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प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रमजीवियों का सम्मान, PM मोदी ने राम मंदिर के निर्माण में लगे श्रमवीरों पर की पुष्पवर्षा: कुबेर टीला पर जटायु की प्रतिमा का भी अनावरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हिस्सा लिया, उसके बाद उन्होंने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कालचक्र बदल रहा है, ये एक नए युग का उद्गम है। इसके बाद वो कुबेर टीला पहुँचे, जहाँ उन्होंने राम मंदिर के निर्माण के शुभ कार्य में लगे मजदूरों से मुलाकात की। पीएम मोदी ने श्रमजीवियों पर पुष्पवर्षा की। बता दें कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन हो या फिर दिल्ली में ‘भारत मंडपम’ का उद्घाटन, वो हमेशा से इन मौकों पर श्रमजीवियों का सम्मान करते रहे हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि पीएम मोदी कुर्सी पर बैठे मजदूरों पर फूल बरसा रहे हैं। उन्होंने टोकरी में से लेकर लाल रंग के फूल बरसा कर इन मजदूरों को सम्मान दिया। ये वही ‘श्रमवीर’ हैं, जिनकी महीनों की मेहनत के बाद राम मंदिर का गर्भगृह तैयार हुआ और आज उसमें प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संभव हो पाया है। पीएम मोदी हमेशा से ‘श्रमेव जयते’ का नारा देते रहे हैं और ये मोदी सरकार की विकास योजनाओं में भी झलकता है। श्रम का सम्मान उनकी सरकार के मुख्य केन्द्रबिन्दुओं में से एक है।

ये सभी मजदूर अलग-अलग कंपनियों से जुड़े हुए हैं, जिन पर पीएम मोदी ने फूल बरसाया। कुबेर टीला पर उन्होंने पक्षीराज जटायु की मूर्ति का अनावरण भी किया। कुबेर टीला पर ही प्राचीन शिव मंदिर भी स्थित है, जिसका ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने पुनर्निर्माण करवाया है। मान्यता है कि यहाँ स्वयं धन के देवता कुबेर ने आकर शिवलिंग की स्थापना की थी। उससे पहले पीएम मोदी ने कहा कि वो भी एक समय था, जब कुछ लोग कहते थे कि राम मंदिर बना तो आग लग जाएगी। उन्होंने रामलला के मंदिर के निर्माण को भारतीय समाज के शांति, धैर्य, आपसी सद्भाव और समन्वय का प्रतीक बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि ये निर्माण आग को नहीं, ऊर्जा को जन्म दे रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “ये मंदिर, मात्र एक देव मंदिर नहीं है। ये भारत की दृष्टि का, भारत के दर्शन का, भारत के दिग्दर्शन का मंदिर है। ये राम के रूप में राष्ट्र चेतना का मंदिर है। राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं, राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं, राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन है, राम भारत की प्रतिष्ठा है। मैं आभार व्य​क्त करूँगा भारत की न्यायपालिका का जिसने न्याय की लाज रख ली। न्याय के पर्याय प्रभु श्रीराम का मंदिर भी न्याय बद्ध तरीके से बना।”

अयोध्या में खुद की ‘छाया’ का आलिंगन कर साध्वी ऋतम्भरा के नेत्र हुए गीले, राम जन्मभूमि मुक्ति की आवाज़ बनी थीं नारी शक्तियाँ

राम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है। ये एक विश्वास है, एक आस्था है। इसके साकार होने से जहाँ दुनिया भर के रामभक्त भावविह्वल है तो वहीं श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली बीजेपी नेता उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा के एहसास उनकी आँखों से छलक पड़े।

सोमवार (22 जनवरी 2024) को अयोध्या के राम मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह से कुछ घंटे पहले उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा ने राम मंदिर परिसर के सामने पहुँचते ही भावुक हो गई। उनके इन भावुक पलों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में दोनों एक-दूसरे को गले लगाते नजर आ रही हैं। देख सकते हैं कि दोनों की आँखों से खुशी के आँसू छलक आए हैं।

इनकी तस्वीरें देखने के बाद लोग उस समय को भी याद कर रहे हैं जब साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती ने राम मंदिर आंदोलन में हिंदुओं को जगाने का काम किया था। नारे दिए थे- “कहो गर्व से हम हिन्दू हैं, हिंदुस्तान हमारा है।”

वो बयान भी वायरल हैं जिसमें साध्वी ऋतंभरा बार-बार दोहराती है। हिंदुओं ने अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के साथ, काशी और मथुरा की भी बात की थी।

बता दें कि 90 के दशक की शुरुआत में उमा भारती और साध्वी ऋतंभरा दोनों ने बीजेपी द्वारा शुरू किए गए राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राम मंदिर आंदोलन को भारत के घर-घर तक पहुँचाने में इन दोनों के भाषणों की भूमिका थी। अयोध्या आंदोलन के दौरान साध्वी ऋतंभरा के भाषणों के ऑडियो कैसेट पूरे देश में सुनाई देते थे। इसमें वे विरोधियों को ‘बाबर की आलौद’ कह ललकारती थीं।

जब आचार्य धर्मेंद्र रामकथा कुंज से कारसेवकों को प्रसाद यानी बाबरी की ईंटों को लेने को कहा था। तब वो उमा भारती ही थीं जिन्होंने कहा था कि जब तक काम पूरा न हो जाए तक इलाका न छोड़ा जाए। इसे समतल किया जाए। उमा भारती ने नारा दिया था, “राम नाम सत्य है, बाबरी ध्वस्त है।”

