Saturday, July 20, 2024
Homeदेश-समाजबैन होने के बाद भी हैदराबाद यूनिवर्सिटी में BBC डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग, इस्लामी छात्र...

बैन होने के बाद भी हैदराबाद यूनिवर्सिटी में BBC डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग, इस्लामी छात्र संगठनों का हाथ: JNU ने रद्द करने का दिया था आदेश

"हमने इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन से शिकायत की है। स्क्रीनिंग का आयोजन करने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। दोनों संगठनों ने यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर बिना बिना अनुमति के स्क्रीनिंग की है।"

बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री को केंद्र सरकार बैन कर चुकी है। बावजूद हैदराबाद यूनिवर्सिटी (University of Hyderabad) में इसकी स्क्रीनिंग की गई है। इसके पीछे इस्लामिक छात्र संगठनों का हाथ बताया जा रहा है। जेएनयू में भी इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की प्लानिंग की गई थी। लेकिन, विश्विद्यालय प्रबंधन ने इस पर रोक लगा दी थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन और मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन ने की है। इस स्क्रीनिंग में दोनों इस्लामिक छात्र संगठनों के 50 से अधिक छात्र मौजूद रहे। इसको लेकर एबीवीपी के छात्र नेता महेश ने कहा है, “हमने इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन से शिकायत की है। स्क्रीनिंग का आयोजन करने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। दोनों संगठनों ने यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर बिना बिना अनुमति के स्क्रीनिंग की है।”

वहीं, पुलिस का कहना है, “हमें जानकारी मिली है कि कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की है। अब तक लिखित शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर मामले की जाँच की जाएगी।” गौरतलब है कि दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में भी मंगलवार (24 जनवरी 2023) को इस प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग की तैयारी की गई थी। लेकिन, इसकी जानकारी मिलने के बाद जेएनयू प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की। इस एडवाइजरी में कहा गया था कि इस तरह की गतिविधि से विश्वविद्यालय में शांति और सद्भाव भंग हो सकती है।

जेएनयू प्रबंधन ने कहा था, “विश्वविद्यालय प्रशासन के यह संज्ञान में आया है कि जेएनयूएसयू (JNUSU) के नाम पर छात्रों के एक समूह ने पैम्पलेट जारी किया है कि टेफ्लास के पास 24 जनवरी, 2023 को  ‘इंडिया- द मोदी क्वेश्चन’ डॉक्यूमेंट्री को रात 9 बजे दिखाई जाएगी। जेएनयू प्रशासन से इस संबंध में कोई भी अनुमति नहीं ली गई है। इस तरह की गतिविधि से विश्वविद्यालय में शांति और सद्भाव भंग हो सकती है। इसलिए संबंधित छात्रों या इससे जुड़े व्यक्ति को यह सलाह दिया जाता है कि प्रस्तावित कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दें। ऐसा न करने पर विश्वविद्यालय के नियम के हिसाब से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

दरअसल, इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैये, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

BBC की डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के आदेश के बाद ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया है। आईटी नियम, 2021 के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने यह कार्रवाई की है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

घुमंतू (खानाबदोश) पूजा खेडकर: जिसका बाप IAS, वो गुलगुलिया की तरह जगह-जगह भटक बिताई जिंदगी… इसी आधार पर बन गई MBBS डॉक्टर

पूजा खेडकर ने MBBS में नाम लिखवाने से लेकर IAS की नौकरी पास करने तक में नाम, उम्र, दिव्यांगता, अटेंप्ट और आय प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा किया।

फैक्ट चेक’ की आड़ लेकर भारत में ‘प्रोपेगेंडा’ फैलाने की तैयारी कर रहा अमेरिका, 1.67 करोड़ रुपए ‘फूँक’ तैयार कर रहा ‘सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स’...

अमेरिका कथित 'फैक्ट चेकर्स' की फौज को तैयार करने की योजना को चतुराई से 'डिजिटल लिटरेसी' का नाम दे रहा है, लेकिन इनका काम होगा भारत में अमेरिकी नरेटिव को बढ़ावा देना।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -