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‘नेशनल कॉलेज’ और भगत सिंह के राजनीतिक गुरु: ‘पगड़ी सँभाल ओ जट्टा’ के पीछे की कहानी कहता है ‘क्रांतिदूत’ का 5वाँ भाग ‘बसंती चोला’

ठिठुरती हुई ठण्ड विदा लेने लगती है, प्रकृति में एक नई स्फूर्ति का आगमन होने लगता है और फिर अलसाई रात्रि को दूर करते हुए सूर्य एक नए उत्साह के साथ उदित होता है। बसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति में नए बदलाव होने लगते हैं, किन्तु भारत माता के बंधनों को तोड़ने वाली सुबह कब होगी, इसकी प्रतीक्षा करते हुए न जाने कितनी ही रातें बीत गईं। ‘क्रांतिदूत’ शृंखला की 5वीं पुस्तक ‘बसंती चोला’ बसंती आवरण के साथ ही आई है।

पिछली चार पुस्तकों में हमने क्रांति युद्ध के कई अध्याय पढ़े तथा भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते युवाओं के जोश को देखा। सशस्त्र क्रांति के युद्ध में सम्मिलित हो कई वीर बलिवेदी पर अपने शीश चढ़ा चुके थे, पर उसका हासिल कुछ नहीं हुआ था। अब तक के उनके संघर्षों को आतंकवाद और भटके हुए नौजवान की संज्ञा दे दी गई थी। ‘गदर आंदोलन’ ने भारत के पश्चिमी छोर पर एक नई उम्मीद, एक नई उमंग को जन्म दिया था।

भारत माता की बेड़ियों को दासत्व के बंधन से मुक्त कराने के लिए वहाँ कसमें खाई जा रही थीं। लाला लाजपत राय जैसी महान विभूतियाँ इस बदलते हुए वातावरण की अग्नि की ताप को समझ रहे थे। इस ताप की अग्नि से तपते युवाओं को दिशा देने के ही उद्देश्य से ‘नेशनल कॉलेज’ की स्थापना की गई थी। ‘नेशनल कॉलेज’ में उन्होंने ऐसे शिक्षकों को रखा, जो युवाओं में राष्ट्र प्रेम की भावना को जगाने के साथ-साथ उनका सही मार्गदर्शन भी कर सकें।

और, फिर यहीं से आरम्भ होता है भारत में साम्राज्यवादी बेड़ियों को तोड़कर बसंत लाने का संग्राम। अब अपने राष्ट्र को अपने विचारों से परिचित करवाने का समय आ चुका था। ये बदलाव की राह थी, ये इंकलाब की राह थी। एक राष्ट्र की पहचान उसके विचारों से होती है, यदि आप पर किसी दूसरे राष्ट्र के विचार हावी रहेंगे तो आप स्वतंत्र होते हुए भी उनके गुलाम ही रहोगे। विचारों में परिवर्तन लाने के लिए ही बसंत को आना था।

‘नेशनल कॉलेज’ में इन्हीं विचारों की शिक्षा दी जा रही थी। इस कॉलेज के छात्र थे भगत सिंह, सुखदेव, भगवतीचरण, यशपाल, जयदेव आदि और शिक्षक थे भाई परमानंद, छबीलदास, जयचन्द विद्यालंकार आदि। जयचन्द विद्यालंकार को भगत सिंह का राजनितिक गुरु भी कहा जाता है। क्रांतिदूत शृंखला की पुस्तकों को यदि लेखन की दृष्टी से क्रमबद्ध किया जाए तो इसका स्थान दूसरा रहेगा, पहले पर ‘झाँसी‘ ही रहेगी और तीसरे पर ‘मित्रमेला‘।

इसका कारण है, और वह यह है कि ये पुस्तक अपने विचार रखने में सफल रही है, इसमें कहीं भी कथा में दोहराव नहीं हुआ है। पिछली पुस्तक में कहानी कई जगह दोहरा दी गई थी, जिससे कथा के प्रवाह में बाधा पड़ती थी। उसमें कई स्थानों पर अतिरिक्त जोश का प्रदर्शन होता हुआ भी दिख रहा था। लेकिन, बसंती चोला की कहानी एक प्रवाह में बहे जा रही है, इसलिए पढ़ते हुए कहीं दिक्कत नहीं आई। कहानी भगत सिंह के जीवन से जुड़े कई अध्यायों को बताती हैं, उनके परिवार उनके मित्र, उनके अध्ययन और देश के प्रति उनकी लगन को दिखाती है।

महाराजा रणजीत सिंह की सेना में भगत सिंह के पूर्वज खालसा सरदार थे। उनके दादा जी श्री अर्जुन सिंह, उनके पिता श्री किशनसिंह, चाचा श्री अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह ने कैसे समय-समय पर अंग्रेजों से लोहा लिया, उसकी कहानी है बसंती चोला। ‘पगड़ी संभाल ओ जट्टा’ गीत तो आपने सुन ही रखा होगा, इसके पीछे की क्या कहानी है यदि ये जानने में आपकी दिलचस्पी है, तो क्रांतिदूत शृंखला की ये पुस्तक आपके लिए है। वैसे तो इस कहानी को आप और भी जगह से पढ़ सकते हैं, पर जिस अंदाज़ में ये शृंखला लिखी गई है, वह स्कूल जाने वाले छात्रों तक ये कथा पहुँचाने का श्रेष्ठ माध्यम है।

युवाओं में राष्ट्र के प्रति जागृति और राष्ट्र प्रेम जगाने का प्रयास समय समय पर होता रहा है। लाला जी उसे नेशनल कॉलेज के माध्यम से करने का प्रयास करते हैं, तो मनीष श्रीवास्तव उसे ‘क्रांतिदूत’ शृंखला लिख कर करने का प्रयास कर रहे हैं। एक और अध्याय है ‘पुरजा पुरजा कट मरे’, गीत तो सुना ही होगा, भाई मतिदास और भाई सतिदास की कथा कैसे क्रांतिदूत से जुड़ती है, यहाँ पढ़िए।

