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पन्ने फाड़े, पैरों से रौंदा, फिर लगा दी आग… स्वीडन के बाद नीदरलैंड में भी जली कुरान, मुस्लिम देशों ने जताई नाराजगी

नीदरलैंड में कुरान जलाने के मामले पर मुस्लिम मुल्कों ने नाराजगी जताई है। सऊदी अरब और यूएई के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इसकी निंदा की है। कतर, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी डच सरकार से अपना विरोध दर्ज कराया है। इससे पहले स्वीडन में भी कुरान जलाई गई थी।

नीदरलैंड में यह घटना संसद भवन के सामने अंजाम दी गई। इस्लाम विरोधी समूह पेगिडा (Pegida) के नेता एडविन वैगन्सफेल्ड ने डेन हैग में पहले कुरान के पन्नों को फाड़ा। फिर पैरों से उसे रौंद कर कुरान में आग लगा दी थी। 22 जनवरी 2023 को उन्होंने ट्विटर पर इसका वीडियो भी साझा किया था।

एडविन वैगन्सफेल्ड ने जब इस घटना को अंजाम दिया उस समय कुछ पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद दिख रहे हैं। उनकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसको लेकर बड़े मुस्लिम देशों के साथ इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कुरान को फाड़ने और उसे जलाने को इस्लामोफोबिया करार दिया है।

वैगन्सफेल्ड का वीडियो वायरल होने के बाद पाकिस्तान के लाहौर में सैकड़ों मुस्लिमों ने मंगलवार (24 जनवरी 2023) को विरोध रैली निकाली। पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग नाम के एक राजनीतिक दल के समर्थकों ने डच नेता के खिलाफ नारेबाजी की। इसी तरह स्वीडन में 21 जनवरी को कुरान जलाने की घटना का विरोध करते हुए कराची में मुस्लिमों ने एक रैली निकाली थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्वीडन में कुरान जलाने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि इस तरह के कृत्य दुनिया भर के मुस्लिमों की भावनाओं को आहत करते हैं।

गौरतलब है कि 21 जनवरी 2023 को स्टॉहोम में तुर्की दूतावास के सामने स्वीडन की धुर दक्षिणपंथी पार्टी ‘हार्ड लाइन’ के नेता रासमस पलुदान (Hard Line Leader Rasmus Paludan) ने कुरान को सार्वजनिक तौर पर जला दिया था। इस दौरान पलुदान ने इस्लाम और आव्रजन को लेकर एक घंटे तक भाषण भी दिया। लगभग 100 लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए पलुदान ने कहा था, “अगर आपको (मुस्लिमों को) लगता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं होनी चाहिए तो आप रहने के लिए कोई और जगह देखिए।”

स्वीडन में कुरान जलाए जाने के विरोध में यमन, इराक, जॉर्डन और तुर्की सहित कई मिडिल ईस्ट देशों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की खबर सामने आई थी। इसको लेकर तुर्की और यमन में स्वीडिश दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों ने स्वीडन के राष्ट्रीय ध्वज को जलाया और कुरान जलाने की घटना की कड़ी निंदा की थी।

MP में कई जगहों पर लगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे, रिपोर्ट में दावा- रक्षासूत्र और तिलक वाले लोगों को पीटा: ‘पठान’ पर दिखा मजहबी रंग

शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ के विरोध से शुरू हुए विवाद ने मध्य प्रदेश में कई जगहों पर मजहबी रूप अख्तियार कर लिया है। रिपोर्टों के अनुसार इंदौर, महू और देवास में ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगे हैं। इसके कुछ वीडियो भी सामने आए हैं।

नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार इंदौर के बड़वाली चौकी पर सर तन से जुदा के नारे लगाए गए। इसमें बच्चे भी शामिल थे। खजराना में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जाम लगा दिया। कथित तौर पर रक्षासूत्र और तिलक देख लोगों को पीटा भी गया।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल (Vinod Bansal) ने बुधवार (25 जनवरी 2023) को ट्विटर पर दो वीडियो साझा किए हैं। दोनों वीडियो में कई लोग ‘सर तन से जुदा’ के इस्लामवादी नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। दोनों वीडियो मध्य प्रदेश के इंदौर का है।

पहला वीडियो कथित तौर पर बड़वाली चौकी का है, वहीं दूसरा वीडियो खजराना पुलिस स्टेशन के बाहर का है। दोनों वीडियो में छोटे बच्चे भी दिखाई दे रहे हैं। इनलोगों को ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा’ और ‘अल्लाह हो अकबर’ के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है।

विनोद बंसल ने अपने ट्वीट में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टैग किया है। उन्होंने कहा है, “देश के स्वच्छतम शहर में भी लगा जिहादी कूड़े का ढेर… शायद शिवराज सिंह या नरोत्तम मिश्रा जी को पता ही नहीं कि उनके इंदौर में भी आज ‘सर तन से जुदा’ गैंग सक्रिय हो गया है। इन साँपों का फन आज ही कुचलना जरूरी है।”

बंसल ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “हमारा उच्च स्तरीय राज्य प्रतिनिधिमंडल जिहादी गिरोह के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई करने के लिए आज बुधवार (25 जनवरी 2023) रात इंदौर में पुलिस के उच्चाधिकारियों से मिलने जा रहा है।” विहिप के एक स्थानीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार रात नगर पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्रा से मुलाकात की और बड़वाली चौकी के बाहर हुई इस घटना के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा। मिश्रा ने कहा कि बड़वाली चौकी इलाके में कथित आपत्तिजनक नारेबाजी के लिए सदर बाजार थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 505 और अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार इंदौर के अलावा देवास में भी मजहबी नारे लगे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देवास में एसपी ऑफिस का घेराव किया। इसी दौरान ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए।

भारत के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने में तुर्की और कतर की मीडिया एजेंसियाँ पाकिस्तान का दे रही हैं साथ, कश्मीर के पत्रकार भी शामिल: रिपोर्ट में दावा

भारत के खिलाफ मीडिया युद्ध का दोषी सिर्फ पाकिस्तान और पाकिस्तान से बाहर बैठे आकाओं को माना जाता है। हालाँकि, वास्तविकता यह है कि तुर्की और कतर के कई मीडिया संगठन भी इस अभियान में भागीदार बन गए हैं। भारतीय गैर-लाभकारी तथ्य-जाँच वेबसाइट डिजिटल फोरेंसिक, रिसर्च एंड एनालिटिक्स सेंटर (DFRAC) के लिए एक रिपोर्ट में दिलशाद नूर ने इसका खुलासा किया है।

DFRAC के रिसर्च फेलो नूर के अनुसार, भारत को तुर्की और कतर में बसे पत्रकारों और मीडिया संगठनों के बीच गठजोड़ को समझने की जरूरत है, क्योंकि वे दोनों देशों को भारत का विरोध करने के लिए उकसाते हैं। नूर ने लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि खाड़ी क्षेत्र में भारत के बारे में इस तरह की व्यापक गलत सूचना फैलाई जा रही है।”

पाकिस्तान समर्थक या चीन समर्थक समूह अक्सर खाड़ी क्षेत्र में भारत को लक्षित कर गलत सूचनाएँ फैलाते हैं, क्योंकि ये समूह खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को कमजोर करना चाहते हैं। दुष्प्रचार में अक्सर भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड, अल्पसंख्यकों के साथ इसके व्यवहार और इसकी विदेश नीति के बारे में झूठे दावे शामिल होते हैं।

भारत के संबंध में इस तरह के दुष्प्रचार भारत के लोकमत या नीति को प्रभावित करने के लिए झूठी या भ्रामक जानकारियाँ फैलाने से संबंधित हैं। नूर ने कहा कि इस प्रकार की गलत सूचना कई रूपों में हो सकती हैं। इनमें फर्जी समाचार, साजिश के सिद्धांत या संपादित फोटो और वीडियो आदि शामिल हैं।

मिस्र सहित कई देशों में मुस्लिम ब्रदरहुड को प्रतिबंधित किा गया है। मिस्र में इसे साल 2013 में एक आतंकवादी समूह के रूप में नामित किया गया था। वहीं, कई अन्य देश इसे एक कट्टरपंथी और चरमपंथी संगठन के रूप में देखते हैं। तुर्की आज मुस्लिम ब्रदरहुड के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय के रूप में काम कर रहा है और यह कतर के अमीर तमीम द्वारा समर्थित है।

मुस्लिम ब्रदरहुड 1928 में मिस्र में हसन अल-बन्ना द्वारा स्थापित एक राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन है। इसका घोषित लक्ष्य पारंपरिक इस्लामी मूल्यों और सिद्धांतों को बढ़ावा देना है। नूर लिखते हैं कि इस संगठन ने मुस्लिम-बहुल कई देशों के राजनीतिक और सामाजिक विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।

फरवरी 2021 में सामने आई खबर के मुताबिक, तुर्की और पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मीडिया मोर्चा बना लिया था। यह दावा मेडिटेरेनियन-एशियन इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स नामक एक संस्था ने किया है।

इस खबर को रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर यूरोपियन एंड अमेरिकन स्टडीज (RIEAS) द्वारा फिर से छापा गया। खबर में बताया गया कि टीआरटी वर्ल्ड (TRT World) और अनादोलू मीडिया ने कई पाकिस्तानी और भारतीय कश्मीरी पत्रकारों को इस अभियान से जोड़ा है।

DFRAC की रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्की की खुफिया एजेंसी MIT ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ISPR यानी इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशंस के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है।

टीआरटी वर्ल्ड की भारत के कवरेज में पक्षपाती होने और देश के बारे में गलत सूचना फैलाने के लिए आलोचना की गई है। कुछ मामलों में चैनल पर भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड और भारत में अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिमों की स्थिति के बारे में गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया गया है।

कश्मीर के क्षेत्रीय विवाद के संबंध में पाकिस्तान समर्थक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए चैनल की आलोचना की गई है। DFRAC ने बताया कि TRT वर्ल्ड तुर्की, अंग्रेजी और अरबी सहित कई भाषाओं में समाचार प्रसारित करता है।

TRT वर्ल्ड एक 24-घंटे का अंग्रेजी भाषा का अंतर्राष्ट्रीय समाचार चैनल है, जिसका स्वामित्व और संचालन तुर्की रेडियो और टेलीविज़न कॉर्पोरेशन (TRT) द्वारा किया जाता है।

(यह समाचार रिपोर्ट एक सिंडिकेट फीड से प्रकाशित हुई है। शीर्षक को छोड़कर, सामग्री ऑपइंडिया के कर्मचारियों द्वारा लिखी या संपादित नहीं की गई है)

हिंदुस्तान ज़िंदाबाद था, ज़िंदाबाद है और ज़िंदाबाद रहेगा… हाथ में हथौड़ा लिए दोबारा ‘गदर’ मचाने आए सनी देओल, नोट कर लीजिए रिलीज डेट

ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ (Gadar: Ek Prem Katha) की सफलता के 22 साल बाद बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल (Sunny Deol) एक बार फिर ‘गदर 2’ से सिनेमाघरों में गदर मचाने आ रहे हैं। ​गुरुवार (26 जनवरी, 2023) को सनी देओल ने अपने ट्विटर हैंडल पर अपनी अपकमिंग फिल्म ‘गदर 2’ (Gadar 2) का फर्स्ट लुक पोस्टर शेयर किया। पोस्टर के साथ अभिनेता ने कैप्शन में अपनी फिल्म का पुराना डायलॉग लिखा है, “हिंदुस्तान जिंदाबाद है… जिंदाबाद था और जिंदाबाद रहेगा।”

इस स्वतंत्रता दिवस पर हम 2 दशक बाद बॉलीवुड की सबसे बड़ी सीक्वल लेकर आ रहे हैं। ‘गदर 2’ 11 अगस्त, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।”

पोस्टर में 22 साल के बाद एक बार फिर तारा सिंह की झलक देखने को मिल रही है। इसमें तारा सिंह के अवतार में सनी देओल काफी गुस्से में नजर आ रहे हैं। उन्होंने सिर पर हरे रंग की पगड़ी और काले रंगा का कुर्ता-पायजामा पहना हुआ है। उनका यह लुक बेहद जबरदस्त लग रहा है। इसके अलावा इस बार पोस्टर में ‘तारा सिंह’ ने अपनी पत्नी सकीना और बच्चे का हाथ नहीं, बल्कि बड़ा सा हथौड़ा पकड़ा हुआ है।

अनिल शर्मा के डायरेक्शन में बनने वाली ​फिल्म का पोस्टर सामने आने के दर्शक बेहद खुश हैं। वे फिल्म रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नीरज कुमार दुबे लिखते हैं, “हिंदुस्तान जिंदाबाद, पूरा देश ‘गदर 2’ की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा है। इस बार नल नहीं उधर से PoK उखाड़ के इधर ले आइए। हर भारतवासी आपके साथ है। भारत माता की जय।”

रुद्र देव सिंह ने ‘गदर’ का डायलॉग लिखा, “बाप बनकर बेटी को विदा कर दीजिए, इसी में सबकी भलाई है, वरना अगर आज ये जट बिगड़ गया तो सैकड़ों को ले मरेगा। स्वागत है आपका। जय हिन्द, जय भारत। ‘गदर2’ को सुपरहिट करा कर ही रहेंगे।”

पकंज सिंह ने पोस्टर रिलीज होने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा, “इस बार भी सुपर डुपर ब्लॉकबस्टर। सर, हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा। अगर मैं अपनी बीवी-बच्चों के लिए सर झुका सकता हूँ… तो मैं सबके सर काट भी सकता हूँ।”

बता दें कि इस बार भी सनी देओल के साथ अमीषा पटेल मुख्य भूमिका में नजर आएँगी।

बिहार की राजनीति में फिर ख़त्म हुआ ‘लव-कुश’ का रोमांस: JDU में रह कर ही CM नीतीश की टेंशन बढ़ाते रहेंगे उपेंद्र कुशवाहा, या RCP सिंह जैसा होगा हाल?

उपेंद्र कुशवाहा जदयू के नेता हैं, पार्टी के संसदीय दल के नेता हैं। उन्होंने जदयू से अलग होकर ही ‘राष्ट्रीय लोक समता दल (RLSP)’ का गठन किया था और भाजपा के साथ मिल कर लोकसभा 2014 का चुनाव भी लड़ा था। NDA गठबंधन की जीत के बाद उन्हें मानव संसाधन विभाग में केंद्रीय मंत्री बनाया गया, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा तो उपेंद्र कुशवाहा ठहरे। 2014 लोकसभा चुनाव से चंद महीने पहले उन्होंने भाजपा से अपने संबंध खराब कर लिए और गठबंधन से चलते बने।

नतीजा ये हुआ कि 2019 के लोकसभा चुनाव और फिर 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी का सूपड़ा साफ़ हो गया। अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए उपेंद्र कुशवाहा वापस जदयू की तरफ मुड़ गए। हालाँकि, ये दूसरी बार था जब उन्होंने अपनी पार्टी का जदयू में मिले किया। बिहार में कोइरी समाज के सबसे बड़े नेता माने जाने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने 2007 में भी जदयू का साथ छोड़ कर 2009 में ‘समता पार्टी’ बनाई थी, लेकिन उसी साल इसका वापस जदयू में विलय भी कर दिया।

उपेंद्र कुशवाहा बिहार में कितने बड़े नेता हो सकते थे, इसका अंदाज़ा इसी से लगा लीजिए कि जब समता पार्टी और जदयू का विलय हुआ था, उसके कुछ ही वर्षों बाद 2003 में उन्हें बिहार विधानसभा में उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। पार्टी में जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव और नीतीश कुमार जैसे नेताओं के तले उन्हें भविष्य का नेता माना जाने लगा था। लेकिन, बिहार में नेता प्रतिपक्ष और केंद्र में राज्यमंत्री बनने के बावजूद उन्होंने दोनों मौकों को गँवाया।

