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यूपी में अखिलेश यादव ने की कॉन्ग्रेस को मात्र 11 सीटें देने की घोषणा, पार्टी ने नकारा… दक्षिण में DMK ने कहा – जनता की सेवा नहीं, सिर्फ सीट की राजनीति कर रही कॉन्ग्रेस

जहाँ एक तरफ बिहार में I.N.D.I. गठबंधन टूट गया है, वहीं उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में भी कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए स्थिति ठीक नहीं है। पहले मीडिया में खबर आई कि अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस को 11 सीटें देकर उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए गठबंधन फाइनल कर लिया है। अखिलेश यादव ने इसकी घोषणा कर डाली, लेकिन फिर कॉन्ग्रेस ने इसे नकार दिया। उधर तमिलनाडु में गठबंधन साथी DMK ने भी कॉन्ग्रेस पार्टी को गीदड़-भभकी देनी शुरू कर दी है।

अखिलेश यादव की डील कॉन्ग्रेस को मंजूर नहीं

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने शनिवार (27 जनवरी, 2024) को घोषणा कर दी कि कॉन्ग्रेस यूपी में 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालाँकि, अब ‘इंडिया टुडे’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने इस फॉर्मूले को नकार दिया है। अखिलेश यादव ने गठबंधन का ऐलान करने हुए जीत का दावा किया है। यूपी में कॉन्ग्रेस की यूनिट ने इस डील को नकारते हुए कहा है कि ये निर्णय अखिलेश यादव का है, कॉन्ग्रेस पार्टी का नहीं। यूपी में सबसे ज़्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में NDA ने 62 सीटें अपने नाम की थी। वहीं सपा-बसपा गठबंधन जहाँ 15 सीटों पर सिमट गई थी, कॉन्ग्रेस को मात्र 1 सीट से संतोष करना पड़ा था। 1 दिन पहले ही एक इंटरव्यू में अखिलेश यादव ने I.N.D.I. गठबंधन में स्थिति ठीक न होने के लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था। कॉन्ग्रेस यूपी में 50 लोकसभा सीटों पर लड़ने का दावा करती आई है। अब सपा कह रही है कि 11 सीटों वाली बात सिर्फ प्रस्ताव थी, कॉन्ग्रेस अगर जिताऊ उम्मीदवारों के बारे में बताए तो सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

तमिलनाडु में DMK ने भी दिखाया धौंस

उधर तमिलनाडु में डीएमके ने कहा है कि कॉन्ग्रेस सिर्फ लोकसभा चुनाव में अधिक सीटों के लिए पार्टी चला रही है। मंत्री राजा कन्नप्पन ने कहा कि कॉन्ग्रेस एक बड़ी और पुरानी पार्टी है, लेकिन उसने अब अपनी ताकत खो दी है। उन्होंने पूछा कि केवल चुनाव लड़ने के लिए सीटें लेने का क्या फायदा है? उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस इसीलिए काम नहीं करती कि जनता का अच्छा हो, जब चुनाव आता है तो वो आ जाते हैं। लोगों के बीच ये सब काम नहीं करता।”

उन्होंने गुरुवार (24 जनवरी, 2024) को पुडुचेरी में भाषा संघर्ष में मरे लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने हुए ये बातें कही। मंत्री ने कहा कि भाजपा को हम देख लेंगे। बता दें कि रविवार को DMK-कॉन्ग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत होनी है। उधर पश्चिम बंगाल में TMC और पंजाब में AAP ने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया है। बिहार में JDU छिटक गई है। जुलाई 2023 में बना ये गठबंधन अब लगभग बिखर गया है।

अम्बेडकर पूजा में नहीं लिया हिस्सा तो छात्र को नंगा घुमाया, मारा पीटा, गालियाँ दी, वीडियो बनाकर किया वायरल, कॉन्ग्रेस राज वाले कर्नाटक की घटना

कर्नाटक के कलबुर्गी में एक छात्र को अम्बेडकर पूजा में हिस्सा नहीं लेने पर नंगा करके शहर भर में घुमाया गया है। इस दौरान उसके हाथ में डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर पकड़ाया था। नंगा परेड निकालने के दौरान नारे लगाए गए और उसे मारने-पीटने के साथ-साथ बेइज्जत भी किया गया। बाद में इसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, कलबुर्गी के एक कॉलेज में पढ़ने वाले हॉस्टल के कुछ छात्रों ने बृहस्पतिवार (25 जनवरी 2024) को अम्बेडकर पूजा का आयोजन किया था। इसी हॉस्टल में पीड़ित छात्र भी रहता था। छात्र एनवी कॉलेज में विज्ञान की पढ़ता करता है। उसे अम्बेडकर पूजा में शामिल होने के लिए कहा गया था। हालाँकि, छात्र ने निजी कारणों के चलते इसमें भाग लेने से मना कर दिया।

इसके बाद पूजा का आयोजन करने वाले छात्रों ने अन्य छात्रों के साथ मिलकर उसकी पिटाई कर दी। इस दौरान उसे गालियाँ भी दी गईं। इससे भी जब आरोपित छात्रों का मन नहीं भरा तो उन्होंने छात्र को नंगा करके कलबुर्गी की सड़कों पर परेड निकाली। इस दौरान पीड़ित के हाथ में अम्बेडकर की तस्वीर भी पकड़ा दी। नग्न परेड निकालने के दौरान जब आरोपित छात्रों ने पुलिस को देखा तो पीड़ित को छोड़कर भाग गए।

इस दौरान आरोपित पीड़ित छात्र का वीडियो भी बनाते रहे। बाद में उन्होंने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बताया जा रहा है कि 12वीं में पढ़ने वाला 19 वर्षीय पीड़ित छात्र जिस हॉस्टल में रहता था, वह सरकार द्वारा संचालित है। पीड़ित छात्र लम्बानी समुदाय से ताल्लुक रखता है। यह समुदाय बंजारा श्रेणी में आता है। उसके पिता काम करने के लिए मुंबई में रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्टर अम्बेडकर की साप्ताहिक पूजा आयोजित करने वाले जितने भी छात्रों ने पीड़ित के साथ मारपीट की और उसकी नग्न परेड निकाली, वे सभी नाबालिग हैं। कुछ रिपोर्ट में पीड़ित छात्र को भी नाबालिग बताया गया है। इस घटना के बाद पीड़ित छात्र के पिता नीलकंठ राठौड़ ने कर्नाटक के कलबुर्गी पहुँचकर अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

पीड़ित के पिता नीलकंठ राठौड़ की शिकातय पर आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। है। आरोपितों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 341, 323, 504, 505 , 506 और 149 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। अभी तक इन आरोपितों की गिरफ्तारी के विषय में कोई जानकारी नहीं सामने आई है।

बता दें कि बीते कुछ समय में कर्नाटक में हिंसा की कई घटनाएँ हुई हैं। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में इन घटनाओं पर रोक लगाने में विफल रही है। इससे पहले बेलगावी में एक महिला को भी नग्न परेड करवाई गई थी। वहीं, हाल ही में एक हिन्दू पुरुष के साथ दिखने पर एक मुस्लिम महिला के साथ 7 मुस्लिम युवकों ने उसके साथ बलात्कार किया था।

₹3570 करोड़ की लागत से बनेगा 68 km का बाईपास, रामलला के भक्तों के लिए NHAI का प्लान: अयोध्या ही नहीं, लखनऊ, बस्ती और गोंडा को भी फायदा

अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही श्रद्धा का सैलाब आया हुआ है, बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। ऐसे में रामलला की जन्मभूमि आने वाले भक्तों को कोई तकलीफ हो और न ही वहाँ रहने वालों को भी सुविधाएँ मिले, इसके लिए ‘सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय’ (NHAI) ने 68 किलोमीटर बाईपास का प्लान बनाया है।

इस बाईपास के बनने से अयोध्या और आसपास के इलाकों में भीड़भाड़ कम होगी और ये इलाका जाम से फ्री रहेगा। NHAI ने 3570 करोड़ रुपए की लागत वाले इस 68 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास के निर्माण के लिए केंद्र से खास मंजूरी माँगी है। इस कड़ी में NHAI ने इस लखनऊ, बस्ती और गोंडा जिलों को कवर करने जा रहे इस 4/6 लेन राजमार्ग के लिए बिड्स आमंत्रित की हैं। इस प्रोजेक्ट को उत्तरी अयोध्या बाईपास और दक्षिण अयोध्या बाईपास नामक दो भागों में बाँटा गया है। ये बाईपास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मोड पर बनेगा।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद क्षेत्र में यात्री और मालवाहक वाहनों की आवाजाही में बड़े पैमाने पर बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए इस बाईपास को बनाने के बारे में सोचा गया है। अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में हर रोज के मौजूदा ट्रैफिक 2023 ,इ 89,023 तक बढ़कर हर रोज 2.17 लाख पहुँचने की संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बाईपास प्रोजेक्ट के लिए खास मंजूरी माँगी गई है। बता दें कि वित्त मंत्रालय ने परिवहन मंत्रालय से फिलहाल भारतमाला के तहत किसी भी नए प्रोजेक्ट पर कुछ वक्त तक आगे नहीं बढ़ने को कहा था।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय का कहना है चूँकि प्रोजेक्ट की लागत 1000 करोड़ रुपए से अधिक हैं, इसलिए मंत्रालय को PPP प्रोजेक्ट का मूल्यांकन करने वाली शीर्ष कमेटी से मंजूरी लेने की जरूरत है। वहीं NHAI ढाई साल में इस बाईपास का निर्माण पूरा करना चाहता है। अगर NHAI का ये प्रोजेक्ट तय समयसीमा यानी ढाई साल में पूरा हो जाता है तो लखनऊ, बस्ती और गोंडा इन तीन जिलों में पर्यटक और तीर्थ स्थलों सहित आर्थिक, सामाजिक और आर्थिक सप्लाई चेन मैनेजमेंट के केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी में सुविधा होगी।

अयोध्या बाईपास प्रोजेक्ट अयोध्या रेलवे स्टेशन, सोहवाल रेलवे स्टेशन, एएन देव नगर रेलवे स्टेशन और अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ ही अयोध्या एयरपोर्ट जैसे इंटीग्रेटेड बुनियादी ढाँचे के साथ मल्टी-मॉडलिटी को बढ़ाएगा।

बता दें कि अयोध्या उत्तर प्रदेश के 2 आर्थिक केंद्रों लखनऊ और गोरखपुर के बीच में है। चमड़ा, इंजीनियरिंग के सामान, भवन निर्माण सामग्री, लोहा और स्टील जैसे जरूरी सामान अयोध्या से होकर गुजरते हैं, इसलिए इस बाईपास के बनने से माल की आपूर्ति बगैर बाधा के हो पाएगी।

इसके साथ ही इससे रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या राम मंदिर आने वाले भक्तों को भी सुविधा होगी, क्योंकि यहाँ भक्तों के आने की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है। उत्तर प्रदेश अयोध्या जोन के आईजी प्रवीण कुमार ने कहा, “यहाँ भारी संख्या में लोग आ रहे हैं। कल भी 3 लाख से अधिक लोगों ने दर्शन किए हैं। हम सभी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करा रहे हैं। प्रशासन द्वारा भी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं।”

2 डिप्टी CM, विधानसभा स्पीकर भी… रात तक नीतीश को पहुँचेगा समर्थन पत्र: बिहार में BJP की ‘जीत’ पर मीडिया रिपोर्ट – कल 3 बजे शपथग्रहण

बिहार में सरकार बदलने वाली है, लेकिन नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहेंगे। अंतर सिर्फ इतना होगा कि जदयू-राजद की जगह अब सत्ता में भाजपा-जदयू गठबंधन आ जाएगा। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की है। हालाँकि, उन्होंने बताया है कि वो राज्यपाल को मोतिहारी के वार्षिक कृषि मेले में आमंत्रित करने के लिए गए थे। ये भी सामने आया है कि शनिवार (27 जनवरी, 2024) को रात तक नीतीश कुमार को भाजपा अपना समर्थन पत्र सौंप देगी।

भाजपा विधानसभा अध्यक्ष का पद अपने पास रहेगी। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पूर्व में बिहार की ही तर्ज पर 2 उप-मुख्यमंत्री बनाए जाएँगे। उधर लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा भी अमित शाह से मिले हैं। वहीं बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े राजधानी पटना पहुँचे हैं, जहाँ उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की ‘न्याय यात्रा’ ‘I.N.D.I. गठबंधन तोड़ो’ यात्रा है।

बिहार के स्थानीय नेताओं के साथ भाजपा शीर्ष नेतृत्व की जो बैठक हुई है, उसमें तय किया गया कि 2020 के फॉर्मूले पर ही भाजपा सरकार में शामिल होगी। यानी, नीतीश कुमार बिहार में अगले विधानसभा चुनाव तक CM बने रहेंगे। उधर राजद कोटे के मंत्रियों ने अपने तय कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। सभी मंत्री जल्दी-जल्दी अपने विभागीय कार्य निपटा रहे हैं। उधर कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने 20 भाजपा विधायकों के अपने संपर्क में होने का दावा किया है।

वेटनरी ग्राउंड में अग्निशमन विभाग के एक कार्यक्रम में फायर ब्रिग्रेड की गाड़ियों को सीएम नीतीश कुमार ने हरी झंडी दिखाई, जिसमें राजद कोटे के मंत्री शाहनवाज़ नहीं पहुँचे। वहीं जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि राजद के मन में पाप है। उन्होंने कहा कि जदयू के सभी विधायक एकजुट हैं। वहीं RJD नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। उधर बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने HAM (सेक्युलर) के अध्यक्ष जीतन राम माँझी से मुलाकात की है।

नीतीश कुमार ने कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राजद सुप्रीमो लालू यादव के फोन कॉल तक उठाने बंद कर दिए हैं। बिहार के हालत पर खड़गे-लालू में बातचीत हुई है। उधर बक्सर के एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और नीतीश कुमार खुल कर बात करते हुए दिखे। राजद ने अपने विधायकों को बैठक के लिए बुलाया। ताज़ा सूचना है कि रविवार को दोपहर के 3 बजे नीतीश कुमार का शपथग्रहण होगा।

‘PM मोदी + गाय का गोबर’ से उड़ाया मजाक, केरल हाईकोर्ट के 2 कर्मचारी को किया गया सस्पेंड

केरल हाई कोर्ट ने अपने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। इन दोनों ने 26 जनवरी 2024 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर कोर्ट के ही सभागार में किए गए एक नाटक में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार का मखौल उड़ाया था। हाई कोर्ट ने इन दोनों को तुरंत निलंबित करने के साथ ही इसे लेकर जाँच बैठा दी है। कोर्ट ने कहा है कि जाँच पूरी होने तक दोनों कर्मचारी निलंबित ही रहेंगे। केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एजे देसाई के आदेश पर सहायक रजिस्ट्रार सुधीश टीए और कोर्ट कीपर सुधीश पीएम को निलंबित कर दिया गया है।

हाईकोर्ट ने शुक्रवार (26 जनवरी 2024) को दिए अपने आदेश में कहा कि इस नाटक की सामग्री ‘अपमानजनक’ थी और इसमें सरकार की आलोचना की गई थी। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक, “हाईकोर्ट ने जनहित में यह जरूरी समझा है कि सुधीश टीए, सहायक रजिस्ट्रार एचआर ग्रेड और सुधीश पीएम, कोर्ट कीपर (हायर ग्रेड) को लंबित जाँच और अनुशासनात्मक कार्रवाई तक हाई कोर्ट सेवा से निलंबित किया जाना चाहिए। ये मामला गणतंत्र दिवस समारोह, 2024 के दौरान हाई कोर्ट सभागार में किए गए स्टेज शो में सरकार के खिलाफ अपमानजनक सामग्री और आलोचना से संबंधित है।”

केरल हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी फोटो साभार: वर्डिक्टम

इसके साथ ही रजिस्ट्रार (प्रशासन) को यह भी निर्देश दिया गया है कि उन हालातों के बारे में विस्तृत ब्यौरा पेश करें, जिनमें ये घटना हुई। हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार (सतर्कता) को घटना की जाँच करने और जल्द से जल्द एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

लीगल सेल और भारतीय अभिभाषक परिषद ने इस नाटक की शिकायत भारत के मुख्य न्यायाधीश, केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री और खुद प्रधानमंत्री से की थी। बता दें कि 26 जनवरी, 2024 को गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर नाटक का मंचन हुआ था।

कहा जा रहा है कि इस नाटक के डायलॉग्स हाईकोर्ट सहायक रजिस्ट्रार सुधीश ने लिखे थे। एक स्वतंत्र कानूनी न्यूज वेबसाइट वर्डिक्टम के मुताबिक, मलयालम नाटक में पीएम मोदी से मिलते-जुलते किरदार का इस्तेमाल कर उनका मजाक उड़ाया गया। पीएम मोदी से मिलता-जुलता किरदार इसमें कहता है, “अगर मैं कहूँ कि इसका औषधीय महत्व है, तो मेरे अनुयायी गाय का गोबर भी खाएँगे। यही मेरी ताकत है।”

इसी नाटक में एक किरदार कहता है, “मैं ‘प्यारा’ कहता हूँ, लेकिन जनता ‘पोरा’ (मलयालम में काफी नहीं) सुनती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे अपने देश से प्यार नहीं करते। गद्दार।” बताते चलें कि पीए मोदी अक्सर जनता को ‘मेरे प्यारे देशवासियों’ कहकर संबोधित करते हैं। इसके अलावा पीएम मोदी बना किरदार का एक जगह यह डायलॉग भी है – “मैंने दुनिया घुमने की खातिर परिवार तक को छोड़ दिया, फिर भी लोग मेरे लिए कृतज्ञ नहीं हैं।”

बिहार में हर तरफ राजनीतिक चक्रव्यूह: नीतीश कुमार ने राजद कोटे के मंत्रियों के निर्णय पर लगाई रोक, तेजस्वी के मंत्री ने रद्द किए कार्यक्रम

बिहार में राजनीतिक ड्रामा अपने चरम पर है। कहा जा रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज शनिवार (27 जनवरी 2024) को कभी भी अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं, राजद के नेता एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि वे बिहार में आसानी से तख्ता पलट नहीं होने देंगे। उधर, विधायकों को टूट के आसार के बीच कॉन्ग्रेस के 13 विधायकों के मोबाइल बंद हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार कभी महागठबंधन से औपचारिक नाता तोड़ सकते हैं। वहीं, राजद ने राजभवन में अपने सरकार के समर्थन में विधायकों की परेड कराने की बात कही है। इसको लेकर राजभवन के सामने बैरेकेडिंग शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, जदयू, राजद और भाजपा ने अपने-अपने नेताओं के साथ आज बैठक रखी है।

उधर, नीतीश कुमार बक्सर जिले के ब्रह्मपुर में भगवान शिव के मंदिर के विकास के लिए शिलान्यास कार्यक्रम में पहुँचे हैं। वहाँ लगाए गए पोस्टर में तेजस्वी की तस्वीर भी नदारद है। इससे पहले शुक्रवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में तेजस्वी यादव अनुपस्थित रहे थे। इसके बाद एक कुर्सी पर तेजस्वी के नाम की लगी पर्ची को हटाकर अशोक चौधरी बैठ गए थे।

सरकार गिरने की आशंका के बीच RJD कोटे के मंत्रियों ने अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और अपने विभागीय कामों को जल्दी-जल्दी निपटाने में लगे हैं। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने नीतीश कैबिनेट में राजद कोटे के मंत्रियों के विभाग के किसी भी फाइल पर किसी भी तरह के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

उधर, कॉन्ग्रेस के विधायकों में भी फूट की खबर आ रही है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने इन खबर को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा, “हमारे विधायक पार्टी के साथ चट्टानी एकता के साथ खड़े हैं। कॉन्ग्रेस विधायकों में फूट की खबर सूरज के पश्चिम में उगने की तरह है। इससे पहले खबर आई थी कि कॉन्ग्रेस के 13 विधायकों के मोबाइल फोन स्वीच ऑफ हैं।

बिहार कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने बीती रात हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतनराम माँझी से गोपनीय मुलाकात की थी। सूत्रों ने हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि उन्हें महागठबंधन में शामिल होने पर उपमुख्यमंत्री पद और दो मंत्री पद देने का प्रस्ताव दिया गया है। अखिलेश ने माँझी के सामने नीतीश द्वारा विधानसभा में उनके अपमान का भी मुद्दा उठाया।

अखिलेश सिंह ने दावा किया कि भाजपा के 20 विधायक उनके संपर्क में हैं। वहीं, जेडीयू सांसद सुनील कुमार पिंटू ने कहा कि बिहार के विकास के लिए पीएम मोदी और सीएम नीतीश की जोड़ी जरूरी है।  उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को राजद के साथ काम करने की आजादी नहीं थी, इसलिए वो भाजपा के साथ आ रहे हैं। उन्होंने इस बार के गठबंधन को स्थाई बताया।

उधर, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने दावा किया कि बहुमत का आँकड़ा उनके पास है। उन्होंने कहा, “बिहार में हम सबसे बड़ी पार्टी हैं और आज राजद विधायक दल की बैठक में फैसला लिया जाएगा।” मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आरजेडी आज अपने विधायकों को राज्यपाल के सामने परेड करा सकती है।

‘जब मैं होश में आई, वो मेरा रेप कर रहा था’ – इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बाद बलात्कार, छठी क्लास की लड़की के शोषण का भी आरोप

मुंबई की एक लड़की को इंस्टाग्राम पर दोस्ती करना भारी पड़ गया। सोशल मीडिया के इस दोस्त (हीतिक शाह) ने लड़की को नाइट-ऑउट लिए बुलाया। इसके बाद ड्रग्स देकर उसका रेप किया। अब लड़की ने इंस्टाग्राम पोस्ट पर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित लड़की ने साउथ मुंबई के वर्ली पुलिस स्टेशन में FIR भी दर्ज करवाई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पीड़िता का कहना है कि 12 दिन बीतने के बाद भी उसके बलात्कारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

पीड़ित लड़की ने अपने इंस्टाग्राम की डीपी पर पिंक कलर से लिखा है – ‘पनिश माई रेपिस्ट’। इसके साथ ही उसने अपनी पोस्ट में 13 जनवरी, 2024 का वो वाकया शब्द दर शब्द लिख डाला है।

पीड़िता ने लिखा, “मैं मुंबई की 21 साल की लड़की हूँ और यह मेरी कहानी है। मैंने उस लड़के के साथ घूमने का फैसला किया, जिससे मैं इंस्टाग्राम पर बात कर रही थी। मैंने सोचा था कि यह एक मज़ेदार रात होगी लेकिन वह मेरी जिंदगी का सबसे दर्दनाक अनुभव बन गया।”

उसने आगे लिखा, “हीतिक शाह और मैं शहर में ड्रिंक और पार्टी करने के लिए निकले, शुरुआत एक जगह से हुई। उसके कुछ दोस्तों से मिलने के बाद, हम बास्टियन नाम के एक रेस्टॉरेंट के लिए रवाना हुए। वहाँ कुछ टकीला शॉट्स (दारू) पीने के बाद मुझे नशा चढ़ गया। उसने फिर भी मुझे जोर देकर और अधिक ड्रिंक करने के लिए कहा। इसके बाद मुझे ब्लैकआउट हो गया, याद नहीं कि आगे क्या हुआ।”

लड़की ने लिखा है, “मुझे शक है कि मुझे ड्रग्स दी गई होगी। मैं जागी तो देखा कि वह (हीतिक) मेरे साथ बलात्कार कर रहा है। उसे रोकने की मेरी कोशिशों के बावजूद, उसने ऐसा करना जारी रखा और मुझे बहुत गुस्से में तीन बार थप्पड़ भी मारे, जिससे मैं डर गई और भयभीत हो गई।”

पीड़िता ने आगे बताया, “वह जगह उसके दोस्त की थी। इससे पहले कि मैं मदद माँग पाती, उसने मुझे बाहर निकालने की कोशिश की, यहाँ तक कि दोस्तों की मौजूदगी में मुझे धमकी भी दी। इसके बाद उसने घटनास्थल से भागने की कोशिश भी की।” लड़की ने यह भी बताया कि उसके दोस्त रेप किए जाने वाले कमरे के बगल में ही थे लेकिन किसी ने मदद नहीं की। वो जल्द से जल्द इस घटना से छुटकारे पाने के लिए पीड़िता को ही वहाँ से निकालना चाहते थे।

लड़की ने अपनी बात जारी रखते हुए लिखा, “इसके बाद मैंने अपने चचेरे भाई को मुझे लेने के लिए बुलाया। आरोपित और उसके दोस्तों ने उसे भी धमकी दी। चोटिल और आहत होकर, मैं अपने माता-पिता को उस रात के बारे में बताने की हिम्मत नहीं कर सकी। जब मेरे परिवार को पता चला तो वे दंग रह गए। मैंने बाद में उसी हफ्ते हीतिक शाह के खिलाफ FIR दर्ज करवाई।”

पीड़िता की इस पोस्ट को एक्स हैंडल @AtharvaSoni17 ने शेयर करते हुए कुछ स्क्रीन शॉट लगाए हैं जो हीतिक शाह को जानने वालों ने उसके बारे में लिखा है। एक ने लिखा है, “वो 12 साल की उम्र से इस तरह के अपराध करता आ रहा है। वो हमारे स्कूल में था और उसने छठी क्लास की एक लड़की का शोषण किया था।”

वहीं एक लड़की ने लिखा है, “ये बलात्कारी है, हर रात अपने दोस्तों के साथ Bastian (रेस्टॉरेंट) में अलग-अलग लड़कियों के साथ आता रहता है। एक बार मैं अपनी दोस्तों के साथ वहाँ थी, उसने मुझे बहुत गंदी तरीके से घूरा था और अपने दोस्तों से फुसफुसाकर कुछ कहा था और इसके बाद सब मुझे घूरने लगे थे, मुझे बहुत खराब महसूस हुआ था।”

लड़की ने आगे लिखा है कि हीतिक ने सुबह उससे माफी माँगी, लेकिन इसका उसके लिए कोई मतलब नहीं है। वो भाग गया है क्योंकि वह जानता है कि उसने क्या किया है। पीड़िता का कहना है कि 12 दिन बीत गए और उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। उसने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है।

पीड़िता ने बताया, “हीतिक शाह (आरोपित) पर IPC की धारा 376 (बलात्कार के लिए सजा) और 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के लिए सजा) के तहत केस दर्ज किया गया है। मैं न्याय चाहती हूँ और अन्य लड़कियों से आग्रह करती हूँ कि वे इस बात से बहुत सावधान रहें कि वे किससे बात करती हैं और किसके साथ बाहर जाती हैं।”

मुंबई पुलिस ने लड़की की पोस्ट पर कॉमेंट किया,”हम आभारी हैं कि आपने इसकी ब्यौरावार रिपोर्ट की और हम आपको आश्वस्त करते हैं कि न्याय करने के लिए जाँच उचित तरीके से की जाएगी।”

1168 यूनिवर्सिटी, 4470 महिला कॉलेज: PM मोदी ने उच्च शिक्षा में कैसे लाई क्रांति, बता रहे AISHE के आँकड़े, महिलाओं की जबरदस्त बढ़ी भागीदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने साल 2014 में केंद्र की सत्ता सँभाली थी। इसके बाद पिछले 10 वर्षों ने सरकार ने आधारभूत संरचना निर्माण से लेकर हर क्षेत्र में तमाम सुधार किए। उन सुधारों का असर अब धरातल पर दिखने भी लगा है। शिक्षा क्षेत्र में इसका बड़ा असर हुआ। इसको लेकर भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE) ने एक सर्वे रिपोर्ट जारी की है।

AISHE की 2021-22 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 26.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने वाली महिलाओं की संख्या में 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की संख्या में 44 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की महिलाओं संख्या में 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

शनिवार (27 जनवरी 2024) को जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 में उच्च शिक्षा में नामांकन 4.14 करोड़ था, जो 2021-22 में 91 लाख बढ़कर 4.33 करोड़ हो गया है। वित्त वर्ष 2014-15 में यह संख्या महज 3.42 करोड़ थी। वहीं, उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 1.57 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में 2.07 करोड़ हो गया है। 2014-15 में महिला नामांकन लगभग 1.57 करोड़ थी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आँकड़ों को साझा करते हुए सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा शुरू किए गए सुधारों ने हमारे शिक्षा क्षेत्र को बदल दिया है और सभी पहलुओं में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। पहली बार महिलाओं ने 7 शीर्ष यूजी पाठ्यक्रमों में से 5 में पुरुषों को पछाड़ दिया है। पिछले 5 वर्षों में छात्राओं का नामांकन 76 लाख बढ़ गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, सकल नामांकन अनुपात (GER) 28.4% की नई ऊँचाई हासिल करने के साथ ही महिला जीईआर पिछले 5 वर्षों से पुरुष छात्रों की तुलना में अधिक है। ये रुझान प्रोत्साहित करने वाले हैं, खासकर जब हम अपनी नारीशक्ति की ताकत, लचीलेपन और उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं और लैंगिक समानता एवं महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं।”

AISHE रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के नामांकन में भी काफी प्रगति हुई है। अल्पसंख्यक नामांकन साल 2014-15 में 21.8 लाख से बढ़कर साल 2021-22 में 30.1 लाख हो गया है, जो 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं, महिला अल्पसंख्यक नामांकन 2014-15 में 10.7 लाख से बढ़कर 2021-22 में 15.2 लाख हो गया है, जो 42.3% वृद्धि है।

आँकड़ों के अनुसार, कुल विद्यार्थियों में से लगभग 78.9 प्रतिशत स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं और 12.1% स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं। वहीं, साल 2014-15 में पीएचडी में कुल नामांकन 1.17 लाख था, जो 2021-22 में बढ़कर 2.12 लाख हो गया है। यह 81.2 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। महिला पीएचडी नामांकन 2014-15 में 0.48 लाख से दोगुना होकर 2021-22 में 0.99 लाख हो गया है।

उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2021-2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी विश्वविद्यालय कुल विश्वविद्यालयों के 58.6 प्रतिशत हैं। इन विश्वविद्यालयों का कुल नामांकन में 73.7 प्रतिशत योगदान था। वहीं, निजी विश्वविद्यालयों का कुल नामांकन में 26.3 प्रतिशत योगदान है।

साल 2021-22 तक पंजीकृत विश्वविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय स्तर के संस्थानों की कुल संख्या 1,168 हो गई हैं। 2014-15 में इन संस्थानों की संख्या सिर्फ 341 थी। वहीं, 2021-22 तक कॉलेजों की संख्या 45,473 और स्वायत्त (स्टैंडअलोन) संस्थानों की संख्या 12,002 है। 17 विश्वविद्यालय (जिनमें से 14 राज्य सरकार विश्वविद्यालय हैं) और 4,470 कॉलेज महिलाओं के लिए हैं।

साल 2021-22 के आँकड़ों के अनुसार, 99 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय, 93 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में कंप्यूटर केंद्र, 91 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में खेल के मैदान, 88 प्रतिशत विद्यालयों में प्रोयशालाएँ और 71 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में कौशल विकास केंद्र स्थापित हैं।

2021-22 में फैकल्टी/शिक्षकों की कुल संख्या 15.98 लाख है। इनमें से लगभग 56.6% पुरुष और 43.4% महिलाएँ हैं। महिला फैकल्टी/शिक्षकों की संख्या 2014-15 में 5.69 लाख से बढ़कर 2021-22 में 6.94 लाख हो गई है। साल 2014-15 से 2021-22 तक में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

कॉन्ग्रेस नेता लावण्या ज्ञानवापी पर ASI की रिपोर्ट को मानती हैं ‘सर्वे’, संघियों को देने लगीं गाली… सोशल मीडिया पर लोगों ने रगड़ा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष में विवाद चल रहा है। यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। जिस जगह पर ढाँचा खड़ा किया गया है, उसे काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। इसको लेकर हिंदू पक्ष ने कोर्ट में वाद दायर किया है, जिसकी सुनवाई जारी है।

इस बीच पर कोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ढाँचे अंदर जाँच की। ASI ने कोर्ट में 839 पेज की रिपोर्ट पेश की, जिसे हाल ही सार्वजनिक किया गया है। रिपोर्ट इस बात की ओर साफ इशारा कर रही है कि ज्ञानवापी ढाँचे की जगह कभी बड़ा हिंदू मंदिर था।

अपनी रिपोर्ट में ASI ने कहा है कि विवादित स्थान पर मंदिर होने के 32 सबूत मिले हैं। इनमें संस्कृत सहित कई भाषाओं में शिलालेख, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियाँ, खंभे और उन पर बनी कलाकृतियाँ, प्राचीन दिवारें आदि शामिल हैं। दीवार के नीचे 1 हजार साल पुराने अवशेष भी मिले हैं।

हालाँकि, तुष्टीकरण में डूबी कॉन्ग्रेस ASI द्वारा इकट्ठा किए गए प्रमाणों को ही नकारने लगी है। कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता लावण्य बल्लाल जैन ने ASI की रिपोर्ट और उसमें दिए गए सबूतों पर सवाल खड़े किए हैं। अब सोशल मीडिया यूजर लावण्या की समझ पर ही सवाल खड़े रहे हैं।

दरअसल, ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नूपुर जे शर्मा ने ASI की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा, “इससे कहा जा सकता है कि वर्तमान ढाँचे को बनाने से पहले वहाँ (ज्ञानवापी ढाँचे की जगह) एक विशाल हिंदू मंदिर था।- ज्ञानवापी पर ASI की सर्वे रिपोर्ट।”

नूपुर जे शर्मा की पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस नेता लावण्या ने ASI की रिपोर्ट पर ही सवाल खड़ा कर दिया और कहा कि यह एक सर्वे है, ना कि निष्कर्ष। लावण्या ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यह एक सर्वेक्षण है न कि पुरातत्व संबंधी निष्कर्ष। कट्टरता के अलावा संघियों की खोपड़ी में और क्या है?”

लावण्या की इस ‘परिभाषा’ पर सोशल मीडिया यूजर भड़क उठे। भट नेचुरली नाम के एक यूजर ने लिखा, “हे भगवान, असल में उन्होंने (लावण्या ने) सोचा था कि यह मार्केट रिसर्च की तरह 100 लोगों से उनकी राय पूछने के बारे में था?”

