भारत ने ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 में लगातार 8वें मैच में जीत दर्ज की। रविवार (5 नवंबर, 2023) को दक्षिण अफ्रीका को मात देकर भारत ने अंक तालिका में अपना पहला नंबर बरकरार रखा। ये मैच इसीलिए भी इतिहास में दर्ज हो गया क्योंकि विराट कोहली ने इसमें 49वाँ शतक लगाया और सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड की बराबरी की। इसके बाद खुद ‘क्रिकेट के गॉड’ ने ‘किंग’ की प्रशंसा में सन्देश भेजा। स्टेडियम में भी दर्शकों ने अपने मोबाइल फोन्स की लाइट्स जला कर विराट कोहली के शतक का स्वागत किया।
सचिन तेंदुलकर ने अपने ट्वीट में लिखा, “बहुत अच्छा खेले, विराट। पहले इस साल मुझे 49 से 50 तक पहुँचने के लिए 365 दिनों का इंतजार करना पड़ा। मुझे आशा है कि आप 49 से 50 तक अगले ही कुछ दिनों में पहुँचोगे और मेरे रिकॉर्ड को तोड़ोगे। बधाइयाँ!” बता दें कि इस साल 24 अप्रैल, 2023 को सचिन तेंदुलकर ने 50वाँ जन्मदिन मनाया है। विराट कोहली ने इस मैच में 121 गेंदों पर 10 चौकों की मदद से 101 रनों की पारी खेली।
Well played Virat. It took me 365 days to go from 49 to 50 earlier this year. I hope you go from 49 to 50 and break my record in the next few days. Congratulations!!#INDvSApic.twitter.com/PVe4iXfGFk
मैच में इससे पहले कप्तान रोहित शर्मा ने धूम-धड़ाका खेल का प्रदर्शन किया। 24 गेंदों पर 40 रनों की पारी में उन्होंने 6 चौके और 2 छक्के जड़े और फिर कागिसो रबादा का शिकार बने। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रबादा ने 12वीं बार रोहित शर्मा को आउट किया। इसके बाद शुभमन गिल भी चलते बने। हालाँकि, फिर विराट कोहली और श्रेयस अय्यर ने भारतीय पारी को सँभाला। श्यास अय्यर शुरुआत में धीमे थे लेकिन फिर उन्होंने भी कुछ अच्छे शॉट्स खेले।
वो 87 गेंदों मर 77 रन बना कर आउट हुए। 134 रनों की इस साझेदारी ने भारत के लिए काम आसान कर दिया। अंत में उतरे रवींद्र जडेजा ने भी 15 गेंदों पर 29 रनों की तेज-तर्रार पारी खेली और भारत का स्कोर 326 पहुँच गया। इसके बाद पश्चिम बंगाल के कोलकता स्थित ईडन गार्डन्स में भारतीय गेंदबाजों का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला। 13.1 ओवर में 40 रन के स्कोर पर दक्षिण अफ्रीका की आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी।
जहाँ विकेटकीपर बल्लेबाज क्विंटन डिकॉक को मोहम्मद सिराज ने अपना शिकार बनाया, वहीं कप्तान तेम्बा बावुमा को रवींद्र जडेजा ने चलता किया। मोहम्मद शमी ने भी जश्न में शामिल हुए और आते-आते रासी वैन डेर डुसेन को चलता किया। हेनरिक क्लासेन भी जडेजा की गेंद पर चलते बने। रवींद्र जडेजा ने डेविड मिलर के रूप में अपना तीसरा विकेट लिया। जडेजा का चौथा शिकार बने केशव महाराज। कुलदीप यादव ने भी पार्टी जॉइन की और मैक्रो जानसन को आउट किया।
इसके बाद रवींद्र जडेजा का भी 5वाँ विकेट आया और उन्होंने कसिगो रबादा को कट एन्ड बोल्ड किया। कुलदीप यादव ने अंतिम विकेट गिराया और भारत ने एकतरफा जीत दर्ज की। भारत ने इस मैच को 243 रनों से जीत लिया।
सलमान खान का रियलिटी शो इस साल एक नई थीम के साथ शुरू हुआ। तीन ‘मोहल्ला’ और 17 कंटेस्टेंट! हर एपिसोड के साथ शो और भी रोमांचक होता जा रहा है। ऐसे में बिग बॉस 17 के घर में प्रवेश करने के बाद से ही लगातार सुर्ख़ियों में बनी हुई हैं ईशा मालवीय। अभी उनका एक वीडियो जिसमें वह समर्थ जुरेल के साथ लाइव वीडियो में कम्बल के अंदर हैं। एपिसोड के इस दृश्य के वायरल हो जाने के बाद जहाँ इसे बिग बॉस शो को बर्बाद करना बताया जा रहा है वहीं इसकी तीखी आलोचना भी हो रही है।
इससे पहले ईशा मालवीय दूसरे कंटेन्सेंट अभिषेक कुमार के साथ प्रेम प्रसंग और बाद में शारीरिक हिंसा का आरोप लगाकर भी चर्चा में बनी रहीं थी। लेकिन इस बार दो हद ही हो गया नए एपिसोड में, ईशा मालविया और समर्थ जुरेल को रात के दौरान लाइट बंद होने के बाद एक ही कंबल में घुसे हुए दिखाया गया।
यहाँ एक बात यह भी सामने आई है ईशा मालवीय इसके पहले अभिषेक कुमार के साथ एक ही बेड पर सोती हुई नजर आईं थीं। वहीं जब से उनका समर्थ जुरेल के साथ बेड शेयर करने का अंतरंग वीडियो वायरल हुआ उन्हें भयंकर रूप से ट्रोल किया जा रहा है।
दरअसल, वीडियो की शुरुआत में कंबल के नीचे ईशा और जुरेल घुसे होते हैं। तभी अभिषेक कुमार अंदर आते हैं और उस पर टिप्पणी करते हैं जिसके बाद जुरेल कंबल से बाहर निकल जाते हैं। बाद में, अभिषेक अपनी रजाई लेते हैं और कमरे से बाहर चले जाते हैं।
बता दें कि वीडियो के वायरल के बाद दर्शकों ने बिग बॉस को पारिवारिक शो बताते हुए उसे बर्बाद करने का आरोप लगाया। यूजर्स का कहना है कि इस जोड़ी को टेम्पटेशन आइलैंड का हिस्सा होना चाहिए था न कि बिग बॉस 17 का।
Chi chi chi , ye kya bak____ hori hai , #SamarthJurel being a man is Just loosing it & kissing #IshaMalviya ,?
Samarth usse shadi toh karenga nhi ? % gaurentee par Isha (larki) ki kya izzat reh jayegi ? JUST AWFUL & SHAMEFUL#BB17pic.twitter.com/lWVFplyQqi
गौरतलब है कि सलमान खान के साथ वीकेंड का वार एपिसोड में समर्थ जुरेल के साथ घर में एंट्री करने वाली वाइल्डकार्ड कंटेस्टेंट मनस्वी ममगई कम वोटों के कारण बाहर हो गईं। हालाँकि, इसके बाद भी सलमान ने मनस्वी की तारीफ की।
पटना, बेंगलुरु और मुंबई में बैठकों के बाद विपक्षी का I.N.D.I. गठबंधन खूब जोश में था और समर्थक भी उछलते नहीं थक रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखें नज़दीक आती जा रही हैं ये ख़ुशी भी काफूर होती जा रही है। अब तो समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए आयोजित एक रैली में खुल कर अपील की है कि जनता कॉन्ग्रेस पार्टी को वोट न दे। साफ़ है गठबंधन शुरू होने से पहले ही खत्म हो रहा है।
अखिलेश यादव ने मंच से कहा, “कॉन्ग्रेस को भी वोट मत देना। बहुत चालू पार्टी है कॉन्ग्रेस। सावधान रहे कि नहीं रहोगे?” टीकमगढ़ जिले की जतारा विधानसभा क्षेत्र में सपा प्रत्याशी RR बंसल के लिए चुनाव प्रचार करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “बंसल जी दुखी थे कि कॉन्ग्रेस ने धोखा दे दिया। अरे, जब हमें धोखा दे दिया तो तुम कहाँ के बंसल हो। बंसल जी दुखी हैं कि कॉन्ग्रेस ने उन्हें पहचाना ही नहीं। अरे, जिनकी उम्र 80 साल हो वो कैसे पहचानेंगे?”
इतना ही नहीं, इस दौरान अखिलेश यादव ने यहाँ तक कह दिया कि कॉन्ग्रेस जातिगत जनगणना की बात भी वोट के लालच के कारण कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर इस देश में किसी एक पार्टी ने जातिगत जनगणना को रोका है तो वो कॉन्ग्रेस है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके अखिलेश यादव ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने ही मंडल कमीशन की सिफारिशों को भी लागू होने से रोका। उन्होंने इस दौरान बार-बार I.N.D.I. गठबंधन की बात न कर के PDA (पिछड़ा, दलित एवं अल्पसंख्यक) की बात की।
बता दें की अखिलेश यादव का 80 साल की उम्र वाला तंज मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर था। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए खड़गे 81 साल के हैं और उन्हें गाँधी परिवार का वफादार माना जाता है। ध्यान दिला दें कि सिर्फ सपा ही नहीं बल्कि अरविंद केजरीवाल की AAP ने भी मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के खिलाफ प्रत्याशी उतारे हैं। यानी, I.N.D.I. गठबंधन में शामिल ये तीनों ही दल आपस में ही लड़ रहे हैं। सिर्फ सोशल मीडिया पर ही ये गठबंधन बचा है अब।
याद दिलाते चलें कि मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने कॉन्ग्रेस से सिर्फ 6 सीटें माँगी थीं, लेकिन कॉन्ग्रेस ने वह भी नहीं दी। फिर अखिलेश यादव ने कहा था, “हम एमपी की बात को यूपी में भी ध्यान रखेंगे”। मीडियाकर्मियों ने कमलनाथ से अखिलेश यादव द्वारा ‘धोखा’ दिए जाने की बात पूछी तो उन्होंने बोल दिया था, ‘अरे छोड़िए अखिलेश-वखिलेश’ को। अखिलेश यादव ने ये भी कहा था कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के लोग भाजपा से मिले हुए हैं।
उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद 30 मदरसों में गैर-मुस्लिम बच्चों के इस्लामी शिक्षा लेने के मामले सामने आए हैं। अब तक 749 गैर-मुस्लिम छात्र चिन्हित किए गए हैं, जिनमें हिन्दुओं की संख्या सबसे अधिक है। ये मदरसे उधमसिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार जनपदों में हैं। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने इस संबंध में उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद से जवाब माँगा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NCPCR ने 2 नवम्बर 2023 को उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद को एक पत्र जारी किया था। इस पत्र में राज्य भर के मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या की जानकारी माँगी गई थी। जवाब देने के लिए आयोग ने 1 सप्ताह यानी 9 नवम्बर तक का समय दिया NCPCR की नोटिस पर उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद ने रिपोर्ट तैयार की है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तराखंड के मदरसों में कुल 7399 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से 749 छात्र गैर-मुस्लिम हैं। ये सभी गैर-मुस्लिम छात्र 30 अलग-अलग मदरसों में पढ़ते हैं। सबसे अधिक गैर-मुस्लिम छात्र की संख्या हरिद्वार के मदरसों में हैं। हरिद्वार के शिकोहपुर में मदरसा राव असगर अली मेमोरियल पब्लिक स्कूल में 131, तिलकपुर में मदरसा बहार ए चमन में 112 और रुड़की के मदरसा तुल आलिम में 79 गैर-मुस्लिम छात्र पढ़ाई करते हैं।
हरिद्वार के ही मदरसा राष्ट्रीय एकता में 85 और मदरसा जामिया इस्लामिया में 50 गैर-मुस्लिम छात्र पढ़ रहे हैं। इसके अलावा उधमसिंह नगर के मदरसा साबिर इस्लामिया में 68 और मदरसा साबिर बाबा साहब में 21 गैर-मुस्लिम छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। नैनीताल के मदरसा सिराजुल उलूम नूरिया में 4 गैर-मुस्लिम बच्चे पढ़ाई कर रहे है। मुस्लिम छात्रों की तादाद के मामले में भी हरिद्वार पहले नंबर पर है।
सिर्फ हरिद्वार में 21 मदरसे हैं। वहीं, उधमसिंह नगर में 9 और नैनीताल के गुलरघाटी रामनगर में 1 मदरसा बताया गया है। यह रिपोर्ट उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद के डायरेक्टर राजेंद्र सिंह ने प्रेषित की है। इस रिपोर्ट में राज्य मदरसा शिक्षा परिषद का कहना है कि सभी बच्चों को NCERT के पैटर्न पर पढ़ाया जा रहा है। साथ ही यह पढ़ाई बच्चों के अभिभावकों की सहमति से हो रही है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में पाञ्चजन्य से बात करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही मदरसों की जाँच के आदेश दे दिए थे। जाँच के बाद 5 मदरसों को बंद करा दिए गए। उन्होंने बताया कि मदरसों में पढ़ रहे गैर-मुस्लिम छात्रों को दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा। इस बात की भी जाँच करवाने का आश्वासन भी दिया है कि किन हालातों में गैर-मुस्लिम छात्रों को मदरसों में एडमिशन लेना पड़ा।
झारखंड के बोकारो में एक मंदिर पर असामाजिक तत्वों ने हमला करके मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त कर दी हैं। ये मंदिर बोकारो के ललपनिया थाना क्षेत्र में स्थित है जहाँ पर असामाजिक तत्वों ने यह हरकत की है। मूर्तियों को तोड़ने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल किया गया।
जानकारी के अनुसार, छरछरिया झरने के पास स्थित इस मंदिर में पहुँचे कुछ लोगों ने रविवार (5 नवंबर, 2023) की सुबह यह मूर्तियाँ तोड़ी। इन लोगों का विरोध करने पर मंदिर के पुजारी राहुल तिवारी के ऊपर तलवारों से हमला कर दिया गया, उन्होंने पास के दूसरे मंदिर में घुस कर जान बचाई। बताया गया है मंदिर में तीन मूर्तियों को तोड़ा गया है।
यह भी जानकारी सामने आई है कि इससे पहले भी इसी इलाके में बजरंग बली की प्रतिमा तोड़ी गई थी। इसके बाद हमलावर मौके से भाग निकले। लोगों को मंदिर में तोड़फोड़ की जब खबर मिली तो वह आक्रोशित हो गए और विरोध प्रदर्शन किया। हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़े जाने के विरोध में बाजार भी बंद करवा दिया गया।
बताया जा रहा है कि यह मंदिर एक पहाड़ी के पास स्थित है जहाँ एक पावर प्रोजेक्ट का जनजातीय समाज के लोग विरोध कर रहे हैं। इसके विरोध में बड़े प्रदर्शन का आयोजन किया गया था जिसमें जनजातीय समाज के लोग कई जगहों से पहुँच रहे थे।
मंदिर पर हमला करने वाले 50 लोग एक बस में भर कर पहुँचे थे। वह बस भी कब्जे में ले ली गई है जिसमें भर कर यह हमलावर उपद्रवी मंदिर के पास पहुँचे थे। यह भी जानकारी सामने आई है कि मंदिर पर हमला करने के पश्चात वो लोग प्रदर्शन वाली जगह पर चले गए थे। इस मामले में तुरंत कार्रवाई ना होने से विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। वह आरोपितों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की जा रही है। हालाँकि, पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देकर उनसे प्रदर्शन बंद करने को कह रही है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शुक्रवार (3 नवंबर, 2023) देर रात बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दो मुस्लिम युवकों को हिन्दू लड़की के साथ पकड़ा। जिसके बाद होटल में जमकर हंगामा खड़ा हो गया। इतना ही नहीं बजरंगद ल के कार्यकर्ताओं ने दोनों मुस्लिम लड़कों को होटल से नीचे लाकर बीच सड़क पर जमकर पीटा।
इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वहीं, बजरंग दल की शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों को 151 के तहत जेल भेज दिया है। वहीं युवती को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है। भोपाल पुलिस अब इस मामले की जाँच में जुट गई है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, मामला भोपाल के एमपी नगर का है। जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जो शुक्रवार की रात का बताया जा रहा है। इस मामले में देर रात बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने एक निजी होटल के कमरे से दो मुस्लिम लड़कों को हिन्दू लड़की के साथ पकड़ा। पूछताछ करने पर दोनों मुस्लिम लड़कों ने कार्यकर्ताओं के साथ बहस करना शुरू कर दिया जिसके बाद गुस्साए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दोनों को बीच सड़क पर जमकर पीटा।
Bhopal: A Hindu girl was found with 2 Muslim men in a hotel room. Bajrang Dal Karyakartas caught them and handed them over to the police. pic.twitter.com/rCSQjS8lP7
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें देखा जा सकता है कि दोनों को बजरंग दल कार्यकर्ता लात-घूँसों से पीट रहे है, तो वहीं, लड़की दोनों मुस्लिम लड़कों को बचाने की कोशिश कर रही है।
जाँच में जुटी पुलिस
बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने दोनों की पिटाई के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एमपी नगर थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह गुर्जर ने भी इस बात की पुष्टि की कि बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने थाने में शिकायत की थी कि दो मुस्लिम लड़के हिन्दू युवती के साथ होटल के पास घूम रहे हैं।
वहीं, मामले की शिकायत के बाद एमपी नगर पुलिस ने दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि एक युवक भोपाल का रहने वाला है तो दूसरा विदिशा जिले का है। वहीं, हिन्दू युवती ने इस मामले में कोई शिकायत नहीं की है।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 37 साल (कई मीडिया रिपोर्ट्स में उम्र 45 साल बताया गया है) की एक वरिष्ठ महिला अफसर की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई है। यह घटना अधिकारी के घर में ही अंजाम दी गई है। केएस प्रतिमा नाम की यह महिला कर्नाटक सरकार के खनन और भूगर्भ विभाग में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत थी। वह दोमंजिला किराए के मकान में अकेली थीं।
प्रतिमा की लाश बेंगलुरु स्थित सुब्रमण्यमपुर स्थित उनके आवास से बरामद की गई है। प्रतिमा विवाहित थीं और यहाँ वह पिछले आठ सालों से रह रही थीं। वह अकेले रहती थीं और उनके पति अपने मूल स्थान पर रहते थे। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि घटना के समय उनके पति और बच्चे शिवमोगा गए हुए थे।
पड़ोसी सुरेश ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “वह वहाँ पिछले आठ साल से रह रही थीं। वह अपने बेटे के साथ रह रही थीं। यह किराए का मकान है। वह सभी के साथ अच्छा व्यवहार करती थी। किसी के साथ कोई समस्या नहीं थी।”
घटना के बारे में जानकारी प्रतिमा के भाई के जरिए मिली। प्रतिमा के भाई ने उन्हें शनिवार (4 नवंबर 2023) की रात को कई बार फोन किया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद अगली सुबह भाई ने आकर देखा तो घर में प्रतिमा की लाश पड़ी थी। प्रतिमा का गला रेता गया था। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रतिमा शनिवार की शाम 6 बजे तक अपने दफ्तर में काम कर रही थीं। इसके बाद वह अपने घर के लिए निकल गई थीं। उनके ड्राईवर ने बताया कि उसने रात 8 बजे उन्हें उनके आवास पर छोड़ा था। हत्यारों के बारे में अभी जानकारी नहीं मिली है।
हत्या का कारण भी अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्ट्या ऐसा नहीं लगता कि हत्यारों का इरादा लूटपाट का था। उनके घर से कोई महंगा सामान भी गायब नहीं है। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ने सबूत इकट्ठा करने के लिए मौके पर फोरेंसिक टीमें बुलाई हैं। उनके फोन की भी जाँच की जा रही है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा है कि उन्हें मामले की जानकारी हुई है और वह इसकी जाँच कराएँगे। उन्होंने मामले में कड़ी कार्रवाई का भी भरोसा दिया है। वहीं सिटीजन्स मूवमेंट बेंगलुरु नाम के एक अकाउंट ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस मामले में एक दावा करके सनसनी मचा दी है।
A 37-year-old Karnataka government officer named Pratima was hacked to death in her own home. She held the position of Deputy Director in the Mines & Geology department. ? Assailants broke into her residence while her husband was away and brutally ended her life. The incident… pic.twitter.com/mGxu5zDjV8
— Citizens Movement, East Bengaluru (@east_bengaluru) November 5, 2023
इस अकाउंट का दावा है कि प्रतिमा ने इससे पहले खनन माफिया के विरुद्ध आवाज उठाई थी। इसको लेकर उन्हें धमकी भी मिली थीं। इस अकाउंट ने अवैध खनन और भूमाफिया को लेकर कुछ और सनसनीखेज जानकारियाँ साझा की हैं। हालाँकि, इन सूचनाओं की पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता।
केरल में एक कुत्ता पिछले 4 महीने से एक अस्पताल के शवगृह के बाहर इंतजार कर रहा है। कन्नूर जिले का ये वीडियो सोशल मीडिया में भी चर्चा का विषय बन रहा है। असल में कुत्ते के मालिक को मौत के बाद इस मॉर्चरी में ले जाया गया था, जिसके बाद से उसका ये पालतू कुत्ता लगातार अपने मालिक का इंतजार कर रहा है। डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के बाहर का ये नजारा देख कर हर कोई इमोशनल है। अस्पताल के कर्मचारी विकास कुमार ने पुष्टि की है कि 4 महीने पहले मरीज यहाँ आया था और साथ में कुत्ता भी था।
हालाँकि, मरीज की इलाज के दौरान ही मौत हो गई। इसके बाद उसके शव को मॉर्चरी में ले जाया गया। इस कुत्ते ने ये देख लिया। अब उसे लगता है कि उसका मालिक अंदर ही है। इसके बाद वो उस जगह को छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं है और अपने मालिक के लौटने का इंतजार कर रहा है। शायद उसे ये नहीं पता है कि उसका मालिक अब नहीं नहीं लौटेगा। बता दें कि इसी तरह की वफादारी की एक कहानी जापान के टोक्यो से 1920s से भी सामने आई थी जो खासी लोकप्रिय है।
वहाँ हचिको (Hachiko) नाम का एक कुत्ता शिबुया स्टेशन के बाहर कई दिनों तक अपने मालिक के लौटने का इंतजार करता रहा। उसके भी मालिक की मौत हो गई थी, जिसका उसे पता नहीं था। जापान में उस स्टेशन के बाहर उस कुत्ते की मूर्ति भी लगाई गई थी, जहाँ लोग आज भी तस्वीरें क्लिक करवाने के लिए जुटते हैं। जापान में कई फ़िल्में भी उस पर बन चुकी हैं और उसे वफादारी के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। अब केरल के उस कुत्ते की चर्चा है।
#WATCH | Kerala: "A patient came to the hospital four months ago and the dog had come along with the patient. The patient died and the dog saw the owner being taken to the mortuary…The dog feels that the owner is still here. The dog does not leave this place & has been here for… pic.twitter.com/ltaObviLn3
कुछ दिनों तक तो उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया था, लेकिन फिर वो वहाँ आने-जाने वालों द्वारा दिए जाने वाले बिस्किट खाने लगा। असल में मॉर्चरी से शवों को दूसरे दरवाजे से निकाला जाता है। उक्त कुत्ता अंदर नहीं घुस सकता और उसने वो नहीं देखा है, इसीलिए वो उम्मीद में है कि जिस रास्ते से उसके मालिक का शव ले जाया गया उधर से ही वो वापस लौट आएगा। उक्त कुत्ता दिन में अन्य डिपार्टमेंट्स का भी चक्कर लगाता है, लेकिन रात को वापस शवगृह के पास लौट आता है।
भारत धीमे-धीमे लोकसभा चुनावों की तरफ बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के दस वर्ष पूरे होने को हैं। अब वह समय आ गया है कि बीते 9.5 वर्षों में इस सरकार ने अलग-अलग फ्रंट पर कैसा प्रदर्शन किया है, उसका मूल्यांकन किया जाए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार 2014 में सत्ता के आने के बाद से ही कई फ्लैगशिप योजनाएँ लाई है। इन योजनाओं के जरिए 1947 से 2014 तक ना हल की जा सकी जाने वाली मूलभूत समस्याओं को हल करने का प्रयास किया गया है। यह प्रयास कितना सफल है, यह आँकड़े और इनके लाभार्थी बताते हैं।
2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने से पहले की सरकारें देश के लोगों को साफ़ पानी, पक्का आवास, गैस सिलेंडर, बैंक खाता, बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएँ तक नहीं उपलब्ध करवा सकी थीं। उन्होंने सबसे पहले इन समस्याओं को हल करने का निर्णय लिया। योजनावार तरीके से जानते हैं कि इनका क्या असर रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना
एक पक्का घर किसी भी परिवार की सबसे बड़ी और मूलभूत आवश्यकता होती है। वर्ष 2014 से पहले देश के करोड़ों लोग कच्चे घरों या फिर किराए के घरों में रहने को मजबूर थे। अभी तक कोई भी सरकार उन्हें एक पक्की छत मुहैया नहीं करवा पाई थी। इस समस्या से लड़ने के लिए मोदी सरकार ने जून 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की।
इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में लाभार्थियों को ₹2.5 लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹1.2 लाख रूपए घर का निर्माण करवाने के लिए दिए जाते हैं। इस योजना के तहत लाभार्थियों का सर्वे करके उनका चयन किया जाया जाता है।
अपने प्रधानमंत्री आवास के सामने खड़ी एक लाभार्थी महिला
उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत अब तक 1.18 करोड़ घरों के निर्माण को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 77.5 लाख घरों का निर्माण भी हो चुका चुका है। सरकार इसके लिए ₹1.53 लाख करोड़ दे चुकी है।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना के तहत 2.94 करोड़ घरों को मंजूरी दी जा चुकी है जिसमें से 2.48 करोड़ घर बन भी गए हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर ₹2.6 लाख करोड़ की धनराशि दी है।
दोनों योजनाओं को मिलाकर मोदी सरकार के 9 वर्षों में देश भर में अब तक कुल 3.25 करोड़ घरों का निर्माण हो चुका है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की रहने वाली सुनीता इस योजना की लाभार्थी हैं। सुनीता एक मंदिर के बाहर फूल बेच कर जीवनयापन करती हैं।
सुनीता अवधी में कहती हैं, “भैया हम पक्का घर दसन साल नाई बनवाय पउतेन, मोदी सरकार घर दिहिस है। तब बनि पावा है। (हम तो दस सालों तक पक्का घर नहीं बनवा पाते, हमें मोदी सरकार ने घर दिया है।)”
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
देश के करोड़ों घरों को 2014 से पहले गैस सिलेंडर नहीं दिया जा सका था। इससे करोड़ों घरों में महिलाएँ चूल्हे पर धुएँ में खाना बनाने को मजबूर थीं। इससे जहाँ उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता ही था, जलावन के लिए लकड़ी कटान और आग लगने जैसे खतरों से भी उन्हें दो चार होना पड़ता था। इसके अलावा प्रदूषण भी होता था।
इस समस्या से लड़ने के लिए 1 मई 2016 को उज्ज्वला स्कीम की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। उन्हें इसके साथ गैस चूल्हे भी उपलब्ध करवाए गए। इस योजना के चालू होने से पहले देश के मात्र 62.1% घरों में ही एलपीजी कनेक्शन था।
योजना के चालू होने के बाद 99.8% घरों में स्वच्छ ईंधन पहुँच चुका है। इस योजना के तहत उज्ज्वला के पहले फेज में देश में 8 करोड़ कनेक्शन बांटे गए जबकि दूसरे फेज में 1.6 अतिरिक्त कनेक्शन भी बांटे गए हैं।
जिन सुनीता को पक्के घर का लाभ मोदी सरकार में मिला है, वह इस उज्ज्वला योजना का लाभ भी पाई हैं। इस योजना के विषय में वह कहती हैं, “पहिले लकड़ी लाइ केरे खाना बनाईत रहन, बरसात मैहा बड़ी समस्या होती रहय, सब लकड़ी भीगी होती रहय तौ चूल्हा जलति नाइ रहय, अब कोई समस्या नाई है। (पहले लकड़ी लाकर खाना बनाना पड़ता था, बरसात में बड़ी समस्या होती थी क्योंकि लकड़ियाँ भीगी होती थीं, अब कोई समस्या नहीं है।)” वह अपनी जिंदगी में आए इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री को आशीर्वाद देती हैं।
जलजीवन मिशन – हर घर नल से जल
मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उसको वह काम भी करने पड़ रहे थे जो पिछले 7 दशकों में कबके हो जाने चाहिए थे। उसे साफ़ पानी घर घर पहुँचाने जैसी समस्या को हल करना पड़ रहा था।
इस समस्या से लड़ने के लिए वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत की गई। इसके तहत सरकार ने लक्ष्य रखा कि देश के एक-एक घर में नल के माध्यम से साफ़ पानी पहुँचाया जाएगा चाहे वह घर उत्तर प्रदेश के तराई मैदान में स्थित हो या फिर तमिलनाडु की नीलगिरी पहाड़ियों के बीच कहीं।
इस योजना के चालू किए जाने से पहले देश के मात्र 16.82% (3.23 करोड़) घरों तक नल से जल पहुँचता था। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के मात्र 1.9% घरों में ही नल से जल पहुँचता था।
इस योजना को चालू हुए अब 4 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। अब देश के 70.17% घरों में नल से जल पहुँच रहा है। अब देश के 13.5 करोड़ घरों में नल से जल पहुँच रहा है। सरकार योजना की शुरुआत होने के बाद से अब तक ₹1.52 लाख करोड़ राज्यों को दे चुकी है। हालाँकि, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे कुछ राज्य इस योजना को अब भी ढंग से लागू नहीं कर पा रहे।
इस योजना के लाभार्थी बलराम बताते हैं, “पहले नगर पंचायत के सार्वजनिक नल पर पानी लेने जाना पड़ता था जहाँ एक-दो घंटे के लिए ही आपूर्ति होती थी। ठंड में भी सुबह-सुबह 5-6 बजे उठकर पानी भरना पड़ता था। कभी-कभार देर हो जाती थी तो पानी हैण्डपंप से भरना पड़ता था जिसमें आर्सेनिक होता था। अब घर में ही पानी आता है।”
प्रधानमंत्री जन धन योजना
देश में 2014 से पहले विकास के लिए दिए जाने वाले पैसेज में लीकेज बहुत बड़ी समस्या थी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने एक सार्वजनिक भाषण में स्वीकार किया था कि यदि केंद्र सरकार दिल्ली से ₹1 भेजती है तो लाभार्थी तक मात्र 15 पैसे ही पहुँच पाते हैं।
दशकों तक इस समस्या को नहीं सुलझाया जा सका था। इसके अतिरिक्त, देश में बड़ी आबादी ऐसी थी जिसका बैंकिंग सिस्टम से कोई परिचय ही नहीं था। ना ही इनके पास कोई बैंक खाता था और ना ही इन्हें बैंकों में कोई तरजीह दी जाती थी। सरकार यदि इन्हें कोई लाभ देना भी चाहती तो वह ऐसा करने में विफल होती थी।
इन दोनों समस्याओं को हल करने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री जन धन योजना को सत्ता में आने के मात्र तीन महीने के भीतर 28 अगस्त 2014 को लॉन्च किया। इसके तहत देश के हर घर में कम से एक खाता हो, ऐसा लक्ष्य रखा गया। कैम्प लगाए गए, नई शाखाएँ खोली गईं।
यह योजना इतनी सफल रही कि इसके अंतर्गत 50.8 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों के माध्यम से सरकार अब तक ₹32 लाख करोड़ लाभार्थियों को भेज चुकी है। इस पैसे में एक रूपए का भी लीकेज नहीं है।
जन धन योजना का लाभ केवल योजना क्रियान्वन तक सीमित नहीं है। इस योजना से सरकार ने सार्वजनिक बीमा योजना जन ज्योति को जोड़ा है। यह खाते प्रधानमंत्री मुद्रा योजना को सफल बनाने, रुपे (Rupay) कार्ड को बढ़ाने और डिजिटल इंडिया में तेजी लाने में बड़े सहायक रहे हैं।
जन धन योजना की लाभार्थी सुनीता भी हैं, जिन्हें उज्ज्वला और आवास योजना का लाभ मिला है। वह अपने खाते में अब छोटी बचत जमा करती हैं। वह कभी ₹200 तो कभी ₹500 बचा कर अपने खाते में जन सुविधा केंद्र के माध्यम से जमा करती हैं। उनका कहना है कि इन छोटी बचतों से उन्हें अपनी दो बेटियों ममता और सरिता की शादी करने में बड़ी सहायता मिली है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
देश में जनधन योजना की सफलता के साथ ही यह रास्ता भी खुल गया कि अब उद्यमियों को आगे बढ़ाया जाए। सरकार ने छोटे उद्यमियों को आसान कर्ज देने के लिए मुद्रा योजना अप्रैल 2015 में चालू की गई थी। समस्या यह थी कि छोटे उद्यमियों को बैंक कर्ज नहीं देते थे क्योंकि उनके पास कभी कागज नहीं होते थे तो कभी बैंक उन्हें यह कह कर मना कर देता था कि कर्ज के एवज में देने के लिए उनके पास कोई गारंटी नहीं है।
इस योजना में इन समस्याओं को हल करके इसके तहत ₹50,000 रूपए से लेकर ₹50 लाख तक के कर्ज आसानी से देना चालू किए। इससे देश भर छोटे कारोबारियों को बड़ी सहायता मिली है। मुद्रा योजना से अब तक ₹23.2 लाख करोड़ के कर्ज 40 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को दिए जा चुके हैं। इस योजना में सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी 70% लाभार्थी महिलाएँ हैं।
रोड और रेल में क्रान्ति
वर्ष 2014 में मोदी सरकार के आने के समय देश की सड़कों की हालत कोई ख़ास अच्छी नहीं थी। रेलवे को एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश मजदूर ले जाने के साधन की हैसियत देकर छोड़ दिया गया था। ना ही कोई नई तकनीक थी ना ही कोई प्लान था।
मोदी सरकार की रेलवे के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि देश के रेलवे का 90% से अधिक बिजलीकरण है। वर्ष 2014 में मोदी सरकार आने से पहले आजादी के बाद 67 वर्षों में मात्र 21,413 रेलवे लाइनों का बिजलीकरण किया गया था। यह मात्र 9 वर्षों में ही दोगुने से अधिक बढ़ कर 59,818 किलोमीटर हो चुका है।
(BG चित्र साभार: @Trainwalebhaiya/X)
इस बिजलीकरण से रेलवे के डीजल का खर्चा बचा है और साथ ही प्रदूषण को भी रोकने में मदद मिली है। इसके अलावा रेलवे ने पुराने ICF डिब्बों को बदल कर LHB कोच अपनी ट्रेनों में लगाए हैं। यह अधिक सुरक्षित और आरामदायक हैं।
भारतवासियों को अच्छी सुविधाएँ देने के लिए रेलवे ने वन्दे भारत जैसी रेलगाड़ियाँ चलाई हैं जिनकी संख्या लगातार बढाई जा रही है। जहाँ कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा वर्ष 1988 में चलाई गई शताब्दी रेलगाड़ियाँ 29 वर्षों में मात्र 21 की संख्या में चल सकीं वहीं 2019 में चलाई गई वन्दे भारत की संख्या 68 हो चुकी है।
रेलवे नेटवर्क की बात की जाए तो वर्ष 2014 में देश का कुल रेल नेटवर्क 65,808 किलोमीटर था जो कि अब 68,043 किलोमीटर हो चुका है। बाकी पहले से स्थापित नेटवर्क में पटरियों की क्षमता बढ़ा कर उस ओअर तेज रेलगाड़ियाँ चलाने के लिए अपग्रेड किया गया है। इसके अतिरिक्त, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी इस क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।
सड़कों के क्षेत्र में मोदी सरकार की सफलता की प्रशंसा उनके विरोधी भी करते हैं। वर्ष 2013-14 में देश में नेशनल हाइवे की कुल लम्बाई 91,287 किलोमीटर थी जो कि अब बढ़ कर 1.45 लाख किलोमीटर से अधिक हो चुकी है। यह लगभग 59% की वृद्धि है।
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे (BG चित्र साभार: @reeteshraj777/X)
इसके अलावा 2013-14 में मात्र 18,371 किलोमीटर नेशनल हाइवे ही फोरलेन थे जो कि अब बढ़ कर 45,000 किलोमीटर हो चुके हैं। मोदी सरकार आने के पहले जहाँ एक दिन में औसतन 10-12 किलोमीटर सड़क का निर्माण होता था वहीं यह 2021-22 में बढ़ कर 35 किलोमीटर हो चुका है।
साथ ही, पूरे देश में नए एक्सप्रेसवे भी बन रहे हैं। जहाँ 2014 से पहले उँगलियों पर एक्सप्रेसवे गिने जा सकते थे वहीं अब इनकी लम्बाई हजारों किलोमीटर में पहुँच चुकी है। उत्तर प्रदेश में अभी भी कई नए एक्सप्रेसवे का निर्माण चल रहा है।
IMEEC परियोजना
ऐसा नहीं है मोदी सरकार भारत के भीतर ही योजनाओं को तेजी से लागू कर रही है। वह ऐसी योजनाओं को भी तेजी से पूरा कर रही है जो कि विदेशों में है लकिन जिनसे भारत के हित जुड़े हैं। ऐसी ही एक परियोजना IMEEC (भारत मध्य पूर्व आर्थिक कॉरिडोर) पर भारत ने काम करना चालू कर दिया है।
यह योजना काफी महात्वाकांक्षी है और ₹3.5 लाख करोड़ की है। इसके तहत भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEEC) के तहत भारतीय बंदरगाहों से शिप से संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा तक माल ट्रांसपोर्ट किया जाएगा।
इसके बाद वहाँ से कंटेनरों को ट्रेन के जरिए इजरायल में हाइफा तक ले जाना है। हाइफा से, कंटेनर इटली, फ्रांस, यूके और अमेरिका के साथ यूरोप तक जाएँगे। इस परियोजना के अंतर्गत भारत में बंदरगाहों को रेल लिंक से जोड़ने वाले काम पर भारत ने पहले ही काम चालू कर दिया हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह योजनाएँ सिर्फ दिल्ली की गुलाबी ठंड का लाभ ले रहे अफसरों की मेजों पर फाइलों के गट्ठरों में शामिल नहीं है। ना ही योजनाएं पूर्ववर्ती सरकार में बेल्जियम से लाए गए अर्थशास्त्रियों की हॉटटॉक के लिए बनी हैं। यह सभी योजनाएँ अपना असर जमीन पर दिखा रही हैं।
मोदी सरकार की देश से लेकर विदेश तक की इन योजनाओं में सबसे अच्छी बात उनका लाभार्थियों तक पहुँचना है। यदि 2024 का लोकसभा चुनाव इस बात पर लड़ा जाए कि मनमोहन सिंह सरकार ने अपने 10 वर्षों के कार्यकाल में क्या किया था और मोदी सरकार ने क्या किया है, तो निश्चित ही इसमें प्रधानमंत्री मोदी उनसे कहीं मीलों आगे होंगे।
जर्मनी का प्रसिद्ध फुटबॉल क्लब मेन्ज़ (German soccer club Mainz) ने हमास पर इज़रायल की कार्रवाई के विरोध में गाजा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट करने पर डच फॉरवर्ड अनवर अल गाजी को क्लब से हटा दिया। मेन्ज ने शुक्रवार (3 नवंबर 2023) को गाजी के साथ हुए अनुबंध को समाप्त कर दिया। इस पोस्ट को लेकर गाजी को एक बार सस्पेंड भी किया गया था।
मेन्ज़ ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने अनवर अल गाजी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया है और तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। मेन्ज ने कहा कि गाजी को उनकी सोशल मीडिया पोस्ट के लिए हटाया गया है। वहीं, जर्मन अभियोजकों ने कहा कि डच खिलाड़ी पर इंस्टाग्राम के माध्यम से नफरत फैलाने के साथ-साथ आपराधिक कृत्यों को नजरअंदाज करके सार्वजनिक शांति को भंग करने का संदेह है।
गाजी ने आतंकी संगठन हमास के नारे नदी से समुद्र तक, फिलिस्तीन आजाद होगा (from the river to the sea, Palestine will be free) लिखते हुए इंस्टाग्राम पर कई पोस्ट किए थे। बताते चलें कि हमास और उसके सहयोगी इजरायल के विनाश के लिए इस नारे का उपयोग करते हैं, क्योंकि इजरायल और फिलिस्तीन जॉर्डन नदी और भूमध्यसागर के बीच स्थित है।
मेन्ज क्लब द्वारा अनुबंध खत्म करने और अल गाजी को हटाने की घोषणा के बाद उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट लिखा। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में गाजी ने लिखा, “जो सही है उसके लिए खड़े रहें, भले ही इसके लिए अकेले खड़े रहना पड़े। गाजा में निर्दोष और कमजोर लोगों पर ढाए जा रहे नारकीय जुल्म की तुलना में मेरी आजीविका का नुकसान कुछ भी नहीं है।”
इसके पहले अल गाजी ने इजरायल हमास विवाद को लेकर 17 अक्टूबर को एक विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट किया था। हालाँकि, उन्होंने पोस्ट को बाद में डिलीट भी कर दिया था। इस तरह की अनुशासनहीनता को देखते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया था। क्लब के आयोजनों को देखते हुए 30 अक्टूबर को ही उनका निलंबन हटाया गया था।
मेन्ज़ ने कहा कि प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद 28 साल के गाज़ी ने कहा था कि उन्हें सोशल मीडिया पोस्ट प्रकाशित करने को लेकर अफसोस है और इसके नकारात्मक प्रभावों को लेकर भी उन्हें पछतावा है। क्लब ने कहा कि खिलाड़ी ने यह भी कहा कि वह इज़रायल के अस्तित्व के अधिकार पर सवाल नहीं उठा रहा है।
हालाँकि, अनवर गाजी ने बुधवार (1 नवंबर 2023) को एक बार फिर इजरायल और हमास को लेकर विवादास्पद डालकर जता दिया कि पिछली बार उन्होंने मेन्ज प्रशासन से जो भी कहा था, वह झूठ था। गाजी ने लिखा, “मुझे अपनी स्थिति पर कोई पछतावा नहीं है। मैंने जो कहा था, उससे मैं खुद को अलग नहीं कर रहा हूँ। मैं आज और हमेशा, अपनी आखिरी साँस तक मानवता और उत्पीड़ितों खिलाफ खड़ा रहूँगा।”
अनवर गाजी पहले पीएसवी आइंडहोवन, एस्टन विला और एवर्टन के लिए खेलते थे। इस साल सितंबर महीने में एक फ्री एजेंट के रूप में मेन्ज़ में शामिल हुए थे। वे टीम में विकल्प के रूप में तीन बार प्रदर्शन किया। उनका आखिरी प्रदर्शन बुंडेसलीगा में था।