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बिहार में थाने से 15 किमी दूर चल रही थी गन फैक्ट्री, कई राज्यों में होती थी सप्लाई: बंगाल में पकड़े गए हथियार तस्कर तो हुआ खुलासा, छापेमारी में 3 गिरफ्तार

बिहार के पूर्णिया जिले में अवैध गन फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है। इसका खुलासा पश्चिम बंगाल पुलिस की STF टीम ने किया है। यहाँ बने हथियार देश के कई हिस्सों में बेचे जाते थे। अवैध हथियार बनाने वाले गौरव और सौरव चौधरी नाम के 2 भाई बताए जा रहे हैं। दोनों छापेमारी से पहले फरार हो गए। अवैध हथियार बना रहे 3 कारीगरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मौके से भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए हैं। छापेमारी मंगलवार (21 मार्च 2023) को की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला पूर्णिया के थानाक्षेत्र धमदाहा का है। कुछ दिनों पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने बिहार में बने अवैध हथियारों के साथ 3 तस्करों को गिरफ्तार किया था। इन्होंने पूछताछ में बिहार के पूर्णिया में अवैध हथियार की फैक्ट्री होने की जानकारी दी थी। इस जानकारी पर धमदाहा थानाक्षेत्र के गाँव कुकरौन में पश्चिम बंगाल की STF ने छापा मारा। कुकरौन गाँव थाने से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। छापेमारी के दौरान बिहार पुलिस को भी साथ लिया गया था।

बताया जा रहा है कि जिसके मकान में अवैध हथियार बन रहे थे, वे गौरव और सौरव नाम के 2 सगे भाई हैं। कहा जा रहा कि छापेमारी की भनक लगते ही दोनों भाई घर से फरार हो गए। पुलिस ने मौके से अवैध हथियार बना रहे 3 कारीगरों को गिरफ्तार किया। इनमें से मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद शहाबुद्दीन नाम के 2 कारीगर बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले हैं। तीसरा कारीगर मोहम्मद सोनू उर्फ़ शाहनवाज भागलपुर जिले का रहने वाला है। पुलिस की पूछताछ में तीनों कारीगरों ने मकान में लम्बे समय से अवैध हथियार बनने की जानकारी दी है।

गिरफ्तार हुए तीनों कारीगर शहाबुद्दीन, शाहिद और सोनू ने पुलिस को यह भी बताया कि वहाँ से बने हथियार ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक बेचे जाते थे। कारीगरों को हर हथियार की बिक्री पर चौधरी भाइयों द्वारा फिक्स कमीशन मिलता था। पुलिस ने इस ठिकाने से 5 दर्जन से ज्यादा देशी कट्टा बनाने का सामान, लोहे की 60 रॉड, 50 बैरल बॉडी, 12 प्लेट बॉडी, 2 लेथ मशीनें, 16 स्लाइड, 20 अर्द्ध-निर्मित पिस्टल एवं एक तैयार देशी कट्टा बरामद किया है। पकड़े गए तीनों कारीगरों से पूछताछ चल रही है। फरार गौरव और सौरव की तलाश में दबिश दी जा रही है।

जिसने अमृतपाल को ट्रेनिंग देकर भेजा भारत, उसने ही लंदन के भारतीय उच्चायोग में हटाया था तिरंगा: अब हुआ गिरफ्तार, बाप भी था आतंकी

भारत में अमृतपाल सिंह और अलगाववादी संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के खिलाफ हुई कार्रवाई के विरोध में 19 मार्च, 2023 को लंदन में भारतीय उच्‍चायोग के सामने उत्पात मचाया गया था। यहाँ लगाए गए तिरंगे को हटा कर खालिस्‍तानियों ने इसकी जगह पीले रंग का दूसरा झंडा लगा दिया था। इस घटना के पीछे अवतार सिंह खंडा नाम के शख्स का हाथ बताया जा रहा है। जिसे लंदन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

अवतार सिंह खंडा की गिरफ्तारी के बाद जाँच और पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। पता चला है कि खंडा प्रतिबंधित ग्रुप बब्बर खालसा इंटरनेशल (BKI) का मेंबर है। इतना ही नहीं ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन का नीव रखने वाले दीप सिद्धू के पीछे भी उसका दिमाग बताया जा रहा है। जाँच एजेंसियाँ सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई ऐसी कई वीडियो की जाँच कर रही हैं जिसमें अवतार सिंह खंडा दीप सिद्धू की मौत के बाद उसके विरासत को आगे बढ़ाने की बात कर रहा है।

अमृतपाल सिंह को किया तैयार

अब तक की जाँच में यह भी पता चला है कि पंजाब पहुँचने से पहले अवतार सिंह ने ही अमृतपाल सिंह को तैयार किया था। इसी ने अमृतपाल को बताया था कि पंजाब पहुँचकर उसे किस तरह मिशन खालिस्तान को आगे बढ़ाना है। बता दें कि सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत के बाद अमृतपाल ही बारिस पंजाब दे संगठन का प्रमुख बना था। अवतार सिंह खंडा बब्बर खालसा के अन्य मेंबर परमजीत सिंह पम्मा का साथी है। दुबई में रह रहे अमृतपाल की दोस्ती बब्बर खालसा के लोगों से हुई। इसी दौरान वह पम्मा के संपर्क में भी आया और उसी के कहने पर अवतार सिंह ने अमृतपाल को ट्रेनिंग दे कर भारत भेजा।

अमृतपाल सिंह की तलाश में की जा रही छापेमारी के दौरान उसके घर और अलग-अलग ठिकानों से हथियारों के साथ-साथ कई जरूरी दस्तावेज मिले हैं। अमृतपाल का गिरोह आईएसआई और बब्बर खालसा की मदद से आनंदपुर खालसा फोर्स (एकेएफ) के साथ मिलकर काम कर रहा था। छापेमारी के दौरान अमृतपाल के घर जल्लूपुर खेड़ा और दूसरे ठिकानों से बरामद हथियार और जैकेट पर एकेएफ लिखा हुआ पाया गया था।

अवतार सिंह के दूसरे आतंकी कनेक्शन

अवतार सिंह खंडा की गिरफ्तारी के बाद उसके एक अन्य प्रो-खालिस्तानी संगठन दल खालसा से जुड़े होने की भी बात सामने आई है। नवदीप सिंह नाम के यूजर द्वारा ट्विटर पर थ्रेड के जरिए किए गए दावे के अनुसार, वह खालिस्तानी प्रोपगेंडा फैलाने वाले खालसा टेलीविजन ग्लोबल का एंकर रह चुका है। इस चैनल को 31 मार्च, 2022 को ऑफ एयर कर दिया गया था।

इसके बाद उसने ‘सिख फॉर जस्टिस’ द्वारा चलाए जा रहे यूएसएमआई न्यूज के लिए काम किया था। दावा है कि खंडा आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के महबूब अली के साथ भी संपर्क में रहा। अवतार सिंह पर भारतीय खुफिया एजेंसियों ने यूके स्थित गुरुद्वारों में आईईडी ट्रेनिंग आयोजित करने का आरोप लगाया था।

पिता भी रह चुका है आतंकी

पूछताछ के दौरान पता चला है कि खंडा के पिता कुलवंत सिंह खुकराना खालिस्तान लिबरेशन आर्मी (KLF) और खालिस्तान कमांडो फोर्स का आतंकी था। केएलएफ की स्थापना वर्ष 1986 में भारत से पंजाब को अलग कर खालिस्तान बनाने के मकसद से की गई थी।

‘जन्मदिन पर साथी कैदियों में बाँटना चाहता हूँ ₹5.11 करोड़’: महाठग सुकेश ने अनुमति के लिए जेल DG को लिखा पत्र, कहा – साबित कर दूँगा ये वैध कमाई है

200 करोड़ रुपए की ठगी मामले में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) ने अपने जन्मदिन के मौके पर साथी कैदियों की मदद करने के लिए जेल के महानिदेशक (DG) से एक पत्र लिखा है। पत्र में उसने अपने जन्मदिन के अवसर पर 25 मार्च 2023 को 5 करोड़ 11 लाख रुपए दान करके उन साथी कैदियों की मदद करने की अनुमति माँगी है, जो अपनी जमानत राशि भरने में सक्षम नहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने वकील की ओर से सार्वजनिक किए गए इस पत्र में सुकेश ने लिखा है, “मैं जेल में बंद ऐसे कैदियों की मदद करना चाहता हूँ, जो जमानत मिलने के बावजूद बेल बॉन्ड भरने में सक्षम नहीं हैं और इसके चलते बाहर नहीं आ पा रहे हैं। जेल में कई ऐसे कैदी हैं जो अपने परिवार, बच्चों और उनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। उनके लिए मैं 5 करोड़ 11 लाख रुपए दान करना चाहता हूँ।”

महाठग ने लिखा, “मैं 2017 से इस जेल में हूँ और इतने सालों में मैंने निजी तौर पहले भी अपने करीब 400 साथी कैदियों के बेल बॉन्ड भरने और उनके परिवार को सपोर्ट करने के लिए मदद की है। अगर डीजी यह प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं तो मैं अपने इनकम टैक्स के सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दूँगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह पैसे वैध तरीके से कमाए गए हैं।”

सुकेश ने आगे लिखा, “यह सब देखकर मेरा दिल दुखता है कि पैसों की कमी के कारण कैसे लोग सालों तक जेल में सड़ते रहते हैं। ये सहायता मैं दिल्ली की जेल में बंद अपने साथी कैदियों के लिए करना चाहता हूँ। ताकि वे जल्द से जल्द अपने घरवालों से मिल सकें।”

उसने खत में अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि वह और उसका परिवार शुरू से ही अपने गैर-लाभकारी चैरिटेबल ट्रस्ट ‘शारदा अम्मा फाउंडेशन’ और ‘चंद्रशेखर कैंसर फाउंडेशन’ के माध्यम से दक्षिण भारत में लाखों गरीबों की मदद करते हैं और उन्हें फ्री कीमोथेरेपी भी उपलब्ध कराते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले सुकेश चंद्रशेखर ने अपने मामले को दूसरे जज को ट्रांसफर करने की माँग की थी। उसने इस संबंध में कोर्ट में याचिका दाखिल कर जज पर बायस होने का आरोप लगाया था। लेकिन, पटियाला हाउस कोर्ट ने सुकेश की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि आरोपित के पास प्रिसाइडिंग ऑफिसर पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बाद महाठग की न्यायिक हिरासत 31 मार्च तक बढ़ा दी।

बीवी को नशीला पदार्थ दे सौतेली बेटी से रेप करता था मुस्तफा, देता था हत्या की धमकी: गर्भवती होने पर हुआ खुलासा, कोर्ट ने दी मौत की सजा

गुजरात (Gujarat) के खेड़ा जिले में नाडियाद पॉक्सो कोर्ट ने सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म करने के मामले में मुस्तफा मियाँ नाम के एक शख्स को सजा-ए-मौत दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने उसे पीड़िता को मुआवजे के तौर पर 2 लाख रुपए देने का भी आदेश दिया है। मामला खेड़ा जिले के मातर तालुका का है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सौतेला पिता मुस्तफा ने 11 साल 10 महीने की पीड़िता के साथ पहली बार दुष्कर्म किया था। इसके बाद यह सिलसिला 6 महीनों तक चला। वह पीड़िता को धमकी देता था कि यदि उसने किसी से कुछ कहा तो उसे और उसकी वालिदा (माँ) को जान से मार देगा। डर की वजह से नाबालिग चुप रह गई।

इस मामले का खुलासा जनवरी 2022 में तब हुआ, जब नाबालिग लड़की तीन माह की गर्भवती हो गई। पेट दर्द की शिकायत के बाद माँ उसे अस्पताल लेकर गई, जहाँ डॉक्टरों ने गर्भावस्था का खुलासा किया। जब माँ ने पूछताछ की तो लड़की ने सारी कहानी बताई। नाबालिग की माँ ने मुस्तफा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

नाडियाद पॉक्सो कोर्ट में आरोपित के खिलाफ 12 गवाह और 44 दस्तावेज पेश किए गए। पीड़िता ने गवाही के दौरान पॉक्सो कोर्ट को बताया कि उसका सौतेला पिता रात में उसकी माँ को नशीला पदार्थ दे देता था। इसके बाद जब वह गहरी नींद में सो जाती तो नाबालिग का यौन शोषण करता था।

लगभग साल भर की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मुस्तफा को सौतेली बेटी से एक से अधिक बार बलात्कार और नाबालिग को गर्भवती करने जैसे गंभीर अपराधों का दोषी पाया। इसके लिए कोर्ट ने उसे IPC की धारा 376 (ए)(बी), धारा 5 (जे) (2) और 5 (एल) के तहत मौत की सजा सुनाई।

मृत्युदंड देते हुए अदालत ने कहा, “शारीरिक चोट के मामले में घाव भरने की संभावना है, लेकिन यौन हमले के कारण आत्मा पर लगी चोट मानसिक छाप के रूप में पीड़ित के साथ रहती है।इसलिए, इस मामले में किसी भी तरह की अनावश्यक उदारता दिखाना, न्याय व्यवस्था का उपहास और अपमान होगा।”

कोर्ट ने आगे कहा, “एक बच्चे के लिए माता-पिता भगवान के समान होते हैं। एक बच्चे और उसके पिता और माँ के बीच का रिश्ता एक पवित्र बंधन होता है, लेकिन यहाँ पिता ने ही अपनी नाबालिग बेटी का शोषण किया। यह रिश्ते पर एक धब्बा है।” कोर्ट ने इस अपराध को पिता द्वारा बेटीके साथ अपराध को दुर्लभतम मामलों के रूप में वर्गीकृत किया।

बता दें कि आरोपित मुस्तफा मूल रूप से गोधरा का रहने वाला है। वह खेड़ा जिले के मातर के महलेज गाँव में रह रहा था। 28 वर्षीय मुस्तफा ने एक विधवा महिला से निकाह किया था। पहली शादी से महिला की तीन बेटियाँ थीं। बड़ी बेटी शादी कर के अहमदाबाद में बस चुकी है, जबकि अन्य 2 बेटियाँ अपने माँ और सौतेले पिता के साथ रह रही थीं।

बताया गया कि कुछ समय बाद मुस्तफा और उसका परिवार अहमदाबाद के एक फॉर्म हाउस का देखभाल करने लगा। फॉर्म हाउस में जब कोई नहीं होता था, तब मुस्तफा अपनी सौतेली बेटी को डरा-धमका कर उसके साथ बलात्कार करता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने उसे मौत की सजा दी है।

मोटी, नंगी, बेहया… रमजान में भी हिरोइन हिना खान पर टूट पड़े कट्टरपंथी, कहा- तेरा उमराह कबूल नहीं होगा, अल्लाह से डर

टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ से अलग पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस हिना खान (Hina Khan) रमजान का महीना शुरू होने से ठीक पहले उमराह के लिए मक्का पहुँची हैं। उन्होंने मंगलवार (21 मार्च, 2023) को अपनी खुशी बयाँ करते हुए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो और फोटोज शेयर की। इसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, “पहला उमराह मुकम्मल, अल्लाह हमारी इबादत कुबूल फरमाए।” लेकिन कट्टरपंथी इस्लामवादियों को उनका मक्का जाना रास नहीं आया और उन्होंने एक्ट्रेस को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

हिना खान को ट्रोल करते हुए वसीम खान ने लिखा, “आपका उमराह, हज तभी कबूल होगा, जब आप ये कपड़े पहनना बंद करेंगी। अल्लाह का डर पैदा करना होगा आपको, तौबा करनी होगी और अल्लाह का खौफ रखना होगा। आप तो शॉर्ट कपड़े पहन रही हो, आपका पूरा जिस्म दिख रहा है। आप मुस्लिम हो, आपको पता है औरत के तो बाल तक नहीं दिखने चाहिए और आप तो पूरा जिस्म दिखा रही हो। आपने तो हद ही पार कर दी। बेहया बन गए पूरे इस्लाम के।”

हिना खान की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इसके बाद मुहम्मद ने लिखा, “क्या फायदा अल्लाह के घर जाने का, जब कपड़े पहन कर भी तुम नंगी हो। अल्लाह से डरो हिना। पहले तुम मुझे अच्छी लगती थी, पर अब उतनी ही बुरी लगती हो। एक मुस्लिम के लिए ये सब जायज़ नहीं होता है, जो कुछ तुम करती हो।”

हिना खान की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

कुरैशी सादिक ने एक्ट्रेस के कपड़ों पर तंज कसते हुए लिखा कि बहन जरा कपड़े मोटे पहन लेती। वहीं, मुबीन हिना को कहता है कि सारा साल बगैर लिबास के घूमती है, जब रमजान शुरू होता है तू पाक जगह पर चली जाती है।

हिना खान की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

अमरीन खान लिखता है, “कुर्ते में से बदन दिख रहा है। आप अपने लिबास का भी ख्याल रखें। वहाँ इबादत चलती है, बेहयाई नहीं। इसके अलावा कई और कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने भी हिना खान के कपड़ों को लेकर उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। एक और ट्रोलर ने कहा कि बॉलीवुड में दाल नहीं गल पाई तो मजहब अपना लिया।

बता दें कि हिना अपनी अम्मी को लेकर उमराह करने गई हैं। उन्होंने फ्लाइट की फोटो भी शेयर की है, जिसमें वह अपनी अम्मी के साथ नजर आ रही हैं।

खालिस्तानी भगोड़े अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों के ‘हमदर्द’ भी कईः SGPC ने कार्रवाई पर उठाए सवाल, सुखबीर बादल देंगे कानूनी मदद, काॅन्ग्रेस गिरफ्तारी से चिंतित

पाकिस्तान के सहयोग से पंजाब में खालिस्तानी अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले ‘वारिस पंजाब दे’ प्रमुख अमृतपाल सिंह को पुलिस लगातार खोज रही है। वेश बदलकर उसके भागने तक की आशंका जाहिर की जा रही है। हालाँकि, सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार दबिश दे रही है। बठिंडा इलाके में उसके 70 समर्थकों को पुलिस ने जेल भेजा है। उधर, अमृतपाल के समर्थकों की गिरफ्तारी का कॉन्ग्रेस और अकाली दल विरोध कर रही है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) भी सरकार की आलोचना कर रही है।

बठिंडा रेंज के ADGP सुरिंदर पाल सिंह परमार ने कहा, “हमने 70 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। हम अलर्ट पर हैं। स्थिति शांतिपूर्ण है। लोगों में विश्वास जगाने के लिए फ्लैग मार्च किया जा रहा है। लोगों ने हमें बहुत समर्थन दिया है और आशा है कि वे हमारा सहयोग करते रहेंगे।”

अमृतपाल के समर्थकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का शिरोमणि अकाली दल और कॉन्ग्रेस विरोध कर रही है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने इन सिख युवकों को कानूनी मदद उपलब्ध कराने की बात कही है। वहीं, कॉन्ग्रेस के पंजाब अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखकर समर्थकों की गिरफ्तारी चिंता जताई है।

सुखबीर सिंह बादल ने अमृतपाल के समर्थकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को ‘अतिरिक्त संवैधानिक’ कार्रवाई बताया। बादल ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर सिख युवकों की अंधाधुन कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इन युवाओं को कानूनी मदद देने के लिए पार्टी के नेताओं को कहा है।

सुखबीर बादल ने अपने बयान में भगोड़ा अमृतपाल का जिक्र तक नहीं किया। ना ही उसे अलगववादी बताया और ना ही उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया। वहीं, अकाली दल के नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने कहा कि अमृतपाल के समर्थकों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने का विरोध करते हुए उसे वापस लेने की माँग की।

कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष वडिंग ने कहा कि पार्टी चरमपंथियों के खिलाफ नरमी का समर्थन नहीं करती। इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि भटके के नौजवानों के पुनर्वास की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस बड़े पैमाने पर सिख युवकों को अमृतपाल का समर्थक बताकर पकड़ रही है, जो कि चिंता का विषय है।

उधर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), अमृतसर भगोड़ा अमृतपाल एवं अन्य गिरफ्तार खालिस्तानियों के समर्थन में उतर आई है। SGPC के अधिकारियों द्वारा जारी किए गए कई बयानों में अमृतपाल का सीधे तौर पर अमृतपाल का नाम नहीं लिया गया, लेकिन सिख युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना की।

19 मार्च 2023 को दिए गए अपने पहले बयान में एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा था, “पंजाब पुलिस और [पंजाब और हरियाणा] उच्च न्यायालय द्वारा नियम निर्धारित किए गए हैं कि अगर प्राथमिकी दर्ज की जाती है तो किसी को गिरफ्तार करने के लिए कदम उठाए जाएँगे। मेरा मानना है कि कल से अब तक की गई कार्रवाई से जनता में दहशत का माहौल है। बसों को रोक दिया गया है। धारा 144 लगा दी गई है। इंटरनेट को निलंबित कर दिया गया है।”

इसके बाद SPGC ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा, “सरकारों को लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए बोलने वाले युवाओं के उत्पीड़न और अवैध हिरासत की प्रथा को अपनाने से बचना चाहिए, क्योंकि पंजाब ने पहले ही बहुत कुछ झेला है और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने के लिए अब यह आवश्यक है।”

SGPC ने दावा किया कि युवा (अमृतपाल और उनके सहयोगी) ‘लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए बोलते हैं’। हालाँकि, इनके दावों के उलट वे पूरे राज्य में बंदूक और तलवार जैसे हथियार लहराते नजर आए। रिपोर्टों से पता चलता है कि अमृतपाल नशामुक्ति केंद्रों की आड़ में एक निजी मिलिशिया बना रहा था। जाँच के दौरान पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी ISI और आतंकवादी संगठन टसिख फॉर जस्टिस’ के साथ उसके संबंध सामने आए।

उन्होंने सरकार पर सिख युवकों को बलि का बकरा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इस प्रसंग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि सिख युवकों में सरकारों द्वारा भेदभाव और ज्यादतियों के खिलाफ काफी असंतोष पनपा है, लेकिन बड़ी ताक़तें ऐसी भी हैं जो लगातार सिख युवाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर उन्हें दिशाहीन और बलि का बकरा बनाने के अवसरों की ताक में रहती हैं।”

इसके बाद 20 मार्च 2023 को धामी ने एक और बयान जारी किया। इसमें उन्होंने कहा, “बिना किसी आरोप के मनगढ़ंत कहानियाँ बनाकर युवकों को गिरफ्तार करना राज्य के हित में नहीं है। पंजाब ने कई कालखंड देखे हैं और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य की वर्तमान सरकार ने स्थिति में एक और अध्याय जोड़ दिया है।” उन्होंने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया।

श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने 21 मार्च 2023 को कहा, “ऐसा लग रहा है कि सरकार जनता के बीच अनावश्यक दहशत पैदा कर रही है। इंटरनेट ठप है और इस वजह से लोगों के बीच गलत सूचनाएँ फैल रही हैं। लोगों तक सही जानकारी नहीं पहुँच रही है। इसी तरह का दुस्साहस तत्कालीन सरकार ने तीन दशक पहले किया था। सिखों और देश के बाकी हिस्सों ने इसके प्रभावों का सामना किया। सिखों की छवि खराब करने, पंजाब को नुकसान पहुँचाने और राजनीतिक फायदे के लिए इसी तरह की योजना चलाई जा रही है। 16-17 साल की उम्र के सिख युवाओं को अवैध रूप से हिरासत में लिया जा रहा है।”

बता दें कि अमृतपाल और उसके समर्थकों को लेकर लोगों में गलत सूचनाएँ प्रसारित की जा रही थीं। इसको ध्यान में रखते हुए और आम लोगों में किसी तरह की दहशत पैदा ना हो, सरकार ने इंटरनेट सेवा पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। हालाँकि, हरप्रीत सिंह ने इस कदम की आलोचना की।

उन्होंने कहा, “पंजाब को स्थिर करना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक सीमावर्ती राज्य है। अगर वह [सरकार] राज्य को स्थिर करना चाहती है तो उसे सिखों के साथ बैठकर बात करनी होगी। उन्होंने सिखों की समस्याओं का समाधान किया है। अगर सरकार इस तरह का आतंक पैदा करती रही तो राज्य और देश शांतिपूर्ण नहीं रह सकता। सिख युवाओं, खासकर जो युवा के खिलाफ कार्रवाई बंद होनी चाहिए।”

यूपी का वह SDO बर्खास्त जिसके लिए ‘गुरु’ था ओसामा बिन लादेन, ऑफिस में फोटो लगा आतंकी सरगना को बताया था ‘बेस्ट इंजीनियर’

उत्तर प्रदेश पाॅवर काॅरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने उस अधिकारी को बर्खास्त कर दिया है, जिसने आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन को अपन ‘गुरु’ बताया था। बिजली विभाग में SDO रहे रवींद्र प्रकाश गौतम ने अपने दफ्तर में अल कायदा सरगना की तस्वीर लगा रखी थी। उसे ‘बेस्ट इंजीनियर’ बताया करता था। जून 2022 में यह मामला प्रकाश में आने का बाद गौतम को सस्पेंड कर जाँच शुरू की गई थी। जाँच में आरोप सही पाए गए। अपने बचाव में गौतम ने अभिव्यक्ति की आज़ादी का हवाला देते हुए अपने सीनियर अधिकारियों से अभद्रता भी की थी।

जून 2022 में जब यह मामला सामने आया तब रवींद्र गौतम यूपी पावर कारपोरेशन में फर्रुखाबाद जिले के उपखंड नवाबगंज में SDO के तौर पर तैनात था। उसने ऑफिस में अल कायदा सरगना लादेन की फोटो लगा रखी थी। मामले ने तूल पकड़ा तो गौतम ने माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया और अपनी करतूत का बचाव करता रहा। इसे देखते हुए दक्षिणांचल विद्युत् निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमित किशोर ने उसे सस्पेंड कर दिया। साथ ही विभाग द्वारा मामले की जाँच शुरू की गई।

जून 2022 में SDO का निलंबन पत्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जाँच के दौरान रवींद्र गौतम ने MD से अश्लील और गंदी बात पत्र के माध्यम से की। इस दौरान अपनी हरकत को सही साबित करने पर तुला रहा। अभिव्यक्ति की आज़ादी के तहत अपनी करतूत को सही ठहराने की कोशिश की। साथ ही नाथूराम गोडसे द्वारा की गाँधी की हत्या करने और देश में गोडसे को मानने वालों के रहने का भी हवाला दिया।

गौतम ने शिकायत दर्ज कराते हुए यह भी कहा कि उसे ओसामा और अन्य महापुरुषों की फोटो लगाने की अनुमति माँगने के बाद भी विभाग ने नहीं दी थी। बकौल गौतम साल 2011 में उसकी पहली नियुक्ति के दौरान ही अमेरिका में 9/11 की घटना हुई थी जो उसके दिमाग से कभी मिटने वाली नहीं है। सीनियर अधिकारियों ने उसके जवाब को संतोषजनक नहीं पाया। जाँच के दौरान उस पर लगे आरोपों को भी सही पाया गया। इसे देखते हुए आप उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।

ईसाई-इस्लामी ताकतों ने चलाया देवी मंदिरों को मिट्टी में मिलाने का अभियान, भारत इकलौती संस्कृति जिसने स्त्री पूजा को सँभाल कर रखा: नवरात्रि और इसका रहस्य

नवरात्रि अर्थात स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का पर्व, पारम्परिक रूप से देवी की पूजा करने वाली संस्कृतियाँ इस बात से पूरी तरह अवगत थीं कि अस्तित्व में बहुत कुछ ऐसा है, जिसे कभी समझा नहीं जा सकता। आप उसका आनंद उठा सकते हैं, उसकी सुंदरता का उत्सव मना सकते हैं, मगर कभी उसे समझ नहीं सकते। कहा जाता है कि जीवन एक रहस्य है, ये रहस्य इसलिए भी है कि हमें परिणाम तो दिखता है लेकिन कारण लुप्त है। शायद जीवन हमेशा रहस्य ही रहे, जब तक हम खुद इस खोज के साधक न हो। सनातन सदैव धर्म और अध्यात्म की इसी सतत खोज की परम्परा का वाहक है।

या देवी सर्वभूतेषु…. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: … सनातन परम्परा जिनकी रगों में बहता है, ऐसे आदि गुणों के वाहक हिन्दुओं का नववर्ष चैत्र नवरात्रि, चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ और रामनवमी को इसका समापन होता है। यह त्योहार हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुत लोकप्रिय है। महाराष्ट्र राज्य में यह “गुड़ी पड़वा” के साथ शुरू होती है, जबकि आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों में, यह उत्सव “उगादी” से शुरू होता है।

एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीनों में चार बार नवरात्र आते हैं, लेकिन चैत्र और आश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं। यह समय, आदि देवी माँ भगवती की आराधना और स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का उत्सव मनाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। नवरात्र वह समय है, जब दोनों ऋतुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियाँ सतत ऊर्जा के रूप में मानवता का कल्याण करती हैं। बात करें धर्म ग्रंथों, पुराणों की तो उसमें चैत्र नवरात्र का समय सृजन और स्त्री शक्ति के उत्सव का समय है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रकृति में इस समय हर तरफ नए जीवन और एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से जनमानस में भी एक नई उर्जा का संचार हो रहा होता है। लहलहाती फसलों से उम्मीदें जुड़ी होती हैं।

नवरात्रि क्या है? मनाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? क्यों है ये आदि सनातन परम्परा का वाहक? कुछ तो होगा इस उत्सव धर्मिता के पीछे का रहस्य? आइए इन सब पर बातें करते हैं। पहली बात सनातन परम्परा में जीवन का रहस्य यही है कि गंभीर न होते हुए भी पूरी तरह शामिल होना, जीवन के हर क्षण का उत्सव मनाना।

नवरात्रि का उत्सव ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित है। दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-शक्ति यानी स्त्रैण के तीन आयामों की प्रतीक हैं। वे धरती, सूर्य और चंद्रमा या तमस (जड़ता), रजस (सक्रियता या जोश) और सत्व (परे जाना, ज्ञान, शुद्धता) की प्रतीक हैं।

तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का मतलब है सक्रियता और जोश। सत्व एक तरह से सीमाओं को तोडक़र विलीन होना है, पिघलकर समा जाना है। इन तीन खगोलीय पिंडों से हमारे शरीर की रचना का बहुत गहरा संबंध है- पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा। इन तीन गुणों को इन तीन पिंडों से भी जोड़ कर देखा जाता है। धरती माँ को तमस माना गया है, सूर्य रजस है और चंद्रमा सत्व। नवरात्रि के पहले तीन दिन तमस से जुड़े होते हैं। इसके बाद के दिन रजस से, और नवरात्रि के अंतिम दिन सत्व से जुड़े होते हैं।

जो लोग शक्ति, अमरता, क्षमता या सृजन की इच्छा रखते हैं, वे स्त्रैण के उन रूपों की आराधना करते हैं, जिन्हें तमस कहा जाता है, जैसे काली या धरती माँ अर्थात सृजन का आदिस्रोत प्रकृति। सद्गुरु कहते हैं, जो लोग धन-दौलत, जोश, उत्साह, जीवन और भौतिक दुनिया की तमाम दूसरी सौगातों की इच्छा करते हैं, वे स्वाभाविक रूप से स्त्रैण के उस रूप की ओर आकर्षित होते हैं, जिसे लक्ष्मी या सूर्य के रूप में जाना जाता है। जो लोग ज्ञान, बोध चाहते हैं और नश्वर शरीर की सीमाओं के पार जाना चाहते हैं, वे स्त्रैण के सत्व रूप की आराधना करते हैं। सरस्वती या चंद्रमा उस शक्ति के प्रतीक हैं।

तमस धरती की प्रकृति है जो सबको जन्म देने वाली है। हम जो समय गर्भ में बिताते हैं, वह समय तामसी प्रकृति का होता है। उस समय हम लगभग निष्क्रिय स्थिति में होते हुए भी विकसित हो रहे होते हैं। इसलिए तमस धरती और मनुष्यता के जन्म की प्रकृति है। हम सब सृजन के इस आयाम का अनुभव कर सकते हैं। हमारा पूरा जीवन इस पृथ्वी की देन है। सनातन में पृथ्वी के इस आयाम से एकाकार होने को महत्वपूर्ण साधना के रूप में विकसित किया गया है। वैसे भी हम सब पृथ्वी के एक अंश हैं। प्रकृति जब चाहती है, एक शरीर के रूप में अपने गर्भ में सृजन कर हमें नया जीवन दे देती है और जब वह चाहती है, उस शरीर को वापस खाक कर अपने भीतर समा लेती है।

सद्गुरु कहते हैं, नवरात्री के अवसर पर इन तीनों आयामों में आप खुद को जिस तरह से शामिल करेंगे, वह आपके जीवन को एक नई दिशा देगा। अगर आप खुद को तमस की ओर ले जाते हैं, तो आप एक तरीके से शक्तिशाली होंगे। अगर आप रजस पर ध्यान देते हैं, तो आप दूसरी तरह से शक्तिशाली होंगे। लेकिन अगर आप सत्व की ओर जाते हैं, तो आप बिल्कुल अलग रूप में शक्तिशाली होंगे। लेकिन यदि आप इन सब के परे चले जाते हैं, तो बात शक्ति की नहीं रह जाएगी, फिर आप मोक्ष की ओर बढ़ेंगे।

कहते हैं, जो पूर्ण जड़ता है, वह एक सक्रिय रजस बन सकता है। रजस पुन: जड़ता बन जाता है। यह परे भी जा सकता है और वापस उसी तमस की ओर भी जा सकता है। दुर्गा से लक्ष्मी, लक्ष्मी से दुर्गा, सरस्वती कभी नहीं हो पाई। इसका मतलब है कि हम जीवन और मृत्यु के चक्र में फँसे हैं। उनसे परे जाना अभी बाकी है।

यह सिर्फ प्रतीकात्मक ही नहीं है, बल्कि ऊर्जा के स्तर पर भी सत्य है। इंसान के रूप में में हम धरती से निकलते हैं और सक्रिय होते हैं। कुछ समय बाद, हम फिर से जड़ता की स्थिति में चले जाते हैं। सिर्फ व्यक्ति के रूप में हमारे साथ ऐसा नहीं होता, बल्कि तारामंडलों और पूरे ब्रह्मांड के साथ ऐसा हो रहा है। ब्रह्मांड जड़ता की स्थिति से निकल कर सक्रिय होता है और फिर जड़ता की अवस्था में चला जाता है। ध्यान रहे, बस हमारे अंदर इस चक्र को तोड़ने की क्षमता है। इंसान के जीवन और खुशहाली के लिए देवी के पहले दो आयामों की जरूरत होती है। तीसरा परे जाने की इच्छा है। कहते हैं, अगर आपको सरस्वती को अपने भीतर उतारना है, तो आपको प्रयास करना होगा। वरना आप उन तक कभी नहीं पहुँच सकते।

सनातन परम्परा में ही स्त्री शक्ति को सर्वाधिक महत्व हासिल है। स्त्री शक्ति की पूजा धरती पर पूजा का सबसे प्राचीन रूप है। स्त्री सृजन का पर्याय है। सिर्फ भारत में ही नहीं, अपितु यूरोप, अरेबिया और अफ्रीका के बड़े हिस्सों में भी कभी स्त्री शक्ति की पूजा होती थी। वहाँ देवियाँ होती थीं। दुर्भाग्यवश, पश्चिम में मूर्तिपूजा और एक से ज्यादा देवों की पूजा के सभी नामोनिशान मिटाने के लिए देवी मंदिरों को मिट्टी में मिला दिया गया। दुनिया के बाकी हिस्सों में भी यही हुआ।

धर्म न्यायालयों और धर्मयुद्धों का मुख्य मकसद मूर्ति पूजा की संस्कृति को मिटाना था। मूर्तिपूजा का मतलब देवी पूजा ही था। जो लोग देवी पूजा करते थे, उन्हें कुछ हद तक तंत्र-मंत्र विद्या में महारत हासिल थी। कामरूप कामाख्या मंदिर आज भी अपने तंत्र साधना के लिए ही विख्यात है। चूँकि, वे तंत्र-मंत्र जानते थे, इसलिए स्वाभाविक था कि आम लोग उनके तरीके समझ नहीं पाते थे। कहते हैं, उन संस्कृतियों में हमेशा से यह समझ थी कि अस्तित्व में ऐसा बहुत कुछ है, जिसे साधारण लोग आसानी से नहीं समझ सकते और इसमें कोई बुराई नहीं है। कोई भी उसे समझे बिना भी उसके लाभ उठा सकते हैं, जो हर किसी चीज के लिए हमेशा से सच रहा है।

मगर जब एकेश्वरवादी मज़हब यहूदी, इसाई और इस्लाम अपना दायरा फैलाने लगे, तो उन्होंने इसे एक संगठित तरीके से उखाड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने सभी देवी मंदिरों को तोड़ कर मिट्टी में मिला दिया।

दुनिया में हर कहीं पूजा का सबसे बुनियादी रूप देवी पूजा या कहें स्त्री शक्ति की पूजा ही रही है। भारत इकलौती ऐसी संस्कृति है जिसने अब भी उसे संभाल कर रखा है। सनातन परम्परा ने स्त्री शक्ति की पूजा को जारी रखा है। इसी संस्कृति ने हमें अपनी जरूरतों के मुताबिक अपनी देवियाँ खुद गढ़ने की आजादी भी दी। प्राण प्रतिष्ठा के विज्ञान ने हर गाँव को अपनी विशिष्ट स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपना मंदिर बनाने में समर्थ बनाया। अगम शास्त्र में इसकी पूरी विधि है। धर्म को ज़्यादा संजीदगी से सहेजा है तो वह भारत का दक्षिण का हिस्सा है। दक्षिण भारत के हर गाँव में आपको आज भी अम्मन (अम्मा) या देवी के मंदिर मिल जाएँगे। इसके अलावा शिव की नगरी काशी, विंध्याचल से लेकर शायद ही भारत का ऐसा कोई क्षेत्र हो जहाँ देवी आराध्य न हो।

बेशक, आजकल पुरुष शक्ति समाज में सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि हमने अपने जीवन में गुजर-बसर की प्रक्रिया को सबसे अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। आज सौंदर्य या नृत्य-संगीत, प्रेम, दिव्यता या ध्यान की बजाय अर्थशास्त्र हमारे जीवन की प्रेरक शक्ति बन गया है। जब अर्थशास्त्र हावी हो जाता है और जीवन के गूढ़ तथा सूक्ष्म पहलुओं को अनदेखा कर दिया जाता है, तो पौरुष कुदरती तौर पर प्रभावी हो जाता है। अगर स्त्री शक्ति नष्ट हो गई, तो जीवन की सभी करुणामयी, सौम्य, सहज और पोषणकारी प्रवृत्तियाँ लुप्त हो जाएँगी। (हालाँकि, स्त्रीत्व को इन चार शब्दों में समेटा नहीं जा सकता।) जीवन की अग्नि हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी। यह बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

आज जब हम अपनी परम्परा और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं तो ऐसे समय में उसके संरक्षण और संवहन की जिम्मेदारी उन सब पर है जिनकी रगों में आज भी सनातन संस्कृति बह रही है। आज जब हम आधुनिक वामपंथी शिक्षा की वजह से नकार की जड़ता के शिकार हो चुके हैं। इसी शिक्षा का एक दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा यह भी है कि हम अपनी तर्कशक्ति पर खरा न उतरने वाली हर चीज को नष्ट कर देना चाहते हैं। जबकि हमारी तर्क की सीमा सनातन की सीमा नहीं बल्कि हमारी खुद के अज्ञान की सीमा है।

गुरुग्राम का कैफे, ढोल-गिटार लिए युवाओं की आध्यात्मिक जैमिंग: संगीतमय हनुमान चालीसा के पाठ का वीडियो, लोग बोले – अब नहीं दिखेंगे भूत-पिशाच

हरियाणा के गुरुग्राम में एक कैफे के बाहर कुछ युवकों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में युवाओं के एक समूह को ढोल और गिटार आदि के साथ संगीतमय अंदाज़ में हनुमान चालीसा का पाठ करते सुना जा सकता है। आस-पास कई लोग भी जमा दिखाई दे रहे हैं जो बड़े ध्यान से इसे सुन रहे हैं। कुछ लोग तो युवाओं के सुर में सुर मिलाते दिखाई दे रहे। सोशल मीडिया पर कई नेटीजेंस इन युवाओं के प्रयास की तारीफ कर रहे हैं और इसे एक अच्छी पहल बता रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुग्राम के जिस कैफे में हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा है, उसका नाम डिजायर बेकरी एंड कैफे़ है। यह गुरुग्राम के सेक्टर 22 की मेन मार्किट में है। दावा किया जा रहा है कि यहाँ हर मंगलवार को स्प्रिचुअल जैमिंग करने वाले युवा हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। कुछ ही समय में यह पाठ मार्किट में आने वाले लोगों का प्रमुख आकर्षण बन चुका है।

नेटीजेंस ने की तारीफ

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अधिकतर नेटीजेंस ने इस प्रयास की तारीफ की है। नेशनलिस्ट ने इसी प्रकार से हनुमान चालीसा के पाठ की देश के अन्य तमाम कैफे में भी माँग की। जे पी चड्ढा ने इसी प्रकार का कैफे अपने भी शहर में होने की इच्छा जताई। अभिजीत ने इसे बेहद सराहनीय कहा और अंजलि ने हनुमान चालीसा पढ़ रहे युवाओं को भगवान राम द्वारा आशीर्वाद की कामना की। वैभव ने इस वीडियो को देख कर अपने कमेंट में ‘जय हनुमान’ लिखा।

ट्विटर कमेंट, साभार- @ANI

इन सभी के अतिरिक्त अवधेश ने इस वीडियो को अपने व्हाट्सएप पर शेयर करने की बात कही। शेखर ने हिन्दुओं के जागने और रागिनी ने देश बदलने के कमेंट किए। शुभम ने बेहद ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा, “इस चलचित्र में भूत-पिशाच नहीं दिखाई देंगे।” विशाल वर्मा ने वीडियो देख कर ट्विटर पर जय श्री राम लिखा।

ट्विटर कमेंट, चित्र साभार- @ANI

इनके अलावा कई अन्य नेटीजेंस ने भी अलग-अलग हैंडलों से इस वीडियो को शेयर किया है और युवाओं के प्रयासों की तारीफ की है।

दिल्ली में मोदी विरोधी बेनामी पोस्टर, 36 FIR-6 गिरफ्तारः AAP दफ्तर से निकले वैन में मिले पोस्टर, 50 हजार के दिए गए थे ऑर्डर

दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में आपत्तिजनक पोस्टर लगाने के मामले में पुलिस ने करीब 36 एफआईआर दर्ज किए हैं। अब तक 6 की गिरफ्तारी हुई है। ‘मोदी हटाओ, देश बचाओ लिखे’ ये पोस्टर रविवार (19 मार्च 2023) से लेकर सोमवार की सुबह तक दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए थे। इन पर इसे मुद्रित करने वाले का नाम तक नहीं था।

आम आदमी पार्टी (AAP) के दफ्तर से निकले एक वैन को पकड़ा गया है, जिसमें इस तरह के पोस्टर मिलने की बात कही जा रही है। यह बात भी सामने आई है कि करीब 50 हजार पोस्टर प्रिंट करने के ऑर्डर दिए गए थे। शुरुआत में पीएम मोदी विरोधी पोस्टर लगाए जाने को लेकर 100 एफआईआर दर्ज किए जाने की बात कही जा रही थी। लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो 100 एफआईआर दर्ज हुए हैं उसमें 36 पीएम मोदी विरोधी पोस्टर को लेकर हैं। शेष एफआईआर अन्य पोस्टरों से जुड़े हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार की रात दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में ‘मोदी हटाओ, देश बचाओ’ लिखे पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों को न सिर्फ सार्वजानिक स्थानों और सरकारी भवनों पर चिपकाया गया था, बल्कि कई प्राइवेट प्रॉपर्टी पर भी लगाया गया था। पोस्टरों में प्रिंटिंग प्रेस का नाम भी नहीं था। इसकी जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने लगभग 2 हजार पोस्टरों को अलग-अलग हिस्सों से हटावाया। प्रिंटिंग प्रेस अधिनियम के साथ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट के तहत 100 FIR दर्ज कर दिल्ली पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

जाँच के दौरान पोस्टर छापने वाले एक प्रिंटिंग प्रेस का पता दिल्ली के नारायणा में मिला। पुलिस ने प्रिंटिंग प्रेस के मालिक को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि उसे ऐसे 50 हजार पोस्टर छापने का ऑर्डर दिया गया था। पुलिस ने प्रिंटिंग प्रेस में मिले कुछ पोस्टरों को जब्त कर लिया है। इसी दौरान आम आदमी पार्टी ऑफिस के पास एक वाहन को पुलिस ने रोका। यह गाड़ी आम आदमी पार्टी ऑफिस से निकलकर डीडीयू मार्ग की तरफ बढ़ रही थी। तलाशी के दौरान इसमें लगभग 10 हजार पोस्टर मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। गाड़ी मालिक विष्णु और ड्राइवर पप्पू को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक पोस्टरों को छापने और चिपकाने के लिए 2 अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस को ठेका दिया गया था। पुलिस ने दूसरे प्रिंटिंग प्रेस के मालिक को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि पोस्टरों को किसके इशारे पर छापा और चिपकाया जा रहा था। गौरतलब है कि नियमानुसार पोस्टर पर प्रिंट करने वाले प्रेस की जानकारी देना अनिवार्य होता है। साथ ही बिना अनुमति पब्लिक या सरकारी सम्पत्ति पर पोस्टर चिपकाना भी कानूनन जुर्म है।