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डियर आरफा, एक बार तेल लगाकर डाबर का DNA निकाल लो बाबर का, फिर सीने में नहीं चुभेगा भगवा

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद घर-घर भगवा पताका का दिखना पिछले कुछ समय में सामान्य हो गया है। हर हिंदू इस माहौल को देख जहाँ गौरवान्वित हैं तो हर आरफा खानम शेरवानी जैसे इसे देख रो रहे हैं। संविधान और लोकतंत्र की आड़ में नैरेटिव बनाने के लिए अलग-अलग मंच ढूँढे जा रहे हैं ताकि समझाया जा सके कि राम मंदिर का बनना कितना गलत है और हिंदुओं का जय श्रीराम कहना उससे भी बड़ा अपराध… इनका पूछना है कि हिंदुओं के घर भगवा झंडा क्यों लगा है और क्यों वो प्राण-प्रतिष्ठा से खुश हैं।

आरफा खानम ने अपनी ये पीड़ा जाहिर करने के लिए उस मंच को चुना जहाँ राहुल गाँधी पर लिखी गई किताब का विमोचन हो रहा था। यहाँ आरफा कारसेवकों को अपराधी बोलती दिखीं। मंदिर के परिसर में मस्जिद न बनने पर नाराजगी दिखाती दिखीं। साथ ही ये बताती दिखीं कि आज के समय में जब वह हिंदुओं के घरों पर भगवा ध्वज लहरते देखती हैं तो उनको ऐसा लगता है जैसे उनके सीने पर किसी ने उसे लगा दिया हो। 

ये सारी बातें कहते हुए उनकी आवाज में इतना दर्द होता है कि कोई भी समझ सकता है कि वो सिर्फ राम मंदिर बनने से दहाड़े मारकर रो नहीं रहीं है वरना भीतर से उनकी दुर्गत हो चुकी है। हास्यास्पद यह है कि आजीवन इस्लामी पत्रकारिता और इस्लामी कट्टरपंथियों के अपराधों को धो पोछने में लगीं आरफा खानम जब-जब अपनी हिंदू घृणा निकालती हैं तो खुद को सच्चा पत्रकार और भारतीय नागरिक कहने से नहीं चूँकतीं।

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में खुद को बाबर की औलाद से जोड़ते हुए उन्होंने कहा, “मैं जिस सोसायटी में रहती हैं वहाँ हिंदू-मुस्लिम-सिख सभी समुदाय के लोग हैं लेकिन फिर भी वहाँ भगवा झंडा लगा दिया गया है जिसे देख ऐसा लगता है जैसे वो मेरे सीने पर लगा हो।” उन्होंने कहा कि वह, उनके पिता, उनके पिता, उनके पिता के पिता और बाबर की औलादों तक सब इसी देश में पैदा हुए हैं…।

अपनी राष्ट्रभक्ति दिखाते समय वो बिलकुल स्पष्ट बता देती हैं कि ‘बाबर की औलाद’ (वीडियो में 2:48 मिनट के स्लॉट पर इस शब्द को सुना जा सकता है) के बाद से ही उनकी पीढ़ियाँ इस देश में हुईं। लेकिन, इस दौरान उनका विवेक इतना काम नहीं करता कि सोच सकें कि बाबर की औलादों से पहले भी हिंदुस्तान में लोग रहते थे, जिनका धर्म सनातन था, जो राम को मानते थे उनको पूजते थे, उनका आखिर क्या हुआ? आज वही सनातनी अपने धर्म का प्रदर्शन कर रहे हैं तो इसमें गलत क्या है। उनकी आस्था को अगर समझना है तो आरफा को न कि ‘बाबर की औलाद’ का टैग लगाकर सहानुभूति बटोरने की बजाए राम से जुड़ना होगा।

लाउडस्पीकर पर अजान, सड़क पर नमाज से क्यों नहीं दिक्कत थी आरफा को

भगवा देख घबराने वाली आरफा को देश के सेकुलरिज्म की बहुत चिंता है। लेकिन आरफा खानम शेरवानी का ये डर आजतक तब नहीं जागा जब रोड किनारे नमाज पढ़ने का चलन सामान्य था। क्या तब हिंदुओं को ये नहीं लगता होगा कि नमाज उसी स्थान को ब्लॉक करके पढ़ी जा रही है जहाँ आने-जाने का अधिकार उनका भी है? आज भी यदि को मजहब के नाम पर सड़क ब्लॉक करके बैठ जाए तो वह उसे उनका अधिकार कहेंगी और अगर कोई भगवा पहनकर घर से निकल जाए तो वह लोकतंत्र पर खतरा बताएँगी। आरफा बताएँ कि ये कैसी हिपोक्रेसी है जहाँ दंगा करने वाली इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ के उन्माद को प्रदर्शन कहा जाता है और शोभा यात्रा निकालने वाले हिंदुओं पर पथराव की घटनाओं पर चुप्पी साधी जाती है?

मंदिर में मस्जिद क्यों नहीं बनाया: आरफा का सवाल

बुत पूजा को खुलेआम कुफ्र कहने वाले लोगों की आवाज बन आरफा खानम ये रो रही हैं कि कोर्ट ने ऑर्डर में कहा था मंदिर के साथ रहम के तौर पर वहाँ एक छोटी मस्जिद भी बन जाए लेकिन ऐसा नहीं किया गया… अजीब बात ये है कि 5 साल पहले जब राम मंदिर पर फैसला आया था तो एक जमीन मस्जिद के लिए भी मिली थी। मुस्लिम पक्ष द्वारा उसका निर्माण तो दूर उसकी एक ईंट तक नहीं रखवाई गई। लेकिन आरफा खानम के सवाल किससे हैं? हिंदुओं से। उनके लिए देश में सौहार्द तभी आएगा जब हिंदू उन्हें उनके धर्मस्थल पर मस्जिद बनाने देंगे और सेकुलरिज्म तब जीवित रहेगा जब वो भूल जाएँगे कि किसी समय में जहाँ मजहबी स्थल हैं वहाँ भव्य मंदिर हुआ करते थे।

वरना आप ही सोचिए, अगर सोसायटी में किसी के भगवा झंडा लगा ही है तो इससे आरफा को इतनी पीड़ा क्यों हुई कि उन्हें लगे कि वो उनकी छाती पर लगा दिया गया है। हिंदुओं ने तो इतने सालों से कभी आवाज नहीं उठाई थी कि लाउडस्पीकर पर अजान सुबह-सुबह उन इलाकों में क्यों बजाई जा रही है जहाँ की जनसंख्या में हिंदू भी उतने हैं जितने की मुस्लिम…आज अगर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद लोग अपने प्रभु की जय-जयकार कर रहे हैं तो इससे सोचने वाली बात है कि आरफा चिंता में है या ‘बाबर की औलादों (आरफा के शब्द)’ के आने के बाद भारत में घुसा कट्टरपंथ, जिसने लाखों मंदिरों को तोड़ा और हिंदुओं पर धर्मांतरण का दबाव बनाया।

आरफा को आज चाहिए कि भारत में हिंदू धर्म को महत्व न दिया जाए लेकिन आरफा को ये नहीं बताना है कि भारत में बैठकर वो गाजा का रोना क्यों रोती हैं, क्या उसकी वजब उम्माह नहीं है। अगर कारण ‘इंसानियत’ होती तो क्या उन्हें सिर्फ इजरायल की कार्रवाई दिखी, हमास द्वारा की गई बर्बरता पर उन्होंने क्यों आँख मूँदी।

स्कूलों में भक्ति गीत गाने से लोकतंत्र खतरे में, हिजाब पहनने की जिद्द सही?

स्कूली छात्राओं द्वारा हिजाब पहनने की जिद्द को समर्थन देने वाली आरफा को चिंता है कि स्कूल-कॉलेजों में लोकतंत्र-संविधान नहीं पढ़ाया जा रहा, बल्कि भक्ति वाले गानों पर टीचर अपने साथ बच्चों को नचा रहे हैं। वो बताती हैं कि संसद धर्म की धुरी पर घूम रहा है और मंदिर में राजनीति हो रही है। उनसे यदि कोई पूछे कि संसद में नमाज का समय देना और इफ्तार पार्टी में राजनेताओं का पहुँचना आखिर क्या था? तो इसका जवाब होगा। क्या तब मजहब संसद में नहीं घुस रहा था क्या तब मजहब के नाम पर राजनीति नहीं चल रही थी। आरफा टीवी पर राम मंदिर की दिखाई जाने वाली खबरों को रामलीला बताती हैं। वहीं अपने भाषण को और राहुल गाँधी पर लिखी किताब के विमोचन कार्यक्रम को वो क्रांति बताती हैं।

कारसेवकों बलिदानी कहने से भी दिक्कत

आरफा की छटपटाहट ये है कि आखिर आज कारसेवकों के बलिदान लोग क्यों याद कर रहे हैं जबकि उन्होंने तो उनके मस्जिद को तोड़ा है। क्या आरफा को इस बात का जवाब नहीं देना चाहिए कि जब उन्हें कारसेवकों से इतनी समस्या है तो फिर उन हिंदुओं पर क्या बीती होगी जिनके धर्मस्थलों पर बाबर की औलादों ने अपने राज में हथौड़े मारे। उनके भगवान की मूर्तियाँ खंडित की। क्यों आखिर टीपू सुल्तान को नायक मानें, क्यों औरंगजेब को राजा समझें।

आरफा खानम अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाती हैं। कहती हैं कि नरेंद्र मोदी एक धर्म के प्रधानमंत्री बन गए हैं और बाकी विकास नहीं कर रहे। आरफा की विकास की परिभाषा शायद केवल एक मजहब के ईर्द-गिर्द होकर गुजरती है क्योंकि उन्हें न देश में बना अटल सेतु दिखाई देता है न ही अयोध्या का वो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जो राम मंदिर बनने के साथ हुआ। उनके लिए विकास ये भी नहीं है कि सदियों से चली आ रही तीन तलाक की कुरीति को पीएम मोदी ने खत्म किया, जिसकी हिम्मत पुरानी सरकारों ने कभी नहीं दिखाई। उन्हें वो रौशन घर भी नहीं दिखते जो पीएम मोदी की योजनाओं से जगमगाए, न वो गरीब परिवार दिखते हैं जिनके आवास का इंतजाम पीएम मोदी ने किया।

आरफा खानम के लिए विकास का क्या अर्थ

आरफा के लिए शायद विकास यही है कि सड़कों पर नमाज हो, हिंदुओं के इलाकों में अजान हो मुस्लिम बच्चियाँ हिजाब पहनी दिखें और उनके जैसे इस्लामी कट्टरपंथियों का नैरेटिव फिर से चलना शुरू हो जाए। मीडिया में राम मंदिर की कवरेज को कोसने वाली आरफा को चाहिए वो वामपंथी पत्रकार वापस लौट आएँ जो लच्छेदार शब्दों से हिंदुओं को हिंदू होने पर शर्म महसूस कराएँ और भाजपा की हार पर स्टूडियो में डांस दिखाएँ। उन्हें शायद पर्दों पर उन फिल्मों की वापसी भी चाहिए जहाँ महिमामंडन मुगलों का होता हो, उनसे ये दौर नहीं बर्दाश्त नहीं हो रहा जहाँ मराठाओं की गौरवगाथा, सनातन का स्वर्णिम इतिहास उभर का आता है; प्रधानमंत्री अपने हिंदू होने को छिपाते नहीं, बल्कि त्रिपुंड और तिलक गर्व से लगाते हैं।

सरकार पर प्रोपेगेंडा का इल्जाम लगाने वाली आरफा खुद को एक तरफ निष्पक्ष पत्रकार भी कहती हैं और दूसरी तरफ राहुल गाँधी की पीआर बनकर उनकी किताब का प्रचार भी करती हैं। उनके हिजाब से लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने का शायद यही माध्यम है राहुल को प्रधानमंत्री बनाया जाए, कॉन्ग्रेस की वापसी हो, भगवा झंडे हिंदुओं के घर से उतर जाएँ।

एक तरह से दे दिक्कत उनकी है भी नहीं… उनकी सोच और बौद्धिकता और इस्लामी कट्टरपंथियों की है जो उन्हें मजबूर कर रही है खुद को सिर्फ बाबर की औलाद से जोड़ने के लिए। जब तक वो खुद को बाबर से जोड़कर देखेंगी तब तक तो जाहिर है कि उनके सीने में भगवा चुभेगा ही चुभेगा। भारत को समझने के लिए, भगवा और राम मंदिर के महत्व को जानने के लिए तो उन्हें राम से जुड़ना होगा, जो उनसे हो नहीं पा रहा।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था- बकवास है रामचरितमानस, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने कहा- ये उनका मत, यह अपराध कैसे: कार्रवाई पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (25 जनवरी 2024) को समाजवादी पार्टी के नेता एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य स्वामी प्रसाद मौर्या के ऊपर चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मौर्या के खिलाफ उत्तर प्रदेश में रामचरितमानस पर विवादित बयान देने के कारण कई मामले दर्ज किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं मामलों में उन्हें राहत दी है।

सुप्रीम कोर्ट में स्वामी प्रसाद मौर्या की तरफ से उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की माँग की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बीआर गवई ने कहा, “आप इतने संवेदनशील क्यों हैं?” उनके साथ ही इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, “यह तो सिर्फ रामचरितमानस की व्याख्या का मामला है। सीधे और साफ़ तौर पर। यह अपराध कैसे है?”

इसके जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि उनके बयान के बाद रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाई जा रही हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्या इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इसी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में उन्होंने FIR रद्द करने की याचिका डाली थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रामचरितमानस जलाए जाने का प्रथम दृष्टया जिम्मेदार मौर्या के बयानों को माना था। बता दें कि मौर्या ने जनवरी 2023 में प्रतापगढ़ में तुलसीदास रचित रामचरितमानस पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि भले ही वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, लेकिन जाति के नाम पर जो भी विशेष वर्ग को अपमानित करे उस पर आपत्ति जताते हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्या ने रामचरितमानस का नाम लेते हुए था कहा कि अब करोड़ों लोग इस किताब को नहीं पढ़ते हैं, क्योंकि इसमें सब बकवास लिखा गया है। स्वामी प्रसाद ने रामचरितमानस के कुछ हिस्से को आपत्तिजनक बताते हुए सरकार से उसे हटाने की माँग की थी। उन्होंने आगे कहा था कि अगर वो अंश ना हट पाए तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

मौर्या ने यहाँ तक कहा था कि वह रामचरितमानस को धर्मग्रंथ मानते ही नहीं हैं, क्योंकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। स्वामी प्रसाद ने आरोप लगाया था कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है। उन्होंने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया था।

स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा था कि रामचरितमानस के हिसाब से ब्राह्मण कितना गलत करे वो पूजनीय है और शूद्र कितना भी सही करे वो अपमान का अधिकारी होता है। उनके इस बयान के बाद लखनऊ में उनके समर्थकों ने रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाई थीं। यह भी सामने आया था कि प्रतियाँ जलाने में मुस्लिम भी शामिल थे।

रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाने की घटना सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने कार्रवाई की थी। इसमें कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। रामचरितमानस जलाने के बाद उत्तर प्रदेश में कई जगह पर स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई थी। इन FIR से बचने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।

‘उस दिन गोली भी चलती तो नहीं बचता ढाँचा’: 6 दिसंबर के उस चश्मदीद से जानिए क्या-कब-कैसे हुआ जिसे CBI ने सबसे पहले किया था गिरफ्तार

अयोध्या में रामजन्मभूमि पर नवनिर्मित मंदिर में भगवान रामलला की मूर्ति का 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा भव्य तरीके से संपन्न हुआ। इस दिन देश और दुनिया भर के हिन्दुओं ने अपनी-अपनी जगह पर दीवाली मनाई। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद आए इस दिन के पीछे अनगिनत रामभक्तों का बलिदान और त्याग है। उसमें से कई वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं जबकि कुछ आँखों देखी घटना को बताने के लिए आज जीवित हैं। उन जीवित रामभक्तों में से एक हैं रामजी गुप्ता। रामजी गुप्ता 6 दिसंबर 1992 में विवादित ढाँचे के ध्वंस के बाद CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए पहले कारसेवक हैं।

अयोध्या में मौजूद ऑपइंडिया की टीम ने रामजी गुप्ता से मिलकर तब और अब के हालातों के बारे में जानकारी ली। रामजी गुप्ता मूल रूप से पहले फैज़ाबाद और अब अम्बेडकरनगर जिले के मुस्लिम बहुल इलाके टांडा के निवासी हैं। रामजी गुप्ता युवा अवस्था में ही विश्व हिन्दू परिषद (VHP) से जुड़ गए थे। रामजी गुप्ता का कभी टांडा में हैंडलूम का बड़ा कारोबार हुआ करता था। इनका परिवार अभी भी कस्बे के प्रतिष्ठित व्यापारियों में गिना जाता है।

हाँ ध्वंस के दौरान मैं वहाँ मौजूद था

रामजी गुप्ता की उम्र 70 वर्ष से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद वो पूरी तरह से फिट हैं। उन्होंने हमें बताया कि साल 1990 की कारसेवा में वे भी मौजूद थे। 6 दिसंबर 1992 को उन्होंने अपनी आँखों के आगे ढाँचा गिरते देखा था। उनका दावा है कि तब कारसेवकों के जोश के आगे शासन और प्रशासन सबको झुकना पड़ा था। विश्व हिन्दू परिषद की तरफ से रामभक्तों को सरयू से रेत लाकर विवादित ढाँचे पर चढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। हालाँकि, बीच में कई रामभक्त जोश में आ गए और गुंबद कुछ घंटों में ढह गया।

कारसेवकों ने नहीं मानी किसी की भी बात

रामजी गुप्ता के मुताबिक, साल 1990 में रामभक्तों के नरसंहार का लोगों में गुस्सा था। तब प्रशासन ने विवादित ढाँचे के चारों तरफ लोहे के बैरिकेड किए थे। कुछ कारसेवकों ने विवादित ढाँचे को देखकर आक्रोश प्रकट किया। इस दौरान मौके पर मौजूद अन्य लोग भी आंदोलित हो उठे।

रामजी के अनुसार, VHP और RSS के पदाधिकारियों ने उनको रोकने की काफी कोशिश की, लेकिन वो नाकाम रहे। मौके पर मौजूद प्रशासन ने भी खुद को भीड़ के गुस्से के आगे पंगु पाया। उनका मानना है कि अगर पहले की तरह गोली भी चला दी गई होती तो भी विवादित ढाँचे का बच पाना लगभग नामुमकिन था। हालाँकि तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने गोली चलाने का आदेश देने से मना कर दिया था।

रामलला की मूर्ति खुले में कैसे छोड़ देता ?

रामजी गुप्ता के मुताबिक, 6 दिसंबर 1992 को शाम होते-होते लगभग तमाम कारसेवक विवादित ढाँचे को ध्वस्त करके चले गए थे। तब भगवान राम की मूर्ति खुले में पड़ी थी, जिसे सुरक्षा बलों ने घेर रखा था। ऐसे में रामजी गुप्ता ने अपने साथ मौके पर बचे कुछ साथियों संग एक अस्थाई तम्बू बनाया।

इसी तम्बू में भगवान राम की मूर्ति को कुछ स्थानीय साधु-संतों के साथ विधि-विधान से कड़ी सुरक्षा में स्थापित करवाया गया। यही वो तम्बू था जिसमें भगवान राम की विग्रह 1992 से 2024 तक रही थी। मूर्ति स्थापना के बाद रामजी गुप्ता और उनके साथी देर रात अपने-अपने घरों को चले गए। इस बीच कल्याण सिंह की सरकार गिर गई। फैज़ाबाद (अब अयोध्या) के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदार बताते हुए सस्पेंड कर दिया गया था।

CBI पकड़ कर ले गई लखनऊ

रामजी गुप्ता दावा करते हैं कि 11 दिसंबर 1992 को अचानक उनके टांडा स्थित घर पर CBI की टीम आ धमकी। इस टीम के साथ स्थानीय पुलिस भी मौजूद थी। CBI ने उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ चलने को कहा। उनको पहले तत्कालीन फैज़ाबाद जिला मुख्यालय लाया गया। यहाँ से टीम लखनऊ रवाना हो गई। लखनऊ में उनसे कई अधिकारियों ने लम्बी पूछताछ की। इस दौरान रामजी गुप्ता ने सब कुछ होना ‘भगवान राम की इच्छा’ बताया। आखिरकार रामजी गुप्ता को लखनऊ जिला कारागार भेज दिया गया।

महीने भर बाद हाईकोर्ट ने दे दी थी जमानत

रामजी गुप्ता ने हमें बताया कि CBI ने उनको एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर फ्रेम किया था। किसी वीडियो में उन्होंने विवादित ढाँचे को गिराए जाने की जिम्मेदारी खुद ले ली थी। वो जेल में भी भगवान का भजन करते रहे। रामजी गुप्ता ने अपनी जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी। हाईकोर्ट ने महज 1 माह बाद रामजी गुप्ता को जमानत दे दी थी। महज मीडिया के आगे जिम्मेदारी ले लेने की दलील और कोई ठोस सबूत न मिल पाने को हाईकोर्ट ने जमानत योग्य बताया था। तब से रामजी गुप्ता लगातार तारीखों पर अदालतों के चक्कर लगाते रहे।

सितंबर 2020 में सभी आरोपित हुए बरी

विवादित ढाँचे का केस लखनऊ सीबीआई कोर्ट में लगभग 27 वर्षों तक चला। इसी केस में लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, साध्वी ऋतम्भरा, जय भगवान गोयल, विनय कटियार, कल्याण सिंह, महंत नृत्य गोपाल दास, चम्पत राय, मुरली मनोहर जोशी, साक्षी महराज, बृजभूषण शरण सिंह और सतीश प्रधान आदि नामजद आरोपित थे। रामजी गुप्ता केस में कुल 32 आरोपित शामिल थे।

रामजी गुप्ता के मुताबिक, उनके अलावा इस मामले में साक्षी महराज और बृजभूषण शरण सिंह की भी गिरफ्तारी हुई थी। सितंबर 2020 को इन सभी को पर्याप्त सबूतों के अभाव में लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने बरी कर दिया था। इस दौरान अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा था कि विवादित ढाँचे को गिराया जाना कोई पूर्व सुनियोजित घटना नहीं थी।

व्यापर में लाखों का घाटा, खुद के खर्च से लड़े मुकदमा

रामजी गुप्ता ने हमें बताया कि उनके कारखाने में अधिकतर मुस्लिम समुदाय के ही लोग मजदूरी करते थे। साथ ही उनका माल खरीदने के लिए भी अधिकतर मुस्लिम समुदाय के छोटे व्यापारी आते थे। जब उनको सीबीआई विवादित ढाँचे के ध्वंस केस में गिरफ्तार करके ले गई, तब कइयों ने उनके बकाया पैसे रोक लिए।

इसी के साथ ही मुस्लिम मजदूरों ने भी काम करने से मना कर दिया। 1992-93 को याद करते हुए रामजी ने कहा कि तब के समय में उनके परिवार को कारोबार में लगभग 50 लाख रुपए का घाटा हुआ था। मुकदमे से लेकर जमानत आदि का पूरा खर्च रामजी गुप्ता के परिजनों ने अपनी जेब से भरा था।

बचपन से ही किया कट्टरपंथ से संघर्ष

रामजी गुप्ता ने अपने बचपन को याद किया। उन्होंने कहा कि जब वो किशोरावस्था में थे तब से उनके टांडा बाजार में अक्सर साम्प्रदायिक तनाव हो जाया करते थे। 80 के दशक में एक घटना लव जिहाद को ले कर घटी थी। तब हालत दंगों जैसे बन गए थे जिसमें रामजी गुप्ता को भी हिन्दुओं को बचाने के लिए सक्रिय होना पड़ा था। रामजी गुप्ता ने हमें यह भी बताया कि वो आज भी 70 वर्ष की अवस्था में भी धर्म के लिए किसी भी प्रकार की कुर्बानी देने को तैयार हैं।

अब दुनिया को ब्रह्मोस पावर से लैस करेगा भारत: DRDO सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का निर्यात करने को तैयार, कई देशों से डिमांड

मार्च 2024 तक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (BrahMos) का निर्यात शुरू हो जाने की उम्मीद है। पहली डिलिवरी फिलीपींस को की जाएगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बताया है कि अगले 10 दिन में वह इस मिसाइल की ग्राउंड सिस्टम्स का निर्यात शुरू कर देगा। फिलीपींस के अलावा कई अन्य देशों ने भी इस मिसाइल को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “ग्राउंड सिस्टम को बहुत जल्द, अगले 10 दिनों में भेजा जाना चाहिए। उम्मीद है कि क्रूज मिसाइलें मार्च 2024 तक फिलीपींस चली जाएँगी। एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) ने पहले ही सभी परीक्षण पूरे कर लिए हैं। मेरा अनुमान है कि 307 तोपों के लिए ऑर्डर इस वित्तीय वर्ष में 31 मार्च से पहले दिया जाना चाहिए।”

बता दें कि फिलीपींस ने ब्रह्मोस की खरीद को 2022 में मंजूरी दी थी। भारत और फिलीपींस के बीच यह सौदा लगभग 37.49 करोड़ डॉलर में तय हुआ था। ब्रह्मोस मिसाइल के लिए ये पहला विदेशी ऑर्डर है। इसके अलावा कुछ और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ ब्रह्मोस के एक्सपोर्ट पर बातचीत चल रही है।

फिलीपींस ने दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ तनाव को देखते हुए इस मिसाइल को खरीदने का निर्णय लिया था। इन मिसाइलों की फिलीपींस सबसे पहले नौसेना के तटीय रक्षा रेजिमेंट में तैनाती करेगा।

डीआरडीओ द्वारा विकसित रक्षा उत्पादों को लेकर कामत ने बताया, “लगभग 4.94 लाख करोड़ रुपए कीमत के DRDO विकसित उत्पादों को या तो शामिल कर लिया गया है या उन्हें डीएसी (रक्षा अधिग्रहण काउंसिल) से एओएन (जरूरत की मंजूरी) मिली हुई है। अब पहले की तुलना में बहुत तेजी से विकास हो रहा है। मेरा अनुमान है कि बीते 5-7 साल में सशस्त्र बलों में शामिल किए गए प्रोडेक्ट की तुलना में 60% या 70% से अधिक प्रोडेक्ट शामिल होंगे। यह दर नाटकीय रूप से बढ़ने वाली है, जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे।”

कामत ने यह भी बताया कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का इंजन विकसित करने के लिए सफ्रान (Safran) के साथ बातचीत चल रही है। हालाँकि साझेदारी को लेकर आखिरी फैसला अभी तक नहीं लिया गया है।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बढ़ी हुई रेंज का परीक्षण

भारतीय भारतीय नौसेना ने 24 जनवरी 2024 को ही अपने जंगी जहाज से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का बढ़ी हुई रेंज (Extended Range) का कामयाब परीक्षण किया। मिसाइल के इस संस्करण में फायर पावर बढ़ाई गई है। इसकी स्टेल्थ (खुफिया) टेक्नोलॉजी को बेहतर किया गया है।

यह मिसाइल जंगी पोत से जमीन पर हमला करती है। अभी इसकी मारक क्षमता को 800 किलोमीटर से अधिक है। पहले नौसैनिक वर्जन मिसाइल की रेंज 200 किलोमीटर थी जिसे बीते साल बढ़ाकर 500 किलोमीटर किया गया था। अब इसकी रेंज बढ़कर 800 किमी तक जा पहुँची है।

बता दें कि भारत और रूस द्वारा मिलकर बनाए गए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम को दुनिया के सबसे कामयाब मिसाइल कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। ब्रह्मोस मिसाइल हवा में ही रास्ता बदलकर दुश्मन के चलते-फिरते टारगेट को बेधने में सक्षम है। ये मिसाइल 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है, इसलिए दुश्मन के राडार से बच निकलती है। यही नहीं ये अमेरिका के टोमाहॉक मिसाइल से दोगुना तेज उड़ती है।

‘यहाँ से हिंदुओं को निपटा देंगे’: भगवान रामलला के आगमन की खुशियाँ मना रहा था परिवार, कट्टरपंथी भीड़ ने किया हमला; घर में घुस महिलाओं को भी पीटा

उत्तर प्रदेश के बरेली में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मना रहे हिन्दुओं पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला कर दिया। जिस समय हिंदुओं पर हमला किया गया, उस समय अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में स्थानीय हिंदू आतिशबाजी कर रहे थे। इस हमले में महिलाओं की भी पिटाई की गई है।

जानकारी के अनुसार, बरेली के सिरौली में 24 जनवरी 2024 को वरुण रस्तोगी अपने परिवार के साथ घर के बाहर गली में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मना रहे थे। इस दौरान वे आतिशबाजी कर रहे थे। इसी दौरान सिरौली के ही रहने वाले शावेज, वसीम, सुहैल, कय्यूम, दानिश और सहाना ने वरुण और उनके बच्चों पर लाठी डंडों से हमला बोल दिया

कट्टरपंथी मुस्लिम हमलावरों ने उन पर हमला करते हुए कहा कि ‘बहुत रामभक्त बनते हो, आज तुम्हें जान से मार देंगे’। इस दौरान उन्हें बचाने आई उनकी पत्नी पर भी मुस्लिम हमलावरों ने हमला कर दिया और उनके साथ भी मारपीट की। जब उन्हें मोहल्ले के बाकी लोग बचाने आए तो हमलावरों ने उन पर भी हमला कर दिया।

कट्टरपंथियों के हमले के बाद वरुण रस्तोगी की पत्नी बच्चों को लेकर अपने घर के अंदर भाग गई, लेकिन कट्टरपंथियों ने पीछा नहीं छोड़ा और घर के अंदर घुस गए और मारना-पीटना जारी रखा। कट्टरपंथी मुस्लिम हमलावर इस दौरान एक हिन्दू युवक की सोने की चेन खींच ले गए। इसके बाद जब और लोग यहाँ आ गए तो यह धमकी देते हुए भाग गए।

इनके हमले में वरुण और उनके बच्चों समेत अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इनका इलाज जारी है। पीड़ित वरुण रस्तोगी ने थाना सिरौली में हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पुलिस ने हत्या के प्रयास और बलवा समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। फिलहाल सभी आरोपित फरार हैं।

बरेली से ही हिंदुओं पर हमले की एक और खबर आई है। यहाँ भगवान श्रीराम की पूजा कर रहे लोगों पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हमला कर दिया। भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गाँव लक्ष्मियापुर हरवंशपुर में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में भगवान की पूजा कर रहे हिन्दुओं पर पथराव कर दिया।

जानकारी के अनुसार, यहाँ 22 जनवरी की रात को पूजा कर रहे हिन्दुओं पर अनवर, नन्हे, रफीक और कादिर ने पथराव कर दिया। एकाएक पथराव से यहाँ भगदड़ की स्थिति बन गई। इन लोगों ने धमकी भी दी कि वे हिन्दुओं को यहाँ से निपटा देंगे। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

घर में ही घिरे मुइज्जू, विपक्षी दल बोले- भारत पुराना साथी, उसके खिलाफ जाना खतरनाक: चीन के जासूसी जहाज को पनाह दे रहा मालदीव

मोहम्मद मुइज्जू सरकार की भारत विरोधी नीति के खिलाफ अब मालदीव में ही आवाज उठने लगे हैं। हिंद महासागर में स्थित द्वीपीय देश मालदीव की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने मुइज्जू सरकार की आलोचना की है और कहा कि सरकार की भारत विरोधी रूख मालदीव के लिए बेहद नुकसानदायक है। विपक्षी पार्टियों ने भारत को सबसे पुराना सहयोगी बताया है।

मालदीव की मालदीवीयन डेमोक्रेटिक पार्टी और द डेमोक्रेट्स ने एक बयान जारी करके मोहम्मद मुइज्जू वाली सरकार की विदेश नीति की आलोचना की है। दोनों पार्टियों ने भारत को मालदीव का सबसे पुराना एवं भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए कहा कि भारत विरोधी स्टैंड मालदीव के विकास में रुकावट डालने वाला साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्द महासागर में स्थिरता और सुरक्षा मालदीव की स्थिरता और सुरक्षा के लिए जरूरी है।

अपने संयुक्त बयान में विपक्षी पार्टियों ने कहा, “वर्तमान प्रशासन (मुइज्जू सरकार) भारत विरोधी स्टैंड लगातार लेती जा रही है। MDP और डेमोक्रेट्स का मानना है कि किसी भी सहयोगी से दूर होना और विशेषकर अपने सबसे पुराने सहयोगी से, मालदीव के विकास के लिए लम्बे समय में रुकावटें पैदा करेगा। मालदीव की सभी सरकारों को अपने नागरिकों की भलाई के काम करती रहनी चाहिए, जैसा पहले से होता आया है।”

गौरतलब है कि मालदीव में भारत विरोधी भावनाएँ भड़काकर सत्ता में आई मुइज्जू सरकार अब इस रवैये को आगे बढ़ा रही है। वह चीन के इशारों पर काम कर रही है। मुइज्जू की सरकार ने हाल ही में एक चीनी जासूसी जहाज को मालदीव आने की अनुमति दी है। चीन का यह जासूसी जहाज जियांग यांग योंग 3 राजधानी माले के तट पर पहुँचेगा।

चीन हिन्द महासागर में अपने जासूसी जहाज भेजता रहता है। ये जहाज भारतीय तट के पास से निकलते हुए भारत के मिसाइल प्रोग्राम और परमाणु संयंत्रों के विषय में जासूसी करते हैं। साल 2023 में भी चीन ने श्रीलंका में भी ऐसा ही एक जहाज भेजा था। तब भारत ने इस पर भी कड़ी आपत्ति जताई थी।

चीन के इस जहाज के मालदीव में आने पर उसके विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह जहाज माले में अपनी आपूर्तियाँ लेने और स्टाफ बदलने के लिए आएगा। इसके लिए चीन के विदेश मंत्रालय ने माले से अनुमति माँगी थी। ये यहाँ कोई भी रिसर्च नहीं करेगा। मालदीव ने कहा है कि वह हमेशा से मित्र राष्ट्रों को ऐसी अनुमतियाँ देता आया है।

गौरतलब है कि इस चीनी जहाज को अनुमति ऐसे समय में दी गई है, जब मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू हाल ही में चीन का एक दौरा करके आए हैं। यह उनका पहला आधिकारिक विदेश दौरा था। इस प्रकार उन्होंने उस परम्परा को भी तोड़ा जिसके अंतर्गत मालदीव का राष्ट्रपति सबसे पहले भारत के दौरे पर आता था।

मुइज्जू सरकार की आलोचना करने वाली मालदीवीयन डेमोक्रेटिक पार्टी यहाँ के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहीम मोहम्मद सोलिह की पार्टी है। वह नवम्बर 2023 तक मालदीव के राष्ट्रपति थे। वह भारत समर्थक माने जाते थे। उनके कार्यकाल में मालदीव के भारत के साथ संबंधों में काफी बढ़ोत्तरी हुई थी।

चीन के जासूजी जहाज को अनुमति देने के साथ ही मालदीव की मुइज्जू सरकार ने हाल ही में मालदीव में राहत बचाव में लगे भारतीय सैनिकों को यहाँ से निकालने को कहा था। मालदीव ने कहा था कि भारत 15 मार्च तक अपने सैनिक हटा ले। हाल ही में मुइज्जू सरकार में मंत्रियों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणियाँ की थी। इसके खिलाफ भारत में गुस्सा देखा गया था और भारतीयों ने मालदीव का बायकाट करने को लेकर अभियान चलाया था।

मीरा रोड के बाद मोहम्मद अली रोड पर भी चला बुलडोजर, BMC ने 40 दुकानों पर की कार्रवाई: जानें क्यों लिया गया एक्शन

मुंबई के मोहम्मद अली रोड पर बुधवार (25 जनवरी 2024) को बृहन्मुंबई नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान 40 दुकानों द्वारा किए गए कब्जे को हटाया गया। इनमें कुछ दुकानें 1930 की बनीं हुईं थीं। इससे पहले मंगलवार (24 जनवरी 2024) को ठाणे के मीरा रोड पर मीरा भायंदर नगर निगम ने 15 इमारतों पर कार्रवाई की थी। ये जगह 21 जनवरी 2024 को चर्चा में आई थी जब शोभा यात्रा निकालते समय हिंदुओं पर हमला हुआ था

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि मोहम्मद अली रोड पर लोग दुकान सड़कों तक बढ़ाकर बैठे थे। अतिक्रमण हटाने के लिए, रोड चौड़ा करने के लिए ये कार्रवाई की गई है। खबर में एक वीडियो भी लगाई गई है जिसमें दुकान पर बुलडोजर चलता दिख रहा है। इन दुकानों में नूरानी मिल्क सेंटर और सुलेमान उस्मान मिठाईवाला की भी दुकान है।

बीएमसी के अतिक्रमण हटाओ विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “वर्तमान में सीएम के ‘गहन सफाई’ अभियान के हिस्से के रूप में सभी नगरपालिका वार्डों में स्थानीय अभियान चलाए जा रहे हैं। जिसके लिए, हम फुटपाथ साफ-सुथरा रहे यह सुनिश्चित करने के लिए सड़क के किनारे छोटे भोजनालयों और विक्रेताओं को हटा रहे हैं। यह अभियान दिसंबर के पहले सप्ताह से चालू है।”

वहीं विपक्ष ने कहा कि ये कार्रवाई सिर्फ एक समुदाय के खिलाफ हो रही है। वह लोग बुलडोजर कल्चर को घातक और असंवैधानिक बता रहे हैं। समाजवादी पार्टी के विधायक भिवंडी रईस शेक ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये सब केवल एक कम्युनिटी के विरोध में हो रहा है और ये सब केवल इसलिए है क्योंकि चुनाव आ रहे हैं।

बता दें कि मंगलवार को MBMC ने हैदरी चौक पर बुलडोजर की कार्रवाई की थी। ये जगह उस जगह के करीब है जहाँ 21 जनवरी 2024 को विवाद हुआ।

बिखरता जा रहा है INDI गठबंधन का कुनबा: ममता के बाद केजरीवाल ने दिया कॉन्ग्रेस को झटका, AAP ने पंजाब में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का किया ऐलान

लोकसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हराने के लिए बनी I.N.D.I गठबंधन का कुनबा बिखरता नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल में TMC के बाद गठबंधन की एक और सहयोगी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी पंजाब में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 24 जनवरी 2024 को राज्य में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस, दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावना से इनकार कर दिया। बता दें कि ये दोनों ही पार्टियाँ विपक्षी इंडी गुट में सहयोगी हैं। हालाँकि, दोनों ही अपने-अपने राज्यों में अकेले चलने का निर्णय लिया है।

इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं टीएमसी की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 24 जनवरी 2024 को ऐलान किया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। अब सीएम भगवंत मान के ऐलान के बाद कॉन्ग्रेस और I.N.D.I गठबंधन को दूसरा करारा झटका लगा है।

जब सीएम भगवंत मान से ये सवाल किया गया कि ‘क्या आप भी सीएम ममता बनर्जी के अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ने वाले फैसले की राह अपनाने जा रहे हैं’ तो भगवंत मान ने कहा, “पंजाब में हम ऐसा कुछ भी (कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन) नहीं करेंगे। कॉन्ग्रेस के साथ हमारा कोई संबंध नहीं है।”

यही नहीं, सीएम मान ने विश्वास जताया है कि उनकी पार्टी अकेले ही राज्य की सभी 13 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करेगी। बता दें कि सीएम मान के ऐलान से पहले ही पंजाब में AAP के सभी 13 लोकसभा सीटों पर अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावनाएँ जताई जा रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने राज्य में अकेले आम चुनाव लड़ने के पंजाब यूनिट के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि पंजाब में अकेले लोकसभा चुनाव में उतरने का फैसला AAP ने कॉन्ग्रेस के सीट बँटवारे में अड़ियल रवैया अपनाने के बाद लिया है।

बता दें दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच सीट शेयरिंग को लेकर कई दौर की बातचीत हुई है। हालाँकि, हर बार सीएम भगवंत मान ने पंजाब में अपने दम पर चुनाव में उतरने की बात कही। भगवंत मान ने कहा, “हम सरकारें बनाना और चलाना जानते हैं।”

सीएम मान ने कुछ दिन पहले भी कहा था कि साल 2022 में भी पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP ने अकेले दम पर 117 में से 92 सीट जीती थीं। उनका कहना था कि दिल्ली में भी AAP तीन बार जीती है। वहीं, गुजरात में भी कॉन्ग्रेस को पीछे छोड़कर AAP ने अकेले 13 फीसदी वोट हासिल किए।

टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने के अपने फैसले के लिए गठबंधन के अहम सदस्य कॉन्ग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत नाकाम होने का हवाला दिया था। सीएम बनर्जी ने कहा था, “मैंने उन्हें जो भी प्रस्ताव दिया, उन्होंने सभी को अस्वीकार कर दिया। तभी से हमने पश्चिम बंगाल में अकेले जाने का फैसला किया है।”

बता दें कि सीएम बनर्जी की ऐलान कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के साथ तीखी नोकझोंक के एक दिन बाद आया था। कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की थी। उन्हें अवसरवादी कहा था और कहा था कि पार्टी उनकी मदद के बगैर लोकसभा चुनाव 2024 लड़ेगी।

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में साल 2019 के लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन के आधार पर कॉन्ग्रेस को दो सीटों की पेशकश की थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने 10-12 सीटों की माँग की थी, लेकिन ममता इस पर राजी नहीं हुईं। वहीं, BSP सुप्रीमो मायावती भी I.N.D.I गठबंधन की आशाओं पर पानी फेर चुकी हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि कि बीएसपी अकेले चुनाव लड़ेगी।

सपने नहीं हकीकत बुनते हैं, तभी तो सब मोदी को चुनते हैं: भाजपा ने 2024 के लोकसभा रण का फूँका बिगुल, गाने के साथ मारी एंट्री

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में पार्टी (भाजपा) के 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान की आधिकारिक शुरुआत की है। भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘सपने नहीं हकीकत बुनते हैं, तभी तो सब मोदी को चुनते हैं’ नारे के साथ उतरेगी।

भाजपा का यह अभियान पार्टी के नवमतदाता सम्मेलन में शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को संबोधित किया। इसी के साथ ही भाजपा के चुनावी अभियान के लिए आधिकारिक गाना भी रिलीज किया गया। यह गाना भी भाजपा के नारे पर ही आधारित है।

भाजपा द्वारा जारी किए गए लगभग 2 मिनट के इस गाने में पिछले 10 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों और भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई के बारे में बताया गया है। इसमें अयोध्या में हुई राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का भी जिक्र है। इस गाने में भाजपा के सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में हुए कामों को हाइलाइट किया गया है।

गाने में वन्दे भारत ट्रेन, डिजिटल पेमेंट, नए हाइवे और अन्य विकास परियोजनाओं के भी दृश्य दिखाए गए हैं। इसके अलावा, गाने में भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत को प्रदर्शित किया है। इसके साथ ही नारी सशक्तिकरण, चंद्रयान-3 आदि का भी जिक्र किया गया है।

भाजपा का कहना है कि 2024 के चुनावी अभियान के लिए जो नारा चुना गया है, वह लोगों की भावनाओं को दर्शाता है। इसके साथ ही यह अभियान ‘मोदी की गारंटी’ वाले भाव के साथ फिट बैठता है। भाजपा का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान के लिए अपनाया गया यह नारा जनता के बीच से आया है।

गौरतलब है कि ‘सपने नहीं हकीकत बुनते हैं…’ का नारा भाजपा ने हाल ही में संपन्न हुए पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी उपयोग किया था। भाजपा को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बहुमत भी हासिल हुआ था। नारे की सफलता को देखते हुए इसे अब आधिकारिक रूप से लोकसभा के अभियान के लिए चुन लिया गया है।

भाजपा का कहना है कि इस गाने के कुछ दिनों बाद वह एक नया गाना भी लॉन्च करेगी, जिसे जनता के बड़े वर्ग तक पहुँचाया जाएगा। इसका उद्देश्य जनता को यह बताना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में कितने क्षेत्रों में लक्ष्य की प्राप्ति हुई है और वादे पूरे किए गए हैं।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान को शुरू करने के दौरान कहा, “मोदी सरकार के प्रयासों ने करोड़ों सपनों को सच्चाई में बदला है। युवाओं को स्टार्टअप और सस्ते कर्ज से रोजगार मिले हैं तथा वो आत्मनिर्भर हुए हैं। किसान अब अपनी फसल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेच सकते हैं।”

नड्डा ने आगे कहा, “किसानों को बीज से लेकर बाजार तक का सहारा मिला है…. बड़ी संख्या में गरीबों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाया गया है और वे अब सम्मान की जिन्दगी जी रहे हैं। अब लोगों में एक समृद्ध भारत की आशा है और उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री उनकी आशाओं के बारे में ना सिर्फ सुनते हैं बल्कि उन्हें पूरा भी करते हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी आज गुरुवार (25 जनवरी 2024) को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक रैली को संबोधित करेंगे। यह भाजपा के चुनावी अभियान की पहली रैली होगी। यहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के तमाम बड़े नेता मौजूद रहेंगे।

राहुल गाँधी पर दिल्ली पुलिस ने की है FIR, रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने में नहीं मिली है कोई राहत: मीडिया को भ्रम फैलाने पर NCPCR अध्यक्ष ने लताड़ा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा एक रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में एफआईआर करने की माँग को लेकर एक याचिका दायर हुई थी। दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई हुई और याचिका रद्द कर दी गई। हाईकोर्ट ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि दिल्ली पुलिस इस मामले पर पहले एफआईआर दर्ज कर चुकी है। हालाँकि मीडिया ने इस याचिका रद्द की खबर को ऐसे चलाया जैसे राहुल गाँधी को कितनी बड़ी राहत मिली हो। इस तरह की सेलेक्टिव रिपोर्टिंग पर एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने मीडिया संस्थानों को भी लताड़ा।

दरअसल, हुआ ये कि एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा 2021 की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे सोशल एक्टिविस्ट सुरेश महादलेकर ने डाला था। इसमें 3 माँग की गई थी। पहली एनसीपीसीआर मामले पर एक्शन ले, दूसरी राहुल गाँधी अपना वो ट्वीट डिलीट करें, तीसरी राहुल गाँधी पर एफआईआर हो। अब चूँकि तीनों माँग पहले ही पूरी हो चुकी थी तो कोर्ट ने याचिका रद्द करना ही ठीक समझा।

गौर हो कि इस याचिका के रद्द होने से मामले में राहुल गाँधी पर कार्रवाई नहीं होगी… ऐसा कहीं नहीं कहा गया। एनसीपीसीआर माँग कर रहा है कि राहुल की इस मामले में गिरफ्तारी हो। इससे पहले आयोग की शिकायत पर राहुल गाँधी के खिलाफ 2021 में ही आईपीसी की धारा 228 एक के तहत एफआईआर हो गई थी। उन्होंने पीड़िता बच्ची के माता की वीडियो बनाकर अपने अकॉउंट पर डाला था जिसे बाद में डिलीट करने को कहा गया और वो मना करते रहे। जब मामला कोर्ट पहुँचा तो उन्होंने दबाव में उसे हटाया।

कोर्ट ने इन्हीं तीनों शर्तों को पूरा देख याचिका को रद्द किया। लेकिन मीडिया में छापा गया कि कोर्ट ने राहुल गाँधी को राहत दे दी है, उनके खिलाफ दर्ज याचिका खारिज हो गई है आदि- आदि। ऐसी खबरों पर जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो की नजर पड़ी तो उन्होंने इसके स्क्रीनशॉट लेकर अपने अकॉउंट पर साझा किए और तथ्यों के साथ इन मीडिया संस्थानों को खूब लताड़ा।

उन्होंने कहा सेलेक्टिव रिपोर्टिंग कर के नैरेटिव सेट करने के उदाहरण के रूप में टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिंदू की यह खबरें पत्रकारिता के छात्रों को कोर्स में शामिल की जानी चाहिए। इसके बाद उन्होंने बिंदुवार तरीके से बताया कि कैसे राहुल गाँधी के खिलाफ हुई सुनवाई का मामला क्या है और मीडिया ने उसे क्या बताया है।

अपने ट्वीट में उन्होंने ये भी बताया कि नाबालिग की रेप और हत्या के मामले में राहुल गाँधी ने जहाँ उसकी पहचान उजागर की, वहीं अरविंद केजरीवाल ने राहुल को पॉक्सो से बचाने के लिए ये कह दिया कि बच्ची की मौत करंट लगने से हुई थी जबकि हकीकत में पुलिस एफआईआर में साफतौर पर लिखा है कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और फिर उसकी हत्या की गई।