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DCW अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को 15 मीटर तक घसीटा: नशे में धुत था कार चालक, AIIMS के बाहर हुई छेड़छाड़ की घटना

महिलाओं को न्याय दिलाने वाली संस्था दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें भी छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ा। दरअसल मालीवाल निरीक्षण के लिए गई थीं। उसी वक्त एक नशेड़ी ने उनके साथ छेड़छाड़ को अंजाम दिया।

स्वाति मालीवाल ने अपने साथ घटी इस दुर्घटना को ट्विटर पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “कल देर रात मैं दिल्ली में महिला सुरक्षा के हालात Inspect कर रही थी। एक गाड़ी वाले ने नशे की हालत में मुझसे छेड़छाड़ की।”

उन्होंने आगे लिखा, “जब मैंने उसे पकड़ा तो गाड़ी के शीशे में मेरा हाथ बंद कर मुझे घसीटा। भगवान ने जान बचाई। यदि दिल्ली में महिला आयोग की अध्यक्ष सुरक्षित नहीं, तो हाल सोच लीजिए।” हालाँकि, आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मामला गुरुवार (19 जनवरी 2023) के तड़के 3 बजे की। स्वाति मालीवाल AIIMS के गेट नंबर-2 के पास इंस्पेक्शन कर रही थीं। इसी दौरान शराब के नशे में धुत 47 वर्षीय एक व्यक्ति ने उनके साथ छेड़छाड़ की। जब उन्होंने पकड़ने की कोशिश की तो आरोपित ने शीशे को बंद कर उनके हाथ को फँसा दिया और 15 मीटर तक घसीटता रहा।

DCP चंदन सिंह ने बताया कि हौज़ खास थाने से एक कॉल आया था कि एक महिला को एक कार वाले ने गलत इशारे किए और 10-15 मीटर तक घसीटा। इस दौरान पुलिस ने बताया कि जिस महिला के साथ बदसलूकी हुई है, वह दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसकी पहचान हरीश चंद्र के रूप में हुई है।

नीतीश कुमार के काफिले के लिए 15 मिनट तक रोकी गईं 2 ट्रेनें, पूछने पर बिहार CM ने दोहराया अपना वही डायलॉग – ‘हमको नहीं पता’

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बक्सर दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। खबर है कि बक्सर में नीतीश के काफिले के गुजरने के लिए एक रेलवे क्रॉसिंग के पास 2 ट्रेनों को रोक दिया गया। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने ट्रेनें रोके जाने को लेकर उच्च स्तरीय जाँच की बात कही है। वहीं जब सीएम नीतीश कुमार से पत्रकारों ने रेल रोके जाने को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम नीतीश कुमार बुधवार (18 जनवरी, 2023) को समाधान यात्रा के तहत बक्सर पहुँचे थे। इस दौरान उनका काफिला पुलिस लाइन से निकल कर जिला अतिथि गृह (District Guest House) की तरफ जा रहा था। इस बीच इटाढ़ी रेलवे कॉसिंग के पास पटना-बक्सर पैसेंजर ट्रेन और कामाख्या दिल्ली एक्सप्रेस को रोक दिया गया। सीएम के काफिले के गुजरने के बाद ट्रेनों को रवाना किया गया। दावा है कि सीएम के काफिले के कारण ट्रोनों को 15 मिनट तक रोककर रखा गया।

बक्सर से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने मामले को लेकर सीएम नीतीश कुमार को घेरा है। उन्होंने मामले की जाँच करवाने की बात कही है। अश्विनी चौबे ने कहा कि बक्सर में समाधान करने आए नीतीश ने व्यवधान उत्पन्न कर दिया। अश्विनी चौबे ने पूछा कि किसके आदेश पर ट्रेनों को रोका गया? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ट्रेन रोके जाने से बच्चे-बूढ़े सभी लोग परेशान हो रहे थे। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री से मामले की जाँच कराने की अपील की।

ट्रेन रोके जाने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेन में सवार कुछ लोग तो पैदल ही स्टेशन की तरफ जाने लगे। एक यात्री ने स्थानीय पत्रकार को बताया कि गाड़ी रोक दिए जाने की वजह से पैदल चलना पड़ रहा है। हमें दिलदार नगर जाना है। आगे जाकर दूसरी गाड़ी पकड़ेंगे।

सीएम नीतीश कुमार ने ट्रेन रोके जाने की घटना से इनकार कर दिया है। पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा, “कहाँ, किसको रोका गया? कौन सी ट्रेन रोकी गई? हमको नहीं पता। हमें पहली बार मीडिया से जानकारी मिल रही है।” बता दें पिछले कई घटनाओं पर नीतीश कुमार ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है। इससे पहले 4 जनवरी को बिहार में BSSC सचिवालय सहायक की परीक्षा के पेपर आउट होने को प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठी चार्ज पर भी सीएम नीतीश ने इसी तरह का बयान दिया था। पुलिस की लाठीचार्ज में कई छात्रों के घायल होने की खबर सामने आई थी।

‘दाल किसानों को दिए ₹60000 करोड़, छोटे कृषक हमारी प्राथमिकता’: कर्नाटक में राजा वेंकटप्पा की धरती पर PM मोदी, कई विकास परियोजनाओं की दी सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने गुरुवार (19 जनवरी, 2023) को कर्नाटक के यादगिरि, कोडेकल और कलबुर्गी में सिंचाई, पेयजल और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना से संबंधित विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और उनका शिलान्यास किया। वहीं, मालखेड़ में नव घोषित राजस्व गाँवों के लाभार्थियों को ‘हक पत्र’ सौंपा।

इस दौरान पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सूरत-चेन्नई इकोनॉमी कॉरिडोर का जो हिस्सा कर्नाटक में पड़ता है, उस पर भी आज से काम शुरू हो गया है। इससे यादगिरि, रायचूर और कलबुर्गी सहित इस पूरे क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग’ भी बढ़ेगी और रोजगार को बल मिलेगा। विकास के इन सभी प्रोजेक्ट्स के लिए कर्नाटक के लोगों को बहुत-बहुत बधाई।

‘यादगिरी का एक महान इतिहास है’

पीएम मोदी ने कहा, “यादगिरी का एक महान इतिहास है। इसमें अद्भुत स्मारक हैं और समृद्ध संस्कृति और परंपराएँ हैं। इस जगह पर राजा वेंकटप्पा नायक का महान शासन इतिहास में एक अद्भुत निशान छोड़ गया है। मैं यादगिरी की ऐतिहासिक और विरासत भूमि को नमन करता हूँ।” उन्होंने यह भी कहा कि चल रही विकासात्मक परियोजनाएँ यादगिरी, कलबुर्गी और रायचूर के क्षेत्रों में जीवन को आसान बनाएँगी।

‘आजादी के अमृतकाल में विकसित भारत का निर्माण’

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘आजादी के ‘अमृत काल’ का जिक्र करते हुए कहा, “आजादी के अमृत काल में हमें विकसित भारत का निर्माण करना है। भारत विकसित तब हो सकता है, जब देश का हर नागरिक, हर परिवार, हर राज्य इस अभियान से जुड़े। यह किसानों से लेकर व्यापारियों के सामूहिक प्रयास से ही साकार होगा, इसलिए सभी को आगे आना चाहिए और अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए।”

पीएम ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “हमारी सरकार ने यादगिरि सहित देश के 100 से अधिक ऐसे जिलों में आकांक्षी जिला कार्यक्रम शुरू किया। हमने इन जिलों में सुशासन पर बल दिया। विकास के हर पैमाने पर काम शुरू किया। हमारे देश में दशकों तक करोड़ों छोटे किसान भी हर सुख-सुविधा से वंचित रहे, सरकारी नीतियों में उनका ध्यान तक नहीं रखा गया। आज यही छोटे किसान देश की कृषि नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”

‘किसानों से 80 गुना दाल MSP पर खरीदी’

