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अब राजस्थान के जैसलमेर में पाकिस्तानी हिंदुओं को उजाड़ा, रिपोर्ट में बताया- IAS टीना डाबी के आदेश के बाद घरों पर चला बुलडोजर

राजस्थान के जैसलमेर में पाकिस्तान से आए हिन्दू शरणार्थियों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया है। यह कार्रवाई वहाँ की DM (जिलाधिकारी) टीना डाबी के आदेश पर की गई है। बुलडोजर चलाने से पहले क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। मंगलवार (16 मई 2023) को हुई ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के बाद महिलाएँ और बच्चे सड़क पर रहने को मजबूर हैं। पिछले ही महीने जोधपुर में भी पाकिस्तानी शरणार्थियों की एक बस्ती पर स्थानीय प्रशासन द्वारा इसी तरह की कार्रवाई हुई थी।

इंडिया TV के मुताबिक जैसलमेर के अमर सागर इलाके में लम्बे समय से कई शरणार्थी हिंदू परिवार रह रहे थे। वे पाकिस्तान में उत्पीड़न से परेशान होकर परिवार सहित यहाँ आकर बसे थे। बस्ती को खाली कराने के आदेश का पालन करने के लिए UIT के सहायक इंजिनीयर मंगलवार को भारी पुलिस बल के साथ पहुँचे थे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जैसलमेर शहर से अमरसागर केवल 5 किमी दूर है। यहाँ के सरपंच ने जिला कलेक्टर और यूआईटी से ग्राम पंचायत की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर कई बार शिकायत की थी।

बताया जा रहा है कि जब शरणार्थियों के घरों पर प्रशासन के बुलडोजर चलने लगे तब वहाँ रहने वाली महिलाओं ने इसका विरोध किया। हालाँकि उनका विरोध काम नहीं आया और पुलिस बल ने उन्हें हटा दिया। घर गिरने के बाद कई शरणार्थी हिंदू परिवार बेघर हो कर खुले आसमान के नीचे आ गए। भीषण गर्मी में उनके घरों की महिलाओं और बच्चों का भी बुरा हाल हो गया। जैसलमेर प्रशासन की इस इस कार्रवाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जोधपुर में भी हुई थी ऐसी ही कार्रवाई

जैसलमेर जैसी ही कार्रवाई 24 अप्रैल 2023 को जोधपुर में भी हुई थी। वहाँ चोखा गाँव में जोधपुर विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के नाम पर शरणार्थी हिन्दुओं के घरों पर बुलडोजर चलाया था। इस कार्रवाई के शिकार हुए अधिकतर लोगों के पास भारत में रहने के लिए लॉन्ग टर्म वीजा तो है, लेकिन अब तक उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है।

मुस्लिम युवती से हुआ प्यार, शादी की, बाप बना… फिर एक दिन ससुराल में पीट-पीटकर कर दी गई राजू सैनी की हत्या: MP के खंडवा की घटना

मध्य प्रदेश के खंडवा में मुस्लिम लड़की से लव मैरिज करने वाले हिन्दू युवक की हत्या कर दी गई है। युवक को शनिवार (13 मई 2023) को उसकी ससुराल में बुरी तरह से पीटा गया था। पिटाई मृतक के ससुर, साले और सास ने मिलकर की थी। मंगलवार (16 मई 2023) को अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप लगे हैं। फ़िलहाल 2 आरोपितों को कस्टडी में लेकर पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला खंडवा के सिंगोट इलाके का है। यहाँ राजस्थान के सीकर जिले से जितेंद्र उर्फ़ राजू सैनी तीन साथियों के साथ 3 साल पहले एक होटल पर काम करने आया था। राजू सैनी की मुलाकात खंडवा की अमरीन से हुई। दोनों में पहले बातचीत हुई और बाद में प्यार हो गया। परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर राजू और अमरीन ने शादी कर ली। शादी के बाद राजू सैनी अमरीन को ले कर सीकर स्थित अपने गाँव खण्डेल चला गया।

तब अमरीन के परिवार वालों ने पिपलौद थाने में गुमशुदगी का केस दर्ज करवाया था। पुलिस ने अमरीन को तलाशना शुरू किया तो उसकी लोकेशन सीकर में मिली। तब तक अमरीन एक बेटी की माँ बन चुकी थी। पुलिस ने अमरीन को बरामद कर कोर्ट में पेश किया। अदालत में अमरीन ने खुद को बालिग बताते हुए राजू सैनी के ही साथ रहने की इच्छा जताई। कोर्ट ने भी दोनों को एक साथ रहने की अनुमति दे दी थी।

बताया जा रहा है कि कुछ समय बाद अमरीन ने अपने मायके वालों से मिलने की इच्छा जताई। इस पर राजू सैनी ने उसे उसके मायके लाकर छोड़ दिया। थोड़े समय बाद जब राजू अपनी बेटी और बीवी को लेने ससुराल गया, तब उसे भगा दिया गया। राजू ने स्थानीय थाना पिपलौद में इसकी शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन उसकी गुहार पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बावजूद राजू लगभग 25 दिनों तक अपनी ससुराल सिंगोट के आसपास ही रहा। वह अपनी तरफ से अपनी बेटी और बीवी को वापस पाने की कोशिशें करता रहा।

जानकारी के मुताबिक 13 मई को राजू अपनी ससुराल गया। यहाँ उसने अपनी बीवी और बेटी को साथ भेजने की माँग की। आरोप है कि राजू को उसकी सास मुन्नीबाई, ससुर मुमताज और साले ने बेरहमी से पीटा। इस पिटाई से राजू की हालात खराब हो गई। वह पिपलौद थाने पहुँचा जहाँ उसकी शिकायत फिर से नहीं सुनी गई। राजू को उसी दिन जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इलाज के दौरान मंगलवार (16 मई) को उसने दम तोड़ दिया। हिंदू जागरण मंच ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। खंडवा के SP सत्येंद्र कुमार के मुताबिक मृतक के सास, ससुर और साले के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर जाँच की जा रही है। अब तक 2 आरोपितों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

गोरी, कुतुबुद्दीन, रजिया, लोदी, तुगलक, खिलजी… काशी को सबने लूटा-तोड़े मंदिर: इस्लामी आक्रांता बार-बार ध्वस्त करते रहे, हिंदू करते रहे पुनर्निर्माण

ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वेक्षण कराने को लेकर दायर याचिका पर वाराणसी कोर्ट 22 मई 2023 को सुनवाई करेगी। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एएसआई को परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग के निर्देश दिए थे। इस्लामी आक्रांताओं ने ज्ञानवापी ही नहीं बल्कि काशी के कई हिस्सों में मंदिरों को तोड़कर उस पर मस्जिद बनवाई थी।

