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‘जो बोया है वो काटना पड़ेगा’: कनाडा की तरह भौंक रहा था पाकिस्तान, भारत ने की बोलती बंद; कहा- दुनिया को पता है आतंकवाद का गढ़ कहाँ

पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए भारत ने कहा है कि उसने जो बोया है वह उसे काटना पड़ेगा। साथ ही कहा है कि दुनिया जानती है कि आतंकवाद और संगठित अपराध का गढ़ कहाँ है। कनाडा की तरह ही पाकिस्तान ने भी बेतुके आरोप लगाते हुए अपने मुल्क में हुई कुछ हत्याओं के पीछे भारतीय एजेंटों के होने दवा को लेकर भारत पर आरोप लगाए थे।

पाकिस्तान के विदेश सचिव मुहम्मद साइरस सज्जाद काजी ने 25 जनवरी 2024 को कहा था कि सियालकोट और रावलकोट में दो पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या के पीछे भारतीय एजेंटों का हाथ होने को लेकर उनके पास विश्वसनीय सबूत हैं। ये हत्याएँ 2023 में हुई थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार की पाकिस्तान की नई कोशिश करार दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने पाकिस्तानी विदेश सचिव की गई कुछ टिप्पणियों की मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं। यह झूठा और दुर्भावनापूर्ण है। भारत भारत विरोधी दुष्प्रचार की पाकिस्तान की नवीनतम कोशिश है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे वक्त से आतंकवाद, संगठित अपराध और अवैध अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का केंद्र रहा है। भारत और कई अन्य देश सार्वजनिक तौर से पाकिस्तान को चेतावनी दे चुके हैं कि वह आतंक और हिंसा की अपनी संस्कृति में नष्‍ट हो जाएगा।

फोटो साभार : x हैंडल @ShivAroor

जायसवाल ने कहा कि अपने गलत कामों के लिए दूसरे को दोष देने का न तो कोई औचित्य है और न ही इससे कोई समाधान निकलने वाला है। बता दें कि पाकिस्तानी विदेश सचिव मुहम्मद साइरस काजी ने जिन दो हत्याओं का जिक्र कर रहे थे, उनकी पहचान शाहिद लतीफ और मुहम्मद रियाज के तौर पर हुई थी।

इससे पहले कनाडा ने भी इसी तरह खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप लगाए थे। यह बात भी सामने आई थी कि भारत को घेरने के लिए कनाडा ने दुनिया भर के कई देशों का दरवाजा खटखटाया था। पर उसके बेतुके दावों का किसी ने समर्थन नहीं किया।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में भारतीय एजेंटों पर लग रहे आरोपों को लेकर कनाडा सरकार से सबूत माँगे थे। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी प्रकार की जाँच से इनकार नहीं कर रहा है। लेकिन जाँच करवाने के लिए भारतीय एजेंटों के खिलाफ कुछ सबूत तो दिए जाएँ।

उन्होंने कहा था, “कनाडा में, हमें लगता है कि कनाडाई राजनीति ने हिंसक और अतिवादी राजनीतिक विचारों को जगह दी है जो हिंसक तरीकों सहित भारत से अलगाववाद की वकालत करते हैं। इन लोगों को कनाडा की राजनीति में शामिल किया गया है। उन्हें अपने विचार व्यक्त करने की आजादी दी गई है।”

दीवारों पर महादेव का नाम, तहखाने में देवी-देवता… हिंदू मंदिर पर ही खड़ा है ज्ञानवापी ढाँचा, जिसे पीढ़ियों से जानते हैं हम उसका प्रमाण ASI ने भी दिया

ज्ञानवापी ढाँचे के ASI सर्वेक्षण के बाद कई बातों का खुलासा हुआ है। सामने आई 839 पेज की रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि ज्ञानवापी ढाँचे की जगह कभी बड़ा हिंदू मंदिर था। इसके प्रमाण वहाँ के खंभों, दीवारों और शिलापट से मिले हैं। कोर्ट ने ASI से कहा है कि वो इस रिपोर्ट की प्रतियाँ हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों को दे।

ASI रिपोर्ट आने के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने इस संबंध में मीडिया को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में मंदिर होने के 32 सबूत मिले हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार

  • दीवारों पर कन्नड़, तेलुगु, देवनागरी और ग्रंथा भाषाओं में लेखनी मिली है।
  • सबसे बड़ी चीज जो इस रिपोर्ट में आई वो भगवान शिव के 3 नाम दीवारों पर लिखे मिले हैं- जनार्दन, रुद्र और ओमेश्वर।
  • ढाँचे के सारे खंभे भी गवाही दे रहे हैं कि वह पहले मंदिर का हिस्सा थे उन्हें मॉडिफाई करके वहाँ नए ढाँचे में शामिल किया गया।
  • ढाँचे की पश्चिमी दीवार से भी पता चलता है कि वो मंदिर की दीवार है जो 5 हजार साल पहले की नागर शैली में निर्मित है।
  • दीवार के नीचे 1 हजार साल पुराने अवशेष भी मिले हैं।
  • ये भी पता चला है कि ढाँचे से पहले मंदिर में बड़ा केंद्रीय कक्ष और उत्तर की ओर छोटा कक्ष था।
  • कुछ खंबों से हिंदू चिह्नों को मिटाने के भी प्रमाण मिले हैं।
  • इतना ही नही हनुमान जी और गणेश जी की खंडित मूर्तियाँ, दीवार पर त्रिशूल की आकृति भी मिली हैं। साथ ही तहखाने में भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ मिलीं।
  • यह भी पता चला कि ढाँचे का गुंबद महज 350 साल पुराना है जबकि उसके परिसर में मिलने वाले हिंदू साक्ष्य हजारों वर्ष पुराने हैं।
  • ढाँचे के निर्माण संबंधी एक शिलापट पर अंकित समय को मिटाने का भी प्रयास हुआ है।
  • ASI रिपोर्ट से निष्कर्ष आया है कि 2 सितंबर 1669 को मंदिर ढहा दिया गया था।