इसी तरह, AI भगवा नाम के एक यूजर ने लिखा, “ASI में ‘A’ का मतलब ‘आर्कियोलॉजिकल’ लावण्या जी है।”

वहीं, डॉक्टर गणेश श्रीनिवास प्रसाद ने कटाक्ष करते हुए लिखा, “लावण्या बीजे के अनुसार… भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लोगों से उनकी राय पूछकर सर्वेक्षण करता है। राजस्व अधिकारी भी राजस्व रिकॉर्ड की जांँच करके नहीं, बल्कि लोगों से पूछकर भूमि का सर्वेक्षण करते हैं कि जमीन किसकी है।”

पुनिता तोरासकर नाम की एक यूजर ने लिखा, “मूर्ख होना एक बात है, लेकिन इसे मुकुट की तरह पहनना सिर्फ लावण्या बीजे ही कर सकती हैं।”

ज्ञानवापी भगवान शिव का मंदिर, जल्दी शुरू हो पूजा-अर्चना: रामलला के मुख्य पुजारी बोले- कोर्ट को सबूत मिल गए हैं, अब हिंदुओं के पक्ष में आदेश पारित हो

अयोध्या के राम मंदिर के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा है कि काशी स्थित ज्ञानवापी ढाँचा भगवान शिव का मंदिर है। उन्होंने कहा कि कोर्ट को सबूत मिल गए हैं और अब उसे हिंदुओं के पक्ष में आदेश पारित कर देना चाहिए, ताकि वहाँ भगवान शंकर का पूजा-पाठ शुरू करें हिंदू। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी सर्वे में जो सबूत मिले हैं उनमें शिवलिंग, योनि पिंड, नंदी की मूर्ति, शिवलिंग के आकार का पत्थर आदि सबूत मंदिर होने की पुष्टि करते हैं।

रामलला के पुजारी सत्येंद्र दास ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का मामला भी इसी तरह का था। वहाँ भी मंदिर तोड़ा गया था और उसकी जगह पर मस्जिद बनाई गई थी। दोनों मामलों में समानता है और उसी तरह न्याय होना चाहिए। दास ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद हिंदुओं के पक्ष में तो कई सबूत मिल गए हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई सबूत ही नहीं है। इसलिए कोर्ट को आदेश पारित करना चाहिए।

सत्येंद्र दास ने कहा कि हिंदू पक्ष को पूरा भरोसा है कि अदालत न्याय करेगी और मंदिर को उसके मूल स्वरूप में लाया जाएगा। ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट अकाट्य है और जो सबूत मिले हैं उसे कोई नाकार नहीं सकता। उन्होंने कहा कि अब कोर्ट को जल्द से जल्द आदेश दे देना चाहिए। जैसे अयोध्या का हुआ वैसे ही काशी का भी हो जाना चाहिए।

सर्वे रिपोर्ट पर साधु-संतों की भावना के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रबल भावना है कि वहाँ मंदिर बने। उन्होंने कहा कि अब तक कहा जाता था कि वहाँ मस्जिद है, लेकिन सबूत मिलने से साफ हो गया है कि ज्ञानवापी मंदिर है। सत्येंद्र दास ने कहा कि जिस भाग में मस्जिद बनाई गई है, वहाँ मंदिर के अवशेष अभी भी हैं। इसलिए ज्ञानवापी भगवान शिव का मंदिर है। इसमें कोई संदेह नहीं है।

बता दें कि 18 दिसंबर 2023 को ASI ने अदालत में सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उस दिन हिंदू पक्ष की ओर से रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग की गई थी, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई थी। हालाँकि, 24 जनवरी 2024 को वाराणसी कोर्ट ने कहा कि सर्वे की कॉपियाँ हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष को दिया जाए।

ज्ञानवापी ढाँचे के ASI सर्वेक्षण के बाद कई बातों का खुलासा हुआ है। सामने आई 839 पेज की रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि ज्ञानवापी ढाँचे की जगह कभी बड़ा हिंदू मंदिर था। इसके प्रमाण वहाँ के खंभों, दीवारों और शिलापट से मिले हैं। कोर्ट ने ASI से कहा है कि वो इस रिपोर्ट की प्रतियाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को दे। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष इस संबंध में 6 फरवरी तक आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं।

ASI रिपोर्ट आने के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने इस संबंध में मीडिया को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में मंदिर होने के 32 सबूत मिले हैं। ज्ञानवापी की जगह एक बड़ा हिंदू मंदिर था… ऐसा भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट में बताया है। उन्होंने कई सबूत पेश किए हैं, जिनसे पता चलता है कि हिंदू मंदिर को तोड़कर ढाँचा खड़ा किया गया। अब रिपोर्ट में जोड़ी गई कुछ तस्वीरें भी मीडिया में आ गई हैं जिन्हें देखकर हिंदू आक्रोशित हैं।