एक कारसेवक ने दोनों साध्वियों के राम मंदिर बनाने के उत्साह और संकल्प को लेकर एक याद शेयर की है। वो कहते हैं, “उस ढाँचे को ढहाने के वक्त हमारी उम्र 22 साल थी और आज भी हमारे वहाँ वो पाइप वो ईंट रखी गई है। वहाँ गुंबद तोड़ने के लिए छेनी हथौड़ी कुछ काम नहीं आई। वो इतना सड़ा हुआ था कि वो बाँस और बल्ली मारने से ही गिर गया। बस लोगों के जुनून ने वो तोड़ डाला था।”

वो कहते हैं कि साध्वी ऋतंभरा ने तब कहा था कि डायनामाइट से उड़ा दिया जाए तो तब उमा भारती ने तुरंत माइक संभाल लिया और कहा जो आनंद इस तरह से कार सेवा करने में है वो डायनामाइट से तोड़ने में कतई नहीं आएगा।

उन्होंने आगे बताया कि गुबंद तोड़ने के बाद एक-एक चूरा, एक-एक ईंट जो चौकोर थीं प्रसाद के रूप में वहाँ से सारे लोग अपने घर उठा ले गए। वहाँ कुछ भी बचा नहीं मैदान साफ हो गया। उन्होंने आगे कहा, “हमें अपार खुशी है कि मंदिर बनकर तैयार हो गया है। हमारा आंदोलन सफल हुआ। हमारे पूर्वजों का त्याग और बलिदान व्यर्थ नहीं गया। हमारे सामने हमारी आँखों के सामने जीते जी मंदिर बन गया।”

‘मन किया गले लगा लूँ, लेकिन चरण स्पर्श किया’: अयोध्या में बागेश्वर धाम वाले बाबा से मिलीं कंगना रनौत, कहा – कोई उम्र से नहीं, अपने कर्मों से होता है गुरु

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुँचीं। यहाँ उन्होंने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जब भव्य राम मंदिर के ऊपर सेना के हेलिकॉप्टर ने पुष्पवर्षा की तो उन्होंने जय श्रीराम के नारे लगाए। उन्होंने इससे पहले बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से मिलने के विषय में भी लिखा।

कंगना ने यहाँ मंदिर परिसर में जय श्रीराम के नारे लगाए और इसकी वीडियो एक्स (पहले ट्विटर) पर वीडियो साझा की। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पहले वह यहाँ बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के साथ ही अन्य साधुओं से मिलीं। उन्होंने इसकी जानकारी भी सोशल मीडिया पर दी।

उन्होंने बागेश्वर धाम सरकार के बारे में इंस्टाग्राम पर लिखा, “पहली बार अपनी उम्र से छोटे गुरुजी से मिली, मुझसे लगभग 10 वर्ष छोटे हैं, मन किया कि छोटे भाई की तरह गले लगा लूँ, लेकिन फिर याद आया कि कोई उम्र से नहीं बल्कि अपने कर्मों से गुरु होता है। गुरुजी के चरण स्पर्श किए और आशीर्वाद लिया, जय बजरंग बली।”

इंस्टाग्राम पर कंगना रनौत की स्टोरी, बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से मिलीं

कंगना रनौत ने अन्य साधु-संतों के साथ मिलने की तस्वीरें भी साझा कीं। वो प्राण प्रतिष्ठा से एक दिन पहले ही अयोध्या पहुँच गई थीं। वो अपनी बहन के साथ अयोध्या पहुँची हैं। यहाँ उन्होंने का (21 जनवरी, 2023) को अयोध्या के मंदिर में सफाई करने पहुँची थी।

कंगना अयोध्या में इससे पहले रामभद्राचार्य से भी मिलीं थी। रामभद्राचार्य से मिलने की तस्वीरों में दिखा था कि वह रामभद्राचार्य से आशीर्वाद ले रही हैं। उन्होंने इन तस्वीरों को साझा करते हुए ट्विटर पर लिखा, “आओ मेरे राम। आज परमपूजनीय श्री रामभद्राचार्य जी से भेंट हुई, उनका आशीर्वाद लिया। उनके द्वारा आयोजित शास्त्रवत् सामूहिक हनुमान जी यज्ञ में भाग लिया। अयोध्या धाम में श्री राम के स्वागत में सब राममयी हैं। कल अयोध्या के राजा लम्बे वनवास के बाद अपने घर आ रहे हैं । आओ मेरे राम, आओ मेरे राम।” उन्होंने इस दौरान हवन में भी भाग लिया।

कालचक्र बदल रहा है… प्राण प्रतिष्ठा के बाद बोले PM मोदी – भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं राम, संविधान की पहली प्रति में भी राम

अयोध्या में दिव्य और भव्य मंदिर में प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में यह अनुष्ठान पुरा हुआ है। इस मौके पर खुद को धन्य बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राम मंदिर को भारतीय चेतना का मंदिर बताया। पीएम मोदी ने कहा, “हमारे राम आ गए। सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे राम आ गए। सदियों के त्याग और तपस्या के बाद हमारे प्रभु राम आ गए हैं।” वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज आत्मा इस बात से प्रफुल्लित है कि मंदिर वहीं बना है, जहाँ बनाने का संकल्प लिया था।

पीएम मोदी ने इस शुभ घड़ी की देशवासियों को बधाई देते हुए कहा, “मैं अभी गर्भगृह में ईश्वरीय चेतना का साक्षी बनकर आपके सामने उपस्थित हुआ हूँ। आज के इस पल की चर्चा अब हमेशा होगी। ये राम जी की कृपा है कि हम सब साक्षात इस पल को जी रहे हैं, इसे घटित होते देख रहे हैं। यह मौका दिव्यता से परिपूर्ण है। प्रभु राम को भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं। राम तो भारतवासियों के मन-मन में विराजे हुए हैं। हम किसी के भी मन को छुएंगे, तो एकत्व की अनुभूति होगी। इससे उत्कृष्ट भारत को समायोजित करने का सूत्र और क्या हो सकता है?”