वह आगे कहते हैं, “केंद्र सरकार ने भी इन 8 वर्षों में किसानों से 80 गुना दाल MSP पर खरीदी है। 2014 से पहले ​दाल के लिए किसानों को 100 करोड़ रुपए मिलते थे, तो वहीं हमारी सरकार ने दाल किसानों को 60 हजार करोड़ रुपए दिए हैं। यादगिरि दाल का कटोरा है, यहाँ की दालें देश भर में पहुँचती हैं। पिछले 7-8 वर्षों में अगर भारत ने दालों के लिए विदेशी निर्भरता को ​कम किया है तो इसमें उत्तर कर्नाटक के किसानों की बहुत बड़ी भूमिका है।”

प्रधानमंत्री ने वोट बैंक की बजाए विकास को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा, “2014 में आपने मुझे आशीर्वाद दिया और बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। मैं जानता हूँ कि जब तक भारत का एक भी जिला विकास के पैमाने पर पीछे रहेगा, तब तक देश विकसित नहीं हो सकता।”

जंतर-मंतर पर पहलवान नहीं बन पाए वामपंथी: वृंदा करात को मंच से उतारा-नहीं दी माइक, कहा- इसे राजनीति का मुद्दा न बनाएँ

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष के खिलाफ हरियाणा के पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे हुए हैं। इस दौरान माकपा की नेता वृंदा करात (Brinda Karat) इसमें हिस्सा लेने के लिए पहुँची, लेकिन खिलाड़ियों ने उन्हें मंच से उतार दिया। खिलाड़ियों ने कहा कि इस धरने को राजनीतिक ना बनाएँ।

धरने में शामिल बजरंग पुनिया ने वृंदा करात को मंच से नीचे जाने के लिए कहा। पुनिया ने कहा, “आप से अनुरोध है कि आप नीचे आ जाइए। माइक किसी को नहीं मिलेगा। आप से अनुरोध है कि इसे राजनीतिक मुद्दा न बनाएँ।”

बता दें कि महिला पहलवान विनेश फोगाट ने बुधवार (18 जनवरी 2023) को कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। फोगाट ने आगे कहा कि कोच महिलाओं को प्रताड़ित कर रहे हैं और फेडरेशन के चहेते कुछ कोच महिला कोचों के साथ भी बदसलूकी करते हैं। वे लड़कियों का यौन उत्पीड़न करते हैं।

उधर बृजभूषण सिंह ने पहलवानों पर ही मनमानी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “ये चाहते हैं कि हम ओलंपिक विजेता हैं, हमारा ट्रायल ना कराया जाए और ट्रायल कराया भी जाए तो पहले नेशनल के विजेता का ट्रायल हो फिर जो जीत कर आए उनके साथ फाइनल इनका कराया जाए। इससे इन्हें दिक्कत हो रही है। वहीं गुस्सा इनका आज फूटा है।”

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “जहाँ तक इन खिलाड़ियों का सवाल हैं ये ओलंपिक पदक विजेता हैं। उसमें हमारा भी सहयोग है। ओलंपिक के बाद इन्होंने एक भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया और सब सरकार की स्कीमों का फायदा ले रहे हैं। जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता की बात आती है तो इनकी तबीयत खराब हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में इनकी तबीयत ठीक हो जाती है। अभी फेडरेशन ने निर्णय लिया कि कोई भी विजेता हो उसे नेशनल खेलना होगा, अगर वे बीमार है तो उसका मेडिकल दे।”

कई हिन्दू लड़कियों के साथ सदन खान की अश्लील तस्वीरें, नाम बदल इंस्टाग्राम से करता था दोस्ती: ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण भी, ‘बजरंग दल’ ने धुना

मध्य प्रदेश के इंदौर से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ सदन खान पर नाम बदलकर सोशल मीडिया के जरिए हिंदू लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाने, अश्लील वीडियो बनाने और उसे ब्लैकमेल करने का आरोप लगा है। बुधवार (18 जनवरी, 2023) को इसकी जानकारी मिलने पर ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने उसे जमकर पीटा और पुलिस के हवाले कर कर दिया है। यह घटना इंदौर के भंवरकुआँ इलाके की है।

भंवरकुआँ पुलिस ने बताया कि सदन (अब्बा का नाम सादिक खान) पुणे का रहने वाला है। उसके खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। सोशल मीडिया पर सदन खान की कई और लड़कियों के साथ भी फोटो वायरल हो रही हैं। ‘बजरंग दल’ का दावा है कि वह नाम बदलकर इंस्टाग्राम पर केवल हिंदू लड़कियों से ही दोस्ती करता था। इसके बाद वह उन्हें अपने प्रेम जाल में फाँसता था। सदन के मोबाइल से उन्हें इंदौर की लड़की के अलावा कई और लड़कियों के अश्लील फोटोज भी मिले हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सदन खान ने खुद को अभिनव बताकर इंस्टाग्राम पर पहले हिंदू युवती से दोस्ती की। इसके बाद उसका अश्लील वीडियो बनाया और फिर उसे ब्लैकमेल करने लगा। सदन पर लड़की का शारीरिक शोषण करने का भी आरोप है। वह पुणे से इंदौर के भंवरकुआँ इलाके में कॉलेज में पढ़ रही छात्रा से मिलने के लिए आया था। एक ऑटो रिक्शा चालक ने पालदा इलाके से आरोपित को अपने ऑटो में बैठाया था।

रास्ते में सदन ने मोबाइल पर अपने दोस्तों से बात की। वह अपना नाम लेने के साथ कॉलेज की छात्रा के बारे में बात कर रहा था। लड़की जब होस्टल से बैग लेकर निकली तो रिक्शा चालक को उस पर शक हुआ। इसके बाद उसने ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी दी।

‘बजरंग दल’ के विभाग संयोजक तन्नु शर्मा ने बताया कि सदन खान आईटी पार्क में छात्रा के साथ बैठा था। तभी वहाँ संगठन के मंत्री विपिन राठौर और अन्य कार्यकर्ता पहुँचे। पहले वह खुद को हिंदू बताकर उन्हें गुमराह करता रहा। लेकिन, जब उन्होंने उसने पीटा और उससे आईडी कार्ड माँगा तो उसने अपना नाम सदन और अब्बा का नाम सादिक खान बताया। बताया जा रहा है कि छात्रा को भी उसके मुस्लिम होने का पता नहीं चला। छात्रा ने बताया कि वह उससे हिंदू बनकर ही फोन पर बात करता था।

वह उससे मिलने इंदौर आया। उसने पहले होटल बुलाया फिर छात्रा को आईटी पार्क लेकर आया। पुलिस के मुताबिक, छात्रा खुड़ैल इलाके में रहती है। उसने और उसके परिवार वालों ने केस दर्ज कराने से इनकार कर दिया है। वहीं, सदन खान ने इस बात को कबूल किया है कि वह इन सभी हिंदू लड़कियों से नाम बदलकर (हिंदू नाम रखकर) मिलता था। पुलिस इन लड़कियों की पहचान करने में जुट गई है।

नेपाल के रास्ते पाकिस्तान भागने की फिराक में था नौशाद: लश्कर के आतंकियों अशफाक-सुहैल से संपर्क में था, नेपाली अधिकारी को खिलाई थी रिश्वत

दिल्ली के जहाँगीरपुरी के भलस्वा डेयरी क्षेत्र से पकड़े गए आतंकियों नौशाद और जगजीत सिंह जग्गा से पूछताछ में बड़े खुलासे हो रहे हैं। नौशाद से पूछताछ में पता चला है कि वह नेपाल के रास्ते पाकिस्तान जाना चाहता था। रिश्वतखोर नेपाली अधिकारी के पकड़े जाने के कारण ऐसा नहीं हो सका। पता चला है कि नौशाद, अशफाक और सुहैल जैसे पाकिस्तानी आतंकियों के संपर्क में था। आतंकी पंजाब में बड़े नेताओं को निशाना बनाना चाहते थे।

पकड़े गए आतंकी नौशाद ने पूछताछ के दौरान जानकारी दी कि हत्या के आरोप में 25 सालों से ज्यादा समय तक जल में रहने के दौरान उसकी जान-पहचान कई आतंकियों से हुई थी। वह साल 2018 में जेल से रिहा हुआ था। रिहाई के बाद से ही वह आतंकियों के संपर्क में आना चाहता था। यहाँ तक की वर्ष 2019 में वह दो बार नेपाल गया था। नेपाल से पासपोर्ट हासिल कर वह पाकिस्तान जाना चाहता था। जिस नेपाली अधिकारी के जरिए नौशाद अपना नेपाली पासपोर्ट बनवा रहा था वो रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार हो गया और नौशाद पाकिस्तान नहीं जा सका।

