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हिन्दू कार्यकर्ता के घर पर कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ का हमला, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार: गणेश विसर्जन में श्रद्धालुओं को गाड़ी से कुचलने की कोशिश

महाराष्ट्र के पुणे में शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को बजरंग दल के एक कार्यकर्ता के घर पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने कर हमला किया। इस दौरान सूरज चक्रधर नाम के व्यक्ति के नहीं मिलने पर उसके घर की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। उन्मादी भीड़ गणपति विसर्जन के दौरान सूरज पर में अपने मौलाना की गाड़ी रोक कर अभद्रता का आरोप लगा रही थी।

हालाँकि, सूरज ने उस घटना की वीडियो रिकार्डिंग की थी, जिसमें मुस्लिमों की गाड़ी को सबने खुद से हटकर रास्ता दिया था। पुलिस ने अभी तक सूरज की शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए सूरज ने गोरक्षा और लव जिहाद के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से खुद को कट्टरपंथियों के निशाने पर बताया।

यह मामला पुणे के जिला अम्बेगाँव के मंचर थाना क्षेत्र का है। सोमवार (2 अक्टूबर 2023) को सूरज की माँ ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने कहा कि शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को रात 10.00 से 10.30 बजे के बीच 150 से 200 मुस्लिमों की भीड़ उनके घर पर जमा हो गई थी।

उन्मादी भीड़ सूरज चक्रधर की हत्या करने के इरादे से उनके घर पर आई थी। संयोग से सूरज घर पर नहीं थे। सूरज को न पाकर भीड़ उनके घर की महिलाओं से दुर्व्यवहार करने लगी। सूरज की माँ ने आरोप लगाया है कि हमले के दौरान मुस्लिमों की भीड़ ने उनके घर पर पत्थरबाजी की। दरवाजों पर पैरों से ठोकरें मारीं और गंदी-गंदी गालियाँ दीं।

भीड़ में शामिल कुछ लोग सूरज के परिजनों से उसकी लोकेशन पूछ रहे थे। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सूरज बजरंग दल में काम करता है। सूरज की माँ से कहा गया, “वो जहाँ भी मिलेगा उसके हाथ पैर तोड़ डाले जाएँगे।” इस हिंसा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

सूरज की माँ ने इस भीड़ में कुछ लोगों को पहचानने का भी दावा किया है। शिकायत कॉपी में जिन आरोपितों के नाम दिए गए हैं, वे हैं- रियाज जमादार, इसरार शाहबाज खान पठान, आजम मोमिन, कय्यूम पठान, मीरान अनीस इनामदार, आकिब रहमान अत्तार, अमन रहमान अत्तार, मोहम्मद सरताज अली जमादार, तरबेज मुख्तार कुरेशी, दानिश सिराज मोमिन, तौकीर मोहम्मद मतीन जमादार, अदनान मोहम्मद, जावेद शेख।

इसके अलावा इसमें मोहम्मद साबिर रिजवान अली सैयद, इरफान तहजान मंडल, अज़हर सिराज मोमिन, अतीक वसीम इनामदार, उजेफ वसीम इनामदार, आसिफ खान, जिया अहमद इम्तियाज जमादार, रेहान रिजवान इनामदार, शहबाज अली इनामदार, सकलेन सरफराज इनामदार, मोहम्मद फजल शेख।,सैयद हसन, अब्बास रियासत अली का भी नाम है। अन्य हमलावरों को अज्ञात में दिखाया गया है।

पहले गाडी चढ़ाने की कोशिश कोशिश, फिर झूठा हंगामा

शिकायत में सूरज की माँ ने बताया है कि उनके घर पर हमले से 1 दिन पहले यानि 28 सितंबर को रात लगभग 11:50 पर गणपति विसर्जन जुलूस चल रहा था। तभी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने जुलूस के बीचों-बीच चार पहिया गाड़ी घुसाकर लोगों को कुचलने का प्रयास किया था।

हालाँकि, जुलूस में शामिल हिन्दू समाज के लोगों ने बिना किसी बहस या झगड़े के मुस्लिमों के उस वाहन को जाने का रास्ता दे दिया। इसके बावजूद थोड़ी देर के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग गणेश विसर्जन यात्रा में शामिल लोगों के खिलाफ शिकायत लेकर थाने पर जमा हो गए।

सूरज की माँ ने आरोप लगाया है कि गाड़ी चढ़ाने में नाकाम मुस्लिम समुदाय के लोग भीड़ की शक्ल में पुलिस स्टेशन पहुँचे। यहाँ उन्होंने अमर शिवराज्य गणेश मंडल और वेतालेश्वर तरूण गणेश मित्र मंडल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में झूठी तहरीर दी। तहरीर में गणेश विसर्जन कर रहे हिन्दुओं पर मुस्लिमों की गाड़ी रोक कर मारपीट का आरोप लगाया गया था।

पुलिस ने इस शिकायत पर विसर्जन में शामिल सूरज को अन्य कुछ लोगों सहित हिरासत में ले लिया। हालाँकि, थोड़ी देर बाद सूरज को छोड़ दिया गया। ऑपइंडिया के पास वो वीडियो मौजूद है, जिसमें हिन्दू संगठनों ने मुस्लिम समाज की गाड़ी को बिना किसी विवाद के रास्ता दिया था।

सूरज की माँ ने अपने पूरे परिवार को खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की माँग की है। साथ ही CCTV व घटना के वीडियो जाँच करके सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की आशा जताई है। इस घटना के बाद सूरज के भाई का ब्लड प्रेशर बढ़ गया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

बाहरी भीड़ ईद मिलाद वाली, अभी तक FIR नहीं

ऑपइंडिया ने इस मामले की जानकारी के लिए बजरंग दल कार्यकर्ता सूरज से सम्पर्क किया। सूरज ने अपना घर मुस्लिम बाहुल्य इलाके में बताया। उन्होंने कहा कि लव जिहाद और गोहत्या जैसे मामलों की आवाज उठाने के चलते वो लंबे समय से कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।

सूरज ने आरोप लगाया कि घटना के बाद से अब तक पुलिस उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की है, जबकि इसके लिए वो खुद और उनकी माँ थाने के कई चक्कर काट चुकी हैं। सूरज ने कहा कि उन्हें पुलिस का जवाब मिलता है कि ‘हम अपने हिसाब से काम करेंगे न कि तुम्हारे अनुसार’।

ईद मिलाद वाली थी भीड़

सूरज ने हमसे बताया कि हमले के दौरान वो अपनी बीमार माँ की दवाएँ लेने गए थे। उनका दावा है कि अगर वो घर पर मिले होते तो मुस्लिमों की भीड़ जरूर उनके साथ कोई अनहोनी कर देती, क्योंकि हमलावर मारो-काटो के नारे लगा रहे थे। बकौल सूरज, जो भीड़ उनके घर में आई थी उसमें कई बाहरी लोग भी शामिल थे।

