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ताजुद्दीन ने राम मंदिर को ‘बाबरी मस्जिद’ बता कर लगा दिया पाकिस्तानी झंडा, अपना एड्रेस बता कर राम-सीता को गाली दे रहे शख्स को यूपी पुलिस ने उठाया

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो गई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर माहौल खराब करने की कोशिश भी की गई। कर्नाटक में ताजुद्दीन दाफेदार नाम के युवक ने सोशल मीडिया पर राम मंदिर की फोटो को एडिट करके उस पर पाकिस्तान के तीन झंडे लगा दिए। यही नहीं, उसने फोटो पर बाबरी मस्जिद भी लिख दिया और इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

कर्नाटक में ताजुद्दीन ने लगाया पाकिस्तान झंडा

ये मामला कर्नाटक के गडग जिले का है। जहाँ ताजुद्दीन ने ऐसी घटिया हरकत को अंजाम दिया। इस मामले में हिंदू संगठन के लोगों ने आवाज उठाई। हालाँकि जब मामला हंगामे तब्दील होने लगा, तो पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपित की पहचान की और उसे ट्रेस करके गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, पुलिस ने आरोपित की आईडी से वो पोस्ट डिलीट करवा दी। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है। इस मामले में गडग के एसपी बाबासाब नेमागौड ने बताया है कि आरोपित को हिरासत में ले लिया गया है। उसके बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है।

पीलीभीत में भगवान राम और माता सीता पर अभद्र टिप्पणी

उत्तर प्रदेश समेत सारा भारत रामलला के आगमन की खुशियाँ मना रहा था, तो खुद को एथीस्ट बताने वाले दिव्य यशस्वी नाम के एक्स हैंडल ने भगवान राम और माता सीता पर अभद्र टिप्पणी कर दी। उसने राम भक्तों को गोबरजीबी भी कहा। यही नहीं, उसने ये कह कर लोगों का मजाक उड़ाया कि सीता जी को छोड़ने वाले राम को ये गोबरजीवी लोग मर्यादा पुरुषोत्तम करते हैं।

एक्स पर अभद्र टिप्पणी

उसके इस पोस्ट पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। एक व्यक्ति ने उसके घर का पता पूछा, तो उसने अपना घर पीलीभीत बताया।

इस पोस्ट के थोड़ी ही देर बार पीलीभीत पुलिस ने एक्स पर जवाब दिया है कि आरोपित को लोकेट करके उसे हिरासत में ले लिया गया है।

दो घंटे के भीतर पीलीभीत पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लिया

इधर पीलीभीत पुलिस ने आरोपित को हिरासत में लिया, उधर लोगों ने माँग की है कि आरोपित की फोटो ज़रूर एक्स पर शेयर की जाए।

‘ठीक की पूर्वजों की गलती’: उधर राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा, इधर याकूब ने परिवार समेत अपनाया सनातन धर्म, अब कहलाएँगे ‘राजकुमार’

मध्य प्रदेश में एक मुस्लिम परिवार ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन सनातन धर्म को स्वीकार कर लिया। यह घटना मध्य प्रदेश के अलीराजपुर की है। अलीराजपुर के निवासी याकूब खान ने 22 जनवरी के मौके को सनातन में प्रवेश के लिए चुना। उन्होंने अपने पूरे परिवार के साथ सनातन को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वो अपने पूर्वजों की गलतियों को ठीक कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, अलीराजपुर के कुम्हारवाड़ा निवासी याकूब खान ने 22 जनवरी, 2024 को अपने बेटे शाहरुख, बेटी करिश्मा के साथ सनातन स्वीकार कर लिया। इनके नाम भी बदल दिए गए। उन्होंने इस्लाम से सनातन में दीक्षा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में ली।

मुस्लिम याकूब को अलीराजपुर के महात्मा गाँधी मार्ग पर बनाए गए अयोध्या धाम में सनातन में प्रवेश दिलाया गया। हिन्दू कार्यकर्ता जयेश भट्ट और संजय माँझी ने उनकी घर-वापसी की प्रक्रिया संपन्न करवाई। उनके पैर धुले गए और भगवा अंगवस्त्र ओढ़ा कर उनका सनातन में स्वागत किया। इस दौरान पूजन विधि सम्पन्न की गई।

अयूब का नया नाम राजकुमार रखा गया है। उनकी बेटी का नाम करिश्मा था, उसका नाम करिश्मा ही रखा गया है। वहीं शाहरुख को सुभाष का नाम दिया गया है। उन्होंने कहा है कि वह लम्बे समय से सनातन को पसंद करते थे और स्वेच्छा से सनातन में आ रहे हैं।

यह भी जानकारी दी गई कि याकूब की पत्नी शारदा हिन्दू हैं। वह याकूब से निकाह के बाद हिन्दू ही बनी रहीं और घर में सनातन रीति-रिवाज का पालन करती रहीं। अयूब (राजकुमार) की दो बेटियों की शादी भी हिन्दू परिवारों में हुई है। बताया गया कि एक बेटी की शादी राजस्थान में हिन्दू परिवार जबकि एक की गुजरात के हिन्दू परिवार में की है।

अयूब (राजकुमार) ने कहा है कि उन्होंने बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से अपने परिवार के साथ सहमति से धर्म बदला है। वह लम्बे समय से सनातन को पसंद करते आए हैं और इसीलिए उन्होंने इसमें आने का निर्णय लिया।

राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद ‘प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना’ का शंखनाद, 1 करोड़ घरों की छत पर सोलर पैनल लगाएगी मोदी सरकारः अयोध्या से लौटने के बाद पहला निर्णय

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से लौटने के बाद एक बड़ा निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है कि जल्द ही सरकार ‘प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना’ शुरू करेगी। इसके तहत देश में एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर लगाया जाएगा।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “सूर्यवंशी भगवान श्री राम के आलोक से विश्व के सभी भक्तगण सदैव ऊर्जा प्राप्त करते हैं। आज अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर मेरा ये संकल्प और प्रशस्त हुआ कि भारतवासियों के घर की छत पर उनका अपना सोलर रूफटॉप सिस्टम हो।”

आगे उन्होंने लिखा, “अयोध्या से लौटने के बाद मैंने पहला निर्णय लिया है कि हमारी सरकार 1 करोड़ घरों पर रूफटॉप सोलर लगाने के लक्ष्य के साथ ‘प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना’ प्रारंभ करेगी। इससे गरीब और मध्यम वर्ग का बिजली बिल तो कम होगा ही, साथ ही भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनेगा।”

दरअसल, सोलर रूफटॉप से घरों की छतों पर सोलर एनर्जी प्लांट लगाकर बिजली पैदा की जाती है। इसमें घर की क्षमता के हिसाब से सोलर प्लांट लगाया जाता है। इसके जरिए सोलर एनर्जी बनाकर घर की बिजली जरूरत पूरी होती है।

जो घर अपनी आवश्यकता से अधिक बिजली पैदा करते हैं, उनसे सरकार बिजली खरीद भी लेती है। भारत के बड़े हिस्से में ठण्ड का प्रभाव इतना नहीं होता है और कई हिस्सों में धूप लम्बे समय तक रहती है। ऐसे में यह योजना गेमचेंजर साबित हो सकता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 25 करोड़ घरों पर ऐसे रूफटॉप सोलर लगाए जा सकते हैं। इनके ऊपर 637 गीगावॉट तक की ऊर्जा पैदा कर सकती है। हालाँकि, यही रिपोर्ट दिखाती है कि देश में मात्र 11 गीगावॉट ही रूफटॉप सोलर लगाए गए हैं अभी।

भले ही भारत ने घरों पर सोलर क्षमता लगाने में अभी आशातीत सफलता नहीं पाया हो, लेकिन उसने बीते कुछ वर्षों में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में काफी प्रगति हासिल की है। रिपोर्ट बताती है देश में अभी लगभग 75 गीगावॉट की सोलर क्षमता है। यह 2014 में लगभग 2 गीगावॉट ही थी। ऐसे में 2014 से अब तक इसमें लगभग 35 गुने की वृद्धि हुई है।

राम मंदिर से अभी ही 20000 नौकरियाँ, इस साल ₹25000 करोड़ की एक्स्ट्रा कमाई: अयोध्या में 50 बड़े होटल प्रोजेक्ट्स, वेटिकन-मक्का छूटेगा पीछे

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में भक्तों की बाढ़ आने वाली है। उनके स्वागत के लिए योगी आदित्यनाथ की राज्य सरकार भी तैयार है। इसके लिए वो बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर रही है। प्रदेश सरकार ने अयोध्या में हजारों करोड़ का निवेश किया है। सड़कों के जाल से लेकर सुरक्षा और अन्य मामलों में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाया है। खुद योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्यमंत्री अयोध्या पर अच्छा खासा ध्यान दिया।

राम मंदिर के निर्माण से अयोध्या की अर्थव्यवस्था में हजारों करोड़ का निवेश होगा। इससे अयोध्या में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। राम मंदिर के निर्माण से अयोध्या एक प्रमुख आर्थिक केंद्र बन जाएगा। यह मंदिर भारत की एकता और अखंडता को भी मजबूत करेगा। राम मंदिर का निर्माण सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर है। मंदिर के निर्माण से अयोध्या में पर्यटन और व्यापार में उछाल आएगा। इससे अयोध्या की अर्थव्यवस्था में विकास होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “सांस्कृतिक अयोध्या, आयुष्मान अयोध्या, स्वच्छ अयोध्या, सक्षम अयोध्या, सुरम्य अयोध्या, सुगम्य अयोध्या, दिव्य अयोध्या और भव्य अयोध्या के रूप में पुनरुद्धार के लिए हजारों करोड़ों रुपए वर्तमान में यहाँ पर भौतिक विकास के लिए लग रहे हैं।”

राम मंदिर के निर्माण से अयोध्या और उत्तर प्रदेश की दिशा और दशा किस तरह से बदलेगी, उसके बारे में यहाँ विस्तार से बताया जा रहा है।

SBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर के कारण फाइनेंशियल ईयर 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार को 25,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। मास्टर प्लान 2031 के मुताबिक, अयोध्या के पुनर्विकास का काम अगले 10 साल में पूरा होगा। इस पर 85,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। शहर में अभी केवल दो ब्रांडेड होटल हैं, लेकिन आने वाले दिनों में ताज होटलों और ITC होटलों ने शहर में बड़े पैमाने पर निवेश करने की तैयारी में है।

होटल इंडस्ट्री में बड़े निवेश के लिए कई डील साइन हो रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की फेमस होटल कंपनियाँ अयोध्या में अपने होटल बना रही हैं। इस शहर में करीब 50 प्रमुख होटल निर्माण परियोजनाएँ जारी हैं। इनमें ताज, मैरियट, जिंजर, ओबेरॉय, ट्राइडेंट और रेडिसन शामिल हैं। अयोध्या में होटल उद्योग में चार बड़ी परियोजनाओं के तहत करीब 420 करोड़ रुपए का निवेश होने का अनुमान है। इस सूची में पहले नंबर पर पंचे ड्रीमवर्ल्ड LLP है, जो 140 करोड़ रुपए की कुल लागत से ‘ओ रामा होटल्स एंड रिजॉर्ट्स’ परियोजना स्थापित करेगी। वहीं, हेरिटेज होटल जैसे प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ने वाली हैं।

अयोध्या के मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि ‘वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन’ (GIS) के दौरान अयोध्या में पर्यटन के लिए करीब 18,000 करोड़ रुपए के 102 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। जीआईएस के बाद भी कई व्यापारी अयोध्या में पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार और जिला प्रशासन के पास अपने प्रस्ताव भेज रहे हैं। इस समय अयोध्या में पर्यटन से संबंधित 126 परियोजनाएँ पूरी होने वाली हैं। इनमें से 46 में MoU पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जबकि 80 गैर-एमओयू हैं। इन सभी 126 परियोजनाओं की कुल लागत करीब 4000 करोड़ रुपए के आसपास है।

अयोध्या में नौकरियों और व्यवसाय से आय बढ़ने की नई लहर

‘इकोनॉमिक टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, उद्घाटन से पहले हॉस्पिटैलिटी, टूर और टूरिज्म से अयोध्या में 20,000 नौकरियाँ पैदा हुईं। होटल और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के आने और टूरिस्टों की संख्या बढ़ने से रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे। रैंडस्टैड इंडिया के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी यशब गिरी ने 20,000 से 25,000 स्थायी और अस्थायी नौकरियों के सृजन का अनुमान लगाया। यह संख्या सालाना बढ़ने की उम्मीद है। इससे अकेले अयोध्या को लाभ नहीं होगा, बल्कि लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर जैसे पड़ोसी शहरों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

‘कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स’ (CAIT) ने कहा कि अकेले प्रतिष्ठा समारोह से देश भर में 1 लाख करोड़ रुपए का कारोबार होने की उम्मीद है। CAIT के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने PTI से बातचीत में कहा कि यह आयोजन (राम लला प्राण प्रतिष्ठा) न केवल धार्मिक भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर रहा है, बल्कि पूरे प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी कर रहा है।

अगले 6 माह में आएँगे 2 करोड़ लोग

उत्तर प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि अब हर दिन एक लाख लोग अयोध्या पहुँचने लगेंगे। अगले 6 माह में ये आँकड़ा 20 मिलियन यानी 2 करोड़ तक पहुँच जाएगा। ऐसे में अयोध्या अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और तिरुपति बालाजी के मंदिर को भी श्रद्धालुओं की संख्या के मुकाबले में पीछे छोड़ देगा। बता दें कि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में प्रति वर्ष 30-35 मिलियन लोग आते हैं, जबकि तिरुपति मंदिर में 25-30 मिलियन लोग आते हैं। विश्व स्तर पर, वेटिकन सिटी में हर साल लगभग 9 मिलियन पर्यटक आते हैं और सऊदी अरब के मक्का में लगभग 20 मिलियन पर्यटक आते हैं। इस तरह से अयोध्या अगले एक साल में दुनिया के सबसे प्रमुख धार्मिक पर्यटन क्षेत्रों को पीछे छोड़ देगी।

अयोध्या में ये सबकुछ होता रहेगा, तो अयोध्या के मास्टरप्लान पर भी तेज़ी से काम चलता रहेगा। जब साल 2031 के लिए बनाए गए मास्टरप्लान के तहत 85,000 करोड़ रुपयों को अयोध्या पर जब खर्च किया जाएगा और हर दिन 2 से 3 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुँचने लगेंगे, तो अयोध्या की सूरत देखने लायक होगी। ऐसे में रामलला का मंदिर सिर्फ धार्मिक वजह से ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद शुभ साबित होने वाला है।

जानिए कौन हैं वो महंत, जिनके हाथ से PM मोदी ने तोड़ा 11 दिनों के उपवास: प्राण प्रतिष्ठा पर दिया ऐसा संबोधन कि वायरल होने लगा वीडियो

अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 दिनों का अपना व्रत तोड़ा। उनका व्रत स्वामी गोविन्द गिरी ने तुड़वाया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द गिरी ने अपने संबोधन में बताया कि प्रधानमंत्री ने कैसे भगवान की प्राण प्रतिष्ठा के लिए कैसे कठिन व्रत रखा था।

स्वामी गोविन्द गिरी ने कहा कि उस समय उन्हें आश्चर्य हुआ, जब प्राण प्रतिष्ठा के लिए जरूरी नियम एवं व्रत के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे जानकारी माँगी। उन्होंने कहा कि 20 दिन पहले पीएम ने व्रत के लिए नियमावली माँगी थी। गोविंद गिरी ने कहा, “अपने आप को सिद्ध (व्रत के लिए) करने की भावना कहाँ होती है। यह भावना यहाँ (मोदी जी में) होती है।”

उन्होंने कहा कि कर्म, वाणी और मन से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आप को सिद्ध करने के लिए कठिन तप किया। तप से ही विशेष परिशुद्धि होती है। गोविंद गिरी ने कहा, “हम लोगों ने महापुरुषों से परामर्श करके प्रधानमंत्री से कहा था कि आपको मात्र 3 दिन का उपवास करना होगा, लेकिन उन्होंने 11 दिन का उपवास किया। हमने 11 दिन एकभुक्त (अनुष्ठान से पहले अन्न खाने का विधान) कहने के लिए कहा था, उन्होंने अन्न का ही त्याग कर दिया।”

प्रधानमंत्री के कठिन व्रत के विषय में बताते हुए कहा कि उन्हें 3 दिन जमीन पर सोने की बात कही गई थी लेकिन वह इस कड़कड़ाती ठण्ड में 11 दिनों तक जमीन पर सोते रहे। वह इस दौरान भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के तप से तप की कमी हो गई। प्रधानमंत्री की तुलना गोविन्द गिरी ने छत्रपति शिवाजी महाराज से की और एक किस्सा भी सुनाया।

उन्होंने यह बताया कि प्रधानमंत्री ने इस दौरान सांसारिक दोषों से बचने के लिए विदेश यात्राएँ टाल दी थीं। स्वामी गोविन्द गिरी ने कहा कि देश को ऐसा तपस्वी राष्ट्रीय नेता मिले, यह सामान्य बात नहीं है। स्वामी गोविन्द गिरी ने बताया कि वह प्रधानमंत्री मोदी की माता से मिले थे। इससे उन्हें मालूम हुआ था कि वह 40 वर्षों से ऐसा ही तप कर रहे हैं।

गोविंद गिरी ने प्रधानमंत्री की दक्षिण के मंदिरों के यात्राओं के विषय में भी बताया। उन्होंने कहा कि भारत के हर कोने में जाकर वह अयोध्या आने का निमंत्रण दे रहे थे, ताकि ये दिव्य आत्माएँ आकर भारत को महान बनाने के लिए आशीर्वाद दें।

कौन हैं स्वामी गोविन्द गिरी?

स्वामी गोविन्द गिरी एक मराठी परिवार से आते हैं। संन्यास से पहले उनका नाम आचार्य किशोरजी मदनगोपाल व्यास था। उनका जन्म 1949 में महाराष्ट्र के बेलापुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह वेद, उपनिषद पढ़े हुए हैं और उन्हें दर्शनाचार्य की उपाधि मिली है। ये उपाधि वाराणसी में मिली है। इसके अतिरिक्त वे रामायण, महाभारत और शिव पुराण जैसे पुराणों के ज्ञाता हैं। उन्होंने साल 2006 में कांची कामकोटि पीठ के स्वामी जयेंद्र सरस्वती से दीक्षा लेकर संन्यास लिया था।

जिनके पुरखों को घर छोड़ भागना पड़ा था, वो हैं राम मंदिर के सबसे बड़े दानकर्ता: रामलला के लिए दिया 101 किलो सोना, जानिए कौन हैं दिलीप V लाखी

अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए कई बड़े कारोबारियों और हस्तियों ने दान दिया है, लेकिन गुजरात के सूरत के हीरा कारोबारी दिलीप V लाखी ने इस दान में भी इतिहास रच दिया है। उन्होंने राम मंदिर के लिए 101 किलोग्राम सोना का दान किया है।

बताते चलें कि आज यानी 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या के राम मंदिर के गर्भ गृह में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में रामलला विराज गए हैं। इस समारोह के लिए शहर को फूलों और चमकदार रोशनी से सजाया गया है। इस बीच फूलों से सजे-धजे मंदिर की अलौकिक छवि देखते ही बन रही है। इस पल को एक बात खास बनाती है कि 500 साल से जिस राम मंदिर का सब लंबे वक्त से इंतजार कर रहे थे उसका पूरा निर्माण पूरी तरह से समर्पित अनुयायियों के दान से हुआ है।

राम के इन दान देने वालों में दिलीप V लाखी नंबर वन रहे हैं। उन्होंने मंदिर को इतना सोना दान किया है कि लोग दाँतों तले उँगली दबा लें। राम मंदिर निर्माण के लिए 5500 करोड़ रुपए से अधिक का दान दिया गया है, लेकिन इन सबके बीच दिलीप V लाखी अपनी अलग जगह बना ले गए।

राम मंदिर में उनके असाधारण योगदान में 101 किलोग्राम सोने का दान शामिल है। इसका मूल्य लगभग 68 करोड़ रुपए है। इस सोने का इस्तेमाल राम मंदिर के दरवाजे, गर्भगृह, त्रिशूल, डमरू और स्तंभों को सजाने के लिए किया जाएगा, जो पवित्र संरचना में एक अलग रूप देते हैं।

बताते चलें कि राम मंदिर में भूतल पर गर्भगृह के द्वार सहित कुल 15 स्वर्ण द्वार बनाए गए हैं। अब बात करते दिलीप वी लाखी के परिवार की। उनका परिवार सूरत में हीरा का सबसे बड़ा कारोबारी हैं। दिलीप कुमार के पिता विशिनदास होलाराम भारत-पाकिस्तान के बँटवारे से पहले 1944 में जयपुर आए थे। पहले से ही मेहनत के पुजारी रहे दिलीप ने 13 साल की उम्र से ट्यूशन देते थे और खाली वक्त में पिता का कारोबार सँभालते थे। इसके साथ ही उनमें कारोबारी कुशलता और अनुभव बढ़ता गया।

जब वो 22 साल के थे उनके पिता ने 1972 में उन्हें मुंबई के जवेरी बाजार कारोबार के लिए भेजा था। पिता के विश्वास पर खरा उतरते हुए उन्होंने हीरे के कारोबार में खासी तरक्की की।

यही वजह है कि दिलीप कुमार लाखी सूरत में बड़ी हीरा पॉलिशिंग की फैक्ट्री के मालिक हैं। उनकी फैक्ट्री में 6000 से अधिक कर्मचारी को रोजगार मिला हुआ हैं। दिलीप कुमार के तीन भाई मोतीराम वी लाखी, प्रकाश वी. लाखी और दीपक वी लाखी हैं। ये तीनों अलग-अलग हॉन्गकॉन्ग, न्यूयॉर्क और संयुक्त अरब अमीरात में कारोबार सँभालते हैं। वहीं गुजरात के प्रसिद्ध राम कथाकार मोरारी बापू के अनुयायी दान देने में दूसरे नंबर रहे। उनके अनुयायियों ने 16.3 करोड़ रुपए का दान दिया।

इसके बाद तीसरे नंबर पर गुजरात के हीरा कारोबारी गोविंदभाई ढोलकिया हैं। डायमंड कंपनी श्री राम कृष्णा एक्सपोर्ट्स के मालिक ढोलकिया ने 11 करोड़ रुपए की बड़ी राशि दान की है। दुनिया भर में राम मंदिर में दान के लिए पटना का महावीर मंदिर भी अव्वल रहा है। वहाँ से राम मंदिर के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए का अहम योगदान दिया है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के राम भक्तों ने अलग से 8 करोड़ का योगदान दिया।

दरअसल राममंदिर के लिए हर दो घंटे में दान दोगुना हो रहा है। इसमें कई मशहूर हस्तियों और राजनेताओं के अघोषित रकम दान करने की अफवाहें भी हैं।वहीं कुछ और कारोबारी भी हैं जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए उदारतापूर्वक दान दिया है।

₹20 करोड़ में बनी ‘हनुमान’ ने 10 दिन में ही कमा लिए ₹200 करोड़: बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है टॉलीवुड की ‘पहली सुपरहीरो फिल्म’, राम मंदिर को भी जाता है दान

फिल्म ‘हनुमान’ बॉक्स ऑफिस पर बीते 10 दिनों से शानदार कमाई कर रही है। तेजा सज्जा के अभिनय से सजी और प्रशांत वर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 200 करोड़ के पार पहुँच चुका है। ये फिल्म 12 जनवरी, 2024 को रिलीज़ हुई थी। मात्र 10 दिनों में फिल्म 200 करोड़ रुपए की कमाई को पार कर गई है।

फिल्म ‘हनुमान’ में सेकेंड वीकेंड पर भी पहले वीकेंड के करीब कमाई की है। फर्स्ट वीकेंड में फिल्म ने 41 करोड़ 59 लाख रुपए कमाए थे। वहीं सेकेंड वीकेंड पर फिल्म में 41 करोड़ 25 लाख रुपए का कलेक्शन किया।

इसे फिल्म ने टोटल डोमेस्टिक कलेक्शन में महेश बाबू जैसे सुपरस्टार की फिल्म ‘गुंटूर कारम’ को पछाड़ दिया है। जहाँ ‘गुंटूर कारम’ ने 21 जनवरी, 2024 को 3 करोड़ 75 लाख रुपए का कारोबार किया। वहीं वहीं ‘हनुमान’ ने रविवार को ही इससे करीब 5 गुना अधिक कलेक्शन किया।

इस फिल्म ने 21 जनवरी को 16 करोड़ 50 लाख रुपए का कलेक्शन किया। इसके साथ ही हनुमान का टोटल डोमेस्टिक कलेक्शन अब 130 करोड़ 60 लाख रुपए हो गया है। उधर ‘गुंटूर कारम’ का टोटल डोमेस्टिक कलेक्शन 118 करोड़ रुपए है।

वहीं ‘हनुमान’ का वर्ल्ड वाइड कलेक्शन 200 करोड़ रुपए के पार पहुँच चुका है। फिल्म के रिलीज़ होने के 10 दिनों बाद रविवार (21 जनवरी, 2024) को पूरी दुनिया में 23 करोड़ 91 लाख रुपए का कारोबार किया। इसके साथ ही इसका कुल वर्ल्ड वाइड कलेक्शन 209 करोड़ रुपए तक जा पहुँचा।

ये फिल्म उत्तरी अमेरिका में 5वीं सबसे अधिक कमाई करने वाली टॉलीवुड फिल्म बन चुकी है। नॉर्थ अमेरिकन बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान’ फिल्म का कलेक्शन 32 करोड़ रुपए से अधिक तक जा पहुँचा। इस तरह से इस फिल्म ने कमाई के मामले में अल्लू अर्जुन की ‘अला वैकुंठपुरमलू’, राम चरण की ‘रंगस्थलम’, महेश बाबू की ‘भरत अने नेनू’ और प्रभास की ‘साहो’ और ‘आदिपुरुष’ जैसी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है।

दिलचस्प बात है कि बगैर किसी सुपर स्टार के कम बजट में बनी इस फिल्म ने इतनी कमाई करना इसकी उपलब्धि भी है। 34 साल के निर्देशक प्रशांत वर्मा और 29 साल अभिनेता तेजा सज्जा की इस फिल्म ‘HanuMan’ ने धमाल मचा दिया। ये फिल्म बड़ों के साथ ही बच्चों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के वक्त इसका रिलीज होना भी इसका प्लस प्वाइंट है। इस फिल्म को पूरे परिवार के साथ देखे जा सकने वाला यूनिवर्सल यानी U सर्टिफिकेट दिया गया है।

ये फिल्म पूरी तरह से न तो एनिमेशन बेस्ड है और न ही पूरी तरह से धार्मिक है। इसके साथ एक बात और खास है कि इस फिल्म के हर टिकट पर 5 रुपए अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के निर्माण के लिए दिए जाएँगे। तकनीक के मामले में ‘हनुमान’ फिल्म की सिनेमाटोग्राफी और VFX इसका एक अहम हिस्सा है।

फिल्म की कहानी की बात करें तो गाँव में हो रही राजनीति, हीरो और विलेन के साथ एक-एक कॉमेडियन, कमजोरों का शोषण करते ताकतवर, प्रेमिका को बचाता प्रेमी और इन सबके साथ बजरंग बली है। ये फिल्म डायरेक्टर प्रशांत वर्मा ने मूलतः ये फिल्म तेलुगू में बनाई है। ये मूवी हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम, मराठी, अंग्रेजी, स्पेनिश, कोरियन, जापानी और मंदारिन (चीनी) सहित 11 भाषाओं में एक साथ रिलीज की गई थी।

प्राण-प्रतिष्ठा के उत्सव में डूबे थे हिन्दू… बुर्काधारी महिला लगाने लगी अल्लाह-हू-अकबर के नारे: अब्बा बोले- बेटी मानसिक रूप से बीमार है

कर्नाटक के शिवमोगा में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर उत्सव मना रहे हिन्दुओं के बीच एक महिला ने घुस कर अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। उसने यहाँ लोगों को भड़काने वाली बातें भी कहीं। महिला को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के शिवमोगा में हिन्दू कार्यकर्ता अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उत्सव मनाने को इकट्ठा हुए थे। यह कार्यक्रम शिवमोगा के शिवप्पा नायक चौक पर हो रहा था। यहाँ एकत्रित हुए हिन्दू ‘जय श्रीराम’ के नारे लगा रहे थे।

इसी दौरान एक बुर्के वाली महिला आई और लोगों से बहस करने लगी। महिला ने इस दौरान भक्तों के बीच में अल्लाह-हू-अकबर के नारे भी लगाए। बताया गया कि यह महिला एक बाइक पर यहाँ पहुँची थी और साथ में एक बच्चे को लिए हुए थी। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महिला यहाँ साम्प्रादायिक सौहार्द बिगाड़ने आई थी।

यहाँ मौजूद इस महिला ने प्रधानमंत्री मोदी और हिन्दू भक्तों के खिलाफ भी उलटी सीधी बातें कीं। इसका वीडियो भी सामने आया है। वहीं महिला के घरवालों ने उसको बचाने के लिए बताया है कि महिला मानसिक रूप से अस्थिर है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने इस महिला को मौके से हटा कर हिरासत में लिया है। शिवमोगा के एसपी ने बताया, “शिवप्पा नायक चौक पर हिन्दू कार्यकर्ता राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रसाद तैयार कर रहे थे। इस दौरान यह महिला यहाँ पहुँची और फोटो लिए फिर अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाने लगी और प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपमानजनक बातें करने लगी। यहाँ इसके जवाब में हिन्दू कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने महिला को यहाँ से हटा दिया और अपने साथ थाने ले गई।”

बता दें कि पुलिस महिला को अपने साथ ले गई है लेकिन गिरफ्तारी न होने पर हिन्दू कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जताई है। मामले में रिपोर्ट भी दर्ज न किए जाने की बात सामने आई है। वहीं महिला के अब्बा ने दावा किया है कि वह मानसिक रूप से बीमार है और उसका कुछ समय से इलाज चल रहा है।

एक ऐसा ‘कारसेवक’ जिसने ढाँचे का गुंबद तोड़ने का दावा किया, बाद में अपना लिया इस्लाम और फिर संदिग्ध हालत में हो गई मौत: जानिए खबर की सच्चाई

धर्मनगरी अयोध्या के राम मंदिर में आज सोमवार (22 जनवरी 2024) को रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। ज्यादातर लोग इस दिन का श्रेय उन रामभक्तों को दे रहे हैं, जिन्होंने मुगल काल से मुलायम यादव सरकार के बीच जन्मभूमि के लिए अपने प्राण दे दिए। मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में उन तमाम कारसेवकों के परिजनों को विशेष तौर पर आमंत्रित भी किया गया है।

कारसेवकों के बारे में भ्रम फैलाते हुए वामपंथी और इस्लामी समूह के लोग बलवीर नाम के एक व्यक्ति का खूब प्रचार किया था। बलवीर ने बाद में इस्लाम अपनाकर आमिर नाम रख लिया था। उसने कहा था कि वह 6 दिसंबर 1992 की उस कारसेवा में शामिल था। ऑपइंडिया ने इस दावे की पड़ताल कागजातों और अयोध्या में मौजूद उन लोगों से की, जो इसके चश्मदीद हैं।

क्या है इस्लामी समूह और वामपंथियों का दावा?

इस्लाम कबूल करके मोहम्मद आमिर बने बलबीर का कई मीडिया संस्थानों ने इंटरव्यू प्रकाशित किया था। बलबीर ने खुद को मूलतः हरियाणा के पानीपत का निवासी बताया था। उसने कहा था कि वह शिवसेना का सदस्य था।, लेकिन हिन्दू संगठनों ने उसके मन में मुस्लिमों के खिलाफ नफरत भरी, जिसके कारण वह बाद में बजरंग दल में शामिल हो गया था।

बलवीर ने कहा था कि उसे जज्बाती करके 1 दिसंबर 1992 को अयोध्या ले जाया गया था और 6 दिसंबर 1992 की घटना में उसने विवादित ढाँचे के बीच वाले गुंबद पर सबसे पहला वार किया था। उसने यह भी कहा था कि जब वो पानीपत पहुँचा हीरो जैसा स्वागत हुआ था, लेकिन उसके माता-पिता नाराज हो गए थे।

बलबीर ने कहा था कि नाराजगी को दूर करने के लिए उसने इस्लाम कबूल कर लिया और 100 मस्जिदें बनवाने का निर्णय लिया। बलबीर ने दावा किया था कि उसने 5 साल पहले तक 92 मस्जिदों को बनवाने में मदद कर चुका है। उसने दावा किया कि वह जल्दी ही 100 मस्जिद बनवाने के अपने प्रण को दूर कर लिया जाएगा। धर्मांतरण के बाद बलबीर ने घूम-घूम कर खुद को पूर्व कारसेवक बताया था।

इस दौरान आजतक जैसे संस्थानों ने बलवीर के इंटरव्यू लिए। बाद में वो हरियाणा छोड़कर आमिर बना बलबीर हैदराबाद शिफ्ट हो गया। यहाँ वो हाफिज बाबा नगर में किराए के मकान में रहता था। 24 जुलाई 2021 को संदिग्ध हालातों में मोहम्मद आमिर की मौत की सूचना सामने आई। उसके कमरे से बदबू आने लगी तो लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी थी।

अयोध्या के संतों ने खबरों को बताया साजिश

इस दावे की पड़ताल करते हुए ऑपइंडिया ने 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा के तमाम चश्मदीद खोजे। अयोध्या के प्रमोद इलाके में पड़ने वाले नायक मंदिर के महंत महेश दास ने हमसे बातचीत में इन खबरों को सरासर झूठ का पुलिंदा बताया। उन्होंने दावा किया कि 6 दिसंबर 1992 में वो पूरी कारसेवा के चश्मदीद गवाह हैं।

महंत महेश दास का कहना है कि भले ही मौके पर हजारों की भीड़ थी, लेकिन गुंबद पर गिने-चुने लोग ही चढ़े थे। उन्होंने कहा कि पहली कुदाल चलाने का दावा करने वाला कथित बलवीर उर्फ़ मोहम्मद आमिर कतई नहीं था। अयोध्या के निवासी आशुतोष, मीरा, कपिल, रघुवीर, अजय दास और हनुमंत ने भी बताया कि वो भी 6 दिसंबर 1992 की घटना से अच्छे से वाकिफ हैं।

बलवीर उर्फ़ आमिर के दावों का खंडन करते हुए 6 दिसंबर 1992 के चश्मदीद और नायक मंदिर के महंत महेश दास

इन सभी ने कहा कि मीडिया में आई चर्चा के अलावा तब 6 दिसंबर 1992 की घटना में जमीनी तौर पर शामिल किसी बलवीर उर्फ़ मोहम्मद आमिर का वो नाम भी नहीं सुने थे। इन सभी लोगों ने वायरल की जा रहीं तमाम खबरों को धर्मान्तरण बढ़ाने की साजिश करार दिया और सरकार से माँग की है कि ऐसी निराधार खबरों को फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

CBI की FIR में नामजद कारसेवक ने भी खबरों को बताया अफवाह

ऑपइंडिया ने इन खबरों की सत्यता जाँचने के लिए उस कारसेवक को खोज निकाला जो 6 दिसंबर 1992 की घटना में सीबीआई द्वारा जाँचे गए केस में नामजद आरोपित हैं। 6 दिसंबर 1992 की घटना में पहली गिरफ्तारी अयोध्या जिले से सटे टांडा (अब अम्बेडकरनगर जिला) निवासी रामजी गुप्ता की हुई थी।

रामजी गुप्ता ने ऑपइंडिया से दावा किया कि वो विवादित ढाँचा गिराने के सभी आरोपितों और गुंबद पर चढ़े गिने-चुने रामभक्तों को अच्छे से जानते हैं, जिनमें बलवीर नाम का कोई भी कारसेवक नहीं था। खुद को एक-एक मिनट का गवाह बताते हुए रामजी गुप्ता ने इस्लाम कबूलने वाले बलवीर के कारसेवक होने जैसी खबरों को सरासर शरारतपूर्ण और सोची-समझी साजिश करार दिया।

बलवीर की कहानी को झूठी बताते विवादित ढाँचे के ध्वंस केस में नामजद रामजी गुप्ता

मैं था गुंबद के पास, बलवीर नहीं

ऑपइंडिया ने 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा में शामिल रहे मुजफ्फरनगर के अम्बरीश गोयल से बात की। अम्बरीश ने हमें बताया कि वो 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा के सक्रिय कारसेवक रहे हैं। तब कई टोलियाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से निकली थीं। उन्होंने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के हिस्सों से निकली टोलियों में अधिकतर लोगों से वे परिचित थे।

अम्बरीश ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित कारसेवक मोहम्मद आमिर उर्फ़ बलबीर की तस्वीर देखी थी। वह कारसेवा के दौरान गुंबद तो दूर, कहीं आसपास भी मौजूद नहीं था। अम्बरीश गोयल ने इन खबरों को रामभक्तों का मनोबल गिराने की साजिश करार देते हुए कहा कि वे इसके खिलाफ जल्द ही मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।

6 दिसंबर 1992 के कारसेवक अंबरीश गोयल

न FIR और न ही कोर्ट कार्रवाई में नाम, फिर भी इतना बड़ा झूठ

मोहम्मदी मस्जिद में मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान करके चर्चा में आए राष्ट्रीय हिन्दू दल नामक संगठन के अध्यक्ष रोशन पांडेय ने अयोध्या में ऑपइंडिया से बात की। रोशन ने कहा, “मैंने विवादित ढाँचे के ध्वंस से जुड़े सभी सरकारी कागजातों और अदालती कार्रवाई का बारीकी से अध्ययन किया है। कहीं एक सिंगल जगह भी हरियाणा के किसी बलवीर का जिक्र नहीं है।”

उन्होंने कहा, “जिनका ध्वंस से कोई वास्ता ही नहीं था, उनको तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने आरोपित बना डाला था। खुद मीडिया में आकर जिम्मेदारी ले रहे मोहम्मद आमिर बने बलबीर पर केस नहीं दर्ज हुआ, क्योंकि वो वहाँ था ही नहीं।” उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थान हिन्दुओं के खिलाफ ऐसी साजिशों का प्रचार करने से बाज आना चाहिए।

झूठ फ़ैलाने वालों से बाज आने की अपील करते रोशन पांडेय

इतना ही बड़ा रामभक्त था तो 1990 में क्यों नहीं आया ?

मूल रूप से एटा निवासी और हिन्दू एकता समूह नामक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुभम हिन्दू ने इस मामले में ऑपइंडिया से बात की। शुभम ने विवादित ढाँचे के गिरने के गम में बलबीर से मोहम्मद आमिर बन जाने जैसी खबरों को महज कुछ साजिशकर्ताओं के मन की उपज करार दिया।

बलवीर का इंटरव्यू प्रकशित करने वाले मीडिया संस्थानों से सवाल ठोकते हुए शुभम ने कहा कि अगर बलबीर इतना ही बड़ा रामभक्त था तो साल 1990 की कारसेवा में वो क्यों नहीं आया, जब मुलायम सिंह यादव की सरकार के आदेश पर हर तरफ गोलियाँ चल रहीं थीं?

शुभम हिन्दू ने कहा कि वो ऐसी खबरों को वायरल करने वाले साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश करने के लिए सरकार को पत्र लिखेंगे। शुभम चाहते हैं कि इस बात की भी जाँच हो कि इस प्रकार की झूठी खबरों को वायरल कर के साजिशकर्ताओं ने हिन्दू समाज का कितना नुकसान किया है।

धर्मांतरण रैकेट का आरोपित कलीम सिद्दीकी था आमिर उर्फ़ बलवीर का गुरु

बलवीर ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि वह देवबंद के मौलाना कलीम सिद्दीकी से मिलकर इस्लाम से प्रभावित हुआ था। कलीम सिद्दीकी के मदरसे में कुछ दिन रहने के बाद बलवीर ने ईमान लाने (मुस्लिम बनने) की बात कही थी। जनसत्ता का यहाँ तक दावा है कि विवादित ढाँचा ध्वंस के बाद बलबीर देवबंद में कलीम सिद्दीकी को मारने गया था, लेकिन यहाँ उसका मन बदल गया।

हालाँकि, जनसत्ता ने इस घटना का समय नहीं बताया है। कलीम सिद्दीकी वही शख्स है, जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने पूरे देश में फैले धर्मान्तरण का सरगना बताया था। कलीम सिद्दीकी का आपराधिक नेटवर्क मुंबई और गुजरात तक पाया गया था। वह लम्बे समय तक जेल में भी रहा था। अभी भी UP ATS कलीम के खिलाफ सबूत जुटा रही है।

बार-बार बयान बदला बलबीर

जनसत्ता जैसे संस्थानों ने दावा किया कि बलबीर मौलाना कलीम सिद्दीकी की हत्या करने गया था और वहाँ उसका मन बदल गया, जबकि एक इंटरव्यू में बलबीर ने खुद कहा था कि बाबरी गिराने के बाद उसके मन में डर जैसा बैठ गया था और वो कलीम सिद्दीकी के पास उस डर की ताबीज लेने गया था। वो कई डॉक्टरों और पंडितों के पास जाकर थक गया था, लेकिन उसका डर खत्म नहीं हुआ था।

कलीम सिद्दीकी के बारे में बलबीर को किसी अन्य व्यक्ति ने बताया था, जहाँ वो मिन्न्नत करके मिलने का दावा करते सुना जा सकता था। मौलाना कलीम के माध्यम से इस्लाम कबूल करने वाले बलबीर को थोड़े ही दिनों में मीडिया का पोस्टर ब्वॉय बना दिया गया। बलबीर उर्फ़ आमिर को हैदराबाद भेज दिया गया, जहाँ वह दीनी इदारा (इस्लाम की जानकारी देने वाले स्कूल) चलाने लगा।

यहीं पर एक मुस्लिम लड़की से बलबीर का निकाह भी करवा दिया गया। जुलाई 2021 में बलबीर की संदिग्ध हालातों में मौत हो गई। यह मौत तब हुई, जब उत्तर प्रदेश ATS कलीम सिद्दीकी के खिलाफ सबूत जुटाने में लगी हुई थी। कलीम को सितंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था। इसी के साथ उसके देशव्यापी धर्मान्तरण नेटवर्क का खुलासा भी हुआ था, जिसमें अधिकतर पीड़ित हिन्दू समुदाय से थे।

हमारा शिवसैनिक नहीं था बलबीर, भेजेंगे लीगल नोटिस

लल्लनटॉप जैसे संस्थानों ने धर्मान्तरित बलबीर के शिव सैनिक होने का दावा किया था। इन दावों की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने हरियाणा प्रदेश के युवा शिवसेना प्रमुख रितुराज से बात की। रितुराज ने साफ़ तौर पर बलबीर के शिव सैनिक होने की खबरों को कोरी बकवास बताया। रितुराज ने बताया कि इस तरह की खबरें छवि धूमिल करने की साजिश के तहत उड़ाई गईं।

रितुराज ने कहा, “हमें गर्व है कि बाला साहेब ठाकरे से मिली प्रेरणा से कई शिव सैनिकों ने कलंक रूपी ढाँचे को ध्वस्त करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन बलबीर जैसे लोगों को शिव सैनिक बताकर हमारी छवि धूमिल करने की भी साजिश रची गई, जो कि निंदनीय है। बलबीर जैसे लोगों की शिवसेना में न तो कभी जगह थी, न है और न ही आगे रहेगी।”

FIR दर्ज करवाकर बजरंग दल करेगा साजिश का पर्दाफाश

ऑपइंडिया ने इस पूरे मामले की जानकारी हरियाणा बजरंग दल प्रदेश के विद्यार्थी प्रमुख ललित भाटी से ली। ललित भाटी ने हमें बताया कि उन्होंने भी सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों के माध्यम से इन खबरों को सुना है। ललित ने बताया कि उन्होंने बलबीर के बारे में जानकारी जुटाई और निष्कर्ष के तौर पर यह निकला कि वो कभी भी कारसेवक नहीं रहा था।

ललित ने कहा, “विवादित ढाँचे के ध्वस्त होने के बाद मुस्लिम समूहों ने बड़ी साजिश रची और बलबीर नाम के व्यक्ति को मोहरा बनाया। बलबीर उनका शिकार आसानी से इसलिए बन गया, क्योंकि वो एक गाँधीवादी परिवार से था। उसको आगे रखकर बाबरी से जोड़ा गया, जो सम्भवतः कभी विवादित ढाँचे तक गया ही नहीं।”

ललित भाटी ने बताया कि तमाम साजिशकर्ताओं ने बलवीर को आगे कर के न सिर्फ धर्मान्तरण मामले को हवा दी बल्कि मस्जिदों को भी बनवाने के लिए पैसे आई जुटाने में अपना उल्लू सीधा किया। बकौल ललित भविष्य में ऐसी साजिश को अंजाम न दिया जा सके इसलिए वो जल्द ही संगठन की बैठक में इस मुद्दे को रखेंगे और FIR दर्ज करवा के पूरे मामले का पर्दाफाश करवाएँगे।

टीवी पर रामलला, हाथ जोड़ दर्शन करते ओडिशा के CM… प्राण प्रतिष्ठा पर बोले नवीन पटनायक – एक साथ आया पूरा राष्ट्र, धार्मिक उत्साह देख कर हुई ख़ुशी

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोमवार को राज्य की राजधानी में अपने आवास पर अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह का सीधा प्रसारण देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में एक घंटे तक चले समारोह के दौरान जन्मस्थान पर बने मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई।

नवीन पटनायक ने ‘X’ पर लिखा, “अयोध्या में आयोजित होने हुए शुभ राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी बना। राष्ट्र को प्राण प्रतिष्ठा के लिए धार्मिक उत्साह के साथ एक साथ आते देखकर खुशी हुई।” तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें हाथ जोड़ कर टीवी पर रामलला का दर्शन करते हुए नज़र आ रहे हैं।

अयोध्या में रामलला अपने जन्मस्थान पर हमेशा के लिए विराजमान हो गए। इसी के साथ सनातनियों की सदियों की तपस्या भी पूर्ण हो गई, जिसके लिए वो 500 वर्षों तक त्याग और बलिदान करते रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे। मंत्रोच्चार एवं वैदिक कर्मकांड के साथ रामलला को प्राण प्रतिष्ठित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मुख्य यजमान की भूमिका निभाई। वो चाँदी का मुकुट लेकर गर्भगृह में पहुँचे थे।

रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह (फोटो साभार : इंडिया टीवी)

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे राम आ गए। सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए। सदियों के त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु राम आ गए हैं।” वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज आत्मा इस बात से प्रफुल्लित है कि मंदिर वहीं बना है, जहाँ बनाने का संकल्प लिया था।