ANI से मिली जानकारी के मुताबिक, नौशाद लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अशफाक और सुहैल के संपर्क में था। सुहैल ने पंजाब के कुछ बड़े नेताओं को निशाना बनाने की योजना तैयार की थी। दिल्ली पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, जेल में सजा के दौरान ही वह पाकिस्तानी आतंकियों के संपर्क में आया था और उनके लिए काम करने लगा था।

बता दें कि 12 जनवरी, 2023 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नौशाद और जगजीत सिंह जग्गा को गिरफ्तार किया था। दोनों ने हिंदू युवक के हत्या की बात कबूली थी। नौशाद ने आतंकी संगठन आईएसआईएस से प्रेरित होकर हिंदू युवक की हत्या कर सिर काट दिया था और इस कृत्य का वीडियो भी बनाया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस वीडियो को उसने पाकिस्तान स्थित अपने आका सुहैल को भेजा था। नौशाद और जगजीत की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने घर और आसपास की तलाशी के दौरान यह युवक का शव बरामद किया था।

मुंबई पुलिस ने राखी सावंत (अब फातिमा) को हिरासत में लिया: कहा- आदिल खान को मुझसे अलग करना चाहते हैं उसके परिवार वाले

अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री राखी सावंत (Rakhi Sawant) को मुंबई पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस बात की जानकारी मॉडल शर्लिन चोपड़ा ने दी दी है। शर्लिन ने राखी सावंत के खिलाफ कुछ दिन पहले शिकायत दर्ज करवाई थी।

शर्लिन चोपड़ा ने गुरुवार (19 जनवरी 2023) को ट्वीट कर कहा, “ब्रेकिंग न्यूज अम्बोली पुलिस ने प्राथमिकी 883/2022 के संबंध में राखी सावंत को गिरफ्तार किया है। कल राखी सावंत की ABA 1870/2022 को मुंबई की सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया था।”

यह मामला बॉलीवुड के ऐक्टर-डायरेक्टर साजिद खान द्वारा किए गए कई लड़कियों के यौन शोषण और उनके खिलाफ MeToo के आरोपों से जुड़ा है। बिग बॉस-16 में साजिद खान को लेने पर पीड़िताओं ने मोर्चा खोल दिया था। उनका कहना था कि जिन व्यक्ति ने कई लड़कियों का शोषण किया उसे इतने बड़े शो में मौका नहीं दिया जाना चाहिए।

शर्लिन चोपड़ा ने भी उन लड़कियों के पक्ष में आवाज उठाई और अपने हाथ साजिद खान द्वारा किए गए अपमानजनक व्यवहार को भी साझा किया। शर्लिन चोपड़ा साजिद खान के लिए शिकायत भी पहुँची थी। उधर, राखी सावंत ने साजिद खान का बचाव किया था।

राखी ने कहा था कि वह साजिद खान को भाई मानती हैं। उन्होंने कहा था कि साजिद खान के खिलाफ लगाए गए सारे आरोप गलत है। इतना ही नहीं, साजिद के खिलाफ शिकायत देने पर राखी ने शर्लिन चोपड़ा के खिलाफ भी भद्दी-भद्दी टिप्पणी की थी। इसके बाद शर्लिन चोपड़ा ने राखी के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई थी।

शर्लिन ने राखी सावंत पर आरोप लगाते हुए कहा था, “राखी सावंत क्या करती है कि वो लग्जरी होटल्स में जाकर प्राइवेट इवेंट्स करती है और करवाती है। वो सब्सक्रिप्शन पर बॉयफ्रेंड और हस्बैंड बनाती है। एक या दो साल में वो उन भाड़े के बॉयफ्रेंड और हस्बैंड को इतना चूस-चूस के कंगाल करती है कि बेचारे भाग जाते हैं। ये है राखी सावंत की असलियत।”

