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महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान के अवैध स्मारक पर चला बुलडोजर: AIMIM विधायक ने करवाया था निर्माण, हिंदू संगठनों के शिकायत के बाद कार्रवाई

महाराष्ट्र के धुले में चौक पर बने टीपू सुल्तान के एक अवैध स्मारक पर स्थानीय हिंदुओं की शिकायत के बाद नगर निगम ने 8 जून 2023 को बुलडोजर चला दिया। टीपू सुल्तान का यह स्मारक ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के स्थानीय विधायक फारूक अनवर शाह द्वारा 100 फीट चौड़ी सड़क के ठीक बीचो-बीच में बनाया गया था।

इस स्मारक को वडजई रोड क्षेत्र के बहुसंख्यक मुस्लिमों को खुश करने के लिए बनाया गया था। हालाँकि, भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की धुले इकाई ने इस संबंध में गृहमंत्री और राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा था। पत्र की प्रतियाँ स्थानीय एसपी और नगर निगम धुले के आयुक्त को भी दी गईं।

पत्र में कहा गया था, “धुले शहर में नगर निगम द्वारा डी-मार्ट से बायपास हाईवे तक 100 फीट की सड़क का निर्माण किया गया है। इस सड़क पर काफी ट्रैफिक रहता है। इसके अलावा, सड़क के दोनों किनारे ज्यादातर मुस्लिमों के घर हैं।”

भाजयुमो के नेता अधिवक्ता रोहित चंदोडे ने इस पत्र में आगे लिखा है, “धुले शहर के विधायक डॉ फारूक शाह ने हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है और चौराहे पर बिना किसी सरकारी अनुमति के हिंदू विरोधी टीपू सुल्तान के स्मारक का निर्माण करके अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया है। धुले शहर के मुस्लिम इलाके में 100 फीट रोड पर यह स्मारक बना है।”

पत्र में सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए आगे कहा गया है, “मैं नगर निगम प्रशासन से इस अवैध स्मारक के निर्माण को गिराने के लिए कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ, ताकि शहर की शांति बरकरार रहे। संबंधित को फारूक शाह के खिलाफ सिटी डिफेसमेंट एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए।”

धुले के एक मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी

धुले शहर के मोघलाई क्षेत्र में स्थित राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति को अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा 6 जून 2023 की रात को खंडित कर दिया गया था। इससे शहर में तनाव फैल गया था। इस मामले में पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद मंदिर के पास अवैध रूप से बनाए गए शेड में रात के समय अवैध कारोबार होता था। इसकी शिकायत मिलने के बाद अतिक्रमण हटा लिया गया।

मंदिर में नियमित रूप से प्रार्थना करने के लिए एक स्थानीय परिवार जिम्मेदार है। मंगलवार (6 जून 2023) की रात परिजन मंदिर के दरवाजे पर ताला लगाना भूल गए। यह मौका देख अज्ञात बदमाशों ने आधी रात में हंगामा कर दिया। उन्होंने शराब डालकर भगवान राम की मूर्ति को अपवित्र किया।

इस घटना के बारे में पता तब चला, जब सुबह श्रद्धालु पूजा के लिए पहुँचे। इस संबंध में नगर थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार किए गए तीनों संदिग्ध हिंदू भोईर समुदाय से हैं और इसलिए इस मामले में कोई सांप्रदायिक कोण नहीं है। हालाँकि, शहर में तनाव व्याप्त है।

मुस्लिम बनें गौ रक्षक, मांसाहार छोड़ें: IAS नियाज ने धर्मांतरण के लिए ‘बॉलीवुड’ को कहा जिम्मेदार, MP के गृह मंत्री बोले- ओवैसी इनसे सीख लें

मध्य प्रदेश के आईएएस नियाज खान एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने कहा है कि धर्मांतरण की शुरुआत बॉलीवुड से हुई। यह पूरा पाप बॉलीवुड ने ही फैलाया है। इसके अलावा नियाज खान ने मुस्लिमों को गौरक्षक बनने और धर्मांतरण न कराने और मांसाहार छोड़ने की सलाह दी है। 

नियाज खान ने भास्कर से हुई बातचीत में कहा है कि हिंदू गाय को माँ मानते हैं। इसलिए गाय का पूरा सम्मान होना चाहिए। नॉर्थ ईस्ट का पूरा इलाका बीफ वाला है। यदि वहाँ के लोग जागरूक हो जाएँ और बीफ की सूचना सरकार को दें तो गौ माता को बचाया जा सकता है। 

इससे पहले गुरुवार (8 जून 2023) को एक ट्वीट में नियाज खान ने कहा था, “मुस्लिम भाई भी गौ रक्षक बनें, धर्म परिवर्तन का विरोध करें, किसी का धर्म ना बदलवाएँ। जबरन धर्म बदलवाना इस्लाम में प्रतिबंधित है। अगर शाकाहार अपना सकें तो यह एक बेहतरीन प्रयास होगा। यद्यपि शाकाहारी बनने को बाध्य नही किया जा सकता। हर मुस्लिम भाई ब्राह्मणों से मधुर संबंध रखें।”

धर्मांतरण के मुद्दे पर बात करते हुए नियाज खान ने आगे कहा है कि भारत लोकतंत्र के हिसाब से चलने वाला देश है। यहाँ 80 प्रतिशत हिंदू रहते हैं। जब कोई किसी का धर्मांतरण कराता है तो इसका मतलब यही है कि वह अपने मजहब को दूसरे धर्म से अच्छा मानता है। जब कोई दूसरे धर्म में शादी कर रहा है तो वह अपना धर्म क्यों छोड़ देता है? सभी को अपना-अपना धर्म मानना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा है कि देश की आजादी के बाद से जबरन धर्मांतरण एक पक्ष के द्वारा ही हो रहा है। 90% हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ होगा। बाकी का 10 प्रतिशत बाहर हुआ होगा। नियाज ने कहा है कि उन्हें लगता है कि हिंदू धर्म, सनातन धर्म है। भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया। आज तक किसी की जमीन नहीं छीनी। इससे अधिक सहिष्णु कोई नहीं है। यदि कोई यह सोचता है कि वह हिंदुओं से अच्छा है तो उसकी सोच गलत है।

IAS नियाज खान ने यह भी कहा है कि धर्मांतरण का पूरा पाप बॉलीवुड का फैलाया हुआ है। बीते 70 सालों में बड़े-बड़े स्टार्स ने शादियाँ कीं और फिर उनका इस्लाम में धर्मांतरण करा दिया। देश में बॉलीवुड को खुदा की तरह देखा जाता है। इसलिए नई पीढ़ी बॉलीवुड की ही नकल कर रही है। धर्मांतरण की शुरुआत बॉलीवुड से ही हुई। 

आईएसएस नियाज खान की ऐसी ही बातों से प्रभावित होकर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने असदुद्दीन ओवैसी को उनसे सीख लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा है “असदुद्दीन ओवैसी जैसे लोगों को एक IAS और पढ़े लिखे लोगों की बातों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने पुस्तक भी लिखी है। लेकिन ये करेंगे नहीं। अगर ये कर लें तो शायद इनके जाले कुछ साफ हो जाएँ।” नरोत्तम मिश्रा ने यह भी कहा है, “मध्यप्रदेश में धर्मांतरण का कुचक्र नहीं चलने दिया जाएगा। ओवैसी को साक्षी पर बोलते नहीं सुना। दमोह पर लंबी तकरीर कर रहे हैं। साक्षी, श्रद्धा पर तकरीर नहीं की। उनकी ये पीड़ा है। उनकी यही मानसिकता जिहादी कहलाती है।”

दरअसल, दमोह के गंगा जमना स्कूल में हिंदू लड़कियों को हिजाब पहनाने को लेकर छिड़े विवाद पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि बीजेपी को मुस्लिम और उनकी लड़कियों के हिजाब पहनने दोनों से नफरत है।

‘जिस दिन 75 करोड़ हो जाएँगे… हमारा मुसलमान PM होगा’: शोएब जमई का जहरीला वीडियो वायरल, लोग कर रहे गिरफ्तारी की माँग

सोशल मीडिया पर आज शोएब जमई नाम के शख्स का जहरीला वीडियो क्लिप वायरल है। इस वीडियो में क्लिप में वह अखंड भारत की बात करते हुए जहरीला बयान दे रहा है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है कि जिस दिन 75 करोड़ हो जाएँगे। उस दिन हमारा ही मुसलमान प्राइम मिनिस्टर होगा और 250 से ज्यादा हमारे सांसद होंगे।

वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “कसम खुदा की कह रहा हूँ, अल्लाह करे वो दिन आए कि ये देश अखंड भारत बन जाए और पाकिस्तान में रहने वाले 25 करोड़ मुसलमान, बांग्लादेश में रहने वाले 25 करोड़ मुसलमान और हिंदुस्तान में रहने वाले 25 करोड़ मुसलमान ये सब मिलकर जिस दिन 75 करोड़ हो जाएँगे। उस दिन हमारा ही मुसलमान प्राइम मिनिस्टर होगा और 250 से ज्यादा हमारे सांसद होंगे।”

आगे जमई कहता है, “2024 में ऐसे बाबाओं को लंगोट लेकर न भागना पड़ा तो शोएब जमई का नाम बदल देना… तुम्हारे बाप का देश है।”

अब जमई का यह वीडियो एन एस टाइम्स पर 6 दिन पहले अपलोड हुआ था। इस वीडियो क्लिप में जमई बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर अपना गुस्सा दिखा रहा है। इसकी क्लिप को सोशल मीडिया पर शेयर करके लोग जमई की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। कुछ लोग शोएब के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की माँग कर रहे हैं।

बता दें कि जहरीले बयान के कारण चर्चा में आया शोएब जमई इंडिया मुस्लिम फाउंडेशन का राष्ट्रीय प्रवक्ता है। इसके अलावा शाहीन बाग के प्रदर्शन में वो कन्वीनर था। अपनी वीडियो के वायरल होने के बाद उसने इस संबंध में एक ट्वीट करके अपनी सफाई दी और अपने बयान को आभासी स्थिति कही।

उसने लिखा, “जब हमने RSS द्वारा प्रस्तावित अखंड भारत की बात की। एक HYPOTHETICAL SITUATION समझाया कि ऐसी स्थिति में क्या-क्या मुमकिन हो सकता है। जनसंख्या का अनुपात बढ़ेगा। डेमोग्राफी चेंज होगी तो जवाब में राइट विंग ने कहा कि सब का धर्म परिवर्तन करवा दिया जाएगा। कोई क्यों करेगा धर्म परिवर्तन। क्या डरा कर सकते हो या जबरन? फिर हमने जब समझाया कि मुमकिन है कि कोई मुस्लिम भी प्रधानमंत्री बन सकता है तो हंगामा मच गया। इनका एजेंडा इन्हीं पे भारी पड़ने लगा। बस देने लगे गाली और धमकियाँ। Check mate… अरे, इसीलिए कहता हूँ कि ख्याली पुलाव मत बनाओ, कब तक भ्रम में रहोगे। सच्चाई ये है कि ऐसा होना निकट भविष्य में मुमकिन नहीं इसलिए जिस देश में हम रहते हैं उसी को खूबसूरत बनाओ…।”

‘कुरान की आयत पढ़कर जीतोगे खेल’: ऑनलाइन गेम्स की आड़ में ऐसे होता था गैर-इस्लामी बच्चों का ब्रेनवॉश, मौलवी समेत 2 गिरफ्तार

ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए नाबालिगों को इस्लाम में धर्मांतरण का घिनौना खेल बहुत ही शातिर तरीके से अंजाम दिया जा रहा था। गाजियाबाद के एक मामले के सामने आने के बाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार गिरफ्तार किए गए मौलवी ने कई खुलासे किए हैं। नाबालिगों को धर्मांतरित करने के लिए गिरोह के सदस्य उन्हें तरह-तरह से धमकाते थे और कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे।

मुंबई का रहने वाला इस गिरोह का सरगना शहनवाज खान उर्फ बद्दो फरार है और उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। हालाँकि, गाजियाबाद के सेक्टर-23 में स्थित मस्जिद का एक मौलवी और एक अन्य आरोपित अब्दुल रहमान उर्फ नन्नी को गिरफ्तार कर लिया है।

अब्दुल रहमान के मोबाइल फोन से भी पुलिस को कई सबूत मिले हैं। मामला तब सामने आया था, जब 30 मई को राजनगर निवासी एक व्यक्ति ने धर्मांतरण मामले में FIR दर्ज कराई थी। कविनगर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई FIR में संजयनगर स्थित सेक्टर-23 की मस्जिद के एक मौलवी अब्दुल रहमान और मुंबई निवासी बद्दो का जिक्र था।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह उन नाबालिग बच्चों को अपना निशाना बनाता था, जो ऑनलाइन गेम खेलने में अपना अधिकतर समय व्यतीत करते थे। अपने झाँसे में लेने के बाद गिरोह उनसे कहता था कि अगर वे कुरान की आयतों को पढ़ेंगे तो अल्लाह उन्हें गेम जिताने में मदद करेगा। चूँकि, इन खेलों का अधिकांश सर्वर गिरोह के पास होता था तो वे बच्चों को खेल में जीता देते थे।

इसके बाद नाबालिगों से एक सोशल मीडिया ऐप डिस्कॉर्ड (Discord) और फोर्ट नाइट (Fort Nite) ज्वॉइन करने के लिए कहा जाता था। इस सोशल मीडिया को ज्वॉइन करने के बाद उन्हें इस्लाम का बखान करने वाले वीडियो दिखाए जाते थे। कट्टरपंथी जाकिर नाइक सहित अन्य कट्टरपंथी मौलानाओं का वीडियो दिखाया जाता था।

इस दौरान उन्हें स्थानीय मौलवी से भी जोड़ दिया जाता था। यह मौलवी इन नाबालिगों को इस्लाम के बारे में बताता था। उन्हें बताता का नमाज कैसे और कब पढ़ा जाता है। न्यूज 18 के अनुसार, नमाज के समय को कोड वर्ड में ‘जिम टाइम’ कहा जाता था। जिन बच्चों से नमाज छूट जाता था, उन्हें डराया जाता था और कहा जाता था कि अल्लाह उनसे नाराज है।

इस धर्मांतरण गिरोह का शिकार बना फरीदाबाद निवासी एक लड़के ने पुलिस को बताया, “साल-2021 में कोविड से उसके माँ-बाप की मौत हो गई थी। समय बिताने के लिए वह ऑनलाइन गेम खेलता था। इस दौरान मुंबई के बद्दो से बातचीत शुरू हुई। अचानक इस लड़के को भी कोविड हुआ और बाद में ये ठीक हो गया। तब बद्दो ने कहा था कि मैंने तेरे लिए कुरान पढ़ी और दुआ माँगी थी, इस वजह से तू बच गया है।”

इसके बाद से इस लड़के की इस्लाम में रुचि बढ़ने लगी थी। गाजियाबाद, फरीदाबाद और चंडीगढ़ के जिन चार नाबालिग लड़कों के धर्मांतरण की कोशिश हो रही थी, वे सभी ‘यूथ क्लब’ नामक यूट्यूब चैनल से जुड़े थे। पुलिस का कहना है कि यह चैनल पाकिस्तान का है। 

यह बात सामने आई है कि देश के अंदर तेजी से फैल रहे धर्मान्तरण के इस रैकेट के तार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र से जुड़े पाए गए हैं। गुजरात और महाराष्ट्र के एक अनजान कॉलर ने महाराष्ट्र पुलिस को फोन करके बताया कि इस गैंग ने सिर्फ महाराष्ट्र में 400 से अधिक लोगों का धर्मान्तरण कराए हैं।

इन तमाम इनपुट के बाद अब NIA और ATS भी इस गैंग से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है। मुंबई के मुंब्रा क्षेत्र के रहने वाले शाहनवाज उर्फ़ बद्दो के फंडिंग सोर्स की भी जाँच पुलिस कर रही है। फ़िलहाल पुलिस की अलग-अलग टीमें अलग-अलग ठिकानों पर भेजी गईं हैं। इस गिरोह के तार पाकिस्तान एवं अन्य मुस्लिम देशों से जुड़ते नजर आ रहे हैं।

इस रैकेट का भंडाफोड़ 30 मई 2023 को उस समय हुआ, जब एक किशोर के पिता ने गाजियाबाद पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसके बच्चे ने अचानक दिन में पाँच बार नमाज पढ़ना शुरू कर दिया है। जब उसने बच्चे को रोका तो वह भड़क गया और कहा कि वह घर छोड़ देगा और जिस मौलवी के संपर्क में है, उसके साथ रहेगा।

कोविड के दौरान स्कूल ने दी बुर्का पहनने की इजाजत, अब लड़कियाँ इसे उतारने को तैयार नहीं: J&K के स्कूल ने अबाया पर जारी की गाइडलाइन तो आतंकी संगठन ने दी धमकी

जम्मू और कश्मीर में श्रीनगर के रैनावाड़ी में स्थित विश्व भारती गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने गुरुवार (8 जून 2023) को आरोप लगाया कि स्कूल ने लड़कियों को क्लास में अबाया (बुर्का) नहीं पहनने का निर्देश दिया है। इसको लेकर उन्होंने स्कूल के सामने प्रदर्शन किया। वहीं, स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा है कि अबाया पर प्रतिबंध नहीं लगा गया है, बल्कि यूनिफॉर्म से मैचिंग वाली बुर्का पहनने के लिए कहा गया है।

छात्राओं के इन आरोपों के बाद प्रदेश में राजनीति तेज होने के साथ-साथ इस्लामी आतंकी भी मैदान में कूद गए हैं। जम्मू-कश्मीर भाजपा, फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी ने अबाया को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार के अंतर्गत बताया है। वहीं, एक आतंकी संगठन ने छात्राओं को अबाया पनने से रोकने पर स्कूल की प्रिंसिपल को धमकी दी है। इसके बाद प्रिंसिपल ने माफी माँग ली।

प्रिंसिपल ने कहा कि लड़कियाँ अलग-अलग रंगों और डिजाइनों के बुर्के पहनकर स्कूल आती हैं। इसलिए स्कूल उन्हें यूनीफॉर्म से मेल खाता हिजाब (सिर और चेहरा ढँकने वाला कपड़ा) पहनने के लिए कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि लड़कियाँ स्कूल यूनीफॉर्म के ऊपर उसी रंग का बुर्का पहन सकती हैं और स्कूल पहुँचने के बाद उसे उतारना होगा।

महिला प्रिंसिपल मेमरोज़ शफी ने कहा कि लड़कियों को इस्लामिक नियमों के अनुसार अपने शरीर को ढँकना जरूरी है। इसलिए उन्हें स्कूल में यूनीफॉर्म के ऊपर सफेद रंग का लंबा हिजाब पहनने या चादर लाने के लिए कहा गया है।

विश्व भारती गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल ने 8 जून 2023 को एक स्पष्टीकरण जारी कर कहा, “सोशल मीडिया पर चल रहा है कि छात्राओं को अबाया (लंबा चोगा) नहीं पहनने का निर्देश दिया गया है, जो पूरी तरह से निराधार है और गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। ड्रेस कोड को लेकर स्कूल प्रबंधन हमेशा समाज के सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान करता है।”

बयान में आगे कहा गया है, “यह स्पष्ट किया जाता है कि स्कूल के प्रधानाचार्य या प्रबंधन द्वारा अबाया पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन यह छात्रों को विनम्रता से बताया गया है कि अबाया के नीचे स्कूल की वर्दी पहनें। यह सभी छात्रों की जानकारी के लिए है कि वे अबाया पहन सकते हैं और कक्षाओं में इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।”

प्राचार्य ने अपने बयान में आगे कहा, “छात्रों और अभिभावकों के साथ आज की बातचीत को गलत तरीके से पेश किया गया है। अगर इससे छात्राओं या अभिभावकों की भावनाओं को ठेस पहुँची है तो मैं इसके लिए बिना शर्त उनसे माफी माँगता हूँ।”

रैनावाड़ी में स्थित विश्व भारती (वीबी) गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं के एक समूह ने इस मामले को लेकर गुरुवार (8 जून 2023) को विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं का कहना था कि उन्हें सूचित किया गया था कि यदि वे हिजाब पहनना चाहती हैं तो उन्हें स्कूल के बजाय ‘मदरसा’ में जाना चाहिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विरोध करने वाली लड़कियों में से एक ने कहा, “हम अबाया को क्यों उतारें? मैं इस स्कूल को अपने अल्लाह से ज्यादा प्यार नहीं करती कि मैं इस अबाया को उतार दूँ। मैं अपना अबाया कभी नहीं उतारूँगी। कॉलेज में इतने सारे लड़के हैं और इतनी अनैतिकता चल रही है, फिर भी उनकी आँखों से दिखाई नहीं देती है और हमें अबाया उतारने के लिए कह रही हैं।”

छात्रा ने आगे कहा, “वह (प्रशासन अधिकारी) कौन होती हैं, जो हमसे अबाया को हटाने के लिए कहती हैं? अगर हम अबाया पहनना चाहती हैं तो उन्होंने हमें एक दरगाह (धार्मिक विद्यालय) जाने के लिए कहा। क्या अबाया पहनने वाली लड़कियों को वो शिक्षा नहीं मिलती, जो बाकी सबको मिलती है?”

विश्व भारती (वीबी) स्कूल की प्रिंसिपल मेमरोज़ शफी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद अबाया पहनने की अनुमति दी गई थी। कुछ समय के लिए केवल कुछ लड़कियों ने स्कूल में अबाया पहना था, लेकिन हाल ही में निचली कक्षा की लड़कियों ने स्कूल के यूनीफॉर्म की अवहेलना करते हुए अबाया पहनना शुरू कर दिया।

प्रिंसिपल के अनुसार, स्कूल ने इन लड़कियों को ड्रेस कोड के अनुसार अबाया निकालने का निर्देश दिया था। हालाँकि, छात्राओं ने इससे नाराजगी जाहिर की। लड़कियों की चिंताओं के जवाब में स्कूल ने हिजाब पहनने की व्यवस्था दी है। बताते चलें कि जनवरी 2022 में कर्नाटक में हिजाब प्रतिबंध विवाद छिड़ गया था। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया कि स्कूल शैक्षिक परिसरों पर वर्दी लगा सकता है।

भाजपा के जम्मू-कश्मीर महासचिव अशोक कौल ने पहनावे में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “क्या पहनें और क्या नहीं, इसमें कोई जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए। हम किसी की पोशाक तय नहीं करेंगे। इसकी पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए।”

वहीं, नेशनल कांफ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा “हिजाब पहनना एक व्यक्तिगत पसंद होना चाहिए। धार्मिक वेश-भूषा के मामलों में कोई दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए।” पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा, “जम्मू-कश्मीर गाँधी के भारत को गोडसे के भारत में बदलने की भाजपा की योजनाओं के लिए एक प्रयोगशाला बन गया है। सभी प्रयोग यहीं से शुरू होते हैं।”

मंदिरों का ध्वंस, गोहत्या, हिंदू नरसंहार… जिन ‘सूफी संतों’ की शह पर हुआ सब कुछ, अब उनकी ही आड़ में ‘Ajmer 92’ पर पर्दा चाहते हैं इस्लामी

राजस्थान के अजमेर में 90 के दशक में 100 से ज्यादा लड़कियों के साथ रेप हुआ। उस घटना पर ‘अजमेर 92’ नाम से फिल्म आ रही। इस्लामी संगठन इसका उसी तरह विरोध कर रहे हैं जैसे द कश्मीर फाइल्स, द केरल स्टोरी जैसी फिल्मों का किया गया था। अजमेर 92 का विरोध अजमेर शरीफ दरगाह और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का हवाला देकर किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इनसे इनकी छवि को नुकसान होगा। ख्वाजा लाखों दिलों पर राज करने वाले शांतिदूत बताया जा रहा है। दरगाह को बदनाम करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस फिल्म को मुस्लिमों के खिलाफ बताया जा रहा है।

अब मुस्लिम संगठनों में यह डर क्यों है? क्या फिल्म मेकर किसी काल्पनिक घटना पर फिल्म बना रहे हैं? नहीं! वो देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल पर फिल्म बना रहे हैं। अब अगर इसके आरोपितों के तार अजमेर दरगाह के खादिमों से जुड़ते हैं तो उसमें मेकर्स कैसे दोषी हो जाएँगे। आप अगर अजमेर सेक्स स्कैंडल से जुड़ी खबरें पढ़ेंगे तो आपको तीन आरोपितों के नाम ज्यादातर जगह देखने को मिलेंगे- फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती। ये तीनों दरगाह के खादिम थे। फिल्ममेकर निष्पक्ष होकर पूरी आपराधिक घटना पर अपनी फिल्म बनाएँगे तो भी वो इस तथ्य को थोड़ी मिटा सकते हैं कि आरोपित खादिम थे।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का एम ए खान की किताब में जिक्र

अजमेर दरगाह के अलावा मुस्लिम संगठनों में जो सबसे बड़ा डर है वो ये कि कहीं इसके कारण ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को अपमानित न किया जाए जिन्हें गरीब नवाज के नाम से भी जाना जाता है। वो उन्हीं के बल पर चाहते हैं कि फिल्म पर रोक लग जाए या इसे पर्दे पर न लाया जाए। जमीयत के मदनी ने तो ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को सबसे बड़ा शांतिदूत कहा है। हालाँकि ये बात और है कि इतिहासकार एमए खान की पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’  में प्रसिद्ध सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के बारे में कुछ अलग पढ़ने को मिलता है।

किताब में कहा गया है कि मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया, नसीरुद्दीन चिराग और शाह जलाल जैसे सूफी संतों का उल्लेख करते हुए जिक्र किया गया है कि वास्तव में, हिंदुओं के उत्पीड़न का विरोध करने की बात तो दूर, इन सूफी संतों ने बलपूर्वक हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही नहीं, ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हिंदू रानियों का अपहरण किया और उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया। इसी प्रकार सूफियों के अनुयायियों द्वारा हिंदुओं के पावन स्थलों पर गायों का कत्ल करवाने की बात और उन्हें खाने की बात भी पुराने लेखों में पढ़ने को मिलती हैं।

केरल और कश्मीर में ‘शांतिदूतों’ से फैली कट्टरता

और आपको जानकर हैरानी होगी कि ये हाल केवल अजमेर का नहीं। बल्कि ऐसी स्थिति केरल और कश्मीर की भी था। आज हमें सूफी-संतों के नाम पर शांति की जो बातें समझाई जाती हैं, उनका इतिहास बेहद डराने वाला है। कश्मीर के जो आज हालात हैं उसके पीछे ऐसे ही सूफी संत थे जो मजहबी कट्टरता फैलाने के लिए हिंदुओं पर नए-नए तरीकों से अत्याचार कर रहे थे। शाहमीर वंश के राज के दौरान छठे सुल्तान सिकंदर बुतशिकन के काल में तो हिंदुओं पर अत्याचार की हर सीमा लांघ दी गई। तब, सूफियों से मिली सीख पर ही राज्य नीतियाँ निर्धारित होने लगीं। इन नीतियों में हिंदुओं के मंदिर की तोड़फोड़, उनके निर्माण पर प्रतिबंध आदि लगा दिया गया। खुले तौर पर हिंदुओं को दोयम दर्जे का माना जाने लगा, उनसे इस्लाम कबुलवाना और न कबूलने पर उन्हें मारना, सब सामान्य हो गया। इसके बाद केरल में भी 1921 में जो केरल में नरसंहार हुआ था वो भी ऐसे विचारों का परिणाम था। उस समय भी हजारों हिंदू मारे गए थे, कई परिवर्तित हुए थे। उस नरसंहार के पीछे भी सूफी अली मुसलीयार का ही हाथ था। इस बात का जिक्र आपको राहुल रोशन की किताब में भी पढ़ने को मिलेगा।

क्यों घबराए मुस्लिम संगठन?

गौरतलब है कि आज अजमेर 92 फिल्म के चर्चा में आते ही इस तरह मुस्लिम संगठनों का भड़कना, उनका धमकियाँ देना… उसी कट्टरता का परिणाम है जो बीते इतिहास में सूफी-ंसंतों द्वारा मजहब के प्रसार के नाम पर फैलाई गई। ऐसे कट्टरपंथियों को उन 100 लड़कियों के साथ हुआ अत्याचार नहीं दिख रहा जिन्हें रेप के बाद ब्लैकमेल भी किया गया। इन्हें अगर कुछ नजर आ रहा है तो सिर्फ ये किसी भी तरह से बात दरगाह न तक आ जाए और किसी शख्सियत पर उंगली न उठ जाए। क्योंकि अगर ऐसा होता है तो उन शायद हिंदुओं का विश्वास भी डगमगा जाएगा जो सालों से हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के नाम पर दरगाहों तक जाकर चादर चढ़ाते हैं। लेकिन ये नहीं जानते कि बीते समय में उनके पूर्वजों के साथ शांतिदूतों के कहने क्या हुआ और कैसे हिंदू समाज- उनकी संस्कृति पर अत्याचार किए गए, उनके ख़िलाफ़ शासकों को भड़काया गया, जिहाद जैसे षड्यंत्र रचे, उनके पावन स्थलों को अपवित्र किया गया।

ऑस्ट्रेलिया ने बेईमानी से किया कोहली और पुजारा को आउट? WTC फाइनल में बॉल टेंपरिंग का दावा, कहा- ये रहा सबूत, अंधे हो गए हैं अंपायर

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का फाइनल में ऑस्ट्रेलिया और इंडिया के बीच चल रहा है। इस बीच मैच में बॉल टेंपरिंग (Ball tampering) का दावा किया गया है। यह दावा पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली (Basit Ali) ने किया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगाया। अली का दावा है कि ऑस्ट्रेलिया ने बॉल टेंपरिंग कर विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा को पहली पारी में आउट किया था।

बासित अली ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो के जरिए ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया पर बॉल टेंपरिंग का आरोप लगाया। अली ने कहा है, “सबसे पहले मैं टीवी और स्टेडियम में बैठकर मैच देखने वालों तथा कमेंट्री कर रहे लोगों और अंपायरों के लिए ताली बजाऊँगा। पता नहीं ऊपर वाले ने इन लोगों को आँखें दी हैं या बटन। ऑस्ट्रेलिया ने इतना साफ बॉल बनाया (बॉल टेंपरिंग) और कोई भी इसके बारे में बात नहीं कर रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है बल्लेबाज़ का गेंद छोड़ते समय बोल्ड हो जाना।”

बासित अली ने आगे कहा है, “मुझे पता है सबूत नहीं होता। लेकिन मैं आज आपको सबूत भी देता हूँ। 53वें-54वें ओवर तक जब मोहम्मद शमी गेंदबाजी कर रहे थे और स्टीव स्मिथ बल्लेबाजी कर रहे थे, तब तक बॉल की साइन बाहर की ओर थी। इस ओवर में गेंद बाहर की ओर जा रही थी। इसे रिवर्स स्विंग नहीं कहते। रिवर्स स्विंग तब होती है जब साइन अंदर होती है और गेंद अंदर आती है।”

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर ने कहा है “16वें, 17वें और 18वें ओवर की गेंदबाजी देखिए। इस दौरान जिस गेंद पर विराट कोहली आउट हुए, उस गेंद की साइन देखिए। मिचेल स्टार्क के हाथ में बॉल थी और साइन बाहर की तरफ थी, लेकिन इसके बावजूद गेंद दूसरी तरफ जा रही थी। इसके अलावा जडेजा गेंद को ऑन साइड पर हिट कर रहे थे और गेंद प्वाइंट के ऊपर से जा रही थी। ऐसा लगता है अंपायर अंधे हो गए हैं। कैमरून ग्रीन ने जब पुजारा को गेंदबाजी की तब साइन अंदर थी। लेकिन वह बोल्ड हो गए।”

बासित ने अली ने यह भी कहा है, “बीसीसीआई इतना बड़ा बोर्ड है। क्या उन्हें यह सब नजर नहीं आ रहा है? इसका मतलब है कि क्रिकेट की ओर ध्यान नहीं है। आप फाइनल में पहुँच गए हैं तो सारी चीजें सही हो गईं। बहुत गलत क्रिकेट हो रही है।” बासित अली ने डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ द्वारा किए गए सैंड बॉल टेंपरिंग को याद करते हुए कहा है कि चोर चोरी से जाए, हेराफेरी से न जाए। उन्होंने आगे सवाल उठाते हुए कहा है, “क्या 15-16 ओवर में कभी रिवर्स स्विंग होती है, वह भी ड्यूक की गेंद? ड्यूक की गेंद कम से कम 40 ओवर के बाद रिवर्स स्विंग होती है। कूकाबुरा गेंद 18-20 ओवर्स के बाद रिवर्स स्विंग होती है। मुझे बड़ा अफसोस हुआ है।”

इस बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मार्नस लाबुशेन को क्रेप बैंड से गेंद पोंछते हुए देखा जा सकता है। आमतौर पर गेंदबाज गेंद पोंछने के लिए सॉफ्ट टॉवल का उपयोग करते हैं। वहीं, क्रेप बैंड खुरदुरा होता है। इससे बॉल टेंपरिंग की जाती है। इसलिए वीडियो सामने आने के बाद बॉल टेंपरिंग के दावों को बल मिल रहा है। 

62 दिन की अमरनाथ यात्रा, 1 जुलाई से शुरू-31 अगस्त को समाप्त: इस बार हलवा-डोसा-छोले सब बैन, अमित शाह ने सुरक्षा इंतजामों को लेकर की बैठक

अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra 2023) 1 जुलाई 2023 से शुरू हो रही है। 62 दिनों तक यात्रा चलेगी। 31 अगस्त को यात्रा समाप्त होगी। शुक्रवार (9 जून 2023) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने एक हाई लेवल मीटिंग में यात्रा को लेकर की गई सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (Shri Amarnath Ji Shrine Board) ने यात्रा के दौरान कई खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर ​दिया है।

यात्रा को लेकर अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल व सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बैठक की। रिपोर्ट्स के अनुसार बैठक में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख तपन डेका, उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ उपेंद्र द्विवेदी, सीआरपीएफ के महानिदेशक एसएल थाउसेन सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।

बता दें कि अमरनाथ यात्रा बेहद दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरती है। साथ ही यह आतंकियों के निशाने पर भी रहती है। यही कारण है कि इस दौरान सुरक्षा के काफी कड़े बंदोबस्त किए जाते हैं। श्रद्धालुओं को जत्थे में भेजा जाता है।

अमरनाथ यात्रा 2023 का नया फूड मेनू

श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने तीर्थयात्रियों की सेहत को देखते हुए स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। बोर्ड ने नया फूड मेनू जारी किया है। यह फूड मेनू तीर्थयात्रियों के साथ ही भोजन परोसने और बेचने के लिए यात्रा क्षेत्र में आने वाले लंगर संगठनों, फूड स्‍टॉलों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों पर लागू होगा।

अमरनाथ यात्रा 2023 के नए फूड मेनू में धार्मिक कारणों के चलते मांसाहार, शराब, तंबाकू, गुटखा, पान मसाला, धूम्रपान समेत सभी नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया गया है। तीर्थयात्रियों को पूड़ी, छोले-भटूरे, पिज्जा, बर्गर, स्टफ पराठा, डोसा, फ्राइड रोटी, मक्खन के साथ ब्रेड, अचार, चटनी, फ्राइड पापड़, चाऊमीन, फ्राइड राइस व अन्य फ्राइड और किसी भी प्रकार का फास्ट फूड खाने को नहीं मिलेगा। इसके साथ ही हलवा, जलेबी, गुलाब जामुन, लड्डू, मिठाइयाँ और रसगुल्ले पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

यात्रा में कोल्‍ड ड्रिंक्‍स का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित होगा। हालाँकि तीर्थयात्रियों को हर्बल चाय, कॉफी, कम फैट वाला दूध, फ्रूट जूस व वेजिटेबल सूप जैसे पेय पदार्थ पीने की अनुमति दी गई है। फ्राइड राइस पर प्रतिबंध है। लेकिन यात्री सामान्य चावल, पोहा, उत्तपम, इडली व सामान्य दाल-रोटी और चॉकलेट खा सकेंगे। खीर, जई, सूखे मेवे और शहद का सेवन करने की भी अनुमति दी गई है।

गौरतलब है कि साल 2022 की अमरनाथ यात्रा के दौरान प्राकृतिक कारणों के चलते करीब 42 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी। इसके बाद सरकार ने स्वास्थ्य प्रमाण पत्र को अनिवार्य कर दिया है। साथ ही तीर्थयात्रियों की सेहत को देखते हुए यात्रा के रास्ते में कई जगहों पर ऑक्सीजन बूथ बनाए गए हैं। वहीं, कई स्थानों पर अस्पताल भी बनाए गए हैं।

जुमे पर श्रीचंडी मंदिर में घुसा और पढ़ने लगा नमाज, हिंदुओं ने गंगाजल से किया शुद्धिकरण: CCTV फुटेज खँगाल रही पुलिस, UP के हापुड़ की घटना

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में शुक्रवार (9 जून 2023) को एक युवक द्वारा मंदिर में घुसकर नमाज पढ़ने का मामला सामने आया है। इसे देखकर मंदिर में आए हुए लोग आश्चर्यचकित रह गए। हालाँकि, श्रद्धालुओं और मंदिर के पुजारी ने युवक को वहाँ से भगा दिया। बाद में मंदिर को गंगाजल से धोकर पूजा-अर्चना की गई।

शुक्रवार की सुबह हापुड़ कोतवाली थाना क्षेत्र में चंडी रोड पर स्थित श्रीचंडी देवी मंदिर में युवक अंदर घुसकर नमाज पढ़ने लगा। इसकी जानकारी जैसे ही इलाके में फैली, भारी संख्या में लोग मंदिर के पास इकट्ठा हो गए। इसके साथ ही पुलिस भी मौके पर पहुँच गई।

हालाँकि, लोगों के पहुँचने के पहले ही युवक को लोग मंदिर से खदेड़ चुके थे। डीएम, एसपी समेत आला अधिकारियों घटनास्थल पर पहुँचे थे। उन्होंने युवक की पहचान के लिए सीसीटीवी की सीडीआर कब्जे में ले लिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सुबह करीब 4.40 बजे एक व्यक्ति मंदिर में अंदर घुस आया। अंदर आने के बाद उसने कपड़ा बिछाया और नमाज पढऩी शुरू कर दी। उस समय मंदिर में पुजारी और कुछ श्रद्धालु मौजूद थे। श्रद्धालुओं ने मंदिर के बाहर जाकर इसकी जानकारी दी तो यह बात शहर में फैल गई।

बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग मंदिर परिसर में पहुँचकर नारेबाजी करने लगे। हंगामे को देखकर दो थानों की पुलिस मौके पर पहुँची और लोगों को समझाने का प्रयास किया। लोगों ने पुलिस से आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की।

इस घटना को लेकर डीएम प्रेरणा शर्मा ने कहा, चंडी मंदिर का एक मैटर संज्ञान में आया है। मैंने और एसपी साहब ने यहाँ मंदिर कमिटी के लोगों और मौजूद लोगों से बात की। इस मैटर की जाँच की जा रही है। हापुड़ पुलिस ने अपने ट्वीट में कहा है कि घटना चंडी मंदिर के गेट पर हुई है।

इस घटना के बाद मंदिर को गंगाजल से धोया गया। वहीं, पुलिस ने इस संबंध में FIR दर्ज कर ली है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर युवक की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

पहलवानों को हेट स्पीच में दिल्ली पुलिस ने दी क्लीनचिट, इंटरनेशनल रेफरी का दावा- थाइलैंड में बृजभूषण से महिला रेसलर को असहज होते देखा था

भारतीय कुश्ती संघ के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों द्वारा यौन शोषण का लगाया गया आरोप राजनीति में उलझता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात के बाद दिल्ली पुलिस ने आपत्तिजनक बयानों के मामले में पहलवानों को क्लीन चिट दे दी है। वहीं, आरोप लगाने वाली कथित नाबालिग लड़की के पिता द्वारा झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने की बात स्वीकार करने के बाद अब एक अंतर्राष्ट्रीय रेफरी सामने आए हैं। रेफरी का कहा है कि भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह ने उनके सामने लड़कियों का यौन शोषण किया था।

दिल्ली पुलिस ने पहलवानों पर दर्ज केस के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट फाइल करते हुए उन्हें क्लीनचिट दी है। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया गया कि पहलवानों ने धरने के दौरान जंतर मंतर पर कोई भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया था। अदालत इस मामले पर 7 जुलाई 2023 को सुनवाई करेगी।

आपत्तिजनक बयान को लेकर पहलवानों को क्लीनचिट

दरअसल, बमबम महाराज नाम के व्यक्ति ने पाटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर पहलवानों के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की थी। याचिका में कहा गया था कि धरने पर बैठे पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया देश को बदनाम कर रहे हैं। इसके बाद अदालत ने पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट माँगी थी।

दिल्ली पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए पहलवानों को क्लीन चिट दे दी है और उनके खिलाफ की गई शिकायत को बंद करने का आग्रह किया है। पुलिस ने अदालत में बताया कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान जो भी भाषण और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था, वो अज्ञानी सिख प्रदर्शनकारियों ने किया था। पहलवानों ने ऐसा नहीं किया था।

पहलवानों पर दर्ज हैं दंगा भड़काने का केस

बता दें कि जिस दिन नए संसद भवन का उद्घाटन था, उस दिन यानी 28 मई 2023 को खाप पंचायतों और किसान संगठनों से जुड़े लोगों ने संसद भवन की तरफ मार्च किया था। इनमें विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया भी थे। इस मामले में भी पुलिस ने पहलवानों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी। इस दौरान पहलवानों, उनके समर्थकों व पुलिस के बीच झड़प हो गई थी। इस झड़प में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट भी आई थी। बाद पुलिस ने पहलवानों व उनके समर्थकों समेत कई लोगों को हिरासत में लिया था। हालाँकि, शाम तक पुलिस ने इन लोगों को रिहा कर दिया था।

बाद में दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस ने कहा था, “पहलवान बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगट और प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कुछ पहलवान विरोध करने के लिए रात में जंतर-मंतर आए थे। उन्हें अनुमति नहीं दी गई और वापस भेज दिया गया।”

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पहलवानों, प्रदर्शन के आयोजकों व अन्य लोगों के खिलाफ IPC की धारा धारा 147 (दंगा करना), धारा 149 (गैरकानूनी जमावड़ा), 186 (सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालना), 188 (सरकारी कर्मचारी के विधिवत आदेश की अवहेलना), 332 (सरकारी कर्मचारी के साथ हिंसा करना) और 353 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए आपराधिक बल) तथा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत FIR दर्ज की है।

मोदी तेरी कब्र खुदेगी… जैसे नारे धरनास्थल पर लगे थे

दरअसल, धरने के दौरान जंतर मंतर पर कई लोगों ने देश विरोधी नारे लगाए थे। इतना ही नहीं, ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’, ‘हमें चाहिए आजादी’ जैसे घोर आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे। यहाँ तक कि पहलवानों से मिलने गई उड़न परी कहलाने वाली IOC की अध्यक्ष पीटी उषा के साथ भी मारपीट और बदतमीजी करने की बात सामने आई थी।

इस घटना से पहले पीटी ऊषा ने कहा था कि देश के पहलवान सड़कों पर बैठकर देश को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने पहलवानों की इस हरकत को अनुशासनहीनता बताया था। पीटी उषा ने कहा था कि अगर पहलवानों को कोई दिक्कत है तो उन्हें IOC के पास आना चाहिए। उनके बयान पर विनेश फोगाट और अन्य पहलवानों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इसके बाद उनके साथ बदतमीजी की घटना हुई थी।

अंतरराष्ट्रीय रेफरी ने कहा- मेरे सामने बृजभूषण सिंह ने किया शोषण

बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक जगबीर सिंह नाम के एक अंतर्राष्ट्रीय रेफरी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद द्वारा किए गए यौन शोषण के वे गवाह है और साल 2013 में थाइलैंड में एक घटना उनके सामने हुई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस एक पहलवान को लेकर बृजभूषण सिंह के घर क्राइम सीन रिक्रिएट करने के लिए पहुँची है।

जगबीर सिंह ने आजतक से बात करते हुए कहा कि डिनर के समय बृजभूषण सिंह महिला पहलवानों के बगल में खड़े थे। इससे महिला पहलवान असहज महसूस कर रही थीं। एक पहलवान ने बृजभूषण सिंह से खुद को छुड़ाया और वहाँ से चली गई थी। जगबीर ने कहा कि उन्होंने देखा था कि महिला पहलवान बृजभूषण शरण सिंह से असहज महसूस कर रही हैं।

नाबालिग के पिता बता चुके हैं झूठी रिपोर्ट कराने की बात

जिस नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण का आरोप लगाकर बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ POCSO में शिकायत दर्ज करवाई गई, उस नाबालिग के पिता ने आरोप को झूठा बताया।भास्कर के अनुसार, नाबालिग पहलवान के पिता ने कहा, “मेरी बेटी के साथ भेदभाव के कारण हमारे अंदर गुस्सा था। फेडरेशन ने हमारी अपील नहीं सुनी। हमने पुलिस को जो शिकायत दी थी, उसमें कुछ सच और कुछ गलत था। कोर्ट में जाकर मैंने स्पष्ट कर दिया है।”

हिंदुस्तान ने नाबालिग लड़की के पिता के हवाले से कहा है, “यौन उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई, लेकिन मेरी बेटी के साथ भेदभाव किया गया। मैंने 5 जून को सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट कर दिया था कि महासंघ के अध्यक्ष (बृजभूषण शरण सिंह) ने किसी तरह का उत्पीड़न नहीं किया। लेकिन मैं भेदभाव की शिकायत से पीछे नहीं हट रहा।”