Home Blog Page 1363

20 साल पहले भी CM गहलोत को जनता ने मतदान प्रतिशत बढ़ा सत्ता से किया था बेदखल, इस बार भी बढ़ा है वोटिंग %… खिलेगा कमल!

राजस्थान में 199 सीटों के लिए शनिवार (25 नवंबर 2023) को मतदान हो गया। हालाँकि, एक सीट पर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी की मौत के बाद इस सीट पर बाद में चुनाव कराया जाएगा। इस बार राज्य में कुल 74.96 प्रतिशत मतदान हुआ। इसमें से 0.83 प्रतिशत वोटिंग डाक मतपत्रों के जरिए हुई। इस बार का मतदान पिछले विधानसभा चुनावों के मतदान से लगभग 1 प्रतिशत अधिक हुई है।

साल 2018 के विधानसभा चुनावों में राजस्थान में 74.06 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। पिछली बार की तुलना में इस बार हुई अधिक मतदान, क्या राज्य में सरकार परिवर्तन का संकेत है, इसको लेकर चुनाव विशेषज्ञ और तमाम लोग चर्चा कर रहे हैं। दरअसल, अंतिम रैली में भी पीएम मोदी ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए लोगों से अधिक-से-अधिक संख्या में मतदान करने के लिए कहा था।

अगर राजस्थान में पुरानी सरकारों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वहाँ हर पाँच साल में जनता सरकार को बदल देती है। अगर भाजपा की सरकार है तो अगली बार कॉन्ग्रेस की सरकार आती है और अगर कॉन्ग्रेस की सरकार है तो अगली बार भाजपा की सरकार आती है। अगर मानकर चला जाए कि यह ट्रेंड इस बार भी जारी रहता है तो राज्य में भाजपा की सरकार बनने की गुंजाइश दिखाई देती है।

इससे अलग हटकर अगर वोटिंग ट्रेंड पर नजर डालें तो एंटी इंकम्बैंसी (सत्ता विरोधी लहर) की स्थिति में वोटिंग प्रतिशत में वृद्धि देखने को मिलती है। इस बार भी वोटिंग प्रतिशत में वृद्धि सत्ताधारी कॉन्ग्रेस के लिए चिंता का विषय है। इसके पीछे कई कारण भी हैं। राज्य की अशोक गहलोत की सरकार भले आम लोगों की भलाई की बात करें, लेकिन उनके शासनकाल में भ्रष्टाचार, परीक्षा प्रश्न पत्र का आउट हो जाना, महिलाओं के खिलाफ अपराध में वृद्धि जैसे तमाम मसले रहे हैं, जिससे राज्य सरकार के खिलाफ जनता में आक्रोश दिखा था।

‘लाल डायरी’ जैसे आरोप, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेताओं तक को कठघरे में खड़ा किया गया है, ने भी जनता को चिंतन पर मजबूर किया है। इससे अलग, पार्टी में ही अंदरुनी फूट भी एक बड़ा कारण हैं। सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान जैसे कारण पार्टी के प्रदर्शन पर सीधा प्रभाव डाले हो सकते हैं।

पिछले 20 सालों के चुनाव नतीजों को गौर करें तो पाएँगे कि जब-जब मतदान प्रतिशत में गिरावट आई है, तब-तब कॉन्ग्रेस फायदा पहुँचा है। वहीं, मतदान प्रतिशत में वृद्धि का लाभ भाजपा को मिला है। हालाँकि, ये ट्रेंड जारी रहता है या टूटता है, इसका पता 3 दिसंबर को मतगणना के दिन पता चल जाएगा।

अगर साल 1998 के चुनावी नतीजों को देखें तो उस समय लगभग 63.40 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद कॉन्ग्रेस की सरकार बनी थी और अशोक गहलोत पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उसके ठीक बाद साल 2003 के चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 67.18 प्रतिशत हुआ। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला और उसकी सरकार बनी।

साल 2008 के विधानसभा चुनावों में फिर वोटिंग पर्सेंट गिरकर 66.25 प्रतिशत रह गया और फिर से कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। साल 2013 के विधानसभा चुनावों में 75 प्रतिशत मतदान हुआ और भाजपा को सत्ता मिली। इस दौरान भाजपा को 167 सीटें मिलीं और कॉन्ग्रेस को सिर्फ 21 सीटें मिलीं।

इसी तरह साल 2018 के विधानसभा चुनावों में 0.98 प्रतिशत कम वोटिंग हुई और 74.06 प्रतिशत मतदान के कारण कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। इस बार कॉन्ग्रेस को 92 सीटें मिलीं। इस बार भी मतदान प्रतिशत में पिछली बार के मुकाबले 0.90 प्रतिशत अधिक वोटिंग हुई है और भाजपा की सरकार बनने की आशा व्यक्त की जा रही है।

हालाँकि, अशोक गहलोत इसे कॉन्ग्रेस के पक्ष में वोटिंग बता रहे हैं, जबकि भाजपा दावा कर रही है कि इस बार राजस्थान में उसकी सरकार बनेगी। देखना है कि दोनों प्रमुख पार्टियों में से किसके दावे इस बार सही होते हैं। इस बार के चुनाव में शामिल कुल 5.25 करोड़ मतदाता 1863 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।

भारत के पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार, एक सप्ताह में हुई 5 बिलियन डॉलर (41657 करोड़ रुपए) की बढ़त

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले एक सप्ताह में 5 बिलियन डॉलर (लगभग 41,657 करोड़ रुपए) से अधिक बढ़ कर 595.4 बिलियन डॉलर (लगभग 49,60,560 करोड़ रुपए) हो गया है। यह बीते लगभग 3 महीने में सबसे ऊँचा स्तर है। भारत के पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है। बीते चार माह में विदेशी मुद्रा भंडार में यह सबसे बड़ी बढ़त है। इससे पहले के सप्ताह में यह लगभग 462 मिलियन डॉलर घट गया था।

यह जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक ने दी है। भारत से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार केवल चीन, जापान और स्विटज़रलैंड के पास हैं। चीन के पास 3.1 ट्रिलियन डॉलर जबकि जापान के पास 1.1 ट्रिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार हैं। स्विटज़रलैंड के पास 809 बिलियन डॉलर से अधिक के भंडार हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत स्थिति में होना उसकी बढ़ती अर्थव्यस्था को दिखाते हैं। जिन देशों की अर्थव्यवस्था गड़बड़ होती है, वह अधिकांश समय विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे होते हैं, पड़ोसी देश पाकिस्तान इसका एक उदाहरण है।

क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश या उसके केन्द्रीय बैंक के पास संचित ऐसी धनराशि होती है, जिसका उपयोग कर वह विदेशों में अपनी खरीददारी का भुगतान कर सके। किसी भी राष्ट्र का विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक स्थिति को प्रदर्शित करता है।

इसमें कमी आने पर विदेशों को किए जाने वाले भुगतान में समस्या आती है, जिससे अर्थव्यवस्था बिगड़ जाती है। इसका हालिया उदाहरण पाकिस्तान और श्रीलंका हैं। भारत के साथ ऐसी स्थिति वर्ष 1991 में हुई थी, जब देश का सोना गिरवी रखना पड़ा था।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के 4 कंपोनेंट – विदेशी मुद्रा, सोना, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स और IMF में रिज़र्व पोजीशन होते हैं। इनमें सबसे मुख्य दूसरे देशों की मुद्रा का रिज़र्व है। इसके अंतर्गत भारत डॉलर, यूरो, पाउंड और येन जैसी करेंसी संचित करता है। इसमें भी सबसे प्रमुख अमेरिकी डॉलर है।

भारत के पास वर्तमान में 526 बिलियन डॉलर मुद्रा भंडार है, जबकि 46 बिलियन डॉलर का सोना है। स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स के अंतर्गत भारत के पास 18 बिलियन डॉलर हैं। भारत जब चाहे इन्हें उपयोग में ला सकता है। रिजर्व पोजीशन, IMF के पास जमा देश का पैसा होता है।

अक्टूबर 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 645 बिलियन डॉलर पर पहुँचा था। इसके पश्चात फरवरी 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध चालू होने के कारण डॉलर मजबूत हुआ, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो गया। कच्चे तेल के महँगे होने का असर भी इस पर पड़ा।

इस विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग व्यापार के अतिरिक्त, देश की मुद्रा को स्थिर करने में भी किया जाता है। यदि रुपया अधिक कमजोर हो रहा है तो रिजर्व बैंक अपने रिज़र्व से डॉलर बाजार में बेच कर उसकी कीमत को स्थिर रखती है।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम विदेशों से व्यापार होता है। भारत, कच्चे तेल का आयातक होने के कारण बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा देता है। जो देश आयात पर अत्यधिक निर्भर होते हैं, उन्हें विदेशी मुद्रा भंडार की समस्याएँ बनी रहती हैं।

जिस कुत्ते को बचाने में चली गई बाइकर की जान, अब वो ‘पश्चताप’ करने उसके घर पहुँचा: माँ की गोद में सिर रख जताया दुख, देखें Video

पालतू कुत्तों की वफादारी की कई कहानियाँ आपने अक्सर सुनीं होंगी लेकिन सड़क पर घूमने वाले आवारा कुत्ते में भी कितने इमोशन्स होते हैं ये समझने के लिए एक कर्नाटक की घटना के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

कर्नाटक के दावणगेरे में पिछले दिनों एक आवारा कुत्ते की जान बचाने के चक्कर में तीपेश नाम के लड़के ने अपनी जान गवा दी थी। जवान लड़के के चले जाने से घर में मातम का माहौल था। ऐसे में नाते-रिश्तेदारों का घर आ आकर सांत्वना देना एक आम बात थी। लेकिन इन सबके बीच उसी कुत्ते का घर आना लोगों को चौंका गया जिसे बचाते हुए तीपेश की जान गई थी।

सोचिए ये कितना अचंभित करने वाला होगा कि एक सड़क पर घूमने वाला कुत्ता कई किलोमीटर दूर से चलकर उसी तीपेश के घर आ पहुँचा, जिसने उसकी जान बचाई थी। तीपेश की माँ तो बताती हैं कि वो कुत्ता उनके घर पर तभी से आने की कोशिश कर रहा था जब से उनके बेटे का अंतिम संस्कार हुआ था, मगर इलाके के कुत्ते उसे भगा दे रहे थे।

आखिर में कुछ दिन बाद वही कुत्ता अचानक तीपेश के घर आ पहुँचा और जाकर सीधे तीपेश की माँ यशोदम्मा की गोद में अपना सिर रख दिया। घरवालों को जरा देर भी नहीं लगी समझने में कि किस तरह वो कुत्ता उनके बेटे की मौत पर दुख जताने के लिए इतनी दूर से उनके घर आया है और ऐसी हरकत करके वो बताने की कोशिश कर रहा है कि उसे भी बहुत दुख है तीपेश के जाने का।