बसंत विदा लेने लगी थी, बसंत में आए परिवर्तन से अंग्रेजों की नींद हराम होने लगी थी। फिर अंग्रेजों ने बौखलाहट में ऐसी गलती कर डाली, जिसने उनके साम्राज्य के कभी न डूबने वाले सूर्य को अस्ताचल की ओर मोड़ दिया था। जलियाँवाला बाग में उस दिन रक्त से सनी भूमि पर से जब बसंत विदा ले रही थी, तब एक हाथ की मुठ्ठी ने उस भूमि से तिलक कर विदा होती बसंत की मिट्टी को एक बोतल में क़ैद कर लिया था। उसने कसम खाई थी कि या तो इन राक्षसों से इस भूमि को मुक्त कराऊँगा या आने वाले वर्षों में वसंत के साथ ही विदा ले जाऊँगा।

ये हाथ थे भगत सिंह के और बदलाव की राह उन्होंने अपने लिए चुन ली थी। उन्होंने उस बदलाव को नाम दिया ‘इंकलाब’। बसंती चोला की कहानी अगली पुस्तक के लिए पाठकों को बाँधे रखती है। चंद्रशेखर आज़ाद और गणेश शंकर विद्यार्थी, एक बल और पौरुष की मूर्ति तो दूसरे विचारों से सिंहासन हिलाने की ताकत रखने वाले व्यक्तित्व। अगली पुस्तक में नेशनल कॉलेज के ये छात्र जब इनसे मिलेंगे, तो क्या समा बनेगा उसकी प्रतीक्षा रहेगी। 

‘तुम्हारे भगवान कम शक्तिशाली हैं…’: इलाज के नाम पर पूरे परिवार को बनाया ईसाई, घर से फिकवा दीं हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ

देश भर में लोभ-लालच के जरिए धर्मांतरण (Religious Conversion) का खेल जारी है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक बार फिर जनजातीय समूह के पूरे परिवार का धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है। इंदौर में जनजाति समाज के एक व्यक्ति का इलाज कराने के बहाने उसके पूरे परिवार को धर्म परिवर्तन कराकर ईसाई बना दिया गया।

इस मामले की जानकारी जब हिंदूवादी संगठनों को हुई तो उन्होंने हंगामा कर दिया। इस मामले में तीन महिलाओं सहित सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। यह घटना सांवेर और शिप्रा के बीच आने वाले ग्राम हतुनिया फाटा का है। F

इस गाँव के रहने वाले मान सिंह बिलवाल की शिकायत पर धर्म परिवर्तन के मामले में पास्टर राय सिंह, उसकी पत्नी उर्मिला, बेटे खेमराज, दोस्त हाकिम, उसकी पत्नी मंगली, मान सिंह और उसकी पत्नी कालीबाई के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

खेतिहर मजदूर 30 वर्षीय मानसिंह का कहना है कि दो साल पहले उसकी तबीयत खराब हो गई थी। उसने कई जगह इलाज कराया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। इसी दौरान किसी ने उसे बताया कि झाबुआ के छापरी गाँव में एक चर्च है, जहाँ उसका अच्छे से उपचार हो जाएगा। इसके बाद वह चर्च चला गया।

मानसिंह का कहना है कि जब वह चर्च पहुँचा तो चर्च में उसे पास्टर राय सिंह मिला। वहाँ उन लोगों ने ईसाई धर्म के भगवान का नाम लेने के लिए कहा। इस दौरान उन लोगों ने उसे पानी पिलाया और कुछ दवाएँ भी दीं। इसके बाद वह ठीक होने लगा।

पीड़ित ने कहा कि करीब एक साल पहले पास्टर राय सिंह अपने बेटे और पत्नी को लेकर उनसे मिलने आए। बातचीत के दौरान पास्टर ने कहा कि ‘तुम्हारे भगवान कम शक्तिशाली हैं। तुम्हें ईसाई धर्म के भगवान ने ठीक किया है।’ मानसिंह ने कहा कि इसके बाद पास्टर ने घर से हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर और मूर्तियों को बाहर निकलवा दिया।

पास्टर पर लालच देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उसे कुछ रुपए दिए गए। इसके साथ ही कुछ धार्मिक पुस्तकें भी पढ़ने के लिए दी गईं। इसके बाद पास्टर राय सिंह ने उससे ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहा। पास्टर ने कहा कि ईसाई बनने पर परिवार के बच्चों को अच्छी एजुकेशन, हेल्थ सहित कई सुविधाएँ फ्री में मिलेंगी।

पीड़ित जनजाति ने आरोप लगाया कि इसके बाद पास्टर लगातार उसकी आर्थिक मदद करने लगा। इसके साथ ही वह उसे चर्च आने के लिए कहने लगा। मानसिंह का कहना है कि सोमवार (23 जनवरी 2023) को सोमवार को पास्टर अपनी पत्नी, बेटा और अन्य लोगों के साथ उसके घर आया।

इस दौरान पास्टर ने उसे एक धार्मिक पुस्तक ली और उसमें से कुछ पढ़ते हुए उसके शरीर पर पानी के छींटे डाले। ये सब करने के बाद उसने कहा कि इसके बाद कहा, “अब तुम लोग परिवार सहित ईसाई बन गए हो।” पीड़ित का कहना है कि वह इसके लिए राजी नहीं हुआ और इसके बारे में अपने परिचित को बताया।

गणतंत्र दिवस की झाँकी में भगवान राम और कृष्ण, जम्मू कश्मीर से आए बाबा अमरनाथ: मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तेह रहे मुख्य अतिथि, पहली बार परेड में दिखे अग्निवीर

देश गुरुवार (26 जनवरी 2023) को अपना 74 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने पहली बार कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराया। इसके बाद परेड की शुरुआत हुई। परेड में दिखाई जाने वाली झाँकियों को लेकर हर साल उत्सुकता बनी रहती है। इस साल भी कई बेहतरीन झाँकियों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। परेड के दौरान मिस्र का सैन्य दल मुख्य आकर्षण रहा। इस बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी (Abdel Fattah El-Sisi) हैं। उन्हीं के साथ यह सैन्य दल भारत आया है।

लेफ्टिनेंट कमांडर दिशा अमृत (Disha Amrit) के नेतृत्व में 144 युवा नाविकों की नौसेना टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। मार्च करने वाली टुकड़ी में 3 महिलाएँ और 6 पुरुष अग्निवीर शामिल थे। ऐसा पहली बार है जब अग्निवीरों ने गणतंत्र दिवस की परेड में भाग लिया है। जम्मू कश्मीर की झाँकी में बाबा अमरनाथ शिवलिंग को दिखाया गया।

वहीं इस बार गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश की ओर से झाँकी में अयोध्या दीपोत्सव की झलक दिखाई गई। वर्ष 2017 से ही योगी आदित्यनाथ की सरकार अयोध्या में भव्य तरीके से दीपोत्सव का आयोजन कर रही है। इसी का प्रदर्शन इस बार झाँकी में किया गया है। 2017 के पहले दीपोत्सव के दौरान सरयू के घाटों पर कुल 1.71 लाख दीपक जलाए गए थे।

झारखंड की ओर से झाँकी में देवघर स्थित प्रसिद्ध बैद्यनाथ मंदिर को प्रदर्शित किया गया है। झाँकी में सबसे आगे भगवान बिरसा मुंडा को भी दर्शाया गया है।

हरियाणा की झाँकी भगवद्गीता पर आधारित है। झाँकी में भगवान कृष्ण को अर्जुन के सारथी के रूप में और उन्हें गीता का ज्ञान देते हुए दिखाया गया है। झाँकी ट्रेलर के किनारों पर बने पैटर्न महाभारत के युद्ध के विभिन्न दृश्यों को दिखाते हैं।

वहीं 74वें गणतंत्र दिवस परेड के ग्रैंड फिनाले में भारतीय वायुसेना के 45 विमानों ने भाग लिया। इसमें भारतीय नौसेना का एक और भारतीय सेना के चार हेलीकॉप्टर शामिल थे। इन विमानों ने आसमान में हैरतअंगेज करतब दिखाए। इससे पहले भारतीय सेना के जवानों ने मोटरसाईकिल पर भी शानदार कारनामा दिखाया।

स्कूल में बच्चे कर रहे थे प्रार्थना, स्थानीय मुस्लिमों का समूह आया, कहा- बंद करो मंत्रोच्चार: Video वायरल, शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार

गुजरात के पालनपुर शहर के एक प्राथमिक विद्यालय में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा प्रार्थना बंद करने की धमकी देने का मामला सामने आया है। इस संबंध में विद्यालय के एक शिक्षक ने प्राथमिक शिक्षा अधिकारी से शिकायत की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिमों ने स्कूल के शिक्षकों को रोजाना होने वाले ’20 मिनट के प्रार्थना सत्र’ को बंद करने की धमकी दी है।

घटना सोमवार (23 जनवरी 2023) को ढोंडियावाड़ी पालनपुर स्थित एन कोठारी प्राथमिक विद्यालय (N Kothari Primary School) की है। शिक्षक ने अपनी शिकायत में कहा है कि कुछ असामाजिक तत्व स्कूल में आए और प्रार्थना बंद करने की माँग को लेकर हंगामा करने लगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह जब प्रार्थना शुरू हुई तो 10-12 लोगों की भीड़ वहाँ आ गई। उन्होंने हंगामा करते हुए प्रार्थना बंद करने के लिए कहा। इस स्कूल में 500 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से तक़रीबन 150-175 छात्र मुस्लिम समुदाय के हैं। स्कूल में 16 शिक्षक हैं।

संगीत शिक्षक महेश भाई सोलंकी ने दिव्य भास्कर को बताया कि प्रतिदिन छात्र 20 मिनट मंत्रों के उच्चारण के साथ प्रार्थना करते हैं। प्रश्नोत्तरी आदि सहित अन्य गतिविधियाँ भी होती हैं। उन्होंने कहा, “भीड़ प्रार्थना के समय आई और शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार करने लगी। उन्होंने प्रार्थना बंद करने की माँग की। छात्र डर गए। प्राचार्य ने प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को इस बाबत लिखित शिकायत दी है।”

स्कूल द्वारा दिए गए लिखित शिकायत के अनुसार, “इलाके में रहने वाले कुछ निवासियों को हर सुबह होने वाली प्रार्थना पसंद नहीं है। वे अक्सर स्कूल में समस्या पैदा करते हैं और प्रार्थना बंद करने की माँग करते हैं।” स्कूल ने दिव्य भास्कर को बताया कि छात्र प्रार्थना, मंत्र उच्चारण और अन्य गतिविधियों में भाग लेते हैं। अन्य गतिविधियों के दौरान छात्र क्विज़, सामान्य ज्ञान, समाचार पढ़ने, स्किट और अन्य चीजों में शामिल होते है। स्कूल ने बताया, “इससे छात्र पाठ्येतर गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।”

पहले भी मुस्लिम कर चुके हैं ऐसी माँग

यह पहली बार नहीं है जब मुस्लिमों ने स्कूल में प्रार्थना को रोकने की माँग की है। 2017 में मकतमपुरा के एक मुस्लिम नेता हाजी असरबेग एस मिर्जा (Haji Asrarbeg S Mirza) ने सीबीएसई को पत्र लिखकर इस बाबत शिकायत दर्ज कराई थी। डीएवी इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि स्कूल मुस्लिम छात्रों को प्रार्थना के दौरान गायत्री मंत्र का पाठ करने के लिए मजबूर कर रहा है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया था कि ईद जैसे मुस्लिम त्योहार स्कूल में नहीं मनाए जाते थे। स्कूल ने हालाँकि आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि मुस्लिम छात्र प्रार्थना से दूर रहने के लिए स्वतंत्र हैं।

बैगा, पेपर मेसी, बावन बूटी… देश का हुनर ही जिनकी जिंदगी, उनको भी पद्म पुरस्कार: मिलिए उनसे जो चुपचाप करते रहे काम, अब मोदी सरकार ने दी पहचान

