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‘भारत को कम मत आँकना’: अडानी विवाद के बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया को आनंद महिंद्रा की चेतावनी, कहा – ऐसे कई दौर देखे हैं

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा सोशल मीडिया काफी सक्रिय रहते हैं। वह अक्सर वायरल वीडियो और फोटोज को शेयर करते दिखाई देते हैं। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में आई गिरावट के बाद आनंद महिंद्रा ने ग्लोबल मीडिया को भारत को कम न समझने की चेतावनी दी है।

आनंद महिंद्रा ने ट्वीट कर कहा है, “ग्लोबल मीडिया अनुमान लगा रहा है कि क्या व्यापार क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियाँ वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की भारत की महत्वाकांक्षाओं को नाकाम कर देंगी। मैंने भूकंप, सूखा, मंदी, युद्ध और आतंकवादी हमलों के कई दौर देखे हैं। मैं केवल यही कहना चाहता हूँ कि भारत को कभी भी कम समझो।”

दरअसल, गत 24 जनवरी को हिंडनबर्ग ने रिपोर्ट आने के बाद से अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी से गिरावट देखी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में सामूहिक रूप से 50 फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई है। इससे अडानी ग्रुप को अब तक 10 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

बता दें कि हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह पर कई आरोप लगाए थे। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, अनऑथोराइज्ड ट्रेडिंग, वित्तीय गड़बड़ी, भारी-भरकम लोन सहित कई गंभीर आरोप थे, जो किसी कंपनी के लिए घातक बताए गए थे। बाद में अडानी समूह ने अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया था। कंपनी ने 413 पन्नों के जवाब में हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठ करार दिया था। कंपनी ने कहा था कि ये आरोप भारत और यहाँ की कंपनियों तथा देश के विकास पर सुनियोजित हमला है।

अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में इस कदर गिरावट देखी गई है कि लगातार शॉर्ट सर्किट झेलने के बाद शेयर साल के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गए हैं। शुक्रवार (फरवरी, 2023) को अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर में 35 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।

पाकिस्तान ने Wikipedia को किया बैन, ‘ईशनिंदा’ वाले कंटेंट हटाने को राजी नहीं हुई कंपनी

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान कथित ईशनिंदा से संबंधित कंटेंट हटाने से इनकार करने पर विकिपीडिया (Wikipedia) को ब्लॉक करने का फैसला किया है। पाकिस्तान का कहना है कि विकिपीडिया को तभी बहाल किया जाएगा, जब वह ईशनिंदा (Blasphemy) से संबंधित कंटेंट को हटाएगा।

इससे पहले, पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (PTA) ने कंटेंट को हटाने के लिए 48 घंटे का समय देते हुए इस ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया की पहुँच को सीमित कर दिया था। पाकिस्तान ने विकिपीडिया को 1 फरवरी 2023 को चेतावनी दी थी। हालाँकि, उसने यह नहीं बताया कि पाकिस्तान किस कंटेंट को ईशनिंदा मानता है।

पाकिस्तानी ऑनलाइन मीडिया वेबसाइट द न्यूज (The News) के मुताबिक, एक कानून और अदालती आदेश के तहत विकिपीडिया को नोटिस जारी किया गया था और उससे ईशनिंदा से संबंधित सामग्री को ब्लॉक करने/हटाने के लिए कहा गया था। हालाँकि, विकिपीडिया ने इस आदेश का पालन नहीं किया।

PTA के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने विकिपीडिया को सुनवाई के लिए उपस्थित होने या ‘ईशनिंदा’ सामग्री को हटाने का अवसर दिया था, लेकिन उसने दोनों में से किसी पर भी ध्यान नहीं दिया। इसलिए PTA ने उसे ब्लॉक करने का फैसला लिया।

साल 2012 में पाकिस्तान सरकार ने इस्लाम विरोधी एक फिल्म के 700 से अधिक YouTube लिंक को ब्लॉक कर दिया था। इस फिल्म को लेकर कई देशों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। वहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें ब्लॉक करने का आदेश दिया था।

बता दें कि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और महँगाई के कारण वहाँ खाद्यान्नों की कीमतें आसमान छू रही हैं। आटा-चावल खरीदना एक आम पाकिस्तानी के लिए मुश्किल हो गया है। इसके कारण पूरे देश में अराजकता फैल गई है। जगह-जगह दंगे और लूट-मार मची है।

इस बीच लोगों का ध्यान हटाने के लिए वहाँ की संसद ने जनवरी 2023 में वहाँ की क्रूर ईशनिंदा कानून को और कड़ा कर दिया। इस कानून का इस्तेमाल वहाँ अल्पसंख्यकों को सताने और धर्मांतरण के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं, आम मुस्लिम भी व्यक्तिगत झगड़ों से निपटने के लिए इस कानून का खूब इस्तेमाल करता है।

ईशनिंदा कानून में इस्लाम, उसके पैगंबर मुहम्मद और कुरान का अपमान करने के दोषी को मौत की सजा का प्रावधान है। अब इस कानून में बदलाव करके उन लोगों को भी दंडित करने का प्रावधान किया जा सकता है, जो उनसे जुड़े लोगों का अपमान करने के दोषी पाए जाते हैं।

काशी के अस्सी घाट पर स्कूल ड्रेस में खुलेआम सुट्टा मारती दिखीं छात्राएँ, टोकने पर उलटे उलझ पड़ीं: पर्यटन स्थल पर पार्टी से बिफरे लोग

वाराणसी के मशहूर अस्सी घाट का एक वीडियो सोशल मीडिया (Social video) पर वायरल हो गया है। वीडियो में चार-पाँच छात्राएँ यहां सीढ़ियों पर सिगरेट का कश लगाते देखी जा सकती हैं। किसी ने इस वीडियो को रिकॉर्ड कर लिया और इसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। हालाँकि, वीडियो दूर से रिकॉर्ड किया गया है। इसीलिए, इसमें छात्राओं को चेहरा साफ तौर नजर नहीं आ रहा है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा, “प्रशासन ने घाट पर सिगरेट पीने पर रोक लगाई है। माता पिता को समझाओ, उसके बाद उसे वीडियो भेजो।”

एक रिपोर्ट के अनुसार, जब वहाँ कुछ लोगों ने छात्राओं को ऐसा करने से मना किया तो वे समझाने वाले लोगों से ही उलझ पड़ी। दरअसल, ये छात्राएँ फेयरवेल पार्टी मनाने अस्सी घाट पहुँची थी और काफी देर तक बड़ी ही बेशर्मी से सिगरेट का कश लगाती रहीं। उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक जगहों और पर्यटन स्थलों पर धूम्रपान करने पर ‘तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम (सीओटीपीए)’ 2003 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

छात्राओं के इस व्यवहार की लोग काफी आलोचना कर रहे हैं। लोग स्कूल प्रबंधन के साथ माता-पिता की परवरिश पर भी सवाल उठा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भले ही छात्राओं का चेहरा वीडियो में स्पष्ट तौर पर नहीं दिख रहा है, लेकिन स्कूल ड्रेस से पता चलता है कि ये छात्राएँ लहरतारा इलाके में स्थित एक स्कूल में पढ़ती हैं।

हालाँकि, स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्राएँ इतनी दूर फेयरवेल मनाने नहीं जा सकती है। प्रबंधन ने आगे कहा कि ड्रेस देखकर तो यही लग रहा है कि छात्राएँ उसी के स्कूल की है। छात्राओं की पहचान कराई जा रही है। पहचान होने के बाद इनपर कार्रवाई की जाएगी। 

‘ये मुस्लिम विरोधी कार्रवाई’: असम में बाल विवाह के खिलाफ एक्शन से भड़के ओवैसी, अब तक 2200 गिरफ्तार – इनमें सैकड़ों मौलवी-पुजारी

असम में बाल विवाह के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन जारी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में बाल विवाह के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई है। मामले में अब तक 4 हजार से ज्यादा केस रजिस्टर किए गए हैं तो वहीं 2200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और एआईयूडीएफ चीफ मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने राज्य सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

बाल विवाह के खिलाफ असम में गुवाहाटी, विश्वनाथ, गोलपारा, करीमगंज, जोरहाट,मोरी गाँव, बोंगाईगाँव जैसे इलाकों में कार्रवाई की गई है। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने जानकारी दी है कि अब तक पूरे प्रदेश में बाल विवाह से संबंधित 4074 केस दर्ज किए गए हैं। कुल 8134 आरोपितों की पहचान की गई है। शनिवार (04 फरवरी, 2023) सुबह तक 2211 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और हमें लगभग 3500 लोगों को गिरफ्तार करना होगा।

मीडिया रिपोर्टों में राज्य सरकार की इस कार्रवाई को बाल विवाह के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा एक्शन कहा जा रहा है। कार्रवाई के तहत दूल्हे और उसके परिजनों के अलावा पंडितों और मौलवियों को भी गिरफ्तार किया जा रहा है।

मुस्लिम लीडर कर रहे हैं विरोध

असम सरकार के एक्शन पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार के फैसले का विरोध किया है। ओवैसी ने कहा कि बीजेपी की सरकार मुस्लिमों के खिलाफ है। ओवैसी ने गिरफ्तारियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आप लड़कों को जेल भेज देंगे तो लड़कियों का क्या होगा? उन्होंने सीएम सरमा से पूछा कि आपने असम में अब तक कितने स्कूल खोले हैं।

ओवैसी के अलावा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के चीफ मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने भी बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। बदरुद्दीन अजमल ने भाजपा सरकार पर लोगों को धर्म के आधार पर बाँटने का आरोप लगाया। अजमल पुलिस की कार्रवाई को मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा कि चुनावों को देखते हुए भाजपा शासित राज्यों में कुछ न कुछ गुल खिलाए जाएँगे। अजमल ने यहाँ तक कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों में ज्यादातर मुस्लिम होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री पर जानबूझकर मुस्लिमों को परेशान करने का आरोप लगाया।

सीएम सरमा ने बाल विवाह को जघन्य अपराध करार दिया

बता दें कि बाल विवाह को लेकर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कई बार फिक्र जता चुके हैं। 23 जनवरी, 2023 को असम कैबिनेट ने बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर फैसला लिया था। मुख्यमंत्री सरमा ने बाल विवाह को जघन्य अपराध करार दिया था। इसके साथ ही कानून में बड़ा बदलाव करते हुए 14 साल से कम उम्र में लड़की की शादी करने के मामले पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences-POCSO) एक्ट लगाने को मंजूरी दी गई। कैबिनेट की मंजूरी के बाद से ही पुलिस एक्शन में है।

टूरिस्ट वीसा पर भारत आया पाकिस्तानी मूल का ब्रिटिश मुस्लिम प्रचारक, धार्मिक गतिविधियों में ले रहा भाग: AMU भी गया, गृह मंत्रालय में शिकायत

कानूनी कार्यकर्ता समूह ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ (LRPF) ने एक विदेशी इस्लामी उपदेशक मुहम्मद साकिब बिन इकबाल शमी उर्फ साकिब इकबाल शमी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शमी पर्यटक वीसा पर भारत आकर कई शहरों में आयोजित इस्लामी मजहबी सम्मेलनों में शामिल हुए थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) द्वारा आयोजित ऐसे ही एक कार्यक्रम में भी भाग लिया था।

संस्था ने गृह मंत्री अमित शाह और उनके कार्यालय, यूके में भारत के उच्चायोग, यूपी और तेलंगाना के डीजीपी और वारंगल सीपी को टैग करते हुए ट्वीट किया। अपने ट्वीट में फोरम ने लिखा, “पाकिस्तान से जुड़े यूके स्थित इस्लामी उपदेशक साकिब इकबाल शमी द्वारा भारतीय वीसा प्रावधानों का घोर उल्लंघन और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया गया। @AmitShah जी, @HMOIndia @IndiainUK, @cpwarangal1 @TelanganaDGP @dgpup और इमिग्रेशन से उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की शिकायत दर्ज की गई है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी मूल ब्रिटिश उपदेशक टूरिस्ट वीसा पर भारत का दौरा कर रहे हैं और विभिन्न शहरों में इस्लामी मजहबी आयोजन कर रहे हैं। अपने कार्यक्रम के एक भाग के रूप में वह 4 फरवरी 2023 को मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में वारंगल के आजम जाही मिल मैदान में आयोजित एक विशाल धार्मिक आयोजन में भाग लेंगे।

उन्होंने 2 फरवरी 2023 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एक सामूहिक इस्लामी धार्मिक आयोजन में भाग लिया। साकिब बिन इकबाल शमी ने AMU में आयोजित कार्यक्रम की झलकियों को ट्विटर पर साझा करते हुए इसे ‘सबसे बड़ी राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और इस्लामी सभा’ बताया।

साकिब कट्टर इस्लामी उपदेशक हैं। YouTube पर इनके 776 हजार फॉलोअर हैं। वे कंज़ उल हुदा नामक एक संगठन का नेतृत्व करते हैं। इसके जरिए वे नियमित रूप से मजहबी तकरीर करते हैं और दावा या इस्लामिक धर्मांतरण में संलग्न रहते हैं। साकिब का YouTube चैनल गैर-मुस्लिमों को इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर करने वाले वीडियो से अटा पड़ा है।

फोरम ने अपनी शिकायत में कहा कि साकिब भारत की आंतरिक मामलों में दखल दे रहे हैं। गृह मंत्रालय को भेजी गई शिकायत में LRPF ने कहा, “उपरोक्त परिस्थितियों और सबसे गंभीर मामले को देखते हुए, हम आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि वारंगल में होने वाले उनके कार्यक्रम को रोकने के लिए निवारक कदम उठाएँ और उनके और कार्यक्रम के प्रायोजकों/आयोजकों के खिलाफ विदेशी अधिनियम, 1946 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करें। हम भविष्य में भारत आने से रोकने के लिए उन्हें काली सूची में डालने का भी अनुरोध करते हैं।”

उल्लेखनीय है कि टूरिस्ट वीसा या किसी अन्य वीसा पर देश में आए विदेशियों के महजबी प्रचार में शामिल होना गैरकानूनी है। मिशनरियों के लिए, मिशनरी वीसा इस शर्त के साथ दिया जाता है कि मिशनरी कार्य में धर्मांतरण शामिल नहीं होगा। भारतीय वीसा नियमों के अनुसार, भारत उन प्रचारकों को वीजा नहीं देता है, जो भारत में धर्म प्रचार के लिए आना चाहते हैं। भारत में स्थित कोई संगठन भी उन्हें बुलाना चाहे तो उन्हें वीसा जारी नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि गृह मंत्रालय ने वर्ष 2020 में भारत में महजबी गतिविधियों में शामिल होकर वीसा शर्तों का उल्लंघन करने पर तबलीगी जमात के 960 विदेशी सदस्यों के टूरिस्ट वीसा को रद्द कर दिया था और उन्हें काली सूची में डाल दिया था।

इसके अलावा, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तबलीगी जमात के सदस्य मौजूद हैं, उनसे भी केंद्र ने विदेशी अधिनियम, 1946 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा था। इसमें निर्वासन के लिए $500 जुर्माना लेना भी शामिल है।

AMU में एक बार फिर गूँजा ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’, जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शन: BBC की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री को बताया सही

उत्तर प्रदेश की ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ में गणतंत्र दिवस के दिन इस्लामी नारे लगाने के कारण एक छात्र को निलंबित किया गया था। निलंबित छात्र के समर्थन में शुक्रवार (3 फरवरी, 2023) को जुमे की नमाज के बाद एक बार छात्रों ने इस्लामिक नारेबाजी की है। हंगामा कर रहे छात्र ‘नारा ए तकबीर’, और ‘अल्लाह हू अकबर’ जैसे नारे लगाते दिखाई दिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जुमे की नमाज के बाद इस्लामवादी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर वसीम अली को लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निलंबित छात्र को तत्काल प्रभाव से बहाल करने की माँग की गई।

दरअसल, गणतंत्र दिवस पर वाहिदुज्जमा नामक छात्र और एनसीसी कैडेट ने इस्लामिक नारे लगाए थे। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया था। इस निलंबन का विरोध करते हुए छात्रों ने न केवल नारेबाजी की। बल्कि एमएमयू के माहौल को बिगाड़ने की भी कोशिश की।

हालाँकि, इस मामले में पहले यह कहा गया था कि गणतंत्र दिवस पर सिर्फ एक छात्र ने ‘अल्लाह हू अकबर’ का नारा लगाया है। लेकिन बाद में ऐसे वीडियो सामने आए थे जिसमें कुछ अन्य एनसीसी कैडेट्स नारेबाजी कर रहे थे।

इसके अलावा, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जुमे की नमाज के बाद प्रॉक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को सही बताया गया है। इस ज्ञापन ने एएमयू प्रबंधन के उस दावे की पोल खोल कर रख दी है, जिसमें कहा गया था कि कैंपस में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के क्यूआर वाले पोस्टर छात्रों ने नहीं बल्कि बाहरी लोगों ने लगाए हैं।

दरअसल, गुरुवार (2 फरवरी, 2023) को खबर आई थी कि एएमयू कैंपस की दीवारों पर क्यूआर कोड वाले कई पोस्टर चिपकाए गए हैं। इन क्यूआर कोड को स्कैन कर छात्र बीबीसी की प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री अपने मोबाइल फोन पर देख सकते हैं। इस घटना का संज्ञान लेते हुए एएमयू प्रॉक्टर ने पोस्टरों को हटाने के आदेश जारी किया था। साथ ही कहा कि पोस्टर बाहरी लोगों द्वारा लगाए गए हैं। इसमें एएमयू के छात्र शामिल नहीं हैं।

‘कोई मारपीट नहीं हुई, हमारा खून ज़्यादा गर्म’: जिन कश्मीरियों के सामान फेंके जाने की खबर चला रहा मीडिया, उन्होंने कैमरे पर कबूला – UP पुलिस करती है सपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में ड्राई फ्रूट्स बेचने वाले कश्मीरियों के साथ कथित मारपीट करने और उनका सामान फेंकने की फर्जी खबरें गुरुवार (2 फरवरी, 2023) को कई मीडिया संस्थानों ने चलाई थी। वहीं इनके सपोर्ट में कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी ट्वीट कर प्रोपेगेंडा चलाने की कोशिश की थी। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने हालाँकि पहले ही सामान फेंके जाने जाने की बात का खंडन कर दिया है। ऑपइंडिया की टीम ने भी जब ग्राउंड जीरो पर जाकर पड़ताल की तो पता लगा कि कश्मीरियों ने झूठ फैलाया था। 

घटना को लेकर मोहम्मद नदीम सिद्दीकी ने 2 फरवरी, 2023 को ट्वीट किया था। इसमें एक मुस्लिम युवक कहता है, “हम पुल पर अपना माल बेच रहे थे और इतने में नगर निगम वाले आए और पुल पर माल को न बेचने के लिए कहने लगे। फिर कुछ युवक गाड़ी से आए और सामान उठाकर नीचे फेंक दिया। वे हमें गाली देने लगे। फिर हमने पुलिस को फोन किया और वे मौके पर पहुँचे।”

वहीं लखनऊ पुलिस ने सामान फेंके जाने का खंडन किया था। पुलिस ने ट्वीट कर कहा, “जब हमने मामले की जाँच की तो पता चला कि जनसंपर्क अनुभाग स्मारक समिति एलडीए के सुपरवाइजर दीपक सिंह 1090 चौराहे के पास मौजूद पुल पर साज-सज्जा के लिए साफ सफाई करवा रहे थे। इसी क्रम में ड्राइफ्रूट बेचने वाले को वहाँ से हटने के लिए कहा। इसका उन्होंने विरोध किया। वहीं ड्राइ फ्रूट फेंके जाने के संबंध में कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हो रहे हैं।”

वहीं ऑपइंडिया ने LDA (लखनऊ विकास प्राधिकरण) के अधिशाषी अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजिनियर) राज कुमार से बात की। उन्होंने कहा, “G 20 सम्मेलन आयोजित होने से पहले हम दिन रात एक कर के काम कर रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग हैं जो इस प्रकार की आधारहीन बातें कर के गलत माहौल पैदा करना चाहते हैं। कश्मीरियों या किसी के भी साथ किसी भी LDA स्टाफ ने गलत हरकत नहीं की है।”

दूसरी ओर इतने बवाल के बाद शनिवार (4 फरवरी 2023) को भी कश्मीरी फिर से वहाँ ड्राई फ्रूट बेचते नजर आए। कल तक जो कश्मीरी रो-रो कर मीडिया से बात कर रहे थे, शनिवार को जब ऑपइंडिया ने उनसे बात की तो मेहराब नाम के कश्मीरी ने कहा, “मारपीट का कोई मसला नहीं है। हम कश्मीरी हैं। हमारा खून ज्यादा गर्म है। हम बर्दाश्त नहीं कर पाते। वरना हमें कोई कुछ नहीं कहेगा।” वहीं वह आगे कहता है कि पुलिस का सपोर्ट हमें यहाँ खूब मिलता है।

उसने कहा कि पुलिस वाले हमारी यहाँ इज्जत करते हैं। वहीं कुलगाम के सोहेल ने भी दावा किया कि मारपीट की कोई घटना नहीं हुई है। वह दावा करता है कि केवल सामान उठाकर फेंका गया है। 

अमेरिका के आकाश पर चमकते ‘चायनीज चाँद’ ने बढ़ाई टेंशन: गुब्बारे के कारण रद्द हुआ US विदेश मंत्री का चीन दौरा, समझिए क्यों शूट भी नहीं कर पा रहे ‘अंकल सैम’

पहले अमेरिकी क्षेत्र और उसके बाद लैटिन अमेरिका में चीनी गुब्बारा देखे जाने के बाद एक बार फिर से अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है। यहाँ तक कि अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने अपना चीन का दौरा रद्द कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की तरफ से शुक्रवार (03 फरवरी, 2023) की रात बयान जारी कर दूसरे चीनी गुब्बारे की जानकारी दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार (01 फरवरी, 2023) को एक चीनी गुब्बारा अमेरिका के मोंटाना इलाके के ऊपर देखा गया था। अमेरिका का यह क्षेत्र संवेदनशील है। यहाँ अमेरिकी एयरफोर्स का बेस होने के साथ-साथ न्यूक्लियर मिसाइलें भी रखी हुई हैं। पेंटागन की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, गुब्बारे का आकार तीन बसों के बराबर है, जो 60 हजार फीट पर उड़ रहा है। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए इसे शूट करने का निर्णय नहीं लिया गया। पेंटागन इससे निपटने के उपाय तलाश रहा है। गुब्बारे की जाँच के लिए लड़ाकू विमानों को भी उड़ाया गया था।

दूसरे गुब्बारे के बारे में जानतारी देते हुए पेंटागन के प्रवक्ता पैट राइडर ने कहा कि हमें लैटिन अमेरिका के आसमान में एक गुब्बारे की जानकारी मिली है। हम इसे दूसरा चाइनीज जासूसी गुब्बारा मान रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जासूसी गुब्बारे देखे जाने के बाद पैदा हालात के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन का चीन दौरा रद्द कर दिया गया है। साथ ही चीनी गुब्बारे को देखते हुए अमेरिका ने सभी संवेदनशील डाटा को सुरक्षित करने की बात कही है।

चीन की सफाई

अमेरिका में देखे गए गुब्बारे को लेकर चीन ने सफाई दी है। चीन ने स्वीकार किया है किअमेरिकी क्षेत्र में पाया गया गुब्बारा चीन का ही है। चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि गुब्बारे का इस्तेमाल मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है। संभवतः गुब्बारा अपने मार्ग से भटक गया है। चीन ने अमेरिकी हवाई क्षेत्र में गुब्बारे के प्रवेश पर खेद प्रकट करते हुए कहा कि यह जानबूझकर नहीं किया गया है।

इसके पहले चीन ने मामले की जाँच की बात करते हुए शांति की अपील की थी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा था कि चीन एक जिम्मेदार देश है और उसने हमेशा से अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया है।

जासूसी गुब्बारे को शूट क्यों नहीं कर रहा अमेरिका?

अमेरिका में सर्विलांस या जासूसी गुब्बारों के विशेषज्ञ विलियम किम ने आशंका जताई है कि चीनी गुब्बारे का उद्देश्य अमेरिकी सीमाओं के बाहर से डेटा एकत्र करना हो सकता है। किम ने कहा कि इन गुब्बारों को शूट करना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि ये हीलियम पर चलते हैं। ऐसे में, यदि गुब्बारे को शूट किया गया तो गुब्बारा आग की लपटों में बदल जाएगा।

जासूसी गुब्बारे की विशेषताएँ

किम कहते हैं कि पहला जासूसी गुब्बारा देखने में बिलकुल सामान्य मौसम की जानकारी हासिल करने वाले गुब्बारे जैसा दिखता है लेकिन इसमें कई दूसरी विशेषताएँ भी हैं। यह सामान्य वेदर बैलून के मुकाबले काफी बड़ा है। इसमें सोलर पैनलों द्वारा संचालित बड़ा पेलोड है। जानकारी जुटाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी लगाए गए हैं। संभव है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हवा में परिवर्तन भाँप कर इसमें अपना रास्ता चुनने की क्षमता भी है।

किम ने कहा कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया हो सकता है कि इसे एक बार छोड़ने के बाद यह हवा के साथ उड़ता रहता है। किम ने कहा कि इन दिनों सैटेलाइट द्वारा निगरानी मुश्किल है लेकिन स्पाई बैलून ने काम आसान कर दिया है। बैलून रडार आसानी से नहीं देखे जा सकते। क्योंकि इसमें धातु (Metal) का इस्तेमाल काफी कम होता है। किम का मानना है निकट भविष्य में इस तरह के बैलून बड़ा खतरा बनकर सामने आने वाले हैं। विशालकाय बैलून में छोटे-मोटे पेलोड को छिपाना आसान हो सकता है। बता दें पेलोड के जरिए हथियार ले जाए जा सकते हैं। सैटेलाइट्स की तुलना में गुब्बारों द्वारा निगरानी से सटीक जानकारी मिलने की संभावना ज्यादा होती है।

आखिर मुस्लिम महिलाओं से जुड़ा ‘खुला’ है क्या? इस्लाम क्या कहता है इसके बारे में: मद्रास हाईकोर्ट ने इसे लेकर सुनवाई के दौरान क्या कहा, जानिए विस्तार से…