रिपोर्ट्स की मानें तो रिश्तेदारों का कहना है कि कुत्ता करीब 8 किलोमीटर तक चलने के बाद तीपेश के घर पहुँचा था। उसने उसी वाहन का पीछा करके घर का पता लगाया था जिसमें तीपेश के शव को लाया गया। अंतिम संस्कार के वक्त भी वो कुत्ता आसपास ही था और हैरानी तो सबको तब हुई जब वो 3 दिन बाद घर में घुसकर सीधे तीपेश की माँ के पास जाकर बैठ गया।

तिपेश के घरवालों का कहना है कि वो कुत्ते से नाराज नहीं है। हादसे में उन्होंने अपना बेटा-भाई खोया है। इसमें उस कुत्ते की क्या गलती। आज वो कुत्ता अपने व्यवहार के चलते तीपेश के घरवालों के साथ ही रहता है। हर मीडिया अखबार में उसकी चर्चा हो रही है।

सिंगर निकिता गाँधी की कन्सर्ट में भगदड़, 4 की मौत और 65 घायल: जानिए कोचीन यूनिवर्सिटी में भगदड़ में क्या हुआ था, कहाँ थी पुलिस

केरल के कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CUSAT) में आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में शनिवार (25 नवंबर 2023) को भगदड़ से चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, इसमें 65 से अधिक लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। केरल की सरकार ने जाँच के आदेश दे दिए हैं।

दरअसल, कोचीन यूनिवर्सिटी में हर साल तीन दिवसीय फेस्ट ‘दिशना’ का आयोजन किया जा रहा था। फेस्ट के दूसरे दिन यानी शनिवार (25 नवंबर 2023) को प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर निकिता गाँधी का कन्सर्ट रखा गया था। इसको लेकर भारी संख्या में भीड़ जुटी थी। हालाँकि, बाहरी एंट्री प्रतिबंधित थी, इसके बावजूद हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएँ थीं।

इस कन्सर्ट का आयोजन खुले ऑडिटोरियम में किया गया था। इसके एक बिल्कुल बगल में कैंटीन और स्टूडेंट एमिनिटी सेंटर है। इसमें बुलाए गए लोगों की एंट्री के लिए शाम 5:30 बजे गेट खोल दिया गया। प्रवेश 7:30 बजे तक निर्धारित किया गया था। आमंत्रित किए गए लोगों का आना लगातार जारी था। इसमें बिना पास वाले लोग भी शामिल थे।

ओपन ऑडिटोरियम भरा हुआ था, लेकिन भीड़ को उचित तरीके से मैनेज नहीं किया जा रहा था। पूअर क्राउड मैनेज के बीच लगभग सात बजे अचानक बारिश शुरू हो गई। इसके बाद खुले में इकट्ठा हुए लोग इनडोर ऑडिटोरियम की ओर भागने लगे। इस दौरान ऑडिटोरियम की सीढ़ियों पर कुछ लोग लड़खड़ाकर गिर पड़े और फिर भगदड़ मच गई।

ये भी कहा जा रहा है कि वहाँ पर प्रवेश और निकास के लिए एक ही गेट का उपयोग किया जा रहा था। नगर निगम पार्षद प्रमोद ने कहा, “एक ही गेट से निकास और प्रवेश के कारण भगदड़ मच गई। इस दौरान जो लोग अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे, उन्होंने गिरे हुए लोगों को रौंद दिया।”

हालाँकि, अब तक ये साफ नहीं हो पाया कि वहाँ पर भीड़ को मैनेज करने के लिए केरल पुलिस मौजूद थी या नहीं। अगर पुलिस मौजूद थी तो कितने पुलिस वाले थे और वे उस दौरान भीड़ को मैनेज करने में सफल क्यों नहीं हो पाए। वहीं, यूनिवर्सिटी के वीसी पीजी शंकरन का कहना है कि इस इवेंट के बारे में पुलिस को सूचित कर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि कोच्चि में इंडियन सुपर लीग के केरला ब्लास्टर गेम का भी आयोजन किया जा रहा था। इस कारण से अधिकांश पुलिसकर्मी जवाहरलाल स्टेडियम इंटरनेशनल स्टेडियम में और उसके आसपास व्यस्त थे। वहीं, पुलिस के एक सीनियर अधिकारी का दावा है कि जिस वक्त भगदड़ हुई, उस वक्त ऑडिटोरियम का एक हिस्सा ही भरा था।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इस आयोजन में भीड़ को नियंत्रित करने का काम पुलिस नहीं, बल्कि खुद छात्र-छात्राओं द्वारा किया जा रहा था। ये छात्र-छात्राएँ इवेंट के ऑर्गनाइजर थे। इसमें पुलिस की कहीं भूमिका नहीं दिखी।

वीसी शंकरन का कहना है कि 2000 लोगों की क्षमता वाले इस ऑडिटोरियम में संस्थान के 2500 छात्र-छात्राएँ मौजूद थे। इसके अलावा स्थानीय लोग और नजदीकी कॉलेजों के स्टूडेंट्स भी घटना के वक्त मौजूद थे। वहीं, इनडोर ऑडिटोरियम में घटना के वक्त लगभग 800 लोग मौजूद थे। इसलिए पुलिस का यह दावा कि ऑडिटोरियम का एक हिस्सा भी भरा था, प्रभावी नजर नहीं आ रहा।

इस घटना में जिन चार लोगों की मौत हुई है, उनकी पहचान कर ली गई है। इनके नाम- अतुल थांबी, अन रुफ्ता, सारा थॉमस है। ये सभी CUSAT में सेकेंड ईयर के स्टूडेंट थे। वहीं, चौथे व्यक्ति की पहचान पलक्कड़ के अल्विन जोसेफ के रूप में हुई है। अल्विन इस विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ता था।

केरल सरकार ने घटना की जाँच के आदेश दे दिए हैं। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव और कोचीन विश्वविद्यालय के कुलपति एवं रजिस्ट्रार सहित तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है। यह टीम भगदड़ की घटना की जाँच करके रिपोर्ट सौंपेगी।

इस घटना पर निकिता गाँधी ने भी दुख व्यक्त किया। एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, “यह घटना परफॉर्मेंस के लिए कार्यक्रम स्थल के लिए मेरे रवाना होने से पहले ही घट गई। इस गहन दुःख को व्यक्त करने के लिए संभवतः कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं हैं। मेरी प्रार्थनाएँ छात्रों के परिवारों के साथ हैं।”

17 बंधकों की ‘घरवापसी’: इस्लामी आतंकी हमास औकात में आया, कर रहा था आनाकानी – इजरायल को मिली तीसरी सूची

इस्लामी आतंकी संगठन हमास की कैद से 17 बंधक शनिवार (25 नवम्बर 2023) को रिहा किए गए। इजरायल ने भी जेलों में बंद 39 फिलिस्तीनियों को छोड़ा। दोनों के बीच यह अदला-बदली 4 दिवसीय सीजफायर के तहत हुई है। इससे पहले शुक्रवार को 13 बंधक छोड़े गए थे।

हमास की तरफ से छोड़े जाने वाले बंधकों में 4 थाईलैंड के छात्र भी हैं, जिन्हें 7 अक्टूबर 2023 के हमले के दौरान इजरायल के भीतर से बंधक बनाया गया था। हमास की कैद से छोड़े जाने वाले बंधकों में बच्चे और महिलाएँ हैं। उनकी अपने परिवार से मिलने की तस्वीरें और वीडियो सामने आ रही हैं।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर गाजा के भीतर से हमला कर दिया था। इस हमले में हमास ने 230 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया था और 1,200 से अधिक लोगों को मार दिया था। इसके जवाब में इजरायल ने भी गाजा पर कब्जे के लिए सैन्य अभियान चला दिया है।

लगभग 7 सप्ताह की लड़ाई के बाद हाल ही में क़तर और मिस्र की मध्यस्तता से इजरायल और हमास के बीच 4 दिन के लिए सीजफायर समझौता हुआ है। इजरायल इस दौरान 150 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा जबकि हमास अपनी कैद से 50 बंधकों को छोड़ेगा। सीजफायर के आगे बढ़ने की आशाएँ व्यक्त की गई हैं।

हमास द्वारा छोड़े गए बंधक रेडक्रॉस द्वारा इजरायल लाए गए हैं। इजरायल को आगे छोड़े जाने वाले बंधकों की तीसरी सूची मिल गई है। इन्हें आज रविवार (26 नवम्बर 2023) को छोड़ा जाएगा। इन बंधकों के परिवार वालों को इसकी सूचना दे दी गई है।

हमास की कैद से मुक्त होने वाले 17 व्यक्तियों में 8 बच्चे हैं। इनमें 4 ऐसी महिलाएँ हैं, जिनके छोटे बच्चे हैं। 1 युवती को भी रिहा किया गया है। इनमें 13 इजरायली नागरिक हैं। इसके अलावा 4 थाई नागरिक हैं, जिनके विषय में थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने जानकारी दी है।

अब तक कुल 26 इजरायली नागरिक हमास की कैद से छोड़े जा चुके हैं। शुक्रवार को भी इन इजरायली नागरिकों के अलावा 10 थाई नागरिक और 1 फिलिपीन्स के नागरिक को छोड़ा गया था। हमास लगभग एक दर्जन नागरिकों को हर दिन छोड़ेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

हमास पहले तय हुई शर्तों के बाद भी बंधक छोड़ने में आनाकानी कर रहा है। शनिवार को उसने इजरायली बंधकों को तय समय पर छोड़ने में देरी की। उसने उत्तरी गाजा में सहायता वाले ट्रकों के पहुँचने पर बंधकों को छोड़ने की बात की। हालाँकि बाद में बंधकों को छोड़ दिया गया।

हमास द्वारा छोड़े गए बंधकों में ऐसे भी हैं, जिनके परिवार के लोग हमास द्वारा मार दिए गए हैं। छूटने वाले बंधकों में अधिकांश किब्बुत्ज़ बेरी इलाके के है, जहाँ हमास ने नरसंहार किया था। अभी हमास की कैद से छूटने वाले बंधकों में महिलाएँ और बच्चे हैं।

इजरायल द्वारा छोड़े जाने वाले फिलिस्तीनी छोटे-मोटे आरोपों में जेल में बंद थे। अधिकांश इनमें से इजरायली सुरक्षा बलों पर हमला करने के आरोपित हैं। एक फिलिस्तीनी महिला को भी छोड़ा गया है, जिसने एक कार में बम विस्फोट किया था।

अभी इजरायल और हमास के बीच समझौते का एक दिन बचा हुआ है। मध्यस्थता कर रहा कतर चाहता है कि यह आगे बढ़ जाए। इजरायल का कहना है कि प्रत्येक 10 बंधकों को छोड़ने पर वह अपनी सैन्य कार्रवाई को एक-एक दिन के लिए रोकता जाएगा। अभी भी हमास की कैद में लगभग 150 से अधिक बंधक हैं।

खाई में गिरी कार, अंदर फँसे लोग… मोहम्मद शमी ने ‘हीरो’ बनकर जान बचाई, लोग बोले- एक ही दिल है कितनी बार जीतोगे भाई

क्रिकेट विश्व कप 2023 के दौरान शानदार गेंदबाजी की वजह से हमेशा चर्चा में रहने वाले मोहम्मद शमी ने इंस्टा पर एक वीडियो शेयर की है। 31 सेकेंट इस वीडियो में वह खाई में कार सहित गिरे एक व्यक्ति की जान बचाते नजर आ रहे हैं।

उन्होंने वीडियो के साथ कैप्शन में बताया कि उन लोगों के सामने ये हादसा हुआ जिसके बाद उन्होंने कार में बैठे शख्स को सुरक्षित बचा लिया। उन्होंने लिखा- “ये लोग बहुत सौभाग्य वाले हैं कि भगवान ने इन्हें दूसरा जीवन दिया। इनकी कार मेरी कार के सामने ही नैनीताल में हिल रोड से गिर गई थी। हमने इन्हें सुरक्षित बचाया।”

इसके अलावा उन्होंने वीडियो के पर भी लिखा- “मैं बहुत खुश हूँ कि मैंने किसी की जान बचाई।”

इस वीडियो को देखने के बाद शमी के फैन उनके और दीवाने हो गए। लोगों ने उन्हें रियल लाइफ हीरो कहा।

एक यूजर ने लिखा- दुर्लभ दृश्य कि शमी किसी की विकेट बचा रहे हैं।

कुछ यूजर्स ने लिखा- भाई एक ही दिल है कितनी बार जीतोगे।

आरती सोनी ने कहा- आज मैं शमी साहब की कर्जदार हो गई हूँ बेटा। जब तक जिऊँगी आपकी अहसानमंद रहूँगी।

सोनाली ने कहा, “पिच पर भारतीय टीम को बचाया और यहाँ भारतीय नागरिक को।”

बता दें कि एक तरफ शानदार गेंदबाजी के कारण चर्चा में रहे मोहम्मद शमी वर्ल्ड कप के बाद छुट्टियों पर हैं तो वहीं उनकी पत्नी इंस्टा पर एक्टिव हैं। हाल में उन्होंने एक रील डाली जिसमें उनकी बीवी हसीन जहाँ ने अपनी वीडियो के पीछे ऑडियो लगाई जिसमें कहा जा रहा था- “मैं वो शहजादी हूँ जो महलों में नहीं अपने पति के दिल में राज करती हूँ।”

इस ऑडियो में हसीन जहाँ की वीडियो देखने के बाद लोगों ने अंदाजा लगाया कि शायद हसीन दोबारा से शमी के पास लौटना चाहती हैं। हालाँकि, कैप्शन में हसीन ने लिखा है कि भले ही नफरत से राज करती हूँ पर राज करती हूँ।

21 साल की लड़की को 31 टुकड़ों में काटा, फिर नमक डाल दफना दिया: ओडिशा पुलिस ने एक कपल को हिरासत में लिया

ओडिशा के में पिछले चार दिनों से लापता एक युवती की 31 टुकड़ों में कटी लाश मिली है। नवरंगपुर जिले में अंजाम की गई इस वारदात में युवती की लाश को दफना दिया गया था। इसके साथ ही लाश जल्दी गल जाए, इसके लिए उस पर नमक भी डाल दिया गया था। पुलिस ने शक के आधार पर एक दंपति को गिरफ्तार किया है।

मामला नवरंगपुर जिला के राईघर थाना अंतर्गत बाघबेड़ा गाँव का है। युवती बुधवार (22 नवंबर 2023) से ही अपने घर से लापता थी। परिजनों का कहना है कि लड़की उनसे स्थानीय बाजार में जाने की बात कहकर घर से निकली थी। देर शाम तक भी जब वह नहीं लौटी तो परिजनों को चिंता होने लगी।

घर से लापता हुई 21 साल की तिलावती गोंड के घर-परिवार वालों ने उसे कई जगह खोजा, लेकिन वह नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने थाने में इसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। लड़की के पिता लुडुराम गोंड की शिकायत के आधार पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस युवती की खोजबीन में जुट गई। इसी दौरान शनिवार (25 नवंबर 2023) की सुबह पुलिस को मुरुमडिही गाँव के पास स्थित जंगल में हाल ही में दफनाए गए एक शव का पता चला। पुलिस ने साइंटिफिक टीम को बुलाकर दफनाए गए शव की जाँच की तो वहाँ 31 टुकड़े बरामद हुए।

शव को बेरहमी से टुकड़ों में काटा गया था और उसमें नमक डालकर जंगल में दफना दिया था। पुलिस ने इस शव की स्थानीय लोगों से पहचान करवाई। इसके बाद शव की पहचान लापता युवती के रुप में हुई। पुलिस ने घटनास्थल से एक कटारी भी जब्त की है। शायद इसी से शव को काटा गया था।

इस मामले में जाँच को आगे बढ़ाने के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर एक दंपत्ति को हिरासत में लिया है। इस मामले में पापड़ाहांडी के सीडीपीओ आदित्य सेन ने बताया कि सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस संदिग्ध दंपती से गहन पूछताछ कर रही है। अभी तक हत्या के कारणों का पता नहीं चला है।

हालाँकि, इस संबंध में एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया, “चंद्र राउत नाम के एक व्यक्ति और उसकी पत्नी ने गुरुवार (23 नवंबर) की रात को तिलावती की हत्या कर दी। लड़की चंद्र से प्यार करती थी और उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने के लिए दबाव डालती थी। वह आदमी शादीशुदा था, इसलिए वह नजरअंदाज करना शुरू कर दिया।”

उसने आगे बताया, “उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन वह चंद्र के घर आई और उसके साथ रहने की जिद करने लगी। दंपति ने उससे छुटकारा पाने के लिए उसकी हत्या कर दी और आसानी से फेंकने के लिए उसके शरीर के टुकड़े कर दिए।” ग्रामीण ने दोषियों को ऐसी सजा देने की माँग की कि लोग ऐसी वारदात करने से पहले सोचे।

राजस्थान में 68% मतदान के साथ संपन्न हुआ चुनाव: कहीं गोलीबारी तो कहीं हुई पत्थरबाजी, हमले में पुलिसकर्मी भी हुए घायल

क्षेत्रफल के हिसाब से भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में शनिवार (25 नवंबर, 2023) को विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न हुआ। शाम 5 बजे तक राजस्थान में 68% मतदान हुआ। वहाँ मुख्य मुकाबला सत्ताधारी कॉन्ग्रेस पार्टी और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच में है। सीकर, धौलपुर और डीग क्षेत्रों में पत्थरबाजी और हिंसा की वारदातें हुईं। सीकर में 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है। CAPF (सेंटर आर्म्ड पुलिस फोर्सेज) टीमों को वहाँ तैनात किया गया है।

हालाँकि, पुलिस स्थिति के नियंत्रण में होने का दावा कर रही है। उधर धौलपुर में भी पत्थरबाजी हुई लेकिन गोलीबारी की नौबत नहीं आने पाई। कुछ व्यक्तिगत गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हुई हैं, लेकिन बारी जिले के डीएम ने मतदान बूथों के सुरक्षित होने का दावा किया है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति शांतिपूर्ण है। डीग के कामन इलाके के साँवलेर इलाके में एक पुलिसकर्मी सहित 2 लोग जख्मी हुए हैं। डीग में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को 12 राउंड गोलीबारी करनी पड़ी।

कुछ मिनटों के लिए मतदान में भी व्यवधान आया। जहाँ पाली जिले में एक पोलिंग एजेंट की वहीं उदयपुर में एक उम्मीदवार की ही कार्डियक अरेस्ट की वजह से मौत हो गई। 199 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 51,000 बूथों पर मतदान संपन्न हुआ। सुबह के 7 बजे मतदान शुरू हुआ, वहीं शाम के 6 बजे ये खत्म हो गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भाजपा प्रचंड बहुतमत से राजस्थान की सत्ता में आ रही है।

सीकर जिले के फतेहपुर में बीजेपी और कांग्रेस के समर्थक आमने-सामने हो गए। हंगामा करते हुए लोगों ने पथराव किया। लक्ष्मणगढ में एक पोलिंग बूथ पर पुलिसकर्मी ने टोका तो बीजेपी प्रत्याशी पुलिस से भिड़ गए। प्रत्याशी सुभाष महरिया और पुलिस के बीच झड़प हुई। जयपुर के पास कोटपूतली विधानसभा क्षेत्र में एक प्रत्याशी के समर्थकों और पुलिस में झड़प हो गई। भरतपुर जिले के कामां में भी फर्जी वोटिंग की शिकायत सामने आई।

बेटियाँ जो ब्याही जाएँ मुड़ती नहीं हैं… : काश! हर लड़की की किस्मत अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता नंदा जैसी होती और मिल पाता इसका जवाब

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपनी जायदाद का सबसे खास बंगला ‘प्रतीक्षा’ बेटी श्वेता बच्चन नंदा के नाम किया कर दिया है। इस बंगले की डील साइन करने के लिए उन्होंने 8 नवंबर, 2023 को 50.65 लाख रुपए रजिस्ट्रेशन और स्टैंप ड्यूटी के दिए और बंगला श्वेता का हो गया।

पर्दे के एंग्री मैन का ये कदम अपने पीछे कई सवाल छोड़कर गया है। मसलन दुनिया में ऐसी कितनी बेटियाँ होती हैं जिन्हें श्वेता जैसी किस्मत नसीब होती हैं और कितने ऐसे पिता हैं जो ऐसी सोच रखते हैं या फिर ऐसा कदम उठाते है जो ये दिखाती है कि बेटा और बेटी केवल और केवल संतान हैं।

एक जेंडर के तौर पर वो अपने बच्चों में हर तरह की समानता के पक्षधर होते हैं जिसमें अचल संपत्ति भी शामिल होती है। शायद इस सवाल का जवाब हमारे समाज में हमेशा ही पूरी ईमानदारी से नहीं दिया गया या फिर उसकी कोशिश ही नहीं की जाती, क्योंकि इसका एहसास मुझे शायद 3-4 साल की उम्र में ही बहुत शिद्दत के साथ हो गया था।

मेरे दिमाग में ये सवाल 70 के दशक से ही घूमता रहा कि क्यों मेरी आमा यानी दादी अपने पिता के घर में हमेशा नहीं रह सकती? मसला ये था कि मेरे दादा जी लोहाघाट जो अब उत्तराखंड के चंपावत जिले में पड़ता है के एक गाँव के थे। वो बचपन में अनाथ हो गए।