पीएम मोदी ने भगवान हनुमान को प्रणाम करते हुए कहा कि जहाँ भी राम का काम होता है, वहाँ पवनपुत्र हनुमान अवश्य उपस्थित होते हैं। उन्होंने कहा, “मैं अयोध्या पुरी, पावन सरयू माँ को प्रणाम करता हूँ। मैं माता सीता, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न को नमन करता हूँ। सब हमारे आसपास उपस्थित हैं। मैं सभी को कृतज्ञतापूर्वक नमन करता हूँ। मैं आज प्रभु श्री राम से क्षमायाचना भी करता हूँ। हमारे पुरुषार्थ, हमारे त्याग, हमारी तपस्या में कुछ तो कमी रह गई होगी कि हम इतनी सदियों तक ये कार्य कर नहीं पाए। आज वो कमी पूरी हुई है। मुझे विश्वास है कि प्रभु राम आज हमें अवश्य क्षमा करेंगे।”

पीएम मोदी ने कहा, “त्रेता में राम आगमन पर पूज्य संत तुलसीदास ने लिखा है- प्रभु का आगमन देखकर ही समस्य देशवासी हर्ष से भर गए। लंबे वियोग से जो आपत्ति आई थी, उसका अंत हो गया। उस काल खंड में तो वो वियोग केवल 14 वर्षों का था, तब भी इतना असह्य था। इस युग में तो अयोध्या और देशवासियों ने सैकड़ों वर्षों का वियोग सहा है। हमारी कई-कई पीढ़ियों ने वियोग सहा है। भारत के संविधान में उसकी पहली प्रति में भगवान राम विराजमान हैं। संविधान के अस्तित्व में आने के बाद भी दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चली। मैं आभार व्यक्त करूँगा भारत की न्यायपालिका को, जिसने न्याय की लाज रख ली। न्याय के पर्याय प्रभु राम का मंदिर भी न्यायबद्ध तरीके से ही बना।”

पीएम मोदी ने कहा, “आज गाँव-गाँव में एक साथ कीर्तन संकीर्तन हो रहे। मंदिरों में उत्सव हो रहे। स्वच्छता अभियान चल रहे हैं। पूरा देश आज दीपावली मना रहा है। शाम को घर-घर में रामज्योति जलाने की तैयारी हो रही है। कल मैं भगवान राम के आशीर्वाद से रामसेतु के प्रारंभ बिंदु अरिचल मुनाई पर था। जिस घड़ी राम जी लंका पर चढ़ाई करने निकले थे, मैं उस अद्भुत पल को महसूस कर रहा था। वहाँ मैंने पुष्प वंदना की। वहाँ मेरे भीतर एक विश्वास जगा, जैसे उस समय कालचक्र बदला था, वैसे फिर बदलेगा। शुभ दिशा में बढ़ेगा।”

अपनी बात को जारी रखते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अपने 11 दिनों के व्रत के दौरान मैंने उन जगहों पर जाने का प्रयास किया, जहाँ प्रभु के चरण पड़े थे। चाहे नासिक हो, केरल हो, आंध्र प्रदेश का लेपाक्षी मंदिर हो या रामेश्वर और धनुषकोड़ी। मेरा सौभाग्य है कि मुझे सागर से सरयू तक आने का सौभाग्य मिला। मुझे देश के कोने-कोने में अलग-अलग भाषाओं में रामायण सुनने का अवसर मिला है। विशेषकर पिछले 11 दिनों में रामायण को अलग-अलग भाषा में अलग-अलग राज्यों में सुनने का मौका मिला।”

पीएम मोदी ने कहा, “राम लोक की स्मृतियों में लोक से लेकर परंपरा में सर्वत्र समाए हुए हैं। हर युग में लोगों ने राम को जिया है। हर युग में लोगों ने अपने-अपने शब्दों में अपनी-अपनी तरह से राम को अभिव्यक्त किया है और ये रामरस जीवन प्रवाह की तरह निरंतर बहता रहता है। प्राचीन काल से भारत के हर कोने के लोग रामरस का आचमन करते रहे हैं। रामकथा असीम है और रामायण भी अनंत है। राम के आदर्श, मूल्य और शिक्षाएँ सब जगह एक समान हैं। आज इस ऐतिहासिक समय में देश उन व्यक्तियों को याद कर रहा है, जिसके समर्पण की वजह से आज हम ये दिन देख रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “राम विवाद नहीं, राम समाधान हैं। राम सबके हैं। राम सिर्फ वर्तमान ही नहीं, राम अनंत काल तक हैं। आज जिस तरह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा आयोजन से पूरा विश्व जुड़ा है, उसमें राम की सर्वव्यापकता का अनुभव हो रहा है। जैसा उत्सव भारत में है, वैसे ही दुनिया के अन्य देशों में है। राम का ये उत्सव वैश्विक उत्सव है। राम का होना वसुधैव कुटुंबकम है। ये साक्षात मानवीय मूल्यों और सर्वोच्च आदर्शों की प्राण प्रतिष्ठा है। सर्वे भवन्तु सुखिना। ये संकल्प हम सदियों से दोहराते रहे हैं। आज राम मंदिर में उसे साक्षात देखा जा सकता है।”