इस रिपोर्ट के सार्वजिनक होने के बाद मुस्लिम पक्ष ने इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा है कि 839 पेज की रिपोर्ट में वजूखाने को छोड़कर हर कोने का एक-एक ब्‍योरा एएसआई ने लिखा है। रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि मंदिर तोड़कर ज्ञानवापी ढाँचा बनाया गया थी। इसलिए अब हिंदुओं को वहाँ पूजा-पाठ की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ढाँचे के भीतर वजूखाने में मिले शिवलिंग का भी एएसआई सर्वे होने के बाद साफ हो जाएगा कि वो कोई फव्वारा नहीं शिवलिंग ही है। इसके अलावा भी कई सबूत मिलेंगे जो हिंदुओं के पक्ष को मजबूत करेंगे।

बता दें कि 18 दिसंबर को ASI रिपोर्ट में सील बंद लिफाफे में स्टडी रिपोर्ट सौंपी थी। इसी दिन हिंदू पक्ष की ओर से निष्कर्ष सार्वजनिक करने की माँग की गई थी लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इसपर आपत्ति जताई। 24 जनवरी को वाराणसी कोर्ट ने कहा कि सर्वे की कॉपियाँ हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष को दिया जाए। कोर्ट ने कहा था कि रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों पक्ष इस संबंध में 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं।

‘यह युगांतकारी परिवर्तन का कालखंड’: गणतंत्र की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को किया संबोधित, राम मंदिर से लेकर चंद्रयान तक का किया जिक्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 75वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार (25 जनवरी 2024) को देश को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने इस संबोधन में राम मंदिर से लेकर चंद्रयान, जी20 सम्मेलन, महिला आरक्षण विधेयक समेत भारत की तमाम उपलब्धियों की बात है और देश को गणतंत्र दिवस की बधाई दी है।

राष्ट्रपति ने देशवासियों को बधाई देते हुए कहा, “हमारी 75 वर्ष कि यात्रा कठिनाइयों से भरी रही है, लेकिन हमने इसे पूरा किया है। जब इसे पीछे मुड़कर देखा जाए तो मन गर्व से भर जाता है।” उन्होंने कहा कि यह देश का 75वाँ गणतंत्र दिवस है, इसलिए यह राष्ट्र के इतिहास में ऐतिहासिक पड़ाव है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह युगांतकारी परिवर्तन का कालखंड है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कर्पूरी ठाकुर को किया याद

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा, “सामाजिक न्याय के लिए अनवरत युद्धरत रहे श्री कर्पूरी ठाकुर जी की जन्म शताब्दी का उत्सव कल ही संपन्न हुआ है। कर्पूरी जी पिछड़े वर्गों के सबसे महान पक्षकारों में से एक थे, जिन्होंने अपना सारा जीवन उनके कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। उनका जीवन एक संदेश था। अपने योगदान से सार्वजनिक जीवन को समृद्ध बनाने के लिए, मैं कर्पूरी जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ।”

राम मंदिर का भी जिक्र

राष्ट्रपति के संबोधन में 22 जनवरी 2024 को सम्पन्न हुए राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का जिक्र भी हुआ। उन्होंने कहा, “इस सप्ताह के आरंभ में हम सबने अयोध्या में प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान पर निर्मित भव्य मंदिर में स्थापित मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक समारोह देखा। भविष्य में जब इस घटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाएगा, तब इतिहासकार, भारत द्वारा अपनी सभ्यतागत विरासत की निरंतर खोज में युगांतकारी आयोजन के रूप में इसका विवेचन करेंगे।”

राष्ट्रपति ने आगे कहा, “उचित न्यायिक प्रक्रिया और देश के उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद, मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ हुआ। अब यह एक भव्य संरचना के रूप में शोभायमान है। यह मंदिर न केवल जन-जन की आस्था को व्यक्त करता है  बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में हमारे देशवासियों की अगाध आस्था का प्रमाण भी है।”

महिला आरक्षण विधेयक और चंद्रयान पर भी की बात

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में संसद द्वारा पास किए गए महिला आरक्षण विधेयक और चंद्रयान पर भी बात की। उन्होंने महिलाओं को 33% आरक्षण दिए जाने के विषय में कहा, “जब संसद ने ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक पारित किया तो हमारा देश स्त्री-पुरुष समानता के आदर्श की ओर आगे बढ़ा। मेरा मानना है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’, महिला सशक्तीकरण का एक क्रांतिकारी माध्यम सिद्ध होगा। इससे हमारे शासन की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में भी बहुत सहायता मिलेगी।”

चंद्रयान 3 की सफलता के साथ ही हाल ही में ISRO द्वारा लॉन्च किए गए सैटेलाईट के विषय को भी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा, “भारत, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के क्षेत्र पर उतरने वाला पहला देश बना। चंद्रयान-3 के बाद ISRO ने एक सौर मिशन भी शुरू किया। हाल ही में आदित्य L1 को सफलतापूर्वक ‘Halo Orbit’ में स्थापित किया गया है। भारत ने अपने पहले एक्स-रे Polarimeter Satellite, जिसे एक्सपोसैट कहा जाता है, के प्रक्षेपण के साथ नए साल की शुरुआत की है।”

राष्ट्रपति ने इन विषयों के अलावा देश की अर्थव्यस्था और गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने संबधी विषयों पर भी बात की। उन्होंने विश्व में चल रहे युद्धों पर दुख जताया और इनके समाधान का रास्ता तर्क बताया। उन्होंने कहा कि हाल के दौर में विश्व में अनेक स्थलों पर लड़ाइयाँ हो रही हैं और दुनिया के बहुत से हिस्से हिंसा से पीड़ित हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “जब दो परस्पर विरोधी पक्षों में से प्रत्येक मानता है कि केवल उसी की बात सही है और दूसरे की बात गलत है तो ऐसी स्थिति में समाधान-परक तर्क के आधार पर ही आगे बढ़ना चाहिए। दुर्भाग्य से तर्क के स्थान पर आपसी भय और पूर्वाग्रहों ने भावावेश को बढ़ावा दिया है, जिसके कारण अनवरत हिंसा हो रही है।”

गणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बलों, पुलिस और अर्ध-सैन्य बलों का भी कृतज्ञता-पूर्वक अभिनंदन राष्ट्रपति ने किया। उन्होंने कहा कि उनकी बहादुरी के बिना भारत ने जो भी हासिल किया यह करना मुश्किल था।

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों के साथ जयपुर में किया रोड शो, दुकान में जाकर साथ में चाय पी: उपहार में दिया राम मंदिर का मॉडल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुुुरुवार (25 जनवरी 2024) को फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के साथ राजस्थान की राजधानी जयपुर में रोड शो किया। राष्ट्रपति मैक्रों इस बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के तौर भारत आए हुए हैं। दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने से पहले जयपुर में उनका पारम्परिक तरीके से स्वागत हुआ।

जयपुर एयरपोर्ट पर विदेश मंत्री एस जयशंकर, राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, सीएम भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने उनका स्वागत किया। वहाँ से राष्ट्रपति मैक्रों कच्छावाह (कुशवाह) क्षत्रियों का विश्व प्रसिद्ध आमेर किला भी गए और वहाँ स्कूली बच्चों से मुलाकात की। इस दौरान राजा मानसिंह की उत्तराधिकारी दीया कुमारी भी मौजूद थीं।

प्रधानमंत्री मोदी भी इसके बाद जयपुर पहुँचे। उन्होंने फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के साथ मुलाक़ात की और फिर दोनों नेता जयपुर स्थित यूनेस्को हेरिटेज जंतर मंतर पहुँचे। यहाँ मौजूद विशेषज्ञों ने उन्हें जंतर मंतर की बारीकियों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद दोनों नेताओं का रोड शो शुरू हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के रोड शो को देखने के लिए बड़ी संख्या में जनता सड़कों पर उमड़ पड़ी। प्रधानमंत्री ने मैक्रों के साथ यह 1.50 किलोमीटर लंबा रोड शो एक खुली जीप में खड़े होकर किया। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों ने उन पर फूल बरसाए। जंतर मंतर से शुरु होकर यह रोड शो हवामहल पहुँचा। 1799 में बना हवामहल जयपुर राजमहल का ही विस्तार है।

हवामहल पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों यहाँ स्थित एक दुकान में पहुँचे और वहाँ चाय पी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति मैक्रों को भारतीय डिजिटल भुगतान सिस्टम UPI की बारीकियों और इसके काम करने के तरीके के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति को राम मंदिर की लकड़ी का एक मॉडल भी भेंट किया।

इसके बाद प्रधानमंत्री जयपुर के रामबाग पैलेस में राष्ट्रपति मैक्रों के सम्मान में एक डिनर का आयोजन किया। इसके बाद दोनों नेता जयपुर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों अब 26 जनवरी को सुबह कर्तव्य पथ पर होने वाली गणतन्त्र दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद उनका राष्ट्रपति भवन में दोपहर में स्वागत होगा।

राष्ट्रपति मैक्रों की 6 माह के भीतर यह दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले वह सितम्बर 2023 में G20 की बैठक के लिए दिल्ली आए थे। राष्ट्रपति मैक्रों के इस दौरे में भारत के साथ महत्वपूर्ण समझौतों के आगे बढ़ने की सम्भावना है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण समझौते रक्षा क्षेत्र में माने जा रहे हैं।

बिहार में बीजेपी का CM, नीतीश NDA के संयोजक… फाॅर्मूला तो है तैयार, पर सहमति बनने की संभावना कितनी

अल्ताफ राजा के एक लोकप्रिय गाने के बोल कुछ इस तरह हैं,
जब तुम से इत्तेफ़ाकन मेरी नज़र मिली थी
अब याद आ रहा है शायद वो जनवरी थी
तुम यूं मिलीं दुबारा फिर माह-ए-फ़रवरी में
जैसे कि हमसफ़र हो तुम राह-ए-ज़िंदगी में

वैसे तो इसे आशिकों का गाना माना जाता है। लेकिन बिहार के लिए लग रहे राजनीतिक कयासों से ऐसा लगता है कि इस ‘अमर गीत’ की रचना किसी ऐसे ही दिन के लिए की गई होगी।

पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारे में हलचल मची हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक बार फिर से पाला बदलने की अटकलें जोरों पर है। सूत्र तरह-तरह के शिगूफे छोड़ रहे हैं। ऐसे ही एक शिगूफों में से एक यह है कि इस बार जदयू के एनडीए में लौटने के बाद बिहार का मुख्यमंत्री बीजेपी कोटे से होगा। फिलहाल नीतीश कुमार एनडीए की संयोजक की भूमिका में आ जाएँगे। जिस सूत्र ने यह जानकारी दी है उसने ऑपइंडिया को यह भी बताया है कि इस पर नीतीश कुमार और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बननी शेष है। इस पर अंतिम निर्णय दिल्ली में होगा।

जब राजनीति में सारे पक्ष ‘कोई मतभेद नहीं है, सब कुछ ठीक है’ जैसा रटा-रटाया जवाब देने लगे तो सूत्र बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। क्योंकि सूत्र से तार हाथ लगने के कुछ घंटों के बाद यह खबर सामने आती है कि नीतीश कुमार पटना से दिल्ली के लिए उड़ान भर चुके हैं। उसी विमान से बीजेपी के बिहार अध्यक्ष सम्राट चैधरी सहित पार्टी के अन्य नेता भी दिल्ली आ रहे हैं। बिहार से आने वाले कैबिनेट मंत्रियों को भी दिल्ली तलब कर लिया गया है।

बीजेपी और नीतीश कुमार के बीच कोई खिचड़ी पकती है या नहीं? खिचड़ी किन शर्तों पर पकती है? इन सवालों के जवाब समय के गर्भ में हैं। लेकिन पिछले कई दिनों से ऐसे संकेत दिए जा रहे हैं जिनसे यह तो पता चलता ही है कि बिहार की सत्ता में बदलाव की बयार यूँ ही नहीं बही है।

‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर निकले काॅन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की पूर्णिया रैली से नीतीश कुमार के कन्नी काटने की खबर भले अब आई हो पर INDI गठबंधन से उनकी नाराजगी की खबरें काफी पहले से चल रही हैं। शुरुआत में कहा गया कि विपक्षी गठबंधन का संयोजक नहीं बनाए जाने से नीतीश कुमार नाराज हैं। हालाँकि बाद में यह प्रस्ताव आया पर नीतीश ने उसे ठुकरा दिया। इसके बाद बिहार में अचानक से जदयू लोकसभा सीटों की संख्या को लेकर मुखर हो गई। बार-बार राजद, काॅन्ग्रेस सहित अन्य साझेदारों को यह बताने की कोशिश की गई कि JDU अपने हिस्से की सीटें कम नहीं करेगी।

फिर एक इंटरव्यू में जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नीतीश कुमार को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने दरवाजे खुले होने के संकेत दिए। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि अगस्त 2022 में जब एनडीए को छोड़ नीतीश कुमार राजद के साथ गए थे, उसके बाद इस तरह के सवाल कई बार बीजेपी नेताओं से पूछे गए थे। लेकिन जवाब में वे दोबारा नीतीश के साथ किसी तरह के गठबंधन को खारिज करते रहे।

इसके बाद से नीतीश कुमार की घर वापसी को लेकर संकेतों का सिलसिला चल पड़ा। रामचरितमानस को लेकर लगातार विवादित बयान देने वाले राजद कोटे से मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर का विभाग बदला गया। कैबिनेट बैठक मिनटों में समाप्त की गई। लालू यादव के कृपा पात्र माने जाने वाले कई अधिकारी इधर से उधर किए गए। कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ दिए जाने का श्रेय नीतीश कुमार के हिस्से में भी जाए इसका ख्याल रखा गया। नीतीश कुमार ने भी ट्वीट डिलीट कर इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देने में कंजूसी नहीं की।

कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने यह कहकर कि कुछ लोग राजनीति में केवल अपने परिवार को आगे बढ़ाते हैं घर वापसी की कयासों को और बल दिया। फिर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने चंद मिनटों के भीतर तीन ऐसे ट्वीट किए जिन्हें नीतीश कुमार पर निशाना माना गया। हालाँकि बाद में रोहिणी ने ये ट्वीट डिलीट कर दिए। लेकिन इसने राजद और जदयू की निकाह के दिन पूरे होने के संकेत दे दिए। बता दिया कि तलाक तलाक तलाक कभी भी मुमकिन है।

यही कारण है कि भले बीजेपी के सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार की घर वापसी की शर्ते अभी फाइनल नहीं हुई हैं, लेकिन राजद की तरफ से खुद लालू प्रसाद यादव ने मोर्चा सँभाल लिया है। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पार्टी नेताओं के साथ बैठकों में व्यस्त हैं, वहीं लालू के लिए कहा जा रहा है कि वे बिना नीतीश कुमार के भी सरकार बनाने की संभावनाओं को टटोल रहे हैं।

बिहार विधानसभा की जो मौजूदा स्थिति है उसमें राजद, काॅन्ग्रेस, वाम दल और निर्दलीय मिलाकर 115 विधायक होते हैं। बहुमत का आँकड़ा 122 है। यदि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के इकलौते विधायक का समर्थन भी राजद को मिल जाए तो भी उसे सरकार बनाने के लिए कम से कम 6 विधायकों का जुगाड़ करना ही होगा। दूसरी ओर सहमति बनने पर बीजेपी, जदयू और जीतनराम मांझी की पार्टी HUM 127 विधायकों के साथ आसानी से सरकार बना सकती है।

जाहिर है कि बिहार के सारे समीकरणों के केंद्र में अभी भी नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू ही है। इसी हुनर ने उन्हें डेढ़ दशक से ज्यादा समय से बिहार की राजनीति में प्रासंगिक बना रखा। इसी हुनर के कारण 2020 विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद बड़ी पार्टी होने के बाद भी बीजेपी ने उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार कर लिया था। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस बार बीजेपी शायद ही राज्य में उनकी सदारत में सरकार कबूल करने को तैयार होगी।

पर नीतीश कुमार की सियासत को समझना इतना भी आसान नहीं है। खुद लालू यादव कहते रहे हैं कि नीतीश कुमार के पेट में दाँत है। 2017 में जब नीतीश राजद को छोड़ एनडीए में चले गए थे तब लालू यादव ने कहा था, “नीतीश साँप है। जैसे साँप केंचुल छोड़ता है, वैसे ही नीतीश भी केंचुल छोड़ता है और हर 2 साल में साँप की तरह नया चमड़ा धारण कर लेता है। किसी को शक?”

अचानक से जिस तरह पटना से दिल्ली तक का मौसम एक जैसा होता दिख रहा है, उससे लालू यादव के शब्दों में कहें तो लगता नहीं कि नीतीश कुमार इस बार नया चमड़ा धारण करने के लिए 2 साल की प्रतीक्षा नहीं करेंगे। केंचुल छोड़ने में वे अधिक से अधिक दो दिनों का समय लें। किसी को शक?

