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कर्नाटक चुनाव में शिवकुमार के लिए काम कर रही थी पत्रकारों की टीम, खुद किया खुलासा: कॉन्ग्रेस-मीडिया नेक्सस फिर हुआ बेनकाब

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कुछ पत्रकार कॉन्ग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे थे। पत्रकारों का यह गिरोह कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिव कुमार से जुड़ा हुआ था। इसका खुलासा खुद शिवकुमार ने किया है। उनके इस कबूलनामे ने कॉन्ग्रेस और मीडिया गिरोह की साँठगाँठ को फिर से बेनकाब कर दिया है।

16 मई 2023 को इंडिया टुडे की पत्रकार नबीला जमील से बातचीत में शिवकुमार ने चुनाव में कुछ पत्रकारों के अपने लिए काम करने का खुलासा किया। वीडियो में इसे आप 4 मिनट 16 सेकेंड से सुन सकते हैं। शिवकुमार कहते हैं कि उन्होंने कर्नाटक में अकेले दम पर कॉन्ग्रेस की जीत सुनिश्चित की। उनके लिए तीन टीम काम कर रही थी जो एआईसीसी (अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी) से अलग थी। वे बताते हैं कि उनकी एक टीम पत्रकारों की थी। एक उनके राजनीतिक समर्थकों की। इसके अलावा उनका 10 साल पुराना सिस्टम भी सक्रिय था।

इस तरह से बोलते-बोलते शिवकुमार ने यह उजागर कर दिया उनकी ‘कृपा’ पर कई पत्रकार कॉन्ग्रेस को लेकर जनता की धारणा बदलने के मिशन में जुटे थे। हालाँकि ये पत्रकार कौन हैं, इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया है। बावजूद इसके शिवकुमार कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने में नाकामयाब रहे हैं। 20 मई को सिद्धारमैया सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं। शिवकुमार डिप्टी सीएम होंगे।

सीएम के रेस में शिवकुमार के पिछड़ने की कई वजहें बताई जा रही है। इनमें से एक उनका ‘घनघोर हिंदू’ दिखना भी बताया जा रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वामपंथी पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्धारमैया को आरएसएस और बीजेपी के ‘कट्टर’ वैचारिक विरोधी के तौर पर देखा जाता है। इसके उलट दक्षिणपंथी समूहों को लेकर शिवकुमार की ऐसी छवि नहीं है। वे एक ऐसे हिंदू के तौर पर देखे जाते हैं जो अपना धार्मिक झुकाव छिपाने की कोशिश नहीं करते। अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते रहते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्नाटक का मौजूदा राजनीतिक माहौल स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो शिवकुमार की यह हिंदुवादी छवि उनके लिए कोई समस्या नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनावों में जेडीएस के मुस्लिम वोटरों ने भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया है। कई लोगों का मानना है कि यह कॉन्ग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोट बैंक के अधिक मजबूती से खड़े होने के संकेत हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले यह ध्रुवीकरण और गहरा हो सकता है। इसे देखते हुए आलाकमान ने एक ऐसे व्यक्ति (सिद्धारमैया) को चुना जो वैचारिक तौर पर बीजेपी-आरएसएस का विरोधी है और जो मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने के पार्टी के एजेंडे को दृढ़ता से आगे बढ़ा सकता है।

वैसे सिद्धारमैया को सीएम बनाने के फैसले पर पार्टी के भीतर अभी से ही असंतोष दिखने लगा है। कॉन्ग्रेस सांसद और शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने कहा है कि वे इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं हैं। जी परमेश्वर जैसे नेता खुद को डिप्टी सीएम भी नहीं बनाए जाने पर नाखुशी जता चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने भी मुस्लिम डिप्टी सीएम और गृह, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे 5 महत्वपूर्ण मंत्रालय मुस्लिमों के लिए माँग चुका है।

17 सेकेंड में फावड़े से किए 9 वार, जरीफ अंसारी ने PAC के रिटायर्ड दलित दारोगा को दिनदहाड़े काट डाला: हमले का CCTV देख काँप जाएगी रूह

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पीएसी के जिस रिटायर्ड दलित दारोगा पर फावड़े से हमला किया गया था, उनकी मौत हो गई है। हमले का दिल दहलाने वाले सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इसमें जरीफ अंसारी को दिनदहाड़े रिटायर्ड दारोगा गरीब दास पर फावड़े से ताबड़तोड़ वार करते देखा जा सकता है। हमला 18 मई 2023 को किया गया था।

