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झील किनारे गोमाँस भरकर समोसे बेच रहा था अहमद, गुजरात पुलिस ने दबोचा: 20 दिन में दूसरा मामला, पहले इस्माइल हुआ था गिरफ्तार

पिछले कुछ समय से दक्षिण गुजरात के इलाकों में गोहत्या और बीफ बेचने की कई शिकायतें सामने आ रही हैं। हाल ही में मंगरोल से हत्या के वांछित आरोपित इस्माइल के पास से बड़ी मात्रा में गोमाँस से भरे समोसे जब्त किए गए थे। अब ताजा मामले में नवसारी के दाभेल गाँव से भी यह घटना सामने आई है जहाँ एक लॉरी में गोमाँस से भरे समोसे बेचे जाने पर एक शख्स गिरफ्तार हुआ।

खबरों के मुताबिक, नवसारी के जलालपुर तहसील के दाभेल गाँव में मरोली पुलिस और गौ रक्षकों को बीफ से बने पकवानों की बिक्री की सूचना मिली थी। इस कारण मरोली पुलिस के जवानों ने दाभेल गाँव में झील के किनारे ए-वन चिकन बिरयानी नाम के ट्रक में जाकर मसालों से मिले मीट का सैंपल लिया तो वह बीफ निकला। पुलिस ने तुरंत एक आरोपित अहमद मुहम्मद सुज को गिरफ्तार कर लिया और दूसरे को वांछित घोषित कर दिया। यह भी पता चला कि आरोपित बीफ से भरे इन समोसे को 4 साल से बेच रहे थे।

गौरतलब है कि इससे पहले आरोपित अहमद मोहम्मद सूज पुलिस को अपनी लॉरी की ओर आते देख समझ जाता था कि छापेमारी होने वाली है। इसलिए वह तुरंत लॉरी में रखे समोसों को झील में फेंक देता था। उसने यह हरकत एक से अधिक बार की थी। लेकिन इस बार पुलिस सतर्क थी और इससे पहले कि वह गोमाँस से भरे समोसे झील में फेंक पाता, उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस की कार्रवाई में डाभेल गाँव के एक तालाब के किनारे पकड़ा गया। छानबीन में पता चला कि 45 वर्षीय आरोपित अहमद मोहम्मद सूज काफी समय से अपनी लॉरी में गोमाँस के व्यंजन बनाकर बेच रहा था। मारोली पुलिस ने उसे पहले भी गिरफ्तार किया था लेकिन बिना मास टेस्टिंग के ही उसे छोड़ दिया गया था।

हालाँकि अब पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से कच्चे बीप के सेम्पल को जाँच के लिए भेजा तो उसमें बीफ मिला होना बताया गया। इसके आधार पर आरोपित की गिरफ्तारी के साथ ही एक और आरोपी चाचा अजीम भाई को वांछित घोषित किया गया है।

गौरतलब है कि दक्षिण गुजरात में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पिछले महीने वांछित आरोपित इस्माइल को इसी तरह के अपराध में हत्या के आरोप में सूरत के मंगरोल से गिरफ्तार किया गया था। गुप्त सूचना के आधार पर मंगरोल पुलिस ने हत्या के वांछित आरोपित इस्माइल यूसुफ को मोसली चौराहे के पास एक रिक्शे से समोसे के साथ पकड़ा था। पुलिस पर संदेह जताते हुए पकड़े गए समोसे को एफएसएल भेजा गया। बाद में इस समोसे में गोमाँस होने की सूचना मिलने पर पुलिस ने मुंबई पशु संरक्षण अधिनियम 1954 की धारा 5, 6, 8 और गुजरात पशु संरक्षण संशोधन अधिनियम की धारा 6 (ए), (बी) के तहत कार्रवाई की।

ठेकेदारों के राज में ही OBC के हक पर डाका: बिहार-बंगाल-पंजाब-राजस्थान में नहीं मिल रहा कोटे का पूरा फायदा, NCBC के सर्वे से खुलासा

बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब ऐसे प्रदेश हैं, जहाँ बीजेपी की सरकार नहीं है। इन राज्यों की सत्ता पर काबिज लोग अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के स्वयंभू ठेकेदार हैं। लेकिन इन राज्यों में ओबीसी वर्ग को उनके कोटे का पूरा फायदा तक नहीं मिल रहा है। यह खुलासा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के सर्वे से हुआ है।

आयोग ने अपनी जाँच में पाया है कि देश के चार राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, पंजाब और राजस्थान में OBC के लिए बनाए गए आरक्षण नियमों का खुले तौर पर उल्लंघन हुआ है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस साल फरवरी से लेकर मई के बीच देश के कई राज्यों का दौरा किया। इस दौरान हुए सर्वे के अनुसार आरक्षण नीतियों में कई तरह की गड़बड़ी देखने को मिली है। NCBC के इस सर्वे से पता चला है कि अन्य पिछड़ा वर्ग की एक बड़ी आबादी को सरकारी नौकरियों और स्कूलों, कॉलेजों में मिलने वाले आरक्षण से वंचित किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी और रोहिंग्या को लाभ

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणूमल कॉन्ग्रेस (TMC) की सरकार है। एनसीबीसी के दौरे में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को भी ओबीसी की सूची में शामिल किया गया है। आयोग ने यह भी पाया कि है बंगाल सरकार ने कुल 179 जातियों को ओबीसी का दर्जा दिया है। इसमें से 118 जातियाँ मुस्लिम हैं।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने कहा है कि आयोग के दौरे में यह सामने आया है कि पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर हिंदुओं ने धर्मांतरण कर इस्लाम कबूल किया है। यह जानकारी बंगाल सरकार की संस्था कल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट से मिली। हालाँकि जब इस बारे में बंगाल सरकार से लिखित स्पष्टीकरण माँगा गया तो सरकार ने कहा कि कितने लोगों ने धर्मांतरण किया है, इसके स्पष्ट आँकड़े नहीं हैं। हंसराज अहीर ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि पश्चिम बंगाल में ओबीसी के दायरे से बाहर लोगों को भी इस सूची में शामिल किया गया है।

राजस्थान और पंजाब में लागू है गलत आरक्षण नीति

NCBC ने अपने दौरे में यह भी पाया है कि कॉन्ग्रेस की सत्ता वाले राज्य राजस्थान में आरक्षण नीति को सही ढंग से लागू नहीं किया गया था। आयोग ने कहा है कि राजस्थान के सात जिलों में आधिकारिक रूप से एक भी व्यक्ति अन्य पिछड़ा वर्ग से नहीं था। हालाँकि सच्चाई यह है कि ओबीसी आबादी का एक बड़ा वर्ग इन जिलों में रह रहा है।

हंसराज अहीर ने कहा है, “राजस्थान के 7 जिलों में कोई भी जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया गया था। यहाँ गलत तरीके से आरक्षण नीति लागू की गई है। राज्य सरकार ओबीसी प्रमाण-पत्र देने के लिए पूरे परिवार की आय का प्रमाण-पत्र माँग रही थी। इसके चलते कई योग्य लोग गैर-क्रीमी लेयर प्रमाण-पत्र के अयोग्य ठहरा दिए गए।”

एनसीबीसी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को ओबीसी आरक्षण को 12% से बढ़ाकर 25% करने का भी निर्देश दिया है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में कुल 37% आरक्षण लागू है। इसमें अनुसूचित जाति के लिए 25% और ओबीसी के लिए 12% निर्धारित है। चूँकि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% है। ऐसे में पिछड़ा वर्ग आयोग ने पंजाब सरकार को ओबीसी कोटा में 13% की अतिरिक्त वृद्धि करने का निर्देश दिया है।

बिहार ने ओबीसी आरक्षण के नियमों का किया उल्लंघन

इसी तरह, जेडीयू-आरजेडी के गठबंधन वाली नीतीश कुमार सरकार ने बिहार में आरक्षण लागू करने में कई तरह की विसंगतियाँ देखने को मिलीं। NCBC ने पाया है कि बिहार सरकार कुल आय की गणना के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की कृषि आय को भी शामिल कर रही थी। इस प्रकार, उन्हें गैर क्रीमी लेयर ओबीसी प्रमाण-पत्र दे दिए गए थे। इसके अलावा बिहार में कुर्मी जाति के व्यक्तियों को भी गलत जाति प्रमाण-पत्र दिए जा रहे थे। पिछड़ा वर्ग आयोग ने इसमें संशोधन करने का निर्देश दिया है। बिहार में यह नियम 30 वर्षों (1993-2003) से लागू था। बता दें कि इस दौरान बिहार की सत्ता लालू यादव, राबड़ी देवी और नीतीश कुमार के हाथों में रही है।

‘बन जाइए लव जिहाद को प्रमोट करने वाली गैंग का मेंबर’: नसीरुद्दीन शाह को मुकेश खन्ना ने धोया, कहा- कट्टर हो गया है अच्छा एक्टर

पूर्व एक्टर मुकेश खन्ना ने नसीरुद्दीन शाह को उनकी कट्टरता देखने के बाद लताड़ लगाई है। शाह ने कुछ दिन पहले कहा था कि मुस्लिमों से नफरत करना आजकल फैशन हो गया। पढ़े-लिखे लोग भी मुस्लिमों से नफरत करते हैं। उनकी इसी बयान पर मुकेश खन्ना ने उन्हें लव जिहाद की तमाम घटनाएँ बताईं और तमाम घटनाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर देश में मुस्लिम कैसे खतरे हैं।

मुकेश खन्ना ने अपने यूट्यूब चैनल ‘भीष्म इंटरनेशनल’ पर नसीरुद्दीन की उजागर होती कट्टरता पर बात की। वह बोले कि FTII के समय नसीरुद्दीन उनके क्लासमेट थे। लेकिन आज वो उन्हें देख और सुनकर काफी हैरान होते हैं। उन्हें लगता था कि कलाकार की कोई जाति-मजहब नहीं होता क्योंकि वो हर तरह के रोल निभाता है। लेकिन आज जब वो नसीरुद्दीन शाह को एक बेहतरीन एक्टर से कट्टर बनते हुए देखते हैं तो उन्हें हैरानी होती है।

उन्होंने इस वीडियो को साझा करते हुए अपने इंस्टा पर लिखा, “एक बेहतरीन एक्टर इतनी घटिया और बचकानी बात कह सकता है ये मुझे नसीरुद्दीन शाह को देख कर पता चला।” उन्होंने नसीरुद्दीन पर निशाना साधते हुए लिखा, “कहते हैं हिंदुस्तान में मुसलिम सुरक्षित नहीं! साक्षी, श्रद्धा, अंकिता कांड, कानपुर हनुमान मंदिर में तोड़ फोड़ के अलावा दिन दहाड़े एक दर्ज़ी की गर्दन काटने की वीभत्स घटना के बाद भी आप कहने का दुस्सहास रखते हैं कि हमारे देश में मुस्लिम सुरक्षित नहीं हैं।”

एक्टर नसीरुद्दीन को फटकारते हुए कहते हैं, “अरे कोई सुरक्षित नहीं हैं तो वो 100 करोड़ हिन्दू ही हैं। आप कट्टर बन चुके हैं जो एक एक्टर को शोभा नहीं देता। ऐसा है तो शामिल हो जाइए लव जिहाद की टीम को प्रमोट करने वाली गैंग में। विचार आपने करना हैं वरना लोगों ने आपकी फ़िल्मे देखना बंद कर देना है। भगवान आपको सद्बुद्धि दे।”

बता दें कि पिछले कुछ सालों से नसीरुद्दीन शाह अपने कट्टर बयानों के कारण चर्चा में आते रहते हैं। ताज सीरीज में नजर आने वाले नसीरुद्दीन ने हाल में कहा था, “ऐसे कंटेंट्स परोसे जा रहे हैं जो विशुद्ध और खुला प्रोपेगंडा है, जो इस समय के बारे में बहुत कुछ बताता है। मुस्लिमों से घृणा करना आजकल फैशन बन गया है, यहाँ तक कि शिक्षित लोगों के बीच भी। ये चीजें सत्ताधारी पार्टी ने देश के लोगों की नसों में घुसा दी है। हम सेक्युलरिज़्म और लोकतंत्र की बातें करते हैं, लेकिन हर चीज में धर्म को घुसाने की क्या ज़रूरत है? चुनाव आयोग चुपचाप ये सब देख रहा है।”

गोलू अंसारी ने खुद को हिंदू बता दलित लड़की को फँसाया: शादी के बाद इस्लाम कबूलने का बनाया दबाव, लड़की ने की आत्महत्या

झारखंड की राजधानी राँची में लव जिहाद का शिकार हुई लगभग 17 साल की लड़की ने आत्महत्या कर ली है। गोलू अंसारी नाम के युवक ने खुद को हिंदू बताते हुए लड़की को प्रेम जाल में फँसाया था। इसके बाद लड़की से शादी कर उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा था। गोलू अंसारी के दबाव के चलते लड़की ने आत्महत्या कर ली। दोनों का एक बेटा भी है।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने ट्विटर पर यह मुद्दा उठाते हुए आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। इसके बाद यह मामला प्रकाश में आया। मरांडी ने ट्विटर पर आरोपित गोलू अंसारी और मृतक लड़की का वीडियो तथा पीड़ित पिता द्वारा पुलिस को लिखा गया पत्र शेयर किया है।

भाजपा नेता द्वारा शेयर किए गए पत्र के अनुसार, पीड़िता का नाम पूजा है और वह दलित वर्ग से है। आरोपित गोलू अंसारी लड़की का लगातार शोषण करता था। इस बीच उसने मंदिर जाकर लड़की से शादी करने का दिखावा भी किया। बाद में उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा। शादी के बाद दोनों का एक बेटा भी है।

मृतक लड़की गोलू से अपने घर लेकर चलने और साथ रहने की बात लगातार कहती थी, लेकिन गोलू उसे साथ रखने को तैयार नहीं था। जब लड़की को गोलू अंसारी की सच्चाई का पता चला तो वह उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। हालाँकि, लड़की धर्मांतरण के लिए तैयार नहीं हुई। आखिरकार गोलू अंसारी के धोखे और दबाव के कारण लड़की ने 31 मई 2023 की रात आत्महत्या कर ली।

बता दें कि बाबू लाल मरांडी ने गुरुवार (8 जून 2023) को ट्विटर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड के डीजीपी को टैग करते हुए आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “लव जिहाद के लिए सबसे सेफ जोन बन चुके झारखंड में एक और नाबालिग बेटी षड्यंत्र का शिकार बन गई। खलारी थाना की एक दलित नाबालिग पूजा को नाम बदलकर गोलू अंसारी ने पहले अपने प्रेम जाल में फँसाया, धोखे में रखकर शादी की, इसी बीच लड़की माँ बनी।”

उन्होंने आगे लिखा, “गोलू लगातार पूजा का शोषण करता रहा, अपने घर ले जाने के नाम पर आनाकानी करता रहा और धर्मांतरण का दबाव बनाता रहा। पिछले कई दिनों से पूजा काफी तनाव में थी। पूजा धर्मांतरण और सामाजिक लोकलाज का दबाव नहीं झेल पाई और खुद की जिंदगी समाप्त कर ली। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, मैं बार बार आपसे कह रहा हूँ, झारखंड में लव जिहाद के जड़ें काफी मजबूत हो चुकी है। संथाल से लेकर राज्य के सभी हिस्सों में ऐसे षड्यंत्रकारी एक्टिव हैं, जो आदिवासी, दलित नाबालिगों को शिकार बना रहे हैं। 

मरांडी ने आगे लिखा, “ऐसे तत्वों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंडिंग हो रही है। ये षड्यंत्रकारी झारखंड की अस्मिता और सामाजिक ताने-बाने को समाप्त करने को तुले हैं। आप के ऊपर राज्य की जिम्मेवारी है, अपना कर्तव्य निभाइए। ऐसे तत्वों को चिह्नित करते हुए इनका पालन/पोषण करने वालों के ऊपर कड़ी कार्रवाई करिए।”

फिलहाल, इस मामले में आरोपित पुलिस की गिरफ्त में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। 

हज यात्रा मुस्लिमों के लिए छुट्टी नहीं, इसे संविधान का प्राप्त है संरक्षण: दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘मजहबी अधिकार’ बता केंद्र के फैसले पर लगाई रोक

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार (7 जून 2023) को कहा है कि हज यात्रा और उससे जुड़े समारोह ‘धार्मिक अभ्यास’ के दायरे में आते हैं। ये भारत के संविधान द्वारा संरक्षित है। न्यायालय ने कुछ हज समूह आयोजकों (HGO) के पंजीकरण को निलंबित करने और उनके हज कोटे को स्थगित रखने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने कहा, “हज तीर्थयात्रा और उसमें शामिल समारोह धार्मिक प्रथा के दायरे में आते हैं, जो भारत के संविधान द्वारा संरक्षित है। धार्मिक स्वतंत्रता आधुनिक भारतीय गणराज्य के संस्थापकों की दृष्टि के अनुरूप संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत गारंटी और प्रतिष्ठापित सबसे पोषित अधिकारों में से एक है।”

न्यायालय ने कहा कि भारत का संविधान का सभी नागरिकों को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और यह स्वतंत्रता सबसे पोषित अधिकारों में से एक है। इससे उन्हें अलग नहीं किया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने यह फैसला HGO द्वारा केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दी। केंद्र ने पिछले महीने हज समूहों के पंजीकरण और कोटा को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने कारण बताओ नोटिस भी दिया था। HGO ने यह भी कहा था कि केंद्र का यह फैसला मनमाना है।

हालाँकि, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के वकील ने तर्क दिया कि मंत्रालय के अधिकारियों की एक टीम के याचिकाकर्ता एचजीओ के कार्यालय परिसर में दौरे किया था। उस दौरान यह बात सामने आई थी कि एचजीओ के संबंधित पंजीकरण को उनके जानबूझकर गलतबयानी और गलत सूचना दी गई थी। इसके आधार पर पंजीकरण स्थगित रखने का आदेश दिया गया था।

इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि सरकार गंभीर दंडात्मक कार्रवाई पर विचार कर रही है, जिसमें एचजीओ को काली सूची में डालना और पंजीकरण रद्द करना शामिल होगा। कोर्ट को यह भी बताया गया कि सरकार इन गैर-अनुपालन वाले एचजीओ के हाथों में तीर्थयात्रियों के भाग्य को सौंपने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है।

इसके अलावा, इन एचजीओ को कानून के गंभीर उल्लंघनों के खुलासे के बाद तीर्थयात्रियों को सऊदी अरब ले जाने की अनुमति देना द्विपक्षीय समझौते की भावना में नहीं होगा। इसके तहत सरकार को यह सुनिश्चित करने का दायित्व है कि केवल कानून का अनुपालन करने वाले और सत्यापित एचजीओ ही पंजीकृत होंगे।

मामले पर विचार करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची कि पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करने के साथ-साथ एचजीओ को आवंटित कोटा पर प्रतिबंध और शर्तें लगाई जा सकती हैं, लेकिन यह उन तीर्थयात्रियों के खिलाफ नहीं होनी चाहिए, जो नेक नीयत से तीर्थ यात्रा करने के लिए उनके साथ पंजीकृत हैं।

न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि एक विकल्प की तलाश की जानी चाहिए और इसे लागू किया जाना चाहिए, ताकि कानून के काम करने के साथ ही हज जाने वाले यात्रियों के लिए लिए बाधा न बने। न्यायालय ने कहा कि हज यात्रा केवल एक छुट्टी नहीं है, बल्कि यह उनके धर्म और आस्था का पालन करने का एक माध्यम है।

कोर्ट ने कहा कि न्यायालय तीर्थयात्रियों के अधिकार का रक्षक होने के नाते इस संबंध में आवश्यक कदम उठाएगा। इसलिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता एचजीओ के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और हज कोटे को स्थगित रखने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगा दी।

‘बच्ची को समझा, इस्लाम कबूल कर ले’: अब्दुल मंसूरी करता था टॉर्चर, फंदे से झूल गई नेशनल प्लेयर; हिंदू बनकर मिला था लव जिहादी

मध्य प्रदेश के जबलपुर में बेसबॉल की नेशनल प्लेयर संजना बरकड़े ने धर्मांतरण की धमकियों के चलते 5 जून 2023 को फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। संजना की माँ ने बताया कि अब्दुल मंसूरी उर्फ राजन खान उनकी बेटी के ऊपर लगातार इस्लाम कबूलने का दबाव बना रहा था। पिता ने कहा कि मजहब छिपाकर अब्दुल ने संजना से दोस्ती की थी लेकिन जब उनकी बेटी को इस सच का पता चला तो वो दोस्ती तोड़कर अलग हो गई। अब संजीवनी नगर थाना की पुलिस ने इस मामले में आरोपित को गिरफ्तार किया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, छानबीन में सामने आया कि अब्दुल मंसूरी और संजना के बीच पिछले एक साल से दोस्ती थी। कुछ दिन पहले एक इंस्टा स्टोरी के ऊपर दोनों के बीच अनबन हुई थी। वहीं लड़की के दोस्तों ने कहा संजना लव जिहाद की खबरें सुनकर काफी घबराई हुई थी। उसने अब्दुल से रिश्ता खत्म कर दिया था लेकिन वह उसका पीछा नहीं छोड़ रहा था और उसे धमकी देने में लगा था।

संजना की माँ बताती हैं आरोपित ने कुछ दिन पहले उनसे भी फोन पर बात करके धमकी दी थी। अब्दुल ने कहा था- “तुम लड़की की माँ हो? अच्छा हुआ तुमसे बात हो गई। तुमसे ही बात करना चाहता था। तुम अपनी बच्ची को समझा दो। हमारा मजहब कबूल करे। मुझे उससे शादी करनी है। अगर तुम हमारे मजहब को नहीं कबूलते तो हमें पता चल चुका है कि तुम्हारा घर कहाँ है। हम तुमको मार डालेंगे। अगर कबूल कर लोगे तब कुछ नहीं होगा।”

संजना की माँ ने इस कॉल के बाद अपनी बेटी से पूछा- “क्या तुम जानती हो इस लड़के को।” इस पर संजना ने न कहकर फोन बंद कर दिया। वहीं पिता ने कहा कि उन्हें 3 महीने पहले पता चला था कि जिस राजन से संजना बात करती है वो मुस्लिम है। पिता के अनुसार बेटी को जब से सच पता चला था वो अब्दुल से बात नहीं करती थी। इसी कारण अब्दुल भड़का हुआ था और उसे टॉर्चर करता था। उसने उसके डॉक्यूमेंट्स चुरा लिए थे। इतना ही संजना ने बेसबॉल कॉम्पिटिशन में जो मेडल जीते थे वो भी अब्दुल ने चुरा लिए थे और जब संजना ने उन्हें माँगा तो बोला कि इस्लाम कबूल लो।

पिता ने बताया कि उनकी शिकायत के बाद आरोपित पकड़ा जा चुका है। इससे उन्हें थोड़ी राहत हुई है। लेकिन उन्हें न्याय तभी मिलेगा जब अब्दुल को सजा दी जाएगी। इस मामले में पुलिस ने बताया कि अब्दुल ने पूछताछ में बताया है कि उसकी संजना से दोस्ती एक साल पुरानी थी। संजना से मिलने के लिए वो तीन बार जबलपुर भी आया था। मगर संजना उससे दूर होने लगी थी। वो लगातार संजना के फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकियाँ देकर उसे उस पर रिलेशनशिप जारी रखने का दबाव बना रहा था और बात न मानने पर धमकी देता था। संजना के आत्महत्या के बाद पुलिस उससे दोनों के बीच हुई लड़ाई की वजह का पता लगा रही है।

पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर हिंदुओं का धर्मांतरण, OBC लिस्ट में मुस्लिम जातियों का दबदबा, बांग्लादेशी-रोहिंग्या भी उठा रहे फायदा: NCBC अध्यक्ष का खुलासा

पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की स्थिति को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक राज्य में बड़े पैमाने पर हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ है। ओबीसी की लिस्ट में ज्यादातर मुस्लिम जातियों को शामिल किया गया है। अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को मिलने वाले फायदों का लाभ बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम भी उठा रहे हैं।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के अध्यक्ष हंसराज अहीर (Hansraj Ahir) ने गुरुवार (8 जून 2023) को ये खुलासे किए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर हिंदुओं ने इस्लाम कबूल किया है। बांग्लादेश से आए मुस्लिमों को भी ओबीसी की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि आयोग की टीम ने इसी साल 25 फरवरी को राज्य का आधिकारिक दौरा किया था। जाँच के दौरान पश्चिम बंगाल की सरकारी संस्था कल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट से हिंदुओं के बड़े पैमाने पर इस्लाम कबूलने की जानकारी मिली।

अहीर ने कहा, “ओबीसी सूची में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जो वास्तव में ओबीसी नहीं हैं। आयोग को ऐसी शिकायतें मिली हैं और ऐसा देखा भी गया है कि कई लोग ऐसे हैं जो बांग्लादेश से आए हुए हैं। म्यांमार से आए हुए रोहिंग्या को भी इस सूची में शामिल किया गया है।” नीचे लगे वीडियो में आप 17 मिनट के बाद से अहीर के इस बयान को सुन सकते हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में ओबीसी की लिस्ट में हिंदुओं से अधिक मुस्लिमों की जाति हैं। यह तब है राज्य में स्पष्ट रूप से हिंदुओं की आबादी अधिक है। आयोग को इस सूची को लेकर शिकायतें मिली हैं। एनसीबीसी के अनुसार राज्य में ओबीसी लिस्ट में 179 जातियों को रखा गया है। इनमें 118 मुस्लिम और 61 हिंदू जाति हैं।

अहीर ने बताया कि पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार की ओबीसी सूची में स्पष्ट रूप से खिलवाड़ किया गया है। सूची की ए कैटेगरी में करीब 90% मुस्लिम हैं। इसी तरह बी कैटेगरी में भी आधे से अधिक मुस्लिम हैं। इसके बारे में पूछे जाने पर राज्य सरकार का कहना है कि इनमें से ज्यादातर पहले हिंदू ही थे।

अहीर ने यह भी बताया कि बंगाल सरकार ने कुरैशी मुस्लिम जाति को ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल करने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को एक प्रस्ताव भेजा है। लेकिन पश्चिम सरकार सरकार खुद इनको अलग जाति नहीं मानती। बंगाल की ओबीसी लिस्ट में कुरैशी मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है।

लव और लैंड जिहाद से त्रस्त उत्तराखंड के हिंदू सड़कों पर उतरे: स्थानीय लोग बोले- लगातार बढ़ रही मुस्लिमों की जनसंख्या और कारोबार पर दबदबा, ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट

मीडिया और सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर उत्तराखंड का उत्तरकाशी क्षेत्र इस समय चर्चा के केंद्र में है। पुरोला क्षेत्र से शुक्रवार (26 मई 2023) को लव जिहाद के आरोपित उबैद खान को गिरफ्तार किया गया है। कहा जा रहा है कि लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं से हिन्दू समाज नाराज हैं। कुछ मीडिया संस्थानों ने पुरोला से मुस्लिमों के पलायन करने और कुछ ने हिन्दू संगठनों द्वारा उन्हें धमकाने जैसी बातें अपनी रिपोर्ट में कही हैं। आखिर सच क्या है?

ऑपइंडिया ने जब उत्तरकाशी और उत्तराखण्ड के हिन्दू संगठन से जुड़े कुछ लोगों से इस संबंध में बात की तो मामला उल्टा निकला। हिन्दू संगठनों ने उत्तराखंड के हिन्दुओं को लव जिहाद, लैंड जिहाद, डेमोग्राफी बदलाव, व्यापार जिहाद और हत्या जैसी घटनाओं से खुद को पीड़ित बताया।

मीडिया के कई संस्थानों ने यह साबित करने का प्रयास किया है कि पुरोला के हिन्दू संगठनों ने मुस्लिमों को बाजार छोड़ कर जाने का अल्टीमेटम दिया है। इस बावत वायरल हो रहे एक पोस्टर का भी खासतौर पर जिक्र किया जा रहा है।

पोस्टर में ‘जिहादियों’ को सम्बोधित करते हुए 15 जून 2023 तक अपनी दुकानें खाली करने के लिए कहा गया है। देवभूमि रक्षा अभियान नाम से जारी इस पोस्टर में 15 जून को महापंचायत का भी एलान हुआ है। हालाँकि, पोस्टर छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस का जिक्र इसमें नहीं है।

‘द वायर’ की पत्रकार अरफ़ा खानम ने इस मामले में हिन्दू संगठनों के प्रदर्शन के वीडियो को काटकर दिखाया और मुस्लिमों को भयभीत बताया। ऑपइंडिया ने जब इन दावों की पड़ताल की तो असली भय देवभूमि के हिन्दुओं में देखने को मिला। पुलिस ने भी मुस्लिमों में किसी भी प्रकार के डर की बात से इनकार किया।

विक्टिम कार्ड खेलने वालों ने लगाए पोस्टर

ऑपइंडिया ने देवभूमि रक्षा अभियान संगठन के संस्थापक स्वामी दर्शन भारती से बात की। उन्होंने बताया कि घटना के दिन वो पुरोला में मौजूद थे, लेकिन न तो उन्होंने इन पोस्टरों को लगाया और न ही उनकी जानकारी में किसी ने ऐसा किया। स्वामी दर्शन भारती ने पोस्टरों को कुछ लोगों द्वारा विक्टिम कार्ड खेलने की साजिश करार दिया।

उत्तराखंड पुलिस ने भी पोस्टर लगाने के मामले में अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है। उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक IPS अपर्ण यदुवंशी के मुताबिक, जल्द ही आरोपित की पहचान की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि जिले में कानून और शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम है।

रोटी, बेटी और चोटी तीनों खतरे में

स्वामी दर्शन भारती ने आगे बताया कि हिन्दू धर्म के उद्गम स्थल देवभूमि उत्तराखंड पर जिहादियों की मजहबी नजर पड़ चुकी है। दर्शन भारती ने कहा, “उत्तराखंड में काफी पहले कुछ मुस्लिम रोटी माँगने आए थे। अब वो हमारी बेटियाँ भगा रहे हैं। आने वाले समय में हमारी चोटियाँ खतरे में हैं।”

चोटियों का मतलब स्वामी भारती ने सनातन संस्कृति से संबंधित होना बताया। दर्शन भारती का दावा है कि लव जिहाद के मामले में फिलहाल उत्तराखंड देश में सबसे ज्यादा टारगेट पर है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लड़कों द्वारा अपहृत हिंदू लड़कियों को मानव तस्करी में प्रयोग किया जाता है।

मार डाला गया था हिन्दू छात्र

पुरोला के एक अन्य स्थानीय निवासी अनिल असवाल ने ऑपइंडिया से बात की। अनिल ने बताया कि लगभग 3 साल पहले पुरोला से करीब 40 किलोमीटर दूर हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे मोरी इलाके में इंटर कॉलेज के अंदर मुस्लिम छात्र ने अपने हिंदू सहपाठी को मार डाला था।

हत्या की यह घटना दोनों छात्रों के बीच मामूली कहासुनी के बाद हुई थी। दावा है कि इस घटना से स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा था, लेकिन तब वे सब खामोश रहे थे। हमें बताया गया कि मोरी इलाके के कई गाँवों में मुस्लिम रहते हैं।

आए दिन दुकानों और मकानों में होती हैं चोरियाँ

अनिल असवाल के मुताबिक, बाहर से आकर बसे मुस्लिमों की वजह से पुरोला और आसपास के क्षेत्र में आए दिन चोरी की घटनाएँ होती रहती हैं। इन घटनाओं में कभी शटर तोड़े जाने, गाड़ियों में तोड़फोड़ तो कभी साइकिल चोरी होने जैसी घटनाएँ शामिल हैं।

ऑपइंडिया को बताया गया कि पुलिस इन मामलों को अपनी तरफ से रफा-दफा करने का प्रयास करती रहती है। अनिल ने आगे बताया कि स्थानीय लोगों में पनपे गुस्से की एक बड़ी वजह ये घटनाएँ भी हैं, जिनसे स्थानीय लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है।

नाबालिग लड़की को रखा था 5 दिनों तक बंधक

पुरोला की घटना से खुद को पूरी तरह से परिचित बताते हुए देहरादून निवासी राकेश उत्तराखंडी ने पिछले साल की एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि तब पुरोला में 15 साल की एक नाबालिग हिन्दू लड़की को 5 दिनों तक बंधक बनाए रखा गया था।

राकेश का दावा है कि इस घटना में सभी आरोपित मुस्लिम समुदाय के थे, जो कबाड़ का काम किया किया करते थे। लड़की को भूखा-प्यासा रखा जाता था। हालाँकि, लड़की को बचा लिया गया था और आरोपितों को जेल भेज दिया गया था, लेकिन राकेश ने इस सजा को नाकाफी बताया।

अनिल असवाल के मुताबिक, पुरोला के पास शरणौर गाँव से मई 2023 में एक मुस्लिम युवक हिन्दू समुदाय की 2 बच्चों की माँ को भगाकर ले गया था। उन्होंने दावा किया है कि इस महिला को अब तक बरामद नहीं किया जा सका है।

पुरोला के रहने वाले संजू ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में यह स्वीकार किया है कि वहाँ लव जिहाद की वजह से हिन्दू समाज में भय का माहौल है। उन्होंने हिन्दुओं के आक्रोश की वजह बहन-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ को बताया।

साल भर से हो रहा था अनाथ नाबालिग पीड़िता से रेप

जिस नाबालिग लड़की से हुए लव जिहाद पर पुरोला सहित पूरे उत्तराखंड में हंगामा मचा हुआ है, उसे स्थानीय निवासी अनिल असवाल ने अनाथ बताया। बकौल अनिल, बच्ची लगभग 40 किलोमीटर दूर मोरी विकास खंड की रहने वाली थी, जो माता-पिता की मौत के बाद पुरोला में अपने मामा के साथ रहती थी।

अनिल असवाल ने दावा किया कि आरोपित उबैद खान नाबालिग पीड़िता से लगभग एक साल से रेप कर रहा था। इस दौरान आरोपित ने नाबालिग लड़की के अश्लील फोटो और वीडियो भी बनाए थे।

घटना के दिन का जिक्र करते हुए अनिल ने बताया कि 26 मई शुक्रवार के दिन वह लड़की को लेकर बाजार से पैदल निकला और पेट्रोल पम्प के पास दूर कहीं ले जाने के लिए वाहन में बिठाने ही वाला था कि एक स्थानीय युवक ने पीड़िता को पहचान लिया।

स्थानीय युवक ने लोगों की मदद से आरोपित उबैद खान और लड़की को पकड़ लिया और उन दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया। लड़की के मामा स्थानीय बाजार में सम्मानित व्यक्ति हैं। इसलिए काफी दिनों से जहर जैसा घूँट पी रहे हिन्दू समाज के लोग आंदोलित हो गए।

बाले खाँ है पुरोला के मुस्लिमों का लीडर

पुरोला निवासी अनिल असवाल ने बताया कि वहाँ के मुस्लिमों का लीडर बाले खाँ नाम का व्यक्ति है। उन्होंने बताया कि बाले ख़ाँ साल 1978 में कहीं बाहर से आकर पुरोला में बसा था। उस समय उसकी आटा चक्की हुआ करती थी। समय के साथ उसने कई कारोबार बदले।

अनिल का आरोप है कि बाले खाँ ने अपना कई कारोबार बदला और अब वह बाजार में कपड़े की बड़ी दुकान चलाता है। बाले खाँ समय के साथ अरब देशों से आने वाली फंडिंग के दम पर और अमीर होता चला गया। वहीं, उसके समय के कई हिन्दू व्यापारी घाटे की वजह से अपना दुकान बंद कर चुके हैं।

अनिल असवाल ने हमें आगे बताया कि बाले ख़ाँ जब शुरू में बाजार में बसा था, तब वह हिन्दुओं से काफी सलीके से पेश आता था लेकिन अब उसका चाल-ढाल बदल चुका है। हमें बताया गया कि स्थानीय हिन्दू समाज का गुस्सा सबसे ज्यादा बाले खाँ पर ही है।

बकौल अनिल बाले खाँ ही बाजर के सारे मुस्लिमों को अपने घर पर जमा करके नमाज़ आदि अपनी छत पर पढ़वाता है। अनिल ने बुजुर्ग हो चले बाले खाँ के बेटे अशरफ को भी अपने अब्बा के नक्शे कदम पर बताया। फ़िलहाल अशरफ अपने अब्बा के साथ कपड़े की दुकान चलाता है।

पुरोला कांड के बाद भी जारी है लव जिहाद

राकेश का यह भी दावा है कि मई के अंतिम सप्ताह में पुरोला में घटी लव जिहाद की जिस घटना से लोग नाराज हैं, उसके बाद भी आसपास में वैसी ही 2 अन्य घटनाएँ घटी हैं। ताजा घटना का जिक्र करते हुए राकेश ने बताया कि 8 जून 2023 (गुरुवार) की सुबह 3 बजे उन्होंने 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियों को चकराता के पास से बरामद किया है।

राकेश के मुताबिक, पीड़िताएँ नेपाली मूल की हैं। इन दोनों लड़कियों को एक मुस्लिम युवक अपने साथ कहीं लेकर जा रहे थे। लड़कियों को ऑनलाइन गेम के माध्यम से फँसाया गया था। एक आरोपित का नाम नवाब उर्फ़ गुड्डू बताया जा रहा है और वह यूपी के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है।

बच्चियों की माँ द्वारा दी गई तहरीर में नवाब पर पीड़िताओं से सेक्स चैट करने और उसे वायरल करने की धमकी देने का आरोप है। राकेश उत्तराखंडी ने इस मामले में उत्तराखंड पुलिस पर कार्रवाई में हीला-हवाली करने का आरोप लगाया है। वहीं, दूसरे मामले में आरोपित का नाम शाहरुख़ है, जो सहारनपुर का रहने वाला है।

देवबंद और बरेलवी मौलवियों की फंडिंग से हिन्दुओं के कारोबार तबाह

राकेश उत्तराखंडी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि पुरोला और आसपास के मुस्लिम कारोबारियों को देवबंद और बरेलवी मौलवी फंडिंग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुरोला बाजार ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में जिन दुकानों को कोई हिन्दू व्यापारी 5 हजार रुपए के भाड़े पर उठाता है, उसे मुस्लिम दुकानदार 10 हजार रुपए के भाड़े पर लेते हैं।

बाहर से आ रही फंडिंग को राकेश ने हिन्दू कारोबारियों की बर्बादी की वजह बताया। राकेश ने इसे व्यापार जिहाद बताया। राकेश का दावा है कि उत्तराखंड के सैलून, सब्ज़ी, मैकेनिक आदि के काम करने वाले व्यवसायों में इसी वजह से हिन्दू घटते चले जा रहे हैं। राकेश ने दुकानों को किराए पर देने वाले लोगों को हिन्दू बताया। उन्होंने कहा कि सबको समझा पाना संभव नहीं है।

प्रेग्नेंट गाय को काटकर बच्चा कर दिया था बाहर

गोकशी की एक घटना का जिक्र करते हुए राकेश ने बताया कि मार्च 2021 में देहरादून जिले में एक गाय को काट दिया गया था। गाय गर्भवती थी, जिसके पेट में बच्चा था। गाय को काटकर उसके बच्चे को बाहर निकाल दिया गया था। वसंत विहार थाना क्षेत्र की इस घटना में पुलिस ने 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

हो रहा है विरोध का असर

राकेश ने कहा कि उत्तराखंड में पीड़ित हिन्दुओं के आक्रोश को देखते हुए कुछ मुस्लिमों को मकान मालिकों ने दुकानें खाली करने के लिए कहा है। हालाँकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआती कुछ मामलों को छोड़कर अब किसी भी तरह का गैरकानूनी काम हिन्दुओं द्वारा नहीं किया जा रहा है।

पुलिस के साथ कानून व्यवस्था सही रखने में खुद को साझीदार बताते हुए उन्होंने बताया कि संवैधानिक तौर पर उत्तराखंड की आबोहवा को खराब करने वालों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। हालाँकि, मुस्लिम समुदाय के कई कारोबारी लोग अभी भी वहाँ हैं, जिनमें नाई और कबाड़ी आदि शामिल हैं।

उत्तरकाशी के रहने वाले पत्रकार दिनेश ने भी हमें बताया कि वहाँ के हिन्दू व्यापारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उत्तरकाशी के कारोबार में मुस्लिमों की अच्छी दखल बताते हुए दिनेश ने कहा कि अधिकतर दुकान किराए पर लिए गए हैं, जिन्हें हिन्दुओं ने भाड़े पर दिया हुआ है।

पुरोला के रहने वाले अनिल असवाल ने बताया कि बाजार के कुछ दलाल किस्म के लोग पुलिस के साथ मिलकर बंद बाजार को खुलवाना चाह रहे। अनिल का दावा है कि अभी के हालात को देखते हुए बाजार खुलने से हालात और बिगड़ सकते हैं। अनिल ने भी कुछ एक मामलों के अलावा हिन्दुओं के विरोध को अहिंसात्मक बताया है।

मुस्लिमों का पलायन नहीं, बल्कि घर वापसी कहिए

अनिल असवाल ने दुकान मालिकों द्वारा भविष्य में मुस्लिम दुकानदारों को अपनी दुकानें किराए पर ना देने की बात को सही बताया। उनका दावा है कि लगभग आधे दर्जन मुस्लिमों को दुकान खाली करना पड़ सकता है। हालाँकि, अनिल ने मीडिया से इस कार्रवाई को पलायन के बजाय घर वापसी कहने की अपील की।

उन्होंने बताया कि मुस्लिमों ने अपने मूल घर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ आदि से पलायन किया था और उत्तरकाशी में अस्थाई रूप से काम कर रहे थे। अनिल का कहना है कि अब UP के अलग-अलग हिस्सों से पलायन किए मुस्लिम वापस अपने-अपने घरों को जा रहे हैं।

तेजी से बढ़ रहा जनसंख्या असंतुलन

राकेश ने कहा कि पुरोला की जनसंख्या में बड़े पैमाने पर असंतुलन बढ़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से वहाँ आने वाले मजदूरों का सत्यापन कराए जाने की माँग की। उन्होंने कहा कि कमजोर कानून और निगरानी की कमी की वजह से कई मुस्लिमों ने न सिर्फ फर्जी कागजात बनवा लिए हैं, बल्कि उनके द्वारा वहाँ जमीनें भी खरीद ली गईं हैं।

उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम रहने आता है तो बाद में वो धीरे-धीरे पूरी भीड़ जमा कर लेता है। इस साजिश को राकेश ने देवभूमि को जिहाद भूमि बनाने जैसा बताया। राकेश ने उत्तराखंड आने वाले मुस्लिमों को लेकर नियमों को कड़ा करने की माँग की है।

पुरोला के अनिल असवाल का दावा है कि साल 1978 में वहाँ महज 3 परिवार मुस्लिमों के थे। अब उसी पुरोला में मुस्लिमों की 40 से अधिक दुकानें हैं। दावा है कि इन दुकानों में कई तो स्थाई तौर पर बस गए हैं। बकौल अनिल इन 40 दुकानों और उससे जुड़े परिवारों ने ही आसपास के तमाम हिन्दुओं की नाक में दम कर रखा है।

विरोध में कोई राजनीति नहीं

राकेश ने कहा कि लव जिहाद विरोधी प्रदर्शन सिर्फ पुरोला में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के कई हिस्सों में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन को कोई भी हिन्दू पार्टी नहीं देख रहा, बल्कि बेटियों की सुरक्षा के लिए सभी एकजुट हैं।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हालाँकि कुछ अपवाद हर कहीं होते हैं और पुरोला में भी हैं। पुरोला के अनिल असवाल ने बताया कि 8 जून 2023 (गुरुवार) को पुलिस की मौजूदगी में शांति कमिटी की मीटिंग हुई है, लेकिन आशा कम ही है कि उनकी अपील का कोई बहुत असर पड़ेगा।

उत्तराखंड आंदोलन में सिर्फ हिन्दू बलिदान

राकेश उत्तराखंडी ने सवाल किया कि जो भी मुस्लिम ताव से उत्तराखंड को अपना बताते हैं, वो बताएँ कि प्रदेश के निर्माण में उन्होंने कितनी कुर्बानियाँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं ने अपनी संस्कृति को बचाने के लिए अपनी जान को जोखिम में डाला था, न कि आज का ये दिन देखने के लिए।

बंद दुकानों को न बताया जाए पलायन

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO पुरोला ने बताया कि कोई भी शिकायत मिलने पर पुलिस सख्ती से कार्रवाई करती है। उन्होंने किसी भी मुस्लिम द्वारा पलायन की खबरों से इनकार करते हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद होने की जानकारी दी। थाना प्रभारी का कहना है कि सभी पक्षों से सकारात्मक बातचीत चल रही है और जल्द ही तमाम समस्याओं को सुलझा लिया जाएगा।

राजस्थान के सरकारी स्कूल में रेप, पोर्न देख शोषण करता था हेडमास्टर: NCPCR ने बताया- जाँच में मदद नहीं कर रहा डूंगरपुर प्रशासन

राजस्थान के डूंगरपुर के एक सरकारी स्कूल में छात्राओं से रेप के मामले की राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) भी जाँच कर रही है। आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने जाँच टीम को स्थानीय प्रशासन का सहयोग नहीं मिलने की बात कही है।

स्कूल के हेडमास्टर रमेशचंद्र कटारा पर ही छात्राओं से रेप का आरोप है। उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार पोर्न मूवी देखकर वह स्कूल की 8 से 12 साल की बच्चियों के साथ दरिंदगी करता था। उन्हें डराता-धमकाता था। यह मामला 31 मई 2023 को तब सामने आया, जब ग्रामीणों ने सदर थाने में हेडमास्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद 3 जून को कटारा को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस मामले को लेकर कानूनगो ने 8 जून को ट्वीट कर बताया, “राजस्थान के डूंगरपुर जिले में सरकारी स्कूल में 6 लड़कियों के बलात्कार के मामले में जाँच के लिए एनसीपीसीआर की टीम राजस्थान पहुँच चुकी है। कल (9 जून) डूंगरपुर में जाँच करेगी। दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिला प्रशासन का यथेष्ट सहयोग नहीं मिल रहा है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार पीड़ित छात्राओं का आरोप है कि हेडमास्टर छुट्टियों के दिन भी कार्यक्रम, पौधों को पानी देने और खेल-कूद के नाम पर उन्हें स्कूल बुलाता था। इस दौरान वह उन्हें स्कूल के ही कमरे में ले जाता। अश्लील फ़िल्म दिखाकर उनका यौन शोषण करता था। जब दर्द होने पर लड़कियाँ रोने लगतीं तो वह उन्हें फेल करने और तालाब में डूबा कर मारने की धमकी देता था।

एक पीड़ित छात्रा की माँ ने दैनिक भास्कर को बताया कि गर्मी छुट्टी होने के बाद भी हेडमास्टर लड़कियों को स्कूल बुलाता था। 29 मई 2023 को स्कूल से घर आने के बाद उनकी बेटी ने पेट में दर्द होने की शिकायत की। वह पहले भी ऐसा कह चुकी थी। इसलिए उसे हर बार की तरह दर्द की दवा दे दी। लेकिन अगले दिन उसने स्कूल जाने से मना कर दिया। जब इसका कारण पूछा तो उसने कहा कि यूरिन वाली जगह पर दर्द हो रहा है। वहाँ चोट जैसे निशान थे। पूछने पर उन्हें बेटी ने बताया कि हेडमास्टर ने उसकी ऐसी हालत की है। वह स्कूल की अन्य लड़कियों के साथ भी ऐसा ही करता है।

एक पीड़िता ने हेडमास्टर की करतूतें बताते हुए कहा है कि पढ़ाई के नाम पर हेडमास्टर आए दिन गंदी हरकतें करता था। एक बार वह स्कूल की लड़कियों को घुमाने के बहाने डूंगरपुर के तालाब ले गया था। वहाँ उसने कहा कि इसमें मगरमच्छ रहता है। तुम लोगों के साथ जो रहा है वह किसी से बताया तो इसी में फेंक दूँगा। मगर तुम लोगों को जिंदा खा जाएगा। हेडमास्टर की धमकियों के बाद सब लड़कियाँ बुरी तरह डर गई।

हेडमास्टर की घिनौनी हरकत का शिकार हुई एक पीड़िता के परिजनों का कहना है कि सर्दियों की छुट्टियों में हेडमास्टर स्कूल आता था। इसके बाद वह लड़कियों को अपनी कार में बैठाकर घर ले जाता और वहाँ उनका यौन शोषण करता। हेडमास्टर रमेशचंद्र कटारा गाँव वालों के सामने अच्छा बनने का नाटक करता था। वह गाँव के लोगों की मदद भी करता था। इसलिए स्थानीय ग्रामीणों को कभी भी उस पर शक नहीं हुआ। इसका ही फायदा उठाकर वह लड़कियों का यौन शोषण करता रहा। एक पीड़िता की माँ ने कहा है कि हेडमास्टर ने 6 नहीं, बल्कि 10 लड़कियों का यौन शोषण किया है।

इस पूरे मामले में एसपी कुंदन कवरिया का कहना है कि हेडमास्टर को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है। अब तक 6 लड़कियों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं। कुछ और मामले सामने आ सकते हैं। पीड़ित छात्राएँ 8 से 12 साल की हैं।

मुस्लिम संगठनों को सुहा नहीं रहा ‘अजमेर 92’, देश के सबसे बड़े सेक्स कांड पर बनी है फिल्म: कहा- रिलीज से पहले दरगाह कमेटी को दिखाओ

90 के दशक में देश के सबसे बड़े सेक्स कांड को राजस्थान के अजमेर में अंजाम दिया गया। इस घटना पर आधारित एक फिल्म ‘अजमेर 92’ (Ajmer 92) नाम से बनी है। लेकिन मुस्लिम संगठन लगातार इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं।

अजमेर शरीफ दरगाह कमेटी का कहना है कि इस फिल्म के जरिए एक खास समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। य​दि फिल्म से अजमेर शरीफ दरगाह और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश हुई तो वे फिल्म बनाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। रिलीज से पहले फिल्म दरगाह कमेटी को दिखाने की माँग भी की गई है।

इस फिल्म को लेकर इंडिया मुस्लिम फाउंडेशन के मुखिया शोएब जमाई ने भी एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने कहा है, “अजमेर दरगाह कमेटी के सदर सैय्यद गुलाम किब्रिया और जनरल सेक्रेटरी सरवर चिश्ती सहित खादिम कमेटी से मीटिंग करने के बाद अधिकारिक घोषणा करते हैं कि फिल्म ‘अजमेर 92’ शहर में गठित एक आपराधिक घटना तक सीमित है तो हमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन यदि षड्यंत्र के तहत अजमेर शरीफ दरगाह और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश हुई तो फिल्मकारों के खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही देश में शांतिपूर्ण विरोध होगा।”

वहीं दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जागदान के जनरल सेक्रेटरी सैयद सरवर चिश्ती ने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर कर फिल्म को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने ‘अजमेर 92’ को राजनीति हथकंडा करार दिया। कहा है कि कर्नाटक में चुनाव था तो ‘द केरल स्टोरी’ बनाई गई। अब राजस्थान में चुनाव है तो ‘अजमेर 92’ बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म पर बैन लगना चाहिए क्योंकि यह एक ही कम्युनिटी को टारगेट करती है।

बता दें कि इससे पहले जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने भी कहा था कि यह फिल्म अजमेर शरीफ दरगाह को बदनाम करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। मदनी ने कहा था, “आपराधिक घटनाओं को मजहब से जोड़ने की बजाए इसके खिलाफ एकजुट कार्रवाई करने की जरूरत है। वर्तमान समय में समाज को विभाजित करने के बहाने खोजे जा रहे हैं। यह फिल्म समाज में दरार पैदा करेगी।”