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अब सेक्स एक स्पोर्ट्स: 45-60 मिनट का गेम, ऑर्गेज्म-पेनेट्रेशन पर मिलेंगे नंबर – इस खेल का स्वीडन से कनेक्शन और सच

स्वीडन में अब सेक्स एक स्पोर्ट्स है। वहाँ इसे आधिकारिक रूप से खेलों की लिस्ट में शामिल किया गया है। इसे लेकर वहाँ गोथनबर्ग में 8 जून से पहली यूरोपियन सेक्स चैंपियनशिप भी होगी। मीडिया में कुछ इस तरह की रिपोर्ट छपी है, जो गलत है, फेक है।

असल खबर क्या है, आइए जानते-समझते हैं। स्वीडिश सेक्स फेडरेशन नाम की एक संस्था है वहाँ। वो जगह-जगह स्ट्रीप क्लब (नंगे-अर्धनंगे होकर जहाँ डांस होता है) चलाता है। इसी संस्था ने स्वीडन में सेक्स को एक स्पोर्ट्स के तौर पर मान्यता देने के लिए आवेदन किया था।

स्वीडिश स्पोर्ट्स कॉन्फेडरेशन स्वीडन की वो संस्था है, जो खेलों को मान्यता देती है, तरह-तरह के खेल करवाती है। इस संस्था के पास ही स्वीडिश सेक्स फेडरेशन का आवेदन आया था। स्वीडिश स्पोर्ट्स कॉन्फेडरेशन ने आवेदन को रद्द कर दिया और कहा – हमारे पास और भी काम हैं।

स्वीडन में सेक्स एक स्पोर्ट्स: मीडिया में रिपोर्ट, सोशल मीडिया पर बातें

स्वीडन में सेक्स एक स्पोर्ट्स होगा, इसको लेकर मीडिया में कैसी-कैसी रिपोर्ट छपी, सोशल मीडिया में क्या-क्या बातें हुईं… पहले इसको जानिए। मीडिया रिपोर्ट में लिखा गया कि इस प्रतियोगिता को स्वीडिश सेक्स फेडरेशन की देख-रेख में 6 दिन के लिए कराया जाएगा। इस दौरान अलग-अलग तरह की यौन गतिविधियों में प्रतिभागी शामिल होंगे।

रिपोर्ट में यह बताया गया कि 8 जून से शुरू इस प्रतियोगिता में 45 मिनट से लेकर 1 घंटे तक सेक्सुअल एक्टिविटी में शामिल रहना होगा। कहा गया कि एक दिन में यह खेल ज्यादा से ज्यादा 6 घंटे तक चलेगा और पैनल फिर निर्णय करेगा कि आखिर जीता कौन।

रिपोर्ट में बताया गया कि इस खेल में अलग-अलग देशों से 20 लोग के भाग लेंगे। विजेताओं का फैसला करने के लिए दो मानक बनाए गए हैं। एक जजों का पैनल अपना फैसला देगा और दूसरा दर्शक अपना फैसला व्यूअरशिप रेटिंग और मूल्यांकन से देंगे। अंतिम नतीजों में दर्शकों के वोट का भार 70% होगा जबकि बचे हुए शेष 30% जजों के स्कोर से आएगा। 

यह भी लिखा गया कि इस खेल में ओरल सेक्स, सिडक्शन, पेनेट्रेशन, एनड्यूरेंट, नंबर ऑफ ऑर्गेस्म, सेक्स के बारे जानकारी, दो लोगों के बीच केमेस्ट्री आदि चीजें देखते हुए प्रतिभागियों को जज किया जाएगा और उन्हें 5 से 10 के बीच नंबर दिए जाएँगे। इतना ही नहीं अगर किसी प्रतिभागी को कामसूत्र के बारे में जानकारी है तो उसे इस प्रतियोगिता में प्लस प्वाइंट मिलने वाला है।

और तो और, मीडिया ने इस बात को भी लिख डाला कि स्वीडन से इस खेल की शुरुआत करने होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य यूरोपीय देश भी इस खेल को अपनाएँगे और ऐसी प्रतियोगिता करवाएँगे। स्वीडिश फेडरेशन ऑफ सेक्स के अध्यक्ष ड्रैगन ब्राटिच से बात कर मीडिया ने यह भी लिखा कि उन्होंने खेल के तौर पर सेक्स की महत्वता पर जोर डाला है। उन्होंने कहा कि अन्य किसी भी खेल की तरह सेक्स में मनचाहा नतीजा पाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है, तभी लोग इसमें भाग ले पाएँगे।

बृजभूषण सिंह के खिलाफ नाबालिग ने कोर्ट में वापस ली शिकायत, सूत्रों के हवाले से खबर: पिता का इनकार, अमित शाह से मिले बजरंग-विनेश-साक्षी

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ की गई शिकायत नाबालिग महिला पहलवान द्वारा वापस लिए जाने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के ह​वाले से पटियाला कोर्ट में शिकायत वापस लेने की बात कही गई है। यह भी खबर आई है कि बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है।

शाह से पहलवानों की मुलाकात 3 जून 2023 की रात करीब 11 बजे हुई। यह बैठक करीब दो घंटे चली। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बजरंग पुनिया ने गृह मंत्री के साथ बैठक की पुष्टि की है। दैनिक भास्कर ने एक अनाम महिला पहलवान की माँ के हवाले से कहा है कि शाह ने बिना भेदभाव के पूरी जाँच का भरोसा दिया है। कहा है कि पुलिस जाँच कर रही है। कानून अपना काम करेगा।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद पहलवान अपने मेडल बहाने हरिद्वार चले गए थे। हालाँकि उन्होंने 5 दिन का अल्टीमेटम देते हुए गंगा में मेडल नहीं बहाए थे। इसके बाद राकेश टिकैत ने 9 जून तक का अल्टीमेटम दिया था।

पहलवानों की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कर रखी है। इनमें यौन उत्पीड़न के 15 मामलों का जिक्र है। इनमें से 10 में गलत तरीके से छूने की शिकायत की गई है। शिकायत में बिना सहमति के गलत तरीके से छूना, स्तनों और पेट पर हाथ फेरना, पीठ पर हाथ रखना, डराना-धमकाना और पीछा करना शामिल है। एक एफआईआर नाबालिग पहलवान की शिकायत पर दर्ज है। इसमें POCSO अधिनियम की धारा 10 जोड़ी गई है।

अब टाइम्स नाउ नवभारत ने सूत्रों के ह​वाले से बताया है कि 2 जून को इस नाबालिग महिला पहलवान ने पटियाला हाउस कोर्ट में जाकर अपनी शिकायत वापस ले ली। उस समय कोर्ट में नाबालिग पहलवान पिता और दादा के मौजूद रहने की बात भी कही गई है। सूत्रों के अनुसार मजिस्ट्रेट के सामने नाबालिग ने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह ने कभी उसका यौन उत्पीड़न नहीं किया है।

लेकिन लाइव हिंदुस्तान ने इस नाबालिग पहलवान के पिता के हवाले से शिकायत लेने के दावों को बेबुनियाद बताया है। नाबालिग के पिता ने कहा कि पहलवानों को लेकर फेक न्यूज चलाई जा रही। इससे पहले मेरी बेटी की उम्र को लेकर भी गलत खबर चलाई गई थी। उन्होंने कहा, “वह नाबालिग है और मैं अपनी शिकायत क्यों वापस लूँ।”

गौरतलब है कि खुद को इस पहलवान के चाचा बताने वाले एक शख्स ने दावा किया था कि उनकी भतीजी बालिग है। साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया जैसे पहलवान उसका इस्तेमाल कर उनके परिवार को गुमराह कर रहे हैं। लेकिन बाद में इस लड़की के पिता ने मीडिया को बताया था कि जब उनकी बेटी का एक कैंप के दौरान यौन शोषण हुआ वह नाबालिग थी। इसी तरह न्यूज एजेंसी एनआई सूत्रों के हवाले से बता चुकी है कि बृजभूषण सिंह के खिलाफ जो आरोप लगाए हैं, उसको लेकर दिल्ली पुलिस को अब तक साक्ष्य नहीं मिले हैं।

मालगाड़ी को प्रणाम, भारत माता के जयकारे: बालासोर में 51 घंटे बाद सेवा बहाल, भावुक हो बोले अश्विन वैष्णव- अभी खत्म नहीं हुई जिम्मेदारी

ओडिशा के बालासोर में रेल हादसे के 51 घंटे बाद वहाँ ट्रैक से पहली माल गाड़ी गुजरी। इस दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वहीं मौजूद रहे। उन्होंने ट्रैक पर चलती ट्रेन को देखने के बाद दोनों हाथ जोड़े। वहीं अपने साथियों की तारीफ भी की। साथ ही कहा कि हादसा जिसके कारण भी हुआ है उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस तत्परता से काम करने को कहा था सभी लोगों ने मेहनत करके दोनों पटरियों को रिस्टोर कर दिया है। हादसे के 51 घंटे के अंदर-अदर ट्रैक पर पहली ट्रेन दौड़ी। बाकी ट्रैक को सही करने का काम भी हो रहा है। संभव है बुधवार तक ट्रैक पर ट्रेन चलने लगे।

घटनास्थल पर लगातार राहत-बचाव कार्यों की निगरानी रखने वाले रेल मंत्री ने ट्रैक पर ट्रेन चलने के बाद वहाँ मौजूद लोगों के साथ भारत माता की जय और वंदे मातरम नारे लगवाए और काम में जुटे सभी लोगों की हिम्मत बढ़ाई। लेकिन, मीडिया से बात करते हुए उनका गला रुंध गया और वो भावुक हो गए।

उन्होंने हादसे में गायब लोगों को उनके परिवार से मिलाने की बात करते हुए कहा, “अब तक ट्रैक से तीन गाड़ियाँ निकल चुकी हैं। हम स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बहुत ही संवेदना के साथ जिन परिवारों के सदस्य खो गए हैं, वो जल्द से जल्द उन तक पहुँचें… यही हमारी कोशिश है। हमारा दायित्व अभी खत्म नहीं हुआ है।” 

बता दें कि बालासोर हादसे में तीन ट्रेनों की टक्कर होने के कारण शुक्रवार रात भीषण हादसा हुआ। इस हादसे में 250+ से ज्यादा लोगों की जानें चलीं गईं जबकि 1000 से ज्यादा घायल मिले। जाँच के बाद सामने आया है कि हादसा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग हादसे के बाद सामने आया। सरकार ने कहा कि जो कोई भी इस घटना के पीछे होगा उसे किसी भी हाल में नहीं बख्शा जाएगा। रेल मंत्री ने यह भी बताया है कि बालासोर में हुई ट्रेन दुर्घटना की जाँच अब CBI करेगी।

मणिपुर हिंसा की जाँच करेगी केंद्रीय गृह मंत्रालय की कमिटी, लोगों से अमित शाह ने की अपील – नाकेबंदी हटाएँ

मणिपुर में हुई हिंसा की जाँच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार (4 जून 2023) को 3 सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है। यह आयोग 6 महीने के भीतर जाँच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। गुवाहाटी हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा इस आयोग की अध्यक्षता करेंगे। मणिपुर हिंसा को लेकर कोई भी व्यक्ति सबूतों के साथ आयोग के पास अपनी शिकायत भी दर्ज करा सकता है।

इस आयोग के गठन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। इस विज्ञप्ति में कहा गया है, “पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जाँच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत एक जाँच आयोग का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता गुवाहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अजय लांबा करेंगे। साथ ही रिटायर्ड IAS हिमांशु शेखर दास व रिटायर्ड IPS आलोक प्रभाकर आयोग के सदस्य होंगे। यह आयोग मणिपुर में 3 मई 2023 और उसके बाद हुई हिंसा की घटनाओं की जाँच करेगा।”

विज्ञप्ति में आगे कहा गया है, “यह आयोग मणिपुर में हुई हिंसा के कारणों तथा हिंसा के बढ़ने के कारणों की जाँच करेगा। साथ ही इस बात की भी जाँच करेगा कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों या व्यक्तियों की ओर से कोई संभावित चूक हुई है।” बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 मई से 1 जून 2023 तक मणिपुर दौरे पर थे। इसी दौरान उन्होंने जाँच आयोग के गठन का ऐलान किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मणिपुर हिंसा की जाँच के लिए बनाया गया तीन सदस्यीय जाँच आयोग राज्य में विभिन्न समुदायों के सदस्यों को टारगेट कर हिंसा के कारणों की भी जाँच करेगा। साथ ही हिंसा से संबंधित सभी जानकारियाँ और फैक्ट जुटाते हुए यह भी जाँचेगा कि हिंसा रोकने के लिए प्रशासनिक तौर पर पर्याप्त उपाय किए गए या नहीं। इसके अलावा ऐसे मामलों पर भी विचार किया जाएगा जो इस जाँच के दौरान प्रासंगिक हो सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि कोई भी व्यक्ति हिंसा से जुड़े सबूतों के साथ इस जाँच आयोग के सामने अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है।

मणिपुर की जनता से गृह मंत्री ने की नाकेबंदी हटाने की अपील

हिंसा के बाद से मणिपुर में हालात सामान्य हो रहे हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर की जनता से नाकेबंदी हटाने की अपील की है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, “मणिपुर के लोगों से मेरी विनम्र अपील है कि इंफाल-दीमापुर NH-2 हाइवे पर लगी नाकेबंदी को हटा लें। ताकि खाना, दवाइयाँ, पेट्रोल/डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुएँ लोगों तक पहुँच सकें। मैं यह भी अनुरोध करता हूँ कि सिविल सोसायटी के लोग आम सहमति बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएँ। हम सब मिलकर ही इस खूबसूरत राज्य में सामान्य स्थिति बहाल कर सकते हैं।”

पनौती, मनहूस, मौत का सौदागर… बिहार में पुल ध्वस्त होने के बाद झूठ फैलाने में लगी कॉन्ग्रेस, जिस पुल का PM मोदी ने किया शिलान्यास वो नहीं हुआ है ध्वस्त

बिहार में हवा के कारण एक बड़ा पुल ध्वस्त होने के बाद अब कॉन्ग्रेस पार्टी एक बार फिर से झूठ फैलाने में लग गई है। बता दें कि बिहार में सुल्तानगंज और अगुवानी को जोड़ने वाला पुल गंगा नदी में समा गया। ये पुल दूसरी बार ध्वस्त हुआ है। 2014 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका शिलान्यास किया था। खगड़िया के परवत्ता थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद बिहार की जदयू-राजद-कॉन्ग्रेस सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं।

उधर गुजरात कॉन्ग्रेस के SC विभाग के अध्यक्ष हितेंद्र पिठडिया ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र को दोष देने में देर नहीं लगाई। उन्होंने पुल के ध्वस्त होने का वीडियो शेयर किया। साथ ही उन्होंने एक पुराणी खबर की स्क्रीनशॉट लगाई, जिसकी हेडिंग में लिखा है कि पीएम मोदी ने भागलपुर में 4 लेन के विक्रमशिला सेतु के सामानांतर पुल और फुलौत ब्रिज का शिलान्यास किया। साथ ही लिखा, ‘बिहार में निर्माणाधीन पुल गिरा। पनौती, मनहूस, मौत का सौदागर।’

अब आपको बताते हैं कि इस मामले की सच्चाई क्या है। दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता ने जिस खबर की स्क्रीनशॉट लगाई, वो ये वाला पुल है ही नहीं जो ध्वस्त हुआ है। ध्वस्त हुए पुल का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। ध्वस्त हुआ पुल खगड़िया का है, जबकि पीएम मोदी ने वर्चुअल रूप से सितबर 2020 में जिस पुल का शिलान्यास किया था, वो भागलपुर में है। वो पुल ध्वस्त नहीं हुआ है।

कॉन्ग्रेस नेता ने इसके बावजूद अब तक अपना ट्वीट डिलीट नहीं किया है। जो पुल ध्वस्त हुआ है, उसका एक हिस्सा अप्रैल 2022 में भी गिर चुका है। उसके साथ ये दूसरा ऐसा हादसा है। खगड़िया-अगुवानी-सुल्तानगंज वाला पुल फ़िलहाल निर्माणाधीन ही था, जबकि पीएम मोदी ने जिस 4 किलोमीटर लंबे पुल का उद्घाटन किया था वो भागलपुर और नवगछिया को जोड़ता है। अब सीएम नीतीश ने इस मामले के जाँच के आदेश दिए हैं।

भड़भड़ा कर पानी में गिर गया नीतीश कुमार का ₹1700 करोड़ वाला ड्रीम प्रोजेक्ट, शिलान्यास के बाद दूसरी बार ध्वस्त हुआ ये पुल: वीडियो आया सामने

बिहार में बहार नहीं बल्कि भ्रष्टाचार हावी है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि भागलपुर में गंगा नदी पर 1700 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा पुल रविवार (4, जून 2023) को एक बार फिर जमींदोज हो गया। इससे पहले, अप्रैल 2022 में भी पुल का एक हिस्सा ढह गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2014 में इस पुल का शिलान्यास किया था।

भागलपुर और खगड़िया जिलों को जोड़ने के लिए अगुवानी और सुल्तागंज के बीच यह पुल बन रहा था। इस पुल के टूटने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ सेकंडों के भीतर पुल को धराशाई हो गंगा नदी में गिरते देखा जा सकता है। बताया जा रहा है कि रविवार के चलते इस निर्माणाधीन पुल का निर्माण कार्य बंद था। ऐसे में पुल पर कोई भी मजदूर मौजूद नहीं था। नहीं तो एक सप्ताह के भीतर देश में दूसरा बड़ा हादसा हो जाता।

हालाँकि, इस हादसे में 2 गार्ड के लापता होने की बात कही जा रही है। लेकिन इसकी अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माणाधीन पुल के 10वे, 11वें और 12वें पाये का पूरा हिस्सा टूटकर नदी में गिरा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि टूटे हुए हिस्से की लंबाई 100 मीटर से अधिक थी।

वहीं, इस घटना पर जदयू नेता और परबत्ता विधायक परबत्ता विधायक संजीव कुमार ने अपनी ही सरकार पर सवालिया निशान लगाए हैं। संजीव कुमार ने कहा है कि यह सीएम नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस पुल की क्वालिटी को लेकर उन्होंने विधानसभा में भी सवाल उठाए थे। लेकिन पुल बनाने वाली कंपनी एसपी सिंगला ने खराब क्वालिटी के तहत काम किया। साथ ही उन्होंने कहा है कि पुल बिना किसी कारण के कैसे गिर सकता है? इसकी उच्चस्तरीय जाँच होनी चाहिए।

1700 करोड़ की लागत वाले इस पुल के टूटने पर भाजपा नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा है, “नीयत में जब खोट होगी तो नीति कैसे सफल होगी। एक बार सुलतानगंज की तरफ पुल गिरा था और आज खगड़िया की ओर गिरा है। कई पुल पुर्णिया में भी गिरे हैं, बिहार के अंदर यह कमीशनखोरी की प्रथा गुणवत्ता विहीन काम चरम पर है। जिसकी छवि दिखाई दे रही है।”

अब CBI करेगी ओडिशा ट्रेन दुर्घटना की जाँच, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का ऐलान

ओडिशा के बालासोर में हुई ट्रेन दुर्घटना की जाँच अब CBI करेगी। इसकी जानकारी खुद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी, जो दुर्घटना के बाद से ही घटनास्थल पर डटे हुए हैं। कोरोमंडल एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी सही तीन ट्रेनों के आपस में टकराने के मामले में रविवार (4 जून, 2023) को रेलवे बोर्ड ने ‘केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI)’ जाँच की सिफारिश कर दी है। इस घटना में अब तक 275 लोगों की मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हुई है।

1100 लोग इस भीषण हादसे में घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासनिक सूचनाओं को आधार बनाते हुए रेलवे बोर्ड ने इस पूरे मामले को CBI के पास भेजने का निर्णय लिया। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पत्रकारों से बात करते हुए अश्विनी वैष्णव ने ये जानकारी दी। उन्होंने ये भी बताया है कि घटना के मूल कारण का पता लग गया है और जो ‘अपराधी’ इसमें शामिल हैं उनकी पहचान भी कर ली गई है। उन्होंने मरम्मत के कार्य का भी जायजा लिया।

कमिश्नर ऑफ रेल सेफ्टी (साउथ ईस्टर्न सर्कल) के द्वारा भी इस मामले की स्वतंत्र जाँच की जाएगी। शुरुआती जाँच के बाद अब इस जाँच रिपोर्ट का इंतजार है। ये कमीशन ही रेलवे संचालन की सेफ्टी के लिए जिम्मेदार होता है। CCRS के वर्तमान मुखिया शैलेश कुमार पाठक हैं, जो 1986 बैंच के IRSE (रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस) अधिकारी हैं। जहाँ तक दुर्घटनास्थल का सवाल है, वहाँ ट्रैक से जुड़ा कार्य पूरा हो गया है और ओवरहेड वायरिंग का काम चालू है।

ये भी पता चला है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव की वजह से ये घटना हुई है। ये एक सिग्नल व्यवस्था होती है, जिससे ट्रेनों को आपस में टकराने से बचाया जाता है। दुर्घटना वाली जगह पर डाउन मेन लाइन को रिस्टोर कर दिया गया है। उधर गौतम अडानी ने ऐलान किया है कि इस दुर्घटना में जो भी बचे अनाथ हुए हैं, उनकी स्कूली शिक्षा-दीक्षा की जिम्मेमदारी अडानी समूह उठाएगा। लोगों ने इस घोषणा का स्वागत किया है।

ऑनलाइन गेम हारने वाले हिन्दू बच्चों को पढ़वाते थे कुरान की आयतें, सुनाते थे ज़ाकिर नाइक की तकरीरें: यूपी में मौलवी गिरफ्तार, 3 स्टेप में ऐसे होता था इस्लामी धर्मांतरण

गाजियाबाद में जैन समाज के एक बच्चे के इस्लामी धर्मांतरण के बाद हुई यूपी पुलिस की जाँच में बड़ा खुलासा हुआ है। इस संबंध में रविवार (4 जून, 2023) को कार्रवाई भी की गई है। इस मामले में मस्जिद कमिटी के पूर्व सदस्य अब्दुल रहमान को गिरफ्तार किया गया है। अब्दुल रहमान एक गिरोह से जुड़ा हुआ था। वो ऑनलाइन गेम जिताने के लिए कुरान की आयतें पढ़वाता था। फिर ब्रेनवॉश कर के हिन्दू बच्चों का इस्लामी धर्मांतरण कराया जाता था।

अब्दुल रहमान के मोबाइल फोन से भी पुलिस को कई सबूत मिले हैं। मामला तब सामने आया था, जब 30 मई को राजनगर निवासी एक व्यक्ति ने धर्मांतरण मामले में FIR दर्ज कराई थी। कविनगर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई FIR में संजयनगर स्थित सेक्टर-23 की मस्जिद के एक मौलसि अब्दुल रहमान और मुंबई निवासी बद्दो का जिक्र था। बद्दो की पहचान खान शाहनवाज मक़सूद के रूप में हुई है। ये दोनों हिन्दू बच्चों का ब्रेनवॉश कर उन्हें मुस्लिम बनाते थे। एक साल पहले दो नाबालिग लड़कों को फुसलाने के बाद इन्होंने ये काम शुरू किया था।

इन नाबालिग लड़कों में एक जैन और एक हिन्दू समाज से था। इन बच्चों ने इस्लामी गिरोह के प्रभाव में आकर नमाज पढ़नी भी शुरू कर दी थी। जैन परिवार को जब इसका पता चल गया था, तब मौलवी ने डर से अपने फोन की चैट हिस्ट्री डिलीट कर दी थी। DCP निपुण अग्रवाल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित बच्चों से सारी जानकारी ली गई है। पता चला है कि मोबाइल-लैपटॉप पर ‘Fort Nite’ नामक एप के जरिए गेम खेला जाता था।

इसके लिए अन्य धर्मों के नाम से आईडी बनाए जाते थे। जो लड़के गेम हार जाते थे, उन्हें कुरान की आयतें पढ़वा कर जीत का भरोसा दिलाया जाता था। फिर ‘Discord App’ के जरिए मुस्लिम लड़कों को इन हिन्दू लड़कों से बातचीत कर उन्हें इस्लामी रीति-रिवाज अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता था। फिर तीसरे स्टेप में ज़ाकिर नाइक के वीडियोज दिखाए जाते थे। मुख्य आरोपित की तलाश के लिए यूपी पुलिस की एक टीम महाराष्ट्र रवाना हुई है।

याद दिला दें कि जैन समाज के उक्त व्यक्ति ने जब अपने बेटे के मोबाइल और लैपटॉप की जाँच की तो उसमें इस्लाम से जुड़ी कई सामग्रियाँ मिली थीं। इसमें से कुछ गैर-कानूनी भी हैं। इसी दौरान उन्हें पता चला कि ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए उनके बेटे की दोस्ती मुंबई निवासी बद्दो नामक व्यक्ति से हुई थी। बद्दो से उनके बेटे ने कम्प्यूटर पार्ट्स भी खरीदे थे। इसके बाद से उन दोनों की दोस्ती बढ़ गई। पीड़ित व्यक्ति ने कहा था कि उनका बेटा कई घंटों तक बद्दो से बात करता था। वो रोज जिम की जगह नमाज पढ़ने जाता था।

ओडिशा ट्रेन दुर्घटना में अनाथ हुए जो बच्चे, अडानी समूह उठाएगा उनकी स्कूली पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा: खुद गौतम अडानी ने किया ऐलान

ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण दुर्घटना में 275 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इस घटना में करीब 900 लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं, इस खौफनाक हादसे में कुछ लोगों ने अपने माँ-बाप तक खो दिए हैं। ऐसी विषम परिस्थिति में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी आगे आए हैं। उन्होंने माता-पिता खोने वाले बच्चों की स्कूली शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने की बात कही है।

दरअसल, गौतम अडानी ने रविवार (4 जून, 2023) को ट्वीट कर इस रेल दुर्घटना पर दुःख जताया है। साथ ही उन्होंने लिखा है, “ओडिशा की रेल दुर्घटना से हम सभी बेहद व्यथित हैं। हमने फैसला लिया है कि जिन मासूमों ने इस हादसे में अपने अभिभावकों को खोया है उनकी स्कूली शिक्षा की जिम्मेदारी अडानी समूह उठाएगा। पीड़ितों एवं उनके परिजनों को संबल और बच्चों को बेहतर कल मिले यह हम सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है।”

बता दें कि शुक्रवार (2, जून 2023) शाम करीब 6:55 मिनट पर ओडिशा के बालासोर जिले के महानगा गाँव के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरियों से उतर गई थी। इसके बाद वह ट्रेन लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। मालगाड़ी से टक्कर होने के बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे बगल वाली पटरी पर चले गए। इस पटरी पर दूसरी दिशा से यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन आ गई और कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बों में जाकर टकरा गई। 

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव बना हादसे की वजह…

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार (4, जून 2023) को एएनआई से हुई बातचीत में कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण यह हादसा हुआ। रेलवे कमिश्नर ने इस पूरे मामले की जाँच की है। जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद सारी चीजें स्पष्ट हो जाएँगीं। जाँच रिपोर्ट के बाद हादसे के आरोपित भी सामने आ जाएँगे।

ज्ञात हो कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के माध्यम से ट्रेन का ट्रैक तय किया जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो ट्रेन किस पटरी से जाएगी और कहाँ उसकी पटरियों में बदलाव होगा इसको लेकर सिग्नल देना वाला सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम कहलाता है। इस सिस्टम का उद्देश्य यह है कि किसी भी ट्रेन को तब तक आगे बढ़ने नहीं दिया जाता, जब तक इस बात की पुष्टि न हो जाए कि आगे की पटरियाँ या रास्ता पूरी तरह सुरक्षित है।

पेट के कई अंग आए बाहर, 70 टूटी हड्डियाँ, 16 बार छुरे से ताबड़तोड़ वार… पुलिस चार्जशीट में होगी साक्षी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, लोकल गैंग से भी जुड़ा था साहिल

दिल्ली के शाहाबाद डेयरी इलाके में 28 मई, 2023 को हुए साक्षी हत्याकांड में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। यह रिपोर्ट आरोपित साहिल सरफराज की निर्ममता को बयाँ करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, साहिल के हमले से साक्षी के पेट से कई अंग निकल कर बाहर आ गए थे। हमलावर द्वारा छुरे को 16 बार पेट में घोंपा गया था। मृतका की कई हड्डियाँ भी टूटी मिली हैं। अस्पताल द्वारा साक्षी को दिए गए घावों की 16 से 17 पन्नों की रिपोर्ट बनाई गई है। साहिल की नाराजगी की वजह साक्षी का एक हिन्दू लड़के से बात करना बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साक्षी के पेट और सिर को मिला कर कुल 70 हड्डियाँ टूटी पाई गईं हैं। साहिल ने चाकुओं के कुल 16 वार साक्षी के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में किए थे। अधिकतर वार कंधे से कमर के बीच हुए थे। साहिल के हमलों से साक्षी के कई आंतरिक अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। मौत की वजह अधिक रक्त बहना बताया गया है। बताया जा रहा है कि चाकुओं के घाव से मृतका की आँतें पेट से बाहर निकल कर लटक चुकीं थीं।

दिल्ली पुलिस ने इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अपनी जाँच में शामिल कर लिया है। इंस्पेक्टर राजीव रंजन के नेतृत्व में एक टीम का भी गठन किया गया है जो जल्द से जल्द तमाम बिखरे सबूतों को जोड़ कर चार्जशीट तैयार कर रही है। इस पुलिस टीम की प्राथमिकता आरोपित को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा दिलाना है। इन सबूतों में इलेक्ट्रॉनिक CCTV फुटेज भी शामिल है। माना जा रहा है कि पुलिस साहिल के साथ घटनास्थल पर सीन के रिक्रिएशन के लिए जा सकती है।

वहीं पुलिस ने साक्षी को मारने के लिए साहिल द्वारा प्रयोग किया गया चाकू भी बरामद कर लिया है। इस चाकू को जाँच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। यहाँ चाकू पर मिले खून के छींटों के अंश से साक्षी के माता-पिता के DNA का मिलान करवाया जाएगा। साक्षी को मार कर साहिल ने अपने उस समय पहले हुए जूते अपनी बुआ के घर छोड़ दिए थे। पुलिस ने उन जूतों को भी बरामद कर लिया है। पुलिस 8 अलग-अलग फोन को अपने कब्ज़े में ले कर जाँच कर रही है।

बताया जा रहा है कि इंस्टाग्राम पर साहिल के अलावा साक्षी की बात एक प्रवीण नाम के लड़के से भी हो रही थी। उसी से हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट साक्षी ने साहिल को भेज दिया था जिस से वो भड़क गया था। अब तक की जाँच में साहिल के स्थानीय गुंडों के गैंग से भी जुड़े होने की बात सामने आई है। साक्षी पर हमले के दौरान साहिल के नशे में होने की भी जानकारी सामने आई है। साहिल पर IPC में हत्या की धारा 302 के तहत केस दर्ज है।