हमले के बाद जरीफ अंसारी ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया था। सीसीटीवी में दिख रहा है कि वह फावड़े से तब तक हमला करता रहता है जब तक गरीब दास अचेत होकर गिर नहीं जाता है। घटना मुजफ्फरनगर के सिखेड़ा गाँव की है। एक दुकान पर बैठे रिटायर्ड दारोगा पर जरीफ ने अचानक हमला कर दिया था।

हमले की पूरी घटना दुकान के पास लगी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जरीफ अंसारी तब तक हमला करता है, जब तक गरीब दास लहूलुहान होकर गिर नहीं पड़ते। जरीफ ने 17 सेकेंड में गरीबदास पर 9 जानलेवा वार किए। गिरने के बाद भी वह गर्दन और सिर पर वार करता रहा।

हमले के बाद जख्मी गरीबदास को स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहुँचाया। जहाँ से उन्हें मेरठ रेफर कर दिया गया। फिर मेरठ से दिल्ली ले जाया गया। बताया जा रहा है कि गरीबदास के सिर और गर्दन पर गंभीर चोटें लगी थीं, इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका। इधर हमलवार जरीफ अंसारी ने थाने में सरेंडर कर अपना जुर्म कबूल लिया है।

शुरुआती पूछताछ में जरीफ ने पुलिस को बताया है कि उसकी बीवी से गरीब दास के साथ अवैध संबंध था। इसलिए उसने हमला किया। पुलिस को हत्या में और भी लोगों के शामिल होने का शक है। इस संबंध में एक शख्स को हिरासत में लिया गया है, जबकि एक की तलाश की जा रही है। परिजनों की तरफ से दी गई शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

4 मुस्लिम युवक, 13 साल की लड़की से चलती कार में कर रहे थे रेप: असम पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी ने पकड़ा, इंस्टाग्राम पर रुबेल रहमान से हुई थी पीड़िता की दोस्ती

असम में 13 साल की लड़की से चलती कार में गैंगरेप की घटना सामने आई है। आरोपितों की पहचान रुबेल रहमान, इमरान हुसैन, अनवर हुसैन और मोमिनुर रहमान के तौर पर हुई है। पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी ने शक के आधार पर इस कार को पकड़ा और उसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

गैंगरेप की यह वारदात कोकराझार जिले में 16 मई 2023 को हुई। पुलिस ने गुरुवार (18 मई 2023) को इसकी जानकारी दी। आरोपितों में से एक को पीड़िता जानती है। रुबेल रहमान से इंस्टाग्राम पर उसकी दोस्ती हुई थी। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर कोकराझार की अदालत में पेश किया। अदालत ने इन्हें तीन दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नूर इस्लाम सरकार ने बताया कि 16 मई की दोपहर पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी डोटमा इलाके के पास नेशनल हाईवे से गुजर रही थी। इसी दौरान उनकी नजर एक संदिग्ध कार पर पड़ी। उन्होंने गाड़ी रुकवाकर जाँच की। गाड़ी में 1 नाबालिग लड़की और चार युवक मिले। पेट्रोलिंग पार्टी सभी को लेकर नजदीकी थाने पहुँची। पूछताछ के दौरन नाबालिग लड़की ने बताया कि कार में उसके साथ चारों युवकों ने बारी-बारी से बलात्कार किया है।

आरोपितों की उम्र 19 से 24 साल के बीच है। सभी धुबरी जिले के रहने वाले हैं। रुबेल और इमरान स्टूडेंट हैं। मोमिनुर ड्राइवर है और अनवर कुछ नहीं करता। पूछताछ के दौरान पता चला कि रुबेल पीड़िता को पहले से जानता था। कुछ महीने पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर दोनों की दोस्ती हुई थी।

वारदात वाले दिन रुबेल अपने तीन दोस्तों के साथ पीड़िता से मिलने धुबरी से कोकराझार के डोटमा पहुँचा था। लड़की को अकेला पाकर चारों ने उसे जबरन गाड़ी में बैठा लिया और गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। चारों के खिलाफ डोटमा पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रूस के एंटोन एंड्रीव बने हिंदू, कुंडलिनी जागरण और अनुष्ठान के बाद नाम मिला अनंतानंद: काशी के इस मठ में 80 देशों के 15 हजार लोग ले चुके हैं दीक्षा

