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कॉफी हाउस के नाम पर पाकिस्तान ने पौराणिक शारदा पीठ की दीवार तोड़ी, हिंगलाज माता के मंदिर को भी कट्टरपंथियों ने किया ध्वस्त

पाकिस्तान में लगातार एक के बाद एक हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है। पाकिस्तानी सेना ने Pok स्थित पौराणिक धर्मस्थल शारदा पीठ की जमीन पर वहाँ कॉफी हाउस बनाकर जबरन कब्जा कर लिया है। वहीं कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ हिंगलाज माता मंदिर को भी नुकसान पहुँचाया गया है।

दरअसल, थारपारकर जिले के अधिकारियों ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मीठी शहर में स्थित इस मंदिर को तोड़ने के लिए एक अदालती आदेश का हवाला दिया। बताया जा रहा है कि इसे ध्वस्त करने में पाकिस्तान का पूरा प्रशासन शामिल रहा। जबकि यह मंदिर यूनेस्को (UNESCO) की संरक्षण लिस्ट में आता है। 

हालाँकि, पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों को तोड़ना या हिंदुओं पर हमले की यह पहली घटना नहीं है लेकिन इस बार कोर्ट के आदेश का सहारा लेकर जिस तरह से हिंगलाज माता मंदिर को ध्वस्त किया गया है। यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की श्रृंखला में एक और डराने वाली घटना है। 

CNN न्यूज-18 की रिपोर्ट केअनुसार, एलओसी के पास हिंदुओं के जिस धार्मिक स्थल शारदा पीठ मंदिर को तोड़ा गया। उसे सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुरक्षा के आदेश के बावजूद तोड़ा गया। दरअसल, यहाँ पाकिस्तानी सेना द्वारा मंदिर के करीब एक कॉफी हाऊस बनाया जा रहा है, जिसका उद्घाटन इसी साल नवंबर में होना है। ऐसे में यहाँ पाकिस्तानी सेना ने शारदा पीठ की जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है।

हालाँकि, यहाँ के स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सेना की इस तानाशाही के खिलाफ विरोध भी किया और कब्जा हटाने पर भी जोर दिया, लेकिन वे नहीं माने और उन्होंने स्थानीय सीविल सोसाइटी के सदस्यों को ही उल्टा प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बता दें कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें टार्गेट करके हिंसा, हत्या और उनकी जमीनों को कब्जा तक शामिल है। 

पाकिस्तान में पहले भी तोड़े गए हैं कई हिन्दू मंदिर 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूनेस्को साइट होने के बावजूद भी जब शारदा पीठ ध्वस्त होने से नहीं बच पाया तो यह विश्व के लिए चिंता का विषय है। इससे पहले जुलाई में भी पाकिस्तान में एक मंदिर को तोड़ दिया गया था। तब कराची में मरीमाता का मंदिर जमींदोज कर दिया गया था। इस मंदिर को तब ध्वस्त किया गया था जब पूरे इलाके में लाइट नहीं थी। बाहरी दीवार और गेट को छोड़कर अंदर का पूरा ढाँचा ही ढहा  दिया गया था।

बता दें पाकिस्तान में मंदिरों का यह विध्वंस धरोहरों के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के प्रयासों का खंडन करता है और क्षेत्र में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की रक्षा के बारे में सवाल उठाता है। ये घटनाएँ पाकिस्तान जैसे देश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे उत्पीड़न को उजागर करती हैं।

हमास ने 13 बंधकों को रिहा किया, इनमें अमेरिकी नागरिक नहीं: इजरायल के मंत्री बोले- 4 दिन का युद्धविराम खत्म होने पर शुरू होगी सैन्य कार्रवाई

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को इजरायल में बंधक बनाए गए लगभग 240 लोगों में से 13 बंधकों को रिहा कर दिया। ये बंधक मिस्र में रेड क्रॉस को सुपुर्द किया गया है। वहाँ से वे इजरायल लौट आए हैं। बता दें कि बंधक की रिहाई के लिए इजरायल ने 4 दिनों के लिए युद्धविराम की घोषणा की है।

इजरायल के अधिकारियों का कहना है कि रिहा किए गए बंधकों की सूची इजरायल द्वारा जारी किए गए बंधकों की सूची से मेल खा रही है। बंधकों का हस्तांतरण दक्षिणी गाजा पट्टी के खान यूनिस में किया गया। आईडीएफ के अनुसार, 13 बंधकों के स्वागत के लिए अपनी तैयारी की गई थी।

मिस्र के संचार मंत्रालय के अनुसार, रिहा किए गए 13 बंधकों के अलावा हमास ने 12 थाई लोगों को भी रिहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हमास और थाईलैंड सरकार के बीच बातचीत इज़रायल के साथ बातचीत से अलग है और इसकी मध्यस्थता ईरान ने की है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने उनकी रिहाई की पुष्टि की है। इसके पहले कहा गया था कि हमास 23 थाई बंधकों को बिना शर्त रिहा करेगा।

इजरायल की मीडिया के अनुसार, रिहा किए गए बंधकों को पहले अस्पताल ले जाया जाएगा, जहाँ वे अपने परिजनों से भी मिल सकेंगे। इसके लिए इजरायल की सरकार ने एंबुलेंस और अस्पतालों में अपनी तैयारी पूरी कर ली है। बंधकों की रिहाई से संबंधित सारा ऑपरेशन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मॉनिटर कर रहे हैं।

उधर, अमेरिका की मीडिया एजेंसी सीएनएन ने एक अनाम अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि गाजा में हमास द्वारा बंधक बनाए गए अमेरिकी रिहा किए जाने वाले बंधकों की सूची में नहीं हैं। हालाँकि, अमेरिका को उम्मीद है कि चार दिवसीय युद्धविराम समझौते के तहत रिहाई के लिए निर्धारित लगभग 50 बंधकों में अमेरिकी भी शामिल होंगे।

इजरायल के युद्ध कैबिनेट मंत्री बेनी गैंट्ज़ ने कहा कि युद्धविराम के चार दिन पूरे होने के बाद गाजा पर कार्रवाई फिर से शुरू होगी। उन्होंने कहा, “मैं सभी बंधकों के परिवारों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हम रूकेंगे नहीं। हम बंधकों को वापस लाने और निरोध बहाल करने के लिए गाजा में सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करेंगे।”

उधर, हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हानियेह ने एक छोटा सा वीडियो जारी कर यरूशलम को अपनी राजधानी बनाने का फिर से दावा किया है। इस्लामइल ने कहा कि हमास संघर्ष विराम की शर्तों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, जब तक कि इज़रायल भी ऐसा करता है।

हनियेह ने आगे कहा, “हमास गाजा पर इजरायली हमले को रोकने, कैदियों की अदला-बदली को पूरा करने, गाजा पट्टी पर इजरायली नाकाबंदी को समाप्त करने और अल-अक्सा मस्जिद पर ‘हमले’ के अलावा फिलिस्तीनी लोगों को जागरूक करने के अपने प्रयास को आगे बढ़ाएगा। यरूशलेम को अपनी राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करेगा।”

बता दें कि इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में चौतरफा हमला करके 1400 अधिक लोगों की नृशंस हत्या कर दी थी। इनमें महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। हमास के आतंकियों ने महिलाओं के साथ रेप जैसी घृणित काम किया था और कुछ का गला भी रे दिया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा पर हवाई और थल कार्रवाई शुरू कर दी थी।

डीपफेक पर एक्शन में मोदी सरकार: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निगरानी के लिए स्पेशल ऑफिसर नियुक्त, लोगों को FIR दर्ज कराने में भी करेगा मदद

पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीपफेक पर चिंता जताई थी। इसके बाद IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि डीपफेक को लेकर मोदी सरकार गंभीर है और इसको लेकर 10 दिनों में कानून बनाएगी। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि डीपफेक की निगरानी के लिए एक अधिकारी को नियुक्त किया गया है और यह अधिकारी इससे संबंधित मामलों में FIR दर्ज कराने में आम लोगों की मदद करेगा।

डीपफेक को लेकर राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को कहा, “आज से भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय आईटी एक्ट के रूल 7 के तहत एक अधिकारी को नामित करेगा। रूल 7 अफसर एक ऐसा व्यक्ति होगा, जो एक ऐसा मंच तैयार करेगा, जहाँ नागरिकों के लिए प्लेटफार्मों द्वारा कानून के उल्लंघन की रिपोर्ट भारत सरकार के ध्यान में लाना बहुत आसान होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “रूल 7 अफसर उस डिजिटल प्लेटफॉर्म की जानकारी लेंगे और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देंगे। इस तरह हम नागरिकों के लिए कानून के उल्लंघन की रिपोर्ट करना बहुत सरल बना देंगे। डीपफेक के अलावा भारत में इंटरनेट पर प्रतिबंधित बाल यौन शोषण से संबंधी सामग्री सहित कई अन्य श्रेणियाँ भी शामिल हैं,​ जिनको लेकर लोग रूल 7 अफसर से शिकायत कर सकेंगे।”

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर कहा कि इस मामले में मध्यस्थ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और यदि वे बताते हैं कि सामग्री कहाँ से उत्पन्न हुई है तो उस व्यक्ति या इकाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी, जिसने सामग्री पोस्ट की है। उन्होंने कहा कि सभी मीडिया प्लेटफॉर्म ने इस नियम को मानने की स्वीकृति दी है।

डीपफेक को लेकर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सभी महत्वपूर्ण इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों के साथ एक बैठक की थी। इससे पहले राजीव चंद्रशेखर ने कहा था कि केंद्र सरकार ने 24 नवंबर को गूगल, फेसबुक, यूट्यूब सहित महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्लेटफार्मों को तलब किया है। इन सभी को चेतावनी दी गई है कि अगर वे अपनी साइट से डीपफेक कॉन्टेंट नहीं हटाते हैं तो उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इसके पहले आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव का कहना है कि सरकार अगले 10 दिन के अंदर इसको लेकर कानून लाएगी। वैष्णव ने डीपफेक पर बढ़ती चिंताओं पर कहा था कि इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार नया क़ानून लाएगी या पुराने क़ानून में संशोधन करेगी। उन्होंने ऐसे वीडियो बनाने वालों पर कार्रवाई करने की भी बात कही थी।

वैष्णव ने कहा था, “सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से यह अपील की गई है कि वह अपने तकनीक का उपयोग करके डीपफेक पर नियंत्रण करें।” उन्होंने कहा कि डीपफेक सोशल मीडिया के जरिए तेजी से फैलते हैं और इनकी जाँच भी नहीं हो पाती है। उन्होंने समाज और लोकतंत्र में विश्वास को बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों पर जल्दी एक्शन लेने की आवश्यकता बताई।

चीन और यूरोपीय यूनियन में कानून

बता दें कि डीपफेक भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लिए चुनौती पैदा की है। इससे निपटने के लिए भारत ही नहीं, बल्कि यूरोपीय देश भी कानून बनाने की तैयारी कर रहे हैं। चीन ने तो इसको लेकर कानून जनवरी 2023 से लागू भी कर दिया है। वहीं, यूरोपीय यूनियन इसको लेकर तैयारी कर रहा है।

चीन ने बनाए गए नियम में कहा गया है कि अगर डीपफेक तकनीक से कोई वीडियो बनाया जाता है तो जिसका वीडियो है उसकी अनुमति लेनी जरूरी होगा। अगर कोई डीपफेक वीडियो बनाता है तो उसे बताना होगा कि कंटेंट में इस्तेमाल हुए फोटो या वीडियो से छेड़़छाड़ की गई है। इसको लेकर डिस्क्लेमर लगाना होगा।

वहीं, किसी भी तरह की फेक खबर के उद्देश्य से डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। नियमों को नहीं मानने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसकी निगरानी चीन का सायबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन करता है। चीन में यह कानून 10 जनवरी 2023 से प्रभावी है।

डीपफेक को लेकर यूरोपीय यूनियन ने भी कानून का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों से ऐसे कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए कहा जाएगा। उन्हें ऐसी जानकारियाँ हटाने के लिए कहा जाएगा, जो भ्रमित करने का काम कर रही हैं। अगर ये प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इजरायल ने भारत सरकार से की संजय राउत की शिकायत, पत्र लिखकर कहा- उन्हें बताए हम आहत हुए: उद्धव के MP ने यहूदियों के नरसंहार को ठहराया था जायज

हाल ही में शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने हिटलर द्वारा यहूदियों के होलोकॉस्ट अर्थात नरसंहार को जायज ठहराया था। वहीं अब इस मामले में इजरायली दूतावास ने विदेश मंत्रालय और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर शिवसेना नेता संजय राउत की ‘यहूदी विरोधी’ पोस्ट के बारे में शिकायत की है। 

द प्रिंट की खबर के अनुसार, इस मामले में इजरायल ने भारत सरकार से यह अपील की है कि शिवसेना सांसद को बताया जाए कि उनके यहूदी नरसंहार को जायज ठहराने वाले पोस्ट ने उस देश को किस तरह आहत किया है जो हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। 

इस मामले की जानकारी देते हुए पत्रकार आदित्य राज कौल ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “नई दिल्ली में इजरायली दूतावास ने यहूदी समुदाय के खिलाफ नरसंहार को उचित ठहराने वाली यहूदी विरोधी टिप्पणियों के लिए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के खिलाफ विदेश मंत्रालय को कड़े शब्दों में एक वर्बल नोट और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा है।”

बता दें कि यह मामला दरअसल, 14 नवंबर, 2023 का है। उस दिन शिव सेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अपने एक्स हैंडल से यहूदियों के खिलाफ हिटलर के नरसंहार को उचित ठहराते हुए एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने एक्स हैंडल ‘आर्टिकल19 इंडिया’ की एक पोस्ट शेयर की थी जिसमें समय से पहले जन्मे बच्चों का एक वीडियो शेयर किया गया था और यह दावा किया गया था कि इजरायली सशस्त्र बलों ने इन शिशुओं के इनक्यूबेटर की बिजली काट दी है।

वहीं संजय राउत ने अपने पोस्ट में कहा था कि यहूदियों को हिटलर ने ऐसे ही कार्यों के लिए मार डाला था। उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए कमेंट में यह लिखा था, ”हिटलर को यहूदी समुदाय से इतनी नफरत क्यों थी? क्या यह अब समझ में आ रहा है?”

बता दें कि संजय राउत ने अपने पोस्ट में कहा कि हिटलर ने यहूदियों को नरसंहार में मार डाला क्योंकि उन्होंने ऐसे कृत्य किए थे। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर द्वारा यहूदियों के नरसंहार को उचित ठहराया। हिटलर ने होलोकॉस्ट में 60 लाख से अधिक यहूदियों की जान ले ली थी, जिसमें उन्हें गैस चैंबर में बंद करके मार दिया गया। हालाँकि, इस पोस्ट के बाद विवाद बढ़ने पर संजय राउत ने पोस्ट हटा दिया था लेकिन तब तक इज़रायली अधिकारियों ने स्क्रीनशॉट ले लिया था। 

गौरतलब है कि आर्टिकल 19 इंडिया ने अपने पोस्ट में लिखा था, ”अल-शिफा अस्पताल में समय से पहले पैदा हुए बच्चे  चीख रहे हैं। जिस इनक्यूबेटर में उन्हें रखा गया था उसकी बिजली इजरायल ने काट दी है। सशस्त्र बलों ने अस्पताल को चारों तरफ से घेर लिया है। अस्पताल के अंदर किसी भी खाद्य पदार्थ, दूध या पानी की अनुमति नहीं है।” पोस्ट में एक वीडियो भी था जिसमें दावा किया गया कि यह अल शिफ़ा अस्पताल का है।

वहीं इस मामले में खबर आई थी कि अल शिफा अस्पताल में 39 बच्चों की मौत नहीं हुई है, बल्कि यह कहा गया था कि ऑक्सीजन और बिजली की कमी के कारण ये खतरे में हैं। जबकि इस मामले में आईडीएफ ने शिफ़ा अस्पताल को ऑक्सीजन और सहायता प्रदान करने की भी पेशकश की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

इस मामले में सैन्य प्रवक्ता ने कहा था, “आईडीएफ नागरिकों और हमास आतंकवादियों के बीच अंतर करने की अपनी नैतिक और पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आईडीएफ इनक्यूबेटरों के हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए किसी भी विश्वसनीय मध्यस्थ पक्ष के साथ काम करने को तैयार है।”

‘अमीर कैसे बनें, आमिर खान के बारे में जानिए’: अब रतन टाटा हुए डीपफेक के शिकार, सट्टेबाजी को प्रमोट करते दिखाया

AI तकनीक पर आधारित डीपफेक (DeepFake) अब दुनिया भर के लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। रश्मिका मंदाना, कैटरीना कैफ, सारा तेंदुलकर, ऐश्वर्या राय, काजोल सहित विभिन्न हस्तियों के बाद अब रतन टाटा का डीपफेक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा को ऑनलाइन सट्टेबाजी का समर्थन करते दिखाया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में रतन टाटा को ऑनलाइन सट्टेबाजी कोच का समर्थन करते हुए दिखाया गया है। इसके साथ ही आमिर खान नाम के एक शख्स के टेलीग्राम चैनल से जुड़ने के लिए लोगों से कहा जा रहा है। इसके माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को फँसाने की कोशिश की जा रही है।

इस फेक वीडियो में रतन टाटा कहते हुए दिख रहे हैं, “लोग मुझसे हर समय पूछते रहते हैं कि अमीर कैसे बनें और मैं उन्हें अपने दोस्त आमिर खान के बारे में बताना चाहता हूँ। भारत में कई लोगों ने एविएटर खेलकर लाखों रुपए कमाए हैं। उनके प्रोग्रामरों, विश्लेषकों, AI और Chat GPT को धन्यवाद कि इसमें जीतने की संभावना 90 प्रतिशत है।”

इस फर्जी वीडियो में रतन टाटा का वीडियो प्रयोग किया गया है और उसमें छेड़छाड़ करके उसे स्कैमर द्वारा अपने प्रयोग के लिए बनाया गया है। रतन टाटा का यह मूल वीडियो संभवत: जून 2015 का है। इसमें वे एचईसी पेरिस बिजनेस स्कूल में मानद डिग्री प्राप्त करने के बाद बोलते हुए नजर आए थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आमिर खान एक घोटालेबाज है, जो @aviator_ultrawin नाम से टेलीग्राम चैनल चलाता है। आमिर खान का दावा है कि लोग उसका ‘एविएटर’ बेटिंग गेम खेलकर हर दिन कम से कम एक लाख रुपए कमा सकते हैं। गेम खेलने के लिए वह यूजर्स से ‘एविएटर’ पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए बोलता है।

दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद ‘1विन’ नाम का एक अलग खेल सट्टेबाजी और कैसीनो प्लेटफ़ॉर्म खुलता है। यहाँ पर यूजर का फोन नंबर और ईमेल आईडी माँगा जाता है। आमतौर पर मोबाइल और ईमेल आईडी जैसी व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के लिए घोटालेबाजों द्वारा इस तरह की रणनीति अपनाई जाती है।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल का एक अश्लील वीडियो सामने आया था। डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके बनाए गए इस वीडियो में वो कैमरे के सामने कपड़े बदलती नजर आ रही हैं। दरअसल, रोजी ब्रीन नाम की एक सोशल एंफ्लुएंसर का वीडियो में रोजी के चेहरे से छेड़छाड़ करके काजोल का चेहरा लगा दिया गया था।

इसी तरह बॉलीवुड अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का वीडियो शेयर किया गया था। इसमें जारा पटेल नाम की एक ब्रिटिश-इंडियन इन्फ्लुएंसर के वीडियो में छेड़छाड़ करके रश्मिका का चेहरा लगा दिया गया था। जारा अक्सर अंतरंग वस्त्रों में तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करती रहती हैं। इसके बाद रश्मिका ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

रश्मिका मामले के बाद केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी कहा था कि इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे सभी डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा एवं भरोसे को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम मोदी ने भी दिवाली मिलन समारोह में डीपफेक पर चिंता जताई थी और देश के लिए खतरा बताया था।

अब केन्द्रीय रेल और सूचना प्रोद्यौगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार (23 नवंबर 2023) डीपफेक पर बढ़ती चिंताओं पर कहा है कि इन्हें रोकने के लिए केंद्र सरकार नया क़ानून लाएगी या फिर जरूरत के अनुसार पुराने क़ानून में संशोधन करेगी। उन्होंने ऐसे वीडियो बनाने वालों पर भी कार्रवाई करने की बात कही है।

अब, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को कहा कि सरकार ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर डीपफेक कॉन्टेंट की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी को नियुक्त करेगी। यह अधिकारी डीपफेक के मामलों में एफआईआर दर्ज करने में नागरिकों की सहायता करेगा।

डीपफेक क्या होता है?

डीपफेक तकनीक से वीडियो बनाना एक लम्बी प्रक्रिया है। सबसे पहले जिन दो लोगों के चेहरे आपस में बदले जाने हैं उनके हजारों फोटो वीडियो ‘एनकोडर’ नाम के एक AI आधारित प्रोग्राम पर चलाए जाते हैं। यह तकनीक इन दो चेहरों की समानताएँ परखती है। इसके बाद यह तकनीक इन चेहरों को केवल उनकी समानताओं के आधार पर सीमित कर देती है और एक कंप्रेस्ड इमेज बनाती है।

इसके पश्चात एक और AI तकनीक ‘डीकोडर’ से चेहरा तलाशने को कहा जाता है। आसान भाषा में समझे तो इनकोडर को ‘A’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता और डीकोडर को ‘B’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता है। इसके पश्चात दोनों मशीनों से यह चेहरा बनाने को कहा जाता है लेकिन इस स्थिति में इनकोडर को B का और डीकोडर को A का चेहरा बनाने को कहा जाएगा। ऐसे में मान लीजिए कि B उस फोटो में रो रहा है तो नई फोटो में A रोता हुआ दिखेगा।

इसके अलावा एक अन्य तकनीक जिसका नाम ‘जनरेटिव एड्वर्सियल नेटवर्क’ (GAN) है उसके जरिए भी बनाई जाती हैं। इसमें एक गड़बड़ तस्वीर और एक सही तस्वीर डाली जाती है। AI तकनीक इन दोनों के कोड डिकोड करके फोटो को आपस में मिलाती है। इसमें समय लगता है।

रिटायर फौजियों को कश्मीर में आतंकवादी बनाकर भेज रहा पाकिस्तान, स्थानीय लोगों की नहीं कर पा रहा भर्ती: नॉर्दर्न आर्मी के कमांडर

जम्मू-कश्मीर में अब पाकिस्तान को स्थानीय आतंकी नहीं मिल रहे। लिहाजा वह अपने रिटायर फौजियों को आतंकवादी बनाकर कश्मीर भेज रहा है। यह जानकारी सेना के नॉर्दर्न आर्मी के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दी है।

राजौरी एनकाउंटर में बलिदान हुए सेना के अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि देने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को मीडिया से बात करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीमा पार से भारत में घुसे कुछ आतंकवादी रिटायर्ड पाकिस्तानी फौजी हैं।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान स्थानीय लोगों की भर्ती नहीं कर पा रहा है। वह बाहर से आतंकियों को लाकर कश्मीर में दहशत फैलाना चाहता है। सेना ने पाया है कि कुछ आतंकी पाकिस्तान के रिटायर फौजी हैं। लिहाजा हमारी प्राथमिकता इन विदेशी आतंकवादियों का खात्मा करने की है।

लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने कहा, “जहाँ हमने मुठभेड़ में अपने 5 बहादुर सैनिकों को खो दिया, वहीं हमने दो खूंखार आतंकवादियों को भी मार गिराया। हमारे लड़के अपनी निजी सुरक्षा की परवाह किए बगैर अच्छे से प्रशिक्षित और आधुनिक उपकरणों से लैस विदेशी आतंकवादियों के पीछे चले गए।”

उन्होंने आगे कहा, “इन खूंखार आतंकवादियों के मारे जाने से आतंकी इको सिस्टम और पाकिस्तान को एक बड़ा झटका दिया है। हमारे अनुमान के मुताबिक 20-25 आतंकवादी अभी भी क्षेत्र में सक्रिय हो सकते हैं। स्थानीय लोगों की मदद से एक साल में हम हालात को काबू में करने सक्षम हो जाएँगे।”

लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी नेराजौरी में कालाकोटे क्षेत्र का दौरा किया और ऑपरेशन की समीक्षा की। आर्मी कमांडर ने सबसे मुश्किल इलाके और प्रतिकूल मौसम के बावजूद ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए वीर सैनिकों और आर्मी डॉग ‘डोमिनोज़’ की सराहना की और उन्हें सम्मानित किया।

मीडिया रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं ले सकता SEBI, सुप्रीम कोर्ट ने अडानी मामले में फैसला सुरक्षित रखा: हिंडनबर्ग किया था वित्तीय हेरफेर का दावा

अमेरिका की शॉर्टसेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अडानी ग्रुप पर लगाए गए वित्तीय हेराफेरी के आरोपों से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (24 नवंबर, 2023) को सुनवाई की। न्यायालय ने कहा कि बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) को मीडिया रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लेने के लिए नहीं कहा जा सकता। सेबी की जाँच और विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की निष्पक्षता पर संदेह करने लायक कोई सामग्री नहीं मिली। इस मामले में कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

