंने आयशा से निकाह किया था, लेकिन बाद में उस निकाह को खारिज कर दिया था। फिर दुनिया की सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक सानिया मिर्जा के साथ साल 2010 में उन्होंने निकाह किया। दोनों का एक बेटा भी है। तीसरी निकाह के बाद सानिया के पिता इमरान मिर्जा ने बताया था कि उनकी बेटी ने शोएब मलिक से खुला के जरिए अपना संबंध समाप्त किया है।

योनिपट्ट से गायब शिवलिंग, टूटी हनुमान-गणेश की मूर्ति… देखें ज्ञानवापी में कैसे हुआ हिंदू देवी-देवताओं का अपमान, ASI ने साफ कहा- पहले ये मंदिर था

ज्ञानवापी की जगह एक बड़ा हिंदू मंदिर था… ऐसा भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट में बताया है। उन्होंने कई सबूत पेश किए हैं जिनसे पता चलता कि हिंदू मंदिर को तोड़कर वहाँ ज्ञानवापी का ढाँचा खड़ा किया गया। 26 जनवरी की सुबह इस रिपोर्ट पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने जानकारी दी थी। हालाँकि अब रिपोर्ट में जोड़ी गई कुछ तस्वीरें भी मीडिया में आ गई हैं जिन्हें देख हिंदू आक्रोशित हैं।

ASI की रिपोर्ट में साफ लिखा गया था ज्ञानवापी परिसर में हिंदू मंदिर था, जिसे 17वीं शताब्दी में तोड़कर नया ढाँचा बनाया गया और ज्ञानवापी परिसर को बनाने में उसी मंदिर के मलबे को लगा दिया गया।

बिन शिवलिंग के योनिपट्ट (तस्वीर साभार: दैनिक जागरण)

तस्वीरों में देख सकते हैं कि कितनी बेरहमी से हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित किया गया। इन तस्वीरों में हनुमान जी की मूर्ति है, गणेश जी की प्रतिमा है, विष्णु जी हैं और योनिपट्टा भी है जिसमें से शिवलिंग गायब है।

खंडित गणेश प्रतिमा

बता दें कि ASI क रिपोर्ट में मंदिर होने के 32 सबूत मिले हैं।

चार भुजाधारी खंडित मूर्ति

ज्ञानवापी मामले में ASI रिपोर्ट से हुए मुख्य खुलासे

  • सबसे बड़ी चीज जो इस रिपोर्ट में आई वो भगवान शिव के 3 नाम दीवारों पर लिखे मिले हैं- जनार्दन, रुद्र और ओमेश्वर।
  • दीवारों पर कन्नड़, तेलुगु, देवनागरी और ग्रंथा भाषाओं में लेखनी मिली है।
  • ढाँचे के सारे खंभे भी गवाही दे रहे हैं कि वह पहले मंदिर का हिस्सा थे उन्हें मॉडिफाई करके वहाँ नए ढाँचे में शामिल किया गया।
  • ढाँचे की पश्चिमी दीवार से भी पता चलता है कि वो मंदिर की दीवार है जो 5 हजार साल पहले की नागर शैली में निर्मित है।
  • दीवार के नीचे 1 हजार साल पुराने अवशेष भी मिले हैं।
  • ये भी पता चला है कि ढाँचे से पहले मंदिर में बड़ा केंद्रीय कक्ष और उत्तर की ओर छोटा कक्ष था।
  • कुछ खंबों से हिंदू चिह्नों को मिटाने के भी प्रमाण मिले हैं।
  • इतना ही नही हनुमान जी और गणेश जी की खंडित मूर्तियाँ, दीवार पर त्रिशूल की आकृति भी मिली हैं। साथ ही तहखाने में भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिलीं।
  • यह भी पता चला कि ढाँचे का गुंबद महज 350 साल पुराना है जबकि उसके परिसर में मिलने वाले हिंदू साक्ष्य हजारों वर्ष पुराने हैं।
  • ढाँचे के निर्माण संबंधी एक शिलापट पर अंकित समय को मिटाने का भी प्रयास हुआ है।
  • ASI रिपोर्ट से निष्कर्ष आया है कि 2 सितंबर 1669 को मंदिर ढहा दिया गया था।