उन्होंने कहा, “ये मात्र राम मंदिर नहीं है, ये भारत की दृष्टि का, दर्शन का, दिग्दर्शन का मंदिर है। ये राष्ट्र चेतना का मंदिर है। राम भारत की चेतना है… आधार है… विचार है। राम भारत का विधान हैं। राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन है। प्रवाह है, प्रभाव है। राम नेती भी है, नीति भी है, नित्यता भी है, निरंतरता भी है। विश्व है, विश्वात्मा है। इसलिए जब राम की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो उसका प्रभाव वर्षों शताब्दियों तक नहीं होता, सहस्त्राब्दियों तक होता है। राम 10 हजार वर्षों के लिए राज्य पर प्रतिष्ठित हुए यानि हजारों वर्षों के लिए रामराज्य स्थापित हुआ।”

नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब त्रेता में राम आए थे, तो हजारों वर्षों के लिए राम राज्य की स्थापना हुई थी। इसलिए देशवासियों, आज अयोध्या भूमि प्रत्येक भारतीय से कुछ सवाल कर रही है। श्रीराम का भव्य मंदिर तो बन गया। अब आगे क्या? आज के इस अवसर पर, जो दैव, दैवीय आत्माएँ हमें आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित हुए हैं, क्या हम उन्हें ऐसे ही विदा करेंगे? कदापि नहीं। आज मैं महसूस कर रहा हूँ कि कालचक्र बदल रहा है। हमारी पीढ़ी को कालचक्र के परिवर्तन के तौर पर चुना गया है। हजार वर्ष बाद भी हमें इसी रूप में याद किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “यही समय है, सही समय है। हमें आज से, इस पवित्र समय से अगले एक हजार साल के भारत की नींव रखनी है। मंदिर निर्माण से आगे बढ़कर हमें सभी देशवासी को इसी पल से समर्थ, सक्षम, भव्य, दिव्य भारत के निर्माण की सौगंध लेते हैं। राम के विचार मानस के साथ जनमानस में भी हो, यही राष्ट्रनिर्माण की सीढ़ी है। साथियों आज के युग की माँग है कि हमें अपने अंत:करण को विस्तार देना होगा। हमारी चेतना का विस्तार देव से देश तक, राम से राष्ट्र तक होनी चाहिए। हनुमान जी की भक्ति, सेवा, समर्पण ऐसे गुण हैं, जिन्हें हमें बाहर नहीं खोजना पड़ता।”

पीएम मोदी के अनुसार, “प्रत्येक भारतीय में भक्ति, सेवा और समर्पण के लिए भाव समर्थ, सक्षम, भव्य, दिव्य भारत का निर्माण करेंगे। दूर-सुदूर कुटिया में जीवन गुजारने वाली मेरी आदिवासी माँ शबरी का ध्यान आते ही अप्रतिम विश्वास जागृत होता है। माँ शबरी तो कब से कहती थी, राम आएँगे। प्रत्येक भारतीय में जन्मा यही विश्वास समर्थ, सक्षम, भव्य भारत का आधार बनेगा। यही तो है देव से देश तक, राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार। आज देश में निराशा के लिए रत्ती भर भी स्थान नहीं है। आज कोई अगर कोई खुद को छोटा समझता है, तो उसे गिलहरी के योगदान को याद करना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “गिलहरी का स्मरण ही हमें सिखाएगा कि छोटी-बड़ी ताकत का अपना योगदान होता है। यही भावना समर्थ, सक्षम, भव्य, दिव्य भारत का आधार बनेगी। यही तो है देव से देश तक, राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार। लंकापति रावण प्रकांड विद्वान, शक्तिशाली थे। लेकिन जटायू जी महाबली रावण से भिड़ गए। उन्हें भी पता था कि वो रावण को परास्त नहीं कर पाएँगे, लेकिन उन्होंने रावण को चुनौती दी। कर्तव्य की यही पराकाष्ठा समर्थ, सक्षम, भव्य भारत का आधार बनेगा। यही तो है देव से देश तक, राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार। हम संकल्प लें कि हम अपने जीवन का पल-पल, शरीर का कण-कण राम से राष्ट्र की चेतना में जोड़ देंगे।”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, “आज 500 वर्षों बाद रामलला यहाँ लौटे हैं। जिनके प्रयासों से हम आज का यह स्वर्ण दिन देख रहे हैं, उन्हें हम कोटि-कोटि नमन करते हैं। इस युग में रामलला के यहाँ वापस आने का इतिहास जो कोई भी श्रवण करेगा उसके सारे दुख-दर्द मिट जाएँगे, इतना इस इतिहास में सामर्थ्य है।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “श्रीराम जन्मभूमि संभवत: विश्व में पहला ऐसा अनूठा प्रकरण होगा, जिसमें किसी राष्ट्र के बहुसंख्यक समाज ने अपने ही राष्ट्र में अपने आराध्य की जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण के लिए इतने वर्षों और इतने स्तरों पर लड़ाई लड़ी हो… आज आत्मा प्रफुल्लित है इस बात से कि मंदिर वहीं बना है, जहाँ बनाने का संकल्प लिया था।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रभु रामलला के भव्य, दिव्य और नव्य धाम में विराजने की आप सभी को कोटि-कोटि बधाई… मन भावुक है… निश्चित रूप से आप सब भी ऐसा महसूस कर रहे होंगे… आज इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत का हर नगर, हर ग्राम अयोध्या धाम है… हर मन में राम नाम है। हर आँख हर्ष और संतोष के आँसू से भीगी है। हर जुबान राम नाम जप रही है। रोम-रोम में राम रमे हैं…ऐसा लगता है कि हम त्रेतायुग में आ गए हैं…”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अब अयोध्या की सड़कें गोलियों की आवाज से नहीं गूँजेंगी। कोई कर्फ्यू नहीं होगा। अब यहाँ दीपोत्सव और रामोत्सव होगा। स्थापना के चलते सड़कों पर श्रीराम नाम संकीर्तन गूँजेगा, यहाँ रामलला के रामराज्य का उद्घोष हैं…”

