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बंगाल में इस बार दल-बल के साथ ED ने मारा छापा, फरार TMC नेता शाहजहाँ शेख के घर में ताला तोड़ घुसी: पिछली बार भीड़ ने किया था हमला

पश्चिम बंगाल के राशन घोटाला मामले में बुधवार (24 जनवरी 2024) की सुबह ईडी ने एक बार फिर तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शाहजहाँ के घर जाकर छापेमारी की। पिछली बार रेड के दौरान हुए हमले के कारण इस दफा जाँच एजेंसी अपने साथ भारी सुरक्षा का इंतजाम करके टीएमसी नेता के घर पहुँची। उनके साथ 24 गाड़ियाँ थीं जिसमें जाँच टीम के अलावा सुरक्षाकर्मी भी थे।

जब टीम जाँच के लिए शाहजहाँ के घर पर गई तो वहाँ ताला था। उन्होंने उस ताले को तुड़वाया और घर के बाहर 100 जवानों को तैनात रखा। इस दौरान कहा जा रहा है कि लोकल पुलिस भी आई और उन्होंने ईडी टीम से कहा कि छापेमारी की वीडियोग्राफी वो करेंगे। हालाँकि ईडी टीम ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।

बता दें कि इससे पहले 5 जनवरी 2024 को तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख के घर रेड मारने गई प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर और सीआरपीएफ के जवानों पर 250-300 लोगों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया था। उस दौरान पत्रकारों पर भी अटैक हुआ था और कई गाड़ियों में तोड़फोड़ भी हुई थी।

हमले में ईंट-पत्थर का इस्तेमाल हुआ था। सामने आई तस्वीर में एक आदमी का सिर खून से लथपथ नजर आ आया था। वो कपड़ा बाँधकर सुरक्षाकर्मियों के साथ खड़ा था। वहीं सुरक्षाकर्मी भी भीड़ के आगे बेबस दिखाई पड़ रहे थे। हमला करने वाली भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी थीं। सबने ईडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें गालियाँ दीं थी, फिर हमला किया था।

बंगाल पुलिस ने इस मामले में 3 एफआईआर दर्ज की थी। इनमें एक शिकायत स्थानीयों द्वारा भी कराई गई थी जिसमें था कि टीम इलाके में अशांति फैला रही थी। हालाँकि, कोर्ट ने पुलिस को ई़डी टीम पर कार्रवाई करने से लिए रोक दिया था।

शाहजहाँ शेख कौन है?

गौरतलब है कि टीएमसी के नेता शाहजहाँ शेख को संदेशखली का बेताज बादशाह बताते हैं। शेख का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है लेकिन फिर भी वह राजनीति में बड़ी तेजी से आगे बढ़ा। वह जन्मा गरीब घर में ही था, जिसके कारण शुरुआत में उसने ट्रक ड्राइवर का काम किया, तो कभी कंडक्टर का। कभी सब्जी बेची तो कभी कुछ और किया। लेकिन इन सबके साथ वो संदेशखली में बड़े नेताओं से संपर्क भी बनाता रहा।

धीरे-धीरे समय आया कि वो खुद एक रसूखदार आदमी बन गया। 2006 में वामपंथी सरकार के वक्त उसने मोस्लेम शेख के सबसे करीबी सहयोगी के रूप में पैसे उगाही जैसे काम करने की शुरूआत की। धीरे-धीरे वो रियल स्टेट में घुसा और फिर मछली पालन जैसे कामों में लग गया।

सत्ता परिवर्तन के साथ उसका पाला भी बदल गया। 2011 में वामपंथी सरकार गई तो 2013 में वो टीएमसी में आ गया। यहाँ वह खाद्य मंत्री ज्योतिप्रियो मल्लिक का खास बन गया। भाजपा के साथ टीएमसी की झड़पों में भी शेख का नाम आता रहा। 

2020 में उसके ऊपर दो भाजपा नेताओं की हत्या का इल्जाम लगा, लेकिन वह उससे भी बच गया। उसकी नीति यही रही कि वो हमेशा से बड़े लोगों के ग्रुप में उठता-बैठता, जिससे जब उस पर कोई दोष लगे तो वह बच सके। यही वजह है कि उसपर कार्रवाई नहीं हुई। उसपर अपने चुनाव क्षेत्र में चुनाव के दौरान धांधली करने का आरोप भी लगता रहा है।

सादगी की मिसाल, सच्चे जननायक, संघर्ष की आवाज… कर्पूरी ठाकुर पर PM मोदी का विशेष लेख, कहा- हमारी योजनाओं में उनका विजन

हमारे जीवन पर कई लोगों के व्यक्तित्व का प्रभाव रहता है। जिन लोगों से हम मिलते हैं, हम जिनके संपर्क में रहते हैं, उनकी बातों का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। लेकिन कुछ ऐसे व्यक्ति भी होते हैं जिनके बारे में सुनकर ही आप उनसे प्रभावित हो जाते हैं। मेरे लिए ऐसे ही रहे हैं जननायक कर्पूरी ठाकुर।

आज कर्पूरी बाबू की 100वीं जन्म-जयंती है। मुझे कर्पूरी जी से कभी मिलने का अवसर तो नहीं मिला, लेकिन उनके साथ बेहद करीब से काम करने वाले कैलाशपति मिश्र जी से मैंने उनके बारे में बहुत कुछ सुना है। सामाजिक न्याय के लिए कर्पूरी बाबू ने जो प्रयास किए, उससे करोड़ों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया। उनका संबंध नाई समाज, यानि समाज के अति पिछड़े वर्ग से था। अनेक चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने कई उपलब्धियों को हासिल किया और जीवनभर समाज के उत्थान के लिए काम करते रहे।

जननायक कर्पूरी ठाकुर जी का पूरा जीवन सादगी और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित रहा। वे अपनी अंतिम साँस तक सरल जीवनशैली और विनम्र स्वभाव के चलते आम लोगों से गहराई से जुड़े रहे। उनसे जुड़े ऐसे कई किस्से हैं, जो उनकी सादगी की मिसाल हैं।

उनके साथ काम करने वाले लोग याद करते हैं कि कैसे वे इस बात पर जोर देते थे कि उनके किसी भी व्यक्तिगत कार्य में सरकार का एक पैसा भी इस्तेमाल ना हो। ऐसा ही एक वाकया बिहार में उनके सीएम रहने के दौरान हुआ। तब राज्य के नेताओं के लिए एक कॉलोनी बनाने का निर्णय हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने लिए कोई जमीन नहीं ली। जब भी उनसे पूछा जाता कि आप जमीन क्यों नहीं ले रहे हैं, तो वे बस विनम्रता से हाथ जोड़ लेते। 1988 में जब उनका निधन हुआ तो कई नेता श्रद्धांजलि देने उनके गाँव गए। कर्पूरी जी के घर की हालत देखकर उनकी आँखों में आँसू आ गए कि इतने ऊँचे पद पर रहे व्यक्ति का घर इतना साधारण कैसे हो सकता है!

कर्पूरी बाबू की सादगी का एक और लोकप्रिय किस्सा 1977 का है, जब वे बिहार के सीएम बने थे। तब केंद्र और बिहार में जनता सरकार सत्ता में थी। उस समय जनता पार्टी के नेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण यानि जेपी के जन्मदिन के लिए कई नेता पटना में इकट्ठा हुए। उसमें शामिल मुख्यमंत्री कर्पूरी बाबू का कुर्ता फटा हुआ था। ऐसे में चंद्रशेखर जी ने अपने अनूठे अंदाज में लोगों से कुछ पैसे दान करने की अपील की, ताकि कर्पूरी जी नया कुर्ता खरीद सकें। लेकिन कर्पूरी जी तो कर्पूरी जी थे। उन्होंने इसमें भी एक मिसाल कायम कर दी। उन्होंने पैसा तो स्वीकार कर लिया, लेकिन उसे मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिया।

सामाजिक न्याय तो जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के मन में रचा-बसा था। उनके राजनीतिक जीवन को एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रयासों के लिए जाना जाता है, जहाँ सभी लोगों तक संसाधनों का समान रूप से वितरण हो और सामाजिक हैसियत की परवाह किए बिना उन्हें अवसरों का लाभ मिले। उनके प्रयासों का उद्देश्य भारतीय समाज में पैठ बना चुकी कई असमानताओं को दूर करना भी था।

अपने आदर्शों के लिए कर्पूरी ठाकुर जी की प्रतिबद्धता ऐसी थी कि उस कालखंड में भी जब सब ओर काॅन्ग्रेस का राज था, उन्होंने काॅन्ग्रेस विरोधी लाइन पर चलने का फैसला किया। क्योंकि उन्हें काफी पहले ही इस बात का अंदाजा हो गया था कि काॅन्ग्रेस अपने बुनियादी सिद्धांतों से भटक गई है।

कर्पूरी ठाकुर जी की चुनावी यात्रा 1950 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में शुरू हुई और यहीं से वे राज्य के सदन में एक ताकतवर नेता के रूप में उभरे। वे श्रमिक वर्ग, मजदूर, छोटे किसानों और युवाओं के संघर्ष की सशक्त आवाज बने। शिक्षा एक ऐसा विषय था, जो कर्पूरी जी के हृदय के सबसे करीब था। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में गरीबों को शिक्षा मुहैया कराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। वे स्थानीय भाषाओं में शिक्षा देने के बहुत बड़े पैरोकार थे, ताकि गाँवों और छोटे शहरों के लोग भी अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ें। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बुजुर्ग नागरिकों के कल्याण के लिए भी कई अहम कदम उठाए।

Democracy, Debate और Discussion तो कर्पूरी जी के व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा था। लोकतंत्र के लिए उनका समर्पण भाव, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ही दिख गया था, जिसमें उन्होंने अपने-आप को झोंक दिया। उन्होंने देश पर जबरन थोपे गए आपातकाल का भी पुरजोर विरोध किया था। जेपी, डॉ. लोहिया और चरण सिंह जी जैसी विभूतियाँ भी उनसे काफी प्रभावित हुई थीं।

समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर जी ने एक ठोस कार्ययोजना बनाई थी। यह सही तरीके से आगे बढ़े, इसके लिए पूरा एक तंत्र तैयार किया था। यह उनके सबसे प्रमुख योगदानों में से एक है। उन्हें उम्मीद थी कि एक ना एक दिन इन वर्गों को भी वो प्रतिनिधित्व और अवसर जरूर दिए जाएँगे, जिनके वे हकदार थे। हालाँकि उनके इस कदम का काफी विरोध हुआ, लेकिन वे किसी भी दबाव के आगे झुके नहीं। उनके नेतृत्व में ऐसी नीतियों को लागू किया गया, जिनसे एक ऐसे समावेशी समाज की मजबूत नींव पड़ी, जहाँ किसी के जन्म से उसके भाग्य का निर्धारण नहीं होता हो। वे समाज के सबसे पिछड़े वर्ग से थे, लेकिन काम उन्होंने सभी वर्गों के लिए किया। उनमें किसी के प्रति रत्तीभर भी कड़वाहट नहीं थी और यही तो उन्हें महानता की श्रेणी में ले आता है।

हमारी सरकार निरंतर जननायक कर्पूरी ठाकुर जी से प्रेरणा लेते हुए काम कर रही है। यह हमारी नीतियों और योजनाओं में भी दिखाई देता है, जिससे देशभर में सकारात्मक बदलाव आया है। भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी त्रासदी यह रही थी कि कर्पूरी जी जैसे कुछ नेताओं को छोड़कर सामाजिक न्याय की बात बस एक राजनीतिक नारा बनकर रह गई थी। कर्पूरी जी के विजन से प्रेरित होकर हमने इसे एक प्रभावी गवर्नेंस मॉडल के रूप में लागू किया। मैं विश्वास और गर्व के साथ कह सकता हूँ कि भारत के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की उपलब्धि पर आज जननायक कर्पूरी जी जरूर गौरवान्वित होते। गरीबी से बाहर निकलने वालों में समाज के सबसे पिछड़े तबके के लोग सबसे ज्यादा हैं, जो आजादी के 70 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे।

हम आज सैचुरेशन के लिए प्रयास कर रहे हैं, ताकि प्रत्येक योजना का लाभ, शत प्रतिशत लाभार्थियों को मिले। इस दिशा में हमारे प्रयास सामाजिक न्याय के प्रति सरकार के संकल्प को दिखाते हैं। आज जब मुद्रा लोन से OBC, SC और ST समुदाय के लोग उद्यमी बन रहे हैं, तो यह कर्पूरी ठाकुर जी के आर्थिक स्वतंत्रता के सपनों को पूरा कर रहा है। इसी तरह यह हमारी सरकार है, जिसने SC, ST और OBC Reservation का दायरा बढ़ाया है। हमें ओबीसी आयोग (दुख की बात है कि काॅन्ग्रेस ने इसका विरोध किया था) की स्थापना करने का भी अवसर प्राप्त हुआ, जो कि कर्पूरी जी के दिखाए रास्ते पर काम कर रहा है। कुछ समय पहले शुरू की गई पीएम-विश्वकर्मा योजना भी देश में ओबीसी समुदाय के करोड़ों लोगों के लिए समृद्धि के नए रास्ते बनाएगी।

पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाले एक व्यक्ति के रूप में मुझे जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिला है। मेरे जैसे अनेकों लोगों के जीवन में कर्पूरी बाबू का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष योगदान रहा है। इसके लिए मैं उनका सदैव आभारी रहूँगा। दुर्भाग्यवश, हमने कर्पूरी ठाकुर जी को 64 वर्ष की आयु में ही खो दिया। हमने उन्हें तब खोया, जब देश को उनकी सबसे अधिक जरूरत थी। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जन-कल्याण के अपने कार्यों की वजह से करोड़ों देशवासियों के दिल और दिमाग में जीवित हैं। वे एक सच्चे जननायक थे।

(कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह विशेष लेख अपने ब्लाॅग पर लिखा है। बिहार के दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर को भारत सरकार ने मरणोपरांत भारत रत्न देने का निर्णय किया है)

4.5 अरब वर्ष की पृथ्वी, 2.5 अरब साल पुरानी ‘कृष्ण शिला’ से बने हैं रामलला; पानी का भी नहीं होगा असर: पहले दिन 5+ लाख भक्तों ने राम मंदिर में किए दर्शन

अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर में रामलला विराजमान होने के बाद श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। पहले ही दिन 5 लाख लोगों ने प्रभु के बाल स्वरूप के दर्शन किए और आज भी भीड़ लगी ही हुई है। इस उत्साह के बीच राम मंदिर में विराजमान हुए रामलला के नवनिर्मित विग्रह को लेकर कुछ जानकारी सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि 51 इंच ऊँची और 200 किलो के वजन वाली रामलला की मूर्ति कोई सामान्य पत्थर से नहीं बनी, बल्कि इसे बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ पत्थर 2.5 अरब साल पुराना ग्रेनाइट है। इसपर न पानी का असर पड़ता है और न ही कार्बन का। मौसम के तमाम बदलावों के बाद भी ये पत्थर वैसे का वैसा ही रहता है। इस चट्टान को ‘कृष्ण शिला’ भी कहा जाता है क्योंकि इसका रंग प्रभु कृष्ण के रंग जैसा है।

इस बारे में जानकारी नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रॉक मेकेनिक्स के डायरेक्टर एच एच वेंकटेश ने दी है। भारत में न्यूक्लियर पावर प्लांट्स और बाँधों के निर्माण के लिए पत्थरों एवं चट्टानों को चेक करने का कार्य यही संस्था करती है।

उन्होंने इस चट्टान के बारे में बात करते हुए कहा कि ये एक ग्रेनाइट पत्थर है। इस पर मौसम का कोई असर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर विस्फोट हुए थे तो उसी लावा के पिघलने से ग्रेनाइट पत्थर बने थे। ये पत्थर बेहद ठोस होते हैं। बदलते मौसम से इसपर कोई असर नहीं पड़ता।

वहीं विशेषज्ञों ने बताया कि ये पत्थर प्री क्रैम्ब्रियन काल का है, जिसकी शुरुआत 4 अरब साल पहले हुई थी यानी वैज्ञानिकों के अनुसार, ये पत्थर तब का है जब जीवन की शुरुआत हुई थी।

केंद्रीय विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी पिछले दिनों राम मंदिर को लेकर कहा था कि प्रभु का मंदिर ऐसे तकनीक से बन रहा है कि 1 हजार साल तक इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसके निर्माण में श्रेष्ठ तकनीक और उच्चतम क्वॉलिटी के पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मूर्ति के लिए पत्थर कर्नाटक के मैसुरु के जयपुरा होबली गाँव से लिया गया। ये जगह शानदार क्वालिटी के काले ग्रेनाइट पत्थरों के लिए जानी जाती है।

रामलला के दर्शन को पहले दिन आए 5 लाख लोग

इसी पत्थर से निर्मित रामलला की मूर्ति को देखने के लिए पहले दिन 5 लाख श्रद्धालु आए। इस दौरान भीड़ भाड़ रोकने के लिए करीबन 8000 पुलिस वाले वहाँ तैनात रहे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हेलीकॉप्टर पर बैठकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अपील की, “दर्शन के लिए न हड़बड़ाएँ। भीड़ नॉर्मल होने के बाद अयोध्या आएँ।”

सीएम ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात करके भीड़ को परिसर में संभालने की कोशिशों के बारे में जाना। स्थिति संभालने के लिए कई जगह श्रद्धालुओं को रोका गया। इससे पहले अयोध्या की सीमा सील करने की खबरें भी मीडिया में आई हैं।

कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न, बिहार में पहली गैर-कॉन्ग्रेसी सरकार के थे मुख्यमंत्री: PM मोदी बोले – वो समाजिक न्याय के पुरोधा, जन्म-शताब्दी पर यह निर्णय गौरवान्वित करने वाला

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न (मरणोपरांत) से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। पिछड़े वर्ग से आने वाले कर्पूरी ठाकुर बिहार के 11वें मुख्यमंत्री थे। वह दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। वह बिहार के पहले गैर कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री थे।

कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रसन्नता जताई है। उन्होंने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मुझे इस बात की बहुत प्रसन्नता हो रही है कि भारत सरकार ने समाजिक न्याय के पुरोधा महान जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने आगे लिखा “उनकी जन्म-शताब्दी के अवसर पर यह निर्णय देशवासियों को गौरवान्वित करने वाला है। पिछड़ों और वंचितों के उत्थान के लिए कर्पूरी जी की अटूट प्रतिबद्धता और दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी है। यह भारत रत्न न केवल उनके अतुलनीय योगदान का विनम्र सम्मान है, बल्कि इससे समाज में समरसता को और बढ़ावा मिलेगा।”

कर्पूरी ठाकुर पिछड़ी मानी जाने वाली नाई बिरादरी से आते थे। वह बिहार के पिछड़े वर्ग से आने वाले दूसरे मुख्यमंत्री थे। वह पहले 1970 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और सोशलिस्ट पार्टी से सम्बन्ध रखते थे। वह वर्ष 1977 में देश से आपातकाल हटने के बाद भी बिहार के मुख्यमंत्री बने।

1924 में जन्मे कर्पूरी ठाकुर स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उन्होंने सक्रिय तौर पर महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में भाग लिया था। उन्हें 26 महीने की जेल अंग्रेजी राज का विरोध करने के कारण काटनी पड़ी थी। वह 1952 से ही बिहार विधानसभा के सदस्य बन गए थे।

कर्पूरी ठाकुर ने मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार में आरक्षण लागू किया था जिसमें 12% आरक्षण अति पिछड़ों और 8% आरक्षण पिछड़ों के लिए दिया गया था। इसके बाद बिहार में सत्ता को लेकर मचे बवाल के कारण उनका मुख्यमंत्री पद चला गया था।

बिहार के मुख्यमंत्री रहने से पहले वह शिक्षा मंत्री भी रहे थे। इस दौरान उन्होंने एक अहम निर्णय लेते हुए कक्षा 10 तक अंग्रेजी की शिक्षा की अनिवार्यता हटा दी थी। इसके पीछे उनकी सोच थी कि इससे बच्चों की शिक्षा में बाधा पड़ती है।

‘अपवित्र हो गया है गर्भगृह, 11 दिन उपवास कर के ज़िंदा कैसे हैं PM मोदी?’: कॉन्ग्रेस नेता ने उठाए सवाल, महंत बोले – हमने 3 दिन कहा था, उन्होंने 11 दिन का कठिन व्रत रखा

देश के पूर्व पेट्रोलियम मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 दिवसीय उपवास पर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने इसे असमभव बताया है और राम मंदिर के गर्भगृह की पवित्रता पर भी टिप्पणी की है। उनका यह बयान अब सुर्ख़ियों में है।

वीरप्पा मोइली ने कहा, “मैं एक डॉक्टर के साथ सुबह की सैर कर रहा था। उन्होंने मुझे बताया कि कोई भी मानव 11 दिन उपवास करके जीवित नहीं रह सकता। अगर पीएम मोदी जीवित हैं तो यह चमत्कार है। इसीलिए मुझे इस विषय में शंका है।” उन्होंने राम मंदिर के गर्भ गृह की पवित्रता पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा, “अगर वह (प्रधानमंत्री मोदी) बिना उपवास किए राम मंदिर के गर्भगृह में घुसे हैं तो वह स्थान अपवित्र हो गया है और उस स्थान से शक्ति नहीं प्रवाहित होगी।”

वीरप्पा मोइली का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करने से पहले 11 दिन के उपवास के विषय में था। प्रधानमंत्री मोदी ने यम नियम के अंतर्गत यह कठिन उपवास रखा था। इस दौरान उन्होंने 11 दिन तक भोजन ना करने और केवल नारियल पानी पीने के नियम का पालन किया था। वह रात में सोते भी मात्र एक कम्बल के साथ ही थे।

प्रधानमंत्री मोदी के कठिन व्रत के विषय में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविन्द गिरी ने प्रधानमंत्री के इस कठिन व्रत और उनके पारण के विषय जानकारी दी थी। प्रधानमंत्री मोदी के कठिन व्रत के विषय में उन्होंने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद सार्वजनिक संबोधन में बताया था।

स्वामी गोविन्द गिरी ने बताया था कि उस समय उन्हें आश्चर्य हुआ, जब प्राण प्रतिष्ठा के लिए जरूरी नियम एवं व्रत के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे जानकारी माँगी। उन्होंने कहा कि 20 दिन पहले पीएम ने व्रत के लिए नियमावली माँगी थी। गोविंद गिरी ने कहा, “अपने आप को सिद्ध (व्रत के लिए) करने की भावना कहाँ होती है। यह भावना यहाँ (मोदी जी में) होती है।”

स्वामी गोविंद गिरी ने कहा, “हम लोगों ने महापुरुषों से परामर्श करके प्रधानमंत्री से कहा था कि आपको मात्र 3 दिन का उपवास करना होगा, लेकिन उन्होंने 11 दिन का उपवास किया। हमने 11 दिन एकभुक्त (अनुष्ठान से पहले अन्न खाने का विधान) कहने के लिए कहा था, उन्होंने अन्न का ही त्याग कर दिया।”

प्रधानमंत्री के कठिन व्रत के विषय में बताते हुए कहा कि उन्हें 3 दिन जमीन पर सोने की बात कही गई थी लेकिन वह इस कड़कड़ाती ठण्ड में 11 दिनों तक जमीन पर सोते रहे। वह इस दौरान भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के तप से तप की कमी हो गई। 

उन्होंने इस व्रत को तोड़ने के विषय में बताया, “पहले यह तय हुआ था प्रधानमंत्री मोदी का व्रत जल में शहद और नींबू की दो बूंदें डालकर व्रत खुलवाने का सोचा गया था। उन्होंने यहाँ आकर मुझे बताया कि राम मंदिर के चरणामृत से उनका व्रत खुलवाया जाए।” उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे खुद ही यह उनको पिलाने के लिए कहा जिससे उनके मन में माता का वात्सल्य जागृत हो गया। उनके मन में मातृत्व का भाव आ गया क्योंकि वह प्रधानमंत्री की माँ को बहुत अच्छे से जानते थे।

बजरंग बली के पोस्टर फाड़े, झंडों पर उल्टियाँ तक की… हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर रॉड लेकर कट्टर इस्लामी भीड़ का हमला, कहा – ‘देखेंगे तुम्हारे राम बचाने आते हैं कि नहीं’

सोमवार (22 जनवरी, 2024) को अयोध्या में राम मंदिर में हुई प्राण प्रतिष्ठा से भारत का प्रत्येक हिन्दू प्रसन्न है और अपने भगवान को उनके घर में वापस देख कर उसकी आँखों में आँसू भी हैं। हालाँकि, इस ख़ुशी के मौके पर इस्लामी कट्टरपंथियों को चैन नहीं आया और उन्होंने इस दिन भी हिंसा का रास्ता चुना। गुजरात के मेहसाना से लेकर महाराष्ट्र के सोलापुर तक से हिन्दुओं पर हमले की खबरें सामने आई हैं। ठाणे के मीरा रोड से भी हिंसा की सूचना सामने आई थी।

इससे जुड़ी और जानकारियाँ अब ऑपइंडिया सामने लाया है। मीरा रोड में इस्लामी कट्टरपंथियों ने यात्रा निकाल रहे हिन्दुओं पर लोहे की रॉड और हथियारों के साथ हमला किया। बताया जा रहा है कि जिन इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं पर हमला किया था, उन पर बुलडोजर कार्रवाई हुई है।

मीरा रोड में हुए हमले के विषय में अब यह जानकारी सामने आई है कि इस्लामी दंगाइयों ने हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए बजरंग बली की छवि वाले पोस्टर भी फाड़े थे, यह भी बताया गया कि इन झंडों पर इस्लामी कट्टरपन्थियों ने उलटी तक की। ऑपइंडिया ने अपनी जाँच में पता किया है कि इस मामले में पुलिस ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालाँकि, पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम नहीं बताए हैं।

ऑपइंडिया ने मीरा रोड हिंसा मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी भी हासिल की है। यह FIR इस हिंसा के पीड़ित विनोद जायसवाल ने दर्ज करवाई है। FIR से पता चला है कि 21 जनवरी की रात को 10:30 बजे यह घटना हुई। जायसवाल ने बताया है कि उनकी गाड़ी को 50-60 लोगों ने घेर लिया और हमला किया जबकि वह मीरा रोड पर जा रहे थे। उनकी गाड़ी पर लाठी-डंडों से हमला किया गया और इस पर लगा झंडा भी उखाड़ दिया।

FIR में उन्होंने बताया, “मैं अपनी कार चला रहा था जबकि मेरे दोस्त अपनी बाइक से चलते हुए मेरे साथ थे। हम उस दिन पूरे मुंबई में यात्रा निकाल रहे थे। जैसे ही हम मीरा रोड इलाके में पहुँचे, हम ट्रैफिक में फँस गए। इसके बाद हमने यू-टर्न लिया और भायंदर रोड की ओर बढ़ गए।

आगे उन्होंने बताया, “यहाँ सड़क जाम थी इसलिए हमने इसके बाद नयानगर की शिवार गार्डन रोड से जाने का फैसला किया। यहीं पर एक लड़के ने अचानक कार रोकी और धमकी देने लगे। उन्होंने धमकी देते कहा ‘हम तुम्हें दिखाएँगे कि अब हम कौन हैं।’ उसने कहा – देखेंगे तुम्हारे राम तुम्हें बचाने आते हैं या नहीं। इसके तुरंत बाद लगभग 50-60 लोग यहाँ पर आ गए और रॉड व लाठियों से हमला करना शुरू कर दिया।”

आगे उन्होंने लिखा, “इन लोगों ने कार के बोनट पर भगवान हनुमान का पोस्टर देखा और उस पर उल्टी कर दी। उन्होंने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए, मेरे सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया और मेरी हत्या करने की कोशिश की। इससे हमारी हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँची है। उन्होंने मेरे साथ घूमने आई महिलाओं और बच्चों पर तक पत्थर फेंके।”

इस मामले में धारा 307 (हत्या का प्रयास), 341 (किसी को जबरदस्ती रोकना), 295ए (धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाना), 153ए (दो समूहों के बीच लड़ाई करवाना) के तहत दर्ज की गई है। इस मामले में धारा 141, 143, 147, 149 और 427 धाराएँ जोड़ी गई हैं।

इस इस्लामी हमले के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें देखा जा सकता है कि इस्लामी कट्टरपंथी कारों पर हमला करते हुए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगा रहे हैं। इसी के साथ हिन्दुओं पर लाठी डंडे से वार करते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों को देखा जा सकता है। महिलाओं पर हमले की भी वीडियो सामने आई हैं।

बताया जा रहा है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के एक दिन बाद, हिंदुओं ने भी इस्लामी दंगाइयों के हमले का प्रतिकार किया। मीरा रोड क्षेत्र में हिंदू बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए और दंगाइयों के पथराव का जवाब दिया। यह वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विट्टर) पर एक व्यक्ति रौशन सिन्हा द्वारा साझा किया गया था जिसमें हिन्दू दंगाइयों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

ऑपइंडिया ने इस्लामियों के हमले के विषय में FIR करवाने वाले विनोद जायसवाल से भी बात करने की कोशिश की लेकिन वह चोट के कारण अनुपलब्ध थे। उन्हें भीमसेन जोशी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। यहाँ उनका इलाज हो रहा है।

पुलिस ने ऑपइंडिया को बताया है कि इस मामले में 13 लोगों को अभी तक गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनकी पहचान बताने से इनकार किया, उन्होंने कहा, “यह अति-संवेदनशील मामला है। नाम उजागर करने से मजहबी हिंसा हो सकती है। मैं अन्य कोई जानकारी नहीं दे सकता। अभी माहौल शांत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।” यहाँ पर प्रदर्शन करने वाले सकल हिन्दू समाज नाम के संगठन के लोगों ने बताया है कि गिरफ्तार किए गए लोग मुस्लिम ही हैं और कुछ हिन्दू भी गिरफ्तार किए गए थे लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया था।

इससे पहले नया नगर, जहाँ यह हिंसा हुई है, वहाँ से हिन्दुओं को भड़काते हुए वायरल हुआ था। इसमें एक शख्स कहता है कि नयानगर इलाके में अगर हिन्दू आते हैं तो इसके भीषण परिणाम होंगे क्योंकि यहाँ मुस्लिम आबादी ज्यादा है।

वीडियो में शख्स कहता है, “भाई लोग, मुस्लिमों को उकसाना बंद करो। क्यों सोते हुए शेर को जगा रहे हो। मुंबई को यूपी समझ रखा है क्या? मुंबई किसी के बाप की जागीर नहीं है। मुंबई खुले साँड़ों का इलाका है। खुले साँड़ बम्बई में घूम रहे हो। किसलिए जो इंसान सोया है उसको जगा रहे हो। नयानगर में आने की क्या जरूरत है? तुमलोग का राम इधर नयानगर में है? यहाँ मुसलमान लोग रहते हैं, यहाँ आकर जय श्रीराम के नारे लगा रहे, उकसाने की कोशिश कर रहे, क्या हासिल हुआ इससे? यह विवादित बयान देने वाला गिरफ्तार कर लिया गया है।

मुंबई में अभी भी स्थिति चिंताजनक है। इस्लामी कट्टरपंथी लगातार हिन्दुओं पर हमला कर रहे हैं। यहाँ हिंसा ना भड़के इसके लिए यहाँ भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इलाके में RAF भी तैनात की गई है। यहाँ पर हिन्दू समाज विरोध में रैली भी आयोजित कर रहा है।

‘भारत कोई पश्चिमी देश नहीं जो लिव-इन सामान्य हो’: इलाहाबाद HC की टिप्पणी, जज शमीम अहमद बोले – ‘अपनी संस्कृति व परंपराओं पर गर्व करें’

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत कोई पश्चिमी देश नहीं है जहाँ लिव इन रिलेशनशिप सामान्य बात हों। हाईकोर्ट ने कहा है भारत में लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को मानना चाहिए और इस पर गर्व करना चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई करते हुई की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने एक व्यक्ति आशीष कुमार ने याचिका डाली थी कि एक महिला, जिससे उसका 2011 से प्रेम सम्बन्ध है, उसका परिवार उसे उससे मिलने नहीं दे रहा है। उसने इस संबंध ने याचिकाकर्ता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका डाली थी। उसका कहना था कि महिला को उसके परिवार वालों ने जबरन कैद कर रखा है।

इस मामले की सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शमीम अहमद ने कहा, “अदालत का मानना है कि हम एक पश्चिमी देश नहीं हैं जहाँ एक लड़की-लड़के का लिव इन रिलेशनशिप में रहना सामान्य बात हो। हम एक ऐसे देश हैं जहाँ लोग अपनी परंपराओं और संस्कृति में विश्वास करते हैं और उस पर गर्वित हैं, ऐसे में हमें भी यही करना चाहिए।”

आशीष कुमार ने कोर्ट के समक्ष याचिका के साथ एक पत्र भी रखा था जो कि उसने दावा किया था कि लड़की ने लिखा है। याचिकाकर्ता आशीष कुमार ने कोर्ट के सामने कुछ तस्वीरें भी रखी थीं और बताया था कि वह इस लड़की के 2011 से प्रेम संबंध में हैं। हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि यह याचिका मात्र लड़की और उसके परिवार की छवि खराब करने के उद्देश्य से डाली गई है और इससे याचिकाकर्ता उन पर दबाव डाल कर अपने मन का निर्णय करवाना चाहता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, “अदालत के सामने कोई कारण नहीं है कि वह इस तरह की याचिका की सुनवाई करे जो कि किसी लड़की और उसके परिवार वालों की छवि खराब करने के उद्देश्य से डाली गई है। अदालत अगर ऐसी याचिका को सुनता है तो इससे लड़की और उसके परिवार की छवि धूमिल होगी और उन्हें भविष्य में उसके लिए दूल्हा ढूँढने में समस्या होगी।”

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि यदि वह और लड़की जिसके विषय में याचिका डाली गई है, वह 13 साल से एक दूसरे के साथ प्रेम सम्बन्ध में हैं तो विवाह क्यों नहीं किया। कोर्ट ने इसी के साथ ही याचिका को खारिज कर दी और याचिकाकर्ता पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया।

एक अयोध्या अपने मन में लेकर लौटा हूँ, प्रभु श्रीराम ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की प्रेरणाः राष्ट्रपति को PM मोदी का पत्र

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य यजमान की भूमिका में थे। अब प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर अपने इस अनुभव के बारे में उन्हें बताया है।

प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से ठीक पहले राष्ट्रपति ने भी प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा का अवसर मिलने पर पीएम को सौभाग्यशाली बताया था। प्रधानमंत्री ने इसके जवाब में लिखी गई अपनी चिट्ठी एक्स/ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा है, “दो दिन पूर्व मुझे आदरणीया राष्ट्रपति जी का एक बहुत ही प्रेरणादायी पत्र मिला था। मैंने आज अपनी कृतज्ञता पत्र के माध्यम से प्रकट करने का प्रयास किया है।”

नीचे आप प्रधानमंत्री द्वारा लिखे गए पत्र को हूबहू उनके ही शब्दों में पढ़िए;

आदरणीया राष्ट्रपति महोदया,

अयोध्या धाम में अपने जीवन के सबसे अविस्मरणीय क्षणों का साक्षी बनकर लौटने के बाद, मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूँ। मैं, एक अयोध्या अपने मन में भी लेकर लौटा हूँ। एक ऐसी अयोध्या जो कभी मुझसे दूर नहीं हो सकती।

अयोध्या जाने से एक दिन पूर्व मुझे आपका पत्र मिला था। आपकी शुभकामनाओं और स्नेह का मैं बहुत-बहुत आभारी हूँ। आपके पत्र के हर शब्द ने आपके करुणामयी स्वभाव और प्राण-प्रतिष्ठा के आयोजन पर आपकी असीम प्रसन्नता को व्यक्त किया।

जिस समय मुझे आपका पत्र मिला था, मैं एक अलग ही भावयात्रा में था। आपके पत्र ने मुझे, मेरे मन की इन भावनाओं को सँभालने में, उनसे सामंजस्य बिठाने में अपार सहयोग और संबल दिया।

मैंने एक तीर्थयात्री के रूप में अयोध्या धाम की यात्रा की। जिस पवित्र भूमि पर आस्था और इतिहास का ऐसा संगम हुआ हो, वहाँ जाकर मेरा मन अनेक भावनाओं से विह्वल हो गया।

ऐसे ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना एक सौभाग्य भी है और एक दायित्व भी है। आप ने मेरे 11 दिन के व्रत-अनुष्ठान और उससे जुड़े यम-नियमों के विषय में भी चर्चा की थी। हमारा देश ऐसे अनगिनत लोगों का साक्षी रहा है जिन्होंने शताब्दियों तक अनेक संकल्प व्रत किए जिससे कि रामलला पुनः अपने जन्मस्थान पर विराज सकें।

सदियों तक चले इन व्रतों की पूर्णाहुति का संवाहक बनना, मेरे लिए बहुत भावुक क्षण था और इसे में अपना सौभाग्य मानता हूँ।

140 करोड़ देशवासियों के साथ रामलला के साक्षात दर्शन, उनके रूप से साक्षात्कार और उनके स्वागत का वो क्षण अप्रतिम था। वो क्षण प्रभु श्रीराम और भारत के लोगों के आशीर्वाद से ही संभव हुआ और मैं इसके लिए सदा कृतज्ञ रहूँगा।

जैसा आपने कहा था, हम ना सिर्फ प्रभु श्रीराम को पूजते हैं बल्कि जीवन के हर पहलू में और विशेषकर सामाजिक जीवन में उनसे प्रेरणा लेते हैं।

आपने पत्र में ‘पीएम जनमन’ और जनजातीय समाज में भी अति पिछड़ों के सशक्तिकरण पर इस योजना के प्रभाव की चर्चा की। आदिवासी समाज से जुड़े होने के कारण आपसे ज्यादा बेहतर तरीके से ये कौन समझ सकता है? हमारी संस्कृति ने हमेशा, हमें समाज के सबसे वंचित वर्ग के लिए काम करने की सीख दी है। पीएम जनमन जैसे कई अभियान आज देशवासियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहे हैं।

गरीब कल्याण के इन कार्यों के लिए, गरीबों के सशक्तिकरण के इन अभियानों के लिए प्रभु श्रीराम के विचार हमें निरंतर ऊर्जा देते हैं।

ये प्रभु श्रीराम ही तो हैं, जिन्होंने अपने जीवन के हर अध्याय में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की प्रेरणा दी। इसी मंत्र का आज सर्वत्र परिणाम दिख रहा है। पिछले एक दशक में देश करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफल हुआ है।

प्रभु श्रीराम के शाश्वत विचार, भारत के गौरवशाली भविष्य का आधार हैं। इन विचारों की शक्ति ही, हम सभी देशवासियों के लिए वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। श्रीराम का भव्य मंदिर हमें सफलता और विकास के नव प्रतिमान गढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

आपके प्रेरणादायी शब्दों के लिए पुनः आभार। मुझे विश्वास है कि देश इसी तरह आपके मार्गदर्शन के साथ प्रगति और कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता रहेगा।

सादर
आपका,
नरेन्द
(नरेन्द्र मोदी)

हर साल राम मंदिर में 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान, चल रहे ₹85000 करोड़ के विकास कार्य: अमेरिका से आई रिपोर्ट, बताया – अयोध्या में खड़ी हो रही पूरी की पूरी इंडस्ट्री

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही यहाँ का विकास कार्य भी तेज़ी से हो रहे हैं। भक्तों की भारी भीड़ अभी से अयोध्या में दर्शन के लिए पहुँच रही है। अयोध्या भारत के हवाई नक़्शे पर भी आ चुका है। अब एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इन बदलावों के बाद अब अयोध्या में हर साल लगभग 5 करोड़ श्रद्धालु आएँगे।

अयोध्या के विकास और आने वाले सुनहरे भविष्य के विषय में अमेरिकी फर्म जेफरीस ने यह रिपोर्ट जारी की है। जेफरीस ने कहा है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद 5 करोड़ श्रद्धालुओं के हर साल यहाँ आने की सम्भावना है। इन श्रद्धालुओं के यहाँ आने के पीछे अयोध्या में किए जा रहे समावेशी विकास कार्य हैं।

रिपोर्ट का कहना है कि अयोध्या में लगभग ₹85,000 करोड़ के विकास प्रोजेक्ट वर्तमान में चल रहे हैं। इसके अंतर्गत अयोध्या को बाकी शहरों से जोड़ने वाली सड़कें, नए एयरपोर्ट और घाटों का विकास लेकर शहर के अंदर का सौंदर्यीकरण शामिल है। रिपोर्ट का कहना है कि इसके प्रभाव से अयोध्या में नए होटलों समेत पूरी एक इंडस्ट्री खड़ी हो रही है।

रिपोर्ट का कहना है कि अयोध्या में इन सब निर्माण गतिविधियों की वजह से वहाँ सीमेंट फैक्ट्रियों की संख्या भी बढ़ेगी। इसके अनुसार धार्मिक पर्यटन अभी भी भारत में पर्यटन का सबसे बड़ा स्रोत है। अयोध्या के ही विकास से भारत की जीडीपी भी में बड़ा फर्क पड़ेगा।

बताया गया है कि अगले 10 वर्षों (2033) तक भारत की GDP में टूरिज्म क्षेत्र का योगदान 443 बिलियन डॉलर (लगभग ₹37 लाख करोड़) होगा। यह कोरोना काल से पहले 193 बिलियन डॉलर (लगभग ₹16 लाख करोड़) था। ऐसे में दस वर्षों में काफी बढ़त की सम्भावना नजर आ रही है।

अयोध्या में आने वाले श्रद्धालु यहाँ आकर रुके और बाकी जगह भी घूमें इसके लिए भी प्रयास जारी हैं। यहाँ अभी 17 होटल हैं और 73 और बनने हैं। इनमें से लगभग 40 का निर्माण कार्य जारी है। भारत की बड़ी होटल चेन पहले ही अयोध्या में आकर अपने होटल स्थापित करने के प्लान बना चुकी हैं।

‘भारतीय स्टेट बैंक’ (SBI) ने भी इस सम्बन्ध में एक रिपोर्ट दी है। उसने बताया है कि मंदिर के कारण बढ़ी हुई गतिविधियों से उत्तर प्रदेश सरकार को इस वित्त वर्ष में लगभग ₹25,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इससे उत्तर प्रदेश सरकार को एक साल के भीतर ₹4 लाख करोड़ का कर संग्रह के ऊपर का आँकड़ा छूने में सहायता मिलेगा।

‘जो काफिर हैं वो डरते हैं, मरते हैं’: CM ममता बनर्जी ने मुस्लिमों को दे दी ‘अल्लाह की कसम’, कहा – BJP की मदद करोगे तो कभी माफ़ नहीं करेंगे

जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की, उसी दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भड़काऊ भाषण देकर एक और विवाद खड़ा कर दिया।

पार्क सर्कस मैदान में सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने उन लोगों को कड़ी चेतावनी दी, जो बीजेपी का समर्थन करते हैं या उसे वोट देते हैं। ममता बनर्जी ने कहा, “एक बात याद रखना, बीजेपी की मदद मत करो, बीजेपी का अगर तुम लोग मदद करोगे कोई, तो अल्लाह की कसम, आप लोगों को कोई माफ नहीं करेगा, हम तो माफ नहीं करेंगे।” ‘सर्व धर्म समभाव’ रैली के दौरान सर्कस मैदान में अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा, “जो काफिर हैं, वो डरते हैं, वो मरते हैं, जो लड़ते हैं वो जिंदा रहते हैं, वो बसते हैं, वो काम करते हैं।

सोशल नेटवर्किग साइट ‘एक्स’ पर अंकुर सिंह नाम के यूजर ने उनके इस विवादास्पद वीडियो को शेयर किया और लोगों से कहा – “जो काफिर हैं, वो डरते हैं, जो लड़ते हैं, वो जीतते हैं’ ममता बनर्जी कैसे मुस्लिमों को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद भड़का रही हैं।”

बता दें कि ‘काफिर’ एक अपमानजनक व्यंग है, जो मुस्लिमों द्वारा ऐसे किसी भी व्यक्ति को संबोधित किया जाता है, जो इस्लाम में विश्वास नहीं करता या बहुदेववादी और मूर्तिपूजक है। काफिर का मतलब ‘मारने योग्य’ भी होता है।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है कि पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने हिन्दुओं को लेकर अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया है। मई 2022 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह ईद के मौके पर भीड़ को संबोधित कर रही थीं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कहा जो सुनने में ‘काफ़िर’ जैसा लगा। उन्होंने कहा, “उन्हें वही करने दीजिए जो वे चाहते हैं। हम डरे हुए नहीं हैं। हम कायर नहीं हैं। हम ‘काफ़िर’ नहीं हैं। हम संघर्ष करते हैं। हम लड़ना जानते हैं। हम उनके खिलाफ लड़ेंगे। हम उन्हें ख़त्म कर देंगे।”

वीडियो वायरल होते ही नेटीजेंस ने आपत्ति जताई। कई लोगों ने एक मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक संबोधन में इस शब्द का इस्तेमाल करने पर चिंता व्यक्त की। दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी, जो ज्यादातर समय बांग्ला में बोलना पसंद करती हैं, ने हिंदी में बयान दिया, जिससे इन अटकलों को भी बल मिला कि वह कथित तौर पर उन लोगों को संदेश देना चाहती थीं जो बांग्ला नहीं बोलते।

कई नेटिज़न्स ने इस ओर ध्यान दिलाया है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पश्चिम बंगाल की सीएम ने अपने संबोधन के दौरान क्या कहा, लेकिन उनका विवादास्पद बयान देने का इतिहास रहा है। यह मत भूलिए कि राज्य चुनावों के दौरान, उन्होंने ‘खेला होबे’ ​​नारे का इस्तेमाल किया था, जिसे ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ से जोड़ा जाता है। ऐसे इतिहास को देखते हुए, किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर उन्होंने ‘काफिर‘ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा, “हम कायर नहीं हैं और लड़ना जानते हैं।”