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‘शराबबंदी से उसके कारोबारियों की रोजी-रोटी पर संकट’: बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश, 4 दिनों का बैन घटा कर किया 1 दिन

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि बहुत ज्यादा दिनों तक शराबबंदी इसका कारोबार करने वाले व्यापारियों की रोजी-रोटी के अधिकारों का उल्लंघन है। इसी के साथ उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के 4 जिलों में होने वाले एमएलसी (MLC) चुनावों के मद्देनजर तय की गई शराबबंदी की समय सीमा को कम करके चार दिन के बजाय एक दिन का कर दिया गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद अब संबंधित जिलों में शराबबंदी सिर्फ चुनाव के दिन यानी 30 जनवरी 2023 को ही लागू होगी। पहले यह समय सीमा 28 जनवरी से 31 जनवरी 2023 तक तय की गई थी।

लाइव लॉ के मुताबिक स्थानीय प्रशासन द्वारा लगाई गई 4 दिनों की शराबबंदी के खिलाफ शराब के कारोबारियों का एसोशिएशन हाईकोर्ट गया था। इस याचिका में एसोसिएशन ने रायगढ़, नासिक, पुणे और पालघर के जिलाधिकारियों के साथ महाराष्ट्र के चुनाव अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया था। केस की सुनवाई जस्टिस मिलिंद जाधव की कोर्ट में हुई।

इस सुनवाई के दौरान एसोसिएशन के व्यापारियों ने 4 दिनों की शराबबंदी को अपनी और अपने यहाँ काम करने वाले लोगों की रोजी-रोटी पर संकट बताया। हालाँकि इसी बहस में महाराष्ट्र प्रशासन ने अपने आदेश को सही ठहराने का प्रयास किया।

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस जाधव ने शराब कारोबारियों के एसोसिएशन के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि रोजगार देने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर लम्बे समय तक रोक लगाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। कोर्ट ने ऐसे प्रतिबंध लगाने वाले अधिकारियों को और अधिक सोच-विचार कर निर्णय लेने की भी सलाह दी।

अपनी टिप्पणी में जस्टिस जाधव ने यह भी कहा कि जिस चुनाव के मद्देनजर प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाए गए हैं वो संसदीय चुनाव नहीं हैं, इसलिए उस नजरिए से इसे नहीं देखा जाना चाहिए। अंतिम आदेश में अदालत ने संबंधित जिलों में शराब की बिक्री पर 4 दिनों की रोक के बजाए मात्र चुनाव के दिन यानी 30 जनवरी 2023 को ही ऐसा करना न्यायोचित माना।

इस मामले में 2 याचिकाएँ एक साथ सुनी गईं। दोनों याचिकाओं में शराब के कारोबारी वादी और महाराष्ट्र प्रशासन प्रतिवादी थे। कोर्ट ने केस में प्रतिवादी बनाए गए पक्षों से 4 हफ्ते में इस बावत शपथ पत्र जमा करने का निर्देश देते हुए मामले को 23 फरवरी 2023 तक के लिए पोस्ट कर दिया।

‘नीतीश का बेटा उनका है या नहीं, वही जानते होंगे’ – बिहार में वंश-वीर्य पर उतरी राजनीति: नाम तेजस्वी का, चाल उपेंद्र कुशवाहा की

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) और उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) के रिश्ते दिन-ब-दिन तल्ख होते जा रहे हैं। कुशवाहा ने बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। तेजस्वी ने नीतीश कुमार के बेटे पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आज नीतीश कुमार तेजस्वी को आगे बढ़ाने की रोज बात करते हैं, लेकिन वही तेजस्वी ने विधानसभा में कहा था कि ‘नीतीश कुमार का एक बेटा है और वो भी उनका अपना है या नहीं, वही जानते होंगे’।

कुशवाहा ने कहा, उस समय तत्कालीन नेता, प्रतिपक्ष ने विधानसभा में भाषण देेते हुए कहा- मुख्यमंत्री नीतीश जी, आपका एक बेटा है और वह भी आपका अपना है या नहीं है, वो भी आप ही जानिएगा।” कुशवाहा ने कहा कि वे नीतीश कुमार को परिवार का सदस्य मानते हैं और तेजस्वी की इस बात पर वे उन्होंने ट्वीट कर विरोध किया था।

दरअसल, कुशवाहा राजद को लेकर हमलावर रहे हैं और वे नीतीश कुमार से बार-बार सवाल करते रहे हैं कि राजद के साथ गठबंधन के वक्त क्या डील हुई थी, उसके बारे में पार्टी को बताना चाहिए। वे कहते रहे हैं कि पार्टी के लोगों को इसके बारे में जानने का हक है। वहीं, 27 जनवरी 2023 को कुशवाहा ने कहा कि दो साल में उनकी कोई बात नहीं सुनी गई। अगर वे झूठ बोल रहे हैं तो नीतीश कुमार अपने बेटे की कसम खाएँ।

इतना ही नहीं, नीतीश कुमार के आने-जाने वाले बयान को लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “… आज वो (नीतीश कुमार) कह रहे हैं कि अपने मन से आए तो 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद स्वयं नीतीश कुमार ने जी कॉल करके हमसे बात की थी। मैंने उन्हें कॉल नहीं किया था। मेरे कॉल रिकॉर्ड निकाल कर कोई भी इसकी पुष्टि कर सकता है।”

बता दें कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था, “कोई पार्टी में आ भी जाता है, कोई चला भी जाता है। किसी को आगे बढ़ाते हैं तो वो भाग भी जाता है तो कोई भागने की कोशिश करता है। जिसको जो मन में आए करे, पार्टी को थोड़े ना कुछ होना है।” सीएम के इस बयान के बाद कुशवाहा के जदयू छोड़ने के कयास लगाए जाने लगे।

कुशवाहा ने कहा, “नीतीश कुमार के साथ उनकी ना सिर्फ कॉल पर बात हुई, बल्कि नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के दो-तीन बड़े नेताओं को लगाया। इन लोगों ने मध्यस्थता की इसके बाद मैं पार्टी (जदयू में विलय) आया। जब मुख्यमंत्री जी से पहली बार फोन पर चर्चा हुई, उस समय वे असहाय महसूस कर रहे थे।”

उपेंद्र कुशवाहा जदयू में पार्टी के संसदीय दल के नेता हैं। उन्होंने जदयू से अलग होकर ही ‘राष्ट्रीय लोक समता दल (RLSP)’ का गठन किया था और भाजपा के साथ मिलकर 2014 के लोकसभा का चुनाव लड़ा था। NDA गठबंधन की जीत के बाद उन्हें मानव संसाधन विभाग में केंद्रीय मंत्री बनाया गया। बाद में वे भाजपा से अपने संबंध खराब कर लिए और गठबंधन से चलते बने।

2019 के लोकसभा चुनाव और फिर 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी का सूपड़ा साफ़ हो गया। उस समय नीतीश कुमार विपक्षी दलों के निशाने पर थे। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा को भी अपनी डूबती राजनीति को बचाना था। इस तरह दोनों एक साथ आ मिले। कुशवाहा बिहार में कोइरी समाज के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। उपेंद्र कुशवाहा 2007 में जदयू का साथ छोड़ दिया और 2009 में ‘समता पार्टी’ बनाई थी। हालाँकि, उसी साल इसका वापस जदयू में विलय भी कर दिया था।

‘जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोग’ पर राजनीति करने में जुटे राहुल गाँधी… कुछ दिन पहले ही आधार कार्ड देख 4 हिंदुओं को इस्लामी आतंकियों ने मार डाला था

भारत जोड़ो यात्रा अपने अंतिम चरण में कश्मीर पहुँच चुकी है। इस बीच 24 जनवरी, 2023 को जम्मू के सतवारी चौक के पास आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने विवादित बयान दिया था। राहुल गाँधी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को बाहरी चला रहे हैं। उनके बयान का यह वीडियो अब वायरल हुआ है। देश भर में उनके इस बयान की निंदा की जा रही है।

वायरल वीडियो में राहुल गाँधी कह रहे हैं, “पहले जम्मू के लोग व्यापार करते थे। जम्मू-कश्मीर को जम्मू-कश्मीर के लोग चलाते थे। आज बाहर के लोग जम्मू और कश्मीर को चला रहे हैं। हमारी आवाज (जम्मू-कश्मीर के लोगों की) उसको प्रशासन नहीं सुनता। सारा व्यापार बाहर के लोग करते हैं, जम्मू-कश्मीर के लोग देखते रह गए।” राहुल आगे कहते हैं कि देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी जम्मू कश्मीर में है।

राहुल गाँधी के इस बयान को ट्विटर पर शेयर करते हुए राजनीतिक विश्लेषक और लेखक जावेद इकबाल शाह ने लिखा कि जो राहुल गाँधी जम्मू-कश्मीर में स्थानीय बनाम बाहरी की बात कर रहे हैं, क्या वो दिल्ली या उत्तर प्रदेश में इस तरह की भाषा का प्रयोग कर सकते हैं? उन्होंने आगे लिखा कि जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी कश्मीरी राजनीतिक पार्टियों के 70 साल के कुशासन का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि हजारों कश्मीरी जम्मू-कश्मीर के बाहर काम और व्यापार करते हैं।

द ब्रेन डॉक्टर नाम के यूजर ने लिखा कि तमिलनाडु में राहुल गाँधी द्रविड़ियन पहचान की बात कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर में दूसरे राज्य के मजदूरों और प्रशासन के खिलाफ बोल रहे हैं। साथ ही आरोप लगाया कि पूरी की पूरी भारत जोड़ो यात्रा ही विभाजनकारी है।

फिल्म मेकर और ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ट्विटर पर लिखा, “राहुल गाँधी के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो भारत के किसी दूसरे हिस्से से जम्मू और कश्मीर में आता है, वह बाहरी है। बाहर के लोग ठीक वही हैं, जो हम सभी को कहा जाता है। वह किसकी भाषा बोल रहे हैं?”

आपको याद दिला दें कि राहुल गाँधी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब जम्मू-कश्मीर में इस्लामी आतंकी टारगेट किलिंग्स को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे समय में जब पहचान पत्र देखकर हिंदुओं की हत्या की जा रही है, राहुल गाँधी जम्मू-कश्मीर में बाहरी बनाम स्थानीय जैसे बयान देकर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। दूसरों पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाने वाले राहुल गाँधी जो भारत जोड़ने निकले हैं, खुद विभाजनकारी बयान देते फिर रहे हैं।

अंकित को शहादत, समशेर, आरिफ सहित 10 ने चाकुओं से गोदा: पिता ने मस्जिद के पास मर्डर का लगाया आरोप, बिहार पुलिस ने बताई क्रिकेट की कहानी

बिहार के गोपालगंज के बसडीला गाँव में कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने सब्जी खरीदने गए अंकित नाम के युवक की शुक्रवार (27 जनवरी, 2023) शाम को चाकू मार कर हत्या कर दी। मृतक के पिताजी के अनुसार बताया जा रहा है कि मस्जिद के पास तीन अन्य युवकों से उनके गाँव का नाम पूछकर तेज हथियारों से जानलेवा हमला किया गया। उनमें से एक की हालत नाजुक है। अंकित की मौत के बाद नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने शनिवार को सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठी चार्ज की। खबर है कि आरोपित पक्ष द्वारा भी प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला किया गया है।

मृतक अंकित पसरमा गाँव का रहने वाला है। अंकित के पिता मोहन प्रसाद के मुताबिक बसडीला मस्जिद के पास से गुजर रहे अंकित और उसके साथियों को स्थानीय लोगों ने घेर लिया। अंकित के साथ मारपीट की गई। उसे पास के घर में ले जाया गया और गला दबाकर हत्या को अंजाम दिया गया। अंकित के पिता मोहन प्रसाद ने शहादत मियाँ, समशेर मियाँ, सोनू मियाँ, आरिफ मियाँ, मुन्ना मियाँ, सोनू मियाँ, आदिल अली, सुभान अहमद, अहमद अली और दिलशाद अली पर एफआईआर दर्ज करवाया है। उन्होंने हमले में महिलाओं समेत 30-35 लोगों के शामिल होने की बात कही है।

पसरमा गाँव के ही हरिओम, चंदन कुमार और शिवम कुमार इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हरिओम की हालत नाजुक बताई जा रही है। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद यूपी के गोरखपुर रेफर कर दिया गया है। हमले में जख्मी अंकित की शनिवार (28 जनवरी, 2023) को इलाज के दौरान मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद शव मिलते ही परिजन और गाँव वाले आक्रोशित हो गए और हत्यारों की गिरफ्तारी की माँग करने लगे।

परिजन शव लेकर प्रदर्शन करते हुए आरोपितों के गाँव पहुँचे। यहाँ कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने उन पर हमला किया। इसके बाद देखते-देखते दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया। सूचना पर पहुँची पुलिस ने भी प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठी चार्ज किया और हवाई फायरिंग की। गोपालगंज के डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी और एसपी स्वर्ण प्रभात भी घटना स्थल पर पहुँचे। तनाव को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। पुलिस के अनुसार फिलहाल हालात काबू में है।

घटना की जानकारी देते हुए बिहार पुलिस की तरफ से भी ट्वीट भी किया गया है। बिहार पुलिस की तरफ से लिखा गया, “गोपालगंज जिले के नगर थाना अंतर्गत बसडीला गाँव में क्रिकेट खेलने को लेकर हुए दो पक्षों के विवाद में एक युवक अंकित कुमार बुरी तरह जख्मी हो गए थे। इलाज के क्रम में उनकी मृत्यु हो गई। मिली सूचना, सबूतों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कुल 6 लोगों को पूछताछ हेतु हिरासत में लिया गया है।

क्यों हुआ विवाद?

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो 4 दिन पहले क्रिकेट खेलने के दौरान पसरमा गाँव के अंकित कुमार और उनके दोस्तों का बसडीला गाँव के मुस्लिम युवकों के साथ विवाद हुआ था। हालाँकि विवाद पंचायत स्तर पर सुलझा लिया गया था। शुक्रवार को दोस्तों के साथ बसडीला बाजार से लौट रहे अंकित कुमार को बसडीला गाँव के मुस्लिम युवकों ने घेर लिया और गाली-गलौज करने लगे। देखते-देखते विवाद बढ़ गया और चाकूबाजी होने लगी। आरोप है कि कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने दोस्तों के गाँव का नाम पूछ कर उन पर हमला किया। इस हमले में अंकित और उसके दोस्त बुरी तरह घायल हो गए। इलाज के दौरान अंकित की मौत हो गई जबकि एक दोस्त हरिओम बुरी तरह से जख्मी हैं।

सोशल मीडिया पर इस विवाद को सरस्वती पूजा से जोड़े जाने पर गोपालगंज पुलिस ने ट्वीट कर लोगों से अफवाह न फैलाने की अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामले का सरस्वती पूजा विसर्जन से लेना देना नहीं है। बिहार पुलिस के अनुसार जिले में सरस्वती माता की प्रतिमा का विसर्जन शांतिपूर्ण रहा है।

मोहसिन का हरा शर्ट, सिर पर गोल टोपी और हत्या: हिन्दू राष्ट्र सेना के प्रमुख धनंजय देसाई सहित 20 लोग कोर्ट से आरोप मुक्त

महाराष्ट्र में पुणे की एक अदालत ने साल 2014 में हुए मोहसिन नाम के एक मुस्लिम युवक की हत्या के मामले में अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में हिन्दू राष्ट्र सेना के प्रमुख धनंजय देसाई को बरी कर दिया है। अदालत ने इसी केस में 20 सभी आरोपितों को भी सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसबी सालुंके की अदालत में हुई। उन्होंने बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनीं। अपने आदेश में उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले में आरोपित किए गए लोगों पर आरोप सिद्ध होने लायक प्रमाण नहीं दे पाया। धनंजय देसाई ने इस फैसले पर संतोष जताया। निर्णय के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को इस्लामी कट्टरपंथी जिहादियों की तुष्टिकरण करने वाला बताया। धनंजय देसाई ने कहा कि उन्हें हिंदुत्व का काम करने की वजह से निशाने पर लिया गया था।

मोहसिन मोहम्मद सादिक की हत्या: क्या था पूरा मामला

दरअसल यह मामला पुणे के 29 वर्षीय युवक मोहसिन मोहम्मद सादिक की हत्या का था। सादिक एक प्राइवेट कम्पनी में IT मैनेजर के पद पर कार्यरत था। वह पुणे में अपने भाई मोबिन और दोस्त रियाज़ के साथ रहता था। आरोप है कि 2 जून 2014 को मृतक मोहसिन सादिक पास की एक मस्जिद से नमाज पढ़ कर लौट रहा था। तभी उसके बगल से लगभग आधे दर्जन बाइक सवार हाथों में रॉड और स्टिक लेकर गुजरे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाइक सवार मोहसिन की शर्ट का हरा रंग और सिर पर गोल टोपी देख कर नाराज हो गए।

शिकायत में बताया गया है कि सभी आरोपितों ने मोहसिन को बैट, स्टिक और रॉड से पीटा। आगे बताया गया कि मोहसिन ने अपने भाई मोबिन और दोस्त रियाज़ को कॉल कर के बुलाया। कुछ ही देर में पुलिस भी पहुँच गई। घायल मोहसिन को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले IPC की धारा 302, 307, 143, 147, 148, 120 B और 153 A के तहत FIR दर्ज की। इस केस में हिन्दू राष्ट्र सेना के प्रमुख धनंजय देसाई को मुख्य आरोपित किया गया था। दिसंबर 2018 में मोहसिन के अब्बा भी हार्ट फेल्यर से चल बसे थे।

अमृत उद्यान: बदल गया राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डन का नाम, ‘अमृत महोत्सव’ की थीम पर नया नाम

राष्ट्रपति भवन में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है। देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर मनाए जा रहे ‘अमृत महोत्सव’ की थीम पर इस गार्डन का नाम बदला गया है। राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू रविवार (29 जनवरी 2023) को इस उद्यान का उद्घाटन करेंगीं।

राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू की उप-प्रेस सचिव नविका गुप्ता ने कहा, “भारत सरकार ने राष्ट्रपति भवन के उद्यान का नाम अमृत उद्यान किया है। राष्ट्रपति भवन के सभी उद्यानों को अब अमृत उद्यान के नाम से जाना जाएगा।”

नविका गुप्ता ने यह भी कहा है, “आजादी के 75 साल पूरे होने को ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसे देखते हुए भारत की राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन के उद्यान को एक सामान्य नाम ‘अमृत उद्यान’ दिया है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस बार यह उद्यान 31 जनवरी से 26 मार्च तक यानी दो महीने के लिए आम जनता के लिए खुला रहेगा। इसके अलावा, एक दिन विशेष श्रेणियों को समर्पित होगा। इस विशेष श्रेणी में महिलाएँ, दिव्यांग शामिल हैं।”

बता दें कि अब तक यह उद्यान आम लोगों के लिए फरवरी से मार्च तक मात्र 1 महीने के लिए ही खुलता था। यह वह अवधि होती थी जब इस उद्यान में फूल खिले होते थे। लेकिन, अब इस समय को बढ़ाकर 2 महीने किया गया है।

राष्ट्रपति भवन की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अमृत उद्यान में 28 मार्च को सिर्फ किसान प्रवेश कर सकेंगे। वहीं, 29 मार्च को दिव्यांग और 30 मार्च को सेना, पैरामिलिट्री फोर्स व पुलिस के जवान प्रवेश कर सकेंगे। 31 मार्च का दिन महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है।

विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि अमृत उद्यान प्रत्येक सोमवार को बंद रहेगा। सोमवार को इस उद्यान का मेंटिनेंस किया जाएगा। इसके अलावा, होली के दिन यानी 8 मार्च को भी यह उद्यान बंद रहेगा।

इस उद्यान में प्रवेश के लिए सुबह 10 बजे से 12 बजे तक 7500 लोगों को टिकट मिलेगा। इसके बाद, दोपहर 12 से शाम चार बजे तक 10 हजार लोगों को प्रवेश मिलेगा। इस उद्यान में 12 तरह के विशेष किस्म के ट्यूलिप के फूल लगाए हैं। साथ ही सेल्फी प्वांइट भी है। इस उद्यान में लगे सभी पौधों में क्यूआर कोड लगे हुए हैं। क्यूआर कोड को स्कैन कर पौधों के किस्मों की जानकारी ली जा सकती है।

हिंदू संगठन को सम्मेलन के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने दी इजाजत: तमिलनाडु सरकार ने अनुमति से इनकार कर कहा था- लोग दूसरे धर्मों के खिलाफ बोलेंगे

मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) ने तमिलनाडु के हिंदू संगठन इंदु मक्कल काची-तमिझगम (IMKT) को 29 जनवरी 2023 को आयोजित होने वाली राज्यस्तरीय सम्मेलन की इजाजत दे दी है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन द्वारा रोका जा रहा सम्मेलन तय समय पर आयोजित होगा। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक सभाओं के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

हिंदू संगठन आईएमकेटी ने आयोजन के लिए स्थानीय पुलिस से अनुमति माँगी थी। हालाँकि, पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी। कुड्डालोर पुलिस ने तमिलनाडु सरकार के एक अप्रैल 1986 के सरकारी आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें अन्य धार्मिक समूह की बहुलता वाले क्षेत्रों से धार्मिक जुलूस को ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

पुलिस द्वारा इनकार करने के बाद संगठन के लोगों ने हाईकोर्ट का रुख किया। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी चंद्रशेखरन ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 के तहत सभी को धार्मिक आयोजनों की अनुमति है। राज्य धार्मिक आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगा सकता। न्यायाधीश ने कुछ शर्तों के साथ सम्मेलन की अनुमति दे दी।

अदालत ने इंदु मक्कल काची-तमिझगम को 29 जनवरी 2023 के दिन दोपहर 3.00 बजे से रात 10.00 बजे तक के बीच सम्मेलन की अनुमति दी। कोर्ट ने संगठन को इस बात का ध्यान रखने की हिदायत दी कि कार्यक्रम के दौरान कोई वक्ता किसी धर्म या जाति की भावनाओं को ठेस न पहुँचाए। IMKT को कोविड के संभावित प्रसार और भीड़ की वजह से ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई है।

इसके पहले कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की तरफ से दलील दी गई थी कि प्रस्तावित सम्मेलन में हिंदू धर्म के साधु-संत, धर्मगुरु और धार्मिक संगठन के सदस्य शामिल होंगे। पूर्वाग्रह से ग्रसित सरकार ने कहा था कि इस बात की पूरी सम्भावना है कि हिन्दू धर्म की बात करते हुए वक्ता अन्य धर्मों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करेंगे। इससे कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

बार ऐंड बेंच के अनुसार, हिंदू संगठन के सदस्यों ने एक हलफनामा देते हुए कहा कि कार्यक्रम की वजह से किसी तरह के कानून व्यवस्था की समस्या उत्पन्न नहीं होगी। उच्च न्यायालय ने दोनों तरफ की दलील सुनने के बाद हिंदू संगठन के पक्ष में अपना निर्णय सुनाया और कार्यक्रम की इजाजत दे दी। हालाँकि, उच्च न्यायालय ने जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी।

ईद पर आने वाली फिल्म की रिव्यू के लिए KRK ने सलमान खान से माँगी अनुमति: नेटिजेन्स बोले- ‘क्या दिन आ गए, भीख माँगनी पड़ रही’

कमाल राशिद खान उर्फ KRK अलग अंदाज में फिल्मों की समीक्षा करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने सलमान खान (Salman Khan) से उनकी आने वाली फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ (Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan) के टीजर का रिव्यू करने की अनुमति माँगी है। केआरके ने कहा कि कोर्ट के ऑर्डर के कारण वह सलमान की फिल्मों का रिव्यू नहीं कर सकते।

दरअसल, सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ का टीजर बुधवार (25 जनवरी 2023) को रिलीज हुआ था। टीजर सामने आने के बाद कई फिल्म समीक्षकों ने इसका रिव्यू किया था। सभी की तरह केआरके भी रिव्यू करना चाहते हैं।

केआरके ने ट्विट में लिखा, “प्रिय सुपरस्टार सलमान खान साहब, क्या आप मुझे अपनी फिल्म किसी का भाई किसी की जान के टीजर की समीक्षा करने की अनुमति दे सकते हैं? आपके इस एहसान के लिए मैं और लोग आपके आभारी रहेंगे। सलमान भाई को मनाने के लिए लिए कृपया रीट्वीट करें।”

केआरके यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने अगले ट्वीट में सलमान खान के पिता सलीम खान को टैग करते हुए लिखा, “सलीम खान साहब आपने टीवी पर कहा था कि किसी को माफ करना सबसे बड़ी खैरात है। यदि आप सच में इस बात पर विश्वास करते हैं तो कृपा करके सलमान खान साहब से कहें कि मुझे उनकी फिल्मों की समीक्षा करने की अनुमति दें। मैं वादा करता हूँ कि उनका मजाक नहीं उड़ाऊँगा। मैं सिर्फ एक प्रोफेशनल समीक्षक की तरह फिल्म के बारे में बात करूँगा।”

फिल्म रिव्यू करने के लिए केआरके द्वारा बार-बार अनुरोध किए जाने पर फैंस कई प्रकार के सवाल कर रहे थे। ऐसे ही एक यूजर ने कहा, “रिव्यू करने के लिए आपको भीख माँगना पड़ रहा है। क्या दिन आ गए हैं।”

इस पर केआरके ने कहा, “मैं लोगों से प्यार करता हूँ। लोगों के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ। जेल भी जा सकता हूँ। लोगों का समर्थन ही मेरा जीवन है।” हालाँकि, एक अन्य ट्वीट में केआरके ने खुलासा किया कि सलमान खान के पास कोर्ट का ऑर्डर है। इसलिए वह उनकी फिल्म का रिव्यू नहीं कर सकते।

केआरके ने ट्वीट किया, “सलमान खान के पास अदालत का आदेश है कि मैं उनकी फिल्म की समीक्षा नहीं कर सकता। मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूँ। इसलिए कानून नहीं तोड़ सकता। लोग मुझसे किसी का भाई किसी का जान के टीजर का रिव्यू करने के लिए कह रहे हैं। इसलिए मैं सलमान खान से अनुरोध कर रहा हूँ कि मुझे इसकी समीक्षा करने की अनुमति दें। सलमान को भी जनता का सम्मान करना चाहिए।”

दरअसल, जून 2021 में मुंबई की एक कोर्ट ने KRK को सलमान खान की फिल्मों की समीक्षा करने से रोक दिया था। कहा जाता है कि केआरके ने सलमान खान की फिल्म ‘राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई’ का मजाकिया अंदाज में समीक्षा की थी। इस पर केआरके के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था। हालाँकि, सलमान खान के वकीलों ने कहा था कि यह मुकदमा बीइंग ह्यूमन के खिलाफ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के जवाब में था। वहीं, केआरके ने इसे ‘राधे: योर मोस्ट वांटेड भाई’ के पक्ष में फिल्म की समीक्षा नहीं करने का बदला बताया था।

मुंबई की एक अदालत ने 23 जून 2021 को सलमान खान द्वारा दायर मानहानि के मामले में फैसला सुनाते हुए केआरके को सलमान पर कोई भी मानहानि वाला पोस्ट या वीडियो शेयर करने से अस्थायी तौर पर रोक दिया था। यह अस्थायी रोक मामले के अंतिम फैसले तक जारी रहेगी। अदालत ने अपने फैसले में कहा था, “एक अच्छी प्रतिष्ठा व्यक्तिगत सुरक्षा का एक तत्व है और यह संविधान द्वारा समान रूप से जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति के आनंद के अधिकार के साथ रक्षित किया गया है।”

68 विदेशियों को भेजा गया मटिया ट्रांजिट कैम्प; बारी-बारी से बाकी भी लाए जाएँगे… असम में घुसपैठियों पर बड़ी कार्रवाई

असम सरकार ने 68 विदेशियों को चिह्नित करके उन्हें ट्रांजिट कैम्प में भेज दिया है। सरकार द्वारा यह कार्रवाई शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को की गई। अवैध घुसपैठियों के लिए इस नए ट्रांजिट कैम्प को गोलपारा जिले के मटिया इलाके में बनाया गया है। इसका निर्माण केंद्र सरकार के निर्देश पर असम के 6 अलग-अलग ट्रांजिट कैम्प में रखे गए घुसपैठियों को एक जगह करने के लिए हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कैम्प में न सिर्फ एजेंसियों द्वारा पकड़े गए घुसपैठी हैं, बल्कि इस जगह वो विदेशी घुसपैठी भी रखे गए हैं जो निचली अदालतों द्वारा वीजा नियमों का उल्लंघन के दोषी साबित हुए हैं। असम प्रदेश के जेल विभाग की IG बर्नाली शर्मा (Barnali Sharma) के मुताबिक, शिविर में लगभग 68 लोग रखे गए हैं। इनमें से 45 पुरुष, 21 महिलाएँ और 2 बच्चे हैं। दोनों बच्चे अपने अभिभावकों के साथ हैं। बताया यह भी जा रहा है कि कुछ ही समय में यहाँ अन्य घुसपैठियों को भी लाया जाएगा।

जिस मटिया ट्रांजिट कैम्प में ये सभी विदेशी घुसपैठी रखे गए हैं, उसकी कुल क्षमता 3000 लोगों की है। यहाँ अवैध विदेशियों को रखने की पूरी तैयारी की जा चुकी है। देखरेख के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस कैम्प को और पहले शुरू हो जाना था, लेकिन स्टाफ नहीं नियुक्त होने के चलते इसमें देरी हुई। IG जेल के मुताबिक, विदेशियों को जेल से ट्रांजिट शिविर लाने के दौरान स्थानीय पुलिस उन्हें पूरी सुरक्षा देती है।

मटिया ट्रांजिट कैम्प लगभग 2.5 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यहाँ लाई जा रहीं महिलाओं के लिए अलग सेल बने हुए हैं। यहाँ मौजूद विदेशी घुसपैठियों के लिए स्कूल और अस्पताल भी मौजूद हैं। इन सभी जगहों पर काम करने के लिए सरकार ने अलग-अलग विभागों के अलग-अलग लोगों का चयन किया है। बताया जा रहा है कि असम के 6 ट्रांजिट केन्द्रों को मिलाकर घुसपैठियों की कुल संख्या लगभग 1,000 है। ये कैंप वर्तमान में चार सेंट्रल जेल और दो जिला जेलों में स्थित हैं। ये कैम्प कोकराझार, गोलपारा, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और सिलचर में बने हुए हैं।

NDTV से उस श्रीनिवासन जैन ने दिया इस्तीफा, जिसने PM मोदी की हत्या वाली साजिश को बताया था छोटे-मोटे बम धमाके की कोशिश

विवादित न्यूज एंकर श्रीनिवासन जैन ने एनडीटीवी (NDTV) से इस्तीफा दे दिया है। श्रीनिवासन लगभग 30 सालों से कथित पत्रकारिता संस्थान एनडीटीवी के लिए सेवाएँ दे रहे थे। फिलहाल वह एनडीटीवी 24×7 चैनल में ग्रुप एडिटर की जिम्मेदारी निभा रहे थे।

श्रीनिवासन जैन ने एक ट्वीट के जरिए अपने फैसले का ऐलान किया। उन्होंने लिखा, “एनडीटीवी पर लगभग तीन दशक से चला आ रहा सिलसिला आज समाप्त हो गया। इस्तीफा देने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन… जो है यही है। बाकी बातें बाद में।”

वर्ष 1995 से NDTV के साथ काम कर रहे श्रीनिवासन जैन अपने करियर के दौरान लगातार विवादों में घिरे रहे। जुलाई 2022 में उन्होंने तथाकथित फैक्ट-चेकर मोहम्मद ज़ुबैर को अपना मित्र बताते हुए उसके जमानत के लिए ₹50,000 का मुचलका भरा था।

कोरोना काल के दौरान अगस्त 2021 में जब देश ने अपना कोविड वैक्सीन कोवैक्सीन (Covaxin) विकसित किया, उस वक्त श्रीनिवासन ने इस वैक्सीन को लेकर झूठ फैलाया। उन्होंने दावा किया था कि नेशनल वैक्सीन एडवाइजरी ग्रुप के चेयरपर्सन ने कहा है कि भारत में निर्मित कोवैक्सीन के शुरुआती बैच अच्छी क्वालिटी के नहीं थे। हालाँकि बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था।

दिलचस्प बात यह है कि श्रीनिवासन जैन को उनके कार्यक्रमों में शामिल होने वाले मेहमानों ने कई मौकों पर आईना दिखाया है। एक बार एक कार्यक्रम के दौरान कारोबारी राकेश झुनझुनवाला ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा था, “मुझे लगता है कि आप और एनडीटीवी सरकार के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। प्रेस कोई राजनीतिक इकाई नहीं है। प्रेस को पूर्वाग्रह से ग्रसित नहीं बल्कि निष्पक्ष होना चाहिए।”

उन्होंने एक बार एचडीएफसी के अध्यक्ष दीपक पारेख से मोदी सरकार के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणी करवाने का भी प्रयास किया था। उनकी इच्छा के विपरीत दीपक ने जवाब दिया था कि असंतोष और असहिष्णुता को लेकर चर्चा अतिशयोक्तिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार सुनने को तैयार नहीं है। सरकार इन मामलों पर चर्चा करने को भी तैयार है।

इन सब के अतिरिक्त श्रीनिवासन जैन के पूरे करियर का मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश करने वाली लश्कर-ए-तैयबा की आतंकवादी इशरत जहाँ के जुर्म को कमतर बतलाना था। उन्होंने दावा किया था कि इशरत जहाँ गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को मारने नहीं आई थी बल्कि छोटा-मोटा बम धमाका करने आई थी।

बता दें गुजरात पुलिस ने इशरत जहाँ को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया था। इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले की सीबीआई जाँच की जानकारी देने की आड़ में एनडीटीवी के कथित पत्रकार ने अपने दर्शकों को तर्क दिया था कि चूँकि इशरत जहाँ किसी छोटे-मोटे आतंकी वारदात को अंजाम देने आई थी, इसलिए गुजरात पुलिस को उसके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए था।

NDTV की होल्डिंग कंपनी पर अडानी समूह के नियंत्रण के बाद से ही वामपंथी एजेंडावादी पत्रकारों का इस्तीफा जारी है। इसके पहले रवीश कुमार ने चैनल से इस्तीफा दिया था। रवीश कुमार NDTV के हिंदी चैनल के माध्यम से लगातार मोदी विरोधी प्रोपेगंडा फैलाने में व्यस्त थे। उनका इस्तीफा तुरंत प्रभाव से लागू हो गया था। उन्हें चैनल में ‘सीनियर एग्जीक्यूटिव’ का पद दिया गया था। उन्होंने ‘हम लोग’, ‘रवीश की रिपोर्ट’, ‘देस की बात’ और ‘प्राइम टाइम’ समेत कई कार्यक्रमों में NDTV के लिए एंकरिंग की थी।