इस रिपोर्ट के आने के बाद  मुस्लिम पक्ष ने इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा है कि 839 पेज की रिपोर्ट में वजूखाने को छोड़कर हर कोने का एक-एक ब्‍योरा एएसआई ने लिखा है। रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि मंदिर तोड़कर ज्ञानवापी ढाँचा बनाया गया थी। इसलिए अब हिंदुओं को वहाँ पूजा-पाठ की अनुमति मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ढाँचे के भीतर वजूखाने में मिले शिवलिंग का भी एएसआई सर्वे होने के बाद साफ हो जाएगा कि वो कोई फव्वारा नहीं शिवलिंग ही है। इसके अलावा भी कई सबूत मिलेंगे जो हिंदुओं के पक्ष को मजबूत करेंगे।

जिस DMK के नेता रखते हैं सनातन को मिटाने की ख्वाहिश, उनकी सरकार ने फेक न्यूज के उस्ताद मोहम्मद जुबैर को दिया अवाॅर्डः बताया ‘सांप्रदायिक सद्भाव’ बढ़ाने वाला

तमिलनाडु में सनातन विरोधी पार्टी DMK सत्ता में है। इसके एक मंत्री ने हाल ही में सनातन को मिटाने की बात की थी। अब तमिलनाडु सरकार ने हिंदुओं के खिलाफ प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज फैलाने वाले मोहम्मद जुबैर को सम्मानित किया है। गणतंत्र दिवस पर ‘सांप्रदायिक सद्भाव’ बढ़ाने और सांप्रदायिक वैमनस्यता को रोकने में मदद करने के नाम पर जुबैर को पुरस्कृत किया गया है।

जुबैर ‘सर तन से जुदा’ गैंग के लिए खाद-पानी का काम करता रहा है। इसके एडिटेड वीडियो से देश भर के कट्टरपंथी सड़कों पर उतर जाते हैं। भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा के मामले में सारी दुनिया ये देख चुकी है कि तरह से वह एकतरफा प्रोपेगेंडा फैलाता है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर हिंसा हो जाती है। जुबैर को सनातनियों की ऑनलाइन लिंचिंग करने वाले गिरोह का मुख्य सरगना कहा जाता है।

तमिलनाडु सरकार ने जुबैर को ‘कोट्टई अमीर सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार‘ प्रदान किया है। हालाँकि, ये कोई हैरान करने वाली खबर नहीं है, क्योंकि डीएमके के कई नेता-मंत्री भी सनातन विरोध में आगे रहे हैं। वहीं, मोहम्मद जुबैर इस्लामिक कट्टरपंथियों का साथ लेकर सनातनियों के खिलाफ माहौल तैयार करता रहता है।

तमिलनाडु सरकार से सम्मान मिलने पर जुबैर के फॉलोवर सोशल मीडिया पर भौकाल बना रहे हैं। उसके एक फॉलोवर ने X पर लिखा, “तमिलनाडु सरकार ने फैक्ट चेकर और ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को कोट्टई अमीर सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार से सम्मानित किया है। बधाई!! आशा है कि ऑल्ट न्यूज़ सभी दलों के फर्जी समाचार फैलाने वालों के तथ्यों की जाँच जारी रखेगा!”

इसी तरह का एक और ट्वीट अरविंद गुनासेकर नाम के एक ‘पत्रकार’ ने साझा किया है। यह व्यक्ति जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़ा रहा है। उसने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स शेयर है। इस डॉक्यूमेंट मोहम्मद जुबैर को दिए गए सम्मान का विवरण दिया गया है।

इसमें लिखा है, “जुबैर ने ऑल्ट न्यूज़ नाम से एक वेबसाइट बनाई है और वह सोशल मीडिया पर आने वाली खबरों की सत्यता का विश्लेषण करते रहे हैं और अपनी वेबसाइट पर केवल वास्तविक खबरें ही प्रकाशित करते हैं। उनका काम समाज में फर्जी खबरों के कारण होने वाली हिंसा की घटना को रोकने में मदद करता है।”

डॉक्यूमेंट में आगे लिखा है कि जुबैर ने मार्च 2023 में राज्य के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठ को ‘पर्दाफाश’ करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि मार्च 2023 में सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसार हुआ कि तमिलनाडु में प्रवासी श्रमिकों पर हमला किया जा रहा है, जिसका एक वीडियो फुटेज भी वायरल हुआ था।

इसमें आगे लिखा है, “वीडियो फुटेज की प्रामाणिकता की पुष्टि करने के बाद जुबैर ने अपनी वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ पर प्रकाशित किया कि जो वीडियो फुटेज पोस्ट किया गया था, वह घटना वास्तव में तमिलनाडु में नहीं हुई थी। उनकी रिपोर्ट ने तमिलनाडु के खिलाफ अफवाहों के प्रसार को रोक दिया और तमिलनाडु में जाति, धर्म, नस्ल और भाषा के कारण होने वाली हिंसा को रोकने के लिए काम किया।”

बता दें कि मार्च 2023 में कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि तमिलनाडु में काम करने वाले बिहार के श्रमिकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ हुई हैं। हालाँकि, जुबैर ने अपनी वेबसाइट पर एक लेख में बताया था कि तमिलनाडु में मजदूरों पर हमले के जो वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, वो गलत हैं। हालाँकि उसने सही खबरों के बारे में कभी नहीं बताया।

इस दौरान तमिलनाडु में प्रवासियों के खिलाफ डीएमके नेताओं की बयानबाजी लगातार जारी रही। तमिलनाडु के कई मंत्रियों ने उत्तर भारतीय लोगों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं। उन्हें ‘वडक्कन’, ‘पानी पुरी वाला’ और ‘पानपराग वायाँ’ कहकर अपमानित किया गया। डीएमके नेताओं ने उत्तर भारतीयों के प्रति नफरत फैलाने वाली नस्लवादी भाषा का इस्तेमाल किया। मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे ने तो सनातन को मिटाने वाले बयान भी दिए।

यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

जिनकी खोजी शिला से अरुण योगीराज ने बनाई रामलला की मूर्ति, उन पर कर्नाटक में लगा ₹80 हजार जुर्माना: पत्नी के गहने रखने पड़े गिरवी

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की जिस मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई है, वह अरुण योगीराज की बनाई है। लेकिन इस मूर्ति को बनाने के लिए शिला खोजने वाले श्रीनिवास नटराज पर काॅन्ग्रेस शासित कर्नाटक में जुर्माना लगा दिया गया है। उन पर 80 हजार रुपए का जुर्माना कर्नाटक के खान एवं भूविज्ञान ने लगाया है। जुर्माने का भुगतान करने के लिए नटराज को अपनी पत्नी के गहने तक गिरवी रखने पड़े हैं।

रिपोर्ट के अनुसार रामलला की मूर्ति तराशने के लिए इस्तेमाल की गई कृष्ण शिला को खोजने वाले ठेकेदार श्रीनिवास नटराज पर अवैध खनन का आरोप लगा 80 हजार का जुर्माना लगाया गया है। हरोहल्ली-गुज्जेगौदानपुरा गाँव निवासी श्रीनिवास नटराज एक स्थानीय खदान ठेकेदार हैं। उन्हें रामदास नाम के किसान ने अपनी कृषि भूमि से चट्टानों को साफ करने का ठेका दिया गया था। उन्होंने इस भूमि की एक विशाल चट्टान को तीन शिलाखंडों में बाँटा था।

रामलला की बनाने के लिए मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने इन शिलाखंडों में से ही एक को चुना था। नटराज का कहना है कि इस शिलाखंड को सौंपने से पहले कुछ मुखबिरों ने विभाग को इसकी खबर दे दी और उन पर जुर्माना लगा दिया गया। विजयपथ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नटराज को जुर्माने का भुगतान करने के लिए अपनी पत्नी के सोने के आभूषण गिरवी रखने पड़े।

नटराज का कहना है कि उन्होंने केवल चट्टानों को साफ किया और अगले खेत में चले गए। लेकिन खान और भूविज्ञान विभाग ने उन पर अवैध खनन का आरोप लगाकर जुर्माना लगा दिया। नटराज को इस बात का भी अफसोस है कि कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने कहा, “मैं इंतजार कर रहा हूँ कि कोई मेरी भी मदद करेगा।”

70 साल के दलित किसान रामदास के स्वामित्व वाली जमीन से निकले काला ग्रेनाइट पत्थर को रामलला की मूर्ति बनाने के लिए खरीदा गया था। बता दें कि इसी किसान ने हाल ही में भगवान राम के मंदिर के निर्माण के लिए अपनी जमीन का एक हिस्सा दान करने का प्रतिज्ञा की थी।