नीतीश कुमार का ‘लव-कुश’ कॉम्बिनेशन और उपेंद्र कुशवाहा

कुल मिला कर देखें तो उपेंद्र कुशवाहा का वोट बैंक कोइरी समाज से बाहर नहीं है, जो बिहार की जनसंख्या का लगभग 6% के आसपास बताई जाती है। बिहार की राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि हर नेता अपनी जाति के साथ अन्य जातियों का गठबंधन बना कर सत्ता पर आता रहा है। 7% पासवान जनसंख्या के साथ रामविलास पासवान की लोजपा की राजनीति चलती रही। लालू यादव राज्य में यादवों के एकछत्र नेता रहे और आज भी उनकी पार्टी राजद पर यादव समाज का सबसे ज्यादा भरोसा रहता है।

हाँ, 2014 में नरेंद्र मोदी की एंट्री के बाद लोकसभा चुनावों में जातियों का ये गणित टूटता ज़रूर है, लेकिन विधानसभा चुनावों में फिर वही पुराना हाल हो जाता है। लालू यादव ने जब 1990 में सत्ता पाने के बाद खुद को बिहार में यादव समाज और पिछड़ों के सबसे बड़े नेता के रूप में स्थापित किया, तब नीतीश कुमार को भी उनके मुकाबले ऐसी ही किसी गोलबंदी की ज़रूरत थी। गाँधी मैदान में कुर्मी-कोइरी समाज की एक रैली में उन्हें ये अवसर मिला।

नीतीश कुमार ने उस रैली में ही इस कॉम्बिनेशन को ‘लव-कुश’ का नाम दिया और एक बड़े वोट बैंक को अपने साथ जोड़ लिया। बाद में उन्होंने एक महादलित वोट बैंक बना कर इसे ‘लव-कुश’ के साथ जोड़ा और फिर 2005 में सत्ता पकड़ी सो अभी तक नहीं गए। पिछले 18 वर्षों से नीतीश कुमार सत्ता में हैं। 8 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, लेकिन आज भी उनकी जाति का वोट बैंक जदयू के पास होने का ही दावा किया जाता है।

ऐसे में जदयू जानती है कि उपेंद्र कुशवाहा का अपमान कर के कोइरी समाज को नाराज़ नहीं किया जा सकता और इसीलिए जब-जब वो नाराज़गी खत्म कर के वापस आए, उनका स्वागत किया गया। रालोसपा में रहते जो उपेंद्र कुशवाहा मन मुताबिक चुनाव परिणाम न आने पर सड़क पर खून बहने की बातें करते थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियाँ देते रहते थे, आज वही भाजपा के करीबी बन गए हैं और नीतीश कुमार को नया सिरदर्द दे रहे हैं।

RCP सिंह: नीतीश कुमार ने आगे बढ़ाया, फिर पटक दिए गए

आपको रामचंद्र प्रसाद सिंह तो याद होंगे, वही जिन्हें RCP सिंह के नाम से जाना जाता है। नालंदा के ही हैं, नीतीश कुमार की ही जाति के। 2020 दुर्गा पूजा के दौरान पुलिस की गोली से अनुराग पोद्दार की मौत हो गई थी, जिस दौरान वहाँ की एसपी लिपि सिंह का नाम खूब उछला था। उनके वो ससुर हैं। RCP सिंह के दामाद भी डीएम हैं। वो खुद केंद्रीय मंत्रालय में बतौर अधिकारी सेवा दे चुके हैं, ऐसे में उनका शक्तिशाली परिवार है।

कुछ वर्षों तक वो नीतीश कुमार के खासे विश्वस्त रहे। इतने कि उन्हें जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। पार्टी ने बिहार से बाहर सँभावनाएँ तलाशनी शुरू कर दीं और उन्होंने राज्य भर में घूम कर संगठन को मजबूत करने के लिए एक के बाद एक कई बैठकें की। जुलाई 2021 में उन्हें जदयू कोटे से केंद्रीय मंत्री भी बनाया गया, जब पार्टी राजग गठबंधन का हिस्सा थी। लेकिन, 1 साल तक इस पद पर रहने के बाद उनके रिश्ते भी जदयू से अच्छे नहीं रहे और उनकी जगह ललन सिंह को ये पद दे दिया गया।

ललन सिंह से भी नीतीश कुमार की दोस्ती-दुश्मनी का दौर चलता रहता है, लेकिन फ़िलहाल वो उनके विश्वासपात्र हैं। RCP सिंह पर नीतीश कुमार का दुःख भी छलका, जब उन्होंने कहा कि जिसे वो आगे बढ़ाते हैं वो भाग ही जाता है। खैर, आजकल RCP सिंह उतने चर्चा में नहीं रहते क्योंकि उनके पास न जदयू के संगठन को तोड़ने को कुव्वत है और न ही विधायकों को अपने पाले में करने की। सच्चाई तो ये है कि महाराष्ट्र का एकनाथ शिंदे बनने की ताकत न तो RCP सिंह में है और न ही उपेंद्र कुशवाहा में।

यू-टर्न के बादशाह माने जाते हैं उपेंद्र कुशवाहा, नीतीश को देंगे टेंशन?

ये दोनों ही केवल बयानवीर हैं। उपेंद्र कुशवाहा अब तक 7 बार पाला बदल चुके हैं और ये 8वीं बार है, जब वो बदलने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के रणनीतिकार कहे जाने वाले अमित शाह से भी मुलाकात की थी, लेकिन शायद अब रणनीति यही है कि वो जदयू में रह कर ही नीतीश कुमार की टेंशन बढ़ाते रहें, जो तेजस्वी यादव की राजद के सहारे सत्ता में बैठे हैं और 2025 विधानसभा चुनाव के बाद से उन्हें ही नेता घोषित कर रहे हैं (भले ऐसा हो या न हो)।

नीतीश कुमार भी खुन्नस में कह चुके हैं कि जिसको जहाँ जाना है वो चला जाए। उपेंद्र कुशवाहा जदयू में अपने खिलाफ साजिश की बातें कर रहे हैं। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह सीधे सीधे कह चुके हैं कि उपेंद्र कुशवाहा भाजपा के संपर्क में हैं। उपेंद्र कुशवाहा तभी से बगावती सुर अपनाए हुए हैं, जब से नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव को महागठबंधन का भविष्य बता दिया है। उन्हें उनकी अपनी महत्वाकांक्षा अधर में लटकती नजर आ रही है।

उपेंद्र कुशवाहा को उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने की अफवाह भी उड़ी, इससे सरकार में उनका कद तेजस्वी यादव के बराबर हो जाता। लेकिन, नीतीश कुमार ने इन अटकलों को भी मजाक में उड़ा दिया। इससे उन्हें धक्का लगा। कहाँ वो जदयू के अगले नेता के रूप में खुद को देख रहे थे, कहाँ नीतीश कुमार ने उनका पत्ता ही काट डाला। और सबसे बड़ी बात कि उन पर हमले के लिए उनकी ही जाति के नेता का इस्तेमाल किया जा रहा है।

असल में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष हैं, जनवरी 2021 से ही इस पद पर हैं। उससे पहले वयोवृद्ध नेता वशिष्ठ नारायण सिंह को 11 वषों तक इस पद पर रखा गया था। अब उमेश कुशवाहा कह रहे हैं कि उपेंद्र कुशवाहा को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने जदयू को नीतीश कुमार द्वारा सींची पार्टी करार देते हुए कहा कि उपेंद्र कुशवाहा उन्हें ही धोखा दे रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने अपने राजनीतिक करियर में कई बड़े मौकों को खुद बर्बाद किया है, आगे वो किस काम के हैं ये देखना पड़ेगा।

फ़िलहाल स्थिति ये है कि उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू से बाहर जाने से मना कर दिया है। एक मँझे हुए नेता (या ऐसे किसी नेता की सलाह) पर वो चाहते होंगे कि उन्हें पार्टी से बाहर निकाला जाए, ताकि न सिर्फ उन्हें सहानुभूति वोट मिले बल्कि उनका जाति समाज नीतीश कुमार और जदयू से गुस्सा भी हो। फ़िलहाल वो जदयू में रह कर नीतीश को टेंशन देते रहेंगे। उन्हें निकाला भी नहीं जाएगा शायद, क्योंकि नीतीश भी मँझे हुए राजनेता हैं। हाँ, मुख्यमंत्री के लिए भी ये असहज स्थिति ज़रूर है, लेकिन बिहार की यही राजनीति है और देखना है इसमें भाजपा कहाँ है।

‘गरीब नवाज दरबार में मेरी दुआ कबूल हो’: राखी सावंत ने दरगाह के लिए खरीदी भगवा चादर, नेटिजन्स बोले- कितना नाटक करती है ये औरत

सुर्खियों में रहने के लिए तमाम हथकंडे अपनाने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री राखी सावंत (Rakhi Sawant) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वह दरगाह पर चढ़ाने के लिए चादर, फूल और इत्र खरीदते हुए दिखाई दे रही हैं।

राखी वीडियो में कहती हैं, “मेरा अभी-अभी आदिल खान दुर्रानी (Adil Khan Durrani) से निकाह हुआ है। मैं पहली बार दरगाह पर चादर चढ़ाना चाहती हूँ। गरीब नवाज दरबार में मेरी दुआ कबूल हो। मैं चाहती हूँ कि वहाँ मौजूद सभी लोग मेरा निकाह फले-फूले इसके लिए दुआ करें। मेरी माँ की तबियत अच्छी हो जाए। बस यही मेरी इल्तिजा है।” वह आगे कहती हैं, “गरीब नवाज का उर्स चालू है और मैं अपनी तरफ से चादर, फूल और ये सब कुछ पेश कर रही हूँ। मैं चाहती हूँ कि मेरी दुआ कबूल हो।”

इसको लेकर राखी सोशल मीडिया पर यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं। लोग उन्हें नाटक करने वाली औरत बता रहे हैं। कह रहे हैं, “अभी तो हलाला भी करना पड़ सकता है।”

वहीं कुछ कह रहे हैं कि इसने घर वापसी कर ली है। अब अपना नाम फातिमा खान दुर्रानी लिखो।

विरल भयानी के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

शेलवी ठाकुर ने लिखा कि ये साइको है। कभी ईसाई बन जाती है, तो कभी मुस्लिम। अब आगे क्या बनेगी। एक यूजर ने पूछा कि अब जल्दी से ये बताओ कि यहूदी कब बन रही हो।

शोभा लिखती हैं कि कभी उसको (आदिल) बोलकर देखना मंदिर जाएगा तो वीडियो डालना।

विरल भयानी के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

एक और यूजर ने लिखा यदि चादर चढ़ाने से ही सब होता तो ये चादर बेचने वाला सबसे बड़ा अमीर होता।

संतोष शाह लिखते हैं कि दुआ कबूल नहीं होगी, क्योंकि इतिहास गवाह है कुछ दिन के बाद तलाक जरूर हो जाएगा।

इसके अलावा एक अन्य वीडियो में राखी सावंत ने ‘पठान’ फिल्म की तारीफ करते हुए कहा है, “सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी। सलमान खान और शाहरुख खान की फिल्में सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी। 3000 करोड़ कमा लेगी। मैं चाहती हूँ कि ये RRR का रिकॉर्ड तोड़े। शाहरुख खान पूरे देश की जान है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों राखी सावंत कई दिनों तक अपने निकाह को लेकर चर्चा में थीं। शुरुआत में आदिल ने निकाह से इनकार किया था। लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया। राखी ने ये भी बताया था कि आदिल से निकाह करने के लिए उन्होंने इस्लाम अपना कर अपना नाम फातिमा रख लिया है।

‘पद्म विभूषण देना मुलायम सिंह यादव के सम्मान का मजाक’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने माँगा भारत रत्न, शिवपाल-डिंपल भी आए समर्थन में

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) को मरणोपरांत मोदी सरकार ने भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया है। हालाँकि, मुलयाम सिंह को ‘भारत रत्न’ देने की माँग फिर से उठ रही है।

रामचरितमानस और कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री पर विवादित बयान देने वाले सपा के विधान पार्षद स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने भी मुलायम को भारत रत्न देने की माँग की है। उधर, शिवपाल यादव और डिंपल यादव ने भी यही माँग की है।

स्वामी ने कहा, “आदरणीय नेताजी मुलायम सिंह को पद्म विभूषण का सम्मान देकर उनके विशाल व्यक्तित्व, कृतित्व और देश के प्रति किए गए उनके योगदान का मजाक उड़ाया गया है। नेता जी को यदि सम्मानित करना ही था तो भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए था।”

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भारत रत्न के बजाय मुलायम को पद्म विभूषण देकर उनके सम्मान का मजाक उड़ाया गया है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार की घटिया सोच को दर्शाता है।

मुलायम को पद्म विभूषण देने की घोषणा के बाद उनके भाई शिवपाल सिंह यादव और बड़ी बहू डिंपल यादव ने उनके लिए भारत रत्न की माँग की है। वहीं, मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव ने कहा कि जो मिल गया, उसे स्वीकार करना चाहिए।

इससे पहले अक्टूबर 2022 में यूपी के संभल से समाजवादी पार्टी के विधायक नवाब इकबाल महमूद ने मुलायम के लिए भारत रत्न की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि कहा कि मुलायम सिंह यादव देश के नेता थे। हर दल के नेता उनका सम्मान करते थे और अब भी करते हैं। उन्होंने सबको जोड़ने का काम किया। ऐसी शख्सियत को ‘भारत रत्न’ मिलना चाहिए।

सबसे पहले सपा नेता दीपक मिश्रा ने मुलायम को भारत रत्न देने की माँग साल 2020 में उठाई थी। इसके लिए मिश्रा ने करीब 10,000 लोगों के हस्ताक्षर का एक अभियान भी चलाया था। उन्होंने कहा था कि मुलायम तीन बार मुख्यमंत्री और केंद्र में रक्षा मंत्री रहे हैं। वह भारत रत्न के असली हकदार हैं।

एक हिंदू लड़की को बच्चा पैदा कर छोड़ा, दूसरे को गर्भवती किया, चौथी निकाह के लिए नाबालिग को किया अगवा: पकड़ा गया लव जिहादी सलमान

उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस ने सलमान को गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी बुधवार (25 जनवरी 2017) को एक नाबालिग हिंदू लड़की को निकाह के इरादे से किडनैप करने के आरोप में हुई है। पुलिस जाँच में खुलासा हुआ है कि सलमान इससे पहले भी दो हिंदू लड़कियों को फँसा चुका है। उसके लव जिहाद के किसी रैकेट से जुड़े होने का शक है।

रिपोर्ट के अनुसार 15 वर्षीय पीड़िता गाजियाबाद के गोविंदपुरी इलाके में रहती है। वह आठवीं कक्षा की छात्रा है। 14 दिसंबर 2022 को वह दूध लेने डेयरी गई, लेकिन वापस घर नहीं लौटी। इसके बाद परिजनों ने कविनगर थाने में मामला दर्ज करवाया। अब उसे बरामद करते हुए पुलिस ने सलमान को गिरफ्तार किया है। वह अमरोहा जिले के पंजू सराय गाँव का रहने वाला है।

गाजियाबाद के सिटी डीसीपी निपुण अग्रवाल ने बताया, “सलमान एक कंसल्टेंसी एजेंसी का संचालक है। वह पीड़िता को अगवा कर काशीपुर, उधम सिंह नगर सहित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जगहों पर ले गया था। वह लगातार लोकेशन बदल रहा था। अपहरण में उसका साथ हापुड़ निवासी मुहीद ने भी दिया था। मुहीद को 31 दिसंबर 2022 को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन वह सलमान के लोकेशन के बारे में नहीं बता पाया था।”

बकौल डीसीपी अपहरण के बाद सलमान नए नंबरों से अन्य लड़कियों के संपर्क में था। उसके पुराने नंबर की सीडीआर से कुछ लड़कियों के नंबर मिले। इनकी जाँच से उसकी लोकेशन ट्रेस हुई और फिर उसे गाजियाबाद के कविनगर थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि 14 दिसंबर को सलमान उसे जबरन कार में बिठाकर ले गया था। रास्ते में मुहीद बाइक लेकर आया। फिर उसके साथ वह पीड़िता को लेकर फरार हो गया।

पुलिस ने बताया है कि छात्रा का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। जाँच में खुलासा हुआ है कि सलमान हर लड़की को अपना अलग-अलग नाम बताता था। छह साल पहले उसने एक हिंदू लड़की से शादी की, जिससे उसका एक बच्चा है। फिर उसने एक मुस्लिम लड़की से निकाह किया। तीसरी बार फिर उसने एक हिंदू लड़की को अपनी जाल में फँसाया और वह गर्भवती है।

पत्रकार सचिन गुप्ता ने ट्वीट कर कहा है, “ये है सलमान। 6 साल पहले हिन्दू लड़की से शादी की और उसे छोड़ दिया। फिर मुस्लिम लड़की से शादी की, उसे भी छोड़ दिया। फिर तीसरी युवती से मोहब्बत की और उसे भी छोड़ा, जो गर्भवती है। अब इसने चौथी नाबालिग हिन्दू लड़की फँसाई। उसे किडनैप करके उत्तराखंड ले गया। गाजियाबाद पुलिस ने धर दबोचा।”

नेपाल की पवित्र कालीगण्डकी में मिली शिलाओं से बनेगी भगवान राम के बाल स्वरूप की प्रतिमा: अयोध्या के भव्य मंदिर में होगी स्थापना, मजबूत होंगे रिश्ते

अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के मुख्य गर्भगृह में नेपाल की पवित्र नदी कालीगण्डकी में मिली शिलाओं से भगवान राम की बालस्वरूप और माता सीता की मूर्तियों का निर्माण किया जाएगा। नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र से दो बड़ी शिला को बुधवार (25 जनवरी, 2023) को इस काम के लिए अयोध्या (Ayodhya) भेजने का इंतजाम किया गया। इन शिलाओं को शालीग्राम पत्थर के नाम से भी जाना जाता है। शालीग्राम को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। अगले साल जनवरी में मकर संक्रांति तक इन मूर्तियों के तैयार होने की उम्मीद है।

राम जन्मभूमि में राम मंदिर ट्रस्ट के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने टीओआई से बात करते हुए कहा, “विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र सिंह पंकज बुधवार को नेपाल के मस्तंग जिले से दो पवित्र शिलाओं को लेकर चल दिए हैं। वह शुक्रवार तक अयोध्या पहुँच सकते हैं।” गण्डकी के मुख्यमंत्री खगराज अधिकारी पोखरा के विंध्यवासिनी मंदिर में 23 टन और 15 टन की दो शिलाएँ उन्हें सौंपी। गण्डकी राज्य सरकार के आवश्यक प्रबंध के तहत शिला को जनकपुर से अयोध्या भेजने की व्यवस्था भी नेपाल ही कर रहा है।

जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास के उत्तराधिकारी राम रोशन दास ने काठमाण्डू से प्रकाशित राष्ट्रीय दैनिक ‘नया पत्रिका’ को बताया था कि कालीगण्डकी की शिला को जनकपुरधाम ले जाने के बाद हम इसे जुलूस के साथ अयोध्या भेजेंगे। उनके मुताबिक, अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जानकी मंदिर के महंत से कालीगण्डकी की शिला उपलब्ध कराने के कार्य में समन्वय बनाने का अनुरोध किया था। जनकपुर में बसंतपंचमी के पर्व पर इसका पूरे विधि-विधान के साथ पूजन होगा। पूजन और साधु-संतों के अनुष्‍ठान के बाद शालीग्राम प्रतिमा को जनकपुर से अयोध्‍या लाया जाएगा। इसे लाने के लिए मधुबनी-दरभंगा रास्‍ते को चुना गया है।

नेपाल और भारत के सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे

हिंदू पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सीता नेपाल के राजा जनक की बेटी थीं और उनका विवाह अयोध्या के भगवान राम से हुआ था। रामनवमी पर भगवान राम के जन्म के उत्सव के साथ, नेपाल के जनकपुर में भक्त शुक्ल पक्ष के पाँचवें दिन राम और सीता के विवाह का जश्न मनाते हैं। यह आमतौर पर नवंबर और दिसंबर के बीच पड़ता है। जानकारों का मानना है कि इससे कालीगण्डकी क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और भी मजबूत होंगे।

उल्लेखनीय है कि 15 दिसम्बर 2022 को नेपाली कैबिनेट की बैठक में कालीगण्डकी नदी से मिली शिलाओं को भेजने का फैसला किया गया था। उसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा ने गण्डकी प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कृष्ण चंद्र नेपाली से शिला दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का अनुरोध किया था। तब जाकर नेपाल और भारत के विशेषज्ञों की एक टीम को कालीगण्डकी में दो शिला मिलीं।

दोनों शिलाएँ अयोध्या के लिए उपहार

शिला के चयन के लिए नेता विमलेन्द्र निधि, विश्व हिंदू परिषद नेपाल के महामंत्री जितेंद्र कुमार सिंह, विश्व हिंदू परिषद भारत के केंद्रीय मंत्री पंकज सिंह, कालीगण्डकी के जानकार और चट्टान विशेषज्ञ डॉ. कुलराज चालीसे सहित अन्य लोग मौजूद रहे। चालिसे के अनुसार, प्रारंभ में मुस्ताड में एक और शिला का चयन किया गया था, पर उसे अयोध्या ले जाना सम्भव नहीं था। इसलिए अन्नपूर्णा-धवलागिरी हिमपर्वतों के बीच की दो शिलाएँ ले जाने का निर्णय लिया गया। इस साल देवशिला को जनकपुर से अयोध्या उपहार स्वरूप भेजा जा रहा है।

मूर्ति तैयार करने में लगेगा नौ महीने का समय

वहीं, विश्व हिंदू परिषद नेपाल के महामंत्री जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि अयोध्या में भगवान राम की मूर्ति तैयार करने में नौ महीने का समय लगेगा। पूर्व उपप्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता निधि ने नया पत्रिका को बताया, “अयोध्या में बनने वाले श्रीराम मंदिर के गर्भगृह में नेपाल स्थित कालीगण्डकी से ली गई शिला से तराशी गई मूर्ति रखने का महत्व हमेशा रहेगा। इस कार्य को करने पर गर्व है। इससे नेपाल और भारत के बीच सदियों से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।”

यूएमएल के केंद्रीय सदस्य और विदेश मामलों के विभागीय उप प्रमुख कृष्ण बहादुर केसी ने कहा, “मुक्तिनाथ उद्गम स्थल से निकली कालीगण्डकी नदी की शिला अपने आप में पवित्र है। अयोध्या में राम मंदिर के गर्भगृह में पवित्र कालीगण्डकी नदी का पत्थर रखने का मतलब न केवल नेपाल और भारत के सांस्कृतिक संबंधों का विषय है, बल्कि हम कालीगण्डकी के तटीय क्षेत्र के निवासियों के लिए भी गर्व का विषय है।”

1 जनवरी 2024 से भक्तों के लिए खुलेगा राम मंदिर

गौरतलब है कि राम मंदिर का निर्माण मार्च 2020 से चल रहा है। राम मंदिर 70 एकड़ जमीन पर बन रहा है, जिसकी लंबाई 360 फीट, चौड़ाई 235 फीट और ऊँचाई 161 फीट होगी। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट के मुताबिक, मंदिर में पांच मंडप और बीच में एक गर्भगृह होगा। गर्भगृह भूतल पर होगा, जबकि प्रथम तल पर राम दरबार का निर्माण किया जा रहा है। 1 जनवरी 2024 को राम मंदिर का उद्घाटन कर इसे श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तैयारी चल रही है।

द मिंट के अनुसार, राम मंदिर और परिसर के निर्माण में लगभग 20 अरब रुपए खर्च होने का अनुमान है। अकेले मंदिर के निर्माण में साढ़े पाँच अरब रुपए खर्च होंगे। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सरकार से फंड नहीं मिला है। ट्रस्ट के परियोजना निदेशक वीके मेहता ने जानकारी दी है कि अब तक श्रद्धालुओं द्वारा 32 अरब रुपए से अधिक का सहयोग प्राप्त हो चुका है।

‘हिन्दू राष्ट्र बनाने वाले कितने आए और चले गए’: मौलाना तौकीर रज़ा का बागेश्वर धाम पर निशाना, कहा- 1400 साल पुरानी लाइट मिल जाएगी तो आप भी इस्लाम में आ जाएँगे

उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित मुस्लिमों के धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। रजा ने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र कभी नहीं बन सकता। उन्होंने पीएम मोदी (PM Modi) को आज का भगवान बताते हुए कहा कि जिन्ना मुस्लिम नहीं थे।

इतना ही नहीं, सपा के एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस को लेकर दिए गए बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जो उसमेें लिखा है, वह आजकल हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज शूद्र, गँवार, ढोल पीटे जा रहे है, उनकी लड़कियाँ उठाई जा रही हैं, उनकी बेइज्जती की जा रही है। 

बागेश्वर के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के घर वापसी करवाने वाले बयान पर तौकीर रजा ने कहा कि वह पॉपुलर होना चाहते हैं। इसलिए ऐसा बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम पर बयान दो, फिर जान का खतरा बताओ। उन्होंने कहा कि शास्त्री को जान का खतरा नहीं है, वह पॉपुलर होना चाहते हैं।

घरवापसी को लेकर उन्होंने कहा, “घर वापसी क्या होती है? 1400 साल पहले एक लाइट हमें मिली थी और वो लाइट अभी तक आपको नहीं मिली है। जब मिल जायेगी तो आप भी इस्लाम में आ जाएँगे। इस्लाम को उन्होंने इंसाफ, अच्छाई, सच्चाई और मोहब्बत का रास्ता बताया।

धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के बयान पर तौकीर रजा कहा, “हिंदू राष्ट्र बनाने वाले न जाने कितने आए और चले गए। हमारे देश को हिंदू राष्ट्र नहीं बनाया जा जा सकता। यह आस्थाओं का देश है, हमारा देश गुलदस्ता है यहां हर रंग के फूल खिलते रहेंगे।” उन्होंने का कि देश का बँटवारा हो गया, लेकिन हिंदू राष्ट्र नहीं बन सका।

तौकीर रजा ने कहा कि मुहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम नहीं था। मुस्लिम बनकर इस देश का बँटवारा किया है। तौकीर रजा ने कहा कि किसी मुस्लिम ने गाँधी जी की हत्या नहीं की, गोडसे ने की। तौकीर रजा ने कहा कि गाँधी जी की हत्या RSS का षड़यंत्र था।

अपने विवादास्पद बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले तौकीर रजा ने कहा कि RSS की योजना थी कि गाँधी जी की हत्या होगी तो मुस्लिमों का कत्लेआम हो जाएगा। लोगों को यह लगेगा कि गाँधी जी की हत्या किसी मुस्लिम ने की है। उन्होंने कहा कि RSS की इस योजना को मुस्लिमों ने नाकाम कर दिया।