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने हाल ही में मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) के ‘खुला’ को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम महिलाएँ ‘खुला’ के तहत अपने शौहर से तलाक लेने की अधिकारी हैं। हालाँकि, कोर्ट ने इसके लिए कुछ प्रावधान बताए हैं।

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ‘खुला’ के तहत तलाक लेने के लिए मुस्लिम महिलाओं को फैमिली कोर्ट जाना होगा। किसी निजी शरीयत परिषद को इस संबंध में प्रमाण पत्र जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे प्रमाण-पत्र की कोई मान्यता नहीं है।

क्या है मामला

दरअसल, एक मुस्लिम महिला अपने पति अब्दुल के साथ नहीं रहना चाहती थी। उसने ‘खुला’ के जरिए अपने पति से तलाक ले लिया। इसके लिए 2017 में वह तमिलनाडु के तौहीद जमात की शरीयत परिषद के शरण में गई और वहाँ से इस बाबत प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।

महिला के पति ने इस संबंध में साल 2019 में न्यायालय में याचिका देकर इस प्रमाण-पत्र को रद्द करने का आग्रह किया। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस सी सरवनन ने शरीयत परिषद की ओर से जारी प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि महिला को खुला के तहत तलाक लेने के लिए तमिलनाडु कानूनी सेवा प्राधिकरण या फैमिली कोर्ट जाना होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि शरीयत परिषद जैसी संस्थाएँ न तो अदालत हैं और न ही मध्यस्थ। ऐसे में इन्हें प्रमाण पत्र जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।

मुस्लिम महिलाओं को तलाक का अधिकार

इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं को भी अपने शौहर से तलाक लेने का प्रावधान है। यदि मुस्लिम महिला अपने पति से खुश नहीं है या किसी अन्य वजह से उसके साथ रहना नहीं चाहती है तो वह निकाह को तोड़ सकती है। मुस्लिम महिला तलाक-ए-ताफवीज, मुबारत, ‘खुला’, लिएन या फिर मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939 के तहत अपने शौहर से अलग हो सकती है।

मुस्लिम महिला तलाक-ए-ताफवीज़ के तहत तलाक ले सकती है। ताफवीज एक ऐसा अनुबंध है, जिसमें मुस्लिम पुरुष अनुबंध के जरिए निकाह को खत्म करने का अपना अधिकार महिला को सौंपता है। बफातन बनाम शेख मेमूना बीवी AIR (1995) कोलकाता (304) और महराम अली बनाम आयशा खातून इसका प्रमुख उदाहरण है।

मुबारत के जरिए भी शौहर-बीवी अलग हो सकते हैं। मुबारत का शाब्दिक अर्थ होता है पारस्परिक छुटकारा। मुबारत में अलग होने का प्रस्ताव चाहे पत्नी की ओर से आए या पति की ओर से, उसकी स्वीकृति से तलाक हो जाता है। इसके बाद पत्नी को इद्दत का पालन करना अनिवार्य हो जाता है।

लिएन वह प्रक्रिया है, जब कोई मुस्लिम शौहर अपनी पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाता है, लेकिन वह आरोप झूठा हो जाता है तो बीवी को तलाक लेने का अधिकार मिल जाता है।

मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम 1939 के तहत भी मुस्लिम महिला को तलाक लेने का अधिकार है। इस अधिनियम की धारा 2 के तहत मुस्लिम महिलाओं को शौहर की अनुपस्थिति (चार साल से अधिक), बीवी की भरण पोषण करने में असफलता (शौहर अगर 2 साल से उसका भरण-पोषण नहीं दे रहा है), शौहर को कारावास (कम से कम 7 साल), शौहर द्वारा वैवाहिक दायित्व पालन में असफलता (कम से कम 2 साल से), शौहर की नपुंसकता, शौहर को पागलपन या कुष्ठ-एड्स जैसे संक्रामक रोग होना, बीवी द्वारा निकाह अस्वीकार करना और शौहर की क्रूरता की स्थिति में तलाक लेने का अधिकार है।

क्या है खुला?

खुला के तहत अगर बीवी अपने शौहर से अलग होती है तो उसे अपने शौहर से उसकी जायदाद लौटानी पड़ेगी। पर यह जरूरी है कि दोनों इसके लिए रजामंद हों। उल्लेखनीय है कि खुला की पहल केवल बीवी ही कर सकती है। कुरान और हदीस मे इसका जिक्र है।

वहीं, भारत में मुस्लिमों के बीच मान्य पुस्तक फतवा-ए-आलमगीरी में कहा गया है कि जब निकाह के बाद शौहर-बीवी इस बात पर राज़ी हैं कि अब वे साथ नहीं रह सकते तो तो पत्नी कुछ संपत्ति पति को वापस करके स्वयं को उसके बंधन से मुक्त कर सकती है। जायदाद में बीवी अपनी मेहर की रकम छोड़ सकती है या फिर कोई अन्य रकम/संपत्ति दे सकती है।

खुला को लेकर मुस्लिमों की आपत्ति

‘खुला’ को लेकर हनफी सहित कुछ तबके के उलेमाओं का कहना है कि इसके तहत मुस्लिम महिला तभी तलाक ले सकती है, जब उसका शौहर तैयार हो। अगर शौहर मना कर दे तो महिला के पास मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम 1939 के प्रावधानों के तहत अदालत जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने साल 2021 में ‘खुला’ के संबंध में कहा था कि इस प्रक्रिया में पति की स्वीकृति एक शर्त है। वहीं, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कुरान एक मुस्लिम पत्नी को एक प्रक्रिया निर्धारित किए बिना उसकी निकाह को रद्द करने के लिए ‘खुला’ का अधिकार देता है।

लड़की से लड़का बना जहाद हुआ गर्भवती, जिसके साथ रहता है वो लड़का से बन गई लड़की: देश में पहली बार बच्चे को जन्म देगा पुरुष ट्रांसजेंडर

केरल के कोझिकोड में ट्रांसजेंडर कपल के घर जल्द ही एक बच्चे को जन्म देने वाला है। कपल जिया पावल और जहाद बीते 3 साल से साथ रह रहे हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर माता-पिता बनने की खबर शेयर की है। यह कपल उम्मीद कर रहा है कि मार्च महीने में उनका बच्चा दुनिया में आ जाएगा। देश में यह पहला ऐसा मामला है, जहाँ पुरुष ट्रांसजेंडर एक बच्चे को जन्म देगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रांसजेंडर कपल ने अपना जेंडर बदलने के लिए सर्जरी कराई है। जिया ने एक पुरुष के रूप में जन्म लिया था। वहीं, जाहद ने एक स्त्री के रूप में जन्म लिया था। हालाँकि, बाद में दोनों ने सर्जरी कराकर जेंडर बदल लिया। यानी जिया स्त्री बन गई और जहाद पुरुष। जेंडर बदलने के लिए हुई सर्जरी के दौरान इनके गर्भाशय और प्रजनन अंगों को नहीं हटाया गया था। इस कारण ही वह गर्भ धारण करने में सक्षम हुआ।

जिया पावल ने अपने इंस्टाग्राम पर जहाद के साथ कुछ फोटो शेयर कीं हैं। इन फोटो में, जहाद गर्भधारण किए हुए दिखाई दे रहा है। इस फोटो को शेयर करते हुए जिया ने लंबा-चौड़ा कैप्शन लिखा है। उसने लिखा है, “मेरा माँ बनने का सपना और मेरे पार्टनर का पिता बनने का सपना पूरा होने वाला है। आठ महीने का बच्चा अब जहाद के पेट में है।”

जिया ने आगे लिखा है कि वह जन्म से या शरीर से एक महिला नहीं थी। लेकिन उसका सपना था कि मुझे कोई माँ कहकर पुकारे। उसे और जहाद को साथ रहते 3 साल से अधिक का समय हो गया है। जब उन दोनों ने साथ रहना शुरू किया था। तभी यह सोच लिया था कि उनका जीवन अन्य ट्रांसजेंडर्स से अलग होना चाहिए।

उसने यह भी लिखा है कि अधिकांश ट्रांसजेंडर कपल को समाज और उनका परिवार बहिष्कार कर देता है। वे दोनों एक बच्चा चाहते थे। बच्चे की चाहत इसलिए थी कि दुनिया से उनके जाने के बाद भी उनका कोई हो। जिया ने आगे लिखा है कि जब उन दोनों ने बच्चे का फैसला लिया, तब जहाद की ब्रेस्ट रिमूवल सर्जरी की प्रक्रिया चल रही थी। लेकिन फिर बच्चे के लिए इस सर्जरी को रोक दिया गया।

जिया के इस इंस्टाग्राम पोस्ट पर अब तक 20 हजार से अधिक लाइक्स और 800 से अधिक कमेंट्स आ चुके हैं। यूजर्स इस कपल को बधाई देते हुए अलग-अलग तरह के कमेंट्स कर रहे हैं।