दरअसल याचिकाकर्ता ने अडानी समूह द्वारा की गई कथित धोखाधड़ी के आरोपों की जाँच की माँग करने के लिए जनहित याचिकाएँ दायर की गई थीं। इस मामले पर बहस करने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (SEBI) से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अडानी के कथित आचरण के बारे में निर्णय लेने के लिए अखबारों की रिपोर्टों का पालन करेगा। दरअसल, एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश होते हुए वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इस मामले में सेबी का आचरण विश्वसनीय नहीं था।

प्रशांत भूषण ने कहा, “हम इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि सेबी की जाँच विश्वसनीय नहीं है। उनका कहना है कि 13 से 14 एंट्री अडानी से जुड़ी हैं, लेकिन वे इस पर गौर नहीं कर सकते, क्योंकि एफपीआई दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया है।” उन्होंने कहा कि साल 2014 से SEBI अडानी ग्रुप की हेरफेर को नजरअंदाज कर रहा है।

इस संबंध में वकील भूषण ने राजस्व खुफिया निदेशालय के निदेशक नजीब शाह द्वारा जनवरी 2014 में सेबी के तत्कालीन निदेशक यूके सिन्हा को लिखे एक पत्र का हवाला भी दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कोयला आयात में मूल्य को अधिक दिखाकर पैसों की हेराफेरी की जा रही है।

इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, “मिस्टर भूषण, मुझे नहीं लगता कि आप किसी वित्तीय नियामक से अखबार में छपी किसी बात को स्वीकार करने के लिए कह सकते हैं.. इससे सेबी की बदनामी नहीं होती.. क्या सेबी को अब पत्रकारों का पीछा करना चाहिए?” कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिससे सेबी की जाँच या विशेषज्ञ समिति की जाँच की निष्पक्षता पर संदेह किया जा सके।

जवाब में वकील प्रशांत भूषण ने कहा, “अगर पत्रकारों को ये दस्तावेज़ मिल रहे हैं तो सेबी को ये कैसे नहीं मिल सकते, जिससे पता चलता है कि श्री विनोद अडानी इन फंडों को नियंत्रित कर रहे थे? इतने सालों तक उन्हें ये दस्तावेज़ कैसे नहीं मिले? OCCRP, द गार्जियन आदि ने दिखाया है कि अधिकांश अदानी शेयरों में निवेश करने वाली इन ऑफशोर कंपनियों को विनोद अदानी द्वारा नियंत्रित किया गया था।”

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने फिर कहा, “न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों का अनुपालन करते हुए इसका कोई साक्ष्यात्मक मूल्य कैसे हो सकता है? ऐसे मामले में कारण बताओ कैसे हो सकता है? हम यह धारणा नहीं बना सकते कि यह विश्वसनीय है या इसमें विश्वसनीयता की कमी है।”

वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि मीडिया रिपोर्ट अब भारत के कार्यों को प्रभावित करने के लिए ‘प्लांट’ की जा रही हैं। उन्होंने कहा, “भारत के भीतर फैसलों को प्रभावित करने के लिए भारत के बाहर कहानियां गढ़ने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसका एक उदाहरण ओसीसीआरपी रिपोर्ट है।”

याचिकाकर्ताओं में से एक अनामिका जयसवाल ने सेबी पर हितों के टकराव और तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया था। जयसवाल ने कहा था कि सेबी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस कमेटी में सिरिल श्रॉफ सदस्य थे, जिनकी बेटी की शादी गौतम अडानी के बेटे से हुई है।

बार एंड बेंच के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अनामिका जयसवाल के हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा, “मैं इसका जवाब देकर इसे विश्वसनीयता नहीं देना चाहता था। अगर हम ऐसी रिपोर्टों को देखना शुरू कर देंगे तो सेबी निरर्थक हो जाएगा।”

इस बीच, वकील प्रशांत भूषण ने विशेषज्ञ समिति में शामिल वकील सोमशेखर सुंदरेसन, जो अब बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए हैं और न्यायमूर्ति ओपी भट्ट को शामिल किए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोमशेखर ने अपनी कानूनी प्रैक्टिस के दौरान सेबी के समक्ष अडानी का प्रतिनिधित्व किया था। वहीं, जस्टिस भट्ट उस कंपनी के अध्यक्ष थे, जिसने अडानी समूह के साथ साझेदारी की थी।

इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, “वह (सोमशेखर) इन-हाउस वकील नहीं थे, वह एक वकील थे। वह 2006 में पेश हुए थे। यह मामला 17 साल बाद आया है। आपने कोई और उदाहरण भी संलग्न नहीं किया है, फिर हम इन अप्रमाणित आरोपों को रिकॉर्ड पर कैसे ले सकते हैं?”

बताते चलें कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट आने के बाद देश भर में सवाल उठने लगे थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को इस मामले की स्वतंत्र रूप से जाँच करने के अलावा सेवानिवृत्त न्यायाधीश एएम सप्रे की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने को कहा था। विशेषज्ञ समिति ने मई में अपनी रिपोर्ट दे दी थी। इसमें कहा था कि प्रथम दृष्टया इस मामले में सेबी की ओर से कोई चूक नहीं पाई गई।

केरल के मदरसे में बच्चों से कुकर्म, 3 उस्ताद गिरफ्तार: 1 साल से बच्चे का यौन शोषण कर रहा मौलवी भी पकड़ा गया

केरल में मौलानाओं के हाथों बच्चों के यौन शोषण और कुकर्म के दो चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पहली घटना में, तीन मदरसा शिक्षकों को, जिनमें से एक उत्तर प्रदेश का है, नेदुमंगड पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं दूसरा मामला भी यौन शोषण का ही है। दरअसल, अधिकारियों ने बताया कि नाबालिग छात्रों पर यौन उत्पीड़न के मामले में 18 नवंबर, 2023 को ही मदरसा शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहले मामले में आरोपितों की पहचान कडक्कल कांजीराथुम्मुडु बिस्मी भवन के 24 वर्षीय एल सिद्दीकी, करीबा ऑडिटोरियम के पास जैस्मीन विला के 28 वर्षीय एस मुहम्मद शमीर और उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के गणेशपुर के 30 वर्षीय मुहम्मद रसलाल हक के रूप में हुई। तीनों पर आरोप है कि मदरसे में किशोरों के साथ अप्राकृतिक सेक्स किया। 

इस मामले में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए किशोर न्याय अधिनियम, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और प्रासंगिक भारतीय दंड संहिता की धाराएँ लागू की गईं।

रिपोर्ट के अनुसार, तीनों आरोपित पिछले एक साल से नेदुमंगड (Nedumangad) में एक मदरसा चला रहे थे। वहीं शिकायत के बाद कट्टक्कडा के पुलिस उपाधीक्षक (डीवाईएसपी) एन शिबू, नेदुमंगड स्टेशन हाउस अधिकारी (एसएचओ) ए सुनील, उप-निरीक्षक (एसआई) सुरेश कुमार, सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई), जिला पुलिस अधीक्षक किरण नारायणन ने अपराधियों की गिरफ्तारी को सुनिश्चित किया।

दरअसल, वरिष्ठ सिविल पुलिस अधिकारी (एससीपीओ) सी बीजू, दीपा और सिविल पुलिस अधिकारी (सीपीओ) अजीत मोहन को सीडब्ल्यूसी से आरोपितों के खिलाफ उनके भयानक अपराधों के बारे में एक पीड़ितों द्वारा की गई एक शिकायत की सूचना मिली, जो दीनी तालीम के लिए मदरसे में आए थे। फ़िलहाल,अब तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद रिमांड पर भेज दिया गया।

इस बीच, वाज़िकादावु पुलिस ने 22 नवंबर, 2023 को मलप्पुरम में पुथुक्कादावु मुहम्मद शाकिर नामक एक मौलवी को भी गिरफ्तार किया है, जिसे शाकिर बाक्वावी ममपाद के नाम से भी जाना जाता है, उस पर भी एक साल तक एक बच्चे से छेड़छाड़ करने का आरोप था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित ने 21 नवंबर, 2023 को अपने मदरसा शिक्षक को दुर्व्यवहार के बारे में बताया और शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में वाज़िकादावु पुलिस स्टेशन के हाउस ऑफिसर, मनोज परायट्टा ने बताया, “हमें मंगलवार को शाकिर के खिलाफ शिकायत मिली। लड़के ने अपने शिक्षक शाकिर के दुर्व्यवहार के बारे में पुलिस को बताया। और हमने बिना देर किए आरोपित को उसके घर से पकड़ लिया था।”

हालाँकि, यौन उत्पीड़न के इस मामले में मदरसे के शिक्षक द्वारा करीब एक साल से बच्चे का यह उत्पीड़न चल रहा था। मदरसे के शिक्षकों ने पीड़ितों को द्वारा इस मामले के बारे में खुलासा करने पर भयंकर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। इसके अलावा, जाँच दल इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि और कितने समय से इन आरोपितों ने मदरसे के बच्चों को शिकार बनाया। 

बता दें कि इस्लामी प्रचारक यौन उत्पीड़न के आरोपित मुहम्मद शाकिर के फेसबुक पेज पर 23,000 से अधिक फेसबुक फॉलोअर्स और 8,000 से अधिक यूट्यूब सब्सक्राइबर्स है। उसके ज़्यादातर वीडियो इस्लामी प्रचार से जुड़े हैं। 

‘हिंदू सिर्फ धर्म नहीं, जीने का तरीका है’: जानिए कौन हैं डॉक्टर मिहिर मेघानी, अमेरिका में ‘सनातन’ के लिए दान करेंगे ₹33 करोड़

अमेरिका में हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए एक भारतीय मूल के एक अमेरिकी डॉक्टर ने 40 लाख डॉलर ( 33 करोड़ रुपए से ज्यादा) देने का वादा किया है। डॉक्टर का नाम मिहिर मेघानी है। दो दशक पहले डॉ मेघानी ने ही हिंदू अमेरिका फाउंडेशन की स्थापना की थी। उनका कहना है कि हिंदू सिर्फ एक धर्म नहीं है बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस महीने की शुरुआत में ही सालाना सिलिकॉन वैली समारोह में अगले 8 वर्षों में हिंदू हित के लिए 15 लाख डॉलर देने का वादा किया। उनके हिंदू हित में किए गए इस योगदान के बाद कुल राशि 40 लाख डॉलर हो जाएगी।

पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा- “मेरी पत्नी तन्वी और मैंने, अब तक ‘हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन’ को 15 लाख डॉलर का योगदान दिया है। हमने पिछले 15 वर्षों में अन्य हिंदू और भारतीय संगठनों को इस उद्देश्यों के लिए 10 लाख डॉलर से भी अधिक का योगदान दिया है। अगले 8 वर्षों में हम भारत समर्थक और हिंदू संगठनों को 15 लाख डॉलर देने का संकल्प ले रहे हैं।”

वह लोगों को बताते हैं, “मेरी कोई स्टार्टअप कंपनी नहीं है, मेरा कोई साइड बिजनेस नहीं है, मैं वेतन पर एक आपातकालीन डॉक्टर हूँ। मेरी पत्नी एक फिटनेस प्रशिक्षक और आभूषण डिजाइनर हैं। हम प्रतिवर्ष लाखों डॉलर नहीं कमा रहे हैं। हमारे पास शेयर के विकल्प नहीं है। हम ऐसा कर रहे हैं क्योंकि ये हमारा धर्म है।”

हिंदुत्व के बारे में किए गए सवाल पर डॉ मेघानी कहते हैं कि हिंदू धर्म वो नहीं है जिसे अमेरिकी लोग आसानी से समझें क्योंकि यहाँ ज्यादातर ईसाई हैं। वह इब्राहिमिक पृष्ठभूमि से बाते हैं। वो जब अलग-अलग धर्म देखते हैं तो उन्हें समझ नहीं आता कि हिंदू धर्म सिर्फ एक धर्म नहीं है बल्कि ये जीने के संस्कार हैं। ये जिंदगी को जीने की सोच है।

वह कहते हैं, “हम हिंदुओं को बतौर भारतीय मजबूत होना होगा। ये हमारी सभ्यता की पहचान है। हमें हमारी हिंदू सभ्यता को लेकर गौरवान्वित महसूस करना गोगा। तभी सहकर्मी, दोस्त और पड़ोसी हमें बेहतर जान पाएँगे।”

बता दें कि डॉक्टर मेघानी की संस्था जो शुरुआती सालों में केवल वॉल्यूटरों पर आधारित थी अब उसका वार्षिक बजट 2.5 मिलियन डॉलर हो गया है। आने वाले समय में इसका लक्ष्य 5 मिलियन डॉलर तक पहुँचना है और दशक तक लक्ष्य 20 मिलियन डॉलर पहुँचना है।

मिशेल मार्श के खिलाफ पुलिस में शिकायत, PM मोदी से डिमांड- भारत में खेलने पर लगाएँ बैन: वर्ल्ड कप पर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने रखा था पैर, मोहम्मद शमी ने कहा- इससे ठेस पहुँची

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मिशेल मार्श के खिलाफ अलीगढ़ के एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। बताया जा रहा है मिशेल मार्श के ट्रॉफी पर पैर रखने वाली फोटो देखने के बाद एक्टिविस्ट नाराज हुए और उन्होंने थाने में शिकायत दी। पुलिस के समक्ष इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई है

आरटीआई एक्टिविस्ट का नाम पंडित केशव देव है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि उन्होंने इंटरनेट पर एक फोटो देखी जिसमें ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने वर्ल्ड कप ट्रॉफी पर पैर रखा था। उनके मुताबिक इस तस्वीर से 140 करोड़ लोगों के सम्मान को ठेंस पहुँचा इसलिए उन्होंने थाना देहली गेट पर इस मामले में तहरीर दी।

अपनी शिकायत में पंडित केशव देव ने कहा कि पहले तो मिशेल मार्श के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और दूसरा उसके भारत खेलने पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए।

शिकायतकर्ता ने कहा कि वर्ल्ड कप फाइनल जीतने पर प्रधानमंत्री ने पैट कमिंस को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया था लेकिन मिशेल मार्श ने इसका अपमान कर दिया। यह देख उनको (पंडित केशव देव) को बहुत पीड़ा हुई। इसलिए उन्होंने शिकायत देते हुए माँग की कि मिशेल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाए।

अपनी शिकायत की कॉपी पंडित केशव देव ने प्रधानमंत्री व खेलमंत्री को भी दी। उनकी माँग है कि अब के बाद कभी भी ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर मिशेल मार्श को न खेलने दिया जाए।

गौरतलब है कि वर्ल्ड कप के बाद सामने आई मिशेल मार्श की तस्वीर से कई भारतीय उनसे नाराज हैं। इसी क्रम में भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला ने भी बताया कि कैसे उन्हें इस हरकत से दुख पहुँचा है।

शमी ने जहाँ मीडिया से बातचीत में इस फोटो के बारे में कहा, “मुझे ठेस पहुँची। वह ट्रॉफी जिसके लिए दुनियाभर की टीमें लड़ रही थी, ट्रॉफी जिसे आप अपने सिर पर रखकर उठाना चाहते हैं, उस पर पैर रखना वाकई दुखी करने वाला था।”

इसी तरह उर्वशी रौतेला ने कहा- मिशेल मार्श वर्ल्ड कप ट्रॉफी की कुछ तो इज्जत करो। सिर्फ कूल दिखने के लिए मिशेल मार्श ने ट्रॉफी पर पैर रखा है।”