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कभी-कभी ह्यूमन एरर हो जाता है… रेल मंत्री रहते दुर्घटना पर बोलती थी ममता बनर्जी, लालू के समय 550 बार पटरी से उतरी ट्रेनें

ओडिशा के बालासोर में हुए शुक्रवार (2 जून 2023) की शाम को हुए भीषण रेल हादसे में अब तक 288 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसको लेकर देश में राजनीति तेज हो गई है। विपक्षी दल रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से इस्तीफा माँग रहे हैं। हालाँकि, रेल मंत्री कह रहे है कि यह राजनीति करने का वक्त नहीं है।

अश्विनी से इस्तीफा माँगने वालों में रेल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हैं। ये तीनों ही नेता केंद्र की विभिन्न सरकारों में रेल मंत्री रह चुके हैं। इनका आरोप है कि ये अब तक सबसे बड़ी रेल दुर्घटना है, इसलिए रेल मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।

ममता बनर्जी तो इसके लिए मौत के आँकड़ें तक बढ़ाने की कोशिश करती नजर आईं। उन्होंने यहाँ तक झूठा दावा कर दिया कि बालासोर में दुर्घटनाग्रस्त हुईं दो बोगियों में फँसे लोगों को रेस्क्यू करने का भी काम नहीं किया गया। हालाँकि, मौके पर मौजूद अश्विनी ने ममता को बीच में रोका और उन्होंने मौत के आँकड़ें सही बताए और रेस्क्यू की बात को झूठा साबित किया।

साल 2010 में ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए पश्चिम बंगाल के सैंथिया में एक बड़ा रेल हादसा हुआ था। इस हादसे में सैकड़ों लोग मारे गए थे। राहत और बचाव कार्य की ऐसी स्थिति थी कि समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण कई लोगों की जान चली थी। घटनास्थल से मलबे को हटाने में कई दिन लग गए थे। मृतकों के अंतिम संस्कार तक की उचित व्यवस्था नहीं की गई थी।

हालाँकि, इन तीनों लोगों के रेल मंत्री के रूप में कार्यकाल देखें तो वो ग्रस्त सवालों के घेरे में आ जाएँगे। आँकड़े बताते हैं कि रेलमंत्री के रूप में सबसे अधिक रेल दुर्घटनाएँ और लोगों की मौत नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुए और उसके बाद ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए।

रेलमंत्री के रूप में नीतीश कुमार

बिहार के सीएम नीतीश कुमार पहली बार अटल सरकार में रेल मंत्री बने थे। नीतीश कुमार के पहले ही कार्यकाल के दौरान 1999 में गैसल में बड़ा रेल हादसा हुआ था, जिसमें 285 लोगों की मौत हुई थी। हालाँकि, इस हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके पहले रेलमंत्री रहते हुए एक हादसे के बाद लाल बहादुर शास्त्री भी इस्तीफा दे चुके थे। नीतीश कुमार दूसरे रेलमंत्री थे।

साल 2001 में एक बार फिर नीतीश को रेल मंत्रालय मिला। इस पर वह साल 2004 तक रहे। नीतीश कुमार के कार्यकाल में कुल 79 रेल हादसे हुए, जिनमें कुल 1,527 लोगों की मौत हुई। वहीं, नीतीश कुमार के रेल मंत्री रहते ट्रेन के बेपटरी होने की 1000 घटनाएँ हुईं।

रेल मंत्री ममता बनर्जी हादसे को लेकर संसद में जवाब दी थीं

ममता बनर्जी दो बार रेल मंत्री रह चुकी हैं। एक बार अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल 1999 में और दूसरा यूपीए-2 के दौरान 2009 में। ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए 54 रेल दुर्घटनाएँ हुईं थीं, जिनमें कुल 1451 लोगों की मौत हुई थीं। इसके साथ ही ममता के कार्यकाल में ट्रेनों के पटरी से उतरने की 839 घटनाएँ हुई थीं।

इस दौरान ममता बनर्जी पर सवाल भी खूब उठे थे। इसको लेकर उन्हें संसद में जवाब भी देना पड़ा था। लोकसभा में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा था, “कभी ह्यूमन एरर (मानवीय गलती) हो जाता है। वो भी हमलोग देखता है कि इसे नहीं होना चाहिए। इसको जितना जल्दी चेंज करके अपडेट करना है।”

रेलमंत्री के रूप में लालू यादव

राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मनमोहन सिंह की नेतृत्व वाली यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री बने थे। लालू के 5 साल के कार्यकाल में नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के कार्यकाल की तुलना में कम हादसे हुए थे। लालू के कार्यकाल में कुल 51 हादसे हुए। इन हादसों में कुल 1,159 लोगों की जान गई। ट्रेनों के पटरी से उतरने की 550 घटनाएँ हुईं।

