उत्तर प्रदेश के बरेली में एक युवती ने धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) कर हिंदू धर्म अपना लिया। इसके बाद अपने प्रेमी के साथ हिन्दू रीति रिवाज से विवाह कर लिया। नसरीन ने धर्मांतरण के बाद अपना नाम नेहा रख लिया है। शादी के बाद उसने अपने परिवार वालों से जान का खतरा जताया है। नेहा पति राहुल के साथ सोमवार (15 मई 2023) को एसएसपी दफ्तर पहुँची और दोनों की सुरक्षा की गुहार लगाई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला भमोरा थाना क्षेत्र का है। नेहा उर्फ नसरीन सिहौलिया दिगोई की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि भले ही उनका जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ हो, लेकिन उनकी हिंदू धर्म में आस्था रही है। वह हिंदू देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा रखती हैं और उनकी शरण में जाना चाहती हैं। इसलिए उन्होंने धर्म परिवर्तन करने का फैसला किया। नेहा ने कहा कि वह राहुल से शादी करके बहुत खुश हैं और उसके साथ हँसी-खुशी रहना चाहती हैं। राहुल भी नेहा से शादी करके बेहद खुश है।
नेहा के मुताबिक, उसने अपनी मर्जी से यह शादी की है। उस पर किसी का दबाव नहीं था। उसके परिजनों के संबंध कुख्यात अपराधियों से हैं, जिससे उसकी और राहुल की जान को खतरा है। नवदंपती ने एसएसपी को लिखे पत्र में बताया कि उनकी शादी से उसके (नेहा) परिवार वाले बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। इसलिए उन्होंने सुरक्षा देने की माँग की है।
नेहा ने आरोप लगाया है कि उसका पूर्व शौहर शराब पीकर उसके साथ आए दिन मारपीट करता था। उसके चरित्र पर शक करता था। महिला ने बताया कि उसके तीन बच्चे भी हैं, लेकिन उसके पूर्व शौहर ने इन्हें अपने बच्चे मानने से मना कर दिया और कहा, “कहीं भी जाएगी, मुँह काला करवाकर आएगी और कह देगी ये मेरे बच्चे हैं। ये मेरे नहीं तेरे यार के बच्चे हैं।” उसने उसे तीन तलाक देकर घर से बाहर निकाल दिया और अब उस पर हलाला का दबाव बना रहा था। इसके बाद नसरीन उससे परेशान होकर अपने मायके चली गई।
एक साल पहले दिल्ली में काम के दौरान उसकी मुलाकात राहुल नाम के शख्स से हुई। दोनों की फोन पर बातचीत होने लगी। बातचीत के दौरान राहुल और नसरीन में नजदीकियाँ बढ़ीं और 4 से 5 दिन पहले ही दोनों ने शादी कर ली।
केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) ने देश की सुरक्षा से जुड़ी खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और विदेशी खुफिया एजेंसियों को भेजने के आरोप में एक पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपित की पहचान विवेक रघुवंशी के रूप में हुई। वह DRDO और सेना से जुड़ी जानकारी लीक कर रहा था। सीबीआई ने विवेक से जुड़े 12 ठिकानों पर छापेमारी कर कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले की जाँच कर रही सीबीआई का कहना है कि पत्रकारिता की आड़ में विवेक रघुवंशी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और सेना की संवेदनशील जानकारी इकट्ठा कर रहा था। इसी कड़ी में उसने डीआरडीओ और भारतीय सेना द्वारा भविष्य में किन चीजों की खरीद करने वाली है इसकी जानकारी उसने इकट्ठी कर ली थी।
Update | The freelance journalist booked under the Official Secrets Act by the Central Bureau of Investigation has been identified as Vivek Raghuvanshi.
साथ ही डीआरडीओ किन परियोजनाओं पर काम कर रहा है और आगे की योजना क्या है, इस बारे में भी वह जानकारियाँ जुटा रहा था। यही नहीं, उसने भारत के मित्र देशों के साथ चल रही कूटनीतिक और रणनीतिक वार्ताओं की जानकारी इकट्ठा कर रहा था। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा है कि वह देश की सुरक्षा और अखंडता से जुड़ी इन जानकारियों को इकट्ठा कर कथित तौर पर विदेशी खुफिया एजेंसियों को भेज रहा था।
इसी सिलसिले में सीबीआई ने दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और जयपुर में 12 ठिकानों पर छापेमारी की है। कहा जा रहा है कि इस छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सीबीआई के हाथ लगे हैं। फिलहाल, सीबीआई आरोपित विवेक रघुवंशी के खिलाफ सरकारी गोपनीयता अधिनियम के तहत FIR दर्ज कर मामले की जाँच कर रही है। सरकारी गोपनीयता अधिनियम को जासूसी विरोधी अधिनियम भी कहा जाता है।
DRDO डायरेक्टर की भी हुई थी गिरफ्तारी
बता दें कि इससे पहले इसी महीने 3 मई को महाराष्ट्र एटीएस ने डीआरडीओ के डायरेक्टर प्रदीप कुरुलकर को पुणे से गिरफ्तार किया था। प्रदीप कुरुलकर पर व्हाट्सएप मैसेज, वॉयस और वीडियो कॉल के जरिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को जानकारी देने का आरोप है। यही नहीं, प्रदीप का पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) की महिला एजेंट को भी खुफिया जानकारी देने का आरोप है। बताया जा रहा है कि PIO एजेंट ने हनी ट्रैप में फँसाकर प्रदीप से कई महत्वपूर्ण और खुफिया जानकारी हासिल कर ली।
प्रदीप कुरुलकुर को मंगलवार (16 मई 2023) को पुणे की विशेष अदालत में पेश किया गया था। जहाँ से अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
#UPDATE | DRDO espionage case | Accused scientist Dr Pradeep Kurulkar sent to judicial custody for 14 days by Special Court in Pune, Maharashtra. https://t.co/gc7L1YihG3
आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल (Apple) ने अपने iPhone 15 सीरीज के दो मॉडल बनाने के लिए भारत को चुना है। टाटा ग्रुप एप्पल के अपकमिंग मॉडल iPhone 15 और iPhone 15 Plus को भारत में असेंबल करेगा। इससे पहले भारत में फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और लक्सशेयर जैसी कंपनियाँ iPhone को असेंबल करती रही हैं। लेकिन अब इस रेस में टाटा ग्रुप भी शामिल हो गया है। टाटा ग्रुप भारत में iPhone बनाने वाली चौथी कंपनी बनेगी।
TrendForce की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में टाटा ग्रुप को iPhone 15 और iPhone 15 Plus के प्रोडक्शन का एक छोटा हिस्सा मिलेगा। यानी टाटा, दोनों मॉडल्स का सिर्फ 5 प्रतिशत ही असेंबल करेगा। वहीं, फॉक्सकॉन नए आईफोन के रेगुलर वेरिएंट के 70 प्रतिशत और लक्सशेयर रेगुलर वेरिएंट का 25 प्रतिशत असेंबल करेंगी। कहा जा है कि लक्सशेयर को प्लस वेरिएंट के असेंबली ऑर्डर का 60 प्रतिशत और पेगाट्रॉन को प्लस वेरिएंट के असेंबली ऑर्डर का 35 प्रतिशत मिला है। टाटा ग्रुप पहले ही बेंगलुरु में विस्ट्रॉन का आईफोन प्लांट खरीद चुका है, जहाँ iPhone 15 सीरीज को असेंबल किया जाएगा।
हर साल सितंबर के महीने में iPhone सीरीज को लॉन्च किया जाता है। इस साल एप्पल की तरफ से iPhone 15 को सितंबर में लॉन्च किया जा सकता है। 2023 में आईफोन सीरीज के चार मॉडल- आईफोन 15, आईफोन 15 प्लस, आईफोन 15 प्रो और आईफोन 15 प्रो मैक्स इसमें शामिल हो सकते हैं। दरअसल, कोरोना महामारी और भू-राजनीतिक संबंधों के कारण उपजे तनाव के बाद Apple का व्यवसाय प्रभावित हुआ है। वहीं चीन से दूर Apple की मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन के चल रहे बदलाव ने Tata Group को iPhone असेंबल ऑर्डर हासिल करने में मदद की है।
बता दें कि 2022 में चीन के झेंगझू में स्थित एप्पल के प्लांट में कामगारों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वीडियो में प्रदर्शनकारियों को हंगामा करते और लाठी से सीसीटीवी कैमरों को तोड़ते हुए देखा गया था। इस हिंसा का कारण वेतन का भुगतान और प्लांट में कठोर कोविड गाइडलाइन को लेकर था। एप्पल के इस फैसिलिटी सेंटर में लगभग 3,00,000 कर्मचारी काम करते थे और यहाँ iPhone प्रो के 85 प्रतिशत हिस्से का काम होता था। इसकी वजह एप्पल अपनी उत्पादन फैक्ट्री को चीन से निकालकर भारत और वियतनाम जैसे एशियाई देशों में स्थानांतरित करना चाहता है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि आरिफ नाम का एक शादीशुदा मुस्लिम युवक नाम बदल कर लड़कियों को परेशान करता था। मंगलवार (16 मई 2023) को आरिफ लोगों के हत्थे जब चढ़ गया जब वो एक स्कूल के पास एक नाबालिग लड़की से जबरन बात करने की कोशिश कर रहा था। लोगों ने आरिफ की पिटाई कर के उसका सिर मूँड़ा दिया। पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र का है। जिस लड़की से आरिफ़ बात करने की कोशिश कर रहा था, वह नाबालिग है और क्लास 8 की छात्रा है। पीड़िता के घर वालों के मुताबिक आरिफ उसे जबरन अपना मोबाइल नंबर एक पर्ची पर लिख कर देने की कोशिश कर रहा था। लड़की ने मदद के लिए शोर भी मचाया। इस दौरान आस-पास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने आरिफ को पकड़ लिया। जब आरिफ का नाम पूछा गया तो उसने खुद को राजा बताया।
शादीशुदा मों0 आरिफ, राजा नाम बताकर स्कूल की लड़की से नंबर मांग रहा था, कानपुर में अवधपुरी की जनता ने फ्री में कटिंग के साथ-2 मसाज भी की। लेकिन ऐसी गंभीर समस्या के बारे में हमें अपनी बेटियों कों जागरूक करना बहुत जरुरी है। कुछ नहीं तों उन्हें केरला स्टोरी जरूर देखने भेजें ?? pic.twitter.com/GsHmJD2GLy
हालाँकि, आधार कार्ड चेक करने पर उसकी पोल खुल गई और वह औरैया जिले के विधूना क्षेत्र का रहने वाला आरिफ निकला। इसके बाद मौके पर जमा लोगों ने उसकी पिटाई की। पिटाई के बाद वीडियो बनाते हुए आरिफ का सिर मुंडा दिया गया। इस घटना का 41 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में लोग आरिफ के परिवार वालों को बुलाने के साथ उसके शादीशुदा होने और कानपुर में किराए पर रहने की बात करते दिख रहे हैं।
प्रकरण स्थानीय पुलिस के संज्ञान मे है, जाँच कर आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) May 16, 2023
बताया जा रहा है कि बाद में लोगों ने आरिफ को थाना रावतपुर के हवाले कर दिया। पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच करवाए जाने की बात कही है। रावतपुर SHO नीरज ओझा ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि नाबालिग के परिजन शिकायत दे रहे हैं, जिसके आधार पर आरोपित पर कार्रवाई की जा रही है। आरोपित आरिफ पुलिस हिरासत में है।
वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वेक्षण कराने को लेकर याचिका दायर की गई है। चार हिंदू महिला उपासकों ने जिला जज को इस संबंध में याचिका दी है। इस पर 22 मई 2023 को सुनवाई होगी। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एएसआई को परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग के निर्देश दिए थे।
यह याचिका (सीपीसी की धारा 75 (ई) और आदेश 26 नियम 10ए के तहत) उन हिंदू महिलाओं (वादी) द्वारा दायर की गई है, जो ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में साल भर से पूजा करने का अधिकार माँग रही हैं। हिंदू याचिकाकर्ताओं के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि ज्ञानवापी में ऐसे कई सच हैं, जिनका सामने आना जरूरी है। इसलिए एएसआई सर्वे की माँग की जा रही है। इससे यह पता चल सकता है कि क्या स्जिद का निर्माण पहले से मौजूद हिंदू मंदिर के ढाँचे पर किया गया था।
#FirstOnTNNavbharat: 'शिवलिंग' समेत पूरे ज्ञानवापी परिसर की ASI जांच की मांग, आज हिंदू पक्ष दाखिल करेगा याचिका
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, “पूरा परिसर हिंदू मंदिर का है। सर्वे के दौरान गुंबद के नीचे हिंदू मंदिर के शिखर मिले हैं। उसकी कार्बन डेटिंग जाँच की माँग हम कर रहे हैं। हमारी माँग है कि विवादित ढाँचे की पश्चिमी दीवार की भी जाँच हो। हम चाहते हैं कि तहखाने की भी वैज्ञानिक जाँच की जाए। चूँकि, हाई कोर्ट शिवलिंग की वैज्ञानिक जाँच का आदेश कर चुका है। ऐसे में पूरे परिसर की वैज्ञानिक जाँच एवं कार्बन डेटिंग की जा सकती है।”
जैन ने कहा, “मंदिर के ढाँचे को औरंगजेब ने तोड़कर बनवाया है, ये भी ASI जाँच में स्पष्ट हो जाएगा। अयोध्या केस में ASI का सर्वे मील का पत्थर साबित हुआ था। ज्ञानवापी में भी एएसआई के सर्वे से चौंकाने वाली बातें सामने आ सकती हैं। इसलिए हम सभी पूरे परिसर की वैज्ञानिक एवं कार्बन डेटिंग जाँच की माँग कर रहे हैं।”
हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग एवं साइंटिफिक सर्वे की माँग वाली याचिका स्वीकार करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वे (ASI) को बिना शिवलिंग को क्षति पहुँचाए कार्बन डेटिंग कराने का आदेश दिया था। बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान 16 मई 2022 को शिवलिंग मिला था। इस शिवलिंग की ASI से साइंटिफिक सर्वे कराने की माँग को लेकर वाराणसी की जिला अदालत में वाद दाखिल किया गया था। हालाँकि, कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद वक्फ बोर्ड की बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शफी सादी ने जहाँ इस जीत के बाद कहा कि अब नई सरकार में मुस्लिम समुदाय का उप-मुख्यमंत्री बनना चाहिए और 5 मुस्लिम विधायकों को खास विभाग दिया जाना चाहिए। वहीं गुलबर्गा के वक्फ जिला अध्यक्ष सैयद हबीब सरमस्त का एक बयान वायरल हुआ कि मुसलमानों को किसी रिजर्वेशन की जरूरत नहीं है। उनके पास गुलबर्गा में ही 27000 एकड़ से ज्यादा वक्फ की जमीन है। अगर मुसलमान वक्फ को सही से संभालते हैं तो उनके पास इतना है कि वो हुकूमत को कर्जा दे सकते हैं।
अब ये वक्फ बोर्ड है क्या चीज? जिसके बूते इतने बड़े दावे हो रहे हैं। इसका काम क्या है? जो इसके सदस्य राज्य में जीतने वाली कॉन्ग्रेस को कह रहे हैं कि सरकार में उनके समुदाय के डिप्टी सीएम चुने जाएँ। इनके पास कितनी संपत्ति है? जो हुकूमत को कर्जा देने की बात खुलेआम कर रहे हैं। आइए इस वक्फ बोर्ड के बारे में सारी जानकारी लेते हैं और बताते हैं कि कैसे लोकतांत्रिक देश में मजहब के नाम पर शुरू संस्था का प्रभाव इतना बढ़ चुका है कि वो धीरे-धीरे देश के तीसरे सबसे बड़े जमींदार बन गए हैं।
वक्फ बोर्ड होता क्या है?
वक्फ बोर्ड वो संस्था है जो अल्लाह के नाम पर दान में दी गई संपत्ति का रख-रखाव करता है। जैसे इस्लाम मजहब मानने वाले जब अपनी किसी चल या अचल संपत्ति को जकात में देते हैं तो वो संपत्ति तभी से ‘वक्फ’ कहलाती है। जकात दिए जाने के बाद इस संपत्ति पर किसी का मालिकाना अधिकार नहीं होता। उसे अल्लाह की संपत्ति माना जाता है और उसकी देख-रेख ‘वक्फ-बोर्ड’ को दी जाती है। ये संस्थान उस संपत्ति से जुड़े सारे कानूनी काम को संभालती है जैसे उसे बेचने-खरीदना-किराए पर देना आदि। एक बार यदि कोई व्यक्ति ये वक्फ दे देता है तो फिर उसके बाद उसका उस संपत्ति को कभी वापस नहीं ले सकता। वक्फ बोर्ड उसे जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल करता है।
आजाद भारत में कैसे हुई ‘वक्फ’ की शुरूआत?
आजादी के बाद भारत में वक्फ एक्ट 1954 नेहरू सरकार लेकर आई थी। साल 1995 में एक्ट कुछ संशोधन हुए। इन संशोधनों के बाद प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में वक्फ बोर्डों के गठन की अनुमति दी गई और कुछ ऐसे बदलाव हुए जिनपर अक्सर विवाद होता रहता है।
सेंट्रल वक्फ काउंसिल करता है वक्फ बोर्डों की देखरेख
सेंट्रल वक्फ काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना 1964 में भारत सरकार द्वारा 1954 के इस वक्फ अधिनियम के तहत की गई थी। यह केंद्रीय निकाय वक्फ अधिनियम, 1954 की धारा 9 (1) के प्रावधानों के तहत स्थापित विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों के तहत काम की देखरेख करता है।
देश भर में कितने वक्फ बोर्ड?
देश में एक सेंट्रल वक्फ काउंसिल और 32 स्टेट बोर्ड है। हर राज्य के अलग-अलग वक्फ बोर्ड होते हैं। जबकि केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सेंट्रल वक्फ काउंसिल का पदेन अध्यक्ष होता है।
वक्फ बोर्ड में कौन होता है शामिल?
बात करें वक्फ बोर्ड के सदस्यों की तो इसमें शीर्ष पर सारे मुस्लिम अधिकारी होते हैं। जैसे एक अध्यक्ष, राज्य सरकार की ओर से एक या दो नामित व्यक्ति, मुस्लिम विधायक, मुस्लिम एमपी, मुस्लिम वकील, मुस्लिम आईएएस, इस्लामी स्कॉलर, टाउन प्लॉनर और इनके अलावा एक लोकल लेवल पर मुतवल्ली भी होता है।
वक्फ के पास कितनी संपत्तियाँ हैं?
पिछले दिनों खबरें आई थीं कि वक्फ बोर्ड रेल और सेना के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा जमींदार बनता जा रहा है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के अनुसार वक्फ बोर्ड के पास पूरे देश भर में 8,65,646 संपत्तियाँ पंजीकृत हैं। इनमें से 80 हजार से ज्यादा संपत्ति वक्फ के पास केवल बंगाल में हैं। इसके बाद पंजाब में वक्फ बोर्ड के पास 70,994, तमिलनाडु में 65,945 और कर्नाटक में 61,195 संपत्तियाँ हैं। देश के अन्य राज्यों में भी इस संस्थान के पास बड़ी संख्या में संपत्तियाँ हैं।
कानूनी वैधता पर सवाल, याचिका खारिच
वक्फ के नाम पर वक्फ बोर्ड में जोड़ी गई इतनी संपत्तियाँ पर पिछले दिनों बहुत सवाल उठे। यूपी जैसे राज्यों में तो वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर जाँच के लिए राज्य सरकार जाँच के आदेश भी दे चुकी है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल वक्फ बोर्ड को अंसवैधानिक करार देने के लिए एक याचिका डाली गई थी। हालाँकि कोर्ट ने याचिका ये कहकर खारिज कर दी कि इस मामले में याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं हुए।
याचिका डालने वाले अश्विनी उपाध्याय इसकी संवैधानिक मान्यताओं पर सवाल खड़ा करते हुए कहते हैं, “वक्फ के नाम से भारतीय संविधान में एक शब्द नहीं है। सरकार ने 1995 में वक्फ एक्ट बनाया और ये सिर्फ मुस्लिमों के लिए बना दिया।” उन्होंने पूछा कि जब संविधान में ही ऐसा शब्द नहीं था तो ये वक्फ एक्ट बना कैसे। इसमें मुस्लिम विधायक, एमपी, वकील, आईएएस, स्कॉलर और टाउन प्लॉनर और एक मुतवल्ली होता है। मगर जो इसका पूरा खर्चा होता है वो पूरा का पूरा जनता के टैक्स से दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार मस्जिद, मजारों से पैसे ही नहीं लेते और वक्फ पर उसके सदस्यों के वेतन में पैसे खर्च करेंगे तो ये आर्टिकल 27 का उल्लंघन नहीं हुआ?
उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड 1995 के जरिए वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियाँ दे दी गईं। उन्हें ये अधिकार दे दिया गया है कि उनके सब धार्मिक संपत्तियों से जुड़े मामले ट्रिब्यूनल कोर्ट में जाएँगे। वो सवाल करते हैं कि देश में इतनी ट्रिब्यूनल कोर्ट नहीं है ऐसे में अगर वक्फ जाकर किसी की संपत्ति पर दावा ठोंकता है तो लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है तब सुनवाई होती है जबकि बाकी धर्मों के मामले आराम से सिविल कोर्ट में सुन लिए जाते हैं।
लोकतांत्रिक देश में वक्फ के मायने
सुप्रीम में भले ही वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका खारिज कर दी गई। लेकिन उठाए सवाल गलत नहीं थे। भारत जैसे लोकतांत्रित देश में मजहबी आधार पर ऐसे बोर्ड और कानून बनाना कहाँ तक उचित है। पिछले ही दिनों ये खबर आई कि एक पूरे गाँव पर वक्फ बोर्ड ने अपना अधिकार बता दिया है जबकि लोग उस पर सालों से रह रहे हैं और जमीन पर मंदिर भी है।
ये भेदभाव नहीं तो क्या है कि किसी भी अन्य धर्म की संपत्ति से जुड़े मामलों पर सिविल कोर्ट सुनवाई कर लेता है जबकि अगर किसी वक्फ की संपत्ति का विवाद है हो तो वो केवल ट्रिब्यूनल कोर्ट में सुनी जाती है। यानी अगर वक्फ कभी कहता है कि किसी गैर इस्लामी शख्स की जमीन भी उसके हिस्से में आती है तो उस व्यक्ति को ट्रिब्यूनल कोर्ट जाकर शिकायत करनी पड़ती है और देश में इन कोर्टों की संख्या मात्र 14 है। वहीं अगर यही विवाद किसी अन्य धर्म के व्यक्ति से जुड़ा है तो बड़े आराम से मामला सिविल कोर्ट में सुना जाता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि वक्फ का कॉन्सेप्ट इस्लामी देशों तक में नहीं है। फिर वो चाहे तुर्की, लिबिया, सीरिया या इराक हो। लेकिन भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते आज हालात ऐसे हैं कि इन्हें देश में तीसरा सबसे बड़ा जमींदार बताया जा रहा है। इनके पास अकूत संपत्ति है।
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में शनिवार (13 मई 2023) रात मुस्लिम युवकों ने जबरन घुसकर चादर चढ़ाने की कोशिश की थी। अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने SIT जाँच के आदेश दिए हैं। वहीं, नासिक पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए 5 लोगों को हिरासत में लिया।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में हुई इस घटना की SIT जाँच को लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम कार्यालय ने एक ट्वीट किया।
त्र्यंबकेश्वर मंदिरात प्रवेश करण्यासाठी एक विशिष्ट जमाव मंदिराच्या मुख्य प्रवेशद्वारावर एकत्र झाल्याच्या कथित घटनेसंदर्भात एफआयआर नोंदवून अत्यंत कडक कारवाई करण्याचे आदेश उपमुख्यमंत्री आणि गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी दिले आहेत.
या घटनेची चौकशी करण्यासाठी उपमुख्यमंत्री…
— @OfficeOfDevendra (@Devendra_Office) May 16, 2023
इस ट्वीट के अनुसार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने त्र्यंबकेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर भीड़ के इकट्ठा होने की घटना के संबंध में FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। इसके अलावे उप-मुख्यमंत्री ने घटना की जाँच के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रैंक के अधिकारियों की अध्यक्षता में एक एसआईटी के गठन का भी आदेश किया। आदेश में स्पष्ट है कि एसआईटी न केवल इस साल बल्कि पिछले साल की घटना की भी जाँच करेगी क्योंकि तब भी कुछ लोग मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में घुस गए थे।
वहीं, इस घटना के बाद हुई कार्रवाई को लेकर नासिक आईजी बीजी शेखर का कहना है कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर में जबरन घुसने के आरोप में पुलिस ने 5 लोगों को हिरासत में लिया है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से पुलिस को जानकारी दी गई थी कि 13 मई को 10-12 युवक जबरन मंदिर में घुस गए। उनके पास हरी चादर और फूलों के गुच्छे थे।
बता दें कि भगवान महादेव के प्रसिद्ध मंदिर त्र्यंबकेश्वर मंदिर में जबरन घुसने की कोशिश करने वाले मुस्लिमों को सुरक्षाकर्मियों ने मंदिर के अंदर प्रवेश करने से रोक दिया था। जो मुस्लिम भीतर घुसने का प्रयास कर रहे थे, वो अपने मजहबी कार्यक्रम उर्स में शामिल होने के लिए आए थे। लेकिन, सतर्क सुरक्षाकर्मियों और मुस्तैद मंदिर प्रशासन ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया। फिर स्थिति को नियंत्रित भी कर लिया गया। आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की जा रही थी। पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने पर पुजारियों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।
इस संबंध में मंदिर प्रशासन ने स्थानीय पुलिस थाने को पत्र भी लिखा। इसमें शनिवार (13 मई, 2023) रात 9:41 बजे हुई इस घटना के संबंध में बताया गया है। मंदिर के उत्तरी द्वार से कुछ ही दूरी पर उर्स का आयोजन चल रहा है। वहीं से कुछ मुस्लिमों ने मंदिर में एंट्री लेने की कोशिश की। इस पत्र में लिखा है कि सदियों से ये परंपरा चली आ रही है कि मंदिर में सिर्फ हिन्दुओं को ही प्रवेश देने की अनुमति रही है, जिनकी हिन्दू धर्म में आस्था नहीं है उन्हें नहीं।
ज्ञात हो कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर नीलगिरि, ब्रह्मगिरि और कलागिरि की पहाड़ियों के बीच में स्थित है। मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हुए 3 लिंग स्थापित हैं। मुग़ल बादशाह औरंगजेब द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद पेशवा बालाजी बाजीराव ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था।
केंद्रीय जाँच एजेंसी CBI ने मंगलवार (16 मई 2023) को राजद सुप्रीमो लालू यादव के करीबीयों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की। लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में बिहार से लेकर दिल्ली तक छापेमारी की गई। मिली जानकारी के मुताबिक, सुबह ही सीबीआई की टीम विधायक किरण देवी के पटना और भोजपुर स्थित घर पर छापेमारी करने पहुँची। इसके अलावा जाँच एजेंसी ने दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा में आरजेडी के राज्यसभा सांसद प्रेमचंद गुप्ता के आवास और ठिकानों पर भी रेड मारी।
Bihar | CBI raids underway at the residence of RJD MLA Kiran Devi in Arrah. (Outside visuals) pic.twitter.com/CD2PCMFOpQ
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लैंड फॉर जॉब घोटाले की जाँच कर रही सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने एक साथ विधायक किरण देवी के पटना और भोजपुर के अगियाँव के आवास पर रेड मारा। किरण देवी पूर्व विधायक अरुण यादव की पत्नी हैं। नाबालिग से रेप केस में फँसने के बाद अरुण यादव पिछला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सके थे। लालू के करीबी माने जाने वाले अरुण यादव ने अपनी जगह पत्नी किरण देवी को को विधानसभा चुनाव लड़ाया। अरुण यादव बिहार के बड़े बालू कारोबारियों में शामिल हैं।
CBI raids underway at Delhi residence of RJD Rajya Sabha MP Prem Chand Gupta. pic.twitter.com/VRG99yEghN
बिहार के अलावा सीबीआई की टीम ने राजद के राज्य सभा एमपी प्रेमचंद गुप्ता के दिल्ली एनसीआर के ठिकानों पर छापेमारी की। सीबीआई की टीम ने गुरुग्राम, नोएडा और दिल्ली स्थित आवास पर छापा मारा। प्रेमचंद गुप्ता भी लालू यादव के करीबी माने जाते हैं। खबर लिखे जाने तक राज्य सभा सांसद के दिल्ली आवास पर छापेमारी कार्रवाई जारी थी।
बता दें कि 8 मई, 2023 को जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट से सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल करने के लिए समय माँगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 1 जून 2023 को तय की है। सीबीआई के अलावा ईडी भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जँच कर रही है।
क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम मामला?
उल्लेखनीय है कि 14 साल पहले जिस समय यह घोटाला हुआ था, उस समय लालू प्रसाद यादव यूपीए-1 शासनकाल में केंद्रीय रेल मंत्री थे। उस समय नौकरी के देने बदले लालू प्रसाद यादव के परिजनों को पटना में करीब 1.05 लाख वर्ग फुट जमीन अधिग्रहित की गई थी। इस घोटाले में बिना विज्ञापन निकाले रिश्वत देने वाले अभ्यार्थियों को तीन दिन के अंदर रेलवे में नौकरी दे दी गई थी। इतना ही नहीं, इन उम्मीदवारों ने नौकरी के लिए झूठे स्थानांतरण प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया है और रेल मंत्रालय में झूठे प्रमाणित दस्तावेज भी जमा कराए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (16 मई, 2023) को 71,206 सरकारी नौकरी नियुक्ति पत्र का वितरण किया। इस दौरान उन्होंने नव-नियुक्त अभ्यर्थियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित भी किया। देश भर में 45 स्थलों पर इस ‘रोजगार मेला’ का आयोजन किया गया था। इस योजना के तहत केंद्र के साथ-साथ प्रदेश सरकारों में भी नियुक्तियाँ की जा रही हैं। ग्रामीण दल सेवक, इंस्पेक्टर, क्लर्क, सेक्शन ऑफिसर, अनुमंडल अधिकारी, टैक्स असिस्टेंट, शिक्षक, प्रधानाध्यापक और रजिस्ट्रट समेत कई पदों पर नियुक्तियाँ हुई हैं।
इस दौरान जारी किए गए वीडियो में बताया गया है कि पिछले 9 वर्षों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल देश के सर्वांगीण और सर्वस्पर्शी विकास की मिसाल है। बीते 9 वर्षों में देश में अभूतपूर्व गति से इंसफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हुआ है और गरीब कल्याण के लिए संकल्पबद्ध प्रयास हुए हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर उद्यमिता, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिले हैं। युवा देश के सामर्थ्य का देश को लाभ मिले और कर्मठ कर्मयोगी देश के विकास में योगदान दें, इसी क्रम में पीएम मोदी ने 1 वर्ष में 10 लाख लोगों को सरकारी नौकरियाँ देने का विशाल लक्ष्य रखा गया है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2022 के धनतरेस में रोजगार मेला की शुरुआत की गई थी। इसके तहत अब तक करीब साढ़े चार लाख लोगों को नौकरी दी जा चुकी है।
रोजगार मेला सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की एक पहल है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इससे विभागों में भी समय आधारित प्रक्रिया पूरी हो और तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएँ। पहले की धीमी और ऑफलाइन नियुक्ति प्रक्रिया को खत्म कर तकनीक आधारित और समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया अपनाई गई है। इससे अनियमितता खत्म हुई है। अब हर महीने संपूर्ण चयन प्रक्रिया के जरिए नौकरियों के लिए पहल की जा रही है।
इसके तहत एक ही दिन में सभी नियुक्ति संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है। इससे युवा सशक्त होते हैं। व्यवस्था से जुड़ कर किस तरह काम करना है, कार्यस्थल नैतिकता क्या होती है और मानव संसाधन की भूमिका क्या हो – इन विषयों पर एक ऑनलाइन मॉड्यूल ‘कर्मयोगी’ के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभिन्न विभाग और प्रदेश सरकारें भी अब ‘रोजगार मेला’ का आयोजन कर रही हैं। इससे नियुक्ति प्रक्रिया सरल और स्पष्ट हो जाती है।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “बीते 9 वर्षो में भारत सरकार ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा तेज करने, ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने को भी प्राथमिकता दी है। आवेदन से लेकर नतीजे आने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन की जाती है। ग्रुप C और D के पदों के लिए इंटरव्यू सिस्टम खत्म किया गया। सबका साथ-सबका विकास के मंत्र के साथ कदम बढ़ाने वाला भारत, आज विकसित भारत बनने के लिए प्रयास कर रहा है। 9 वर्षों में स्टार्टअप कल्चर में क्रांति आई है, युवाओं को नए अवसर मिले हैं।”
प्रयागराज पुलिस ने अतीक अहमद की माफिया बीवी शाइस्ता परवीन के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है। उसके दो शूटरों गुड्डू मुस्लिम और साबिर की तलाश में भी यह नोटिस जारी हुआ है। फरवरी 2023 में उमेश पाल की हत्या के बाद तीनों फरार हैं। अब इनके देश छोड़कर भागने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच एक रिपोर्ट से पता चला है कि दुबई की प्रॉपर्टी अतीक अहमद ने किसी शबाना नाम की महिला के बेटे आरिफ के नाम कर दी थी। इसको लेकर माफिया के परिवार में झगड़ा भी हुआ था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शाइस्ता, गुड्डू मुस्लिम और साबिर के खिलाफ लुक आउट नोटिस 1 साल के लिए जारी हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों को इन तीनों के देश छोड़ कर कहीं और बसने के इनपुट मिले हैं। लुक आउट नोटिस जारी होने के बाद सभी हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर अलर्ट घोषित किया गया है।
Uttar Pradesh | A lookout notice has been issued by Prayagraj Police Commissionerate against Shaista Parveen, wife of gangster-turned-politician Atiq Ahmed, shooter Guddu Muslim and Sabir, in connection with the Umesh Pal murder case.
दैनिक जागरण के मुताबिक अतीक अहमद ने अपनी दुबई की फ्लैट और अन्य प्रॉपर्टी शबाना के बेटे आरिफ एमबीए के नाम कर दी थी। इसकी जानकारी जब अशरफ के साले सद्दाम को हुई तो उसने इसका विरोध किया था। सद्दाम और आरिफ में झगड़ा भी हुआ था। सद्दाम ने आरिफ पर अतीक के दुबई वाले कारोबार को कब्ज़ा करने का आरोप लगाया था। रिपोर्ट में यह साफ नहीं है कि इसको लेकर शाइस्ता की कैसी प्रतिक्रिया थी। शबाना से अतीक का संबंध भी स्पष्ट नहीं है। यह बताया गया है कि आरिफ साबरमती जेल में अतीक से कई बार मिला था।
इससे पहले कुछ रिपोर्टों में एक महिला को लेकर अतीक और शाइस्ता में कलह के दावे किए जा चुके हैं। रिपोर्टों में कहा गया था कि यह महिला जेल में भी अतीक से मिलती थी। एनबीटी ने अपनीकी रिपोर्ट रिपोर्ट में इस महिला का नाम शबनम बताया था। कहा गया था कि अतीक ने बुरे समय में इस महिला की काफी मदद की थी। इसके बाद दोनों एक दूसरे के संपर्क में आ गए। इस रिश्ते की वजह से अतीक और शाइस्ता में कई बार झगड़े भी हुए थे। शाइस्ता के कई बार मना करने के बावजूद अतीक ने उस महिला से बातचीत जारी रखी। 24 फरवरी 2023 को हुए उमेश पाल हत्याकांड के कुछ दिन पहले भी इस महिला के अतीक से मिलने साबरमती जेल जाने की बात कही गई थी।