रामदास के अनुसार वे अपनी 2.14 एकड़ जमीन को कृषि योग्य बनाने के लिए चट्टानों को साफ करना चाहते थे। जब जमीन को समतल करने में वे नाकाम रहे तो उन्होंने नटराज को इसका ठेका दे दिया। इसके बाद मूर्तिकार अरुण योगीराज ने इन्हीं में से एक शिला मूर्ति बनाने के लिए चुनी। नटराज के मुताबिक बाद में इसी जमीन से मिली चट्टानों के शिलाखंडों को भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की मूर्ति को तराशने के लिए ले जाया गया।

अपनी जमीन पर राम मंदिर बनाने की प्रतिज्ञा के बारे में रामदास ने कहा, “हमारे पास दक्षिण की तरफ एक अंजनेय मंदिर है, जिससे ऐसा लगता है कि अंजनेय की मूर्ति उस जगह को देख रही है, जहाँ से रामलला की मूर्ति के लिए पत्थर का खोदा गया था। इसलिए, मैंने वहाँ भगवान राम को समर्पित एक मंदिर बनाने के लिए चार गुंटा (Guntas) जमीन दान करने का फैसला किया है। हम मंदिर के लिए भगवान राम की मूर्ति तराशने के लिए अरुण योगीराज से मिलेंगे।”

गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट ने पत्थर से रामलला की मूर्ति बनाने के लिए तीन मूर्तिकारों को नियुक्त किया था। तीनों में से अरुण योगीराज की मूर्ति को ट्रस्ट ने राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित करने के लिए चुना था। 22 जनवरी 2024 पीएम नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर में इस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की थी।

2030 तक फ्रांस में पढ़ सकेंगे 30 हजार भारतीय छात्र, रिपब्लिक डे के चीफ गेस्ट का ऐलान: फ्रांस के राष्ट्रपति ने बताया महत्वाकांक्षी लक्ष्य

भारत के 75वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2024 की परेड में मुख्य अतिथि के रूप में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों शामिल हुए। उन्होंने साल 2030 तक फ्रांस में 30 हजार भारतीय छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने का लक्ष्य रखा है। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि ये ऐलान बेहद महत्वाकांक्षी है, लेकिन इस लक्ष्य तक पहुँचना नामुमकिन भी नहीं है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक्स पर लिखा, “2030 में फ्रांस में 30,000 भारतीय छात्र। यह एक बहुत ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, लेकिन मैं इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।” उन्होंने बाकायदा एक कार्ययोजना भी तैयार की है। फ्रांस में भारतीय छात्रों की संख्या कैसे बढ़ाई जाएगी, इसके बारे में मैक्रों ने नोट शेयर किया है।

इस कार्ययोजना में लिखा गया है कि गैर-फ्रेंच भाषी छात्र भी फ्रांस में पढ़ाई कर सकें, इसके लिए इंटरनेशनल क्लासेज तैयार की जाएँगी। इसमें लिखा है, “फ्रेंच भाषा का ज्ञान देने के लिए सहयोग और फ्रेंचाइज नेटवर्क विकसित किया जाएगा। हम उन छात्रों को भी इंटरनेशनल क्लासेज के माध्यम से शिक्षा दे पाएँगे, जो फ्रेंच भाषा नहीं जानते। ऐसे लोगों को भी फ्रांस में पढ़ाई की अनुमति रहेगी।”

सबसे जरूरी बात ये है कि फ्रांस अपने यहाँ पढ़ चुके भारतीय छात्रों के लिए वीजा नियमों को भी सुविधाजनक बनाएगा। फ्रांस में 35 विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जो दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों की लिस्ट में शामिल हैं। वहीं, 15 ऐसे विश्वविद्यालय हैं, जिन्हें टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग में स्थान मिला है।

बता दें कि साल 2024 भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संबंधों का ये महत्वपूर्ण वर्ष हैं। दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। भारत और फ्रांस के बीच साझेदारी किसी भी पश्चिमी देश के साथ भारत की पहली साझेदारी है। इसकी वजह से भारत और फ्रांस के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत हुए हैं।

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा और सुरक्षा के साथ ही अंतरिक्ष और परमाणु मामलों में भी रणनीतिक साझेदारी है। हाल के कुछ समय में दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर भी साझेदारी बढ़ रही है। दोनों देशों के बीच संबंध अपने स्वर्णिम दौर में है।