बिहार के कटिहार में हिंदू मंदिरों पर हमला, मूर्तियों को किया खंडित: आक्रोशित लोगों ने रेलवे ट्रैक-हाइवे किया जाम, भाजपा नेता ने दी चेतावनी

बिहार के कटिहार जिले में दो जगहों पर बजरंग बली की मूर्ति क्षतिग्रस्त कर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है। इन घटनाओं से स्थानीय लोगों में आक्रोश भड़क गया है। लोगों ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की और इसको लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन भी किया। वहीं, बिहार के बड़े नेताओं ने भी इसका संज्ञान लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कटिहार के मनिहारी थाना क्षेत्र में बजरंग बली की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने की घटनाएँ हुई हैं। एक घटना मनिहारी थाने के जगावटी गाँव में हुई, जबकि दूसरी घटना महियारपुर रेलवे स्टेशन में स्थापित मूर्ति के साथ हुई। दोनों जगह पर उपद्रवियों ने बजरंग बली की मूर्ति को खंडित कर दिया।

इस घटना को मंगलवार (23 जनवरी 2024) की रात को अंजाम दिया गया। अगले दिन लोगों ने बजरंग बली की मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त देखी तो इसके खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुस्साई भीड़ ने रेलवे ट्रैक और हाइवे को जमा कर दिया। भड़के लोग मूर्ति तोड़ने वालों को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग कर रहे थे।

घटना के बाद गुस्साई भीड़ को शांत करने के लिए दोनों घटनास्थलों पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनात कर दी गई। पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की। आखिरकार, घंटों मशक्कत करने के बाद पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर उन्हें वापस भेजा। इसके बाद ट्रेनों और गाड़ियों का आवागमन शुरू हुआ।

ग्रामीणों को मनाने के लिए क्षेत्र के एसडीएम ने एक समिति का गठन किया है। यह धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा को लेकर काम करेगी। उन्होंने आश्वासन भी दिया कि मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने वालों को तीन दिन के भीतर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने इस घटना पर FIR दर्ज कर लिया है।

इस मामले में केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जल्द कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा, “हनुमान जी की मूर्तियों को तोड़ा गया है। अगर इसको गंभीरता से नहीं लिया गया और राज्य सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो नीतीश बाबू और लालू जी… मैं दोनों को चेताना चाहता हूँ। यह मात्र हनुमान जी की मूर्ति नहीं टूटी है, बल्कि बिहार में आपने सनातनियों का गर्दन कटवाने का काम किया है। अगर अपराधी नहीं पकड़े गए और कार्रवाई नहीं हुई तो इस का खामियाजा आपको भुगतना पड़ेगा।”

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को नहीं पचा पाए मुस्लिम कट्टरपंथी: बिहार-झारखंड से लेकर कर्नाटक और महाराष्ट्र तक हिंदुओं पर हुए हमले

अयोध्या के राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। इसको लेकर देश भर के हिन्दू हर्षोल्लास में मना रहे थे। हालाँकि, कट्टरपंथी मुस्लिमों को हिंदुओं का यह उत्साह पसंद नहीं आया। प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मनाते हुए हिन्दुओं पर कई जगह हमले किए गए। कहीं शोभायात्रा पर पथराव हुआ तो कहीं भगवा ध्वज का अपमान किया गया। ऑपइंडिया ने इन घटनाओं को संकलित किया है।

21 जनवरी: मीरा रोड में हिन्दुओं पर हमला, ध्वज का अपमान

प्राण प्रतिष्ठा से एक दिन पहले यानी 21 जनवरी 2024 की रात को महाराष्ट्र स्थित ठाणे के मीरा रोड में कुछ हिन्दू युवक गाड़ियों पर शोभा यात्रा निकाल रहे थे। यात्रा जैसे ही भायंदर इलाके में मीरा रोड पर पहुँची, मुस्लिमों ने इसे निशाना बनाया दिया। उपद्रवियों ने गाड़ियों में तोड़फोड़ की और यात्रा में शामिल महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता की। जिहादियों ने भगवान हनुमान के पोस्टर पर उलटी तक कर दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करके कुछ उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है।

21 जनवरी: मेहसाणा में हिन्दुओं पर हमला

गुजरात के मेहसाणा के खेड़ालू में हिन्दू श्रद्धालुओं पर मुस्लिमों ने पथराव किया। यहाँ राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में शोभा यात्रा का आयोजन किया गया था। यात्रा पर पथराव करने में मुस्लिम महिलाएँ भी शामिल थीं। यात्रा को देखते हुए कट्टरपंथी मुस्लिमों ने पहले से ही छतों पर पत्थर जमा कर लिए थे। जब श्रद्धालु इलाके में पहुँचे तो उन पर हमला कर दिया। पुलिस ने अब तक 15 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

21 जनवरी: वडोदरा में हिन्दुओं पर हुआ हमला

गुजरात के वडोदरा स्थित भोज गाँव में 22 जनवरी के दिन मुस्लिमों ने हिन्दुओं पर उस समय हमला कर दिया, जब वे प्रभु श्रीराम की शोभायात्रा निकाल रहे थे। इस मामले में पुलिस ने 16 लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज की है। FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास है। यह यात्रा लगभग डेढ़ घंटे के बाद नगीना मस्जिद पहुँची। यहीं पर मुस्लिमों ने हिन्दुओं पर हमला कर दिया।

नगीना गली पहुँचने के बाद कट्टरपंथियों ने शोभायात्रा को रोक लिया और हिंदुओं से कहा, “दोबारा ऐसा करने की कोशिश मत करना, क्योंकि आज हम 2-4 हिन्दुओं को काटेंगे। जितने भी हिन्दू सामने पड़े मार दो।” इसके बाद कट्टरपंथी यात्रा पर हमला करने के लिए आगे बढ़ गए और चिल्लाने लगे कि किसी को जिन्दा नहीं छोड़ना है।

22 जनवरी: शिवमोगा में अल्लाहु अकबर के नारे, अपमानजनक बातें

कर्नाटक हिन्दू अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उत्सव मनाने के लिए इकट्ठा हुए थे। यह कार्यक्रम शिवमोगा के शिवप्पा नायक चौक पर हो रहा था। यहाँ एकत्रित हुए हिन्दू ‘जय श्रीराम’ के नारे लगा रहे थे। इसी दौरान एक बुर्के वाली महिला आई और लोगों से बहस करने लगी। महिला ने इस दौरान भक्तों के बीच में अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए और उल्टी-सीधी बातें कीं। बताया गया कि यह महिला एक बाइक पर यहाँ पहुँची थी और साथ में एक बच्चे को लिए हुए थी।

22 जनवरी: दरभंगा में रामलला की शोभायात्रा पर पथराव

बिहार के दरभंगा में रामलला की शोभा यात्रा पर भी पथराव किया गया। दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थाने के भपुरा गाँव में श्रीराम शोभायात्रा पर पथराव किया गया। उपद्रवियों ने दो बाइक सहित डीजे वाहन को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। अचानक हुए हमले से शोभायात्रा में शामिल रामभक्तों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रित किया।

22 जनवरी: झारखंड के गिरिडीह में हिन्दुओं पर हमला

शोभायात्रा पर हमले को लेकर गिरिडीह में तनाव के कई मामले दर्ज किए गए हैं। ऐसे ही एक मामले में आजाद नगर के पास बिरनी के RSS कार्यकर्ता रोहित महतो पर जानलेवा हमला किया गया। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चुंजका के पास जमकर पथराव हुआ।

बताया गया कि पूर्णानगर राम मंदिर के पास से लोग जुलूस निकालकर चुंजका ‘बजरंग बली’ मंदिर जा रहे थे। मंदिर के पास पहुँचने के बाद कट्टरपंथी मुस्लिमों की एक भीड़ ने अपने-अपने घरों की छतों से पथराव शुरू कर दिया। इसमें कई लोग घायल हो गए हैं। घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।  

22 जनवरी: झारखंड के लोहरदगा में बवाल

झारखंड के लोहरदगा में भी तनाव की खबरें सामने आईं। यहाँ कैरो थाना क्षेत्र के हनहट गाँव में 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान को लेकर उत्सव मनाया जा रहा था। इसी बीच मंदिर में गाना बजाने के दौरान दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने हो गए और लाठी डंडे के साथ भीड़ ने मंदिर को घेर लिया। एसपी हारिस बिन जमा ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई है।

22 जनवरी: झारखंड के धनबाद में भी बवाल

धनबाद के टुंडी थाना इलाके में कदैयाँ में रविवार को तनाव फैला था, इसके बाद 22 जनवरी 2024 की शाम को छाताबाद में जुलूस निकालने के दौरान कट्टरपंथी बाहर निकल आए और हिंदुओं से भिड़ गए। कट्टरपंथियों ने ना सिर्फ बहस की, बल्कि मारपीट भी की। वहीं, 21 जनवरी 2024 को कदैयाँ में धार्मिक झंडा लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें कई लोग जख्मी हो गए थे। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से टुंडी थाना में लिखित शिकायत की गई है।

22 जनवरी: नांदेड़ में प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मनाते हिन्दुओं पर हमला

महाराष्ट्र के नांदेड़ में मुस्लिमों ने हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। नांदेड़ के चिखली गाँव के मंदिर में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम मनाने पर मुस्लिमों ने हिंदुओं के साथ धक्का-मुक्की की और धमकी दी। पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लिया है और असलम खान और गफ्फार खान के खिलाफ मामला दर्ज किया। बताया गया है कि यह दोनों हिन्दू आस्था के विरुद्ध उलटी सीधी बातें कर रहे थे।

22 जनवरी: पनवेल में हिंदू बाइक रैली पर हमला

नवी मुंबई के पनवेल में प्राण प्रतिष्ठा का जश्न मनाने के लिए एक बाइक रैली का आयोजन किया गया था। इस पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भीड़ ने पीछे से हमला कर तीन हिंदुओं को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस दौरान वाहनों में तोड़फोड़ की गई और एक व्यक्ति की पीठ और एक के सिर में चाकू मारा गया।

22 जनवरी: नागपुर में हिन्दू युवकों पर हमला

नागपुर के मोमिनपुरा इलाके से गुजरते समय ‘जय श्रीराम’ का नारा लगा रहे कुछ हिंदू लड़कों पर हमला किया गया। बताया गया कि लड़के छोटी खदान में हनुमान मंदिर की ओर जा रहे थे। जब लड़के यह पूछने के लिए रुके कि चप्पल किसने फेंकी तो 30 से अधिक मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठा हो गई और 14 वर्षीय हिंदू लड़के की बेरहमी से पिटाई कर दी। इसी तरह का दृश्य संभाजी नगर के पडेगाँव इलाके से सामने आया, जहाँ दो समूहों के बीच लाठियां और पत्थर फेंके गए। इस मामले में 64 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

22 जनवरी: कुशीनगर में शोभायात्रा पर हमला

कुशीनगर में भगवान राम की शोभा यात्रा के आयोजन पर मुस्लिम समुदाय ने विवाद पैदा कर दिया। इस दौरान पथराव भी किया गया। इसमें कुछ मोटरसाइकिलें क्षतिग्रस्त हो गईं और कई लोग घायल हो गए। हालाँकि, पुलिस ने दावों का खंडन किया है। आपसी झगड़े का एक ऐसा ही मामला आज़मगढ़ जिले के जहानाबाद पुलिस थाना क्षेत्र में सामने आया, जब इस्लामी कट्टरपन्थियों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर इकट्ठा होकर जुलूस को रोक दिया और साथ में चल रहे डीजे को बंद कर दिया।

22 जनवरी: बिहार के मुजफ्फरपुर में हिन्दुओं पर हमला

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक विवाद के बाद हिंदू और मुस्लिमों के बीच जमकर पथराव हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, मुस्लिमों ने न केवल यात्रा में शामिल युवाओं पर पथराव किया बल्कि कई घरों को भी निशाना बनाया। इसके अलावा तलवारों से भी हमले की खबरें हैं।

22 जनवरी: कर्नाटक के बेलगावी में जय श्रीराम कहने पर पथराव

कर्नाटक के बेलगावी में भी प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मना रहे हिन्दुओं पर पथराव किया गया। यहाँ मुस्लिमों ने यात्रा निकाल रहे हिन्दुओं के ऊपर पत्थरबाजी की। यह घटना भी 22 जनवरी 2024 की ही है। बताया गया कि जहाँ पथराव हुआ, वे मुस्लिम जनसंख्या वाले इलाके हैं। यहाँ उत्सव मना रहे हिन्दू ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे, जो कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आया।