रूस के मनोचिकित्सक (Psychiatrist) एंटोन एंड्रीव (Anton Andreev) हिंदू बन गए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तंत्र दीक्षा लेकर हिंदू धर्म अपनाया है। कई वर्षों की कोशिशों के बाद एंड्रीव तंत्र दीक्षा पूरी कर पाए हैं। काशी के शिवाला स्थित वाग्योग चेतना पीठम में गुरुवार (18 मई 2023) को खास अनुष्ठान आयोजित किया गया। इस दौरान एंटोन को गुरु मंत्र के साथ नया नाम ‘अनंतानंद नाथ’ मिला। उन्हें कश्यप गोत्र मिला है।

सेंटपीट्सबर्ग में रहने वाले मनोचिकित्सक एंटोन एंड्रीव को शुरुआत से ही हिंदू संस्कृति से लगाव था। उन्होंने तंत्र विद्या की अदृश्य शक्तियों के बारे में पढ़ा था। उन्हें भी कुंडलिनी जागृत कर तंत्र विद्या प्राप्त करने की इच्छा हुई। काफी रिसर्च के बाद एंटोन को वाराणसी के वागीश शास्त्री के बारे में जानकारी मिली। जनवरी 2015 में एंटोन भारत आए और वागीश शास्त्री से तंत्र विद्या की शिक्षा लेने की इच्छा जताई। एंटोन इस दौरान जरूरी मानकों को पूरा नहीं कर पाए और कुंडलिनी जागृत नहीं हो सकी। इसके बाद वे रूस लौट गए।

एंटोन साल 2016 में दोबारा भारत पहुँचे। उनकी कक्षाएँ पूरी नहीं हो सकीं। साल 2022 में गुरु वागीश शास्त्री का निधन हो गया। 25 अप्रैल 2023 को एंटोन अपनी इच्छा लिए पंडित आशापति शास्त्री के पास पहुँचे। यहाँ उन्होंने कुंडलिनी जागृत करने की शिक्षा ली। 10 दिनों के अभ्यास और 5 दिनों के स्वतंत्र ध्यान के दौरान एंड्रीव ने माँ तारा शक्ति (माता काली का एक रूप) का ध्यान किया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एंटोन एंड्रीव ने पंडित आशापति से आगे की शिक्षा लेने की इच्छा जाहिर की। पंडित आशापति ने उन्हें अपने इष्ट देव का ध्यान करने के लिए कहा। कई घंटों के ध्यान के बाद तारापीठ में उन्हें देवी की छाया का आभास हुआ। पंडित आशापति ने आगे की गोपनीय बातों की जानकारी नहीं दी। पंडित आशापति के अनुसार आध्यात्मिक रूप से तैयार होने के बाद रूस के मनोचिकित्सक को गुरु दीक्षा दी गई।

पंडित आशापति बताते हैं कि तंत्र विद्या प्राप्त करने के लिए कुंडलिनी जागृत करना आवश्यक है। अलग-अलग लोगों को कुंडलिनी जागृत करने में अलग-अलग समय लगता है। कुछ लोग इसे 10 दिन में जागृत कर लेते हैं तो कुछ को सालों का अभ्यास करना पड़ता है। कुंडलिनी जागृत करने का अर्थ यह नहीं है कि अब वह व्यक्ति सर्वशक्तिमान हो गया है। इसका अर्थ है कि अब वह व्यक्ति तंत्र साधना के लिए तैयार है।

पंडित आशापति शास्त्री की मानें तो दीक्षा लेने वालों में रूस और यूक्रेन के लोगों की संख्या सबसे अधिक है। मुस्लिम और अन्य क्रिश्चियन देशों के भी लोग गुरुदीक्षा लेते रहते हैं। उन्होंने बताया कि मठ से अब तक 80 देशों के 15 हजार विदेशी शिष्य दीक्षा ले चुके हैं।

‘घनघोर हिंदू’ दिखने के कारण डीके शिवकुमार नहीं बने CM: मीडिया ने बताए कारण, मुस्लिम वोट बैंक के लिए कॉन्ग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को चुना

20 मई 2023 को सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री (Karnataka CM) पद की शपथ लेंगे। कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) डिप्टी सीएम होंगे। सीएम के रेस में शिवकुमार के पिछड़ने की कई वजहें बताई जा रही है। इनमें से एक उनका ‘घनघोर हिंदू’ दिखना भी बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार अगले लोकसभा चुनावों से पहले मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिए कॉन्ग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया (Siddaramaiah) को उन पर वरीयता दी है।

इकोनॉमिक्स टाइम्स ने ‘कॉन्ग्रेस आलाकमान द्वारा सिद्धारमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री चुनने के 5 कारण (Five reasons why Congress high command picked Siddaramaiah as Karnataka CM) शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें जो दूसरा कारण बताया गया है, वह बेहद दिलचस्प है। इसमें कहा गया है कि वामपंथी पृष्ठभूमि से आने वाले सिद्धारमैया को आरएसएस और बीजेपी के ‘कट्टर’ वैचारिक विरोधी के तौर पर देखा जाता है। इसके उलट दक्षिणपंथी समूहों को लेकर शिवकुमार की ऐसी छवि नहीं है। वे एक ऐसे हिंदू के तौर पर देखे जाते हैं जो अपना धार्मिक झुकाव छिपाने की कोशिश नहीं करते। अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते रहते हैं।

ऊपर आप ET की रिपोर्ट का वह हिस्सा देख सकते हैं। इसमें कहा गया है कि कर्नाटक का मौजूदा राजनीतिक माहौल स्पष्ट ध्रुवीकरण दिखाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो शिवकुमार की यह हिंदुवादी छवि उनके लिए कोई समस्या नहीं होती। रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनावों में जेडीएस के मुस्लिम वोटरों ने भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया है। कई लोगों का मानना है कि यह कॉन्ग्रेस के पक्ष में मुस्लिम वोट बैंक के अधिक मजबूती से खड़े होने के संकेत हैं। अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले यह ध्रुवीकरण और गहरा हो सकता है। इसे देखते हुए आलाकमान ने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जो वैचारिक तौर पर बीजेपी-आरएसएस का विरोधी है और जो मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने के पार्टी के एजेंडे को दृढ़ता से आगे बढ़ा सकता है।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान कॉन्ग्रेस की जीत पर शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना जताई जा रही थी। उनकी दावेदारी कितनी मजबूत थी इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि कर्नाटक चुनाव के नतीजे 13 मई 2023 को ही आ गए थे। 224 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस को 135 सीटें भी मिल गई। लेकिन मुख्यमंत्री का नाम 18 मई को जाकर फाइनल हुआ। उससे पहले शिवकुमार और सिद्धारमैया के साथ कई बार पार्टी आलाकमान की बैठकें हुई।

वैसे सिद्धारमैया को सीएम बनाने के फैसले पर पार्टी के भीतर अभी से ही असंतोष दिखने लगा है। कॉन्ग्रेस सांसद और शिवकुमार के भाई डीके सुरेश ने कहा है कि वे इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं हैं। जी परमेश्वर जैसे नेता खुद को डिप्टी सीएम भी नहीं बनाए जाने पर नाखुशी जता चुके हैं। इसके अलावा कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने भी मुस्लिम डिप्टी सीएम और गृह, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे 5 महत्वपूर्ण मंत्रालय मुस्लिमों के लिए माँग चुका है।

मेरठ के रेस्टोरेंट पर लव जिहाद के आरोप: बजरंग दल ने छापा मारा, फीडबैक बोर्ड पर लिखे मिले हिंदू लड़कियों-मुस्लिम युवकों के नाम

उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित एक रेस्टोरेंट में मुस्लिम युवकों द्वारा बहला-फुसलाकर हिंदू लड़कियों का ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया गया है। बजरंग दल ने इसको लेकर बुधवार (17 मई 2023) को रेस्टोरेंट में हंगामा किया लव जिहाद का सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाया। मामले की जानकारी पुलिस को मिलने के बाद इसकी जाँच शुरू कर दी गई है।

हंगर हेड नाम का यह रेस्टोरेंट नौचंदी इलाके के शास्त्रीनगर में स्थित है। बजरंग दल के कार्यकर्ता बुधवार की रात को अचानक यहाँ पहुँचे और देखा कि रेस्टोरेंट के फीडबैक वॉल पर हिंदू लड़कियों के साथ मुस्लिम लड़कों के नाम लिखे हैं। इसके अलावा, इनको लेकर आपत्तिजनक बातें भी लिखी गई थीं।

इसको देखकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रेस्टोरेंट में दूसरे संप्रदाय के लड़के हिंदू समुदाय की लड़कियों को लाकर उन्हें गुमराह करते हैं। यहाँ सरेआम अश्लीलता की जाती है। बजरंग दल ने इसको लेकर रेस्टोरेंट के संचालक पर भी आरोप लगाकर हंगामा किया। हिंदू संगठनों को देखकर रेस्टोरेंट में बैठे हुए युवक-युवतियाँ भाग गई।

विश्व हिंदू परिषद के महानगर सह धर्म प्रसार प्रमुख अश्वनी गुप्ता ने बताया कि रेस्टोरेंट की दीवारों पर अश्लील स्लोगन लिखे मिले। इसके साथ ही यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों के पास से अश्लील सामग्री भी बरामद की गई है। इसके साथ ही पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में भी लिया है।

वहीं, रेस्टोरेंट के मालिक अरुण ने बताया, “कैफे में एक बोर्ड लगाया लगाया गया है। यहाँ पर आने वाले इस पर अपना फीडबैक देते हैं।” नौचंदी इंस्पेक्टर सुबोध सक्सेना ने कैफे संचालक को इस तरह के स्लोगन हटाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जाँच की जा रही है।

‘इतनी कट्टर हो गई थी, कोई इस्लाम न कबूलता तो हत्या भी कर देती’ : ‘द केरल स्टोरी’ की असल कहानी, पीड़िता की जुबानी

‘द केरल स्टोरी’ फिल्म की रिलीज के बाद कई लोग सामने आकर जबरन करवाए जा रहे इस्लामी धर्मांतरण के मुद्दे पर अपनी कहानियाँ साझा कर रहे हैं। ऐसे में ऑपइंडिया ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों का शिकार हुई कुछ पीड़िताओं से मुलाकत की। इनमें एक श्रुति भी हैं जो कासरगोड की रहने वाली हैं।

श्रुति ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें इस हद तक कट्टरपंथी बना दिया गया था कि अगर कोई उनकी विचारधारा नहीं मानता और इस्लाम में कन्वर्ट करने से मना करता तो वह उसकी हत्या भी कर सकती थीं।

उनका कथिततौर पर केरल के मल्लापुरम के सेंटर में ब्रेनवॉश किया गया था। उनके भीतर न सिर्फ हिंदू धर्म के बारे में उल-जुलूल भरा गया था बल्कि देश को लेकर भी गलत सिखाया जाता था। उन्हें कहा जाता था – “भारत तुम्हारा मुल्क नहीं है। ये काफिरों का देश है। तुम्हारा देश वो है जहाँ से पैगंबर थे।”

श्रुति के अनुसार, उन्हें समझाया जाता था कि कैसे पूरे देश में इस्लाम का प्रसार करना चाहिए और देश को दारुल इस्लाम बनाना चाहिए। वे इतने सफाई से ऐसा करते हैं कि जो उनको सुनता है वे उनकी बातों पर विश्वास करने लगता है। आप यह मानने लगते हैं कि काफिरों के साथ जीना असंभव है।

श्रुति हैरान करने वाला खुलासा करते हुए कहती हैं, “मैं इतना कट्टरपंथी बन गई थी कि मैं हर उस व्यक्ति को इस्लाम में परिवर्तित करना चाहती थी जिसे मैं जानती था। मैं वास्तव में उन लोगों को मारने के लिए भी तैयार थी, जिन्होंने इस्लाम में परिवर्तित होने से इनकार कर दिया था।”

उन्होंने समझाया कि कैसे एक सुनियोजित ढंग से पूरा सिंडिकेट काम करता है। इन्हें कई इस्लामी समूह सपोर्ट देते हैं। इसके बद यह लोग उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो अपनी धार्मिक जड़ों से कमजोर होते हैं।

श्रुति के अनुसार, पहले ऐसी लड़कियों को तलाशा जाता है जिन्हें हिंदू धर्म के बारे में ज्यादा न पता हो। इसके बारे में इन्हें इनके धर्म के बारे में भड़काया जाता है जिसका जवाब उन लड़कियों पर नहीं होता। पीड़िता बताती हैं कि ब्रेनवॉश करने की प्रक्रिया में ये लोग पूछते हैं कि भगवान राम को तुम पूजते हो? बताओ उन्होंने अपनी पत्नी को क्यों छोड़ा? महिलाओं को उन्होंने क्या इज्जत दी? तुम कृष्ण को पूजते हो जिनकी इतनी पत्नियाँ थीं? तुम बंदरों को मानते हो।

श्रुति ये बताने का प्रयास करती हैं कि कैसे ये लोग धार्मिक प्रथाओं और उसकी सामग्री पर सवाल खड़ा करते हैं और जब जवाब न दो तो वो धर्म को और बुरा बताते जाते हैं। जब पीड़िता उस स्तर पर पहुँच जाती है कि उसके मन में सवाल खड़े हो तो वो अपने मजहब, अपनी विचारधारा का महिमामंडन करते हैं। एक समय आता है कि पीड़िता को उसकी आदत हो जाती है। उनकी विचारधारा धीमे जहर की तरह काम करती है। श्रुति उस पूरे सिस्टम के बारे में बात करती हैं जिससे देश भर में ऐसे अपराध अंजाम दिए जा रहे हैं।

बता दें कि श्रुति ने इस इंटरव्यू में जो खुलासे किए वही कहानी सुदीप्तो सेन ‘द केरल स्टोरी’ के जरिए दिखा चुके हैं। इसमें उन्होंने बताया कि कैसे लड़कियों को निशाना बनाकर इस्लाम कबूल करवाया जाता है फिर ISIS में शामिल होने भेज दिया जाता है। ये फिल्म सत्य घटनाओं पर आधारित है। कॉन्ग्रेस समेत कई इस्लमी समूहों ने इसे नकारने का प्रयास किया। उन्होंने इसे प्रोपेगेंडा बताया। इसकी स्क्रीनिंग होने से रोकी। इसके बावजूद तमाम लोग आगे बढ़कर आए जिन्होंने इसे सराहा। हिंदू महिलाएँ सामने आईं जिन्होंने अपने निजी अनुभवों को मीडिया में बताया और दावा किया कि द केरल स्टोरी बिलकुल निराधार नहीं है-समाज में ऐसा होता है।

नोट: इंटरव्यू को अंग्रेजी में आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

दूसरे राज्यों के 63 बच्चों को ट्रक में लादकर भेजा जा रहा था महाराष्ट्र के मदरसे: पुलिस ने पकड़ा, ड्राइवर फरार

महाराष्ट्र पुलिस ने बुधवार (17 मई 2023) को कोल्हापुर शहर में 63 नाबालिग मुस्लिम लड़कों को ले जा रहे एक ट्रक को रोक कर पकड़ लिया। इन मुस्लिम लड़कों की उम्र 7 से 13 साल के बीच है। ये सारे बच्चे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के हैं। इन्हें बिहार से ट्रेन के जरिए शहर में लाया गया था।

जानकारी के अनुसार, इन लड़कों को तालीम के लिए कोल्हापुर जिले के अजरा स्थित एक मदरसे में भेजा जा रहा था। यह घटना तब सामने आई, जब एक हिंदू संगठन के सदस्य विजयेंद्र माने ने शहर के रुईकर कॉलोनी में ट्रक को देखकर संदेह जताया। ट्रक चालक से पूछने पर वे मौके से फरार हो गए। इसके बाद माने का शक और गहरा गया।

विजयेंद्र माने ने पुलिस और हिंदू संगठनों के अन्य सदस्यों को मौके पर बुलाया। हिंदू संगठन के लोगों ने इस मामले में पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने बच्चों को हिरासत में लिया और कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उन्हें सौंपे गए ट्रेन टिकटों की जाँच की। पूछताछ के दौरान नाबालिग लड़कों ने खुलासा किया कि उनमें से कुछ बिहार से, कुछ उत्तर प्रदेश से और कुछ पश्चिम बंगाल से हैं।

हिंदूवादी संगठनों ने इस घटना को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कई प्रासंगिक सवाल पूछे- ये बच्चे कौन हैं, कोल्हापुर क्यों आए थे, क्या उन्हें मजबूर किया गया था, ट्रक में क्यों ले जाया जा रहा था आदि। संगठनों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

ट्रक को रोकने में पुलिस की मदद करने वाले हिंदू संगठन के सदस्यों में विजयेंद्र माने, विजय खाड़े, विवेक वोरा, नितिन मिसाल, अनिकेत पाटिल, अनिकेत मोदकी, सुनील पाटिल, प्रसाद पटोले, अमेय भालकर, बजरंग दल के बांदा सालुंखे, प्रशांत कागले, अनिल चौगुले, सुजीत पाटिल और अवधूत भाटे प्रमुख हैं। बीजेपी से जुड़े विजयेंद्र माने ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि छात्रों के पास कोई पहचान पत्र या दस्तावेज नहीं थे।

विजयेंद्र माने ने कहा, “मैंने ट्रक को आज सुबह रुइकर कॉलोनी में देखा, क्योंकि यह महाराजा होटल नाम के एक होटल के सामने खड़ा था। मैंने बच्चों से पूछा कि वे कौन हैं, वे यहाँ क्यों आए हैं। लेकिन उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। बाद में पता चला कि उन्हें कोल्हापुर के अजरा के एक मदरसे में ले जाया जा रहा था। उनके पास कोई पहचान पत्र भी नहीं है।”

कोल्हापुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी मंगेश चव्हाण ने पुष्टि की है कि छात्रों को आगे की प्रक्रिया के लिए बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में जाँच की। हमें पता चला कि ये छात्र लंबे समय से अज़रा मदरसा में पढ़ रहे हैं। उन्हें छुट्टियों में उनके घर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल भेजा गया था। अब उन्हें वापस लाया गया है।”

हालाँकि, पुलिस ने यह भी कहा कि मामले की विस्तृत जाँच की जाएगी और छात्रों को राज्य बाल कल्याण संघ द्वारा गठित समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। कुछ मीडिया संगठनों का दावा है कि कुल 69 नाबालिग मुस्लिम लड़के थे, जबकि अन्य ने कहा है कि 63 नाबालिग मुस्लिम छात्रों को हिरासत में लिया गया है।

जैसलमेर में पाकिस्तानी हिंदुओं की बस्ती में लगाई गई थी आग भी, उजाड़ने का आदेश देने के बाद अब बसाने का एक्शन प्लान बना रहीं IAS टीना डाबी

16 मई 2023 को राजस्थान के जैसलमेर के अमर सागर इलाके में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की बस्ती को उजाड़ दिया गया था। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इससे पता चलता है कि शरणाथिर्यों के घरों पर बुलडोजर ही नहीं चलाया गया था, बल्कि आग भी लगाई थी ताकि लोग दहशत से भाग जाएँ। इस बस्ती पर कार्रवाई जैसलमेर की कलेक्टर टीना डाबी के आदेश के बाद हुई थी। अब मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि आईएएस टीना डाबी प्रभावित शरणार्थियों के पुनर्वास को लेकर एक्शन प्लान बना रही हैं।

पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया है। इसमें एक झोपड़ीनुमा घर में लगी आग और बस्ती के लोगों को देखा जा सकता है। आग के कारण महिलाओं और बच्चे दहशत में दिख रहे है। उन्होंने लिखा है, “यह वीडियो जैसलमेर में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की बस्ती उजाड़ने के दिन का है। कथित तौर पर अधिकारियों ने बस्ती के मंदिर की बगल की एक झोपड़ी में आग लगा दी थी। इससे बस्ती में अफरातफरी मच गई। महिलाएँ बेहोश हो गईं। प्रताड़ना से बचकर भागे लोगों को आग के इस्तेमाल से हटाना हैरतंगेज है।”

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस कार्रवाई के बाद विवादों में घिरीं कलेक्टर टीना डाबी ने बुधवार (17 मई 2023) की शाम विस्थापित लोगों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था करवाई। इस कार्रवाई से करीब 50 परिवार प्रभावित हुए हैं। उनके रहने को वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। आज तक ने डाबी के हवाले से कहा है कि अमर सागर तालाब क्षेत्र के केचमेंट एरिया में अतिक्रमण नहीं होने दिया जा सकता है। यहाँ से लोगों को हटाने के लिए कई बार समझाया गया था। इससे बात नहीं बनी तो एक्शन लिया गया। उन्होंने कहा है कि बेघर परिवारों के पुर्नवास के लिए जिला प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। जिला प्रशासन, यूआईटी और पाकिस्तानी विस्थापितों की एक सर्वे टीम बनाई जाएगी। यह टीम उस जमीन का चयन करेगी, जहाँ इनलोगों को बसाया जा सके। तब तक बेघर लोग रैन बसेरे में रहेंगे।

गौरतलब है अमर सागर जैसलमेर शहर से केवल 5 किमी दूर है। कलेक्टर के आदेश के बाद यूआईटी की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पाकिस्तानी शरणार्थियों की बस्ती को उजाड़ दिया था। बुलडोजर से उनके घर तोड़ दिए थे। इससे पहले राजस्थान के जोधपुर में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। 24 अप्रैल 2023 को चोखा गाँव में जोधपुर विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के नाम पर शरणार्थी हिन्दुओं के घरों पर बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई के शिकार हुए अधिकतर लोगों के पास भारत में रहने के लिए लॉन्ग टर्म वीजा तो है, लेकिन अब तक उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट में भी ‘जाति जनगणना’ पर बिहार सरकार को झटका, कहा- अभी सर्वे पर लगी रोक नहीं हटाई जाएगी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार (18 मई 2023) को बिहार सरकार द्वारा की जा रही जाति जनगणना पर पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) द्वारा लगाई गई रोक को हटाने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय ने केस की अंतिम सुनवाई के लिए 3 जुलाई 2023 को सूचीबद्ध किया है।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की खंडपीठ ने कहा कि पटना हाईकोर्ट 3 जुलाई को इस पर सुनवाई करने वाली है। यदि किसी कारण से उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका पर सुनवाई नहीं की जाती है तो सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई 2023 को दलीलों पर विचार करेगी।

जस्टिस ओका ने कहा, “हम इस स्तर पर हस्तक्षेप क्यों करें? उच्च न्यायालय 3 जुलाई को इस पर विचार करेगा… उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्ट्या निष्कर्ष दर्ज किया है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम निष्कर्षों की पुष्टि करेंगे या हम हस्तक्षेप करेंगे। हम केवल इतना कह रहे हैं कि आज इस पर विचार मुश्किल है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम इसे नहीं सुनेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार ने अपील में कहा कि उच्च न्यायालय ने अंतरिम स्तर पर मामले की योग्यता की गलत जाँच की और राज्य की विधायी क्षमता को छुआ है। इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने इस तर्क को भी गलत तरीके से स्वीकार कर लिया कि सर्वेक्षण एक जनगणना है और लोगों की व्यक्तिगत जानकारी विधायकों के साथ साझा की जाएगी।

बिहार सरकार ने तर्क दिया कि अगर इस स्तर पर सर्वेक्षण बंद किया जाता है तो राज्य को भारी वित्तीय लागत को सहन करना पड़ेगा। बिहार सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कोर्ट से जनगणना और सर्वेक्षण के बीच अंतर करने की भी माँग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान अभ्यास जनगणना नहीं, बल्कि केवल एक स्वैच्छिक सर्वेक्षण है।

जाति सर्वेक्षण को लेकर अधिवक्ता ने कहा कि जहाँ तक डेटा और उनकी गोपनीयता का सवाल है तो यह डेटा सिर्फ बिहार सरकार के सर्वर में इकट्ठा किया जाएगा, किसी अन्य क्लाउड पर नहीं। यह फुलप्रूफ सिस्टम है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोर्ट कोई सुझाव देता है तो वह उस पर विचार करने के लिए तैयार हैं।

दरअसल, यह मामला बुधवार (17 मई 2023) को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संजय करोल की बेंच के समक्ष आया था, लेकिन जस्टिस करोल से इस केस से खुद को अलग कर लिया। जस्टिस करोल ने कहा कि उन्होंने इस मामले को उच्च न्यायालय में निपटाया था। बता दें कि जस्टिस करोल 6 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने से पहले पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे।

बता दें कि इस साल जनवरी में न्यायमूर्ति गवई के नेतृत्व वाली शीर्ष अदालत की एक पीठ ने जातिगत जनगणना शुरू करने के राज्य के फैसले को चुनौती देने वाली तीन जनहित याचिकाओं (PIL) पर विचार करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने याचिकाकर्ताओं को पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी थी।

इसके बाद यह मामला पटना उच्च न्यायालय में गया। पटना उच्च न्यायालय ने इस पर तुरंत निर्णय लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता फिर से सुप्रीम कोर्ट गए। तब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से अंतरिम राहत आवेदन को शीघ्रता से निपटाने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के 6 दिन बाद पटना हाईकोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुना दिया।

पटना हाईकोर्ट ने 4 मई 2023 को राज्य सरकार द्वारा की जाने वाली जातिगत जनगणना पर 3 जुलाई 2023 तक रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा कि जातिगत आँकड़े इकट्ठा करने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है। अपने आदेश में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद की पीठ ने कहा कि सर्वेक्षण वास्तव में एक जनगणना है, जिसे केवल केंद्र सरकार ही कर सकती है।

पटना हाईकोर्ट ने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि जातिगत सर्वेक्षण पर रोक केवल जनगणना को लेकर नहीं, बल्कि डेटा संग्रह के साथ-साथ इसे राजनीतिक दलों के साथ साझा करने को लेकर भी है। बता दें कि बिहार की नीतीश कुमार की सरकार ने जातिगत सर्वे का काम 7 जनवरी 2023 को शुरू किया था, जिसको लेकर बिहार में राजनीतिक बवाल हो गया था।