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‘राम जन्मभूमि पर निर्णय नहीं सुनाने के लिए मुझपर बनाया गया था दबाव’: HC के पूर्व जज बोले- अगर फैसला नहीं देता तो 200 वर्षों तक फैसला नहीं होता

अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि मामले में सुनवाई करने वाले एक पूर्व न्यायाधीश ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि उन पर फैसला नहीं देने का बहुत दबाव था। यह दबाव उनके घर-परिवार और रिश्तेदारों से लेकर बाहर से भी था। उन्होंने कहा कि अगर वे फैसला नहीं सुनाते तो इस मामले की सुनवाई अगले 200 साल तक नहीं होती।

पूर्व न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल साल 2010 में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक से संबंधित मुकदमे में महत्वपूर्ण फैसला सुनाने वाली इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ का हिस्सा थे। इस बेंच में जस्टिस एसयू खान, सुधीर अग्रवाल और डीवी शर्मा थे। सुधीर अग्रवाल 23 अप्रैल 2020 को हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हो गए।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उस दौर को याद करते हुए कहा, “फैसला सुनाने के बाद… मैं धन्य महसूस कर रहा हूँ… मुझ पर केस का फैसला टालने का दबाव था। घर के अंदर और बाहर दोनों जगह दबाव था।” उन्हें रिटायरमेंट तक मामले को टालने की सलाह दी जाती थी।

पूर्व न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल ने कहा, “परिवार के सदस्य और रिश्तेदार सलाह देते थे कि हम किसी तरह टाइम पास करें और फैसला न सुनाएँ।” उन्होंने कहा, “अगर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में 30 सितंबर 2010 को फैसला नहीं सुनाया गया होता तो अगले 200 सालों तक इस मामले में कोई फैसला नहीं होता।”

इस फैसले में हाईकोर्ट ने 2:1 के बहुमत से फैसला सुनाया था और कहा था कि अयोध्या में स्थित 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षों – सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और ‘राम लला’ या उनके प्रतिनिधि हिंदू महासभा में समान रूप से विभाजित किया जाएगा। इस फैसले पर तीनों पक्ष राजी नहीं हुए।

इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। तत्कालीन CJI रंजन गोगोई के नेतृत्व में 9 नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले कहा कि अयोध्या में विवादित भूमि पर मंदिर बनाया जाएगा और मुस्लिम पक्षकारों को सरकार पाँच एकड़ जमीन कहीं अन्य उपलब्ध कराएगी।

इस निर्णय के बाद अयोध्या में राममंदिर बनने का रास्ता साफ हुआ था। निर्णय आते ही केंद्र की मोदी सरकार ने मंदिर निर्माण समिति का गठन किया। इस मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। मंदिर गर्भगृह लगभग बनकर तैयार है और जनवरी 2024 में मकर संक्रांति पर आम लोगों के लिए खोला जाएगा।

हिन्दू के माथे पर लगाया तिलक…तो ‘मुस्लिम समाज’ ने आरिफ का किया बहिष्कार: अम्मी के इंतकाल तक पर कोई नहीं आया, जमीन हड़पने की कर रहे कोशिश

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक हिन्दू युवक को तिलक लगाने वाले मुस्लिम को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित का नाम आरिफ शाह है। आरिफ का आरोप है कि उन्होंने एक हिन्दू को चुनावी सभा में गुलाल से तिलक लगाया था जिसके बाद वो अपने ही मुस्लिम समाज के कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। पीड़ित की माँ की मौत पर भी उनके घर कोई नहीं गया और न ही कोई और उन्हें अपने घर बुलाता है। पीड़ित ने इसकी शिकायत पुलिस में की है। पुलिस मामले का संज्ञान ले कर जरूरी कार्रवाई कर रही है।

यह बहिष्कार 1 साल से चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला दमोह के तेजगढ़ का है। यहाँ रहने वाले आरिफ शाह ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बताया है कि उनके घर के आस-पास हिन्दू धर्म के लोग रहते हैं। एक दिन किसी चुनावी सभा में जब लोग एक-दूसरे से मिल रहे थे तब उन्होंने गुलाल ले कर नामदेव नाम के एक हिन्दू के माथे पर टीका लगा दिया था। यह घटना मुस्लिम समाज के लोगों को नागवार गुजरी और उन्होंने आरिफ के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान कर दिया। इस बहिष्कार का सूत्रधार आरिफ ने अपने मुखिया को बताया है।

पीड़ित द्वारा बहिष्कार करने वालों में शौकत अली और कलीम का नाम प्रमुखता से लिया गया है। पत्नी और बच्चों के साथ जिले के पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने पहुँचे आरिफ ने अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने कहा कि आरोपित मुखिया के भड़काने पर कोई भी मुस्लिम उनकी अम्मी के इंतकाल (मौत) के बाद खाने पर नहीं आया। इसी के साथ वहाँ का मुस्लिम समाज आरिफ को अपने घर होने वाले आयोजनों में भी न्योता देना बंद कर दिया है। बकौल आरिफ इस बहिष्कार से उन्हें हर तरह से काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आरिफ का यह भी आरोप है कि बहिष्कार करने वालों ने उसकी जमीन भी कब्ज़ाने की कोशिश की थी जिसमें असफल रहने से आरोपित और नाराज हो गए। बताया जा रहा है कि आरिफ का बहिष्कार करने वालों ने उनके घर जाने वाले हर व्यक्ति के बहिष्कार का ऐलान किया है। पीड़ित परिवार ने पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। आरिफ की शिकायत के बाद पुलिस ने सभी आरोपित पक्षों को बुलवाया और नसीहत दी। पुलिस का कहना है कि इस मामले में नजर रखी जाएगी और भविष्य में घटना दोहराई गई तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

बालासोर रेल हादसे के बाद घटनास्थल पर घंटो डटे रहे रेल मंत्री, खुद की राहत और बचाव कार्यों की निगरानी: लोग बोले- कोई और नेता होता तो AC में बैठता

उड़ीसा के बालासोर में शुक्रवार (2 जून 2023) की रात हुए हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इस हादसे में अब तक 288 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि कई घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। लगभग 84 ट्रेनों को कैंसिल करना पड़ा है और कइयों के रुट बदले गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (3 जून) को घटनास्थल का दौरा किया। वहीं घटना के बाद से रेलमंत्री खुद राहत और बचाव कार्यों का नेतृत्व मौके पर मौजूद रह के कर रहे हैं।

राहत और बचाव कार्यों के साथ ट्रेनों का संचालन फिर से शुरू हो सके इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खुद रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव बालासोर में घटनास्थल पर मौजूद रह कर इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं। इस दौरान उनके कई वीडियो और फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस वीडियो में वो क्षतिग्रस्त डिब्बे के नीचे से निकलते दिखाई दे रहे हैं। डिब्बे से निकल कर रेलमंत्री ने राहत और बचावकर्मियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए।

रेलमंत्री ने घटनास्थल पर ही अपनी मौजूदगी के दौरान अधिकारियों को इस घटना के कारणों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। घटना की रात बीतने के बाद शनिवार सुबह ही अश्वनी वैष्णव बालासोर पहुँच गए थे। शनिवार-रविवार की रात सहित कुल 25 घंटों से अधिक समय तक वो घटनास्थल पर जमे रहे।

उनका एक फोटो रेल विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ वायरल हो रहा है जिसमें वो एक चबूतरे पर व्यथित होकर बैठे दिखाई दे रहे हैं। विकास अहीर ने ये फोटो शेयर करते हुए लिखा, “रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव जी के चेहरे से व्यथा साफ झलक रही है।”

वहीं एक अन्य वीडियो में वो रात में चल रहे राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा करते दिखाई दिए। इस वीडियो में घटनास्थल पर पुलिस ने बैरिकेड कर रखी है। पटरियों को अन्य स्टाफ द्वारा सही किया जा रहा है। इस वीडियो को शेयर करते हुए मुदित नाम के यूजर ने लिखा, “कोई और नेता होता तो एसी कमरे में आराम से बैठा होता।”

बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विन वैष्णव कानपुर IIT के पूर्व छात्र और पूर्व में IAS अधिकारी भी रह चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुद पर ममता बनर्जी व अन्य राजनेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और प्रत्यारोपों पर उन्होंने ये समय राजनीति के लिए ठीक नहीं होने का जवाब दिया। हादसे की जाँच जारी है।

‘बहस करना हो तो घर में करें’: राहुल गाँधी को विदेश मंत्री जयशंकर ने दी नसीहत, कहा- ‘कुछ चीजें राजनीति से ऊपर होती हैं’

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा अमेरिका में दिए गए विवादास्पद बयान को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी है। जयशंकर ने कहा कि कभी-कभी कुछ चीजें राजनीति से बड़ी होती हैं और खासकर तब, जब आप देश से बाहर कदम रखते हैं। सामूहिक जिम्मेदारी की बात कहते हुए जयशंकर ने कहा कि वे विदेश जाकर वहाँ राजनीति नहीं करते हैं।

बता दें कि अमेरिकी यात्रा पर गए राहुल गाँधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी को लगातार निशाना बना रहे हैं। वहीं, मुस्लिम लीग जैसी पार्टी को सेक्युलर भी बता रहे हैं। ये वही मुस्लिम लीग है, जिसे जवाहरलाल ने नेहरू ने हिंसक और कट्टरपंथी बताया था।

विदेश मंत्री जयशंकर ब्रिक्स देशों (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने दक्षिण अफ्रीका गए हैं। वहाँ, भारतीय समुदाय के लोगों से बात करने के दौरान राहुल गाँधी का नाम लिए बिना उनके बयान को लेकर एक व्यक्ति ने पूछा। इस पर उन्होंने कहा, “मैं अपनी कर सकता हूँ। मैं कोशिश करता हूँ कि जब विदेश जाऊँ तो राजनीति न करूँ। अगर मुझे बहस करनी होगी तो मैं अपने देश में करूँगा।”

जयशंकर ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी होती है, राष्ट्रीय हित और सामूहिक छवि होती है। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें राजनीति से ऊपर होती हैं। जब आप देश के बाहर कदम रखते हैं तो आपको यह बातें ध्यान में रखनी चाहिए।

दरअसल, अमेरिका के सांता क्लारा में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री मोदी को नमूना कहा था। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में अल्पसंख्यकों, दलित और आदिवासी समुदाय उत्पीड़न महसूस कर रहा है। उन्होंने पीएम का मजाक भी उड़ाया था।

राहुल गाँधी ने कहा था, “इस समय जिस तरह से आप (मुस्लिम) महसूस कर रहे हैं, मैं गारंटी दे सकता हूँ कि सिख, ईसाई, दलित और आदिवासी भी ठीक इसी तरह महसूस कर रहे हैं। आप नफरत को नफरत से नहीं काट सकते, इसे प्रेम के जरिए ही किया जा सकता है।”

राहुल गाँधी ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में यहाँ तक कह दिया कि भारत में आजकल कुछ मानते हैं कि पीएम मोदी भगवान से भी ज्यादा जानते हैं। वे भगवान के साथ बैठकर उनको समझा सकते हैं कि आखिर ब्रह्मांड कैसे काम करता है। उन्होंने कहा कि मोदी जी अगर भगवान के साथ बैठ जाएँ तो भगवान भी चौंक जाएँगे कि उन्होंने क्या बना दिया है।

सोमालिया में अल-शबाब के आतंकियों ने युगांडा के 54 फौजियों को मारा: राष्ट्रपति ने की पुष्टि, आतंकी संगठन बोला- हमने 137 सैनिकों की ली जान

अशांत अफ्रीकी देश सोमालिया में बड़े आतंकी हमले की खबर है। युगांडा ने इस हमले में अपने 54 फौजियों के मारे जाने की पुष्टि की है। हमले का आरोप इस्लामी आतंकी संगठन अल-शबाब पर लगा है। घटना शुक्रवार (27 मई 2023) की है जब आतंकी संगठन के लड़ाकों ने बुलामारेर नामक जगह पर युगांडा के सैन्य कैम्प को निशाना बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी (Yoweri Museveni) ने शनिवार (3 जून) को इन हमलों की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि युगांडा के 54 शांति सैनिक अल-शबाब के हमले में मारे गए हैं। अपने बयान में मुसेवेनी ने आगे बताया कि इस हमले के बाद युगांडा पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (UPDF) ने अदम्य साहस का परिचय दिया और मंगलवार (30 मई 2023) तक अपने बेस कैम्प को फिर से हासिल कर लिया। इस हमले के दौरान सैनिकों को गलत निर्देश देने के आरोप में युगांडा के राष्ट्रपति ने मेजर रैंक के 2 अधिकारियों के कोर्ट मार्शल के आदेश भी दिए।

योवेरी मुसेवेनी ने पिछले हफ्ते ही युगांडा के बेस कैम्प पर हमले की जानकारी तो दी थी लेकिन उन्होंने मृतकों की संख्या का खुलासा नहीं किया था। हालाँकि तब उन्होंने अल-शबाब को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। जानकारी के मुताबिक यह हमला सोमालिया की राजधानी मोगदिशु से 80 मील (130 किलोमीटर) दूर दक्षिण-पश्चिम दिशा में बुलामारेर में हुआ था। हालाँकि आतंकी संगठन अल-शबाब ने अपने हमले में 137 सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है। युगांडा के सभी मृतक सैनिक अफ्रीकन यूनियन ट्रांजीशन मिशन इन सोमालिया (ATMIS) के सदस्य थे।

इस बीच गुरुवार (1 जून 2023) को यूनाइटेड स्टेट्स अफ्रीका कमांड (अफ्रीकॉम) द्वारा किए गए जवाबी हवाई हमले में अल-शबाब के 3 आतंकी मारे गए हैं। ये हमला सोमालिया के दक्षिणी बंदरगाह शहर किसमायो से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में वायंता में हुआ है। बताते चलें कि इस्लामी आतंकी संगठन अल-शबाब सोमालिया में इस्लामी शासन को स्थापित करने के लिए वहाँ हमले करता है। वह सोमालिया की वर्तमान सरकार को पश्चिम देश समर्थित मानता है। साल 2022 में सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख महमूद ने भी जवाब में आतंकियों के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी।

भोजन, पानी, जूस… सब लेकर बजरंग दल उतरा मैदान में: बालासोर ट्रेन हादसे के पीड़ितों को रक्त देने के लिए अस्पतालों में भीड़ लगी

बालासोर ट्रेन हादसे में घायल लोगों तक मदद पहुँचाने के लिए हिंदू संगठन लगातार काम कर रहे हैं। इसी क्रम में कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जहाँ बजरंग दल के कार्यकर्ता अस्पताल में भर्ती लोगों को भोजन करवा रहे हैं। साथ ही जूस-पानी जैसी आवश्यक सामग्री उन तक पहुँचा रहे है।

बजरंग दल के आधिकारिक ट्विटर अकॉउंट से किए गए ट्वीट में कार्यकर्ताओं द्वारा रक्दान करने की जानकारी भी दी गई। ट्वीट में बताया गया, बालासोर, ओड़िशा में हुए अत्यंत दुखद और भयानक ट्रेन हादसे के तुरंत बाद से जारी राहत कार्य में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार सहयोग जारी हैं। प्रांत के अनेकों केंद्रों पर कार्यकर्ताओं द्वारा रक्तदान भी किया गया हैं।

RSS के कार्यकर्ता कर रहे हर संभव मदद

बता दें कि बालासोर ट्रेन एक्सीडेंट के बाद वहाँ लगातार घायलों तक राहत पहुँचाने का काम हो रहा है। बजरंग दल की तरह राष्ट्रीय सेवक संघ के कार्यकर्ता भी जी जान से सेवा में जुटे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार जानकारी मिलते ही करीब 250 कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए थे। वहाँ मची चीख-पुकार के बीच आरएसएस कार्यकर्ताओं ने घायलों को इलाज के लिए तुरंत ही हॉस्पिटल ले जाना शुरू कर दिया था। आरएसएस कार्यकर्ताओं के राहत और बचाव कार्य शुरू होने के बाद NDRF की टीम भी हादसे वाली जगह पहुँच गई। इसके बाद संघ कार्यकर्ता उनके साथ मिलकर लोगों को बचाने में जुट गए।

कुछ लोगों ने जहाँ घायलों को निकालने में एनडीआरएफ की मदद की तो वहीं कई कार्यकर्ता रक्तदान के लिए पहुँच गए। उन्हें सिर्फ वॉट्सएप से इस हमले की जानकारी मिली थी। इसके बाद अस्पताल में रक्तदान के लिए कतार लगी दिखी। वहीं रेस्क्यू करने के लिए ट्रैक्टर बाइक और कार लेकर अस्पताल पहुँचे

‘238 नहीं, 500 लोग मरे हो सकते हैं’: बालासोर ट्रेन हादसे पर CM ममता की राजनीति, रेल मंत्री की बात काटकर कहती रहीं- 3 डिब्बों में अभी भी पैसेंजर फँसे हैं

ओडिशा के बालासोर जिले में शुक्रवार (2 जून 2023) की शाम को हुए भीषण रेल हादसे में 238 लोगों की मौत हो गई और लगभग लगभग 900 लोग घायल हो गए। दुर्घटना में तीन ट्रेनें शामिल थीं, हावड़ा-चेन्नई कोरोमंडल एक्सप्रेस, यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी।

मीडिया इस दुखद घटना के बारे में मिनट-मिनट की जानकारी दे रहा है। इससे पहले रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा के हवाले से बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो चुका है और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी आश्चर्यजनक रूप से इससे अनभिज्ञ रहीं।

ममता बनर्जी ने शनिवार (3 जून 2023) को घटनास्थल का दौरा किया और वहाँ केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। उस दौरान एक वीडियो में ममता को जोर देकर यह कहते हुए सुना गया है कि पटरी से उतरी ट्रेनों के तीन डिब्बों की जाँच अभी तक नहीं हुई है और उसमें अभी कई यात्री फँसे हो सकते हैं।

ममता ने आगे कहा, “मैंने सुना है कि ट्रेन दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 500 तक जा सकती है। ट्रेन के क्षतिग्रस्त तीन डिब्बों की जाँच की जानी बाकी है और घायलों एवं शवों को अभी भी बाहर निकालने की जरूरत है।” अश्विनी ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा, “दीदी, सभी कोचों का पूरी तरह से निरीक्षण किया गया है और शव बरामद किए गए हैं। राज्य सरकार ने मरने वालों की अंतिम संख्या 238 होने की पुष्टि की है।”

केंद्रीय मंत्री के बताने के बावजूद ममता अपनी बात पर अड़ी रहीं और जोर देकर कहा कि तीन कोचों से अभी रेस्क्यू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि रेल मंत्री द्वारा बताई गई मौतों की संख्या केवल कल (शुक्रवार, 2 जून) तक की है, कुल संख्या नहीं है। बता दें कि अश्विनी त्रासदी के तुरंत बाद घटनास्थल पर पहुँचे थे, जबकि ममता बनर्जी अगले दिन दुर्घटनास्थल पर पहुँची थीं।

ममता बनर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अश्विनी ने कहा, “सीआरपीसी एक उचित प्रक्रिया निर्धारित करती है और राज्य सरकार ने समय-समय पर सटीक जानकारी दी है और अब तक सटीक जानकारी के अनुसार मरने वालों की संख्या 261 तक पहुँच गई है।” ममता उनकी इस्तीफा माँगने को लेकर अश्विनी ने कहा, “यह राजनीति करने का समय नहीं है। यह बहाली जल्द से जल्द सुनिश्चित करने का समय है।”

रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा, “बचाव अभियान पूरा हो गया है, अब हम बहाली का काम शुरू कर रहे हैं। 238 लोगों की मौत हुई है और 600 से ज्यादा घायल हुए हैं। कवच इस मार्ग पर उपलब्ध नहीं था”। उन्होंने बताया कि अब तक 100 से अधिक लोगों ने अनुग्रह राशि का दावा किया है।

‘भैंसा काटा जा सकता है तो गाय क्यों नहीं?’: कर्नाटक में ‘गोवध’ बैन होने पर कॉन्ग्रेसी मंत्री वेंकटेंश ने उठाए सवाल, बोले- गोहत्या हो या नहीं, हम फैसला लेंगे

कर्नाटक के पशुपालन मंत्री के वेंकटेश ने शनिवार (4 जून 2023) को कहा कि जब भैंसों को काटा जा सकता है तो गाय को क्यों नहीं काटा जा सकता। अपने बयान के माध्यम से उन्होंने संकेत दिया कि कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) भाजपा सरकार द्वारा राज्य में लागू किए गए गोहत्या विरोधी कानून की समीक्षा करेगी।

वेंकटेश ने कहा कि सरकार इस कानून के संबंध में चर्चा करेगी और फिर फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार एक विधेयक लाई थी, जिसमें उसने भैंस और भैंसा का वध करने की अनुमति दी थी, लेकिन कहा था कि गोहत्या नहीं होनी चाहिए। भाजपा ने सरकार ने इसके सजा को भी कड़ा कर दिया था।

कर्नाटक के पशुपालन मंत्री ने कहा, “जब भैंस और भैंसा का वध किया जा सकता है तो गायों का क्यों नहीं? यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है। हम चर्चा करेंगे और फैसला लेंगे। इस सिलसिले में अब तक कोई चर्चा नहीं हुई है।”

वेंकटेश ने कहा कि बूढ़ी गायों की देखभाल करने और उनकी मौत होने पर उन्हें दफनाने में किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि हाल में उनके फार्म हाउस में एक गाय की मौत हो गई। उस मृत गाय को दफनाने के लिए उन्हें जेसीबी की मदद लेनी पड़ी थी।

दरअसल, भाजपा सरकार ने कर्नाटक पशु वध रोकथाम एवं संरक्षण अधिनियम को 2021 में लागू किया था। यह अधिनियम राज्य में पशुओं की वध पर प्रतिबंध लगाता है। केवल बीमार मवेशियों और 13 साल से अधिक उम्र की भैंसों के वध की ही अनुमति दी गई। इस कानून का कॉन्ग्रेस विरोध करती रही है।

इससे पहले 25 मई 2023 को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में राज्यमंत्री प्रियांक खड़गे ने भी कहा था कि राज्य मे हिजाब पर प्रतिबंध, गोवध प्रतिबंध और धर्मांतरण कानून सहित अन्य मामलों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

कर्नाटक के सिद्धारमैया सरकार में राज्यमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा था, “हम अपने रुख को लेकर बहुत स्पष्ट हैं। हम ऐसे किसी भी कार्यकारी आदेश की समीक्षा करेंगे, हम किसी भी विधेयक की समीक्षा करेंगे जो कर्नाटक की आर्थिक नीतियों के प्रतिकूल है। जो राज्य की खराब छवि प्रस्तुत करता है।”

उन्होंने आगे कहा था, “कोई भी विधेयक जो आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग नहीं किया जाता है, कोई भी विधेयक जो रोजगार पैदा नहीं करता है, कोई भी विधेयक जो किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है, कोई भी विधेयक जो असंवैधानिक है उसकी समीक्षा की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो उसे रद्द किया जाएगा।”

राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही मानवाधिकार के नाम पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने अपनी तीन प्रमुख माँगें रखी थीं। उसने कहा था कि कर्नाटक में हिजाब पर प्रतिबंध, धर्मांतरण विरोधी कानून और गोवध कानून का सरकार समीक्षा करेगी।

एमनेस्टी इंडिया ने अपनी पहली माँग में शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने को कहा। उसने कहा, “यह प्रतिबंध मुस्लिम लड़कियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर करता है। इससे समाज में सार्थक रूप से भाग लेने की उनकी क्षमता बाधित होती है।”

अपनी दूसरी माँग में पशु क्रूरता (रोकथाम) अधिनियम 2020 और कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण विधेयक 2022 के प्रावधानों की समीक्षा करने और उन्हें निरस्त करने के लिए कहा। दूसरे शब्दों में, एमनेस्टी इंडिया ने कर्नाटक में गोहत्या की अनुमति और हिंदू विरोधी ताकतों को राज्य में धर्मांतरण रैकेट (लव जिहाद) चलाने की माँग की है।

एमनेस्टी इंडिया ने अपने ट्वीट में आगे कहा कि गोवध और धर्मांतरण पर बने कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, एमनेस्टी इंडिया ने मुस्लिम विक्रेताओं का बहिष्कार करने वाले हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया।

अपनी तीसरी माँग को लेकर एमनेस्टी ने कहा, “राज्य में चुनावों से पहले मुस्लिम के आर्थिक बहिष्कार और उनके खिलाफ हिंसा का आह्वान किया गया था। धर्म-जाति आधारित भेदभाव से प्रेरित घृणा और घृणित अपराधों को समाप्त करने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करें।” दिलचस्प बात यह है कि ऐसी कई रिपोर्ट आई हैं, जिनमें मुस्लिमों ने हिंदू व्यवसायों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है, लेकिन एमनेस्टी ने इसे कभी भी घृणित नहीं कहा।

रक्तदान करने पहुँचे RSS कार्यकर्ताओं की भीड़ देख डॉक्टर भी हैरान, सब कुछ छोड़ राहत कार्य में जुटे रहे संघ कार्यकर्ता: सबसे पहले पहुँच शुरू किया था कार्य

ओडिशा के बालासोर में हुए भयानक ट्रेन हादसे की तस्वीरें दिल दहलाने वाली हैं। इस हादसे में अब तक 280 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता यदि समय पर नहीं पहुँचते तो मौत का यह आँकड़ा कहीं अधिक हो सकता था। बताया जा रहा है कि NDRF की टीम के पहुँचने से पहले ही RSS कार्यकर्ता मौके पर पहुँचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गए थे।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, बालासोर में हुए ट्रेन हादसे का शिकार लोगों की मदद के लिए आरएसएस के कार्यकर्ता तन, मन, धन से जुटे हुए हैं। इस हादसे की जानकारी मिलते ही करीब 250 कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए थे। वहाँ मची चीख-पुकार के बीच आरएसएस कार्यकर्ताओं ने घायलों को इलाज के लिए तुरंत ही हॉस्पिटल ले जाना शुरू कर दिया था। आरएसएस कार्यकर्ताओं के राहत और बचाव कार्य शुरू होने के बाद NDRF की टीम भी हादसे वाली जगह पहुँच गई। इसके बाद संघ कार्यकर्ता उनके साथ मिलकर लोगों को बचाने में जुट गए।

एक ओर जहाँ आरएसएस के कुछ कार्यकर्ता ट्रेन मेंदबे हुए लोगों व घायलों की मदद कर रहे थे। वहीं, कुछ अन्य कार्यकर्ता घायलों को खून देने के लिए हॉस्पिटल पहुँच गए। रक्त दान करने आए युवाओं की भीड़ देखकर हॉस्पिटल के डॉक्टर भी हैरान हो गए थे। दरअसल, बालासोर के RSS के व्हाट्सएप ग्रुप में हादसे की जानकारी के साथ ही रक्तदान करने की अपील की गई थी। इसके बाद कार्यकर्ता हॉस्पिटल पहुँच गए।

ओडिशा के आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख रविनारायन पंडा ने कहा है कि हादसा बालासोर के महानगा गाँव के पास हुआ। महानगा में RSS के कई कार्यकर्ता रहते हैं। इसके अलावा जिले में भी संघ कार्यकर्ता सक्रिय हैं। हादसे 6:50 पर हुआ था। इसके बाद व्हाट्सएप मैसेज से जानकारी मिलने के बाद संघ कार्यकर्ता 7 बजे तक हादसे वाली जगह पहुँच गए थे। इसके बाद उन लोगों ने ट्रेन के दरवाजे खोलकर घायलों को बाहर निकालना शुरू किया। साथ ही स्थानीय लोगों की सहायता से ट्रैक्टर, बाइक और कार के माध्यम से घायलों को हॉस्पिटल पहुँचाया।

आरएसएस के स्थानीय कार्यकर्ता हरेंद्र का कहना है कि एक हजार से अधिक आरएसएस कार्यकर्ता लोगों की मदद करने के लिए आगे आए हैं। जिन लोगों ने रात में रक्त दान किया था वे सुबह से घायलों और उनके परिजनों के भोजन पानी की व्यवस्था कर रहे थे। इसके अलावा, घायलों को उनके परिजनों से मिलवाने में RSS कार्यकर्ता सहयोग कर रहे हैं।

‘वो मुझे यहीं मारेगा, बोल क्या करेगा तू?’: हिन्दू लड़की को पीट रहा था मुस्लिम युवक, हिन्दू कार्यकर्ताओं ने टोका तो बोलने लगी – ये मेरे साथ है चाहे कुछ हो जाए

देश में लव जिहाद की घटनाएँ बढ़ती जा रहीं हैं। मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए तरह-तरह की हरकतें करते पकड़े जा चुके हैं। हालाँकि ऐसे कुछ मामलों में लड़कियों की नासमझी भी उन पर भारी पड़ती है। लव जिहाद से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में हिंदू लड़की मुस्लिम युवक के साथ दिखाई दे रही है। जब उसे हिंदू युवक रोकने की कोशिश करता है तो वह उल्टा उसे ही धमकाते नजर आ रही है।

यह वीडियो संजू तिवारी नामक यूजर ने ट्विटर पर शेयर किया। वीडियो में मुस्लिम युवक हिंदू लड़की को धक्का देकर घर जाने के कहता दिखाई दे रहा है। वहीं, वीडियो बना रहा व्यक्ति खुद को ‘बजरंग दल’ का कार्यकर्ता बताते हुए मुस्लिम युवक से कहता है, “बहुत देर से देख रहा हूँ तो उसको मार रहा था।” इसके बाद वह लड़की को वापस बुलाकर उससे बातचीत करने की कोशिश करता है। वहीं, इस बीच मुस्लिम युवक लड़की को चिल्लाकर घर जाने के लिए कहता दिखाई दे रहा है।

वहीं, खुद को बजरंग दल का कार्यकर्ता बता रहा व्यक्ति लड़की से उसका नाम पूछता है। इस पर लड़की अपना नाम प्रिया बताती है। इसके बाद वह लड़की से कहता है कि यह लड़का मुस्लिम है और तुम्हें बिल्कुल भी शर्म नहीं है। अभी तुमने केस नहीं सुना तुमने। (शायद वह दिल्ली के शाहबाद इलाके में हुई साक्षी की हत्या की बात कर रहा है।) इस पर लड़की कहती है ये मुस्लिम है इससे तुम्हें क्या मतलब है। एक वीडियो वायरल हो गया तो तुम बतंगड़ बनाकर बैठ जाओगे। ये मेरे साथ है चाहे कुछ भी हो जाए।

इस पर वीडियो बना रहा व्यक्ति कहता है कि वह तुम्हें इतनी देर से मार रहा है तब तुमने कुछ नहीं किया। इस पर लड़की पलटकर जवाब देते हुए कहती है वह मुझे यहाँ भी मारेगा, बोल क्या करेगा तू? इसके बाद लड़की चली जाती है। इसके बाद मुस्लिम युवक वीडियो बना रहे व्यक्ति को धौंस दिखाते हुए कहता है कि वह दिल्ली क्राइम प्रेस में काम करता है। हालाँकि जब उसे आईडी प्रूफ माँगा गया तो वह कुछ भी बोलने की जगह फोन पर बात करते हुए आगे बढ़ जाता है।