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अमेरिका का IT मुग़ल नेविल रॉय सिंघम, जो दुनिया को चीनी एजेंडे के जाल में फँसाने के लिए फूँक रहा करोड़ों डॉलर: अभिसार शर्मा-उर्मिलेश वाले ‘न्यूज़क्लिक’ को भी इसी ने की फंडिंग

अमेरिकी कारोबारी और आईटी कंसल्टिंग फर्म थॉटवर्क्स के पूर्व अध्यक्ष नेविल रॉय सिंघम इस साल अगस्त में सुर्खियों में आ गए थे। ‘न्यूयार्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के बाद वो भारतीय वेबसाइट ‘न्यूज़क्लिक’ सहित चीन के एजेंडे का मीडिया प्रोपेगंडा फ़ैलाने वाले समूहों को फंडिंग के लिए जाँच के दायरे में आए थे।

‘द न्यूयार्क टाइम्स’ ने अमेरिकी और ब्रिटिश कार्यकर्ताओं के चलाए जाने वाले सामूहिक अभियान ‘नो कोल्ड वॉर’ को लेकर लिखा कि ये प्रचार करता है कि चीन के खिलाफ पश्चिम की बयानबाजी ने जलवायु परिवर्तन और नस्लीय अन्याय जैसे मुद्दों से ध्यान भटका दिया है। वास्तव में, NYT की जाँच में पाया गया कि ये तगड़ी फंडिग के जरिए प्रभाव डालने वाले एक अभियान का हिस्सा है जो चीन का बचाव करता है। इसके एजेंडे को बढ़ावा देता है।

इसके केंद्र में अमेरिकी करोड़पति नेविल रॉय सिंघम का नाम निकल सामने आया। उसे वामपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले के रूप में जाना जाता है। ये व्यक्ति गैर-लाभकारी समूहों (NGO) और शेल कंपनियों (यानी केवल कागजों पर चलने वाली कंपनियों) की घपलेबाजी के बीच छिपकर काम करता है। सिंघम गुप्त तरीके से चीनी सरकारी मीडिया मशीनरी के साथ मिलकर काम करता है और दुनिया भर में उसके प्रचार के लिए फंडिंग कर रहा है।

‘द टाइम्स ने मैसाचुसेट्स’ में एक थिंक-टैंक से लेकर मैनहट्टन में एक कार्यक्रम स्थल तक, दक्षिण अफ्रीका में एक राजनीतिक दल से लेकर भारत और ब्राजील में समाचार संगठनों तक सिंघम से जुड़े समूहों के सैकड़ों मिलियन डॉलर को ट्रैक किया। ये सभी तरक्की की सिफारिश में चीनी सरकार के नज़रिए को बढ़ावा देते हैं और इस सबके पीछे एक ही नाम सिंघम सामने आया। यहाँ जानते हैं कि पूरी दुनिया में चीन का प्रचार करने वाला ये शख्स आखिर कौन है।

श्रीलंकाई राजनीतिक के घर हुए पैदा

नेविल रॉय सिंघम के पिता आर्चीबाल्ड सिंघम एक श्रीलंकाई राजनीतिक वैज्ञानिक और इतिहासकार थे। वो न्यूयॉर्क के सिटी यूनिवर्सिटी के ब्रुकलिन कॉलेज में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर थे। वह कैरेबियन में अधिकारी था और गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भागीदार थे। इन्हीं के घर 1954 में नेविल रॉय का जन्म हुआ था। नेविल रॉय अपनी युवावस्था में लीग ऑफ़ रिवोल्यूशनरी ब्लैक वर्कर्स एक काले राष्ट्रवादी-माओवादी समूह का सदस्य था।

उन्होंने साल 1972 में समूह में एक कार्यकर्ता के रूप में डेट्रॉइट में क्रिसलर प्लांट में नौकरी की थी। अपने शिकागो के घर से 1993 में आईटी परामर्श फर्म थॉटवर्क्स शुरू करने से पहले नेविल ने हावर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। यहाँ से उसने अर्थशास्त्र की पढ़ाई की थी। ये फर्म कस्टम सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेयर टूल और परामर्श सेवाएँ देती हैं।

जब बना थॉटवर्क्स दुनिया में नंबर वन

नेविल रॉय सिंघम ने 2001 से 2008 तक हुआवै के लिए एक रणनीतिक तकनीकी सलाहकार के तौर पर काम किया। उसके नेतृत्व में थॉटवर्क्स अपने क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी बनकर उभरा।

साल 2009 में फॉरेन पॉलिसी मैग्जीन के ‘टॉप 50 ग्लोबल थिंकर्स’ की सूची में सिंघम को पहचान मिली। हालाँकि, नेविल रॉय सिंघम ने एक्टिविस्ट जोडी इवांस के साथ 2017 में शादी कर ली और उन्होंने अपनी टेक कंपनी बेच दी। हाल के दिनों में सिंघम तेजी से राजनीतिक तौर पर सक्रिय हुए और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक अहम पैरोकार के रूप में उभर रहा है। 69 साल के सिंघम खुद शंघाई में बैठते हैं, जहाँ शहर के प्रचार विभाग की फंडिंग से उनके नेटवर्क का एक आउटलेट यूट्यूब शो तैयार कर रहा है।

जुलाई 2023 में सिंघम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को बढ़ावा देने वाली एक कम्युनिस्ट पार्टी वर्कशॉप में शिरकत की थी।

न्यूज़क्लिक को भी दिया फंड

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) की जाँच मुताबिक, सिंघम के नेटवर्क ने कथित तौर पर दिल्ली की न्यूज समाचार वेबसाइट ‘न्यूज़क्लिक’ को भी फंडिंग की। इसने चीनी सरकार की बातों को अपने कवरेज में शामिल किया। सामूहिक सामग्री में ऐसे वीडियो शामिल थे जो यह दावा करते थे कि ‘चीन का इतिहास श्रमिक वर्गों को प्रेरित करता रहा है।’ NYT की रिपोर्ट में बताया गया कि इसमें सिंघम की केंद्रीय भूमिका है। जिस तरह से नेविल सिंघम ने चीन के प्रचार को पीछे के दरवाजे से दुनिया में पहुँचाने की जुगत भिड़ाई है, उसे कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारी ‘स्मोकलैस वॉर’ का नाम देते हैं।

शी जिनपिंग के नेतृत्व के दौरान चीन ने अपने राज्य मीडिया असर को बढ़ावा दिया है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स के साथ गठबंधन किया है। इसके जरिए चीन ने छुपे तौर पर अपने नजरिए का प्रचार-प्रसार करने के लिए विदेशी प्रभावशाली लोगों को तैयार किया है।

प्रवर्तन निदेशालय के नेतृत्व में साल 2021 में एक जाँच से पता चला कि मीडिया प्लेटफॉर्म ‘न्यूज़क्लिक‘ को 38 करोड़ रुपए की विदेशी धनराशि मिली थी। इसके तार आखिरकार अमेरिकी करोड़पति सिंघम से जुड़े। NYT की जाँच के मुताबिक, चीन अपने प्रचार तंत्र के जरिए अपने मानवाधिकारों के उल्लंघन के संबंध में अंतरराष्ट्रीय निंदा से खुद को बचाने में कामयाब रहा है और इसमें सिंघम का भी बड़ा हाथ है।

सिंघम का कहना है कि वह चीनी सरकार के निर्देश पर काम नहीं करता है। लेकिन, उसके और चीनी प्रचार तंत्र के बीच की रेखा इतनी धुँधली है कि वह एक ऐसी कंपनी के साथ अपने दफ्तर की जगह साझा ही नहीं करते बल्कि उनके ग्रुप में चीन के स्टाफ मेंबर होते हैं। इन लोगों का मकसद विदेशियों को ‘उन चमत्कारों के बारे में पढ़ाना होता है जो चीन ने वैश्विक मंच पर किए हैं।’

3 याचिकाएँ दाखिल की, सब पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना, खारिज हुईं सो अलग: ड्रग्स मामले में सुप्रीम कोर्ट से पूर्व IPS अधिकारी संजीव भट्ट को झटका 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की तीन याचिकाएँ खारिज कर दी हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने ड्रग्स जब्ती के मामले को लेकर तीन याचिकाएँ दायर की थीं जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए हर याचिका पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने माना कि याचिकाकर्ता संजीव भट्ट द्वारा बार-बार सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जा रहा था। जिससे नाराज होकर पीठ ने याचिकाकर्ता को तीन लाख रुपए गुजरात अधिवक्ता संघ में जमा करने का आदेश दिया। 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए पीठ ने कहा कि आप कितनी बार सुप्रीम कोर्ट गए हैं, कम से कम एक दर्जन बार, जिस पर संजीव भट्ट को बार-बार कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए फटकार लगाया।

संजीव भट्ट ने दायर की थी तीन याचिकाएँ 

बता दें कि संजीव भट्ट द्वारा दायर तीन याचिकाओं में से एक में माँग की गई थी कि ड्रग्स जब्ती मामले की सुनवाई किसी अन्य निचली अदालत में स्थानांतरित किया जाए। संजीव भट्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज पर मामले में पक्षपात करने का आरोप लगाया था। वहीं अन्य याचिका में भट्ट ने उनके द्वारा दायर आवेदनों को ट्रायल कोर्ट द्वारा खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने निचली अदालत की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए निर्देश देने की भी माँग की थी। तीसरे मामले में अतिरिक्त सबूत जोड़ने की माँग की थी।

इस मामले में हुई थी गिरफ्तारी

गौरतलब है कि साल 1996 में राजस्थान के पालनपुर में एक वकील के होटल के कमरे से ड्रग्स जब्त हुई थी। इस मामले में बासनकांठा पुलिस द्वारा वकील को गिरफ्तार किया गया था। उस समय संजीव भट्ट बासनकांठा जिले के पुलिस अधीक्षक थे। हालाँकि, इस मामले में बाद में यह खुलासा हुआ कि वकील के कमरे में ड्रग्स रखकर उसे फँसाया गया था। इस मामले में संजीव भट्ट की टीम ने वकील के खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया था। दरअसल, संपत्ति विवाद में वकील को परेशान करने के लिए ऐसा किया गया था।

बता दें कि पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को वकील के कमरे में ड्रग्स रखने और उसे गिरफ्तार करने के मामले में 2018 में गुजरात सीआईडी द्वारा गिरफ्तार किया गया था।

‘मुस्लिम ने नहीं बोला ‘जय श्री राम’ तो हिंदू युवकों ने पीटा’: भास्कर ने फैलाया झूठ, फैक्ट-चेक में खुली पोल

दैनिक भास्कर समूह के गुजराती अखबार ‘दिव्य भास्कर’ ने मंगलवार (3 अक्टूबर 2023) को एक खबर प्रकाशित की है। इसमें दावा किया है कि अहमदाबाद में जय श्रीराम न बोलने पर चार हिंदू युवकों ने एक मुस्लिम युवक की बुरी तरह से पिटाई की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला अली तालिब हुसैन और मोहम्मद शहरोज तालिब हुसैन नामक दो भाई अहमदाबाद के मधुपुरा इलाके में रहते हैं। इसमें से अली हुसैन ने शहरोज के साथ हुई मारपीट को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को दी गई शिकायत में 20 वर्षीय युवक अली तालिब हुसैन ने कहा कि 1 अक्टूबर 2023 की शाम को वह अपने घर पर था। इसी दौरान उसका भाई शहरोज हुसैन वहाँ आया और कहा कि 3-4 लोगों ने उससे झगड़ा किया है और मारने के लिए आए हैं।

इस पर अली हुसैन नीचे गया और देखा कि चार लोग चाकू, चप्पल, पाइप और डंडे लेकर खड़े हुए हैं। रिपोर्ट में आगे दावा किया है कि वहाँ आए 4 युवकों ने शहरोज पर हमला किया। इससे वह घायल हो गया और उसे हॉस्पिटल ले जाना पड़ा।

भास्कर ने रिपोर्ट में दावा किया, “अली हुसैन ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि 4 लोगों ने उसके भाई शहरोज से ‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए कहा था और उसने मना किया तो उसके साथ मारपीट की गई।”

दिव्य भास्कर की रिपोर्ट (साभार: दिव्य भास्कर वेबसाइट)

ऑपइंडिया ने ‘दिवस भास्कर’ के इस दावे का फैक्ट चेक किया है। हालाँकि भास्कर की इस रिपोर्ट को फैक्ट चेक करने के लिए आखिरी में लिखी दो लाइनें ही काफी थीं। इसमें लिखा है कि पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि चारों लड़के ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए सड़क से जा रहे थे। इस पर मुस्लिम युवक को लगा कि वे उससे ‘जय श्रीराम’ कह रहे हैं> इसकी वजह से ही झगड़ा हुआ।

भास्कर की रिपोर्ट में ही उसकी ‘हेड लाइन’ की पोल खुल चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी ऑपइंडिया ने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। इसमें मामले की जाँच कर रहे मधुपुरा पुलिस स्टेशन के एन धासुरा ने कहा कि ‘जय श्रीराम’ बोलने को लेकर मजबूर करने जैसी कोई घटना नहीं हुई। यह पूरी घटना एक हिंदी भाषी व्यक्ति के गुजराती न समझने के चलते हुई।

पुलिस अधिकारी ने ऑपइंडिया से हुई बातचीत में पूरी जानकारी देते हुए कहा, “दो हिंदू युवक सड़क से जा रहे थे। मुस्लिम युवक भी वहाँ खड़ा हुआ था। इसी दौरान हिंदू युवकों ने आपस में जय श्रीराम कहकर अभिवादन किया, लेकिन मुस्लिम युवक को लगा कि उन लोगों ने उससे ‘जय श्रीराम’ कहा है। इसके बाद वह हिंदुओं से झगड़ने लगा।”

उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम युवक के गलत समझने और झगड़ा करने के चलते विवाद हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों के लोग एकजुट हुए। इसमें से एक युवक को चाकू लगी हुई। ‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए मजबूर करने जैसी कोई घटना नहीं हुई है। यह अफवाह है।

गौरतलब है कि मुस्लिम युवक ने आरोप लगाया था कि ‘जय श्रीराम’ नहीं कहने के चलते उसके साथ मारपीट हुई थी। पुलिस अभी इस मामले की जाँच कर रही है। इसके बाद भी भास्कर ने अपनी रिपोर्ट के जरिए झूठी खबर फैलाने की कोशिश की।

केरल में पादरी ने ली भाजपा की सदस्यता, चर्च ने पद से कर दिया बर्खास्त

केरल के इडुक्की में एक चर्च के पादरी ने भाजपा के सदस्यता ले ली। इसके बाद उस कैथोलिक चर्च ने उन्हें पादरी के पद से हटा दिया है। पादरी को उनके पद से हटाने का निर्णय आनन-फानन में एक बैठक बुलाकर लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इडुक्की के कैथोलिक मंकुवा चर्च में पादरी कुरियाकोस मट्टम (73) ने 2 अक्टूबर 2023 को भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली थी। पार्टी में शामिल होने की उनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी।

कुरियाकोस मट्टम के भाजपा में शामिल होने को लेकर साइरो मालाबार चर्च के आर्कबिशप ने एक आपात बैठक बुलाई थी। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मट्टम को उनके पद से हटा दिया जाए।

आर्कबिशप के इस निर्णय पर चर्च के एक प्रतिनिधि ने बताया कि पादरी वर्ग के लोग किसी राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं ले सकते हैं। मट्टम, संत थॉमस चर्च के पादरी के रूप में काम कर रहे थे, इसलिए उनको पार्टी में शामिल होने की अनुमति नहीं थी।

कुरियाकोस मट्टम को इडुक्की जिला भाजपा जिलाध्यक्ष केएस आजी ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। आजी ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी डालीं। मट्टम ने भाजपा में शामिल होने पर कहा उन्हें नहीं लगता कि भाजपा ईसाई विरोधी पार्टी है।

मट्टम ने आगे कहा, “मैं वर्तमान के मुद्दों पर नजर रखता हूँ। ऐसा कोई भी कारण नहीं है कि मैं भाजपा की सदस्यता ना लूँ। मेरी कई भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मित्रता है। मैंने आज सदस्यता ली है। मैं लगातार समाचार पत्र पढ़ता हूँ और भाजपा को समझता हूँ।”

आगे उन्होंने बताया, “आज से 40-45 वर्ष पहले तिरुवनंतपुरम का मार्क्सवादी पार्टी का एक समूह हमारे यहाँ से गुजर रहा था, मैंने उसकी बैठक में हिस्सा लिया था। मैं इसको भी उसी तरह से देखता हूँ।”

भाजपा जिलाध्यक्ष आजी ने इस मौके पर कहा, “भाजपा पादरी का प्रसन्नता से स्वागत करती है। यह पहली बार है कि कोई पादरी भाजपा में शामिल हो रहे हैं। वर्तमान समय में भाजपा अल्पसंख्यकों के लिए काम कर रही है और कई विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं।”

रात 2 बजे 200 पुलिसकर्मियों की बैठक, सुबह-सुबह छापेमारी, अब सील किया गया चीन के पैसे से चलने वाले ‘Newsclick’ का दफ्तर: ABC में बाँटे गए थे ‘चीनी एजेंट’

चीनी फंडिंग के दम पर भारत सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार में लिप्त संस्थान ‘Newsclick’ और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बड़ा ऑपरेशन चलाया है। इस ऑपरेशन लिए रात 2 बजे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों और जवानों ने बैठक की थी। इस बीच, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने UAPA के तहत न्यूजक्लिक के ऑफिस को सील कर दिया है।

स्पेशल सेल ने सील किया न्यूजक्लिक का ऑफिस

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) की सुबह से ही UAPA एवं अन्य मामलों को लेकर ‘न्यूज़क्लिक’ से जुड़े विभिन्न परिसरों पर छापेमारी कर रही है। इसी क्रम में स्पेशल सेल ने ‘न्यूज़क्लिक’ के कार्यालय को सील कर दिया है।

दिल्ली पुलिस ने रात 2 बजे की छापेमारी से पहले मीटिंग

इस मामले में बताया जा रहा है कि ‘न्यूज़क्लिक’ और उससे जुड़े पत्रकारों के परिसरों पर छापेमारी करने से कुछ घंटे पहले स्पेशल सेल के अधिकारियों ने सोमवार की आधी रात 2 बजे के आसपास बैठक की थी। लोधी कॉलोनी में स्पेशल सेल के ऑफिस में हुई इस बैठक में 200 से अधिक पुलिसकर्मियों ने बैठक में भाग लिया।

ANI की रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी भी तरह की जानकारी लीक होने से रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अन्य पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन भी जमा कर लिए गए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ए, बी और सी कैटेगरी में लिस्टिंग करके 30 से अधिक जगहों पर छापेमारी की।

यह छापेमारी 17 अगस्त को दर्ज यूएपीए और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत दर्ज मामले पर की गई है, साथ ही आईपीसी की 153ए (दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और आईपीसी की 120 बी (आपराधिक साजिश) जैसी धाराएँ शामिल है। ये छापेमारी दिल्ली से लेकर मुंबई तक की गई है। मुंबई में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल और मुंबई पुलिस की टीमों ने तीस्ता सीतलवाड़ के ठिकानों पर छापेमारी की।

सुबह से ही जारी है छापेमारी

बता दें कि चीन के पैसे पर प्रोपेगेंडा करने वाले पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ (NewsClick) के पत्रकारों पर दिल्ली पुलिस ने UAPA के तहत मामला दर्ज किया है। 3 अक्टूबर 2023 की सुबह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इन पत्रकारों से जुड़े दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में 30 ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें से कई पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की भी चर्चा है। उर्मिलेश और प्रांजय गुहा ठाकुरता के यहाँ दिल्ली पुलिस की छापेमारी के वीडियो भी सामने आए हैं।

OBC को पहले दादी-पापा ने ठगा, अब राहुल गाँधी समझ रहे मूर्ख: पिछड़ों का हिस्सा मुस्लिमों को दिया, अब दलितों का हक ईसाइयों को देने की तिकड़म भिड़ा रही कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी के साथ पूरा I.N.D.I. गठबंधन जातिगत जनगणना और ‘जिसकी जितनी संख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ का राग अलाप रहे हैं। बिहार में जातिगत जनगणना के आँकड़े सामने आ चुके हैं। इस बीच, राहुल गाँधी कुछ समय से बार-बार ये दावा कर रहे हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार ने पूरे देश में जातिगत जनगणना कराई थी, मोदी सरकार उसके आँकड़े जारी करे। राहुल गाँधी ऐसे ही कुछ दावे लगातार कर रहे हैं, जिसका पोस्टमॉर्टम आवश्यक है।

राहुल गाँधी का दावा नंबर 1: कॉन्ग्रेस ने कराई जातीय जनगणना, मोदी सरकार करे सार्वजनिक

सच्चाई: कॉन्ग्रेस ने ऐसी कोई जनगणना नहीं कराई। राहुल गाँधी का दावा है कि साल 2010-11 की जनगणना के दौरान जातिगत आँकड़े भी दर्ज किए गए थे। कॉन्ग्रेस की सरकार 2014 तक रही। वहीं, जनगणना के आँकड़े 2011 में जारी कर दिए गए थे। ऐसे में सवाल ये है कि जातिगत जनगणना का प्रोसेस कब पूरा हुआ? किस नियम के तहत जातीय जनगणना कराई गई? जातीय जनगणना के लिए नोटिफिकेशन कब जारी हुआ?

यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि जनगणना एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए संवैधानिक प्रावधान हैं। साल 1931 के बाद आधिकारिक तौर पर जातिगत जनगणना नहीं कराई गई। अगर ऐसा कॉन्ग्रेस की सरकार ने कराया भी, तो भी उसके आँकड़े क्यों जारी नहीं किए?

अब बता देते हैं साल 2010 की जनगणना के नोटिफिकेशन की बात, तो उसमें कहीं भी OBC का जिक्र नहीं है। हम उस जनगणना के प्रारूप की कॉपी यहाँ उपलब्ध करा रहे हैं।

वैसे, कॉन्ग्रेस जिस सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना 2011 (एसईसीसी) की बात कर रही है, उसके आँकड़े गलत हैं। उन आँकड़ों का कहीं उपयोग नहीं किया जा सकता है। इस बारे में केंद्र सरकार ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट को हलफनामा भी दिया था। महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में केंद्र ने कहा है कि सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना 2011 में जाति/जनजाति डेटा त्रुटिपूर्ण है और उपयोग योग्य नहीं है।

रही बात जातीय जनगणना की, तो बिहार की जातीय जनगणना से पहले साल 2015 में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने कर्नाटक में भी ऐसी ही जनगणना कराई थी। हालाँकि, उस जनगणना के आँकड़े क्यों नहीं जारी हुए, ये किसी को नहीं पता। ऐसे में माना जा सकता है कि कॉन्ग्रेस की टॉप लीडरशिप उस आँकड़े को दबाकर बैठ गई, क्योंकि वो उसके अनुकूल नहीं थी।