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (25 जनवरी 2023) पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। साल 2023 के लिए 106 लोगों को पद्म अवॉर्ड देने की घोषणा हुई है। 6 करे पद्म विभूषण, 9 को पद्म भूषण और 91 पद्म श्री मिला है। इनमें 19 महिला हैं। 7 लोगों को मरणोपरांत यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलेगा।

जिनलोगों को पद्म पुरस्कार देने की घोषणा की है उनमें कुछ बड़े और चर्चित नाम हैं, जबकि कुछ के बारे में बेहद कम लोग जानते हैं। इन गुमनामों के कार्यों को सम्मानित कर मोदी सरकार ने उन्हें नई पहचान देने का काम किया है। इनमें जोधइया बाई बैगा, सुभद्रा देवी और कपिल देव प्रसाद भी शामिल हैं।

पहले बात करते हैं मध्य प्रदेश के उमरिया की रहने वाली 84 साल की जोधइया बाई बैगा की। इन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने विलुप्त की कगार पर पहुँच चुकी बैगा चित्रकला को अपनी मेहनत व लगन के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाई। वर्ष 2022 में महिला दिवस (8 मार्च) के उपलक्ष्य पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें ‘नारी शक्ति सम्मान’ से सम्मानित कर चुके हैं। बैगा जनजाति से ताल्लुक रखने वाली जोधइया बाई ने इस कला को समाप्त होता देख 63 वर्ष की उम्र में इसे सीखा और आधुनिक पद्धति से इसे फिर से उकेरना शुरू कर दिया। बैगा कला के अंतर्गत भगवान शिव और बाघ के चित्र बनाए जाते हैं।

जोधाइया बाई की कला को विदेशों में भी पहचान मिल चुकी है। इटली, फ्रांस की आर्ट गैलेरियों में भी उनकी कला का प्रदर्शन हो चुका है। हालाँकि जोधइया बाई ने अपना जीवन काफी गरीबी में गुजारा है। जोधइया बाई जब 30 वर्ष की थीं तभी उनके पति का निधन हो गया था। इसके बाद उन्होंने गोबर के उपले और लकड़ियों को बेच कर अपना जीवन गुजारा। इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें बधाई दी है। कहा है कि यह आदिवासी समाज के लिए काफी गर्व की बात है।

बिहार की सुभद्रा देवी को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। सुभद्रा देवी को पेपर मेसी कला के लिए यह पुरस्कार मिला है। यह कला मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में प्रसिद्ध है। दरअसल पेपर मेसी कला के अंतर्गत कागज को गला कर उसकी लुगदी बनाई जाती है और फिर नीना थोथा व गोंद मिलाकर तरह-तरह की कलाकृतियाँ बनाई जाती है।

सुभद्रा देवी को अपनी कला के लिए वर्ष 1980 में राज्य पुरस्कार और 1991 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 90 वर्ष की सुभद्रा अब अपने बेटे के पास दिल्ली में रहती हैं और यहाँ भी इस कला को फैलाने का काम करती हैं।

वहीं 55 साल से बुनकरी का काम कर रहे बिहार के नालंदा के कपिलदेव प्रसाद को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। वह 15 वर्ष की उम्र से ही बुनकर का काम कर रहे हैं। वर्ष 2017 में देश के बेहतरीन बुनकरों के लिए हुई प्रतियोगिता में कपिलदेव प्रसाद को भी चुना गया था। वह आज भी बुनकरी का काम करते हैं और लोगों को इसके लिए ट्रेनिंग भी देते हैं। उन्हें खास 52 बूटी की साड़ी बनाने में उनकी महारत के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है।

राजा भोज ने बनवाया माँ सरस्वती की आराधना का केंद्र, इस्लामिक आक्रांताओं ने रौंदा: दिग्विजय सिंह की ‘तुष्टिकरण’ की भेंट भी चढ़ा भोजशाला

वसंत पंचमी 2023 में गुरुवार (26 जनवरी, 2023) को है। मध्य प्रदेश के धार में एक जगह है – धार। यहाँ वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती, यानी वाग्देवी की पूजा होती है। इस भोजशाला की खासियत ये है कि इस्लामी आक्रांताओं ने इसे जम कर नुकसान पहुँचाया, जिसके बाद मुस्लिम इस पर अपना आधिपत्य मानते हैं। भोजशाला की माँ वाग्देवी की प्रतिमा 114 साल से लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट में रखी हुई है।

अंग्रेजों ने सन् 1875 में खुदाई के बाद इस प्रतिमा को निकाला था, जिसे मुगलों ने आक्रमण कर के खंडित कर डाला था। लंदन से इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई कर रहे धार के कृष पाल ने इस प्रतिमा को देखने के बाद ‘दैनिक भास्कर‘ को बताया है कि भोजशाला को लेकर कई बार हिंसा और दंगे भी हुए हैं। ‘भोज उत्सव समिति’ आज़ादी के बाद से ही इस प्रतिमा को ब्रिटेन से वापस लाने के लिए संघर्ष कर रही है। हिन्दुओं ने इसके लिए लाठियाँ खाई हैं।

फ़िलहाल इस प्रतिमा को छूने की अनुमति नहीं है, लेकिन वहाँ इस बारे में जानकारी चस्पाई गई है। ‘भोज की नगरी नरेशचंद्र नगरी विद्याधरी शांभरी… अर्थात राजा भोज की नगरी की विद्या की देवी’ – प्रतिमा के पास ये लिखा हुआ है। ये 1034 ईस्वी का ही शिलालेख है। म्यूजियम में इस प्रतिमा को ‘देवी अम्बिका’ बताया गया है। कृष पाल ने जब इसे देखा तो घर पर वीडियो कॉल कर सबको दर्शन कराए, उनकी माँ ने तो दण्डवत प्रणाम किया।

1995 में यहाँ एक विवाद हुआ था, जिसके बाद मंगलवार को हिन्दू और शुक्रवार को मुस्लिम यहाँ आने लगे। 12 मई, 1997 को जिला प्रशासन ने आम लोगों को इसमें आने से प्रतिबंधित कर दिया। लेकिन, इसके 3 महीने बाद इसे हटा दिया गया। 18 फरवरी, 2003 में भी यहाँ हिंसा हुई। हिन्दुओं को बगैर फूल-माला मंगलवार को पूजा की अनुमति मिली। 2013 में यहाँ सरस्वती पूजा के दिन और 2016 में नमाज़ के बाद यहाँ माहौल बिगड़ गया था।

2003 में पर्यटकों के लिए भोजशाला को खोल दिया गया। भोजशाला में ढोल-झाँझ और मजीरे के साथ हिन्दू हर मंगलवार पूजा करते हैं। शुक्रवार को मुस्लिम यहाँ नमाज़ पढ़ते हैं। सन् 1034 में परमार शासक राजा भोज ने इसके निर्माण करवाया था, ज्ञान की देवी की आराधना के लिए। नालंदा-तक्षशिला की तरफ यहाँ भी एक आवासीय संस्कृत विश्वविद्यालय हुआ करता था। माघ, बाणभट्ट, कालिदास, भवभूति, भास्कर भट्ट, धनपाल और मानतुगाचार्य जैसे विद्वान अध्ययन करते थे।

यहाँ की दीवारों और स्तंभों पर देवी-देवताओं की आकृतियाँ उकेरी गईं। राजा भोज स्वयं 72 कलाओं और 36 तरह की आयुध विज्ञान के जानकर थे। कई मंदिर, तालाब और विद्यालय उन्होंने बनवाए हैं। 271 वर्षों तक भोजशाला ज्ञान का केंद्र बना रहा। सन् 1269 में कमाल मौलाना यहाँ आकर बसा। ठीक वैसे ही, जैसे अजमेर में पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ माहौल बनाने के लिए ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती को बसाया गया था।

सन् 1305 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण कर के भोजशाला को नुकसान पहुँचाया। सन् 1401 में दिलावर खाँ गोरी ने यहाँ आक्रमण किया। सन् 1514 में महमूद खिलजी ने आक्रमण किया। उसने भोजशाला को मस्जिद बनाने की कोशिश की। कमाल मौलाना की मौत अहमदाबाद में हुई थी, लेकिन खिलजी ने उसका मकबरा धार में बनवा डाला। कहते हैं, प्रथम आक्रमण के समय 1400 विद्वानों ने बलिदान दिया था। महमूद खिलजी के आक्रमण के समय राजपूत सरदार मेदिनी राय के नेतृत्व में वनवासियों की फ़ौज ने लड़ाई लड़ी थी।

1977 के बाद से मंदिर परिसर में नमाज़ शुरू कर दी गई। 12 मई, 1997 को एक फैसला आया। तब दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री हुआ करते थे। उन्होंने भोजशाला में हिन्दुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध (वसंत पंचमी को छोड़ कर) लगा दिया और मुस्लिमों को साल भर नमाज़ पढ़ने की अनुमति दे दी।

18 फरवरी, 2003 को भोजशाला में प्रवेश के लिए संघर्ष कर रहे हिन्दुओं पर लाठीचार्ज किया गया। इसके अगले दिन पुलिस की गोली से 3 लोग मारे गए और 1400 लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। आखिरकार 8 अप्रैल, 2003 में हिन्दुओं को कई शर्तों के साथ पूजा का अधिकार मिला। हाईकोर्ट में अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका डाली है, लेकिन 9 महीने से किसी भी पक्ष ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है।

‘भोज उत्सव समिति’ परिसर के वीडियो सर्वे की माँग कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान जब धार आए थे, तब भी उनसे प्रतिमा वापस लाने की माँग की गई थी। इस बार भी वसंत पंचमी के मौके पर शोभा यात्रा, आरती, यज्ञ, वेदारंभ संस्कार, मातृशक्ति सम्मेलन, सत्याग्रह पूजन और कन्या पूजा का कार्यक्रम है, जो लगभग एक सप्ताह चलेगा। ऐसे में सतर्क प्रशासन ने भी सुरक्षा कड़ी कर दी है।

जिन्होंने खोजा जीवन बचाने वाला ORS फॉर्मूला, उन्हें पद्म सम्मान, लिस्ट में मुलायम का भी नाम: RRR वाले कीरवानी और तबला वादक ज़ाकिर हुसैन को भी अवॉर्ड

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर (25 जनवरी, 2023) पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों का ऐलान कर दिया गया। इनमें 6 लोगों को पद्मविभूषण सम्मान दिया जा रहा है जबकि 9 हस्तियों को पद्म भूषण से नवाजा जा रहा है वहीं 91 लोगों को पद्मश्री सम्मान दिया जा रहा है। इस बार कुल 19 महिलाओं को पद्म सम्मान दिए जा रहे हैं जबकि 7 हस्तियाँ ऐसी हैं जिन्हें भारत का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हो रहा है।

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव को पब्लिक अफेयर्स कैटेगरी में पद्मविभूषण सम्मान दिया जा रहा है। ORS के फॉर्मूले की खोज करने वाले डॉ. दिलीप महालनोबिस (Dilip mahalanabis) को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है। उनके अलावा जाकिर हुसैन, एसएम कृष्णा, श्रीनिवास वर्धान और बालकृष्ण दोसी को पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा रहा है।

साभार एएनआई

कर्नाटक के एसएल भैयरप्पा को शिक्षा क्षेत्र में सेवाओं के लिए पद्म भूषण सम्मान दिया जा रहा है। उनके अलावा कुमार मंगलम बिरला, दीपक धार और वानी जयराम समेत 9 हस्तियों को पद्म भूषण सम्मान दिया गया है।

साभार एएनआई

पद्मश्री सम्मानों की बात करें तो 91 लोगों को यह सम्मान प्राप्त हुआ है। रतन चंद्राकर को पद्मश्री सम्मान दिया गया है। रतन चंद्राकर अंडमान के जारवा ट्राइब्स में मिजल्स के लिए काम कर रहे हैं। हीरा बाई लोबी को गुजरात में सिद्धि ट्राइब्स के बीच बच्चों के शिक्षा पर काम करने के लिए पद्मश्री अवार्ड दिया जा रहा है। चिकित्सा के क्षेत्र में मुनीश्वर चंदर डावर को पद्मश्री मिला है। जबलपुर के रहने वाले मुनीश्वर पिछले 50 सालों से गरीबों और वंचितों का इलाज कर रहे हैं।

नागा समाजिक कार्यकर्ता रामकुइवांगबे न्यूमे को संस्कृति क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान दिया गया है। तेलंगाना के 80 साल के भाषा विज्ञान प्रोफेसर बी.रामकृष्ण रेड्डी को साहित्य और शिक्षा (भाषाविज्ञान) के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है। कांकेर के गोंड ट्राइबल वुड कार्वर अजय कुमार मंडावी को कला (लकड़ी पर नक्काशी) के क्षेत्र में पद्मश्री से पुरस्कार मिलेगा। मिजो संस्कृति की रक्षा करने वाले आइज़वाल के मिज़ो लोक गायक के.सी. रनरेमसंगी को पद्मश्री अवार्ड दिया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी से ताल्लुक रखने वाले 102 वर्षीय सरिंदा वादक मंगला कांति रॉय को कला लोक संगीत क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।

कला लोक संगीत क्षेत्र में ही नागा संगीतकार और नवप्रवर्तक मोआ सुबोंग को भी पद्मश्री से नवाजा जाएगा। डोमार सिंह कुंवर को कला (नृत्य) के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है। डोमार सिंह छत्तीसगढ़ी नाट्य नाच कलाकार हैं। कश्मीर में बेहतरीन संतूर बनाने वाले परिवार के 8वीं पीढ़ी के संतूर शिल्पकार गुलाम मोहम्मद जाज को कला (शिल्प) के क्षेत्र में पद्मश्री से नवाजा जाएगा।

नेपाल के सीमावर्ती गाँव बन रहे ‘किडनी वैली’ का हिस्सा, ‘दूसरी उग आएगी’ कह फाँसते हैं तस्कर: अफगानिस्तान में भी किडनी बेच रहे गरीब, ऐसे पनप रहा बाजार

कई विकासशील देशों में गरीबी, बेरोजगारी और कर्ज तले डूबे लोग अपनी किडनी बेचने को मजबूर हो जाते हैं। कुछ लोग मजबूरी में अपना गुर्दा (Kidney) बेच देते हैं तो कुछ लोगों को धोखे में रखकर उनकी किडनी निकाल ली जाती है। इन देशों में मानव अंगों के कारोबार के लिए कई रैकेट काम करते हैं। मानव अंगो के तस्कर पकड़े भी जाते हैं लेकिन फिर भी यह अवैध कारोबार दिन ब दिन फलता फूलता जा रहा है। इस लेख में हम दक्षिण एशियाई देशों में अवैध अंग बाजारों और उनकी वजह से बने ‘किडनी गाँवों’की चर्चा करेंगे।

भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच स्थित नेपाल के बागमती अंचल के काभ्रेपलाँचोक इलाका किडनी वैली के नाम से मशहूर है। पिछले 20 सालों में इलाके के सैकड़ों लोग अपना गुर्दा बेचने के लिए या तो स्वेच्छा से भारत आए हैं या उनको धोखे से लाया गया है। कुछ लोगों को झूठा लालच देकर शिकार बनाया गया है। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2009 में कावरे (काभ्रेपलाँचोक) के लगभग 300 लोगों की किडनी अवैध रूप से निकाल ली गई थी।

पीबीएस की एक रिपोर्ट में नेपाल के मानवाधिकार आयोग के हवाले से बताया गया है कि काभ्रेपलाँचोक के होकसे गाँव में 150 से ज्यादा लोगों ने अपनी किडनी बेच दी है। अंग तस्करों ने लोगों की गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठाकर उन्हें अपना शिकार बनाया।

पीबीएस की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, किडनी वैली के ही दूसरे जामदी गाँव (Jamdi village) के हर दूसरे घर में कम से कम एक व्यक्ति ऐसा जरूर मिल जाएगा जिसने पैसों के लिए अपनी किडनी बेच दी हो। होकसे या जामदी जैसे गाँव में गरीबी बहुत ज्यादा है। जिसकी वजह से यहाँ के लोग जीवन यापन के लिए अपनी एक किडनी बेच देते हैं। 2015 में प्रकाशित के स्टडी के मुताबिक होकसे गाँव के 300 लोगों ने अपनी किडनी मात्र $200 USD (आज के हिसाब से लगभग 16 हजार रुपए) में ही बेच दी। किडनी हासिल करने के लिए तस्कर यहाँ के भोले-भाले लोगों को गलत जानकारियाँ भी देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार। तस्कर लोगों को लालच देते हुए कहते हैं कि किडनी निकालने के बाद उसकी जगह दूसरी किडनी उग आएगी।

कुछ लोगों को बताया जाता है कि उनकी एक किडनी किसी काम की नहीं है। गाँव के मासूम लोग उनकी बातों में फँस जाते हैं और कुछ रुपयों के लालच में अपना बहमूल्य अंग उन तस्करों को दे देते हैं। कुछ मामलों में गैरजरूरी ऑपरेशन के बहाने लोगों को बिना जानकारी के उनका अंग निकाल लिया जाता है।

आपको बता दें कि प्रत्यारोपण के लिए मानव अंगों को बेचना नेपाल में अपराध है। इसके अलावा मानव अंगों को निकाला जाना और उन्हें एक से दूसरे स्थान पर ले जाया जाना भी गैर कानूनी है। गरीबी और अंग तस्करों के अलावा वर्ष 2015 में आए भयानक भूकंप ने भी लोगों को अपना गुर्दा बेचने के लिए मजबूर किया।

नेपाल के जनअधिकार संरक्षण मंच (Forum for Protection of People’s Rights) की एक रिपोर्ट के अनुसार सच्चाई सामने आने के बाद भी पीड़ीत केस फाइल करने को तैयार नहीं थे। दरअसल नेपाली कानून के मुताबिक अंगो को बेचना भी कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है अतः जाँच और पकड़े जाने के भय से कई पीड़ीत अपना गाँव छोड़कर फरार हो गए और अपने साथ हुई ज्यादति क छिपाने लगे।

अफगानिस्तान का किडनी वैली

फिलहाल नए किडनी वैली के रूप में अफगानिस्तान के गाँवों को देखा जा रहा है। तालिबानी शासन आने (2021) के बाद अफगानिस्तान में लोगों का बुरा हाल है। देश में महंगाई चरम पर है। लोगों के पास रोजगार नहीं हैं और लोग खाने को तरस रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की अक्टूबर 2022 की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में आवश्यक वस्तुओं की कीमत में 35% तक की वृद्धि हो गई है। महँगाई बढ़ने की वजह से गरीब परिवारों को जीवित रहने के लिए अधिक कर्ज लेने या संपत्ति बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

अफगानिस्तान के ग्रामीण जिन्होंने अपनी किडनी बेच दी (फोटो साभार एएफपी)

‘द ऑफिस ऑफ कोऑर्डिनेशन ऑफ ह्यूमेरिटेरियन अफेयर्स (OCHA)’ ने पिछले साल नवंबर में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें दिखाया गया था कि अफगानिस्तान में गरीबी दर जो 2020 में 47% थी 2021 में बढ़कर 70% और 2022 में 97% तक पहुँच गई। परिणामस्वरूप 97% अफगानिस्तानी गरीबी रेखा से नीचे रहने को मजबूर हैं। ऐसे में अफगानिस्तान के लोगों को परिवार चलाने के लिए अपनी किडनी बेचना एक जरिया दिखा।

अफगानिस्तान के हेरात शहर से सटे शेनशायबा गाँव में 90 फीसदी पुरुष अपनी एक किडनी तस्कारों को बेच चुके हैं। इस तरह ये गाँव भी एक किडनी वाला बन गया है। फरवरी 2022 की फ्राँस 24 की रिपोर्ट में बताया गया है कि हेरात में दर्जनों लोगों ने पैसों के बदले अपनी किडनी बेच दी है।

हेरात में 5 लाख 75हजार बेरोजगार लोगों में से एक 32 वर्षीय नूरुद्दीन ने एएफपी से अपना दर्द साझा किया। उन्होंने कहा, “मैं किडनी बेचना नहीं चाहता था लेकिन मेरे लिए कोई दूसरा विकल्प नहीं था।” नूरुद्दीन अपने पेट के बाईं ओर ऑपरेशन से बने लंबे तिरछे निशान को दिखाते हुए कहा कि मैंने अपनी किडनी अपने बच्चों के लिए बेची।

भारत का किडनी बाजार

भारत में 1980 और 1990 के दशक में चेन्नई अंग व्यापार का केंद्र था। विलीवक्कम शहर के गुर्दा व्यापार की कहानी ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान आकर्षित किया। किडनी के अवैध कारोबार के लिए इस जगह को किडनीवक्कम जैसा नाम दिया गया। भारत में भले ही शरीर के अंगों की बिक्री गैरकानूनी हो लेकिन कानून में खामियों के कारण अवैध किडनी व्यापार जारी रहा। परोपकार की आड़ में गुर्दे की जमकर खरीद फरोख्त की गई।

कर्ज तले दबे गरीबों को अपनी किडनी खोने के दर्द से ज्यादा इस बात का संतोश था कि उनके परिवार पर से कर्ज का बोझ कम हो गया है। ऐसे गरीबों ने अपनी तरह के और लोगों को किडनी बेचने को प्रेरित किया जिसका फायदा शहर के दलालों और कुछ चिकित्सकों ने उठाया। चेन्नई में विल्लीवक्कम, तमिलनाडु के पल्लीपलायम और कुमारपलायम, बंगलौर के करीब मगाडी जैसे स्थान धीरे-धीरे किडनी बेचने का केंद्र बनने लगे। साल 1980 के अंत तक पल्लीपलायम और कुमारपलायम वर्चुअल किडनी फार्म बन गए थे।

तमिलनाडु के चेन्नई स्थित विलीवक्कम के भारती नगर की झुग्गी में 1987 से 1995 तक गुर्दा व्यापार चला। इस झुग्गी को किडनी नगर या किडनी-वक्कम के नाम से जाना जाता था। यहाँ किडनी की तलाश में विदेशों से भी लोग आते थे। कथित तौर पर कुछ महिलाओं ने पैसों के लिए किडनी बेची तो कई मामलों में दहेज के लिए पैसों का इंतजाम करने के लिए लोगों ने अपनी किडनी बेचने की बात सामने आई। इसके अलावा अपने पति को खो चुके महिलाओं को भी अपनी किडनी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा।

जब आप सबसे हताश होते हैं…किडनी दलाल आते हैं

पत्रकार स्कॉट कार्नी ने अपनी किताब द रेड मार्केट में 2004 की सुनामी से बचे लोगों के लिए बने एक शरणार्थी शिविर के बारे में लिखा है। उन्होंने लिखा है कि कैंप की महिलाओं की मजबूरी और लोगों की हताशा का फायदा उठाकर अंग तस्करों ने थोड़े से पैसों के बदले उनकी किडनी निकाल ली। हालाँकि, तमिलनाडु ने अंग व्यापार केंद्र से अंग दान केंद्र बनने तक का लंबा सफर तय किया है। 2015 में, मन की बात कार्यक्रम के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य में आए इस परिवर्तन की सराहना की थी।

तीसरी बार गिरफ्तार हुआ TMC नेता साकेत गोखले: ED की कार्रवाई, चंदा के पैसे के दुरुपयोग का है मामला

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता साकेत गोखले (Saket Gokhale) को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (25 जनवरी 2023) को गिरफ्तार किया। साकेत धोखाधड़ी के मामले में पहले ही गुजरात की जेल में बंद हैं।

साकेत गोखले पर आरोप है कि उन्होंने क्राउड फंडिंग के जरिए करोड़ों रुपए जुटाए और उसका दुरुपयोग किया। कहा जा रहा है कि ED टीएमसी नेता की रिमांड के लिए अहमदाबाद मेट्रो कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी। अगर ED को रिमांड मिल जाती है तो गोखले को पूछताछ के लिए अहमदाबाद ऑफिस ले जाया जाएगा।

बता दें कि क्राउड फंडिंग के मामले में गुजरात पुलिस ने 29 दिसंबर 2022 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मोरबी यात्रा को लेकर झूठ फैलाने पर साकेत गोखले को दिसंबर में ही दो बार गिरफ्तार किया गया था।

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने उनके खिलाफ IPC की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 467 (जालसाजी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आपको बता दें कि गोखले एक पूर्व आरटीआई एक्टिविस्ट हैं और वर्तमान में तृणमूल कॉन्‍ग्रेस के प्रवक्ता हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर फैलाए गए झूठ के मामले में साकेत गोखले ने एक मनगढ़ंत समाचार रिपोर्ट साझा की थी। गुजराती समाचार पत्र की कथित क्लिपिंग साझा करते हुए दावा किया था कि पीएम मोदी की मोरबी यात्रा पर 30 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

जो क्लिपिंग साझा की थी, वह कथित तौर पर ‘गुजरात समाचार’ का था। भाजपा ने इसे मनगढ़ंत बताते हुए कहा था कि ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं हुई है। साथ ही बताया था कि ऐसा कोई आरटीआई जवाब भी नहीं है। ‘गुजरात समाचार’ ने भी कहा था कि उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित ही नहीं की है।

दरअसल, क्राउड फंडिंग को लेकर अहमदाबाद के एक व्यक्ति ने गोखले के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। उस व्यक्ति ने ऑनलाइन मोड में गोखले को 500 रुपए का चंदा दिया था। पुलिस ने कहा, “मामला सिर्फ 500 रुपए का नहीं है, क्योंकि टीएमसी नेता ने ‘हमारे लोकतंत्र’ मंच के जरिए 1,700 से अधिक लोगों से 70 लाख रुपए से भी ज्यादा इकट्ठे किए। उन पैसे का उन्होंने निजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया।”

बता दें कि इससे पहले सोमवार (23 जनवरी 2023) को गुजरात हाईकोर्ट ने क्राउड फंडिंग के दुरुपयोग को लेकर गोखले को जमानत से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही उन्हें चार्जशीट दायर होने के बाद अदालत आने के लिए कहा था। इससे पहले अहमदाबाद के मजिस्ट्रेट कोर्ट और सत्र न्यायालय जमानत की अर्जी ठुकरा चुका था।

बांग्लादेश से भारत में घुसा, बेंगलुरु में निकाह, गर्भवती बीवी की हत्या कर फिर बांग्लादेश भाग रहा था नासिर हुसैन: सिलीगुड़ी में गिरफ्तार

बेंगलुरु में अपनी गर्भवती बीवी की हत्या करने वाला नासिर हुसैन (Nasir Hussain) बांग्लादेशी घुसपैठिया निकला। पुलिस जाँच में इसका खुलासा हुआ है। दरअसल नासिर हुसैन ने निकाह के महज छह माह बाद 15 जनवरी 2023 को 22 वर्षीया बीवी नाज खानम (Naz Khanum) की हत्या कर दी थी। तब से वह अपने देश बांग्लादेश भागने की फिराक में था, लेकिन 19 जनवरी 2023 को वह कोलकाता में पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

बेंगलुरु सिटी के साउथ ईस्ट डिवीजन पुलिस ने आरोपित नासिर हुसैन को कोलकाता के बाहरी इलाके में पकड़ा था। वह सिलीगुड़ी के रास्ते अपने देश बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह असफल रहा। इसके बाद वह कोलकाता वापस आ रहा था, जहाँ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। बेंगलुरु पुलिस ने आरोपित नासिर को पकड़ने के लिए पश्चिम बंगाल के पाँच जिलों की पुलिस से समन्वय स्थापित किया हुआ था। 

नाज खानम के परिजनों को नासिर हुसैन के बारे में गलत जानकारी थी। उनका मानना था कि नासिर पश्चिम बंगाल जिले का रहने वाला है और अनाथ है। पुलिस से उसके बांग्लादेशी होने की जानकारी मिली। नासिर हुसैन के पास से पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड, वोटर कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।

वहीं जाँचकर्ताओं के अनुसार, “हुसैन 2013-14 में अवैध रूप से बांग्लादेश से भारत आया था। वह पेशे से हार्डवेयर इंजीनियर था। हालाँकि उसके पास इसके लिए कोई डिग्री नहीं थी और दिल्ली, गुरुग्राम और कोलकाता में काम करते-करते मोबाइल और लैपटॉप रिपेयरिंग का काम सीख गया था।” इसके बाद वह बेंगलुरु चला गया।

अधिकारी के अनुसार, “हुसैन को शक था कि उसकी पत्नी का उसकी बहन के पति इलियास पाशा से अफेयर है और होने वाला बच्चा उसका नहीं है। इस बाबत वह अपनी बीवी से बच्चा गिराने के लिए कह रहा था। जब उसने ऐसा करने से मना किया तो हुसैन ने उसकी हत्या कर दी। अगले दिन हुसैन ने अपनी बीवी के भाई को उसकी मौत की जानकारी देकर शहर से भाग गया।”

बकौल पुलिस अधिकारी, घटना के बाद से हुसैन लगातार बांग्लादेश भागने का प्रयास करता रहा, लेकिन वह असफल रहा और अंतत: 19 जनवरी 2023 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। हुसैन तीन वर्ष पहले बेंगलुरु आया था और नाज खानम के घर के पास ही उसने किराए पर घर पर लिया था। दोनों के बीच प्यार हो गया और फिर दोनों ने 6 महीना पहले निकाह कर लिया।

डीसीपी (साउथ ईस्ट) सीके बाबा ने बताया, “हुसैन को भारत-बांग्लादेश सीमा पार करने के सभी रास्तों की जानकारी थी। सीमा पार करने का उसका पहला प्रयास विफल हो गया था, क्योंकि वहाँ सुरक्षा अधिकारी तैनात थे। इसलिए उसने दूसरा रास्ता चुना, जहाँ पुलिस ने उसे पकड़ लिया। बाद में उसे बेंगलुरु लाया गया।”