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना उपवास तोड़ा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या के पूर्ण राम मंदिर की चाँदी की प्रतिकृति भेंट की।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आज कई बॉलीवुड हस्तियां शामिल हुईं। निर्देशक रोहित शेट्टी और राजकुमार हिरानी, अभिनेत्री माधुरी दीक्षित नेने, आलिया भट्ट-रणबीर कपूर, कैटरीना कैफ-विक्की कौशल और आयुष्मान खुराना ने कार्यक्रम स्थल पर एक तस्वीर के लिए पोज दिया।

बता दें कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम दोपहर में भव्य तरीके से संपन्न हो गया। इसी के साथ सनातनियों की सदियों की तपस्या भी पूर्ण हो गई, जिसके लिए वो 500 वर्षों तक त्याग और बलिदान करते रहे। मंत्रोच्चार एवं वैदिक कर्मकांड के साथ रामलला को प्राण प्रतिष्ठित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मुख्य यजमान की भूमिका निभाई। वो चाँदी का मुकुट लेकर गर्भगृह में पहुँचे थे।

रामलला की हुई प्राण प्रतिष्ठा तो वामपंथी-कट्टरपंथी गिरोह के उखड़े प्राण पखेरू: कहने लगे – ये सेक्युलरिज्म की मौत: इस्लामी गिरोह कह रहा – फिर खड़ा होगा बाबरी

एक तरफ जहाँ सोमवार (22 जनवरी, 2024) को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर संपूर्ण हिन्दू समाज खुश नज़र आ रहा है, वहीं एक गिरोह के कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके दुःखों की कोई सीमा नहीं है। यहाँ तक कि सोशल मीडिया पर ‘बाबरी ज़िंदा है’ हैशटैग के साथ ट्रेंड भी चलाया गया। वहीं राना अय्यूब, अरफ़ा खानम, शेरवानी व आइशी घोष जैसों ने अपने देश को ही मृत करार दिया। इस गिरोह को 500 वर्षों के संघर्ष के बाद बने राम मंदिर से बड़ा ही दुःख है।

चंदा जमा कर के खा जाने का आरोप जिन पर लग चुका है, खुद को पत्रकार बताने वाली राना अय्यूब ने भी अपना ‘दर्द’ बयाँ किया। राना अय्यूब अक्सर विदेशी चैनलों पर बैठ कर भारत विरोधी बातें करती रहती हैं। राना अय्यूब ने लिखा, “ये दिन न सिर्फ सत्ताधारियों के क्रूर बहुसंख्यकवाद को प्रदर्शित करता है, बल्कि उनकी चुप्पी पर भी सवाल खड़े करेगा जो कभी संप्रदायिकता के खिलाफ लड़ते थे।” राना अय्यूब खुद इस्लामी कट्टरपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं।

इसी तरह ‘The Wire’ जैसे प्रोपेगंडा पोर्टल के लिए काम करने वाली अरफ़ा खानम शेरवानी ने भी सोशल मीडिया पर आकर प्रलाप किया। उन्होंने लिखा, “1992 में हुए सांप्रदायिक दंगों की एक पीड़ित के रूप में मेरे आसपास जो भी हो रहा है वो सब काफी परेशान करने वाला, अशांत कर देने वाला और हतोत्साहित करने वाला है। मेरी पीढ़ी को श्राप मिला है कि उन्होंने 6 दिसंबर, 1992 और 22 जनवरी, 2024 को अपने जीवनकाल में देखा।”

इसी तरह वामपंथी नेता आइशी घोष भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ लिखती नज़र आईं। उन्होंने लिखा, “22 जनवरी, 2024 – एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का पतन। इसे याद रखा जाएगा।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने अयोध्या पहुँचे सेलिब्रिटज पर तंज कसते हुए लिखा, “ये रीढ़विहीन लोग पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं। उनके एजेंडे में फिट हो तो चाट भी सकते हैं। इसके राम के प्रति श्रद्धा से कोई लेना-देना नहीं है।” आइशी घोष JNU में हिंसा के लिए भी जानी जाती हैं।

इसी तरह, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ‘बाबरी ज़िंदा है’ ट्रेंड भी कराया गया। कोई 22 जनवरी, 2024 को ‘काला दिन’ बता रहा है, जबकि कोई लिख रहा है कि बाबरी मस्जिद उनके दिलों में ज़िंदा रहेगा। इस्लामी कट्टरपंथियों ने लिखा कि मस्जिद को मंदिर में तब्दील कर लोगे, लेकिन इस्लाम हमेशा रहेगा। इन लोगों ने लिखा कि हम न भूलेंगे, न माफ़ करेंगे। वहीं कुछ ने तो ‘इंशाअल्लाह’ लिखते हुए ये दावा भी कर डाला कि बाबरी मस्जिद को फिर से खड़ा किया जाएगा।