अब सवाल ये है कि क्या कॉन्ग्रेस ने जातिगत जनगणना के आँकड़ों को इसलिए जारी नहीं किया, क्योंकि इससे उसके वोट बैंक के खिसकने का डर था? अगर ऐसा नहीं भी है, तो साल 2014 तक ये आँकड़े क्यों नहीं जारी किए गए? इस जनगणना की याद कॉन्ग्रेस को अभी क्यों आई है? इसका सवाल राजनीतिक है।

जैसा कि सबको पता है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए खासकर भाजपा ने आम चुनावों (2014 और 2019) में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। नरेंद्र मोदी की आँधी के आगे जातिवादी दलों की दाल गल ही नहीं पाई। अब तक विपक्ष नरेंद्र मोदी के विकास और राष्ट्र प्रथम की नीति का कोई काट नहीं ढूँढ पाया है। ऐसे में वो सिर्फ जातिगत बँटवारे के नाम पर नरेंद्र मोदी की आँधी को चैलेंज करना चाहते हैं, जो कि संभव होता नहीं दिख रहा है, भले ही कॉन्ग्रेस जातिवादी और परिवारवादी पार्टियों के साथ कितने भी घमंडिया गठबंधन क्यों न कर ले।

राहुल गाँधी का दावा नंबर – 2: केंद्रीय सचिवालय के 90 में सिर्फ 3 ओबीसी

राहुल गाँधी कुछ समय से केंद्रीय सचिवालय में तैनात 90 अधिकारियों में से सिर्फ 3 के ओबीसी होने का मामला उठा रहे हैं। ऐसे में सबसे पहले उन्हें ही जवाब देना चाहिए कि साल 2004 से 2014 तक यूपीए के शासनकाल में कितने ओबीसी अधिकारी केंद्रीय सचिवालय में तैनात थे?

आइए, अब बताते हैं कि ये संख्या कम क्यों हैं और क्यों इसे सरकार से जोड़ना गलत है। इस मामले की तह तक जाना है, तो इसके तार देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से जुड़ते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने ये बात संसद में भी रखी। उन्होंने संसद में ओबीसी को लेकर कहा कि पंडित नेहरू के कार्यकाल में काका कालेलकर की रिपोर्ट आई। उसके बाद इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के समय में मंडल कमीशन की रिपोर्ट आई, लेकिन उसे लागू ही नहीं किया गया। ये लागू हुआ 1990 में, जबकि इंदिरा-राजीव के समय में ये रिपोर्ट धूल फाँकती रही।

जेपी नड्डा ने आगे कहा कि साल 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने सर्विसेज में ओबीसी को रिजर्वेशन के लिए कहा, तब जाकर 1995-1996 से ऑल इंडिया सर्विसेज में ओबीसी-एससी-एसटी रिजर्वेशन मिलना शुरू हुआ। इस कारण से अभी जो भी कैबिनेट सेक्रेटरी हैं, वो 1992 से पहले के लोग हैं, लेकिन आने वाले समय में OBC सेक्रेटरियों की संख्या बढ़ेगी। इसे इस बात से भी समझ सकते हैं कि कैबिनेट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी सबसे ऊपर के और वरिष्ठ अधिकारी होते हैं।

कोई कनिष्ठ इस पद पर सीधे तो पहुँच नहीं सकता। ऐसे में समय बीतने के साथ ही लोग वरिष्ठ होकर उन पदों पर पहुँचेंगे, यही बात नड्डा ने संसद में भी कही है। ऐसे में राहुल गाँधी का ये दावा कि मोदी सरकार ओबीसी लोगों को कैबिनेट सेक्रेटरी बना नहीं रही है, ये पूरी तरह से बेबुनियाद है।

राहुल गाँधी का दावा नंबर 3: कॉन्ग्रेस है ओबीसी वर्ग की हितैषी

राहुल गाँधी के इस दावे की सच्चाई है – कॉन्ग्रेस का ओबीसी वर्ग का सबसे बड़ा विरोधी होगा। जब भी आरक्षण का सवाल आता है, तो जिक्र उठता है मंडल कमीशन का। ये मंडल कमीशन किसने बनवाया था? जवाब है – साल 1979 में जनता पार्टी की मोरारजी देसाई की सरकार ने मंडल कमीशन बनाया। इसकी रिपोर्ट 1980 में आ गई थी। अब सवाल ये उठता है कि इंदिरा गाँधी के समय में 1980 से 84 तक क्यों लागू नहीं हुआ मंडल कमीशन? इसके बाद राजीव गाँधी के कार्यकाल में 1984 से 1989 तक क्यों लागू नहीं हुआ मंडल कमीशन?

इस दावे का जवाब है कि साल 1990 में जनता दल की सरकार, जिसे भाजपा ने बाहर से समर्थन दिया, उसने मंडल कमीशन लागू किया। ऐसे में राहुल गाँधी का दावा इस बार भी गलत ही निकला।

हकीकत ये है कि ओबीसी के रिजर्वेशन में से मुस्लिमों को आरक्षण देकर उनका हिस्सा कॉन्ग्रेस सरकार खा गई। कॉन्ग्रेस सरकार ने कर्नाटक, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में तय सीमा से ज्यादा आरक्षण दिया। उसमें भी ओबीसी के हिस्से के आरक्षण का फायदा मुस्लिमों (भाजपा ने कोटा खत्म किया, तो कोर्ट पहुँच गई कॉन्ग्रेस सरकार) को दिया गया। इन राज्यों में ओबीसी के आरक्षण में से 4 फीसदी आरक्षण मुस्लिमों को दे दिया गया, जो ये बताता है कि ओबीसी वर्ग की हितैषी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी दुश्मन साबित हुई है कॉन्ग्रेस सरकार। ये सवाल आप खुद से पूछिए कि क्या वाकई ओबीसी वर्ग की हितैषी है कॉन्ग्रेस?

