Home Blog Page 1800

2000 रुपए के नोट वाले ध्यान दें: 23 मई 2023 से 30 सितंबर 2023 तक बैंक में जाकर इन्हें बदल लें, सर्कुलेशन पर RBI की रोक

अब 2000 रुपए के नोट (₹2000 denomination banknote) मार्केट में सर्कुलेट नहीं किए जाएँगे। इसका मोटा-मोटी मतलब यह हुआ कि 2000 रुपए के नोट जो बैंक में जमा किए जाएँगे, उन्हें वापस मार्केट में नहीं उतारा जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI: Reserve Bank of India) ने 19 मई 2023 को यह निर्णय लिया।

किसी से पास अगर 2000 रुपए के नोट हैं, तो उन्हें घबराने की जरूरत हालाँकि नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि 2000 रुपए के नोट को लेकर आरबीआई ने जो निर्णय लिया है, उसके अनुसार यह वैध मुद्रा बनी रहेगी। तो आम नागरिक को करना क्या होगा अगर उनके पास 2000 रुपए के नोट हैं तो?

23 मई 2023 से 30 सितंबर 2023 – इन दोनों दिनों को याद कर लीजिए। अगर आपके पास 2000 रुपए के नोट हैं तो 23 मई 2023 से 30 सितंबर 2023 तक के बीच किसी भी बैंक में जाकर इन्हें जमा कीजिए, इसके बदले में आपको दूसरे नोट (2000 रुपए के अलावा) मिल जाएँगे।

2000 रुपए के नोट लेकर जब बैंक में बदलने जाएँ तो एक बात और ध्यान देने लायक है – 20000 रुपए से ज्यादा एक बार में नहीं बदल पाएँगे। RBI ने इस निर्णय को लेकर जो डॉक्यूमेंट जारी किया है, उसे आप यहाँ क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते हैं।

ज्ञानवापी में 128 फीट ऊँचा था आदि विशेश्वर का मंदिर, 8 फीट का शिखर और 8 मंडप थे: जानिए औरंगजेब के तोड़ने से पहले कैसा दिखता था

वाराणसी का जो ज्ञानवापी ढाँचा है, वह कभी आदि विशेश्वर का मंदिर था। क्या आप जानते हैं कि औरंगजेब के हुक्म पर तोड़ा गया यह मंदिर कैसा दिखता था? इसका जवाब तलाशते हुए एक भव्य मॉडल तैयार किया गया है। इसे देशभर में प्रदर्शित किया जाएगा ताकि लोग यह जान सके कि औरंगजेब द्वारा तोड़ दिया गया मंदिर कितना भव्य, दिव्य और विशाल था।

लकड़ी के इस मॉडल को तैयार करने में करीब दस महीने लगे हैं। ज्ञानवापी मुकदमें से जुड़े लोगों ने ग्रन्थों, पुस्तकों के अध्ययन और उपलब्ध नक्शों के आधार पर यह मॉडल तैयार करवाया है। पांडेयपुर के रहने वाले अमर अग्रवाल ने इसे बनाया है। ज्ञानवापी केस से जुड़े डॉ. राम प्रसाद सिंह के अनुसार वर्ष 1669 से पहले ज्ञानवापी में भगवान शिव का भव्य मंदिर हुआ करता था। धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रन्थों में इस बात का उल्लेख मिलता है। बनारस के इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले इतिहासकार एएस अल्टेकर व जेम्स प्रिंसेप ने भी विश्वेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है। प्रिंसेप ने तो मंदिर का नक्शा भी तैयार किया था।

अध्ययनों से पता चलता है कि भगवान आदि विश्वेश्वर के मंदिर की ऊँचाई 128 फीट और चौड़ाई 136 फीट थी। तीन मंजिला मंदिर में आठ फीट ऊँचा शिखर था। मंदिर में आठ मंडप थे। पश्चिम दिशा में स्थित श्रृंगार मंडप के पास प्रवेश द्वार था। उत्तर दिशा में नंदी विराजमान थे और दक्षिण दिशा में स्थित कुंड में मंदिर का जल प्रवाहित होता था।

श्रृंगार गौरी मामले से जुड़े सोहनलाल आर्य का कहना कि इतिहास की पुस्तकों में जानकारी मिलती है कि औरंगजेब ने चुनार से तोप मंदिर के पश्चिमी दीवार को उड़वा दिया था। मंदिर के गर्भगृह की ओर जाने वाले मार्ग को बड़े-बड़े पत्थरों से ढक दिया गया था। ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा है कि काफी अध्ययन और रिसर्च के बाद यह मंदिर का मॉडल तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह तैयार होने में कुछ वक्त और लगेगा। मॉडल पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद भव्य आयोजन के तहत इसे लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि 18 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने एक फरमान जारी कर काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने का आदेश दिया था। यह फरमान एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में आज भी सुरक्षित है। उस समय के लेखक साकी मुस्तइद खाँ द्वारा लिखित ‘मासीदे आलमगिरी’ में इस ध्वंस का वर्णन है। 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब को मंदिर तोड़ने का कार्य पूरा होने की सूचना दी गई थी।

1777-80 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था। अहिल्याबाई होलकर ने इसी परिसर में विश्वनाथ मंदिर बनवाया जिस पर पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने सोने का छत्र बनवाया। ग्वालियर की महारानी बैजाबाई ने मंडप बनवाया और महाराजा नेपाल ने वहाँ विशाल नंदी प्रतिमा स्थापित करवाई। नंदी प्रतिमा का मुख उल्टा होने का रहस्य यही है कि पहले मंदिर जहाँ थी, वहाँ मस्जिद बना ली गई।

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रनेता प्रभात गुप्ता हत्याकांड में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा बरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 23 साल पहले प्रभात गुप्ता नाम की व्यक्ति की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ सहित चारों आरोपित बरी हो गए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2004 में ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी करने के दिए गए आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले के खिलाफ यूपी सराकर ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अताउ रहमान मसूदी और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश शुक्ला की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ यूपी सरकार की अपील को खारिज कर दिया। साल 2004 में यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पहुँचा था। तब से अब तक, यानी 14 सालों में इस मामले में हाईकोर्ट ने 3 बार अपना फैसला सुरक्षित रखा।

बता दें कि 8 जुलाई 2000 को लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता प्रभात गुप्ता की लखीमपुर खीरी के तिकोनिया गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पंचायत चुनाव को लेकर एक विवाद में प्रभात गुप्ता को गोली उनके घर के पास ही मारी गई थी। इस मामले में अजय मिश्रा टेनी के अलावा सुभाष मामा, शशि भूषण उर्फ पिंकी, राकेश उर्फ डालू को आरोपित बनाया गया था।

जब निचली अदालत ने टेनी को बरी कर दिया, उसके बाद मृतक के पिता संतोष गुप्ता ने सीआरपीसी की धारा 397/401 के तहत हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर दायर की थी। इस याचिका को फरवरी 2005 में हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था और आरोपित को बरी करने के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर आपराधिक अपील से जोड़ दिया गया था।

राज्य सरकार ने अपनी अपील में कहा था कि निचली अदालत ने चश्मदीद गवाह के बयानों को नजरअंदाज किया। दूसरी तरफ कोर्ट ने चश्मीदीद गवाह के बयान को निचली अदालत ने विश्वसनीय नहीं मानकर खारिज कर दिया था।

प्रभात गुप्ता के दिवंगत पिता संतोष गुप्ता ने इस संबंध में दर्ज कराई गई अपनी FIR में कहा था कि उनके बेटे प्रभात गुप्ता को पहली गोली टेनी ने मारी थी। प्रभात गुप्ता के भाई राजीव गुप्ता ने कहा था, “उन लोगों ने मेरे भाई को रोका। उसके बाद गोली चली। पहली गोली अजय मिश्रा ने चलाई, जो मेरे भाई की कनपटी में लगी। दूसरी गोली सुभाष मामा ने चलाई, जो सीने में लगी। इसके बाद मेरे भाई सड़क पर गिर गए और उनकी मौके पर मौत हो गई।”

केस दर्ज होने के बाद टेनी ने हाईकोर्ट से इस मामले में गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था। हालाँकि, जब मामले में चार्जशीट दाखिल की गई तो 5 जनवरी 2001 को उनके अरेस्ट स्टे को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से अरेस्ट स्टे खारिज होने के बाद भी लखीमपुर पुलिस ने अजय मिश्रा को गिरफ्तार नहीं किया। 

जब पीड़ित परिवार इसको लेकर फिर से हाईकोर्ट पहुँचे तो 10 मई 2001 को हाईकोर्ट में जस्टिस नसीमुद्दीन की बेंच ने अजय मिश्र को अरेस्ट करने का ऑर्डर दिया। इसके डेढ़ महीने बाद टेनी ने कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया। फिर उन्हें बीमार बताकर अस्पताल भेज दिया गया और फिर अगले दिन सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई। साल 2004 में उन्हें रिहा कर दिया गया।

राजीव गुप्ता ने कहा था, “मेरे भाई की हत्या के मुख्य अभियुक्त होने के बावजूद टेनी एक भी दिन जेल नहीं गए। पूरा सिस्टम उनके हाथ में था।” दरअसल, टेनी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के नेपाल सीमा से बिलकुल सटे बनवीरपुर गाँव के रहने वाले हैं। इस गाँव से सीधी सड़क तिकुनिया जाती है, जहाँ प्रभात गुप्ता की हत्या की गई थी। इसी तिकुनिया में साल 2021 में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर भी ट्रैक्टर चढ़ाकर उनकी हत्या के मामले में भी नाम सामने आया था।

उनके इलाके में अजय मिश्रा टेनी का इतना खौफ है कि कोई भी उनके खिलाफ खुलकर बोलने को तैयार नहीं होता। राजनीति में आने से पहले अजय मिश्रा टेनी की पहचान एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी की थी। उनके खिलाफ तस्करी से लेकर हत्या तक के तमाम मामले दर्ज हुए थे। हालाँकि, हाईकोर्ट के आदेश पर साल 1996 में टेनी की हिस्ट्रीशीट बंद कर दी गई थी।

भास्कर के अनुसार, प्रभात गुप्ता हत्याकांड के जाँच अधिकारी रहे आरपी तिवारी ने अभियोजन रोजनामचे के आखिरी पन्ने पर अजय मिश्र को लिखा था, “अजय मिश्र उर्फ टेनी भाजपा का महामंत्री है तथा क्षेत्रीय विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता मंत्री श्री राम कुमार वर्मा का खास होने के कारण इसके आतंक एवं भय से क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति सही एवं सत्य बात कहने की हिम्मत नहीं कर रहा है। यह नेपाल क्षेत्र पास होने के कारण तस्करी के कार्यों में भी लिप्त है, जिससे इसकी आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी है।”

ये बिहार है! एक सरकारी स्कूल गुंडों के डर से हो गया बंद, 200 छात्रों की पढ़ाई प्रभावित: रंगदारी नहीं मिलने पर नरसंहार की दे रहे थे धमकी

बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति एक सरकारी स्कूल पर लटके ताले से समझा जा सकता है। भागलपुर का यह सरकारी स्कूल गुंडों के भय से बंद कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आपराधिक तत्व स्कूल चलने देने के एवज में रंगदारी माँग रहे थे। इसके बाद शिक्षकों ने स्कूल ही बंद कर दिया।

इसके कारण करीब 200 छात्रों की पढ़ाई कई दिनों से बंद है। पीड़ितों ने पुलिस पर भी कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक मामला भागलपुर के नाथनगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ वार्ड नंबर 8 में मुनीराम खेतान नाम का सरकारी स्कूल है। प्रिंसिपल पंकज मूसेस हैं। प्रिंसिपल ने इलाके के विक्रांत कुमार उर्फ़ पूरन शाह को बाहुबली बताते हुए स्कूल चलाने में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि विक्रांत और उसके गुर्गे स्कूल खोलने के लिए रंगदारी माँगते हैं। रंगदारी नहीं देने पर शिक्षकों को स्कूल से बाहर फेंक देने की धमकी दी। कथित तौर स्कूल खुलने पर नरसंहार की भी धमकी दी।

इस स्कूल में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। प्रिंसिपल का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या से अपने सीनियर अधिकारियों और पुलिस को अवगत करवाया। लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद प्रिंसिपल और शिक्षकों ने स्कूल के गेट पर ताला लगा दिया। स्थानीय लोगों ने भी स्कूल के स्टाफ की बातों से सहमति जताते हुए असामजिक तत्वों पर कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया है।

इस मामले में भागलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी संजय कुमार ने स्कूल न आने वाले टीचरों और प्रिंसिपल पर नाराजगी जताई है। बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित रखने की बात कहते हुए DEO संजय कुमार ने प्रिंसिपल पंकज मूसेस को सस्पेंड कर दिया है। इसी के साथ उन्होंने अन्य टीचरों को भी काम पर लौटने की हिदायत देते हुए कहा कि ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। DEO ने जल्द ही स्कूल में पढ़ाई शुरू होने का दावा किया है। थाना प्रभारी नाथनगर महताब आलम ने मीडिया से शिक्षकों की तरफ से शिकायत मिलने की बात स्वीकारी है। उन्होंने कहा कि दी गई शिकायत पर जाँच करवाई जा रही है।

अडानी-हिंडनबर्ग मामला: सु्प्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ पैनल ने सौंपी अपनी रिपोर्ट, कहा- पहली नजर में नियमों के उल्लंघन के सबूत नहीं

अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के खिलाफ जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय (SC) द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल ने कहा है कि कीमतों में हेरफेर को लेकर पहली नजर में किसी तरह की रेगुलेटरी कमी नहीं दिखी है। कोर्ट की समिति ने कहा कि इस स्तर पर नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

अदालत द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने अडानी समूह की संस्थाओं की अपनी जाँच में कुछ नहीं मिला है। विशेषज्ञ पैनल ने कहा कि अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट से पहले अडानी समूह के शेयरों में शॉर्ट पोजीशन के सबूत मिले हैं। इससे यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं कि कीमतों में हेराफेरी के संबंध में नियामकीय विफलता हुई है या नहीं।

पैनल की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि अनुभवजन्य आँकड़ों से पता चलता है कि अडानी के सूचीबद्ध शेयरों में खुदरा निवेशकों का निवेश 24 जनवरी 2023 के बाद बढ़ा है। यह वह दिन था जब हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर अपनी रिपोर्ट जारी की थी।

पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि विधायी पक्ष की नियामक विफलता के निष्कर्ष पर पहुँचना मुश्किल है, लेकिन एक प्रभावी प्रवर्तन नीति की आवश्यकता है। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट की सलाह है कि प्रवर्तन नीति SEBI द्वारा अपनाई गई विधायी नीति के अनुरूप होनी चाहिए।

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति को एक ही पार्टियों के बीच कई बार कृत्रिम ट्रेडिंग का कोई पैटर्न नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार, “एक पैच में जहाँ कीमत बढ़ी, वहाँ जाँच में पता चला कि शुद्ध विक्रेता विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) थे। एक निवेश इकाई ने एक पैच में जितनी खरीदारी की थी, उससे कहीं अधिक अन्य प्रतिभूतियों को खरीदा था। इसलिए, इसका कोई सुसंगत पैटर्न नहीं था।”

दूसरी ओर, यह भी कहा गया कि SEBI ने पाया है कि कुछ संस्थाओं ने रिपोर्ट के प्रकाशन से पहले शॉर्ट पोजिशन बना ली थी और कीमत गिरने के बाद उन्हें लाभ हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है, “सभी पक्ष अभी भी जाँच के दायरे में हैं और इसलिए समिति गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं करती है।”

रिपोर्ट में अडानी समूह द्वारा खुदरा निवेशकों को राहत देने के लिए उठाए गए जरूरी कदम की भी सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टियों ने शपथ पर पुष्टि की है कि एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) निवेश अदानी समूह द्वारा वित्त पोषित नहीं हैं। सेबी ने यह साबित नहीं किया है कि उसके संदेह को एक ठोस मामले में तब्दील किया जा सकता है।

इसके अलावा, अडानी-हिंडनबर्ग मामले में रिपोर्ट ने बताया कि कुछ 13 विदेशी संस्थाओं के स्वामित्व की श्रृंखला स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा, एफपीआई में आर्थिक हित के अंतिम मालिक का पता नहीं चल सका है। इसीलिए, इस मामले में सेबी के संदेह को खत्म नहीं किया जा सकता है।

रिपोर्ट SEBI को यह तय करने के लिए छोड़ती है कि क्या 13 संस्थाओं, जिनकी जाँच लंबित है उसमें क्या कोई और मामला बनाया जाना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेबी ने प्रथम दृष्टया कोई आरोप नहीं लगाया है।

इस बीच, शीर्ष अदालत ने बुधवार (17 मई 2023) को अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जाँच पूरी करने के लिए SEBI को तीन महीने का विस्तार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 14 अगस्त तक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी परदीवाला की पीठ ने यह भी आदेश दिया कि जस्टिस एएम सप्रे समिति की रिपोर्ट पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे इस मामले में अदालत की सहायता कर सकें। पूरी रिपोर्ट को यहाँ पढ़ा जा सकता है।

UP के ओरैया में घर की खुदाई में मुगलों का खजाना मिलने का दावा, सोने की ईंट लेकर भाग गया मजदूर: जानिए क्या है मामला

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में एक घर की खुदाई के दौरान मुगल काल खजाना मिलने का दावा किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि खजाने में धातु की ईंट और सिक्के हैं। यह भी दावा है कि खुदाई कर रहा मजदूर सोने की ईंट लेकर भाग गया।

जिस मकान की खुदाई की जा रही थी, उसके पड़ोस में रहने वाली विनीत गुप्ता के दावों के बाद गुरुवार (18 मई 2023) को यह मामला मीडिया में आया। हालाँकि मकान के मालिक महादेव विश्नोई का कहना है कि 2 और 5 पैसे के सिक्के मिले हैं। एक ईंट मिलने की बात भी उन्होंने स्वीकार की है। पुलिस ने मिले सामान को अपनी कस्टडी में ले लिया है और आगे की कार्रवाई कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला औरैया जिले के कोतवाली नगर क्षेत्र का है। यहाँ के मुमटी मोहाल इलाके में एक घर में निर्माण कार्य चल रहा था। इस दौरान पुराने निर्माण को गिराते समय मजदूरों को दबा खजाना मिला। इस खजाने में धातु की ईंटें और कुछ सिक्के बताए जा रहे हैं। कुछ ही देर में शोर-शराबा शुरू हो गया। आसपास के लोगों को जमा होता देख कर एक मजदूर मौके से एक ईंट ले कर भाग गया। बताया जा रहा है कि वो ईंट सोने की थी।

पड़ोसी ने बताया चाँदी का मटका

विनीत गुप्ता ने बताया है यह मकान पहले किसी तिवारी जी का था। विश्नोई ने इसे खरीदा है। लेकिन लिखा-पढ़ी नहीं हुई है। विनीत के अनुसार नए मालिक मकान ही खुदाई करवा रहे हैं। 7 मई 2023 को इस दौरान चाँदी का एक मटका और सोने की एक ईंट मिली थी। उनका कहना है कि CCTV फुटेज से उनके दावों की पुष्टि हो सकती है। उसमें नए मकान मालिक का बेटा ईंट ले जाता दिखाई पड़ेगा।

विनीत गुप्ता का कहना है कि उन्होंने इसकी सूचना प्रशासन को दी है। इन तमाम दावों पर जिला औरैया की पुलिस का कहना है कि SHO कोतवाली सिटी को जरूरी कार्रवाई के लिए आदेश दे दिए गए है।

मकान मालिक ने बताया अफवाह

ऑपइंडिया को मकान मालिक महादेव विश्नोई ने बताया ये सच है कि वे नया निर्माण करवा रहे हैं। लेकिन मुगलकालीन खजाना मिलने की बात अफवाह है। उनके मुताबिक खुदाई में 2 और 5 पैसों के कुल 215 सिक्के मिले हैं। इसके अलावा एक ईंट भी मिली है। उन्होंने खुदाई से मिला सारा सामान पुलिस स्टेशन में जमा करवा दिया है।

खुदाई में मिली ईंट

मकान मालिक विश्नोई ने किसी भी तरह के सोने या चाँदी आदि के मिलने के दावों का खंडन किया है। जो ईंट मुगलकाल की बताई जा रही है, ऑपइंडिया के पास उसकी तस्वीर मौजूद है। ईंट पर अंग्रेजी में किसी ने खरोंच कर 63 भी लिख रखा है। ईंट किस धातु की है ये अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने इस मामले में संबंधित विभाग को सूचित कर दिया है।

अयोध्या राम मंदिर में लगेंगी 3600 मूर्तियाँ, पत्थरों पर आकार दे रहे मूर्तिकार: शास्त्रों के आधार पर हो रहा निर्माण, देखिए तस्वीरें

अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर आकार ले रहा है। जनवरी 2024 में रामलला गर्भगृह में विराजमान हो जाएँगे। अब यह जानकारी सामने आई है कि मंदिर परिसर में 3600 अन्य मूर्तियाँ भी लगाई जाएँगी। इनका निर्माण शास्त्रों के आधार पर हो रहा है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Janmbhumi Teerth Kshetra Trust) ने ऐसी ही कुछ मूर्तियों के निर्माण की तस्वीरें ट्वीट की है। साथ ही बताया है, “श्री राम जन्मभूमि मंदिर में स्तंभों, पीठिका तथा अन्य स्थानों पर सज्जित होने के लिए शास्त्रीय ग्रंथों में वर्णित कथाओं के आधार पर सुंदर मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इन मूर्तियों को निर्माण प्रक्रिया की सारिणी के अनुसार निर्दिष्ट स्थानों पर प्रस्थापित किया जाएगा।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ऐसी 3600 मूर्तियाँ मंदिर में स्थापित की जाएँगी।

मीडिया रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राम मंदिर 2023 के अंत तक आंशिक रूप से तैयार हो जाएगा। मंदिर का गर्भगृह दिसंबर 2023 तक बनकर तैयार हो जाएगा। रामलला की मूर्ति 51 इंच की होगी, जिसे गर्भगृह में बने चबूतरे पर स्थापित किया जाएगा। जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद भक्त गर्भगृह में राम लला के दर्शन कर पाएँगे।

पिछले दिनों यह भी खबर आई थी कि धर्मनगरी अयोध्या को उत्तर प्रदेश पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की भी योजना बना रही है। राम मंदिर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर टेंट सिटी बनाने का फैसला किया है। इनमें अगले साल के अंत से ठहरा जा सकता है। अयोध्या आने वाले पर्यटकों के लिए 15,000 वर्गमीटर के दायरे में बनाया जा रहा टेंट सिटी यह अयोध्या में आने वाले कई नए होटलों की योजना का हिस्सा है। इनमेें प्रमुख पाँच सितारा होटल भी शामिल हैं।

इस साल का 28 मई खास: वीर सावरकर की होगी जयंती, राष्ट्र को नया संसद भवन समर्पित करेंगे PM मोदी; जानिए इसके बारे में सब कुछ

भारत की संसद (Parliament) के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 28 मई 2023 को करेंगे। इसी दिन वीर सावरकर के विख्यात विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) की जयंती भी है। सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था और इस साल 28 मई को उनकी 140वीं जयंती है।

गुरुवार (18 मई 20223) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला (Om Birla) ने PM मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को भवन के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया था। लोकसभा सचिवालय ने नए संसद भवन को आत्मनिर्भर भारत की एक नई पहचान बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों ने 5 अगस्त 2019 में संसद के नए भवन की माँग रखी थी। इसके बाद नए संसद भवन का शिलान्यास पीएम मोदी द्वारा 10 दिसंबर 2020 को किया गया था। यह भवन 4 मंजिला है, जिसमें 1224 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है। वर्तमान भवन में लोकसभा में 550 और राज्यसभा में 250 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है।

नया संसद भवन पुरानी बिल्डिंग से 17,000 वर्गमीटर बड़ा है। इस भवन में लोकसभा के 888 और राज्यसभा के 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। लोकसभा चेंबर में ही दोनों सदनों का संयुक्त सत्र भी होगा। नए संसद भवन में अत्याधुनिक तकनीक वाले उपकरण लगाए गए हैं। इसके साथ यहाँ सुरक्षा में तैनात मार्शलों की ड्रेस भी अब दूसरी होगी।

पुराना संसद भवन 47,500 वर्गमीटर में है, जबकि नया भवन 64,500 वर्गमीटर में बनी है। वास्तुकार बिमल पटेल द्वारा बनाए गए नए भवन में 3 दरवाजे हैं, जिन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार के नाम से जाना जाएगा। इसमें सांसदों और वीआईपी के लिए अलग प्रवेश द्वार है। इस पर भूकंप का असर नहीं होगा।

इसमें पुस्तकालय, कैफेटेरिया आदि की भी व्यवस्था है। नए भवन में दिव्यांगों को भी आने में आसानी होगी। सेन्ट्रल लाउंज में भारत का राष्ट्रीय वृक्ष अशोक भी लगाया गया है। कहा जा रहा है कि यह भवन भारत की सांस्कृतिक और परम्पराओं का आईना है। इस भवन के आसपास कई पेड़ लगाए जाएँगे, जो लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देंगे।

नए संसद भवन का सबसे बड़ा हॉल संविधान हॉल है। कहा जा रहा है कि इसमें संविधान की मूल प्रति रखी जाएगी। इसके अलावा इसमें महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस सहित देश के सभी प्रधानमंत्रियों की बड़ी तस्वीरें भी लगाई गई हैं। बताते चलें कि सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर में नए संसद भवन के अलावा प्रधानमंत्री आवास एवं कार्यालय, केंद्रीय सचिवालय और उपराष्ट्रपति का आवास शामिल है।

सितम्बर 2020 में नए संसद भवन को बनाने का ठेका टाटा प्रोजेक्ट को दिया गया था। शुरुआत में नए संसद भवन को बनाने की लागत 861 करोड़ रुपए आँकी गई थी। हालाँकि, बाद में यह लागत बढ़कर 1200 करोड़ रुपए तक पहुँच गई। तिकोने आकार के नए संसद भवन का निर्माण 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था। इसका अधिकांश काम पूरा हो चुका है।

सन 1927 में बना वर्तमान संसद भवन लगभग 100 साल पुराना है और इसे सरकार ने हेरिटेज बिल्डिंग बताया है। सरकार के मुताबिक, अब सदन में काम करने वाले सदस्यों से लेकर बाहर से आने वाले आगंतुकों की संख्या बढ़ी है। सरकार का यह भी मानना है कि पुराने भवन के आकार और डिजाइन की वजह से उसमें आधुनिक तकनीक के उपकरण लगाने सम्भव नहीं थे।

मार्च 2023 में PM मोदी ने इस संसद का आकस्मिक निरीक्षण किया था। तब उन्होंने इसे बनाने वाले मजदूरों से भी बात की थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले इस निर्माण की आलोचना की थी। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे पैसे की बर्बादी बताया था।

महिलाओं के बीच में बैठ गया दाढ़ी वाला सवाद और करने लगा हस्तमैथुन: केरल के एक बस की स्टोरी एक्टर-मॉडल ने शेयर की

केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (KSRTC) की एक बस। एक युवती इसी बस में त्रिशूर में सवार होती है। वह कोच्चि जा रही है। महिलाओं के लिए आरक्षित सीट पर बैठती है। एक और महिला भी उसी सीट पर बैठी है। रास्ते में एक युवक दोनों महिलाओं के बीच आकर बैठ जाता और हस्तमैथुन करने लगता है।

इस युवक की पहचान (Savad Shah) के तौर पर हुई है। कुछ रिपोर्टों में उसे कोझिकोड का रहने वाला सैय्यद केके भी बताया गया है। मॉडल-एक्टर नंदिता शंकर (Nandita Sankara) ने बुधवार (17 मई 2023) को इस घटना की स्टोरी इंस्टाग्राम पर साझा की है। ​कोच्चि जाने के लिए त्रिशूर में इस बस में बैठने वाली महिला वही थीं। उन्होंने बताया है कि उस युवक की अश्लील हरकत का उन्होंने वीडिया बनाया। आवाज उठाई तो उसने भागने की कोशिश। लेकिन बस कंडक्टर और अन्य यात्रियों की मदद से उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

वीडियो में नंदिता ने कहा है कि वह त्रिशूर से कोच्चि की यात्रा कर रहीं थी। अंगमाली में आरोपित बस में चढ़ा। महिलाओं और गर्भवती के लिए आरक्षित सीट पर उनके और एक अन्य महिला के बीच बैठ गया। उसने खिड़की के पास बैठी नंदिता से बातचीत करने की कोशिश की। उनसे पूछा कि वह कहाँ जा रही हैं और क्या रास्ते में जाम मिल सकता है। नंदिता ने बताया है, “मेरे जवाब देने के करीब दो सेकेंड बाद मैंने महसूस किया कि वह अपने एक हाथ से मेरे कमर को टच कर रहा है। जल्द ही मैंने पाया कि बैग की आड़ लेकर वह दूसरे हाथ से अपने निजी अंगों को सहला रहा है।” उन्होंने कहा है, “इससे मुझे घृणा हो गई। मैंने खिड़की खोला और बाहर देखने लगी। जब मैं दूसरी बार उसकी तरफ मुड़ी तो उसने जिप खोलकर गुप्तांग बाहर निकाल रखा था और हस्तमैथुन कर रहा था।”

घटना के रिकॉर्ड किए गए वीडियो नंदिता को उस युवक से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह क्या कर रहा है। इसके बाद युवक सीट से उठ जाता। कंडक्टर के आने पर अपना बचाव करने लगता है। नंदिता की रजामंदी के बाद कंडक्टर ड्राइवर को बस लेकर पुलिस स्टेशन चलने को कहता है। इसके बाद आरोपित भागने की कोशिश करता है।

पेशे से एक्टर और मॉडल नंदिता ने दावा किया है कि सवाद ने अन्य महिलाओं के साथ भी बस में अश्लील हरकत की। उन्होंने बताया कि वीडियो शेयर करने के बाद 5 महिलाएँ सामने आई हैं। महिलाओं का कहना है कि आरोपित ने उनके साथ भी बस में अश्लील हरकत की थी। केरल पुलिस ने सवाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। नंदिता ने मदद के लिए बस के चालक और कंडक्टर के साथ-साथ उन लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने सवाद को पकड़ने में मदद की।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर को तोड़कर औरंगजेब ने बना दिया था मस्जिद, मराठों ने अपने पराक्रम से किया जीर्णोद्धार: जानिए नासिक के ज्योतिर्लिंग का इतिहास

महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्रयम्बकेश्वर मंदिर में 13 मई 2023 की रात करीब 9:15 बजे मुस्लिमों का एक समूह दाखिल होने की कोशिश करता है। त्रयम्बकेश्वर शिवलिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हिंदू परंपरा के अनुसार इस मंदिर में सिर्फ हिंदुओं को प्रवेश और पूजा का अधिकार है। जिन मुसलमानों ने मंदिर के परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की वो लोग गर्भगृह के अंदर शिवलिंग पर चादर चढ़ाना चाहते थे। बाद में मुस्लिम पक्ष के तरफ से बयान आया कि वे महादेव को धूप का धुआँ पेश कर रहे थे।

इस विवाद के बीच आपको त्रयम्बकेश्वर मंदिर का इतिहास भी जान लेना चाहिए। औरंगजेब ने अपने शासन काल में अन्य बड़े मंदिरों के साथ इस मंदिर को भी तुड़वा दिया था। मंदिर की जगह एक मस्जिद बनवा दी गई थी। हिंदुओं ने बाद में मंदिर पर दोबारा कब्जा कर लिया और मस्जिद की जगह मंदिर बनवा दिया था।

मंदिर में मुस्लिमों का जबरन प्रवेश

13 मई की रात को जैसे ही स्थानीय मुस्लिम मंदिर परिसर में दाखिल हुए, वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें गर्भगृह तक जाने से रोक लिया। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने मंदिर में घुसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

पुलिस ने अकील यूसुफ सैय्यद, सलमान अकील सैय्यद, मतीन राजू सैय्यद और सलीम बक्श सैय्यद को त्रयम्बकेश्वर मंदिर में जबरन प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। इन लोगों के खिलाफ IPC की धारा 295 और 511 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। राज्य के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीश के आदेश के बाद मामले की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।

आरोप है कि उर्स के मौके पर निकाले गए जुलूस में शामिल लोग शिवलिंग पर चादर चढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। जुलूस के आयोजक मतीन सैय्यद ने दावा किया कि मुस्लिम समाज के लोग चादर को सीढ़ियों तक ले गए थे, लेकिन उनका इरादा शिवलिंग पर चादर चढ़ाने का नहीं था।

हिंदुओं पर साम्प्रदायिक सद्भाव खराब करने का आरोप

त्रयम्बकेश्वर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष अवेज़ कोंकणी (Avez Kokni) ने कहा कि मुस्लिमों ने मंदिर में प्रवेश करने या महादेव पर चादर चढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया। यहाँ नजदीकी दरगाह में उर्स के दौरान मुस्लिमों द्वारा पीढ़ियों से मंदिर की सीढ़ियों से धूप या लोबान का धुआँ दिखाने की परंपरा रही है।

नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, “स्थानीय हिंदू समाज ने कभी भी इस प्रथा का विरोध नहीं किया। अब मामले ने साम्प्रदायिक रंग ले लिया है। इससे काफी हैरानी हो रही है।” वैसे हिंदुओं ने ऐसा कब महसूस किया होगा कि उनके देवता को लोबान के इस धुएँ की जरूरत है।

नासिक जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (Nashik District Central Cooperative Bank) के पूर्व अध्यक्ष और त्रयम्बकेश्वर के निवासी परवेज़ कोंकणी ने कहा कि सदियों से चली आ रही यह प्रथा मजहबी समन्वय व एकता का प्रतीक है। शहर में मुस्लिमों की आबादी काफी कम है और सभी यहाँ सद्भाव के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा, “शहर शांतिपूर्ण और गैर-सांप्रदायिक रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हिंदू बहुल इलाके में मुझे सहकारी बैंक का अध्यक्ष चुना गया है।”

परवेज का कहना है कि सदियों पुरानी परंपरा पर सवाल उठाए जाने से वे हैरान हैं। अब यहाँ सवाल उठता है कि क्या साम्प्रदायिक एकता का यह झंडाबरदार किसी मस्जिद, दरगाह या अन्य मजहबी स्थान पर हनुमान चालीसा के पाठ की वकालत करेगा? राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी त्रयम्बकेश्वर में हुई घटना को भी सही ठहराया है।

ऐसी प्रथाओं का रोका जाना क्यों जरूरी?

हिंदू देवता के किसी भी मंदिर में इस तरह से चादर चढ़ाने की कोई परंपरा नहीं है। किसी भी शास्त्र में इसका उल्लेख नहीं है। साथ ही गैर-हिंदुओं को मंदिर में प्रवेश करने और परिसर के अंदर अपने गैर-हिंदू धर्म के अनुष्ठान करने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती।

सनातन धर्म में देवी-देवताओं के पूजा और अनुष्ठान की खास प्रक्रिया होती है। ऐसे में साम्प्रदायिक सौहार्द्र के नाम पर पूजा पद्धति को विकृत नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी हिंदू मंदिर में धार्मिक सौहार्द्र के नाम पर इस तरह की प्रक्रियाएँ हो रही हैं तो उन पर तुरंत पाबंदी लगनी चाहिए।

कुछ लोग धार्मिक सौहार्द्र के नाम पर इस तरह के प्रथाओं की वकालत कर सकते हैं। हो सकता है कि देश के कुछ मंदिरों में धार्मिक सौहार्द्र जैसी प्रक्रियाएँ की जा रही हों, लेकिन ज्योतिर्लिंग जैसे प्रमुख मंदिरों का इन सब से अलग रहना उस स्थान की विशेषता के लिए भी आवश्यक है।

हिंदुओं को आवश्यकतानुसार इन चीजों में बदलाव करना चाहिए, जिससे हमारे पौराणिक स्थलों की पूजा पद्धति दूषित न हो। त्रयम्बकेश्वर मामले में मुस्लिम ज्योतिर्लिंग को चादर दिखाने को समन्वय की संस्कृति बता रहे हैं और इस घटना को लेकर हिंदुओं एवं मंदिर अधिकारियों पर धार्मिक बैर और घृणा फैलाने का परोक्ष आरोप लगा रहे हैं।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर में धूप का धुआँ दिखाने को धार्मिक सौहार्द्र बताने वाले ये लोग इस तथ्य को छिपा जाते हैं कि धार्मिक एकता की जिम्मेदारी सिर्फ हिंदुओं को दी गई है। क्या हिंदुओं के साथ प्रेम और सद्भाव दिखाने के लिए किसी मस्जिद या ईदगाह में आरती, यज्ञ, हवन या किसी भी तरह के पूजा की इजाजत मिल सकती है? क्या इस देश में ऐसी कोई परंपरा रही है, जहाँ किसी मस्जिद में किसी हिंदू देवता का बड़ा अनुष्ठान आयोजित किया गया हो?

मजहबी प्रेम और सम्मान का बोझ हिंदुओं के कंधों पर ही लाद दिया गया है। हिंदुओं से उम्मीद की जाती है कि वे गैर-हिंदुओं को मंदिरों में देवताओं पर चादर चढ़ाने की अनुमति दें। मुस्लिम हिंदू देवी-देवताओं की कितनी इज्जत करते हैं, इसका उदाहरण काशी विश्वनाथ में देखिए।

ज्ञानवापी परिसर में तथाकथित मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग मिला है। इसी स्थान पर मुस्लिम वजू किया करते थे। शिवलिंग पर कुल्ला किया करते थे, हाथ-पैर धोते थे। इसी मजहब के मानने वाले त्रयम्बकेश्वर मामले में हिंदुओं को सांप्रदायिक सद्भाव की बातें सुना रहे हैं।

मराठों के दम पर त्रयम्बकेश्वर को दोबारा हासिल किया गया

साल 1689 में औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज की हत्या कर दी। राजा की मृत्यु के बाद औरंगज़ेब ने हिंदुओं पर और अधिक अत्याचार शुरू कर दिए। उसने साल 1690 में भारत के अन्य स्थानों की तरह मराठा साम्राज्य के तहत आने वाले धार्मिक स्थलों को अपवित्र और नष्ट करने का आदेश दिया। ऐसा करके वह मराठा योद्धाओं का मनोबल कम करना चाहते था। उस समय युवा छत्रपति राजाराम महाराज के नेतृत्व में हिंदू साम्राज्य की रक्षा के लिए लड़ रहे थे।

जदुनाथ सरकार ने अपनी पुस्तक ‘औरंगजेब का इतिहास'(History of Aurangzeb) और काशीनाथ साने ने अपनी पुस्तक वार्षिक इतिब्रित्ता (वार्षिक समाचार पत्र) में कई स्थानों पर एलोरा, त्र्यंबकेश्वर, नरसिंहपुर, पंढरपुर, जेजुरी और यवत (भूलेश्वर) में औरंगजेब द्वारा मंदिरों को तोड़े जाने का उल्लेख किया है।

मुगल आक्रांता औरंगजेब ने त्रयम्बकेश्वर स्थित भगवान शिव के एक हजार साल पुराने मंदिर को तोड़ दिया था। इसके स्थान पर उसने एक मस्जिद बनवा दी थी। इतना ही नहीं, कुंभ नगरी नासिक का नाम बदलकर गुलशनाबाद रख दिया गया था।

मराठों का नया इतिहास – खंड II (New History of Marathas – Volume II) में जीएस सरदेसाई लिखते हैं, “नवंबर 1754 में त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को मराठाओं ने दोबारा बनवाया था। उन्होंने त्रयम्बकेश्वर मंदिर के स्थान पर बनवाए गए मस्जिद को गिरवा दिया था।

अन्य ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि मंदिर का निर्माण तीन वर्षों यानी 1751 से 1754 तक चला था। अर्थात छत्रपति राजाराम के शासनकाल में बालाजी बाजीराव भट उर्फ नानासाहेब पेशवा के नेतृत्व में मराठों ने कार सेवा की थी। मंदिर का पुनर्निर्माण बेसाल्ट पत्थर से कराया गया था। यह मंदिर आज भी इसी स्वरूप में है।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित तीन मुखी शिवलिंग तीन देवताओं- ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में है। यह नासिक शहर से 28 किलोमीटर दूर ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित है। मंदिर हेमाद पंथी शैली में बनाया गया है। इस शैली का नाम 13वीं शताब्दी के यादव वंश क्षत्रिय राजा के मंत्री हेमाद्रि पंडित के नाम पर रखा गया है। उन्होंने उस शैली को प्रतिष्ठित किया था।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर को प्राप्त करने के लिए असंख्य हिंदू सैनिकों ने लगातार चार पीढ़ियों तक अपने प्राणों की आहुति दी। अपनी भूमि की रक्षा करने, मंदिरों में देवताओं को पुनर्स्थापित करने और धर्म को पुनर्स्थापित करने में हमारे पूर्वजों को बहुत समय लगा।

हिंदुओं को विचार करना चाहिए कि क्या त्र्यंबकेश्वर जैसे उनके देवताओं को वास्तव में किसी इस्लामी पूजा स्थल से कुछ लोबान के धुएँ की आवश्यकता है? इस तथ्य को जानते हुए कि उसी मंदिर को अतीत में उसी आस्था के आक्रमणकारी ने हिंदुओं पर इस्लामिक आस्था थोपने और अत्याचार करने के लिए नष्ट कर दिया गया था।

त्रयम्बकेश्वर विवाद के बाद मुख्य बातें:

  1. त्रयम्बकेश्वर मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पहले से ही प्रतिबंध है। यह प्रतिबंध आज के समय की नहीं है।
  2. मंदिर को वर्ष 1690 में औरंगजेब ने ध्वस्त कर दिया था और इसकी जगह एक मस्जिद बनवाई गई थी। वर्ष 1754 में मराठों ने अपने पराक्रम से मस्जिद को तोड़कर मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।
  3. अब, स्थानीय मुस्लिमों का कहना है कि वे किसी गुलाम वली शाह दरगाह के जुलूस के दौरान भगवान को धूप दिखाने के लिए पहले सीढ़ी पर एक पल के लिए रुकते हैं। हम कैसे जान सकते हैं कि यह एक प्रयोग नहीं है? क्योंकि दूसरी तरफ का इतिहास मंदिर को ध्वस्त करने का है। इसलिए ‘मैं सीढ़ियों पर रूक गया, अंदर नहीं आया, चादर चढ़ाने का इरादा नहीं था, बस धूप ही तो दिखाया’ आदि तर्क विश्वसनीय नहीं हैं। स्थानीय दरगाह के खादिम सलीम सैय्यद ने यह भी कहा कि जब वो सीढ़ियों पर रूकते हैं तो ‘हर हर महादेव और ओम नमः शिवाय’ का जाप करते हैं। भले ही यह किसी हिंदू को खुश करने वाली बात हो, लेकिन क्या सलीम सैय्यद को उसका मजहब ऐसा करने की अनुमति देता है?
  4. यदि किसी गैर-हिंदू की त्रयम्बकेश्वर में आस्था है तो उसका हिंदू धर्म में स्वागत है।
  5. क्या किसी इस्लामी तीर्थ स्थल या मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करना, मंत्रों का पाठ करना, पूजा करना, यज्ञ, होम-हवन या कम से कम कुमकुम-हल्दी आदि हवा मे उड़ाना ठीक है? यदि नहीं तो सद्भाव बनाए रखने का भार केवल हिंदू समुदाय के कंधों पर ही क्यों?
  6. अंतिम प्रश्न हिंदुओं के लिए है। क्या ज्योतिर्लिंग जैसे विशेष पवित्र पूजा स्थल पर विधर्मियों के पूजा स्थल की धूप, दीप, फूल, कपड़े आदि देवता को चढ़ाना या दिखाना आवश्यक है? क्या इससे उस स्थल की ऊर्जा प्रभावित नहीं होगी? हमारे देवताओं में इनकी कितनी आस्था है, यह समझने के लिए ज्ञानवापी का उदाहरण ही काफी है। तथाकथित मस्जिद में 300 वर्षों तक वजूखाने में शिवलिंग का किस प्रकार सम्मान होता रहा, यह पूरी दुनिया देख चुकी है।

इन तर्कों को किसी भी तरह से कट्टरता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि यह गैर-हिंदुओं को अपना धर्म पालन करने के अधिकार से वंचित करने की बात नहीं करता है।