उधर अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब अयोध्या की गलियों में गोलियों को गड़गड़ाहट नहीं होगा, बल्कि दीपोत्सव होगा। उन्होंने कहा कि अब कोई अयोध्या की परिक्रमा में बाधा नहीं बन पाएगा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर वहीं बना, जहां बनाने का संकल्प लिया, आज हम सबकी आत्मा इस बात से प्रफुल्लित हो रही है। उत्तर प्रदेश के CM ने कहा कि आज के इस पावन अवसर पर भारत का हर गाँव अयोध्या है, हर जिह्वा पर राम है, हमारे रामलला सिंहासन पर विराज रहे हैं।

‘काफिर नंबर-1’ : ऊर्फी जावेद ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर किया हवन-पाठ, इस्लामी कट्टरपंथियों ने दी गालियाँ

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर उर्फी जावेद ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन हवन पूजा की एक वीडियो को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। साथ ही लिखा- उत्सव मना रहे सभी लोगों को बधाई। वीडियो के बैकग्राउंड में भजन चल रहा है “मैं तो रूचि, रूचि भोग लगाऊँगी, माखन मिश्री मैं राम को खिलाऊँगी।”

इस वीडियो में दिख रहा है कि उर्फी स्लीवलेस सूट पहनकर अपने घर में हवन कर रही हैं। इस दौरान दो पंडित साथ हैं जो उनसे यज्ञ करवा रहे हैं।

वीडियो देखने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। कोई उनको दयालु बता रहा है तो कोई उन्हें हर धर्म का सम्मान करने वाला कह रहा है। लेकिन कुछ लोगों को उनका ये पूजा पाठ करना पसंद भी नहीं आया।

एक सैफे नाम के यूजर ने कहा, “सभी मुस्लिम लोग इसे अनफॉलो करो।”

तस्वीर साभार: उर्फी जावेद का इंस्टा अकॉउंट

वहीं, कुछ ने तो उसे मुसलमान मानने से ही इनकार कर दिया। एक रिहान सब्बीर ने लिखा- “ए सा$% मुसलमानों की इज्जत दुबा रही है।”

फारूक अब्दुल्ला नाम के यूजर ने लिखा- “अस्तागफिरउल्लाह, लानत है तेरे जैसी लड़की पे तू जल्दी से गोबर खाने वाली बन जा सा&%।” एक यूजर ने तो उन्हें काफिर नंबर-1 भी कहा।

तस्वीर साभार: उर्फी जावेद का इंस्टा अकॉउंट

बता दें कि अपने अजीब और अनोखी पोशाकों के कारण उर्फी जावेद इंटरनेट पर मशहूर हैं। उन्हें ‘DIY एक्सपर्ट’ कहा जाता है। अक्सर वो अपने बोल्ड आउटफिट से पैपराजी का ध्यान खींचती रहती हैं।

इससे पहले उर्फी जावेद अपने पहनावे को लेकर बीबीसी वर्ल्ड से का था, “मैंने प्रसिद्धि हासिल कर ली है? हाँ। यश? हाँ। काम? नहीं, लोग मेरी इज्जत नहीं करते। लोग मेरे साथ काम नहीं करना चाहते।” उन्होंने ये भी कहा था, “मैं ध्यान आकर्षित करती हूँ। मैं ध्यान चाहती हूँ, इसलिए मैं वैसे ही कपड़े पहनती हूँ।”

वो ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘कसौटी जिंदगी’ सहित कई टीवी शो में नजर आई चुकी हैं। वो बिग बॉस ओटीटी का हिस्सा बनने के बाद वो मशहूर हुई थीं। उर्फी जावेद आखिरी बार रियलिटी टीवी शो स्प्लिट्सविला के 14वें एडिशन में दिखाई दी थीं।

‘मैं संसार का सबसे सौभाग्यशाली’: जिनकी प्रतिमा की अयोध्या के मंदिर में हुई प्राण-प्रतिष्ठा वे हुए भाव विह्वल, बोले अरुण योगीराज- मुझ पर भगवान राम का आशीर्वाद

सदियों के इंतजार के बाद भगवान रामलला अयोध्या के भव्य राममंदिर में प्रतिष्ठित हो गए। प्रधानमंत्री मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य यजमान गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न करा चुके हैं। इससे पहले रामलला की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि वे अपने आप को दुनिया के सबसे सौभाग्यशाली व्यक्ति मान रहे हैं।

अरुण योगीराज ने कहा, “मुझे यह भावना आ रही है कि मैं विश्व का सबसे सौभाग्यशाली व्यक्ति हूँ। मेरे साथ हमेशा मेरे पुरखों, मेरे परिवार और भगवान रामलला का आशीर्वाद रहा है। मुझे लगता है कि मैं सपनों की दुनिया में हूँ। यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा दिन है।” योगीराज ने ही इस मंदिर में स्थापित होने वाली रामलला की मूर्ति बनाई है।

अरुण योगीराज ने रामलला के पाँच वर्षीय क्षत्रिय राजकुमार वाले स्वरुप की श्यामल प्रतिमा बनाई है। यह प्रतिमा कुछ दिन पहले ही गर्भगृह में स्थापित की गई थी। उन्होंने यह मूर्ति कर्नाटक से लाए गए पत्थर से बनाई है। यह पत्थर मैसूर के एक दलित किसान रामदास के खेत से लाए गए थे। रामदास ने जहाँ से यह पत्थर निकला है, उस जमीन को राम मंदिर बनाने के लिए दे दी है।