भाजपा नेता ने बताया काम का रिकॉर्ड

इन नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और रेलमंत्री की इस्तीफे की माँग के बाद भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने बताया है कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में रेल हादसों की कितनी घटनाएँ हुईं, कितने लोग मारे गए और कितनी रेलगाड़ियाँ बेपटरी हुईं। वहीं, ममता बनर्जी के कार्यकाल में इस तरह की कितनी घटनाएँ हुईं और लालू के कार्यकाल में कितनी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि भाजपा के कार्यकाल में रेलवे में कितना काम हुआ है।

मालवीय ने ट्वीट किया, “पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए भारतीय रेलवे द्वारा उठाए गए कुछ कदम इस प्रकार हैं: पटरियों के रखरखाव और नवीनीकरण के लिए रिकॉर्ड काम किया गया है। अकेले वर्ष 2022-23 में ही 5,227 किलोमीटर के ट्रैक नवीनीकरण और रखरखाव का काम किया गया है। पिछले दस वर्षों में कुल 37,159 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण किया गया। औसतन 3,716 किमी प्रति वर्ष। इसकी तुलना में वर्ष 2013-14 में केवल 2,885 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण किया गया।”

मालवीय ने आगे लिखा, “ब्रॉडगेज मार्ग पर सभी मानवरहित फाटकों को समाप्त कर दिया गया है। रेलवे मार्गों पर ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (TCAS) या कवच लगाने का काम तेजी से चल रहा है। देश भर में रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) और रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। पारंपरिक पुराने कोचों को अति सुरक्षित और अत्याधुनिक एलएचबी कोचों से बदलने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।”

अब भारत का हर ट्विटर यूजर होगा फैक्ट-चेकर: ट्विटर का नया फीचर लागू हुआ, फर्जी फोटो-वीडियो फैलाने वाले ऐसे होंगे बेनकाब

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क सोशल मीडिया साइट ट्विटर खरीदने के बाद से इस पर लगातार बदलाव करते नजर आ रहे हैं। दरअसल, अब ट्विटर ने ‘नोट्स ऑन मीडिया’ फीचर लॉन्च किया है। इस फीचर की सहायता से ट्वीट यूजर फेक फोटो और वीडियो क्लिप को आसानी से पहचान सकेंगे। यानि कि अब फेक फोटो, वीडियो वायरल होने पर लगाम लग सकेगी। खास बात यह है कि यह फीचर अब भारत में भी उपलब्ध है।

क्या है नोट्स ऑन मीडिया?

‘नोट्स ऑन मीडिया’ की लॉन्चिंग को लेकर ट्विटर के कम्युनिटी नोट्स ने ट्वीट कर कहा है, “AI जनरेटेड फोटोज से लेकर एडिट किए गए वीडियो तक, फेक मीडिया का सामने आना आम बात है। इसलिए हम नोट्स ऑन मीडिया सुविधा की शुरुआत कर रहे हैं। इससे ट्विटर यूजर्स के हाथों में एक अलग ही ताकत आ जाएगी। एक फोटो से जुड़ा नोट्स ओटोमेटिक ही अभी और बाद में अपडेट किए गए फोटो दिखाएगा।”

एक अन्य ट्वीट में ट्विटर की ओर से कहा गया है, “यदि आप 10 या अधिक ट्वीट करने वाले यूजर हैं तो आपको कुछ ट्वीट्स पर ‘अबाउट फोटो’ का एक नया ऑप्शन दिखाई देगा। इस ऑप्शन का यूज तब किया जा सकता है जब यूजर को लगता है कि शायद फ़ोटो फेक है। भले ही वह फोटो किसी अन्य के ट्वीट में भी हो।”

कैसे काम करेगा ‘नोट्स ऑन मीडिया’ फीचर

ट्विटर ने कहा है कि यूजर्स जब फोटो शेयर करते हुए उस फोटो के बारे में लिख देंगे या नोट लगा देंगे तब अन्य यूजर्स को उस फ़ोटो पर एक नोट दिखाई देने लगेगा। यह नोट ‘अबाउट द इमेज’ ऑप्शन में दिखेगा। इस पर जाने के बाद यूजर्स को यह जानने में आसानी होगी कि फोटो ओरिजनल है या फेक। हालाँकि ट्विटर ने अभी यह साफ किया है कि फिलहाल यह फीचर सिर्फ एक फोटो के लिए ही उपलब्ध है। टेस्टिंग पूरी हो जाने के बाद इसे कई फोटोज, जीआईएफ और वीडियो के लिए भी शुरू किया जाएगा

ट्विटर का यह फीचर फिलहाल टेस्टिंग मोड में है। साथ ही यह सभी दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में ही शुरू किया गया है। लेकिन टेस्टिंग सफल होने के बाद जब यह दुनिया भर में शुरू हो जाएगा। तब सिर्फ एक ‘नोट्स’ से किसी भी फोटो, वीडियो,  GIF या अन्य मीडिया की जानकारी सामने आ जाएगी। सीधे शब्दों में कहें तो फेक फोटो और वीडियो वायरल नहीं हो पाएँगे।

ट्विटर में लगातार हो रहे बदलाव

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है जब ट्विटर में कुछ बदलाव हो रहा हो। बल्कि एलन मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद से इसमें कई बदलाव देखने को मिले हैं। यहाँ तक कि अप्रैल में ट्विटर का लोगो भी बदल गया था। तब ट्विटर के लोगो में दिखने वाली चिड़िया की जगह एक कुत्ता नजर आ रहा था। यह कुत्ता Doge कॉइन का भी लोगो है। हालाँकि कुछ दिन बाद ट्विटर के लोगो में नीली चिड़िया नजर आने लगी थी।

ट्विटर वेरिफिकेशन भी किया है लॉन्च

एलन मस्क ने ट्विटर पर जो सबसे बड़ा बदलाव किया है वह है ट्विटर वेरिफिकेशन। ट्विटर ने वेरिफिकेशन बैज के रूप में दिए जाने वाले नीली बैज में बदलाव कर इसे सरकारी कार्यालयों व संस्थानों के लिए ब्राउन, तथा प्राइवेट और वेरिफाइड कंपनियों को गोल्डन व अन्य व्यक्तियों व संस्थाओं को नीले बैज में बदल दिया। यही नहीं, ट्विटर इसके लिए अब मासिक शुल्क भी ले रहा है।

बांदा में हिन्दू नाबालिग का गुड्डू मुस्लिम ने किया अपहरण, सूरत ले जाकर गैंगरेप… धर्मांतरण और निकाह का दबाव भी बनाया

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक नाबालिग हिन्दू लड़की का अपहरण गुड्डू मुस्लिम नाम के एक व्यक्ति ने किया और अपने साथ गुजरात ले गया। यहाँ पीड़िता से 3 मुस्लिम युवकों ने 15 दिनों तक गैंगरेप किया। पीड़िता पर धर्म परिवर्तन कर के निकाह का भी दबाव बनाया गया। ऐसा न करने पर उसे बेचने की भी धमकी दी गई। इस पूरी साजिश की सूत्रधार एक मुस्लिम महिला को बताया जा रहा है। पुलिस ने 30 मई 2023 (मंगलवार) को लड़की को सूरत शहर से बरामद कर लिया है। फरार हुए आरोपितों की तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला बांदा जिले के नरैनी थानाक्षेत्र के राजीव नगर इलाके का है। यहाँ के रहने वाले एक व्यक्ति ने 15 मई 2023 (सोमवार) को अपनी बेटी के किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा अपहरण की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में बताया गया कि एक दिन पहले (14 मई) को उनकी 16 वर्षीया नाबालिग बेटी सब्जी खरीदने गई पर वो लौट कर नहीं आई। लड़की के पिता ने अपनी बेटी के 2 अलग-अलग नम्बरों पर कॉल किया पर वो बंद आए। परिजनों ने रिश्तेदारों के घर पर तलाशा पर लड़की नहीं मिली। पुलिस ने यह केस IPC 363 के तहत दर्ज कर लिया और जाँच शुरू कर दी।

पुलिस लड़की तलाश ही कर रही थी कि उसने अपनी माँ को कॉल किया। फोन पर पीड़िता ने अपनी लोकेशन गुजरात के सूरत शहर में गणेश नगर क्षेत्र में बताई। लड़की ने यह भी बताया कि उसके साथ गैंगरेप किया जा रहा है। लड़की की माँ ने सूरत में रहने वाले अपने भाई को इस बात की जानकारी दी। लड़की के मामा ने स्थानीय पुलिस की मदद से 30 मई को पीड़िता को बरामद कर लिया। हालाँकि दबिश के दौरान आरोपित भाग निकले। गुरुवार (1 जून 2023) को UP पुलिस पीड़िता को ले कर बांदा पहुँची।

पूछताछ में लड़की ने बताया कि बांदा में उसी के मोहल्ले में रहने वाली एक मुस्लिम महिला अक्सर उसे घर पर बुलाया करती थी। इस दौरान मुस्लिम महिला ने लड़की का परिचय रेडीमेड की दुकान पर काम करने वाले एक युवक से करवाया जिसका नाम गुड्डू था। पीड़िता के अनुसार मुस्लिम महिला अक्सर अपने मोबाइल फोन से दोनों की बात करवाया करती थी। कुछ ही दिनों में दोनों की जान-पहचान हो गई। इस बीच लड़की अपने व्हाट्सएप की प्रोफ़ाइल फोटो भी अलग तरह से लगाने लगी थी। ऑपइंडिया को पीड़िता के व्हाटसएप का प्रोफ़ाइल फोटो मिला जिसमें एक शेखनुमा मुस्लिम व्यक्ति एक नाबालिग लग रही लड़की पर छतरी ताने हुए है। व्हाट्सएप पर लास्ट सीन 17 मई को शाम 3:43 पर है। व्हाट्सएप के स्टेट्स के तौर पर दिल के आधे दर्जन इमोजी के साथ I Love Drive लिखा हुआ है।

पीड़िता की व्हाट्सएप प्रोफ़ाइल फोटो

पीड़िता ने बताया कि 14 मई 2023 को घर से सब्जी लेने जाते हुए गुड्डू मुस्लिम ने उसे नशीला पदार्थ सुंघा कर बेहोश कर दिया। पीड़िता के अनुसार इस दौरान बेहोशी की हालत में गुड्डू मुस्लिम पीड़िता को 15 मई को ट्रेन से अतर्रा से गुजरात के सूरत शहर ले गया। सूरत में उसने लड़की को एक कमरे में रखा। मकान मालिक से उसने पीड़िता को अपनी पत्नी बताया। इसी के साथ वो लड़की को मुँह खोलने पर बेचने की भी धमकी दिया करता था। लड़की का आरोप है कि यहाँ गुड्डू के 2 अन्य दोस्त भी आते थे जो बारी-बारी से उसके साथ रेप करते थे। कुछ दिनों बाद गुड्डू ने लड़की पर इस्लाम कबूल कर के खुद से निकाह का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

इस बीच लड़की को एक दिन अपनी माँ से बात करने का मौक़ा मिल गया। लड़की ने अपनी लोकेशन माँ को बताई और वहाँ से उसके मामा ने पीड़िता को मुक्त करवाया। पुलिस का कहना है कि पीड़िता के कोर्ट में दिए 164 के बयान के आधार पर अन्य धाराएँ बढ़ाई जा रहीं हैं। साथ ही आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को गुजरात के लिए रवाना कर दिया गया है।

कैसे हो गया ‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ में बदलाव? बालासोर ट्रेन दुर्घटना का यही है कारण, जानिए क्या है और कैसे करता है काम

ओडिशा के बालासोर में हुए भीषण ट्रेन हादसे की प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि यह दुर्घटना इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण हुआ। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने मामले की जाँच की है। घटना के कारणों और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली है।

उन्होंने कहा कि इसमें अभी तक किसी तरह की साजिश का पता नहीं चला है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (Railway Electronic Interlocking) में बदलाव किसी कारण हुआ है या किसी ने जानबूझकर की है, इसकी जाँच की जा रही है।

क्या होता इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग

दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक तकनीक है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल रेलवे की सिग्नल व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह सुरक्षा प्रणाली ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिग्नल और स्विच के बीच ऑपरेटिंग सिस्टम को कंट्रोल करती है। यह सिस्टम रेलवे लाइनों पर सुरक्षित और अवरुद्ध चल रही ट्रेनों के बीच सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करती है। इसकी मदद से रेल यार्ड के कामों को कंट्रोल किया जाता है।

इंटरलॉकिंग पहले मैनुअली होती थी, लेकिन अब यह मैनुअली नहीं होती है। अब यह इलेक्ट्रॉनिक हो गई है। रेलवे सिग्नलिंग अन-इंटरलॉक्ड सिग्नलिंग सिस्टम, मैकेनिकल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल इंटरलॉकिंग से लेकर अब तक के मॉर्डन हाईटेक सिग्नलिंग तक एक लंबा सफर तय कर चुका है। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लॉजिक सॉफ्टवेयर बेस्ड होता है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) एक ऐसी सिग्नलिंग व्यवस्था है, जिसके जरिए यार्ड में फंक्शंस इस तरह कंट्रोल होते हैं, जिससे ट्रेन के एक कंट्रोल्ड एरिया के माध्यम से सुरक्षित तरीके से गुजर सके। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के कई फायदे हैं। इसमें कोई भी मोडिफिकेशन आसान होता है। ईआई सिस्टम एक प्रोसेसर बेस्ड सिस्टम होता है। फेल होने के मामले में भी इसमें न्यूनतम सिस्टम डाउन टाइम होता है।

EI ऑपरेशनल कमांड, स्विच और सिग्नल स्थितियों को ऑपरेट करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक निर्देश दिए जाते हैं, जबकि इसके पहले के सिस्टम में ऐसा नहीं था। इस सिस्टम में मानवी गलतियों (human errors) की बहुत कम गुंजाइश होती है। इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर नेटवर्क के इस्तेमाल से ट्रेनों के बीच ट्रांजिशन को कंट्रोल किया जाता है।

कैसे काम करता है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग

जब एक ट्रेन रेल नेटवर्क पर चलती है तो उसके पास एक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम द्वारा प्रशिक्षित संकेतक (trained sensor) होते हैं। ये सेंसर ट्रेन की स्थिति, गति और अन्य जानकारी को सिग्नलिंग सिस्टम को भेजते हैं। सिग्नलिंग सिस्टम फिर उस ट्रेन के लिए उचित संकेत जारी करता है। इससे ट्रेन की गति, रुकावट आदि कंट्रोल किया जाता है। यह एक प्रक्रिया है, जो चलती ट्रेन मे लगातार होती रहती है।

इस प्रक्रिया से ट्रेनों को उचित संकेत मिलते रहते हैं, ताकि उनके परिचालन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित रहे। इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों में माइक्रो प्रोसेसर, सेंसर, इंटरफेस मॉड्यूल, नेटवर्क कनेक्टिविटी और सफलतापूर्वक टेस्ट किए गए एल्गोरिदम शामिल होते हैं। इंटरलॉकिंग सिस्टम इन्हीं सिग्नल, प्वॉइंट्स, ट्रैक और उनकी स्थिति को मॉनिटर करता है।

इसे दूसरे अर्थ में ऐसे समझें, रेलवे स्टेशन के पास यार्डों में कई लाइनें होती हैं। इन लाइनों को आपस में जोड़ने के लिए पॉइंट्स होते हैं और इन पॉइंट्स को चलाने के लिए हर पॉइंट पर एक मोटर लगी होती है। इन पॉइंट्स से ही ट्रेनों को एक ट्रैक से दूसरी ट्रैक पर भेजा जाता है। सिग्नल के जरिए लोको पायलट को अनुमति दी जाती है कि वह ट्रेन के साथ रेलवे स्टेशन के यार्ड में प्रवेश करे।

दरअसल, पॉइंट्स और सिग्नलों के बीच में एक लॉकिंग होती है। लॉकिंग कुछ ऐसी होती है कि पॉइंट सेट होने के बाद जिस लाइन का रूट सेट हुआ हो, उसी लाइन के लिए सिग्नल जाए। ये सिग्नल इंटरलॉकिंग है। इंटरलॉकिंग का मतलब है कि अगर लूप लाइन सेट है तो लोको पायलट को मेन लाइन का सिग्नल नहीं जाएगा। वहीं, मेन लाइन सेट है तो लूप लाइन का सिग्नल नहीं जाएगा।

क्या हुआ था बालासोर में?

ओडिशा रेल दुर्घटना में कोरोमंडल एक्सप्रेस (Coromandel Express Train) मेन लाइन से लूप लाइन पर चली गई थी। यह ट्रेन बाहानगा बाजार स्टेशन से थोड़ा सा पहले लूप लाइन (Loop Line) पर चली गई थी, जहाँ पहले से ही एक मालगाड़ी खड़ी थी। इसी मालगाड़ी से कोरोमंडल एक्सप्रेस टकरा गई थी। इस टक्कर के बाद ट्रेन के कुछ डिब्बे दूसरी लाइन पर जा गरे।

जिन मेन डाउन लाइन पर डिब्बे गिरे, उस पर बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट जा रही थी, जिसकी टक्कर इन डिब्बों से हो गई और यह बड़ा हादसा हो गया। इसमें सिग्नल मेन लाइन पर सेट किया जाना था, लेकिन सेट कर दिया गया लूप लाइन पर। यही जाँच की कोशिश की जा रही है कि यह जानबूझकर किसी ने ऐसा किया या फिर किसी अन्य कारणों से यह हुआ। यदि ऐसा हुआ तो वो कौन से कारण थे।

‘तुम्हारा फिगर बढ़िया है, डेट पर चलोगी?’ – महिला को ये कहना यौन उत्पीड़न, मुंबई की अदालत ने ख़ारिज की जमानत अर्जी

मुंबई की एक अदालत ने माना है कि महिला सहकर्मी के फिगर की तारीफ करना और उसे डेट पर ले जाने के लिए पूछना यौन उत्पीड़न है। इसके साथ ही कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के आरोपित रियल एस्टेट कंपनी के दो कर्मचारियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला सहकर्मी के यौन उत्पीड़न आरोपितों की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए मुंबई के सत्र न्यायाधीश एजेड खान ने कहा है, “यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें आरोपित को अग्रिम जमानत दे दी जाए। इस मामले के कई पहलू हैं। ऐसे में आरोपितों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ होना जरूरी है। अन्यथा केस प्रभावित हो सकता है।”

कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए यह भी कहा है कि एक आरोपित के पिता और ऑफिस के अन्य कर्मचारियों ने पीड़िता पर दबाव बनाने का प्रयास किया था। इसमें कोई दो राय नहीं है कि मामला गंभीर है और एक महिला की गरिमा से जुड़ा हुआ है। वहीं, दूसरे आरोपित ने भी महिला का यौन उत्पीड़न के साथ उसकी गरिमा को भी ठेस पहुँचाई है। यही नहीं, ऑफिस में गंदी भाषा का भी उपयोग किया।

दरअसल, रियल एस्टेट कंपनी में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने 24 अप्रैल 2023 को अपने पुरुष सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। आरोपित कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर और सेल्स मैनेजर के रूप में काम करते हैं। पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 354A, 354D तथा 509 के तहत मामला दर्ज किया था।

पीड़िता के वकील ने कोर्ट में कहा है कि सबूतों और गवाहों से पता चलता है कि आरोपितों ने 1 मार्च से 15 अप्रैल के बीच यौन उत्पीड़न किया। साथ ही आरोपित, महिला को “मैडम, आपने खुद को मेंटेन रखा है। आपका फिगर बहुत खूबसूरत है। क्या आपने मेरे साथ बाहर जाने के बारे में सोचा है?” कह कर परेशान कर रहे थे और उसका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। वहीं, आरोपितों ने खुद पर लगे आरोपों को झूठा बताया है। साथ ही कहा है कि उन्हें फँसाने की कोशिश की जा रही है। 

सुहागरात के लिए कमरे में गए पति-पत्नी, सुबह मिली दोनों की लाश: हार्ट अटैक बताया जा रहा कारण, जाँच में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में शादी की पहली ही रात दूल्हा और दुल्हन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। पति-पत्नी की लाश सुबह उनके कमरे से बरामद हुई है। परिजनों की सूचना पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्ज़े में ले कर जाँच शुरू कर दी है। मौत के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना बुधवार (31 मई 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला थानाक्षेत्र कैसरगंज के गाँव टेपरहनपुरवा गोड़हिया का है। 30 मई 2023 (मंगलवार) को इस गाँव के सुंदर यादव नाम के व्यक्ति के बेटे प्रताप की शादी गोलनपुरवा के परशुराम यादव की बेटी पुष्पा से हुई थी। 31 मई को बारात विदा हो कर आई थी। रात में लगभग 11 बजे 22 वर्षीय प्रताप यादव अपनी 20 वर्षीया पत्नी पुष्पा के पास गया था लेकिन गुरुवार (1 जून 2023) को सुबह काफी देर हो जाने के बाद भी वो बाहर नहीं आया। घर वालों ने सोता समझ कर जगाने के लिए दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब नहीं मिला।

आखिरकार परिजनों ने खिड़की से झाँक कर देखा तो बिस्तर पर पति-पत्नी बेसुध पड़े थे। जैसे-तैसे जब लोग अंदर गए तो पुष्पा और प्रताप को मृत पाया। मामले की सूचना लड़की के घर वालों को दी गई। परिजनों का कहना है कि रात तक उन्हें किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं दिखी। शादी भी धूमधाम से हुई थी। आखिरकार पूरे मामले से पुलिस को अवगत करवाया गया।

पुलिस ने प्रताप और पुष्पा के घर वालों से पूछताछ की मगर उन्होंने किसी भी जानकारी होने से मना किया। पुलिस को पति-पत्नी द्वारा की गई उल्टी के कुछ अवशेष मिले। जिसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए कहा। हालाँकि, परिवार पहले वाले दोनों शवों का पोस्टमार्टम करवाने के लिए राजी नहीं हुआ लेकिन फिर उन्हें पुलिस द्वारा समझाया गया।

इसके बाद पुलिस ने दोनों शवों को कब्ज़े में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के मुताबिक प्रारम्भिक जाँच में दोनों के शव पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं। शुरू में लगा कि ऐसा जहर खाने के कारण हुआ है। हालाँकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया कि ये मौत हार्ट अटैक से हुई है।

इस्लामी आतंकवाद की पोल खोलने आ रही हैं ’72 हूरें’, टीजर हुआ जारी: 9/11 से लेकर मुंबई सीरियल ब्लास्ट तक की दिखेगी कहानी

इस्लामिक आतंकवाद से पूरी दुनिया प्रभावित है। आतंक के आका काफिरों को मारने और जिहाद के लिए मुस्लिम युवकों को जन्नत और 72 हूरों का लालच देते हैं। इस लालच में फँसकर मुस्लिम आतंकी बन जाते हैं और फिर न केवल दूसरों बल्कि खुद को भी मारने के लिए तैयार हो जाते हैं। इस्लामवाद के इसी मिथक को तोड़ने के लिए ’72 हूरें’ (72 Hoorain First Look) नाम से फिल्म आ रही है। फिल्म 7 जुलाई 2023 को रिलीज होगी।

इस फिल्म का टीजर रविवार (4 जून, 2023) को जारी किया गया। फिल्म आतंक के आकाओं द्वारा मुस्लिमों को बहकाकर उन्हें 72 हूरों का लालच देकर आतंकी बनाने की घटनाओं पर आधारित है। पवन मल्होत्रा और आमिर बशीर स्टारर फिल्म ’72 हूरें’ के डायरेक्टर दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संजय पूरन सिंह हैं। गुलाब सिंह तंवर, किरण डागर, अनिरूद्ध तँवर, अशोक पंडित फिल्म के प्रोड्यूसर हैं। फिल्म का टीजर ऐसे वक्त में आया है जब देश में ‘लव जिहाद’ की घटनाएँ लगातार सामने आ रहीं हैं। साथ ही आतंक और ‘लव जिहाद’ पर बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ चर्चा में है।

’72 हूरें’ के टीजर (72 Hoorain Teaser) में साल 2011 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेन सेंटर में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार ओसामा बिन लादेन से लेकर, मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब तथा साल 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट में शामिल याकूब मेनन, साल 1999 में दिल्ली प्लेन हाईजैक मामले के आरोपित आतंकी मशूद अजहर और 2006 के मुंबई ट्रेन बम ब्लास्ट के आरोपित आतंकी हाफिज सईद समेत कई आतंकियों के 72 हूरों के चक्कर में आतंकी बनने तथा उसके बाद मिली खौफनाक मौत (जो आतंकी मारे गए हैं) के बारे में बताया गया है।

फिल्म का टीजर (फर्स्ट लुक) शेयर करते हुए निर्माता अशोक पंडित ने एक ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने लिखा है, “जैसा कि वादा किया गया था, हम आपके लिए हमारी फिल्म ’72 हूरें’ का फर्स्ट लुक पेश कर रहे हैं। मुझे यकीन है कि यह आपको पसंद आएगा। क्या होगा यदि आप आतंक के आकाओं द्वारा दिए गए आश्वासन के उलट ’72 कुँवारियों’ से मिलने की बजाए एक खौफनाक मौत मर जाते हैं। पेश है अपनी आने वाली फिल्म ’72 हूरें’ का फर्स्ट लुक। यह फिल्म 7 जुलाई, 2023 को रिलीज होगी।”

अल-शबाब ने युगांडा के 54 सैनिकों को मार डाला, इस्लामी शरिया की सत्ता स्थापित करना है लक्ष्य

युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी कागुटा मुसेवेनी ने जानकारी दी है कि सोमालिया में आतंकियों ने उनके देश के 54 सैनिकों की हत्या कर दी है। ये सैनिक ‘अफ्रीकन यूनियन पीसकीपर्स’ का हिस्सा थे। सोमलिया में उनके बेस पर हमला कर के इस घटना को अंजाम दिया गया है। मुसेवेनी ने शनिवार (3 जून, 2023) को इस घटना के बारे में बताया। उक्त घटना एक सप्ताह पहले सोमालिया की राजधानी मोगादिशु से 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बुलामरेर बेस पर हुई।

ये इलाका सोमालिया की राजधानी से दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। आतंकी संगठन अल-शबाब का कहना है कि इस आत्मघाती हमले में उसने 137 सैनिकों की हत्या की है। उसने इस घटना को 26 मई को अंजाम दिए जाने की बात बताई है। हालाँकि, इस घटना के बाद ‘युगांडा पीपल्स डिफेंस फोर्सेज’ ने इसके बाद बेस पर वापस नियंत्रण स्थापित कर लिया है। राष्ट्रपति मुसेवेनी ने कहा कि घटना के बाद साहस और बहादुरी दिखाते हुए सैनिकों ने एक्शन लिया।

कुछ दिनों पहले उन्होंने हमले के बारे में जानकारी तो दी थी, लेकिन ये नहीं बताया था कि कितने लोग मारे गए हैं। अल-शबाब 2006 से ही सोमालिया में हिंसा कर रहा है। वो चाहता है कि सोमालिया में पश्चिमी देशों के समर्थन वाली सरकार को हटा कर शरिया का शासन स्थापित किया जाए। अगस्त 2022 में हसन शेख महमूद की जीत के बाद इस इस्लामी आतंकी संगठन का प्रभाव कम हुआ था। लेकिन, ये अब भी सैन्य ठिकानों पर हमले में सक्षम है।

केन्या ने इस आतंकी संगठन के खिलाफ सोमालिया की सैन्य मदद की थी, इसके बाद अल-शबाब पड़ोसी केन्या की जमीन पर भी हमले कर के निशाना बनाता रहता है। 2006 के उत्तरार्ध में अल-शबाब ने सोमालिया के दक्षिणी हिस्से के अधिकतर इलाकों पर कब्ज़ा जमा लिया था। आपसी गुटबाजी और कलह के कारण ये आतंकी संगठन उसके बाद कमजोर हो गया था। इसकी तुलना अफगानिस्तान के तालिबान से भी होती है।

दुर्घटनास्थल पर ही डटे हैं अश्विनी वैष्णव, धर्मेंद्र प्रधान की निगरानी में मरम्मत का काम: इलाज की देखरेख के लिए अब खुद पहुँचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे में घायलों से मिलने और रेलवे लाइनों के सुधार कार्य का जायजा लेने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहुँचे। इस दौरान प्रधान ने कहा कि ट्रैक पर तीन नहीं, चार ट्रेनें थीं। इनमें दो सवारी गाड़ी और दो मालगाड़ी थी। वहीं, मंडाविया ने कहा कि 100 घायलों को क्रिटिकल केयर की जरूरत है।

धर्मेंद्र प्रधान चौथी ट्रेन मालगाड़ी थी और इसके इंजन को नुकसान पहुँचा है। बता दें कि इस हादसे में अब तक 288 लोगों के मौत हो चुकी है, जबकि 1000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। रेस्क्यू अभियान पूरा हो चुका है। वहीं, घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पीड़ितों को प्रदान की जा रही चिकित्सा का जायजा लेने के लिए भुवनेश्वर स्थित AIIMS और कटक के मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। अपनी यात्रा के दौरान मंडाविया ने कहा कि उनसे दुर्घटना के बारे में विस्तृत चर्चा हुई और एक कार्य योजना भी तैयार की गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस भयानक हादसे में 1,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है। 100 से ज्यादा मरीजों को क्रिटिकल केयर की जरूरत है और उनके इलाज के लिए दिल्ली एम्स, लेडी हार्डिंग अस्पताल और आरएमएल अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर आधुनिक उपकरणों और दवाओं के साथ यहाँ पहुँचे हैं।

इस दुर्घटना में 21 कोच पटरी से उतर गए और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। यात्रियों का पूरा होने के बाद अब पहले वाली स्थिति को बहाल करने करने के लिए पटरियों की मरम्मत का काम चल रहा है। घटनास्थल पर धर्मेंद्र प्रधान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ और जीर्णोद्धार के कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

इस रूट को जल्द से जल्द चालू करने के लिए लगभग 1000 लोग दिन-रात काम कर रहे हैं। पीएम ने अश्विनी को फोन कर मरम्मत के कामों का जायजा लिया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “जितनी जल्दी हो सके सामान्य स्थिति बहाल करना हमारी जिम्मेदारी है। भारतीय रेलवे मुफ्त ट्रेनें चला रहा है और रसद सुविधाएँ भी प्रदान की जा रही हैं।”

‘राहुल-सोनिया के आगे झुकाना पड़ा मुझे सिर’: CM की कुर्सी न मिलने पर छलका डीके शिवकुमार का दर्द, बोले- ‘आपने मुझे मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया था’

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे डीके शिवकुमार को राज्य के उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा है। सीएम की कुर्सी न मिल पाने को लेकर डीके शिवकुमार ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि जनता ने उन्हें सीएम बनाने के लिए वोट किया था। लेकिन पार्टी हाईकमान के कहने के बाद उन्हें सीएम पद की दावेदारी छोड़नी पड़ी।

दरअसल, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद डीके शिवकुमार पहली बार शनिवार (3 जून 2023) को अपने विधानसभा क्षेत्र कनकपुरा पहुँचे। यहाँ उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “आप सभी लोगों ने यह सोचकर प्यार दिया था कि मुझे नया पद मिलेगा, नई जिम्मेदारी मिलेगी। किसी को निराश होने की जरूरत नहीं है।”

डीके शिवकुमार ने आगे कहा है, “आपने मुझे मुख्यमंत्री बनाने के लिए बड़ी संख्या में वोट दिया था। लेकिन राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, मल्लिकार्जुन खड़गे ने फैसला लेते हुए मुझे एक सलाह दी। मुझे उनके फैसले के आगे सिर झुकाना पड़ा। अब मुझे धैर्य रखते हुए इंतजार करना चाहिए। लेकिन ईश्वर और आप लोगों की इच्छा कभी अधूरी नहीं रहेगी। मैं बस यही कहूँगा सब लोग धैर्य रखें।” इसके अलावा उन्होंने अपने क्षेत्र के मतदाताओं को उन्हें वोट देने के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही, आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी करने के लिए कहा।

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव की 224 सीटों में से कॉन्ग्रेस ने 136 सीटों में जीत कर सत्ता में वापसी की थी। विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलकों में डीके शिवकुमार ही कॉन्ग्रेस की ओर से सीएम पद के लिए बड़ा चेहरा माने जा रहे थे। इसके अलावा मीडिया में भी सिद्धारमैया की अपेक्षा डीके शिवकुमार के नाम की अधिक चर्चा थी। चुनाव परिणाम आने के बाद शिवकुमार ने भी सीएम पद के लिए दावेदारी पेश की थी। लेकिन राहुल, सोनिया और खड़गे के आगे उनकी एक न चली। इस प्रकार सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया। वहीं, डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा।