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‘बुर्का न पहनना वेश्यावृत्ति जैसा… इस्लाम अपनाओ तभी कबूल होगी नमाज’: हिन्दू पीड़ित लड़कियों की The Real Kerala Story

देश के विभिन्न हिस्सों में कई कट्टर इस्लामी संगठनों द्वारा जारी धर्मान्तरण की साजिश के शिकार कुछ पीड़ितों से ऑपइंडिया ने मंगलवार (16 मई 2023) को मुलाकात की। हमने अपनी पहली रिपोर्ट में केरल के कासरगोड की रहने वाले एक ब्राह्मण लड़की श्रुति से हुई बातचीत के अंश प्रकाशित किए थे। इस दौरान श्रुति ने बताया था कि साजिश से अनजान लोगों को इस्लाम कबूल करवाने के लिए एक बड़ा नेटवर्क एक्टिव है। ऑपइंडिया से अपने निजी अनुभव साझा करते हुए श्रुति ने बताया था कि उस दौरान वह खुद इतनी कट्टरपंथी हो चुकी थी कि अपनी बात का विरोध करने वाले या गैर इस्लामी व्यक्ति की हत्या करने में भी उसे जरा सा भी संकोच न होता।

इसी बातचीत में श्रुति ने आगे बताया कि उनके ब्रेनवाश के दौरान उन्हें न केवल अन्य धर्मों से नफरत बल्कि इस्लाम के लिए पूरी तरह समर्पित होना सिखाया गया। श्रुति के मुताबिक उन्हें यकीन दिलाया गया था कि उनका (मुस्लिमों का) पहनवा और जीवन शैली सबसे अच्छा है, जिससे बाकी सभी महिलाओं को अपना लेना चाहिए। इस ब्रेनवाश में ‘बुर्का न पहनना वेश्यावृत्ति’ जैसी बातें भी शामिल थीं। ये बातें मौलानाओं और श्रुति के मुस्लिम दोस्तों द्वारा कही गईं थीं।

श्रुति का कहना था कि उनसे मिलने वाले मौलानाओं या मुस्लिम दोस्त पूरी तरह इस्लाम में आने पर ही नमाज़ या रोजा कबूल होने की बात किया करते थे। श्रुति के अनुसार उन्हें बुर्का पहनने के लिए राजी करने के लिए कई कुतर्क दिए गए। इन कुतर्कों में गैर मर्दों द्वारा नंगी त्वचा देखना वेश्यावृत्ति जैसे बताना भी शामिल था। हालाँकि अब श्रुति इन बातों को उन मौलानाओं द्वारा की जाने वाली तार्किक हेरफेर मानती हैं। श्रुति ने यह भी बताया था कि ब्रेनवॉश के दौरान उनमें हीन भावना पैदा की जाती थी और माहौल ऐसा बना दिया जाता था कि उस बारे में कोई सोचे भी नहीं।

एक अन्य पीड़िता विशाली शेट्टी ने भी ऑपइंडिया से धर्मांतरण पर अपना अनुभव साझा किया। विशाली के मुताबिक उनका ब्रेनवाश उनके ऑफिस में हुआ था। यही उन्हें कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाया गया और इस्लाम की तरफ आकर्षित किया गया। विशाली ने केरल में अपने करियर की शुरुआत की और बाद में बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में काम करने गईं थीं। यहीं उनके साथियों ने विशाली के धर्म के बारे में सवाल करना शुरू किया। शुरुआत में यह बातचीत सामान्य ज्ञान और आम बातचीत की तरह होती थी।

विशाली का कहना है कि उनके पास अपने दोस्तों द्वारा किए जाने वाले सवालों के जवाब नहीं थे। विशाली में धर्म के प्रति खाली जगह देख कर उनके दोस्तों ने उसमें इस्लाम की जानकारी भरनी शुरू कर दी थी। उस समय विशाली को लगता था कि जो उनके साथी कह रहे हैं, वो सही है। कहीं न कहीं विशाली को यह लगने लगा था कि जिस धर्म का पालन वो बचपन से करती आ रहीं हैं, उसमें कमी जरूर है। हालाँकि विशाली इस हद तक ब्रेनवाश नहीं हुई थीं कि वो नमाज़ पढ़ें या बुर्का पहने। विशाली का कहना है कि कुछ समय बाद उन्हें लगने लगा था कि उन्हें फँसाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वो कट्टरपंथ की तमाम चालों को समझ गई और आख़िरकार फिर से सनातन धर्म में लौट आई।

पीड़िताओं का कहना है कि उनमें कट्टरपंथ भरने के दौरान इस सोच का बना दिया जाता है कि कोई भी अपनी ही आस्था की बुराई शुरू कर देता है। उन्होंने बताया कि सोच को धीमे जहर की तरह इस स्तर पर ला दिया जाता है कि उनके शिकार को बाकी लोगों से विरक्ति हो जाए। इस नेटवर्क की शिकार हुई श्रुति ने यह भी बताया कि धर्मान्तरण का ये काम पूरे देश में चल रहा है, जिसमें खासतौर पर दक्षिण भारत में इससे जुड़े लोग ज्यादा सक्रिय हैं।

धर्मान्तरण और लव जिहाद देश के लिए एक ज्वलंत समस्या की तरह है। श्रुति और विशाली ने जिस नेटवर्क को अपनी आपबीती में बताया है, उसे सुदीप्तो सेन की The Kerala Story में बहुत अच्छी तरह से दिखाया गया है। 5 मई 2023 को रिलीज हुई यह हिट फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तमाम रिकॉर्ड तोड़ रही है। फिल्म में केरल के उन चरमपंथियों को दिखाया गया है जो प्रेमजाल में फँसा कर राज्य की महिलाएँ को ISIS में भर्ती करने के लिए काम कर रहे हैं। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि कई लड़कियाँ ऐसी भी हैं, जिन्होंने सीरिया जा कर ISIS आतंकवादियों से निकाह कर लिया। इन पीड़िताओं में हिन्दू के साथ ईसाई महिलाएँ भी हैं।

द केरल स्टोरी सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है। इसका ट्रेलर जारी होने के बाद से ही वामपंथी, कॉन्ग्रेसी और इस्लामी समूह एकजुट होकर फिल्म को झूठी साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। पहले इन सभी ने फिल्म को सिनेमाघरों में चलने से रोकने की कोशिश की थी। हालाँकि इन विरोधों के बावजूद लोगों ने इस फिल्म को काफी पसंद किया है। इस फिल्म को देखने के बाद कई लोगों ने यह भी बताया कि उन्हें देश में चल रही इन तमाम बातों की जानकारी ही नहीं थी।

पहले भी ऑपइंडिया ने अनघा जयगोपाल और विशाली शेट्टी नाम की दो महिलाओं पर रिपोर्ट प्रकशित की थी। इन दोनों ने पहले धर्मान्तरण और बाद में सनातन धर्म में वापसी के अनुभव साझा किए। इसी अनुभव के आधार पर दोनों पीड़िताओं ने पुष्टि की है कि द केरल स्टोरी में वही दिखाया गया है जो दुनिया भर में सही रूपों में चल रहा है। ऑपइंडिया ने एक ऐसी ही हिन्दू महिला के बारे में लेख भी प्रकाशित किया था जिसने द केरल स्टोरी देखने के बाद कहा था कि फिल्म में दुनिया की सच्ची समस्या दिखाई गई है। तब महिला ने माना था कि वो अपने कॉलेज टाइम में भी इसी साजिश का शिकार हुईं थीं।

नोट: इंटरव्यू को अंग्रेजी में आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

त्रयम्बकेश्वर मंदिर मामले में मुस्लिमों के साथ उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना: भाजपा को कहा गोमूत्रधारी, मुस्लिम युवक धूप दिखाने वाले

नासिक के त्रयम्बकेश्वर मंदिर में मुस्लिम समाज के कुछ लोगों द्वारा चादर चढ़ाने की कोशिश के बाद भड़के विवाद पर शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधा है। भाजपा को गोमूत्रधारी बताते हुए ठाकरे ने कहा कि हिन्दू धर्म को असली खतरा धूप दिखाने मुस्लिम युवकों से नहीं, बल्कि गोमूत्रधारियों से है।

अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे लेख में महाराष्ट्र की पार्टी ने लिखा, “भारतीय जनता पार्टी (BJP) को ऐसा लगता है कि वही दुनिया में हिंदुत्व की एकमात्र ठेकेदार है। ऐसे स्वघोषित ठेकेदारों ने अपने अधीन उप-ठेकेदारों की नियुक्ति करके हिंदुत्व के नाम पर जो कर्कश हंगामा खड़ा किया है, उसे देखकर दो हिंदू हृदय सम्राट वीर तात्याराव सावरकर और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे भाजपा को श्राप दे रहे होंगे।”

अपने मुखपत्र में पार्टी ने लिखा, “भाजपा का हिंदुत्व गोमूत्रधारी है। त्रयम्बकेश्वर में हिंदुत्व के नाम पर दंगा भड़काकर उसका रिएक्शन पूरे महाराष्ट्र में फैलाने की योजना हिंदुत्व के उप-ठेकेदारों ने बनाई थी। इस तरह धूप दिखाने की प्रथा बहुत पुरानी है, लेकिन इस बार उप-ठेकेदारों ने इस घटना को भुनाया और ‘मंदिर में मुस्लिमों ने घुसने की कोशिश की, हिंदू धर्म संकट में है’ का हो-हल्ला मचाया।”

शिवसेना (UBT) ने आगे​ लिखा, “खुद को हिंदुत्ववादी आदि कहने वाले बचकाने संगठनों को मंदिर शुद्धीकरण का ठेका किसने दिया? जब तक हिंदुत्व के नाम पर कालाबाजारी की ये दुकानें बंद नहीं होंगी, तब तक हिंदुत्व का मजाक उड़ता रहेगा। हिंदू धर्म को असली खतरा गोमूत्र से शुद्धीकरण करने वालों से है। इन्हीं विचारधारा वाले लोगों के कारण देश गुलाम हुआ था।”

उद्धव ठाकरे की पार्टी ने अपने मुखपत्र में आगे लिखा, “गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने त्रयम्बकेश्वर में धूप-महाआरती मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल की घोषणा की है, लेकिन इस जाँच की कोई जरूरत नहीं थी। जो त्रयम्बकेश्वर में हुआ ही नहीं, उसकी जाँच क्यों?”

पूर्व हिंदुत्ववादी पार्टी ने ‘सामना’ में आगे कहा गया, “यह सब उल्टा तरीका है। इससे भी गंभीर बात यह है कि राज्य के गृहमंत्री उतावलेपन में ऐसा करें। जाँच करनी है तो गोमूत्र का बैरल लेकर त्रयम्बकेश्वर में हंगामा मचाने वाले हिंदुत्व के उप-ठेकेदारों की करनी चाहिए।

बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित भगवान शंकर के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक त्रयम्बकेश्वर मंदिर में मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों ने 13 मई 2023 की शाम को चादर चढ़ाने की कोशिश की थी। इसके बाद से त्रयम्बकेश्वर मंदिर चर्चा में है। घटना के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया गया।

वहीं, स्थानीय मुस्लिमों का कहना था कि यह दशकों पुरानी परंपरा है, जिसका वे पालन करते आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के अंदर जाकर उन्होंने चादर चढ़ाने की कोशिश नहीं की थी, बल्कि सिर्फ दूर से ही धूप और चादर दिखा रहे थे। इसके लिए नजदीक में स्थित दरगाह के खादिम ने कान पकड़कर माफी भी माँगी है।

दो सप्ताह पहले भी उद्धव ठाकरे ने गोमूत्र को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “क्या हमारे देश को गोमूत्र छिड़कने से आजादी मिली थी? क्या ऐसा हुआ था कि गोमूत्र छिड़का गया और हमें आजादी मिली? ऐसा नहीं था, स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया था। तब कहीं जाकर हमें आजादी मिली थी।”

ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर SC की रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी थी इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 मई 2023) को वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक यह रोक लगाई है। इसके पहले 12 मई 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की वैज्ञानिक जाँच की अनुमति दे दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अंजुमन इस्लामिया मस्जिद कमिटी (मस्जिद पक्ष) सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी।

अंजुमन इस्लामिया मस्जिद कमिटी की याचिका पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान कमिटी की तरफ से पेश हुए वकील हुजेफा अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट में मस्जिद कमिटी की याचिका पर दिसंबर 2022 में ही फैसला सुरक्षित रखा गया। इसके बाद 11 मई 2023 को एएसआई अदालत में रिपोर्ट सौंपती है और 12 मई को हाईकोर्ट कार्बन डेटिंग कराने के ऑर्डर दे देती है। हुजेफा का कहना है कि अदालत ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय नहीं दिया।

उत्तर प्रदेश राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वैज्ञानिक जाँच के दौरान शिवलिंग को नुकसान पहुँचने को लेकर चिंता व्यक्त की। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत के सामने कहा कि एएसआई ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि उनकी जाँच से शिवलिंग को नुकसान नहीं पहुँचेगा। इसी आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की इजाजत दी थी। उन्होंने कोर्ट से वह रिपोर्ट मँगवाने का अनुरोध भी किया।

एसजी तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि सरकार को यह भी पता लगाने की आवश्यकता है कि क्या कार्बन डेटिंग के अलावा अन्य वैज्ञानिक परीक्षण किए जा सकते हैं। इस पर सीजेआई चंद्रचुड़ ने कहा कि कोर्ट ASI से रिपोर्ट मँगवाने के खिलाफ नहीं है लेकिन सरकार को अन्य विकल्पों और मुद्दों पर विचार करने के लिए समय देना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि इन मामलों में सावधानी से चलने की जरूरत है।

मामले की सुनवाई कर रही तीन जजों की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दिया। इसके बाद मामले की सुनवाई 7 अगस्त तक के लिए टाल दी गई। 7 अगस्त तक कार्बन डेटिंग पर रोक जारी रहेगी। बता दें कि 12 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वे (ASI) को शिवलिंग को बिना किसी तरह की क्षति पहुँचाए कार्बन डेटिंग कराने का आदेश दिया था।

PM मोदी G-7 में हिस्सा लेने परमाणु हमले के शिकार जापान के हिरोशिमा पहुँचे, 1974 के बाद यहाँ जाने वाले पहले भारतीय पीएम, पाक-चीन को लेकर कही बड़ी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) प्रभावशाली देशों के समूह G-7 में हिस्सा लेने के लिए जापान के शहर हिरोशिमा पहुँच गए हैं। वहाँ उन्होंने भारतीय समुदाय के लोगों से बात की। पीएम मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो 1974 में भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण के बाद एटम बम से कभी तबाह हुए शहर हिरोशिमा गए हैं।

जी-7 की बैठक हिरोशिमा शहर में ही आयोजित किया जा रहा है। पीएम मोदी हिरोशिमा में होटेल शेरेटन पहुँचे। वहाँ पर प्रवासी भारतीयों ने पीएम का स्वागत किया। उनके हाथों में तिरंगा था और ‘मोदी… मोदी…’ के नारे लगाए। इस दौरान पीएम मोदी ने उन लोगों के साथ बातचीत की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 1974 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण के बाद पहले ऐसे पीएम हैं, जो जापान के हिरोशिमा गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू साल 1957 में हिरोशिमा का दौरा किया था।

बता दें कि साल 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया था। इसके बाद ये दोनों शहर पूरी तरह तबाह हो गए थे। विध्वंस का शिकार होने के बाद जापान परमाणु अस्त्र के प्रसार के खिलाफ काम करने लगा। इसी दौरान साल 1974 में इंदिरा गाँधी की सरकार ने पहला परमाणु परीक्षण किया था।

भारत द्वारा परमाणु बम परीक्षण का सीधा असर जापान के साथ रिश्तों पर पड़ा। पश्चिमी देशों के साथ-साथ पश्चिमी देश भारत के खिलाफ खड़े हो गए थे। साल 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने फिर से परीक्षण किया तो जापान ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। इसके कारण देश का कोई पीएम हिरोशिमा नहीं जा सका।

हिरोशिमा पहुँचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (19 मई 2023) को जापान की एक मीडिया हाउस निकेई एशिया को इंटरव्यू दिया। इसमें उन्होंने कहा कि भारत पड़ोसी देशों के साथ मधुर संबंध चाहता है। इसमें पड़ोसी देशों की जिम्मेदारी है कि वे आतंकवाद और दुश्मनी को भुलाकर मिलकर काम करें।

चीन को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और गरिमा की रक्षा करने के लिए कटिबद्ध और तैयार है। पीएम मोदी ने कहा, “चीन के साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति आवश्यक है। भारत-चीन संबंधों का भविष्य का विकास केवल आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों पर आधारित हो सकता है। इससे इस क्षेत्र को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को लाभ होगा।”

इस दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि अगर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को स्थायी बनने से दूर रखा जाता है तो उसकी विश्वसनीयता और फैसले लेने की क्षमता पर सवाल उठते रहेंगे।

2000 रुपए के नोट वाले ध्यान दें: 23 मई 2023 से 30 सितंबर 2023 तक बैंक में जाकर इन्हें बदल लें, सर्कुलेशन पर RBI की रोक

अब 2000 रुपए के नोट (₹2000 denomination banknote) मार्केट में सर्कुलेट नहीं किए जाएँगे। इसका मोटा-मोटी मतलब यह हुआ कि 2000 रुपए के नोट जो बैंक में जमा किए जाएँगे, उन्हें वापस मार्केट में नहीं उतारा जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI: Reserve Bank of India) ने 19 मई 2023 को यह निर्णय लिया।

किसी से पास अगर 2000 रुपए के नोट हैं, तो उन्हें घबराने की जरूरत हालाँकि नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि 2000 रुपए के नोट को लेकर आरबीआई ने जो निर्णय लिया है, उसके अनुसार यह वैध मुद्रा बनी रहेगी। तो आम नागरिक को करना क्या होगा अगर उनके पास 2000 रुपए के नोट हैं तो?

23 मई 2023 से 30 सितंबर 2023 – इन दोनों दिनों को याद कर लीजिए। अगर आपके पास 2000 रुपए के नोट हैं तो 23 मई 2023 से 30 सितंबर 2023 तक के बीच किसी भी बैंक में जाकर इन्हें जमा कीजिए, इसके बदले में आपको दूसरे नोट (2000 रुपए के अलावा) मिल जाएँगे।

2000 रुपए के नोट लेकर जब बैंक में बदलने जाएँ तो एक बात और ध्यान देने लायक है – 20000 रुपए से ज्यादा एक बार में नहीं बदल पाएँगे। RBI ने इस निर्णय को लेकर जो डॉक्यूमेंट जारी किया है, उसे आप यहाँ क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते हैं।

ज्ञानवापी में 128 फीट ऊँचा था आदि विशेश्वर का मंदिर, 8 फीट का शिखर और 8 मंडप थे: जानिए औरंगजेब के तोड़ने से पहले कैसा दिखता था

वाराणसी का जो ज्ञानवापी ढाँचा है, वह कभी आदि विशेश्वर का मंदिर था। क्या आप जानते हैं कि औरंगजेब के हुक्म पर तोड़ा गया यह मंदिर कैसा दिखता था? इसका जवाब तलाशते हुए एक भव्य मॉडल तैयार किया गया है। इसे देशभर में प्रदर्शित किया जाएगा ताकि लोग यह जान सके कि औरंगजेब द्वारा तोड़ दिया गया मंदिर कितना भव्य, दिव्य और विशाल था।

लकड़ी के इस मॉडल को तैयार करने में करीब दस महीने लगे हैं। ज्ञानवापी मुकदमें से जुड़े लोगों ने ग्रन्थों, पुस्तकों के अध्ययन और उपलब्ध नक्शों के आधार पर यह मॉडल तैयार करवाया है। पांडेयपुर के रहने वाले अमर अग्रवाल ने इसे बनाया है। ज्ञानवापी केस से जुड़े डॉ. राम प्रसाद सिंह के अनुसार वर्ष 1669 से पहले ज्ञानवापी में भगवान शिव का भव्य मंदिर हुआ करता था। धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रन्थों में इस बात का उल्लेख मिलता है। बनारस के इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले इतिहासकार एएस अल्टेकर व जेम्स प्रिंसेप ने भी विश्वेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है। प्रिंसेप ने तो मंदिर का नक्शा भी तैयार किया था।

अध्ययनों से पता चलता है कि भगवान आदि विश्वेश्वर के मंदिर की ऊँचाई 128 फीट और चौड़ाई 136 फीट थी। तीन मंजिला मंदिर में आठ फीट ऊँचा शिखर था। मंदिर में आठ मंडप थे। पश्चिम दिशा में स्थित श्रृंगार मंडप के पास प्रवेश द्वार था। उत्तर दिशा में नंदी विराजमान थे और दक्षिण दिशा में स्थित कुंड में मंदिर का जल प्रवाहित होता था।

श्रृंगार गौरी मामले से जुड़े सोहनलाल आर्य का कहना कि इतिहास की पुस्तकों में जानकारी मिलती है कि औरंगजेब ने चुनार से तोप मंदिर के पश्चिमी दीवार को उड़वा दिया था। मंदिर के गर्भगृह की ओर जाने वाले मार्ग को बड़े-बड़े पत्थरों से ढक दिया गया था। ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा है कि काफी अध्ययन और रिसर्च के बाद यह मंदिर का मॉडल तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह तैयार होने में कुछ वक्त और लगेगा। मॉडल पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद भव्य आयोजन के तहत इसे लोगों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि 18 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने एक फरमान जारी कर काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने का आदेश दिया था। यह फरमान एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में आज भी सुरक्षित है। उस समय के लेखक साकी मुस्तइद खाँ द्वारा लिखित ‘मासीदे आलमगिरी’ में इस ध्वंस का वर्णन है। 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब को मंदिर तोड़ने का कार्य पूरा होने की सूचना दी गई थी।

1777-80 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था। अहिल्याबाई होलकर ने इसी परिसर में विश्वनाथ मंदिर बनवाया जिस पर पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने सोने का छत्र बनवाया। ग्वालियर की महारानी बैजाबाई ने मंडप बनवाया और महाराजा नेपाल ने वहाँ विशाल नंदी प्रतिमा स्थापित करवाई। नंदी प्रतिमा का मुख उल्टा होने का रहस्य यही है कि पहले मंदिर जहाँ थी, वहाँ मस्जिद बना ली गई।

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रनेता प्रभात गुप्ता हत्याकांड में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा बरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 23 साल पहले प्रभात गुप्ता नाम की व्यक्ति की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ सहित चारों आरोपित बरी हो गए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2004 में ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी करने के दिए गए आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले के खिलाफ यूपी सराकर ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अताउ रहमान मसूदी और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश शुक्ला की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ यूपी सरकार की अपील को खारिज कर दिया। साल 2004 में यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पहुँचा था। तब से अब तक, यानी 14 सालों में इस मामले में हाईकोर्ट ने 3 बार अपना फैसला सुरक्षित रखा।

बता दें कि 8 जुलाई 2000 को लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता प्रभात गुप्ता की लखीमपुर खीरी के तिकोनिया गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पंचायत चुनाव को लेकर एक विवाद में प्रभात गुप्ता को गोली उनके घर के पास ही मारी गई थी। इस मामले में अजय मिश्रा टेनी के अलावा सुभाष मामा, शशि भूषण उर्फ पिंकी, राकेश उर्फ डालू को आरोपित बनाया गया था।

जब निचली अदालत ने टेनी को बरी कर दिया, उसके बाद मृतक के पिता संतोष गुप्ता ने सीआरपीसी की धारा 397/401 के तहत हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर दायर की थी। इस याचिका को फरवरी 2005 में हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था और आरोपित को बरी करने के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर आपराधिक अपील से जोड़ दिया गया था।

राज्य सरकार ने अपनी अपील में कहा था कि निचली अदालत ने चश्मदीद गवाह के बयानों को नजरअंदाज किया। दूसरी तरफ कोर्ट ने चश्मीदीद गवाह के बयान को निचली अदालत ने विश्वसनीय नहीं मानकर खारिज कर दिया था।

प्रभात गुप्ता के दिवंगत पिता संतोष गुप्ता ने इस संबंध में दर्ज कराई गई अपनी FIR में कहा था कि उनके बेटे प्रभात गुप्ता को पहली गोली टेनी ने मारी थी। प्रभात गुप्ता के भाई राजीव गुप्ता ने कहा था, “उन लोगों ने मेरे भाई को रोका। उसके बाद गोली चली। पहली गोली अजय मिश्रा ने चलाई, जो मेरे भाई की कनपटी में लगी। दूसरी गोली सुभाष मामा ने चलाई, जो सीने में लगी। इसके बाद मेरे भाई सड़क पर गिर गए और उनकी मौके पर मौत हो गई।”

केस दर्ज होने के बाद टेनी ने हाईकोर्ट से इस मामले में गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था। हालाँकि, जब मामले में चार्जशीट दाखिल की गई तो 5 जनवरी 2001 को उनके अरेस्ट स्टे को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से अरेस्ट स्टे खारिज होने के बाद भी लखीमपुर पुलिस ने अजय मिश्रा को गिरफ्तार नहीं किया। 

जब पीड़ित परिवार इसको लेकर फिर से हाईकोर्ट पहुँचे तो 10 मई 2001 को हाईकोर्ट में जस्टिस नसीमुद्दीन की बेंच ने अजय मिश्र को अरेस्ट करने का ऑर्डर दिया। इसके डेढ़ महीने बाद टेनी ने कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया। फिर उन्हें बीमार बताकर अस्पताल भेज दिया गया और फिर अगले दिन सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई। साल 2004 में उन्हें रिहा कर दिया गया।

राजीव गुप्ता ने कहा था, “मेरे भाई की हत्या के मुख्य अभियुक्त होने के बावजूद टेनी एक भी दिन जेल नहीं गए। पूरा सिस्टम उनके हाथ में था।” दरअसल, टेनी उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के नेपाल सीमा से बिलकुल सटे बनवीरपुर गाँव के रहने वाले हैं। इस गाँव से सीधी सड़क तिकुनिया जाती है, जहाँ प्रभात गुप्ता की हत्या की गई थी। इसी तिकुनिया में साल 2021 में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर भी ट्रैक्टर चढ़ाकर उनकी हत्या के मामले में भी नाम सामने आया था।

उनके इलाके में अजय मिश्रा टेनी का इतना खौफ है कि कोई भी उनके खिलाफ खुलकर बोलने को तैयार नहीं होता। राजनीति में आने से पहले अजय मिश्रा टेनी की पहचान एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी की थी। उनके खिलाफ तस्करी से लेकर हत्या तक के तमाम मामले दर्ज हुए थे। हालाँकि, हाईकोर्ट के आदेश पर साल 1996 में टेनी की हिस्ट्रीशीट बंद कर दी गई थी।

भास्कर के अनुसार, प्रभात गुप्ता हत्याकांड के जाँच अधिकारी रहे आरपी तिवारी ने अभियोजन रोजनामचे के आखिरी पन्ने पर अजय मिश्र को लिखा था, “अजय मिश्र उर्फ टेनी भाजपा का महामंत्री है तथा क्षेत्रीय विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता मंत्री श्री राम कुमार वर्मा का खास होने के कारण इसके आतंक एवं भय से क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति सही एवं सत्य बात कहने की हिम्मत नहीं कर रहा है। यह नेपाल क्षेत्र पास होने के कारण तस्करी के कार्यों में भी लिप्त है, जिससे इसकी आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी है।”

ये बिहार है! एक सरकारी स्कूल गुंडों के डर से हो गया बंद, 200 छात्रों की पढ़ाई प्रभावित: रंगदारी नहीं मिलने पर नरसंहार की दे रहे थे धमकी

बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति एक सरकारी स्कूल पर लटके ताले से समझा जा सकता है। भागलपुर का यह सरकारी स्कूल गुंडों के भय से बंद कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आपराधिक तत्व स्कूल चलने देने के एवज में रंगदारी माँग रहे थे। इसके बाद शिक्षकों ने स्कूल ही बंद कर दिया।

इसके कारण करीब 200 छात्रों की पढ़ाई कई दिनों से बंद है। पीड़ितों ने पुलिस पर भी कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक मामला भागलपुर के नाथनगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ वार्ड नंबर 8 में मुनीराम खेतान नाम का सरकारी स्कूल है। प्रिंसिपल पंकज मूसेस हैं। प्रिंसिपल ने इलाके के विक्रांत कुमार उर्फ़ पूरन शाह को बाहुबली बताते हुए स्कूल चलाने में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि विक्रांत और उसके गुर्गे स्कूल खोलने के लिए रंगदारी माँगते हैं। रंगदारी नहीं देने पर शिक्षकों को स्कूल से बाहर फेंक देने की धमकी दी। कथित तौर स्कूल खुलने पर नरसंहार की भी धमकी दी।

इस स्कूल में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। प्रिंसिपल का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या से अपने सीनियर अधिकारियों और पुलिस को अवगत करवाया। लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद प्रिंसिपल और शिक्षकों ने स्कूल के गेट पर ताला लगा दिया। स्थानीय लोगों ने भी स्कूल के स्टाफ की बातों से सहमति जताते हुए असामजिक तत्वों पर कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया है।

इस मामले में भागलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी संजय कुमार ने स्कूल न आने वाले टीचरों और प्रिंसिपल पर नाराजगी जताई है। बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित रखने की बात कहते हुए DEO संजय कुमार ने प्रिंसिपल पंकज मूसेस को सस्पेंड कर दिया है। इसी के साथ उन्होंने अन्य टीचरों को भी काम पर लौटने की हिदायत देते हुए कहा कि ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। DEO ने जल्द ही स्कूल में पढ़ाई शुरू होने का दावा किया है। थाना प्रभारी नाथनगर महताब आलम ने मीडिया से शिक्षकों की तरफ से शिकायत मिलने की बात स्वीकारी है। उन्होंने कहा कि दी गई शिकायत पर जाँच करवाई जा रही है।

अडानी-हिंडनबर्ग मामला: सु्प्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ पैनल ने सौंपी अपनी रिपोर्ट, कहा- पहली नजर में नियमों के उल्लंघन के सबूत नहीं

अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के खिलाफ जाँच के लिए सर्वोच्च न्यायालय (SC) द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल ने कहा है कि कीमतों में हेरफेर को लेकर पहली नजर में किसी तरह की रेगुलेटरी कमी नहीं दिखी है। कोर्ट की समिति ने कहा कि इस स्तर पर नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

अदालत द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने अडानी समूह की संस्थाओं की अपनी जाँच में कुछ नहीं मिला है। विशेषज्ञ पैनल ने कहा कि अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट से पहले अडानी समूह के शेयरों में शॉर्ट पोजीशन के सबूत मिले हैं। इससे यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं कि कीमतों में हेराफेरी के संबंध में नियामकीय विफलता हुई है या नहीं।

पैनल की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि अनुभवजन्य आँकड़ों से पता चलता है कि अडानी के सूचीबद्ध शेयरों में खुदरा निवेशकों का निवेश 24 जनवरी 2023 के बाद बढ़ा है। यह वह दिन था जब हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर अपनी रिपोर्ट जारी की थी।

पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि विधायी पक्ष की नियामक विफलता के निष्कर्ष पर पहुँचना मुश्किल है, लेकिन एक प्रभावी प्रवर्तन नीति की आवश्यकता है। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट की सलाह है कि प्रवर्तन नीति SEBI द्वारा अपनाई गई विधायी नीति के अनुरूप होनी चाहिए।

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति को एक ही पार्टियों के बीच कई बार कृत्रिम ट्रेडिंग का कोई पैटर्न नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार, “एक पैच में जहाँ कीमत बढ़ी, वहाँ जाँच में पता चला कि शुद्ध विक्रेता विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) थे। एक निवेश इकाई ने एक पैच में जितनी खरीदारी की थी, उससे कहीं अधिक अन्य प्रतिभूतियों को खरीदा था। इसलिए, इसका कोई सुसंगत पैटर्न नहीं था।”

दूसरी ओर, यह भी कहा गया कि SEBI ने पाया है कि कुछ संस्थाओं ने रिपोर्ट के प्रकाशन से पहले शॉर्ट पोजिशन बना ली थी और कीमत गिरने के बाद उन्हें लाभ हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है, “सभी पक्ष अभी भी जाँच के दायरे में हैं और इसलिए समिति गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं करती है।”

रिपोर्ट में अडानी समूह द्वारा खुदरा निवेशकों को राहत देने के लिए उठाए गए जरूरी कदम की भी सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टियों ने शपथ पर पुष्टि की है कि एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) निवेश अदानी समूह द्वारा वित्त पोषित नहीं हैं। सेबी ने यह साबित नहीं किया है कि उसके संदेह को एक ठोस मामले में तब्दील किया जा सकता है।

इसके अलावा, अडानी-हिंडनबर्ग मामले में रिपोर्ट ने बताया कि कुछ 13 विदेशी संस्थाओं के स्वामित्व की श्रृंखला स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा, एफपीआई में आर्थिक हित के अंतिम मालिक का पता नहीं चल सका है। इसीलिए, इस मामले में सेबी के संदेह को खत्म नहीं किया जा सकता है।

रिपोर्ट SEBI को यह तय करने के लिए छोड़ती है कि क्या 13 संस्थाओं, जिनकी जाँच लंबित है उसमें क्या कोई और मामला बनाया जाना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेबी ने प्रथम दृष्टया कोई आरोप नहीं लगाया है।

इस बीच, शीर्ष अदालत ने बुधवार (17 मई 2023) को अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जाँच पूरी करने के लिए SEBI को तीन महीने का विस्तार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 14 अगस्त तक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी परदीवाला की पीठ ने यह भी आदेश दिया कि जस्टिस एएम सप्रे समिति की रिपोर्ट पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे इस मामले में अदालत की सहायता कर सकें। पूरी रिपोर्ट को यहाँ पढ़ा जा सकता है।

UP के ओरैया में घर की खुदाई में मुगलों का खजाना मिलने का दावा, सोने की ईंट लेकर भाग गया मजदूर: जानिए क्या है मामला

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में एक घर की खुदाई के दौरान मुगल काल खजाना मिलने का दावा किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि खजाने में धातु की ईंट और सिक्के हैं। यह भी दावा है कि खुदाई कर रहा मजदूर सोने की ईंट लेकर भाग गया।

जिस मकान की खुदाई की जा रही थी, उसके पड़ोस में रहने वाली विनीत गुप्ता के दावों के बाद गुरुवार (18 मई 2023) को यह मामला मीडिया में आया। हालाँकि मकान के मालिक महादेव विश्नोई का कहना है कि 2 और 5 पैसे के सिक्के मिले हैं। एक ईंट मिलने की बात भी उन्होंने स्वीकार की है। पुलिस ने मिले सामान को अपनी कस्टडी में ले लिया है और आगे की कार्रवाई कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला औरैया जिले के कोतवाली नगर क्षेत्र का है। यहाँ के मुमटी मोहाल इलाके में एक घर में निर्माण कार्य चल रहा था। इस दौरान पुराने निर्माण को गिराते समय मजदूरों को दबा खजाना मिला। इस खजाने में धातु की ईंटें और कुछ सिक्के बताए जा रहे हैं। कुछ ही देर में शोर-शराबा शुरू हो गया। आसपास के लोगों को जमा होता देख कर एक मजदूर मौके से एक ईंट ले कर भाग गया। बताया जा रहा है कि वो ईंट सोने की थी।

पड़ोसी ने बताया चाँदी का मटका

विनीत गुप्ता ने बताया है यह मकान पहले किसी तिवारी जी का था। विश्नोई ने इसे खरीदा है। लेकिन लिखा-पढ़ी नहीं हुई है। विनीत के अनुसार नए मालिक मकान ही खुदाई करवा रहे हैं। 7 मई 2023 को इस दौरान चाँदी का एक मटका और सोने की एक ईंट मिली थी। उनका कहना है कि CCTV फुटेज से उनके दावों की पुष्टि हो सकती है। उसमें नए मकान मालिक का बेटा ईंट ले जाता दिखाई पड़ेगा।

विनीत गुप्ता का कहना है कि उन्होंने इसकी सूचना प्रशासन को दी है। इन तमाम दावों पर जिला औरैया की पुलिस का कहना है कि SHO कोतवाली सिटी को जरूरी कार्रवाई के लिए आदेश दे दिए गए है।

मकान मालिक ने बताया अफवाह

ऑपइंडिया को मकान मालिक महादेव विश्नोई ने बताया ये सच है कि वे नया निर्माण करवा रहे हैं। लेकिन मुगलकालीन खजाना मिलने की बात अफवाह है। उनके मुताबिक खुदाई में 2 और 5 पैसों के कुल 215 सिक्के मिले हैं। इसके अलावा एक ईंट भी मिली है। उन्होंने खुदाई से मिला सारा सामान पुलिस स्टेशन में जमा करवा दिया है।

खुदाई में मिली ईंट

मकान मालिक विश्नोई ने किसी भी तरह के सोने या चाँदी आदि के मिलने के दावों का खंडन किया है। जो ईंट मुगलकाल की बताई जा रही है, ऑपइंडिया के पास उसकी तस्वीर मौजूद है। ईंट पर अंग्रेजी में किसी ने खरोंच कर 63 भी लिख रखा है। ईंट किस धातु की है ये अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने इस मामले में संबंधित विभाग को सूचित कर दिया है।