अरुण योगीराज को प्रतिमा बनाने के दौरान मुश्किल का सामना करना पड़ा। मूर्ति बनाने के दौरान उनकी आँख में एक पत्थर का नुकीला टुकड़ा घुस गया था। इसके बाद उनकी सर्जरी हुई। कई दिनों तक उन्हें एंटीबायोटिक और पेनकिलर्स पर रखा गया। हालाँकि, रामलला की भव्य प्रतिमा गढ़ने से उन्हें कुछ भी नहीं रोक सका। उनकी पत्नी विजेता ने ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को ये जानकारी दी।

मैसूर के रहने वाले अरुण योगीराज साल 2008 में मैसूर यूनिवर्सिटी से MBA कर चुके हैं और कुछ समय तक निजी कंपनी में नौकरी भी की। हालाँकि, इस नौकरी को छोड़कर उन्होंने अपने पारिवारिक पेशे को चुना। मैसूर के गुज्जेगौदाना पुरा स्थित एक जगह से पत्थर लाया गया, जिससे रामलला की प्रतिमा गढ़ी गई है। ये दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन पत्थरों में से एक है।

उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम में जगद्गुरु शंकराचार्य की जिस प्रतिमा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनावरण किया था, उसे भी उन्होंने ही बनाया था। इतना ही नहीं, दिल्ली के इंडिया गेट पर पीएम मोदी ने ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जिस प्रतिमा का अनावरण किया था, उसे भी अरुण योगीराज ने ही गढ़ा था। प्रतिमा बनाने के दौरान योगीराज सात्विक आहार पर थे।

अयोध्या के भव्य राममंदिर में प्रतिष्ठित हुए रघुकुल दीपक, सनातनियों की 500 वर्षों की पूर्ण हुई तपस्या: PM मोदी ने की पूजा

अयोध्या में रामलला अपने जन्मस्थान पर हमेशा के लिए विराजमान हो गए। इसी के साथ सनातनियों की सदियों की तपस्या भी पूर्ण हो गई, जिसके लिए वो 500 वर्षों तक त्याग और बलिदान करते रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे।

मंत्रोच्चार एवं वैदिक कर्मकांड के साथ रामलला को प्राण प्रतिष्ठित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान मुख्य यजमान की भूमिका निभाई। वो चाँदी का मुकुट लेकर गर्भगृह में पहुँचे थे।

रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह (फोटो साभार : इंडिया टीवी)

राम मंदिर का निर्माण केवल एक भवन का निर्माण नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक उपलब्धि है। यह मंदिर सनातन मूल्यों और सिद्धांतों का प्रतीक है। राम मंदिर हिंदू धर्म के भूत, वर्तमान और भविष्य का प्रतीक है। यह मंदिर सनातन परंपरा के अतीत की शानदार विरासत को संजोता है। यह मंदिर हिंदू धर्म के वर्तमान को मजबूत करता है।

यह मंदिर हिंदू धर्म के भविष्य के लिए एक नई आशा का संदेश देता है। राम मंदिर का निर्माण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। यह घटना भारत की संस्कृति और सभ्यता की विरासत को दर्शाती है। यह घटना भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करती है। राम मंदिर भारत के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक है। यह मंदिर भारत में शांति, समृद्धि और भाईचारे का संदेश देता है।

टाइम्स स्कायर से लेकर एफिल टॉवर तक… राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की धूम: विदेशों में गूँज रहा- एक ही नारा, एक ही नाम, जय श्रीराम

अयोध्या के राम मंदिर में रामलला के विराजने की खुशी केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है। अमेरिका में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से एक दिन पहले ही रविवार (21 जनवरी, 2024) को लोग प्रभु राम के रंग में नजर आए।

न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर भगवान राम की तस्वीर देख भारतीय प्रवासी झूम उठे। परदेश में अपने देश की सांस्कृतिक विरासत और सनातन पर गर्व करते हुए श्री राम के भजन गाए और जयकारे लगाए।

यहाँ भारतीय लोग पारंपरिक भारतीय पोशाक पहने, हाथों में राम जी की तस्वीर वाले भगवा झंडे लिए, झूम-झूम के रामलला का गुणगान कर रहे थे। इसके साथ ही ढोल-नगाड़ों संग ‘एक ही नारा एक ही नाम, जय श्री राम’ जयकारा लगाता नजर आए।

इस संबंध में यूके में भारतीय दूतावास ने एक्स पर लिखा, “भारतीय प्रवासियों ने राम मंदिर, अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के शानदार उत्सव के साथ टाइम्स स्क्वायर को रौशन किया। पारंपरिक भारतीय पोशाक पहने हुए लोगों ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करते हुए जीवंतता और एकता के साथ भजन और गीत गाए।”

अमेरिकी मेयर ने दी शुभकामनाएँ

वहीं अमेरिका में मैसाचुसेट्स के वॉर्सेस्टर शहर के मेयर जो पेटी ने भी राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के लिए हिंदू समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। वो इस मौके पर खुद भी मौजूद रहे।

मेयर पेटी ने भारत के 75वें गणतंत्र दिवस मनाने का ऐलान करने के साथ कहा, “वॉर्सेस्टर शहर के सभी निवासियों को इसमें (गणतंत्र दिवस) भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें और अयोध्या (भारत) में श्री राम मंदिर के शुभ उद्घाटन पर अमेरिकी हिंदू, सिख, जैन को हमारी हार्दिक बधाई दें।”

