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ये लड़की मेरी, वो मकान मेरा, वो औरत मेरी… जब मस्जिद से आईं आवाजें बता रही थी कश्मीरी हिंदू महिला और रो रहे थे सब

आज 19 जनवरी है। ये वही दिन है, जब कश्मीर के हिंदुओं के जिंदगी में काला दिन बनकर आया। आज ही दिन घाटी की मस्जिदों से हिंदुओं के खिलाफ फतवे जारी कर उन्हें घाटी छोड़ने का फरमान जारी किया गया था। आज भी कश्मीरी इस दिन को याद कर सिहर उठते हैं।

19 जनवरी यानी कश्मीरी पंडित नरसंहार दिवस पर कश्मीरी पंडितों ने उस दिन को याद किया। एक महिला ने बताया, “धर्मांतरित हो, या मरो या भाग जाओ! 1990 में आज ही के दिन जब पूरी घाटी के मस्जिदों से यह नारा दिया गया। हजारों पंडितों का नरसंहार कर लाखों को अपने ही वतन में निर्वासित किया गया था। सनातनियों, याद रखना, भूलना नहीं।”

एक कश्मीरी महिला अपने दर्द को याद करते हुए कहती है, “हम भागे नहीं, हमें भगाया गया। मस्जिदों से वो अनाउंस करते थे। लड़कियाँ गिन कर रखी थीं। वो लड़की मेरी… वो औरत मेरी… वो मकान मेरा। सेकेंड क्लास में मेरा भाई पढ़ता था। मैं अपनी पड़ोसन की ट्रक मे आई हूँ। कौन पड़ोसी? कोई नहीं था वहाँ जो उन्हें बताए कि ये मत करो, ये गलत है? कौन सा भाईचारा उन्होंने उस वक्त हमें दिखाया, जो कहें ये हमारे अपने हैं?”

‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म के निर्माता विवेक अग्निहोत्री पीड़िताओं द्वारा बताई गई कहानी को याद करते हुए कहते हैं, “हमारे अपने, हमारे पड़ोसी, हमारे स्टूडेंट्स थे। जो हमारे घरों में आकर खेलते थे बच्चे, हमारे घरों में खेलना सीखा। जब वे थोड़े बड़े हो गए और उनकी मूँछें आ गई तो उन्होंने आकर हमारे पति को मारा।”

कश्मीर के मुस्लिम पड़ोसियों को याद करते हुए फिल्म के मुख्य किरदार निभाने वाले अनुपम खेर कहते हैं, वे अमानवीय लोग हैं। उनके शरीर में दिल नहीं है। राक्षस हैं वो। आप कैसे महसूस करेंगे कि आप इंसान हैं? जब दूसरे का दुख आपको अपना दुख लगता है, तो लगता है कि आप इंसान हैं।”

अनुपम खेर ने बताया कि जब वे इस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़े थे, तब बहुत रोए थे। खेर बोले, हम उस सपने को पूरा होते हुए देख रहे थे। 32 साल से किसी ने हमारी आवाज सुनी नहीं थी। मैंने अपने दादा जी को मरते देखा था, अपने पिताजी को मरते देखा था।”

बता दें कि The Kashmir Files को 19 जनवरी को कुछ सीमित थिएटर्स में दोबारा रिलीज किया गया है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ सिनेमा इतिहास की उन चुनिंदा फिल्मों में है, जिसे एक साल के भीतर दो बार रिलीज़ किया गया। 19 जनवरी को कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के 33 साल पूरे रहे हैं।

‘इतिहास की पुस्तकों में पढ़ाई जाए कश्मीरी हिन्दुओं से हुई क्रूरता, नरसंहार की मान्यता दे सरकार’: पलायन की 33वीं बरसी पर प्रदर्शन, न्याय की माँग

संगठन ‘India 4 Kashmir’ (I4K) ने जम्मू कश्मीर में हमारी खोई हुई जमीन को पुनः हासिल करने के लिए और प्रदेश में कश्मीरी हिन्दुओं को पूरे गरिमा एवं सम्मान के साथ पुनर्वासित करने के लिए ’33वाँ निष्कासन दिवस’ मनाया। 19 जनवरी, 1990 को कश्मीरी हिन्दू ‘काला दिन’ के रूप में मनाते हैं, क्योंकि इसी दिन वहाँ की मस्जिदों से साजिश के तहत घोषणा कर के भगाया गया था और उनका नरसंहार किया गया था।

इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आम नागरिकों के साथ मिल कर 19 जनवरी, 1990 की भयावह रात को घाटी में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा अंजाम दिए गए नरसंहार में में बलिदान हुए कश्मीरी हिन्दुओं की याद में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया और साथ ही श्रद्धांजलि सभा भी आयोजित की गई। काली पट्टी बाँधे, हाथों में तख्तियाँ-बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने अपने धर्म का पालन करने के लिए मारे गए निर्दोष हिन्दू समाज के सदस्यों के सम्मान में ये प्रदर्शन किया गया।

उस तारीख़ को इस्लामी कट्टरपंथियों ने ‘रलिव, गालिव, चलिव’ (इस्लामी धर्मांतरण करो या फिर प्रदेश छोड़ कर भागो) के नारे के साथ हिन्दुओं पर हमला किया था। साथ ही वो हिन्दुओं को अपनी महिलाओं को छोड़ कर जाने के लिए कह रहे थे। ताज़ा प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने माँग की है कि भारत सरकार आधिकारिक तौर पर इसे ‘समुदाय के नरसंहार’ के रूप में मान्यता दे और इतिहास की किताबों में इस घटना का उल्लेख भी किया जाए।

I4K ने अपने बयान में कहा, “जबरन निर्वासन में रह रहे कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाया जाए। नरसंहार से इनकार करने का तात्पर्य है कि आप इसके भागीदार बन रहे हैं। हम मृतकों और उन लोगों के लिए न्याय की माँग करते हैं, जिन्हें 33 वर्षों से अपने ही देश में शरणार्थी के रूप में रहने के लिए मजबूर कर दिया गया है। 1990 में 7 लाख कश्मीरी पंडितों को बेघर कर दिया गया था। आज तक घाटी में उनकी वापसी के लिए अनुकूल समाधान नहीं मिल पाया है।”

गुजरात दंगों पर BBC की प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री: प्रधानमंत्री मोदी को मिला ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक का साथ, मुस्लिम सांसद को ऐसे लगाई लताड़

साल 2002 के गुजरात दंगों (Gujarat Riots 2002) पर बनी BBC की डॉक्युमेंट्री का मामला ब्रिटिश संसद में पहुँच गया। हालाँकि, इस विवाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का बचाव किया।

दरअसल, पाकिस्तान मूल के ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने संसद में गुजरात दंगे का मुद्दा उठाया। इस पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने इस डॉक्यूमेंट्री में अपने भारतीय समकक्ष के चरित्र चित्रण से वह सहमत नहीं हैं।

बता दें कि साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की बोगी आग लगाकर 59 हिंदुओं को जिंदा जलाकर मारने के बाद गुजरात के गोधरा सहित अन्य जगहों पर दंगे भड़क उठे थे। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थी। इस्लामवादी, वामपंथी और प्रोपेगेंडा फैलाने वाली विदेशी एजेंसियाँ इस दंगे का दोष पीएम मोदी पर मढ़ने का लगातार प्रयास करती रही हैं।

इसी तरह की प्रोपेगेंडा के तहत ब्रिटेन की मीडिया एजेंसी BBC ने एक डॉक्यमेंट्री बनाई है। इस डॉक्यूमेंट्री में BBC ने दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है।

India: The Modi Question शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैये, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

सांसद इमरान हुसैन ने ब्रिटिश संसद में कहा, “वह (पीएम नरेंद्र मोदी) इस हिंसा (गुजरात दंगों) के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार थे। यह देखते हुए कि सैकड़ों लोगों को क्रूरता से मार दिया गया था और यहाँ ब्रिटेन सहित भारत और दुनिया भर के परिवार अभी भी न्याय के बिना हैं। क्या प्रधानमंत्री (यूके पीएम) विदेश कार्यालय में अपने राजनयिकों से सहमत हैं कि मोदी सीधे तौर पर जिम्मेदार थे और क्या विदेश कार्यालय को जातीय संहार के इस गंभीर कार्य में उनकी संलिप्तता के बारे में पता है?”

इस पर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि यूनाइटेड किंगडम की सरकार की लंबे समय से चली आ रही स्थिति स्पष्ट है और वह बदली नहीं है। ऋषि सुनक ने आगे कहा, “निश्चित रूप से हम किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करते हैं, चाहे यह कहीं भी हो। लेकिन, मैं उस चरित्र-चित्रण से बिल्कुल सहमत नहीं हूँ, जो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर सामने रखा गया है।”

इतना ही नहीं, ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड के सदस्य लॉर्ड रामी रेंजर ने बुधवार (18 जनवरी 2023) को ट्वीट कर बीबीसी को निशाने पर लिया और उसे पक्षपाती बताया। उन्होंने भारत के करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए बीबीसी की आलोचना की। 

लॉर्ड रेंजर ने अपने ट्वीट में लिखा, “बीबीसी न्यूज, आपने भारत के करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत किया है और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित भारत के प्रधानमंत्री को अपमानित करने के साथ-साथ भारतीय पुलिस और भारतीय न्यायपालिका की भी बेइज्जती की है। हम दंगों और लोगों की मौत की निंदा करते हैं, लेकिन आपकी पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग की भी निंदा करते हैं।”

इस डॉक्यूमेंट्री पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हमें लगता है कि यह डॉक्यूमेंट्री एक प्रोपोगेंडा का हिस्सा है। इसकी कोई सत्यता नहीं है। इस पक्षपातपूर्ण सीरीज को भारत में प्रदर्शित नहीं किया गया है।” 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा बुधवार (18 जनवरी 2023) को कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री उन एजेंसी और व्यक्तियों का प्रतिबिंब है, जो इस कहानी को फिर से फैला रहे हैं। इस कोशिश इसके पीछे के एजेंडे के बारे में सोचने पर मजबूर करता है।  

शबनम, मदीना, शहनाज और शबाना… बुर्के में मिला 4 Kg गाँजा, यूपी में मुस्लिम महिलाओं के गिरोह का पर्दाफाश: गाँजे की सप्लाई से होती थी मोटी कमाई

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पुलिस ने बुर्के की आड़ में गाँजा सप्लाई करने वाली मुस्लिम महिलाओं के गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 4 को गिरफ्तार किया है। जिन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम हैं – शबनम, मदीना, शहनाज और शबाना। ये महिलाएँ स्थानीय मंडल जिला कारगर में विचाराधीन कैदियों को गाँजे की सप्लाई कर रही थीं। ये बुर्के की आड़ में कैदियों से मिलती थीं और मुँह माँगे दाम पर गाँजे की सप्लाई करती थीं।

पुलिस की पूछताछ में महिलाओं ने बताया कि कैदियों से मिलने के बहाने वो उन्हें उनकी डिमांड के हिसाब से गाँजे की सप्लाई करती थीं। इस बार भी वो गाँजे की सप्लाई के लिए ही पहुँची थीं, लेकिन पुलिस ने धर-दबोचा। पुलिस ने जब अच्छे से जाँच की तो पता चला कि उन्होंने अपने बुर्के में ही गाँजा छिपा रखा था। चारों महिलाओं के पास से 4 किलोग्राम गाँजा बरामद किया गया है। जेल में बंद कैदियों अरमान और इस्माइल को भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है।

IPC (भारतीय दंड संहिता) के साथ-साथ यूपी पुलिस ने NDPS (स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985) के तहत भी मामला दर्ज किया है। पुलिस को जब इन महिलाओं की गतिविधि संदिग्ध लगी तो महिला कॉन्स्टेबलों को बुला कर उनकी तलाशी ली गई थी। इन महिलाओं ने बताया कि वो जेल में बंद अरमान और इस्माइल को गाँजा सप्लाई करने जा रही थीं। पुलिस ने कहा है कि ये गिरोह बड़ा है और जल्द ही इसका पूर्णरूपेण पर्दाफाश किया जाएगा।

इस काले धंधे में मुस्लिम महिलाओं के इस गिरोह की मोटी कमाई होती थी। जेल से बुर्के का एडवांस में ऑर्डर लिया जाता था। लंबे समय से पुलिस को इन महिलाओं पर शक हो रहा था। आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) शैलेन्द्र लाल ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है। बता दें कि कर्नाटक के शैक्षिण संस्थानों में यूनिफॉर्म को धता बता कर बुर्के में प्रवेश को लेकर हंगामा किया गया था। मुरादाबाद के ‘हिन्दू कॉलेज’ से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जान बुर्के में कॉलेज में प्रवेश न मिलने पर मुस्लिम छात्राएँ धरने पर बैठ गईं।

चलती स्कूटी, गोद में बैठी किशोरी लगातार कर रही थी किस: वीडियो वायरल होने के बाद युवक धराया, मोबाइल फोन दुकान पर छूटने से शुरू हुई थी ‘लव स्टोरी’

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक प्रेमी जोड़े को चलती स्कूटी पर ‘अश्लील स्टंट’ करते हुए देखा गया था। पुलिस ने लगभग 100 CCTV फुटेज खँगालने के बाद उस व्यक्ति की पहचान कर के उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित विक्की शर्मा एक कपड़े की दुकान पर काम करता है। ये वीडियो रविवार (15 जनवरी, 2023) का है, जब वो किशोरी के साथ घूमने के लिए निकला था।

जब वो हजरतगंज से गुजर रहा था, उसी समय किसी ने वीडियो बना कर वायरल कर दिया। विक्की शर्मा ने बताया कि उसकी दुकान और किशोरी के पिता की दुकान अगल-बगल में ही है। एक साल पहले लड़की के पिता का मोबाइल फोन उसकी दुकान में छूट गया था। फिर उन्होंने अपनी बेटी के फोन नंबर से अपने फोन पर कॉल किया। फिर विक्की ने उस नंबर को नोट कर लिया और दोनों के बीच चैटिंग होने लगी। धीरे-धीरे वो कॉल पर भी बात करने लगे।

जब दोनों में दोस्ती बढ़ गई तो किशोरी भी अपने पिता की दुकान पर आने लगी और दोनों मिलने लगे। विक्की शर्मा अक्सर उसे घर छोड़ने के बहाने स्कूटी लेकर निकल जाता था। जब ये वीडियो बनाया गया, तब भी वो उसे घुमाने के बाद घर छोड़ने जा रहा था। सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील हरकत करने का अश्लील गाना बजाने पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-294 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें 3 महीने तक की सज़ा हो सकती है।

हालाँकि, ये जमानती प्रावधान है। सार्वजनिक स्थानों पर लापरवाही से वाहन चलाने और इससे दूसरों के जीवन को संकट में डालने पर धारा-279 भी लगाई जा सकती है। यूपी पुलिस ने इन्हीं दोनों धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। वीडियो में युवक स्कूटी चला रहा था, और लड़की उसके चेहरे की तरफ मुँह कर के उसकी गोद में बैठी हुई थी और उसे लगातार किस कर रही थी। उस समय सड़क व्यस्त थी और काफी ट्रैफिक भी था।

‘हमारे आका पर हाथ डाला तो शहर का शहर कर्बला बना देंगे’: जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी का भड़काऊ बयान, नूपुर शर्मा को कहा ‘पागल औरत’

जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी के भड़काऊ बयान दिया है। राज्य सभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके गुलाम रसूल बलियावी ने झारखंड के हजारीबाग में गुरुवार (18 जनवरी, 2023) को मजहब के नाम पर भड़काऊ बातें की। उन्होंने भाजपा की प्रवक्ता रहीं (अब पार्टी से निलंबित) नूपुर शर्मा पर निशाना साधते हुए ये बातें कही। नूपुर शर्मा के बयान के नाम पर पहले ही राजस्थान के उदयपुर से लेकर महाराष्ट्र के अमरावती तक इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्याएँ की थीं।

जदयू नेता ने कहा , “मेरे आका की इज्जत पर हाथ डालोगे तो अभी तो हम कर्बला मैदान में इकट्ठा हुए हैं, उनकी इज्जत के लिए हम शहरों को भी कर्बला बना देंगे। खुद को सेक्युलर बताने वाली राजनीतिक पार्टियों ने भी नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग नहीं की। कोई रियायत नहीं होगी, क्योंकि मेरी ज़िन्दगी मेरी नहीं है और मेरी साँसें भी मेरी नहीं हैं। जीने की तमन्ना वो करे, जिसके पास रसूल का नूर न हो। हम तो इसी आरजू-तमन्ना से जीते आए हैं कि मरने के बाद एक ऐसा दिन तो आएगा, जब कोई नहीं रहेगा।”

गुलाम रसूल बलियावी ने ये भी कहा कि किसी भी ‘तथाकथित धर्मनिरपेक्ष’ पार्टियों के नेताओं ने नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग नहीं की। इतना ही नहीं, उन्होंने नूपुर शर्मा को ‘पागल औरत’ करार देते हुए कहा कि उनकी गिरफ़्तारी के लिए किसी ने आवाज़ नहीं उठाई। उन्होंने मुस्लिमों को भड़काते हुए पूरे राँची को जाम करने को कहा। उन्होंने कहा कि तुमलोग हमेशा गैरों का झंडा लेकर निकलते हो, हुक्मरानों को बताना पड़ेगा कि हम राख के नीचे दबे ज़रूर हैं, पर बुझे नहीं हैं।

उन्होंने किसी 17 एजेंडे की बात करते हुए कहा कि मुस्लिम दिल से इन मुद्दों पर साथ दें। उन्होंने ‘नामूस-ए-रिसालत’ की बात करते हुए कहा कि दलितों की तरह मुस्लिमों के लिए भी ‘सेफ्टी एक्ट’ बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दहेज़ को खत्म करते हुए मुस्लिमों के बच्चों को रोजगार दिए जाने और मुस्लिमों को सत्ता में हिस्सेदारी दिए जाने की भी माँग की। जदयू नेता ने कहा कि जब कोई नहीं रहेगा, तब भी मेरा रसूल था और हमेशा रहेगा।

‘वो भोंक रहे हैं, सामने आएँगे तो गीले हो जाएँगे’: अंधविश्वास के आरोपों पर बोले बागेश्वर धाम के महंत – घर वापसी कराता हूँ, इसीलिए हो रही साजिश

बागेश्वर धाम और वहाँ के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने कथित चमत्कारों के लिए विवादों में हैं। उन पर समाज में अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगा है। धीरेंद्र शास्त्री ने इन अंधविश्वास फैलाने के आरोपों को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा है कि वह हिंदुओं की घर वापसी करवा रहे हैं। इसलिए कुछ लोगों को समस्या हो रही है।

धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है, “धर्म विरोधी लोग ये सब कर रहे हैं। ये वही लोग हैं, जिन्होंने भगवान राम के होने और अयोध्या का सबूत माँगा था। हर बार सनातनी साधुओं को ही टारगेट किया जा रहा है। हमने जबसे लोगों की घर वापसी करवाई है, तब से इन लोगों को समस्या हो रही है। हमने छतारी की कथा में ऐलान किया था कि हमारे खिलाफ साजिशें होंगीं। लेकिन, हमें इनसे डर नहीं है। वो अपनी जगह बोलते ही रहते हैं। वो अपनी जगह भोंक रहे हैं। सामने आएँगे तो गीले हो जाएँगे।”

उन्होंने यह भी कहा है, “सनातन के लिए सनातनी जाग रहे हैं। इसका प्रमाण यही है कि धर्म विरोधी मुँह चला रहे हैं। हमने इन सब पर बात करना बंद कर दिया है। उन्हें साफ कह दिया है कि यदि आपको हमारे दरबार से दिक्कत है तो आकर देखिए और समझिए। आपकी चुनौती हमें कानूनी रूप से नहीं मिली है।”

उन्होंने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव की चुनौती पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब हम वहाँ (नागपुर) में 7 दिन थे, तब चुनौती क्यों नहीं दी? उन्होंने व्यक्ति क्यों नहीं भेजा? उन्होंने लेटर क्यों नहीं भेजा?”

उन्होंने श्याम मानव को जवाब देते हुए कहा, “यहाँ (रायपुर) भी आना तो बताकर आना। ऐसा न हो कि यहाँ आकर भाग जाओ फिर कहो कि हमसे मिले नहीं। जब मिलने आओ तो हमारे नीतेंद्र चौबे या केशव मेहता जी, इन लोगों को बता देना कि हम फलां जगह से आए हैं। इसके बाद हम ठठरी बाँध देंगे।”

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आगे कहा है, “हमारे पास किसी प्रकार की सिद्धि नहीं है, लेकिन जो दरबार है उसमें किंचित मात्र भी संदेह नहीं है। वो और उनके जैसे लोग आएँ और दरबार में बैठें। हमें जो प्रेरणा मिलेगी हम बेझिझक बताएँगे, क्योंकि न तो हम कमरे में मिलते हैं और न हम अंधविश्वास फैला रहे हैं। हम तो सिर्फ हनुमान जी से जोड़ रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत अपने धर्म का प्रचार करने का अधिकार है। हमारे पूर्वजों ने संविधान स्वीकार किया है।”

सुदर्शन न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा, “इन लोगों ने भगवान राम को नहीं छोड़ा, फिर हम तो आम हैं। ये हमें कब छोड़ेंगे। हमें इनसे डिगना या डरना नहीं है। हम सभी ये प्रार्थना करेंगे कि इन लोगों की कोई भी बात सुनने से पहले एक बार हमारा तथ्य जरूर जान लेना। तब इनको मानना, क्योंकि ये सोची समझी साजिश है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम घर वापसी करवा रहे हैं। वो लोग धर्मांतरण पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं। फिर हम पर 10 करोड़ खर्च करने में क्या बुराई है।” कहा जाता है कि क्रिसमस के दिन अपने पैतृक गाँव में स्थित बागेश्वर धाम में धीरेंद्र शास्त्री ने 300 लोगों की घर वापसी करवाई थी।

उन्होंने आगे कहा है, “लोगों से हम यही कहना चाहते हैं कि हम वचन देते हैं कि ऐसा कोई कृत्य नहीं करेंगे जिससे हिंदुओं की नाक और साख को नुकसान हो। चाहे हमें उसके लिए प्राणों की आहुति देना पड़े।” उन्होंने कहा कि यदि अपने धर्म का प्रचार करने पर एफआईआर दर्ज होती है तो देश के सभी हनुमान भक्तों पर एफआईआर होनी चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री ने सवाल उठाते हुए यह भी कहा है, “भारत में चादर चढ़ाना श्रद्धा है, लेकिन हनुमान जी की भक्ति बताना अंधविश्वास है। भारत में कैंडल जलाना श्रद्धा है, लेकिन कलावा बाँधना और हनुमान चालीसा का उपाय बताना या सनातन की बात करना अंधविश्वास है। ये दोगलापन लाते कहाँ से हैं भारत में?”

उन्होंने आगे कहा है कि जिन लोगों को भी समस्या है वह रायपुर में 20 और 21 फरवरी 2023 को दिव्य दरबार लग रहा है, वहाँ पहुँच सकते हैं। वे उनके आने-जाने का किराया और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेते हैं कि उनकी पुजाई (मारपीट) नहीं होगी।

दरअसल, बागेश्वरधाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा नागपुर में 5 जनवरी से 11 जनवरी तक तक रामकथा के लिए पहुँचे थे। पहले यह कथा 13 फरवरी तक होनी थी। हालाँकि, किन्हीं कारणों से यह कथा 2 दिन पहले ही समाप्त हो गई थी।

इस कथा के समापन के बाद महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। साथ ही, कहा था कि उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को चुनौती थी। इसलिए वे दो दिन पहले ही नागपुर से भाग गए।

श्याम मानव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर दरबार के दौरान चमत्कार दिखाने पर 30 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। बाद में उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

(फोटो साभार: बागेश्वरधाम का इंस्टाग्राम अकाउंट)

‘केंद्र सरकार से शिकायत नहीं, वो करती है हमारा सपोर्ट’: खेल मंत्रालय के साथ पहलवानों की बैठक बेनतीजा, कहा – जब तक नहीं हटेंगे WFI अध्यक्ष, जारी रहेगा धरना

दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों के डेलीगेशन ने खेल मंत्रालय में बातचीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। पहलवान विनेश फोगाट ने मीडिया से कहा कि हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। बजरंग पुनिया ने कहा है कि हम सरकार से सकारात्मक आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। जब तक संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया जाता हमारा धरना जारी रहेगा। बजरंग पुनिया ने कहा कि हमारी लड़ाई फेडरेशन के खिलाफ है, राज्य या केंद्र की सरकार से नहीं।

देश के कई बड़े पहलवान भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष के खिलाफ धरना दे रहे हैं। विनेश फोगाट ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। महिला खिलाड़ियों और महिला कोचों के साथ बदसलूकी और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जा रहा है।

मीडिया से बात करते हुए विश्व चैंपियन पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि खेल मंत्रालय के साथ बातचीत में हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हम सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और जब तक माँगे पूरी नहीं होती धरना जारी रहेगा। विनेश फोगाट ने कहा कि हमारे पास लगाए गए आरोपों के सबूत हैं। विनेश ने आगे कहा कि फेडरेशन के अध्यक्ष ने गलत किया है। यदि उनपर कार्रवाई नहीं हुई तो हमें मजबूरन एफआईआर करवानी पड़ेगी।

विनेश ने कहा कि यौन शोषण के कारण यूपी की कुश्ती खत्म हुई है। पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि शोषित लड़कियों के फोन आ रहे हैं। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में दखल देकर न्याय की अपील करते हैं।

पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा कि हमारी लड़ाई फेडरेशन से है और हम इसे भंग करना चाहते हैं। बजरंग ने कहा कि राज्यों के कुश्ती संघ में भी उन्हीं के लोग बैठे हैं, हम चाहते हैं फेडरेशन भंग कर के नए सिरे से इसे बनाया जाए। बजरंग ने कहा कि खेल मंत्रालय के साथ बैठक में दिए गए आश्वासन से हम खुश नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि हमें हरियाणा की सरकार और देश की सरकार से कोई शिकायत नहीं है। सरकार हमें सपोर्ट करती है।

उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई सरकार से नहीं व्यक्ति विशेष है। हम तब तक धरने पर बैठे रहेंगे, जब तक फेडरेशन के अध्यक्ष को हटा कर इसे भंग करने की घोषणा नहीं कर दी जाती। बजरंग ने कहा कि अब तक 6 लड़कियों ने अपने साथ गलत होने का दावा किया है।

आपको बता दें कि बृजभूषण सिंह ने पहलवानों पर ही मनमानी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “ये चाहते हैं कि हम ओलंपिक विजेता हैं, हमारा ट्रायल ना कराया जाए और ट्रायल कराया भी जाए तो पहले नेशनल के विजेता का ट्रायल हो, फिर जो जीत कर आए उनके साथ फाइनल इनका कराया जाए। इससे इन्हें दिक्कत हो रही है। वहीं गुस्सा इनका आज फूटा है।”

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “जहाँ तक इन खिलाड़ियों का सवाल हैं ये ओलंपिक पदक विजेता हैं। उसमें हमारा भी सहयोग है। ओलंपिक के बाद इन्होंने एक भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया और सब सरकार की स्कीमों का फायदा ले रहे हैं। जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता की बात आती है तो इनकी तबीयत खराब हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में इनकी तबीयत ठीक हो जाती है। अभी फेडरेशन ने निर्णय लिया कि कोई भी विजेता हो उसे नेशनल खेलना होगा, अगर वे बीमार है तो उसका मेडिकल दे।”

Free the Nipple… फेसबुक और इंस्टाग्राम पर न्यूड सेल्फी भी डाल सकेंगे कुछ लोग, दशकों पुराना प्रतिबंध हटाने जा रहा है मेटा

फेसबुक (Facebook) की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) जल्द ही कुछ लोगों को फेसबुक और इंस्टाग्राम (Instagram) पर नग्न शरीर वाली तस्वीरों को पोस्ट करने की अनुमति देगा। फेसबुक ऐसी तस्वीरों पर प्रतिबंध लगाने के लगभग 10 साल बाद अपने नियमों में बदलाव करने का फैसला लिया है।

दरअसल, एक दशक पहले फेसबुक ने नंगी तस्वीरों, खासकर महिलाओं की नग्न स्तन वाली तस्वीरों को प्रतिबंधित कर दिया था। इन प्रतिबंधों का स्तनपान कराने वाली महिलाओं ने विरोध किया था। उन्होंने कहा कि फेसबुक उनके साथ पोर्नोग्राफर की तरह व्यवहार कर रहा है।

इन महिलाओं ने 2008 में फेसबुक मुख्यालय के बाहर प्रतिबंध के विरोध में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनों करने वालों में ‘फ्री निप्पल मूवमेंट’ (Free Nipple Movement) की महिलाएंँ शामिल थीं।

‘फ्री द निप्पल’ नाम से कई महिलाओं ने ग्लोबल मूवमेंट चलाया है। इस मूवमेंट की महिलाओं की माँग है कि उन्हें भी पुरुषों की तरह टॉपलेस घूमने का अधिकार दिया जाए। इन महिलाओं की माँग पर अमेरिका के छह राज्यों ने सितंबर 2019 में टॉपलेस घुमने की अनुमति दे दी थी।

फेसबुक पर इन्हीं महिलाओं की माँग को देखते हुए ओवरसाइट बोर्ड ने मेटा को सलाह दी कि वह महिलाओं और ट्रांसजेंडर को नंगी छाती वाली तस्वीरों पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले पर फिर से विचार करे। ओवरसाइट बोर्ड में शिक्षाविद, नेता और पत्रकार शामिल होते हैं, जो कंपनी को उसकी सामग्री-मॉडरेशन नीतियों पर सलाह देते हैं।

दरअसल, एक ट्रांसजेंडर और गैर-बाइनरी जोड़े ने मेटा के आदेश को लेकर बोर्ड से संपर्क किया था। इस जोड़े ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2021 और 2022 में इंस्टाग्राम पर दो अलग-अलग कंटेंट पोस्ट की थी। पोस्ट की तस्वीरों में कैप्शन में स्वास्थ्य देखभाल के बारे में बात किया गया था।

हालाँकि, मेटा ने दोनों पोस्ट को सेक्सुअल सॉलिसिटेशन कम्युनिटी स्टैंडर्ड का उल्लंघन करने के आरोप में हटा दिया। बोर्ड ने अपने निष्कर्षों में कहा कि इन पोस्ट को हटाना मेटा के सामुदायिक मानकों, मूल्यों या मानवाधिकारों की जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। ये मामले मेटा की नीतियों के मूलभूत मुद्दों को भी उजागर करते हैं।

दिल्ली में दीवारों पर लिख दिए ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, पुलिस ने हटवाए: पश्चिम विहार की घटना

गणतंत्र दिवस से ठीक पहले दिल्ली (Delhi) के पश्चिम विहार इलाके में एक दीवार पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ और ‘रेफरेंडम 2020’ के नारे लिखने का मामला सामने आया है। गुरुवार (19 जनवरी 2023) को इसकी सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने दीवार पर लिखे नारों को हटवा दिया।

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की पीआरओ सुमन नलवा ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को बताया कि दिल्ली के कुछ स्थानों पर देश विरोधी नारे लिखे गए थे। मामले में जाँच की जा रही है और इसे लिखने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सुरक्षा-व्यवस्था से संबंधित नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली पुलिस का हर सेक्शन यह सुनिश्चित कर रहा है कि गणतंत्र दिवस से पहले कोई गलत गतिविधि न हो। इससे हमारी सुरक्षा प्रभावित नहीं होती है। सिख फॉर जस्टिस (SFJ) एक प्रतिबंधित संगठन है, इसलिए यह खुद को चर्चा में लाने की कोशिश कर रहा है। वह खबरों में बना रहना चाहता है।

हाल ही में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की स्पेशल सेल ने भलस्वा डेयरी से आतंकी जगजीत उर्फ याकूब और नौशाद को गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि दोनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के K2 (कश्मीर-खालिस्तान) डेस्क के ऑर्डर पर काम कर रहे थे। इनके निशाने पर हिंदुवादी नेता थे। इन्होंने दिल्ली में एक हिंदू के टुकड़े-टुकड़े कर वीडियो बनाए थे। यह वीडियो पाकिस्तान में अपने आकाओं को भेजे भी थे। दोनों आतंकियों को पंजाब में 4 हिंदुवादी नेताओं को खत्म करने का टारगेट दिया गया था। इनमें दो नेता शिवसेना के थे।

दोनों आतंकियों की गिरफ्तारी 12 जनवरी 2023 को हुई थी। 56 साल का नौशाद पाकिस्तानी आतंकी समूह हरकत-उल-अंसार से जुड़ा बताया गया था। वह हत्या के 2 मामलों में उम्रकैद और विस्फोटक अधिनियम के एक केस में 10 साल की सजा भी काट चुका है। वहीं, जगजीत सिंह के देविंदर बंबीहा गिरोह समूह से जुड़े होने के बारे में खबर आई थी। 29 साल के जगजीत के खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप से भी संबंधों का शक जताया गया था।