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गुजरात की बसंती पटेल को ‘मरियम’ बना कर किया निकाह; इंजीनियरिंग की डिग्री… 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेजे गए ISIS आतंकी शाहनवाज और उसके साथी

दिल्ली पुलिस ने सोमवार (2 अक्टूबर, 2023) को ISIS से जुड़े 3 लाख रुपए के इनामी आतंकी शाहनवाज को गिरफ्तार किया है। इसी साल जुलाई माह में शाहनवाज महाराष्ट्र में पुणे पुलिस की कस्टडी से भाग निकला था। विदेश में बैठे आकाओं ने शाहनवाज को भारत में ISIS का स्लीपर सेल खड़ा करने का काम दिया था जिसे वो बखूबी अंजाम भी दे रहा था। शहनवाज ने एक हिन्दू लड़की को इस्लाम कबूल करवा कर उस से निकाह किया था। पेशे से वह इंजीनियर था लेकिन उसने आतंकवाद का रास्ता अपनाया।

हिन्दू लड़की को इस्लाम कबूल करवा के किया निकाह

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मूल रूप से शाहनवाज झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला है। उसने गाजियाबाद के विश्वेश्वरैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक शाहनवाज ने एक हिन्दू लड़की से निकाह किया है। उसकी बीवी का नाम बसंती पटेल है जो मूल रूप से गुजरात की रहने वाली बताई जा रही है। शाहनवाज ने बसंती को पहले इस्लाम कबूल करवाया फिर उस से निकाह किया। निकाह के बाद बसंती का नया इस्लामी नाम मरियम रखा गया था।

बाइक चोरी से हुआ था भंडाफोड़

इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद शाहनवाज पुणे चला गया। वहाँ पर वो ISIS का स्लीपर सेल तैयार करने में जुट गया। उसकी गैंग के तमाम सदस्य बम बना कर उसे पास के जंगलों में टेस्ट करने जाया करते थे। विस्फोट की साजिश को अंजाम देने के लिए शाहनवाज की गैंग को चोरी की बाइक की जरूरत थी। शाहनवाज के साथ इस नेटवर्क से जुड़े इमरान और युसूफ को जुलाई 2023 में बाइक चोरी करने के मिशन पर भेजा गया था लेकिन वो पुलिस द्वारा पकड़े गए। हालाँकि शाहनवाज फरार होने में कामयाब रहा था।

इधर इमरान और युसूफ को शुरुआत में पुलिस ने दोनों को मामूली चोर समझा। लेकिन, बाद में उनके ISIS से जुड़े होने का खुलासा हुआ। तब से इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और महाराष्ट्र ATS ने भी पड़ताल शुरू की। कोढ़वा इलाके में दबिश दे कर 7 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। इधर शाहनवाज और उसके 3 अन्य फरार साथियों पर 3-3 लाख का इनाम भी घोषित कर दिया गया। NIA शाहनवाज को पकड़ने के लिए ताबड़तोड़ दबिश दे रही थी। हालाँकि इस बीच शाहनवाज दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़ गया।

ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारने की थी तैयारी

पुलिस को शाहनवाज के ठिकाने से लोहे की पाइपें और प्लास्टिक केमिकल मिले हैं। उसके मोबाइल से विस्फोटक बनाने के तरीकों का लिट्रेचर भी बरामद हुआ है। ये लिट्रेचर उसे उसके पाकिस्तानी आका भेजते थे। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार ये सभी आरोपित भीड़भाड़ वाली जगह ब्लास्ट कर के ज्यादा से ज्यादा जनहानि करना चाहते थे। इस गैंग के निशाने पर कुछ बड़े नाम भी थे। पुलिस को इन सभी के फंडिंग सोर्स की भी जानकारी मिली है। हालाँकि पुलिस ने इन मामलों में खुल कर जानकारी देने से मना कर दिया।

शाहनवाज के साथ जो 2 अन्य आरोपित गिरफ्तार हुए हैं उनके नाम मोहम्मद रिज़वान अशरफ और मोहम्मद अशरफ वारसी हैं। मोहम्मद रिज़वान अशरफ को लखनऊ जबकि अशरफ वारसी को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार हुए तीनों आतंकी पेशे से इंजिनियर हैं। पुलिस ने तीनों आरोपितों को अदालत में पेश किया। यहाँ से तीनों को 7 दिनों की कस्टडी रिमांड पर भेज दिया गया है। रिमांड के दौरान इन सभी से और अधिक कबूलनामे की उम्मीद जताई जा रही है।

भारतीय मूल के अमेरिकी एंकर फरीद जकारिया ने आतंकी निज्जर को बताया ‘खालिस्तानी एक्टिविस्ट’, ट्रूडो के बचाव में भारत में चुनाव की गढ डाली कहानी

अमेरिकी समाचार चैनल CNN ने 2 अक्टूबर 2023 को भारतवंशी अमेरिकी टीवी एंकर फरीद जकारिया का एपिसोड जारी किया है। इसमें जकारिया ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत और कनाडा के बीच चल रही राजनयिक रस्साकशी के विषय में बात की है।

पाँच मिनट के इस वीडियो में कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे रफीक जकारिया के पुत्र फरीद जकारिया खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को सामान्य एक्टिविस्ट बताने की पूरी कोशिश करते हैं। इसी वीडियो में वह भारत को लेकर खालिस्तानी खतरे को कम कर के आंकते हैं।

जकारिया दावा करते हैं कि भारत खालिस्तान के मुद्दे को आवश्यकता से अधिक उठा रहा है। जकारिया यह भी कहते हैं कि खालिस्तान का मुद्दा अधिक इसलिए उठाया जा रहा है, ताकि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में आसानी हो।

जकारिया अपने वीडियो की शुरुआत कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों से करते हैं और हरदीप सिंह निज्जर को एक ‘एक्टिविस्ट’ और गुरुद्वारे का मुखिया बताते हैं और जून में हुई उसकी हत्या का जिक्र करते हैं।

