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घर के सामने कुत्ते को शौच मत कराओ…इतना कहने पर पड़ोसी ने महिला पर छोड़ा पिटबुल, कुत्ते ने 5 जगह नोचकर खून निकाला

दिल्ली में शुक्रवार (नवंबर 3, 2023) को एक शर्मनाक घटना घटी जहाँ एक परिवार ने आपसी बहस के बीच अपने पिटबुल कुत्ते को दूसरी महिला के ऊपर छोड़ दिया। वाकया पूरा सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। पीड़िता ने पड़ोसी परिवार के खिलाफ केस करवा दिया है।

घटना स्वरूप नगर थाना इलाके के गली नंबर 14 की है। यहाँ एक महिला अपने पड़ोसियों से सिर्फ ये कहने गई थी कि उसके घर के आगे वो लोग अपने कुत्ते को शौच न कराएँ, लेकिन ये बात इतनी बढ़ गई कि पहले पड़ोसी उस औरत से खुद भिड़ गए और फिर कुत्ते को भी उस पर छोड़ दिया।

पीड़िता का नाम रिया देवी है। रिया ने देखा था कि पड़ोस से एक महिला रोज अपने कुत्ते को उनके घर के सामने शौच कराने लाती थी। जिससे परेशान होकर वो 3 नवंबर को सुबह पौने 9 बजे इस बात की शिकायत करने उनके दरवाजे गई। दरवाजा खुलते ही घर की महिला बाहर निकली और दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। इस दौरान कुत्ता रिया के ईर्द-गिर्द ही घूम रहा था।

शोर मचने पर महिला के परिवार के और लोग भी बाहर आते हैं। पहले तो एक लड़का पिटबुल को घर में ले जाता है लेकिन बाद में रिया को धक्का दिया जाता है और ये देख पिटबुल भी रिया को काटने लगता है। पीड़ित महिला के गिरते ही लड़की पिटबुल को पकड़ अंदर ले जाती है। लेकिन वो दोबारा से आकर झपट्टा मारता है और कई जगह काट भी लेता है।

जब घटना स्थल पर कई लोग जुट जाते हैं तब जाकर घर का युवक पिटबुल को पकड़ता है और रिया वहाँ से हट पाती है। रिपोर्ट के मुताबिक रिया को शरीर में पाँच जगह जख्म आए हैं। पीड़िता का कहना है कि कुत्ते को उकसाने पर ही उसने काटना शुरू किया।

घटना के बाद रिया ने पहले अपना इलाज कराया फिर पड़ोसियों के खिलाफ शिकायत दी। महिला का आरोप है कि पड़ोसी महिला ने जानबूझकर अपने कुत्ते को उनपर छोड़ा। पुलिस ने भी सीसीटीवी देखने के बाद केस को आईपीसी की धारा 289 के तहत दर्ज कर लिया है।

रिया कहती है कि वो इस घटना के बाद से इतने खौफ में है कि घर से बाहर भी नहीं निकलती। बाकी पड़ोसियों का भी यही हाल है। पुलिस केस होने के बाद इस मामले की जाँच कर रही है।

पंजाब में एक सप्ताह में पराली जलाने के 10000 मामले, टॉप पर CM भगवंत मान का गृह जिला: यूपी-हरियाणा को दोष दे रहे AAP के मंत्री, आँकड़े कह रहे कुछ और

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर तो खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ है ही, साथ ही इस पर भरपूर राजनीति भी हो रही है। शनिवार (4 नवंबर, 2023) को पंजाब में पराली जलाने की 1360 घटनाएँ सामने आई हैं। सैटेलाइट की तस्वीरों में दिखा है कि पंजाब में किस तरह लगातार पराली जलाई जा रही है। केवल पिछले 4 दिनों की ही बात करें तो 6500 मामले अकेले पंजाब से सामने आ चुके हैं पराली जलाने के। इस साल पंजाब में अब तक पराली जलाने के 14,173 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

लेकिन, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय कह रहे हैं कि पंजाब में पराली जलाए जाने का दिल्ली के वातावरण पर ज़्यादा सर नहीं हो रहा है। उन्होंने सारा दोष हरियाणा और उत्तर प्रदेश पर मढ़ दिया। हालाँकि, आँकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि सबसे ज़्यादा पराली कहाँ जलाई जा रही है। पंजाब में भी दिल्ली की तरह AAP (आम आदमी पार्टी) की ही सरकार है, ऐसे में राजनीति के लिए दिल्ली के मंत्री अपनी पार्टी का बचाव करने में जुटे हुए हैं।

पिछले कुछ दिनों में आँकड़े किस तरह तेज़ी से बढ़े हैं, वो देखिए। 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक डेढ़ महीनों में पंजाब में पराली जलाने के 7673 मामले सामने आए थे। लेकिन, पिछले 4 दिनों में ही ये आँकड़ा दोगुना होने के करीब है। कई मामले तो सैटेलाइट की पकड़ में भी नहीं आते, क्योंकि पराली जला कर धुआँ रोकने के लिए ऊपर से ट्रैक्टर चला दिया जाता है। 3 नवंबर को पराली जलाने के 1551 और और 4 नवंबर को 1360 मामले सामने आए हैं।

इसका असर न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पंजाब पर भी पड़ रहा है। बठिंडा वहाँ का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। वहाँ का AQI एक दिन में ही 338 से 385 पर पहुँच गया। पंजाब में अगले कुछ हफ़्तों में 40% किसान अपने खेत से धान की कटाई कर के गेहूँ बोने वाले हैं, ऐसे में पराली जलाने की घटनाओं में अभी और बढ़ोतरी आ सकती है। पराली जलाने की सबसे ज़्यादा घटनाएँ शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में सामने आई।

यहाँ ऐसी घटनाएँ दर्ज की गईं। पिछले एक सप्ताह की बात करें तो पंजाब में पराली जलाने की 9987 मामले सामने आ चुके हैं। पंजाब के कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने बेहतर पैदावार के लिए 15 नवंबर तक किसानों को गेहूँ की बुआई कर लेने की सलाह दी है। यानी, तब तक पराली जलाने की घटनाएँ ऐसे ही बदस्तूर जारी रहेंगी। इस पूरे साल की भी बात करें तो सबसे ज़्यादा 2147 मामले संगरूर से ही सामने आए हैं। इसके बाद तरनतारन (1585), फिरोजपुर (1531), अमृतसर (1376) और पटियाला (1092) का नंबर आता है।

इसी बीच बीच सोशल मीडिया पर पंजाब के बठिंडा से एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में देखने को मिल रहा है कि कई किसान शर्ट-पैंट में खड़े दो व्यक्तिों को घेरकर उनसे तेज-तेज बात कर रहे हैं और उसके बाद उनमें से एक को देकर पराली में आग लगवा रहे हैं। वीडियो बनाने वाले को कहते सुना जा सकता है- ये देखो भाई ये आग बुझाने आए थे और अब खुद आग लगा रहे हैं। ये शर्ट पैंट में नजर आ रहे व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि सरकारी अधिकारी हैं। जो किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए गाँव गए थे।

‘सनातन के लिए हर घर से एक बच्चा कफ़न बाँध कर निकलेगा’: चादर और फादर पर बागेश्वर धाम वाले बाबा का वार, बोले – ये देश बाबर का नहीं, रघुवर का है

देहरादून के परेड ग्राउंड स्थित खेल मैदान में शनिवार (4 नवंबर, 2023 ) को आयोजित दिव्य दरबार में बागेश्वर धाम मध्य प्रदेश के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने धीरेन्द्र शास्त्री का स्वागत किया। वहीं उत्तराखंड को सनातन का शीश बताते हुए धीरेन्द्र शास्त्री ने एक बार फिर हिन्दू राष्ट्र के संकल्प को दोहराते हुए धर्मान्तरण का विरोध किया। 

बता दें कि शनिवार को देहरादून के परेड ग्राउंड के खेल मैदान में पहली बार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का दरबार लगा। रात 8:20 बजे धीरेंद्र शास्त्री मंच पर पहुँचकर हनुमान जी के चरणों मे शीश नवाया। मंच पर सबसे पहले संतो ने सनातन को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया। वहीं धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि देवभूमि में कण कण में भगवान का वास है।

हालाँकि, देर से शुरू हुए दिव्य दरबार में तीन ही अर्जियाँ पढ़ी गईं। इसके साथ ही के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देहरादून में 5 दिनों तक कथा करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कथा के दौरान सनातन धर्म का झंडा बुलंद करने का संदेश दिया जाएगा। जिस तरह एक ब्लड ग्रुप वाला दूसरे ब्लड ग्रुप वालों को रक्त नहीं दे सकता, वैसे ही कैसे हम दूसरा मजहब स्वीकार सकते हैं।

धीरेन्द्र शास्त्री ने देव भूमि उत्तराखंड में तेजी से फैलते दरगाहों और मस्जिदों पर चिंता जताते  हुए कहा, “वो जमीनों पर कब्जा कर चादर डाल देते थे, अब जरूरत है बाबर को बेघर कर रघुवर का नाम बढ़ाया जाए। उत्तराखंड में यह काम होते दिख रहा है। जब उन्हें बागेश्वर नाम सुनायेंगे तो कोई चादर व फादर के निकट नहीं आएगा।”

उन्होंने मुख्यमंत्री धामी की तारीफ करते हुए कहा कि बाबर को बेघर कर दे ऐसा मुख्यमंत्री होना चाहिए। साथ ही उन्होंने धर्मनगरी उत्तराखंड में मदिरा बंद करने के संकल्प को भी दोहराया। 

धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि सौभाग्य है कि आप लोगों को देवभूमि में जन्म मिला। अब हर घर से एक बच्चा सनातन का कफ़न बाँधकर निकलेगा। दुनिया की कोई भी शक्ति हनुमान जी के सामने टिक नहीं सकती। जब शरीर दूसरा खून स्वीकार नहीं कर सकता, तो हम दूसरे मजहब को क्यो स्वीकार करें। यह देश बाबर का नही, रघुवर का है।”

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भारत का मुकुट है। ऐसे में सिर सनातन से ऊपर होगा तभी भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा। उत्तराखंड अब सिर्फ सनातन-सनातन दिखेगा तभी भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा। उन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ों पर मस्जिद नहीं, बल्कि राम मंदिर के निर्माण का आह्वान भी किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। 

गौरतलब है कि श्री पशुपतिनाथ मंदिर भारत चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस दिव्य दरबार को शाम चार बजे से शुरू होना था, लेकिन मुंबई से देहरादून आने के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विमान को दो बार इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। लिहाजा वह रात आठ बजकर 20 मिनट पर परेड मैदान पहुँचे। उन्होंने देरी से आने का कारण बताते हुए भक्तों से इंतजार के लिए खेद भी व्यक्त किया।

इजरायली बॉयफ्रेंड की लाश के नीचे प्रेमिका ने छिप कर बचाई जान, प्रियंका गाँधी तुष्टिकरण की राजनीति में फिलिस्तीन पर दे रहीं ज्ञान

फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर को इजरायल में चौतरफा हमला करके बच्चे, महिलाएँ एवं बुजुर्ग सहित लगभग 1400 लोगों को मौत के घाट उतार दिए था। इसके बाद इजरायल ने हमास के खात्मे के लिए उस पर कार्रवाई कर रहा है। इसको लेकर कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा इजरायल को कठघरे में खड़ा कर रही हैं, जबकि हमास के वीभत्स कारनामों पर वह चुप रही थीं। हमास ने छोटेद-छोटे बच्चों के गले काट दिए थे। यहाँ तक कि उन्हें जिंदा जला दिया था।

हमास के हमलों में बाल-बाल बची ऐसी ही एक पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई है। नोआम मजाल बेन-डेविड ने बताया कि जब हमास के आतंकियों ने इजरायल पर हमला किया था, तब वह किबुत्ज में आयोजित फेस्टिवल में हिस्सा ले रही थीं। उस समय उनके साथ उनके बॉयफ्रेंड डेविड नेमन भी थे। आतंकियों ने नोआम के बॉयफ्रेंड को गोली मारकर हत्या कर दी और उन्हें बॉयफ्रेंड के शव के नीचे छिपकर अपनी जान बचानी पड़ी थी।

हालाँकि, प्रियंका गाँधी ने हमास के बर्बर अत्याचार का इतनी पीड़़ा के साथ कभी विरोध नहीं किया। लेकिन, फिलिस्तीन पर कार्रवाई से उनकी उपजी पीड़ा भारत के चुनावी मौसम में काटी जा रही वोट की फसल के रूप में देखा सकता है। इसके कॉन्ग्रेस की पुरानी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के रूप में भी समझा जा सकता है।

दरअसल, प्रियंका गाँधी ने रविवार (5 नवंबर 2023) को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट लिखा। इसमें उन्होंने कहा, “यह भयावह और शर्मनाक है, जिसे शब्दों बयां नहीं किया जा सकता कि लगभग 10,000 नागरिकों, जिनमें से लगभग 5000 बच्चे हैं, का नरसंहार किया गया है। पूरे परिवार को ख़त्म कर दिया गया है। अस्पतालों और एम्बुलेंसों पर बमबारी की गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “शरणार्थी शिविरों को निशाना बनाया गया है, फिर भी ‘मुक्त दुनिया’ के तथाकथित नेता फ़िलिस्तीन में नरसंहार का वित्तपोषण और समर्थन जारी रखे हुए है। युद्धविराम सबसे छोटा कदम है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तुरंत लागू किया जाना चाहिए, अन्यथा इसका कोई नैतिक अधिकार नहीं बचेगा।”

27 साल की नोआम ने उस भयानक दिन की याद को साझा करते हुए कहा कि वे अपने बॉयफ्रेंड के साथ उत्सव में व्यस्त थीं। अचानक हर तरफ विस्फोट होने लगे तो उन्हें लगा पटाखे छूट रहे हैं। अचानक हमास के आतंकियों ने धावा बोल दिया और ऑटोमेटिक हथियारों से हर तरफ कहर बरपाने लगे।

नोआम बताती हैं, “हम वहाँ से निकलने के लिए अपनी कार में बैठे, लेकिन आतंकियों ने निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिए थे। बाहर निकलना असंभव था। एक सुरक्षा गार्ड चिल्लाते हुए कि अपनी जान बचाने के लिए भागो।” नोआम और डेविड भागने लगे। उन्हें स्टील की दो कंटेनर दिखे। वे दोनों उसमें घुस गए।

इसी दौरान आतंकियों ने ग्रेनेड फेंक दिया। इसमें उनकी दाईं दरफ के लोग मारे गए। इस हमले में वे दोनों बचे रहे। लगभग तीन घंटे तक वे उसी कंटेनर में छिपे रहे। इस दौरान बाहर के भयावह मंजर को वे अपनी कानों से सुनते रहे। नोआम ने बताया, “मैंने एक लड़की को चिल्लाते हुए सुना ‘कृपया मुझे मत ले जाओ। बस मुझे अकेला छोड़ दो’। लेकिन उन लोगों ने लड़की के क्रूरता की हदें पार कीं।”

अचानक हमास का एक आतंकी कंटनेर में कूद गया और अल्लाह हू अकबर चिल्लातेे हुए लोगों पर गोलियाँ बरसाने लगा। नोआमी ने बताया कि वह कंटेनर में अंदर की तरफ चली गई थीं। इसी दौरान नोआम ने देखा कि उनके बॉयफ्रेंड डेविड के सीने में गोली लगी हुई है और वह मृत है। वहीं, पड़ी एक लड़की का कंधा ब्लास्ट में उड़ गया है।

नोआम ने मान लिया कि अब उनकी भी मौत निश्चित है। इसके बाद वह अपनी आँखें बंद करके मौत की प्रतीक्षा करने लगीं। हालाँकि, आतंकियों की गोली उनके पैर और हीप में लगी थी और खून बह रहा था, लेकिन वह हिली नहीं। आतंकियों को लगा कि वह मर गई हैं और वे वहाँ से चले गए।

कुछ घंटों के बाद इजरायल की सेना IDF वहाँ पहुँचीं तो इन्हें वहाँ से ले गई। उस कंटेनर में छिपे 16 लोगों में सिर्फ चार लोग ही बच पाए। बचे हुए सभी लोगों को ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ दिनों के ईलाज के बाद वह स्वस्थ हो गईं और दुनिया के सामने उस घटना का जिक्र किया।

प्राइवेट पार्ट्स दिखाती लड़की, एक्सप्रेशंस देता लड़का: इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर गुनगुन गुप्ता का MMS वीडियो वायरल, टेलीग्राम पर शेयर कर रहे लोग

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गुनगुन गुप्ता का कथित रूप से अश्लील वीडियो लीक हो गया है। इस वीडियो में वो एक लड़के के साथ वीडियो कॉल पर दिखाई दे रही हैं। गुनगुन गुप्ता इंस्टाग्राम पर खासी सक्रिय हैं, जहाँ उनके 58 लाख फॉलोवर्स हैं। इतना ही नहीं, स्नैपचैट पर भी उनके 6 लाख से अधिक फॉलोवर्स हैं। इसी तरह फेसबुक पर उनके 2 लाख से ज़्यादा फॉलोवर्स हैं। यूट्यूब पर भी 66,000 लोगों ने उनके चैनल को सब्स्क्राइब कर रखा है। ऐसे में उनका वीडियो वायरल होना चर्चा का विषय बना हुआ है।

इसमें गुनगुन गुप्ता कथित तौर पर वीडियो कॉल पर कपड़े उतारते हुए नज़र आ रही हैं। वो अपने स्तन और प्राइवेट पार्ट्स दिखाती नज़र आ रही हैं। वहीं वीडियो कॉल पर उनके साथ जुड़ा लड़का भी एक्सप्रेशंस दे रहा है। टेलीग्राम पर ये वीडियो खासा वायरल हो रहा है। गुनगुन गुप्ता ने इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। इंस्टाग्राम पर उनके डांस वाले वीडियो अक्सर वायरल होते हैं। एक वीडियो में वो गरीबों को वस्त्र वितरित करते हुए भी दिखाई दे रही हैं।

हालाँकि, मीडिया में कहा जा रहा है कि इन्फ्लुएंसर की टीम ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है और इसे प्रसारित होने से रोकने के लिए कार्यवाही शुरू कर दी है। गुनगुन गुप्ता को TikTok से पहचान मिली थी, लेकिन चीन के एप्स को प्रतिबंधित किए जाने के क्रम में भारत सरकार ने टिकटॉक पर भी बैन लगा दिया, जिसके बाद वो इंस्टाग्राम पर वायरल होने लगीं। ‘बचपन का प्यार नहीं भूल जाना रे’ पर रील बनाने के बाद उन्हें 10 करोड़ व्यूज रिकॉर्ड मिले थे।

उनकी उम्र मात्र 19 वर्ष बताई जाती है। वायरल वीडियो के दौरान एक फोन नंबर भी फ्लैश होता है, जो दीपू चावला के नाम से शो होता है। हालाँकि, साफ़ है कि ये वीडियो प्राइवेट है और इसे सोशल मीडिया में शेयर नहीं किया जाना चाहिए। फिर भी ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी कई लोग इसे शेयर कर रहे हैं जो गलत है। किसी की प्राइवेट वीडियो वायरल करना भी यौन अपराध है। गुनगुन गुप्ता का पक्ष इस पर अभी नहीं आया है, ऐसे में अफवाहें भी नहीं फैलाई जानी चाहिए।

BJP नेता की निर्मम हत्या… एक छुटपुट घटना: CM बघेल का बयान, मौत पर कर डाली खुद की वाहवाही वाली राजनीति

छत्तीसगढ़ में चुनाव मतदान से 2 दिन पहले बस्तर में भाजपा नेता रतन दुबे की निर्मम हत्या कर दी गई और जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इस पर जवाब माँगा गया तो उन्होंने बातों ही बातों में इसे एक छोटी घटना करार दे दिया।

सीएम बघेल ने मीडिया से बात करते हुए रतन दुबे के परिवार के प्रति पहले संवेदना व्यक्त की और फिर अपनी वाहवाही वाले अंदाज में बोले कि उनकी फोर्स के कारण नक्सली प्रभाव कम हुआ। लोग दूर-दूर इलाकों में जाते हैं। लेकिन ऐसी छुट-पुट घटनाएँ भी हो रही हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा शेयर वीडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है-

“जिले स्तर के पदाधिकारी की मृत्यु हुई है। पूरे परिवार के प्रति मैं संवेदना व्यक्त करता हूँ लेकिन लगातार हमारे फोर्स के दबाव के चलते नक्सली पीछे हो गए हैं। कहीं-कहीं छुटपुट घटनाएँ हो रही हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन जो पहली वाली स्थिति थी उसमें और अब में जमीन-आसमान का फर्क है।”

मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी बात कहे जाने के बाद लोग उनकी वीडियो देख पूछ रहे हैं कि एक व्यक्ति को निर्मम ढंग से मार दिया गया और ये छोटी घटना लगती है उनको। एक यूजर कहता है- छोटा वाकया। जब कोई कॉन्ग्रेसियों को कुछ होता है तभी इनके लिए वो घटना बड़ी होती है।

एक यूजर ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार छत्तीसगढ़ को नक्सल हिंसा से बचाने में असमर्थ रहे इसलिए जनता ने इनपर से अपना विश्वास खो दिया है।

रतन दुबे की बस्तर में नक्सलियों ने की हत्या

उल्लखनीय है कि 4 नवंबर की शाम छत्तीसगढ़ के बस्तर में रतन दुबे की हत्या चुनाव प्रचार के बाद भरी भीड़ के बीच की गई थी। रिपोर्ट्स में बताया गया कि प्रचार खत्म होने के बाद मंच के पास मुर्गों की लड़ाई का आयोजन किया गया, जिसके कारण वहाँ भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान ग्रामीणों के वेश में आए पुरुषों का एक समूह चुपचाप भीड़ से अलग हो गया और मंच के पास आने लगा।

दुबे ने उन्हें तुरंत देख खतरे को भांप लिया। वह मंच से कूदकर भागने लगे। हंगामे के कारण ग्रामीणों की नजर भी वहाँ पड़ी और सबने देखा कि बंदूक, खंजर और कुल्हाड़ी लिए लोगों का एक समूह दुबे का पीछा कर रहा थे। कुछ दूर पीछा करने के बाद एक नक्सली ने दुबे पर पीछे से गोली मारी। जैसे ही वो नीचे गिरे वैसे ही उनके ऊपर पीछे खंजर और कुल्हाड़ी लेकर हमला बोल दिया गया। ये घटना जरघाटी थाने से 5 किलोमीटर दूर शाम करीब 5:30 हुई। पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

इससे पहले 16 जनवरी को भाजपा कार्यकर्ता बुधराम करतम की हत्या की गई थी। इसके बाद भाजपा नेता नीलकंथ कक्कम को मारा गया था। 10-11 फरवरी में नारायणपुर के ही उपाध्यक्ष साग साहु और दंतेवाड़ा में रामधर अलामी की हत्या हुई थी।

आरा शेख ने मंदिर में घुस कर पैंट उतारा, शिवलिंग पर किया पेशाब, वीडियो वायरल: पश्चिम बंगाल पुलिस ने बताया मानसिक बीमार

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में एक शख्स हिन्दू मंदिर में घुस कर शिवलिंग के सामने पेशाब करता दिख रहा है। यह वीडियो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का बताया जा रहा है। आरोपित की पहचान कथित तौर पर आरा शेख के रूप में हुई है। पुलिस द्वारा केस दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार किए जाने की सूचना है। घटना मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) की बताई जा रही है, जिसके बाद आम लोगों में नाराजगी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुर्शिदाबाद जिले के सालार ब्लॉक का है। यहाँ के वायरल हो रहे 36 सेकेंड के वीडियो की शुरुआत में आरा शेख बहस करता दिख रहा है। कुछ ही सेकेंड के बाद आरा शेख मंदिर के अंदर घुस कर मूर्ति तक पहुँच जाता है। मौके पर मौजूद कुछ लोग शेख को रोकने की कोशिश करते हैं। हालाँकि आरा शेक नहीं रुकता है। इसके बाद उसने मंदिर के गर्भगृह में घुस कर शिवलिंग के आगे पैंट खोल कर पेशाब किया। मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में वायरल हो गया।

इस वीडियो को @HinduVoice_in नाम की X प्रोफ़ाइल द्वारा शनिवार (4 नवंबर 2023) को शेयर किया गया। वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में नाराजगी फ़ैल गई। हिन्दू समाज ने इस घटना को अपनी आस्था पर प्रहार बताया है और आरोपित आरा शेख के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठने लगी।

आदर्श पांडेय सनातनी ने पश्चिम बंगाल पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “यदि इस राष्ट्र में आप लोगों ने संविधान की शपथ ली है तो ऐसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वालो लोगों पर कठोरतम कार्यवाही की आपसे अपेक्षा है।”

वहीं दुर्गेश कौशिक ने इसी वीडियो पर कहा, “अखिर चाहते क्या हो। आधा बंगाल तो ले ही चुके हो। आधे में घुस गए हो। कुछ साल तो जीने दो। इतनी जल्दी क्यों बांग्लादेश बना कर बंगाल को निकालना चाहते हो?”

मीडिया पोर्टल Newsroompost.com ने इस मामले में सालार पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी से बात करने का दावा किया है। न्यूज़रूम पोस्ट के मुताबिक पुलिस अधिकारी ने आरोपित की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। आरोपित आरा शेख को मानसिक तौर पर बीमार भी बताया गया और साल 2017 से उसकी बीमारी का इलाज चलने की बात कही गई। मीडिया पोर्टल ने अपनी रिपोर्ट में आरोपित आरा शेख के कथित मेडिकल कागजों के साथ स्थानीय थाने पर हुई बातचीत का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया है।

गोली लगते ही ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष कर गिर जाते थे कारसेवक, ईश्वर की सेवा में न्यौछावर होने के लिए शरीर पर लिखवा लिया था नाम-पता

साल 1990 का दशक हर मायने में भारतीय जनमानस में बदलाव का दशक था। एक तरफ मंडल कमीशन को लागू किया गया था तो दूसरी तरफ राम जन्मभूमि अयोध्या पहुँचे कारसेवकों का नरसंहार किया गया था। मंडल कमीशन लागू करके देश की एक बड़ी आबादी को आरक्षण का लाभ देकर तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह विलेन बन गए तो दूसरी तरफ कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाकर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ‘मुल्ला मुलायम’ बन गए और सेक्युलर जमात के हीरो बन गए।

इन दोनों घटनाओं ने भारतीय राजनीति और जनमानस को बेहद गहराई तक प्रभावित किया। OBC आरक्षण ने पिछड़ों में समृद्धि लाने का काम किया तो अयोध्या गोलीकांड ने हिंदुओं में नवचेतना का संचार किया। उन्हें पता लगा कि उनके अराध्य के दर्शन करने पर भी जालियाँवाला बाग कांड की तर्ज पर उन्हें गोलियों से छलनी किया जा सकता है।

आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है। हर तरफ भगवान राम की गूंज सुनाई दे रही है, लेकिन इस भव्य मंदिर के लिए हिंदुओं खासकर कारसेवकों ने अपने सीने पर गोलियाँ खाईं और ‘जय श्रीराम’ बोलकर अयोध्या की पुण्य भूमि पर अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया। कारसेवकों को पता था कि उन्हें मृत्यु को वरण करना पड़ सकता है, फिर भी वे पीछे नहीं हटे।

शास्त्रों में कहा गया है कि मानव शरीर निर्जीव हो जाने के बाद भी वह बिनी किसी पूर्वाग्रह या ईर्ष्या के सम्मान का अधिकारी होता है, लेकिन मुलायम सिंह यादव की पुलिस ने इस सार्वभौमिक नियमों की भी अनदेखी की और मृत रामभक्तों के शवों को क्षत-विक्षत किया। आज हम उसी अयोध्या की भूमि पर सांसारिक शरीर के त्याग की बात करेंगे।

साल 1990 के अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत की मद्धिम-मद्धिम बयार शीतकाल के आगमन का आभास देने लगी थी। लगभग 400 वर्षों से मुक्ति का मार्ग दे रहे अयोध्या के राम मंदिर को लेकर हिंदुओं में छटपटाहट थी। हिंदू नेताओं एवं संतों के आग्रह पर कारसेवकों का जनसैलाब अयोध्या पहुँच चुका था, लेकिन यहाँ सब कुछ सामान्य नहीं था। राजनीति के मोहरे साधने के चक्कर में मुलायम सिंह यादव ड्रैक्युला बने बैठे थे।

अयोध्या में कारसेवकों को आगमन को देखते हुए कदम-कदम पर पुलिस बल तैनात थी। शहर में आने वाले हर रास्ते पर बैरियर लगाकर सुरक्षाबलों के हवाले कर दिया गया था। बड़ी-बड़ी इमारतों पर पुलिस के जवान हथियार लिए निशाना साधे बैठे थे। हर सुरक्षाकर्मी के हाथ में हथियार थे। शहर की फिजा में भयानक शांति थी, लेकिन कारसेवकों का ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष उसे तोड़ने का प्रयास कर रहा था।

देश के कोने-कोने से आए कारसेवकों का जत्था शहर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान भक्तों के कानों में गोलियों की आवाज सुनाई देने लगी। अयोेध्या का वातावरण बारूद की गंध से मलिन हो चला। कुछ कारसेवक गोलियों से बचने के लिए भगवान का नाम लेते हुए जमीन पर लेट गए। इनमें युवा से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे। इसके बावजूद इन पर लाठियाँ बरसाईं जाने लगीं। बूटों से कुचला जाने लगा। यहाँ तक कि उन पर घोड़े दौड़ाए गए।

कितने ही लोगों के अंग भंग हुए, कितने ही लोग काल कल्वित होकर ईश्वर के पास प्रस्थान कर गए। जो घायल थे, वे फिर भी पीछे हटने को तैयार नहीं थे। जय श्रीराम का उद्घोष करते रहे। शायद इन्होंने 30 अक्टूबर की घटना को जानकर स्वयं को ईश्वर की सेवा में न्यौैछावर करने के प्रण के साथ ही अयोध्या के लिए प्रस्थान किया था। इसलिए इन्होंने अपने शरीर के विभिन्न अंगों पर अपने नाम पर पता लिख दिया था कि अगर राजनीति के इस दुष्चक्र में उनका शरीर निर्जीव भी हो जाए तो वह ससम्मान घर तक पहुँचा दिया जाए।

जो कारसेवक अयोध्या नगर में प्रवेश कर गए और गलियों से होकर गुजरने लगे, उन पर गोलियाँ बरसाई जाने लगीं। यह कारसेवकों का दृढ़ता ही थी कि वे गोली खा रहे थे और जय श्रीराम कहकर शरीर त्याग रहे थे। जो कारसेवक गोलियों से बचने के लिए आसपास के घरों में घुस गए थे, उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला और इन निहत्थे लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी। जिन घरों में अंदर से दरवाजा बन कर दिया गया था, उसे पुलिस ने तोड़ दिया।

राजस्थान के बीकानेर से आए दो भाइयों- शरद कोठारी और राम कोठारी के बलिदान से कौन भला परिचित नहीं होगा। दोनों भाई भी आतंक के इस माहौल में खुद को बचाने के लिए एक घर में छिपे हुए थे। पुलिस ने घर का दरवाजा तोड़ा और बड़े भाई शरद कोठारी को बाहर निकालकर उनके सिर में गोली मार दी। अपने भाई को बचाने के लिए राम कोठारी दौड़े तो उन्हें भी गोली मार दी गई। दोनों भाइयों की घटनास्थल पर ही मौके पर ही मौत हो गई।

मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या के बारे में बयान दिया था कि वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। 30 अक्टूबर को कोठरी भाइयों ने गुम्बद के ऊपर भगवा ध्वज फहरा दिया था, लेकिन दो दिन बाद 2 नवंबर को दोनों भाई बलिदान हो गए। कहा जाता है कि इस नरसंहार में दर्जनों लोगों की जान गई थी, लेकिन चार-पाँच शवों को छोड़कर पुलिस ने सारे शव उठा लिए थे। उन शवों का आज तक पता नहीं चल पाया।

उस समय विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद केंद्रीय गृहमंत्री थे। कारसेवकों पर गोली चलाने से वे ख़ुश थे और इसके लिए उन्होंने मुलायम सिंह यादव की पीठ थपथपाई थी। मुलायम सिंह भी अपनी इस कार्रवाई को सरकारी मर्दानगी समझते थे। यही कारण है कि समय-समय पर वे इसका गुणगान भी करते थे।

नवंबर 2017 में अपने 79वें जन्मदिन के मौके पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा था कि देश की ‘एकता और अखंडता’ के लिए अगर सुरक्षा बलों को गोली चला कर लोगों को मारने भी पड़े तो ये सही था। इतना ही नहीं, उन्होंने यहाँ तक कहा दिया था कि अगर और लोगों को मारना पड़ता तो सुरक्षा बल ज़रूर मारते।

मुलायम ने गर्व के साथ कहा था कि इस गोलीकांड में 28 कारसेवकों को मौत के घाट उतार दिया गया था। मंदिर आंदोलन को अंजाम तक पहुँचाने वाली भाजपा इस हत्याकांड के लिए मुलायम सिंह यादव को हमेशा कोसती रही। हालाँकि, जब पिछले सा मुलायम सिंह यादव की मौत हुई तो भाजपा सरकार ने उन्हें देश के द्वितीय सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया।

अगर मुलायम ने गोली नहीं चलवाई होती तो शायद आज राम मंदिर नहीं बन रहा होता। मुलायम ने जिस चीज को दबाने के लिए गोली चलाई, शायद उन्हें पता नहीं था कि वो हिंदुओं की गर्भनाल है, उसी आत्मा में रची-बसी है। मुलयाम सिंह यादव ने शरीर छीना लेकिन, मन को उसके आराध्य से अलग नहीं कर पाए। आखिरकार उस घटना के 33 साल बाद यह सपना भी साकार हो गया।

उत्तराखंड में आ सकता है बड़ा भूकंप, नेपाल में आने वाले भूकंप पश्चिम की तरफ बढ़ रहे: IIT कानपुर के साइंटिस्ट ने जताई चिंता

नेपाल में तबाही मचाने वाले भूकंप को देखने के बाद आईआईटी कानपुर के एक साइंटिस्ट ने भविष्य में आने वाले खतरे पर बात की है। साइंटिस्ट ने कहा है कि ये कम मैग्नीट्यूड के ज्यादा भूकंप आना एक बड़े भूकंप के आने की आशंका है।

साइंटिस्ट का नाम प्रोफेसर जावेद मलिक है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा- “एक ही जगह पर बार-बार भूकंप आना चिंताजनक बात है। इसके अलावा कम मैग्नीट्यूड के ज्यादा भूकंप आना भी एक बड़े भूकंप की आशंका है। उनके मुताबिक अगर यही हाल रहा तो इससे भारत का उत्तराखंड भी प्रभावित हो सकता है।”

उन्होंने बताया कि ये एक ट्रेंड देखा गया है कि नेपाल में आने वाले भूकंप वेस्ट की तरफ बढ़ रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो इसका दुष्प्रभाव उत्तराखंड पर पड़ेगा। संभव है उत्तराखंड में भी ऐसा बड़ भूकंप आए। अनुसंधान के दौरान यह भी सामने आया है कि दरारों में जब पानी जाता है तो उससे वाटर प्रेशर बनता है और उसकी वजह से भूकंप की आशंका बढ़ जाती है।

जानकारी के मुताबिक आईआईटी कानपुर में एक प्रोजेक्ट के चलते फॉल्ट लाइंस को मार्क किया गया जहाँ भूकंप आने की आशंका है या वहाँ भविष्य में प्लेट्स खिसक सकती है। उनकी इस स्टडी से अर्बन डेवलपर्स और प्लॉनर्स को आसानी होगी।

उन्हें पता चलेगा कि किन जगहों पर भारी कंस्ट्रक्शन और प्रोजेक्ट्स नहीं लाने हैं ताकि भूकंप की आशंका से सुरक्षित रहा जा सके। इस स्टडी ने यह भी अनुमान लगाया है कि अगर भूकंप आएगा तो कितने मैग्नीट्यूड का आएगा।

बता दें कि नेपाल में शुक्रवार को आए भूकंप से भारी तबाही मची। जिसमें 129 लोगों की मौत हुई जबकि कई घायल हो गए। भूकंप का सबसे ज्यादा प्रभाव रुकूम पश्चिम और जाजरकोट में पड़ा। किसी परिवार ने अपने घर के कई सदस्यों को खो दिया तो कहीं पूरा परिवार तबाह हो गया।

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि जिस समय भूकंप आया उस समय पंफा रावत जाजरकोट से भारत में अपने बेटे से बात कर रही थीं। अचानक भूकंप आया, घर गिरा और वो उनके पति और दो बेटे मलवे में समा गए। पड़ोसियों ने मशक्कत से उन लोगों को वहाँ से निकाला जब उनकी जान बच पाई। इसी तरह एक परिवार के 6 के 6 सदस्य भूकंप के कारण चल बसे।

सीडीओ सुनार ने बताया कि जिले में जितने पत्थर और मिट्टी के घर थे सभी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वो लोग अब भी राहत-बचाव कार्य कर रहे हैं। घायलों को इलाज देने का प्रयास हो रहा है मगर स्वास्थ्यकर्मियों, उपकरणों और दवाइयों की कमी के कारण दिक्कत आ रही है। हालात ये हैं कि अभी कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सका है कि इस भूकंप ने कितनी तबाही मचाई

ऐसे ही रुकुम वेस्ट में इस आपदा से 52 से ज्यादा लोगों की जान गई। एक स्थानीय ने सुनाया कि कैसे एक घर में कुछ मेहमान आ रहे थे वो लोग भी इस भूकंप के कारण मलवे में दबकर मर गए। ऐसी कहानी सरस्वती की भी है। सरस्वती ने बताया कि जब घर गिरा तो वो बेहोश हो गई थीं। होश में आने के बाद पता चला कि उनकी बेटी और नाति-नातिन अब इस दुनिया में नहीं।

इस भूकंप में नालागड़ की डिप्टी मेयर सरिता सिंह की भी मृत्यु हो गई। खालंगा में घर गिरने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि नेपाली कॉन्ग्रेस की ओर से वो डिप्टी मेयर पिछले सार बनी थीं। लेकिन एक भूकंप ने उनके राजनैतिक करियर के साथ उनकी जिंदगी भी उनसे ले ली।

CRPF की गाड़ी को भीड़ ने घेरा, ड्राइवर को नीचे खींचने की कोशिश और पत्थरबाजी: श्रीनगर में हिंसक भीड़ को सुरक्षा बलों ने किया तितर-बितर

कश्मीर के श्रीनगर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की गाड़ी से 2 बाइक सवारों की टक्कर हो गई। इस एक्सीडेंट में 1 बाइक सवार की मौत हो गई। वहीं दूसरा बाइक सवार घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मृतक का नाम मंज़ूर अहमद है। इस घटना के बाद स्थानीय भीड़ ने CRPF के वाहन को घेर लिया और तोड़फोड़ की। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। घटना शनिवार (4 नवंबर 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना श्रीनगर के चिनार चौक इलाके की है। शनिवार को CRPF की 25वीं बटालियन की QRT का वाहन इसी चौक के पास से गुजर रहा था। अचानक ही JK 01AM 4913 नंबर की एक TVS ज्यूपिटर स्कूटी सवार 2 युवक उधर से गुजरे। चौक के पास इनकी बाइक की CRPF के बंकर वाहन से टक्कर हो गई। इस टक्कर में बाइक चला रहा व्यक्ति मंज़ूर अहमद बुरी तरह से घायल हो गया। घायल मंज़ूर को आसपास के लोगों ने अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

इस घटना से चौक पर मौजूद भीड़ भड़क उठी। भीड़ ने CRPF के वाहन को घेर लिया। वो ड्राइवर को नीचे उतरने के लिए दबाव बना रहे थे। ऑपइंडिया को मिले वीडियो में कुछ लोग दरवाजा भी पीटते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान एक व्यक्ति वाहन के आगे चढ़ कर शीशे पर हमला करता है। वहीं दूसरा व्यक्ति ड्राइवर की साइड से चढ़ कर खिड़की में हाथ डालने का प्रयास करता है। नीचे तमाम लोग ड्राइवर को गंदी-गंदी गालियाँ देते सुने जा सकते हैं।

वायरल हो रहे एक अन्य वीडियो में कुछ लोगों को सुरक्षा वाहनों पर पत्थरबाजी करते भी देखा गया।

मौके पर पुलिस बल के साथ अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने पहुँच कर हालात को काबू किया और हिंसक हो रही भीड़ को तितर-बितर किया। पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है। मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।