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सारे ट्रैक्टर लेकर आओ, हर कोई दिल्ली आओ, पुलिस हमें पीट रही-गाली दे रही… AAP नेता के खाट से जंतर-मंतर पर रात को दंगल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे पहलवानों के प्रदर्शन में पहलवानों और पुलिस के बीच झड़प की खबर है। एक वीडियो सामने आई है जिसमें कुछ लोग फोल्डिंग बेड लेकर प्रोटेस्ट में घुसते दिख रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस उन्हें ऐसा करने से रोक रही है। इस दौरान रेसलर्स को बार-बार ‘वीडियो बना लो-वीडियो बना लो’ कहते और पुलिस से भिड़ते देखा जा सकता है।

घटना के बाद बजरंग पूनिया समेत अन्य पहलवानों का बयान आया। इसमें वह सारे देशवासियों से कह रहे हैं कि उनके प्रदर्शन को लोग समर्थन देने दिल्ली के जंतर-मंतर आएँ। पूनिया कहते हैं, “हमें पूरे देश के साथ की जरूरत है। हर किसी को दिल्ली आना चाहिए। पुलिस हमारे विरुद्ध तो बल इस्तेमाल कर रही है, बहन-बेटियों के साथ गाली-गलौच कर रही है, बद्तमीजी हो रही है, लेकिन बृजभूषण का कुछ नहीं हो रहा।”

पूनिया की इसी वीडियो के बीच में कुछ पहलवानों को गुस्से में कहते सुना जा सकता है- “सभी लोग ट्रैक्टर लेकर आओ, ट्रैक्टर लेकर दिल्ली आओ, सुबह नहीं होनी चाहिए। सुबह सभी यहीं पर सबसे पहले आओ।”

दिल्ली पुलिस ने इस झड़प के बाद बताया कि जंतर-मंतर पर चल रहे पहलवानों के प्रदर्शन के दौरान आप नेता सोमनाथ भारती प्रदर्शन स्थल पर फोल्डिंग बेड लेकर पहुँचे थे। जब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो समर्थक भड़क गए और बेड को ट्रक से नीचे फेंकने का प्रयास किया। इस बीच छोटी झड़प हो गई। पुलिस ने सोमनाथ भारती समेत 2 को हिरासत में लिया है।

डीसीपी प्रणव ने भी इस संबंध में बताया, “अनुमति न होने के बावजूद सोमनाथ भारतीय जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में फोल्डिंग बेड लेकर आए। हमने बस उन्हें घुसने नहीं दिया तो उस पर झड़प गुई। उन्होंने महिला पहलवानों से बदसलूकी पर कहा कि साइट पर महिला पुलिसकर्मी लगातार तैनात हो रखी हैं। हमने पहलवानों से कहा है कि वो अपनी शिकायत दें और पुलिस उसपर निष्पक्ष जाँच करेगी। जिस पुलिसकर्मी पर इन्होंने नशे में होने का आरोप लगाया है कि उसका भी मेडिकल करवाया जा रहा है जो भी एक्शन लेना होगा वो भी लेंगे।”

बता दें कि इससे पहले भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने जंतर-मंतर पर बैठे खिलाड़ियों से बात की थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि पहलवानों की समस्या पर गौर किया जाएगा और जल्द समाधान होगा। वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिल रही पुलिस सुरक्षा को पहलवानों ने लेने से मना कर दिया। पहलवानों ने कहा कि अगर वे जंतर-मंतर पर भी सुरक्षित नहीं है, तो वे कही भी सुरक्षित नहीं है। वे यहाँ शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं। उन्हें किसी से भी कोई दिक्कत नहीं है।

जंतर-मंतर पहुँच जिन पहलवानों को गले लगाया, सुनी जिनकी बात, उनके समर्थकों ने ही पीटी उषा से की बदसलूकी: देखिए Video

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा के साथ पहलवानों के समर्थकों ने बुधवार (3 मई 2023) को जंतर-मंतर पर बदसलूकी की। स्थिति को देखते हुए सुरक्षाबल उन्हें वहाँ से निकालकर सुरक्षित जगह ले गए। बता दें कि धरना दे रहे पहलवानों से मिलने के लिए वह धरना स्थल पर गई थीं।

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला सहित कई लोग पीटी उषा को घेर उनके साथ बदतमीजी कर रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला कह रही कि ‘इन्होंने महिलाओं का अपमान किया है। क्यों नहीं करें ऐसा…’। इस दौरान पीटी उषा भीड़ से खुद को बचाने की कोशिश करती दिख रही हैं।

इसके एक एक बुजुर्ग व्यक्ति उन पर चिल्लाते दिख रहा है। कार में बैठी पीटी उषा के सामने आकर एक बुजुर्ग चीखते हुए कहता है, ‘हम फौजी आदमी हैं। हमारी बहन-बेटियों के लिए कर सकत है तो बता।”

बता दें कि पीटी उषा भारतीय ओलंपिक संघ (IOC) की अध्यक्ष हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने पहलवानों के धरने को अनुशासनहीनता बताया था। पीटी उषा ने कहा था कि पहलवान सड़कों पर आकर भारत की छवि धूमिल कर रहे हैं। उन्होंने पहलवानों की आलोचना की थी।

इस पर पहलवान साक्षी मलिक ने पीटी उषा पर ही सवाल दाग दिया था। साक्षी मलिक ने 27 अप्रैल 2023 को कहा, “मैं पीटी उषा का सम्मान करती हूँ। उन्होंने हमें प्रेरित किया है, लेकिन मैं मैम से पूछना चाहती हूँ कि महिला पहलवानों ने आगे आकर उत्पीड़न का मुद्दा उठाया है। क्या अब हम विरोध भी नहीं कर सकते?”

पीटी उषा बुधवार (3 मई 2023) को भारतीय कुश्ती संघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह (WFI Chief Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों से मिलने पहुँची। उन्होंने पहलवानों से मुलाकात की।

मुलाकात के बाद धरना में शामिल बजरंग पुनिया ने कहा, “उन्होंने (पीटी उषा) कहा कि वे हमारे साथ खड़ी हैं और हमें न्याय दिलाएँगी। वह पहले एक एथलीट हैं और फिर कुछ और। उन्होंने (पीटी उषा) ने कहा कि वह हमारी समस्या पर गौर करेंगी और जल्द से जल्द इसका समाधान करेंगी।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी, तब पहलवान विनेश फोगाट ने कहा था कि धरना दे रहे हरियाणा के पहलवानों को दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है।

पहलवान साक्षी मलिक ने तो यहाँ तक कह दिया था, “हम अपना बयान सुप्रीम कोर्ट में दर्ज कराएँगे। उनको (बृजभूषण शरण सिंह) को जेल में डालने और सभी पदों से हटाने के बाद ही हमारा प्रदर्शन खत्म होगा।” पहलवान बृजभूषण शरण सिंह ने सांसद की सदस्यता छोड़ने की भी माँग रहे हैं।

पुतिन के घर पर ड्रोन अटैक की कोशिश: रूस ने बताया राष्ट्रपति की हत्या की साजिश, यूक्रेन को ठहराया जिम्मेदार

रूस और यूक्रेन (Ukrain-Russia War) के बीच पिछले कई महीनों से युद्ध जारी है। इस बीच रूस ने यूक्रेन पर आरोप लगाया है कि उसने मध्य मास्को में स्थित राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के आवास क्रेमलिन को ड्रोन के जरिए निशाना बनाकर उनकी हत्या करने की कोशिश की।

रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा कि सुरक्षा बलों ने रात में दो ड्रोन को मार गिराया है। वहीं, पुतिन के प्रवक्ता ने कहा कि रूसी नेता उस समय परिसर में नहीं थे। इस मामले पर यूक्रेन का कहना है कि ड्रोन हमले से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल एक क्लिप में क्रेमलिन के ऊपर विस्फोट से पहले एक छोटी सी वस्तु को उड़ते हुए और बाद में उसमें धुँआ उठते हुए दिखाई दे रहा है। हालाँकि, यह फुटेज सही है या गलत, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

रूस ने कहा कि मध्य मास्को में स्थित बड़े सरकारी परिसर क्रेमलिन को निशाना बनाने वाले दो ड्रोन को रडार का उपयोग करके निष्क्रिय कर दिया गया। रूसी राष्ट्रपति के आवास ने कहा, “पिछली रात कीव शासन ने मानव रहित हवाई वाहनों के साथ रूसी संघ के राष्ट्रपति के क्रेमलिन निवास पर हमला करने का प्रयास किया।”

बयान में कहा गया है कि रूस इसे एक सुनियोजित आतंकवादी कृत्य और राष्ट्रपति की हत्या के प्रयास के रूप में मानता है। रूस जहाँ भी और जब भी आवश्यक समझेगा, प्रतिशोधात्मक उपाय करेगा। बता दें कि रूस के राष्ट्रपति की सुरक्षा बेहद उच्च कोटि की है।

रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि ड्रोन के टुकड़े क्रेमलिन स्थल पर गिरे लेकिन किसी को चोट नहीं आई और इमारतों को कोई नुकसान नहीं हुआ। कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रपति सुरक्षित हैं और उनका कार्यक्रम सामान्य रूप से जारी रहेगा।

बता दें कि यह घटना रूस की 9 मई विजय दिवस परेड से कुछ समय पहले हुई थी। इस विजय दिवस में कई विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। यह द्वितीय विश्वयुद्ध में रूस की जीत के रूप में मनाया जाता है। अब माना जा रहा है कि इस घटना के बाद रूस यूक्रेन पर नए सिरे से हमले कर सकता है।

उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर ज़ेलेंस्की के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले साल रूस के आक्रमण के बाद यूक्रेन अपने क्षेत्र को मुक्त कराने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इस घटना से संकेत मिलता है कि रूस यूक्रेन में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति के प्रवक्ता सेर्ही निकिफोरोव ने कहा, “मास्को में जो हुआ वह स्पष्ट रूप से 9 मई से पहले स्थिति को खराब करने के लिए बनाया गया है। यह घटना रूस को यूक्रेन में नागरिक लक्ष्यों पर हमलों को सही ठहराने में मदद कर सकती है और रूस के अंदर स्थानीय प्रतिरोध बलों की छापामार गतिविधियों का संकेत भी दे सकती है।”

जो बजरंग दल राम भक्तों की रक्षा के लिए बना, जो इस्लामी कट्टरपंथ से है लड़ता; उस पर कर्नाटक में प्रतिबंध का वादा कॉन्ग्रेस की हिंदू घृणा का एक और नमूना

कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा (Karnataka Assembly election 2023) के लिए 10 मई 2023 को वोट पड़ने हैं। चुनावों में सत्ताधारी बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच कड़ी टक्कर बताई जाती है। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ वाला कार्ड चलकर ध्रुवीकरण की कोशिशों में लगी है। पहले उसने मुस्लिम आरक्षण (Muslim Reservation) को फिर से बहाल करने का वादा किया। जब घोषणा-पत्र (Congress Manifesto) जारी किया तो उसमें हिंदुवादी संगठन बजरंग दल की तुलना कट्टर इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से की। बजरंग दल (Bajrang Dal) पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया। इतना ही नहीं कुछ महीने पहले पीएफआई ने कर्नाटक में अल्पसंख्यकों के नाम पर जितना फंड माँगा था, घोषणा-पत्र में काॅन्ग्रेस ने उतना ही देने का वादा भी किया है।

पिछले साल ही उन साजिशों का खुलासा हुआ था, जिससे पता चला कि पीएफआई 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के मिशन पर काम कर रहा है। इसके लिए वह मुस्लिम युवाओं को ट्रेनिंग दे रहा था। देशभर में हिंसा के मामलों में इस इस्लामी संगठन की संलिप्तता भी सामने आती रही है। केंद्र सरकार अब इस कट्टरपंथी संगठन को प्रतिबंधित कर चुकी है। दूसरी तरफ बजरंग दल ऐसा संगठन है जो इस्लामी कट्टरपंथ के खतरों से लड़ता है। जैसा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान कहते हैं, “बजरंग दल एक राष्ट्रवादी संगठन है। यह संगठन आतंकवाद और लव जिहाद का विरोध करता है। समाज सेवा में विश्वास करता है।”

जाहिर है कि पीएफआई और बजरंग दल की नीति और नीयत में दूर-दूर तक कोई समानता नहीं है। बावजूद कॉन्ग्रेस का बजरंग दल पर प्रतिबंध की बात करना बताता है कि वह पीएफआई पर केंद्र की मोदी सरकार की कार्रवाइयों से खार बैठी है। इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि कर्नाटक में जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी तो पीएफआई के 1600 आतंकियों के खिलाफ केस वापस लिए गए थे। तो क्या कर्नाटक चुनाव के बहाने इस्लामी कट्टरपंथियों को कॉन्ग्रेस यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि यदि वह सत्ता में आती है तो वे बेरोकटोक फिर से अपनी गतिविधियों में लग सकते हैं? इसके लिए जरूरी नहीं है कि वे पीएफआई के ही नाम से काम करें। हम पहले भी देख चुके हैं कि कैसे सिमी पर प्रतिबंध के बाद उसी कट्टरपंथी एजेंडे को पीएफआई के रूप में विस्तार मिला। कॉन्ग्रेस की इस छिपी हुई रणनीति के संकेत छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भी ताजा बयान से मिलते हैं। बघेल ने अपने राज्य में भी बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने पर विचार की बात कही है। दिलचस्प यह है कि इस साल के अंत तक छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं।

कब, कैसे, क्यों बना बजरंग दल

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 1984 में ‘श्रीराम जानकी रथ यात्रा’ शुरू की। राम भक्तों को लगातार धमकियाँ मिल रही थी। लेकिन उस समय की उत्तर प्रदेश सरकार ने सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। उस समय प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में उसी काॅन्ग्रेस की सरकार थी जो आज प्रतिबंध लगाने की बात कर रही है। ऐसे में रामभक्तों की सुरक्षा के लिए 8 अक्टूबर 1984 को बजरंग दल की स्थापना की गई। हिंदुवादी नेता विनय कटियार इसके संस्थापक संयोजक थे। उसके बाद से रामजन्मभूमि मुक्त आंदोलन में इस संगठन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बजरंग दल पर पहले भी प्रतिबंध लगा चुकी है कॉन्ग्रेस

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढाँचा ध्वस्त हो गया। उसके बाद केंद्र की तत्कालीन काॅन्ग्रेस सरकार ने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा दिया। एक साल बाद प्रतिबंध हटा लिया गया। सवाल है कि यदि काॅन्ग्रेस के लिए पीएफआई की कट्टरता और बजरंग दल की हिंदुवादिता एक जैसी ही है तो उसने पहले ऐसी नौबत क्यों आने दी जो इस संगठन की नींव पड़ी? जब उसने बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाया तो फिर उसे एक ही साल में क्यों हटाया? जाहिर है कि बजरंग दल बस एक बहाना है। काॅन्ग्रेस का असली मकसद इस बहाने से हिंदुओं को नीचा दिखाना और इस्लामी कट्टरपंथियों को तुष्ट करना है।

बजरंग दल का मौजूदा संगठन

बजरंग दल की वेबसाइट बताती है कि 1993 में ही उसका सांगठनिक विस्तार हो चुका था। सभी राज्यों में उसकी ईकाई बन गई थी। आज भी यह संगठन देश भर में सक्रिय है। देश भर के 13 लाख युवा संगठन से जुड़े बताए जाते हैं। धार्मिक स्थानों की सुरक्षा, गौरक्षा के लिए संगठन काम कर रही है। घुसपैठ, लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसी चुनौतियों से लड़ रही है। भूकंप, दुर्घटना जैसी प्राकृतिक आपदाओं में उसके कार्यकर्ताओं को राहत एवं बचाव कार्यों में भी शामिल देखा जा सकता है। इसके अलावा भी संगठन कई सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ा रही है।

काॅन्ग्रेस की वही पुरानी नफरत

यह काॅन्ग्रेस की तुष्टिकरण ही जिसने सिमी और पीएफआई जैसे इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों को भारत में फलने-फूलने की जगह दी। यह काॅन्ग्रेस की तुष्टिकरण ही है जिसने हिंदू, उनके धार्मिक स्थानों, उनके हितों की रक्षा के लिए बजरंग दल जैसे संगठनों की आवश्यकता को पैदा किया। यह काॅन्ग्रेस की तुष्टिकरण ही है जो वह कभी राम को तो कभी बजरंग बली को अपमानित कर हिंदुओं को नीचा दिखाने का काम करती है। यह जगजाहिर है कि अयोध्या में राम मंदिर के राह में काॅन्ग्रेस ने कितनी अड़चनें पैदा की। यहाँ तक कि नेहरू रामलला को ही बेघर करने पर अमादा थे। ऐसे समय में जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का स्वरुप आकार ले रहा है तो काॅन्ग्रेस बजरंग दल को निशाने पर लेकर अपनी तुष्टिकरण का प्रदर्शन कर रही है।

राम मंदिर का निर्माण रोकने में विफल रही काॅन्ग्रेस अब हिंदुओं से वह सुरक्षा कवच छीनना चाहती है जो राम भक्तों की, उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए बनी है। इसलिए जरूरी है कि केवल कर्नाटक ही नहीं देश के हर कोने में ‘काॅन्ग्रेस मुक्त भारत’ की भावना और बलवती हो ताकि फिर कोई पीएफआई भारत राष्ट्र के धर्मांतरण की साजिश न रच सके।

PM मोदी पर डॉक्यमेंट्री को लेकर BBC, विकिपीडिया और इंटरनेट अर्काइव को समन: RSS और VHP को बदनाम करने को लेकर दायर है मानहानि का मुकदमा

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार (3 मई 2023) को ब्रिटेन की मीडिया कंपनी BBC, विकिमीडिया और इंटरनेट अर्काइव को समन जारी किया है। बीबीसी द्वारा ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ (India: The Modi Question) के डॉक्यूमेंट्री बनाने के बाद भाजपा नेता बिनय कुमार सिंह ने BBC के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) रुचिका सिंगला ने बीबीसी के साथ-साथ विकिपीडिया की फंडिंग करने वाली कंपनी विकिमीडिया फाउंडेशन और अमेरिका में स्थित डिजिटल लाइब्रेरी ‘इंटरनेट आर्काइव’ को भी समन भेजा है। अदालत ने समन की तामील की तारीख से 30 दिनों के भीतर लिखित बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है।

बिनय कुमार सिंह ने यह कहते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था किया कि वह झारखंड भाजपा की राज्य कार्यकारी के सदस्य और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सक्रिय स्वयंसेवक हैं। दायर मुकदमे में उन्होंने कहा है कि बीबीसी ने डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से आरएसएस, विहिप और भाजपा जैसे संगठनों को बदनाम किया है।

अपनी याचिका में उन्होंने कहा, “आरएसएस और वीएचपी के खिलाफ लगाए गए आरोप संगठनों और उसके लाखों सदस्यों/स्वयंसेवकों को बदनाम करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रेरित हैं। इस तरह के आरोप न केवल निराधार हैं, बल्कि आरएसएस, वीएचपी की प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुँचाने वाले भी हैं।”

इसमें आगे कहा गया है, “प्रतिवादी नंबर 1 (बीबीसी) ने दावों की प्रामाणिकता की पुष्टि किए बिना रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण रूप से निराधार अफवाहें फैलाईं। इसके अलावा, इसमें लगाए गए आरोप कई धर्मों, विशेष रूप से हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देते हैं।”

बार एंड बेंच के अनुसार, इस दौरान कोर्ट को बताया गया है कि भारत सरकार ने इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद विकिपीडिया पर इसके लिए एक पेज बनाया गया है और उस पर इसे देखने के लिए लिंक दिया गया है। इसके साथ ही यह सामग्री अभी भी इंटरनेट आर्काइव पर उपलब्ध है।

याचिका में कहा गया है, “यह एक उचित निष्कर्ष की ओर जाता है कि सभी तीन प्रतिवादी देश की छवि को खराब करने के साथ-साथ RSS और VHP जैसे प्रतिष्ठित संगठनों की छवि को खराब करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।” इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई 2023 को होगी।

₹10000 करोड़ का घोटाला, दारू के पैसे से चल रही नीतीश कुमार की पार्टी JDU: बिहार BJP अध्यक्ष का दावा, कहा- शराबबंदी में हो रही होम डिलीवरी

बिहार के भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर शराबबंदी सहित कई मामलों को लेकर जोरदार हमला बोला है। चौधरी ने कहा कि शराब बिहार के हर हर में पहुँच चुकी है और होम डिलीवरी के जरिए सीएम नीतीश कुमार पैसे कमा रहे हैं।

सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार की सरकार पर शराब घोटाले का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आज हर घर में शराब पहुँच गई है और नीतीश कुमार को होम डिलीवरी के जरिए पैसा मिल रहा है। नीतीश कुमार की पार्टी अवैध शराब में 10,000 करोड़ रुपए का घोटाला कर रही है।”

उन्होंने बिहार की नीतीश सरकार पर शराब माफियाओं के साथ साँठ-गाँठ का भी आरोप लगाया। चौधरी ने कहा, “प्रशासन शराब माफियाओं के साथ मिलकर सारा पैसा जद (यू) के खाते में भेज रहा है। इसलिए आज हम संकल्प लेते हैं कि 2024 में हम बिहार में पूर्ण बहुमत से जीतेंगे।”

सासाराम के एक कार्यक्रम में बोलते हुए सम्राट चौधरी ने मंगलवार (2 मई 2023) को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम को रद्द कराने के लिए मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग से साजिश रची गई। उन्होंने कहा, “सासाराम की धरती पर अमित शाह को आना था। उनके कार्यक्रम को डिस्टर्ब करने के लिए नीतीश कुमार की सरकार ने ये पूरा कुचक्र रचा था।

चौधरी ने कहा कि जब भी शोभायात्रा निकलती थी, पुलिस फोर्स को लगाया जाता था। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने गृह सचिव और डीजीपी से कहा कि स्थिति गड़बड़ हो रही है फ्लैग मार्च कराइए, लेकिन कुछ नहीं किया गया। सरकार षडयंत्र कर रही थी कि सासाराम में अमित शाह नहीं आएँ। वे जल्द सासाराम आएँगे। कोई माई का लाल रोक नहीं सकता है।

सासाराम में रामनवमी के दंगे को लेकर अमित शाह ने अपना कार्यक्रम रद्द दिया था। वहीं, उस दंगे को लेकर पाँच बार विधायक रहे जवाहर प्रसाद को बिहार पुलिस ने आरोपित बनाकर गिरफ्तार कर लिया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि जवाहर प्रसाद 70 साल के बुजुर्ग हैं और वो साधु आदमी हैं।

चौधरी ने कहा, “घटना के बाद एक माह तक जवाहर प्रसाद प्रशासन से मिलते रहे, लेकिन प्रशासन ने कभी नहीं कहा कि आपको गिरफ्तार करना है। अमित शाह के कार्यक्रम की जब घोषणा हुई, तब विधायक का जिला प्रशासन से झगड़ा हुआ। जिला प्रशासन ने कहा कि ज्यादा तंग कीजिएगा तो आपके होम मिनिस्टर के कार्यक्रम को रद्द करा देंगे।”

गौरतलब है कि जवाहर प्रसाद को गिरफ्तार करने के लेकर भाजपा मंगलवार को धरना पर बैठी थी। इस धरने में भाजपा के कई दिग्गज नेता भी पहुँचे थे। बता दें कि भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र बेगुसराय में ‘सम्राट चौधरी बिहार के योगी हैं’ के नारे लगवाए थे।

उन्होंने कहा था, “मैं देख रहा हूँ सम्राट चौधरी जिस दिन से अध्यक्ष बने हैं, नारे लग रहे हैं सम्राट चौधरी बिहार का…? बिहार का…? बिहार का…? बिहार का…?” इसके बाद भीड़ की ओर से जवाब मिला ‘योगी है’ और ‘मुख्यमंत्री हो’।

मंगलवार (2 मई 2023) को यह नारेबाजी मंच से स्थानीय विधायकों, राज्यसभा सांसद और संगठन के तमाम नेताओं की उपस्थिति में हुई। हालाँकि, पत्रकारों के सवाल पर गिरिराज ने कहा, “यह मैंने नहीं कहा। आपने कहा कि बिहार में योगी जैसा मुख्यमंत्री चाहिए और सम्राट चौधरी का नाम आप ही ले रहे हैं।”

6 बीवी-16 बच्चे, फिर भी 65 साल के हिसाम हुसैन ने स्कूल जाने वाली लड़की से की 7वीं शादीः सास को प्रमोशन, विरोध के बाद ब्राजील के मेयर ने पार्टी छोड़ी

ब्राजील के एक करोड़पति मेयर हिस्साम हुसैन देहैनी ने 65 वर्ष की उम्र में 7वीं बार शादी की है। उनकी नई बीवी की उम्र मात्र 16 साल है और वो एक स्कूली छात्रा है। बताया जा रहा है कि इससे पहले वो 6 बार शादी कर चुके हैं। उनकी पहली शादी 43 वर्ष पहले 1980 में हुई थी। हिस्साम हुसैन देहैनी के अब तक 16 बच्चे भी हो चुके हैं। उन्हें अब अपनी राजनीतिक पार्टी से भी इस्तीफा देना पड़ा है। ड्रग्स लेने के आरोप भी उन पर लग चुके हैं।

हिस्साम की नई बीवी कयने रोड कमार्गो (Kauane Rode Camargo) एक चाइल्ड ब्यूटी क्वीन रही हैं। अप्रैल 2023 की शुरुआत में ही उससे शादी की। सन् 2000 में हिस्साम को 100 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया था। उन पर ड्रग्स की तस्करी का मामला चलाया गया था। उन पर आरोप लगे थे कि वो एक ड्रग्स लैब चलाते हैं और पुलिस के साथ सेटिंग कर के ड्रग तस्करों को बचाते हैं। उनकी संपत्ति भारतीय रुपए में 23 करोड़ रुपए से अधिक आँकी गई है।

वो Cidadania पोलिटिकल पार्टी का हिस्सा थे, लेकिन अब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है। 12 अप्रैल, 2023 को उन्होंने ताज़ा शादी की है। इससे पहले उन्होंने अपनी होने वाली बीवी के 2 रिश्तेदारों को बड़े पदों पर काबिज किया। उनकी नई बीवी की माँ को जहाँ कल्चर-टूरिज्म का म्युनिसिपल सेक्रेटरी बना दिया गया, वहीं उनकी चाची को सेक्रेटरी जनरल डायरेक्टर का पद दिया गया। देहैनी दूसरी बार मेयर बने हैं। उनकी बेटियों और पूर्व बीवियों को भी सरकारी पद दिए गए हैं।

बता दें कि ब्राजील कम उम्र में शादी के मामले में दुनिया भर में पाँचवें नंबर पर आता है। अगर माता-पिता की इजाजत हो तो वहाँ लड़की 16 की उम्र में शादी कर सकती है। इस तरह अब अरौकेरिया की फर्स्ट लेडी अभी भी स्कूल में पढ़ती हैं। मेयर हुसैन का कहना है कि दोनों एक-दूसरे को खुश रखते हैं। उनकी नई शादी के बाद ब्राजील में उनका विरोध होने लगा था और यही उनके इस्तीफे का कारण बना। वो राजनेता होने के साथ-साथ कारोबारी भी हैं।

अयोध्या में ‘टेंट सिटी’ भी बसा रही योगी सरकार, राम मंदिर से बस 1 किमी होगी दूर: 15000 वर्गमीटर में श्रद्धालुओं के लिए बनेंगे 200 तम्बू

उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या को सरकार सिर्फ धर्मस्थल के तौर पर ही नहीं, बल्कि पर्यटन स्थल पर विकसित करने की योजना बना रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) ने राम मंदिर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर 200 ‘टेंट सिटी’ बनाने का फैसला किया है। इनमें अगले साल के अंत से ठहरा जा सकता है।

अयोध्या आने वाले पर्यटकों के लिए 15,000 वर्गमीटर के दायरे में बनाया जा रहा टेंट सिटी यह अयोध्या में आने वाले कई नए होटलों की योजना का हिस्सा है। इनमेें प्रमुख पाँच सितारा होटल भी शामिल हैं। बता दें कि अयोध्या में राममंदिर का पट खुलने की तारीख तय हो गई है।

अयोध्या घुमने आने वाले पर्यटकों के लिए टेंट सिटी सालों भर खुला रहेगा। यह सिटी पर्यटकों को भारत की एक अलग झलक पेश करेगा। बता दें कि अगले दशक तक तैयार होने वाले टेंट सिटी को PPP मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार भूमि प्रदान करेगी और लाइसेंस शुल्क वसूल करेगी।

न्यूज 18 द्वारा हासिल किए गए दस्तावेजों के अनुसार, “प्रस्तावित टेंट सिटी आने वाले लोगों को एक अद्वितीय और आरामदायक शिविर अनुभव प्रदान करेगा। इससे वे शहर की संस्कृति और आध्यात्मिकता में खुद को समायोजित कर पाएँगे। इस परियोजना का उद्देश्य प्राकृतिक परिवेश और क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करते हुए आधुनिक सुविधाओं की पेशकश करना है।”

दस्तावेज में कहा गया है कि सरयू नदी पर बसा अयोध्या दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है। यहाँ पर प्राचीन मंदिर और शानदार घाट हैं, जो भारत के समृद्ध इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करता है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि एक तम्बू का न्यूनतम आकार 250 वर्ग फुट होगा।

योगी आदित्यनाथ की सरकार टेंट सिटी में हाई क्वालिटी सर्विस की योजना बना रही है। इनमें कम-से-कम 200 टेंटों में टॉयलेट, रिसेप्शन/फ़ोयर क्षेत्र, रेस्तरां, रसोई, भोजन क्षेत्र और वीआईपी लाउंज के साथ कई मनोरंजक गतिविधियाँ शामिल हैं।

यूपी सरकार का कहना है, “निजी पार्टी टेंट सिटी क्षेत्र में संचालन, टेंट की बिक्री, रेस्तरां, मनोरंजक गतिविधियों से राजस्व की हकदार होगी और लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर करने के दो महीने के भीतर संचालन शुरू करने के लिए कहा जाएगा।”

7 साल में सगाई-12 में निकाह, 10 गोली मारी-चाकू से आँखें निकाली… कहानी दिल्ली में रह रहीं खात्रा हाशमी की, तालिबान ने बनाया ‘जिंदा लाश’

अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के बाद महिलाओं की स्थिति खासी दयनीय हो गई है। तालिबान से पीड़ित रहीं एक महिला अधिकारी ने अपना दर्द बयाँ किया है। वो फ़िलहाल दिल्ली में रह रही हैं। पैसों के लालच में उसके अब्बू ने मात्र 7 साल की उम्र में बड़े उम्र के व्यक्ति के साथ उसकी शादी तय कर दी थी और 12 साला की उम्र में निकाह करा दिया था। अब्बू द्वारा न पढ़ाने-लिखाने के बावजूद वो अपनी मेहनत से अफगानिस्तान में पुलिस अधिकारी बनीं।

हालाँकि, अफगानिस्तान में एक महिला का इस तरह से तरक्की करना तालिबानियों को रास नहीं आया और वो फोन कॉल कर-कर के धमकियाँ देने लगे। 2020 के शुरुआत में पुलिस थाने से घर जाते समय उन पर गोलीबारी की गई। 9 गोलियाँ उनके शरीर पर लगीं। ये वो समय था, जब तालिबान मुल्क पर कब्जे की तरफ तेजी से बढ़ रहा था। उनके शरीर में 10 बार चाकू से वार किया गया। बेहोशी की हालत में उनकी दोनों आँखें निकाल ली गईं। महिला ने कहा कि अब वो ‘ज़िंदा लाश’ बन कर रह गई हैं।

उक्त महिला का नाम खात्रा हाशमी है, जो फ़िलहाल ‘नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड (NAB)’ के लिए काम करती हैं। ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब उनके साथ ये दरिंदगी हुई थी, तब वो गर्भवती थीं। जब उन्हें होश आया, तो वो पूरी तरह अंधी हो चुकी थीं। वो अपना पहला वेतन भी अपने आँखों से नहीं देख पाई थीं। मात्र 3 महीने की नौकरी के बाद उनके साथ ये वीभत्स्ता हुई थी। उनके शरीर में अब भी बुलेट के टुकड़ों की वजह से दर्द रहता है, जिसका इलाज भी चल रहा है।

उनकी 2 साल की बेटी भी है, जो उनके साथ ही रहती है। उनका कहना है कि महिलाओं-बच्चों की तालिबान से हिफाजत के लिए ही पुलिस फ़ोर्स जॉइन किया था, लेकिन हुआ कुछ और ही। उनका कहना है कि तालिबानी ये नहीं चाहते कि महिलाएँ नौकरी करें, वो चाहते हैं कि लड़कियाँ घर में कैद रहें। 3 नकाबपोश तालिबानियों ने उन पर हमला किया था। उनके पहले पति, दो बेटे और एक बेटी अफगानिस्तान में ही रहती है।

तालिबानी उनसे पूछने आते हैं कि उनकी अम्मी लौटी या नहीं। दिल्ली में खात्रा हासमी ने दूसरी शादी भी की है। पहले पति की उम्र 80 साल से अधिक हो गई है और वो उन्हें तलाक भी दे चुके हैं। फिर भी वो और बच्चे पैदा करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि उन बच्चों से मिलने का उनका दिल करता है, लेकिन ये सम्भव नहीं हो पाता। खात्रा हाशमी को तालिबानी अब भी खोज रहे हैं। जब उन पर हमला हुआ था, तब उन्होंने अपनी साँसें रोक ली थीं और तालिबानी उन्हें मरा हुआ समझ कर चले गए थे।

लखनऊ की सड़क पर स्कूल जाती बच्ची के पीछे पड़ा था पुलिसकर्मी शहादत अली, महिला ने पकड़ा तो बोला- मेरे बच्चे के साथ पढ़ती है: Video

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें एक पुलिसकर्मी को एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ करते हुए देखा जा सकता है। उक्त पुलिसकर्मी की पहचान शहादत अली के रूप में हुई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि साइकिल से छात्रा जा रही होती है और शहादत अली अपनी स्कूटी लेकर उसके बगल में जा रहा होता है। एक अन्य महिला ने उसकी हरकत को देख लिया और उसे फटकार लगाई।

जिस व्यक्ति ने ये वीडियो बनाया, वो स्कूटी पर बैठा हुआ था जिसे एक महिला चला रही थी। ये लोग पीड़ित छात्र और उस पुलिसकर्मी के पीछे से गुजर रही थी। वीडियो में उक्त व्यक्ति को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि गाड़ी में कोई नंबर प्लेट भी नहीं है। वीडियो में महिला उक्त पुलिसकर्मी से पूछती है, “आप कौन भाई साहब? जानते हैं आप उनको (छात्रा को)?” इस पर वो पुलिसकर्मी जवाब देता है कि छात्रा उसके बच्चे के साथ पढ़ती है।

इस पर महिला उसे रुकने और गाड़ी साइड में लगाने के लिए कहती है। हालाँकि, उसने स्कूल का नाम गलत बताया। इस पर महिला ने कहा कि ये पुलिसकर्मी रोज लड़कियों का इसी तरह से पीछा कर रहा है। साथ ही उसकी हेलमेट उतारने को भी कहा, ताकि उसकी पहचान सामने आए। पुलिसकर्मी ने हेलमेट उतारा भी। जब महिला ने पूछा कि उसकी गाड़ी में नंबर क्यों नहीं है, तो उसने कहा कि ये बैटरी वाली गाड़ी है। इस पर महिला ने पूछा कि क्या बैटरी वाली गाड़ी में नंबर नहीं होता?

वायरल वीडियो के सामने आने के बाद यूपी पुलिस ने भी बयान दिया है। लखनऊ पुलिस ने कहा, “प्रकरण को संज्ञान में लेकर उक्त पुलिसकर्मी के विरुद्ध थाना कैंट में अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जा रही है। विभागीय कार्यवाही हेतु प्रक्रिया प्रचलित है।” इस वीडियो को लेकर लोगों ने कहा कि छोटी-छोटी बच्चियों के साथ इस तरह की हरकत कर के शहादत अली वर्दी को शर्मसार कर रहा है। उसे निलंबित कर गिरफ़्तारी की माँग भी की जा रही है।

ईस्ट डीसीपी ने इस मामले में कहा कि इस प्रकरण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस संबंध में कैंट थाने में एक तहरीर मिली है और उसके आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है।

लखनऊ पूर्वी के डीसीपी ने आगे बताया कि मुख्य आरक्षी शहादत अली को पुलिस हिरासत में ले लिया गया है। इस मामले में आगे की जाँच जारी है और आरोपित पुलिसकर्मी शहादत अली को निलंबित किया जा सकता है।