जिसे बता रहे मौलाना वो असल में टेलर मास्टर

पीड़ित युवक सूरज ने हमसे बातचीत के दौरान इस पूरे विवाद को सोची समझी साजिश बताया। उन्होंने दावा किया कि घटना के दिन ईद मिलाद का जुलूस खत्म हुआ था और वहाँ से भीड़ उनके घर की तरफ मुड़ गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्मादी भीड़ जिसे मौलाना बता रही है, वो बगल के गाँव में कपड़े सिलने का काम करता है।

1 दिन, अलग-अलग बीमारियाँ, 24 मौतें, इनमें 12 बच्चे… महाराष्ट्र के अस्पताल में जाँच के लिए सरकार ने भेजी समिति, मेडिकल कॉलेज बोला- दवा और डॉक्टरों की कमी नहीं

महाराष्ट्र के नांदेड़ के शंकरराव चव्हाण सरकारी अस्पताल में बीते 24 घंटों में 24 मरीजों की मौत हो गई। मृतकों में 12 शिशु सहित 7 महिलाएँ और 5 पुरुष शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, सभी की मौत 30 सितंबर की रात 12 बजे से 1 अक्टूबर रात 12 बजे के बीच हुई है।

इन मौतों पर अस्पताल के डीन डॉ. श्यामराव वाकोड़े का कहना है कि मरीजों के शरीर पर इलाज का असर नहीं हुआ, इस वजह से ये मौतें हुई हैं। इन मौतों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जा चुकी है और इसे कल यानी 4 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे तक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

डीन डॉ श्यामराव वाकोड़े के मुताबिक, “पिछले 24 घंटों में 24 लोगों की जान चली गई। इनमें करीब 12 बच्चों (1-2 दिन के) की मौत हो गई। ये बच्चे अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित थे। वयस्कों में 70-80 वर्ष की आयु के 8 मरीज़ थे। उन्हें मधुमेह, लीवर फेलियर और किडनी फेलियर जैसी कई समस्याएँ थीं।”

हालाँकि कई मीडिया रिपोर्ट में दवा की कमी का दावा किया जा रहा है। वहीं इस मामले में डॉ वाकोड़े मुताबिक, मरीज़ आमतौर पर गंभीर स्थिति में यहाँ आते हैं। दवाओं या डॉक्टरों की कोई कमी नहीं थी। रोगियों की उचित देखभाल की गई थी, लेकिन उनके शरीर ने इलाज का जवाब नहीं दिया जिसकी वजह से ये मौतें हुई।”

उनका कहना है कि इस अस्पताल में अधिकांश गंभीर मरीज प्राइवेट प्रैक्टिशनर के यहाँ से आते हैं वो डरकर यहाँ भेज देते हैं कि उनके वहाँ उनकी मौत होगी। इसके अलावा दूर-दराज के इलाकों के गंभीर मरीज इस सरकारी अस्पताल में आते हैं।

वहीं इस मामले में मौतों को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई में पत्रकारों से कहा कि अस्पताल में क्या हुआ, इसके बारे में अधिक जानकारी माँगी जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ का कहना है, “हम पूरी जाँच करेंगे। मैंने महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस को इस संबंध में जानकारी दी है।” वही मैं अस्पताल का दौरा करूँगा और डॉक्टरों की एक समिति बनाई जाएगी।”

वहीं महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक डॉ दिलीप म्हैसेकर ने मीडिया को बताया कि मौतों की जाँच के लिए एक समिति गठित की गई है। उन्होंने बताया, “छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) जिले की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। इसे कल 4 अक्टूबर, 2023 को दोपहर 1 बजे तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। मैं स्थिति की समीक्षा करने के लिए व्यक्तिगत रूप से अस्पताल का दौरा कर रहा हूँ।”

उधर दूसरी तरफ महाराष्ट्र में इस घटना को लेकर विपक्ष ने एकनाथ शिंदे सरकार पर चौतरफा हमला करते हुए कहा, “ट्रिपल इंजन सरकार (भाजपा, एकनाथ शिंदे सेना और एनसीपी के अजीत पवार गुट की) को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कहा, “ट्रिपल इंजन सरकार सभी 24 निर्दोष लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार है। उन्हें जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि इस मामले में कॉन्ग्रेस ने भी मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को महाराष्ट्र के नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में 24 मौतों की गहन जाँच की माँग की। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्य सरकार की स्वास्थ्य प्रणाली पर सवाल उठाए। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने आज अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा, सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और स्थिति पर नियंत्रण रखना चाहिए।

‘चीन के दलालों’ पर छापे से भय में मीडिया गिरोह: ‘न्यूज़क्लिक’ से जुड़े पत्रकारों पर कार्रवाई के बाद ‘ प्रेस की आज़ादी’ का रोना रो रहे राजदीप, आरफा और रोहिणी

ऑनलाइन पोर्टल ‘न्यूज़क्लिक’ से जुड़े कई लोगों पर मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) की सुबह अमेरिकी और चीनी संगठनों से अवैध विदेशी धन लेने के मामले में छापे मारे गए। इस छापे की जद में ‘न्यूज़क्लिक’ से जुड़े संजय राजौरा, भाषा सिंह, उर्मिलेश, प्रबीर पुरकायस्थ, अभिसार शर्मा, औनिंद्यो चक्रवर्ती और सोहेल हाशमी समेत कई पत्रकार आए हैं।

इन पर छापेमारी से देश का लिबरल वामपंथी पत्रकारों का गैंग तिलमिलाया हुआ है। वो लगातार ट्वीट कर ‘न्यूज़क्लिक’ पर छापेमारी को प्रेस की आज़ादी पर हमला बताने से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “छापों ने साबित कर दिया कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता ख़तरे में है।”

इन छापों के दौरान वामपंथी तंत्र लोगों को बरगलाने लिए अति-उत्साह में चला गया। इस गिरोह की मानें तो भारत के खिलाफ प्रचार करने के लिए दुश्मन देशों से अवैध फंडिंग से फायदा पाने वाले लोगों पर कोई भी जाँच स्वतंत्र प्रेस पर हमला है।

खुद को पत्रकार मानने वाली रोहिणी सिंह ने दावा किया है की कि छापों की खबर से संकेत मिलता है कि पत्रकारिता भारत में सबसे बड़ा अपराध है। गौरतलब है कि रोहिणी सिंह का नाम राडिया टेप विवाद में भी आया था और न केवल राजनीतिक दुष्प्रचार ही नहीं, बल्कि ज़बरदस्त फर्जी खबरें भी फैलाने की उनकी पुरानी आदत रही है।

इस क्रम में ‘द वायर’ की तथाकथित उस मुस्लिम पत्रकार ने भी ट्वीट्स किए, जो अक्सर इस्लामवादियों के बचाव करती हैं, फर्जी खबरों को आगे बढ़ाती हैं और हिंदू विरोधी दुष्प्रचार को बढ़ावा देती हैं। ये भी रोहिणी की राह पर हैं। आरफ़ा खानम शेरवानी ने ‘द वायर’ की रिपोर्ट को इस सवाल के साथ ट्वीट किया, “लोकतंत्र की जननी, कुछ भी? कई पत्रकारों, स्टैंड-अप कॉमिक्स, व्यंग्यकारों और टिप्पणीकारों के घरों पर सुबह-सुबह छापेमारी करते हुए दिल्ली पुलिस ने “आतंकवादी संबंधों से संबंधित” मामलों में पूछताछ शुरू कर दी है।”

राजदीप सरदेसाई, जो खुद को गिद्ध बताते रहे हैं, उन्होंने प्रशांत पुजारी (PFI जिहादियों के द्वारा मारे गए एक हिंदू) की नृशंस हत्या को राजनीतिक संदर्भ से जोड़ दिया। यहीं नहीं संसद पर आतंकवादी हमले को कवर करने में उन्होंने खासा उत्साह दिखाया था।

राजदीप ने अपने ट्वीट में कहा, “आज सुबह की ब्रेकिंग स्टोरी: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ‘न्यूज़क्लिक’ वेबसाइट से जुड़े कई पत्रकारों/लेखकों के घरों पर छापेमारी की। मोबाइल और लैपटॉप ले गए। पूछताछ जारी। अभी तक कोई वॉरंट/एफआईआर नहीं दिखाया गया। लोकतंत्र में पत्रकार कब से राज्य के ‘दुश्मन’ बन गए?”

इस्लामी प्रोपेगंडा आउटलेट AltNews के को-फाउंडर और जिहादी अपराधों का बचाव करने की कोशिश करने वाले जुबैर के साथी प्रतीक सिन्हा ने ये ऐलान कर डाला है कि सरकार सभी हदें पार कर रही है।

गौरतलब है कि फिलहाल जिन लोगों पर छापेमारी की जा रही है, वे सभी लोग काफी लंबे वक्त से भारत खिलाफ प्रोपेगंडा चला रहे हैं। उनमें से किसी पर भी उनकी राय और विचारों के लिए मुकदमा नहीं चलाया गया है। ये छापे इसलिए नहीं हैं की कि भारत सरकार ने जानबूझकर पत्रकारों पर मुकदमा चलाने का फैसला किया हैं। दरअसल, जिन लोगों पर छापे मारे जा रहे हैं वे ‘न्यूज़क्लिक’ से जुड़े हुए थे या हैं। ये ऑनलाइन न्यूज पोर्टल भारत में रह कर भारत के खिलाफ ही दुष्प्रचार करता है और चीनी एजेंडे को आगे बढ़ाता है।

अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शनिवार (5 अगस्त, 2023) को एक लेख प्रकाशित हुआ था। इस लेख में अमेरिकी व्यवसायी के साथ चीनी सरकार के संबंध और ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगंडा पोर्टल को मिल रही फंडिंग को लेकर खुलासा किया गया।

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, “यह बहुत कम लोगों को पता है कि गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में नेविल रॉय सिंघम चीन के सरकारी मीडिया के साथ मिलकर काम करता है और चीन के प्रोपेगेंडा को दुनिया भर में फैलाने के लिए फंडिंग कर रहा है।”

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लेख में कहा है कि नेविल रॉय सिंघम भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में प्रगतिशील होने की वकालत करने के बहाने चीनी सरकार के एजेंडे को लोगों के बीच फैलाने में कामयाब रहा है। नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट फाइलिंग से भी पता चलता है कि नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क ने प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘न्यूज़क्लिक’ को फंडिंग की थी। इसके तहत ‘न्यूजक्लिक’ ने अपनी कवरेज को चीनी सरकार के मुद्दों से जोड़ते हुए एक वीडियो में कहा था, “चीन का इतिहास श्रमिक वर्गों को प्रेरित करता रहा है।”

चाइनीज पैसा लेने वाला पत्रकार क्या-क्या करता है, क्या-क्या नहीं (लिख-बोल सकता)… जानिए 4 साल तक सैलरी लेने वाले पत्रकार से

खबर यह है कि पुलिस ने न्यूज क्लिक (NewsClick) से जुड़े कई पत्रकारों के घरों पर छापा मारा, बहुतों को हिरासत में लिया। यह मामला चीन से करोड़ों रुपए की फंडिंग लेकर भारत के खिलाफ और चायनीज प्रोपेगेंडा के लिए लिखने-बोलने के संबंध में है। मामला चूँकि पत्रकारों और खासकर वामपंथी मीडिया गिरोह से जुड़ा है, इसलिए सोशल मीडिया पर इसे ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ से जोड़ कर रायता फैलाया जा रहा है।

राजदीप सरदेसाई जैसे बड़े और उम्रदराज पत्रकार तो यहाँ तक सवाल करने लग गए कि पत्रकारों/लेखकों के घरों में जो छापेमारी की गई, उनके मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिए गए, उसको लेकर पुलिस के पास कोई वॉरंट या एफआईआर तक नहीं था। पुलिस की छापेमारी जैसी रोजमर्रा की खबर को राजदीप ने लोकतंत्र से जोड़ते हुए पूछ डाला कि – “पत्रकार कब से राज्य के दुश्मन बन गए?”

पुलिस के पास न्यूज क्लिक (NewsClick) से जुड़े पत्रकारों के घरों की तलाशी, उनके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट आदि जब्त करने संबंधी वॉरंट या एफआईआर है या नहीं, राजदीप जैसे कद वाले पत्रकार को यह पता लगाने में बस 1-2 फोन कॉल करना था, जो उन्होंने नहीं किया। सोशल मीडिया पर हवा बनानी थी, इसलिए आधी-अधूरी जानकारी लिख दी। “पत्रकार कब से राज्य के दुश्मन बन गए?” वाला दूसरा सवाल जो उन्होंने पूछा, उसको लेकर भी सिर्फ यही कहा जा सकता है कि बाल सफेद कर लेने या हो जाने या उम्र के ज्यादा हो जाने से जानकारी भी ज्यादा हो, यह एक भ्रम ही है, जिसे इन जैसे पत्रकार-लेखकों ने गढ़ा है।

1.) पैसे लेकर प्रोपेगेंडा कैसे किया जाता है? 2.) पैसे देकर प्रोपेगेंडा कैसे करवाया जा सकता है? 3.) कॉन्टेंट कंपनी के नाम पर चीन भारत के ही लोगों को सैलरी देकर कैसे उनके जरिए अपनी बात, अपनी राजनीति, अपनी कूटनीति फैला सकता है? 4.) भारत के लोग अगर चायनीज कंपनी में काम करते हैं, वहाँ से सैलरी लेते हैं तो क्या वो अपने ही देश के खिलाफ लिखना-बोलना शुरू कर देंगे? – राजदीप या राजदीप जैसे जो भी पत्रकार इस तरह के सवाल उठा रहे हैं, तो उनका जवाब है मेरे पास।

मैंने लगभग 4 साल (2016 से 2019 के आखिरी महीने तक) 2 अलग-अलग चीनी कंपनियों के लिए काम किया है। दोनों ही कंपनियाँ कॉन्टेंट से जुड़ी थी। न्यूज का ही काम होता था। दोनों जगह लिखने-बोलने वाले सारे कर्मचारी भारत के ही थे। संपादकीय टीम में एक भी चायनीज नहीं था। इतनी डिटेल इसलिए क्योंकि अगली लाइन चौंकाने वाली है। संपादकीय टीम में हम सभी भारतीय थे जरूर लेकिन संपादकीय नीतियाँ आती थीं बन कर बीजिंग से। मौखिक नहीं बल्कि सब लिखित होता था। हम सबको उस एक्सेल शीट के अनुसार ही काम करना होता था।

क्या होता था उस एक्सेल शीट में?

कॉन्टेंट, न्यूज, मीडिया से जुड़ा कोई भी विषय हो – सब पर डिटेल में लिखा रहता था। बात पॉर्न की हो, नग्नता की या अश्लीलता की – ज्ञान बीजिंग से ही आता था। अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, कॉर्पोरेट जगत की बात हो – संपादकीय नीति बीजिंग की टीम ही तय करती थी। एक छोटे से उदाहरण से ऐसे समझिए कि शुरुआती हायरिंग के बाद तब के हमारे संपादक ने यह तय किया अर्थव्यवस्था के अंदर बैंकिंग/कॉर्पोरेट/इंश्योरेंस आदि विषय आएँगे। भारत की तमाम मीडिया लगभग इसी सोच से चलती है। चायनीज टीम इसे समझ नहीं पाई, ना ही अपनी बात हम सभी को समझा पाई। इसके बाद उन्होंने पूरी टीम (हिंदी-अंग्रेजी) को भारी-भरकम खर्चे पर बीजिंग बुला लिया और महीने भर की ट्रेनिंग देकर समझाया कि कॉर्पोरेट पैरंट कैटेगिरी होगी, इसके अंदर अर्थव्यवस्था/बैंकिंग/इंश्योरेंस आदि आएँगे।

इस पूरे प्रकरण के बाद चायनीज मैनेजमेंट यह समझ चुकी थी कि भारत में कॉन्टेंट संबंधी ऑफिस चलाना है तो बीजिंग से मैनेज करना मुश्किल होगा। इसके बाद 2-4 चायनीज हमारे गुड़गाँव वाले ऑफिस में परमानेंट रहने लगे। वीजा पर आते थे। एक समय ऐसा आया कि भारतीय शक्ल से ज्यादा चायनीच मुंडी हमारे दफ्तर में दिखती थी। इनमें 1-2 हमेशा वो होते थे, जो या तो चीन के ही किसी विश्वविद्यालय से या भारत के किसी संस्थान से हिंदी का कोर्स किए रहते थे। वो हिंदी कॉन्टेंट तैयार नहीं करते थे क्योंकि वैसी योग्यता उनकी थी भी नहीं लेकिन वो ऑफिस में होते थे। स्पष्ट तो नहीं कह सकते लेकिन कयास लगा सकते हैं कि शायद बातचीत सुनने के लिए वो हों!

ऑफिस में जो चायनीज रहते थे, की-बोर्ड पर उनकी स्पीड गजब की होती थी। वो बीजिंग टीम से हमेशा चैट करते रहते थे। वहाँ से चायनीज में दिया गया निर्देश गुड़गाँव में अंग्रेजी और हिंदी में ट्रांसलेट किया जाता था, एक्सेल शीट में जोड़ा जाता था। भले वो टूटी-फूटी अंग्रेजी और हिंदी ही क्यों न हो, यह काम वही करते थे। उसको एडिट करने का भी राइट्स भारतीय टीम को नहीं थी।

क्या नहीं करना है – एक एक्सेल शीट इसकी भी

ऊपर जिस एक्सेल शीट की बात मैंने की, वो शीट यह बताती थी कि अगर कुछ करना है तो कैसे करना है। लेकिन यह काफी नहीं था। चीन जैसे वामपंथी देश और भारत में ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ का रोना रोने वाले वामपंथी पत्रकार/लेखकों को यह जानना भी जरूरी है कि एक एक्सेल शीट ऐसी भी थी, जिसके अंदर लिखे विषयों पर लिखने-बोलने की मनाही थी। इतना ही नहीं, न्यूज एग्रीगेटर के तौर पर इन विषयों से संबंधित किसी भी चैनल/वेबसाइट से आई ऐसी खबरों को हाइड करना भी हमारा ही काम था।

आखिर कौन-कौन ऐसे विषय थे, जिन्हें चायनीज मैनेजमेंट नहीं चाहता था जनता को दिखाना-पढ़ाना:

  1. चीन-विरोधी कोई भी खबर
  2. अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी खबरें
  3. दलाई लामा की कैसी भी खबर हो
  4. तिब्बत से जुड़ी खबर
  5. ताइवान की कोई भी खबर
  6. हॉन्गकॉन्ग संबंधी खबरें
  7. तियानमेन स्क्वायर और वहाँ के विद्रोह वाली खबर और फोटो
  8. चायनीज हिरोइन की सेक्सी फोटो/वीडियो नहीं
  9. फलाना-ढिकाना (सब याद नहीं)

आखिर किन लोगों को चायनीज कंपनियाँ एक खास तरह का कॉन्टेंट पढ़ाना चाहती थी, जबकि अपने प्रोपेगेंडा के तहत कुछ खबरों को दिखाने तक पर रोक लगा देती थी? भारत के ही लोगों को। भारत के ही मीडिया घरानों से खबरें लेकर अपने ऐप पर भारत के ही खिलाफ काम किया जाता था। और इसके लिए काम करने वाले सभी भारतीय ही थे, मैं भी था। बाकियों का नहीं पता, पर मेरे लिए इसके पीछे सैलरी ही एकमात्र वजह थी।

अब फिर से आते हैं न्यूज क्लिक (NewsClick) वाली खबर पर। उस सोच पर जो यह मानती है कि – “पत्रकार कब से राज्य के दुश्मन बन गए?” जिस संपादकीय नीति की चर्चा मैंने की, जिस पर काम करके 4 साल तक सैलरी उठाई, क्या कुछ उसी तरह का काम न्यूज क्लिक (NewsClick) के संपादक लोग कर रहे थे/हैं या वो सही मायने में ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ का झंडा बुलंद कर रहे?

NewsClick में तिब्बत संबंधी खबरें कैसी और कश्मीर इसमें क्यों?
NewsClick में अरुणाचल प्रदेश की सिर्फ एक खबर क्यों?
NewsClick में पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) संबंधी खबरों का टेस्ट समझिए
NewsClick के लिए दलाई लामा और उनकी खबर = जीरो, सोचिए क्यों?

उदाहरण के लिए बस 4 टॉपिक उठाकर उसका स्क्रीनशॉट लगाया है मैंने। न्यूज क्लिक (NewsClick) पर तिब्बत, दलाई लामा, पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK), अरुणाचल प्रदेश आदि पर जो खबरें बनी हैं, जितनी संख्या में बनी हैं, वो सब क्लियर है सिर्फ 4 स्क्रीनशॉट से। दलाई लामा पर जीरो खबर, अरुणाचल प्रदेश पर सिर्फ 1 खबर, तिब्बत पर सिर्फ 4 खबर (उसमें भी कश्मीर, सिक्किम, अमेरिका को घुसा दिया संपादकीय नीति के तहत) और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) पर भी सिर्फ 5 खबर (जिसमें हुर्रियत, चीन, भारतीय सेना, कश्मीर के फोटो आदि) करके छुट्टी।

इन 4 स्क्रीनशॉट का क्या मतलब हुआ? इनका मतलब यह है कि 2016 से लेकर 2020 तक (चायनीज ऐप के ब्लॉक किए जाने तक) जो संपादकीय नीतियाँ बीजिंग से निर्देशित होती थी, वही सिलसिला 2023 में भी चल रहा है। न्यूज क्लिक (NewsClick) में छपने वाली खबरों से यह स्पष्ट है।

चाइनीज कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को गुलाम बनाती हैं, सोचने-समझने की जगह वो आपसे बीजिंग से निर्देशित होने की न सिर्फ अपेक्षा रखते हैं बल्कि ऐसा मानने के लिए बाध्य भी करते हैं। हर बात में वो ‘तुमसे बेहतर जानते हैं’ वाला तर्क देकर आपको चुप कराते हैं। जिस भी देश में ये कंपनियाँ काम करती हैं, वहाँ के कानूनों को ताक पर रख कर वहीं के नागरिकों का हक मारती हैं।

सैलरी लेकर ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ का रोना रोने वाले राजदीप या राजदीप जैसे पत्रकारों/लेखकों को सवाल पूछना चाहिए कि PoK मतलब ‘पाक-अधिकृत कश्मीर’ कैसे ‘पाक-प्रशासित कश्मीर‘ बन जाता है। और तो और, जिस BBC की संपादकीय नीति में ‘पाक-प्रशासित कश्मीर’ लिखा जाता है, उसे पत्रकारिता के कथित स्वर्ण तमगे से यही मीडिया गिरोह नवाजता है। आखिर वो कौन सी मानसिकता है, जो भारत के ही ऑफिस में काम करने वाले भारतीय लोग अंग्रेजों की या चायनीज लोगों की बनी-बनाई शब्दावली को संपादकीय नीति के तहत मानने लगते हैं? जो जवाब राजदीप या मीडिया गिरोह को शायद नहीं पता हो या नहीं पता होने का ढोंग करते रहते हैं, वो जवाब है – सैलरी… वो जवाब है – पैसा लेकर लिखना।

PS: मैं चायनीज कंपनी का पूर्व कर्मचारी रहा हूँ। ठीक वैसे ही जैसे कभी आजतक, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण का था। न मैंने कभी किसी भारतीय कंपनी से संबंधित बिजनेस डेटा का खुलासा किया, न ही चायनीज कंपनी का करूँगा। इसलिए पूरा लेख संपादकीय नीति के अंतर्गत ही लिखा गया है। वो नीतियाँ जिससे देश का अहित किया जा सकता है, अहित होता है।

कनाडा पर और सख्त हुआ भारत: 41 राजनयिक वापस बुलाने को कहा, राजनयिक छूट वापस लेने की चेतावनी भी दी

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडा से कहा है कि वह भारत में मौजूद अपने 41 राजनयिकों को 10 अक्टूबर 2023 से पहले वापस बुला ले। भारत ने चेतावनी देते हुए कहा कि कनाडा यदि ऐसा करता है तो इन्हें मिली हुई राजनयिक छूट वापस ले ली जाएगी।

यह जानकारी अंग्रेजी अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने दी है। अखबार के अनुसार, इस समय भारत में कनाडा के 62 राजनयिक मौजूद हैं। 41 राजनयिकों को वापस बुलाने पर यह संख्या 21 हो जाएगी। ऐसी स्थिति में 10 अक्टूबर के बाद भारत में कनाडाई राजनयिकों की संख्या एक तिहाई रह जाएगी।

भारत ना छोड़ने की स्थिति में कनाडाई राजनयिक वह छूट खो देंगे, जो कि उन्हें मिली हुई हैं। इसके बाद वह अपने राजनयिक ओहदे का लाभ लेकर भारतीय कानूनों से नहीं बच पाएँगे। सामान्य स्थिति में विदेशी राजनयिकों को किसी अपराध का दोषी पाए जाने पर देश छोड़ने को कहा जाता है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने राजनयिकों की संख्या का मसला कई बार कनाडा के सामने उठाया था। भारत ने साफ शब्दों में कहा था कि दोनों देशों की राजनयिकों की संख्या में असमानता है। जितने भारतीय राजनयिक कनाडा में हैं, उससे कहीं अधिक कनाडाई राजनयिक भारत में हैं।

भारत का यह निर्णय दोनों देशों के बीच जारी रस्साकशी के बीच आया है। 18 सितम्बर 2023 को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या करवाने का आरोप लगाया था। कनाडा ने एक भारतीय राजनयिक को भी निष्कासित किया था।

भारत ने इसका कड़ा विरोध करते हुए बदले में एक कनाडाई राजनयिक को निष्कासित किया था। भारत ने कनाडा के आरोपों को भी खारिज किया था। इसके साथ ही भारत ने कनाडाई राजनयिकों पर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोप भी लगाए थे। भारत ने कहा था कि कनाडा आतंकियों और अपराधियों को शरण देता है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडाई नागरिकों को वीजा जारी करने पर रोक लगा दी थी, जो कि अभी तक जारी है। कनाडा के साथ हुए विवाद के बाद 21 सितम्बर 2023 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भारत की चिंता दोहराई थी।

फाइनेंशियल टाइम्स की इस रिपोर्ट पर भारतीय विदेश मंत्रालय का कोई बयान नहीं आया है। कनाडाई दूतावास ने भी इस सम्बन्ध में कोई जानकारी नहीं दी है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने राजनयिक भारत छोड़ चुके हैं और यह आदेश कब दिया गया था।

हालाँकि, भारत के इस कदम से स्पष्ट है कि वह कनाडा द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर काफी गुस्सा में है। भारत, कनाडा में राजधानी ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर में दूतावास/वाणिज्यिक दूतावास संचालित करता है। कनाडा, भारत में 4 दूतावास/वाणिज्यिक दूतावास संचालित करता है जो नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चंडीगढ़ में स्थित हैं।

हिन्दुओं पर गोमूत्र और शाकाहार वाला तंज, काली माँ का मजाक… भारत से घृणा करती है जो पाकिस्तानी एंकर, उसे ICC ने बनाया वर्ल्ड कप का प्रेजेंटर

आईसीसी ने भारत में होने वाले क्रिकेट विश्वकप के लिए पाकिस्तानी एंकर जैनब अब्बास को प्रेजेंटर बनाया है। जैनब अब्बास ने खुद सोशल मीडिया एक्स पर अपनी तस्वीर के साथ ये खुशखबरी शेयर की है। हालाँकि इस खबर के सामने आते ही जहाँ कुछ ने जैनब अब्बास को बधाई दी, तो वहीं बहुतों ने उसके पुराने हिंदूफोबिक ट्वीट्स के लिए उसे सोशल मीडिया पर घेर लिया। लोगों ने उसके पुराने यूजर नेम के साथ ही उसके हिंदूफोबिक ट्वीट्स भी शेयर करने शुरू कर दिए।

खैर, जैनब के हिंदूफोबिक ट्वीट्स के बारे में तो हम आगे बता ही रहे हैं, लेकिन आपको बता दें कि ये वही जैनब अब्बास है, जिसने पाकिस्तान के मौजूदा कप्तान बाबर आजम को उस समय पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कोच रहे मिकी आर्थर का बेटा तक कह दिया था। हालाँकि इस मामले में बाबर आजम ने उसे बहुत डाँट लगाई थी। देखिए, उसका ट्वीट और बाबर आजम की डाँट वाले ट्वीट का स्क्रीनशॉट…

हिंदूफोबिक टिप्पणियों से भरा रहा है जैनब अब्बास का इतिहास, अब लोग माँग रहे हिसाब

जैनब अब्बास के एक्स हैंडल का पुराना यूजर नेम ZainabLovessrk था। उसने साल 2014 में शाकाहारियों और भारत में तेज गेंदबाजों की कमीं को लेकर हिंदूफोबिक ट्वीट किया था, जिसमें उसने भारतीयों के शाकाहारी होने का भी मजाक उड़ाया था। कुछ ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट हम आपके साथ शेयर भी कर रहे हैं।

जैनब के पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉन देखिए…

जैनब का पुराना ट्वीट वायरल

जैनब ने एक और ट्वीट में गाय का मजाक उड़ाया था। उसके ऐसे कई पुराने ट्वीट्स वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोग उससे पूछ रहे हैं कि क्या ये वही जैनब है, जो हिंदूफोबिक हुआ करती थी।

जैनब का आपत्तिजनक ट्वीट

अब लोग जैनब से माँग रहे हिसाब

मयंक नाम के एक्स यूजर ने जैनब से पूछा है कि ये तुम्हीं हो?

यूजर नेम से जुड़े सवाल का जवाब

वैसे, ये सवाल आपके मन में आ रहा होगा कि जैनब की वर्तमान आईडी का यूजर नेम अलग है और हम जिस यूजर नेम का जिक्र कर रहे हैं, वो अलग है।

इसके लिए आपको ट्विटर पर कुछ सर्च करने होंगे। जैसे कि उसके पुराने ट्विटर यूजर नेम @ZainabLovesSRK को सर्च करना होगा, इससे जुड़ा बहुत सारा कंटेंट आपको मिल जाएगा।

साल 2015 में क्रिकेट की दुनिया में रखा कदम

बता दें कि जैनब अब्बास एक स्पोर्ट्स एंकर है। कभी वो सिर्फ मेकअप आर्टिस्ट हुआ करती थी। जैनब अब्बास साल 2015 तक अपने स्टूडियो में मेकअप आर्टिस्ट का काम करती थी। लेकिन साल 2015 में उसने दुनिया न्यूज चैनल के लिए क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान सईद अजमल और इमरान नजीर के साथ टीवी शो किया। इसके बाद से उसकी गाड़ी निकल पड़ी। फिर मेकअप का काम छोड़कर जैनब ने स्पोर्ट्स एंकरिंग शुरू कर दी। उसे उनकी माँ ने भी खूब बढ़ावा दिया।

माँ भी थी एंकर, बाद में इमरान खान की पार्टी से बनी सांसद

जैनब अब्बास की उम्र 35 साल है। जैनब का परिवार काफी प्रभावशाली रहा है। उसकी माँ अंदलीब अब्बास जनवरी 2023 तक पाकिस्तानी सेंट्रल असेंबरी की मेंबर (सांसद) रही हैं। वो पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और अभी जेल में बंद पाकिस्तान के विश्व विजेता क्रिकेट कप्तान इमरान खान की करीबी हैं और उनकी पार्टी पीटीआई के टिकट पर ही सीनेट की सदस्य रही हैं। अंदलीब अब्बास खुद साल 1999 में क्रिकेट वर्ल्ड कप की प्रजेंटर रह चुकी हैं। वहीं, अंदलीब अब्बास के पति और जैनब अब्बास के पिता नासिर अब्बास फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके हैं।

जैनब ने चार साल पहले पाकिस्तान के पूर्व वित्तमंत्री और पाकिस्तानी स्टेट बैंक के पूर्व गवर्नर शाहिद हफीज करदार के बेटे हमजा करदार से शादी की थी। हमजा करदार पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पहले कप्तान अब्दुल हाफीज करदार का पोता है। जैनब का भाई हुसैन अब्बास मिर्जा फिटनेस ट्रेनर है, वो इसी साल फरवरी 2023 में पहली बार पीएसएल की टीम मुल्तान सुल्तान्स के साथ बतौर फिटनेस एक्सपर्ट जुड़ा है।

दिन- गाँधी जयंती का, नाम- गाँधी दुबे, उम्र 15 साल… देवरिया में 5 का गला काट लिया प्रेम यादव का ‘बदला’

नंदिनी केवल 10 साल की थी। उसका भाई गाँधी दुबे 15 साल का था। गाँधी जयंती के दिन यानी 2 अक्टूबर 2023 को देवरिया के फतेहपुर गाँव में प्रेम यादव का बदला लेने को उतारू भीड़ ने इन दोनों की भी हत्या कर दी थी। दुबे परिवार के कुल 5 लोगों की हत्या की गई थी। 2 अक्टूबर को ही गाँधी दुबे का जन्मदिन भी था।

जिनलोगों की हत्या की गई उनमें गाँधी दुबे के पिता सत्यप्रकाश दुबे, माँ किरण और दो बहनें शामिल हैं। इन्हें प्रेम यादव की कथित हत्या के शक में मार डाला गया। दुबे परिवार के सभी लोगों को पहले बुरी तरह पीटा गया, फिर गोली मारी गई और गला काट दिया गया।

हमले के बाद दुबे परिवार का सबसे छोटा सदस्य अनमोल जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जूझ रहा है। हमलावरों ने उसे मरा समझ कर छोड़ा दिया था। परिवार का दूसरा जिंदा बचा शख्स सत्यप्रकाश दुबे के सबसे बड़े बेटे देवेश हैं। वे हमले के समय एक श्राद्ध कर्म करवाने के लिए घर से बाहर थे। इस वजह से उनकी जान बच गई।

रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में पुलिस ने अब तक 15 को गिरफ्तार किया है। 12 आरोपित अभी भी फरार हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई गई हैं। गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

बताया जाता है कि सत्यप्रकाश दुबे और प्रेम यादव के परिवार के बीच जमीन का विवाद चल रहा था। यादव बाहुल्य गाँव में दुबे परिवार इकलौता ब्राह्मण परिवार था। परिवार पूजा-पाठ कर गुजारा करता था। वहीं प्रेम यादव का समाजवादी पार्टी से कनेक्शन था। वह जिला पंचायत का सदस्य रहा था। वह अपनी दबंग छवि और विवादित जमीनों की खरीद को लेकर भी इलाके में जाना जाता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावर भीड़ ने सत्यप्रकाश दुबे के घर पर लगभग आधे घंटे तक उत्पात मचाया। इस दौरान उन्हें जो भी मिला उसे मारा। हमलावरों के हाथों में बंदूकों के साथ लाठी-डंडे भी थे। हमलावर भीड़ को देख कर अपने परिवार की जान बचाने के लिए सत्यप्रकाश की 52 वर्षीया पत्नी किरण घर के आगे हाथ जोड़ कर खड़ी हो गई थी। लेकिन भीड़ ने उनकी भी हत्या कर दी।

जन्मदिन पर ही हत्या

जिस दिन हत्या की गई उसी दिन गाँधी दुबे का जन्मदिन भी था। उसने देवरिया गए अपने भाई देवेश से कुछ लेकर आने के लिए कहा था। देवेश ने आरोपितों को फाँसी की सजा देने और घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग की है। उन्होंने हमलावरों के तौर पर रामजी यादव, राम भवन यादव के नाम गिनाए हैं।

सपा का नेता था प्रेमचंद यादव

प्रेमचंद यादव समाजवादी पार्टी का नेता था। साल 2015 में उसने सपा के टिकट पर जिला पंचायत का चुनाव जीता था। प्रेमचंद को रुद्रपुर के पूर्व विधायक मुक्तिनाथ यादव का समर्थक माना जाता था। उसके खिलाफ बलवा, गाँव के ही एक अन्य बिरादरी के व्यक्ति को पीटने जैसे केस दर्ज थे। प्रेमचंद ने सत्यप्रकाश के भाई साधु दुबे की 9 बीघा जमीन को खरीदा था। यह जमीन विवादित थी और इसी जमीन पर कब्जेदारी को ले कर उसका सत्यप्रकाश से विवाद चल रहा था। साधु दुबे का अपने ही भाई सत्यप्रकाश से विवाद था। प्रेम यादव की बेटी का दावा है कि साधु गाँव आने पर उनके ही घर में रहता था।

दावा किया जा रहा है कि 7 फरवरी 2023 में सत्यप्रकाश दुबे ने IGRS पोर्टल पर प्रेम यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। इस शिकायत में सत्यप्रकाश ने प्रेम यादव पर सरकारी और अन्य लोगों की जमीनों को जबरन कब्ज़ाने का आरोप लगाया था।

‘पंजाब में AAP से गठबंधन डेथ वारंट पर साइन करना है’: खैरा की गिरफ्तारी के बाद पंजाब की मान सरकार पर भड़की कॉन्ग्रेस, I.N.D.I. गठबंधन में फूट के आसार

आम चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए बनाए गए I.N.D.I. गठबंधन की पंजाब में दुर्गति हो रही है। पंजाब कॉन्ग्रेस के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा है कि 2024 के आम चुनावों में पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ गठबंधन ‘डेथ वारंट’ जैसा होगा।

पंजाब में आम आदमी पार्टी सत्ता में है और कॉन्ग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। दोनों पार्टियाँ केंद्र में एक साथ I.N.D.I. गठबंधन में काम कर रही हैं, लेकिन पंजाब में आपसी लड़ाई चरम पर है। इससे पहले भी दोनों पार्टियों के काई नेता इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि वह गठबंधन नहीं चाहते।

दोनों पार्टियों के बीच की लड़ाई कॉन्ग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा की गिरफ्तारी के बाद चरम पर पहुँच गई है। खैरा को एक पुराने मामले में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। यह मामला ड्रग्स की बरामदगी से जुड़ा हुआ है।

प्रताप सिंह बाजवा ने NEWS18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा है, “साल 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए पंजाब में AAP से गठबंधन कॉन्ग्रेस के डेथ वारंट जैसा होगा और हम कॉन्ग्रेस को ध्वस्त नहीं होने देना चाहते।” बाजवा ने आम आदमी पार्टी की सरकार गिराने की भी बात की है।

उन्होंने कहा, “अगर हमें लोकसभा चुनावों में पंजाब से 10-11 सीटें मिल गईं (पंजाब में कुल 13 लोकसभा सीटें हैं) तो हम भगवंत मान की सरकार गिरा सकते हैं। आम आदमी पार्टी के कई विधायक हमारे सम्पर्क में हैं। हमें जब भी मौक़ा मिलेगा, हम सरकार गिरा देंगे। अगर उनके अधिकांश विधायक उनके साथ ना रह कर हमारे साथ आना चाहते हैं तो मैं क्या कर सकता हूँ? एक विफल शादी को कौन बचा सकता है?”

खैरा वाले मामले पर बाजवा ने कहा कि भगवंत मान ने 2017 में उनको क्यों टिकट दिया, जबकि उनके ऊपर मुकदमा चल रहा था। एक वर्ष बाद अरविन्द केजरीवाल ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष बना दिया। मान ने ही पहले कहा है कि सुखपाल खैरा के ऊपर यह मामला राजनीतिक बदले का है। खैरा को सुप्रीम कोर्ट से भी एक तरह की क्लीन चिट मिल चुकी है।

बाजवा ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता, जिलाध्यक्ष और विधायक कोई भी आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं चाहता है। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पाीर्टी, एक दूसरे के खिलाफ एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। ऐसे में AAP के साथ कॉन्ग्रेस मंच कैसे साझा कर सकती है।

बाजवा ने आम आदमी पार्टी की सरकार को पंजाब का सबसे बड़ा लुटेरा बताया है। उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी ये सरकार चली जाएगी, उतना ही अच्छा होगा। उन्होंने भगवंत मान की सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा।”

इससे पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी के भीतर से भी कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन ना करने के स्वर उठ चुके हैं। आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री अनमोल गगन मान ने कुछ दिन पहले बयान देकर स्पष्ट किया था कि राज्य में कॉन्ग्रेस के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

पंजाब में हो रही कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी की इस लड़ाई ने I.N.D.I. गठबंधन के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा भी कह चुकी हैं कि दिल्ली में लोकसभा चुनावों के लिए कॉन्ग्रेस सभी सात सीटों पर तैयारी करेगी।

