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‘मुस्लिम होने के कारण पाकिस्तान चुना, पर यह दादा-दादी की सबसे बड़ी गलती’: अली ने तिरंगा लहराकर साझा किया दर्द

पाकिस्तान के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मोहम्मद शायन अली (Shayan Ali) को अपना मुल्क छोड़ना पड़ा है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI के इशारों पर नाचने से इनकार करने के बाद उन्हें अपनी हत्या का डर सता रहा था। सोशल मीडिया के जरिए वे लगातार अपना दर्द साझा कर रहे हैं। ऐसे ही एक पोस्ट में उन्होंने कहा है उनके दादा-दादी ने भारत की जगह पाकिस्तान को चुनकर सबसे बड़ी गलती की थी।

शायन ने ट्विटर लिखा है, “दुनिया में ‘पाकिस्तान’ जैसी कोई चीज ही नहीं है। पाकिस्तान की स्‍थापना मजहब के आधार पर की गई थी न कि इसलिए कि दुनिया को इसकी जरूरत थी। मेरे दादा-दादी ने भारत के बजाय पाकिस्तान को सिर्फ इसलिए चुना क्योंकि वे मुसलमान थे। पाकिस्तान जाना मेरे दादा-दादी की सबसे बड़ी गलती थी।”

इस पोस्ट के साथ शायन ने तिरंगे के साथ अपनी तस्वीर भी साझा की है। लिखा है, “यदि मैं पाकिस्तान के बजाय भारत में होता तो मुझे सुरक्षा मसलों की वजह से अपना देश नहीं छोड़ना पड़ता। मुसलमान और हिंदू कभी दुश्मन नहीं थे। कुछ असामाजिक लोग थे जो इन दोनों समुदायों को अलग करना चाहते थे। कुछ बाहरी ताकतें ‘अखंड भारत’ को देखकर डर गईं। दुर्भाग्य से, वे एक सुंदर और शायद सबसे शक्तिशाली राष्ट्र को विभाजित करने में सफल भी रहीं।”

शायन ने देश के तौर पर भी पाकिस्तान के अस्तित्व को खारिज कर दिया है। कहा है कि एक देश की अपनी संस्कृति होती है। लेकिन 1947 में विभाजन के बाद पाकिस्‍तान की पूरी संस्‍कृति सिर्फ भारतीय संस्कृति की नकल थी। जिन्होंने जमीन के टुकड़े किए उनमें अपनी संस्कृति का निर्माण की काबिलियत नहीं थी। वे सिर्फ हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच द्वेष फैलाना चाहते थे।

शायन अली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैन हैं। हनुमान चालीसा भी उन्हें कंठस्थ है। इससे पहले उन्होंने ट्विटर पर ‘पाकिस्तान छोड़ने की मेरी कहानी’ शीर्षक से एक पोस्ट साझा कर अपनी आपबीती बताई थी। इसमें उन्होंने कहा था, “मैंने पाक आर्मी के पीआर विंग के कश्मीर से संबंधित एक म्यूजिक वीडियो (भारत के खिलाफ नफरत वाला) में जब काम करने से मना कर दिया तो उन्होंने मुझ पर मेरे सुनहरे बालों के कारण भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का जासूस और यहूदी एजेंट होने का आरोप लगाया। मैं भाग्यशाली था कि मैंने पाकिस्तान को सुरक्षित छोड़ दिया, लेकिन फिर भी आतंकवादी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के खिलाफ मेरा संघर्ष कभी समाप्त नहीं हुआ।”

दादा जी ने वाट लगा दी

पाकिस्तान चुनने के अपने पुरखों के फैसले पर अफसोस जताने वाला शायन अली अकेले नहीं हैं। हाल ही में पाकिस्तानी पत्रकार आरजू काजमी (Arzoo Kazmi) ने भारत छोड़ पाकिस्तान में बसने के पूर्वजों के फैसले पर अफसोस जताते हुए कहा था कि दादा जी ने वाट लगा दी। अपने ट्वीट में काजमी ने कहा था, “मेरे भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों को लगता है कि उनका पाकिस्तान में कोई भविष्य नहीं है। मेरे दादाजी और उनका परिवार बेहतर भविष्य के लिए प्रयागराज और दिल्ली से पाकिस्तान चला आया था। वाट लगा दी दादा जी।”

कर्नाटक में 20 मई को शपथ ग्रहण: सिद्धारमैया होंगे मुख्यमंत्री, डीके शिवकुमार डिप्टी CM

सिद्धारमैया (Siddaramaiah) कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री (Karnataka CM) होंगे। डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) डिप्टी सीएम की भूमिका में होंगे। 20 मई को बेंगलुरु में शपथ ग्रहण समारोह होगा। लगातार बैठकों के बाद बुधवार (18 मई 2023) कॉन्ग्रेस यह फैसला लेने में सफल रही। 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे 13 मई को आए थे। कॉन्ग्रेस को 135 सीटों पर जीत मिली है।

वैसे सीएम की रेस में शिवकुमार के पिछड़ने के संकेत बुधवार दिन से ही मिलने लगे थे। एक तरफ शिवकुमार के क्षेत्र में उनके समर्थन प्रदर्शन शुरू हो गए, दूसरी तरफ सिद्धारमैया के समर्थक जश्न मनाने लग गए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार (18 मई 2023) को कर्नाटक कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। बैठक शाम 7 बजे बेंगलुरु में होगी। सिद्धारमैया को इस बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा।

कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है। इस पर सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों तैयार हैं। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक में सीएम पद को लेकर आम सहमति बनाने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे बुधवार देर रात तक कोशिश करते रहे। इसके पहले कॉन्ग्रेस में बुधवार पूरे दिन कर्नाटक सीएम पद को लेकर बैठकें होती रही। सिद्धारमैया और शिवकुमार को ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री बनाने पर चर्चा हुई थी। डीके शिवकुमार चाहते थे कि पहला कार्यकाल उन्हें दिया जाए। रिपोर्टों के अनुसार बैठक में उन्होंने कहा था, “मुझे पहला कार्यकाल मिले अन्यथा कुछ नहीं मिले। हर हाल में मैं चुप रहूँगा।” दिन में हुई बैठक में डीके शिवकुमार ने डिप्टी सीएम पद का ऑफर ठुकरा दिया था।

देर रात तक चली पार्टी हाईकमान के साथ बैठक में डीके शिवकुमार को मना लिया गया। खबरों के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह के लिए बेंगलुरु के कांतिरावा स्टेडियम में तैयारी चल रही है। सिद्धारमैया दूसरी बार कर्नाटक के सीएम बनेंगे। इसके पहले वे 2013 से 2018 तक राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

साधु की वेशभूषा, बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम पर आपत्तिजनक टिप्पणी: वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड पुलिस ने दर्ज किया मामला

उत्तराखंड पुलिस ने बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के विषय में अभद्र और भ्रामक टिप्पणी करने को लेकर एक तथाकथित साधु के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। सोशल मीडिया पर तथाकथित साधु का वीडियो वायरल होने के बाद चमोली पुलिस ने यह कार्रवाई की है। इस संबंध में उत्तराखंड पुलिस की तरफ से सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की गई है।

यूट्यूब रोहित पहाड़ी ने अपने यूट्यूब चैनल रोहित पहाड़ी वीलॉग (Rohit Pahadi Vlog) पर उत्तराखंज के माणा इलाके में एक साधु से बातचीत का वीडियो अपलोड किया था। यह तथाकथित साधु भगवान बद्रीनाथ और केदारनाथ के बारे में भ्रामक टिप्पणी कर रहा था। शख्स ब्रदीनाथ और केदारनाथ के नाम का उच्चारण भी गलत कर रहा था। ऐसे में वीलॉगर उस साधु से उलझ पड़ता है। साधु की पहचान शानन्तु विश्वास के तौर पर हुई है।

वीडियो वायरल होने के बाद नेटिजन्स में नाराजगी है। नेटिजन्स ने साधु का भेष धरे इस शख्स को मौलवी करार देते हुए इसके खिलाफ सख्त एक्शन की माँग की। बदरीनाथ में निवास कर रहे स्वामी अदृश्यानंद ने धार्मिक टिप्पणी करने वाले साधु के खिलाफ बदरीनाथ कोतवाली में तहरीर दी। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने संबंधित साधु के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।

उत्तराखंड पुलिस ने इस संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी। उत्तराखंड पुलिस द्वारा ट्विटर पर लिखा गया, “सोशल मीडिया पर श्री बद्रीनाथ व श्री केदारनाथ धाम के विषय में तथाकथित साधु द्वारा अभद्र टिप्पणी करने विषयक प्रसारित वीडियो का संज्ञान लेते हुए चमोली पुलिस द्वारा इस संबंध में कोतवाली श्री बद्रीनाथ में शानन्तु विश्वास के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।” साधु ने बद्रीनाथ धाम को बदरुद्दीन और केदारनाथ धाम को केदारुद्दीन बताते हुए कहा था कि वहाँ नमाज होता था।

यूट्यूबर रोहित पहाड़ी ने विवादित वीडियो को अपलोड करने को लेकर माफी माँगी है। रोहित पहाड़ी ने अपने यूट्यूब और फेसबुक चैनल से विवादित वीडियो को हटा दिया है। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि उस वीडियो को प्रसारित न करे। चमोली पुलिस ने भी लोगों से वीडियो को शेयर न करने की अपील की है। फिलहाल आरोपित साधु शानन्तु विश्वास की तलाश की जा रही है।

कभी निकाह, तलाक और दूसरी शादी, अब शरणार्थी हिन्दुओं का घर ध्वस्त करने का आदेश… IAS टीना डाबी फिर सुर्ख़ियों में, पति भी फँसे थे रिश्वत केस में

मंगलवार (16 मई, 2023) को राजस्थान के जैसलमेर में प्रशासन ने पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों के घरों को गिरा दिया है। कहा जा रहा है कि जैसलमेर की कलेक्टर टीना डाबी के आदेश पर ही पाकिस्तानी हिंदुओं के घरों को तोड़ा गया है। इसके बाद से ही टीना डाबी चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर भी वे ट्रेंड कर रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब टीना डाबी सुर्खियों में हैं इसके पहले भी अपनी निकाह और शादी को लेकर उन्होंने खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं।

टीना डाबी ने पहले तो अपनी पहचान 2015 बैच की आईएएस टॉपर के रूप में बनाई। आईएएस टॉप करने के बाद उनकी जमकर तारीफ हुई। कई लड़कियों ने उन्हें अपना रोल मॉडल माना। उसके बाद डाबी तब चर्चा में आई जब उन्होंने अपने ही बैच के आईएएस अतहर आमिर खान से निकाह किया। मार्च 2018 में आईएएस टीना डाबी ने जम्मू-कश्मीर के आईएएस अतहर आमिर खान से निकाह किया था।

टीना और अतहर का रिश्ता मसूरी स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री अकादमी फॉर एडमिनिस्ट्रेशन’ से शुरू हुआ था। दोनों के प्यार और फिर शादी में बदलने की चर्चा पूरे देश में हुई थी। कॉन्ग्रेस एमपी राहुल गाँधी समेत कई राजनेताओं और पत्रकारों ने इस निकाह का खूब डंका बजाया था और इसे ‘सेक्युलर इंडिया की पहचान’ से लेकर सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक तक बताया था। राहुल गाँधी ने दोनों को बधाई देते हुए यहाँ तक कामना की थी कि ‘असहिष्णुता और सांप्रदायिक घृणा के इस बढ़ते दौर में’ इन दोनों का प्यार और परवान चढ़े और सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा बने। शादी के बाद टीना डाबी ने अपने सरनेम के आगे खान लगा लिया था।

नवंबर 2020 आते-आते दोनों ने अपनी मर्जी से तलाक की अर्जी दाखिल कर दी, जिसे अगस्त 2021 में मंजूर कर लिया गया। इस तरह सांप्रदायिक एकता की मिसाल बनी शादी अधिक समय तक नहीं टिक सकी। तलाक की अर्जी से कुछ समय पहले टीना ने सोशल मीडिया अकाउंट में अपने नाम से खान सरनेम हटा दिया था। तलाक के बाद अतहर कैडर बदलकर अपने गृह राज्य जम्मू कश्मीर वापस लौट गए थे।

अप्रैल 2022 में टीना ने अपने से 13 साल बड़े आईएएस अफसर प्रदीप गवांडे से शादी का फैसला कर सबको चौंका दिया। तलाक के साल भर बाद ही टीना ने दूसरी शादी कर ली। इस शादी को लेकर टीना ने मीडिया से कहा था कि कोविड के समय में दोनों नजदीक आए थे। एक दूसरे को जानने के बाद जब प्रदीप ने टीना के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। यह प्रदीप गवांडे की भी दूसरी शादी थी। RSLDC में MD रहते हुए गावंडे का नाम रिश्वत केस में भी आया था।

जुलाई 2022 में राज्य सरकार ने 29 आईएएस के तबादले किए। टीना डाबी और उनके पति प्रदीप गवांडे का नाम भी इस लिस्ट में शामिल था। आईएएस अफसर टीना डाबी को जैसलमेर जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट बनाया गया तो उनके पति आईएएस अफसर डॉ. प्रदीप गवांडे को उदयपुर भेजा गया है। गवांडे को राजस्थान राज्य खान एवं खनिज निगम लिमेटड का प्रबंध निदेशक और पेट्रोलियम का निदेशक बना दिया गया।

‘पोस्टर फाड़ सकते हो, लेकिन लोगों के दिल से कैसे निकालोगे’: बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- हिंदुओं को माला के साथ भाला रखने की जरूरत

तमाम विवादों के बीच मध्य प्रदेश के बागेश्वर के महंत धीरेंद्र शास्त्री का बिहार की राजधानी पटना में आयोजन हनुमंत कथा का बुधवार (17 मई 2023) को समापन हो गया। इस बीच पटना में उनके पोस्टर्स पर कालिख पोत दी गई और उस पर 420 और चोर लिख दिया गया है। हालाँकि, ऐसा करने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ‘दिल से कैसे निकालोगे’।

पटना में आयोजित पाँच दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन उन्होंने कथा सुनने आए श्रद्धालुओं से ‘माला और भाला’ साथ रखने का आह्वान किया। भगवान हनुमान को शास्त्र और अंगद को शस्त्र बताते हुए उन्होंने कहा, “सनातन धर्म में शास्त्र और शस्त्र दोनों की जरूरत है। शास्त्र और शस्त्र दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है। एक डंडा निकाला तो शास्त्र भी शस्त्र बन जाता है, लेकिन सनातन धर्म की रक्षा के लिए माला और भाला दोनों होना जरूरी है।”

पटना में पोस्टर फाड़े जाने को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “पोस्टर तो फाड़ा जा सकता है, लेकिन लोगों के दिल से कैसे निकालोगे।” इस दौरान उन्होंने शायरी भी सुनाई। उन्होंने कहा, “सितारों को आँखों में महफूज रखना, क्योंकि बहुत देर तक रात ही रात होगी। मुसाफिर हो तुम भी… मुसाफिर हैं हम भी, बालाजी ने चाहा तो किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी।।”

अंतिम में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम में भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी पहुँचीं और उनसे मुलाकात की। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे भी पास बैठे हुए थे। कथा सुनाने के बाद धीरेंद्र शास्त्री पटना एयरपोर्ट पहुँचे और वहाँ से चार्टर्ड प्लेन में सवार होकर मध्य प्रदेश के लिए निकल गए। पटना में उनकी कथा में जुटे लोगों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने एयरपोर्ट पर सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ा दी थी।

कहा जा रहा है कि पटना के नौबतपुर के तरेत पाली मठ के बाद अब धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा गया में आयोजित की जाएगी। उन्होंने 15 मई 2023 को ऐलान किया था कि 29 सितंबर 2023 को गया में हनुमंत कथा का आयोजन होगा और दरबार लगेगा।

राष्ट्रीय लोक जनता दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने धीरेंद्र शास्त्री के हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश संविधान से चलता है, न कि धर्म से। उन्होंने कहा कि बिहार में बाबा बागेश्वर ने जिस तरह से हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कही गई है, यह ठीक नहीं है। 

धीरेंद्र शास्त्री के पोस्टर पर कालिख पोतने और चोर लिखने पर भाजपा और लोजपा (रामविलास) भड़क गई है। भाजपा ने कहा कि यह काम राजनीतिक प्रवृत्ति के लोगों ने किया है और वोट की राजनीति को लेकर किया है। वहीं, चिराग पासवान ने भी इसकी निंदा की है।

बताते चलें कि हिंदू जागरण मंच के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉक्टर सुमन ने दिसंबर 2022 में झारखंड में जनजाति समुदाय के खिलाफ लव जिहाद और लैंड जिहाद को लेकर यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हिन्दू एक हाथ में माला ले तो दूसरे हाथ में भाला ले, ताकि धर्मांतरण करने वाले सचेत हो जाएँ।

मुख्तार अंसारी पर हत्या का केस… 30-40 पुलिस वालों से भरे कोर्ट में गाली सुनने वाले जज की कहानी, 5 करोड़ रुपए लेकर लिखा गया था फैसला?

उत्तर प्रदेश में दशकों तक अपराध जगह की रीढ़ रहे माफिया मुख़्तार अंसारी के आपराधिक इतिहास की पड़ताल में ऑपइंडिया की टीम अप्रैल व मई माह में पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में गई। इस दौरान हमें मुख़्तार द्वारा प्रताड़ित किए गए तमाम पीड़ितों ने अपने अलग-अलग अनुभव बताए। हत्या, हत्या के प्रयास, जमीन कब्ज़ाने, गुंडा टैक्स उगाही के अलावा मुख़्तार अंसारी पर अपने खिलाफ दर्ज केस की फाईलें भी गायब करवा देने का आरोप है।

इस दौरान कुछ पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि मुख़्तार अंसारी का दबाव न्यायपालिका पर भी था। पीड़ितों और वकील ने जजों पर मुख़्तार के खिलाफ फैसले से पहले छुट्टी पर चले जाने और अनुचित फैसला सुनाने का भी आरोप लगाया।

4 वर्षों तक कोर्ट में पेश ही नहीं हुआ मुख़्तार

जिन अजय सिंह उर्फ़ मन्ना की हत्या का आरोप 2009 में मुख़्तार अंसारी पर लगा था, उनके भाई अशोक सिंह ने ऑपइंडिया से बात की। अशोक सिंह ने हमें बताया कि 2009 में उनके भाई मन्ना की हत्या के बाद 2010 में इसी केस के गवाह राम सिंह मौर्य और उनके सरकारी गनर को भी मार डाला गया था। अशोक सिंह ने आगे बताया कि 4 साल तक मुख़्तार अंसारी इस केस में मऊ कोर्ट में हाजिर ही नहीं हुआ था।

उन्होंने कहा कि मुख़्तार दूसरे मामलों में अपनी गैर-हाजिरी लगवा लेता था। ऐसा करते हुए मुख़्तार ने 4 साल बिता दिए और साल 2014 आ गया। अशोक ने बताया कि इन 4 सालों तक मुख़्तार केस में जजों से अपनी सेटिंग भिड़ाता रहा।

फैसले के दिन ही केस से हट गए थे जिला जज

अशोक सिंह ने आगे बताया कि 4 साल तक मुख़्तार अंसारी ने उनके भाई के हत्याकांड केस को लगातार गैर-हाजिर रह कर टाला। अशोक ने आगे बताया, “4 साल बाद 2014 में केस की सुनवाई हुई और इसी साल मऊ के तत्कालीन जिला जज अनिरुद्ध सिंह की कोर्ट में मुख़्तार अंसारी को सजा सुनाने का दिन आया।” उस दिन का जिक्र करते हुए अशोक सिंह ने कहा, “फैसले की डेट पड़ी। शाम के समय केस से वास्ता रखने या न रखने वाले कचेरी के तमाम लोग वहीं थे। सारे मुल्जिम बुला लिए गए। हथकड़ियाँ मँगा ली गईं। ये लगा कि जज साहब फैसला सुनाने जा रहे हैं।”

अशोक सिंह ने कहा कि इसी दिन मुख़्तार अंसारी ने जिला जज अनिरुद्ध सिंह की कोर्ट से अपना केस हटवाने की हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन वो ख़ारिज हो गई थी। घटनाक्रम बताते हुए अशोक ने कहा, “थोड़ी देर बाद अंदर जब जज साहब अंदर गए तो वहाँ से निकले ही नहीं। अंदर से ही इन्होंने फाइल ADJ के यहाँ ट्रांसफर कर दी। ये दबाव मुख़्तार अंसारी का रहा।” अशोक सिंह ने बताया कि उन्हें कहीं से सुनाई दिया था कि जज अनिरुद्ध सिंह पर कोई बड़ा दबाव आया था।

जज आदिल आफताब का न्याय संदिग्ध: पीड़ित

अशोक सिंह ने बताया कि साल 2014 में जिला जज ने जब उनके भाई मन्ना के हत्याकांड केस में फैसले के दिन खुद को अलग कर लिया तब वह केस सेशन जज आदिल आफ़ताब की कोर्ट में गया। उन्होंने कहा कि साल 2014 से 2017 तक आदिल आफ़ताब ने इस केस की सुनवाई की। साल 2017 में आदिल आफ़ताब ने मुख़्तार अंसारी को मन्ना सिंह हत्याकांड में बरी कर दिया।

फैसले के दिन का जिक्र करते हुए अशोक सिंह ने कहा, “हमारे वकील आदिल आफ़ताब की कोर्ट से केस ट्रांसफर करवाने जिला जज के यहाँ प्रार्थना पत्र देने जा रहे थे। कोर्ट में उस दिन न मुल्जिम आए थे और न ही विपक्ष वाले लेकिन आदिल आफ़ताब ने फैसला सुना दिया।”

जज आदिल आफ़ताब की शिकायत हाईकोर्ट में

सेशन जज आदिल आफ़ताब के फैसले से अशोक सिंह ने खुद को असंतुष्ट बताया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा इसकी शिकायत हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और रजिस्टार को लिखित तौर पर की गई है। इस शिकायत में जज आदिल आफ़ताब के सुनाए गए फैसले की पूरी जाँच की माँग की गई है। अशोक सिंह ने कहा कि अगर उनके भाई मन्ना सिंह के हत्यारों को भाड़े का शूटर बता कर मुख़्तार को बरी किया गया है तो ये भी बताया जाए कि उन कातिलों को खरीदा किसने था? अशोक सिंह ने सवाल किया कि फैसला सुनाते समय इस गहराई तक कोर्ट क्यों नहीं गई ?

हालाँकि, अशोक सिंह को जज आदिल आफ़ताब के खिलाफ भेजी शिकायत पर हुई जाँच के निष्कर्ष के बारे में कुछ नहीं पता। उन्होंने कहा कि 2 बार उन्होंने शिकायत की है लेकिन संभवतः जजों की जाँच गोपनीय होती है इसलिए क्या हुआ इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

भरी कोर्ट में जज पर लगा था रिश्वत का आरोप

अशोक सिंह के सहयोगी और मऊ जिला न्यायालय में वकील सुनील सिंह ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि जब मन्ना सिंह हत्याकांड में जज आदिल आफताब ने मुख़्तार अंसारी को बरी किया तब सजा पाए एक अन्य मुल्जिम ने उन पर भरी कोर्ट में रिश्वत लेने का आरोप लगाया। एडवोकेट सुनील सिंह ने कहा, “जब फैसला हो गया तो उसमें एक अभियुक्त राजू कनौजिया जिसे सजा हो गया उसने भरी अदालत में कहा कि जब 5 करोड़ लिए थे फैसला करने के लिए, तो हम लोगों को क्यों सज़ा कर दिए?”

अधिवक्ता सुनील सिंह सिंह का दावा है कि राजू कन्नौजिया ने ये बातें 30 से 40 पुलिस वालों के आगे भरी कोर्ट में कही।

मुल्जिम ने जज को दी थी गाली

एडवोकेट सुनील सिंह का यह भी दावा है कि सजा पाए राजू कनौजिया ने कोर्ट में जज को गाली भी दी। अधिवक्ता सुनील सिंह ने आगे कहा, “यहाँ एक जिले में जज 3 साल से ज्यादा नहीं रहता है लेकिन किस कारण से उन्हें 5 साल यहाँ फैमिली कोर्ट में रखा गया? फिर आदिल आफ़ताब को फैमिली कोर्ट अम्बेडकरनगर ट्रांसफर हुआ जबकि उन्हें सीनियारिटी के आधार पर जिला जज बनना चाहिए था।” सुनील सिंह ने भी सेशन जज आदिल आफ़ताब की शिकायत हाईकोर्ट में किए जाने की बात दोहराई।

मारे जाते रहे गवाह, कोर्ट ने नहीं लिया संज्ञान

अधिवक्ता सुनील सिंह मन्ना सिंह हत्याकांड में वादी मुकदमा हरेंद्र सिंह के वकील हैं। उन्होंने कहा कि मन्ना सिंह के बाद इस केस के गवाह की भी उनके गनर सहित कत्ल हो गया था लेकिन, इसका संज्ञान कभी अदालत ने नहीं लिया।

अशोक सिंह और उनके वकील सुनील सिंह ने बताया कि मन्ना सिंह हत्याकाण्ड में मुख़्तार अंसारी को बरी किए जाने के सेशन जज आदिल आफताब फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले के खिलाफ न सिर्फ वो बल्कि प्रदेश सरकार भी हाईकोर्ट गई है। बकौल अशोक सिंह हाईकोर्ट में दोनों अपीलों को स्वीकार कर लिया गया है और उस पर सुनवाई लंबित है।

मन्ना सिंह हत्याकांड के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ पढ़ें।

मुख़्तार ही तय करता था जिले के DM और SP

मऊ के जिला पंचायत सदस्य प्रिंस यादव ने समाजवादी पार्टी की सरकार के समय का जिक्र करते हुए बताया कि तब मुख़्तार अंसारी का असर जजों पर भी हुआ करता था। प्रिंस ने कहा, “जब अन्य पार्टियों की सरकारें हुआ करती थीं तब इनके (मुख़्तार) के डर से जज फैसला नहीं सुनाते थे। जब फैसला आने को होता था उस दिन जज छुट्टी पर चले जाते थे।” योगी सरकार में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए प्रिंस यादव ने कहा कि आज वही जज खुल कर मुख़्तार के खिलाफ फैसला सुना रहे हैं।

प्रिंस यादव ने आगे बताया कि मुख़्तार अंसारी ही जिसे चाहता था वही DM और SP बन कर आता था। उन्होंने बताया, “जिस DM या SP को उनका (मुख़्तार) का फोन चला जाता था वो किसी और की सुनता ही नहीं था।” प्रिंस यादव ने माँग की है कि मुख़्तार अंसारी के उस समय में तैनात रहे सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों की जाँच करवाई जाए।

राह कई, पर किधर जाएँगे DK शिवकुमार: कर्नाटक में CM बने कोई भी, पिसना कॉन्ग्रेस को ही

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव परिणाम आए 4 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक थाह-पता नहीं है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। CM पद की रेस में 2 नाम आगे हैं, ये किसी से छिपा नहीं है – नेता प्रतिपक्ष रहे सिद्धारमैया और प्रदेश अध्यक्ष DK शिवकुमार। सिद्धरमैया 1983 से ही विधायक बनते रहे हैं और 5 साल CM भी रह चुके हैं, जबकि DK शिवकुमार कॉन्ग्रेस के संकटमोचक हैं जो 8 बार MLA बन चुके हैं। कॉन्ग्रेस की रिजॉर्ट पॉलिटिक्स अक्सर अरबपति शिवकुमार के इर्दगिर्द ही घूमती रही है।

सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार, दोनों ने ही नई दिल्ली पहुँच कर राहुल गाँधी से मुलाकात की है। कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। मीडिया सूत्र कह रहे हैं कि DK शिवकुमार को उप-मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया गया, जिसके लिए वो तैयार नहीं हैं। सिद्धारमैया के सीएम पद के लिए चुने जाने की अफवाह फैलने के बाद उनके समर्थकों ने खूब जश्न भी मनाया, लेकिन पार्टी ने साफ़ किया है कि अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

ये कर्नाटक का दुर्भाग्य ही होगा कि वहाँ की सत्ताधारी पार्टी कलह में व्यस्त रहे और पूर्ण बहुमत के बावजूद राज्य विकास से वंचित रह जाए। यहाँ हम उन विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जो DK शिवकुमार के पास हैं, अगर वो मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाते हैं तो। ये विकल्प कहीं और नहीं, बल्कि उनकी पार्टी में ही मौजूद हैं या रहे हैं। कुर्सी पर गाँधी परिवार से धोखा मिलने के बाद DK शिवकुमार क्या-क्या कर सकते हैं, आइए जानते हैं।

या तो दो तिहाई विधायक तोड़ दें, या ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह कॉन्ग्रेस को अल्पमत में कर दें

DK शिवकुमार के पास पहला विकल्प ये हो सकता है कि अगर उनकी राजनीतिक हैसियत कॉन्ग्रेस में बहुत ज्यादा है तो वो पार्टी के दो तिहाई विधायक तोड़ कर एक अलग पार्टी बना लें, जैसा कि महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने किया और भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने। या फिर, वो इतना विधायक तोड़ दें कि कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में चली जाए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण उनकी पार्टी में ही रहे हैं। मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत कर के मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिरा दी थी।

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की जीत के बाद गाँधी परिवार के पुराने सिपहसालार कमलनाथ को तरजीह दी गई थी और युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ धोखा हुआ। उन्होंने 22 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी। वो भाजपा में शामिल हुए। उप-चुनाव में भाजपा के ज़्यादा विधायक जीते और कमलनाथ की सरकार चली गई। ‘महाराज’ की तरह बगावत के लिए DK शिवकुमार के पास वैसा ही करिश्मा और जनस्वीकार्यता होनी चाहिए। क्या वो इस रिस्की रास्ते पर जाना पसंद करेंगे?

सचिन पायलट की तरह अपनी ही सरकार का विपक्ष बन जाएँ

राजस्थान में कुछ ऐसा ही हो रहा है। सचिन पायलट को राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष और उप-मुख्यमंत्री का पद मिला था। 2020 में उन्होंने बगावत तो की, लेकिन उलटे उनके दोनों पद चले गए और कॉन्ग्रेस में कद भी घटा दिया गया। सचिन पायलट फ़िलहाल शांति प्रदर्शन कर रहे हैं। राजस्थान में अशोक गहलोत अपने विधायकों को एकजुट रखने में कामयाब रहे। सचिन पायलट की हालिया ‘जन संघर्ष पदयात्रा’ खत्म हो गई है, लेकिन उन्होंने अपनी ही सरकार पर जम कर हमला बोला और भीड़ जुटाई। पायलट तो कह भी चुके हैं कि बाद में CM बनाने के वादे से कुछ नहीं होता।

पूरे 5 वर्षों तक अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जुबानी जंग चलती रही। गहलोत ने तो उन्हें ‘नालायक’ तक बता दिया। उन्होंने अशोक गहलोत और भाजपा नेता वसुंधरा राजे की मिलीभगत का आरोप लगाया। अब वो जनता के बीच जाकर अपना अगला रुख तय करेंगे। क्या DK शिवकुमार भी अगले 5 साल अपनी ही सरकार का विपक्ष बन कर बिताएँगे? जन-समर्थन से ऐसा संभव तो है। अगर विधायक उनके साथ नहीं हैं तो उनके लिए ये रास्ता हो सकता है, क्योंकि इससे वो खबरों में बने रहेंगे और सक्रिय रहेंगे।

बाबा की तरह मंत्रिमंडल में रह कर कुढ़ते रहें

छत्तीसगढ़ में जीत के बाद कॉन्ग्रेस ने भूपेश बघेल को CM बनाया था। TS सिंह देव, जो सरगुजा राजघराने से आते हैं, उन्हें ढाई साल बाद ये पद देने का आश्वासन मिला। हालाँकि, भूपेश बघेल पद पर बने रहे। टीएस सिंह देव कभी गुस्सा कर विधानसभा से लौट गए तो कभी कुढ़न में बयान देते रहे। अब उन्होंने कह दिया है कि चुनाव लड़ने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने हार मान ली है या फिर ये उनकी राजनीति है, भगवान जाने।

अगर DK शिवकुमार भी TS सिंह देव के रास्ते जाते हैं तो उनके पास विकल्प होगा कि वो उप-मुख्यमंत्री का पद और कुछ मलाईदार विभाग ले लें और खुद को सरकार में नंबर-2 मान ही लें। हाँ, बीच-बीच में मीडिया के बयानों में उनकी चिढ़न सामने आ सकती है। सिंह देव को दो मंत्रालय दिए गए थे, लेकिन उन्होंने अचानक से पंचायती राज मंत्री से त्याग-पत्र दे दिया। वो स्वाथ्य मंत्री बने रहे। क्या डीके शिवकुमार इस रास्ते जाएँगे और सिद्धारमैया के सामने हार मानते हुए जो मिला उसी में खुश रहेंगे?

हिमाचल प्रदेश की प्रतिभा सिंह की तरह परिवार को आगे बढ़ाएँ

भाजपा ने 2022 में हिमाचल प्रदेश में बड़ी जीत दर्ज की। प्रदेश अध्यक्ष थीं प्रतिभा सिंह, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में सुखविंदर सिंह सुक्खू को चुना गया। प्रतिभा सिंह का नाम भी चर्चा में था, लेकिन CM पद छोड़ने की एवज में उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को मंत्री बनाने का सौदा तय हुआ। विक्रमंदितया को पब्लिक वर्क्स विभाग दिया गया है। वो 33 वर्ष के हैं, ऐसे में प्रतिभा सिंह ने अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य के लिए समझौता कर लिया।

अगर DK शिवकुमार अपनी प्रतिष्ठा भी बचाना चाहते हैं और खुद को नंबर-2 नहीं बनाना चाहते, तो उनके पास विकल्प है कि अपने परिवार के किसी सदस्य को मंत्री बनवा दें, या फिर अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाएँ। आज भी प्रतिभा सिंह गाहे-बगाहे चर्चा करती रहती हैं कि हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह के नाम पर आज भी वोट पड़ते हैं। अब उन्हें अध्यक्ष पद से हटाए जाने की भी खबरें घूम रही हैं। भले ही वो इसमें कुछ न कर पाएँ, उनके बेटे के राजनीतिक भविष्य सुरक्षित ही दिख रहा।

सिद्धू की तरह बन जाएँ: कॉन्ग्रेस के लिए न उगलते बने, न निगलते

DK शिवकुमार के पास एक और अजीब सा विकल्प है और वो है नवजोत सिंह सिद्धू जैसा। ये वो नाम है, जो कॉन्ग्रेस को न उगलते बनता है और न निगलते। उन्हें भी उप-मुख्यमंत्री का पद दिया गया था पंजाब में। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ विद्रोह कर दिया। बाद में कैप्टन सीएम पद से हटाए गए और चरणजीत सिंह चन्नी पर कॉन्ग्रेस ने भरोसा जताया, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष रहे सिद्धू के तेवर ढीले नहीं पड़े।

नवजोत सिंह सिद्धू एक पुराने मामले में एक वर्ष के लिए जेल गए। फ़िलहाल वो जेल से बाहर आ चुके हैं और पंजाब कॉन्ग्रेस में फिर राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो रही है। एक तरफ वो बगवात करते हैं, दूसरी तरफ सोनिया-राहुल-प्रियंका की शान में कसीदे पढ़ते हैं। DK शिवकुमार के पास ये सबसे अजीब विकल्प है, जिस पर वो शायद ही विचार करें। लेकिन हाँ, ऐसा रुख अपनाने से अगले चुनाव में कॉन्ग्रेस की बुरी हार तय हो जाएगी।

2 केरल, एक मनोरम-दूसरा आतंकी हब: द केरल स्टोरी के डायरेक्टर ने बताया 100% साक्षर स्टेट का ‘काला सच’

लव जिहाद और धर्मांतरण के बाद महिलाओं को इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) में सेक्स स्लेव के रूप में भेजने की वास्तविक घटनाओं पर आधारित ‘द केरल स्टोरी (The Kerala Story)’ चर्चा में बनी हुई है। एक तरफ ब्रिटेन में इसे दिखाने की इजाजत मिल गई तो दूसरी तरफ फिल्म निर्माता ने कुछ लव जिहाद पीड़ितों को भी पत्रकारों से रू-ब-रू करवाया।

पत्रकार वार्ता में फिल्म के निर्देशक सुदिप्तो सेन ने कहा, “केरल में दो केरल विद्यमान है। एक केरल- जो फिल्म की तरह है, पोस्टकार्ड, बैकवॉटर्स, खूबसूरत लैंडस्केप, कलरीपयट्टू, डांस, मार्शल आर्ट आदि। दूसरा केरल बसता है उसके उत्तरी भाग में, जहाँ मलप्पुरम, कासरगोड, कोझिकोड है, जो मंगलुरु सहित दक्षिण कर्नाटक से जुड़ता है। ये आतंकी नेटवर्क का हब है।”

केरल के बारे में बताते हुए सुदिप्तो सेन ने कहा, “यहाँ जाकर जितनी आप सुनेंगे, जानेंगे तो आपको पता चलेगा कि महिला साक्षरता में सबसे आगे रहने वाला राज्य में पर्दे के पीछे क्या हो रहा है। अगर सच्चाई जानना हो तो कासरगोड, मल्लपुरम में जाना चाहिए और पता करना चाहिए कि ये कहानी (फिल्म की) सही है या गलत।”

फिल्म निर्माताओं में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “CNN इंटरनेशनल की एक डॉक्यूमेंट्री है, जहाँ पे केरल के कुछ गाँवों में शरिया कानून लागू है। ये हम उस 100 परसेंट साक्षर राज्य की बात कर रहे हैं, जहाँ गाँव-गाँव शरिया लॉ से चलते हैं। इस फिल्म को बनाने से पहले मुझे भी बहुत कुछ नहीं पता था।”

प्रेस वार्ता में आईं लव जिहाद पीड़ित महिलाओं में से एक ने कहा, “केरल से ऐसी केसेज आए हैं, जिनमें महिला ISIS में शामिल होने गई हैं। हाल ही में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने खुलासा किया था कि प्रजरू, जिसने धर्मांतरण करने के बाद अपना नाम मोहम्मद अमीन रख लिया था। मैं एक न्यूज क्लिप का हिस्सा पढ़कर सुना रही हूँ।”

उस महिला ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने नारकोटिक्स जिहाद के संदर्भ बोलते हुए कहा था कि बालूशेरी का रहने वाला प्रजरू का नाम उन मलयाली लोगों की सूची में शामिल किया गया है, जिन्होंने ISIS ज्वॉइन की है। प्रजरू एक हत्या के मामले में भी वांछित था और उस पर भारी कर्ज था। प्रजरू की पत्नी ने कहा कि उसे यह जानकर आश्चर्य नहीं हुआ कि उसका पति आतंकी संगठन में शामिल हो गया, क्योंकि पैसे के लिए वह कुछ भी कर सकता था।”

फिल्म निर्माताओं के साथ आई महिला ने सीएम विजयन के बयान को आगे बढ़ाते हुए कहा, “प्रजरू ने चार शादियाँ कीं। शादी करने के लिए तीन साल पहले उसने इस्लाम अपना लिया था। बाद में वह रेडिकल हो गया था। मर्डर केस में सबूतों के अभाव में उसे रिहा कर दिया गया था।” महिला ने कहा कि ये सारी बातें केरल के मुख्यमंत्री ने खुद बताई हैं।

बताते चलें कि केरल स्टोरी फिल्म को लेकर देश ही नहीं, विदेशों में भी बवाल हो गया है। एक तरफ ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार और एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले तमिलनाडु सरकार ने उनके राज्यों में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। वहीं, यूपी, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने इस फिल्म को टैक्स-फ्री कर दिया है।

वहीं, ब्रिटेन में इस फिल्म को 12 मई को रिलीज किया जाने वाला था। कई हाउसफुल शो होने के बावजूद ब्रिटेन में इसकी स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई थी। इसकी वजह थी कि ब्रिटेन की सेंसर बोर्ड ने फिल्‍म को रिलीज करने का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया था। बोर्ड ने सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था। हालाँकि, फिल्म के डायरेक्टर सुदिप्तो ने खुद ट्वीट कर जानकारी दी कि अब उन्हें रिलीज करने की अनुमति मिल गई है और इसे जल्दी ही रिलीज किया जाएगा।

सुदिप्तो सेन के इस ट्वीट को फिल्म की अभिनेत्री अदा शर्मा ने भी रिट्वीट कर बधाई दी है। बताते चलें कि ब्रिटेन भी लव जिहाद से बुरी तरह प्रभावित है। वहाँ पर एशियाई, खासकर पाकिस्तानी मुस्लिमों का गैंग है जो ब्रिटेन की नाबालिग लड़किों को फँसा कर उनका शोषण करता है। इस आतंक को खत्म करने के लिए ब्रिटेन ने टास्क फोर्स भी बनाया है।

नाबालिग हिन्दू लड़की की ID पर डासना मंदिर में घुस रहा था मोहसिन, साथ में एक मुस्लिम लड़की: यति नरसिंहानंद बोले – रेकी करने की थी मंशा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना मंदिर में 2 नाबालिग लड़कियों के साथ एक संदिग्ध के पकड़े जाने की खबर है। संदिग्ध का नाम मोहसिन बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि हिरासत में लिए गए मोहसिन सहित 2 अन्य लड़कियों में एक हिन्दू समाज की है, जिसने अपने आधार कार्ड पर एंट्री की कोशिश की थी। दूसरी नाबालिग लड़की भी मुस्लिम समुदाय से बताई जा रही है। मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद का आरोप है कि मोहसिन मंदिर में घुस कर रेकी करना चाह रहा था।

मंदिर की तरफ से अभी तक पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी गई है। फ़िलहाल पुलिस संदिग्ध को हिरासत में ले कर पूछताछ कर रही है। घटना बुधवार (17 मई, 2023) की है।

ऑपइंडिया इस इस मामले में डासना शक्तिपीठ मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद से बात की। उन्होंने कहा कि लड़के का नाम मोहसिन है, जिसकी उम्र लगभग 24-25 साल के बीच की है। महंत के मुताबिक, वह लगभग हर दिन परिवार के साथ मंदिर पर आने वाली हिन्दू लड़की के आधार कार्ड पर मंदिर में घुस चुका था। बकौल यति नरसिंहानंद, मोहसिन मंदिर में सुरक्षा के पुलिस वाले चक्र को पार कर चुका था लेकिन उनके व्यक्तिगत सुरक्षा गार्डों की चेकिंग में पकड़ा गया। महंत ने बताया कि उन्होंने पुलिस को कोई शिकायती पत्र नहीं दिया है।

यति नरसिंहानंद ने हमें आगे बताया कि तलाशी के दौरान तीनों में से किसी के पास कोई हथियार आदि नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहसिन और नाबालिग मुस्लिम लड़की ने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने आधार कार्ड की एंट्री नहीं करवाई थी। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पुलिस कुछ संदिग्धों को हिरासत में ले कर ले जा रही है। वीडियो में स्कूल के ड्रेस में एक लड़की भी दिखाई दे रही है।

इसी मंदिर की भक्त डॉक्टर उदिता त्यागी ने घटनास्थल से एक वीडियो जारी किया है। उन्होंने लड़की की उम्र 13 साल बताई है। उदिता का आरोप है कि मोहसिन के साथ हिरासत में ली गई 2 नाबालिग लड़कियों में से एक मुस्लिम है।

डासना मंदिर के सेवादार ने बताया कि मोहसिन डासना क्षेत्र का ही है और वो मंदिर में रेकी के मकसद से आया था। इस घटना पर गाजियाबाद पुलिस के ACP वेब सिटी ने 1 आधार कार्ड पर मंदिर में 3 लोगों की एंट्री की बात स्वीकारी है। उन्होंने बताया कि तीनों से पूछताछ कर के कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पहले भी पकड़े जा चुके हैं संदिग्ध

गौरतलब है कि मई 2021 में ऑपइंडिया से बात करते हुए यति नरसिंहानंद ने खुद को कट्टरपंथियों के निशाने पर बताया था। इस से पहले भी डासना मंदिर में घुसपैठ की कोशिश में कुछ संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं। 2 जून 2021 की रात काशिफ़ और विपुल नाम के दो व्यक्ति घातक ड्रग सायनाइड और सर्जिकल ब्लेड के साथ घुस गए थे। इन दोनों ने मंदिर के प्रमुख द्वार के बाहर एंट्री रजिस्टर में अपना नाम डॉक्टर विपुल विजय वर्गीय नागपुर और काशी गुप्ता के रूप में कराई थी। दोनों संदिग्धों पर आरोप था कि वो महंत पर शाम की पूजा के दौरान हमला करने की फिराक में थे।

इसके अलावा मंगलवार (10 अगस्त, 2021) को तड़के सुबह 4 बजे डासना मंदिर में 2 साधुओं को किसी संदिग्ध द्वारा चाकू घोंपी गई थी। इस हमले में दोनों साधु बुरी तरह से घायल हो गए।

नारियल फोड़ा, जल छिड़का… नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर का हिंदुओं ने किया शुद्धिकरण, चादर चढ़ाने घुस गए थे मुस्लिम

महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर का बुधवार (17 मई, 2023) को शुद्धिकरण किया गया। कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मंदिर के प्रवेश द्वार और परिसर में नारियल फोड़ा व जल छिड़क कर शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की। दरअसल, 13 मई को कुछ मुस्लिम मंदिर में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि, सुरक्षा में तैनात जवानों ने उन लोगों को शिवलिंग के पास नहीं पहुँचने दिया।

मुस्लिमों के जबरन त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दाखिल होने की घटना से कई हिंदू संगठन के लोग भी नाराज हैं। हिंदू महासंघ समेत कई संगठन के लोगों ने मंदिर पहुँचकर अपना विरोध जताया। कार्यकर्ताओं ने मंदिर के द्वार और परिसर का शुद्धिकरण किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। बता दें कि मंदिर से कुछ ही दूरी पर मुस्लिमों के उर्स का प्रोग्राम चल रहा था। इसके लिए जुलूस निकाला गया था।

विवाद बढ़ने के बाद जुलूस के आयोजकों ने सफाई दी है कि उनके पूर्वज भी बाहर से ही भोलेनाथ को चादर दिखाते थे। उर्स आयोजकों का कहना है कि उन्होंने पूर्वजों की परंपरा का पालन करने की कोशिश की। उनका उद्देश्य मंदिर में दाखिल होना या शिवलिंग पर चादर चढ़ाना नहीं था। हालाँकि, हिन्दू संगठन के लोग इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह के रिवाज के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने पूरे मामले की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया है। राज्य के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि एसआईटी ताजा मामले के साथ-साथ इस तरह के पुराने मामलों की भी जाँच करेगी।

इसके पहले मंदिर प्रशासन ने मंदिर में जबरन दाखिल होने वाले मुस्लिमों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया था। मंदिर प्रशासन द्वारा दी गई शिकायत में लिखा गया है कि त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सदियों से जारी परंपरा के अनुसार मंदिर में सिर्फ हिन्दुओं को ही प्रवेश देने की अनुमति रही है, जिनकी हिन्दू धर्म में आस्था नहीं है उनका मंदिर में प्रवेश वर्जित है।

देवस्थान ट्रस्ट का कहना है कि इस तरह की घटना से सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुँच सकता है। आगे इस तरह की घटना न हो इसके लिए प्रशासन से व्यवस्था करने की अपील की। महादेव का यह मंदिर नीलगिरि, ब्रह्मगिरि और कलागिरि की पहाड़ियों के बीच में स्थित है। मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हुए 3 लिंग स्थापित हैं। मुग़ल बादशाह औरंगजेब द्वारा ध्वस्त किए जाने के बाद पेशवा बालाजी बाजीराव ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था।