लव जिहाद और धर्मांतरण पर आधारित फिल्म केरल स्टोरी (The Kerala Story) देश ही नहीं, दुनिया भर में सराही जा रही है और बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई भी कर रही है। हालाँकि, कट्टरपंथी इस इसकी सच्चाई को पचा नहीं पा रहे हैं। बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह (Nasiruddin Shah) ने कहा कि यह फिल्म एक प्रोपोगेंडा है। इसलिए इसे देखने का उनका कोई इरादा नहीं है।
IndiaToday.in के साथ खास बातचीत में नसीरुद्दीन शाह ने कहा, “भीड़, अफ़वाह, फ़राज़ जैसी सार्थक फ़िल्में धराशायी हो गईं। कोई भी उन्हें देखने नहीं गया, लेकिन लोग केरल स्टोरी देखने के लिए जा रहे हैं। मैं इसे देखने का इरादा नहीं रखता, क्योंकि मैंने इसके बारे में काफी कुछ पढ़ा है। ये खतरनाक चलन है।”
नसीरुद्दीन ने कहा, “यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है, इसमें कोई संदेह नहीं है। ऐसा लगता है कि हम नाजी जर्मनी की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ हिटलर के समय में फिल्म निर्माताओं को सर्वोच्च नेता हिटलर द्वारा उस समय के फिल्ममेकर्स को ऐसी फिल्में बनाने के लिए कहा जाता था, जिसमें उसकी तारीफ हो और यहूदियों को नीचा दिखाया जाए।”
भाजपा सरकार, संघ और पीए मोदी पर परोक्ष रूप स कटाक्ष करते हुए उन्होंने आगे कहा, “इसलिए कई सारे दिग्गज फिल्ममेकर्स ने जर्मनी छोड़ दिया और वो हॉलीवुड आ गए। यहाँ पर वे फिल्में बनाने लगे थे। यहाँ भी कुछ ऐसा ही होता नजर आ रहा है। या तो सही पक्ष में रहें, तटस्थ रहें या सत्ता समर्थक रहें।”
बदलाव की उम्मीद करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि नफरत का यह माहौल थका देने वाला हो जाएगा। कब तक नफरत फैलाते रहोगे? मैं सोचता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि जिस तरह से इसने अचानक हम सबको अपनी चपेट में ले लिया है, उसी तरह गायब हो जाएगा। हालाँकि, ऐसा जल्द नहीं होगा।”
बताते चलें कि कुछ दिन पहले ही नसीरुद्दीन शाह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मुस्लिमों से नफरत करना आज फैशन बन गया है। उन्होंने कहा था, “पढ़े-लिखे लोगों में भी मुस्लिमों से नफरत करना आजकल फैशन बन गया है। सत्ताधारी दल ने बहुत चतुराई से इसका इस्तेमाल किया है। हम सेक्युलर लोग लोकतंत्र की बात करते हैं तो आप हर चीज में धर्म का परिचय क्यों दे रहे हैं?”
इसी तरह मुगलों की तरफदारी करते हुए उन्होंने कहा था कि नादिर शाह और तैमूर जैसे लोग यहाँ लूट के लिए आए थे। मुगल यहाँ लूट-मार करने नहीं, बल्कि बसने आए थे। उनके योगदान को कौन नकार सकता है? उन्होंने कहा कि मुगलों को हर बात के लिए दोषी ठहरा देना इतिहास के साथ इंसाफ नहीं होगा।
दिल्ली के शाहबाद डेयरी इलाके में रविवार (28 मई 2023) को साहिल खान नामक युवक ने 16 वर्षीय साक्षी की निर्मम हत्या कर दी थी। साहिल ने साक्षी पर चाकू से इतने वार किए थे कि गर्दन से लेकर पेट तक कुल 16 बड़े कट-मार्क पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में आए। इससे उसकी आँतें बाहर निकल आईं थीं। चाकू से हमले के बाद साहिल ने पास पड़े कॉन्क्रिट स्लैब से भी बार-बार साक्षी के सिर पर वार किया था। इससे उसका सिर बुरी तरह टूट गया था।
ऑपइंडिया ने ग्राउंड पर जाकर वहाँ के हालातों का जायजा लिया। इस हत्या के पीछे का मकसद, फिलहाल के हालात, आस-पास की जानकारी और दिल दहला देने वाले वीडियो से प्रभावित हुए स्थानीय लोगों से बातचीत करना हमारी प्राथमिकता थी।
स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए हम सबसे पहले जा रहे थे उस जगह पर, जहाँ साक्षी की हत्या हुई थी। वहाँ तक पहुँचने से पहले हमें तमाम मीडियाकर्मी बड़े-बड़े कैमरों के साथ एक जगह बैठे दिख गए। पूछने पर पता चला कि वो आम आदमी पार्टी के विधायक का ऑफिस है। वहाँ किसी नेता-विधायक के ऑफिस जैसा बोर्ड-बैनर वगैरह हालाँकि कुछ नहीं लगा हुआ था। बाद में इसके पीछे की भी कहानी पता चली।
जहाँ साक्षी की हत्या की गई, वहाँ मामला शांत था। एक-दो यूट्यूबर थे, वीडियो बना रहे थे। मुख्यधारा की मीडिया दूर बैठी थी। घटना वाली जगह और आम आदमी पार्टी के विधायक का ऑफिस महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। दोनों के बीच एक पार्क है, बिना पेड़ और घास के। पार्क से सटा एक बड़ा सा मजार भी है। यहीं हमें एक स्थानीय निवासी मिल गए। दलीप कुमार है उनका नाम।
ऑपइंडिया ने साक्षी की हत्या को लेकर दलीप कुमार से बात की है। इस बातचीत में हमने उनसे हत्या वाली जगह से करीब 50 मीटर की दूरी पर स्थित एक पार्क और उससे सटे मजार को लेकर सवाल किया। इस पर दलीप ने कहा:
“पार्क में पहले मजार नहीं थी। 10-15 साल पहले यहाँ मजार के नाम पर कुछ ईंटों से घेरा किया गया था। इसके बाद 5-7 साल पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद जय भगवान उपकार (जो अब वर्तमान में विधायक हैं) ने यहाँ से जीतने के बाद सबसे पहले मजार की छत डलवाई। जब हिंदुओं ने इसका विरोध किया तो पुलिस ने इस पर रोक लगाने की जगह हिंदुओं को ही फटकार लगा दी।”
दलीप कुमार के अनुसार आम आदमी पार्टी और केजरीवाल इस तरह की राजनीति को सह देते हैं। ऐसी राजनीति में मुस्लिम-हितों का साधा जाता है, हिंदुओं को नजरअंदाज किया जाता है। अगर हिंदू विरोध करते हैं तो उनको धमकाया भी जाता है।
पार्क की जमीन पर अवैध मजार, मंदिर को अभी भी छत का इंतजार
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दलीप ने बताया, “पार्क के बगल में ही सड़क किनारे पीपल के पेड़ के नीचे एक देवी की मूर्ति थी। स्थानीय हिंदू वहाँ पूजा करते थे। मजार बनने के बाद विरोध-स्वरूप जब हिंदुओं ने मूर्ति की जगह पर मंदिर बनाने की कोशिश की तो उसका निर्माण-कार्य रुकवा दिया गया। आधे-अधूरे मंदिर में अभी भी मूर्तियाँ विराजमान हैं, लेकिन मंदिर नहीं बनने देते।”
स्थानीय विधायक के बोर्ड-बैनर गायब क्यों?
जिस स्थान पर साक्षी की हत्या की गई, उससे महज 200 मीटर की दूरी पर यहाँ के आम आदमी पार्टी विधायक जय भगवान उपकार का कार्यालय है। दलीप कुमार के अनुसार विधायक ऐसे नेता हैं, जो साक्षी के अंतिम संस्कार में भी नहीं गए। विधायक के मुख्य कार्यालय के बाहर से बोर्ड-बैनर क्यों हटा हुआ है, इस पर दलीप ने जो बताया, वो चौंकाने वाला है:
“हत्या से पहले विधायक कार्यालय के बाहर बोर्ड लगे हुए थे। लेकिन अगली ही सुबह बोर्ड हटा दिए गए। ताकि लोगों को यह न लगे कि विधायक के कार्यालय के पास हत्या हुई है।”
बता दें कि रविवार (28 मई 2023) को साक्षी अपनी दोस्त नीतू के बेटे के जन्मदिन में शामिल होने जा रही थी। तभी घात लगाए साहिल ने उसे रोक लिया। इसके बाद उसके पेट में ताबड़तोड़ चाकू बरसाने लगा। लगातार हुए हमले से साक्षी बुरी तरह घायल हो गईं और जमीन पर गिर गईं। इसके बाद भी साहिल नहीं रुका और वह जमीन पर पड़े कॉन्क्रिट स्लैब को उठाकर उनके सिर पर पटकने लगा। पेट पर चाकू के हमले और सिर पर कई बार पत्थर लगने से उनकी मौत हो गई।
यह भी जानने लायक बात है कि साक्षी की हत्या अचानक नहीं हुई। साहिल कई दिनों से इसकी साजिश रच रहा था। सिर्फ साक्षी ही नहीं, बल्कि उसने 5 लोगों की हत्या का प्लान बना रखा था। साक्षी के साथ-साथ उसके पुरुष दोस्तों को भी खत्म करने की साजिश थी। उस दिन उसे रास्ते में इन पाँचों में से जो भी मिलता, उसकी वो हत्या कर देता। साक्षी और उसके दोस्त इन्हीं रास्तों से आते-जाते हैं, ये भी उसने रेकी कर रखा था। उसने गाँजा और शराब का भी सेवन कर रखा था।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Maharashtra CM Eknath Shinde) ने बुधवार (31 मई 2023) को कहा कि अहमदनगर (Ahmednagar) जिले को अहिल्या बाई होलकर के नाम पर अहिल्यानगर (Ahilyanagar) के रूप में जाना जाएगा।
सीएम शिंदे ने इसकी घोषणा एक कार्यक्रम में की। इस कार्यक्रम में इस महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Dy CM Devendra Fadnavis), महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और भाजपा विधायक गोपीचंद पाडलकर सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।
अहिल्यादेवी होळकर यांनी जन्म घेतलेल्या मातीचे आपल्यावर मोठे ऋण आहे. अहिल्यादेवींनी समाजातल्या सर्व स्तरातील जनतेच्या कल्याणासाठी काम केले. हे सरकारही सर्वसामान्यांचे सरकार असून सर्वसामान्यांना न्याय देणारे सरकार आहे. राज्यात कालच झालेल्या मंत्रिमंडळ बैठकीत नमो शेतकरी सन्मान योजना… https://t.co/NYzM9oZtaTpic.twitter.com/Zpac7I8T5B
— Eknath Shinde – एकनाथ शिंदे (@mieknathshinde) May 31, 2023
अहमदनगर के चोंडी में आयोजित 18वीं सदी में मालवा के होलकर वंश की महारानी अहिल्याबाई होलकर की 298वीं जयंती के अवसर पर सीएम शिंदे ने यह घोषणा की। निजामशाही के अंतर्गत आने के कारण निजामों ने इस शहर का नाम बदल दिया था और इसका नाम अहमदनगर रख दिया था।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आगे कहा, “यह फैसला राज्य सरकार ने लिया है और मुझे गर्व है कि देवेंद्र जी (देवेंद्र फडणवीस) और मैं दोनों इस ऐतिहासिक क्षण के हिस्सा बने हैं।” देवेंद्र फडणवीस ने भी इस निर्णय पर खुशी जाहिर की।
Ahmednagar will now be AhilyaNagar ! That’s our Govt’s humble tribute to the fearless warrior queen Punyashlok Ahilyadevi Holkar.. अहमदनगर जिल्ह्याचे नाव बदलण्याची मागणी सातत्याने केली होती. माझे सहकारी राधाकृष्ण विखे पाटीलजी, राम शिंदे, गोपीचंद पडळकर आणि इतरही नेते सातत्याने… pic.twitter.com/8OBznjNlBO
बता दें कि अहमदनगर इस साल का तीसरा शहर है, जिसका नाम बदला गया है। इसके पहले फरवरी 2023 में महाराष्ट्र की सरकार ने औपचारिक रूप से औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद का नाम धाराशिव कर दिया था।
बताते चलें कि अहमदनगर का नाम बदलने की माँग लंबे समय से की जा रही थी। महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने दिसंबर 2022 में विधान परिषद को बताया था कि अहमदनगर जिले का नाम बदलकर पुण्यश्लोक अहिल्यानगर करने के लिए जिला प्रशासन से प्रस्ताव माँगा गया है।
इसके पहले भाजपा नेता गोपीनाथ पाडलकर ने अहमदनगर का नाम बदलने के लिए एक पत्र लिखा था। उस पत्र में कहा गया था कि अहिल्याबाई होलकर का जन्म अहमदनगर के चौंडी गाँव में हुआ था। इसलिए इस गाँव का नाम उनके नाम पर होना चाहिए।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पुरोला इलाके में एक नाबालिग हिंदू छात्रा के अपहरण का प्रयास किए जाने के बाद बवाल मचा हुआ है। छात्रा पुरोला बाजार के ही एक दुकानदार की बेटी है। मामले को लव जिहाद से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 मई, 2023 को 2 युवकों ने छात्रा के अपहरण की कोशिश की थी। इसे लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार (31 मई, 2023) को उवेद खान और उसका साथी जितेंद्र सैनी खरसाड़ी इलाके की रहने वाली कक्षा नौवीं की छात्रा को बहला-फुसला कर अपने साथ ले जा रहे थे। छात्रा पुरोला में अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई करती है। छात्रा को दोनों युवकों के साथ ऑटो रिक्शा पर जाता देख राहगीरों को शक हुआ। उन्होंने रिक्शा रुकवाकर पूछताछ की तो सच्चाई का पता चल सका।
दोनों नौजवानों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन घटना को लेकर स्थानीय लोगों में रोष है। मामला सामने आने के बाद पुरोला और आसपास के लोगों ने मुस्लिम तबके के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध कर रहे लोगों ने आपराधिक किस्म के बाहरी लोगों पुरोला छोड़कर जाने की चेतावनी दे दी। मंगलवार (30 मई ) को भी स्थानीय लोगों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और सड़कों पर रैली निकाली।
आरोपित युवक इलाके के कुमोला रोड पर दुकानें चलाते हैं। प्रदर्शन कर रहे पुरोला के स्थानीय लोगों ने अपराधिक किस्म के बाहरी लोगों को जल्द से जल्द पुरोला छोड़ने की चेतावनी दी है। इस संबंध में लोगों ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर अपराधिक किस्म के व्यापारियों व अन्य लोगों को तत्काल हटाने की माँग की है। लोगों की नाराजगी को देखते हुए मुस्लिम समुदाय के 42 दुकानदार अपनी दुकानें छोड़कर रातों रात फरार हो गए हैं।
वीएचपी के स्थानीय नेता वीरेंद्र रावत ने का कहना है कि पुरोला में बाहर से आकर मुस्लिम समुदाय के लोग दुकानें खोलते हैं और मजदूरी करते हैं। इसके साथ-साथ वे स्थानीय लोगों का खासकर हिंदू युवतियों का ब्रेन वॉश करते हैं। उन्होंने बाहरी लोगों के पुलिस सत्यापन पर जोर दिया। स्थानीय लोगों ने सोमवार (29 मई) को एसडीएम देवानंद शर्मा से मुलाकात कर गैर-स्थानीय लोगों के पुलिस वेरिफिकेशन की माँग की।
पुरोला उत्तरकाशी में नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में पुलिस द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुये आरोपी दोनों युवकों को जेल भेज दिया गया है। उक्त मामले में अनावश्यक भ्रमकता/तूल से बचें, कानून एवं शान्ति व्यवस्था बनाये रखने में पुलिस का सहयोग करें। #ukfactcheckpic.twitter.com/pXyG2IbuCA
— Uttarkashi Police Uttarakhand (@UttarkashiPol) May 31, 2023
वहीं उत्तरकाशी के एसपी अर्पण यदुवंशी ने वीडियो जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि नाबालिग लड़की के अपहरण की कोशिश करने वाले दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। मामले में अनावश्यक और भ्रामक खबरें न फैलाई जाए। कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद करें।
श के विभिन्न धार्मिक स्थलों को मुक्त कराने के लिए अदालत में लड़ाई लड़ रहे हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचे की जगह पर भव्य शिव मंदिर बनेगा। बताते चलें कि ज्ञानवापी ढाँचा (Gyanvapi Masjid) मामले में भी हरिशंकर जैन (Hari Shankar Jain) हिंदू पक्ष के वकील हैं। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार (31 मई 2023) को ढाँचा परिसर में स्थित माता श्रृंगार गौरी पूजा को लेकर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज कर दिया।
भगवान विश्वेश्वर के मंदिर को तोड़कर मुगल आक्रांता औरंगजेब (Mughal Invader Aurangzeb) द्वारा बनवाए गए ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वकील जैन ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि वह दिन दूर नहीं जब वर्तमान ढाँचे को हटा दिया जाएगा और हम (हिंदू समुदाय) वहाँ एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करेंगे।”
वकील हरिशंकर जैन ने कहा, “353 साल से हिंदू जनता संघर्ष कर रही है और चाहती है कि वहाँ से ढाँचा हटे और भगवान भोलेनाथ प्रकट हों। वहाँ भगवान भोलेनाथ प्रकट हो गए हैं। उनकी भी साइंटिफिक जाँच होगी और मालूम पड़ जाएगा कि वहाँ पर शिवजी हैं।ठ
ज्ञानवापी ढाँचे की जाँच को लेकर उन्होंने आगे कहा, “हमने पूरे-के-पूरे परिसर की वैज्ञानिक जाँच के लिए प्रार्थना-पत्र दिया है और उससे साबित हो जाएगा कि पूरा परिसर हिंदुओं का है। भगवान भोलेनाथ चाहते हैं कि मंदिर बने और हम उसी तरफ आगे बढ़ रहे हैं।”
"I hope that the day is not far when we will construct a grand Shiv temple there and the present structure will be removed," says Hari Shankar Jain, advocate representing the Hindu side on Allahabad HC upholding the maintainability of suit filed by five women worshippers seeking… pic.twitter.com/oCZVc2Jtqz
बताते चलें कि वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचा परिसर में ही माता श्रृंगार स्थित हैं। इनकी पूजा करने को लेकर राखी सिंह के नेतृत्व में 5 महिलाओं ने कोर्ट से अनुमति माँगी थी। हालाँकि, मस्जिद पक्ष से जुड़े अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने इसका विरोध करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High court) ने याचिका दाखिल की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया।
इस अर्जी के खारिज होते ही माता श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा की माँग वाली अर्जी पर सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। अब वाराणसी की जिला कोर्ट माता श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करेगी।हाईकोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम पक्ष के लिए बहुत बड़ा झटका माना जाता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर की एकल पीठ ने इस मामले में 23 दिसंबर 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिसंबर में ही इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने जिला जज वाराणसी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिला जज की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया था।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने अपनी अर्जी में कहा था कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के उपबंधों के तहत अदालत को वाद सुनने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कमेटी की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
दरअसल, रेखा सिंह एवं अन्य महिलाओं ने माता श्रृंगार गौरी की हर दिन पूजा करने की इजाजत कोर्ट से माँगी थी। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर परिसर का सर्वे हुआ था। सर्वे के दौरान ढाँचे के तहखाने में कई हिंदू प्रतीक मिले। इसके साथ ही एक शिवलिंग भी मिला। मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बताता आ रहा है।
इसके बाद 18 अगस्त 2021 को इन महिलाओं ने ज्ञानवापी परिसर में माता श्रृंगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान समेत मौजूद अन्य देवताओं की रोजाना पूजा की इजाजत माँगने के लिए कोर्ट पहुँची। अभी यहाँ साल में एक बार ही पूजा होती है। अब हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज होने के बाद परिसर में स्थित भगवानों की नियमित पूजा पर सुनवाई होगी।
पिछले 30 वर्षों में स्पेन में मुस्लिमों की जनसंख्या 10 गुना बढ़ गई है। ये जानकारी खुद स्पेन के ही ‘सेक्रेटरी ऑफ द इस्लामिक कमीशन’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दी है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम यूरोप के इस देश में मुस्लिमों की जनसंख्या 25 लाख के पार चली गई है। मोहम्मद अजाना ने ‘Anadolu’ मीडिया संस्थान को बताया कि अनाधिकारिक आँकड़ों की मानें तो स्पेन में मुस्लिमों की जनसंख्या 30 लाख के भी पार चली गई है।
उन्होंने कहा कि पहले मुस्लिमों की जनसंख्या में अधिकतर प्रवासी ही होते थे, लेकिन अब मुस्लिम समुदाय स्पेन के नागरिकों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। 10 लाख से अधिक मुस्लिम स्पेन के नागरिक हैं, बाकियों में प्रवासी और स्पेनिश मूल के मुस्लिम शामिल हैं। मोरक्को, पकिस्तान, बांग्लादेश, सेनेगल और अल्जीरिया के कई मुस्लिमों ने स्पेन को अपना ठिकाना बनाया है। स्पेन के अधिकतर मुस्लिम वहाँ के औद्योगिक इलाकों में रहते हैं, जैसे – कैटेलोनिया, वालेंसिया, आंदालुसिया और मैड्रिड।
ये जानकारी भी दी गई है कि स्पेन में फ़िलहाल 53 मुस्लिम संगठन हैं और मस्जिदों की संख्या 2000 के पार चली गई है। साथ ही 40 कब्रिस्तान भी हैं। हालाँकि, मोहम्मद अजाना ने कहा कि मस्जिदें वगैरह बनाने के लिए लाइसेंस मिलने में समस्या आती है। स्पेन के आंदालुसिया इलाके में तो हर शुक्रवार (जुमे के दिन) कोई न कोई व्यक्ति इस्लाम अपनाता है। धर्मांतरण की इस प्रक्रिया को ‘शहादा’ कहा जाता है। आंदालुसिया स्थित ग्रैंड मस्जिद में जुमे के दिन कलमा पढ़वा कर इस्लामी धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है।
And another Spaniard named Jose Miguel converted to Islam in the Great Mosque of Granada, Spain. pic.twitter.com/wlicnTgLbR
इस मस्जिद में तो एक पादरी ने ही इस्लाम कबूल कर लिया। ‘स्पेनिश इस्लामिक सोसाइटी एसोसिएशन’ और ‘ग्रानाडा ग्रैंड मॉस्क फाउंडेशन’ के अध्यक्ष उमर देल पोजो ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान धर्मांतरण में तेज़ी आई थी। उन्होंने इसे खुश करने वाला और गौरव करने वाली घटना करार दिया। ग्रानाडा में 36,000 मुस्लिम हैं, जिनमें से 3700 धर्मांतरित हैं। मस्जिद में धर्मांतरण के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आती रहती हैं।
जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना ने तीन आतंकियों को पकड़ा है। ये खराब मौसम और बारिश का फायदा उठाकर 30 मई 2023 की रात करमारा सेक्टर से घुसपैठ कर रहे थे। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार, 10 किलो आईईडी और हेरोइन के 20 पैकेट बरामद हुए हैं। आईईडी ये प्रेशर कुकर में लेकर आ रहे थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय सेना को जम्मू-कश्मीर के पुंछ के करमारा सेक्टर में LOC पर संदिग्ध गतिविधि नजर आई। इसके बाद जवानों ने तड़के करीब 4 बजे सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सेना के जवानों को देख घुसपैठ कर रहे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में जवानों ने भी कार्रवाई की। इस दौरान एक आतंकी के पैर में चोट लगी। वहीं सेना का एक जवान भी घायल हो गया।
सर्च ऑपरेशन के बाद सेना और पुलिस के जवानों ने तीनों आतंकियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान मोहम्मद रियाज, मोहम्मद फारूक और मोहम्मद जुबैर के रूप में हुई। इनमें से मोहम्मद फारूक घायल है। तीनों आतंकी करमारा के ही बताए जा रहे हैं। आतंकियों के पास से पुलिस ने एके-56 राइफल, 2 पिस्टल, 2 पिस्टल की मैग्जीन, 6 चीनी ग्रेनेड, हेरोइन के 20 पैकेट और प्रेशर कुकर में बंद 10 किलो आईईडी बरामद किया है। बरामद की गई हेरोइन की कीमत 100 करोड़ रुपए के आसपास बताई जा रही है। वहीं, आईईडी को सेना के बम निरोधक दस्ते ने डिस्पोज (निष्क्रिय) कर दिया है।
Around 10 kg of IED has been recovered from terrorists intercepted by the Indian Army and J&K Police while trying to cross the fence along the LoC in the Poonch sector today.
सेना के अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल ऐसा माना जा रहा है तीनों आतंकियों को बॉर्डर पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स की खेप मिली थी। वे इसकी तस्करी कर भारत लाने की कोशिश में जुटे हुए थे। दो आतंकियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, घायल होने के चलते तीसरे आतंकी को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती की, पुजारियों से मंदिर को लेकर बातचीत की, जिसके बाद उन्होंने एक अजमेर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने देवी अहिल्याबाई होल्कर की जन्म-जयंती पर उन्हें याद करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के कार्यों के लिए देश के लोगों को कर्तव्य-पथ की दिशा दिखाने के लिए देवी अहिल्याबाई होल्कर को देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने पुष्कर में जन-कल्याणकारी नीतियों के लाभार्थियों से भी बातचीत की।
इस दौरान उन्होंने पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर में दर्शन करने के अनुभव की भी बात की। इसे सौभाग्य बताते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्रों में ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता कहा गया है, उनके आशीर्वाद से ही आज भारत में नव-निर्माण का दौर चल रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार के 9 साल भी पूरे हो गए हैं और ये 9 साल देशवासियों की सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के लिए समर्पित रहे हैं।
पीएम मोदी ने इस दौरान जनता को ये भी बताया कि 2014 से पहले देश की क्या स्थिति थी, जैसे – पूरे देश में जनता भ्रष्टाचार के विरुद्ध सड़क पर उतरी हुई थी, कॉन्ग्रेस सरकार सीमा पर सड़कें बनाने से भी डरती थी, बड़े-बड़े शहरों में आए दिन आतंकी हमले होते थे, प्रधानमंत्री के ऊपर सुपरपावर थी और कॉन्ग्रेस सरकार रिमोट कंट्रोल से चला करती थी। उन्होंने बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस की नीति रही है- गरीबों को भरमाओ, गरीबों को तरसा, जिसका राजस्थान के लोगों ने भी बहुत बड़ा नुकसान उठाया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज देखिए, पूरी दुनिया में भारत का यशगान हो रहा है। दुनिया के बड़े एक्सपर्ट्स ये बोल रहे हैं कि भारत अति गरीबी को समाप्त करने के बहुत निकट है। कॉन्ग्रेस ने वीरों के साथ भी हमेशा धोखा किया है। ये कॉन्ग्रेस ही है जो ‘वन रैंक वन पेंशन’ के नाम पर हमारे पूर्व सैनिकों से विश्वासघात करती रही। भाजपा सरकार ने ना सिर्फ ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लागू किया बल्कि पूर्व सैनिकों को एरियर भी दिया।”
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में विकास के काम के लिए पैसे की कमी कभी भी नहीं रही है, लेकिन ये बहुत जरूरी होता है कि जो पैसा सरकार भेजे वो पूरा का पूरा विकास के कार्यों में लगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सबके बावजूद कॉन्ग्रेस ने अपने शासन में देश का खून चूसने वाली ऐसी भ्रष्ट व्यवस्था बना दी थी, जो देश के विकास को खाए जा रही थी। उन्होंने याद किया कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने भी माना था कि कॉन्ग्रेस सरकार 100 पैसे भेजती है तो उसमें से 85 पैसे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते थे।
पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस को हर योजना में 85% कमीशन खाने वाली पार्टी करार दिया। उन्होंने कहा कि जब लूट की बात होती है तो कॉन्ग्रेस किसी में भेदभाव नहीं करती है और इस पार्टी ने देश के हर नागरिक को – गरीब, शोषित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, महिला और दिव्यांग सबको समान भाव से लूटती है। उन्होंने कहा कि देश की हर सफलता के पीछे भारत के लोगों की मेहनत है, भारत के लोगों का पसीना है। ये भारत के लोग ही हैं जिन्होंने महामारी के बाद देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाई पर पहुँचाया है।
पीएम मोदी ने कहा, “ये भारत के लोग ही हैं, जिनकी वजह से आज दुनिया कह रही है कि ये दशक भारत का दशक है, ये सदी भारत की सदी है। भारत को नया संसद भवन मिला है, लेकिन कॉन्ग्रेस ने भारत के गौरव के इस क्षण को भी अपने स्वार्थी विरोध की भेंट चढ़ा दिया। इस पार्टी ने 60 हज़ार श्रमिकों के परिश्रम का, देश की भावनाओं और आकांक्षाओं का अपमान किया है। बता दें कि राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 30 मई 2023 को 9 साल पूरे कर लिए हैं। इसी दिन 2019 में नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इन नौ वर्षों में केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार ने कई बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कीं और घोषणा पत्र में किए गए कई वादों को पूरा किया है। हालाँकि, इस दौरान कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, जिसने देश की प्रगति को कुछ महीनों के लिए रोक दिया था। हालाँकि, केंद्र में मजबूत नेतृत्व की बदौलत देश ने शानदार वापसी की।
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इन नौ वर्षों में मोदी सरकार ने सभी विभागों और मंत्रालयों में डैशबोर्ड के माध्यम से समय-समय पर सभी आँकड़े उपलब्ध करवाएँ हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा किए गए वादों के साथ-साथ देश के सामने आने वाली चुनौतियों के आधार पर सरकार की उपलब्धियों की जाँच करने के लिए ऑपइंडिया ने 2014 और 2019 के घोषणा पत्रों पर बारीकी से नज़र डाली।
अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A को रद्द करना
बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने और अनुच्छेद 35A को रद्द करने के बारे में बात की थी। 2019 में सत्ता में दोबारा वापसी करने के तीन महीने से भी कम समय में उसने अपना वादा पूरा किया। 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और अनुच्छेद 35ए को रद्द करने की घोषणा की। इस निर्णय के साथ सरकार ने जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया और लद्दाख को उससे अलग कर उसे भी एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। इसके बाद से जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों में तेजी से विकास देखा गया है।
फोटो साभार: बीजेपी का घोषणा पत्र
राम मंदिर और तीर्थ स्थलों का विकास
बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और देश भर में तीर्थ स्थलों के विकास के बारे में बात की। सांस्कृतिक विकास (Cultural Development) बीजेपी के घोषणा पत्र का अहम हिस्सा रहा है। 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया और भव्य राम मंदिर बनाने के लिए विवादित जमीन हिंदुओं को दे दी। इसके बाद बिना समय बर्बाद किए भारत सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया।
राम मंदिर के निर्माण के लिए धन इकट्ठा करने के लिए ट्रस्ट ने एक विशेष दान संग्रह (Special Donation Collection) अभियान शुरू किया, जिसमें दुनिया भर के हिंदुओं ने भाग लिया था। 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। जनवरी 2024 में भगवान राम के दर्शन करने के लिए मंदिर को भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा।
इसके अलावा, पीएम मोदी के कार्यभार संभालने के बाद हिंदू तीर्थ स्थलों और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास, नवीनीकरण और कायाकल्प के लिए कई परियोजनाएँ शुरू की गई हैं, जिनमें केदारनाथ, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल कॉरिडोर और अन्य का विकास शामिल है। पीएम ने वाराणसी से चुनाव जीतने के बाद इस शहर के विकास के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है।
कोविड-19 चुनौती
पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल में देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक कोविड-19 महामारी थी। भारत में कोरोना महामारी 2020 की शुरुआत में फैलना शुरू हुई। मार्च 2020 में भारत सरकार ने कोरोना को फैलने से रोकने के देशव्यापी लॉकडाउन लगाने का फैसला किया। हालाँकि, इसने कुछ हद तक वायरस को रोक दिया, लेकिन भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े। महामारी के कारण 5,00,000 से अधिक लोगों को जान गँवानी पड़ी और हजारों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। लोगों पर महामारी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव से उस समय यह पता चला कि हमारा स्वास्थ्य विभाग अभी इतना मजबूत नहीं है।
उस समय भारत में पर्याप्त कोरोना टेस्टिंग सेंटर, आईसीयू और यहाँ तक कि देश में निर्मित पीपीई किट भी नहीं थे। जब भारत में महामारी आई, तब तक हम चीन से पीपीई किट सहित कई उत्पाद आयात कर रहे थे। यह महामारी चीन से ही शुरू हुई थी। इसलिए PPE किट की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त देश में सिर्फ 2.75 लाख पीपीई किट ही उपलब्ध थे।
उस वक्त भारत सरकार के पास किसी अन्य विकल्प को खोजने का समय नहीं था। ऐसे में हिम्मत न हारते हुए मोदी सरकार ने पीपीई किट बनाने का फैसला किया। इसके बाद आने वाले महीनों में ही भारत पीपीई किट के निर्माण का हब बन गया। देश के अस्पतालों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को पीपीई किट की आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने युद्ध स्तर पर काम किया। देशव्यापी लॉकडाउन के दो महीने के भीतर ही भारत ने अपनी पीपीई किट बना ली। इसकी आपूर्ति के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय ने भी साथ मिलकर काम किया।
इसी तरह N95 मास्क, हैंड सैनिटाइज़र और अन्य उत्पादों के साथ भी हुआ। भारत ने इन उत्पादों को न केवल स्थानीय बाजारों को उपलब्ध कराया, बल्कि जरूरतमंद अन्य देशों को भी इन उत्पादों का निर्यात किया और गरीब देशों को उपहार के तौर पर सौंपा।
इसके अलावा, भारत में वैज्ञानिकों ने स्वदेशी टीका विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत की। भारत की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भारत में कोविशील्ड वैक्सीन का निर्माण शुरू कर दिया। कोविशील्ड को एस्ट्राजेनेका ने विकसित किया था। उसी तरह भारत बायोटेक द्वारा ने स्वदेशी वैक्सीन (Covaxin) कुछ ही समय में तैयार कर लिया। महामारी के दौरान दुनिया की बड़ी दवा निर्माता कंपनी फाइजर कोरोना टीके को लेकर अपनी शर्तें थोपने के लिए भारत पर दबाव बना रही थी, लेकिन भारत सरकार इस दबाव के आगे नहीं झुकी।
भारत ने कुछ ही समय में कोविड-19 टीकाकरण अभियान को ट्रैक करने के लिए एक अत्याधुनिक CoWIN प्लेटफॉर्म बनाया। भारत में अब तक वैक्सीन की 220.66 करोड़ डोज दी जा चुकी है। 95.19 करोड़ से अधिक लोगों को टीके की दो खुराकें दी गई हैं और 22 करोड़ से अधिक लोगों को तीसरी खुराक दी गई है। देश भर में अभी भी 261 टीकाकरण केंद्र सक्रिय हैं, जिनमें से 191 सरकार द्वारा चलाए जा रहे हैं और 70 प्राइवेट हैं।
कोविड-19 वैक्सीन आँकड़े। (फोटो साभार: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय)
कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के रूप में भारत को एक और झटका लगा। हालाँकि, सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। इसका परिणाम यह हुआ कि अक्टूबर 2021 तक देश भर के सरकारी अस्पतालों में लगभग 2500 ऑक्सीजन प्लांट चालू किए गए।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रगति
पिछले नौ वर्षों में भारत सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार लाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। 2014 में जब पीएम मोदी ने कार्यभार संभाला था, तब पूर्ण रूप से संचालित एम्स केवल एक और सेमी-ऑपरेशनल एम्स छह थे। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने देश भर में एम्स की संख्या बढ़ाने पर व्यापक रूप से काम किया, ताकि लोगों को अपने राज्यों में कम पैसों में बेहतर मेडिकल केयर मिल सके।
वर्तमान में दिल्ली एम्स के अलावा भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर और ऋषिकेश में छह एम्सपूरी तरह से चल रहे हैं। रायबरेली, गोरखपुर, मंगलागिरी, नागपुर, बठिंडा, बीबीनगर, कल्याणी, देवघर, बिलासपुर और राजकोट में दस एम्स सेमी-ऑपरेशनल में हैं, जहाँ एमबीबीएस की क्लास और ओपीडी चल रही हैं। गुवाहाटी, जम्मू और मदुरै एम्स में एमबीबीएस की क्लास शुरू हो गई हैं। अवंतीपोरा, मनेठी और दरभंगा एम्स निर्माणाधीन हैं।
ऑपरेशनल, सेमी-ऑपरेशनल, निर्माणाधीन और नए घोषित एम्स के साथ इसकी कुल संख्या 22 तक पहुँच गई है। मार्च 2022 में पीएम मोदी ने कहा था कि सभी 22 एम्स 2025 तक पूरी तरह से चालू हो जाएँगे। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2014 में 387 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 660 हो गई है।
भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गरीब परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ देने के लिए ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ शुरू की। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, जो आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के माध्यम से डिजिटली स्वास्थ्य रिकॉर्ड को कवर करता है, उसने जरूरतमंदों को आसानी से सभी चिकित्सा सुविधाएँ देना संभव बना दिया है।
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) ने भी उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं को हाशिए पर पड़े वर्ग को मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना के तहत, भारत सरकार द्वारा 9000 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (पीएमबीजेके) खोले गए हैं, जो बाजार मूल्य से 70 प्रतिशत तक सस्ती जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध कराते हैं।
इन दुकानों में करीब 1,800 दवाएँ और 280 सर्जिकल उपकरण सस्ती कीमतो पर मिलते हैं। इसी तरह AMRIT फार्मेसियों में लगभग 5,000 दवाएँ, स्टेंट, इम्प्लांट और सर्जिकल डिस्पोजल और अन्य जरूरत की वस्तुएँ सामान्य बाजार की तुलना में 60 प्रतिशत तक कम कीमत पर मिलती हैं। जन औषधि केंद्र केवल 1 रुपए में सैनिटरी नैपकिन बेचते हैं, जिससे ये गरीब महिलाओं को भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
भारत सरकार ने देश के लोगों को सभी स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करने के लिए आयुष और इसके ऑफ-शूट आयुर्वेद का बड़े पैमाने पर समर्थन किया है। पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं के लिए कई परियोजनाएँ शुरू की गई हैं और इसे आगे बढ़ाया है। सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन), मिशन इंद्रधनुष (एमआई), पीएम पोषण योजना ने गर्भावस्था और जन्म के बाद महिलाओं व बच्चों को बेहतर देखभाल प्रदान की है। मातृत्व देखभाल भाजपा के घोषणा पत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पार्टी के तहत सरकार ने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया है।
अब तक सरकार ने 38 करोड़ से अधिक आभा खाते (ABHA Accounts) खोले हैं। आयुष चिकित्सा पद्धति के तहत 18 करोड़ से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है। पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 3.9 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा सुविधा मिली है। नि-क्षय मित्र द्वारा 9.55 लाख से अधिक टीबी के मरीजों को गोद लिया गया है। मिशन इंद्रधनुष के कारण 5.65 करोड़ से अधिक माताओं और बच्चों की सुरक्षा की गई है। रिकॉर्ड 11 करोड़ लोगों ने ई-संजीवनी के टेली-कंसल्टेशन का लाभ उठाया है।
नौ साल में LPG कनेक्शन दोगुने से ज्यादा हुए
जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी, तब केवल 14.52 करोड़ परिवारों के पास ही एलपीजी कनेक्शन थे। सरकार ने महिलाओं को हानिकारक धुएँ से बचाने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की। इसके बाद मार्च 2023 तक एलपीजी कनेक्शनों की संख्या बढ़कर 31.36 करोड़ हो गई। इसका मतलब है कि केवल नौ वर्षों में सरकार ने एलपीजी कनेक्शनों को दोगुना से अधिक कर दिया है। भारत में एलपीजी कनेक्शन 2016 में 62% (योजना की शुरुआत) से बढ़कर 2022 में 104% से अधिक हो गया।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव
बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की विस्तार से बात की है। किताबों और ऑनलाइन कोर्सों का डिजिटलीकरण मोदी सरकार का एक ऐतिहासिक निर्णय रहा है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव देखे गए हैं। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत लगभग 400 एनसीईआरटी पुस्तकों को डिजिटलाइज़ किया गया है, जिसे मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। सरकार ने छात्रों को कम कीमत पर उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए नए आईआईटी और आईआईएम खोले हैं। 2014 से अब तक लगभग 350 नए विश्वविद्यालय खाले गए हैं।
उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, 43 प्रतिशत विश्वविद्यालय और 61.4 प्रतिशत कॉलेज अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने 7 IIT और 7 IIM खोले हैं। 2014 में जब पीएम मोदी ने कार्यभार संभाला था, तब देश में 723 विश्वविद्यालय थे और अब यह संख्या बढ़कर 1,113 हो गई है। इसके अलावा, 2014 में भारत में 38,498 कॉलेज थे, जो 2023 में बढ़कर 43,796 हो गए हैं। यानी सिर्फ नौ साल में देश में नए 5,298 कॉलेज बन गए हैं, जो सरकार के हस्तक्षेप के बिना संभव नहीं था।
सड़कों का निर्माण बढ़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश में बुनियादी संरचना के विकास पर खासा जोर दिया है। खासकर नेशनल हाइवे के मामले में देश में बड़ा बदलाव आया है। भारत में लगभग 63.73 लाख किलोमीटर सड़क नेटवर्क है। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। पिछले नौ वर्षों में कॉरिडोर-बेस्ड नेशनल हाइवे का उपयोग करते हुए सड़कों का निर्माण बढ़ा है। 2014 में जहाँ एक दिन में 12 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो रहा था, अब वह बढ़कर 2021-22 में 29 किलोमीटर प्रति दिन हो गया है। केवल पिछले पाँच वर्षों में भारत सरकार ने सीमाओं को जोड़ने वाली 13,525 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया है।
ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़ने से कनेक्टिविटी में सुधार होता है और दोनों के बीच माल के परिवहन में मदद मिलती है। ग्रामीण कनेक्टिविटी के महत्व को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2014 से अब तक 3.28 लाख किमी से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया है। बीजेपी ने 2019 के घोषणा पत्र में ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़ने की बात की थी। इस वादे को पूरा करने के लिए व्यापक रूप से काम किया गया है।
डिजिटल क्रान्ति
एक समय था, जब बैंकिंग के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने की मोदी सरकार की योजना पर विपक्ष हँसता था। जब सरकार ने दुकानदारों को डिजिटल लेन-देन का इस्तेमाल करते देखना चाहा तो किसी को उस पर विश्वास नहीं हुआ। हालाँकि, मोदी सरकार ने इसे संभव बनाया और डिजिटल बुनियादी ढाँचे में बड़े पैमाने पर सुधार पर जोर दिया। जन धन खातों से लेकर आधार कनेक्टिविटी तक, रुपे कार्ड और यूपीआई को बढ़ावा देने से मोदी सरकार की पहल ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ाने में मदद की। बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने की बात की थी, जो उसने पूरी की। अगस्त 2016 में यूपीआई से जुड़े 21 बैंक थे। वहीं, डिजिटल लेनदेन की संख्या 9 लाख से बढ़कर 3.09 करोड़ रुपए हो गई। अप्रैल 2023 में 414 बैंक यूपीआई से जुड़े हैं।
इसके अलावा, मोदी सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पर जोर दिया, जिसके तहत मौद्रिक लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रान्सफर किए गए। नौ वर्षों में सरकार ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत बिचौलियों को हटाकर 29 लाख करोड़ रुपए से अधिक धनराशि ट्रांसफर की हैं। सरकार ने डीबीटी के जरिए फंड ट्रांसफर कर 2.23 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत की है।
सौभाग्य और हर घर जल
मोदी सरकार के दो महत्वपूर्ण योजना- सौभाग्य और हर घर जल ने करोड़ों भारतीयों को लाभान्वित किया है। जल जीवन मिशन से 8 करोड़ से अधिक परिवारों को लाभ हुआ है और उन्हें नल के पानी के कनेक्शन मिले हैं। सौभाग्य योजना के तहत तीन करोड़ से अधिक घरों को रोशन किया गया है, यानी इसके तहत 99.9 प्रतिशत बिजली सुनिश्चित की गई है। दोनों योजनाएँ भाजपा के घोषणा पत्र का हिस्सा थीं।
नौ साल में मोदी सरकार की अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
भाजपा का उद्देश्य देश में किसानों के जीवन में सुधार लाना है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) जैसी कल्याणकारी योजनाओं के तहत भारत सरकार ने 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त राशन दिया है। राज्यों को कुल 4.04 लाख करोड़ रुपए की फूड सब्सिडी जारी की गई है। एफसीआई को 14.48 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं।
एनएफएसए के तहत कोविड के दौरान शुरू की गई मुफ्त राशन योजना को 31 दिसंबर, 2023 तक बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के परिणामस्वरूप शहरी आवासों में 800 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिकॉर्ड बताते हैं कि योजना के तहत 2004 से 2014 के बीच 8.04 लाख से अधिक घर बनाए गए थे, जबकि 2015 में 74 लाख से ज्यादा घर बनाए गए।
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों को स्टैंडअप इंडिया के तहत 7,558 करोड़ रुपए से अधिक के ऋण दी गई।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत 42.87 लाख खातों में 5,182 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जा चुके हैं।
48.9 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले गए हैं।
पीएम आवास योजना के तहत 4 करोड़ से अधिक घरों को मंजूरी दी गई है।
असंगठित क्षेत्र के 28.90 करोड़ से अधिक कामगारों ने ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।
11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है।
पीएम सुरक्षा बीमा योजना के तहत 33.48 करोड़ से अधिक लोगों को नामांकित किया गया है।
मुद्रा लोन के तहत 27.7 करोड़ से अधिक लोगों को ऋण दिया गया।
किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ, जिनमें शॉर्ट टर्म Collateral Free Loans, वृद्ध किसानों के लिए पेंशन योजनाएँ, सब्सिडाइज बीज और उर्वरक शामिल हैं। ये कुछ ऐसे लाभ हैं, जिन्हें इस सरकार ने लोगों को दिया है। इसके अलावा, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड ने देश भर के करोड़ों किसानों की मदद की है। इससे अधिक जानकारी आप भारत सरकार के डैशबोर्ड पर देख सकते हैं।
उम्मीद की जा रही है कि 2024 की शुरुआत से श्रद्धालु अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दर्शन कर सकेंगे। निर्माण कार्य फिलहाल जोरों पर है। इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि अयोध्या में रामलला की तीन मूर्तियों का निर्माण हो रहा है। ये मूर्ति जल्द ही बनकर तैयार हो जाएँगी।
चंपत राय ने मंगलवार (30 मई 2023) को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “रामलला की मूर्ति का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। कर्नाटक के डॉ. गणेश भट्ट, जयपुर के सत्य नारायण पाण्डेय और कर्नाटक के ही अरुण योगीराज तीन अलग-अलग पत्थरों से अलग-अलग जगहों पर मूर्तियाँ बना रहे हैं। निर्धारित समय के भीतर मूर्ति निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा। अन्य मूर्तियों के बारे में हमने अभी तक कोई विचार नहीं किया है।”
#WATCH | Ayodhya, UP: The construction work of the idol of Ram Lalla has started. Dr Ganesh Bhatt from Karnataka, Satya Narayan Pandey from Jaipur, and Arun Yogiraj from Karnataka are making idols at three different places on three different stones. It is expected that the idol… pic.twitter.com/0PBCgjXbP0
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राम मंदिर में गर्भगृह समेत ग्राउंड फ्लोर का 85% काम पूरा हो चुका है। गर्भगृह में गुरुवार (1 जून 2023) से नक्काशीदार पत्थर लगाए जाएँगे। ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को भी आमंत्रित किया है। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ के बीच सुबह 9 बजे से पत्थरों को जोड़ने का काम शुरू होगा। महासचिव चंपत राय ने पत्र भेजकर संतों को भी आमंत्रित किया है।
चंपत राय ने बताया कि भगवान रामलला के विराजमान होने के बाद सेकेंड फ्लोर का निर्माण होता रहे और श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो, इसको लेकर भी ट्रायल किया गया है। इसके अलावा निषादराज, शबरी, अहिल्या, वाल्मीकि, वशिष्ठ की मूर्ति बनाए जाने को लेकर मंथन हुआ है। उनके मुताबिक ग्राउंड फ्लोर तैयार होने के बाद मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। दिसंबर तक मंदिर को फाइनल टच दिया जाएगा। राम लला की प्रतिमा 51 इंच की होगी।
हाल ही में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया था कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण कार्य का पहला चरण इस साल 30 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। पहले चरण का कार्य पूरा होने के बाद श्रद्धालु दर्शन भी कर सकेंगे। उन्होंने कहा था, “मंदिर ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण का प्रथम चरण 30 दिसंबर 2023 तक पूरा करने का निर्णय लिया है। प्रथम चरण में भूतल पर पाँच मंडप होंगे। इनमें सबसे प्रमुख गर्भगृह है, जहाँ भगवान की मूर्ति स्थापित की जाएगी। पाँच मंडपों के निर्माण में लगभग 160 स्तंभ लगे हैं। उनमें आइकनोग्राफी (चित्र और प्रतीक) का काम पूरा किया जाना है। मंदिर के निचले हिस्से में भगवान राम से प्रसंग होंगे। इसी तल पर बिजली और अन्य सुविधाओं को पूरा किया जाना है। ये सभी कार्य 30 दिसंबर 2023 तक पूरे कर लिए जाएँगे।”
कौन हैं अरुण योगीराज
जगद्गुरु शंकराचार्य की भव्य प्रतिमा का निर्माण मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया है। उनके द्वारा बनाई शंकराचार्य की प्रतिमा भगवान शिव की नगरी केदारनाथ की शोभा बढ़ा रही है। 12 फुट की इस पत्थर की प्रतिमा को उन्होंने मैसूर के सरस्वतीपुरम में गढ़ा था। इसके अलावा अरुण योगीराज ने मैसूर में 14.5 फ़ीट की महाराजा जयचमराजेंद्र वोडेयार की संगमरमर की प्रतिमा बनाई थी। साथ ही वो रामकृष्ण परमहंस की प्रतिमा भी बना चुके हैं। भगवान शिव की सवारी नंदी, हनुमान, भगवान वेंकटेश्वर और महान इंजीनियर विश्वेश्वरैया के अलावा वो 5.5 फ़ीट की गरुड़ की प्रतिमा भी बना चुके हैं।