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सुरक्षा में सेंधमारी का दावा कर राहुल गाँधी ने यात्रा रोकी, J&K पुलिस ने बताया- पूरी थी तैयारी, 1 किमी चलकर बिना बताए बंद कर दी

राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ (Bharat Jodo Yatra) जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के बनिहाल में रोक दी गई। कॉन्ग्रेस का आरोप है कि यात्रा के दौरान राहुल गाँधी को सुरक्षा नहीं मिली, इस कारण यात्रा रोकनी पड़ी। वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा है कि यात्रा रोकने से पहले पुलिस से बातचीत नहीं की गई।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने राहुल गाँधी की सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक से इनकार किया है। पुलिस ने कहा है कि इस यात्रा में शामिल होने वाली भीड़ के बारे में उसे सूचना नहीं दी गई थी। यात्रा के शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोग आ गए थे। इसलिए उन्हें सँभालना पड़ा।

पुलिस ने ट्वीट कर कहा, “यात्रा के रूट पर सिर्फ आयोजकों द्वारा अधिकृत व्यक्तियों और तलाशी लेने के बाद ही लोगों को अंदर जाने की अनुमति दी गई थी। भारत जोड़ो यात्रा के आयोजकों और प्रबंधकों ने बनिहाल से यात्रा में शामिल होने वाली भीड़ के बारे में सूचित नहीं किया था। शुरुआती पॉइंट के पास ही बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी।”

पुलिस ने इस यात्रा में तैनात सुरक्षाकर्मियों की जानकारी देते हुए कहा, “सीएपीएफ की 15 कंपनियों और पुलिस की 10 कंपनियों समेत ROP और QRT को ड्यूटी में लगाया गया था। साथ ही, रूट डोमिनेशन, लेटरल डिप्लॉयमेंट और SF को हाई-रिज और अन्य स्थानों पर तैनात किया गया था।”

एक अन्य ट्वीट में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा, “आयोजकों ने एक किलोमीटर चलने के बाद यात्रा बंद की दी। यह निर्णय लेने से पहले पुलिस से किसी प्रकार की चर्चा नहीं की गई। शेष यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से जारी रही। सुरक्षा में जरा भी चूक नहीं हुई। हम फुलप्रूफ सुरक्षा मुहैया कराए।”

बता दें कि इससे पहले राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है, “पुलिस व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और भीड़ को सँभालने वाली पुलिस चली गई या दिखी नहीं। मेरे सुरक्षाकर्मियों ने मुझसे कहा कि अब आगे नहीं चलना चाहिए। इसलिए यात्रा रोकनी पड़ी। प्रशासन का काम है कि सुरक्षा उपलब्ध कराए। मुझे मालूम नहीं क्यों हुआ, पर कल और परसों ऐसा नहीं होना चाहिए।”

वहीं, कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि भारत जोड़ो यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई है। सुरक्षा नहीं मिल रही है। ऐसे में राहुल गाँधी यह यात्रा जारी नहीं रख सकते। अगर राहुल गाँधी यात्रा में आगे जाना भी चाहते हैं, तब भी वे उन्हें आगे नहीं जाने देंगे। सीनियर सुरक्षा अफसरों को यहाँ आना चाहिए।

बता दें कि दिसंबर 2022 में जब भारत जोड़ो यात्रा दिल्ली में थी, तब भी कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी की सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया था। कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर कहा था कि राहुल की सुरक्षा में चूक हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस भीड़ को नियंत्रित नियंत्रित नहीं कर सकी। इस दौरान कॉन्ग्रेस पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की सुरक्षा में कई बार सेंध लगी। उन्होंने कहा था कि स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा।

हालाँकि, केसी वेणुगोपाल के आरोप के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कहा था कि राहुल की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। साल 2020 के बाद से उन्होंने खुद 113 बार नियमों का उल्लंघन किया है। साथ ही CRPF ने कहा था कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान दिल्ली में भी सभी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया था।

दिल्ली पुलिस ने भी कहा था कि सुरक्षाकर्मियों की पर्याप्त तैनाती की गई थी। CRPF ने कहा था कि राहुल गाँधी की ओर से निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कई मौकों पर देखा गया है। इस तथ्य से उन्हें समय-समय पर अवगत भी कराया गया है। केन्द्रीय बल ने यह भी बताया है कि उन्होंने दिल्ली में भी इसका उल्लंघन किया था।

कोरोना वायरस को और खतरनाक बना रही Pfizer, ताकि बेच सके ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन: स्टिंग से खुलासा, संक्रमण को दुधारू गाय मान रही अमेरिकी दवा कंपनी

रूढ़िवादी मीडिया संगठन प्रोजेक्ट वेरिटास के एक स्टिंग ऑपरेशन के प्रकाशित होने के बाद अमेरिकी सीनेटर (फ्लोरिडा) मार्को रुबियो ने फाइजर (Pfizer) के सीईओ अल्बर्ट बोरला (Pfizer CEO Albert Bourla) को एक पत्र लिखा। इस स्टिंग ऑपरेशन में फाइजर के निदेशक जॉर्डन वॉकर ने दावा किया है कि दवा कंपनी कोविड-19 वायरस के प्रकोप को और बढ़ाने पर काम कर रही है।

गुरुवार (26 जनवरी 2023) को लिखे पत्र में रुबियो ने कहा, “एक इंवेस्टिगेटिव रिपोर्ट बताती है कि फाइजर गेन ऑफ फंक्शन रिसर्च कर रहा है। वह SARS-CoV-2 वायरस को म्यूटेट कर भविष्य में नए वैरिएंट को खत्म करने के लिए उससे अधिक शक्तिशाली वैरिएंट व टीके बनाने वाला एक शोध बताता है।” उन्होंने कहा, “इस प्रकार का शोध, गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च के समान है। यह लंबे समय से विवादास्पद रहा है और इसके कारण ही COVID-19 महामारी होने का संदेह है।”

सीनेटर मार्को रुबियो ने कहा, “चाहे यह कार्य किसी शोध का हिस्सा हो या फिर वायरस के खतरे को कम करने के लिए कोई नई खोज। जैसा कि वॉकर ने दावा किया वायरस को अधिक प्रभावशाली और बेजोड़ बनाने का कोई भी प्रयास लापरवाह और खतरनाक है।”

उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “वॉकर ने कहा है कि फाइजर इस खतरनाक शोध में शामिल होने के लिए तैयार है, क्योंकि कोविड-19 और इसके वैरिएंट कंपनी के लिए दूध देने वाली एक गाय की तरह है। सरकारी अधिकारियों का एक समूह भी फाइजर के लिए काम करना चाहता है।”

अमेरिकी सीनेटर ने फाइजर के सीईओ से की पूछताछ

फाइजर को अपने कार्यों के प्रति जवाबदेही समझाने और इसकी पारदर्शिता की बढ़ावा के लिए रुबियो ने दवा कंपनी से 6 अहम सवाल पूछे हैं। ये सवाल इस प्रकार हैं-

1. SARS-CoV-2 वायरस को म्यूटेट करने के लिए फाइजर वर्तमान में क्या प्रयास कर रहा है या फिर आगे क्या करने की योजना बना रहा है?

2. क्या फाइजर का इरादा गेन-ऑफ-फंक्शन या निर्देशित विकास अनुसंधान के माध्यम से SARS-CoV-2 वायरस को म्यूटेट करना जारी रखना है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक आबादी में वैरिएंट के फैलने से पहले नए टीके बना लेना है?

3. क्या फाइजर ने इस शोध की देखरेख करने की अपनी योजनाओं के संबंध में संघीय अधिकारियों के साथ बातचीत की है? कृपया उन व्यक्तियों के नाम और एजेंसियों की जानकारी दें।

4. फाइजर ने यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं कि म्यूटेट वायरस प्रयोगशाला से लीक न हो और बड़ी आबादी को संक्रमित न करे?

5. क्या फाइजर ने इस शोध में सहयोग करने के लिए अन्य बायोफार्मास्यूटिकल कंपनियों के साथ काम किया है? कृपया उन संस्थाओं को सूचीबद्ध करें, जिनके साथ आप संपर्क में रहे हैं।

6. क्या आप भविष्य में SARS-CoV-2 वैक्सीन को म्यूटेट करने वाले किसी भी शोध को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं, क्योंकि पर्याप्त साक्ष्य ने संकेत दिया है कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में इसी तरह के खतरनाक शोध से वायरस के शुरुआत में बढ़ने और दुनिया भर में फैलने की आशंका है?

जॉर्डन वॉकर और ‘प्रोजेक्ट वेरिटास’ स्टिंग ऑपरेशन

स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए जाने जाने वाले रूढ़िवादी मीडिया संगठन समूह ‘प्रोजेक्ट वेरिटास’ ने फाइजर के निदेशक जॉर्डन वॉकर के साथ एक मुलाकात तय की थी। इस दौरान उनसे दवा कंपनी द्वारा विकसित वैक्सीन के बारे में पूछताछ की। इसका वीडियो 26 जनवरी 2023 को जारी किया गया था।

इस दौरान वॉकर ने फाइजर द्वारा किए जा रहे कार्यों और कंपनी के भीतर चल रही शोध एवं संतुलन की कमी के बारे में खुलासे किए। उन्होंने बिना कोई परवाह किए कहा कि फाइजर टीकों का एक नया वैरिएंट विकसित करने के लिए कोविड-19 वायरस को शक्तिशाली बनाने पर विचार कर रही है।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महामारी फाइजर के लिए दूध देने वाली गाय की तरह रही है और आने वाले दिनों में भी ऐसे ही बनी रहेगी। वॉकर ने फार्मा कंपनी के नए कोविड-19 टीकों से पैसा बनाने के विचार पर कहा, “हाँ, यह एकदम सही होगा।”

जॉर्डन वॉकर ने यह भी कहा कि फाइजर सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बेहद फायदेमंद रहा है। उन्होंने इसे पिछला दरवाजा कहा और बताया कि जो अधिकारी आज दवाओं की जाँच एवं समीक्षा करते हैं, वे बाद में उसी फार्मा कंपनी में शामिल हो जाते हैं। इसलिए वे कंपनी के प्रति कठोर नहीं होते।

कोरोना वायरस कैसे फैला

गौरलतब है कि चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) से कोरोना वायरस लीक हुआ था। यह दावा यहाँ काम कर चुके एक वैज्ञानिक ने किया था। वैज्ञानिक एंड्रयू हफ का दावा था कि कोविड-19 एक मानव निर्मित वायरस है, जो WIV से लीक हो गया था।

हफ वायरस का अध्ययन करने वाले न्यूयॉर्क स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था के लिए भी काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि कोविड को ढाई साल से पहले चीन में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से लीक किया गया। हफ ने इसे 9/11 के बाद की सबसे बड़ी अमेरिकी खुफिया विफलता बताया और इसके लिए अधिकारियों को दोषी ठहराया था।

जुबैर एंड गैंग ने ‘सर तन से जुदा’ दस्ते को दिए नए शिकार: विरोध हो रहा था ‘पठान’ का, ईशनिंदा बता हिंदुओं की तस्वीरें बढ़ा रहे इस्लामवादी

शाहरुख खान की फिल्म पठान (Pathan) को लेकर विवाद अब खतरनाक मोड़ ले चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में इस्लामवादियों ने कई जगहों पर ‘सर तन से जुदा‘ के नारे लगाए। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्विटर पर ऐसे दो वीडियो साझा किए हैं जिनमें इस जानलेवा नारे को सुना जा सकता है।

दोनों वीडियो मध्य प्रदेश के इंदौर के हैं। पहला वीडियो बड़वाली चौकी का और दूसरा खजराना पुलिस स्टेशन के बाहर का। दोनों वीडियो में मुस्लिम पुरुषों, छोटे बच्चों को ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा’ और ‘अल्लाह हो अकबर’ का मजहबी नारा लगाते हुए सुना जा सकता है।

आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ

‘पठान’ के विरोध में बुधवार (25 जनवरी 2023) सुबह हिंदू कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया। ऐसे ही एक विरोध के तहत हिंदू कार्यकर्ता इंदौर के सपना संगीता रोड स्थित आईनॉक्स थिएटर पहुँचे और लोगों से फिल्म न देखने का आग्रह किया। उन्होंने कथित तौर पर विरोध करते हुए थिएटर में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। कुछ कार्यकर्ता छत्रीपुरा थाना अंतर्गत कस्तूर थियेटर के बाहर भी जमा हुए थे।

हिंदू कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ नारे लगाए। इससे नाराज मुस्लिम समुदाय ने पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्रा से मुलाकात की और कथित रूप से ये नारे लगाने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर मुस्लिम समुदाय ने इंदौर के कई हिस्सों में ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। कथित तौर पर, मुस्लिम चंदन नगर पुलिस स्टेशन पहुँचे और थाने के सामने जानलेवा नारे लगाए। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ था। विनोद बंसल द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में मुसलमानों को खजराना पुलिस स्टेशन के सामने नारे लगाते देखा जा सकता है।

छत्रीपुरा थाना प्रभारी पवन सिंघल ने कहा, “पठान के खिलाफ कस्तूरी टॉकीज परिसर में एक संगठन द्वारा प्रदर्शन किया गया था। विरोध के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने एक आपत्तिजनक नारा लगाया। इसके बाद एक समुदाय के कुछ सदस्यों ने पुलिस से संपर्क किया।” दर्ज शिकायत के आधार पर कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 505 के तहत मामला दर्ज किया गया।

मुहम्मद के खिलाफ कथित नारे लगाए जाने के बाद मुस्लिम समुदाय ने चंदन नगर पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद, पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत किया और उन्हें सूचित किया कि चूँकि घटना छत्रीपुरा थाने में हुई थी, इसलिए प्राथमिकी भी वहीं दर्ज की जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर छत्रीपुरा पुलिस स्टेशन में जाकर विरोध किया, जहाँ एक प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने बुधवार (25 जनवरी 2023) की देर रात 4 हिंदू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिन्होंने कथित तौर पर मुस्लिमों को नाराज करने वाले नारे लगाए थे।

‘सर तन से जुदा’ का नारा लगाने वालों की अब तक गिरफ्तारी नहीं, विहिप ने जारी किया बयान

ऑपइंडिया की जानकारी के अनुसार, इंदौर पुलिस ने ‘सर तन से जुदा’ का नारा लगाने के लिए अभी तक किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया है। इस नारे के कारण अतीत में हिन्दुओं की हत्या और हिंसा हुई है। नारेबाजी के बाद VHP ने इस घटना के बारे में एक बयान जारी किया, जिसमें और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

VHP के अनुसार, जब नारे लगाए जा रहे थे मुस्लिम धार्मिक प्रतीकों से हिंदुओं की पहचान कर उन पर हमला कर रहे थे। विहिप के अनुसार कुछ के साथ मुस्लिमों ने धक्का-मुक्की भी की, जबकि अन्य पर चाकुओं से भी हमला किया गया। कई को जान से मारने की धमकियाँ सोशल मीडिया पर दी जारी की जा रही है। VHP को आशंका है कि इस्लामवादी इस मामले को हिंसक रूप से बढ़ा सकते हैं।

विहिप ने अपनी प्रेस नोट में कहा है कि 25 जनवरी 2023 को एजाज नाम का शख्स और उसका दोस्त एक हिंदू कार्यकर्ता प्रकाश के पिता के घर में जबरदस्ती घुस गया और संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। प्रकाश ने चंदन नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है और इंदौर पुलिस ने मामले के संबंध में कोई गिरफ्तारी नहीं की है।

VHP के बयान में आगे कहा गया है कि जिन 4 हिंदू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, वे पहले से ही मुस्लिमों के निशाने पर थे और उन्हें साजिश के तहत गिरफ्तार करवाया गया है। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से एक तनु शर्मा के बारे में VHP का कहना है कि वह पिछले कुछ महीनों से लव जिहाद के खिलाफ काम कर रहा है। इसके अलावा कुछ महीने पहले तनु शर्मा ने चंदन नगर हवाई अड्डे के बगल में जमीन पर कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान शुरू किया था।

उन्होंने मामले में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उसे अपने अभियानों में सफल होते देख भू-माफियाओं और जिहादियों ने उसके खिलाफ साजिश रची है। VHP ने माँग की है कि तनु शर्मा को इंदौर पुलिस सुरक्षा दे और मामले में गिरफ्तार अन्य लोगों की भी सुरक्षा सुनिश्चित करे।

4 ऑडियो क्लिप जिसमें हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या की बात कही गई है

विश्व हिंदू परिषद ने पुलिस को 4 ऑडियो क्लिप भी सौंपे हैं जो अब व्हाट्सएप पर प्रसारित हो रहे हैं। इन ऑडियो क्लिप में एक कथित मुस्लिम व्यक्ति को हिंदुओं को गाली देते हुए और तनु शर्मा का सिर कलम करने की बात करते हुए सुना जा सकता है। ऑडियो में मुस्लिम व्यक्ति को अन्य मुस्लिमों से तनु शर्मा को खोजने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है ताकि उसकी हत्या की जा सके। एक ऑडियो में मुस्लिम व्यक्ति का कहना है कि अगर इस्लाम का सवाल नहीं होता तो वह हत्या का आह्वान नहीं करता, लेकिन अब जब पैगंबर मुहम्मद का नाम लिया गया है तो इन हिंदू कार्यकर्ताओं को खोज कर मार दिया जाना चाहिए।

एक अन्य ऑडियो में, मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार किए गए हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ का आह्वान करते हुए सुना जा सकता है।

सोशल मीडिया पर भी तन्नू शर्मा के खिलाफ एक हैशटैग ट्रेंड करता देखा गया है, जहाँ मुसलमानों ने उनकी गिरफ्तारी और उनका सिर कलम करने का आह्वान किया है। हिंदू कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए कॉन्ग्रेस के नेता, एआईएमआईएम के नेता और तथाकथित मुस्लिम ‘पत्रकार’ और पोर्टल एक साथ आ गए। मिल्लत टाइम्स और उसके ‘पत्रकार’ मामले को भड़काने में सबसे आगे थे।

एआईएमआईएम और कॉन्ग्रेस नेता भी यही राग अलाप रहे।

तथाकथित ‘पत्रकारों’ और मीडिया ने हिंदू कार्यकर्ताओं की तस्वीरें लीक कीं

मुस्लिम केंद्रित मीडिया पोर्टल, सियासत टाइम्स ने सबसे पहले अपनी समाचार रिपोर्ट पर गिरफ्तार किए गए 4 हिंदू कार्यकर्ताओं की तस्वीरों को प्रकाशित किया था। 4 की तस्वीर को पोर्टल द्वारा फीचर इमेज के रूप में उपयोग किया गया था।

सियासत डॉट कॉम का फीचर इमेज

जमानत पर छूटे AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने एक स्वयंभू मुस्लिम पत्रकार के ट्वीट को रीट्वीट किया, जिसने हिंदू कार्यकर्ताओं की तस्वीरों को ट्वीट किया था। उल्लेखनीय है कि जुबैर ने नूपुर शर्मा के जीवन को भी खतरे में डाला दिया था।

मुहम्मद जुबैर द्वारा ने एक मुस्लिम पत्रकार का के ट्वीट को रीट्वीट किया

उल्लेखनीय है कि इस्लामवादियों द्वारा कथित ईशनिंदा के आरोप में हिन्दुओं की हत्याएँ की जाती रही है। यह लिस्ट काफी लंबी है। हाल ही में नूपुर शर्मा का समर्थन करने के आरोप में दो हिंदुओं कन्हैया लाल औए उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई थी। नूपुर शर्मा मामले में मुहम्मद जुबैर ने एक टीवी डिबेट की उनकी एक एडिटेड क्लिप ट्वीट की थी। इस वजह से दुनिया भर के इस्लामवादियों ने उनका सिर कलम करने और बलात्कार की धमकी दी थी।

बिना अनुमति लिए DU में BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का ऐलान: विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा- पुलिस तैनात, लेंगे कठोर ऐक्शन

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री (BBC Documentary) का विवाद बढ़ता जा रहा है। देश के कई हिस्सों में बवाल होने के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का ऐलान हुआ है। डीयू की प्रॉक्टर रजनी अब्बी का कहना है कि इसके लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन से अनुमति नहीं ली गई है। स्क्रीनिंग की सूचना पुलिस को दे दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस (Congress) के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और भीम आर्मी स्टूडेंट्स फेडरेशन (BASF) ने स्क्रीनिंग का ऐलान किया है। यह स्क्रीनिंग शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को शाम 5 बजे विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में बने आर्ट्स डिपार्टमेंट के बाहर होनी है।

विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रॉक्टर रजनी अब्बी ने कहा, “स्क्रीनिंग होने की जानकारी मिलने के बाद हमने दिल्ली पुलिस को सूचना दे दी है। पुलिस कार्रवाई करेगी। सुरक्षा बलों की उचित तैनाती की जाएगी। हम इस तरह की स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दे सकते।”

उन्होंने यह भी कहा, “हमें जानकारी मिली है कि एनएसयूआई आर्ट्स डिपार्टमेंट में इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की प्लानिंग कर रहा है। इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। हम इस तरह के व्यवहार की अनुमति नहीं देंगे।”

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) में बुधवार (25 जनवरी 2023) को डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने की तैयारी की गई थी। हालाँकि, जामिया में स्क्रीनिंग से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया था।

वहीं, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में गुरुवार (26 दिसंबर 2023) को SFI ने विश्वविद्यालय परिसर में बिना अनुमति के डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। इसके विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) की स्क्रीनिंग की। स्क्रीनिंग को लेकर विश्वविद्यालय ने कहा कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। वहीं, ABVP के छात्रों ने विश्वविद्यालय के गार्ड्स पर मारपीट का आरोप लगाया है।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में भी गुरुवार (26 जनवरी 2023) को डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग हुई। पुदुच्चेरी विश्वविद्यालय में स्क्रीनिंग के दौरान SFI और ABVP के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस झड़प में 5 छात्रों के घायल होने की खबर है। 

प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम (PSF) ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट और सोशल साइंसेज (TISS) में भी डॉक्यूमेंट्री दिखाने का ऐलान किया है। PSF ने कहा है कि वह शनिवार (28 जनवरी 2023) को इसकी स्क्रीनिंग करेगा। हालाँकि, TISS मैनेजमेंट ने अब तक इसके लिए अनुमति नहीं दी है।

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने गुजरात दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है।

बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए हैं। BBC की इस पक्षपातपूर्ण डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं।

मुस्लिम महिला को दी BJP कार्यकर्ता होने की सजा, घर से निकाल शौहर कर रहा दूसरा निकाह: PM-CM से मदद की गुहार

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur, Uttar Pradesh) की भाजपा नेत्री और अल्पसंख्यक आयोग की पूर्व सदस्य सोफिया अहमद ने अपने शौहर शारिक अराफात पर दूसरा निकाह करने का आरोप लगाया है। सोफिया ने यूपी पुलिस से शौहर का दूसरा निकाह रोकने की अपील की।

शारिक आराफात समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से 4 बार की विधायक रहीं गजाला लारी के भाई हैं। मूल रूप से चेन्नई निवासी सोफिया अहमद ने शारिक और उनकी बहन गजाला से अपनी जान को बताते हुए मदद माँगी है। उन्होंने कहा कि उनका भाजपा से जुड़ा होना ससुराल वालों को पसंद नहीं आ रहा है।

सोफिया का कहना है कि भाजपा कार्यकर्ता होने की वजह से शौहर शारिक ने पहले तो उन्हें बिना तलाक दिए घर से निकाल दिया और अब दूसरा निकाह करने की तैयारी में है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, सोफिया और शारिक की शादी साल जून 2015 में हुई थी। वर्ष 2016 में उनके बीच के रिश्ते खराब हो गए।

आरोप है कि अगस्त 2016 में शौहर शारिक ने एक तलाक देकर सोफिया को एक साल के बच्चे के साथ घर से निकाल दिया। इसके बाद सोफिया स्वरूप नगर की एक फ्लैट में रहने लगी। ससुराल वालों से प्रताड़ित सोफिया ने उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराया था। हालाँकि, समय बीतने के साथ सुलह समझौता हो गया और वह वर्ष 2019-2021 के बीच ससुराल आने-जाने लगी।

सोफिया का आरोप है कि उन पर ससुराल पक्ष की तरफ से भाजपा छोड़ने का लगातार दबाव बनाया जाता रहा है। सोफिया ने ऐसा नहीं किया और अब उन्हें पता चला है कि शौहर दूसरा निकाह करने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद सोफिया ने पुलिस कमिश्नर बीपी जोगदंड से निकाह रोकने की अपील की है। पुलिस कमिश्नर जोगदंड ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

इसके पहले 24 जनवरी 2023 को सोफिया ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में सोफिया ने सपा विधायक गजाला लारी और उनके परिवार से जान का खतरा बताया था। वीडियो में उन्होंने कहा, “मैं पूर्व अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य रही हूँ। मैं भाजपा से जुड़ी हूँ और यह मेरे पति को पसंद नहीं है। मुझ पर पार्टी छोड़ने का दबाव डाला जा रहा है।”

सोफिया ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ (CM Yogi Adityanath) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से मदद की गुहार लगाई थी। इस दौरान उन्होंने अपने शौहर की दूसरे निकाह का भी जिक्र किया था।

‘गूँजेगा तो यहाँ सिर्फ जय श्री राम’: शाहरुख की फिल्म पर कंगना का पैगाम, कहा- इसका नाम ‘इंडियन पठान’ होना चाहिए था

अपनी अदाकारी और बेबाक अंदाज के लिए मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर दमदार वापसी की है। वापसी के साथ ही उन्होंने शाहरुख खान (Shahrukh Khan) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

एक्ट्रेस ने शुक्रवार (27 जनवरी 2023) को इस विवादित फिल्म को लेकर सिलसिलेवार कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा कि जो लोग ‘पठान’ को नफरत पर प्यार की जीत बता रहे हैं, वह सही है, लेकिन किसके प्यार के ऊपर किसकी नफरत? आइए इस पर बात करें कि कौन टिकट खरीद रहा है और इसे सफल बना रहा है?”

एक्ट्रेस ने कहा, “हाँ, ये भारत का प्यार है, जहाँ 80 प्रतिशत हिंदू रहते हैं और फिर भी एक फिल्म जिसका नाम पठान है, उसमें हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी ISI को अच्छा दिखाया गया है, वो फिल्म सक्सेसफुली चल रही है। ये भारत की महानता है। बिना किसी नफरत और जजमेंट से परे, जो देश को महान बनाती है।”

कंगना ने आगे लिखा, “ये भारत का प्यार है, जिसने नफरत और दुश्मनों की ओछी राजनीति पर जीत हासिल की है।” कंगना यहीं नहीं रुकतीं हैं। वह आगे लिखती हैं, “लेकिन उन सभी लोगों के लिए जिनकी उम्मीदें हाई हैं… ‘पठान’ सिर्फ एक फिल्म हो सकती है… गूँजेगा तो यहाँ सिर्फ जय श्री राम… जय श्री राम।”

‘मणिकर्णिका: झाँसी की रानी’ फिल्म की एक्ट्रेस ने आगे कहा, “मुझे यकीन है भारत के मुस्लिम देशभक्त हैं और अफगान पठानों से बिल्कुल अलग हैं। भारत कभी अफगानिस्तान नहीं हो सकता। हम सभी को पता है अफगानिस्तान में क्या हो रहा है। वह नर्क से भी बदतर है। इसलिए ‘पठान’ फिल्म की स्टोरीलाइन के मुताबिक उसका सही नाम ‘इंडियन पठान’ होता।”

वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना रनौत ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘इमरजेंसी’ की शूटिंग पूरी कर ली है। हाल ही में उन्होंने इस फिल्म के सेट से कुछ फोटोज भी शेयर की। एक्ट्रेस इस फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का किरदार निभाती नजर आएँगी। कंगना रनौत ने ‘इमरजेंसी’ फिल्म को खुद डायरेक्ट किया है। इस फिल्म में कंगना के अलावा अनुपम खेर, मिलिंद सोमण, सतीश कौशिक और श्रेयस तलपड़े भी हैं।

भगवा बिकनी, बेशरम रंग पर हुआ विवाद

बता दें कि यशराज फिल्म्स की बैनर तले बनी शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण स्टारर स्पाई-एक्शन फिल्म ‘पठान’ 25 जनवरी 2023 को रिलीज हुई। फिल्म कई कारणों से विवादों में रही है। फिल्म के ‘बेशरम रंग’ गाने से धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। इसमें दीपिका भगवा बिकनी पहनकर शाहरुख के साथ रोमांस करते हुए नजर आई थीं।

इसके बाद फिल्म के दूसरे गाने ‘झूमे जो पठान’ ने विवाद खड़ा कर दिया, क्योंकि यह म्यूजिक डायरेक्टर विशाल-शेखर के पुराने गाने का कॉपी था। इसके अलावा, नेटिज़न्स ने भी आरोप लगाया था कि फिल्म के कई दृश्य हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों से कॉपी किए गए हैं।

वो अंधविश्वास बता खारिज करेंगे… आप भौतिक विज्ञान से आगे आध्यात्मिक विज्ञान की डोर थामे सनातन परम्परा पर गर्व कीजिए

धीरेन्द्र शास्त्री को लेकर पिछले कई दिनों से एक बहस चल रही है पूरे देश में कि चमत्कार कुछ नहीं होता, सब ट्रिक है। अब कौन समझाए इनको कि कुछ चीजें ऐसी हैं जो भौतिक विज्ञान की पकड़ से बाहर की बात है और अल्बर्ट आइन्स्टाइन जैसे वैज्ञानिक ने भी यह माना था। उन्होंने अपने आखिरी समय में यह माना कि प्रकृति के कुछ रहस्यों को उजागर कर पाना भौतिक विज्ञान की पकड़ से बाहर की बात है।

मेरे कहने का तात्पर्य धीरेन्द्र शास्त्री को सही या गलत साबित करना बिल्कुल भी नहीं है, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि चमत्कारों से इनकार नहीं किया जा सकता है।

सनातन परम्परा में इसके रहस्यदर्शी मनीषियों ने अनेक ऐसी विधियाँ खोजी थीं, जिनसे ऐसे सारे चमत्कार सम्भव हैं। चमत्कार से इनकार नहीं किया जा सकता है, बस जरूरत होती है संकल्प की सुपात्र बनने की और तप की। और इसमें पूर्व जन्म के तप के अंकुरण भी उदित होकर उत्तरदायी बनते हैं, ऐसा सनातन परम्परा में माना जाता है।

शंकराचार्य का बत्तीस वर्ष जैसी अल्पायु में इतने विराट काम कर पाना वरना संभव न होता। शंकराचार्य मंडन मिश्र प्रसंग में शंकराचार्य द्वारा परकाया प्रवेश के माध्यम से स्त्री रहस्य जानने का वर्णन भी आता है। कोई पूछे इन तर्क के महारथियों से कि यह चमत्कार ही था तप का या कोई ट्रिक थी।

ओशो रजनीश ने भी ऐसे तमाम प्रसंग बताए हैं।

एक अमेरिकी घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा है कि एक व्यक्ति के साथ दुर्घटना होती है और वह कोमा में पहुँच जाता है। अस्पताल में पड़ा है और डॉक्टर को कोई उपाय नहीं सूझ रहा है, तभी अचानक उसकी चेतना जागती है और वह अपनी पूरी समस्या और इलाज बताता है। साथ ही यह भी बताता है कि अगर इतने घंटे तक दवा उपलब्ध न हुई तो उसका शरीर मर जाएगा।

दुर्घटनाग्रस्त उस आदमी के बताए अनुसार वह दवाई उपलब्ध करवा कर उपचार किया जाता है। और वह सही हो जाता है। बाद में उसने न जाने कितने लोगों की बीमारियों का उपचार इसी तरह से बताकर किया, लोगों को ठीक किया उसने।

इस रहस्य के बारे में पूछने पर उसने बताया कि यह वो हमेशा नहीं कर पाता है। उसने कहा:

“मैं ऐसा महसूस करता हूँ कि जब मेरी आँखों के मध्य खिंचाव होता है और उसके बाद जब मैं नहीं होता हूँ, तब ही यह चमत्कार घटते हैं।”

तिब्बत के लामाओं में भी तो ऐसे प्रयोगों की परम्परा रही है पूरी।

रहस्यों के साथ रामकृष्ण परमहंस का नाम हमेशा से जुड़ा रहा है। उनका एक किस्सा बड़ा ही रोचक है। जब उन्होंने सखी सम्प्रदाय की साधना की तो उनके स्तन उभर आए थे और मासिक धर्म भी शुरु हो गया था, यानि वो पूरी तरह से स्त्री बन चुके थे। कई भौतिक विज्ञानी चिकित्सक हैरत में थे इस चमत्कार को देखकर। लेकिन होता है, साधना और संकल्प से कोई भी चमत्कार सम्भव है।

एक और उदाहरण देना चाहूँगा ओशो के उद्धरण के साथ, जिसके ऐसे भी लोग हुए हैं इस देश में जिन्होंने योग साधना से अपने प्राणों पर काबू करने का कई बार परीक्षण किया और चिकित्सकीय परीक्षणों में वैज्ञानिक मानक के अनुसार पश्चिम के वैज्ञानिकों ने डेथ सर्टिफिकेट बना दिया उनका। लेकिन उन्होंने अपने प्राण वापस लौटा लिए।

कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि यदि कोई चीज आपकी पकड़ से बाहर की है तो आप उसे महज अंधविश्वास बताकर खारिज नहीं कर सकते हैं।

सनातन परम्परा के मनीषियों के कई अविष्कार हैं ऐसे, जिन पर पश्चिम का विज्ञान आज तक पता नहीं कर सका, बस अपने अहंपोषण की खातिर उनको अंधविश्वास बताकर खारिज करने के प्रयास जरूर करता रहा है।

मेरे कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि विधर्मियों के विलासी विमर्श का हिस्सा बनने के बजाय गर्व करना सीखिए अपनी सनातन परम्परा पर।

ज्यादा सुरक्षित-ज्यादा कंट्रोल, क्या एंड्रॉयड को रिप्लेस कर देगा BharOS: देसी ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानिए सब कुछ

भारत ने अपना स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम भार ओएस (BharOS) लॉन्च किया है। फिलहाल यह आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। लेकिन आने वाले दिनों में इससे Android और iOS को कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है। मंगलवार (25 जनवरी, 2023) को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अश्विनी वैष्णव की उपस्थिती में आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम ‘BharOS’ की टेस्टिंग की गई।

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम मार्केट में फिलहाल गूगल का एंड्रॉयड (Android) और एप्पल का आईओएस (iOS) छाया हुआ है। भारतीय भार ओएस का मुकाबला एंड्रॉयड और आईओएस से है। डेवलपर्स का कहना है कि एंड्रॉयड के मुकाबले यह सुरक्षित और कम स्पेस लेने वाला ओएस है।

क्या है देसी ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS ?

भार ओएस (BharOS) को आईआईटी मद्रास के एक स्टार्टअप जेएंडके ऑपरेशन प्राइवेट लिमिटेड (Jandk Operations Private Limited) ने विकसित किया है। प्रोजेक्ट को विकसित करने में भारत सरकार ने भी वित्तीय सहायता दी है। भार ओएस भी एंड्रॉयड ओपन सोर्स प्रोजेक्ट (AOSP) का इस्तेमाल करता है। इसलिए एंड्रॉयड और भार ओएस में काफी समानता है। वहीं iOS एप्पल का प्रोपराइटरी ऑपरेटिंग सिस्टम है। BharOS और ios में ज्यादा समानता नहीं है।

BharOS की विशेषताएँ

बताया जा रहा है कि BharOS में कोई डिफॉल्ट ऐप या सर्विस उपलब्ध नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि यूजर जो ऐप चाहें अपने से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप कई तरह की परमिशन माँगते हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि BharOS अपने यूजर के पास ज्यादा कंट्रोल देगा। वह अपनी पसंद का ऐप डाउनलोड कर सकेगा, जिसके फीचर्स पर उसे ज्यादा भरोसा होगा। यानी BharOS को प्राइवेसी के लिहाज से अधिक सुरक्षित माना जा सकता है। इसके लिए BharOS को अपना प्ले स्टोर डिवेलप करना होगा जहाँ से यूजर को पसंद के ऐप मिल सकें।

प्री एप्लीकेशन स्टोर न होने से यूजर्स को ज्यादा स्टोरेज स्पेस मिलेगा। बताया गया है कि इस ऑपरेटिंग सिस्टम में कोई डिफॉल्ट ऐप भी नहीं होगा। यूजर्स को अनचाहे ऐप का इस्तेमाल करने के लिए भी मजबूर नहीं किया जाएगा। BharOS एंड्रॉयड की तरह नेटिव ओवर द एयर (NOTA) अपडेट प्रदान करेगा। इसका मतलब होता है सॉफ्टवेयर का अपडेट संस्करण (version) डिवाइस पर अपने आप डाउनलोड इंस्टॉल हो जाएगा।

देसी ऑपरेटिंग सिस्टम प्राइवेट ऐप स्टोर सेवाओं (PASS) के द्वारा भी पसंद के ऐप डाउनलोड करने की अनुमति देगा। इसके लिए विश्वसनीय प्राइवेट ऐप्स को ही अनुमति दी जाएगी।

BharOS से जुड़े इन सवालों का जवाब मिलना बाकी

भार ओएस बनाने वाली कंपनी ने अभी तक यह जानकारी नहीं दी है कि वह स्मार्टफोन कंपनियों से किस तरह कनेक्ट करेगी। अभी यह भी साफ नहीं है कि BharOS आम लोगों के लिए कब तक उपलब्ध होगा। ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले फोन सस्ते होंगे या महँगे? BharOS का अपना ऐप स्टोर होगा या नहीं?

यदि भार ओएस यूजर्स को अफना ऐप स्टोर देता है तो इससे गूगल ऐप स्टोर की जरूरत खत्म हो जाएगी। हो सकता है अपने ऐप स्टोर में ओएस ऐसे ऐप्स को प्राथमिकता दे जो भारतीय यूजर्स के लिए ज्यादा यूजर फ्रेंडली हों।

कई बड़ी चुनौतियाँ

मौजूदा बाजार स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि BharOS की राह बहुत आसान नहीं होने वाली है। उदाहरण के लिए ज्यादातर भारतीय एंड्रॉयड यूजर जीमेल का इस्तेमाल करते हैं जो स्मार्टफोन की डिफॉल्ट ईमेल सर्विस है। अगर BharOS के ऐप स्टोर पर गूगल के ऐप नहीं होंगे तो कितने लोग BharOS वाला स्मार्टफोन चुनेंगे इस पर संशय होगा। गूगल और मेटा जैसी कंपनियाँ द्वारा उनके फर्स्ट पार्टी ऐप्स को BharOS के पर पोर्ट करवाना आसान नहीं होगा।

स्मार्टफोन कंपनियाँ भी इस ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ फोन लॉन्च करने के लिए एकदम से शायद ही तैयार हों। दरअसल ब्लैकबेरी, माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग ने अपने मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम लॉन्च किए थे। लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। माइक्रोसॉफ्ट का विंडोज फोन बिल्कुल ही अलग ऑपरेटिंग सिस्टम पर था और काफी एडवांस्ड माना गया था, लेकिन नाकामयाब हो गया। इससे समझा जा सकता है कि BharOS के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं।

एक दिक्कत यह भी है कि भारत में अधिकतर एंड्रॉयड फोन अब चीन की कंपनियाँ बेच रही हैं। ये चीनी कंपनियाँ आसानी से भारतीय ऑपरेटिंग सिस्टम पर शिफ्ट हो जाएँगी कहना मुश्किल है।

पाकिस्तान का पानी भी बंद करेगा भारत? सिंधु जल संधि के उल्लंघन पर नोटिस, जवाब के लिए 90 दिन की मोहलत

साल 1960 में हुई सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) में संशोधन के लिए भारत ने पाकिस्तान (Pakistan) को नोटिस जारी किया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने संधि के प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन का उल्लंघन किया है। इसलिए उसे नोटिस जारी करना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंधु जल संधि को लेकर भारत सरकार ने पाकिस्तान को यह नोटिस बुधवार (25 जनवरी 2023) को भेजा है। इस नोटिस को लेकर भारत सरकार का कहना है कि भारत पाकिस्तान के साथ हुई जल संधि को लागू करने का समर्थक और जिम्मेदार सहयोगी रहा है। लेकिन, पाकिस्तान की गतिविधियों ने भारत को यह नोटिस भेजने के लिए मजबूर किया है।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि साल 2015 में पाकिस्तान ने भारत की किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं (HEPs) पर अपनी तकनीकी आपत्तियों की जाँच के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति का अनुरोध किया था। हालाँकि, अगले ही साल यानी साल 2016 में पाकिस्तान ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए इस अनुरोध को वापस ले लिया। साथ ही, कहा कि एक मध्यस्थ अदालत उसकी आपत्तियों पर फैसला सुनाए।

पाकिस्तान के लगातार कहने पर विश्व बैंक ने हाल ही में तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थ न्यायालय दोनों पर ही कार्रवाई शुरू की है। हालाँकि, एक ही मुद्दे पर इस तरह की दो प्रक्रियाएँ सिंधु जल संधि के किसी भी प्रावधान में नहीं है। इसके विरोधाभासी परिणाम सामने आ सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत चाहता है कि आपस में बातचीत से मामले का हल निकाला जाए। वहीं, पाकिस्तान इससे बचता रहा है। साल 2017 से 2022 तक स्थायी सिंधु आयोग की 5 बैठकें हुई हैं। सभी बैठकों में पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर चर्चा करने से इनकार किया।

भारत ने पाकिस्तान को यह नोटिस सिंधु जल संधि के भौतिक उल्लंघन को सुधारने के लिए 90 दिनों के अंदर अंतर-सरकारी वार्ता में शामिल होने के लिए मौका देने के लिए किया है। इस प्रक्रिया के जरिए भारत बीते 62 सालों में पाकिस्तान की हरकतों से मिली सीख के साथ सिंधु जल संधि में कुछ अपडेट कराना चाहता है।

सिंधु जल संधि…

बता दें कि भारत और पाकिस्तान ने 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के अनुसार सतलज, व्यास और रावी का पानी भारत को दिया गया था। वहीं सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया था। बड़ी बात यह है कि इस संधि में भारत और पाकिस्तान के अलावा विश्व बैंक भी एक हस्ताक्षरकर्ता था।

14 साल की बच्ची से रोज रेप करता था 48 साल का मुकर्रम अली, बना रखे थे Video: पीड़िता ने बच्चे को दिया जन्म, दरिंदे को पुलिस ने दबोचा

दिल्ली की एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता ने बच्चे को जन्म दिया है। मुकर्रम अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता के गर्भवती होने के बाद अली की दरिंगदी सामने आई थी। मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी का है।

मुकर्रम अली ने मोबाइल चोरी का आरोप लगाकर पीड़िता को पहली बार हवस का शिकार बनाया। उसका वीडियो बनाकर फिर ब्लैकमेल करने लगा। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक नाबालिग को एक जगह पर ले जाकर वह रोज रेप करता था।

रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने बताया है कि वह अक्सर मुकर्रम अली की दुकान पर कोल्ड ड्रिंक लेने जाती थी। एक दिन जब वह मुकर्रम के दुकान पर गई तो उसने उस पर फोन चोरी का आरोप लगा दिया। पीड़िता इससे डर गई। इसके बाद वह उसे नंद नगरी ले गया। यहाँ चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे पिलाया। बेहोश होने के बाद रेप कर वीडियो बना लिया। इसके बाद वह ब्लैकमेल कर लगातार नाबालिग का यौन शोषण कर रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार 18 दिसंबर 2023 को लड़की के पेट में दर्द हुआ तो उसके आठ महीने की गर्भवती होने का खुलासा हुआ। शुरुआत में उसने अपने कथित दोस्त सलमान पर वीडियो बनाकर रेप का आरोप लगाया। लेकिन जाँच में सलमान नाम का ऐसा कोई व्यक्ति मिला ही नहीं। इसके बाद पीड़िता ने मुकर्रम अली की दरिंगदगी का खुलासा किया। यह भी बताया कि पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठ बोलने का दबाव भी उसने ही डाला था। मुकर्रम को 25 जनवरी को गिरफ्तार कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया गया।

ससे पहले दिल्ली में ही एक नाबालिग लड़की से रेप और इस्लामी धर्मांतरण के दबाव का मामला सामने आया था। पीड़िता डीयू (Delhi University) की छात्रा है। नाबालिग का आरोप है कि जहाँगीरपुर का रहने वाला शाकिब उसे निकाह के लिए ब्लैकमेल कर रहा था। शाकिब पर पीड़िता के अश्लील फोटो और वीडियो बनाने का भी आरोप है। शाकिब पर रविवार (22 जनवरी 2023) को लड़की के घर पर पत्थरबाजी करने का भी आरोप लगा है। पुलिस ने आरोपित पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। FIR होने के बाद शाकिब फरार हो गया है जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।