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‘मैतेई समाज को ST दर्जा देने का भेजें प्रस्ताव’: हाई कोर्ट के आदेश से मणिपुर में भड़के ईसाई, हिंसा-आगजनी के बाद मैरी कॉम ने भेजा त्राहिमाम संदेश

मणिपुर में जनजातीय समुदाय के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई, जिसके बाद भारतीय सेना और ‘असम राइफल्स’ के जवानों को शांति कायम करने के लिए लगाया गया है। हिंसाग्रस्त इलाकों से अब तक 7500 से भी अधिक लोगों को बचा कर निकाला जा चुका है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए फ्लैग मार्च निकाले जा रहे हैं। एक मार्च के आयोजन के बाद ये सब शुरू हुआ।

जनजातीय समाज के मार्च के बाद शुरू हुई हिंसा

असल में मणिपुर का मैतेई समज लंबे समय से माँग कर रहा है कि उसे ‘अनुसूचित जनजाति (ST)’ का दर्जा दिया जाए। हाल ही में उन्होंने अपनी इस माँग को तेज कर दिया। मैती समाज मणिपुर की जनसंख्या का 53% है, यानी आधा से भी ज़्यादा। इसी माँग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM)’ ने बुधवार (3 मई, 2023) को राज्य के 10 पहाड़ी जिलों में मार्च निकाला था। मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि मैती समाज को ST में सम्मिलित करने के लिए राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजे, जिसके बाद ये हिंसा की घटनाएँ हुईं।

आरोप है कि चुराचांदपुर के तोरबुंग में मार्च के दौरान हथियारबंद भीड़ ने मैती समाज के लोगों पर हमला बोल दिया। इसके बाद पहाड़ी जिलों में बदले में कई हमले किए गए। फिर पूरे राज्य भर में हिंसा फ़ैल गई। तुरबुंग में 3 घंटे तक दंगे चलते रहे। घरों-दुकानों में तोड़फोड़ हुई। आगजनी की गई। मुख्यमंत्री N बीरेन सिंह ने कहा है कि लोगों की जानें गई हैं और संपत्ति को नुकसान पहुँचा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे समाज में कुछ गलतफहमियों का नतीजा बताया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जानमाल की सुरक्षा के लिए हर प्रकार के कदम उठा रही है। मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथंगा ने भी मणिपुर सीएम को पत्र में लिखा है कि एक स्थायी पड़ोसी और संस्कृति-इतिहास के मामले में दोनों राज्यों में समानता होने के कारण वो मणिपुर में हुई हिंसा से दुःखी हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों ने फोन कॉल पर भी बात की है। गैर-जनजातीय के प्रभाव वाले इम्फाल बेल्ट, कक्चिंग, थौबल, जिरीबाम और बिष्णुपुर जिलों के अलावा जनजातीय समाज की बहुलता वाले चुराचांदपुर, कांगपोकपी और तेगनोपाल में भी कर्फ्यू लगाया गया है।

ये मामला ट्राइबल्स और गैर-ट्राइबल्स का नहीं, जानें सच

असल में मणिपुर उच्च न्यायालय ने वहाँ की राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वो केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय को ये प्रस्ताव भेजे कि मैतेई समाज को भी ST में शामिल किया जाए। इन्हें मणिपुर की ट्राइब्स की सूची में शामिल करने को कहा गया। इसके बाद राज्य में दंगे शुरू हो गए। बताया जा रहा है कि ईसाई जनजातीय समुदाय ने मणिपुर के लोकप्रिय त्योहार लाई-हराओबा के दौरान हिंसा की साजिश रच ली थी। उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के दौरे के दौरान राज्य भर में मैतेई समाज पर हमले की साजिश रची गई और इसे अंजाम दिया गया।

ईसाई जनजातीय समुदाय के लोगों ने न सिर्फ मैतेई समाज के लोगों के घरों पर पत्थरबाजी की, हथियारबंद होकर हमले किए। मैतेई समाज के लोगों के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि ईसाई जनजातीय समुदाय के जो अंडरग्राउंड आतंकी संगठन हैं, उनके लोग भी मैतेई समाज के खिलाफ हिंसा कर रहे हैं। जैसा कि मेनस्ट्रीम और राष्ट्रीय मीडिया चला रहा है, ये जनजातीय समाज बनाम गैर-ट्राइबल्स का मामला नहीं है।

चुराचांदपुर में मैतेई समाज के 1000 लोगों को घर छोड़ कर दूसरे क्षेत्रों में भागना पड़ा है। वहीं मुक्केबाज मैरी कॉम ने भी इस हिंसा को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की माँग की है। उन्होंने कहा है कि वो हिंसा के कारण अच्छा महसूस नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की जान जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वो ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि स्थिति जल्द से जल्द ठीक हो जाए।

जानिए क्या है SCO जिसकी बैठक में शामिल होने गोवा आए हैं बिलावल भुट्टो जरदारी, 12 साल बाद भारत में पाकिस्तान का विदेश मंत्री

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए पाकिस्तान के विदेश बिलावल भुट्टो जरदारी (Bilawal Bhutto Zardari) गुरुवार (4 मई 2023) को भारत पहुँच गए। गोवा पहुँचकर उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पाकिस्तान के किसी विदेश मंत्री की 12 साल के बाद यह पहली भारत यात्रा है।

इससे पहले पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार साल 2011 में भारत आई थीं। उस समय भारत में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) की सरकार थी। वहीं, पाकिस्तान में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के नेतृत्व वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की सरकार थी। हीना ने तत्कालीन विदेश मंत्री एमएम कृष्णा से मुलाकात की थी। गिलानी ने शाह महमूद कुरैशी को विदेश मंत्री पद से हटाकर हिना को विदेश मामलों का राज्यमंत्री बनाया था।

2018 में पहली बार सांसद बने 34 साल के बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के युवा मंत्रियों में से एक हैं। उन्होंने अपनी भारत यात्रा को लेकर किए गए ट्वीट में लिखा, “मैं गोवा के रास्ते में हूँ। वहाँ पहुँचकर SCO समिट में अपने देश का प्रतिनिधित्व करूँगा। बैठक में शामिल होने का मेरा फैसला SCO के चार्टर के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। SCO पर केंद्रित अपनी इस यात्रा के दौरान मैं मित्र राष्ट्र के अपने समकक्षों के साथ रचनात्मक चर्चा की उम्मीद करता हूँ।”

बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और एक हमले में मारी गईं पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे हैं। बिलावल का जन्म 21 सितंबर 1988 को पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। उनकी पढ़ाई-लिखाई ब्रिटेन में हुई है। इमरान खान की सरकार गिरने के बाद वहाँ बनी शहबाज शरीफ की सरकार की सरकार में वे 27 अप्रैल 2022 को मुल्क के 37वें विदेश मंत्री बने।

अपनी आत्मकथा में खुद को राजस्थान के भाटी राजपूतों का वंशज बताने वाली बेनजीर भुट्टो ने अपने बाद बिलावट भुट्टो को ‘पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी’ का अध्यक्ष बनाने के लिए कहा था। बिलावल के बालिग होते ही उन्हें इसकी कमान दे दी गई। पाकिस्तान की सरकार में भागीदार हैं। शाहबाज शरीफ की सरकार बनने के बाद वे पाकिस्तान के 37वें विदेश मंत्री बने हैं। यह उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। वे गोवा में आयोजित SCO बैठक में हिस्सा लेंगे।

बता दें कि भारत में आतंकवाद को प्रायोजित करने के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध अनुकूल नहीं हैं। भारत पिछले 7 सालों से पाकिस्तान के साथ किसी तरह का संवाद नहीं कर रहा है। बैठक में आने से पहले बिलावल ने कहा था कि उनका दौरा भारत से संबंधों को सुधारने को लेकर नहीं है।​ उन्होंने कहा था कि यह SCO की बैठक तक ही सीमित है। बता दें कि साल 2020 में जैसलमेर रियासत के पूर्व महाराजा बृजराज सिंह के निधन पर भुट्टो परिवार ने शोक संदेश भेजा था। 

भुट्टो परिवार के चौथे व्यक्ति की भारत यात्रा

भुट्टो परिवार के तीन सदस्य अब तक भारत आ चुके हैं। साल 1972 में पहली बार बिलावल भुट्टो के नाना और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो भारत आए थे। साल 1971 की जंग में मिली हार के बाद वे साल 1972 में शिमला समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत आए थे।

साल 2002 में उनकी माँ बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की महिला प्रधानमंत्री के रूप में भारत आई थीं। बेनजीर ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मुलाकात की थी। इसके बाद साल 2012 में बिलावल के पिता और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री आसिफ अली जारदारी भारत आए थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी।

पीएम मोदी और भारत के प्रति तल्ख रहे हैं बिलावल

बिलावल भुट्टो भारत के प्रति हमेशा तल्ख रूख अपनाए रहे हैं। 5 दिसंबर 2023 को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बिलावल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कसाई कहा था। उन्होंने कहा था, “ओसामा बिन लादेन तो मर गया, लेकिन गुजरात का कसाई अभी जिंदा है और वह भारत का प्रधानमंत्री है।” इसके बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि भुट्टो 1971 भूल गए हैं, जब पाकिस्तान के 90,000 से ज्यादा सैनिकों ने भारतीय सेना के आगे सरेंडर किया था।

इसके बाद 18 दिसंबर 2022 को बिलावल ने कहा था, “मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी पार्टी भाजपा और RSS से नहीं डरता।” PM मोदी को कसाई कहने वाले बयान पर उन्होंने कहा था, “उनका मकसद भारत में मुस्लिमों के खिलाफ हो रहे भेदभाव और नफरत के खिलाफ आवाज उठाना था।” मई 2022 में बिलावल भुट्टो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हाटने और परिसीमन लागू करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि भारत में कश्मीरियों का उत्पीड़न हो रहा है।

बिलावल भुट्टो ने साल 2014 में पहली बार कश्मीर को लेकर बयान दिया था। उन्होंने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के कार्यकर्ताओं से कहा था, “मैं पूरा कश्मीर वापस लूँगा। मैं इसका एक इंच जमीन भी भारत के लिए नहीं छोड़ूँगा, क्योंकि कश्मीर सिर्फ पाकिस्तान का है। पाकिस्तान के बाकी राज्यों की तरह कश्मीर भी हमारा है।”

भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात नहीं होगी

इस दौरे में बिलावल भुट्टो का भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात नहीं होगी। यह बात बिलावल भुट्टो जानते हैं। इसीलिए उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया कि इस यात्रा का मकसद भारत से संबंध सुधारना नहीं, बल्कि SCO की बैठक में हिस्सा लेना है। दरअसल, कुछ दिन पहले ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को लेकर एक कड़ा बयान दिया था।

जयशंकर ने कहा था कि भारत का पड़ोसी देश अभी भी आतंकवाद को प्रश्रय दे रहा है। डोमिनिकन रिपब्लिक के दौरे में विदेश मंत्री ने कहा था कि पिछले कुछ समय से भारत ने पड़ोसी पहले की नीति अपनाई है, लेकिन पाकिस्तान इसका अपवाद है, क्योंकि वह सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन देना अभी भी नहीं छोड़ा है।

क्या है SCO?

इस साल SCO की अध्यक्षता भारत कर रहा है और इसकी बैठक गोवा में हो रही है। वर्तमान में SCO के 8 सदस्य देश हैं- भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान। इसके अलावा पूर्ण सदस्यता ग्रहण करने के इच्छुक 4 पर्यवेक्षक देश- अफगानिस्तान, ईरान, मंगोलिया और बेलारूस। इसके साथ ही SCO में 6 डायलॉग पार्टनर भी हैं, जिनमें नेपाल, कंबोडिया, श्रीलंका, आर्मेनिया, अजरबैजान और तुर्की शामिल हैं।

इस संगठन की स्थापना 15 जून 2001 में चीन और रूस ने की थी। बाद में भारत को इसका सदस्य बनाया गया। भारत में SCO की बैठक 4 मई और 5 मई को है। इस बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ अन्य सदस्य देशों के मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। SCO का फोकस स्टार्टअप्स, पारंपरिक चिकित्सा, युवा सशक्तीकरण और विज्ञान एवं तकनीक पर है।

अब बिहार के लोगों की जाति नहीं गिनी जाएगी, पटना हाई कोर्ट ने लगाई रोक: नीतीश-तेजस्वी सरकार को झटका, याचिका में बताया था निजता का उल्लंघन-₹500 करोड़ की बर्बादी

बिहार सरकार द्वारा कराई जा रही जाति जनगणना पर पटना उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। इससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी CM तेजस्वी यादव की सरकार को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि बिहार की सत्ताधारी पार्टियाँ राजद, जदयू और कॉन्ग्रेस देश भर में जाति जनगणना के लिए जोर लगा रही है। बिहार में तो इसकी शुरुआत भी हो गई थी। शिक्षक पढ़ाना छोड़ कर जाति जनगणना में लगा दिए गए थे, लेकिन अब पटना हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।

साथ ही अब तक की जाति जनगणना के आँकड़े हैं, उन्हें पटना हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने आदेश दिया है कि जाति जनगणना को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में 2 दिन की सुनवाई हुई, जिसके बाद ये निर्णय दिया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख़ 3 जुलाई, 2022 (सोमवार) मुक़र्रर की गई है।

पटना हाईकोर्ट ने सवाल दागा है कि क्या जाति जनगणना कराना और आर्थिक सर्वेक्षण कराना एक कानूनी बाध्यता है? ये सवाल भी पूछा गया है कि राज्य सरकार के पास इसका अधिकार है या नहीं। जातीय गणना पर निजता का उल्लंघन होगा या नहीं, इस पर भी बिहार सरकार को जवाब देना होगा। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जाति जनगणना का बिहार सरकार को कोई अधिकार नहीं है, ऊपर से इससे लोगों की निजता एवं गोपनीयता का उल्लंघन हो रहा है।

इस याचिका में कहा गया है कि लोगों की जाति, उनके कामकाज और योग्यता का ब्यौरा लेना उनकी निजता का उल्लंघन है। साथ ही कहा गया है कि संविधान प्रदेश सरकार को इसकी अनुमति नहीं देता। इसके लिए 500 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, इसे भी याचिका में जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी करार दिया गया है। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को पहले ही बता चुकी है कि जाति आधारित जनगणना नहीं कराई जाएगी।

‘माफ कर दीजिए, भारतीय उच्चायोग पर पत्थर-अंडे फेंक गलती की’: कश्मीरी नेता के बेटे ने PM मोदी को भेजा ‘माफीनामा’, माँ के अंतिम संस्कार के लिए चाहिए वीजा

साल 2021 में लंदन के भारतीय उच्चायोग पर अंडे फेंकने वाले ‘अंकित लव’ भारत आने के लिए छटपटा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी हरकत के लिए माफी माँगी है। साथ ही ये भी कहा है कि उन्हें किसी ने बहका दिया था। अब वो भारत आना चाहते हैं और अपनी माँ को आखिरी बार देखकर उनका अंतिम संस्कार करना चाहते हैं।

दरअसल, अंकित (39) लव जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के संस्थापक भीम सिंह के बेटे हैं जो काफी समय से लंदन में रहते हैं। साल 2021 के फरवरी में भारतीय उच्चायोग पर पत्थर और अंडे फेंकने के बाद सरकार ने उन्हें भारत में ब्लैकलिस्ट कर दिया था। अब उनके देश लौटने पर प्रतिबंध है। हालाँकि अब वो प्रधानमंत्री से मिन्नतें करके भारत आना चाहते हैं। उनकी माँ ‘जयमाला’ का शव जम्मू की एक मॉर्च्युरी में 7 दिन से पड़ा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अंकित ने कहा, “मैं अपनी माँ का चेहरा देखना चाहता हूँ। उन्हें आखिरी बार गले लगाना चाहता हूँ। मेरी माँ यूपी के मेरठ की गौड़ ब्राह्मण थी और उन्हें पूरा अधिकार है कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रिवाजों के अनुसार सम्मानजनक तरीके से हो। मैं उनका एकलौता बेटा हूँ। उनका अंतिम संस्कार उधमपुर की देवक नदी के किनारे करूँगा, ये उनकी आखिरी इच्छा थी।”

भारत आने की गुहार लेकर 2 मई को अंकित ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा। इसमें कहा, “मैं तहे दिल से अपनी भारतीय उच्चायोग पर अंडे फेंकने की गलती के लिए माफी माँगता हूँ। मुझे इसका पछतावा है। कुछ लोगों ने मुझे बहका दिया था, जिसकी वजह से मुझसे यह गलती हुई। मैं माफी माँगता हूँ। आगे कभी भी ऐसा कुछ नहीं करूँगा जो अपने देश के खिलाफ हो। मैं अपने देश को बहुत प्यार करता हूँ और मुझे इसपर बहुत गर्व है।

अंकित ने यह भी कहा कि वो जम्मू हमेशा के लिए नहीं आना चाहता बस सरकार उसे इतनी अनुमति दे दे कि वो अपनी माँ का ऊधमपुर में अंतिम संस्कार कर सके। चाहे तो उसके बाद उसे वापस यूके की फ्लाइट में बैठाकर वापस भेज दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि जयमाला सुप्रीम कोर्ट की एक वरिष्ठ वकील थीं। उनका देहांत 26 अप्रैल को हुआ था। उसके बाद से उनका शव जम्मू के सरकारी अस्पताल की मॉर्च्युरी में पड़ा है। उनकी भतीजी मृगनयनी ने शव की माँग यह कहकर की थी कि लव शायद नहीं भारत आ पाए इसलिए उसे वो बॉडी दी जाए ताकि वो क्रियाक्रम कर सकें।

मृगनयनी ने यह भी कहा कि जयमाला उसी के साथ रहती थीं। 25 अप्रैल को सीढ़ियों से गिरने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। लेकिन अगले दिन उनका निधन हो गया। इस घटना के बाद जयमाला के भतीजे व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री हर्ष देव सिंह ने शव के पोस्टमार्टम की माँग की जिसपर मृगनयनी ने अंतिम संस्कार में देरी का कारण हर्ष देव को बताया। हालाँकि लव ने लंदन से यह बात स्पष्ट की कि उनकी माँ के अंतिम संस्कार में देर केवल उनके वजह से हो रही है।

‘FIR हो गई, सुरक्षा मिल गई’: सुप्रीम कोर्ट ने बंद की जंतर-मंतर वाले पहलवानों की फाइल, बजरंग पुनिया बोले- मेडल/अवॉर्ड लौटा देंगे; दिल्ली की सीमाओं पर अलर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 मई, 2023) को 3 महिला पहलवानों द्वारा दायर की गई याचिका को ये नोट करने के बाद बंद कर दिया कि दिल्ली पुलिस ने ‘भारतीय कुश्ती संघ (WFI)’ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। भारत के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़, जस्टिस PS नरसिम्हा और जस्टिस JB पार्डीवाला की पीठ ने कहा कि FIR दर्ज करने के लिए याचिका दायर की गई थी और अब जब ये हो गया है, प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

आगे किसी भी प्रकार की शिकायत या माँग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह भी दी है। पहलवानों की तरफ से पेश वकील नरेंद्र हुड्डा ने पूरी जाँच प्रक्रिया की निगरानी करने का अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से किया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे नकारते हुए कहा कि अन्य मुद्दों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट या मजिस्ट्रेट के समक्ष जाइए। दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ पीड़िताओं का बयान दर्ज किया है, बल्कि उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की है।

एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में जाँच आगे बढ़ रही है। उधर दिल्ली की सीमाओं पर फिर से अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी सीमावर्ती जिलों के DCP को निर्देश दिया गया है कि वो विष सतर्कता बरतें। सेन्ट्रल दिल्ली की तरफ जाने वाली सड़कों पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया है। कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं। सूत्रों से खबर मिली है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर पहलवानों का समर्थन करने पहुँच सकते हैं।

उधर प्रदर्शनकारी पहलवानों ने अब अपने मेडल्स लौटाने की भी घोषणा कर दी है। बजरंग पूनिया ने कहा कि अगर पहलवानों के साथ ऐसा ही व्यवहार होता रहा तो फिर हमे इन मेडल्स का क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि इससे अच्छा है कि हम इन मेडल्स को लौटा कर एक सामान्य ज़िन्दगी जिएँ। उन्होंने सारे मेडल्स और अवॉर्ड्स भारत सरकार को लौटाने की घोषणा कर डाली। पहलवानों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उन्हें बुलाने की माँग की और कहा कि ये राजनीतिक मुद्दा नहीं है। उन्होंने IT सेल पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया।

‘जंतर-मंतर पर हमें पलंग, गद्दे, मैट चाहिए’: मीडिया गैंग ने अमित शाह के नाम लेटर कर दिया वायरल, पहलवान बोले- यह फर्जी, हमने लिखा ही नहीं

सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ, जिसके बारे में का गया कि विरोध प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा है हालाँकि, खुद प्रदर्शनकारी पहलवानों ने ही कहा है कि ये चिट्ठी फर्जी है और उन्होंने ऐसा कुछ नहीं लिखा है। रणविजय सिंह समेत लिबरल गिरोह के कई पत्रकारों ने भी इस पत्र को शेयर किया। पहलवान बजरंग पूनिया और विनेश फोगट ने भी ट्विटर पर स्पष्ट किया है कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है।

वायरल हो रहे पत्र में पहलवानों की माँगों का तत्काल समाधान करने की माँग करते हुए लिखा गया है कि पिछले 11 दिनों से मेडल जीतने वाले पहलवान शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं और रात्रि विश्राम के दौरान बुधवार (3 मई, 2023) की रात दिल्ली पुलिस के 100 पुलिसकर्मियों ने उन पर हमला कर दिया। पत्र में दुष्यंत फोगट और राहुल यादव नाम के दो पहलवानों का सर फोड़े जाने का आरोप भी लगाया गया है।

साथ ही साक्षी मलिक और संगीता फोगट को भी पुरुष अधिकारियों द्वारा धक्के मारने का आरोप लगाया गया है। इसमें लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय पहलवानों पर इस तरह से हमला करना और उन्हें अपमानित करना उनके मनोबल को तोड़ने वाला है। इसे देश की छवि को खराब करने वाला भी बताया गया है। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की गई है। पत्र में लिखा है कि अलग-अलग स्थानों से इनके जो साथी हिरासत में लिए गए हैं, उन्हें रिहा किया जाए।

वायरल हो रहे इस पत्र में माँग की गई है कि वॉटरप्रूफ टेंट, मजबूत स्टेज, पलंग, साउंड सिस्टम, गद्दे और प्रैक्टिस के लिए कुश्ती मैट के अलावा जिम के सामानों की भी माँग की गई है। साथ ही सरकार के उच्चाधिकारियों से भी तुरंत वार्ता कराए जाने की माँग रखी गई है। हालाँकि, अब जब पहलवानों ने ही साफ़ कर दिया है कि ये पत्र उनका नहीं है, इससे स्पष्ट है कि ये फर्जी है और किसी ने जानबूझ कर लिख कर इसे फैलाया है।

पुलिसवाला लव जिहादी: इमरान ने नाम और मजहब छिपा हिंदू युवती को फाँसा, बड़े भाई के साथ मिल किया रेप-धर्म परिवर्तन का डाला दबाव

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। यहाँ इमरान नाम के एक पुलिसकर्मी ने अपना धर्म और पहचान छुपाकर एक हिंदू युवती को अपने चंगुल में फँसाया। इसके बाद लगातार उसका शोषण करता रहा। इतना ही नहीं उसने अपने बड़े भाई के साथ मिलकर उसका रेप किया और धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

युवती मूल रूप से यूपी के सहारनपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र की रहने वाली है। पीड़िता ने पीलीभीत के एसपी को अपनी शिकायत दी। उस शिकायत में उसने कहा कि तीन साल उसकी मुलाकात शामली जिले के रहने वाले एक युवक से हुई थी। उस दौरान उसने अपनी पहचान और धर्म छिपाते हुए अपना नाम रोहित बताया था। उसने कहा था कि वह पुलिस में है।

युवती का आरोप है कि कुछ समय बाद रोहित ने उसे प्रपोज किया और फिर शादी करने की बात कही। शादी के वादे की आड़ में रोहित बना इमरान उसे अलग-अलग होटलों में ले जाने लगा और वहाँ वह दुष्कर्म करता था। पीड़िता ने कहा कि कई बार मना करने के बाद भी वह जबरन शारीरिक संबंध बनाता था। दुष्कर्म के कारण गर्भवती होने पर उसने जबरदस्ती गर्भपात भी करवा दिया।

पीड़िता का कहना है कि वह जब भी इमरान से शादी की बात करती थी तो वह उसके साथ दुर्व्यवहार करता था। शादी के लिए बार-बार कहने के बाद रोहित बना इमरान उसे एक मंदिर में लेकर गया और वहाँ शादी की। पीड़िता का कहना है कि शादी करने के बाद वह उसे साथ रखने से मना कर दिया। इस दौरान वह उस पर गंदे-गंदे आरोप भी लगाता था।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि रोहित के व्यवहार से तंग आकर उसने उसके बारे में पता लगाना शुरू किया। युवती को पता चला कि आरोपित पीलीभीत के न्यू एरिया थाने में तैनात है और उसका नाम रोहित नहीं, बल्कि इमरान मिर्जा है। पीड़िता का कहना है कि इसकी जानकारी होने के बावजूद वह इमरान से शादी के लिए तैयार थी, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुआ।

पीड़िता ने कहा कि लगभग 6 महीना पहले उसने न्यूरिया थाने में आरोपित इमरान मिर्जा के खिलाफ शिकायत की थी। इसके बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया था। 25 जनवरी 2023 को इमरान उससे मिलने पहुँचा और मनाने लगा। इसके बाद इमरान युवती से शपथ पत्र दिलवाकर अपने साथ ले गया। इमरान उसे शामली में किराए के कमरे पर रखा।

पीड़िता का कहना है कि शामली में इमरान ने शामली पुलिस में तैनात अपने बड़े भाई फुरकान से उसकी मुलाकात करवाई। इसके बाद दोनों भाई रोज उसके कमरे पर आने लगे और रिवॉल्वर दिखाकर उससे रेप करने लगे। महिला का आरोप है कि इस दौरान दोनों उससे मारपीट भी करते थे। महिला ने आरोप लगाया कि दोनों आरोपित भाई उस पर धर्म परिवर्तन का भी दबाव बनाते थे।

युवती ने शिकायत पत्र में आगे लिखा कि एक दिन इमरान ने उसके साथ मारपीट करके भगा दिया और किसी से शिकायत करने पर मारने की धमकी दी। दोनों भाई ने धमकी देते हुए कहा कि वे पुलिस में हैं और उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। पीड़िता के आवेदन पर कोतवाली पुलिस ने दोनों सिपाही भाइयों के के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

बजरंग दल पर प्रतिबंध से पीछे हटी काॅन्ग्रेस, बोले वीरप्पा मोइली- राज्य सरकार ऐसा नहीं कर सकती: कर्नाटक में अब डैमेज कंट्रोल की कोशिश

कर्नाटक में ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का कार्ड भारी पड़ते देख काॅन्ग्रेस डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में लग गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली (Veerappa Moily) का कहना है कि बजरंग दल (Bajrang Dal) पर प्रतिबंध लगाने का काॅन्ग्रेस का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा है कि न तो पार्टी के पास ऐसा कोई प्रस्ताव है और न ही राज्य सरकार प्रतिबंध लगा सकती है।

कर्नाटक विधानसभा के लिए जारी घोषणा-पत्र में काॅन्ग्रेस ने बजरंग दल की पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से तुलना करते हुए सत्ता में आने पर प्रतिबंध का वादा किया है। लेकिन मोइली ने बुधवार (3 मई 2023) को उडुपी में मीडिया से बात करते हुए इससे इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, “काॅन्ग्रेस के घोषणा-पत्र (Congress Manifesto) में पीएफआई और बजरंग दल का उल्लेख है। इसमें सभी कट्टरपंथी संगठन शामिल हैं। लेकिन किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाना राज्य सरकार के लिए संभव नहीं है, क्योंकि यह केंद्र सरकार का अधिकार क्षेत्र है। इसलिए कर्नाटक सरकार के लिए बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है। डीके शिवकुमार इस बारे मे और विस्तार से बताएँगे।”

वीरप्पा मोइली कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि घोषणा पत्र में बजरंग दल जैसे संगठनों पर प्रतिबंध का वादा हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों को ध्यान में रखकर किया गया है। उल्लेखनीय है कि 28 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर स्वतः संज्ञान लेकर सभी राज्यों को एफआईआर करने के निर्देश दिए थे। कहा था कि ऐसा नहीं होने पर इसे अदालत की अवमानना मानी जाएगी।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस ने मंगलवार 2 मई 2023 को अपना घोषणा-पत्र जारी किया था। इसमें बजरंग दल पर प्रतिबंध का वादा करते हुए उसकी तुलना पीएफआई से की गई थी। इसके बाद से न केवल कर्नाटक, बल्कि देशभर में काॅन्ग्रेस का विरोध हो रहा है। इतना ही नहीं काॅन्ग्रेस ने घोषणा पत्र में अल्पसंख्यकों के लिए बजट में 10 हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था करने की बात कही है।

दिलचस्प यह है कि करीब एक साल पहले प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पीएफआई ने भी राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के फंड की ही डिमांड की थी। गौरतलब है कि 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly election 2023) के लिए 10 मई 2023 को वोट पड़ने हैं। नतीजे 13 मई को आएँगे।

शौहर की तस्वीर फाड़ी, पैरों से कुचला… साउथ की हिरोइन को रियाज ने इतना किया टॉर्चर, 3 साल बाद ‘डायवोर्स फोटोशूट’ से मनाया जश्न

सोशल मीडिया पर आजकल तमिल एक्ट्रेस शालिनी का डायवोर्स फोटोशूट खूब वायरल है। इस फोटोशूट में वह बिलकुल तैयार होकर अपनी शादी की फोटोज को फाड़कर अपना डायवोर्स सेलीब्रेट करती दिख रही हैं।

तस्वीरों में देख सकते हैं कि उन्होंने लिखा है- “मुझे परेशानियाँ 99 मिलीं लेकिन शौहर के पास एक भी नहीं है।” इस फोटोशूट में वह अपनी और शौहर रियाज की तस्वीरों को फाड़ती दिख रही हैं। एक में दोनों की फोटोज को पैर से भी कुचल रही हैं। कई लोगों ने इस पहल को देखने के बाद उनकी बोल्डनेस की तारीफें कर रहे हैं। वहीं कुछ इस तरह डायवोर्स पर उनको खुश होता देख सवाल भी उठा रहे हैं।

शालिनी ने अपना यह फोटो शूट शेयर करते हुए लिखा, “जिन लोगों को दबा हुआ महसूस होता है उनके लिए एक तलाकशुदा महिला का संदेश….खराब शादी को छोड़ना उचित है क्योंकि आप खुश रहना और निम्न स्तर में गुजारा न करना डिजर्व करती है। अपनी जिंदगी का नियंत्रण अपने पास रखें और अपने व अपने बच्चे के अच्छे भविष्य के लिए जरूरी बदलाव करें। डायवोर्स कोई फेलियर नहीं है। ये तो एक टर्निंग प्वाइंट है ताकि आप अपने जीवन में सकारात्मकता ला सकें। शादी छोड़कर अकेले रहने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। तो मेरी बहादुर औरतों ये मैं तुम्हें समर्पित करती हूँ।”

बता दें कि शालिनी तमिल की एक टीवी एक्ट्रेस हैं जिन्होंने ‘मुल्लूमा मालारूम’ से डेब्यू किया था। इसके बाद वो सुपर मॉम शो में भी नजर आईं थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी शादी साल 2020 में रियाज से हुई थी। दोनों की एक बेटी भी है। मगर कुछ महीनों पहले शालिनी ने रियाज के ऊपर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाया और फिर उनसे अलग हो गईं।

इस खबर पर उत्तम नगर से विधायकी का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी कृष्ण गहलोत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, तलाक के फोटोशूट के नाम पर जिस तरह पितृसत्तात्मकता के विरुद्ध क्रान्ति के रूप में इसे कूल बताते हुए लड़की को पोस्टरगर्ल बताया जा रहा है, जरा उसकी वह सच्चाई भी जान लीजिए जो मक्कार मीडिया छुपा गया।

उन्होंने लिखा कि शालिनी ने रियाज से निकाह पढ़ा था। बाद में रियाज उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देने लगा। जब शालिनी ने तलाक देना चाहा तो रियाज तलाक को भी तैयार नहीं था। ऐसे में बड़ी मुश्किल से एक्ट्रेस रियाज से मुक्त हुईं। कृष्ण लिखते हैं बड़ी कठिनाइयों से मुक्त हुई शालिनी इस तरह छिछोरेपन के साथ स्वतन्त्रता का उत्सव मना रही है। मनाना भी चाहिए, अन्ततः एक नरक से बाहर जो आई है। पर मैडम को समाज को पूरा सच बताना चाहिए।

अतीक अहमद का ‘पढ़ाकू’ बेटा 10वीं के हर सब्जेक्ट में फेल, असद की मार्कशीट वायरल: खूब चली थी विदेश जाकर पढ़ाई न कर पाने की कहानी

माफिया अतीक अहमद के बेटे असद अहमद के एनकाउंटर के बाद पुलिस को छानबीन में उसकी 10वीं की मार्कशीट हाथ लगी है। इसे देख पता चल रहा है कि प्रयागराज के सेंट जोसेफ स्कूल से दसवीं करने वाला असद पढ़ाई में बिलकुल अच्छा नहीं था। उसके 700 में से कुल 125 नंबर (कुल 25%) आए थे और वह हर पेपर में फेल था। उसके एक पेपर में भी 33 से ऊपर नंबर नहीं थे।

मार्कशीट में देख सकते हैं कि असद को अंग्रेजी में 100 में से 28 नंबर मिले थे। हिंदी में उसके 100 में से 21.5 नंबर आए थे। इसी तरह साइंस-मैथ्स में 19-19 और सोशल साइंड में 19.8 नंबर आए थे। मार्कशीट दिखा रही है कि अच्छे नंबर लेकर पास होना असद की प्राथमिकता थी ही नहीं। उसका मकसद माफिया बनना था। वह अपने अब्बा से प्रेरित था। उसने स्कूल प्रशासन को और टीचरों को डराया-धमकाया हुआ था।

इतना ही नहीं खबरों के अनुसार, उसने एक स्कूल प्रतियोगिता में अपने ही शिक्षक को बुरी तरह प्रताड़ित किया था। इसी तरह एक खेल के दौरान उसने एक रेफ्री को झापड़ मार दिया था। उसकी मार्कशीट में साफ लिखा दिख रहा है कि स्कूल ने उसे हर सब्जेक्ट अच्छे से पढ़ने की सलाह दी थी।

बता दें कि असद अहमद की मार्कशीट ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया था कि असद अहमद पढ़ने में बहुत होनहार था और लॉ पढ़ने विदेश जाना चाहता था। लेकिन अतीक के आपराधिक बैकग्राउंड के कारण उसे वीजा नहीं मिला। रिपोर्ट ने यह भी कहा था कि असद के 12 वीं 85 परसेंट आए थे।

हालाँकि अब असद की 10 वीं की मार्कशीट देखकर लगता है कि मीडिया के दावे पूरी तरह फर्जी थे। उन्होंने ऐसे शख्स का महिमामंडन करने का प्रयास किया जो उमेश पाल की हत्या में शामिल था और पुलिस के रिकॉर्ड में बदमाश था। हत्या के बाद उसके ऊपर 5 लाख रुपए ईनाम रखा गया था। इसके बाद 13 अप्रैल को झाँसी में उसका एनकाउंटर कर दिया गया। वह अतीक का तीसरा बेटा था। उसके एनकाउंटर के दो दिन बाद ही अतीक की हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट में सामने आया था कि असद हमेशा अतीक के दम पर गुंडागर्दी करता था। वह खुद को ‘छोटे सांसद जी’ कहता था।