‘द केरल स्टोरी’ की अपार सफलता के बाद खबर आई है कि इस फिल्म की टीम ने एक संस्था को 51 लाख रुपए दान में दिए हैं। संस्था का नाम आर्ष विद्या समाजम है। ये संस्था लव जिहाद पीड़िताओं को वापस से हिंदू धर्म में लाने और उनके पुनर्वास के लिए काम करती है।
इस संबंध में फिल्म की अभिनेत्री ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “हमारी तरफ से छोटा सा योगदान, द केरल स्टोरी ने आर्ष विद्या समाजम को 51 लाख रुपए डोनेट किए। इसकी पहल विंजना भारतीय एड्यूकेशनल एंड चैरिटेबल सोसायटी फॉर कंस्ट्रक्शन ऑफ आश्रम द्वारा की गई है।”
अदा शर्मा ने बताया कि ये संस्था हमारी बेटियों के पुनर्वास के लिए लगातार और निस्वार्थ रूप से काम कर रही है, जिन्हें कट्टरता के जरिए प्यार के नाम पर परिवर्तित किया गया था।
बता दें कि ” ‘द केरल स्टोरी’ की टीम ने जिस संस्था को उनका काम देख 51 लाख रुपए दान दिए, उसका उद्देश्य धर्म का प्रचार-प्रसार है। पिछले दिनों एक लव जिहाद पीड़िता श्रुति ने इसका जिक्र करते हुए बताया था कि कैसे इस संस्था ने उन्हें बचाया और साथ में उनके घरवालों को यकीन दिलाया कि उन्होंने घरवापसी कर ली है।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः!
A small step from our side, #TheKeralaStory team donates 51 Lakh to Aarsha Vidya Samajam an initiative of Vinjana Bharathi Educational & Charitable Society for construction of Ashram ??
श्रुति ने बताया कि जब उन्होंने इस्लाम अपनाया, तब उनके परिवार वालों के लिए ये हैरानी भरा फैसला था और वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थी, उनकी स्थिति दयनीय हो गई थी। हालाँकि, जब उन्होंने घर-वापसी की, तो उनके पिता को फिर भी भरोसा नहीं हो रहा था कि उन्होंने इस्लाम को मानना छोड़ा है या नहीं। मगर तब संस्था के योगाचार्य मनोज ने उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को ये भरोसा दिलाया कि श्रुति हिन्दू धर्म में वापस आ चुकी हैं।
गुरु ने परिवार को बताया कि श्रुति को उसके किए का पछतावा है और वो अपनी तरह की अन्य पीड़ित लड़कियों की भी मदद कर रही है, उन्हें अँधेरे से निकालने में, उन्हें हिंदू धर्म में वापस लाने में। योगाचार्य मनोज ने परिवार को आश्वस्त किया कि वो अब चिंता न करें, वो सिर उठा कर चलें क्योंकि उनकी बेटी अच्छा कार्य कर रही है।
बता दें कि आर्ष संस्था गुरु परंपरा पर विश्वास रखती है। ‘आर्ष विद्या समाजम’ का मानना है कि दुनिया में आजकल जितनी भी बुराइयाँ फ़ैल रही हैं, उसका मुख्य कारण है युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता का अभाव। संस्था का लक्ष्य है कि दुनिया में एक व्यक्ति भी ऐसा न हो, जिसने ‘सनातन धर्म’ का नाम न सुना हो।
महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के चिखली में बुधवार को एक विशेष समुदाय के लोगों के एक समूह ने जुलूस के दौरान डीजे सिस्टम पर बजने वाले एक गाने पर आपत्ति जताते हुए एक हिंदू विवाह जुलूस पर पथराव किया। डीजे पर बज रहे भगवान राम के भजन को सुनने के बाद जुलूस पर पथराव शुरू हो गया। पथराव करने से पहले उपद्रवियों द्वारा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जाने की बात भी कही जा रही है।
दंगाइयों की भीड़ ने सबसे पहले डीजे पर बज रही संगीत पर आपत्ति जताई। उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों से भगवान राम के गीत बंद करने के लिए कहा और उस पर नाचने से रोका। यह घटना उस समय की बताई जा रही है जब बारात बुलढाणा जिले के चिखली शहर के सैलानी नगर इलाके से गुजर रही थी। इसके बाद दोनों समुदायों के लोग आपस में भिड़ गए।
इस हमले के कारण जुलूस में शामिल कुल 13 लोग घायल हो गए। पथराव शुरू होते ही इसके बारे में पुलिस को सूचना दी गई। आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुँची और लोगों को हटाने की कोशिश करने लगी। इस दौरान पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस बीच 13 घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए करीब 30 लोगों के खिलाफ दंगा करने का मामला दर्ज किया है। पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि चिखली से भाजपा विधायक श्वेता महाले, शिंदे गुट के सदस्य संजय गायकवाड़ और बुलढाणा के सांसद प्रतापराव जाधव ने हिंसास्थल का दौरा किया और नागरिकों से शांति की अपील की।
विधायक संजय गायकवाड़ (शिंदे गुट) ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि जुलूस पर पथराव करने से पहले समुदाय विशेष के लोगों द्वारा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए थे। उन्होंने कहा, “डीजे में तोड़फोड़ की गई और हिंदू माली समुदाय के लोगों पर पथराव किया गया। पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने की घटना अगर सच है तो हम इन लोगों को नहीं बख्शेंगे।”
गुजरात में पिछले दिनों एक ऐसे गिरोह का खुलास हुआ था जो ‘तंत्र’ के नाम पर ठगी करता था। इस गिरोह को चला रहा था ‘तांत्रिक’ मूसा और उसका बेटा अल्ताफ। अब राजस्थान में ऐसी ही एक ‘महिला तांत्रिक’ पकड़ी गई है। शीबा बानो नाम की इस महिला ने राजस्थान के जयपुर के दो प्रॉपर्टी डीलर को 600 करोड़ रुपयों का लालच देकर उन्हें अपने ही परिचित प्रॉपर्टी डीलर के घर लूट के लिए भेज दिया।
बानो के झाँसे में आकर दोनों प्रॉपर्टी डीलर ने दोस्त के घर ने केवल डाका डालने के लिए प्लान बनाया, बल्कि इसके लिए लूटेरों के गिरोह की भी मदद ली। गैंग के लोग करणी विहार इलाके के धाबास में 12 मई 2023 की रात करीब 2 बजे प्रॉपर्टी डीलर यादराम मौर्य के घर में घुस गए। यादराम मौर्य और उसके परिवार वालों को बंधक बनाया और पैसे की तलाश करने लगे। शीबा बानो के कहे अनुसार, उन्होंने दो कमरों की फर्श में लगी टाइल्स भी तोड़ दी। लेकिन उन्हें वहाँ भी पैसे नहीं मिले। इसके बाद वे घर में पड़े कीमती गहने और कैश लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने बुधवार (17 मई 2023) को शीबा बानो सहित सभी 15 आरोपितों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया।
पीड़ित कारोबारी लूट की घटना के बाद पुलिस से शिकायत की थी। कुछ साथी प्रॉपर्टी डीलर से जमीनी विवाद का जिक्र करते हुए उन पर शक जताया था। इसके बाद पुलिस ने रामेश्वर राठी और रामदयाल मीणा को गिरफ्तार किया। उन्होंने पूछताछ में अपने अन्य साथियों का नाम बताया। इसके बाद पुलिस ने महिला तांत्रिक शीबा बानो, शहजाद, नदीम सैफी, रवि, जितेंद्र कुमार, रमेश भोजवानी, पूर्णमल सैनी, रोहिताश जाट, प्रकाश सैनी, सुनील सेन, बाबूलाल, किशोर सिंह व बादल कौशिक को गिरफ्तार किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लुटेरे पिकअप लेकर डकैती करने प्रॉपर्टी डीलर के घर पहुँचे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से 9 जयपुर के, दो टोंक, दो अजमेर, एक सीकर और एक बागपत (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है। डीसीपी वेस्ट वंदिता राणा ने बताया कि पुलिस ने महिला तांत्रिक समेत सभी 15 आरोपितों को बुधवार को गिरफ्तार किया था।
डीसीपी के अनुसार, यादराम मौर्य का अपने परिचित रामदयाल और रामेश्वर राठी से जमीन को लेकर विवाद था। दोनों ने उससे बदला लेने के लिए कथित तांत्रिक शीबा बानो से सलाह ली। शीबा ने उन्हें यादराम के घर में करीब 600 करोड़ रुपए होने की जानकारी दी। इसके बाद रामदयाल और रामेश्वर राठी ने लुटेरों के साथ मिलकर यादराम के घर में डकैती की साजिश रची।
गुजरात में तांत्रिक बन मूसा करता था ठगी
गुजरात के गिर सोमनाथ में भी बीते दिनों तांत्रिक बनकर लोगों को लाखों रुपए का चूना लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया था। गुजरात पुलिस ने अल्ताफ और मूसा समेत 10 ठगों को गिरफ्तार किया था। बहरूपिए अल्ताफ और मूसा तंत्र विद्या से पैसा बढ़ाने का लालच देकर ठगी करते थे। ठगों के पास से काफी मात्रा में सोना, नकदी और कई सामान बरामद हुए थे।
कश्मीर की घाटी में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों की कहानी अक्सर दुनिया के सामने लेकर आने वाली कश्मीरी पत्रकार आरती टिकू सिंह के साथ कश्मीर में हैरान करने वाले घटना घटी है। उन्होंने अपने ट्विटर पर साझा करते हुए बताया कि वो 33 साल बाद अपने माता-पिता को लेकर कश्मीर गईं, ये सोचकर कि शायद पुराने जख्म के दर्द कम होंगे। लेकिन यहाँ उनके साथ ऐसा कुछ हुआ जिसके बाद वो और असुरक्षित महसूस करने लगीं।
आरती टिकू ने बताया कि कश्मीर में जाने के बाद वह जब अपने पेट को घुमाने बाहर निकलीं तो वहाँ एक ट्रेन्ड खूँखार पालतू कुत्ता आया और उसने उनके पेट पर हमला कर दिया। आरती बताती हैं कि उनके सामने उनके पेट को जबड़ों में दबाकर वो कुत्ता भागा और उसे बुरी तरह मारने का प्रयास किया। हालाँकि पत्रकार और उनके माता-पिता ने भागकर किसी तरह अपने Pet को उस कुत्ते से छुड़ाया।
पत्रकार कहती हैं कि इस घटना के बाद उन्हें कश्मीर में कोई सुरक्षा महसूस नहीं हो रही। जब उनके Pet पर हमला किया गया तब कोई उसे बचाने नहीं आया। वो खुद उसको लहूलुहान हालत में डॉक्टर के पास लेकर गईं। सिर्फ उनकी बहन उनके साथ थी। सरकारी वेटनेरी डॉक्टर ने 7 घंटे उसको ऑब्जर्वेशन में रखा । यहाँ उसकी 2 सर्जरी हुई और शरीर पर 30 टाँके आए।
After 33 years, I finally brought my parents back to our homeland Kashmir, thinking that it will heal all of us emotionally a bit. I also brought my pet along with me for the first time to Kashmir. But what happened today with us has shattered my sense of security completely.
आरती कहती हैं कि इस घटना के बाद वो असुरक्षित महसूस कर रही है क्योंकि कुछ ही दिन पहली की बात है जब एक संदिग्ध ने दिल्ली में अचानक आकर उनके उनके Pet की तस्वीर लेने की गुजारिश की थी। उन्हें ये बहुत अजीब लगा था। वो सोच ही रही थीं कि वो आदमी कुछ तो गलत था और अब यह घटना हो गई।
श्रीनगर में हुई घटना ने आरती टिकू को झकझोर दिया है। उनका कहना है कि ऐसा तब हुआ जब वो 33 साल में पहली बार अपने माता-पिता को लेकर गृहराज्य गईं। उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह को टैग करते हुए बताया कि वो काफी असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
उन्होंने ये भी जानकारी दी कि ये कोई पहली घटना नहीं है। उनके भाई और उनके साथ पहले भी ऐसा हुआ है। बता दें कि साल 2021 में आरती टिकू सिंह और उनके भाई साहिल टिकू सिंह को ट्विटर पर खुलेआम धमकियाँ आई थीं। उन्होंने इस संबंध में गृह मंत्रालय से सुरक्षा की माँग भी की थी। टिकू के भाई के ‘एजेंट’ और न जाने क्या-क्या कहा गया था। इसके बाद जब आरती ने इन कट्टरपंथियों के विरुद्ध आवाज उठाई तो ट्विटर ने उन पर कार्रवाई की। उनके उन ट्विट्स को हटा दिया गया जिसमें उन्होंने इस संबंध में बात की थी।
मृतक माफिया अतीक अहमद और जेल में बंद मुख्तार अंसारी ने वक्फ बोर्ड की जमीन पर भी कब्जा कर रखा है। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड (UPSCWB) ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उनसे इनके कब्जे वाली जमीनों को मुक्त कराने के लिए हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
लाइव हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड ने यूपी सरकार को पत्र लिखकर दोनों माफियाओं और उनके परिवारों के कब्जे वाली जमीन और संपत्तियों के बड़े हिस्से को मुक्त करने का आग्रह किया है। पत्र में कहा है कि गैंगस्टर अतीक अहमद के गुर्गों ने प्रयागराज के इमामबाड़ा गुलाम हैदर के छोटी कर्बला की कई बीघा जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र में अलल औलाद वक्फ के मुतवल्ली ने शिकायत की है कि वक्फ की 10-12 बीघा जमीन में से कई बीघे पर अवैध रूप से कब्जा है।
मुतवल्ली के हवाले से यह भी कहा गया है कि माफिया मुख्तार अंसारी की बीवी अफशां अंसारी उस फर्म की निदेशक हैं, जिसने अवैध रजिस्ट्री के जरिए जमीनों पर प्लॉटिंग कराई थी। शिया वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रयागराज में छोटा कर्बला की जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के लिए स्थानीय प्रशासन को कई बार पत्र लिखे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
दिलचस्प बात यह है कि वक्फ बोर्ड से संबंधित जमीनों को हड़पने में अतीक अहमद और उसके गिरोह की भूमिका उसकी मौत के बाद सामने आई है। यह मामला तब सामने आया जब उत्तर प्रदेश पुलिस अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों की जाँच कर रही है। जाँच में सामने आया है कि मारे गए माफियाओ-गैंगस्टर ने अपने व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए वक्फ की संपत्तियों को हड़प लिया।
बता दें कि यूपी पुलिस ने इससे पहले 2016 में प्रयागराज में जीरो रोड पर चक इलाके में वक्फ की संपत्ति हड़पने के आरोप में अतीक के एक करीबी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। उसके रिश्तेदार ने वक्फ की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। वर्तमान में उस जमीन का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन मैटेरियल को बेचने के लिए किया जा रहा है।
पिछले दिनों शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अली जैदी ने वक्फ संपत्ति पर माफियाओं के कब्जे का खुलासा करते हुए कहा था, “वक्फ संपत्ति पर कब्जा करना माफियाओं के लिए सबसे आसान है। अतीक अहमद ने वक्फ संपत्ति पर एक कॉम्प्लेक्स बनाया था। हमारे वक्फ की एक संपत्ति पर फर्जी दस्तावेज बनाकर अवैध रूप से कंपनी रजिस्टर कराकर प्लॉट किया गया था, जिसमें मुख्तार अंसारी की बीवी अफशा अंसारी निदेशक थी। यह जमीन करोड़ों रुपए की है। हमने प्रशासन को इसके बारे में लिखा है और इन मुद्दों को हल करने के लिए सरकार से मदद माँगी है।”
माफियाओं की जब्त की गई जमीन पर गरीबों के लिए घर
हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में माफियाओं से जब्त की गई जमीन पर गरीबों के लिए घर बना रही है। इसकी शुरुआत प्रयागराज में मृतक माफिया अतीक अहमद के कब्जे से खाली की गई जमीन से की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 मई 2023) को लव जिहाद और धर्मांतरण के बाद लड़कियों को आतंकी गतिविधियों में धकेलने पर बनी फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) पर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर रोक लगा दी। इतना ही नहीं, कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस बयान को भी सुना, जिसमें कहा गया कि तमिलनाडु में फिल्म के प्रदर्शन पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई प्रतिबंध नहीं है।
तमिलनाडु सरकार के एडवोकेट जनरल के बयान को रिकॉर्ड करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को आदेश दिया कि जिन सिनेमाघरों में यह फिल्म दिखाई जा रही है, उसे और उसमें फिल्म देखने आने वाले लोगों को वह सुरक्षा मुहैया कराए।
Supreme Court takes on record the assurance of Tamil Nadu that there is no direct or indirect ban on the film 'The Kerala Story'. Supreme Court directs adequate security should be provided in every cinema hall & requisite arrangements shall be made to ensure the safety of… https://t.co/udcR1yNOjm
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी कहा कि फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ में उचित डिस्क्लेमर होना चाहिए। फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि 20 मई की शाम 5 बजे तक डिस्क्लेमर जोड़ा जाएगा।
हरीश साल्वे ने कहा कि फिल्म में डिस्क्लेमर – “इस बात को साबित करने के लिए कोई प्रामाणिक डेटा उपलब्ध नहीं है कि धर्मांतरण के 32,000 या कोई अन्य आँकड़ा हैं” और “फिल्म इस मुद्दे के काल्पनिक संस्करण का प्रतिनिधित्व करती है” – जोड़ा जाएगा।
Senior Adv Harish Salve, appearing for film producers, says that disclaimer -“there is no authentic data to back up the suggestion that the figure of conversions is 32,000 or any other established figure” & “the film represents the fictionalised version” of the issue- shall be…
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जीबी परदीवाला की बेंच ने इस मामले को जुलाई 2023 में होने वाली अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया है। अंतरिम आदेश में पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार का निर्णय प्रथम दृष्टया व्यापकता से ग्रस्त है।
इससे पहले बुधवार (17 मई 2023) को सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की ओर पेश अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में तर्क दिया कि केरल की इस कहानी में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है और यह फिल्म हेरफेर किए गए तथ्यों पर आधारित है। इससे राज्य में सांप्रदायिक वैमनस्य और कानून व्यवस्था से संबंधित स्थिति खड़ी हो सकती है।
इस फिल्म के निर्माता ने राज्य में इस फिल्म को ना दिखाने के सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी। अपनी याचिका में निर्माता ने पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1954 की धारा 6 (1) की संवैधानिकता को भी चुनौती दी है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।
इस पर राज्य सरकार ने कहा कि फिल्म पर प्रतिबंध खुफिया सूचनाओं पर आधारित एक नीतिगत निर्णय है। इससे याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता के वित्तीय नुकसान को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं बताया जा सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल सिनेमा (विनियमन) अधिनियम के रूप में संवैधानिकता की एक धारणा है, जो उन फिल्म प्रदर्शनियों के लिए एक अपवाद बनाती है, जो शांति भंग कर सकती है।
वहीं, तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को दिए गए अपने हलफनामे में कहा था कि राज्य में ‘द केरल स्टोरी’ की स्क्रीनिंग पर कोई बैन नहीं लगाया गया है। एमके स्टालिन सरकार ने निर्माताओं के दावों का खंडन करते हुए कहा कि ये दलील गलत है कि तमिलनाडु में फिल्म दिखाने पर रोक लगाई गई है।
तमिलनाडु ने कहा था कि ये फिल्म 5 मई 2023 को 19 मल्टीप्लेक्स में रिलीज की गई, लेकिन फिल्म में जाने-पहचाने कलाकारों के न होने, कलाकारों के खराब प्रदर्शन और दर्शकों की संख्या में कमी के कारण मल्टीप्लेक्स मालिकों ने खुद ही 7 मई 2023 को फिल्म की स्क्रीनिंग बंद कर दी थी। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं ने जानबूझकर झूठा बयान दिया है कि राज्य सरकार ने फिल्म की स्क्रीनिंग पर बैन लगाया है।
हलफनामे में आगे दावा किया गया था कि राज्य में फिल्म की स्क्रीनिंग करने वाले सभी सिनेमाघरों के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। रिलीज से पहले शहरों में जिला पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को राज्य की कानून व्यवस्था पर नजर रखने के लिए अलर्ट जारी किया था। 25 डीएसपी सहित 965 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को फिल्म दिखाने वाले 21 सिनेमाघरों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ‘कंकाल’ हो गए हैं। उनका 35 किलो वजन घट गया है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत की गुहार लगाते हुए उनके वकील ने ये दलीलें दी है। उनकी याचिका पर गुरुवार (18 मई 2023) को सुनवाई करते हुए जस्टिस एएस बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।
जैन की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी शीर्ष अदालत में पेश हुए। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अदालत से वैकेशन बेंच में सुनवाई की छूट माँगी। वरिष्ठ वकील ने कहा, “जेल में रहने के दौरान वो आदमी कंकाल हो गया है। जेल में उसका 35 किलो वजन घट गया है। वह कई बीमारियों से ग्रस्त है। जैन की सेहत लगातार बिगड़ रही है और उनका केस वेटिंग लिस्ट में 416 नंबर पर है।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री को राहत देते हुए वैकेशन बेंच में अपील करने की इजाजत दी।
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश हुए। उन्होंने कहा, “हम इस याचिका का विरोध करते हैं।” फिलहाल अदालत ने अगली सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं की है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने नहीं दी थी जमानत
सत्येंद्र जैन मई 2022 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली हाई कोर्ट से 6 अप्रैल 2023 को जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैन को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि सत्येंद्र जैन एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। वह जेल से बाहर आकर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।
जेल में मालिश कराते आया था वीडियो
बता दें कि सत्येंद्र जैन के तिहाड़ जेल के भीतर से कई वीडियो सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ वीडियो में वह मालिश कराते, कुछ में ‘दरबार’ लगाते तो कुछ में बाहर का खाना खाते दिखाई दिए थे। एक वीडियो में तो वह निलंबित जेल अधीक्षक के साथ बैठे हुए भी दिखाई दिए थे। वीडियो सामने आने और कोर्ट की सख्ती के बाद जब जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट बंद हो गया तो सत्येंद्र जैन ने जेल अधिकारियों पर धमकी देने का आरोप लगाया था। अभी हाल में जैन ने अकेलेपन का हवाला देते हुए अपने सेल में कैदी शिफ्ट करने का आग्रह किया था। इसके बाद नियमों को ताक पर रखते हुए दो कैदी उनके बैरक में शिफ्ट कर दिए गए थे। मामला सामने आने के बाद तिहाड़ जेल अधीक्षक को शो कॉज नोटिस जारी किया गया था।
पाकिस्तान के लोकतंत्र को अपने बूट से रौंदने वाली सेना और राजनीति को अपनी अंगुली पर नचाने वाली ISI से सीधा-सीधा पंगा लेना पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के मुखिया इमरान खान के लिए मुश्किल खड़ा कर दिया है। खतरा महसूस कर सेना ने इमरान खान को पाकिस्तान छोड़कर दूसरे देश में पनाह लेने का विकल्प दिया है। उनके खिलाफ बड़े ऐक्शन की तैयारी चल रही है।
दरअसल, पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने इमरान खान पर लाहौर के जमां पार्क स्थित अपने घर में 30-40 आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते हुए उन्हें सौंपने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। यह अल्टीमेटम आज गुरुवार (18 मई 2023) को दोपहर 2 बजे खत्म हो गया है। इसके बाद पंजाब सरकार ने उनके घर की तलाशी लेने का आदेश दिया है।
हालाँकि, इमरान खान को इसका अंदेशा है। इसलिए उन्होंने अपने घर पर पाकिस्तान के मीडिया को आमंत्रित कर लिया है। PTI ने ट्वीट कर लिखा, “अवैध कार्यवाहक सरकार द्वारा दिए गए तलाशी अभियान आदेश को कवर करने के लिए फिर से सभी मीडिया को ज़मां पार्क में आमंत्रित किया है।”
पार्टी ने मीडियाकर्मियों को आमंत्रित करते हुए आगे लिखा, “मीडिया को आना चाहिए। लोगों को हकीकत दिखानी चाहिए, क्योंकि कल की योजना को खुद पीएमएल-एन (विरोध शहबाज शरीफ की पार्टी) के प्रतिनिधियों ने लाइव टीवी पर उजागर किया था।”
All media is once again invited to Zaman Park to cover the search operation order given by illegal caretaker government.
Media should come, see and let people see the reality as yesterday’s plan was exposed by PMLN’s representatives themselves on live tv. https://t.co/hc1oWlxRnS
जमां पार्क की ओर जाने वाली लाहौर के सभी सड़कों को बंद कर दिया गया है और इलाके में भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। पंजाब पुलिस के महानिरीक्षक और राजधानी शहर के पुलिस अधिकारी (CCPO) ने पुलिस को “सतर्क” रहने के लिए कहा है। इसके पहले इमरान खान ने खुद की फिर गिरफ्तारी की आशंका जाहिर की है। हालाँकि, पंजाब सरकार ने इससे इनकार किया है।
कहा जा रहा है कि इमरान खान भी अपने घर में ही मौजूद हैं। इस दौरान उन्होंने एक ट्वीट भी किया है। इमरान खान ने अपने ट्वीट में लिखा है, “राष्ट्र को बदमाशों, अपराधियों, किसी भी नैतिकता या नैतिकता से रहित मूर्खों के झुंड ने अपने कब्जे में ले लिया है। देश अपने सबसे खराब आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी में डूब रहा है। सत्ता में बैठे लोग इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि आतंक के शासन को उजागर करके सबसे बड़ी और एकमात्र संघीय पार्टी को कैसे कुचला जाए। बहुत देर होने से पहले सभी नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाने का समय आ गया है।”
Nation has been taken over by a bunch of crooks, criminals, duffers devoid of any ethics or morality.
While the country sinks into its worst economic crisis esp unprecedented inflation and unemployment, all those in power are concentrating on how to crush the biggest and the… pic.twitter.com/j6LktOHxQJ
इमरान खान ने कहा, “यह अहम समय है, जब सत्ता में बैठी ताकतों को संवेदनशील होकर सोचना चाहिए, वरना देश में एक बार फिर से ईस्ट पाकिस्तान जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।” बता दें कि बांग्लादेश पहले पाकिस्तान का हिस्सा था और उसे ईस्ट पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था। साल 1971 की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश बनाने में मदद की थी।
सेना भी PTI के कार्यकर्ताओं के हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए सतर्क है। सेना ने इमरान खान को पाकिस्तान छोड़ देने का ऑफर दिया है। इमरान खान को दुबई और लंदन जाने का ऑफर दिया गया है। सेना ने कहा कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ आर्मी एक्ट के तहत सैन्य अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा। अगर इमरान पाकिस्तान छोड़ देगें तो उन पर किसी तरह का केस नहीं चलाया जाएगा।
पाकिस्तान की सेना द्वारा दिए गए इस ऑफर को पूर्व प्रधानमंत्री और PTI चीफ इमरान खान ने मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान छोड़ना ही होता तो वे पहले ही छोड़ चुके होते। PTI चीफ ने साफ कह दिया कि चाहे जो कुछ भी हो जाए, लेकिन वे पाकिस्तान नहीं छोड़ेंगे। आर्मी ऐक्ट को ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट भी कहा जाता है और इस केस में सेना आरोपित को उम्र से लेकर मौत की सजा तक देती है।
इससे पहले पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने इमरान खान और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि अगर 9 मई जैसी घटना दोबारा होती है तो सेना बर्दाश्त नहीं करेगी। जनरल ने यह बयान सियालकोट गैरिसन की अपनी यात्रा के दौरान कहा कि पाकिस्तान अपने जवानों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।
‘द हीरो ऑफ रानीगंज’ के नाम से मशहूर अमृतसर के इंजीनियर जसवंत सिंह गिल (Jaswant Singh Gill) की बायोपिक में बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार (Akshay Kumar) उनका किरदार निभाते हुए नजर आएँगे। अभिनेता ने 2022 में ट्वीट कर खुद इसकी जानकारी दी थी। फिल्म की शूटिंग पिछले साल शुरू हो चुकी है। जसवंत सिंह गिल ने अपनी जान की परवाह किए बिना 6 घंटे में 65 लोगों की जिंदगी बचाई थी। सरदार जसवंत सिंह गिल को कैप्सूल गिल के नाम से भी पुकारा जाता था। इसलिए फिल्म का नाम ‘कैप्सूल गिल’ (Capsule Gill) रखा गया है। अक्षय कुमार की फिल्म को वासु भगनानी और जैकी भगनानी प्रोड्यूस कर रहे हैं। वहीं फिल्म का निर्देशन टीनू सुरेश देसाई कर रहे हैं।
अक्षय कुमार के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
दरअसल, जसवंत सिंह गिल कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) के इंजीनियर हुआ करते थे। आज से करीब 33 साल (13 नवंबर 1989) पहले उनके कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल के रानीगंज स्थित एक कोयला खदान (Coal Mines) में बाढ़ का पानी भर गया था। इस कारण वहाँ काम कर रहे 220 लोगों में से 6 की मौके पर ही मौत हो गई थी। जो लोग लिफ्ट के पास थे, उनको खींचकर बाहर निकाल लिया गया, लेकिन वहाँ 65 लोग फँसे रह गए थे। जब चीफ इंजीनियर जसवंत सिंह गिल को इस हादसे की खबर लगी, तो उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत उस पानी से भरी खदान में जाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी कुशलता दिखाते हुए टीम के साथियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन किया।
गिल ने सबसे पहले वहाँ मौजूद अफसरों की मदद से पानी को पम्प के जरिए बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन ये तरीका कारगर साबित नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने वहाँ कई बोर खोदे, जिससे खदान में फँसे मजदूरों को जिंदा रहने के लिए खाना-पीना पहुँचाया जा सके। उस दौरान उन्होंने एक 2.5 मीटर का लंबा स्टील का एक कैप्सूल बनाया और उसे एक बोर के जरिए खदान में उतारा। जसवंत राहत और बचाव की ट्रेनिंग ले चुके थे। इसलिए उन्होंने खदान में उतरने का फैसला किया।
उस वक्त कई लोगों ने और सरकार ने उनकी इस बात का विरोध भी किया, लेकिन जसवंत ने अपने रेस्क्यू को जारी रखा। उनके इस कदम से खदान में से एक-एक करके लोगों को उस कैप्सूल के जरिए 6 घंटे में बाहर निकाल लिया गया। जब तक सभी 65 लोगों को खदान से बाहर नहीं निकाल लिया गया, तब तक जसवंत खुद बाहर नहीं आए। यह हादसा अब तक के कोयला खदानों में हुए सबसे बड़े हादसों में से एक था।
जसवंत सिंह को उनकी बहादुरी के लिए 2 साल बाद 1991 में भारत सरकार की तरफ से प्रेसिंडेट रामास्वामी वेंकटरमन के हाथों सिविलियन गेलेन्ट्री अवार्ड ‘ सर्वोंत्तम जीवन रक्षक पदक’ दिया गया। 29 नवंबर, 2009 को, उन्हें नई दिल्ली में ISMAA द्वारा भारत का पहला ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड फॉर माइनिंग’ दिया गया। साथ ही कोल इंडिया ने उनके सम्मान में 16 नवंबर को ‘रेस्क्यू डे’ डिक्लेयर किया। गिल के बनाए कैप्सूल मैथड को इसके बाद कई देशों ने इस्तेमाल किया। 2010 में चिली में इस कैप्सूल का इस्तेमाल हुआ था।
बता दें कि 22 नवंबर, 1939 को पंजाब के अमृतसर के सठियाला में जन्मे जसवंत सिंह गिल ने 1959 में खालसा कॉलेज से ग्रेजुएशन की थी। गिल ने झारखंड के धनबाद स्थित आईआईटी में खनन की बारीकियाँ सीखीं। एशिया के सबसे बड़े खनन इंस्टीट्यूट का नाम तब इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (आईएसएम) हुआ करता था। जसवंत सिंह गिल का 26 नवंबर, 2019 को उनका निधन हो गया था।
खाने की मेज। बैठे हैं कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिव कुमार। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने जा रहे सिद्धारमैया। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला। कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल।
तस्वीर 2
बीच में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। उनकी बाईं ओर शिवकुमार। दाईं ओर सिद्धारमैया। दोनों का हाथ उठाए गंभीर खरगे। खिलखिलाते शिवकुमार। मंद मंद मुस्कुराते सिद्धारमैया।
सियासी तस्वीरों के भी अपने मायने होते हैं। 13 मई 2023 को कर्नाटक की जनता ने कॉन्ग्रेस को जनादेश दिया। पर मुख्यमंत्री का नाम तय होते-होते 18 मई आ गया। इस बीच इतनी बैठकें हुईं, इतने दावे हुए, इतनी बयानबाजी हुई, अपने नेता के समर्थन में प्रदर्शन हुए कि 224 सदस्यीय विधानसभा में 135 सीट पाने के जश्न पर पानी फिरने लगा। ऐसे में इन तस्वीरों का मीडिया में आना कॉन्ग्रेस के लिए जरूरी हो गया था। वैसे ही जैसे हिंदी फिल्मों की हैप्पी एंडिंग जरूरी है। इन तस्वीरों से बताने की कोशिश हो रही है कि कॉन्ग्रेस एकजुट है। सब कुछ आम सहमति से हुआ है। पर क्या सच में ऐसा ही है? इसका जवाब तलाशने से पहले कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ऐलान पर लौटते हैं।
कॉन्ग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री होंगे। डीके शिवकुमार इकलौत डिप्टी सीम होंगे। शिवकुमार 2024 के लोकसभा चुनाव तक कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी बने रहेंगे। साथ ही बताया कि कर्नाटक कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह 20 मई को होगा। वैसे आधिकारिक ऐलान से पहले ही ये सब जानकारी मीडिया में आ चुकी थी। शिवकुमार के रेस में पिछड़ने के संकेत तो 17 मई को तभी मिल गए थे जब सिद्धारमैया का समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया था।
#WATCH | Siddaramaiah will be the Chief Minister of Karnataka and DK Shivakumar will be the only deputy CM, announces KC Venugopal, Congress General Secretary -Organisation. pic.twitter.com/q7PinKYWpG
डीके शिवकुमार के भाई डीके सुरेश कर्नाटक से ही कॉन्ग्रेस के सांसद हैं। उन्होंने कहा है, “मुझे नहीं लगता है कि मैं पूरी तरह से खुश हूँ। मगर कर्नाटक के हित के लिए पार्टी और डीके शिवकुमार और सभी को ये स्वीकार करना होगा। हम कर्नाटक के हित में अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहते थे, इसलिए डीके शिवकुमार को यह स्वीकार करना पड़ा। भविष्य में हम देखेंगे, अभी एक लंबा रास्ता तय करना है। काश यह (डीके शिवकुमार के लिए सीएम पद) होता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, हम इंतजार करेंगे और देखेंगे।”
#WATCH | I am not fully happy but in the interest of Karnataka we wanted to fulfil our commitment…That is why DK Shivakumar had to accept. In future we will see, there is a long way to go. …I wish it (CM post for DK Shivakumar) but it didn't happen, we will wait and see:… pic.twitter.com/DGbiSIUeJk
कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने कहा है, “राज्य में दलित सीएम की डिमांड काफी ज्यादा थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सिद्धारमैया के सीएम और शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाने के ऐलान से दलित समुदाय आहत हुआ है। मैं भी सरकार चला सकता था। अगर सीएम नहीं तो कम से कम मुझे डिप्टी सीएम तो बनाना चाहिए था।” सिद्धारमैया की पूर्व की सरकार में परमेश्वर डिप्टी सीएम रह चुके हैं।
कॉन्ग्रेस के भीतर से आलाकमान के फैसले पर असंतोष का भाव दिखाते ये दो बयान भी उसी समय आए हैं, जब कॉन्ग्रेस ने दो तस्वीरों के जरिए ‘ऑल इज वेल’ का संदेश देने की कोशिश की है। इनके अलावा कुछ डिमांड पहले से भी कॉन्ग्रेस नेतृत्व के पास हैं। मसलन, बेलगावी उत्तर के विधायक आसिफ सैत ने कर्नाटक कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जारकीहोली को डिप्टी सीएम बनाने की माँग की थी। कर्नाटक रेड्डी जनसंघ अपने नेता रामलिंगा रेड्डी को डिप्टी सीएम देखना चाहते हैं। जमीर अहमद खान को डिप्टी सीएम बनाने के लिए कोप्पल जिले के गंगावती में मुस्लिमों का प्रदर्शन भी हो चुका है। कर्नाटक वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शफी सादी भी उपमुख्यमंत्री पद पर मुस्लिम की दावेदारी जता चुके हैं। इतना ही नहीं वे गृह, राजस्व, स्वास्थ्य जैसे 5 खास विभाग के मंत्री भी मुस्लिम चाहते हैं।
विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की सफलता की एक बड़ी वजह जेडीएस के वोटरों का टूटना है। कर्नाटक में वोक्कालिगा (vokkaliga community) दूसरा सबसे प्रभावशाली समुदाय है। शिवकुमार भी इसी समुदाय से आते हैं। वैसे वोक्कालिगा परंपरागत तौर पर जेडीएस के समर्थक रहे हैं। लेकिन इस बार अपने समुदाय के शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावना देख वे कॉन्ग्रेस की तरफ मुड़ गए। ऐसे में जब शिवकुमार मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहे हैं, क्या यह समुदाय आने वाले चुनावों में भी कॉन्ग्रेस के साथ रहेगा? या फिर वह उधर मुड़ जाएगा जहाँ उसे सत्ता में वांछित हिस्सेदारी की उम्मीद दिखेगी?
कॉन्ग्रेस के लिए संकट केवल दलितों, मुस्लिमों और वोक्कालिगा को ही संतुष्ट करने का नहीं है। कर्नाटक के सबसे प्रभावशाली समुदाय लिंगायत ने भी सीएम पद पर दावेदारी जताई थी। अखिल भारतीय वीरशैव महासभा (All India Veerashaiva Mahasabha) ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर ये माँग की थी। वीरशैव महासभा कलबुर्गी के अध्यक्ष अरुण कुमार पाटिल ने कहा था, “लिंगायत समुदाय की मदद से कॉन्ग्रेस जीती है। 39 विधायक लिंगायत हैं। लिंगायत समुदाय से आने वाले कई नेता मुख्यमंत्री पद के योग्य हैं। ऐसे में हमने अपने समुदाय के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने का आग्रह किया है।”
कर्नाटक की राजनीति में येदियुरप्पा के उभार के बाद से लिंगायत बीजेपी समर्थक माने जाते थे। लेकिन इस बार लिंगायत प्रभाव वाली कुछ सीटों पर भी बीजेपी को पराजय मिली है। ऐसे में कॉन्ग्रेस सरकार में शीर्ष स्तर पर हिस्सेदारी पाने में नाकाम रही इस समुदाय को पार्टी कैसे संतुष्ट करेगी?
कॉन्ग्रेस की परिपाटी के अनुसार जब आप इन सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं तो आपको पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे हाल के कई उदाहरण मिलते हैं। इन राज्यों में भी कर्नाटक जैसा ही संकट था। भले शिवकुमार आज कह रहे हैं कि वे ब्लैकमेल नहीं करेंगे। पीठ में छूरा नहीं घोपेंगे। लेकिन हम जानते हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कुछ किए बिना ही पंजाब में कॉन्ग्रेस को साफ कर दिया था। राजस्थान में सचिन पायलट साफ कर रहे हैं।