खालिस्तानी आतंकी निज्जर को ‘एक्टिविस्ट’ बताते बताते समय जकारिया यह भूल जाते हैं कि उसके विरुद्ध दो बार इंटरपोल का रेड कार्नर नोटिस निकल चुका था। निज्जर भारत में 10 मामलों में नामजद था जिसमें बम विस्फोट जैसे गंभीर आरोप भी हैं।

जकारिया जानबूझ कर यह तथ्य छुपा ले जाते हैं कि ट्रूडो खालिस्तानियों का पक्ष राजनीतिक कारणों से ले रहे हैं। वह भारत के क़दमों को राजनीतिक बताते हैं, लेकिन यह बताना भूल जाते हैं कि जस्टिन ट्रूडो की खुद की सरकार जगमीत सिंह के भरोसे चल रही है और वह उन्हीं को खुश करने के लिए खालिस्तानियों का समर्थन कर रहे हैं।

जकारिया जस्टिन ट्रूडो की बचकाना हरक़तों का पक्ष लेते हुए कहते हैं कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत पर इसलिए आरोप लगाए हैं, ताकि भारत को जाँच में सहयोग करने पर मजबूर किया जा सके।

हालाँकि, यह कोई पहला मौका नहीं है जब जकारिया ने भारत विरोधी रवैया अपनाया हो। वह इससे पहले अमेरिका को भारत में हस्तक्षेप करने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने इस बात की अपील भी की थी कि अमेरिका को भारत में NGO, सांस्कृतिक समूहों और प्रेस आदि से सीधे संवाद करना चाहिए।

यह सीधे-सीधे इस बात इशारा है कि भारत में सत्ता किसी तरह बदली जाए। हास्यास्पद रूप से उन्होंने भारत को अपने हितों को पूरा करने के लिए निशाने पर लिया था। उनका कहना था कि अमेरिका के सहयोगी को उसके हित ऊपर रखने चाहिए।

कनाडा वाले मामले पर डाले गए वीडियो में वह भारतीय मीडिया की कुछ क्लिप चलाते हैं। जकारिया का कहना है कि मीडिया द्वारा चलाई गई इन खबरों से भारत में अति राष्ट्रवाद की भावनाएँ उत्पन्न हो रही हैं।

जकारिया वीडियो में कहते हैं, “भारत में इस मामले पर प्रतिक्रिया काफी अलग हैं और यह बात सामने आती है कि ट्रूडो ने बड़ी गलती कर दी है। आप भारतीय प्रेस को देखिए, इस कहानी (निज्जर से सम्बंधित) ने भारत में अति राष्ट्रवाद की भावनाएँ जगा दी हैं, जिसमें कनाडा को एक बहु-सांस्कृतिक नहीं, बल्कि आतंकियों को शरण देने वाला एक राष्ट्र बताया जा रहा है।”

अपने दावे को मजबूत करने के लिए वह टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी का एक वीडियो दिखाते हैं जिसमें गोस्वामी ट्रूडो को आतंकियों का मददगार और उनका समर्थक बताते हैं। जकारिया का यह भी कहना है कि राजनीतिक विश्लेषक सुशांत सरीन ने इस पूरी स्थिति को सही ढंग से लिखा है। इसके लिए वह सुशांत का एक ट्वीट दिखाते हैं जिसमें यह लिखा है, “अगर ये (निज्जर की हत्या) हमने किया है तो ठीक किया है और अगर हमने नहीं किया है तो आप गलत हैं।”

फरीद जकारिया आगे कहते हैं, “हिन्दुस्तान टाइम्स का एक विश्लेषण बताता है कि निज्जर की हत्या एक ऐसा लम्हा होगा जब पश्चिमी शक्तियाँ भारत के विरुद्ध एकत्रित हो जाएँगी।”

जकारिया अपने दर्शकों को भारत द्वारा कनाडा को आतंकियों की शरणस्थली क्यों कह रहा है, यह समझाते समय भारत के लिए खालिस्तानी खतरे को काफी छोटा करके बताते हैं। वह निज्जर को सिख कार्यकर्ता बताकर लगातार उसकी आतंकी गतिविधियों को छुपाते हैं।

इस संबंध में वह कहते हैं, “भारतीय अधिकारियों ने कनाडा पर आतंकियों को शरण देने का आरोप लगाया है। ये आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह इस बात का संदर्भ है कि निज्जर एक सिख अलगाववादी था। उन सिखों में से एक जो कि भारत में एक सिख राष्ट्र की माँग करते हैं। यह माँग दशकों पुरानी है और 1980 के दशक में इसके लिए एक हिंसा का रास्ता भी चुना गया था।”

इन सब के बीच जकारिया यह बताना भूल जाते हैं कि कनाडा में लगातार हिन्दुओं को हिंसा की धमकियां दी जा रही हैं और रैलियाँ आयोजित की जा रही हैं। इसके लिए वह द इकॉनोमिस्ट का सहारा लेकर बताते हैं कि खालिस्तान सिख समुदाय में चर्चा का विषय है।

जकारिया कहते हैं, “इकॉनोमिस्ट के अनुसार, 1980 और 1990 के दशक में खालिस्तान आन्दोलन ने हजारों जानें ली थीं, लेकिन तब से यह विदेशों में रहने वाले सिखों में केवल बातचीत का मुद्दा है और भारत में इसे कोई समर्थन नहीं हासिल है।”

यह राष्ट्रीय सुरक्षा का नहीं, पीएम मोदी के लिए राजनीतिक लाभ का मुद्दा

जकारिया का कहना है कि कनाडा यदि भारत द्वारा उठाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाता है तो इसका राजनीतिक रूप से फायदा प्रधानमंत्री मोदी को होगा।

जकारिया का कहना है, “इस मामले में जो कुछ भी सच्चाई हो, भारत और कनाडा में ‘सिख एक्टिविस्टों’ को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। जैसा की फाइनेंसियल टाइम्स कहता है, भारत ने कनाडा पर आतंकियों पर सख्त रवैया ना अपनाने के आरोप लगाए हैं जिनका परीक्षण होना चाहिए। लेकिन यह भी सत्य है कि इस मुद्दे को उठाना भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए फायदेमंद है।”

जकारिया ने पुलवामा हमले का उदाहरण देते हुए बताया कि ट्रूडो ने जो नीति इस मामले में अपनाई है वह गलत है। जकारिया यहीं नहीं रुके, वह इन सब विवाद के बीच में हिन्दू राष्ट्रवाद को भी खींच लाए।

उन्होंने कहा, “आप समझिए कि सार्वजनिक तौर पर भारत का नाम लेने की ट्रूडो की नीति मोदी के हिन्दू राष्ट्रवाद को नहीं समझ पाती जो कहता है कि भारत बहुत लम्बे समय से पश्चिमी ताकतों और अल्पसंख्यकों के सामने दब्बू रहा है। जब भी कोई अवसर आएगा, प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि इसका लाभ कैसे लिया जाए।”

जकारिया ने 2019 के पुलवामा हमले के विषय में बताते हुए कहा, “वर्ष 2019 में एक आत्मघाती हमलावर ने हमला करके बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों को मार दिया था। भारत ने पाकिस्तान पर इसका आरोप लगाया और भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर एक आतंकी ट्रेनिंग कैम्प पर हमले किए। हालाँकि, पाकिस्तान ने किसी भी नुकसान से मना किया था, लेकिन यह पचास वर्षों में पहली बार था कि भारत ने सीमा पार ऐसी कार्रवाई की थी।”

तब की परिस्थितियों को जकारिया ने वर्तमान से जोड़ते हुए बताने का प्रयास किया कि कनाडा भारत के लिए नया पाकिस्तान है। जकारिया ने दावा किया कि कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह फायदेमंद होगा कि वह प्रदर्शित करें कि वह पश्चिमी देशों के रवैये और सिख अलगाववाद के विरुद्ध खड़े हैं।

जकारिया ने समाचार पत्र ब्लूमबर्ग का हवाला देते हुए कहा, “जैसा कि ब्लूमबर्ग ने कहा है, मोदी की जीत में इस बात का बड़ा रोल था कि उन्होंने एक चुनावी रैली में आतंकियों को घुस कर मारने की बात की थी। उन्होंने यह भी बिना सबूत के कहा था कि विपक्षी दलों को आतंकियों के साथ सहानुभूति है।”

जकारिया ने आगे कहा, “इसके बाद प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में बढ़त देखी गई। अब उनके सामने एक और चुनाव है और अगर वह अपने आप को ऐसे प्रदर्शित करते हैं कि वह सिख अलगाववाद और पश्चिमी देशों के विरुद्ध खड़े हैं तो उनके लिए यह फायदेमंद होगा, भले ही यह असल मुद्दा हो या नहीं।”

जातीय गणना: लालू ने बताया संपूर्ण क्रांति तो राहुल गाँधी ने जनसंख्या के हिसाब से भागीदारी का लिया प्रण, गिरिराज सिंह बोले- सब भ्रम है

बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना के आँकड़े जारी कर दिए हैं। बिहार सरकार द्वारा आँकड़े जारी करने के बाद तमाम बड़े नेताओं की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। राहुल गाँधी ने तो पूरे देश में जातिगत जनगणना की माँग कर डाली है। वहीं, लालू प्रसाद ने जेपी के संपूर्ण क्रांति को याद किया है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार समेत वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रियाएँ कुछ ऐसी रहीं।

नीतीश कुमार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “जाति आधारित गणना के लिए सर्वसम्मति से विधानमंडल में प्रस्ताव पारित किया गया था। बिहार विधानसभा के सभी 9 दलों की सहमति से निर्णय लिया गया था कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराएगी। दिनांक 02-06-2022 को मंत्रिपरिषद से इसकी स्वीकृति दी थी। इसके आधार पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराई है।”

उन्होंने आगे लिखा है, “जाति आधारित गणना से न सिर्फ जातियों के बारे में पता चला है, बल्कि सभी की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी मिली है। इसी के आधार पर सभी वर्गों के विकास एवं उत्थान के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना को लेकर शीघ्र ही बिहार विधानसभा के उन्हीं 9 दलों की बैठक बुलाई जाएगी और जाति आधारित गणना के परिणामों से उन्हें अवगत कराया जाएगा।”

बिहार की राजनीति में दशकों तक सक्रिय रहे आरजेडी के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने भी ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “जातीय जनगणना से ही जेपी का संपूर्ण क्रांति का सपना पूरा होगा, 2015 में भी मैंने यह बात कही थी।”

लालू प्रसाद यादव ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “आज गाँधी जयंती पर इस ऐतिहासिक क्षण के हम सब साक्षी बने हैं। बीजेपी की अनेकों साजिशों, कानूनी अड़चनों और तमाम षड्यंत्र के बावजूद आज बिहार सरकार ने जाति आधारित सर्वे को रिलीज किया। ये आँकड़े वंचितों, उपेक्षितों और गरीबों के समुचित विकास और तरक़्क़ी के लिए समग्र योजना बनाने एवं हाशिए के समूहों को आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने में देश के लिए नज़ीर पेश करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “सरकार को अब सुनिश्चित करना चाहिए कि जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी हो। हमारा शुरू से मानना रहा है कि राज्य के संसाधनों पर न्यायसंगत अधिकार सभी वर्गों का हो। केंद्र में 2024 में जब हमारी सरकार बनेगी तब पूरे देश में जातिगत जनगणना करवायेंगे और दलित, मुस्लिम, पिछड़ा और अति पिछड़ा विरोधी भाजपा को सता से बेदखल करेंगे।”

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने कहा कि बिहार की जातिगत जनगणना से पता चला है कि वहाँ OBC + SC + ST 84% हैं। केंद्र सरकार के 90 सचिवों में सिर्फ 3 OBC हैं, जो भारत का मात्र 5% बजट सम्भालते हैं। इसलिए, भारत के जातिगत आँकड़े जानना जरूरी है। जितनी आबादी, उतना हक। ये कॉन्ग्रेस का प्रण है।

बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा, “कम समय में जाति आधारित सर्वे के आँकड़े एकत्रित एवं उन्हें प्रकाशित कर बिहार आज फिर एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। दशकों के संघर्ष ने एक मील का पत्थर हासिल किया। इस सर्वेक्षण ने ना सिर्फ वर्षों से लंबित जातिगत आँकड़े प्रदान किए हैं, बल्कि उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति का भी ठोस संदर्भ दिया है। अब सरकार त्वरित गति से वंचित वर्गों के समग्र विकास एवं हिस्सेदारी को इन आंकड़ों के आलोक में सुनिश्चित करेगी।”

उन्होंने आगे लिखा, “इतिहास गवाह है भाजपा नेतृत्व ने विभिन्न माध्यमों से कितनी तरह इसमें रूकावट डालने की कोशिश की। बिहार ने देश के समक्ष एक नजीर पेश की है और एक लंबी लकीर खींच दी है सामाजिक और आर्थिक न्याय की मंज़िलों के लिए। आज बिहार में हुआ है कल पूरे देश में करवाने की आवाज उठेगी और वो कल बहुत दूर नही है। बिहार ने फिर देश को दिशा दिखाई है और आगे भी दिखाता रहेगा।”

भाजपा ने बताया दिखावा

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है, “जाति जनगणना राज्य के गरीबों और जनता के बीच ‘भ्रम’ फैलाने से ज्यादा कुछ नहीं करेगी। उन्हें एक रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए था कि नीतीश कुमार ने 18 साल तक राज्य पर शासन किया और लालू यादव ने 15 वर्षों तक राज्य पर शासन किया, लेकिन राज्य का विकास नहीं किया। जाति जनगणना का रिपोर्ट कार्ड सिर्फ दिखावा है…।”

बिहार में आए जातिगत जनगणना के आंकड़े

बता दें कि बिहार में हुई जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी हो गई है। बिहार के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने इन आँकड़ों को जारी करते हुए बताया कि बिहार में पिछड़ा वर्ग 27.13%, अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01%, सामान्य वर्ग 15.52% है। बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ से अधिक है। इन आँकड़ों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जाति की कुल आबादी तीन प्रतिशत से भी कम है।

शिवभक्त उजमा शुद्धिकरण के बाद बनी उर्मिला, भागीरथ से की शादी: परिजनों से बताया जान का खतरा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में उजमा नाम की मुस्लिम महिला ने घर वापसी करते हुए हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है। उजमा का नया नाम उर्मिला रखा गया है। उर्मिला ने अगत्स्य मुनि आश्रम में वैदिक विधि-विधान से भागीरथ नाम के युवक से विवाह किया। उजमा और भागीरथ मूल रूप से पीलीभीत जिले के निवासी हैं। यह विवाह रविवार (1 अक्टूबर 2023) को सम्पन्न हुआ।

भागीरथ मूल रूप से पीलीभीत के नेओरीया थाना क्षेत्र के हुल्करी ढकिया के निवासी हैं। उजमा इसी जिले के हुसैनपुर क्षेत्र की। इस शादी को संपन्न करवाने वाले पंडित केके शंखधर ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि उजमा का ननिहाल भागीरथ के गाँव में है। 2 साल पहले उजमा अपनी नानी के घर गई थीं।

उजमा कुछ सामान लेने के लिए गाँव की ही एक परचून दुकान पर गई थीं, जहाँ उनकी मुलाकात भागीरथ से हुई। दोनों पहली ही मुलाकात में एक-दूसरे के प्रति आकर्षित हो गए। वे दोनों फोन पर बातें करने लगे। कुछ दिनों बाद दोनों में प्यार की गहराई में उतर गए और शादी की तैयारी करने लगे।

पंडित शंखधर ने हमें आगे बताया कि जब उजमा ने अपने अब्बा इकबाल से भागीरथ के साथ रिश्ते के बारे में बताया वो वो आग-बबूला हो गए। उजमा को जान से मारने की धमकी दी गई। साथ ही उस पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए। उजमा के घर वाले उसका निकाह कहीं और करने की तैयारी करने लगे।

हालाँकि, उजमा किसी भी हाल में भागीरथ से ही शादी करना चाहती थी। इसी मकसद से लगभग 5 माह पहले वो भागीरथ के साथ घर छोड़ कर कहीं चली गई और दोनों छिपकर रहने लगे। इस बीच उजमा और भगीरथ रजिस्टर्ड शादी के लिए कई वकीलों से सम्पर्क करते रहे।

इन्हीं में से बरेली के एक वकील ने उन्हें अगत्स्य मुनि आश्रम जाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों सभी कागजातों के साथ बरेली अगत्स्य मुनि आश्रम आए। यहाँ पंडित केके शंखधर ने दोनों के कागजातों की जाँच करवाई। पेपर सही पाए जाने और उजमा के बालिग होने की पुष्टि के आगे की प्रक्रिया पूरी की गई।

रविवार (1 अक्टूबर 2023) को विवाह से पहले उजमा का गोमूत्र और गंगाजल से शुद्धिकरण हुआ और उसे हिंदू धर्म में घरवापसी करवाई गई। इसके बाद नाम बदलकर उजमा से उर्मिला किया गया। फिर दोनों का विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अगत्स्य मुनि आश्रम में विवाह सम्पन्न हुआ।

भगीरथ पेशे से ड्राइवर हैं। वो और उनकी बीवी उजमा शादी से काफी खुश हैं। विवाह के बाद भगीरथ उजमा से उर्मिला बनी अपनी पत्नी को अपने साथ घर ले गए। लोगों ने दोनों को सुखी दाम्पत्य जीवन की शुभकामना दी हैं।

उजमा ने बताया कि उसे हिंदू धर्म में बहुत विश्वास है। उसने कहा कि वह भगवान भोलेनाथ की भक्त है। शादी के बाद अब उसने अपने घरवालों से जान का खतरा भी बताया है। उजमा ने पुलिस से अपने अपने पति भागीरथ के लिए पुलिस सुरक्षा की माँग की है।

GPS देखकर चला रहे थे कार, सड़क की जगह उफान मार रही नदी में समा गए: केरल में जन्मदिन की शॉपिंग से लौट रहे दो डॉक्टर की मौत

अक्सर हम रास्ता खोजने के लिए जीपीएस की मदद लेते हैं। जीपीएस के बताए रास्ते पर बेफ्रिक होकर चल पड़ते हैं। लेकिन केरल के एर्नाकुलम में जीपीएस की मदद से सफर कर रहे दो डॉक्टरों की नदी में डूबने से मौत हो गई।

दरअसल रविवार (1 अक्टूबर 2023) की देर रात 29 साल के डॉ. अद्वैत अपने जन्मदिन की शॉपिंग कर कोडून्गाल्लुर से कोच्चि लौट रहे थे। उनके साथ कार में चार अन्य लोग भी सवार थे। भारी बारिश के बीच वे लोग जीपीएस के सहारे आगे बढ़ रहे थे। लेकिन उनकी कार नदी में समा गई। हादसे में डॉ. अद्वैत और डॉ. अजमल आसिफ की मौत हो गई। तीन अन्य लोग समय रहते कार से बाहर निकलने में कामयाब रहे।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार ये सभी लोग एक हौंडा सिविक कार में सवार थे। रात का समय और बारिश होने के कारण उन्हें रास्ता नहीं पता चल रहा था। रास्ता का पता लगाने के लिए डॉक्टर अद्वैत ने अपने फ़ोन में जीपीएस चालू किया। जीपीएस उनको जिस रास्ते पर ले गया उस पर पानी भरा हुआ था। उन्होंने सड़क समझ कर गाड़ी आगे बढ़ा दी। लेकिन वह सड़क न होकर बारिश के कारण उफान मार रही नदी थी।

इसी नदी के वेग में डॉक्टर अद्वैत और डॉक्टर आसिफ अजमल बह गए। गाड़ी में पीछे बैठे तीन अन्य व्यक्ति निकलने में सफल रहे। स्थानीय सूत्रों ने अंग्रेजी समाचार वेबसाइट डेक्कन हेराल्ड को बताया कि गाड़ी चला रह व्यक्ति ने गलत मोड़ ले लिया और कार नदी में समा गई।

हादसे में जीवित बचे डॉक्टर गाजिक तब्शीर ने बताया, “हाँ, हम उस दौरान जीपीएस का इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन मैं गाड़ी नहीं चला रहा था, इसलिए मै यह नहीं बता सकता कि उन्हें जीपीएस ने गलत रास्ता बताया या फिर यह कोई मानवीय भूल थी।” हादसे में बचे दो अन्य लोग जिस्मन (नर्स) और तमन्ना (MBBS छात्रा) हैं। हादसे में मारे गए डॉक्टर अजमल थ्रिसुर जिले के जबकि अद्वैत कोल्लम के निवासी थे। उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

राजस्थान में ‘वन्दे भारत’ को पलटाने की साजिश: पटरियों के बीच रखे पत्थर, लोहे की रॉड और लकड़ियाँ, पत्थर न गिरें इसका भी किया था इंतजाम

राजस्थान के भीलवाड़ा में उदयपुर से जयपुर के बीच चलने ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस को पटरी से पलटाने की साजिश का खुलासा हुआ है। ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस के आने से पहले पटरी पर पत्थर, लोहे की रॉड और लकड़ियाँ रख कर इसे पलटने की साजिश की गई थी।

उदयपुर से जयपुर के बीच चलने वाली ‘वन्दे भारत’ सोमवार (2 अक्टूबर, 2023) को सुबह 7:50 पर उदयपुर से रवाना होकर दोपहर 2:10 मिनट पर जयपुर पहुँचती है। यह ट्रेन भीलवाड़ा दिन में 10:20 बजे पहुँचती है। इसी समय ट्रेन की पटरी पर यह पत्थर पाए गए। वीडियो में देखा जा सकता है कि ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस रुकी हुई है और रेलवे के कर्मचारी पटरी पर से पत्थर हटा रहे हैं। पटरी पर कई जगह एक के ऊपर एक कई पत्थर रखे गए हैं। इस वजह से ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस पत्थरों के हटने तक खड़ी रही।

ट्रेन के चलने के कारण पटरी पर होने वाले कम्पन के कारण पत्थर नीचे ना गिरे इसके लिए भी साजिशकर्ताओं ने इंतजाम किया था। ऐसी जगह पर पत्थर रखे गए थे जहाँ दो पटरियाँ आपस में मिलती हैं। इन पटरियों के बीच में लोहे की रॉड लगा कर पत्थर रखे गए थे जिससे ट्रेन इसके ऊपर चढ़े और पलट जाए।

हालाँकि, पटरी पर नजर रखने के कारण लोको पायलट ने सही समय पर ट्रेन रोक दी और हादसा होने से बच गया। लोको पायलट ने ट्रेन रोक कर रेलवे के अन्य स्टाफ को सूचना दी और पटरी पर से पत्थर हटवाए।

इस ट्रेन को 24 सितम्बर को ही चलाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिन 9 वन्दे भारत ट्रेनों को एक साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हरी झंडी दिखाई थी, उनमें से एक यह भी थी। यह राजस्थान की चौथी ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस है। इस घटना पर अभी तक रेलवे ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालाँकि, रेलवे पुलिस को इस मामले की जाँच के लिए लगाया गया है। इससे पहले भी देश भर में ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेनों पर कई बार पत्थर फेंके जा चुके हैं।

सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल आफताब अहमद, बच्चों से पकड़वाता था अपना लिंग: अभिभावकों से बोला- जो उखाड़ना हो उखाड़ लो

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल द्वारा छात्र-छात्राओं का यौन उत्पीड़न किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपित प्रिंसिपल का नाम आफताब अहमद है। पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित अभिभावकों ने बताया है कि वह बच्चों से अपना लिंग पकड़वाता था।

ताजा मामला 1 अक्टूबर 2023 का है। जब अभिभावकों ने इसके बारे में प्रिंसिपल से पूछा तो वह उनसे गाली गलौच पर उतर आया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामला आजमगढ़ के सिधारी थाना क्षेत्र का है। यहाँ के कटघर गाँव के कम्पोजिट विद्यालय में 55 साल का आफताब अहमद प्रिंसिपल है।

पीड़ित छात्रों के परिजनों का आरोप है कि आफताब अहमद उनके बच्चों से स्कूल में अपना प्राइवेट पार्ट पकड़वाता था। कुछ साल पहले भी उसके द्वारा इस तरह की हरकत किए जाने का मामला सामने आया था। लेकिन उस समय आफताब ने माफी माँग कर मामला निपटा लिया था। कुछ समय बाद उसने दोबारा बच्चों का यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया।

इसी क्रम में एक अक्टूबर को उसने 13 साल के एक अनुसूचित जाति के छात्र के साथ गंदी हरकत की। छात्र ने घर आ कर पूरी बात अपनी माँ को बताई। छात्र की माँ के स्कूल पहुँचने के बाद आफताब की हरकतों से पीड़ित अन्य बच्चों के अभिभावक भी वहाँ पहुँच गए। पीड़ित छात्रों और छात्राओं की संख्या करीब 1 दर्जन बताई गई है। इनकी उम्र 10 से 13 साल के बीच है।

स्कूल में अभिभावकों के पहुँचने पर आफताब नाराज हो गया। पीड़ित छात्र की माँ के अनुसार आफताब ने अपनी गलती मानने के बजाय झगड़ा शुरू कर दिया। उसने अभिभावकों को गंदी-गंदी गालियाँ दी। उनसे कहा, “जो उखाड़ना हो उखाड़ लो। तुम सब कुछ नहीं कर पाओगे।” सभी पीड़ित छात्र-छात्रों के परिजनों ने शिकायत पर गवाह के तौर पर दस्तखत किए हैं और आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने आफताब के खिलाफ IPC की धारा 354, 294 और 504 के साथ SC/ST व पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया है।

ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। इस मामले में आजमगढ़ जिले के SP सिटी ने बताया कि शिकायत मिलने पर क्षेत्र के DSP को जाँच सौंपी गई थी। जाँच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपित प्रिंसिपल के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। आफ़ताब अहमद को हिरासत में ले लिया गया है।

‘ट्रांसजेंडर से हार गई मेडल’: एशियन गेम्स में गई भारत की महिला खिलाड़ी ने सनसनीखेज दावे के बाद डिलीट किया ट्वीट, नंदिनी बोलीं – मुझे पता है मैं कौन हूँ

चीन के हांगझाऊ शहर में चल रहे एशियन गेम्स के खेल हेप्टेथलॉन में मैडल ना जीतने पर भारतीय एथलीट ने एक सनसनीखेज दावा किया है। स्वप्ना बर्मन ने कहा है कि वह अपना मेडल एक ट्रांसजेंडर से हार गईं। स्वप्ना ने यह दावा एक्स (पहले ट्विटर) पर किया।

स्वप्ना ने लिखा, “मै हांगझाऊ में आयोजित 19वें एशियन गेम्स का अपना कांस्य पदक एक ट्रांसजेंडर से हार गई। मैं अपना मेडल वापस चाहती हूँ क्योंकि यह ओलम्पिक के नियमों के विरुद्ध है। कृपया मेरी सहायता करें।” स्वप्ना ने यह ट्वीट सुबह 9:15 पर किया और कुछ देर बाद हटा भी दिया।

स्वप्ना का ट्वीट, जो उन्होंने बाद में हटा दिया (चित्र साभार: YearOfTheKraken/X)

स्वप्ना बर्मन और नंदिनी हेप्टेथलॉन की खिलाड़ी हैं। यह एक ट्रैक एंड फील्ड खेल है। इसके अंतर्गत 100 मीटर की बाधा दौड़, ऊँची कूद, शॉट पुट, 200 मीटर दौड़, लम्बी कूद, जैवेलिन थ्रो और 800 मीटर की दौड़ शामिल होती है। सभी में मिलाकर जिस खिलाड़ी के सबसे अधिक अंक बनते हैं उसे ही मेडल मिलता है।

हांगझाऊ में आयोजित हो रहे एशियन खेलों में इस खेल की प्रतियोगिता 1 अक्टूबर को भारत की ही खिलाड़ी नंदिनी अगासरा ने कांस्य पदक जीता है और स्वप्ना इस प्रतियोगिता में चौथे नम्बर पर रहीं। स्वप्ना ने अपने ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिखा, लेकिन कांस्य पदक नंदिनी ने जीता है इसलिए यह स्पष्ट हो गया कि वह किसको लेकर बात कर रहीं थी।

इस प्रतियोगिता में चीन की खिलाड़ी ने स्वर्ण पदक जबकि उज्बेकिस्तान की खिलाड़ी ने रजत पदक जीता। स्वप्ना भी रजत पदक जीतने के लिए जोर लगा रही थीं लेकिन वह कुछ प्रतियोगिताओं में पिछड़ गईं और पदक नहीं जीत सकीं। स्वप्ना के कुल 5708 पॉइंट थे जबकि नंदिनी के 5712 पॉइंट थे। स्वप्ना ने वर्ष 2018 में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार भी उनसे काफी उम्मीदें थी। हालाँकि, इस बीच वह काफी चोटों का शिकार हुई थीं और उनसे उबर कर अपना अंतिम प्रयास देने इस प्रतियोगिता में आई थी।

गौरतलब है कि खेलों में ट्रांसजेंडरों की सहभागिता को लेकर काफी विवाद होता आया है। महिला खिलाड़ियों का कहना है कि यह ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता अधिक होती है, इसीलिए वो महिलाओं से आगे निकल जाते हैं और वह महिलाओं के खेल में सहभागिता कर के उनके हिस्से के पदक भी ले जाते हैं। मार्च 2023 में विश्व एथलेटिक्स ने महिलाओं के खेलों में ट्रांसजेंडर महिलाओं के भाग लेने पर रोक लगा दी गई थी यदि उनका यौवनारम्भ (Puberty) पुरुष के तौर पर हुआ है। कुछ अन्य नियम भी इस संबंध में लाए गए थे।

स्वप्ना के ट्रांसजेंडर वाले इस इस दावे को नंदिनी ने खारिज किया है। नंदिनी ने स्वपना के इस दावे पर ‘इंडिया टुडे‘ से कहा, “मुझे पता है मैं कौन हूँ। उनसे (स्वप्ना) से कहिए कि सबूत दिखाएँ। मैं यह भी दिखाऊँगी कि मैंने देश के लिए पदक जीता है। मैं केवल देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहती हूँ।”

आगे नंदिनी ने कहा, “अब जबकि मैं जीत गई हूँ तो लोगों ने इस सम्बन्ध में बात करना चालू कर दिया है। मैं इस मामले को भारतीय एथलेटिक फेडरेशन तक लेकर जाऊँगी। मैं इस लम्हे का आनंद लेना चाहती थी लेकिन अब मैं भारत वापस जा रही क्योंकि मेरी माँ की तबीयत ख़राब है।”

खेलों के समाचार देने वाली वेबसाइट ‘स्पोर्ट्सस्टार‘ के अनुसार, स्वप्ना ने पहले कहा था, “मैं इस खेल की तैयारी पिछले 13 वर्षों से कर रही हूँ और मुझे पता है कि कितनी तैयारी कहाँ तक ले जा सकती है। सबको पता है कि यह मुकाम चार महीने में हासिल नहीं किया जा सकता। उन्हें (नंदिनी) को एशियन चैम्पियनशिप के लिए चयनित नहीं किया गया था और मुझे लगता था इस बार भी यही होगा लेकिन यहाँ मैंने उन्हें प्रतियोगिता में देखा।”

हांगझाऊ में चल रहे एशियन खेलों में भारत अब तक 56 पदक जीत कर चौथे स्थान पर है। भारत ने अभी तक 13 स्वर्ण पदक जीते हैं। एशियन खेलों में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2018 में था जब 16 स्वर्ण पदक के साथ भारत ने कुल 70 पदक जीते थे।

बेटी का नाम रखने पर माँ-बाप में चल रहा था झगड़ा, हाईकोर्ट ने 3 साल की बच्ची का नाम रखा ‘पुण्या’: जानिए क्यों पारिवारिक विवादों में लैंडमार्क साबित हो सकता है ये केस

केरल हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2023 को एक फैसला सुनाया, जिसमें तीन साल की एक बच्ची का नाम ‘पुण्या बालगंगाधरन नैयर’ रखने की अनुमति दी गई। बच्ची के माता-पिता अलग हो चुके हैं और वे अपनी बेटी के नाम को लेकर सहमत नहीं हो पा रहे थे। बच्ची के पिता अपनी बेटी का नाम ‘पद्मा नैयर’ रखना चाहते थे, जबकि माँ ‘पुण्या नैयर’ रखना चाहती थी।

पिता का नाम शामिल करने पर कोर्ट ने दिया जोर

केरल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चे के नाम को लेकर माता-पिता के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, इसलिए कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के नाम में देरी से उसके भविष्य पर असर पड़ रहा है। साथ ही वह सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से पिछड़ रही है।

कोर्ट ने कहा कि बच्चे का हित माता-पिता की लड़ाई से ज्यादा जरूरी है। बच्ची की माँ के साथ रह रही है। इसलिए उसकी माँ के सुझाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालाँकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि पिता का नाम भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि समाज पितृसत्तात्मक है। इसलिए कोर्ट ने माँ का दिया नाम पुण्या और पिता का बालगंगाधरन नैयर नाम जोड़ दिया।

माता-पिता रहते हैं अलग, नामकरण पर विवाद बढ़ा

दरअसल, बच्ची के माता-पिता अलग रहते हैं। माँ बच्ची के एडमिशन के लिए उसे स्कूल ले गई। स्कूल की ओर से बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र माँगा गया, लेकिन इस पर कोई नाम नहीं था। स्कूल ने बिना नाम के जन्म प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया और उस पर नाम दर्ज कराने के लिए कहा।

माँ जब रजिस्ट्रार ऑफिस नाम दर्ज कराने पहुँची तो रजिस्ट्रार ने पिता की सहमति के बिना कोई नाम लिखने से मना कर दिया। इसी मामले में दोनों ने कोर्ट का रुख किया, क्योंकि दोनों ही एक नाम पर सहमत नहीं थे। अंत में, कोर्ट ने बच्ची का नाम ‘पुण्या बालगंगाधरन नैयर‘ रख दिया। कोर्ट ने कहा कि बच्ची को ‘पुण्या बालगंगाधरन नैयर’ या ‘पुण्या बी. नैयर’ के नाम से भी जाना जाएगा।

अच्छा उदाहरण बन सकता है ये फैसला

यह मामला एक महत्वपूर्ण फैसला है, क्योंकि यह बताता है कि माता-पिता के बीच सहमति नहीं बनने पर कोर्ट बच्चे के नाम को लेकर हस्तक्षेप कर सकता है। यह फैसला यह भी बताता है कि बच्चे के नाम को चुनते समय बच्चे के कल्याण को ध्यान में रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने भी इस बारे में टिप्पणी की है कि बच्चे के कल्याण से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।