उन्होंने कहा, “हम 22 जनवरी को भारत के अयोध्या में श्री राम मंदिर के उद्घाटन के लिए अमेरिकी हिंदू, सिख, जैन और एशियाई-अमेरिकी प्रवासी समुदायों को हार्दिक बधाई देते हैं और दोनों ऐतिहासिक समारोहों को स्वीकार करने और मान्यता देने में हमारी मदद करने के लिए फाउंडेशन ऑफ इंडियन-अमेरिकियों (एफआईए) न्यू इंग्लैंड के आभारी हैं।”

ओवरसीज फ्रैंड्स ऑफ राम मंदिर के सदस्यों ने टाइम्स स्कॉवयर पर लड्डू भी बाँटें। अमेरिका के शहरों में बड़े पैमाने पर 22 जनवरी को कार रैली भी होने जा रही है। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर से लेकर अमेरिका में लगभग 300 जगहों पर अयोध्या में हो रही रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण हो रहा है।

अमेरिका से लेकर ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में प्राण-प्रतिष्ठा की झूम

बताते चलें कि केवल अमेरिका ही नहीं दुनिया के अन्य मुल्कों में भी राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर खासा उत्साह देखा गया। यूके, फ्राँस,ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में मंदिरों खास कार्यक्रम और कार रैलियाँ हो रही हैं।

नेपाल के जनकपुर में सीताजी के मायके में प्राण प्रतिष्ठा से पहले मंदिर को रोशनी से सजाया गया है। मॉरिशस में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर 2 घंटे का स्पेशल ब्रेक है। मॉरिशस के सारे मंदिर में दीए जलाए जाएँगे। सभी में राम के नाम का जाप होगा।

प्राण प्रतिष्ठा से पहले ताइवान के इस्कॉन में रविवार भजन-कीर्तन किया गया। वहीं इंग्लैंड के मंदिरों में खास कार्यक्रम और कार रैलियाँ हो रही है तो फ्रांस के पेरिस में एफिल टावर तक बड़ी रामरथ यात्रा निकाली जा रही है। यहीं नहीं इससे पहले विश्व कल्याण का यज्ञ भी हुआ।

कनाडा के ओन्टारियो राज्य के ब्रॉम्पटन और ओकविल में 22 जनवरी को राम मंदिर डे का ऐलान किया है। ब्रॉम्पटन के मेयर पैट्रिक ब्राउन ने कहा कि राम मंदिर बनने से हिंदुओं का सदियों पुराना सपना पूरा हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भी मंदिरों में खास कार्यक्रम और रैलियाँ की जा रही है।

अयोध्या के राम मंदिर में PM मोदी, आ गई प्राण प्रतिष्ठा की बेला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पहुँच गए हैं। प्रधानमंत्री मंदिर परिसर में मौजूद हैं। वे मंदिर परिसर के पास बने हेलीपैड पर हेलिकॉप्टर से उतरे। इसके बाद वह मंदिर की तरफ बढ़ गए। प्रधानमंत्री ने हेलिकॉप्टर से अयोध्या का एक वीडियो भी जारी किया।

प्रधानमंत्री मोदी 12:05 बजे से मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की पूजा करेंगे। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत भी मौजूद रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी इस पूजा में यजमान की भूमिका में रहेंगे। इससे पहले कुछ समय प्रधानमंत्री के लिए रिजर्व रखा गया है।

आज 12:55 बजे मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हो जाएगी और मंदिर भक्तों के दर्शन के लिए तैयार हो जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी यहाँ से निकल जाएँगे और 1 बजे यहाँ बने एक सार्वजनिक कार्यक्रम स्थल पर जाएँगे। यहाँ वह सार्वजनिक समारोह में भाग लेंगे। इस दौरान वे राम मंदिर का निर्माण करने वाले श्रमिकों से मिलेंगे। 

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी लगभग 2 बजे अयोध्या में कुबेर टीला के दर्शन करने जाएँगे। वहाँ वह पूजा अर्चना में भाग लेंगे। इसके बाद 3 बजे वे दिल्ली लौट आएँगे। बताते चलें कि प्रधानमंत्री प्राण प्रतिष्ठा के लिए 11 दिनों से कठिन व्रत कर रहे हैं। वे यम-नियम का भी पालन कर रहे हैं।

वह इस दौरान दक्षिण के कई मंदिरों में भी गए। प्रधानमंत्री मोदी आन्ध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु के कई मंदिरों में गए और वहाँ दर्शन किया। प्रधानमंत्री रामेश्वरम भी पहुँचे थे। रामेश्वरम में पुजारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री तमिलनाडु के मंदिरों से पवित्र जल का कलश लेकर तमिलनाडु से वापस हुए हैं।

प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त पास आते ही मंदिर परिसर में रामध्वनि गुंजायमान हो गई है। गायक सोनू निगम और अनुराधा पौडवाल भजन से सबका मन मोह रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के प्राण प्रतिष्ठा पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा ने कहा है कि यह अवसर उनको भगवान से मिला है। एचडी देवेगौड़ा भी अयोध्या पहुँचे हैं।

राम मंदिर में भगवान रामलला की की जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है, उसे मैसूरु के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगिराज ने बनाई है। योगीराज का कहना है कि वह अपने आप को विश्व का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति मान रहे हैं।