24 जनवरी: बरेली में आतिशबाजी करते हिन्दुओं पर हमला

बरेली के सिरौली में 24 जनवरी 2024 को वरुण रस्तोगी अपने परिवार के साथ घर के बाहर गली में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मना रहे थे। इस दौरान वे आतिशबाजी कर रहे थे। इसी दौरान सिरौली के ही रहने वाले शावेज, वसीम, सुहैल, कय्यूम, दानिश और सहाना ने वरुण और उनके बच्चों पर लाठी डंडों से हमला बोल दिया

कट्टरपंथी मुस्लिम हमलावरों ने उन पर हमला करते हुए कहा कि ‘बहुत रामभक्त बनते हो, आज तुम्हें जान से मार देंगे’। इस दौरान उन्हें बचाने आई उनकी पत्नी पर भी मुस्लिम हमलावरों ने हमला कर दिया। इस हमले में वरुण, उनकी पत्नी और दो बच्चे घायल हो गए। उन्होंने इसको लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

ट्रैक्टर चढ़ा गिरा दी सरदार पटेल की मूर्ति, उज्जैन में भीम आर्मी और पाटीदार समाज भिड़े: पत्थरबाजी-आगजनी के बाद थाना प्रभारी पर गिरी गाज

उज्जैन में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति ट्रैक्टर चढ़ाकर गिरा दी गई। इसके बाद भीम आर्मी और पाटीदार समाज के बीच भिड़ंत हो गई। पत्थरबाजी और आगजनी के बाद माकड़ोन थाना प्रभारी भीम सिंह देवड़ा को निलंबित कर दिया गया है।

इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हैं। बवाल के बाद बड़ी संख्या में मौके पर पुलिस की तैनाती की गई है। रिपोर्ट के अनुसार उज्जैन के माकड़ोन मंडी गेट और बस स्टैंड पर पड़ी खाली जमीन पर मूर्ति लगाने को लेकर भीम आर्मी और पाटीदार समाज के बीच मतभेद है। भीम आर्मी यहाँ डाॅक्टर भीमराव आंबेडकर की लगाने की पक्षधर है, वहीं पाटीदार समाज सरदार पटेल की मूर्ति स्थापित करना चाहता है।

दोनों पक्षों के बीच का ये विवाद पंचायत में विचाराधीन है। लेकिन 24 जनवरी 2024 की रात इस जगह किसी ने सरदार पटेल की मूर्ति लगा दी। इसकी जानकारी मिलते ही दूसरे पक्ष के लोगों ने मूर्ति पर ट्रैक्टर चढ़ा। मौके पर जमा हुए लोगों ने लाठी और पत्थर मार मूर्ति तोड़ दी।

इसकी सूचना मिलते ही पाटीदार समाज के लोग भी मौके पर जमा हो गए। दोनों पक्षों ने पत्थरबाजी की। वाहनों को फूँक दिया। मौके पर पहुँच कर पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत करवाया। कलेक्टर नीरज सिंह का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को पकड़ा है। एडिशनल SP नीतेश भार्गव ने कहा कि है कि जाँच जारी है और सुबूतों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि मूर्ति किसकी लगेगी इसका निर्णय नगर परिषद करेगी। वहीं नगर परिषद अध्यक्ष गोकुल राठौर के मुताबिक बीते साल दोनों पक्षों की तरफ से मूर्ति लगाने का प्रस्ताव आया था। राठौर ने बताया, “हमने दोनों पक्षों को मूर्ति लगाने से मना कर दिया और दोनों को बातचीत कर समाधान निकालने को कहा था। रात में क्या हुआ, यह पता नहीं।”

नासिक में बैठकर इस्लामिक स्टेट को पैसे भेज रहा था इंजीनियर: एक्सपोर्ट-इंपोर्ट की आड़ में ISIS की विचारधारा को फैला रहा था

महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने बुधवार (24 जनवरी 2024) को नासिक शहर से एक 32 साल के एक इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। इस पर सीरिया-ईराक सहित विभिन्न जगहों से अपनी आतंकी गतिविधियों को संचालित करने वाले खूँखार आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया (ISIS)’ या ‘इस्लामिक स्टेट (IS)’ को फंडिंग करने का आरोप है।

आरोपित इंजीनियर को गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की कोर्ट में पेश किया गया। वहाँ से उसे 31 जनवरी 2024 तक 7 दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है। हालाँकि, ATS टीम ने इस आरोपित का नाम एवं अन्य पहचान को अभी उजागर नहीं किया है। वहीं, उसके सहयोगियों की पहचान की कोशिश जारी है।

महाराष्ट्र ATS अब देश के अन्य राज्यों में इससे जुड़े लोगों के बारे में खोजबीन कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित इंजीनियर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित शहर नासिक में आयात-निर्यात का व्यवसाय करता था। ATS के मुताबिक, आरोपित शख्स पिछले दिनों कट्‌टरपंथी पोस्ट भी कर चुका था।

ATS के एक अधिकारी के मुताबिक, अब तक की जाँच से पता चला है कि आरोपित ने सीरिया में तीन बार वैश्विक आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट को पैसा भेजा था। आरोपित के कुछ सहयोगियों की पहचान का ATS ने खुलासा नहीं किया, लेकिन वो कई राज्यों में इनकी जाँच की जा रही है।

ATS ने आरोपित के ठिकाने से आपत्तिजनक दस्तावेजों के साथ मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप और पेन ड्राइव सहित कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट भी जब्त किए। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते के अधिकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र ATS की एक टीम को संदिग्ध आरोपित के बारे में इनपुट मिला था।

इसके बाद से ही उनकी एक टीम बीते कई दिनों से इसकी हरकतों और गतिविधियों पर नजर रख हुए थी। आतंकवाद रोधी एजेंसी ने एक बयान में कहा कि आरोपित इंजीनियर ISIS से जुड़ी एक विदेशी यूनिट के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए था। आतंकी आरोपित को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर UAPA अदालत में पेश किया गया था।

‘परिवार-तोड़ू फेमिनिस्ट और न्याय-विरोधी वामपंथी’ को भगवान राम से नफरत क्यों? क्योंकि ‘शबरी के बेर, ताड़का को ढेर, सौतेली माँ का मान’ टाइप आदर्श पुरुष कहीं और नहीं