उनकी एक दीदी थी जिनकी शादी हुई और वो अपने ससुराल चली गईं। उनके मामा उन्हें अल्मोड़ा ले आए। शादी मेरी दादी से हुई थी और घर बार न होने की वजह से उनके ससुर यानी मेरी दादी के पिता ने उन्हें अपना घर रहने को दिया। आमा कहती थी कि उनके बोज्यू यानी पिता कहते थे,”रेबा तू यहीं रहना।”

इसी घर में मैं भी पैदा हुई। मेरे पैदा होने तक आमा के बोज्यू स्वर्ग सिधार गए थे। लेकिन जब से मैंने होश संभाला तो उस घर में रहने के दौरान हर वक्त ये जताया जाता कि जैसे हमें वहाँ रहने देने से आमा के भाई और उनका परिवार हम पर कोई एहसान कर रहे हों।

मुझे भी होश संभालने के बाद हर पल एहसानों के इस बोझ का एहसास हमेशा होता रहा। रहते तो हम आमा के पिता के घर में थे, लेकिन उनके भाई के परिवार के रवैये से हर वक्त ऐसा एहसास होता रहता कि जैसे हम किराए के घर में हैं, जबकि मेरी आमा भी उसी पिता की संतान थी जिनके उनके भाई थे।

इससे बालमन पर ऐसा असर पड़ा कि मैं सोचा करती कि मैं कभी शादी नहीं करूँगी। मुझे लगता था कि शादी के बाद लड़कियाँ पिता के घर में वैसे नहीं रह पाती जैसे शादी से पहले रहती थी। आमा से अक्सर पूछा करती थी कि आमा ये तो आपके पिता का घर फिर क्यों आप यहाँ नहीं रह सकती जब आपके पिता आपको यहाँ रहने को कह गए हैं।

आमा का हर वक्त यही जवाब होता, “रूचूलि ब्याह के बाद लड़कियाँ मायके में नहीं रहती ससुराल ही उनका घर होता है।” खैर इस बात को तीन दशक हो गए। हमारा अपना घर भी मेरे पापा-चाचा ने बना लिया और हम आमा के पिता का घर छोड़कर अपने घर आ गए, लेकिन पापा की अप्रैल 2020 में मौत के बाद ये सवाल फिर से मेरे आगे आकर खड़ा हो गया।

हालाँकि, हम चार बहनें हैं हमारा चाचा का बेटा है, लेकिन घरवालों की सोच चेलियाँ (बेटियाँ) तो ब्याह के चली गई। अब उनका ससुराल ही उनका घर है उन्हें मायके की अचल संपत्ति की क्या जरूरत। मेरी सास भी कहती हैं कि शादी में बेटियों का हिस्सा दे दिया जाता है।

क्या वो हिस्सा ऐसा होता है कि कोई होनी-अनहोनी होने पर एक पंछी लंबी उड़ान की तरह बेटी अपने उस आरामदायक घोसले में उसी आराम से रह पाएँ। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो हम सब जानते हैं कि अमूमन ऐसा नहीं हो पाता।

लेकिन मेरी समझ में आजतक ये बात नहीं आई कि कैसे जिस घर में बचपन, जवानी गुजारी वो शादी के बाद बेगाना क्यों हो जाता है? क्यों बेटियाँ शादी के बाद मेहमान बन जाती हैं?

क्यों बेटियाँ पिता के घर और संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार नहीं हो सकती? ये समाज का दबाव है या सोच जो हमें पिता की संपत्ति पर पुरजोर हक जताने से रोकती है।

हर पिता अक्सर फक्र से कहते हैं कि मेरी बेटी मेरा अभिमान, लेकिन बेटी के शादी के बाद ये अभिमान पराया क्यों हो जाता है। क्यों बेटी पर इतना नैतिक दवाब होता है कि अपने ही पिता के घर में शादी के बाद चार दिन से अधिक रह लें तो आस-पड़ोस की नाते-रिश्तेदारों की नजरें ऐतराज जताने लगती हैं, सवाल करने लगती है।

क्यों शादी के बाद मायके की संपत्ति सदा के लिए भाई के लिए छोड़ जाने का नैतिक दबाव बेटियों को ही झेलना होता है? कहते हैं न कि समाज जैसा होता है सिनेमा उसका ही प्रतिबिंब होता है।

तभी तो आए दिन फिल्मों में ‘बेटियाँ जो ब्याही जाएँ मुड़ती नहीं हैं… बाबा मैं तेरी मलिका, टुकड़ा हूँ तेरे दिल का, एक बार फिर से दहलीज़ पार करा दे, बाबुल का ये घर गोरी कुछ दिन का ठिकाना है, भैया तेरे अँगना की, मैं हूँ ऐसी चिड़िया रे, रात भर बसेरा है, सुबह उड़ जाना है’ जैसे गाने सुनाई पड़ते हैं।

हर कोई जैसे मान के बैठा हो कि शादी के बाद बेटी के लिए पिता का घर उसका अपना नहीं था। बस कुछ दिन का ही ठिकाना था। कितने माँ और पिताओं को इतनी हिम्मत होती है कि वो खुलेआम अपनी जायदाद बेटा और बेटी में बराबर बाँट सकें।

इसका खुलेआम ऐलान कर सकें जैसे कि अमिताभ बच्चन ने ये साल 2017 में ट्वीट कर किया था, “जब मैं मरूँगा, जो भी जायदाद मैं अपने पीछे इस दुनिया में छोड़कर जाऊँगा वो मेरे बेटे और बेटी के बीच बराबर बाँटा जाएगा, क्योंकि हम एक हैं।”

मैं यहाँ अमिताभ बच्चन का महिमा मंडन नहीं कर रही, लेकिन उन्होंने बेटा-बेटी को एक समझने की बात केवल हवा में नहीं कही। उसे साबित करके भी दिखाया। वहीं कितने भाईयों में ये जिगरा होता है कि वो अभिषेक बच्चन की तरह अपने पिता के बेटी को जाददाद देने का फैसला बगैर किसी नाखुशी के मंजूर कर पाएँ। ये मान पाएँ कि उनकी बहन केवल लड़की नहीं बल्कि उन्ही जैसी उनकी एक इंसान है।

शायद ऐसे माँ-पिता और भाई समाज में अँगुलियों पर गिनने लायक ही हों, क्योंकि बहन-बेटियों की सोशल कडिशनिंग ही समाज में ऐसे की जाती है कि वो दिल-दिमाग से ये मानने लगती हैं कि उन्हें पिता की जायदाद में क्योंकर हिस्सा चाहिए बस भाई का परिवार चलना चाहिए, फिर भले ही वो लाख मुश्किलों का सामना कर ससुराल में रह रही हों या भयकंर आर्थिक तंगी झेल रही हों।

लड़कियों के जायदाद के मामले में मैंने इतने साल में बस यही बदलाव देखा कि भले ही बहन-बेटियाँ पिता की जायदाद पर हक न जता सकें, लेकिन वो अपने पिता के सरनेम पर पूरा हक जताती हैं। जैसे कि मैं पूरे हक से लिखती हूँ- ‘रचना वर्मा बंजारा’ दरअसल ‘बंजारा’ मेरे पिता का तखल्लुस है जिससे वो अपनी साहित्यिक रचनाओं और अपनी बनाई कलाकृतियों और पेंटिंग में दर्ज किया करते थे और वर्मा उनका सरनेम था।

लेकिन ये बदलाव हकीकत में हो तो बात बनें जब लड़कियों, बहन, बेटियों को बगैर कहें, बगैर किसी कानूनी दाँव-पेंच के उनके पिता की जायदाद में ही नहीं बल्कि समाज में एक इंसान की तरह लिया जाए। न कि उनके जेंडर के आधार पर उनको तोला जाएँ।

दुनिया मान लें कि एक इंसान के तौर पर उनकी भी आर्थिक और अन्य तरह कि जरूरतें हो सकती हैं। तब कहीं जाकर हमें ये नहीं कहना पड़ेगा, फसलें जो काटी जाएँ, उगती नहीं हैं, बेटियाँ जो ब्याही जाएँ, मुड़ती नहीं हैं…’

आज़ाद रियाजुद्दीन ने भगवान गणेश पर की अपमानजनक टिप्पणी, फेसबुक पर कर डाली आपत्तिजनक पोस्ट: कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सज़ा

वलसाड की एक अदालत ने फेसबुक पर भगवान गणेश के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में एक मुस्लिम युवक को 3 साल जेल की सजा सुनाई है। यह मामला पाँच साल पुराना है। इस मामले में आजाद रियाजुद्दीन अंसारी नाम के युवक ने 2018 में गणेशोत्सव के दौरान फेसबुक पर एक अभद्र पोस्ट डालकर भगवान गणेश का अपमान किया था। मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद वलसाड में ही मामला दर्ज किया गया था। वहीं अब इस मामले में फैसला आ गया है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपराधी आजाद रियाजुद्दीन अंसारी वलसाड के शालीमार अपार्टमेंट का रहने वाला है। 34 वर्षीय आज़ाद ने 17 सितंबर, 2018 को सोशल मीडिया पर भगवान गणेश की एक अपमानजनक तस्वीर साझा की। फोटो के साथ, उसने भगवान गणेश के बारे में आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की। दरअसल, रियाजुद्दीन ने ‘गणेशजी की पूजा करता कुत्ता’ जैसे कैप्शन के साथ भगवान गणेश की मूर्ति को चाटते हुए एक कुत्ते की एडिटेड तस्वीर साझा की थी।

आज़ाद अंसारी के इस हरकत से स्थानीय हिंदू समाज और संगठनों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। जब भगवान के अपमान की घटना की जानकारी वलसाड शहर में गौरक्षकों बकुल राजगोर, हेमंत खेरनार और संगठन के अन्य कार्यकर्ताओं को हुई तो वे उसकी दुकान पर पहुँचे और विरोध दर्ज कराया।

बताया जा रहा है कि इस दौरान आक्रोशित हिंदुओं ने अपराधी आजाद रियाजुद्दीन अंसारी को जूते की माला पहनाई और जुलूस निकाला। लेकिन, ये मामला ऐसे ही नहीं सुलझ गया। बाद में आजाद अंसारी के खिलाफ भगवान गणेश का अपमान करने के आरोप में पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई गई।

पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बाद, वलसाड सिटी पुलिस ने 18 सितंबर, 2018 को आईपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए), 114 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत अंसारी को गिरफ्तार कर लिया।

फिर मामला वलसाड की अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कोर्ट में गया, जहाँ जाँच के दौरान कोर्ट में अंसारी की हरकतें साबित हो गईं. बहस के अंत में अदालत ने पुलिस की शिकायत, गवाहों और सबूतों पर विचार करते हुए आरोपित को दोषी ठहराया।

गौरतलब है कि 5 साल की अदालती कार्रवाई के बाद, वलसाड की अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने अंततः अंसारी को सीआरपीसी की धारा 248 (2) और आईपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए) और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत दोषी ठहराया और अंसारी को 3 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने अंसारी  पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। बता दें कि कोर्ट के आदेश की प्रति ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।