एक अक्टूबर से हर काम के लिए जरूरी हुआ जन्म प्रमाण पत्र

बता दें कि 1 अक्टूबर 2023 से बर्थ सार्टिफिकेट यानी कि जन्म प्रमाण पत्र का रोल बढ़ चुका है। मोदी सरकार द्वारा जारी नए नियम के अनुसार यदि आपके पास सिर्फ बर्थ सर्टिफिकेट है, तब भी स्कूल में एडमिशन से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरी, वोटर आईडी, पासपोर्ट, आधार कार्ड, विवाह पंजीयन करा सकते हैं।

वेरिफिकेशन के लिए इसका उपयोग सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर होगा। इस बारे में केन्द्र सरकार ने 13 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें कहा गया है कि बर्थ सर्टिफिकेट को सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर पर लागू किया जा रहा है, ताकि केंद्र और राज्य स्तर पर जन्म व मृत्यु डेटाबेस तैयार किया जा सके।

नीतीश कुमार की जाति पर बहुते भारी पड़ी तेजस्वी यादव की जाति: बिहार ने जारी किए जाति जनगणना के नंबर्स, सोशल मीडिया में रार देख अल्प आबादी वाले सहमे

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के बीच सरकार के फैसलों को राजनीति से हटकर मानना थोड़ा मुश्किल होता है। बिहार सरकार का जातिगत आँकड़े कुछ ऐसे ही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में जदयू, राजद और कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार द्वारा आज सोमवार (2 अक्टूबर 2023) को जातिगत आँकड़े पेश किए गए। इनको लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गया है।

जारी किए गए आँकड़ों के मुताबिक, बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 310 है। इसमें हिंदू आबादी 81.99 प्रतिशत है, जबकि 17.70 प्रतिशत जनसंख्या के साथ मुस्लिम आबादी दूसरे नंबर पर है। प्रदेश में ईसाइयों 0.05 प्रतिशत, सिख 0.011 प्रतिशत, बौद्ध 0.0851 प्रतिशत और जैन 0.0096 प्रतिशत है। इस बिहार में बौद्धों की आबादी 1,11,226, जैनों की जनसंख्या 12,523 और सिखों की जनसंख्या 14753 है। इनमें 2146 लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने कहा कि उनका कोई धर्म नहीं है।

अगर संविधानिक संरचना के अनुसार आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश की कुल जनसंख्या में सामान्य वर्ग, जिसे अगड़ा भी कहा जाता है, की जनसंख्या 15.52 प्रतिशत है। वहीं पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.12 प्रतिशत और अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति (SC) 19.65 और अनुसूचित जनजाति (ST) 1.68 प्रतिशत हैं।

अगर हिंदुओं की जाति आधारित संख्या की बात करे तो सबसे अधिक जनसंख्या यादव लिखने वाले अहीर/गोप/ग्वाला जाति की है। उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत है। वहीं, दूसरे स्थान पर 4.21 प्रतिशत आबादी के साथ कुशवाहा (कोइरी) दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर ब्राह्मण, चौथे स्थान पर क्षत्रिय यानी राजपूत और पाँचवे स्थान पर मुसहरों की आबादी है।

अगर सामान्य वर्ग में जाति आधारित जनसंख्या की बात की जाए तो इसमें सबसे अधिक आबादी ब्राह्मण और उससे थोड़ा सा ही नीचे क्षत्रिय आबादी है। बिहार में ब्राह्मणों की आबादी 3.65 प्रतिशत, क्षत्रिय (राजपूत) की 3.45 प्रतिशत और भूमिहार की 2.87 प्रतिशत है। वहीं, बनिया की आबादी 2.31 प्रतिशत और कायस्थ की आबादी 0.60 प्रतिशत है।

उसी तरह, अगर पिछड़ों, अतिपिछड़ों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में बात की जाए तो यादव जाति की आबादी सबसे अधिक 14 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर 4.21 प्रतिशत के साथ कुशवाहा (कोइरी) हैं। तीसरे स्थान पर 3.08 प्रतिशत के साथ मुसहर है। इसके बाद कुर्मी 2.87 प्रतिशत, मल्लाह 2.6086, बढ़ई 1.45 प्रतिशत, पासी 0.98 प्रतिशत और राजभर 0.17 प्रतिशत हैं।

जातिगत आँकड़ें जारी होने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बधाई दी है। उन्होंने कहा, “आज गाँधी जयंती के शुभ अवसर पर बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना के आँकड़े प्रकाशित कर दिए गए हैं। जाति आधारित गणना के कार्य में लगी हुई पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई ! जाति आधारित गणना के लिए सर्वसम्मति से विधानमंडल में प्रस्ताव पारित किया गया था।”

उन्होंने आगे कहा, “जाति आधारित गणना से न सिर्फ जातियों के बारे में पता चला है बल्कि सभी की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी मिली है। इसी के आधार पर सभी वर्गों के विकास एवं उत्थान के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी। बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना को लेकर शीघ्र ही बिहार विधानसभा के उन्हीं 9 दलों की बैठक बुलाई जाएगी तथा जाति आधारित गणना के परिणामों से उन्हें अवगत कराया जाएगा।”

इस जाति आधारित जनगणना का उद्देश्य क्या था, इसकी झलक मिलने लगी है। सोशल मीडिया पर 15 प्रतिशत वाले सवर्णों को नजरअंदाज करने की बात कही जाने लगी है। वहीं, अपनी विभाजनकारी नीति और ‘भूरा बाल (भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, लाला) साफ करो’ का नारा देने वाले लालू यादव ने अपनी राजनीतिक पैंतरेबाजी शुरू कर दी है।

लालू ने ट्वीट किया, “सरकार को अब सुनिश्चित करना चाहिए कि जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी हो। हमारा शुरू से मानना रहा है कि राज्य के संसाधनों पर न्यायसंगत अधिकार सभी वर्गों का हो। केंद्र में 2024 में जब हमारी सरकार बनेगी तब पूरे देश में जातिगत जनगणना करवाएँगे और दलित, मुस्लिम, पिछड़ा और अति पिछड़ा विरोधी भाजपा को सता से बेदखल करेंगे।”