पंजाब और दिल्ली के अलावा केरल में भी कॉन्ग्रेस के सामने यही स्थिति है। केरल में कॉन्ग्रेस विपक्ष में है और वामपंथियों के पास सत्ता है। दोनों दल I.N.D.I. गठबंधन में सहयोगी हैं। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी यही स्थितियां बन रही हैं।

नूहं में है इस पाकिस्तानी खिलाड़ी का ससुराल, वर्ल्ड कप में नातिन को गोद में लेने के लिए बेताब हैं लियाकत अली: इंजीनियर बेटी ने तेज़ गेंदबाज हसन अली से किया था निकाह

हरियाणा के नूहं जिले में रिटायर्ड BDO (खंड विकास अधिकारी) 63 वर्षीय लियाकत खान इसी माह 14 अक्टूबर को अहमदाबाद में होने वाले भारत पाकिस्तान-मैच को ले कर बेहद उत्साहित है। इस उत्साह की वजह सिर्फ क्रिकेट ही नहीं है, बल्कि इस दिन उन्हें अपनी नातिन को गोद में लेने का मौका मिलेगा। लियाकत की बेटी सामिया ने पाकिस्तान के तेज गेंदबाज़ हसन अली से साल 2019 में निकाह किया था। इस निकाह के कार्यक्रम दुबई में सम्पन्न हुए थे।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, लियाकत खान की बेटी सामिया दुबई में रह कर एमिरेट्स एयरलाइन में फ्लाइट इंजीनियर के तौर पर काम करती थी। यहीं पर उनकी मुलाकात पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन अली से हुई थी। दोनों में कुछ समय की दोस्ती प्यार में बदल गई और आखिरकार दोनों ने एक दूसरे से निकाह करने का फैसला किया। सामिया ने अपने अब्बा लियाकत से निकाह की अनुमति माँगी। लियाकत ने भी अपनी रजामंदी दे दी। साल 2019 में सामिया और हसन अली का निकाह दुबई में ही हुआ।

लियाकत खान नूहं जिले के गाँव चंदेनी के रहने वाले हैं। बँटवारे के समय उनके परिवार के कुछ लोग पाकिस्तान चले गए थे। भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों के बीच हो रहे क्रिकेट के बीच लियाकत के परिवार को भी आशंका थी कि शायद वो अपनी बेटी और पोती से न मिल पाएँ। 2021 में जब उनकी बेटी गर्भवती थी तब लियाकत की बीवी पाकिस्तान गईं थी। बाद में सामिया ने एक बेटी को जन्म दिया था। अब 2 साल बाद लियाकत और उनका परिवार उम्मीद जता रहा है कि वो अपनी नातिन से अहमदाबाद में मिल पाएँगे।

लियाकत उस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब भारत और पाकिस्तान का मैच दिल्ली में हो और उसमें हसन अली खेल रहे हों। उनको उम्मीद है कि तब उनकी बेटी, नातिन और दामाद उनके गाँव जा कर रहेंगे। क्रिकेट के मुद्दे पर बोलते हुए लियाकत खान ने खुद को विराट कोहली और राहुल द्रविड़ का प्रशंसक बताया। हसन अली से निकाह करना लियाकत अपनी बेटी की इच्छा मानते हैं। उनका मानना है कि उनकी बेटी सही फैसले ले सकती है।

लियाकत ने बताया कि वो हर दिन भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सुधरने की दुआ करते हैं। बताते चलें कि इस सीरीज में पाकिस्तानी खिलाड़ी हसन अली का नाम पहले टीम में शामिल नहीं किया गया था। पिछले माह एशिया कप के दौरान नसीम शाह को चोट लगने के चलते अंतिम समय में हसन अली को मौका दिया गया है।

चीन के ‘गुलाम’ पत्रकारों पर UAPA, उर्मिलेश और प्रांजय गुहा को उठाकर ले जाती दिखी दिल्ली पुलिस: अभिसार शर्मा की गिरफ्तारी के भी सोशल मीडिया में दावे

चीन के पैसे पर प्रोपेगेंडा करने वाले पोर्टल न्यूज क्लिक (NewsClick) के पत्रकारों पर दिल्ली पुलिस ने UAPA के तहत मामला दर्ज किया है। 3 अक्टूबर 2023 की सुबह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इन पत्रकारों से जुड़े दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में 30 ठिकानों पर छापेमारी की।

इनमें से कई पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की भी चर्चा है। उर्मिलेश और प्रांजय गुहा ठाकुरता को लेकर जा रही दिल्ली पुलिस के वीडियो सामने आए हैं। उर्मिलेश के वकील गौरव यादव ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया है, “उर्मिलेश की गिरफ्तारी के बारे में मुझे उनकी पत्नी ने बताया है। इसके अलावा फिलहाल मेरे पास और जानकारी नहीं है।”

सोशल मीडिया में न्यूज एंकर से यूट्यूबर बने अभिसार शर्मा को गिरफ्तार करने की भी चर्चा है। लेकिन एएनआई ने दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से बताया है कि फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। छापेमारी को लेकर दिल्ली पुलिस की तरफ से आधिकारिक तौर पर विवरण साझा नहीं किया गया है। लेकिन अभिसार शर्मा ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट कर बताया है, “दिल्ली पुलिस मेरे घर पहुँची। मेरा लैपटॉप और फोन ले लिया।”

सामने आ रही जानकारियों के अनुसार न्यूज क्लिक से जुड़े संजय राजौरा, भाषा सिंह, उर्मिलेश, प्रबीर पुरकायस्थ, अनिंदो चकवर्ती और सोहेल हाशमी के ठिकानों पर भी रेड पड़ी है। पत्रकार नेहा दीक्षित ने इनके नाम लेते हुए एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि इनके फोन और लैपटॉप पुलिस ने अपने कब्जे में लिया है। कुछ को थाने भी ले जाया गया है।

अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में अगस्त 2023 में प्रकाशित एक लेख में न्यूजक्लिक और चीन के बीच संबंधों के बारे में बताया था। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में भी यह मामला उठाया था। इस दौरान उन्होंने न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि न्यूज क्लिक को विदेशी फंडिंग से 38 करोड़ रुपए मिले थे, जिसे उसने कुछ पत्रकारों में बाँट दिया था।

अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस की जाँच में न्यूज क्लिक के चीफ एडिटर प्रबीर पुरकायस्थ के दिल्ली वाले फ्लैट को अटैच कर दिया था। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, “यह बहुत कम लोगों को पता है कि गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में नेविल रॉय सिंघम चीन के सरकारी मीडिया के साथ मिलकर काम करता है और चीन के प्रोपेगेंडा को दुनिया भर में फैलाने के लिए फंडिंग कर रहा है।”

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 9 फरवरी 2021 को न्यूजक्लिक के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ के घर पर छापा मारा था। ईडी के सूत्रों के अनुसार, न्यूज़क्लिक को एक अमेरिकी कंपनी से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के तहत 10 करोड़ रुपए मिले थे।