जापान में पिछले 2 दशक में अचानक से मुस्लिमों की संख्या में बढ़ौतरी हुई है। वहाँ मस्जिद जो पहले गिने-चुने होते थे वो भी अब गिनती में काफी बढ़ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डेमोग्राफिक चेंज के पीछे कारण जापान में आकर बसने वाले प्रवासी मुस्लिम हैं। इसके अलावा मुस्लिम और जापानियों में शादियों के चलते भी यह बदलाव देखने को मिल रहा है।
हैरान करने वाली बात है कि सन् 2000 में जापान में मुस्लिमों की संख्या सिर्फ 10 से 20 हजार थी लेकिन अब इनकी गिनती 2 लाख पार है। यानी एक ही पीढ़ी में ये लोग जापान में 10 गुना बढ़े हैं। वहीं 2010 तक जापान में मुस्लिम 110,000 हुए थे और अब ये 230,000 पहुँच गए।
इसी तरह जापान में मस्जिद दिखना पहले आसान नहीं था। 1999 में केवल 15 मस्जिद थे। मगर अब वहाँ 113 मस्जिद हैं। बताया जा रहा है जो जगह कभी एक फैक्ट्री हुआ करती थी वहाँ भी मस्जिद खोल लिया गया जिसे इंडोनेशिया फंड देता है।
जापान के पवित्र स्थल पर इस्लामी कट्टरपंथी का हमला
हाल में एक मामला सामने आया था जब जापान के कोबे शहर में जापानियों के (शिंटो धर्म के) पवित्र स्थल पर घुस एक मुस्लिम प्रावासी ने हमला किया था और प्रार्थना के बीच में जाकर जापानी महिला को कहा था, “यहाँ सिर्फ एक ईश्वर है। अल्लाह। और कोई ईश्वर नहीं।”
घटना की वीडियो जब वायरल हुई तो जापानी यह देख नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि जापान में सबको अपना धर्म मानने की आजादी है। लेकिन बावजूद इसके अगर ये लोग इस तरह करते हैं तो हम साथ नहीं रह सकते। ऐसे मुस्लिमों का होना मुस्लिमों के लिए भी खतरनाक है।
बता दें कि जापान में मुस्लिमों की एंट्री 16 वीं सदी की बात है। जब जापानी व्यवसायियों ने मि़डल ईस्ट और साउथईस्ट एशिया में व्यापार बढ़ाया। इसी के बाद जापानियों की पहचान इस्लामी रिवाज और तौर-तरीकों से हुई। 19वीं शताब्दी में जापान के औद्योगिक और आर्थिक विकास के साथ कई प्रवासियों का आना हुआ। इनमें कई भारत, तुर्की और मिडल ईस्ट के मुस्लिम पहुँचे। धीरे-धीरे वहाँ इस्लाम फैसना शुरू हुआ। 20वीं शताब्दी तक इस्लामी संगठन बन चुके थे। कुछ जापानियों ने इस्लाम अपनाना शुरू कर दिया था। 1960 में कई पाकिस्तानी-बांग्लादेशी मुस्लिम भी जापान आकर बस गए। धीरे-धीरे इनकी तादाद इतनी बढ़ी कि ये 2 लाख का आँकड़ा पार कर गए हैं।
स्पेन में डेमोग्राफी चेंज
उल्लेखनीय है कि केवल जापान में ही मुस्लिमों की बढ़ती तादाद चिंता का कारण नहीं है। पिछले 30 वर्षों में स्पेन में मुस्लिमों की जनसंख्या 10 गुना बढ़ी है। ये जानकारी खुद स्पेन के ही ‘सेक्रेटरी ऑफ द इस्लामिक कमीशन’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम यूरोप के इस देश में मुस्लिमों की जनसंख्या 25 लाख के पार चली गई है। मोहम्मद अजाना ने ‘Anadolu’ मीडिया संस्थान को बताया कि अनाधिकारिक आँकड़ों की मानें तो स्पेन में मुस्लिमों की जनसंख्या 30 लाख के भी पार चली गई है।
देशद्रोह कानून को लेकर जारी बहस के बीच लॉ कमीशन (Law Commission) ने गुरुवार (1 जून 2023) को अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी। कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में 132 साल पुराने इस कानून को कुछ संशोधन के साथ बरकरार रखने की सिफारिश की है। इसके साथ ही, इसकी सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास तक करने का सुझाव दिया है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रितुराज अवस्थी की अध्यक्षता में 22वाँ विधि आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A में परिभाषित राजद्रोह कानून को बनाए रखा जाना चाहिए। आयोग ने इस कानून के तहत सजा के प्रावधान को कम-से-कम 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक बढ़ाने की सिफारिश की है।
विधि आयोग की इस 279वें रिपोर्ट में कहा गया है, “विधि आयोग की 42वीं रिपोर्ट में धारा 124A के लिए सजा को बहुत ‘विषम’ बनाया गया है। यह या तो आजीवन कारावास या केवल तीन साल तक की कैद हो सकती है। इसके बीच में कुछ भी नहीं। न्यूनतम सजा जुर्माना हो सकती है। एक तुलना IPC के अध्याय VI में दिए गए अपराधों के लिए दिए गए वाक्यों से पता चलता है कि धारा 124A के लिए निर्धारित दंड में स्पष्ट असमानता है। इसलिए, यह सुझाव दिया जाता है कि प्रावधान की सजा को अनुरूप लाने के लिए संशोधित किया जाए।”
अपनी रिपोर्ट में विधि आयोग ने कहा, “धारा 124A को भारतीय दंड संहिता में बनाए रखने की आवश्यकता है। हालाँकि कुछ संशोधन के, जैसा कि सुझाव दिया गया है, साथ इसमें केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य के निर्णय को शामिल किया जा सकता है, ताकि प्रावधान के उपयोग के संबंध में और अधिक स्पष्टता लाई जा सके।”
कमीशन ने यह भी कहा कि राजद्रोह केस औपनिवेशिक कानून है, यह कहकर इस पर सवाल उठाया जाएगा तो पूरा भारतीय दंड संहिता (IPC) ही सवालों के घेरे में आ जाएगा। केवल इस तथ्य के साथ कि एक विशेष कानूनी प्रावधान अपने मूल में औपनिवेशिक है और कुछ देशों ने इसे खत्म कर दिया है, इसे निरस्त करने को मान्य नहीं करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि IPC की धारा 124A जैसे प्रावधान की अनुपस्थिति में सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली किसी भी अभिव्यक्ति पर निश्चित रूप से विशेष कानूनों और आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। इसमें अभियुक्तों से निपटने के लिए कहीं अधिक कड़े प्रावधान हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे निरस्त करने से देश की अखंड़ता और सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।
दरअसल, फॉरवर्ड कम्यनिस्ट पार्टी के नेता केदारनाथ सिंह ने 26 मई 1953 में बिहार के मुंगेर जिले के बरौनी गाँव में भाषण देते हुए CID के अधिकारियों के लिए ‘कुत्ता’ और कॉन्ग्रेस के नेताओं के लिए ‘गुंडा’ शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस देश के लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार कर रही है, जैसा कि अंग्रेज करते थे। इसके बाद उन पर राजद्रोह का मुकदमा चला था और उन्हें एक साल का सश्रम कारावास हुई थी।
बताते चलें कि भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने 11 मई 2022 को इसकी वैधता पर निर्णय लेने के बजाय प्रावधान को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने न्यायालय को बताया था कि वह इसकी जाँच करेगी कि धारा 124A को बनाए रखने की आवश्यकता है या नहीं।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) 10 दिन की अमेरिका यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने गुरुवार (1 जून 2023) को वाशिंगटन के नेशनल प्रेस क्लब में सवालों का जवाब देते हुए अजीबोगरीब दावा किया। भारत के विभाजन में अहम भूमिका निभाने वाली पार्टी मुस्लिम लीग को उन्होंने सेकुलर यानी धर्मनिरपेक्ष (Muslim League secular) करार दिया।
राहुल गाँधी से पूछा गया था, “आपने हिंदू पार्टी भाजपा का विरोध करते हुए धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के बारे में बात की। लेकिन जिस केरल से आप सांसद थे, वहाँ कॉन्ग्रेस मुस्लिम पार्टी मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन में रही है।” इस सवाल के जवाब में राहुल गाँधी ने कहा, “मुस्लिम लीग पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, मुस्लिम लीग में कुछ भी गैर धर्मनिरपेक्ष नहीं है। मुझे लगता है कि आपने मुस्लिम लीग के बारे में नहीं पढ़ा है।”
#WATCH | Washington, DC: …" Muslim League is a completely secular party, there is nothing non-secular about the Muslim League…": Congress leader Rahul Gandhi on being asked about Congress's alliance with Indian Union Muslim League (IUML) in Kerala pic.twitter.com/wXWa7t1bb0
यूँ तो राहुल गाँधी विवादित और ऊलजलूल बयानबाजी के लिए ही पहचाने जाते हैं, लेकिन मुस्लिम लीग का इतिहास देखते हुए उनका बयान हैरान करने वाला है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का दावा है कि देश की आजादी के बाद साल 1948 में उसकी स्थापना हुई। लेकिन सच्चाई यह है कि IUML पाकिस्तान के संस्थापक और इस्लामवादी मोहम्मद अली जिन्ना की ऑल इंडिया मुस्लिम लीग (AIML) की एक शाखा ही है।
विभाजन के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम लीग को पाकिस्तान में मुस्लिम लीग और भारत में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के रूप में स्थापित किया गया था। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) अपनी वेबसाइट पर दावा करती है वह धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन ऐसा कई बार सामने आया है कि जब इस पार्टी ने खुलकर इस्लामवाद का समर्थन किया है।
मुस्लिम लीग ने मुस्लिमों के एक अलग देश की माँग का पुरजोर समर्थन किया था। इसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की भावनाओं और इरादों को स्वतंत्र भारत में जीवित रखने के लिए मार्च 1948 में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का जन्म हुआ।
मोहम्मद अली जिन्ना की मुस्लिम लीग से अलग होने के बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के पहले अध्यक्ष मुहम्मद इस्माइल ने भारत विभाजन आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था। यही नहीं, वह बँटवारे और इस्लामवादियों के लिए अलग देश बनाए जाने का समर्थक था। यहाँ दिलचस्प बात यह है कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को ‘धर्मनिरपेक्ष पार्टी’ बताने का दावा करने वाले मुहम्मद इस्माइल ने संविधान सभा में भारतीय मुस्लिमों के लिए शरिया कानून को बनाए रखने की वकालत की थी।
भारत विभाजन के बाद मुस्लिमों की पहली राजनीतिक पार्टी आईयूएमएल के संस्थापक अध्यक्ष मुहम्मद इस्माइल ने मोहम्मद अली जिन्ना के विचारों की तरह दावा किया था कि वह और उनकी पार्टी भारत के मुस्लिमों की एक मात्र हितैषी पार्टी है। देश की आजादी के बाद कॉन्ग्रेस ने सियासी फायदे के लिए मुस्लिम लीग से भले ही हाथ मिला लिया, लेकिन कभी जवाहर लाल नेहरू ने जिन्ना की मुस्लिम लीग से गठबंधन करने से इनकार कर दिया था। कॉन्ग्रेस की अवसरवादिता के नापाक मंसूबे के चलते ही इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसी इस्लमावादी पार्टी को मुस्लिमों के हितों की रक्षा करने के नाम मजहब की राजनीति करने का सबसे बड़ा सहारा मिला।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का नाम केरल में सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने के मामले में भी सामने आया था। जस्टिस थॉमस पी जोसेफ आयोग की रिपोर्ट के अनुसार साल 2003 में केरल में हुए मराड नरसंहार की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में आईएमयूएल भी शामिल थी। जस्टिस जोसेफ आयोग की रिपोर्ट में मराड नरसंहार को ‘इस्लामी कट्टरपंथियों और आतंकी संगठनों की सांप्रदायिक साजिश’ बताया गया था। इसके अलावा, साल 2017 में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने हिंसा के मामले की जाँच करते हुए एक नई FIR दर्ज की थी। इस FIR में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेताओं पीपी मोइदीन कोया और मोईन हाजी को दंगों के लिए फंडिंग करने, साजिश रचने में संलिप्त पाया था।
केरल में कॉन्ग्रेस की एक सहयोगी पार्टी है। नाम है- इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML)। विचारधारा से प्योर कट्टरपंथी है। मोटे शब्दों में कहें तो इस पार्टी की सोच भी वही है जिसने 1947 में भारत का विभाजन करवाया। एक सवाल के जवाब में राहुल गाँधी ने इस पार्टी को ‘सेकुलर’ बताया है। 10 दिवसीय अमेरिकी दौरे पर गए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष से 1 जून 2023 को वाशिंगटन के नेशनल प्रेस क्लब में इस पार्टी को लेकर सवाल पूछा गया था।
वैसे यह बयान हैरान करने वाला नहीं है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो कई साल पहले ही बता चुके हैं कि कॉन्ग्रेस मुस्लिम लीग वायरस से संक्रमित है। ऐसे में राहुल गाँधी ने कट्टर मजहबी विचारों वाली पार्टी को विदेश में सेकुलर बताकर बस इसका प्रदर्शन किया है कि यह संक्रमण कितना गहरा है। सेकुलरिज्म की कॉन्ग्रेस की परिभाषा कितनी छद्म है। इस छद्म को सालों पहले दिवंगत सुषमा स्वराज ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान भी उजागर किया था।
#WATCH | Washington, DC: …" Muslim League is a completely secular party, there is nothing non-secular about the Muslim League…": Congress leader Rahul Gandhi on being asked about Congress's alliance with Indian Union Muslim League (IUML) in Kerala pic.twitter.com/wXWa7t1bb0
योगी आदित्यनाथ में 5 अप्रैल 2019 2019 में कॉन्ग्रेस पर मुस्लिम लीग के प्रभाव को बताते हुए ट्वीट किए थे। उन्होंने लिखा था, “मुस्लिम लीग एक वायरस है। एक ऐसा वायरस जिससे कोई संक्रमित हो गया तो वो बच नहीं सकता और आज तो मुख्य विपक्षी दल कॉन्ग्रेस ही इससे संक्रमित हो चुका है। सोचिए अगर ये जीत गए तो क्या होगा? ये वायरस पूरे देश मे फैल जाएगा।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा था, “1857 के स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडे के साथ पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ मिलकर लड़ा था, फिर ये मुस्लिम लीग का वायरस आया और ऐसा फैला कि पूरे देश का ही बँटवारा हो गया। आज फिर वही खतरा मंडरा रहा। हरे झंडे फिर से लहरा रहे है। कॉन्ग्रेस, मुस्लिम लीग वायरस से संक्रमित है, सावधान रहिए।”
वहीं भारतीय राजनीतिक दलों के छद्म सेकुलरिज्म को जून 1996 में लोकसभा में सुषमा स्वराज ने भी उजागर किया था। इसमें उन्होंने बताया था कि कैसे तथाकथित सेकुलरों का सेकुलरिज्म हिंदुओं को गाली देने से शुरू होता है। कैसे हिंदू और राष्ट्र हित की बात करने वालों को साम्प्रदायिक घोषित कर दिया जाता है।
राहुल गाँधी ने अमेरिका से जिस सेकुलरिज्म का संदेश देने की कोशिश की है, वैसी ही सोच पर प्रहार करते हुए सुषमा स्वराज ने कहा था, “हम साम्प्रदायिक हैं, हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हम वंदे मातरम् गाने की वकालत करते हैं। हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए लड़ते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि धारा 370 को समाप्त करने की माँग करते हैं। हाँ, हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हिन्दुस्तान में गोरक्षा और उसके वंश और वर्धन की बात करते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि हिंदुस्तान में समान नागरिक संहिता बनाने की माँग करते हैं। हम साम्प्रदायिक हैं, क्योंकि कश्मीरी शरणार्थियों के दर्द को जुबान देने का काम करते हैं।”
उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में नूर हसन ने शेविंग ब्लेड से गला काटकर एक हिंदू महिला की हत्या कर दी। महिला का शव गन्ने के खेत में नग्नावस्था में मिला था। वहीं, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में दानिश पर लिव इन रिलेशन में रह रही हिंदू लड़की की हत्या का आरोप लगा है। मौत से पहले मृतका ने दानिश को लेकर कई बड़े खुलासे किए।
पहला मामला उधमसिंह नगर जिले के कनौरा गाँव का है। यहाँ सोमवार (29 मई, 2023) को गन्ने के खेत में नग्न अवस्था में एक महिला का शव मिला था। महिला के गले पर काटने का निशान था। दुष्कर्म और हत्या की आशंका जताई जा रही थी। मृतका के पति ने ठेकेदार नूर हसन पर हत्या का शक जताया था। मृतक महिला नूर हसन के यहाँ काम करती थी। मामले की जाँच कर रही पुलिस ने शक के आधार पर ठेकेदार नूर हसन को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
शुरुआती पूछताछ में नूर हसन हत्या की बात से इनकार करता रहा। लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की की तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अधीक्षक अभय प्रताप सिंह ने खुलासा करते हुए बताया है कि नूर ने ही महिला की हत्या की थी। मृतका उसके यहाँ मजदूरी करती थी और दोनों के बीच पिछले आठ सालों से संबंध थे। नूर हसन ने पुलिस को बताया है कि उसके और महिला के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान उसने महिला को धक्का दे दिया। इससे सिर में चोट लगने से उसकी की मौत हो गई। इसके बाद उसने हत्या को दूसरा रूप देने के लिए शेविंग ब्लेड से महिला का गला काट लाश गन्ने के खेत में फेंक दी।
छत्तीसगढ़ में भी लव जिहाद
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में भी लव जिहाद और हत्या का मामला सामने आया है। यहाँ पहले से शादीशुदा दानिश नामक युवक के अनुसूचित जनजाति समाज की लड़की के साथ संबंध थे। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। लड़की प्रेग्नेंट हुई तो दानिश ने उसे गर्भपात कराने के लिए दवा खिला दी। इससे गर्भपात तो हो गया, लेकिन लड़की की तबियत भी खराब हो गई। उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई।
इस मामले में मृतक लड़की का वीडियो भी सामने आया है। मौत से पहले उसने कहा है कि दानिश उसे मारपीट कर प्रताड़ित करता था। वह दानिश से अलग होना चाहती है, लेकिन वह अलग नहीं होने दे रहा था और लगातार परेशान कर रहा था। मृतका ने यह भी खुलासा किया कि दानिश से पहले भी उसको एक बच्चा हुआ था। उस बच्चे के जन्म के दो दिन बाद ही दानिश ने कहीं गायब कर दिया।
मृतका के भाई का आरोप है कि दानिश ने पहचान छिपाकर उसकी बहन से दोस्ती की और संबंध बनाए। वह उस पर धर्मांतरण कर इस्लाम कबूल करने का दवाब बनाता था। इनकार करने पर मारपीट करता था। मृतक लड़की के भाई ने न्याय की गुहार लगाते हुए दानिश पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और हाई कोर्ट के जज की अध्यक्षता में एसआईटी बनाकर जाँच कराने की माँग की है।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के घुटनों की सर्जरी सफल रही है। गुरुवार (01 जून 2023) को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में उनकी सर्जरी हुई। सर्जरी से पहले धोनी को कार में भगवत गीता पढ़ते देखा गया था। चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान एमएस धोनी बुधवार (31 मई) को अस्पताल पहुँच गए थे। बताया जा रहा है कि 1-2 दिन में उन्हें छु्ट्टी भी मिल जाएगी।
आईपीएल 2023 के अपने पहले मुकाबले में ही चोटिल हो जाने के बाद महेंद्र सिंह धोनी के लिए पूरा सीजन कष्टदायक रहा। कई मैचों में उन्हें विकेट के पीछे लंगड़ाते देखा गया। यहाँ तक की फाइनल मुकाबले में भी धोनी घुटनों पर पट्टी बाँधे नजर आए। फाइनल मुकाबला जीतने के फौरन बाद एमएस ने अपने घुटनों की सर्जरी का फैसला लिया।
धोनी बुधवार (31 मई) शाम को कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती हुए थे। धोनी की पत्नी साक्षी भी उनके साथ मौजूद रहीं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि घुटने के ऑपरेशन से पहले एमएस धोनी भगवत गीता पढ़ रहे थे। उनकी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल है। फोटो में कार में बैठे धोनी हाथ में भगवत गीता लिए नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनकी यह तस्वीर ऑपरेशन से पहले की है।
धोनी के घुटने का ऑपरेशन मुंबई के मशहूर ऑर्थोपेडिक डॉक्टर दिनशॉ पार्दीवाला ने किया है। दिनशॉ पार्दीवाला ने ही क्रिकेटर ऋषभ पंत का ऑपरेशन किया था। पार्दीवाला बीसीसीआई मेडिकल पैनल का भी हिस्सा हैं। सीएसके के सीईओ काशी विश्वनाथन ने दावा किया है कि ऑपरेशन के बाद उनकी बात एमएस धोनी से हुई है। उन्होंने कहा है कि धोनी के घुटनों की सर्जरी सफल रही है और उनकी हालत में तेजी के साथ सुधार हो रहा है।
Mahendra Singh Dhoni's knee surgery has been successful. He is recovering well: Kasi Viswanathan, CEO of Indian Premier League (IPL) franchise Chennai Super Kings
टाटा आईपीएल 2023 का फाइनल मुकाबला जीतने के बाद धोनी ने अपने प्रशंसकों के लिए आईपीएल का एक सीजन और खेलने की उम्मीद जताई थी। अब उनके पास फिट होने के लिए पर्याप्त समय होगा।
झारखंड के रामगढ़ जिले के एक स्कूल में आइकन बताकर पाकिस्तान मूल की मलाला यूसुफजई की तस्वीर लगाने का मामला सामने आया है। इस तस्वीर को जब गाँव वालों ने देखा तो इसका विरोध किया। इसके बाद इस तस्वीर को हटा ली गई। वहीं, कुछ स्कूलों से ‘हिंदू’ और ‘रामरुद्र’ जैसे शब्द हटा दिए गए हैं। इसको लेकर भाजपा ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया है।
ये मामला राजधानी राँची से सटे रामगढ़ जिले के कुजू का है। यहाँ के सरकारी स्कूल में मलाला यूसुफजई की फोटो देखकर गाँव के लोग भड़क गए। ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए स्कूल से मलाला की फोटो को हटाया गया।
बताया जा रहा है कि स्कूल की एक शिक्षिका ने बच्चों को प्रेरित करने के लिए पाकिस्तान मूल की इंग्लैंड निवासी और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई की तस्वीर लगाई थी। स्कूल के प्रिंसिपल रविंद्र प्रसाद ने बताया कि शिक्षिका ने उनसे परमिशन लेकर यह तस्वीर लगाई थी।
इस बीच यह बात भी सामने आई है कि हेमंत सोरेन की सरकार ने झारखंड में विद्यालयों के नाम से ‘हिंदू’ और ‘रामरुद्र’ शब्द हटा दिए हैं। दरअसल, सोरेन सरकार ने राज्य के 80 विद्यालयों को उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में चयन किया है। इन स्कूलों के नाम के साथ सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (CM School Of Excellence) जोड़ा जाएगा।
इस दौरान जिन स्कूलों में हिंदू या रामरुद्र शब्द थे, उन्हें हटा दिया गया है। एक स्कूल से ‘हिन्दू’ शब्द और एक अन्य स्कूल से ‘रामरुद्र’ शब्द हटा दिया गया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने पत्र जारी करके कहा कि कुछ स्कूलों के नाम बदले गए हैं।
लोहरदगा के एक स्कूल का नाम लोहरदगा नदिया हिन्दू हाईस्कूल था। अब इसका नाम बदल कर सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस लोहरदगा, नदिया कर दिया गया है। हिन्दू हाईस्कूल की स्थापना सन 1931 में हुई थी। इसके लिए उद्योगपति बिड़ला घराने ने जमीन दी थी। स्कूल के नाम में से हिन्दू शब्द हटाए जाने का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।
वहीं, बोकारो के चास में स्थित +2 हाईस्कूल का नाम रामरुद्र +2 हाईस्कूल था। अब इसमें से ‘रामरुद्र’ हटाकर उसका नाम सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस रखा गया है। राज्य के ऐसे 9 स्कूल हैं, जिनके नाम बदले गए हैं। इनमें नदिया (लोहरदगा) के हाईस्कूल और चास के स्कूल के अलावा पाकुड़ राज +2 हाईस्कूल से राज शब्द हटा दिया गया है। जिला स्कूल, हजारीबाग से जिला शब्द हटा दिया गया है।
मलाला युसुफजई की तस्वीर लगाने को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “तुष्टिकरण की राजनीति में झारखंड सरकार इतना गिर गई है कि एक पाकिस्तानी एक्टिविस्ट की तस्वीर सरकारी स्कूल में लगा कर प्रचार प्रसार किया जा रहा है।”
अपने ट्वीट में मरांडी ने आगे लिखा, “ये तो भला हो जनता का जो जागरूक है और गाँव वालों के विरोध के बाद यह तस्वीर हटानी पड़ी… मुख्यमंत्री जी…अगर लड़कियों की शिक्षा के लिए आपको किसी आइकॉन की तस्वीर लगानी ही है तो सावित्रीबाई फुले की लगाइए…किसी दुश्मन देश के आइकॉन का नहीं!”
तुष्टिकरण की राजनीति में झारखंड सरकार इतना गिर गई है कि एक पाकिस्तानी एक्टिविस्ट की तस्वीर सरकारी स्कूल में लगा कर प्रचार प्रसार किया जा रहा है…
ये तो भला हो जनता का जो जागरूक है और गाँव वालों के विरोध के बाद यह तस्वीर हटानी पड़ी…
बता दें कि इससे पहले मुस्लिम बहुल इलाकों में चल रहे स्कूलों के नाम में जबरन उर्दू शब्द जोड़ने की खबरें भी आई थीं। इन स्कूलों में सिर्फ उर्दू शब्द ही नहीं जोड़े गए थे, बल्कि रविवार की जगह स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी भी जबरन घोषित कर दी थी। इसको लेकर देश भर में बवाल हुआ था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने इसे ठीक कराया था।
झारखंड के 5 जिलों में 70 ऐसे स्कूलों का पता चला था, जहाँ रविवार की छुट्टी की जगह मुस्लिम समुदाय ने जबरन जुमे (शुक्रवार) को छुट्टी तय कर दी थी। इतना ही नहीं, इन स्कूलों में होने वाले प्रार्थना को भी बदल दिया था। इसको लेकर हेमंत सोरेन की देश भर में किरकिरी हुई थी।
कॉन्ग्रेस नेता और अयोग्य करार दिए गए सांसद राहुल गाँधी इन दिनों अमेरिका (USA) की यात्रा पर हैं। उनका दौरा एक हफ्ते का है। इस दौरान अमेरिका के अलग-अलग इलाकों में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम और राहुल गाँधी के साथ मुलाकात जैसे सत्र के आयोजन की जिम्मेदारी द इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस (The Indian Overseas Congress) संभाल रही है।
4 जून को राहुल गाँधी न्यूयॉर्क के जेविट्स सेंटर (Javits Centre) में आयोजित कार्यक्रम को खिताब करने वाले हैं। अमेरिका स्थित IOC कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियाँ कर रहा है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक पंजीकरण फॉर्म (Registration form) वायरल हो रहा है। इस फॉर्म में न्यूयॉर्क और आस पास के इलाकों में रहने वाले मुस्लिमों से कार्यक्रम का हिस्सा बनने की अपील की जा रही है।
अमेरिका में राहुल गाँधी के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मुस्लिमों को बुलाने वाला पंजीकरण फॉर्म रजिस्ट्रेशन अब बंद हो चुका है। फोटो साभार- गूगल फॉर्म्स
बता दें राहुल गाँधी के अमेरिका यात्रा के दौरान कार्यक्रमों का हिस्सा बनने के लिए रजिस्ट्रेशन फॉर्म इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल फॉर्म इससे अलग है।
राहुल गाँधी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन का ऑरिजनल फॉर्म (फोटो साभार- आईओसी)
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे फॉर्म जो अब रजिस्ट्रेशन के लिए उपलब्ध नहीं है, उनपर संपर्क किए जाने वाले व्यक्तियों के नामों की सूची देखने के बाद लोग चिंता जता रहे हैं। दरअसल, इसमें कुछ ऐसे नाम शामिल हैं जिनपर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।
रजिस्ट्रेशन फॉर्म पर ‘संपर्क करें’ की सूची में मस्जिद अल-वली/MCNJ नॉर्थ एडिसन वुडब्रिज TWP न्यू जर्सी (NJ) के तज़ीम अंसारी और नियाज़ खान, मस्जिद MCMC साउथ एडिसन/पिस्कटवे/ईस्ट ब्रंसविक NJ के जावेद सैयद, हबीब सिद्दीकी और मीर कादरी हैं। ISCJ/MCGP साउथ ब्रंसविक/केंडल पार्क/प्रिंसटन NJ के मोहम्मद असलम और मिन्हाज खान, मस्जिद सदर सायरेविले/ओल्ड ब्रिज NJ के नज़ीर सैयद और अकिल मोहम्मद और दारुल इस्लाह टीनेक, NJ के शाहीन खतीब और हाशिर काज़ी के नाम शामिल हैं।
Prominent Indian politician Shri Rahul Gandhi, during his proposed #RahulInUSA tour,would attend several public events. He may not know, but some ‘coordinators’ who are claiming to be associated with events are Pak Jamaat-e-Islami & Muslim Brotherhood-linked fronts
मिली जानकारी के अनुसार इस विवादास्पद फॉर्म से अब रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया गया है।
साभार- गूगल फॉर्म्स
ट्विटर यूजर और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) अकाउंट Disinfo Lab ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर थ्रेड के जरिए इस संबंध में जानकारी दी है। इसके अनुसार, MCNJ का नेतृत्व इस्लामिक सर्कल ऑफ नॉर्थ अमेरिका (ICNA) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर इमाम जवाद अहमद कर रहे हैं जो पाकिस्तानी मूल के हैं।
गौरतलब है कि आईसीएनए एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है जिसके संबंध पाकिस्तान के जमात-ए-इस्लामी से हैं। जवाद अहमद कश्मीर को भारत से अलग करने का ख्वाब देखने वाले हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों का गुणगान किया है। सलाहुद्दीन की नजदीकी मेहराजुद्दीन से भी थी जो कंधार प्लेन हाईजैक (1999) मामले के आरोपितों में से एक है।
Another coordinator of the eventis Mohammed Aslam a member of Muslim Center of Greater Princeton (MCGP), another close partner of ICNA. Banned radical group #SIMI founder is also ICNA member. Fronts like #JusticeForAll; #HhRD operate under ICNA/ Jamaat umbrella.
Disinfo Lab द्वारा उजागर दूसरा नाम है मोहम्मद असलम। असलम ICNA के करीबी सहयोगी मुस्लिम सेंटर ऑफ ग्रेटर प्रिंसटन (MCGP) का सदस्य है। Disinfo Lab के अनुसार जस्टिस फॉर ऑल जैसे मोर्चे आईसीएनए के तहत काम करते हैं। हाल ही में ऑपइंडिया ने भी ICNA द्वारा अमेरिका की जेलों में इस्लाम के प्रचार और कैदियों के धर्मांतरण पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। आईसीएनए भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहता है। सोशल मीडिया पर भी यह संगठन हिंदू और भारत विरोधी पोस्ट शेयर करता रहता है।
Another coordinator of the eventis Mohammed Aslam a member of Muslim Center of Greater Princeton (MCGP), another close partner of ICNA. Banned radical group #SIMI founder is also ICNA member. Fronts like #JusticeForAll; #HhRD operate under ICNA/ Jamaat umbrella.
इस फॉर्म में तीसरा आपत्तिजनक नाम है मिन्हाज खान का जो भारत विरोधी लॉबी के इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) से जुड़ा हुआ है। ऑपइंडिया ने अपने रिपोर्टों में IAMC और उसकी भारत विरोधी गतिविधियों को विस्तार से कवर किया है।
Another self-appointed coordinator for event, Minhaj Khan is linked to anti-India lobbying group Indian American Muslim Council(IAMC). IAMC relentlessly targets India on pretext of human rights, religious freedom, & via sharing fake news to stir communal unrest in India.
Disinfo Lab ने बताया कि IAMC के कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद जमात से जुड़े एक अन्य संगठन इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (IMANA) के कार्यकारी निदेशक भी हैं। कोरोना महामारी के समय IMANA ने भारत की मदद करने के नाम पर धन उगाहने का अभियान चलाया था और कथित तौर पर पैसों की हेराफेरी की थी। ऑपइंडिया ने वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान संस्था की संदिग्ध गतिविधियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
Fun Fact: IMANA at one end is associated with retired Pakistani Army/ Naval officials; & at another end associated with Terrorists groups – LeT & Hizbul Mujahideen. Full spectrum of Pakistani establishment. One can only imagine where the Covid relief fund has gone.
IMANA के पाकिस्तानी सेना और नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों से संबंध हैं। इसके अलावा आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा सहित कई आतंकवादी संगठनों से भी इसके संबंध होने की बात कही जाती है।
Disinfo Lab के अनुसार 2017 में IMANA के सदस्य मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े संगठन ‘इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ (ISNA) के सदस्य रहे हैं। 2017 में ही कनाडा रेवेन्यू एजेंसी ने ISNA कनाडा द्वारा आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के वित्त पोषण का खुलासा किया था।
Orgs. like IAMC and ICNA sit at confluence of Jamaat & Muslim Brotherhood (MB). IMANA’s members have been part of MB front Islamic Society of North America (ISNA). In 2017 ISNA Canada was implicated by Canada Revenue Agency for funding ‘charity’ wing of Hizbul Mujahideen
दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब IAMC का नाम राहुल गाँधी से जोड़ा जा रहा है। मार्च 2023 में मोदी सरनेम मामले में जब राहुल गाँधी को सजा मिली थी। उसके बाद उन्हें लोकसभा द्वारा अयोग्य घोषित कर दिया गया था। तब भी IAMC उनके समर्थन में आ गया था। राहुल गाँधी पर लोकसभा के फैसले को भारत के ‘फासीवादी’ राष्ट्र होने का प्रमाण बताया गया था।
IAMC की तरफ से बयान जारी कर राहुल गाँधी को अयोग्य ठहराए जाने की निंदा की गई थी। IAMC द्वारा कहा गया कि राहुल गाँधी को परेशान करने और डराने के खिलाफ मानहानि का मामला बनाया गया था। संगठन ने उनकी अयोग्यता को अन्याय और सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सत्ताधारी पार्टी की हताशा का प्रकटीकरण करार दिया था। इसे विपक्ष और असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास बताया गया था।
IAMC और इसका संदिग्ध इतिहास
इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) का कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद है। यह एक कट्टरपंथी इस्लामी ग्रुप है। जिसका संबंध स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से है। यह संगठन लंबे समय से भारत के खिलाफ लॉबिंग करता आया है।
IAMC एक जमात-ए-इस्लामी समर्थित संगठन है जो अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने का दावा करता है। दावा यह भी किया जाता है कि काउंसिल अमेरिका के अलग-अलग ग्रुपों के साथ मिलकर USCIRF (यूनाइटेड स्टेट्स कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम) से भारत को ब्लैकलिस्ट करने की वकालत कर चुका है। यहाँ तक की संगठन द्वारा पैसे भी जुटाए गए थे ताकि भारत को ब्लैकलिस्ट किया जा सके।
Disinfo Lab की एक विस्तृत रिपोर्ट में आतंकी संगठन जमात-ए-इस्लामी के साथ इसके संबंधों का खुलासा किया गया है। जमात-ए-इस्लामी (पाकिस्तान) के अमेरिकी फ्रंट ‘इस्लामिक सर्कल ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ (ICNA) का नेतृत्व IAMC के संस्थापक शेख उबैद और सदस्य अब्दुल मलिक मुजाहिद ने किया। DisInfo Lab के अनुसार ICNA के संबंध लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहों से हैं। IAMC प्रमुख रशीद अहमद पहले इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (IMANA) के पूर्व कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं। वहीं IMANA के संचालन निदेशक (Director of Operations) जाहिद महमूद हैं जो पाकिस्तानी नौसेना के एक पूर्व अधिकारी रहे हैं।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने चलती ट्रेन में बैठे-बैठे बच्चों की तस्करी करने वाले दलालों को पहचान उनकी गिरफ्तारी करवाई। फिल्म के सीन जैसी लगने वाली यह घटना 30-31 मई की रात को मध्यप्रदेश के कटनी स्टेशन से दिल्ली के चली ट्रेन में घटी। रेल में बैठे एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने थोड़ा संदेह होने पर एक दंपति से पूछताछ की और उसके बाद शक सही पाने पर दोनों को पुलिस को सौंप दिया। दिलचस्प बात यह है कि पूरा मामला कैमरे में रिकॉर्ड हुआ।
इस घटना पर एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने फर्स्ट पोस्ट से बात करते हुए कहा, “मैंने एक जोड़े को देखा जिनके साथ एक लड़की थी। उम्र 15-16 साल की होगी। वो उसके माता-पिता नहीं लग रहे थे। उनका बर्ताव भी अजीब था। उनके दस्तावेज चेक करने पर शक सही निकला। वो लड़की के माता-पिता नहीं थे। मैंने पुलिस बुलाई और बाल कल्याण समिति (सीडब्लूसी) को सागर स्टेशन पर बुलाया और आरोपित को पुलिस को सौंपा।”
प्रियांक कानूनगो ने बताया कि सागर की बाल कल्याण समिति लड़की की काउंसलिंग कर रही है। उसका बयान लिया जा रहा है। पूछताछ में पता चला है कि उसका घर छत्तीसगढ़ बिलासपुर में है। एक व्यक्ति को उसकी सोशल रिपोर्ट बनाने के लिए भी कहा गया है।
बता दें कि सोशल रिपोर्ट एक तरह का सर्वे होता है जिसमें राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की तरफ से पीड़ित बच्ची के घर की उन परिस्थितियों के हालात का जायजा लिया जाता है जिन्होंने बच्ची को दलालों के फंदे में भेज दिया। रिपोर्ट के माध्यम से ही निर्धारित होता है कि बच्ची को उसके घर भेजा जाना सुरक्षित है या नही। अगर किसी भी परिस्थिति में ऐसा लगता है कि बच्ची घर जाकर दोबारा दलालों के हाथ आ सकती है तो उसे उसके घर नहीं भेजा जाता।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तकों से लोकतंत्र और विविधता, राजनीतिक दल और लोकतंत्र की चुनौतियों पर अध्याय हटा दिए हैं। यह पाठ कक्षा 10 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘डेमोक्रेटिक पॉलिटिक्स’ का हिस्सा था। इसके अलावा, NCERT ने कई विषयों के पाठ्यक्रमों को भी हटाया है।
NCERT का यह कदम महामारी के दौरान पाठ्यक्रम को तार्किक बनाने की अवधि के बाद आया है। उस दौरान इन अध्यायों को अस्थायी रूप से पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया गया था। अब इन्हें स्थायी रूप से हटा दिया गया है। कक्षा 10 के अन्य जिन विषयों के पाठ्यक्रमों में संशोधन किया गया है, उनमें हिंदी भाषा, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान शामिल हैं।
वैज्ञानिकों एवं शिक्षकों ने कक्षा 10 के पाठ्यक्रम से महत्वपूर्ण अध्यायों को हटाने के कारण लंबी अवधि में इसके पड़ने वाले परिणामों को लेकर चिंता जाहिर की है। अप्रैल में सरकारी निकाय ने कक्षा 9 और कक्षा 10 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों से चार्ल्स डार्विन के विकास के सिद्धांत को हटाने का भी फैसला किया था।
इसके अलावा, रसायन विज्ञान के पीरियोडिक टेबल को भी हटा दिया गया है। देश में कक्षा 10 तक विज्ञान अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। हालाँकि, अब केवल वे छात्र, जो 11वीं व 12वीं में रसायन विज्ञान का चुनाव करते हैं, वे ही आवर्त सारणी (Periodic Table) के बारे में पढ़ेंगे।
इसके पहले महात्मा गाँधी की हत्या और स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के संदर्भों को कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान से हटा दिया गया था। इसको लेकर NCERT की खूब आलोचना हुई थी। इसके अलावा, परिषद ने पाठ्यपुस्तकों से मुगल इतिहास को भी छोटा कर दिया है।
बताते चलें कि NCERT ने नवीनतम पाठ्यक्रमों के तार्किक बनाने (Rationalisation) का काम दिसंबर 2021 से जून 2022 तक किया गया। यह सब छात्रों पर से पाठ्यक्रम के बोझ को हल्का करने के लिए गया था। इसके तहत जिन पाठ्यक्रमों को हटाया गया है, उसका पूरा विवरण यहाँ देखा जा सकता है।
शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए एक संशोधित पाठ्यक्रम जारी किया गया था, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक के 30% पाठ्यक्रम को हटा दिया गया था। साल 2014 से NCERT ने तीन बार- साल 2017, साल 2019 और साल 2021 में पाठ्यक्रम संशोधन किए हैं।