राहुल गाँधी की ‘बाँटो और खाओ’ राजनीति के पीछे का खेल क्या है?

इस सवाल का जवाब जनता जानना चाहती है। ये सवाल जितना सीधा सा है, उसका ही उलझा इसका जवाब है। देश की जनसंख्या में तेज़ी से बदलाव आ रहा है। बड़ी संख्या में हिंदुओं को ‘छल से, बल से और धन से’ इस्लाम और ईसाई बनाने का खेल काफी समय से चल रहा है। लेकिन, इसमें एक पेंच है। धर्म परिवर्तन करने वाले लोग तो धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम और ईसाई बन जा रहे हैं, लेकिन कागजों पर वो खुद को दलित और ओबीसी ही दिखा रहे हैं।

इसका मतलब समझ में आ रहा है? इसका मतलब समझने के लिए आपको मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले को जानना बहुत जरूरी हो जाता है, जो कन्याकुमारी में जनसांख्यिकी परिवर्तन और आरक्षण की मलाई खाने से जुड़ा है।

साल 2022 की शुरुआत में मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, “धार्मिक तौर पर कन्याकुमारी की जनसांख्यिकी में बदलाव देखा गया है। 1980 के बाद से जिले में हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहे। हालाँकि, 2011 की जनगणना बताती है कि 48.5 फीसदी आबादी के साथ हिंदू सबसे बड़े धार्मिक समूह हैं। पर यह जमीनी हकीकत से अलग हो सकती है। इस पर गौर किया जाना चाहिए कि बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के लोग धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ पाने के लिए खुद को हिंदू बताते रहते हैं।”

चूँकि कॉन्ग्रेस की पहचान ही इस्लामी कट्टरपंथियों का तुष्टिकरण और ईसाई मिशनरियों को पोषित करने वाले की रही है। ये उस इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण अंग हैं, जिनके कारण कॉन्ग्रेस इतने सालों तक देश की सत्ता पर काबिज रही और आज भी भारत विरोधी वैश्विक दुष्प्रचार में उसके काम आते हैं। ऐसे में जातीय जनगणना में उन लोगों को शामिल कराने की कोशिश हो रही है, तो क्रिप्टो क्रिश्चियन बन तो चुके हैं, लेकिन जातीय आधार पर आरक्षण का लाभ भी ले रहे हैं। ऐसे में जातीय जनगणना के माध्यम से उन्हें अलग-अलग वर्गों में शामिल करके असली हिंदू ओबीसी-एससी-एसटी लोगों का हक मारने की आज़ादी देना है।

ये भी जानने वाली बात है कि 1931 में जातिगत जनगणना हुई थी, लेकिन 1951 में जातियों वाले कॉलम को हटा कर सिर्फ अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों की संख्या ही गिनी है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि उन्हें आरक्षण देने की बाध्यता थी और इसीलिए उनकी संख्या जाननी ज़रूरी थी।

शाकाहारी छात्रों की मेज, उस पर बैठकर मांस खाने की जिद को लेकर IIT मुंबई में धरना: संस्थान ने लगाया ₹10000 का जुर्माना

भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान (IIT) मुंबई ने मेस में ‘केवल शाकाहारी’ खाने की मेज पर मांस खाने वाले छात्रों में से एक पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है। सितम्बर के अंत में कुछ छात्रों ने जबरदस्ती इन मेजों पर मांस खाया था और शाकाहारी मेजों को अलग करने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।

IIT ने जुर्माना लगाने का यह निर्णय 1 अक्टूबर को हुई एक बैठक के बाद लिया है। जानबूझ कर मांस खाने और धरने में शामिल होने वाले अन्य छात्रों की तलाश की जा रही है।

IIT मुंबई में हॉस्टल 12, 13 और 14 की मेस काउंसिल ने बीते सप्ताह मेस के भीतर 6 खाने की मेजों को ‘केवल शाकाहारी’ खाना खाने के लिए आरक्षित किया था। मेस में बैठने की आम जगह में शाकाहारियों के लिए खाने की मेजों को अलग करने के निर्णय के विरोध में कुछ छात्र ‘धरने’ पर बैठ गए थे।

इन छात्रों का कहना था कि शाकाहारी खाने वालों को अलग से मेजें नहीं दी जानी चाहिए। इस मामले की मेस समिति ने जाँच करके यह बताया कि विरोध करने वाले छात्र संस्थान का माहौल जानबूझ कर खराब करना चाहते हैं। इसी को लेकर संस्थान ने यह अजीब माँग करने वाले एक छात्र पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है। वहीं दो अन्य छात्रों की तलाश भी जारी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्णय के संबंध में हॉस्टल प्रबन्धक ने छात्र को इमेल के माध्यम से यह सूचना दी है कि उस पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया है। यह धनराशि उसके स्पेशल मेंशन अकाउंट से काटी जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, IIT मुंबई ने छात्रों को भेजे गए एक इमेल में कहा, “कुछ लोग अपने खाने की जगह पर मांसाहारी खाने की गंध बर्दाश्त नहीं कर सकते और इससे स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएँ भी हो सकती हैं। हमारा लक्ष्य है कि यहाँ खाना खाने वाले हर छात्र को अच्छा अनुभव हो।”

इसी कारण से हमने खाने की सार्वजनिक जगह में से मात्र 6 मेजें शाकाहारी खाने के लिए आरक्षित की थी। इन मेजों पर स्पष्टतया लिखा होगा, “यह जगह केवल शाकाहारी खाना खाने वालों के लिए आरक्षित है।”

IIT मुंबई में दलित छात्रों के प्रतिनिधित्व का दावा करने वाली एक संस्था ‘आंबेडकर-पेरियार-फूले स्टडी सर्कल(APPSC)’ ने कहा है कि संस्थान का यह निर्णय खाप पंचायतों जैसा है जो कि छुआछूत को बचाने का प्रयास करते हैं। खाने की जगहों को अलग-अलग रखने का निर्णय मनु के किसी अनुयायी को ही सही लग सकता है।

लंदन में खालिस्तानियों का फिर उपद्रव: भारतीय उच्चायोग के सामने तिरंगे पर डाला गोमूत्र, भारतीय युवक ने राष्ट्रीय ध्वज की बचाई लाज

ब्रिटेन में खालिस्तानी आतंकियों की हरकतें बढ़ती जा रही हैं। अब उन्होंने 2 अक्टूबर 2023 को गाँधी जयंती के अवसर पर लंदन के भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे पर गोमूत्र डाला गया। खालिस्तानियों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को भी गोमूत्र पीने के लिए कहा। इसका वीडियो सामने आया है।

वीडियो में एक खालिस्तानी कह रहा है कि वो लोग भारतीय उच्चायोग के लिए गिफ्ट के तौर पर गोमूत्र लेकर आए हैं। उसने उच्चायोग के अधिकारियों से कहा कि वे बाहर आएँ और यह गिफ्ट लें। वहीं एक अन्य खालिस्तानी ने कहा कि भारत वाले गाँधी जयंती मना रहे हैं। वे गोमूत्र पीकर जश्न मना सकते हैं। इस तरह खालिस्तानी गोमूत्र के नाम पर हिंदुओं का मजाक उड़ा रहे हैं।

एक अन्य खालिस्तानी ने कहा कि वह पहले भी पीएम मोदी को गोमूत्र देने आ चुका है। उसने आगे कहा कि चंद्रमा पर जो चंद्रयान गया था, वह भी इसलिए बंद हो गया क्योंकि भारतीय गोमूत्र जैसी चीजों का उपयोग करते हैं। इसके बाद खालिस्तानी गुरुचरण सिंह भारतीय उच्चायोग की दीवार के पास तिरंगा रखकर उस पर गोमूत्र डालते दिखाई दे रहा है। गुरुचरण, गुरूपतवंत सिंह पन्नू के प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस से जुड़े खालसा यूके का सदस्य है।

इस दौरान एक खालिस्तानी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को गोमूत्र पीने के लिए कह रहा है। वहीं मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पम्मा भारत को धमकी देता नजर आ रहा है। मौके पर मौजूद सुरक्षा अधिकारी हाथ पर हाथ धरे खड़े रहे। वहीं एक अन्य वीडियो में एक भारतीय जमीन पर पड़े तिरंगे को उठाकर ले जाता दिखाई दिया।

बता दें कि इससे पहले मार्च 2023 में भी खालिस्तानी आतंकियों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान आतंकियों ने उच्चायोग में लगे भारतीय झंडे को निकालकर फेंक दिया था और वहाँ खालिस्तानी झंडा टाँग दिया था। इस कृत्य की भारत ने कड़ी निंदा की थी। बाद में उच्चायोग में पहले से भी बड़ा तिरंगा लगा दिया गया था।

पंजाब पर ₹3.05 लाख करोड़ का कर्ज, AAP सरकार ने 18 महीने में लिए ₹47107 करोड़: अब मोदी सरकार से CM भगवंत मान लगा रहे गुहार, 5 साल न लें ब्याज

पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता में आने के बाद से अब तक ₹47,107 करोड़ का कर्ज लिया है। यह जानकारी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित (Banwari Lal Purohit) को लिखे एक पत्र में दी है। मुख्यमंत्री मान ने राज्यपाल से कहा है कि वो केंद्र की मोदी सरकार को इस बात के लिए मनाएँ कि पंजाब से पाँच साल तक किसी भी प्रकार के कर्जों की वसूली ना हो।

भगवंत मान ने इस पत्र में बताया है कि उनकी सरकार ने मार्च 2022 में पंजाब की सत्ता में आने के बाद वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान ₹32,447 करोड़ और चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पाँच महीनों (अप्रैल-अगस्त) के दौरान ₹14,660 करोड़ का कर्ज लिया है।

पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने 22 सितम्बर, 2023 को मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक पत्र लिख कर जानकारी माँगी थी कि उनकी सरकार आने के बाद लिए गए कर्जों का किस प्रकार उपयोग किया गया है।

अब एक पत्र के जरिए ही मुख्यमंत्री मान ने यह जानकारी राज्यपाल को दी है। इस पत्र में मुख्यमंत्री मान ने कहा है कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद लिए गए कर्जे में से ₹27,016 करोड़ का खर्च पुराने कर्जों का ब्याज देने में हो गया है। उन्होंने कहा है कि यह कर्ज पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार से उन्हें विरासत में मिला था।

मुख्यमंत्री मान ने पंजाब के राज्यपाल को कर्जे के खर्च की जानकारी देने के अलावा उनसे यह अपील की है वह केंद्र से कहें कि पंजाब से पाँच वर्षों तक कर्जे की वसूली पर रोक लगे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने केंद्र से ग्राम विकास फंड (RDF) और मंडी विकास फंड (MDF) का पैसा देने की अपील की है।

केंद्र द्वारा पंजाब में अनाज खरीद पर पंजाब की राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य का 3% MDF और RDF लगाता है। पंजाब का कहना है कि केंद्र सरकार ने बीते चार फसल विपणन सीजन से उसे यह पैसा नहीं दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब सरकार का कहना है कि केंद्र के पास पंजाब के ₹4,208 करोड़ रूपए इस मद के हैं। भगवंत मान ने राज्यपाल से कहा है कि वह केंद्र से इस पैसे को रिलीज करने के लिए कहें।

पंजाब सरकार की आर्थिक स्थिति पर लगातार प्रश्न उठते रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी केंद्र सरकार से अतिरिक्त पैसे की माँग करते आए हैं। इस पत्र में भी उन्होंने पंजाब के कर्जों की वसूली पर रोक लगाने को कहा है।

राज्य के विपक्षी नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने राज्य का कर्ज मात्र 1.5 वर्षों में ही ₹50,000 करोड़ बढ़ा दिया है। विपक्ष ने इस कर्ज का ऑडिट करवाने की माँग भी की थी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल को लिखे गए पत्र में कहा है कि वह राज्य की कमाई को बढ़ा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कहा है कि राज्य का GST संग्रह 2021-22 से 2022-23 के बीच 16.6% बढ़ा है, उन्होंने इसे एक उपलब्धि के तौर पर बताया है। हालाँकि, इस बीच देश में GST संग्रह में 22% बढ़ोतरी हुई है। यह दर्शाता है कि पंजाब राष्ट्रीय औसत से पिछड़ रहा है।

उन्होंने राज्य के अन्य राजस्व में भी बढ़ोतरी को उपलब्धि बताया है जबकि द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट बताती है कि पंजाब में राजस्व में थोड़ी बढ़ोतरी इसलिए हुई है क्योंकि उन्होंने ईंधन और कलेक्ट्रेट फीस को बढ़ा दिया था।

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पंजाब पर वर्तमान में ₹3.05 लाख करोड़ का कर्ज है। आम आदमी पार्टी की सरकार के आने से पहले यह ₹2.59 लाख करोड़ था। पंजाब के कर्जे में तेज बढ़ोतरी का कारण पुराने कर्जों का ब्याज, मुफ्त बिजली के लिए दी जाने वाली सब्सिडी और सरकार की कमाई में कोई ख़ास वृद्धि ना होना है।

लोकसभा में पंजाब के कर्ज के सम्बन्ध में दिया गया उत्तर

हाल ही में आई रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब पर उसकी जीडीपी का 48% कर्ज है जो कि सामान्य सीमा से बहुत अधिक है। राज्यों के वित्तीय प्रबन्धन का नियोजन करने वाला FRBM (Fiscal Responsibility & Budgetry Management Act) के अंतर्गत राज्यों का कर्ज उनकी जीडीपी का अधिकतम 20% होना चाहिए।

वहीं अंग्रेजी समाचार पत्र द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2022 से जुलाई 2023 के बीच पंजाब सरकार को मुफ्त बिजली देने के लिए ₹27,552 करोड़ खर्चा करना पड़ा है। इसी दौरान सरकार का राजस्व ₹1.13 लाख करोड़ था। इसका अर्थ है कि राज्य के राजस्व का 24.20% पैसा मात्र बिजली मुफ्त देने में जा रहा है।

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सत्ता में आने के लिए कई वादे किए थे। इसमें हर परिवार को 300 यूनिट मुफ्त बिजली के दावे ने आम आदमी पार्टी को खूब समर्थन दिलाया था। हालाँकि, अब यह सब्सिडी पंजाब सरकार को कर्ज में डुबा रही है।

जिसके माँ-बाप, 2 बहनों और भाई को मार डाला, उस घायल बच्चे से मिले CM योगी: अस्पताल में चल रहा है अनमोल दुबे का इलाज, मुख्यमंत्री ने बँधाया ढाँढस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज (बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इसी अस्पताल में भर्ती देवरिया के जमीनी विवाद में घायल बच्चे का कुशल क्षेम जाना। साथ ही CM योगी ने अन्य मरीजों से बातचीत की और अस्पताल की व्यवस्थाओं को परखा। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों से गरीबों के इलाज के लिए बेहतर प्रबंध करने को कहा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने इस निरीक्षण की तस्वीरें आधिकारिक ‘X’ हैंडल (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर की हैं। तस्वीरों में उनके साथ डॉक्टरों का पैनल मौजूद दिख रहा है। देवरिया के जमीनी विवाद में घायल बच्चे की के सिर में पट्टी बँधी दिखी। तस्वीरों में डॉक्टर इलाज संबंधित जानकारियाँ भी साझा करते दिखाई पड़े। अनमोल बीआरडी कॉलेज के ICU वार्ड में भर्ती हैं। यहाँ उन्हें सोमवार की शाम 8 बजे लाया गया था। इसके अलावा CM योगी डेंगू और मलेरिया वार्ड में भी गए। उन्होंने किसी भी मरीज के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही न करने की नसीहत दी।

बताते चलें कि देवरिया के रुद्रपुर में 2 अक्टूबर को हुई हिंसा के दौरान 10 वर्षीय नाबालिग अनमोल दुबे एकमात्र जीवित बच पाया था। वह घर के एक कोने में छिप गया था लेकिन हमलावरों ने उसे भी खोज कर मृत समझ कर छोड़ा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनमोल को मानसिक आघात लगा है और वो बेहद डरा हुआ है। CM योगी आदित्यनाथ ने अनमोल के पास जा कर उसका नाम पूछा। नाम बताने के बाद अनमोल फफक-फफक कर रोने लगा। हालाँकि योगी ने उसे हिम्मत दी और कहा, ‘घबराओ करो। तुम्हारा इलाज चल रहा है।”

जानकारी के मुताबिक, इस नरंसहार के आरोपितों के खिलाफ योगी आदित्यथ ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस कार्रवाई की मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री कर रहे हैं। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के फतेहपुर गांव में 2 अक्टूबर (सोमवार) को एक दिल दहला देने वाली घटना में प्रेम यादव नामक एक व्यक्ति की हत्या के बदले दूसरे पक्ष ने बच्चों समेत 5 लोगों की हत्या कर दी गई थी। सत्य प्रकाश दुबे के परिवार के 5 सदस्यों की हत्या के बाद अब उनके घर में देवेश और अनमोल ही बचे हैं। झगड़े की वजह जमीनी विवाद बताया गया है।