मुहम्मद गोरी ने 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में एक के बाद एक लूट और विध्वंस की घटनाओं को अंजाम दिया। सन् 1193 में कन्नौज के राजा जयचंद और कुतुबुद्दीन ऐबक के बीच यमुना नदी के किनारे चंदावर (अभी फिरोजाबाद) में एक भीषण युद्ध हुआ, जिसमें जयचंद की मृत्यु हो गई। पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी के बीच हुए युद्ध में इस्लामी सेना की जबरदस्त हार हुई थी, लेकिन अगले एक वर्ष में ही वो दोबारा लौटा और पृथ्वीराज चौहान की हार के साथ ही दिल्ली में इस्लामी सत्ता की स्थापना हो गई।

जयचंद के खिलाफ युद्ध में खुद मुहम्मद गोरी और कुतुबुद्दीन ऐबक अपनी-अपनी फ़ौज के साथ था। जयचंद का कटा हुआ सिर इन दोनों इस्लामी शासकों के सामने लाया गया। इसके बाद, मुहम्मद गोरी वाराणसी की तरफ बढ़ा। पृथ्वीराज चौहान और जयचंद जैसे हिन्दू राजाओं की मृत्यु के बाद वाराणसी को बचाने वाला शायद ही कोई था। वाराणसी में लूटपाट का भयंकर मंजर देखने को मिला। मंदिर के मंदिर तोड़ डाले गए। वाराणसी न सिर्फ एक धार्मिक नगरी थी, बल्कि व्यापार और वित्त का भी बड़ा केंद्र था। ऐसे में मुहम्मद गोरी ने मनमाने ढंग से लूटपाट मचाई। कहते हैं, यहाँ से लूटे हुए माल को ले जाने के लिए उसे 1400 ऊँटों की ज़रूरत पड़ी थी।

काशी विश्वनाथ मंदिर को भी इसी दौरान ध्वस्त किया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी उठाई। कन्नौज के राजा जयचंद्र के पुत्र हरीशचंद्र और आम लोगों ने जब मंदिर का निर्माण पुनः शुरू कर दिया, तब कुतुबुद्दीन ऐबक ने 4 वर्षों बाद फिर से अपनी फ़ौज के साथ हमला किया और भारी तबाही मचाई। कुतुबुद्दीन ऐबक ने विश्वेश्वर, अविमुक्तेश्वर, कृतिवासेश्वर, काल भैरव, आदि महादेव, सिद्धेश्वर, बाणेश्वर, कपालेश्वर और बालीश्वर समेत सैकड़ों शिवालयों को तबाह कर दिया। इस तबाही के कारण अगले पाँच-छः दशकों तक ये मंदिर इसी अवस्था में रहे।

तुर्कों का शासन था और दिल्ली में उनकी स्थिति और मजबूत ही होती जा रही थी। ऐसे में कुछेक साधु-संतों के अलावा धर्म की मशाल को ज़िंदा रखने वाले लोग कम ही बचे थे। काशी वही है, जिसके बारे में 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेन सांग ने वर्णन किया है कि उसने यहाँ सैकड़ों शिव मंदिर देखे और हजारों साधु-श्रद्धालु भी अपने शरीर पर भस्म मल कर घूमते हुए उसे दिखे। उसने एक 30 मीटर ऊँची शिव प्रतिमा का भी जिक्र किया है।

हालाँकि, 13वीं शताब्दी के मध्य में ही मुहम्मद गोरी की मौत हो गई और कुतुबुद्दीन ऐबक भी इस दशक के अंत तक मर गया। लेकिन, दिल्ली सल्तनत का काशी पर कब्ज़ा जारी रहा। इसके बाद इल्तुतमिश और फिर उसकी बेटी रजिया सुल्तान का शासन हुआ। जिस रजिया सुल्तान को ‘बहादुर महिला’ बता कर वर्षों तक पढ़ाया जाता रहा उसने भी काशी में मंदिरों को ध्वस्त कर विश्वनाथ मंदिर परिसर में ही एक मस्जिद बनवाई थी। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘रजिया मस्जिद’ की जगह भी कभी मंदिर ही हुआ करता था।

इसके बाद सन् 1448 में मुहम्मद शाह तुगलक ने आसपास के छोटे-बड़े मंदिरों को भी ध्वस्त कर दिया और रजिया मस्जिद को और बड़ा बना दिया। काशी के प्राचीन इतिहास को पढ़ें तो पता चलता है कि यहाँ कई पुष्कर थे, जिन्हें व्यवस्थित ढंग से तबाह कर इस्लामी शासकों ने मस्जिद बनवाए। हालाँकि, उससे पहले 13वीं सदी में हिन्दुओं ने फिर से मंदिर को बना कर खड़ा कर दिया था। इसे हिन्दुओं की जिजीविषा कहें या फिर श्रद्धा, इतने अत्याचार और खून-खराबे के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। इस्लामवादी लगातार मंदिरों को तोड़ते रहे और हिंदू पुनर्निर्माण में लगे रहे।

इन्हीं मंदिरों में से एक था पद्मेश्वर मंदिर, जिसे काशी विश्वनाथ मंदिर के सामने ही बनवाया गया था। हालाँकि, 1296 ईस्वी में बने पद्मेश्वर मंदिर को भी 15वीं शताब्दी के मध्य में तोड़ डाला गया। पद्म नाम के एक साधु ने इसका निर्माण करवाया था। आप जानते हैं कि ये मंदिर अब कहाँ है? इसके ऊपर ही लाल दरवाजा मस्जिद बनवा दिया गया, जिसे आज भी शर्की सुल्तानों का भव्य आर्किटेक्चर बता कर प्रचारित किया जाता है। फिरोजशाह तुगलक से लेकर सिकंदर लोदी तक, कई इस्लामी सुल्तानों ने काशी में मंदिरों को बारम्बार ध्वस्त किया। सन् 1494 में सिकंदर लोदी ने काशी में कई ऐसे मंदिर तोड़े, जिनका पुनर्निर्माण हिंदुओं ने अपने खून-पसीने से किया था।

सन् 1514-1594 के कालखंड में ही जगद्गुरु नारायण भट्ट हुए, जिन्होंने अपनी पुस्तक ‘त्रिस्थली’ में काशी के विश्वनाथ मंदिर के बारे में लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि अगर म्लेच्छों ने शिवलिंग को हटा दिया है तो वो खाली जगह ही हमारे लिए पवित्र है और उसकी पूजा की जानी चाहिए, अथवा कोई और शिवलिंग स्थापित किया जाना चाहिए। उनके शुरुआती जीवनकाल में मंदिर नहीं बना था, इससे ये पता चलता है। तुगलक और लोदी के विध्वंस से वाराणसी नहीं उबरी थी।

वो नारायण भट्ट ही थे, जिनकी प्रेरणा से राजा टोडरमल ने काशी में पुनः भव्य विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। आज जिस ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को आप देख रहे हैं, उसे औरंगजेब ने इसी मंदिर को तोड़ कर इसके ऊपर बनवाया था। काशी की मुक्ति के प्रयास लगातार चलते रहे और यहाँ पूजा-पाठ भी नहीं रोका गया। बार-बार आक्रमण के बावजूद काशी में पुनर्निर्माण चलता रहा। अब यदि अयोध्या के बाबरी ढाँचे की ही तरह पूरे ज्ञानवापी परिसर का सर्वे हो जाए तो हिंदुओं को एक और बार मंदिर के पुनर्निर्माण का सौभाग्य प्राप्त होगा।

पश्चिम बंगाल की अवैध फैक्ट्री में धमाका, 9 की मौत: बीजेपी ने की NIA जाँच की माँग, कहा – किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में मंगलवार (16 मई, 2023) को अवैध पटाखे की फैक्ट्री में धमाका हो गया। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बंगाल यूनिट ने मामले में एनआईए (NIA) जाँच की माँग की है। इसे लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को खत लिखा है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने लिखा है कि पूर्वी मेदिनीपुर के एगरा में हुए बम धमाके की जाँच NIA से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। सुकांत ने आगे लिखा कि घटनास्थल के आसपास कई अवैध पटाखे बनाने वाली फैक्ट्रियाँ हैं। इस तरह की घटनाएँ इलाके के लोगों की सुरक्षा के लिए चिंताजनक हैं। बीजेपी नेता ने आगे लिखा है कि घटना के संदर्भ में यह जानना जरूरी है कि यह किसी ऐसे नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं जो गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त है।

सुकांत मजूमदार का कहना है कि राज्य में पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ऐसे में अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से दखल देने और एनआईए जाँच की अपील की है।

दूसरी तरफ पूर्वी मेदिनीपुर के एसपी अमरनाथ के. ने कहा है कि इस फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। पहले भी यहाँ पुलिस ने छापा मारा था और फैक्ट्री के खिलाफ केस दर्ज किया हुआ था। एक हफ्ते पहले भी पुलिस ने फैक्ट्री पर रेड मारा था लेकिन कुछ भी नहीं मिला था। धमाके के बाद अब तक 9 शव निकाले जा चुके हैं। तलाशी अभियान अब भी जारी है।

बता दें घटनास्थल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक धमाका इतना शक्तिशाली था कि जिस रिहायशी इमारत में यह फैक्ट्री चलाई जा रही थी वह पूरी तरह ढह गई। वीडियो में धमाके के बाद जली हुई फैक्ट्री और खेतों व आस पास के इलाके में पड़े अधजले शव देखे जा सकते हैं। सीएम ममता ने मृतकों के परिजनों को ढाई-ढाई लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

पानि में माछ आ नौ कुट्टी बखरा… क्या कर्नाटक और कॉन्ग्रेस को चैन से जीने देगी खुशफहमी वाला ये जनादेश

16 मई 2023 का दिन भी बीत गया। कॉन्ग्रेस कर्नाटक के लिए मुख्यमंत्री (Karnataka CM) का नाम तय नहीं कर पाई। नतीजों के बाद से ही इस पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) और कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के बीच प्रतिस्पर्धा बताई जा रही है। पर अब लिंगायत समुदाय (Lingayat community) भी इस पर दावा कर रहा है। यहाँ तक कि डिप्टी सीएम पद के लिए भी दावेदारी जताई जा रही है।

कर्नाटक में लिंगायत प्रभावशाली समुदाय हैं। कर्नाटक की राजनीति में येदियुरप्पा के उभार के बाद से वे बीजेपी समर्थक माने जाते रहे हैं। लेकिन इस बार कई लिंगायत प्रभाव वाली कुछ सीटों पर भी ​बीजेपी को पराजय मिली है। अखिल भारतीय वीरशैव महासभा (All India Veerashaiva Mahasabha) ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर इसकी ‘कीमत’ माँगी है।

15 मई को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस ने 46 लिंगायत उम्मीदवार चुनाव में उतारे थे। इनमें से 34 ने जीत हासिल की है। लिंगायत समुदाय ने अन्य 50 सीटों पर कॉन्ग्रेस की जीत में प्रमुख भूमिका निभाई है। लिंगायत समुदाय ने ऐसा भाजपा से अपनी वफादारी को कॉन्ग्रेस की तरफ मोड़कर किया है। वीरशैव महासभा कलबुर्गी के अध्यक्ष अरुण कुमार पाटिल ने कहा है, “लिंगायत समुदाय की मदद से कॉन्ग्रेस जीती है। 39 विधायक लिंगायत हैं। लिंगायत समुदाय से आने वाले कई नेता मुख्यमंत्री पद के योग्य हैं। ऐसे में हमने अपने समुदाय के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने का आग्रह किया है।”

लिंगायत की तरह ही वोक्कालिगा (vokkaliga community) भी कर्नाटक में प्रभावशाली समुदाय है। वे इस विधानसभा चुनाव से पहले जेडीएस के परंपरागत वोटर माने जाते थे। लेकिन इस बार उन्होंने भी जेडीएस से कॉन्ग्रेस की ओर शिफ्ट किया है। इसकी वजह डीके शिवकुमार का वोक्कालिगा होना और कॉन्ग्रेस की जीत पर उनके मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना ही बताई जा रही है।

लेकिन कॉन्ग्रेस की परेशानी केवल मुख्यमंत्री चुनने तक ही सीमित नहीं है। उपमुख्यमंत्री पद के लिए भी दावेदारी शुरू हो गई है। बेलगावी उत्तर के विधायक आसिफ सैत का कहना है कि कर्नाटक कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जारकीहोली को डिप्टी सीएम बनाया जाना चाहिए। जमीर अहमद खान और रामलिंगा रेड्डी को भी डिप्टी सीएम बनाने की माँग हो रही है।

कर्नाटक रेड्डी जनसंघ का कहना है कि रामलिंगा रेड्डी उनके समुदाय के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वे शिवकुमार और सिद्धारमैया की तुलना में ज्यादा बार विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं। अपनी माँग नजरंदाज किए जाने पर समुदाय के कड़े विरोध की चेतावनी भी कॉन्ग्रेस को दी है। इसी तरह जमीर अहमद खान के समर्थन में भी कोप्पल जिले के गंगावती में मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया है।

कर्नाटक वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शफी सादी भी उपमुख्यमंत्री पद पर मुस्लिम की दावेदारी जता चुके हैं। इतना ही नहीं वे गृह, राजस्व, स्वास्थ्य जैसे 5 खास विभाग के मंत्री भी मुस्लिम चाहते हैं।

इस खींचतान के बीच सवाल यह नहीं रहा कि कॉन्ग्रेस किसे मुख्यमंत्री चुनती है? ​कितने डिप्टी सीएम बनाती है? या फिर मंत्रिमंडल में किनको जगह मिलती है? सवाल है कि कॉन्ग्रेस को स्पष्ट जनादेश देकर भी कर्नाटक की जनता ने क्या हासिल किया? हमने ऐसी ही स्थिति में मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को कॉन्ग्रेस छोड़ते और कमलनाथ की सरकार गिरते देखा है। इसी स्थिति के कारण हमने राजस्थान को अशोक गहलोत और सचिन पायलट तथा छत्तीसगढ़ को भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के शीतयुद्ध में पिसते देखा है।

क्या गारंटी है कि शिवकुमार या सिद्धारमैया में से जिसे नेतृत्व का अवसर नहीं मिलेगा, वो इसी तरह की स्थिति पैदा नहीं करेंगे? भले शिवकुमार आज मीडिया पर केस करने की बात कर रहे हैं। कह रहे हैं कि वे ब्लैकमेल नहीं करेंगे। पीठ में छुरा नहीं घोपेंगे। लेकिन इसके साथ ही वे यह भी कह रहे हैं कि सीएम की कुर्सी कोई पैतृक संपत्ति नहीं है जिसका बँटवारा हो। यह भी कहा है कि जब पार्टी संकट में थी तो उन्होंने जिम्मेदारी ली थी और कर्नाटक जीत कर आलाकमान को दिया है। वहीं ​मीडिया रिपोर्टों की माने तो सिद्धारमैया कम से कम शुरुआती दो साल सीएम रहना ही चाहते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि ज्यादातर विधायक उनके ही समर्थक हैं। सिद्धारमैया वैसे भी जेडीएस छोड़कर कॉन्ग्रेस में आए हुए नेता हैं। ऐसे में किसी दल से तलाक ले लेना उनके लिए नई बात नहीं होगी।

मैथिली में एक कहावत है पानि में माछ आ नौ कुट्टी बखरा यानी पानी से मछली बाहर लाया नहीं गया और बँटवारा हो गया। इसका मतलब होता है कुछ प्राप्त होने से पहले ही खुशफहमी पाल लेना! दरअसल कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को मिला जनादेश कुछ समुदायों और एक विशेष मजहब की इसी तरह की खुशफहमियों की उपज है। कॉन्ग्रेस की मजबूरी है कर्नाटक को मुख्यमंत्री देना। वह देगी भी। लेकिन सत्ता रूपी मछली में हिस्सेदारी की पहले से ही खुशफहमी पाले बैठे हिस्सेदार, क्या मनवांछित हिस्सेदारी नहीं मिलने पर कॉन्ग्रेस और कर्नाटक को चैन से जीने देंगे।

बिना बाप की हिंदू बच्ची को मोहम्मद हसन ने लिया गोद, 1 साल तक करता रहा बलात्कार: अब सुनाई गई 20 साल जेल की सज़ा

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में गोद ली हुई बेटी से दुष्कर्म के मामले में आरोपित मोहम्मद हसन उर्फ पप्पू को 20 साल की सजा सुनाई गई है। पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपित हसन को 41 दिनों में सजा सुनाई गई। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने हिंदू मजदूर की बेटी को गोद लिया था। करीब साल भर से वह बच्ची के साथ दुष्कर्म कर रहा था। मोहम्मद हसन को सजा होने के बाद पीड़िता को नारी निकेतन भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 8 साल पहले मोहम्मद हसन ने क्वार्सी में एक भट्ठे से तीन साल की हिंदू बच्ची को गोद लिया था। वह बच्ची को अपने घर ले आया। उसने अपने मजहब के अनुसार उसका नाम रखा। पिछले एक साल से पप्पू नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म कर रहा था। 25 अक्टूबर 2022 को हसन की पुत्रवधू ने बच्ची के साथ कुकर्म करते देख लिया। जिसके बाद उसने शोर मचा दिया।

मामले की जानकारी मिलने के बाद क्वार्सी के एक समाजसेवी मोहन चौहान ने मोहम्मद हसन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने पीड़िता के मेडिकल के आधार पर दुष्कर्म की धाराओं में चार्जशीट लगाई। सुनवाई के दौरान सबूतों और बच्ची की गवाही के आधार पर न्यायालय ने आरोपित मोहम्मद हसन को दोषी करार देकर बीस साल कैद और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने जुर्माने की रकम में से 40 हजार रुपए पीड़िता को देने के निर्देश दिए। बता दें 4 अप्रैल 2023 को मामले में चार्जशीट फाइल हो गई थी। इसके बाद सिर्फ 16 तारीखों (41 दिन) में अदालत ने 15 मई को बलात्कार आरोपित को सजा सुना दी।

50 वर्षीय आरोपित मोहम्मद हसन चार बच्चों का बाप है। उसके दो बेटे और दो बेटियाँ हैं। उधर पीड़िता की देखभाल करने वाला कोई नहीं मिला। जिसके बाद उसे कानपुर के नारी निकेतन में भेज दिया गया। अब भी पीड़िता नारी निकेतन में ही रह रही है।

मुस्लिम लड़कियों से दुर्व्यवहार, उनके हिन्दू दोस्तों की पिटाई… देखिए हाल में हुई ऐसी 7 घटनाएँ, इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा शरिया चलाए जाने की कोशिश

मुस्लिम लड़कियों का हिंदू लड़कों से दोस्ती करना इस्लामी कट्टरपंथियों को रास नहीं आ रहा है। देश के कई शहरों में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जब हिंदू लड़कों से दोस्ती करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने मुस्लिम लड़कियों को परेशान किया है। कई जगह मुस्लिम युवतियों के हिंदू दोस्तों के साथ मारपीट और गाली गलौच की घटनाएँ भी सामने आई हैं। विगत कुछ महीनों में इस तरह की घटनाएँ बढ़ी हैं जब मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिजाब या बुर्का पहनी लड़की को सार्वजनिक स्थानों पर घेर लिया हो, उनका वीडियो बनाया हो और उन्हें अपमानित किया हो।

इस तरह के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। बालिग़ होने के बाद कौन किसे अपना दोस्त बनाता है और किसके साथ घूमता है, इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए बशर्ते कि किसी की मंशा गलत हो। स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएँ आपस में साथ मिल कर घूमते हैं, ऐसे में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा बेवजह मुस्लिम लड़कियों को प्रताड़ित करना और उनके हिन्दू दोस्तों को पीटना दोनों ही पक्षों को दहशत में डालने का प्रयास है।

16 मई: पटना में मुस्लिम लड़की के हिंदू दोस्त की पिटाई

पटना के पीर बहोर थानाक्षेत्र में एक हिन्दू युवक मुस्लिम लड़की के साथ अंजुमन इस्लामिया हॉल के पास बाइक से गुजर रहा था। इस दौरान सड़क पर खड़े कुछ लोगों ने बाइक को रोका। रोकने वालों ने पहले युवक का नाम पूछा। बाद में बाइक सवार युवक को गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए उसकी पिटाई शुरू कर दी गई। हिंसा के दौरान बुर्का पहने लड़की हमलावरों को रोकने का प्रयास करती है। कट्टरपंथी उलटे उसी लड़की को लानत देते हैं।

वीडियो बनाने वाला शख्स कहता है, “मंदिर में ले जा रहा है।” कुछ समय बाद हमलावरों ने लड़की से कहा, “तुम्हे शर्म नहीं आ रहा है ?” हिंदू युवक के पिटाई के दौरान माँ-बहन की गालियाँ देते हुए सॉरी बोलने पर “** फाड़ देंगे तुम्हारा’ जैसे शब्द बोले गए। बाद में हमलावरों ने कहा, “मुस्लिम लड़की को घुमाएगा तू।” हमलावरों ने मारपीट के दौरान पीड़ित युवक से कहा, “भगवा लटकाए हुए हो।”

13 मई: मुजफ्फरनगर में जाट युवक के साथ घूम रही मुस्लिम महिला के साथ अभद्रता

मुजफ्फरनगर के थाना क्षेत्र नई मंडी इलाके में एक जाट युवक अपनी मुस्लिम दोस्त के साथ बाइक पर जा रहे होते हैं। तभी जाट युवक की बुलेट का रास्ते में कुछ लोग पीछा करते हैं। बाद में बाइक रोक कर महिला और युवक से एक भीड़ सवाल-जवाब करती है। दोनों के पते पूछे जाते हैं। महिला का बुर्का जबरन नोचा जाता है। इस दौरान वीडियो बना रहे व्यक्ति ने कहा, “मुँह खोल इसका।” अभद्रता के दौरान महिला अपना चेहरा ढँकने की कोशिश करती दिख रही है।

इस वीडियो को ‘द जाट एसोसिएशन’ नाम के वेरिफाइड हैंडल द्वारा शेयर किया गया है। पुलिस ने जानकारी दी है कि मामला दर्ज कर आरोपितों की तलाश तेज कर दी है।

13 मई: मेरठ के बाजार में मुस्लिम महिलाओं के साथ बदसलूकी

मुजफ्फरनगर के पड़ोसी जिले मेरठ से भी इसी से मिलता जुलता एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में बाजार में घूम रहीं 2 मुस्लिम लड़कियों से कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिन्दू के साथ आने का आरोप लगा कर बदसलूकी की थी। दरअसल दो मुस्लिम युवतियाँ अपने हिंदू दोस्त के साथ बाजार में घूम रही थीं। कट्टरपंथियों की नजर दोनों लड़कियों और साथ घूम रहे लड़के पर थी। देखते-देखते भीड़ ने तीनों को घेर लिया। भीड़ में शामिल कट्टर मुस्लिमों ने लड़कियों से कहा, “हिन्दुओं को दोस्त बनाओगी तुम?” जबरन उन मुस्लिम युवतियों के नकाब भी उतार दिए गए।

जानकारी के अनुसार भीड़ ने पहले हिन्दू युवक से मारपीट की। उसके बाद मुस्लिम लड़कियों से उनके अब्बा का नाम पूछा जाने लगा। सोशल मीडिया पर इसके 2-3 वीडियो सामने आए हैं। इस मामले में भी पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और आरोपितों की तलाश की जा रही है।

अहमदाबाद में मुस्लिम लड़की को नसीहत – ‘दोस्ती नहीं कर सकते’

फैक्ट्स (Facts) नाम के ट्विटर यूजर ने 29 अप्रैल 2023 को एक वीडियो शेयर किया। वीडियो अहमदाबाद के जुहापुर की है। इसमें एक शख्स कैमरा लेकर बुर्काधारी लड़की के पास आकर उससे सवाल जवाब करता है। वह उस लड़के बारे में पूछता है। लड़की उसे अपना दोस्त बताती है। इस पर कट्टरपंथी भड़क जाता है और भीड़ इकट्ठी कर लड़की को नसीहत देने लगता है। ट्टरपंथी उस पर चिल्लाता है और कहता है, “क्या आप वॉट्सएप नहीं चलाते, आपको नहीं पता कि कैसे इतने घपले होते हैं, आप लोग दूसरों के साथ घूमती हो, उन्हें गले लगाती हो।”

एक औरत इस बीच कहती है- “हट जाओ मैं पकड़ के धो देती हूँ इसे।” वहीं स्कूटर पर बैठा आदमी कहता है- “तुम काफिर के साथ क्यों आती हो।” तभी, वो लड़का जो वीडियो बना रहा होता है वो कहता है, “आपा सीधी बात बताता हूँ, यहाँ बहुत सारे मुसलमान है। अखलाख तुम्हारा बहुत खराब है। इतना सारा हमारे को जुनून आ जाता है कि माँ फाड़ डालें उसकी। मैं झूठ नहीं बोलता मैं काट डालता उसको।”

मेरठ के गाँधी बाग में मुस्लिम लड़की का पीछा कर वीडिया वायरल करने की धमकी

ऐसा ही एक वीडियो कथिततौर पर मेरठ के गाँधी बाग का है। इस वीडियो में एक हिजाब पहनी लड़की के पीछे पीछे कुछ लड़के चलते हैं और फिर कहते हैं- “देख तेरी वीडियो वायरल होगी।” लड़कों को कहते सुना जा सकता है, “देख लो मुसलमान की लड़की हिंदू के साथ घूम रही।” इस वीडियो में लड़की अपने दोस्त के साथ आगे बढ़ती है पर कट्टरपंथी लगातार उसका पीछा करते रहते हैं।

24 अप्रैल: महाराष्ट्र के संभाजीनगर में तीन कट्टरपंथियों को पुलिस ने दबोचा

संभाजी नगर (पहले औरंगाबाद) में हिजाब पहने लड़की को बीच सड़क पर परेशान करने के आरोप में पुलिस ने तीन कट्टरपंथियों को दबोच लिया। इन कट्टरपंथियों ने काफी दूर तक मुस्लिम लड़की का पीछा किया, फिर उसका मोबाइल छीनने की कोशिश की और उसे गालियाँ भी दीं। उन्होंने उसके साथ ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वह एक हिंदू लड़के के साथ बीबी का मकबरा देखने गई थी। घटना बेगमपुरा इलाके की है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था।

वायरल वीडियो में ये कट्टरपंथी कॉलेज की छात्रा को रोकने की कोशिश करते हैं। वे उसका हाथ पकड़ते हैं। उसका बैग छीनने कोशिश करते हैं और हिजाब खींचते हैं। लड़की सड़क पर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाती है और बार-बार ‘मुझे छोड़ो, मुझे छोड़ो’ कहती है। लेकिन वे उसे छोड़ने की बजाए उसका फोन छीनने लगते हैं। वे उससे पूछते हैं, “वो लड़का कौन है। तुम किसी और धर्म के लड़के के साथ क्यों हो?” इस दौरान जमा भीड़ भी लड़की की मदद नहीं करती।

16 अप्रैल: मध्य प्रदेश के खंडवा में दोस्तों के साथ जूस पी रही लड़की के साथ मारपीट

16 अप्रैल की दोपहर मुस्लिम युवती सत्यम बवाने और अतुल के साथ आनंद नगर के टी कैफे गई थी। तभी अजहर अली, मोहम्मद इरफान, शादाब और मोहसिन 3-4 अन्य लोगों के साथ आए। तीनों को खींचकर कैफे के बाहर ले गए और मारपीट करने लगे। उनलोगों ने लड़की से कहा कि तुम इनके साथ क्यों आई हो। क्या मुसलमान कम पड़ गए हैं। युवती को अश्लील गालियाँ दी गई। मारपीट की गई। लड़की के अनुसार शादाब नाम के शख्स ने उसे जोर से थप्पड़ मारकर नीचे गिरा दिया और जान से मारने की धमकी दी।

मुस्लिम भीड़ लड़कों को उठाकर खानशाहवली कॉलोनी में दरगाह के पास ले गए। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने लड़कों को छुड़ाया। इसके बाद देर रात मुस्लिमों ने मोघट थाने का घेराव किया। भीड़ ने पत्थरबाजी और नारेबाजी भी की। जिसके बाद प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ी।

राजेश माँझी का गुनाह क्या, दलित होना या आरोपितों का मुस्लिम होना? हत्या पर केरल से बिहार तक वे चुप, जिनका जुनैद-इशरत पर उमड़ा था प्रेम

भारतीय मीडिया का एक बड़ा धड़ा तब कुछ ज़्यादा ही सक्रिय हो जाता है, जब किसी भाजपा शासित राज्य में कोई घटना होती है। लेकिन, जहाँ विपक्षी दलों की सरकारें हैं वहाँ कितनी भी वीभत्स घटना क्यों न हो जाए, उन्हें रियायत दी जाती है। क्या आपने सोशल मीडिया के बुद्धिजीवियों या फिर मेनस्ट्रीम मीडिया में कहीं इस खबर पर बहस होते देखा कि केरल में बिहार के एक दलित मजदूर की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, वो भी मुस्लिमों द्वारा?

मेनस्ट्रीम मीडिया के स्टार एंकर्स इस घटना को कवर करने के लिए केरल नहीं पहुँचे। अख़बारों में इस घटना पर संपादकीय नहीं दिखे। सोशल मीडिया में बुद्धिजीवियों ने CPM सरकार की आलोचना नहीं की। दलित हितों की बात करने वाले खामोश रहे। यूट्यूब से कमाई करने वाले नए-नवेले वरिष्ठ पत्रकारों की जमात ने अख़बारों की कटिंग शेयर नहीं की। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के शासन पर सवाल नहीं उठाए गए। मृतक के परिवार के लिए किसी मुआवजे की घोषणा नहीं की गई।

क्या आप जानते हैं इसका कारण क्या है? इसका कारण ये है कि केरल में वामपंथी दलों की सरकार है, भाजपा की विरोधी दलों की। इसीलिए, एक दलित मजदूर की मॉब लिंचिंग पर अंतरराष्ट्रीय अख़बारों में भी संपादकीय नहीं आता है। वहीं अगर उत्तर प्रदेश में दलितों का आपस का झगड़ा भी होगा तो उसे ऐसे पेश किया जाता है जैसे दलित पर अत्याचार हो रहा हो। आगे बढ़ने से पहले आइए जान लेते हैं कि केरल में हुआ क्या है।

केरल में भाजपा के दलित मजदूर की पीट-पीट कर हत्या

केरल के मलप्पुरम में चोरी के शक में बिहार के पूर्वी चम्पारण के रहने वाले 36 वर्षीय दलित मजदूर को बाँध कर पीटा गया। शनिवार (6 मई, 2023) को दोपहर हुई इस घटना में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है – अफजल, फाजिल, शराफुद्दीन, महबूब, अब्दुसमद, नासिर, हबीब, अयूब और जैनुल। इस घटना की कोई चर्चा न होने का एक कारण ये भी है कि हत्यारे मुस्लिम समुदाय से आते हैं। मुस्लिमों द्वारा किए जाने वाले अपराधों को छिपाना कोई नया ट्रेंड नहीं है, काफी पहले से चला आ रहा है।

लगभग ढाई घंटे तक उक्त मजदूर के हाथ बाँध कर उसे पीटा गया, पाइप और लाठियों द्वारा। फिर उसे एक दुकान के बाहर फेंक दिया गया। इसके एक घंटे बाद पुलिस को सूचना मिली। राजेश माँझी को इसके बाद नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हत्यारों ने सबूतों के साथ भी छेड़छाड़ किया, सर्विलांस कैमरे के फुटेज को डिलीट कर दिया गया। कॉन्डोत्ती के पास किझिसेरी इलाके में उक्त युवक पर चोरी का इल्जाम लगाया गया था।

वहाँ कुछ दिनों पहले मृतक ने एक चिकन की दुकान पर काम किया था। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि मृतक को क्रूरता से पीटा गया था, जिससे उसकी कई पसलियाँ टूट गई थीं। हत्यारों ने झूठ बोल कर बचने की कोशिश की कि राजेश माँझी चोरी की कोशिश में पहले माले से गिर गए। केरल में इस तरह की ये पहली घटना नहीं है। फरवरी 2018 में मधु नाम के जनजातीय समाज के युवक की इसी तरह हत्या कर दी गई थी। ताज़ा मामले पर बिहार के सामाजिक कल्याण मंत्री मदन साहनी ने निंदा कर के इतिश्री कर ली है।

जुनैद के परिजनों को केरल सरकार ने दिया था मुआवजा, राजेश माँझी को क्या?

22 जून, 2017 को एक आपसी झगड़े में ट्रेन में जुनैद नाम के युवक की हत्या कर दी गई थी। अपना अम्मी-अब्बू की 8 संतानों में छठे नंबर का जुनैद इमाम बनना चाहता था। उसकी हत्या के बाद देश भर में मॉब लिंचिंग वाला प्रोपेगंडा चलाया गया और कहा गया कि उसके मजहब के कारण हिन्दू गुंडों ने उसे मारा है। जुनैद और उसके साथी ईद की शॉपिंग कर के दिल्ली से लौट रहे थे, रास्ते में सीट के लिए एक दूसरे समूह से उनका झगड़ा हो गया था।

जुनैद का केरल से कोई लेनादेना नहीं था। न तो वो केरल का रहने वाला था और न ही केरल में ये घटना हुई थी। लेकिन, केरल की वामपंथी सरकार ने जुनैद के परिजनों को रुपए देने का ऐलान किया था। अगस्त 2017 में केरल की सत्ताधारी पार्टी CPI(M) ने ऐलान किया था कि जुनैद के परिजनों को 10 लाख रुपए दिए जाएँगे। पार्टी की राज्य कमिटी की बैठक में ये फैसला लिया गया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी परिवार से मिले थे।

कुख्यात वामपंथी महिला नेता वृंदा करात के साथ जुनैद के परिवार ने दिल्ली स्थित ‘केरल हाउस’ में सीएम से मुलाकात की थी। CPI(M) ने ऐलान किया था कि पार्टी की सेन्ट्रल कमिटी द्वारा ये रकम जुनैद के परिवार वालों को दिए जाने की बात कही गई थी। पार्टी ने सीधा कह दिया था कि RSS ने जुनैद की हत्या की। क्या राजेश माँझी के परिवार से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इसीलिए मुलाकात नहीं करेंगे और CPI(M) वित्तीय सहायता नहीं करेगी, क्योंकि वो जुनैद की तरह किसी मदरसे में नहीं पढ़ते थे?

जब हजारों किलोमीटर दूर हुई एक घटना को लेकर केरल की सत्ताधारी पार्टी और सरकार वित्तीय सहायता कर सकती है, तो फिर उनके राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई दलित प्रवासी मजदूर की हत्या पर क्या वो परिवार की सहायता नहीं कर सकते? खुद मलप्पुरम के पुलिस अधीक्षक ने इसे मॉब लिंचिंग का मामला माना है। हत्यारे मुस्लिम हैं, इसीलिए केरल सरकार चुप्पी साधे हुए बैठी है?

केरल कॉन्ग्रेस की चुप्पी का कारण क्या?

न सिर्फ केरल की सत्ताधारी पार्टी और मीडिया, बल्कि केरल की मुख्य विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने भी इस घटना को लेकर राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए हैं। गुजरात के ‘अमूल’ और कर्नाटक की ‘नंदिनी’ को लेकर क्षेत्रवाद की राजनीति करने वाली कॉन्ग्रेस बिहार के एक दलित मजदूर के लिए आवाज़ उठाएगी, इसकी उम्मीद भी शायद ही है। वैसे भी कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भारत को एक देश की जगह ‘यूनियन ऑफ स्टेट्स’ कहते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर, जो केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद हैं, वो इस पर कुछ बोलेंगे? ‘The Kerala Story’ फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे वहाँ हिन्दू लड़कियों को फँसा कर उनका इस्लामी धर्मांतरण करा दिया जाता है और फिर उनकी मानव तस्करी कर के उन्हें ISIS का सेक्स स्लेव बनने भेज दिया जाता है। इस पर तो शशि थरूर ने खूब हंगामा मचाया था कि ये सच्चाई नहीं है। उम्मीद नहीं ही है कि दलित मजदूर की हत्या पर वो कुछ बोलेंगे।

कॉन्ग्रेस बिहार के महागठबंधन में शामिल है, जो राज्य की सत्ताधारी पार्टी भी है। इस हिसाब से भी उसे इस मामले पर आवाज़ उठानी चाहिए थी। बिहार सरकार तो इस मामले पर बोलने से रही। तमिलनाडु में जब बिहारी प्रवासी मजदूरों के साथ हिंसा की खबरें आईं तो बिहार सरकार ने यूट्यूबर मनीष कश्यप पर फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगा कर उन्हें तमिलनाडु पुलिस के हवाले कर दिया गया। अब उन पर NSA के तहत कार्रवाई की जा रही है।

शर्म की बात है कि एक पिछड़ राज्य के पिछड़े समाज का कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य में मॉब लिंचिंग का शिकार हो जाता है और उस राज्य का मुख्यमंत्री अपने लोगों के हितों की रक्षा करने की बजाए देश भर में घूम-घूम कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गठबंधन बनाने में लगा है। वो अलग बात है कि उससे ये भी नहीं हो पा रहा। बिहार जैसे पिछड़े राज्य का दुर्भाग्य है कि यहाँ ऐसे नेता सत्ता में हैं। इस स्थिति में उन्हें इसकी चिंता करनी चाहिए थी कि राजेश माँझी का शव बिहार कैसे आएगा, अंतिम संस्कार कैसे होगा और उनके परिवार का क्या होगा।

ये वही नीतीश कुमार हैं, जिनका एक आतंकी को लेकर ऐसा प्यार उमरा था कि उन्होंने गुजरात पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारी गई इशरत जहाँ को ‘बिहार की बेटी’ कह दिया था। तेज प्रताप यादव ने बाद में उनके इस बयान का समर्थन किया था। लालू यादव के बेटे तेज प्रताप इस समय नीतीश सरकार में मंत्री भी हैं। जबकि CBI कोर्ट ने भी 2021 में कहा कि इसे फेक एनकाउंटर मानने का कोई सवाल ही नहीं उठता और वो आतंकी नहीं थे ये मानने के लिए कोई तथ्य ही नहीं हैं। तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस पर खूब राजनीति की थी।

मस्तक पर तिलक, घर के आगे धर्म ध्वज… बागेश्वर सरकार ने बिहार से बताया ‘हिंदू राष्ट्र’ के लिए 5 करोड़ वाला संकल्प: कहा- हम जगाते रहेंगे

बागेश्वर सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों बिहार में हैं। पटना में उनकी हनुमंत कथा चल रही है। मंगलवार (16 मई 2023) को उनकी कथा का चौथा दिन था। यहीं से उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का रोडमैप बताया।

उन्होंने कहा कि उनका हिंदू राष्ट्र का संकल्प बिहार से पूरा होता दिख रहा है। इसके लिए उन्होंने भक्तों से तिलक लगाकर घर से निकलने और अपने घरों के बाहर ध्वज लगाने को कहा। बागेश्वर सरकार ने कहा कि वे लोगों को जगाने निकले हैं और जब तक लोग जाग नहीं जाते, वे जगाते रहेंगे।

पटना के नौबतपुर में हनुमंत कथा के चौथे दिन बागेश्वर बाबा ने कहा कि बिहार की आबादी 13 करोड़ है। यदि सिर्फ 5 करोड़ लोग ही अपने मस्तक पर तिलक लगाकर निकले और अपने घरों पर धर्म ध्वज लगा लें तो भारत हिंदू राष्ट्र बनने की तरफ अग्रसर हो जाएगा। साथ ही अगर आपके घर के बाहर धर्म ध्वज रहेगा तो हनुमान जी स्वंय आपकी रक्षा करेंगे।

उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति की रक्षा आपको ही करनी होगी। इसके लिए रामचरितमानस का पाठ, मस्तक पर तिलक और घर के बाहर ध्वज हर एक सनातनी को लगाना चाहिए। बागेश्वर सरकार ने कहा कि ऐसा सिर्फ भक्ति के लिए ही नहीं करना है। जिस घर में राम की पूजा होती है, उस घर के रक्षक हनुमान जी हो जाते हैं और घर की सारी विपदाएँ दूर हो जाती हैं।

बता दें कि धीरेंद्र शास्त्री ने मंगलवार को पटना हनुमान मंदिर में भी दर्शन किए। मंदिर प्रबंधन की तरफ से उनका स्वागत और सम्मान किया गया। इसके पहले पटना के एक होटल के पास लगे उनके पोस्टर फाड़ने की घटना सामने आई थी। बागेश्वर सरकार के पाँच दिवसीय कार्यक्रम का समापन बुधवार (17 मई) को होना है। भीषण गर्मी के बावजूद कथा सुनने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।

ट्रेन में ईसाइयत का प्रचार, हिंदू महिला ने ठुकरा दिया ‘प्यार का प्रस्ताव’: कहा- दुनिया को बेवकूफ मत बनाओ, देखिए Video

सोशल मीडिया पर मुंबई की लोकल ट्रेन का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक लड़की को एक दूसरी लड़की से ईसाई और हिन्दू धर्म पर बहस करते देखा जा सकता है। लगभग 2 मिनट 45 सेकेण्ड लम्बे इस वीडियो में हिंदू महिला को ये जवाब देते भी सुना जा सकता है कि ईसाई मिशनरियाँ देश में धर्मान्तरण कराने में जुटी हुईं हैं। ईसाई मत का प्रचार करने वाली महिला को भी ये कहते सुना जा सकता है कि वो हिन्दुओं का ध्यान रखती है इसलिए उन्हें जीजस का संदेश सुना रही है।

9 मई 2023 को मुंबई न्यूज़ नाम के एक ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर किया है। वीडियो के साथ कैप्शन के तौर पर लिखा, “मुंबई की लोकल ट्रेन में एक महिला धर्मांतरण का प्रचार करती हुई जिसे हिन्दू धर्म को मानने वाली महिलाओं ने सबक सिखाया है।” हालाँकि, ये वीडियो कब और कहाँ का है इसकी सटीक जानकारी अभी तक सामने नहीं आ पाई है।

इस बहस में एक काले रंग की टी शर्ट पहनी महिला ने लाल रंग के कपड़ों में बैठी दूसरी महिला से जीसस के बारे में सवाल किया। महिला ने पूछा कि कौन है जीसस ? साथ ही कहा, “दुनिया को चू$$या बना रहे हो। जो 4 कीलों में टंग गया वो हमें प्रोटेक्ट करेगा? परमेश्वर को मानते हो न? जाओ अपने घर में मानो। आप अपने चर्च में मनाओ। यहाँ दुनिया को बेवकूफ मत बनाओ।”

इसी बीच वीडियो दूसरी तरफ से एक महिला ने सवाल किया, “हमारे सनातनी भाई-बहन किसी को ऐसे ट्रेन में पकड़ रहे हैं क्या? हमारे हिन्दू भाई खुद क%ने हैं जो आप लोगों की बातों में आ जाते हैं और कन्वर्ट हो जाते हैं।” इन बातों के जवाब में जीसस का प्रचार कर रही महिला ने कहा कि हम लोग आप से प्यार करते हैं। हालाँकि, ट्रेन में बैठी हिन्दू महिलाओं ने उस महिला के ‘प्यार के प्रस्ताव’ को ठुकरा दिया और कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं क्योंकि हमारे पास लोग हैं। एक महिला ने कहा, “हमारे पास इतने सरे देवी-देवता हैं कि हमें आपके भगवान की कोई जरूरत नहीं है।”

इसी वीडियो में दूसरी तरफ से सवाल किया गया, “आपके भगवान में इतनी शक्ति होती तो वो 3 कीलों में मर गया होता क्या? हम सिर्फ चक्रधारी को फॉलो करते हैं और किसी को नहीं। हम कट्टर हिन्दू हैं और किसी की बातों में नहीं आते। आप लोग घूम-घूम कर लोगों को ब्रेनवाश करते हैं।” इसी वीडियो में काली टी-शर्ट वाली महिला ने ईसाईयत का प्रचार कर रही लड़की को धर्मांतरण की कोशिश न करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इनकी बातों में कई लोग आ जाते हैं।

वायरल वीडियो के अंतिम में ट्रेन में मौजूद अन्य महिलाएँ ईसाई महिला पर धर्मांतरण के बदले पैसे पाने का आरोप लगाती हैं। हालाँकि, ईसाईयत का प्रचार कर रही महिला इस आरोप से इनकार करती है। इस बीच वही महिला भगवत गीता वालों पर भी अपने जैसी हरकत का आरोप लगाती है। ईसाई प्रचारक के इन आरोपों के जवाब में उसे जवाब दे रही हिन्दू महिला ने कहा कि भगवत गीता वाले ढोल बजाते हैं और भक्ति का प्रचार कर रहे हैं।

दूसरी महिला ने भी ईसाईयत का प्रचार करने वाली महिला से अपने गॉड को खुद मानने और दूसरों पर न थोपने की हिदायत दी। अंत में ईसाई महिला ने कहा कि उनके परमेश्वर ज़िंदा हैं और उठ कर चली गई।