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ABP न्यूज+स्वाति मालीवाल की ‘नीयत’ पर उठे सवाल, BJP बोली- दिल्ली पुलिस को बदनाम करने की थी साजिश: कहा था- कार से घसीटा, भगवान ने बचाया

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने गुरुवार (19 जनवरी 2023) को बताया था कि नशे में धुत कार वाले ने उन्हें 15 मीटर तक घसीटा। भगवान ने उन्हें बचा लिया, नहीं तो उनका हाल भी अंजलि जैसा होता। इसका वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस को बदनाम करने के लिए स्वाति मालीवाल ने एबीपी न्यूज के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया।

बीजेपी नेता शाजिया इल्मी ने शुक्रवार (20 जनवरी 2023) को अपने ट्विटर हैंडल पर सिलसिलेवार कई वीडियो शेयर कर स्वाति मालीवाल, आम आदमी पार्टी और एबीपी न्यूज चैनल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा, “एबीपी न्यूज और स्वाति मालीवाल ने साथ मिल कर एक स्टिंग ऑपरेशन किया, जिसका मकसद सिर्फ दिल्ली पुलिस को बदनाम करना था। क्यों कोई निजी चैनल एक राजनीतिक पार्टी के साथ मिलकर एक संवैधानिक पद पर बैठी महिला आयोग की अध्यक्ष के साथ दिल्ली पुलिस के खिलाफ ऐसा षड्यंत्र करेगी?”

वीडियो में उन्होंने कहा है, “जिस तरह से आम आदमी पार्टी और एबीपी न्यूज ने स्वाति मालीवाल की मदद से एक स्टिंग ऑपरेशन किया, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका मकसद केवल दिल्ली पुलिस को बदनाम करना है। लेकिन दिल्ली पुलिस की सर्तकता के चलते उनका ये षड्यंत्र पूरी तरह से विफल हो गया है। अब सोचने वाली बात यह है कि क्यों कोई चैनल अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए या कोई पार्टी अपनी राजनीति चमकाने के लिए महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे को इस्तेमाल करेगी। नैतिकता के तकाजे पर बहुत ही गंभीर सवाल खड़े होते हैं।”

शाजिया इल्मी के अलावा दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता हरीश खुराना ने भी स्वाति मालीवाल की मंशा पर सवाल उठाया और पूछा कि आखिरकार महिला आयोग की अध्यक्ष 14 घंटे तक चुप क्यों रहीं? घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीजेपी ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस का मनोबल गिराने के लिए इस मुद्दे को तूल दिया गया। दिल्ली के विपक्षी दल भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि वायरल वीडियो से पता चलता है कि मालीवाल ने कार से चाबी निकालने की कोशिश की थी।

हरीश खुराना ने टाइम्स नाउ न्यूज चैनल को बताया, “सब लोग सोशल मीडिया पर देख रहे हैं कि किस तरह से झूठा प्रपंच रचते हुए आप खुद रात के 2 से 2.30 बजे के बीच लोगों की कार की चाबियाँ निकाल रही हैं। मैं आपसे सवाल पूछना चाहता हूँ कि आप जिस तरह से दिल्ली, दिल्ली वालों और दिल्ली पुलिस का मोरल डाउन कर रही हैं, वह निंदनीय है। आप 14 घंटे तक चुप क्यों रहीं?”

बीजेपी दिल्ली ने भी इस घटना को लेकर ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “कल रात आम आदमी पार्टी और एबीपी न्यूज चैनल ने दिल्ली का मनोबल गिराने और पुलिस को बदनाम करने के लिए स्वाति मालीवाल के साथ मिलकर एक कथित स्टिंग ऑपरेशन किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने समय पर इस तरह त्वरित कार्रवाई की, जिससे इनके सारे मंसूबे ‘फेल’ हो गए।” पार्टी ने कहा है , “दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आम आदमी पार्टी, एबीपी न्यूज चैनल और स्वाति मालीवाल के गंदे षड्यंत्र और झूठे ऑपरेशन का पर्दाफाश हुआ और दोनों को मुँह की खानी पड़ी। आखिर दिल्ली पर इतना अविश्वास क्यों?”

इसके अलावा कई नेटिजन्स ने भी स्वाति मालीवाल की वीडियो पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब कार रुकी, तो स्वाति मालीवाल उनसे बात करने के लिए आगे बढ़ीं। जब कार फिर से वापस आई, तो वह बात करने के लिए खुद ड्राइवर की तरफ गई। ड्राइवर ने कथित तौर पर गाड़ी का शीशा इसलिए बंद कर लिया था, क्योंकि स्वाति मालीवाल ने कार के अंदर अपना हाथ डाला था। इसके बाद कार आगे चली गई। हालाँकि, य​ह वीडियो उस वक्त रुक जाता है। इसमें स्वाति मालीवाल को कार से घसीटते हुए नहीं दिखाया गया है।

एबीपी न्यूज ने इस घटना पर अपनी रिपोर्ट में इस वीडियो को भी चलाया। चैनल रात में स्वाति मालीवाल के साथ था। चैनल ने कहा कि यह घटना एबीपी न्यूज के कैमरों में कैद हो गई थी। चैनल ने डीसीडब्ल्यू प्रमुख की रात की अन्य फुटेज भी दिखाई है।

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल किया है कि स्वाति मालीवाल को बीच सड़क पर ड्राइवर की तरफ जाने की क्या जरूरत थी और फिर उसने कार के अंदर हाथ क्यों डाला। ध्यान देने योग्य है कि हाईवे पर दूर से शूट किए गए वीडियो में स्वाति की आवाज असामान्य रूप से स्पष्ट और काफी तेज सुनाई दे रही है। शायद उन्होंने लैपेल माइक पहन रखा था, क्योंकि रात में एबीपी न्यूज की टीम उनके साथ थी।

वहीं, स्वाति मालीवाल ने दावा किया है कि ड्राइवर उन्हें कार में बैठने के लिए मजबूर कर रहा था। वीडियो में ड्राइवर की आवाज सुनाई नहीं दे रही है। अजीब बात यह है कि जब ड्राइवर उन्हें छोड़ने के लिए कहता है, तो वह उससे बार बार पूछती रहती है कि वह उसे कहाँ छोड़ेगा। वह एक बार फिर ड्राइवर की तरफ बढ़ती है और वही सवाल पूछती है।

दूसरी ओर स्वाति मालीवाल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने घटना के तुरंत बाद पुलिस को फोन किया, जिसके बाद ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘आप’ का सदस्य होने को लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। जो लोग उनसे ड्राइवर की साइड जाने और कार के अंदर हाथ डालने के लिए सवाल कर रहे हैं, वह पीड़िता को शर्मसार करने वाला है।

बता दें कि आरोपित की पहचान संगम विहार निवासी हरीश चंद्र के रूप में हुई है, जिसे पुलिस में शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने बताया कि 47 वर्षीय आरोपित नशे की हालत में था, जब उसने डीसीडब्ल्यू प्रमुख के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 341, 354, और 509 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके अलावा आरोपित घटना में शामिल कार को भी जब्त कर लिया गया है।

DCP चंदन सिंह ने बताया कि हौज़ खास थाने से एक कॉल आया था कि एक महिला को एक कार वाले ने गलत इशारे किए और 10-15 मीटर तक घसीटा। जिस महिला के साथ बदसलूकी हुई है, वह दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल है।

कभी थे IPS, आज कॉन्ग्रेस के त्रिपुरा प्रभारी: पहले बाइक रैली के बहाने BJP कार्यालय में तोड़फोड़, फिर CRPF को लेकर बोला झूठा

त्रिपुरा के मजलिसपुर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच गुरुवार (20 जनवरी 2023) को झड़प हो गई। आरोप है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा के पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की, जिसके बाद यह झडप हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना कॉन्ग्रेस पार्टी की बाइक रैली के दौरान हुई। कॉन्ग्रेस ने कहा कि जब उनकी रैली सचिंद्र लाल कॉलोनी, रानीरबाजार टाउनहॉल क्षेत्र और बृद्धनगर से गुजर रही थी तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनपर पथराव किया ।

पार्टी ने आगे दावा किया कि घटना के बाद 15 से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कॉन्ग्रेस ने भाजपा के मंत्री और मजलिसपुर के विधायक सुशांत चौधरी पर कथित रूप से हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

दूसरी ओर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक सुशांत चौधरी ने बताया कि बाइक रैली के दौरान भाजपा कार्यालय पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला किया था । उन्होंने कहा, ”सबसे पहले, उनके पास रैली आयोजित करने के लिए पुलिस की कोई अनुमति नहीं थी। अचानक बाइक सवार कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय पहुँचे और तोड़-फोड़ शुरू कर दी।”

उन्होंने यह भी बताया कि कॉन्ग्रेस पार्टी की बाइक रैली में केशब सरकार और मनोरंजन देबनाथ नाम के दो जाने-माने अपराधियों ने हिस्सा लिया था। चौधरी ने आरोप लगाया कि सीपीआईएम- कॉन्ग्रेस (CPIM-Congress) गठबंधन बाहर से लोगों को लाकर राज्य में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रही है।

CRPF ने कॉन्ग्रेस नेता के दावों की निकाली हवा

इस बीच, त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के प्रभारी डॉ अजय कुमार जो कभी आईपीएस थे, उन्होंने कथित गुंडों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए CRPF के एक ऐसे अधिकारी डीएस राव पर निशाना साधा, जो वहाँ मौजूद थे ही नहीं। 

एक ट्वीट में, उन्होंने दावा किया, ”आईजी सीआरपीएफ डीएस राव के सामने से तलवारों और लाठियों के साथ गुंडों के तीन समूह गुजरे और उन्होंने कुछ नहीं किया। मुझे मोटरसाइकिल पर अस्पताल ले जाया जा रहा था। दरअसल, एक बदमाश ने उनके सामने ही मेरी पीठ पर लाठी से वार कर दिया। शर्म करो डीएस राव।”

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कॉन्ग्रेस पदाधिकारी पर पलटवार किया और उनके फर्जी दावों की हवा निकाल दी। CRPF ने ट्वीट कर कहा, ”सीआरपीएफ के आईजी द्वारा निष्क्रियता के आपके आरोपों पर, हम केवल आपको यह सूचित करना उचित समझते हैं कि सीआरपीएफ में कोई महानिरीक्षक डी एस राव कार्यरत नहीं है।”

इस बीच, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। चुनाव आयोग ने बुधवार (18 जनवरी 2023) को पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की थी। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था, “त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान एक ही चरण में 16 फरवरी 2023 को और नागालैंड और मेघालय में 27 फरवरी 2023 को होगा। परिणाम 2 मार्च 2023 को घोषित किए जाएँगे।”

सीईसी ने कहा था, “नागालैंड, मेघालय और त्रिपुरा में संबंधित राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल क्रमशः 12, 15 और 22 मार्च को समाप्त होने वाला है। तीनों राज्यों में प्रत्येक में 60 विधानसभा क्षेत्र हैं।” 

पूर्व CJI के पुत्र, पाटर्नर विदेशी: गे वकील सौरभ कृपाल को HC जज बनाने पर क्या है आपत्ति, क्यों उनके लिए अड़ा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम

सुप्रीम कोर्ट की विवादित कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने सुप्रीम कोर्ट के समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल (Gay Advocate Saurabh Kripal) को दिल्ली हाईकोर्ट का न्यायाधीश (Delhi High Court Judge) नियुक्त करने की फिर सिफारिश की है। हालाँकि, केंद्र ने इस सिफारिश को मानने से इनकार कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम कृपाल के नाम पर अड़ा हुआ है और उनके नाम को दोबारा 18 जनवरी 2023 को भेजा है।

केंद्र सरकार का कहना है कि गे राइट्स (Gay Rights) के बारे में सौरभ कृपाल का जो रुझान है, उसे देखते हुए उन्हें इस मामले में पूर्वाग्रह से ग्रसित होने सेे इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही उनके पार्टनर के विदेशी होने का हवाला दिया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के सेक्सुअल ओरिएंटेशन और पार्टनर के विदेशी होने आधार पर उसे जजशिप के लिए अनुपयुक्त नहीं ठहराया जा सकता।

केंद्र सरकार की आपत्ति

केंद्र सरकार का कहना है कि वकील सौरभ कृपाल समलैंगिक हैं और उनका पार्टनर स्विस नागरिक है। केंद्र सरकार ने यह भी तर्क दिया कि भारत में समलैंगिकता को भले ही अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है, लेकिन ऐसे विवाह को अभी भी समाज में मान्यता नहीं है।

केंद्र सरकार ने इसके पीछे रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RA&W) के एक लेटर का जिक्र किया। अप्रैल 2019 और मार्च 2021 में RAW ने भी कृपाल को जजशिप में उनके स्विस पार्टनर और खुलेआम सेक्सुअल ओरिएंशन पर आपत्ति जाहिर की थी। इससे भारत की संप्रभुता और अखंडता प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू (Kiren Rijiju) ने कहा था कि चूँकि कृपाल अपनी सेक्सुअल ओरिएंशन को लेकर खुलकर बात करते हैं। इसलिए वे अपने फैसलों में पक्षपातपूर्ण रवैया भी अपना सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का तर्क

सु्प्रीम कोर्ट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सौरभ कृपाल के पास योग्यता भी है और निष्ठा भी है। उनकी नियुक्ति से दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच में वैल्यू एडिशन होगा और विविधता आएगी। इसलिए उनके नाम को केंद्र सरकार के पास दोबारा भेजा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कृपाल का पार्टनर स्विस नागरिक है, इस तर्क को आधार नहीं बनाया जा सकता। कॉलेजियम ने कहा कि वर्तमान और पूर्व में कई ऐसे लोग उच्च संवैधानिक पदों रहे हैं, जिनका पति या पत्नी विदेशी हैं। कॉलेजियम ने पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायण और वर्तमान विदेश मंत्री एस जयशंकर का उदाहरण दिया।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने यह भी कहा कि RAW ने कृपाल के व्यक्तिगत आचरण या व्यवहार को लेकर किसी तरह की आशंका व्यक्त नहीं की है। ऐसे में उनकी नियुक्ति से राष्ट्रीय सुरक्षा कैसे प्रभावित होगी? कॉलेजियम ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी यौन इच्छा को बनाए रखने का अधिकार है। यह मानवीय गरिमा से जुड़ा मामला है।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम में न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बयान में कहा है, “कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सौरभ कृपाल की नियुक्ति के लिए 11 नवंबर 2021 की अपनी सिफारिश को दोहराया है, जिस पर तेजी से निर्णय लेने की आवश्यकता है।”

कौन हैं सौरभ कृपाल

भाई-भतीजावाद को लेकर केंद्र सरकार के निशाने पर आया सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बीएन कृपाल के बेटे सौरभ कृपाल को जज बनाना चाहता है। कृपाल को वकालत का 20 साल का अनुभव है। मार्च 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कृपाल को सीनियर ऐडवोकेट का दर्जा दिया था।

कृपाल ने ग्रेजुएशन दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से की है। इसके बाद वे अमेरिका के ऑक्सफोर्ड यूनिर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन किया। उसके बाद कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से लॉ में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है।

कृपाल ने संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ जेनेवा में भी काम किया है। कृपाल का नाम पहली बार सुर्खियों में ‘नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ’ के केस में सामने आया था। इस केस में वह समलैंगिकता से संबंधित धारा 377 को हटाने के लिए याचिकाकर्ता के वकील थे। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस धारा को खत्म कर दिया था।

इतना ही नहीं, सौरभ कृपाल अपनी सेक्सुअल ऑरिएंटेशन को खुले तौर पर स्वीकार करने के लिए भी जाने जाते हैं। कृपाल के गे पार्टनर स्विस नागरिक निकोलस जर्मेन बाकमैन (Nicolas Germain Bachmann) हैं। बाकमैन स्विस दूतावास के साथ काम करते हैं। इसी सेक्सुअल ओरिएंशन केंद्र सरकार की ऑब्जेक्शन का एक प्रमुख कारण है।

पाँच साल से लटका है कृपाल का मामला

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कहा कि सौरभ कृपाल का मामला पाँच साल से पेंडिंग है। 13 अक्टूबर 2017 को दिल्ली हाईकोर्ट की कॉलेजियम ने उनका उनका नाम प्रस्तावित किया था। इस प्रस्ताव पर दिल्ली हाईकोर्ट के सभी 31 जजों में इसे लेकर सर्वसम्मति थी।

उनके नाम को 4 सितंबर 2018, 16 जनवरी 2019, 1 अप्रैल 2019 और 2 मार्च 2021 को SC कॉलेजियम ने आगे बढ़ाया। मार्च 2021 में तत्कालीन सीजेआई एसए बोबडे ने केंद्रीय कानून मंत्री को पत्र लिखकर कृपाल की नियुक्ति पर आपत्तियों को स्पष्ट करने को कहा था।

इसके बाद 11 नवंबर 2021 को जस्टिस यूयू ललित, एएम खानविलकर और तत्कालीन सीजेआई एनवी रमना वाले कॉलेजियम ने कृपाल के नाम को सरकार के पास भेजा। हालाँकि, केंद्र सरकार ने कई तरह की आपत्तियों को गिनवाते हुए 25 नवंबर 2022 को इसे वापस कर दिया।

बता दें कि कॉलेजियम को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के बीच खींचतान जारी है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से लेकर केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू तक सवाल उठाते रहे हैं। किरेन रिजिजू ने गुरुवार (18 जनवरी 2023) को फिर कहा कि केंद्र सरकार न्यायपालिका का सम्मान करती है, क्योंकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता आवश्यक है।

‘टोपी वालों से भी सीता-राम बुलवा देंगे’: बोले बागेश्वर धाम के महंत- हम भागने वालों में नहीं, पूछा- ये पादरी को चैलेंज क्यों नहीं करते

बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथित चमत्कारों पर जारी विवाद के बीच कई मीडिया संस्थानों ने उनका साक्षात्कार किया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने ऊपर हो रहे हमलों और धर्मांतरण की साजिशों को लेकर खुलकर बात की है। न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ से ऐसी ही एक बातचीत में उन्होंने कहा है कि सनातन में बहुत शक्ति है। उसके सामने पादरी-मौलवी खड़े नहीं हो सकते।

टाइम्स नाऊ के सुशांत सिन्हा से बातचीत में बागेश्वर महाराज के नाम से विख्यात धीरेंद्र शास्त्री ने ईसाई मिशनरियों पर साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणा से लोग सनातन धर्म में वापसी कर रहे हैं। इसलिए मिशनरी के लोग करोड़ों खर्च कर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। वे इन साजिशों से नहीं डरते। धीरेंद्र शास्त्री ने दमोह में 160 परिवारों की घर वापसी का जिक्र किया। कहा कि अब जनजातीय इलाकों में दरबार लगाए जा रहे हैं। इसकी वजह से उनके खिलाफ हमले बढ़ गए हैं और वामपंथी पीछे पड़ गए हैं।

बातचीत के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए बागेश्वर धाम के महंत ने कहा कि अभी उन्हें बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना है। अपने अंदाज में हँसते हुए उन्होंने कहा, “हम टोपी वालों से भी सीता राम बुलवा देंगे। क्यों चिंता करते हो तुम…?” उनकी इस बात को वीडियो में 1:35 मिनट से 1:40 मिनट के बीच सुना जा सकता है।

महाराष्ट्र के नागपुर से डरकर भागने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि हम उनकी चुनौती स्वीकार करते हैं। हम भागने वाले नहीं हैं। सात दिन की कथा हुई तब वे नहीं आए। सवाल उठाने वाले लोग किसी पादरी को चैलेंज करने नहीं जाते। क्या उन्होंने बागेश्वर सरकार को लीगल चुनौती दी? किसी व्यक्ति को भेजा या किसी तरह का पत्राचार किया?

धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि 3 जनवरी को ही उन्होंने आयोजकों से 9 दिन की जगह 7 दिन की कथा कहने की बात कही थी। कथा 5 जनवरी को शुरू हुई। कथा समाप्त कर जब हम निकल आए तो उन लोगों ने डरकर भागने की अफवाह फैलानी शुरू कर दी। महंत धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिसे जो भी पूछना है वो उनके दरबार में आए। उन्हें प्रेरणा लगेगी तो हम बताएँगे, हमें अपने इष्ट पर भरोसा है। निर्णय करना बालाजी का काम है।

अपनी चमत्कारी शक्तियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह​ ध्यान विधि है। यह उन्हें अपने दादा गुरु से मिली थी। सनातन धर्म में ध्यान विधि की परंपरा आदिकाल से मौजूद है। लोग करीब आते हैं तो ध्यान विधि की प्रेरणा से उनकी समस्या का आभास होता है, जिसे वह कागज पर लिखते हैं। राम नाम की ताकत से वह सत्य साबित होता है।

साल का पहला रोजगार मेला…PM मोदी ने बाँटे 71 हजार नियुक्ति पत्र: दिसंबर 2023 तक 10 लाख सरकारी नौकरी देने का है लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (20 जनवरी 2023) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सरकारी विभागों और संगठनों में नई भर्ती के लिए लगभग 71,000 नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान उन्होंने नए भर्ती हुए लोगों के साथ बातचीत भी की। इससे पहले पीएम मोदी ने गुरुवार (19 जनवरी 2023) को कर्नाटक में घुमंतू लंबारा (बंजारा) जनजाति के 52000 लोगों को ‘हक्कू पत्र’ (जमीन के कागज) वितरित करने की भी शुरुआत की।

पीएम मोदी ने नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा है कि यह साल 2023 का पहला रोजगार मेला है। इस साल की शुरूआत उज्जवल भविष्य की नई उम्मीदों के साथ हुई है। वह सभी युवाओं और उनके परिवारों को बधाई देते हैं। उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में लाखों परिवारों को सरकारी नौकरी मिलने वाली है।

उन्होंने यह भी कहा है, “केंद्र सरकार, एनडीए और भाजपा शासित राज्यों में भी लगातार रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। निरंतर हो रहे ये रोजगार मेले अब हमारी सरकार की पहचान बन गए हैं। यह दिखाता है कि किस तरह हमारी सरकार जो संकल्प लेती है, उसे सिद्ध करके दिखाती है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “आप सभी ने महसूस किया होगा कि भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव हुआ है। केंद्रीय सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा कारगर और समयबद्ध हुई है। आज आप भर्ती प्रक्रिया में जिस पारदर्शिता और रफ्तार को देख रहे हैं वो सरकार के हर काम में दिख रहा है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है, “पारदर्शी तरीके से भर्ती और पदोन्नति युवाओं में भरोसा जगाती है। ये पारदर्शिता उन्हें बेहतर तैयारी के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करती है। हमारी सरकार इसी दिशा में निरंतर काम कर रही है।”

गौरतलब है कि रोजगार मेले के अंतर्गत देश भर से चुने गए युवा जूनियर इंजीनियर, लोको पायलट, टेक्नीशियन, इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, कांस्टेबल, स्टेनोग्राफर, जूनियर अकाउंटेंट, ग्रामीण डाक सेवक, इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, शिक्षक, नर्स, डॉक्टर, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी, पीए, एमटीएस समेत विभिन्न पदों पर भर्ती होंगे।

याद दिला दें कि पीएम मोदी ने पिछले साल घोषणा की थी कि वह विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरते हुए दस लाख युवाओं को दिसंबर, 2023 तक नौकरी देंगे। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने 10 लाख लोगों की भर्ती के लिए रोजगार मेला शुरू किया था। इसी कड़ी में रोजगार की पहली किश्त के रूप में, 71000 नियुक्ति पत्र बाँटे हैं।

इससे पहले, प्रधानमंत्री गुरुवार (19 जनवरी 2023) को कर्नाटक के पाँच जिलों में रहने वाली घुमंतू लंबारा जनजाति के 52000 से अधिक सदस्यों को हक्कू पत्र (जमीन का मालिकाना हक दिलाने वाले दस्तावेज) वितरण की शुरुआत की।

इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा “बंजारा (लंबानी घुमंतू) समुदाय के लोगों के लिए यह एक बड़ा दिन है। अब हक्कू पत्र के द्वारा 50000 से अधिक लोगों को अपनी छत मिलेगी”। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने खानाबदोश पांच दंपतियों को पांच हक्कू पत्र बाँटे।

उन्होंने कहा है, “ठंडास में रहने वालों को अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा और कई कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन अब निराशाजनक माहौल बदल रहा है। मैं बंजारा माताओं को विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि उनका बेटा (मोदी) दिल्ली में बैठा है।”

जम्मू कश्मीर में राहुल गाँधी बारिश से ‘डरे’, भारत जोड़ो यात्रा में रेनकोट में आए नजर: लाल चौक पर तिरंगा लहराने से पहले ही काट चुके हैं कन्नी

कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में शुक्रवार (20 जनवरी 2023) को राहुल गाँधी रेनकोट में नजर आए। जम्मू-कश्मीर के कठुआ के हतली मोड़ से कड़ी सुरक्षा के बीच निकली यात्रा से जब राहुल की तस्वीरें सामने आई तो शुरुआत में लोगों ने इसे जैकेट समझ लिया था। इसके कारण कई लोगों ने पूछा कि आखिर राहुल ने स्वेटर क्यों पहन लिया? क्या ‘कॉन्ग्रेस के तपस्वी’ को ठंड लगने लगी है।

इस सवाल के पूछे जाने की वजह भी खुद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ही हैं। उनसे पिछले दिनों जब कड़ाके की ठंड में भी केवल टीशर्ट पहनने की वजह पूछी गई थी तो उनका जवाब था कि उनको ठंड से डर नहीं लगता इसलिए वे ठंड में बिना जैकेट चल रहे हैं। उनके मुताबिक सर्दी में गर्म कपड़े वो पहनते हैं ठंड से डरते हैं

बता दें कि राहुल ने अपनी यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर को कन्याकुमारी से एक टीशर्ट में आरंभ की थी। ठंड आने के बाद जब उनसे इस पर सवाल हुआ तो उन्होंने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उन्हें कुछ लड़कियाँ मिलीं जिन्होंने स्वेटर तक नहीं पहना था, ऐसे में उन्होंने निर्णय लिया कि वो इस यात्रा में सिर्फ टीशर्ट में रहेंगे।

हालाँकि, शुक्रवार को जो कुछ दिखा उससे ऐसा लग रहा है कि राहुल गाँधी को ठंड से भले डर न लगे पर बारिश में भींगने से लगता है। यही कारण है कि इंटरनेट पर उनका वीडियो देख लोग बोल रहे हैं- ‘राहुल बाबा डर गए, डर गए।’

उल्लेखनीय है कि राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जम्मू कश्मीर तक पहुँच चुकी है। इस बाबत 30 जनवरी को श्रीनगर में एक कार्यक्रम भी है। लेकिन इस बीच राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस जो चर्चा में आए हैं उसकी एक वजह लाल चौक पर तिरंगा न फहराने का फैसला भी है।

राहुल अपनी इस यात्रा में लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहराएँगे– यह जानकारी खुद कॉन्ग्रेस ने दी। अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी प्रभारी और पार्टी सांसद रजनी पाटिल ने मंगलवार को कहा था कि राहुल गाँधी 30 जनवरी को लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहराएँगे वह श्रीनगर में कॉन्ग्रेस मुख्यालय पर भारतीय तिरंगा झंडा फहराएँगे। रजनी पाटिल के अनुसार लाल चौक पर तिरंगा फहराना आरएसएस के एजेंडे का हिस्सा था।

BC ही रहेगा AAP विधायक अमानतुल्लाह खान: हाईकोर्ट ने ‘बैड कैरेक्टर’ टैग हटाने से किया इनकार, कहा- दिल्ली पुलिस के DCP से मिलो

दिल्ली के आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) को दिल्ली पुलिस ने ‘बैड कैरेक्टर’ (Bad Character) करार दिया था। इस टैग को हटाने के लिए अमानतुल्लाह खान दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचे थे, जहाँ गुरुवार (19 जनवरी 2023) को उनकी याचिका खारिज कर दी गई।

न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संबंधित पुलिस उपायुक्त ने विधायक के खिलाफ कार्रवाई के समर्थन में कारण बताए हैं। इसके साथ ही न्यायाधीश ने कहा कि खान अगर चाहें तो दिल्ली पुलिस को इस टैग को हटाने के लिए संपर्क कर सकते हैं और इस संबंध में ज्ञापन सौंप सकते हैं। मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद न्यायाधीश ने अक्टूबर 2022 में फैसला सुरक्षित रख लिया था।

खान के वकील एम सूफियान सिद्दीक़ी ने दावा किया है कि अधिकारियों ने इस मामले में पूरी तरह से गलत तरीके से काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि हिस्ट्रीशीट एक गोपनीय दस्तावेज होता है, लेकिन प्रतिद्वंदी पार्टी के प्रवक्ता ने खान की छवि खराब करने के लिए इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। वहीं, सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया कि इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों ने उचित प्रक्रिया का पालन किया है।

आपको बता दें कि दिल्ली के जामिया नगर पुलिस स्टेशन ने 28 मार्च 2022 को ओखला विधानसभा के आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान को ‘बैड कैरेक्टर’ घोषित करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव को 30 मार्च 2022 को मंजूरी दे दी गई थी। प्रस्ताव में कहा गया था कि खान के खिलाफ विभिन्न मामलों में 18 एफआईआर दर्ज हैं।

उल्लेखनीय है कि शाहीन बाग़ और मदनपुर खादर में MCD द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने हंगामा किया था। पुलिसकर्मियों का आरोप लगाया था कि इस हंगामे के दौरान उन पर पथराव भी किया गया था।

पुलिस ने अमानतुल्लाह खान को इस मामले में मुख्य आरोपी बनाते हुए केस दर्ज किया था। विधायक की गिरफ्तारी भी हुई थी। हालाँकि, बाद में साकेत कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में अमानतुल्लाह को BC (बैड कैरेक्टर) घोषित कर दिया था।

वहीं खान को सितंबर 2022 में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ACB ने दिल्ली वक्फ बोर्ड भर्ती में कथित अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसी सिलसिले में उनके ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। छापेमारी के दौर खान के सहयोगियों के यहाँ से लाख रुपए कैश और बिना लाइसेंस वाला हथियार बरामद किया गया था। हालाँकि 1 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई थी।

पहलवानों के समर्थन में जंतर-मंतर कूच कर सकती है खाप, इस्तीफे के दबाव के बीच बोले बृजभूषण शरण सिंह- राजनीतिक साजिश का करूँगा पर्दाफाश

भारतीय कुश्ती फेडरेशन (Wrestling Federation of India) और पहलवानों के बीच विवाद सलटा नहीं है। खेल मंत्रालय से बातचीत बेनतीजा रहने के बाद पहलवानों के एक समूह ने केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात की है। इस्तीफा देने के दबाव के बीच फेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह शरण सिंह आज (20 जनवरी 2023) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इस बीच हरियाणा की खाप पंचायतों ने मामले का निपटारा नहीं होने पर खिलाड़ियों के समर्थन में दिल्ली के जंतर-मंतर पहुँचने की बात कही है।

बुधवार (18 जनवरी 2023) से विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक समेत कई पहलवान धरने पर बैठे हैं। रिपोर्टों की मानें तो धरने में शामिल होने को लेकर सर्वजातीय खाप पंचायत का आयोजन हुआ। फोगाट खाप के आह्वान पर आयोजित इस पंचायत में तय किया गया कि अगर पहलवानों की माँगे नहीं मानी गईं खाप पंचायतें धरने में शामिल होंगी। इसके लिए पंचायतों ने 2 दिनों की समय सीमा तय की है।

धरने पर बैठे पहलवानों के डेलीगेशन और खेल मंत्रालय के बीच गुरुवार (19 जनवरी, 2023) को बातचीत हुई थी। इस बातचीत से पहलवान संतुष्ट नहीं थे। बैठक के बाद बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट, बबीता फोगाट, साक्षी मलिक, रवि दहिया और दीपक पूनिया समेत कई पहलवान खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के सरकारी आवास पर पहुँचे। बताया जा रहा है कि यहाँ अनुराग ठाकुर और पहलवानों के बीच लंबी चर्चा हुई। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक खेल मंत्री के साथ देर रात हुई यह बैठक भी बेनतीजा रही। हालाँकि खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भरोसा जताया है कि मामले को जल्दी सुलझा लिया जाएगा।

उधर भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह आज शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। उनके फेसबुक पेज पर दी गई जानकारी के मुताबिक शाम 4 बजे के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित होगा। दावा किया गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुश्ती और महिला पहलवानों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने की राजनैतिक साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।

इसके पहले फेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह ने पहलवानों पर ही मनमानी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि कुछ पहलवान नेशनल खेलों में हिस्सा नहीं लेना चाहते। उन्होंने कहा था कि कुछ ओलंपिक विजेता पहलवान नहीं चाहते कि उनका ट्रायल कराया जाए और ट्रायल कराया भी जाए तो पहले नेशनल के विजेता का ट्रायल हो, फिर जो जीत कर आए उनके साथ इनका फाइनल कराया जाए।

बृजभूषण सिंह के आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर विनेश फोगाट का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पत्रकार का जवाब देते हुए विनेश कह रही हैं कि कोई नेशनल नहीं खेलेगा, हम खिलाड़ी सीधे ओलंपिक्स में जाने को तैयार हैं। गौरतलब है कि बृजभूषण सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें मानसिक प्रताड़ना, जान से मारने की धमकी और यौन शोषण जैसे आरोप शामिल हैं। 

एक विवाह ऐसा भी: जीते जी एक न हो सके तो कर लिया सुसाइड, मौत के 6 महीने बाद परिजनों-ग्रामीणों ने बना दिया जोड़ा

गुजरात के तापी में एक अनूठा विवाह हुआ है। सुसाइड करने वाले एक प्रेमी जोड़े की मूर्तियों की यह शादी सोशल मीडिया में चर्चा में है। वैसे यह​ मृत जोड़े की अंतिम इच्छा को पूरा करना है या पाश्चाताप यह स्पष्ट नहीं है।

यह शादी तापी के निजार तालुके के न्यू नेवाला गाँव में हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक जनजातीय समाज के गणेश पड़वी और रंजना पड़वी प्रेम में थे। लेकिन दूर का रिश्तेदार होने की वजह से परिजनों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। दोनों ने अगस्त 2022 में पेड़ से लटके मिले। अब परिजनों और ग्रामीणों ने दोनों की मूर्ति बनाकर उनके बीच शादी करवाई है।

यह शादी जनजातीय विधि विधानों के साथ संपन्न हुई। बताया जाता है कि ऐसा दोनों की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए किया गया। उनकी आत्मा की शांति के लिए मूर्ति बनाकर शादी करवाने का फैसला परिजनों ने लिया।

पड़वी जनजातीय समुदाय में मान्यता है कि आत्महत्या करने वालों की आत्मा भटकती है। प्रेमी जोड़े के परिवार वालों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए मूर्तियाँ बनवाकर शादी कराने का निर्णय लिया। घटना के 6 महीने बाद गणेश और रंजना की मूर्तियाँ बनवाईं गईं। शादी का कार्ड भी छपवाया गया। 14 जनवरी, 2023 को गणेश की बारात पुराने नेवाला गाँव पहुँची। रंजना के घर पर गणेश के प्रतीक स्वरुप उसकी मूर्ति को बैठाया गया। सात फेरों के अलावा जनजातीय समुदाय की परंपरा के अनुसार सभी रीति-रिवाजों का पालन किया गया।

विवाह के बाद दुल्हन की विदाई भी हुई। गणेश के साथ रंजना की मूर्ति उसके गाँव पहुँची। इस उपलक्ष पर भोज का आयोजन भी हुआ। मूर्ति स्थापित कर दोनों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई। दोनों की मूर्तियाँ गाँव के बीच के रास्ते में स्थापित की गई हैं।

गाजियाबाद का मदीना होटल, थूक लगाकर तंदूरी रोटी बना रहा था तसीरुद्दीन: Video वायरल होने के बाद गिरफ्तार

होटल में थूक लगाकर रोटी बनाने का एक और मामला सामने आया है। घटना गाजियाबाद के मदीना होटल का है। एक वायरल वीडियो में होटल में काम करने वाला तसीरुद्दीन तंदूरी रोटी के लिए बनाए गए लोई में थूकता नजर आ रहा है।

वीडियो वायरल होने के बाद गुरुवार (19 जनवरी 2023) को तसरुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया। साहिबाबाद की एसीपी पूनम मिश्रा ने बताया कि टीला मोड़ थाना क्षेत्र के पसौंडा इलाके के एक होटल का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें थूक लगाकर रोटी बनाते हुए दिख रहे व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

बुधवार को वीडियो सामने आने के बाद हिंदू रक्षा दल के महानगर संयोजक अनु चौधरी ने टीला मोड़ थाने में रिपाेर्ट दर्ज कराई थी। आरोपित के खिलाफ धारा 188, 269 और 270 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके तहत 2 साल तक की जेल और जुर्माना भी लग सकता है।

आपको बता दें की रोटी में थूक कर खिलाने के कई मामले पहले भी आ चुके हैं। दिसंबर 2022 में गाजियाबाद के मेरठ से इसी तरह का वीडियो सामने आया था। इसमें मवाना इलाके के रॉयल होटल में शोएब थूक लगाकर रोटी सेंक रहा था। मेरठ से ही एक वीडियो आया थाm जिसमें सगाई समारोह में तंदूर पर एक युवक थूक लगाकर रोटी बनाते दिखा था। एक बच्चे ने इस घटना का वीडियो बनाया था और पूरा मामला सामने आया था।

बेंगलुरु से तो पॉपकॉर्न में थूककर खिलाने का मामला सामने आया था। जून 2022 में सामने आई इस घटना में नयाज पाशा पॉपकॉर्न बनाने वाले तेल में थूकता दिखा था। 11 जून 2022 को दुकान के पास घूम रहे एक व्यक्ति ने नयाज को पॉपकॉर्न बनाने वाले तेल में थूकते देखा। वो पॉपकॉर्न को फ्राई कर रहा था। इस दौरान दोनों में विवाद होने लगा। मामले की जानकारी होने पर पुलिस मौके पर पहुँची और उसे गिरफ्तार किया था।