ब्रिटेन में खालिस्तानी आतंकियों की हरकतें बढ़ती जा रही हैं। अब उन्होंने 2 अक्टूबर 2023 को गाँधी जयंती के अवसर पर लंदन के भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे पर गोमूत्र डाला गया। खालिस्तानियों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को भी गोमूत्र पीने के लिए कहा। इसका वीडियो सामने आया है।
वीडियो में एक खालिस्तानी कह रहा है कि वो लोग भारतीय उच्चायोग के लिए गिफ्ट के तौर पर गोमूत्र लेकर आए हैं। उसने उच्चायोग के अधिकारियों से कहा कि वे बाहर आएँ और यह गिफ्ट लें। वहीं एक अन्य खालिस्तानी ने कहा कि भारत वाले गाँधी जयंती मना रहे हैं। वे गोमूत्र पीकर जश्न मना सकते हैं। इस तरह खालिस्तानी गोमूत्र के नाम पर हिंदुओं का मजाक उड़ा रहे हैं।
एक अन्य खालिस्तानी ने कहा कि वह पहले भी पीएम मोदी को गोमूत्र देने आ चुका है। उसने आगे कहा कि चंद्रमा पर जो चंद्रयान गया था, वह भी इसलिए बंद हो गया क्योंकि भारतीय गोमूत्र जैसी चीजों का उपयोग करते हैं। इसके बाद खालिस्तानी गुरुचरण सिंह भारतीय उच्चायोग की दीवार के पास तिरंगा रखकर उस पर गोमूत्र डालते दिखाई दे रहा है। गुरुचरण, गुरूपतवंत सिंह पन्नू के प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस से जुड़े खालसा यूके का सदस्य है।
इस दौरान एक खालिस्तानी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को गोमूत्र पीने के लिए कह रहा है। वहीं मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पम्मा भारत को धमकी देता नजर आ रहा है। मौके पर मौजूद सुरक्षा अधिकारी हाथ पर हाथ धरे खड़े रहे। वहीं एक अन्य वीडियो में एक भारतीय जमीन पर पड़े तिरंगे को उठाकर ले जाता दिखाई दिया।
#Exclusive Yesterday, Monday, on Gandhi Jayanti, Khalistanis held a protest outside the Indian High Commission in London (@HCI_London)
बता दें कि इससे पहले मार्च 2023 में भी खालिस्तानी आतंकियों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान आतंकियों ने उच्चायोग में लगे भारतीय झंडे को निकालकर फेंक दिया था और वहाँ खालिस्तानी झंडा टाँग दिया था। इस कृत्य की भारत ने कड़ी निंदा की थी। बाद में उच्चायोग में पहले से भी बड़ा तिरंगा लगा दिया गया था।
पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता में आने के बाद से अब तक ₹47,107 करोड़ का कर्ज लिया है। यह जानकारी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित (Banwari Lal Purohit) को लिखे एक पत्र में दी है। मुख्यमंत्री मान ने राज्यपाल से कहा है कि वो केंद्र की मोदी सरकार को इस बात के लिए मनाएँ कि पंजाब से पाँच साल तक किसी भी प्रकार के कर्जों की वसूली ना हो।
भगवंत मान ने इस पत्र में बताया है कि उनकी सरकार ने मार्च 2022 में पंजाब की सत्ता में आने के बाद वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान ₹32,447 करोड़ और चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पाँच महीनों (अप्रैल-अगस्त) के दौरान ₹14,660 करोड़ का कर्ज लिया है।
पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने 22 सितम्बर, 2023 को मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक पत्र लिख कर जानकारी माँगी थी कि उनकी सरकार आने के बाद लिए गए कर्जों का किस प्रकार उपयोग किया गया है।
अब एक पत्र के जरिए ही मुख्यमंत्री मान ने यह जानकारी राज्यपाल को दी है। इस पत्र में मुख्यमंत्री मान ने कहा है कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद लिए गए कर्जे में से ₹27,016 करोड़ का खर्च पुराने कर्जों का ब्याज देने में हो गया है। उन्होंने कहा है कि यह कर्ज पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार से उन्हें विरासत में मिला था।
Punjab CM Bhagwant Maan writes to Punjab Governor Banwarilal Purohit, giving details of the increase in debt by his Government.
Bhagwant Maan writes, "I would also urge upon you to convince Hon'ble Prime Minister to not only release the pending RDF but also accord a moratorium… pic.twitter.com/5WeQ3WmHlr
मुख्यमंत्री मान ने पंजाब के राज्यपाल को कर्जे के खर्च की जानकारी देने के अलावा उनसे यह अपील की है वह केंद्र से कहें कि पंजाब से पाँच वर्षों तक कर्जे की वसूली पर रोक लगे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने केंद्र से ग्राम विकास फंड (RDF) और मंडी विकास फंड (MDF) का पैसा देने की अपील की है।
केंद्र द्वारा पंजाब में अनाज खरीद पर पंजाब की राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य का 3% MDF और RDF लगाता है। पंजाब का कहना है कि केंद्र सरकार ने बीते चार फसल विपणन सीजन से उसे यह पैसा नहीं दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब सरकार का कहना है कि केंद्र के पास पंजाब के ₹4,208 करोड़ रूपए इस मद के हैं। भगवंत मान ने राज्यपाल से कहा है कि वह केंद्र से इस पैसे को रिलीज करने के लिए कहें।
पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति पर लगातार प्रश्न उठते रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी केंद्र सरकार से अतिरिक्त पैसे की माँग करते आए हैं। इस पत्र में भी उन्होंने पंजाब के कर्जों की वसूली पर रोक लगाने को कहा है।
राज्य के विपक्षी नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने राज्य का कर्ज मात्र 1.5 वर्षों में ही ₹50,000 करोड़ बढ़ा दिया है। विपक्ष ने इस कर्ज का ऑडिट करवाने की माँग भी की थी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल को लिखे गए पत्र में कहा है कि वह राज्य की कमाई को बढ़ा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कहा है कि राज्य का GST संग्रह 2021-22 से 2022-23 के बीच 16.6% बढ़ा है, उन्होंने इसे एक उपलब्धि के तौर पर बताया है। हालाँकि, इस बीच देश में GST संग्रह में 22% बढ़ोतरी हुई है। यह दर्शाता है कि पंजाब राष्ट्रीय औसत से पिछड़ रहा है।
उन्होंने राज्य के अन्य राजस्व में भी बढ़ोतरी को उपलब्धि बताया है जबकि द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट बताती है कि पंजाब में राजस्व में थोड़ी बढ़ोतरी इसलिए हुई है क्योंकि उन्होंने ईंधन और कलेक्ट्रेट फीस को बढ़ा दिया था।
लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पंजाब पर वर्तमान में ₹3.05 लाख करोड़ का कर्ज है। आम आदमी पार्टी की सरकार के आने से पहले यह ₹2.59 लाख करोड़ था। पंजाब के कर्जे में तेज बढ़ोतरी का कारण पुराने कर्जों का ब्याज, मुफ्त बिजली के लिए दी जाने वाली सब्सिडी और सरकार की कमाई में कोई ख़ास वृद्धि ना होना है।
लोकसभा में पंजाब के कर्ज के सम्बन्ध में दिया गया उत्तर
हाल ही में आई रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब पर उसकी जीडीपी का 48% कर्ज है जो कि सामान्य सीमा से बहुत अधिक है। राज्यों के वित्तीय प्रबन्धन का नियोजन करने वाला FRBM (Fiscal Responsibility & Budgetry Management Act) के अंतर्गत राज्यों का कर्ज उनकी जीडीपी का अधिकतम 20% होना चाहिए।
वहीं अंग्रेजी समाचार पत्र द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2022 से जुलाई 2023 के बीच पंजाब सरकार को मुफ्त बिजली देने के लिए ₹27,552 करोड़ खर्चा करना पड़ा है। इसी दौरान सरकार का राजस्व ₹1.13 लाख करोड़ था। इसका अर्थ है कि राज्य के राजस्व का 24.20% पैसा मात्र बिजली मुफ्त देने में जा रहा है।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सत्ता में आने के लिए कई वादे किए थे। इसमें हर परिवार को 300 यूनिट मुफ्त बिजली के दावे ने आम आदमी पार्टी को खूब समर्थन दिलाया था। हालाँकि, अब यह सब्सिडी पंजाब सरकार को कर्ज में डुबा रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज (बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इसी अस्पताल में भर्ती देवरिया के जमीनी विवाद में घायल बच्चे का कुशल क्षेम जाना। साथ ही CM योगी ने अन्य मरीजों से बातचीत की और अस्पताल की व्यवस्थाओं को परखा। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों से गरीबों के इलाज के लिए बेहतर प्रबंध करने को कहा।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने इस निरीक्षण की तस्वीरें आधिकारिक ‘X’ हैंडल (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर की हैं। तस्वीरों में उनके साथ डॉक्टरों का पैनल मौजूद दिख रहा है। देवरिया के जमीनी विवाद में घायल बच्चे की के सिर में पट्टी बँधी दिखी। तस्वीरों में डॉक्टर इलाज संबंधित जानकारियाँ भी साझा करते दिखाई पड़े। अनमोल बीआरडी कॉलेज के ICU वार्ड में भर्ती हैं। यहाँ उन्हें सोमवार की शाम 8 बजे लाया गया था। इसके अलावा CM योगी डेंगू और मलेरिया वार्ड में भी गए। उन्होंने किसी भी मरीज के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न करने की नसीहत दी।
आज गोरखपुर स्थित बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज में मरीजों से बातचीत कर उन्हें मिल रही सुविधाओं के विषय में जानकारी ली व उनका हाल जाना।
साथ ही, जनपद देवरिया की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में घायल हुए बच्चे का भी कुशल-क्षेम जाना।
बताते चलें कि देवरिया के रुद्रपुर में 2 अक्टूबर को हुई हिंसा के दौरान 10 वर्षीय नाबालिग अनमोल दुबे एकमात्र जीवित बच पाया था। वह घर के एक कोने में छिप गया था लेकिन हमलावरों ने उसे भी खोज कर मृत समझ कर छोड़ा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनमोल को मानसिक आघात लगा है और वो बेहद डरा हुआ है। CM योगी आदित्यनाथ ने अनमोल के पास जा कर उसका नाम पूछा। नाम बताने के बाद अनमोल फफक-फफक कर रोने लगा। हालाँकि योगी ने उसे हिम्मत दी और कहा, ‘घबराओ करो। तुम्हारा इलाज चल रहा है।”
जानकारी के मुताबिक, इस नरंसहार के आरोपितों के खिलाफ योगी आदित्यथ ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस कार्रवाई की मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री कर रहे हैं। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के फतेहपुर गांव में 2 अक्टूबर (सोमवार) को एक दिल दहला देने वाली घटना में प्रेम यादव नामक एक व्यक्ति की हत्या के बदले दूसरे पक्ष ने बच्चों समेत 5 लोगों की हत्या कर दी गई थी। सत्य प्रकाश दुबे के परिवार के 5 सदस्यों की हत्या के बाद अब उनके घर में देवेश और अनमोल ही बचे हैं। झगड़े की वजह जमीनी विवाद बताया गया है।
बिहार में जातिगत आँकड़े जारी करने के बाद इस पर बहस तेज हो गई है। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार द्वारा जारी किए जातीय आँकड़ों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। मंगलवार (3 अक्टूबर 2023) को दी गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार सरकार ने कहा था कि वह इन जातिगत आँकड़ों को सार्वजनिक नहीं करेगी। इसके बावजूद बिहार सरकार ने इसे जारी किया। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 6 अक्टूबर 2023 को सुनवाई के दौरान उनकी दलील सुनेगा।
वहीं, तमाम आलोचनाओं के बीच नीतीश कुमार की सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े (EWS) लोगों को न्यायिक सेवा में 10 प्रतिशत का आरक्षण देने की घोषणा की है। इसके अलावा 14 एजेंडा पर बिहार सरकार की कैबिनेट ने मुहर लगाई है।
बिहार उच्च न्याय सेवा संशोधन नियामवली 1951 और बिहार असैनिक सेवा न्याय शाखा भर्ती नियमावली 1955 में संशोधन पर मुहर लगी है। बिहार उच्च न्याय सेवा संशोधन नियमावली 2023 और बिहार असैनिक सेवा न्याय शाखा भर्ती संशोधन नियमावली 2023 की स्वीकृति दी गई है।
बताते चलें कि सामान्य वर्ग के लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरी में आरक्षण देने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) वर्ग बनाया गया था। इसके तहतत 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया जाता है। केंद्र की मोदी सरकार ने इसे संविधान में 103वाँ संशोधन करके साल 2019 में लागू किया था।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में जदयू, राजद और कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार द्वारा आज सोमवार (2 अक्टूबर 2023) को जातिगत आँकड़े पेश किए गए। इनको लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गया है।
जारी किए गए आँकड़ों के मुताबिक, बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 310 है। इसमें हिंदू आबादी 81.99 प्रतिशत है, जबकि 17.70 प्रतिशत जनसंख्या के साथ मुस्लिम आबादी दूसरे नंबर पर है। प्रदेश में ईसाइयों 0.05 प्रतिशत, सिख 0.011 प्रतिशत, बौद्ध 0.0851 प्रतिशत और जैन 0.0096 प्रतिशत है। इस बिहार में बौद्धों की आबादी 1,11,226, जैनों की जनसंख्या 12,523 और सिखों की जनसंख्या 14753 है। इनमें 2146 लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने कहा कि उनका कोई धर्म नहीं है।
अगर संविधानिक संरचना के अनुसार आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश की कुल जनसंख्या में सामान्य वर्ग, जिसे अगड़ा भी कहा जाता है, की जनसंख्या 15.52 प्रतिशत है। वहीं पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.12 प्रतिशत और अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति (SC) 19.65 और अनुसूचित जनजाति (ST) 1.68 प्रतिशत हैं।
अगर हिंदुओं की जाति आधारित संख्या की बात करे तो सबसे अधिक जनसंख्या यादव लिखने वाले अहीर/गोप/ग्वाला जाति की है। उनकी जनसंख्या 14 प्रतिशत है। वहीं, दूसरे स्थान पर 4.21 प्रतिशत आबादी के साथ कुशवाहा (कोइरी) दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर ब्राह्मण, चौथे स्थान पर क्षत्रिय यानी राजपूत और पाँचवे स्थान पर मुसहरों की आबादी है।
न्यूज क्लिक (Newsclick) मामले में दिल्ली पुलिस ने सीपीआईएम के महासचिव सीताराम येचुरी तो मुंबई पुलिस ने प्रोपेगेंडा एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ के घर की भी तलाशी ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मंगलवार (3 अक्टूबर 2023 ) को डिजिटल न्यूज वेबसाइट न्यूज़क्लिक और मीडिया कंपनी से जुड़े पत्रकारों के 30 ठिकानों पर छापेमारी की।
वेबसाइट की फंडिंग की जाँच के तहत ये छापेमारी शुरू की गई है। वेबसाइट के खिलाफ केस 17 अगस्त को दर्ज किया गया था। केस गैरकानूनी गतिविधियांँ (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 120 बी (आपराधिक साजिश के लिए सजा) के तहत दर्ज किया गया।
इससे पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भी केस दर्ज किया था। इसके साथ ही ईडी ने भी कार्रवाई की थी। हाई कोर्ट ने उस वक्त न्यूज क्लिक के प्रमोटरों को गिरफ्तारी से राहत दे दी थी।
दिल्ली में न्यूज़क्लिक के कार्यालय में तलाशी के साथ ही तीस्ता सीतलवाड के मुंबई आवास पर भी तलाशी ली जा रही है। सीतलवाड थिंक टैंक ट्राइकॉन्टिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक हैं। वो भी न्यूज़क्लिक में आर्टिकल लिखती रही हैं।
उधर दूसरी तरफ दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में न्यूज़क्लिक वेबसाइट से जुड़े कुछ पत्रकारों के घरों पर दिल्ली पुलिस की छापेमारी सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी के घर भी हुई। इस बारे में येचुरी ने खुद मीडिया को जानकारी दी है।
सीपीआई (एम) के महासचिव येचुरी ने कहा, “पुलिस मेरे घर पर आई थी, क्योंकि मेरा एक साथी जो मेरे साथ वहाँ रहता है, उसका बेटा न्यूज़क्लिक के लिए काम करता है। पुलिस उससे पूछताछ करने आई थी।”
#WATCH | Delhi: On Delhi Police conducting raids at different premises linked to NewsClick, CPI(M) General Secretary Sitaram Yechury says, "Police came to my residence because one of my companions who lives with me there, his son works for NewsClick. Police came to question him.… pic.twitter.com/ULoF9G7W7O
उन्होंने आगे कहा, पुलिस ने उनका लैपटॉप और फोन ले लिया। वे क्या जाँच कर रहे हैं, कोई नहीं जानता। अगर यह मीडिया को दबाने की कोशिश है, तो देश को इसके पीछे की वजह पता होना चाहिए।”
गौरतलब है कि न्यूज़क्लिक से जुड़े कई लोगों जिनमें वेबसाइट के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ, पत्रकार अभिसार शर्मा, औनिंद्यो चक्रवर्ती और भाषा सिंह, साथ ही व्यंग्यकार संजय राजौरा के घर पर कथित तौर पर पुलिस ने छापेमारी की है। अभिसार शर्मा ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि पुलिस उनके फोन और लैपटॉप जब्त कर रही है। इसी तरह भाषा सिंह ने बताया कि पुलिस ने उनका फोन जब्त कर लिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को छत्तीसगढ़ में न सिर्फ कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी, बल्कि बिहार में जाति आधारित जनगणना के आँकड़े जारी किए जाने के बाद शुरू हुई राजनीति पर भी बोले। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अब ‘जितनी आबादी, उतना हक़’ वाला राग अलापने शुरू कर दिए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उनके लिए सबसे ज़्यादा आबादी गरीबों की है और और गरीब कल्याण ही उनका मुख्य उद्देश्य है।
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री रहते मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए बयान का जिक्र भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मनमोहन सिंह कहते थे कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ अल्पसंख्यकों का है, उसमें भी मुस्लिमों का है। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि अब कॉन्ग्रेस कह रही है कि आबादी तय करेगी कि पहला हक़ किसका होगा। उन्होंने पूछा कि क्या कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यकों का हक़ खत्म करना चाहती है क्या? पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस से ये स्पष्ट करने को कहा कि क्या वो अल्पसंख्यकों को हटाना चाहती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “सबसे बड़ी आबादी वाले हिन्दू अब आगे बढ़ कर अपने सारे हक़ ले लें क्या? मैं पिछले काफी समय से कह रहा हूँ कि कॉन्ग्रेस पार्टी के बड़े-बड़े नेता मुँह में ताला लगा कर बैठे हैं। न उनसे पूछा जाता है और न ही उनकी बोलने की हिम्मत है। कॉन्ग्रेस को अब पर्दे के पीछे से ऐसे लोग चला रहे हैं और ऐसे खेल कर रहे हैं जो देश विरोधी है। कॉन्ग्रेस किसी भी कीमत पर देश के हिन्दुओं को बाँट कर भारत को तबाह कर देना चाहती है। वो गरीबों को बाँटना चाहती है।”
#WATCH | Chhattisgarh: At Bastar's Jagdalpur PM Modi says, "Since yesterday, Congress leaders are saying 'jitni aabadi utna haq'… I was wondering what the former Prime Minister Manmohan Singh would be thinking. He used to say that the minority has the first right to the… pic.twitter.com/m3KqCikIS4
बता दें कि बिहार में जातिगत जनगणना में पिछड़ों की जनसंख्या 63% और अनारक्षित वर्ग की जनसंख्या 15% बताई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नगरनार में भारत के सबसे आधुनिक स्टील प्लांट में से एक का भी लोकार्पण किया। उन्होंने बताया कि इस स्टील प्लांट के कारण बस्तर सहित आस-पास के इलाकों के करीब 50 हजार नौजवानों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने जानकारी दी कि 27,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात छत्तीसगढ़ को मिली है।
महाराष्ट्र के पुणे में शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को बजरंग दल के एक कार्यकर्ता के घर पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने कर हमला किया। इस दौरान सूरज चक्रधर नाम के व्यक्ति के नहीं मिलने पर उसके घर की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। उन्मादी भीड़ गणपति विसर्जन के दौरान सूरज पर में अपने मौलाना की गाड़ी रोक कर अभद्रता का आरोप लगा रही थी।
हालाँकि, सूरज ने उस घटना की वीडियो रिकार्डिंग की थी, जिसमें मुस्लिमों की गाड़ी को सबने खुद से हटकर रास्ता दिया था। पुलिस ने अभी तक सूरज की शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए सूरज ने गोरक्षा और लव जिहाद के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से खुद को कट्टरपंथियों के निशाने पर बताया।
यह मामला पुणे के जिला अम्बेगाँव के मंचर थाना क्षेत्र का है। सोमवार (2 अक्टूबर 2023) को सूरज की माँ ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने कहा कि शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को रात 10.00 से 10.30 बजे के बीच 150 से 200 मुस्लिमों की भीड़ उनके घर पर जमा हो गई थी।
उन्मादी भीड़ सूरज चक्रधर की हत्या करने के इरादे से उनके घर पर आई थी। संयोग से सूरज घर पर नहीं थे। सूरज को न पाकर भीड़ उनके घर की महिलाओं से दुर्व्यवहार करने लगी। सूरज की माँ ने आरोप लगाया है कि हमले के दौरान मुस्लिमों की भीड़ ने उनके घर पर पत्थरबाजी की। दरवाजों पर पैरों से ठोकरें मारीं और गंदी-गंदी गालियाँ दीं।
भीड़ में शामिल कुछ लोग सूरज के परिजनों से उसकी लोकेशन पूछ रहे थे। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सूरज बजरंग दल में काम करता है। सूरज की माँ से कहा गया, “वो जहाँ भी मिलेगा उसके हाथ पैर तोड़ डाले जाएँगे।” इस हिंसा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
Mob including hundreds of Islamists led by PFI members launched an attack on the residence of Hindu activist Suraj Dharam in Manchar, Pune, Maharashtra.
Attackers have been identified as Riyaz Jamadar, Israr Pathan, Azam Momin, Qayyum Pathan among others. pic.twitter.com/Qn81NPovTS
सूरज की माँ ने इस भीड़ में कुछ लोगों को पहचानने का भी दावा किया है। शिकायत कॉपी में जिन आरोपितों के नाम दिए गए हैं, वे हैं- रियाज जमादार, इसरार शाहबाज खान पठान, आजम मोमिन, कय्यूम पठान, मीरान अनीस इनामदार, आकिब रहमान अत्तार, अमन रहमान अत्तार, मोहम्मद सरताज अली जमादार, तरबेज मुख्तार कुरेशी, दानिश सिराज मोमिन, तौकीर मोहम्मद मतीन जमादार, अदनान मोहम्मद, जावेद शेख।
इसके अलावा इसमें मोहम्मद साबिर रिजवान अली सैयद, इरफान तहजान मंडल, अज़हर सिराज मोमिन, अतीक वसीम इनामदार, उजेफ वसीम इनामदार, आसिफ खान, जिया अहमद इम्तियाज जमादार, रेहान रिजवान इनामदार, शहबाज अली इनामदार, सकलेन सरफराज इनामदार, मोहम्मद फजल शेख।,सैयद हसन, अब्बास रियासत अली का भी नाम है। अन्य हमलावरों को अज्ञात में दिखाया गया है।
पहले गाडी चढ़ाने की कोशिश कोशिश, फिर झूठा हंगामा
शिकायत में सूरज की माँ ने बताया है कि उनके घर पर हमले से 1 दिन पहले यानि 28 सितंबर को रात लगभग 11:50 पर गणपति विसर्जन जुलूस चल रहा था। तभी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने जुलूस के बीचों-बीच चार पहिया गाड़ी घुसाकर लोगों को कुचलने का प्रयास किया था।
हालाँकि, जुलूस में शामिल हिन्दू समाज के लोगों ने बिना किसी बहस या झगड़े के मुस्लिमों के उस वाहन को जाने का रास्ता दे दिया। इसके बावजूद थोड़ी देर के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग गणेश विसर्जन यात्रा में शामिल लोगों के खिलाफ शिकायत लेकर थाने पर जमा हो गए।
सूरज की माँ ने आरोप लगाया है कि गाड़ी चढ़ाने में नाकाम मुस्लिम समुदाय के लोग भीड़ की शक्ल में पुलिस स्टेशन पहुँचे। यहाँ उन्होंने अमर शिवराज्य गणेश मंडल और वेतालेश्वर तरूण गणेश मित्र मंडल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में झूठी तहरीर दी। तहरीर में गणेश विसर्जन कर रहे हिन्दुओं पर मुस्लिमों की गाड़ी रोक कर मारपीट का आरोप लगाया गया था।
पुलिस ने इस शिकायत पर विसर्जन में शामिल सूरज को अन्य कुछ लोगों सहित हिरासत में ले लिया। हालाँकि, थोड़ी देर बाद सूरज को छोड़ दिया गया। ऑपइंडिया के पास वो वीडियो मौजूद है, जिसमें हिन्दू संगठनों ने मुस्लिम समाज की गाड़ी को बिना किसी विवाद के रास्ता दिया था।
सूरज की माँ ने अपने पूरे परिवार को खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की माँग की है। साथ ही CCTV व घटना के वीडियो जाँच करके सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की आशा जताई है। इस घटना के बाद सूरज के भाई का ब्लड प्रेशर बढ़ गया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।
बाहरी भीड़ ईद मिलाद वाली, अभी तक FIR नहीं
ऑपइंडिया ने इस मामले की जानकारी के लिए बजरंग दल कार्यकर्ता सूरज से सम्पर्क किया। सूरज ने अपना घर मुस्लिम बाहुल्य इलाके में बताया। उन्होंने कहा कि लव जिहाद और गोहत्या जैसे मामलों की आवाज उठाने के चलते वो लंबे समय से कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।
सूरज ने आरोप लगाया कि घटना के बाद से अब तक पुलिस उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की है, जबकि इसके लिए वो खुद और उनकी माँ थाने के कई चक्कर काट चुकी हैं। सूरज ने कहा कि उन्हें पुलिस का जवाब मिलता है कि ‘हम अपने हिसाब से काम करेंगे न कि तुम्हारे अनुसार’।
ईद मिलाद वाली थी भीड़
सूरज ने हमसे बताया कि हमले के दौरान वो अपनी बीमार माँ की दवाएँ लेने गए थे। उनका दावा है कि अगर वो घर पर मिले होते तो मुस्लिमों की भीड़ जरूर उनके साथ कोई अनहोनी कर देती, क्योंकि हमलावर मारो-काटो के नारे लगा रहे थे। बकौल सूरज, जो भीड़ उनके घर में आई थी उसमें कई बाहरी लोग भी शामिल थे।
जिसे बता रहे मौलाना वो असल में टेलर मास्टर
पीड़ित युवक सूरज ने हमसे बातचीत के दौरान इस पूरे विवाद को सोची समझी साजिश बताया। उन्होंने दावा किया कि घटना के दिन ईद मिलाद का जुलूस खत्म हुआ था और वहाँ से भीड़ उनके घर की तरफ मुड़ गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्मादी भीड़ जिसे मौलाना बता रही है, वो बगल के गाँव में कपड़े सिलने का काम करता है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ के शंकरराव चव्हाण सरकारी अस्पताल में बीते 24 घंटों में 24 मरीजों की मौत हो गई। मृतकों में 12 शिशु सहित 7 महिलाएँ और 5 पुरुष शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, सभी की मौत 30 सितंबर की रात 12 बजे से 1 अक्टूबर रात 12 बजे के बीच हुई है।
इन मौतों पर अस्पताल के डीन डॉ. श्यामराव वाकोड़े का कहना है कि मरीजों के शरीर पर इलाज का असर नहीं हुआ, इस वजह से ये मौतें हुई हैं। इन मौतों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जा चुकी है और इसे कल यानी 4 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे तक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
डीन डॉ श्यामराव वाकोड़े के मुताबिक, “पिछले 24 घंटों में 24 लोगों की जान चली गई। इनमें करीब 12 बच्चों (1-2 दिन के) की मौत हो गई। ये बच्चे अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित थे। वयस्कों में 70-80 वर्ष की आयु के 8 मरीज़ थे। उन्हें मधुमेह, लीवर फेलियर और किडनी फेलियर जैसी कई समस्याएँ थीं।”
#WATCH | Maharashtra | Dr Shyamrao Wakode, Dean of Govt Medical College Nanded says, "In the last 24 hours, 24 people lost their lives. Around 12 children (1-2 days old) died in the last 24 hours. These children were suffering from different ailments. Among the adults, there were… pic.twitter.com/FG6ZH3EYD9
हालाँकि कई मीडिया रिपोर्ट में दवा की कमी का दावा किया जा रहा है। वहीं इस मामले में डॉ वाकोड़े मुताबिक, मरीज़ आमतौर पर गंभीर स्थिति में यहाँ आते हैं। दवाओं या डॉक्टरों की कोई कमी नहीं थी। रोगियों की उचित देखभाल की गई थी, लेकिन उनके शरीर ने इलाज का जवाब नहीं दिया जिसकी वजह से ये मौतें हुई।”
उनका कहना है कि इस अस्पताल में अधिकांश गंभीर मरीज प्राइवेट प्रैक्टिशनर के यहाँ से आते हैं वो डरकर यहाँ भेज देते हैं कि उनके वहाँ उनकी मौत होगी। इसके अलावा दूर-दराज के इलाकों के गंभीर मरीज इस सरकारी अस्पताल में आते हैं।
वहीं इस मामले में मौतों को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई में पत्रकारों से कहा कि अस्पताल में क्या हुआ, इसके बारे में अधिक जानकारी माँगी जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
#WATCH | Mumbai | On the death of 24 patients in Dr Shankarrao Chavan Medical College and Hospital in Nanded, Minister of Medical Education of Maharashtra, Hasan Mushrif says "We will carry out a thorough investigation. I have briefed Maharashtra CM Eknath Shinde and Deputy CM… pic.twitter.com/SXLUaWNuoN
इस मामले में महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ का कहना है, “हम पूरी जाँच करेंगे। मैंने महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस को इस संबंध में जानकारी दी है।” वही मैं अस्पताल का दौरा करूँगा और डॉक्टरों की एक समिति बनाई जाएगी।”
वहीं महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक डॉ दिलीप म्हैसेकर ने मीडिया को बताया कि मौतों की जाँच के लिए एक समिति गठित की गई है। उन्होंने बताया, “छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) जिले की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। इसे कल 4 अक्टूबर, 2023 को दोपहर 1 बजे तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। मैं स्थिति की समीक्षा करने के लिए व्यक्तिगत रूप से अस्पताल का दौरा कर रहा हूँ।”
उधर दूसरी तरफ महाराष्ट्र में इस घटना को लेकर विपक्ष ने एकनाथ शिंदे सरकार पर चौतरफा हमला करते हुए कहा, “ट्रिपल इंजन सरकार (भाजपा, एकनाथ शिंदे सेना और एनसीपी के अजीत पवार गुट की) को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कहा, “ट्रिपल इंजन सरकार सभी 24 निर्दोष लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार है। उन्हें जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।”
गौरतलब है कि इस मामले में कॉन्ग्रेस ने भी मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को महाराष्ट्र के नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में 24 मौतों की गहन जाँच की माँग की। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्य सरकार की स्वास्थ्य प्रणाली पर सवाल उठाए। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने आज अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा, सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और स्थिति पर नियंत्रण रखना चाहिए।
ऑनलाइन पोर्टल ‘न्यूज़क्लिक’ से जुड़े कई लोगों पर मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) की सुबह अमेरिकी और चीनी संगठनों से अवैध विदेशी धन लेने के मामले में छापे मारे गए। इस छापे की जद में ‘न्यूज़क्लिक’ से जुड़े संजय राजौरा, भाषा सिंह, उर्मिलेश, प्रबीर पुरकायस्थ, अभिसार शर्मा, औनिंद्यो चक्रवर्ती और सोहेल हाशमी समेत कई पत्रकार आए हैं।
इन पर छापेमारी से देश का लिबरल वामपंथी पत्रकारों का गैंग तिलमिलाया हुआ है। वो लगातार ट्वीट कर ‘न्यूज़क्लिक’ पर छापेमारी को प्रेस की आज़ादी पर हमला बताने से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “छापों ने साबित कर दिया कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता ख़तरे में है।”
इन छापों के दौरान वामपंथी तंत्र लोगों को बरगलाने लिए अति-उत्साह में चला गया। इस गिरोह की मानें तो भारत के खिलाफ प्रचार करने के लिए दुश्मन देशों से अवैध फंडिंग से फायदा पाने वाले लोगों पर कोई भी जाँच स्वतंत्र प्रेस पर हमला है।
खुद को पत्रकार मानने वाली रोहिणी सिंह ने दावा किया है की कि छापों की खबर से संकेत मिलता है कि पत्रकारिता भारत में सबसे बड़ा अपराध है। गौरतलब है कि रोहिणी सिंह का नाम राडिया टेप विवाद में भी आया था और न केवल राजनीतिक दुष्प्रचार ही नहीं, बल्कि ज़बरदस्त फर्जी खबरें भी फैलाने की उनकी पुरानी आदत रही है।
Journalists raided by the police, laptops and phones taken away because journalism is the biggest crime in new India.
इस क्रम में ‘द वायर’ की तथाकथित उस मुस्लिम पत्रकार ने भी ट्वीट्स किए, जो अक्सर इस्लामवादियों के बचाव करती हैं, फर्जी खबरों को आगे बढ़ाती हैं और हिंदू विरोधी दुष्प्रचार को बढ़ावा देती हैं। ये भी रोहिणी की राह पर हैं। आरफ़ा खानम शेरवानी ने ‘द वायर’ की रिपोर्ट को इस सवाल के साथ ट्वीट किया, “लोकतंत्र की जननी, कुछ भी? कई पत्रकारों, स्टैंड-अप कॉमिक्स, व्यंग्यकारों और टिप्पणीकारों के घरों पर सुबह-सुबह छापेमारी करते हुए दिल्ली पुलिस ने “आतंकवादी संबंधों से संबंधित” मामलों में पूछताछ शुरू कर दी है।”
Mother of democracy, anyone ? In early morning raids on homes of several journalists, stand-up comics, satirists and commentators, Delhi police has started interrogations in matters “related to terror links” https://t.co/pBw293hvYE
राजदीप सरदेसाई, जो खुद को गिद्ध बताते रहे हैं, उन्होंने प्रशांत पुजारी (PFI जिहादियों के द्वारा मारे गए एक हिंदू) की नृशंस हत्या को राजनीतिक संदर्भ से जोड़ दिया। यहीं नहीं संसद पर आतंकवादी हमले को कवर करने में उन्होंने खासा उत्साह दिखाया था।
राजदीप ने अपने ट्वीट में कहा, “आज सुबह की ब्रेकिंग स्टोरी: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ‘न्यूज़क्लिक’ वेबसाइट से जुड़े कई पत्रकारों/लेखकों के घरों पर छापेमारी की। मोबाइल और लैपटॉप ले गए। पूछताछ जारी। अभी तक कोई वॉरंट/एफआईआर नहीं दिखाया गया। लोकतंत्र में पत्रकार कब से राज्य के ‘दुश्मन’ बन गए?”
Breaking story this morning: Delhi police special cell raids homes of several journalists/writers associated with Newsclick website. Take away mobiles and laptops.. interrogation on. No warrant/FIR shown yet. Since when did journalists become state ‘enemies’ in a democracy?
इस्लामी प्रोपेगंडा आउटलेट AltNews के को-फाउंडर और जिहादी अपराधों का बचाव करने की कोशिश करने वाले जुबैर के साथी प्रतीक सिन्हा ने ये ऐलान कर डाला है कि सरकार सभी हदें पार कर रही है।
How can you target journalists/contributors associated with Newsclick? This Government is crossing all limits.
गौरतलब है कि फिलहाल जिन लोगों पर छापेमारी की जा रही है, वे सभी लोग काफी लंबे वक्त से भारत खिलाफ प्रोपेगंडा चला रहे हैं। उनमें से किसी पर भी उनकी राय और विचारों के लिए मुकदमा नहीं चलाया गया है। ये छापे इसलिए नहीं हैं की कि भारत सरकार ने जानबूझकर पत्रकारों पर मुकदमा चलाने का फैसला किया हैं। दरअसल, जिन लोगों पर छापे मारे जा रहे हैं वे ‘न्यूज़क्लिक’ से जुड़े हुए थे या हैं। ये ऑनलाइन न्यूज पोर्टल भारत में रह कर भारत के खिलाफ ही दुष्प्रचार करता है और चीनी एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शनिवार (5 अगस्त, 2023) को एक लेख प्रकाशित हुआ था। इस लेख में अमेरिकी व्यवसायी के साथ चीनी सरकार के संबंध और ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगंडा पोर्टल को मिल रही फंडिंग को लेकर खुलासा किया गया।
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, “यह बहुत कम लोगों को पता है कि गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में नेविल रॉय सिंघम चीन के सरकारी मीडिया के साथ मिलकर काम करता है और चीन के प्रोपेगेंडा को दुनिया भर में फैलाने के लिए फंडिंग कर रहा है।”
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लेख में कहा है कि नेविल रॉय सिंघम भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में प्रगतिशील होने की वकालत करने के बहाने चीनी सरकार के एजेंडे को लोगों के बीच फैलाने में कामयाब रहा है। नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट फाइलिंग से भी पता चलता है कि नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क ने प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘न्यूज़क्लिक’ को फंडिंग की थी। इसके तहत ‘न्यूजक्लिक’ ने अपनी कवरेज को चीनी सरकार के मुद्दों से जोड़ते हुए एक वीडियो में कहा था, “चीन का इतिहास श्रमिक वर्गों को प्रेरित करता रहा है।”
खबर यह है कि पुलिस ने न्यूज क्लिक (NewsClick) से जुड़े कई पत्रकारों के घरों पर छापा मारा, बहुतों को हिरासत में लिया। यह मामला चीन से करोड़ों रुपए की फंडिंग लेकर भारत के खिलाफ और चायनीज प्रोपेगेंडा के लिए लिखने-बोलने के संबंध में है। मामला चूँकि पत्रकारों और खासकर वामपंथी मीडिया गिरोह से जुड़ा है, इसलिए सोशल मीडिया पर इसे ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ से जोड़ कर रायता फैलाया जा रहा है।
राजदीप सरदेसाई जैसे बड़े और उम्रदराज पत्रकार तो यहाँ तक सवाल करने लग गए कि पत्रकारों/लेखकों के घरों में जो छापेमारी की गई, उनके मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिए गए, उसको लेकर पुलिस के पास कोई वॉरंट या एफआईआर तक नहीं था। पुलिस की छापेमारी जैसी रोजमर्रा की खबर को राजदीप ने लोकतंत्र से जोड़ते हुए पूछ डाला कि – “पत्रकार कब से राज्य के दुश्मन बन गए?”
पुलिस के पास न्यूज क्लिक (NewsClick) से जुड़े पत्रकारों के घरों की तलाशी, उनके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट आदि जब्त करने संबंधी वॉरंट या एफआईआर है या नहीं, राजदीप जैसे कद वाले पत्रकार को यह पता लगाने में बस 1-2 फोन कॉल करना था, जो उन्होंने नहीं किया। सोशल मीडिया पर हवा बनानी थी, इसलिए आधी-अधूरी जानकारी लिख दी। “पत्रकार कब से राज्य के दुश्मन बन गए?” वाला दूसरा सवाल जो उन्होंने पूछा, उसको लेकर भी सिर्फ यही कहा जा सकता है कि बाल सफेद कर लेने या हो जाने या उम्र के ज्यादा हो जाने से जानकारी भी ज्यादा हो, यह एक भ्रम ही है, जिसे इन जैसे पत्रकार-लेखकों ने गढ़ा है।
1.) पैसे लेकर प्रोपेगेंडा कैसे किया जाता है? 2.) पैसे देकर प्रोपेगेंडा कैसे करवाया जा सकता है? 3.) कॉन्टेंट कंपनी के नाम पर चीन भारत के ही लोगों को सैलरी देकर कैसे उनके जरिए अपनी बात, अपनी राजनीति, अपनी कूटनीति फैला सकता है? 4.) भारत के लोग अगर चायनीज कंपनी में काम करते हैं, वहाँ से सैलरी लेते हैं तो क्या वो अपने ही देश के खिलाफ लिखना-बोलना शुरू कर देंगे? – राजदीप या राजदीप जैसे जो भी पत्रकार इस तरह के सवाल उठा रहे हैं, तो उनका जवाब है मेरे पास।
मैंने लगभग 4 साल (2016 से 2019 के आखिरी महीने तक) 2 अलग-अलग चीनी कंपनियों के लिए काम किया है। दोनों ही कंपनियाँ कॉन्टेंट से जुड़ी थी। न्यूज का ही काम होता था। दोनों जगह लिखने-बोलने वाले सारे कर्मचारी भारत के ही थे। संपादकीय टीम में एक भी चायनीज नहीं था। इतनी डिटेल इसलिए क्योंकि अगली लाइन चौंकाने वाली है। संपादकीय टीम में हम सभी भारतीय थे जरूर लेकिन संपादकीय नीतियाँ आती थीं बन कर बीजिंग से। मौखिक नहीं बल्कि सब लिखित होता था। हम सबको उस एक्सेल शीट के अनुसार ही काम करना होता था।
क्या होता था उस एक्सेल शीट में?
कॉन्टेंट, न्यूज, मीडिया से जुड़ा कोई भी विषय हो – सब पर डिटेल में लिखा रहता था। बात पॉर्न की हो, नग्नता की या अश्लीलता की – ज्ञान बीजिंग से ही आता था। अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, कॉर्पोरेट जगत की बात हो – संपादकीय नीति बीजिंग की टीम ही तय करती थी। एक छोटे से उदाहरण से ऐसे समझिए कि शुरुआती हायरिंग के बाद तब के हमारे संपादक ने यह तय किया अर्थव्यवस्था के अंदर बैंकिंग/कॉर्पोरेट/इंश्योरेंस आदि विषय आएँगे। भारत की तमाम मीडिया लगभग इसी सोच से चलती है। चायनीज टीम इसे समझ नहीं पाई, ना ही अपनी बात हम सभी को समझा पाई। इसके बाद उन्होंने पूरी टीम (हिंदी-अंग्रेजी) को भारी-भरकम खर्चे पर बीजिंग बुला लिया और महीने भर की ट्रेनिंग देकर समझाया कि कॉर्पोरेट पैरंट कैटेगिरी होगी, इसके अंदर अर्थव्यवस्था/बैंकिंग/इंश्योरेंस आदि आएँगे।
इस पूरे प्रकरण के बाद चायनीज मैनेजमेंट यह समझ चुकी थी कि भारत में कॉन्टेंट संबंधी ऑफिस चलाना है तो बीजिंग से मैनेज करना मुश्किल होगा। इसके बाद 2-4 चायनीज हमारे गुड़गाँव वाले ऑफिस में परमानेंट रहने लगे। वीजा पर आते थे। एक समय ऐसा आया कि भारतीय शक्ल से ज्यादा चायनीच मुंडी हमारे दफ्तर में दिखती थी। इनमें 1-2 हमेशा वो होते थे, जो या तो चीन के ही किसी विश्वविद्यालय से या भारत के किसी संस्थान से हिंदी का कोर्स किए रहते थे। वो हिंदी कॉन्टेंट तैयार नहीं करते थे क्योंकि वैसी योग्यता उनकी थी भी नहीं लेकिन वो ऑफिस में होते थे। स्पष्ट तो नहीं कह सकते लेकिन कयास लगा सकते हैं कि शायद बातचीत सुनने के लिए वो हों!
ऑफिस में जो चायनीज रहते थे, की-बोर्ड पर उनकी स्पीड गजब की होती थी। वो बीजिंग टीम से हमेशा चैट करते रहते थे। वहाँ से चायनीज में दिया गया निर्देश गुड़गाँव में अंग्रेजी और हिंदी में ट्रांसलेट किया जाता था, एक्सेल शीट में जोड़ा जाता था। भले वो टूटी-फूटी अंग्रेजी और हिंदी ही क्यों न हो, यह काम वही करते थे। उसको एडिट करने का भी राइट्स भारतीय टीम को नहीं थी।
क्या नहीं करना है – एक एक्सेल शीट इसकी भी
ऊपर जिस एक्सेल शीट की बात मैंने की, वो शीट यह बताती थी कि अगर कुछ करना है तो कैसे करना है। लेकिन यह काफी नहीं था। चीन जैसे वामपंथी देश और भारत में ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ का रोना रोने वाले वामपंथी पत्रकार/लेखकों को यह जानना भी जरूरी है कि एक एक्सेल शीट ऐसी भी थी, जिसके अंदर लिखे विषयों पर लिखने-बोलने की मनाही थी। इतना ही नहीं, न्यूज एग्रीगेटर के तौर पर इन विषयों से संबंधित किसी भी चैनल/वेबसाइट से आई ऐसी खबरों को हाइड करना भी हमारा ही काम था।
आखिर कौन-कौन ऐसे विषय थे, जिन्हें चायनीज मैनेजमेंट नहीं चाहता था जनता को दिखाना-पढ़ाना:
चीन-विरोधी कोई भी खबर
अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें
दलाई लामा की कैसी भी खबर हो
तिब्बत से जुड़ी खबर
ताइवान की कोई भी खबर
हॉन्गकॉन्ग संबंधी खबरें
तियानमेन स्क्वायर और वहाँ के विद्रोह वाली खबर और फोटो
चायनीज हिरोइन की सेक्सी फोटो/वीडियो नहीं
फलाना-ढिकाना (सब याद नहीं)
आखिर किन लोगों को चायनीज कंपनियाँ एक खास तरह का कॉन्टेंट पढ़ाना चाहती थी, जबकि अपने प्रोपेगेंडा के तहत कुछ खबरों को दिखाने तक पर रोक लगा देती थी? भारत के ही लोगों को। भारत के ही मीडिया घरानों से खबरें लेकर अपने ऐप पर भारत के ही खिलाफ काम किया जाता था। और इसके लिए काम करने वाले सभी भारतीय ही थे, मैं भी था। बाकियों का नहीं पता, पर मेरे लिए इसके पीछे सैलरी ही एकमात्र वजह थी।
अब फिर से आते हैं न्यूज क्लिक (NewsClick) वाली खबर पर। उस सोच पर जो यह मानती है कि – “पत्रकार कब से राज्य के दुश्मन बन गए?” जिस संपादकीय नीति की चर्चा मैंने की, जिस पर काम करके 4 साल तक सैलरी उठाई, क्या कुछ उसी तरह का काम न्यूज क्लिक (NewsClick) के संपादक लोग कर रहे थे/हैं या वो सही मायने में ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ का झंडा बुलंद कर रहे?
NewsClick में तिब्बत संबंधी खबरें कैसी और कश्मीर इसमें क्यों?NewsClick में अरुणाचल प्रदेश की सिर्फ एक खबर क्यों?NewsClick में पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) संबंधी खबरों का टेस्ट समझिएNewsClick के लिए दलाई लामा और उनकी खबर = जीरो, सोचिए क्यों?
उदाहरण के लिए बस 4 टॉपिक उठाकर उसका स्क्रीनशॉट लगाया है मैंने। न्यूज क्लिक (NewsClick) पर तिब्बत, दलाई लामा, पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK), अरुणाचल प्रदेश आदि पर जो खबरें बनी हैं, जितनी संख्या में बनी हैं, वो सब क्लियर है सिर्फ 4 स्क्रीनशॉट से। दलाई लामा पर जीरो खबर, अरुणाचल प्रदेश पर सिर्फ 1 खबर, तिब्बत पर सिर्फ 4 खबर (उसमें भी कश्मीर, सिक्किम, अमेरिका को घुसा दिया संपादकीय नीति के तहत) और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) पर भी सिर्फ 5 खबर (जिसमें हुर्रियत, चीन, भारतीय सेना, कश्मीर के फोटो आदि) करके छुट्टी।
इन 4 स्क्रीनशॉट का क्या मतलब हुआ? इनका मतलब यह है कि 2016 से लेकर 2020 तक (चायनीज ऐप के ब्लॉक किए जाने तक) जो संपादकीय नीतियाँ बीजिंग से निर्देशित होती थी, वही सिलसिला 2023 में भी चल रहा है। न्यूज क्लिक (NewsClick) में छपने वाली खबरों से यह स्पष्ट है।
चाइनीज कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को गुलाम बनाती हैं, सोचने-समझने की जगह वो आपसे बीजिंग से निर्देशित होने की न सिर्फ अपेक्षा रखते हैं बल्कि ऐसा मानने के लिए बाध्य भी करते हैं। हर बात में वो ‘तुमसे बेहतर जानते हैं’ वाला तर्क देकर आपको चुप कराते हैं। जिस भी देश में ये कंपनियाँ काम करती हैं, वहाँ के कानूनों को ताक पर रख कर वहीं के नागरिकों का हक मारती हैं।
सैलरी लेकर ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ का रोना रोने वाले राजदीप या राजदीप जैसे पत्रकारों/लेखकों को सवाल पूछना चाहिए कि PoK मतलब ‘पाक-अधिकृत कश्मीर’ कैसे ‘पाक-प्रशासित कश्मीर‘ बन जाता है। और तो और, जिस BBC की संपादकीय नीति में ‘पाक-प्रशासित कश्मीर’ लिखा जाता है, उसे पत्रकारिता के कथित स्वर्ण तमगे से यही मीडिया गिरोह नवाजता है। आखिर वो कौन सी मानसिकता है, जो भारत के ही ऑफिस में काम करने वाले भारतीय लोग अंग्रेजों की या चायनीज लोगों की बनी-बनाई शब्दावली को संपादकीय नीति के तहत मानने लगते हैं? जो जवाब राजदीप या मीडिया गिरोह को शायद नहीं पता हो या नहीं पता होने का ढोंग करते रहते हैं, वो जवाब है – सैलरी… वो जवाब है – पैसा लेकर लिखना।
PS: मैं चायनीज कंपनी का पूर्व कर्मचारी रहा हूँ। ठीक वैसे ही जैसे कभी आजतक, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण का था। न मैंने कभी किसी भारतीय कंपनी से संबंधित बिजनेस डेटा का खुलासा किया, न ही चायनीज कंपनी का करूँगा। इसलिए पूरा लेख संपादकीय नीति के अंतर्गत ही लिखा गया है। वो नीतियाँ जिससे देश का अहित किया जा सकता है, अहित होता है।