अयोध्या में भगवान श्रीराम की मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही भारत में फेमिनिस्ट और लिब्रल्स का रुदन जारी है। लगातार ही किसी न किसी बहाने से रोना चलता चला आ रहा है। आरफा खानम से लेकर रवीश कुमार तक इनका रोना चालू है।

राहुल देव जैसे पत्रकार कई चैनलों पर जा-जा कर अपना रोना रो रहे हैं और हर बार यही लोग कह रहे हैं कि भारत का संविधान हार गया। सबसे हैरान करने वाला तो यह था कि कुछ ही समय पहले सुष्मिता सेन को ललित मोदी के साथ सम्बन्धों के आधार पर कोसने वाले लोग सुष्मिता सेन की इन्स्टाग्राम स्टोरी की प्रशंसा कर रहे थे, जिसमें सुष्मिता ने संविधान की बात की थी।

यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि आखिर यह कैसे हो गया है या हो जाता है? आखिर संविधान के अनुसार ही तो यह मंदिर बना है। क्या इस मंदिर के निर्माण की यात्रा में कानून का सहारा नहीं लिया गया? क्या न्याय के लिए भारत के संविधान में प्रदत्त न्यायपालिका का सहारा नहीं लिया गया? क्या इतने वर्षों तक अदालत का मुँह हिन्दू समाज ने नहीं ताका था?

अरे, हिन्दू समाज तो इतना सहिष्णु समाज है कि अपने आराध्य की आराधना के लिए कभी न्यायालय का मार्ग ताकता था, तो कभी मीडिया में चल रहे विमर्श का मुँह ताकता था। मगर यह नहीं समझ पा रहा था कि आखिर अपने आराध्य के घर का मामला उठाने पर उसे पिछड़ा, पुरुषवादी, साम्प्रदायिक क्यों बताया जा रहा है? क्या उसके पास यह भी अधिकार नहीं था कि वह अपने आराध्य के घर के विषय में बात कर सके?

दरअसल समस्या दूसरी है। समस्या है कथित फेमिनिस्ट और कम्युनिस्ट लोगों को, प्रभु श्रीराम के आदर्श पुरुष होने से! प्रभु श्रीराम फालतू के पुरुष-विरोधी स्त्री विमर्श पर नहीं चलते। महिला होने के नाते हजार अपराध समाज के प्रति माफ़ है, ऐसा प्रभु श्रीराम नहीं स्थापित करते। वह अपने कर्मों से यह स्थापित करते हैं कि अपराधी का कोई लिंग नहीं होता।

वह अपराध करने पर ताड़का को भी दंड देते हैं और शूपर्णखा को दिए गए दंड को भी सही ठहराते हैं। मगर भारत की परिवार-तोड़ू फेमिनिस्ट चूँकि इस सीमा तक पुरुषों से घृणा करती हैं कि वह प्रभु श्रीराम के उस रूप को देख ही नहीं पाती हैं, जिनमें स्त्रियों के लिए आदर है। जो पति अकेले ही अपनी पत्नी को खोजने की यात्रा आरम्भ करता है और जो बेटा अपनी सौतेली माँ के वचनों का मान रख कर अपना राजपाट त्याग कर वन में निकल जाता है, उससे कम्युनिस्ट फेमिनिस्ट घृणा करती हैं क्योंकि वह केवल उन्हीं स्त्रियों का आदर करते हैं, जिनमें स्त्रियोचित गुण हैं।

जो स्त्रियाँ अपराध करती हैं, भगवान राम उन्हें मात्र अपराधी की दृष्टि से देखते हैं। प्रभु श्रीराम इसलिए ताड़का को छोड़ नहीं देते हैं कि वह महिला है और कथित अबला है। हालाँकि वह आरम्भ में संकोच करते हैं कि ताड़का पर कैसे प्रहार करें क्योंकि वह महिला है और महिला पर अस्त्र नहीं प्रयोग किया जाता।

इस द्वंद्व को लेकर विश्वामित्र उन्हें आश्वस्त करते हैं कि अपराध देखा जाना चाहिए, अपराधी नहीं। इसके बाद प्रभु श्रीराम की झिझक दूर होती है और फिर वह ऋषियों के यज्ञ में बाधा उत्पन्न करने वाली ताड़का का वध करते हैं। यह हो सकता है कि ताड़का को उसकी शारीरिक बनावट के अनुसार महिला कह दिया जाए, मगर यह देखा जाना चाहिए कि वह क्या कर रही थी। वह तो सृष्टि के कार्यों के संचालन में बाधा उत्पन्न कर रही थी। वह सृष्टि के कल्याण के लिए किए जा रहे यज्ञों का विध्वंस कर रही थी, जिसके चलते ऋषि जन कल्याण के कार्यों को नहीं कर पा रहे थे।

जब जन कल्याण के कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न करेगा, तो उसका लिंग कोई भी हो, उसे मृत्यु का ही सामना करना पड़ेगा, उसे दंड का भागी होना ही होगा। यही प्रभु श्रीराम सन्देश देते हैं। इसलिए फेमिनिस्ट डरती हैं, वह विलाप करती हैं, कम्युनिस्ट प्रभु श्रीराम का विरोध करते हैं, क्योंकि प्रभु श्रीराम जहाँ शबरी के बेर खाते हैं, वहीं वो यज्ञ विध्वंस करने वाली ताड़का को दंड भी देते हैं।

प्रभु श्रीराम मर्यादा निर्धारित करते हैं और वे स्त्री विमर्श की यह सीमा भी निर्धारित करते हैं कि अपराध लिंग निरपेक्ष होता है तो दंड भी लिंग निरपेक्ष ही होना चाहिए। तभी फेमिनिस्ट भगवान श्रीराम से घृणा करती हैं! मगर यह भारत है, जिसे यह अच्छी तरह से पता है कि उसके लिए कैसे पुरुष उत्तम हैं। तभी भारत में हर जगह गूँज रहा है – “जय श्री राम” और इसी कारण परिवार-तोड़ू और पुरुषों से घृणा करने वाली फेमिनिस्ट अपनी कुंठा निकाल रही हैं।