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इस्लामी ब्रेनवॉश और प्रेमियों की शादी में फर्क भूला दैनिक भास्कर, ‘केरल स्टोरी’ से की बरेली में 79 मुस्लिम लड़कियों के हिंदू बनने की तुलना: पंडित शंखधार को किया बदनाम

फिल्म ‘The Kerala Story’ ने 13 दिनों में भारत में 157 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे हिन्दू लड़कियों को पहले प्यार के जाल में फँसाया जाता है, फिर उनका इस्लामी धर्मांतरण करा कर उनसे निकाह किया जाता है, इसके बाद उनकी तस्करी कर के आतंकी संगठन ISIS के पास भेज दिया जाता है। उनका ब्रेनवॉश किया जाता है। उन्हें आतंकियों का सेक्स स्लेव बना दिया जाता है। अब ‘दैनिक भास्कर‘ ने इस घटना की तुलना पंडित शंखधार के कार्यों से कर दी है।

56 वर्षीय पंडित शंखधार उत्तर प्रदेश के बरेली के मढ़ीनाथ स्थित ‘अगस्त्य मुनि आश्रम’ में रहते हैं। उनका असली नाम कृष्ण कुमार शर्मा है। वो ऐसे प्रेमी जोड़ों की शादी कराते हैं, जिनमें लड़के हिन्दू होते हैं और लड़की मुस्लिम। ‘दैनिक भास्कर’ ने दावा किया है कि अब तक वो ऐसी 78 शादियाँ करा चुके हैं (अब ये आँकड़ा 79 हो गया है)। अख़बार ने इसे ये कह कर पेश किया है कि वहाँ मुस्लिम लड़कियों को पहले हिन्दू बना दिया जाता है, फिर मुस्लिम लड़के से उनकी शादी करवा दी जाती है।

पहली नजर में पढ़ कर ऐसा लगता है कि मुस्लिम लड़कियों को फँसाने का कोई धंधा चल रहा हो। ये सब इसके बावजूद लिखा गया है, जब अख़बार में ही इसका जिक्र है कि एक मुस्लिम लड़की ने 2013 में खुद उनसे संपर्क किया था और उसके द्वारा जोर दिए जाने के बाद ही उन्होंने वो शादी करवाई थी। उन्हें हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं, इसके बावजूद ‘दैनिक भास्कर’ उनके खिलाफ दुष्प्रचार में लगा है। उन्होंने खुद बताया है कि शादी के लिए उनसे मुस्लिम लड़कियाँ या हिन्दू लड़के संपर्क करते हैं, सबसे पहले दस्तावेज जाँचा जाता है कि वो बालिग हैं या नहीं।

‘दैनिक भास्कर’ को पता होना चाहिए कि व्यवस्थित ढंग से मौलानाओं द्वारा मुस्लिम युवाओं को हिन्दू लड़कियों को फँसाने के लिए तैयार करना और स्वेच्छा से किसी प्रेमी जोड़े द्वारा शादी के लिए किसी पंडित से संपर्क करना – इन दोनों में अंतर है। ‘The Kerala Story’ एक ऐसे ही नेटवर्क का पर्दाफाश करती है, जबकि पंडित कृष्ण कुमार शर्मा उर्फ़ शंखधार कट्टरपंथियों की धमकी के बावजूद कानूनी प्रक्रिया का पालन करवाते हुए उन प्रेमी जोड़ों की मदद कर रहे हैं जिनका कोई नहीं है।

ऑपइंडिया ने पंडित शंखधार से की बात, ‘दैनिक भास्कर’ के प्रोपेगंडा का पर्दाफाश

ऑपइंडिया ने बरेली के पंडित शंखधार से बात कर के उनके पक्ष को जाना। उन्होंने बताया कि 2013 से उन्होंने ये कार्य शुरू किया था। इसका कारण था एक मुस्लिम लड़की द्वारा उनसे संपर्क करना। उक्त मुस्लिम लड़की ने उस समय उनसे कहा था कि एक हिन्दू लड़के ने प्यार कर के उसे धोखा दे दिया। लड़के के परिवार से बात करने पर पता चला कि वो लोग लड़की के मुस्लिम होने के कारण शादी के लिए राज़ी नहीं थे।

ऐसे में पंडित शंखधार ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। इसके बाद उस लड़की ने पुलिस में शिकायत कर दी। जबकि लड़की कह रही थी कि वो जब भी शादी करेगी तो अपनी प्रेमी से ही, वरना मौत को भी गले लगा सकती है। लड़की ने पुलिस को दी गई शिकायत में यौन शोषण कर शादी से मुकरने का आरोप लड़के पर लगाया। इसके बाद लड़के के घर वालों ने पंडित कृष्ण कुमार शर्मा उर्फ़ पंडित शंखधार से संपर्क किया। लड़की भी राज़ी थी, ऐसे में उन्होंने शादी करा दी।

उसी समय से ये सिलसिला शुरू हो गया और फेसबुक पर इस प्रकरण को लेकर डाले जाने के बाद ऐसे प्रेमी जोड़ों ने उनसे संपर्क करना शुरू कर दिया। जो शादी कराने के लिए आते थे, ना चाहते हुए भी उनकी समस्याओं को सुन कर पंडित शंखधार को विवश होकर उनकी शादी करानी पड़ती थी। पंडित शंखधार बताते हैं कि कैसे काफी हिन्दू लड़कियाँ भी मुस्लिमों से शादी करने के लिए इस्लाम अपना रही हैं और निकाह कर रही है, फिर मुस्लिम लड़कियों के मामले में ऐसा क्यों नहीं हो सकता अगर चीजें स्वेच्छा से हो रही हों?

पंडित शंखधार बताते हैं कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ये काम तब से आसानी से होने लगा है, जब से उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी। उनका कहना है कि इससे लोगों के मन से अपराधियों का भय निकलना शुरू हुआ मुस्लिम लड़कियाँ भी सोचने लगीं कि सीएम योगी की दुरुस्त कानून व्यवस्था वाली सरकार में कोई अनहोनी नहीं होगी और कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता, तो वो भी आगे आने लगीं।

पंडित शंखधार कहते हैं कि लोगों ने सपने में भी नहीं सोची थी कि यूपी में कानून व्यवस्था इतनी चुस्त-दुरुस्त हो सकती है। वो बताते हैं कि रात के समय भी लड़कियाँ यूपी में कहीं घूमने निकल सकती हैं, उनके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता। वो कहते हैं कि इसी कारण मुस्लिम लड़कियों का भी मनोबल बढ़ा और उन्हें लगने लगा कि हिन्दू धर्म में जाकर वो बहुविवाह की प्रथा से बच जाएँगी, तीन तलाक-हलाला जैसी शर्मनाक चीजों से उन्हें नहीं गुजरना होगा।

उन्होंने कहा कि वो अधिकतर ऐसे मामलों में मना ही करते हैं, लेकिन कुछ मामलों में विवश होकर उन्हें शादी करानी पड़ती है क्योंकि लड़का-लड़की कहने लगते हैं कि उनका पास कोई और विकल्प नहीं है और वो आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएँगे। पंडित शंखधार ऐसी शादियाँ कराने से पहले वकीलों से सलाह-मशवरा करते हैं और सारे कागजात जाँचते हैं। उन्हें सौ-हजार में दक्षिणा मिल जाती है। कभी उनके पैसे भी लग जाते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके पास कई ऐसे प्रेमी जोड़े और मुस्लिम लड़कियाँ आईं, जो घर छोड़ चुके थे और इधर-उधर कई दिनों से ठोकर खा रहे थे। कुछ को वकीलों ने भी धोखा दे दिया। जिनकी-जिनकी शादी हुई है, उन सभी के शपथ-पत्र की प्रतियाँ उनके पास हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतर मामलों में मुस्लिम लड़की और उनके हिन्दू प्रेमी साथ ही आते हैं। ‘बजरंग दल’ और ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ जैसे संगठनों से वो संपर्क करते हैं, संगठन के लोग उन्हें लेकर पंडित शंखधार के पास आ जाते हैं।

पंडित शंखधार ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के महानगर प्रवर्तक प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। पहले वो ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ के जिला प्रभारी थे। ये संगठन लंबे समय तक गोरखपुर के सांसद रहे योगी आदित्यनाथ का था, जिन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद इसे निष्क्रिय कर दिया। पंडित शंखधार, हिन्दू नेता कमलेश तिवारी से भी जुड़े थे। याद दिला दें कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगा कर कमलेश तिवारी की लखनऊ में हत्या कर दी थी।

पंडित शंखधार फेसबुक के माध्यम से भी कमलेश तिवारी से जुड़े हुए थे। दोनों की आपस में बातचीत भी होती रहती थी। पंडित शंखधार कहते हैं कि हिंदुत्व से उनका जुड़ाव शुरू से रहा है और वो देखते आ रहे हैं कि कैसे तुष्टिकरण के कारण हिन्दुओं के साथ कीड़े-मकौड़ो जैसा व्यवहार होता है। उन्होंने कहा कि जब पीड़ित हिन्दू होते हैं तो उन्हें कोई पूछता ही नहीं, लेकिन किसी मुस्लिम के साथ कुछ हो जाए तो कॉन्ग्रेसी-वामपंथी हल्ला मचा देते हैं, कैंडल मार्च होने लगता है।

पंडित शंखधार ने कहा, “ये हिन्दुओं का ही देश है और हिन्दुओं को ही कोई सुनने वाला नहीं। ऐसी परिस्थितियों से मुझे बड़ा दुःख होता था। लोकतंत्र में सभी को समानता का अधिकार होना चाहिए।” ‘दैनिक भास्कर’ ने इन चीजों की तुलना ‘The Kerala Story’ से कर दी, जहाँ अंत में हिन्दू लड़कियों की काफी दुर्दशा होती है। जबकि पंडित शंखधार के मामले में मुस्लिम लड़कियाँ खुश रहती हैं, हिन्दू प्रेमी से शादी कर के शरिया के बंधनों से मुक्त हो जाती हैं।

पंडित शंखधार कहते हैं कि इस्लामी आतंकवादी की भट्ठियों में हिन्दू लड़कियों को झोंका जा रहा है, उन्हें बहला-फुसला कर, उनका ब्रेनवॉश कर के और उन पर दबाव बना कर एक षड्यंत्र के तहत उन्हें फँसाया जाता है। यही ‘The Kerala Story’ में होता है। जबकि पंडित शंखधार जो कर रहे, उससे इसका जमीन-आसमान का अंतर है। वो कहते हैं कि उनके यहाँ ऐसा कुछ नहीं होता। यहाँ कोई ब्रेनवॉश नहीं होता, लड़कियाँ अपनी मर्जी से यहाँ आती हैं, वो इस्लामी रीति-रिवाजों से त्रस्त होकर यहाँ आती हैं।

वहाँ आतंकवादियों द्वारा पोषित तत्व ऐसे कांडों को अंजाम देते हैं, जबकि इधर लड़कियाँ अच्छे जीवन की चाह में आती हैं। पंडित शंखधार इसका उदाहरण देते हुए कहते हैं कि कई ऐसी लड़कियाँ हैं जो नृत्य-संगीत का भी प्रशिक्षण ले रही हैं, जो इस्लाम में हराम है और मुस्लिम परिवार में रहते हुए ये सब संभव नहीं है। ये मुस्लिम लड़कियाँ नाचती-जाती हैं, आनंद करती हैं और अपनी आज़ादी का लुत्फ़ उठाती हैं। सभी सुखी जीवन जी रही हैं, जबकि ‘The Kerala Story’ वाली लड़कियों के लिए मौत या बदतर ज़िन्दगी ही विकल्प बचता है।

‘दैनिक भास्कर’ ने पंडित शंखधार द्वारा किए जा रहे कार्य को ऐसे पेश किया जैसे वही हिन्दू लड़कों को भेज रहे हों कि जाओ मुस्लिम लड़कियों का ब्रेनवॉश करो। यहाँ न कोई आतंकी संगठन है, न कोई व्यवस्थित नेटवर्क। वो चुनौती देते हैं कि एक भी ऐसा प्रेमी जोड़ा निकल जाए जिसे पहले से उन्होंने कुछ सिखाया हो, तो वो ये काम छोड़ देंगे। उन्होंने बताया कि कई बार हवन सामग्रियों से लेकर अन्य चीजों के लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते हैं।

क्या उन्हें पुलिस-प्रशासन का सहयोग मिलता है? पंडित शंखधार इसका जवाब देते हुए कहते हैं – कतई नहीं। उनका कहना है कि पुलिस-प्रशासन तो इस फ़िराक में रहता है कि कब कोई गड़बड़ी निकले और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पंडित शंखधार पर एक नाबालिग की शादी कराने का मामला भी चल रहा है, लेकिन उन्होंने बताया कि लड़की ने आधार कार्ड, वोटर आईडी और श्रम कार्ड दिया था उसमें वो बालिग थी। लेकिन, उसके परिजनों ने 10वीं की मार्कशीट के आधार पर उसे नाबालिग साबित करने की कोशिश की। उससे पहले लड़के को मुस्लिम बनने के लिए धमकाया गया।

लड़के ने मना कर दिया तो केस कर दिया गया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में जब से धर्मांतरण के खिलाफ कानून बना है, तब से वो लड़की को सबसे पहले जिलाधिकारी के पास भेजते हैं। वो वकीलों से जाकर लिखवाती हैं कि वो हिन्दू धर्म में आना चाहती हैं, फिर डीएम से अनुमति मिलने के बाद शादी होती है। धमकियों पर पंडित शंखधार कहते हैं कि जो लोग मानवता में विश्वास नहीं रखते उनसे उन्हें खतरा तो है। उन्होंने कहा कि वो महीने में 1 प्रतिशत ही घर से निकलते हैं और भगवान पर विश्वास रख कर अपना काम कर रहे हैं।

इस्लामी ब्रेनवॉश कितना खतरनाक? सौरव को पहले सलीम बनाया, फिर ‘आतंकी प्रोफेसर’; बीवी कह रही- मेरा रब लाएगा उन्हें बाहर

इस्लामी कट्टरपंथियों का ब्रेनवॉश कितना खतरनाक होता है, यह फिल्म द केरल स्टोरी (The Kerala Story) में दिखाया गया है। केरल में गैर मुस्लिम लड़कियों ने ब्रेनवॉश के बाद न केवल धर्म बदला, बल्कि इस्लामिक स्टेट जैसे खतरनाक आतंकी संगठन का हथियार भी बन गईं। इस खतरनाक ब्रेनवॉश का एक रूप मध्य प्रदेश में हिज्ब-उत-तहरीर (HUT) के पर्दाफाश के बाद भी सामने आया है। भोपल के सौरभ राजवैद्य को पहले मोहम्मद सलीम बनाया गया। फिर वह भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के मिशन पर चल निकला। अब उसके गिरफ्तार होने के बाद उसकी बीवी रायला कह रही है कि उसके शौहर को उसका रब बाहर लाएगा।

रायला का धर्मांतरण शादी के बाद सौरभ ने ही करवाया था। पहले उसका नाम मानसी हुआ करता था। HUT के कट्‌टरपंथी सरगना सौरभ उर्फ मोहम्मद सलीम की गिरफ्तारी के बाद से उसकी बीवी और दोनों बेटे (यूसुफ और इस्माइल) भी हैदराबाद में ATS की निगरानी में हैं। रायला का कहना है कि उसे इस्लाम कबूल करने का कोई मलाल नहीं है। इस समय वह मुश्किल में है, लेकिन उसे अल्लाह पर पूरा भरोसा है।

रायला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की रहने वाली है। भोपाल में कम्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है और एमबीए भी किया। 2010 में एक प्राइवेट कॉलेज में नौकरी करने के दौरान उसकी पहचान सौरभ से हुई थी। फिर दोनों ने शादी कर ली। दैनिक भास्कर से बातचीत में रायला ने सलीम पर देशद्रो​ह के आरोप को लेकर कहा, “पहली बात तो उन्हें सलीम नहीं, डॉक्टर सलीम कहिए। वह पीएचडी हैं और एक कॉलेज में नौकरी करते थे। उनके पास दूसरी चीजों के लिए वक्त ही नहीं था। एटीएस वाले सोच रहे हैं कि कुछ मिल जाए तो हम केस बना देंगे। क्या मिला मेरे घर से? बच्चों की बंदूकें उठाकर ले गए। आपने किसी का पूरा करियर बर्बाद कर दिया, कभी सोचा उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं उनका क्या होगा?”

सलीम की देश विरोधी गतिविधियों को लेकर जाँच एजेंसी के पास सबूत होने पर वह कहती है, “अगर ऐसा होता, तो मेरे शौहर मुझे कभी बताते नहीं? क्या मुझे उनकी गतिविधियों पर संदेह नहीं होता। हम केवल एक नॉर्मल सिटीजन की लाइफ जी रहे थे। केवल इस्लाम कबूल करने के कारण एटीएस हमें परेशान कर रही है। एटीएस ने मेरे शौहर की पीएचडी दाँव पर लगा दी, उनकी जॉब दाँव पर लगा दी। बताइए क्या हम अपने घर में सुरक्षित हैं? किताबें भी क्या हम उनसे पूछकर पढ़ें कि हमें क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है?”

शौहर सलीम पर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए रायला ने कहा, “उनके पास पॉवर है, तो क्या वे किसी भी आम इंसान की जिंदगी बर्बाद कर देंगे? अल्लाह के यहाँ क्या जवाब दोगे? लानत होगी इनको? औलादें इनकी भी हैं, जवाब इनको भी देना है।” उसने आगे कहा, “इन लोगों को मेरे बच्चों की बद्दुआ लगेगी। अल्लाह पर भरोसा है कि वो इस मुश्किल दौर उन्हें (सलीम) बाहर निकालेगा।”

कमाल ने किया ब्रेनवॉश, जाकिर नाईक ने धर्मांतरण

इससे पहले मीडिया को सौरभ के माता-पिता ने बताया था कि वीआईटी कॉलेज में पढ़ाने के दौरान सौरभ की मुलाकात प्रोफेसर कमाल से हुई थी। कमाल ने ही उसका ब्रेनवॉश किया और उसकी मुलाकात मुंबई ले जाकर जाकिर नाईक से करवाई। पिता के अनुसार, नाईक ने भोपाल में कई लोगों को कन्वर्ट किया था। उनके बेटे के धर्मांतरण में भी नाईक का हाथ था।

‘मंत्री सौरभ भारद्वाज के इशारे पर ऑफिस तोड़ा, संवेदनशील रिकॉर्ड की फोटोकॉपी हुई’: CM केजरीवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार की जाँच कर रहे सतर्कता अधिकारी का दावा

सतर्कता (Vigilance) के विशेष सचिव वाईवीवीजे राजशेखर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली के भ्रष्टाचार निरोधक शाखा और उपराज्यपाल कार्यालय को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अपने कार्यालय में रात में तोड़ने, आबकारी नीति की जाँच, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के नवीनीकरण और संवेदनशील फाइलों की फोटोकॉपी किए जाने की शिकायत की है।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने पिछले सप्ताह राजशेखर को हटा दिया था। इसके बाद 15-16 मई की रात 3 बजे दिल्ली सचिवालय में विशेष सचिव (सतर्कता) के कमरा नंबर 403 को तोड़ दिया गया था। पत्र में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि उनके कार्यालय की जासूसी की गई हो सकती है।

अपने पत्र में राजशेखर ने कहा कि दिल्ली सरकार के मंत्री (सतर्कता) सौरभ भारद्वाज ने सहायक निदेशकों को भ्रष्टाचार के मामलों से संबंधित फाइलों को सतर्कता अधिकारी को जमा नहीं करने का निर्देश दिया था। यह पत्र उनके पुरानी रिपोर्ट का अगला हिस्सा है।

पत्र में कहा गया है, “माननीय मंत्री के ये निर्देश जब दिनांक 15.05.2023 को पूर्वाह्न 11.30 बजे प्राप्त हुए, उस समय अधोहस्ताक्षरी के गोपनीय खंड में लगभग 76 फाइलें थीं। इन फाइलों को माननीय मंत्री (सतर्कता) के निर्देशानुसार जाँच किए बिना केवल रिकॉर्ड करने के लिए सचिव (सतर्कता) को भेज दिया गया था। ये ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि माननीय मंत्री ने अधोहस्ताक्षरी को फाइलों की जाँच नहीं करने का निर्देश दिया।”

राजशेखर का कहना है कि ‘principle of arms length’ के तहत किसी भी परिस्थिति में मंत्री को फाइलें स्थानांतरित करने का मानदंड नहीं है। इसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि मंत्री को सतर्कता अधिकारी की जाँच से दूरी बनाए रखनी चाहिए, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। हालाँकि, अपने-अपने काम को पूरा करने के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया।

सतर्कता अधिकारी का कहना है कि सहायक निदेशक (सतर्कता) बुनियाद सिंह ने 15 मई की रात 9:14 बजे उन्हें फोन किया और कहा कि अधिकारियों को कुछ रिकॉर्ड निकालने के लिए सतर्कता अधिकारी के कमरे को खोलने का निर्देश दिया गया है। राजशेखर का कहना है कि उन्होंने फोन पर ही सौरभ भारद्वाज द्वारा दिए गए इन निर्देशों का और फाइलों को ले जाने का कड़ा विरोध किया।

पत्र में कहा गया है, “हालाँकि, प्रारंभिक जाँच से समझा जा सकता है कि श्री मनीष (मल्टी टास्क स्टाफ) ने अधोहस्ताक्षरी का कमरा खोला है और कथित तौर पर 15 मई 2023 की रात से 16 मई 2023 की सुबह 3:00 बजे तक के सभी रिकॉर्ड की फोटोकॉपी की है। अधोहस्ताक्षरी निश्चित नहीं है कि क्या कोई रिकॉर्ड/फाइल ले ली गई थी या अन्यथा उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी या फोटोकॉपी की गई थी। वर्तमान परिदृश्य में यह एक गंभीर चूक है।”

राजशेखर का कहना है कि ऑफिस में निम्नलिखित फाइलें थीं:

(1) आबकारी मामलों और नीति में पीओसी अधिनियम 1998 की धारा 17 ए के तहत मंजूरी देने के लिए सीबीआई की प्रस्ताव फाइल।

(2) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस की निविदा फाइलें और नियम एवं शर्तें।

(3) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस की अनुवर्ती परिवर्तन और अतिरिक्त फाइलें।

(4) ठेकेदारों द्वारा 6 फ्लैग स्टाफ से संबंधित जमा किए गए चालानों के संबंध में पीडब्ल्यूडी द्वारा किए गए भुगतानों के संबंधित पुस्तिकाएँ।

(5) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस की निविदा आमंत्रित करने की सूचना संबंधी फाइलें।

(6) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस की डेविएशन फाइलें।

(7) 6 फ्लैगस्टाफ, सिविल लाइंस के बेहतर विनिर्देशों के लिए संशोधित अतिरिक्त मद।

(8) 6 फ्लैग स्टाफ, सिविल लाइंस के निर्माण का पर्यवेक्षण करने वाले व्यक्तियों की तस्वीरें।

(9) “Talk to A.K. File” (DIP)

(10) सामान्य कारण से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले और बिलों के अवैध भुगतान के संबंध में डीआईपी मामले।

(11) विभागों से संबंधित कुछ फाइलें, जहाँ मामला मौजूदा प्रावधानों/नियमों के तहत केंद्रीय जाँच एजेंसियों को भेजा गया था।

(12) आबकारी नीति के संदर्भ में आबकारी विभाग के अधिकारियों के अभियोजन स्वीकृति आदि से संबंधित अन्य विभिन्न फाइलें/दस्तावेज।

पत्र में आगे कहा गया है, “अधोहस्ताक्षरी आशंकित है कि रिकॉर्ड नष्ट कर दिए जाएँगे या समय के साथ आगे नष्ट हो सकते हैं।” राजशेखर ने कहा कि उन्होंने सभी सतर्कता निदेशकों को इस तरह के निर्देशों का पालन नहीं करने का निर्देश दिया था, क्योंकि उन्हें मंत्री से मौखिक आदेश नहीं लेना चाहिए जब तक कि वे आपातकाल की स्थिति में न हों।

पत्र में कानून का हवाला देते हुए सतर्कता अधिकारी का कहना है कि जब तक लिखित में निर्देश नहीं दिए जाते, तब तक सतर्कता विभाग के अधिकारियों को जाँच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मंत्री को कोई फाइल/दस्तावेज उपलब्ध नहीं करानी चाहिए।

पत्र में आगे लिखा गया है, “मुझे गंभीर आशंका है कि हमारे कमरों में सेंध लगी हो सकती है और गोपनीयता भंग होने, अभिलेखों में छेड़छाड़, रिकॉर्ड में हेरफेर आदि की पूरी आशंका है। मैं वरिष्ठ अधिकारियों से जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ। इस दौरान अधोहस्ताक्षरी ने दिल्ली सचिवालय के सहायक निदेशक (केयर टेकिंग) और दिल्ली पुलिस प्रभारी निरीक्षक को कड़ी हिदायत दी थी कि अधोहस्ताक्षरी की अनुमति के बिना उसके कमरे और गोपनीय अनुभाग, जहाँ सिस्टम मौजूद हैं, में किसी को छुने या प्रवेश करने नहीं दिया जाए।”

दिल्ली सरकार का कहना है कि संबंधित अधिकारी को उसके कर्तव्यों से वंचित कर दिया गया था, क्योंकि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप थे। सरकार ने कुछ फाइलों को अपने पास रखने में राजशेखर की ‘रुचि’ पर सवाल उठाया। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने यह भी कहा कि इसके बावजूद ब्रेक-इन के आरोपों की गहन जाँच की जाएगी।

दिल्ली सरकार ने अपने बयान में कहा, “उनके खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं कि वह प्रोटेक्शन मनी की माँग करते हैं। आधिकारिक तौर पर 13 मई को उनसे काम छीन लिया गया…। अगर उनसे आधिकारिक तौर पर काम वापस ले लिया गया है… तो फिर भी उनके पास सभी फाइलें कैसे हैं? जब उसका काम अन्य अधिकारियों को सौंपा जाता है तो कार्यालय प्रक्रिया की माँग होती है कि उसे आधिकारिक रूप से सभी फाइलों को नए अधिकारियों को सौंप देना चाहिए।”

दिल्ली सरकार ने आगे कहा, “उन्हें हटाए जाने के बावजूद कुछ फाइलों को रखने में उनकी क्या दिलचस्पी है? उनके इस आरोप के बारे में कि किसी ने रात में उनके कार्यालय में घुसने की कोशिश की, सरकार इसकी पूरी जाँच करवाएगी कि यह सच है या नहीं। अगर यह सच है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अधिकारी से उनके सभी कर्तव्यों को ‘वापस’ ले लिया था

आप मंत्री सौरभ भारद्वाज ने विशेष सचिव सतर्कता वाईवीवीजे राजशेखर को हटा दिया था। उन्होंने शराब घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले की जाँच की थी, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी निजी हवेली बनाने के लिए करदाताओं का करोड़ों का पैसा खर्च किया था। भारद्वाज ने दावा किया था कि अधिकारी पर भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोप थे।

13 मई के एक नोट में, भारद्वाज ने कहा, “ऐसी शिकायतें हैं कि वाईवीवीजे राजशेखर जबरन वसूली का रैकेट चला रहे हैं और सुरक्षा के लिए पैसे की माँग कर रहे हैं। यह आरोप काफी गंभीर है, जिसकी जाँच किए जाने की जरूरत है… वाईवीवीजे राजशेखर को सौंपे गए सभी काम एतदद्वारा वापस लिए जाते हैं।”

भारद्वाज ने सतर्कता विभाग को यह कहते हुए अतिरिक्त निदेशकों (एडी) के बीच राजशेखर द्वारा जाँच किए जा रहे मामलों और कार्यों को वितरित करने का निर्देश दिया है कि एडी सीधे सचिव (सतर्कता) को रिपोर्ट करेंगे। आदेश में आगे कहा गया है: “एडी को सीधे सचिव (सतर्कता) के सामने फाइलें रखनी चाहिए।”

वहीं, राजशेखर के करीबी अधिकारियों का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों में जाँच एजेंसियों ने उन्हें बरी कर दिया था। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने दावा किया, “उसे निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वह पिछले एक दशक से विभिन्न सरकारी संगठनों में प्रवर्तन और सतर्कता विभागों में तैनात हैं और उन्होंने कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।” जब राजशेखर को उनके कर्तव्यों से वंचित किया गया था तो उन्होंने कहा था कि AAP सरकार द्वारा उठाया गया कदम अवैध है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने जवाब में राजशेखर ने कहा कि उन्हें विभाग से ‘अवैध रूप से स्थानांतरित’ करना ‘शीर्ष अदालत के निर्देशों को पलटने के अलावा कुछ नहीं है, क्योंकि अधिकारियों को केवल सिविल सेवा बोर्ड के विचार-विमर्श के माध्यम से स्थानांतरित किया जा सकता है’।

गृहमंत्रालय और एलजी को भेजे गए पत्र में कहा गया है, “अधोहस्ताक्षरी (राजशेखर) को कर्तव्यों का पालन करने से रोका जा रहा है और मुझे आबकारी मामले, 6 फ्लैग स्टाफ रोड, सिविल लाइंस, डीआईपी (सूचना और प्रचार विभाग) जैसे संवेदनशील मामलों से संबंधित रिकॉर्ड के गंभीर खतरे और हेरफेर की आशंका है … अनुरोध है कि मंत्री (सतर्कता) द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाने के लिए इस मामले को उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाए।” बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री आवास के जीर्णोद्धार की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और कथित रूप से एलजी को भेजी जाने वाली है।

AAP सरकार के खिलाफ राजशेखर द्वारा जाँच किए जाने वाले मामले

राजशेखर कई अन्य मामलों की जाँच कर रहे थे, जिनमें आबकारी विभाग की चार्जशीट और पीओसी (भ्रष्टाचार निवारण) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत उनकी मंजूरी, एक अलग खुफिया इकाई की स्थापना से संबंधित एफबीयू मामला, राजनीतिक विज्ञापनों पर अधिक खर्च एवं भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं।

दिल्ली की AAP सरकार द्वारा मोहल्ला क्लीनिकों के लिए किराए के स्थानों में AAP कार्यकर्ताओं का फेवर, शराब घोटाला और अरविंद केजरीवाल द्वारा करदाताओं के पैसे से अपनी महलनुमा हवेली के निर्माण आदि मामले भी इसमें शामिल हैं।

टी राजा सिंह की BJP में होगी वापसी? किशन रेड्डी के सिग्नल से गदगद हुए MLA , कहा- ओवैसी को उसकी ही भाषा में मिलेगा जवाब

तेलंगाना के गोशमहल से विधायक टी राजा सिंह की बीजेपी में वापसी हो सकती है। उन्हें अगस्त 2022 में पार्टी ने निलंबित कर दिया था। केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने उनकी पार्टी में वापसी के संकेत दिए हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में टी राजा ने इस पर खुशी जताई है। साथ ही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और तेलंगाना की सत्ताधारी दल को उनकी भाषा में ही जवाब देने की बात कही है।

समाचार चैनल ABN आंध्रा को दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान रेड्डी से राजा सिंह के निलंबन पर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “निलंबन नियमों के तहत किया गया था। 100% निलंबन हटाएँगे। ये फैसला केंद्रीय पदाधिकारी लेंगे। इसमें हम भी बात कर रहे हैं और केंद्रीय पदाधिकारियों को सारी बात बता रहे हैं। जल्द से जल्द सस्पेंशन हटेगा।”

ऑपइंडिया से बात करते हुए टी राजा सिंह ने कहा कि वे किशन रेड्डी के उस बयान का स्वागत करते हैं जिसमें उनके निलंबन को समाप्त करने की बात कही गई है। निलंबित होते हुए भी वे बीजेपी की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। निलंबन समाप्त होने के बाद खुलकर पार्टी को मजबूत करेंगे। उन्होंने जल्द बीजेपी में अपनी वापसी की उम्मीद जताई है।

BJP को कायम रहना होगा हिंदुत्व पर

बताते चलें कि टी राजा सिंह हैदराबाद की गोशमहल विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार भाजपा के सिंबल पर चुनाव जीत चुके हैं। जिस वीडियो को लेकर उनपर FIR दर्ज हुई थी, उसको लेकर उन्होंने कहा है, “मैंने जो कहा सत्य कहा। कुछ गलत नहीं कहा।” उन्होंने बताया, “मुख्यमंत्री KCR का जो बेटा म्युनिसिपल कार्पोरेशन मंत्री है, उसने मुनव्वर फारुखी का कार्यक्रम जान-बूझकर करवाया था। इस कार्यकम का मकसद हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाना था।”

अब राजस्थान के जैसलमेर में पाकिस्तानी हिंदुओं को उजाड़ा, रिपोर्ट में बताया- IAS टीना डाबी के आदेश के बाद घरों पर चला बुलडोजर

राजस्थान के जैसलमेर में पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थियों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया है। यह कार्रवाई वहाँ की DM (जिलाधिकारी) टीना डाबी के आदेश पर की गई है। बुलडोजर चलाने से पहले क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। मंगलवार (16 मई 2023) को हुई ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के बाद महिलाएँ और बच्चे सड़क पर रहने को मजबूर हैं। पिछले ही महीने जोधपुर में भी पाकिस्तानी शरणार्थियों की एक बस्ती पर स्थानीय प्रशासन द्वारा इसी तरह की कार्रवाई हुई थी।

इंडिया TV के मुताबिक जैसलमेर के अमर सागर इलाके में लम्बे समय से कई शरणार्थी हिंदू परिवार रह रहे थे। वे पाकिस्तान में उत्पीड़न से परेशान होकर परिवार सहित यहाँ आकर बसे थे। बस्ती को खाली कराने के आदेश का पालन करने के लिए UIT के सहायक इंजिनीयर मंगलवार को भारी पुलिस बल के साथ पहुँचे थे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जैसलमेर शहर से अमरसागर केवल 5 किमी दूर है। यहाँ के सरपंच ने जिला कलेक्टर और यूआईटी से ग्राम पंचायत की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर कई बार शिकायत की थी।

बताया जा रहा है कि जब शरणार्थियों के घरों पर प्रशासन के बुलडोजर चलने लगे तब वहाँ रहने वाली महिलाओं ने इसका विरोध किया। हालाँकि उनका विरोध काम नहीं आया और पुलिस बल ने उन्हें हटा दिया। घर गिरने के बाद कई शरणार्थी हिंदू परिवार बेघर हो कर खुले आसमान के नीचे आ गए। भीषण गर्मी में उनके घरों की महिलाओं और बच्चों का भी बुरा हाल हो गया। जैसलमेर प्रशासन की इस इस कार्रवाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जोधपुर में भी हुई थी ऐसी ही कार्रवाई

जैसलमेर जैसी ही कार्रवाई 24 अप्रैल 2023 को जोधपुर में भी हुई थी। वहाँ चोखा गाँव में जोधपुर विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के नाम पर शरणार्थी हिन्दुओं के घरों पर बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई के शिकार हुए अधिकतर लोगों के पास भारत में रहने के लिए लॉन्ग टर्म वीजा तो है, लेकिन अब तक उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है।

मुस्लिम युवती से हुआ प्यार, शादी की, बाप बना… फिर एक दिन ससुराल में पीट-पीटकर कर दी गई राजू सैनी की हत्या: MP के खंडवा की घटना

मध्य प्रदेश के खंडवा में मुस्लिम लड़की से लव मैरिज करने वाले हिन्दू युवक की हत्या कर दी गई है। युवक को शनिवार (13 मई 2023) को उसकी ससुराल में बुरी तरह से पीटा गया था। पिटाई मृतक के ससुर, साले और सास ने मिलकर की थी। मंगलवार (16 मई 2023) को अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप लगे हैं। फ़िलहाल 2 आरोपितों को कस्टडी में लेकर पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला खंडवा के सिंगोट इलाके का है। यहाँ राजस्थान के सीकर जिले से जितेंद्र उर्फ़ राजू सैनी तीन साथियों के साथ 3 साल पहले एक होटल पर काम करने आया था। राजू सैनी की मुलाकात खंडवा की अमरीन से हुई। दोनों में पहले बातचीत हुई और बाद में प्यार हो गया। परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर राजू और अमरीन ने शादी कर ली। शादी के बाद राजू सैनी अमरीन को ले कर सीकर स्थित अपने गाँव खण्डेल चला गया।

तब अमरीन के परिवार वालों ने पिपलौद थाने में गुमशुदगी का केस दर्ज करवाया था। पुलिस ने अमरीन को तलाशना शुरू किया तो उसकी लोकेशन सीकर में मिली। तब तक अमरीन एक बेटी की माँ बन चुकी थी। पुलिस ने अमरीन को बरामद कर कोर्ट में पेश किया। अदालत में अमरीन ने खुद को बालिग बताते हुए राजू सैनी के ही साथ रहने की इच्छा जताई। कोर्ट ने भी दोनों को एक साथ रहने की अनुमति दे दी थी।

बताया जा रहा है कि कुछ समय बाद अमरीन ने अपने मायके वालों से मिलने की इच्छा जताई। इस पर राजू सैनी ने उसे उसके मायके लाकर छोड़ दिया। थोड़े समय बाद जब राजू अपनी बेटी और बीवी को लेने ससुराल गया, तब उसे भगा दिया गया। राजू ने स्थानीय थाना पिपलौद में इसकी शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन उसकी गुहार पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बावजूद राजू लगभग 25 दिनों तक अपनी ससुराल सिंगोट के आसपास ही रहा। वह अपनी तरफ से अपनी बेटी और बीवी को वापस पाने की कोशिशें करता रहा।

जानकारी के मुताबिक 13 मई को राजू अपनी ससुराल गया। यहाँ उसने अपनी बीवी और बेटी को साथ भेजने की माँग की। आरोप है कि राजू को उसकी सास मुन्नीबाई, ससुर मुमताज और साले ने बेरहमी से पीटा। इस पिटाई से राजू की हालात खराब हो गई। वह पिपलौद थाने पहुँचा जहाँ उसकी शिकायत फिर से नहीं सुनी गई। राजू को उसी दिन जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इलाज के दौरान मंगलवार (16 मई) को उसने दम तोड़ दिया। हिंदू जागरण मंच ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। खंडवा के SP सत्येंद्र कुमार के मुताबिक मृतक के सास, ससुर और साले के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर जाँच की जा रही है। अब तक 2 आरोपितों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

गोरी, कुतुबुद्दीन, रजिया, लोदी, तुगलक, खिलजी… काशी को सबने लूटा-तोड़े मंदिर: इस्लामी आक्रांता बार-बार ध्वस्त करते रहे, हिंदू करते रहे पुनर्निर्माण

ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वेक्षण कराने को लेकर दायर याचिका पर वाराणसी कोर्ट 22 मई 2023 को सुनवाई करेगी। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एएसआई को परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग के निर्देश दिए थे। इस्लामी आक्रांताओं ने ज्ञानवापी ही नहीं बल्कि काशी के कई हिस्सों में मंदिरों को तोड़कर उस पर मस्जिद बनवाई थी।

मुहम्मद गोरी ने 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में एक के बाद एक लूट और विध्वंस की घटनाओं को अंजाम दिया। सन् 1193 में कन्नौज के राजा जयचंद और कुतुबुद्दीन ऐबक के बीच यमुना नदी के किनारे चंदावर (अभी फिरोजाबाद) में एक भीषण युद्ध हुआ, जिसमें जयचंद की मृत्यु हो गई। पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी के बीच हुए युद्ध में इस्लामी सेना की जबरदस्त हार हुई थी, लेकिन अगले एक वर्ष में ही वो दोबारा लौटा और पृथ्वीराज चौहान की हार के साथ ही दिल्ली में इस्लामी सत्ता की स्थापना हो गई।

जयचंद के खिलाफ युद्ध में खुद मुहम्मद गोरी और कुतुबुद्दीन ऐबक अपनी-अपनी फ़ौज के साथ था। जयचंद का कटा हुआ सिर इन दोनों इस्लामी शासकों के सामने लाया गया। इसके बाद, मुहम्मद गोरी वाराणसी की तरफ बढ़ा। पृथ्वीराज चौहान और जयचंद जैसे हिन्दू राजाओं की मृत्यु के बाद वाराणसी को बचाने वाला शायद ही कोई था। वाराणसी में लूटपाट का भयंकर मंजर देखने को मिला। मंदिर के मंदिर तोड़ डाले गए। वाराणसी न सिर्फ एक धार्मिक नगरी थी, बल्कि व्यापार और वित्त का भी बड़ा केंद्र था। ऐसे में मुहम्मद गोरी ने मनमाने ढंग से लूटपाट मचाई। कहते हैं, यहाँ से लूटे हुए माल को ले जाने के लिए उसे 1400 ऊँटों की ज़रूरत पड़ी थी।

काशी विश्वनाथ मंदिर को भी इसी दौरान ध्वस्त किया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी उठाई। कन्नौज के राजा जयचंद्र के पुत्र हरीशचंद्र और आम लोगों ने जब मंदिर का निर्माण पुनः शुरू कर दिया, तब कुतुबुद्दीन ऐबक ने 4 वर्षों बाद फिर से अपनी फ़ौज के साथ हमला किया और भारी तबाही मचाई। कुतुबुद्दीन ऐबक ने विश्वेश्वर, अविमुक्तेश्वर, कृतिवासेश्वर, काल भैरव, आदि महादेव, सिद्धेश्वर, बाणेश्वर, कपालेश्वर और बालीश्वर समेत सैकड़ों शिवालयों को तबाह कर दिया। इस तबाही के कारण अगले पाँच-छः दशकों तक ये मंदिर इसी अवस्था में रहे।

तुर्कों का शासन था और दिल्ली में उनकी स्थिति और मजबूत ही होती जा रही थी। ऐसे में कुछेक साधु-संतों के अलावा धर्म की मशाल को ज़िंदा रखने वाले लोग कम ही बचे थे। काशी वही है, जिसके बारे में 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेन सांग ने वर्णन किया है कि उसने यहाँ सैकड़ों शिव मंदिर देखे और हजारों साधु-श्रद्धालु भी अपने शरीर पर भस्म मल कर घूमते हुए उसे दिखे। उसने एक 30 मीटर ऊँची शिव प्रतिमा का भी जिक्र किया है।

हालाँकि, 13वीं शताब्दी के मध्य में ही मुहम्मद गोरी की मौत हो गई और कुतुबुद्दीन ऐबक भी इस दशक के अंत तक मर गया। लेकिन, दिल्ली सल्तनत का काशी पर कब्ज़ा जारी रहा। इसके बाद इल्तुतमिश और फिर उसकी बेटी रजिया सुल्तान का शासन हुआ। जिस रजिया सुल्तान को ‘बहादुर महिला’ बता कर वर्षों तक पढ़ाया जाता रहा उसने भी काशी में मंदिरों को ध्वस्त कर विश्वनाथ मंदिर परिसर में ही एक मस्जिद बनवाई थी। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘रजिया मस्जिद’ की जगह भी कभी मंदिर ही हुआ करता था।

इसके बाद सन् 1448 में मुहम्मद शाह तुगलक ने आसपास के छोटे-बड़े मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया और रजिया मस्जिद को और बड़ा बना दिया। काशी के प्राचीन इतिहास को पढ़ें तो पता चलता है कि यहाँ कई पुष्कर थे, जिन्हें व्यवस्थित ढंग से तबाह कर इस्लामी शासकों ने मस्जिद बनवाए। हालाँकि, उससे पहले 13वीं सदी में हिन्दुओं ने फिर से मंदिर को बना कर खड़ा कर दिया था। इसे हिन्दुओं की जिजीविषा कहें या फिर श्रद्धा, इतने अत्याचार और खून-खराबे के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। इस्लामवादी लगातार मंदिरों को तोड़ते रहे और हिंदू पुनर्निर्माण में लगे रहे।

इन्हीं मंदिरों में से एक था पद्मेश्वर मंदिर, जिसे काशी विश्वनाथ मंदिर के सामने ही बनवाया गया था। हालाँकि, 1296 ईस्वी में बने पद्मेश्वर मंदिर को भी 15वीं शताब्दी के मध्य में तोड़ डाला गया। पद्म नाम के एक साधु ने इसका निर्माण करवाया था। आप जानते हैं कि ये मंदिर अब कहाँ है? इसके ऊपर ही लाल दरवाजा मस्जिद बनवा दिया गया, जिसे आज भी शर्की सुल्तानों का भव्य आर्किटेक्चर बता कर प्रचारित किया जाता है। फिरोजशाह तुगलक से लेकर सिकंदर लोदी तक, कई इस्लामी सुल्तानों ने काशी में मंदिरों को बारम्बार ध्वस्त किया। सन् 1494 में सिकंदर लोदी ने काशी में कई ऐसे मंदिर तोड़े, जिनका पुनर्निर्माण हिंदुओं ने अपने खून-पसीने से किया था।

सन् 1514-1594 के कालखंड में ही जगद्गुरु नारायण भट्ट हुए, जिन्होंने अपनी पुस्तक ‘त्रिस्थली’ में काशी के विश्वनाथ मंदिर के बारे में लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि अगर म्लेच्छों ने शिवलिंग को हटा दिया है तो वो खाली जगह ही हमारे लिए पवित्र है और उसकी पूजा की जानी चाहिए, अथवा कोई और शिवलिंग स्थापित किया जाना चाहिए। उनके शुरुआती जीवनकाल में मंदिर नहीं बना था, इससे ये पता चलता है। तुगलक और लोदी के विध्वंस से वाराणसी नहीं उबरी थी।

वो नारायण भट्ट ही थे, जिनकी प्रेरणा से राजा टोडरमल ने काशी में पुनः भव्य विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। आज जिस ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को आप देख रहे हैं, उसे औरंगजेब ने इसी मंदिर को तोड़ कर इसके ऊपर बनवाया था। काशी की मुक्ति के प्रयास लगातार चलते रहे और यहाँ पूजा-पाठ भी नहीं रोका गया। बार-बार आक्रमण के बावजूद काशी में पुनर्निर्माण चलता रहा। अब यदि अयोध्या के बाबरी ढाँचे की ही तरह पूरे ज्ञानवापी परिसर का सर्वे हो जाए तो हिंदुओं को एक और बार मंदिर के पुनर्निर्माण का सौभाग्य प्राप्त होगा।

पश्चिम बंगाल की अवैध फैक्ट्री में धमाका, 9 की मौत: बीजेपी ने की NIA जाँच की माँग, कहा – किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में मंगलवार (16 मई, 2023) को अवैध पटाखे की फैक्ट्री में धमाका हो गया। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बंगाल यूनिट ने मामले में एनआईए (NIA) जाँच की माँग की है। इसे लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को खत लिखा है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने लिखा है कि पूर्वी मेदिनीपुर के एगरा में हुए बम धमाके की जाँच NIA से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। सुकांत ने आगे लिखा कि घटनास्थल के आसपास कई अवैध पटाखे बनाने वाली फैक्ट्रियाँ हैं। इस तरह की घटनाएँ इलाके के लोगों की सुरक्षा के लिए चिंताजनक हैं। बीजेपी नेता ने आगे लिखा है कि घटना के संदर्भ में यह जानना जरूरी है कि यह किसी ऐसे नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं जो गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त है।

सुकांत मजूमदार का कहना है कि राज्य में पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ऐसे में अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से दखल देने और एनआईए जाँच की अपील की है।

दूसरी तरफ पूर्वी मेदिनीपुर के एसपी अमरनाथ के. ने कहा है कि इस फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। पहले भी यहाँ पुलिस ने छापा मारा था और फैक्ट्री के खिलाफ केस दर्ज किया हुआ था। एक हफ्ते पहले भी पुलिस ने फैक्ट्री पर रेड मारा था लेकिन कुछ भी नहीं मिला था। धमाके के बाद अब तक 9 शव निकाले जा चुके हैं। तलाशी अभियान अब भी जारी है।

बता दें घटनास्थल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक धमाका इतना शक्तिशाली था कि जिस रिहायशी इमारत में यह फैक्ट्री चलाई जा रही थी वह पूरी तरह ढह गई। वीडियो में धमाके के बाद जली हुई फैक्ट्री और खेतों व आस पास के इलाके में पड़े अधजले शव देखे जा सकते हैं। सीएम ममता ने मृतकों के परिजनों को ढाई-ढाई लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

पानि में माछ आ नौ कुट्टी बखरा… क्या कर्नाटक और कॉन्ग्रेस को चैन से जीने देगी खुशफहमी वाला ये जनादेश

16 मई 2023 का दिन भी बीत गया। कॉन्ग्रेस कर्नाटक के लिए मुख्यमंत्री (Karnataka CM) का नाम तय नहीं कर पाई। नतीजों के बाद से ही इस पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) और कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के बीच प्रतिस्पर्धा बताई जा रही है। पर अब लिंगायत समुदाय (Lingayat community) भी इस पर दावा कर रहा है। यहाँ तक कि डिप्टी सीएम पद के लिए भी दावेदारी जताई जा रही है।

कर्नाटक में लिंगायत प्रभावशाली समुदाय हैं। कर्नाटक की राजनीति में येदियुरप्पा के उभार के बाद से वे बीजेपी समर्थक माने जाते रहे हैं। लेकिन इस बार कई लिंगायत प्रभाव वाली कुछ सीटों पर भी ​बीजेपी को पराजय मिली है। अखिल भारतीय वीरशैव महासभा (All India Veerashaiva Mahasabha) ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर इसकी ‘कीमत’ माँगी है।

15 मई को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस ने 46 लिंगायत उम्मीदवार चुनाव में उतारे थे। इनमें से 34 ने जीत हासिल की है। लिंगायत समुदाय ने अन्य 50 सीटों पर कॉन्ग्रेस की जीत में प्रमुख भूमिका निभाई है। लिंगायत समुदाय ने ऐसा भाजपा से अपनी वफादारी को कॉन्ग्रेस की तरफ मोड़कर किया है। वीरशैव महासभा कलबुर्गी के अध्यक्ष अरुण कुमार पाटिल ने कहा है, “लिंगायत समुदाय की मदद से कॉन्ग्रेस जीती है। 39 विधायक लिंगायत हैं। लिंगायत समुदाय से आने वाले कई नेता मुख्यमंत्री पद के योग्य हैं। ऐसे में हमने अपने समुदाय के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने का आग्रह किया है।”

लिंगायत की तरह ही वोक्कालिगा (vokkaliga community) भी कर्नाटक में प्रभावशाली समुदाय है। वे इस विधानसभा चुनाव से पहले जेडीएस के परंपरागत वोटर माने जाते थे। लेकिन इस बार उन्होंने भी जेडीएस से कॉन्ग्रेस की ओर शिफ्ट किया है। इसकी वजह डीके शिवकुमार का वोक्कालिगा होना और कॉन्ग्रेस की जीत पर उनके मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना ही बताई जा रही है।

लेकिन कॉन्ग्रेस की परेशानी केवल मुख्यमंत्री चुनने तक ही सीमित नहीं है। उपमुख्यमंत्री पद के लिए भी दावेदारी शुरू हो गई है। बेलगावी उत्तर के विधायक आसिफ सैत का कहना है कि कर्नाटक कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जारकीहोली को डिप्टी सीएम बनाया जाना चाहिए। जमीर अहमद खान और रामलिंगा रेड्डी को भी डिप्टी सीएम बनाने की माँग हो रही है।

कर्नाटक रेड्डी जनसंघ का कहना है कि रामलिंगा रेड्डी उनके समुदाय के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वे शिवकुमार और सिद्धारमैया की तुलना में ज्यादा बार विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं। अपनी माँग नजरंदाज किए जाने पर समुदाय के कड़े विरोध की चेतावनी भी कॉन्ग्रेस को दी है। इसी तरह जमीर अहमद खान के समर्थन में भी कोप्पल जिले के गंगावती में मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया है।

कर्नाटक वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शफी सादी भी उपमुख्यमंत्री पद पर मुस्लिम की दावेदारी जता चुके हैं। इतना ही नहीं वे गृह, राजस्व, स्वास्थ्य जैसे 5 खास विभाग के मंत्री भी मुस्लिम चाहते हैं।

इस खींचतान के बीच सवाल यह नहीं रहा कि कॉन्ग्रेस किसे मुख्यमंत्री चुनती है? ​कितने डिप्टी सीएम बनाती है? या फिर मंत्रिमंडल में किनको जगह मिलती है? सवाल है कि कॉन्ग्रेस को स्पष्ट जनादेश देकर भी कर्नाटक की जनता ने क्या हासिल किया? हमने ऐसी ही स्थिति में मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को कॉन्ग्रेस छोड़ते और कमलनाथ की सरकार गिरते देखा है। इसी स्थिति के कारण हमने राजस्थान को अशोक गहलोत और सचिन पायलट तथा छत्तीसगढ़ को भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के शीतयुद्ध में पिसते देखा है।

क्या गारंटी है कि शिवकुमार या सिद्धारमैया में से जिसे नेतृत्व का अवसर नहीं मिलेगा, वो इसी तरह की स्थिति पैदा नहीं करेंगे? भले शिवकुमार आज मीडिया पर केस करने की बात कर रहे हैं। कह रहे हैं कि वे ब्लैकमेल नहीं करेंगे। पीठ में छुरा नहीं घोपेंगे। लेकिन इसके साथ ही वे यह भी कह रहे हैं कि सीएम की कुर्सी कोई पैतृक संपत्ति नहीं है जिसका बँटवारा हो। यह भी कहा है कि जब पार्टी संकट में थी तो उन्होंने जिम्मेदारी ली थी और कर्नाटक जीत कर आलाकमान को दिया है। वहीं ​मीडिया रिपोर्टों की माने तो सिद्धारमैया कम से कम शुरुआती दो साल सीएम रहना ही चाहते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि ज्यादातर विधायक उनके ही समर्थक हैं। सिद्धारमैया वैसे भी जेडीएस छोड़कर कॉन्ग्रेस में आए हुए नेता हैं। ऐसे में किसी दल से तलाक ले लेना उनके लिए नई बात नहीं होगी।

मैथिली में एक कहावत है पानि में माछ आ नौ कुट्टी बखरा यानी पानी से मछली बाहर लाया नहीं गया और बँटवारा हो गया। इसका मतलब होता है कुछ प्राप्त होने से पहले ही खुशफहमी पाल लेना! दरअसल कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को मिला जनादेश कुछ समुदायों और एक विशेष मजहब की इसी तरह की खुशफहमियों की उपज है। कॉन्ग्रेस की मजबूरी है कर्नाटक को मुख्यमंत्री देना। वह देगी भी। लेकिन सत्ता रूपी मछली में हिस्सेदारी की पहले से ही खुशफहमी पाले बैठे हिस्सेदार, क्या मनवांछित हिस्सेदारी नहीं मिलने पर कॉन्ग्रेस और कर्नाटक को चैन से जीने देंगे।

बिना बाप की हिंदू बच्ची को मोहम्मद हसन ने लिया गोद, 1 साल तक करता रहा बलात्कार: अब सुनाई गई 20 साल जेल की सज़ा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में गोद ली हुई बेटी से दुष्कर्म के मामले में आरोपित मोहम्मद हसन उर्फ पप्पू को 20 साल की सजा सुनाई गई है। पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपित हसन को 41 दिनों में सजा सुनाई गई। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने हिंदू मजदूर की बेटी को गोद लिया था। करीब साल भर से वह बच्ची के साथ दुष्कर्म कर रहा था। मोहम्मद हसन को सजा होने के बाद पीड़िता को नारी निकेतन भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 8 साल पहले मोहम्मद हसन ने क्वार्सी में एक भट्ठे से तीन साल की हिंदू बच्ची को गोद लिया था। वह बच्ची को अपने घर ले आया। उसने अपने मजहब के अनुसार उसका नाम रखा। पिछले एक साल से पप्पू नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म कर रहा था। 25 अक्टूबर 2022 को हसन की पुत्रवधू ने बच्ची के साथ कुकर्म करते देख लिया। जिसके बाद उसने शोर मचा दिया।

मामले की जानकारी मिलने के बाद क्वार्सी के एक समाजसेवी मोहन चौहान ने मोहम्मद हसन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने पीड़िता के मेडिकल के आधार पर दुष्कर्म की धाराओं में चार्जशीट लगाई। सुनवाई के दौरान सबूतों और बच्ची की गवाही के आधार पर न्यायालय ने आरोपित मोहम्मद हसन को दोषी करार देकर बीस साल कैद और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने जुर्माने की रकम में से 40 हजार रुपए पीड़िता को देने के निर्देश दिए। बता दें 4 अप्रैल 2023 को मामले में चार्जशीट फाइल हो गई थी। इसके बाद सिर्फ 16 तारीखों (41 दिन) में अदालत ने 15 मई को बलात्कार आरोपित को सजा सुना दी।

50 वर्षीय आरोपित मोहम्मद हसन चार बच्चों का बाप है। उसके दो बेटे और दो बेटियाँ हैं। उधर पीड़िता की देखभाल करने वाला कोई नहीं मिला। जिसके बाद उसे कानपुर के नारी निकेतन में भेज दिया गया। अब भी पीड़िता नारी निकेतन में ही रह रही है।