बता दें कि राखी सावंत पिछले कुछ दिनों से अपनी शादी को लेकर रोज नए बयान देकर सुर्खियों में बनी हुई थीं। हाल में उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके पति बने आदिल खान दुर्रानी के परिजन यानी उनके ससुराल वाले आदिल को पैसों का लालच देकर उनसे अलग करना चाहते हैं।

राखी ने कहा, “आदिल मुझसे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन मैसूर में कुछ लोग उन्हें वापस बुला लेना चाहते हैं। पैसों का लालच देकर वो आदिल को मुझसे अलग कर देना चाहते हैं। लेकिन, आदिल को पैसों का कोई लालच नहीं है।”

बता दें कि अपनी शादी को ड्रामा बना चुकी राखी ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने आदिल से निकाह करने के लिए इस्लाम धर्म अपना लिया है और अपना नाम फातिमा रख लिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि घर में शांति के लिए वे दोनों अब मक्का में उमरा करने जाएँगे।

दरअसल, राखी ने कुछ दिन पहले आरोप लगाया था कि आदिल ने उससे शादी की है, लेकिन अब इस शादी से इनकार कर रहे हैं। इसके बाद आदिल ने स्वीकार किया था कि उन्होंने राखी सावंत से शादी की थी। 

ड्रेस कोड के बावजूद बुर्का में पहुँचीं मुस्लिम छात्राएँ, प्रवेश नहीं मिला तो धरने पर बैठ गईं: अन्य लड़कियों ने कहा – समानता के लिए यूनिफॉर्म ज़रूरी, फॉलो करो रूल्स

उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के हिंदू कॉलेज में ड्रेस कोड लागू होने के बावजूद बुर्का पहनकर पहुँची छात्राओं को कॉलेज प्रशासन ने बुधवार (18 जनवरी, 2023) को प्रवेश देने से मना कर दिया। इसके बाद छात्राएँ कॉलेज के बाहर धरने पर बैठ गईं।

मुस्लिम छात्राओं का आरोप है कि उन्हें ड्रेस कोड का हवाला देकर बुर्का पहनकर कॉलेज में आने से मना कर दिया गया। साथ ही एंट्री गेट पर बुर्का उतारने के लिए मजबूर भी किया गया। मामला बढ़ने के बाद मुस्लिम छात्रों, ‘समाजवादी छात्र सभा’ के कार्यकर्ताओं और कॉलेज के प्रोफेसर के बीच हाथापाई तक हो गई। सोशल मीडिया पर ‘हिंदू कॉलेज’ का वीडियो वायरल हो रहा है।

इसके साथ ही सोशल मीडिया पर उन छात्राओं का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जो ‘हिंदू कॉलेज’ द्वारा ड्रेस कोड लागू करने से काफी खुश हैं। एक छात्रा ने कहा, “मुझे ड्रेस पहनकर आना बहुत अच्छा लग रहा है। इक्वेलिटी (समानता) महसूस हो रही है। किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं लग रहा है। अमीर, गरीब सब बराबर लग रहे हैं।” एक और छात्रा आयुषी ने बताया कि उसे भी कॉलेज की ड्रेस में आना अच्छा लग रहा है। रूल्स बने हुए हैं। ड्रेस में आते हैं, तो ऐसा लगता है कि कॉलेज जा रहे हैं।

बुर्का पहनकर हंगामा करने वाली छात्राओं के बारे में पूछे जाने पर आयुषी ने कहा, “ये गलत है। हर कॉलेज के अपने-अपने रूल्स होते हैं। वो रूल्स हमें फॉलो करने चाहिए।”

वहीं, कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एपी सिंह का कहना है कि उन्होंने यहाँ छात्रों के लिए एक ड्रेस कोड लागू किया है, जो भी इसका पालन करने से इनकार करेगा, उसे कॉलेज परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, “बिना तर्क के इस मुद्दे को तूल दिया गया है। दो महीने पहले ही घोषणा कर दी गई थी कि एक जनवरी से कॉलेज में ड्रेस पहनकर आना अनिवार्य होगा, तो यह नियम सभी के लिए लागू है। कॉलेज प्रशासन का निर्णय सभी को मानना चाहिए। व्यवस्था खराब करने की किसी को छूट नहीं दी जाएगी।”

इसको लेकर ‘समाजवादी छात्र सभा’ के सदस्यों ने बुर्के को कॉलेज के ड्रेस कोड में शामिल करने और मुस्लिम लड़कियों को इसे पहनकर अपने क्लास रूम में बैठने की अनुमति देने के लिए एक ज्ञापन सौंपा।

कर्नाटक हिजाब विवाद

गौरतलब है कि इसी तरह का एक मामला कर्नाटक में जनवरी 2022 में सामने आया था। कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी जिले के प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राएँ क्लास के अंदर हिजाब (Hijab) पहनने की जिद पर अड़ गई थीं। इसके लिए उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया था। ये छात्राएँ इस्लामीकरण के प्रतीक हिजाब को अपना मौलिक अधिकार बता रही थीं। कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस मामले पर 14 मार्च 2022 को अपने फैसले में कहा था कि छात्राएँ तय यूनिफॉर्म को पहनकर आने से मना नहीं कर सकती हैं। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में 23 याचिकाएँ डालकर चुनौती दी गई थी।

‘भारत में इस्लामी सत्ता स्थापित करने की अनुमति नहीं दे सकते: SIMI पर प्रतिबंध को लेकर अदालत में मोदी सरकार की दो टूक, कहा – ये देश की संप्रभुता के लिए खतरा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)’ पर लगे प्रतिबंधों को सही ठहराया है। केंद्र ने कहा है कि भारत में इस्लामी सत्ता स्थापित करने के उद्देश्य को किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जा सकती।

दरअसल, केंद्र सरकार ने साल 2019 में एक अधिसूचना जारी कर सिमी पर लगे प्रतिबंध को 5 साल के लिए बढ़ा दिया था। इस प्रतिबंध को चुनौती देते हुए हुमाम अहमद सिद्दीकी नामक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा था।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा है कि सिमी पर 27 सितंबर, 2001 को प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद भी सिमी के सदस्य बैठकें कर देश विरोधी साजिश रच रहे हैं। यही नहीं, सिमी के लोग हथियार, गोला-बारूद इकट्ठा कर देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

केंद्र ने यह भी कहा है कि सिमी की गतिविधियाँ भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डाल रहीं हैं। सिमी के कार्यकर्ता देश के बाहर बैठे अपने सहयोगियों और आकाओं के साथ लगातार संपर्क में हैं। उनकी हरकतें देश में स्थापित शांति व्यवस्था को भंग कर सकतीं हैं। सिमी के उद्देश्य भारत के कानून के विपरीत हैं।

केंद्र सरकार ने जोर देकर कहा है कि सिमी की मंशा हिंदुस्तान में इस्लामी सत्ता स्थापित करने की है। इस तरह के उद्देश्य को किसी भी हालत में अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकार ने कहा है कि सिमी अपने नए सदस्य को एक शपथ दिलाता है। इस शपथ में देश से मानवता की मुक्ति और इस्लाम की स्थापना की बात कही जाती है। केंद्र ने यह भी कहा है कि 25 अप्रैल 1997 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से अस्तित्व में आए सिमी के उद्देश्यों में जिहाद, राष्ट्रवाद का विनाश और इस्लामी सत्ता की स्थापना करना शामिल था।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि सिमी देश के संविधान में विश्वास नहीं करता। यह मूर्तिपूजा को पाप को मानता है और इसे समाप्त करने को अपना कर्तव्य मानता है।

सिमी पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सऊदी अरब, बांग्लादेश और नेपाल में बैठे लोगों के संर्पक में है। यह जम्मू-कश्मीर राज्य से संचालित विभिन्न कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी संगठनों से भी प्रभावित है। सरकार ने कहा कि इसके अलावा हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठन अपने राष्ट्र विरोधी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सिमी के कैडरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सरकार ने कहा है कि प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से सिमी देश के कई राज्यों में छोटे संगठनों को कवर के रूप में उपयोग कर रहा है। सिमी के कई कार्यकर्ता तमिलनाडु में ‘वहादत-ए-इस्लामी’ सहित कई नामों से फिर से एकजुट हो रहे हैं। इसी प्रकार राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश और दिल्ली में ‘इंडियन मुजाहिदीन’, कर्नाटक में ‘अंसारुल्ला’, उत्तर प्रदेश में ‘मुस्लिम मुत्ताहिदा मिहाद’, मध्य प्रदेश में ‘वहादत-ए-उम्मत’, और पश्चिम बंगाल में ‘नागरिक अधिकार सुरक्षा मंच’ जैसे संगठन सिमी के कवर के रूप में काम कर रहे हैं।

बता दें कि अमेरिका में हुए 26/11 आतंकी हमले के बाद सिमी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस प्रतिबंध के बाद से सिमी पर लगातार प्रतिबंध बढ़ता रहा है। सिमी कार्यकर्ताओं पर, साल 2017 में बोधगया में हुए आतंकी हमले, साल 2014 में बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए विस्फोट समेत कई आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

‘रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है’: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी, UPA सरकार ने तोड़ने की बनाई थी योजना

सनातनियों के आस्था के केंद्र रामसेतु (Ram Setu) को लंबे समय से राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की माँग जल्दी ही पूरी हो सकती है। केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने शीघ्र ही इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित करेगी। इसकी प्रक्रिया जारी है।

केंद्र सरकार (Central Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया संस्कृति मंत्रालय में चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को कहा है कि अगर उनके पास इससे संबंधित कोई अन्य दस्तावेज या सामग्री है तो वो संस्कृति मंत्रालय को दे सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्वामी चाहें तो मंत्रालय के समक्ष अतिरिक्त बातें रख सकते हैं। इस पर स्वामी ने कहा कि वे अपनी बातें रख चुके हैं।

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा, “अगर मंत्री जी मुझसे मिलना चाहते हैं तो मिल सकते हैं। अगर मंत्री मिलना नहीं चाहते हैं तो मैं भी किसी से नहीं मिलना चाहता। हम एक ही पार्टी में हैं। यह मुद्दा हमारे घोषणा-पत्र में शामिल था। उन्हें (संस्कृति मंत्रालय) को 6 हफ्ते में फैसला करने दीजिए।”

बता दें कि भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद सु्ब्रमण्यम स्वामी (Subramaniyan Swamy) ने रामसेतु को ऐतिहासिक स्मारक के रूप में मान्यता देने की माँग वाली याचिका दाखिल की थी। इसके बाद उन्होंने साल 2020 में इस याचिका पर जल्द सुनवाई की माँग की थी।

इससे पहले केंद्र सरकार ने 12 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि स्वामी की याचिका पर वह फरवरी के पहले सप्ताह में जवाब दाखिल करेगी। जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने सुनवाई फरवरी के दूसरे सप्ताह में करने की बात कही थी। हालाँकि, मामले को गुरुवार (19 जनवरी 2023) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया गया।

भाजपा नेता ने स्वामी ने कहा कि वह मुकदमे का पहला दौर उसी समय जीत चुके थे, जब केंद्र सरकार ने रामसेतु के अस्तित्व को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि उनकी माँग पर विचार करने के लिए 2017 में बैठक संबंधित मंत्री ने बैठक बुलाई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

बता दें कि सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इससे पहले की कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में सेतुसमुद्रम पोतमार्ग परियोजना के खिलाफ जनहित याचिका दायर किया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और उसके बाद साल 2007 मे इस परियोजना पर रोक लगा दी।

रामसेतु तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट के पंबन द्वीप और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के बीच चूना पत्थर की पुल जैसी श्रृंखला है। 48 किलोमीटर लंबे रामसेतु को आदम ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकारों की मानें तो साल 1480 में आए एक तूफान में यह पुल काफी टूट गया। उससे पहले लोग पैदल और वाहन के जरिए भारत और श्रीलंका आते-जाते थे।

अमेरिका के साइंस चैनल ने तथ्यों के साथ ये दावा किया था कि भारत और श्रीलंका के बीच मौजूद रामसेतु प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानव का द्वारा बनाया गया है। कहा जाता है कि अमेरिका के वैज्ञानिकों को इस बात के प्रमाण मिले हैं कि रामसेतु के पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं।