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ऐसे ही नहीं पेंडिंग पड़े हैं 4.5 करोड़ केस: जिस केस में अधिकतम सजा 7 साल, वह आज के सुप्रीम कोर्ट जजों के जन्म से पहले से चल रहा

देश की वर्तमान न्यायिक व्यवस्था को लेकर तमाम तरह के सवाल उठाए जाते रहे हैं और इसमें बदलाव की माँग भी उठती है। इस व्यवस्था के कारण देश की न्यायपालिका केसों के बोझ तले दबकर अंतिम साँसें गिन रही है। आश्चर्य कि बात यह है कि अदालतों में आज भी इतने पुराने केस पेेंडिंग हैं कि सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान 27 न्यायाधीशों का उस समय जन्म नहीं हुआ था।

ये मुकदमें आज भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। ये मामले देश को सन 1950 में गणतंत्र घोषित करने के तीन के साल के भीतर पुलिस और आम जनता द्वारा दायर किए गए थे। इस वक्त में देश में लगभग 4.50 करोड़ से अधिक मामले पेंडिंग हैं और महाराष्ट्र के रायगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज किया गया सबसे पुराना मामला है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीशों में दिनेश माहेश्वरी सबसे उम्रदराज हैं। उनका जन्म 15 मई 1958 को हुआ था। उन्हें साल 2004 में सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वे जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में हुए। जस्टिस माहेश्वरी इस साल 14 मई को रिटायर हो जाएँगे।

सबसे पुराना आपराधिक मामला

सबसे पुराना क्रिमिनल केस महाराष्ट्र की रायगढ़ पुलिस ने महाराष्ट्र निषेध अधिनियम की धारा 65E के तहत 18 मई 1953 को दर्ज किया गया था। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे उम्रदराज न्यायाधीश के जन्म से भी यह मामला 5 साल पुराना है।

केस दर्ज के होने के बाद रायगढ़ जिले के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, उरण ने आरोपित के खिलाफ उसी साल गैर-जमानती वारंट भी जारी कर दिया। तब से यह मामला चल रहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 9 फरवरी 2023 को तारीख दी गई है। अब आरोपित अभी जीवित है या उसका निधन हो गया है, स्पष्ट नहीं है।

इस केस में आरोपित पर 1949 के अधिनियम की धारा 65E (अफीम के अलावा किसी भी भी नशीले पदार्थ को बेचने, खरीदने या रखने) के तहत आरोप लगाया गया था। केस में दोषी साबित होने पर कम-से-कम से 3 साल जेल और 25,000 रुपए जुर्माना और अधिकतम 5 साल जेल और 50,000 रुपए जुर्माना का प्रावधान है।

रायगढ़ में ही 25 मई 1956 को धारा 381 (क्लर्क या नौकर द्वारा मालिक की संपत्ति चोरी) के तहत एक और आपराधिक मामला दायर किया गया था। इसमें शंकर सोनू मालगुंडे को आरोपित बनाया गया था। यह मामला भी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, उरण के समक्ष सुनवाई के लिए लिस्ट हुआ है। इस केस में दोषी पाए जाने पर 7 साल की कैद की सजा का प्रावधान है।

सबसे पुराना दीवानी मामला

अगर वर्तमान के सबसे पुराने सिविल (दीवानी) केस की बात करें तो यह पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में दर्ज किया गया था। पारिवारिक संपत्ति के बँटवारे से जुड़ा ये मामला 3 अप्रैल 1952 को मालदा की दीवानी अदालत में दायर किया गया था। इसमें सबसे हैरानी की बात यह है कि इसकी सुध 66 साल बाद ली गई।

साल 2018 मालदा दीवानी जज (सीनियर डिवीज़न) को सूचित किया गया कि प्रतिवादी नंबर 4 की मौत हो गई है। वह अपने पीछे अपनी विधवा और तीन बच्चों- दो बेटों और एक बेटी को छोड़ गया है। इसके बाद जज ने कानूनी उत्तराधिकारी को पार्टी बनाने का आदेश दिया। इसके बाद से मामला वहीं लटका हुआ है।

इसी तरह दूसरा सबसे पुराना दीवानी मामला भी मालदा के इसी कोर्ट से जुड़ा हुआ है। यह केस पिछले 70 सालों से भी अधिक समय से लंबित है। इस मामले में पार्वती रॉय नाम की महिला ने बिप्रचरण सरकार नाम के व्यक्ति के खिलाफ 18 जुलाई 1952 को मुकदमा दर्ज कराया था।

इस मामले में साल 2018 में मध्यस्थता की एक पहल की गई थी। इस मध्यस्था को लेकर क्या हुआ, किसी को नहीं पता। तब से सिविल जज इसके परिणामों पर रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के सबसे पुराना मामला

देश के सभी उच्च न्यायालयों में लंबित केसों में सबसे पुराने केस की बात की जाए तो यह कलकत्ता उच्च न्यायालय के हिस्से में जाता है। कोर्ट के रिकॉर्ड में सबसे पुराना दीवानी मामला दर्ज है। यह साल 1951 से लंबित है। वहीं, इस हाईकोर्ट का सबसे पुराना आपराधिक मामला 1969 से लंबित है।

बता दें कि देश के कुल 25 उच्च न्यायालयों में कुल लगभग 60 लाख लंबित मामले हैं, जिनमें दीवानी और आपराधिक दोनों शामिल हैं। इनमें से 51,846 दीवानी मुकदमे और 21,682 आपराधिक मुकदमे 30 साल से अधिक पुराने हैं।

वहीं, ट्रायल कोर्ट में दर्ज 79,587 आपराधिक मुकदमे 30 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। वे मुकदमे जो 1975 या उससे पहले दर्ज किए गए थे और आज भी पेंडिंग हैं, ऐसे मुकदमों की संख्या 216 है। ट्रायल कोर्ट में दर्ज 3.23 करोड़ आपराधिक मामलों में 71 प्रतिशत पाँच साल या उससे कम पुराने हैं।

अगर दीवानी मुकदमों के लेकर बात करें तो ट्रायल कोर्ट में ऐसे 36,223 मुकदमे लंबित हैं, जो 30 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। ऐसे मुकदमें जो साल 1965 या उससे पहले दायर किए गए थे और अभी भी लंबित हैं, ऐसे मुकदमों की संख्या 31 है। ट्रायल कोर्ट में पेंडिंग कुल 1.09 करोड़ दीवानी मामलों में 73 प्रतिशत केस पाँच से भी कम पुराने हैं।

भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित हुआ जोशीमठ, 68 परिवार राहत शिविरों में शिफ्ट: 600 घरों में दरार आने के बाद बोले CM धामी – सब मिल कर क्षेत्र को बचाएँ

उत्तराखंड के जोशीमठ में दरार और धँसाव को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में है। फिलहाल, इस क्षेत्र को भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित किया गया है। राहत और बचाव के बीच प्रशासन ने 68 परिवारों को शिफ्ट किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि यह समय मिल जुलकर जोशीमठ को बचाने का है।

आदि शंकराचार्य की तपोभूमि जोशीमठ में स्थितियाँ हर घण्टे बदलती जा रहीं हैं। स्थानीय प्रशासन से लेकर राज्य व केंद्र सरकार की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने जोशीमठ के 68 परिवारों को अस्थायी राहत केन्द्रों में शिफ्ट किया है। साथ ही, कमसे कम 90 से अधिक परिवारों को शिफ्ट करने की बात कही जा रही है।

जोशीमठ में करीब 4500 मकान हैं। इनमें से 600 से अधिक मकान ऐसे हैं जिनमें दरारें पड़ गईं हैं। ऐसे में, इन मकानों में रहना खतरे से खाली नहीं है। यही कारण है कि लोग अपने घरों को छोड़कर जाने को मजबूर हैं। हालाँकि, प्रशासन जोशीमठ में रह रहे लोगों की हरसंभव सहायता में जुटा हुआ है।

जोशीमठ में भू-धँसाव से उपजे हालात को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हमने सभी लोगों से अनुरोध किया है कि ये समय मिलकर जोशीमठ को बचाने का है। सब लोग मिलकर काम करें। हमारी पहली प्राथमिकता है जोशीमठ शहर बचना चाहिए और लोगों की जानमाल की भी सुरक्षा होनी चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा है, “खतरे में आने वाले 68 परिवारों को सुरक्षित जगह शिफ्ट किया गया है। 600 से अधिक मकानों का जो एक जोन बना है, वहाँ से भी लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है। पीएम मोदी भी इसकी लगातार समीक्षा कर रहे हैं और हमें हर प्रकार से सहायता देने का आश्वासन दिया है।”

वहीं, इस मामले में जोशीमठ के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना का कहना है, “जोशीमठ क्षेत्र को आपदा ग्रस्त घोषित किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय की एक टीम सहित केंद्र सरकार की 2 टीमें जोशीमठ पहुँच रही हैं। जोशीमठ और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रभावित लोगों को सूखा राशन किट वितरित किया जा रहा है।”

क्या है भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र

बता दें कि इससे पहले रविवार (8 जनवरी, 2023) को पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) की बैठक के बाद अधिकारियों ने जोशीमठ को भूस्खलन-धँसाव क्षेत्र घोषित किया था।

देश भर के पहाड़ी इलाकों में भू-स्खलन की घटना सामान्य है। खासतौर से उत्तराखंड जैसे राज्य में भारी बारिश या चट्टानों के खिसकने से भूस्खलन होता रहा है। हालाँकि, भू-धँसाव की घटनाएँ काफी कम सामने आतीं हैं। इसमें, जमीन अपनी स्थिति से नीचे की ओर धँसने लगती है।

यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भू-धँसाव की घटना पृथ्वी की ऊपरी सतह के हटने के कारण सामने आती है। यह अक्सर पानी, तेल, प्राकृतिक गैस या खनिज संसाधनों को पंपिंग, फ्रैकिंग या खनन गतिविधियों द्वारा जमीन से बाहर निकालने के कारण होता है। हालाँकि, भूकंप, मिट्टी के कटाव या या जमीन के भूस्खलन के बाद भी भू-धँसाव की घटनाएँ होती हैं।

उत्तराखंड के जोशीमठ, कर्णप्रयाग और उत्तरकाशी जैसे क्षेत्रों में फिलहाल जो सामने आ रहा है वह भूस्खलन और धँसाव दोनों है। यानी पृथ्वी की ऊपरी सतह धँस भी रही है और खिसक भी रही है।

‘जो सोचते हैं ये लागू नहीं होगा…लागू होगा’: CAA के नियम बनाने के लिए MHA को 6 महीने का एक्सटेंशन, अमित शाह ने ‘कोविड’ को बताया था देरी की वजह

नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियमों को तैयार और लागू करने के लिए गृह मंत्रालय को सातवीं बार विस्तार मिल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय की ओर से इस संबंध में संसदीय समितियों को संपर्क किया गया था। इसी क्रम में राज्यसभा ने नियम बनाने और उसे लागू करवाने के लिए 6 महीने का और समय मिला। लेकिन लोकसभा से मंजूरी मिलना फिलहाल बाकी है।

बता दें कि 11 दिसंबर 2019 को नागरिक संशोधन विधेयक संसद में पास हुआ था। इसके अगले दिन राष्ट्रपति से इसे सहमति मिली और बाद में गृह मंत्रालय के जरिए अधिसूचित किया गया। इस एक्ट के तहत 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने की बात करता है।

फिलहाल यह कानून लागू नहीं हुआ है। साल 2019 में जब ये संसद में पास हुआ तब एक निश्चित समुदाय द्वारा इसका जगह-जगह विरोध हुआ। इसके नाम पर सामान्य लोगों को भड़काया और समझाया गया कि कैसे ये मुसलमानों के खिलाफ है। नतीजतन, लोग सड़कों पर आ गए, प्रदर्शन होने लगा। धीरे-धीरे प्रदर्शन इतना हिंसक हुआ कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में दंगे तक हुए। बाद में कोरोना आया और सरकार उसमें जुट गई।

पिछले साल नवबर 2022 में एक कार्यक्रम के वक्त गृहमंत्री अमित शाह ने बताया भी था कि नियम बनाने में केवल कोविड के कारण देरी हुई है, जो लोग सोचते है कि ये लागू नहीं होगा, वो गलत सोचते हैं।

यहाँ मालूम हो कि किसी भी कानून को राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद उसके नियम 6 महीने के भीतर बनाए जाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तब संसदीय समितियों से विस्तार की माँग की जाती है। चूँकि हालातों के कारण ऐसा नहीं हुआ। इसलिए गृह मंत्रालय को विस्तार मिला। सबसे पहला विस्तार जून 2020 में दिया गया था। अब इस मामले में गृह मंत्रालय को फिर से समय मिला है। इससे पहले राज्यसभा और लोकसभा में अधीनस्थ विधान पर संसदीय समितियों ने  गृह मंत्रालय को 31 दिसंबर 2022 और 9 जनवरी 2023 तक विस्तार दिया था।

जिस अंजलि को कार से घसीट कर मार डाला, उसके घर ताला तोड़ कर चोरी: टीवी-बर्तन समेत कई चीजें गायब, परिजनों ने बताया सहेली निधि की साजिश

दिल्ली के कंझावला केस में एक और नया मोड़ आया है। बताया जा रहा है कि मृतका अंजलि के रोहिणी के करन विहार वाले घर से एलईडी टीवी सहित कई चीजें चोरी हो गई हैं। अंजलि के परिवार वालों ने निधि पर साजिश रचने और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इसके अलावा परिजनों ने घर से टीवी और बर्तन चोरी होने का भी आरोप लगाया है। फिलहाल कितने की चोरी हुई है, अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार और स्थानीय लोगों द्वारा 20 वर्षीय अंजलि की मौत की उचित जाँच कराने की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद दिल्ली पुलिस ने उनके घर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी थी। पुलिसकर्मियों द्वारा घर और पूरे इलाके की बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन सोमवार (9 जनवरी, 2023) सुबह इलाके से सुरक्षा हटा दी गई थी।

कहा जा रहा है कि अंजलि और उसका परिवार इस घर में उसकी माँ का इलाज करवाने के ​लिए रह रहा था। वे सोमवार सुबह अस्पताल में थे, तब उन्हें घर में चोरी होने की सूचना मिली। अंजली के परिवार की सदस्य अनु ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “पड़ोसियों ने हमें चोरी के बारे में बताया था। यह निधि की साजिश है। वह पकड़े जाने के डर से अपना सामान हमारे घर में रखवाना चाह रही है। पुलिस 8 दिन से हर जगह थी, लेकिन कल ही क्यों नहीं थी?”

परिवार वालों का यह भी कहना है कि घर का सारा सामना उथल-पुथल कर रखा है। बेड के गद्दे भी नीचे फेंक रखे हैं। टीवी के अलावा बेड में रखा आधे से ज्यादा सामान हमारा गायब हो चुका है। पुलिस ने उन्हें किसी भी चीज ​को हाथ लगाने से मना किया हुआ है। इस घर में अंजलि, उसकी मम्मी के अलावा उनकी मेरी पूरी फैमिली रहती थी। परिवार की एक अन्य सदस्य ने बताया, “हमने अभी दो महीने पहले ही टीवी लिया था। उसकी किश्ते भर रहे थे।

बच्चों के नए-नए कपड़े, बर्तन-भांडे भी गायब हैं। यही नहीं चोरी करने वाले ने पड़ोसियों की कुंडी भी बाहर से लगा दी। बल्ब भी सारे उतार दिए और ए टू जेड सभी लाइटें बंद कर दी थीं। ये सब मिलकर ही करवाया जा रहा है। हमें यह निधि की ही साजिश लग रही है।”

अंजलि की नानी के मुताबिक, “मृतका की माँ चार दिनों से अस्पताल में है। यहाँ पुलिस नहीं थीं, जिस दिन से हमारी लड़की नहीं रही हम यहाँ नहीं आए।”

अंजलि के मामा प्रेम सिंह का कहना है, “उसकी (अंजलि) माँ को किडनी की समस्या है और वह अस्पताल में है। हम सब वहीं थे, जब पड़ोसियों ने हमें बताया कि किसी ने हमारे घर में चोरी की है। हमारा एलईडी टीवी गायब है और घर में तोड़फोड़ की गई है। कपड़े इधर-उधर हैं। हमें संदेह है कि आरोपित या उनके परिवार वाले मामले से संबंधित कुछ चोरी करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस पर से हमारा विश्वास उठ गया है। वे हमारी रक्षा नहीं कर सकते।”

गौरतलब है कि 1 जनवरी, 2023 की रात भयानक कार एक्सीडेंट में अंजलि की मौत हो गई थी। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब वह होटल से अपने घर लौट रही थी। उस दौरान वह स्कूटी पर थी, जिसे कार टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद, वह कार में ही फँस गई थी। आरोपित उसे कार से निकालने की बजाए 12 किलोमीटर तक लगातार घसीटते रहे। इससे उसके पैर तक कट गए थे। बाद में, उसकी बॉडी नग्नावस्था में बरामद हुई थी। अजंलि अपने घर में कमाने वाली इकलौती थी।

इस मामले में, पुलिस ने दीपक खन्ना, अमित खन्ना, कृष्ण, मिथुन, मनोज मित्तल, आशुतोष और अंकुश खन्ना को आरोपित बनाया है। इनमें से एक आरोपित अंकुश खन्ना को जमानत मिल गई है।

जोशीमठ को बचाने के लिए पहुँच रहे धर्मशास्त्री, शंकराचार्य कराएँगे अनुष्ठान: क्या जय और विजय मिलकर बंद करने जा रहे बद्रीनाथ धाम का रास्ता

उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धँसाव को लेकर स्थानीय लोग काफी चिंतित हैं। 600 से ज्यादा घरों में दरारें आ चुकी हैं। वहाँ के लोगों को दूसरी जगह ले जाया जा रहा है। इसी बीच खबर है कि जोशीमठ को बचाने के लिए कई तरह के विशेष अनुष्ठान किए जाएँगे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने समाचार एजेंसी ANI को बताया, “प्रभावित लोग इस समय अपना धैर्य और मनोबल मजबूत बनाएँ रखें। हमने कई ज्योतिषियों और धर्मशास्त्रियों को बुलाया है।”

शंकराचार्य ने कहा, “उन्होंने हमें जोशीमठ को बचाने के लिए अनुष्ठानों के बारे में बताया है। हम आज से ये अनुष्ठान शुरू करेंगे।”

बद्रीनाथ और जोशीमठ को लेकर भविष्यवाणी

दूसरी ओर देश के चार धामों में से एक बद्रीनाथ और जोशीमठ को लेकर कई तरह की भविष्यवाणी की जा रही है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि कलियुग में श्रद्धालु बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएँगे। लोक मान्यताओं के मुताबिक, हिंदू पुराणों में बद्रीनाथ धाम को लेकर एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की गई है। स्कंदपुराण में युगों पहले महर्षि वेदव्यास ने लिखा था कि कलियुग में बद्रीनाथ धाम अपनी जगह से अचानक गायब हो जाएगा।

ठीक उसी समय हिमालय की गोद में एक नया धाम प्रकट होगा, जिसे पुराणों में ‘भविष्य बद्री’ का नाम दिया गया है। यहाँ बद्रीनाथ की तरह साक्षात भगवान विष्णु का वास होगा।

भविष्य बद्री के बनने की प्रक्रिया

कहा जा रहा है कि भविष्य बद्री के बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, एक चट्टान जमीन से खुद ब खुद निकल रही है। ऋषि वेदव्यास ने जिस जगह पर ‘भविष्य बद्री’ की भविष्यवाणी की थी, ठीक उसी जगह पर यह धाम उभर रहा है। इस समय कुछ ऐसी ही घटनाएँ हो रही हैं, जो बद्रीनाथ धाम के समय पर हुई थीं। दावा किया जा रहा है कि उस शिला में भगवान विष्णु का अक्स उभर रहा है। जब त​क भगवान नृसिंह का वजूद जो​शीमठ में है, तभी तक बद्रीनाथ सुरक्षित है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बद्रीनाथ की तरह भविष्य बद्री की स्थापना भी आदि शंकराचार्य ने की थी और बद्री विशाल के दर्शन करने से पहले जोशीमठ के नृसिंह मंदिर जाना जरूरी होता है।

जोशीमठ का नृसिंह मंदिर

नृसिंह मंदिर जोशीमठ में स्थित है। मंदिर में भगवान नृसिंह की बहुत पुरानी प्रतिमा है। भगवान की प्रतिमा को लेकर कई तरह की मान्यताएँ हैं। बताया जाता है कि नृसिंह भगवान की एक भुजा सामान्य है, जबकि दूसरी काफी पतली है। यह भुजा साल दर साल और पतली होती जा रही है। मान्यता के मुताबिक, जिस दिन नृसिंह भगवान की पतली हो रही भुजा टूट कर गिर जाएगी, उस दिन बद्रीनाथ धाम का मार्ग बंद हो जाएगा। नर-नारायण पर्वत एक हो जाएँगे।

यह वही नर-नारायण पर्वत है, जिसका उल्लेख स्कंदपुराण में भी किया गया है। यदि यह भविष्यवाणी सच हो जाती है, तो कलियुग में भक्त भगवान बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएँगे, जहाँ वह वर्तमान में विराजमान हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि नर-नारायण पर्वत के एक हो जाने से बद्रीनाथ धाम लुप्त हो जाएगा। इसके बाद से भक्तों को भगवान बद्रीनाथ का दर्शन ‘भविष्य बद्री’ में ही मिल सकेगा।

रामायण, महाभारत काल से जोशीमठ का संबंध

जोशीमठ को लेकर एक कथा बताई जाती है। कहा जाता है कि रामायण काल में लक्ष्मणजी के मूर्छित होने पर उनके लिए संजीवनी बूटी की खोज में निकले हनुमानजी के लिए रावण ने कालनेमि नामक असुर को भेजा था। जोशीमठ ही वह जगह है, जहाँ हनुमानजी ने कालनेमि असुर का वध किया था। इसके ​अलावा ऐसी भी मान्यता है कि अज्ञातवास काल में स्वर्ग यात्रा के समय पांडव जोशीमठ होकर ही गए थे। आज भी स्थानीय लोग इस घटना की याद में फसल की कटाई के बाद पांडव नृत्य करते हैं।

बता दें कि उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने सभी लोगों से जोशीमठ को बचाने की अपील की है। उन्होंने सभी सामाजिक, राजनीतिक संगठनों से एक टीम के रूप में कार्य करने का अनुरोध किया। सीएम ने कहा, “हम सभी की पहली प्राथमिकता जोशीमठ को बचाना और लोगों की जान माल की रक्षा करना है। 68 घर जो खतरे में थे, उन लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। पीएम भी इसकी निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया है।”

गौरतलब है कि इस आपदा की चपेट में जोशीमठ शहर का 40 प्रतिशत हिस्सा चपेट में आ चुका है। राज्य सरकार ने टेक्निकल कमेटी का गठन किया है, जो भू-धँसाव से हुए नुकसान का आकलन कर रही है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (8 जनवरी 2022) को उत्तराखंड में भूमि धँसने और भूस्खलन की घटनाओं को लेकर प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की। इस दौरान पीएम मोदी ने उत्तराखंड को हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।

‘स्वदेशो भुवनत्रयम्’: PM मोदी ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भारतीयों की भूमिका प्रशंसा की, कहा- बुजुर्ग प्रवासियों को अपने संघर्ष-उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करना चाहिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सोमवार (9 जनवरी 2023) को मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore, Madhya Pradesh) में आयोजित 17वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन 2023 (17th Pravasi Bharatiya Sammelan 2023) को संबोधित किया।

इस सम्मेलन में सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी विशिष्ट अतिथि और गुयाना के राष्ट्रपति मोहम्मद इरफान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह कार्यक्रम 8 जनवरी से 10 जनवरी तक चलेगा, जिसमें 70 देशों के करीब 3800 सदस्य शामिल हो रहे हैं।

समारोह में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया के अलग-अलग देशों में जब भारत के लोग कॉमन फैक्टर की तरह दिखते हैं तो ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के साक्षात दर्शन होते हैं। दुनिया के किसी एक देश में जब भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग मिलते हैं तो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सुखद अहसास होता है।”

पीएम मोदी ने कहा कि समारोह में आए प्रत्येक प्रवासी भारतीय ने अपने-अपने क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा, “भारत का हृदय कहलाने वाले मध्य प्रदेश में प्रवासी भारतीय समारोह का आयोजन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में माँ नर्मदा का जल, यहाँ के जंगल, आदिवासी परंपरा और यहाँ का अध्यात्म आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बनाएगी।”

हर प्रवासी भारतीय को ब्रांड एंबेसडर बताते हुए पीएम ने कहा, “मैं सभी भारतीय प्रवासियों को भारत का ब्रांड एंबेसडर कहता हूँ। भारत के ब्रांड एंबेसडर के रूप में आपकी भूमिका विविध है। आप मेक इन इंडिया, योग, हस्तशिल्प उद्योग के साथ ही भारतीय मिलेट्स के ब्रांड एंबेसडर हैं।”

पीएम मोदी ने कहा, “हमने कुछ महीने पहले भारत की आजादी के 75 साल मनाए थे! हमारे स्वतंत्रता संग्राम को प्रदर्शित करने वाली डिजिटल प्रदर्शनी यहाँ आयोजित की गई है, जो गौरवशाली युग को फिर से आप सबके सामने लाती है। ‘स्वदेशो भुवनत्रयम्’ अर्थात हमारे लिए पूरा संसार ही हमारा स्वदेश है। मनुष्य मात्र ही हमारा बंधु-बांधव है। इसी वैचारिक बुनियाद पर हमारे पूर्वजों ने भारत के सांस्कृतिक विस्तार को आकार दिया था।”

भारत की प्राचीन परंपरा को याद करते हुए पीएम ने कहा, “हमारे प्रवासी भारतीयों को वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को और ऊपर उठाने में भूमिका निभानी है। हमने सदियों पहले वैश्विक व्यापार की असाधारण परंपरा शुरू की थी। हम असीम लगने वाले समंदरों के पार गए। अलग-अलग देशों, अलग-अलग सभ्यताओं के बीच व्यावसायिक संबंध कैसे साझी समृद्धि के रास्ते खोल सकती है, भारत ने करके दिखाया है।”

उन्होंने कहा कि भारत में न केवल एक ज्ञान केंद्र बनने की क्षमता है बल्कि हुनरमंदों की राजधानी भी है। पीएम मोदी ने कहा, “भारत से बाहर रहने वाले बुजुर्ग प्रवासियों को अपने जीवन, संघर्ष, उलब्धियों का दस्तावेजीकरण करना चाहिए। बुजुर्गों के पास उस जमाने की यादें होंगी। विश्वविद्यालयों के माध्यम से हमारे डायस्पोरा की हिस्ट्री के दस्तावेजीकरण के प्रयास किए जाएँ।”

डायस्पोरा के महत्व को रेखांकित करते हुए पीएम ने कहा, “कोई भी राष्ट्र उस पर निष्ठा रखने वाले लोगों की दिलों में जीवित रहता है। जब कोई भारतीय विदेश जाता है और वहाँ कोई भारतीय मिल जाता है तो उसे लगता है कि पूरा भारत मिल गया। आप जहाँ कहीं भी रहते हैं, भारत को अपने साथ रखते हैं। अपने दिल में रखते हैं।”

कहीं अफजल बना आशीष, कहीं हिंदू से जबरन निकाह-रेप, कहीं दलित को बनाया मुस्लिम: बांदा हो या बरेली-नोएडा हो या फिरजोबाद, लव जिहाद से कोई न बचा

उत्तर प्रदेश के बांदा, बरेली, नोएडा और फिरजोबाद से लव जिहाद की घटनाएँ सामने आई है। मुस्लिम पहचान छिपाकर हिंदू पीड़िताओं को फँसाने का आरोप सामने आया है। जबरन निकाह, धर्मांतरण रेप के आरोप लगे हैं।

बांदा: अफजल बना आशीष, नाबालिग से जबरन निकाह

बांदा जिले के अतर्रा थाना क्षेत्र में सामने आए मामले में अफजल पर खुद को आशीष बताकर नाबालिग लड़की को प्रेमजाल में फँसाने का आरोप लगा है। वह लड़की को भगाने की फिराक में था। उसका प्राइवेट वीडियो बनाने का भी आरोप है। पीड़िता के परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसके खिलाफ पॉक्सो और एंटी लव जिहाद की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

बरेली: दलित महिला से जबरन निकाह, धर्मांतरण

बरेली में एक दलित महिला ने सादिक व उसके परिजनों खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। पीड़िता का आरोप है कि साल 2011 में जब सादिक ने उससे जबरन निकाह किया था। तब वह नाबालिग थी। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दुष्कर्म और उत्पीड़न की धाराओं के साथ ही, उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम व एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

नोएडा: हिंदू लड़की को फिरोज ने किया अगवा

नोएडा की एक हिंदू लड़की को बंदूक का भय दिखाकर अपहरण करने का आरोप फिरोज खान पर लगा है। आरोपित कार से लड़की को लेकर मथुरा जा रहा था। इसी बीच लड़की ने चालाकी दिखाते हुए उसकी मैगजीन हाइवे में फेंक दी। आरोपित फिरोज कार रोककर मैगजीन ढूँढ़ रहा था, तभी पुलिस की नजर उस पर पड़ी।

पुलिस को आता देख उसने भागने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। कहा जा रहा है कि फिरोज लड़की से एकतरफा प्यार करता था। लड़की के इनकार करने पर वह उसकी हत्या करने की फिराक में था।

फिरोजाबाद: अंश बन मोइन ने नाबालिग की दोस्ती, फिर दुष्कर्म

फिरोजाबाद के टूंडला थाना क्षेत्र में रहने वाली एक नाबालिग लड़की से मोइन नामक युवक ने फेसबुक के सहारे अंश बनकर दोस्ती की। यह दोस्ती कुछ दिन बाद प्यार में बदल गई। नए साल की शुरुआत यानी 1 जनवरी 2023 को मोइन पीड़िता को बहला-फुसलाकर घर से ले गया। इसकी जानकारी जब पीड़िता के परिजनों को हुई तो उन्होंने मोइन व एक अन्य महिला के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पूछताछ में आरोपित ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने की बात स्वीकार की है।

’60 साल में पहली बार बिजली देखी…हमारे बच्चे अब उजाले में पढ़ेंगे’ : कश्मीर के सुदूर गाँव में जला बल्ब, ग्रामीणों ने PM मोदी का धन्यवाद कहा

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के एक सुदूर गाँव तेथन में 75 साल बाद जाकर रविवार (8 जनवरी 2023) को बिजली आई। ये सब प्रधानमंत्री विकास पैकेज योजना के कारण संभव हुआ। इस गाँव की आबादी 200 है। आजतक यहाँ किसी घर में बिजली नहीं थी। पिछले रविवार को यहाँ पहला बल्ब जला। इतने साल तक लोग यहाँ ग्रामीण लालटेन और मोमबत्ती जलाकर काम चला रहे थे। गाँव का विकास देखने के बाद ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री का हृदय से धन्यवाद किया।

फजुल-उ-द्दीन नाम के ग्रामीण ने कहा, “हमने आज पहली बार बिजली देखी। हमारे बच्चे अब उजाले में पढ़ाई करेंगे…हम अभी तक लकड़ी से अपनी जरूरत पूरी करते थे। हमारी मुश्किलें सुलझ गई हैं। हम सरकार और संबंधित विभाग के आभारी हैं।”

इसी तरह जफर खान ने कहा, “आज हमारी खुशकिस्मती है कि सरकार ने हमें बिजली दी। मैं 60 साल का हो गया हूँ मगर पहली दफा बिजली देखी है…हम एलजी साहब और डीसी साहब के शुक्रगुजार हैं। हम बिजली विभाग के भी आभारी हैं। हमारे पूर्वजों ने ये चमत्कार नहीं देखा था।”

उल्लेखनीय है कि तेथन गाँव, अनंतनाग की पहाड़ियों पर स्थित है। लोग यहाँ सालों से रहते हैं पर बुनियादी चीजों से हमेशा अछूते रहे। रविवार को गाँव में  बिजली देखने के बाद उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। लोगों ने डांस करके अपनी खुशी मनाई।

45 किलोमीटर में बने गाँव में बिजली आने को लेकर एक अधिकारी ने कहा कि तेथन में बिजली लाने का काम फास्ट ट्रैक प्रक्रिया में हुआ है।  बिजली विकास विभाग के तकनीकी अधिकारी फैयाज अहमद सोफी ने बताया कि इस सुदूर गाँव में बिजली लाने के लिए नेटवर्किंग की प्रक्रिया 202 में शुरू की गई थी। मगर हाई टेंशन लाइन की टैपिंग मसला था। आज सुदूर इलाके में बिजली आ गई है। गाँव में 63 किलोवॉट के ट्रांस्फॉर्मर फिट किए गए हैं। सोफी ने कहा कि गाँव में एक ट्रांसफॉर्मर, 38 हाई टेंशन लाइन और 57 एलटी पोल (कुल 95 पोल) लगाए गए, जिससे 60 घरों में बिजली पहुँचाना संभव हुआ और उनका पहला बल्ब जला।

3000+ Km चले, पर बुद्धि वही बाइस पसेरी: ‘सर्दी से डरते हो’ से लेकर ‘देश पुजारियों का नहीं’, राहुल गाँधी का कहा भारत की ही समझ से परे

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी 7 सितंबर, 2022 से ही भारत जोड़ो यात्रा पर हैं और उन्होंने पिछले 4 महीनों में लंबी यात्रा की है। मीडिया में फिर से उनके लॉन्चिंग की खबरें चलाई जाने लगीं, हालाँकि उनके अजीबोगरीब बयान बता रहे हैं कि वायनाड के सांसद अब भी ‘कुछ भी’ बोलते रहना छोड़ने के मूड में नहीं हैं। आइए, यहाँ हम उनके इसी तरह के एक से बढ़ कर एक बयानों का जिक्र करते हैं। ये बयान वो उस भाषा में देते हैं, जिसे शायद सिर्फ वही समझते हैं।

राहुल गाँधी कभी आटे को लीटर में तो कभी जनसंख्या को रुपए में गिनने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कह दिया कि भारत की आबादी 140 करोड़ ‘रुपए’ है। उनका आलू से सोना बनाने वाला बयान भी खासा मजाक का विषय बना था। उन्होंने ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ वाला बयान दिया, उसके बाद सेल्फी लेने वाले एक व्यक्ति का हाथ झटक दिया। वो मंच पर लड़खड़ाते दिखे। उन्होंने ‘भारतीय सैनिकों की पिटाई’ वाला बयान देकर हमारे जवानों का अपमान किया।

ये देश पुजारियों का नहीं, तपस्वियों का है: राहुल गाँधी

राहुल गाँधी के इस बयान से ये स्पष्ट ही नहीं होता है कि वो भला कहना क्या चाह रहे हैं। तपस्या करने वाले को तपस्वी कहते हैं और पूजा करने वाले को पुजारी। दोनों सनातन धर्म के अलग-अलग कर्म हैं। फिर भी, राहुल गाँधी ने कह दिया कि ये देश पुजारियों का नहीं, तपस्वियों का है। बता दें कि भारत में हजारों मंदिर हैं और लगभग सभी में कोई न कोई एक पुजारी होते हैं। बड़े मंदिरों में कई पुजारी होते हैं। उन्हें शास्त्र का ज्ञान होता है और वो पूजा-पाठ करते व कराते हैं।

गाँवों के मंदिरों के पुजारी गरीब होते हैं, जिनके परिवार का पालन-पोषण उन्हें मिलने वाली दक्षिणा पर निर्भर करता है। कई राज्यों में मस्जिदों के इमामों को वेतन मिलता है, लेकिन पुजारियों को कोई नहीं पूछता। अगर पुजारी न रहें तो मंदिर की देखभाल और प्रबंधन से लेकर समय-समय पर पूजा-आरती कैसे होगी? हालाँकि, इस बयान के बाद उन पर न सिर्फ ब्राह्मणों के प्रति नफरत फैलाने के आरोप भी लगे। अब भला राहुल गाँधी ही समझा सकते हैं कि कैसे ये देश पुजारियों का नहीं है।

महभारत पर भी बाँचा उलटा-पुलटा ज्ञान

अब भगवद्गीता और महाभारत पर राहुल गाँधी का ज्ञान सुनिए, “जब अर्जुन मछली की आँख में तीर मार रहा था, तो क्या उसने कहा कि इसके बाद मैं क्या करूँगा? कहा था क्या? नहीं कहा था न? उस कहानी का मतलब गीता में भी है – काम करो, फल की चिंता मत करो।” बता दें कि ‘मत्स्य भेदन’ की प्रतियोगिता की द्रौपदी के स्वयंवर और शादी के लिए हुई थी। अर्जुन को पता था कि लक्ष्य पर निशाना लगाने के बाद क्या होने वाला है।

श्रीमद्भगवद्गीता में कर्म करने और फल की चिंता न करने के सन्देश का अर्थ ये है कि अगर आपको अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते हैं फिर भी अपना कार्य जारी रखना चाहिए और निराश नहीं होना चाहिए। लेकिन, राहुल गाँधी ने बिना कुछ अध्ययन किए कह डाला कि अर्जुन ने मछली की आँख पर निशाना लगाया, लेकिन उसे मालूम नहीं था कि इसके बाद क्या होने वाला है। जबकि स्पष्ट है कि जो स्वयंवर में विजयी होता, उसे द्रौपदी को वरमाला डालने का अधिकार मिलता।

‘आप सर्दी से डरते हो’: कड़ाके की ठंड में भी स्वेटर पहनने पर राहुल गाँधी

‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान, राहुल गाँधी ज्यादातर समय टीशर्ट में ही दिखे हैं। यहाँ तक कि ठंड के दौरान भी वह टीशर्ट पहने हुए दिखाई दिए। पहले कॉन्ग्रेस वालों ने इसके लिए उन्हें ‘महामानव’ प्रदर्शित किया, उसके बाद जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो वायनाड के सांसद ने उलटे पूछ दिया कि आने स्वेटर क्यों पहनी है? जब पत्रकार ने ठंड को कारण बताया तो राहुल गाँधी बोले, “नहीं, इसका कारण यह नहीं है कि सर्दी है। इसका कारण यह है कि आप सर्दी से डरते हो। मैं सर्दी से डरता नहीं हूँ।”

अब आप सोचिए, कोई ठंड से डरे या ना डरे, अगर तापमान में गिरावट हो रही है तो उसे ठंड लगेगी ही ना? इसमें व्यक्ति का तो कोई दोष नहीं। ठंड में बच्चे बीमार पड़ जाते हैं और बुजुर्गों को भी इससे बच कर रहने की सलाह दी जाती है, ऐसे में राहुल गाँधी क्या मेडिकल विज्ञान की भी धज्जियाँ नहीं उड़ा रहे? उन्हें तो लोगों को ये सलाह देनी चाहिए कि वो ठंड से बच कर रहे और स्वास्थ्य पर ध्यान दें। लेकिन, वो अजीबोगरीब ज्ञान देकर और भरम फैला रहे हैं।

‘राहुल गाँधी आपके दिमाग में है’: बड़े से बड़े विद्वान भी न कर पाएँ इसकी व्याख्या

एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए राहुल गाँधी ने कहा, “राहुल गाँधी आपके दिमाग में है, मैंने मार दिया उसको, वो है ही नहीं, मेरे माइंड में है ही नहीं। गया वो, जिस व्यक्ति को आप देख रहे हो वो राहुल गाँधी नहीं है, वो आपको दिख रहा है। बात नहीं समझे आप। हिंदू धर्म को पढ़ो जरा, शिवजी को पढ़ो जरा – बात समझ में आ जाएगी। ऐसे हैरान मत होओ। राहुल गाँधी आपके दिमाग में है, मेरे दिमाग में है ही नहीं। राहुल गाँधी, बीजेपी के दिमाग में है, मेरे दिमाग में है ही नहीं।

इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि इमेज का उन्हें कोई लेना देना नहीं है, जो इमेज आप रखना चाहते हो रख दो। उन्होंने कहा कि अच्छी रखनी है रख, खराब रखनी है रख दो वो आपका व्यू है। बकौल राहुल गाँधी, इन सबसे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। अब कौन से राहुल गाँधी को किस राहुल गाँधी ने मार डाला, पत्रकारों के दिमाग में क्या है, भाजपा के दिमाग में क्या है, हिन्दू धर्म में इसके बारे में क्या लिखा है, और भगवान शिव का इससे क्या लेनादेना है – इसका जवाब किसी के पास हो तो बताएँ।

राहुल गाँधी का अजीबोगरीब ‘एनर्जी व्यायाम’ और भाजपा से ऊर्जा लेने वाली बात

राहुल गाँधी ने एक ‘सूत्र’ बताते हुए कहा कि वो इसी तरीके से ‘भाजपा की नकारात्मक ऊर्जा’ से निपटते हैं और पॉजिटिव एनर्जी प्राप्त करते हैं। उन्होंने अपना फॉर्मूला देते हुए बताया कि जब भाजपा और RSS उन पर हमले करती है तो वो उसे अपनी ऊर्जा बना लेते हैं। इसके बाद उन्होंने अपने समर्थकों को एक दूसरे के पीछे बिठा दिया और धक्का देने के लिए कहा। ये कौन सा व्यायाम था, इसका उल्लेख शायद ही किसी किताब में मिले।

लेकिन हाँ, लोगों को इससे हँसी भरपूर आई। वो ‘Push-Push’ की आवाज़ लगाते रहे और अपने ‘एनर्जी वाला फॉर्मूला’ का डेमो उन समर्थकों के जरिए दिखाते रहे। उन्होंने लोगों को दोनों पाँव फैला कर सामने की तरफ धक्का देने के लिए कहा। लोगों ने कहा कि इस वीडियो से पता चलता है कि राहुल गाँधी को लोग ‘पप्पू’ क्यों कहते हैं। कइयों ने ये भी पूछ डाला कि किस किताब में अथवा किस वैज्ञानिक ने इस ‘फॉर्मूले’ का प्रतिपादन किया है?

‘कुत्ते आए, भैंस आई और सूअर भी आया…’: राहुल गाँधी

राहुल गाँधी के इस बयान को देखिए, “इस यात्रा में हिंसा दिखी… नहीं। किसी ने किसी नहीं मारा… नहीं। किसी ने किसी को गाली दी… नहीं। आपने नफरत देखी… बिल्कुल नहीं। इसमें किसी ने ये पूछा कि भइया तुम्हारा धर्म क्या है? किसी ने पूछा कि तुम हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो, ईसाई हो, क्या हो? नहीं। किसी ने ये पूछा कि तुम स्त्री हो या पुरुष हो… नहीं। किसी ने पूछा कि तुम्हारी क्या जाति है… बिल्कुल नहीं।” इसका अर्थ आप समझा सकते हैं?

राहुल गाँधी ने आगे कहा, “किसी ने कपड़े भी नहीं पूछे। इस यात्रा में कुत्ते भी आए, लेकिन उन्हें किसी ने नहीं मारा। इसमें गाय भी आई… भैंस भी आई… सूअर भी आए। मैंने देखा। सब जानवर आए। सब लोग आए। लेकिन, यहाँ पर कोई नफरत नहीं दिखी। जैसा हमारा हिंदुस्तान है, वैसे ही ये यात्रा है। कोई नफरत नहीं, कोई हिंसा नहीं, कोई गलत सवाल नहीं।” क्या ये जानवरों की यात्रा थी? भला कुत्ते-बिल्ली और सूअरों के लिए राजनीतिक यात्रा कोई करेगा कोई?

चंदा कोचर और उनके पति को रिहा करने का आदेश: बॉम्बे हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी को बताया अवैध, ICICI बैंक में ₹3250 करोड़ के घपले का मामला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ICICI Bank और Videocon (वीडियोकॉन) लोन धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा गिरफ्तार पूर्व CEO चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दोनों की गिरफ्तारी कानून के मुताबिक नहीं है।

कोचर परिवार के वकील रोहन दक्षिणी ने कहा, “अदालत ने उन्हें इस आधार पर जमानत दी कि यह गिरफ्तारी अवैध थी, क्योंकि वे धारा 41A के तहत जारी नोटिस के अनुपालन में सीबीआई के सामने पेश हुए थे। इसके तहत पेश होने वाले व्यक्ति को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, जब तक यह नहीं पाया जाए कि वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं।”

वकील ने कहा कि CBI कोर्ट को साबित नहीं कर पाई कि दोनों सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी वैध है। इस मामले में कोर्ट ने दोनों आरोपितों पर एक-एक लाख के नकद बेल का आदेश दिया। वहीं, CBI ने दोनों को रिहा करने का कोर्ट में विरोध किया।

बता दें कि सीबीआई ने बैंक लोन मामले में कोचर दंपति को 25 दिसंबर 2022 को गिरफ्तार किया था। इससे पहले कोचर दंपति कोर्ट से इस आधार पर अंतरिम राहत की माँग कर रहे थे कि उनके बेटे की इसी महीने शादी है। हालाँकि जब कोर्ट ने इस आधार पर राहत नहीं दी तो उन्होंने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए याचिका दायर की।

कोचर परिवार ने अदालत में तर्क दिया कि सीबीआई की गिरफ्तारी मनमानी और अवैध थी। परिवार ने कोर्ट को बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 46 (4) का अनुपालन किए बिना उन्हें गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि उस दौरान कोई भी महिला पुलिस अधिकारी उपस्थित नहीं थी।

उधर, CBI ने कोर्ट में कोचर परिवार की रिहाई का विरोध किया। उसका कहना है कि उसने कानून का किसी तरह का उल्लंघन नहीं किया है। कहा जा रहा है कि बॉम्बे कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ CBI सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जा सकती है।

बेटे अर्जुन कोचर की शादी के लिए आलीशान होटल

पहली बार याचिका रद्द होने के बाद चंदा कोचर और दीपक कोचर के बेटे अर्जुन कोचर की शादी कैंसिल करने की खबर आई थी। अर्जुन की शादी के लिए मुंबई की एक इवेंट कंपनी की तरफ से जैसलमेर में 2 आलीशान होटलों को बुक कराया गया था।

इसके अलावा शादी में मेहमानों को एयरपोर्ट से लाने और जैसलमेर की सैर करवाने के लिए 150 लग्जरी गाड़ियों की भी व्यवस्था की गई थी। सूत्रों के मुताबिक तीन महीने पहले से ही जैसलमेर में विवाह की तैयारी चल रही थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक चंदा कोचर के बेटे अर्जुन की शादी एक बिजनेस घराने से संबंध रखने वाली संजना नाम की लड़की के साथ तय हुई है। 7 जनवरी 2023 को मुंबई के ताज होटल में शादी की प्री-मैरिज पार्टी आयोजित की गई थी। इसके लिए मेहमानों को आमंत्रण भी दे दी गई थी।

बेटे अर्जुन के अलावा चंदा कोचर और दीपक कोचर को एक बेटी भी है। बेटी आरती की शादी साल 2014 में हो चुकी है। बेटे अर्जुन (26 साल) ने अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है।

क्या है मामला

CBI ने पति-पत्नी की गिरफ्तारी ICICI बैंक और वीडियोकॉन लोन धोखाधड़ी के मामले में की थी। चंदा कोचर के समय ICICI बैंक ने वीडियोकॉन को 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था, जो बाद में नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) हो गए। NPA को साधारण भाषा में कहें तो ये पैसे डूब गए।

ICICI बैंक ने 2009 से 2012 तक वीडियोकॉन ग्रुप को 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया था। इसमें से 86 प्रतिशत (करीब 2810 करोड़ रुपए) ऋण वीडियोकॉन ने नहीं चुकाए। इसके बाद साल 2017 में इस लोन को ICICI बैंक ने NPA खाते में डाल दिया। उस समय बैंक की प्रमुख चंदा कोचर थीं।

आरोप है कि चंदा कोचर ने वीडियोकॉन को यह लोन इस शर्त पर दिया था कि वीडियोकॉन चंदा के पति दीपक कोचर की कंपनी में निवेश करेगा। वीडियोकॉन ग्रुप के पूर्व चेयरमैन वेणुगोपाल धूत ने कोचर की कंपनी नूपावर रिन्यूएबल में लोन के पैसे से करोड़ों रुपए का निवेश किया था।

वीडियोकॉन को लोन की मंजूरी देने वाली कमिटी में चंदा कोचर खुद शामिल थीं। बाद में यह मामला सामने आया तो बवाल हो गया। CBI ने 24 जनवरी 2019 को FIR दर्ज की और उसमें चंदा, उनके पति दीपक और वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत को आरोपित बनाया।

दरअसल, यह मामला तब सामने आया, जब ICICI Bank और वीडियोकॉन के शेयर होल्डर अरविंद गुप्ता ने फ्रॉड का आरोप लगाया था। अरविंद गुप्ता ने साल 2018 में प्रधानमंत्री, भारतीय रिजर्व बैंक और सेबी (SEBI) को पत्र लिखकर वीडियोकॉन के एमडी धूत और ICICI Bank की सीईओ चंदा कोचर पर एक-दूसरे को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाया था।

कोचर परिवार के बुरे दिन की शुरुआत

इस कार्रवाई के बाद बैंक ने अप्रैल 2009 से मार्च 2018 के बीच चंदा कोचर को दिए गए सभी बोनस को वापस ले लिया। फरवरी 2019 में बैंक ने चंदा कोचर को टर्मिनेशन लेटर देकर उन्हें पद से हटा दिया। फिलहाल मामले की जाँच CBI, ED, SFIO और आयकर विभाग जाँच कर रही है।

जनवरी 2020 में ED ने कोचर परिवार की 78 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति की थी। उस दौरान ED ने पूछताछ के बाद दीपक कोचर को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद पिछले साल फरवरी में स्पेशल PMLA कोर्ट ने आईसीआईसीआई बैंक-वीडियोकॉन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 5 लाख रुपए के मुचलके पर जमानत दे दी थी। कोर्ट ने देश से बाहर जाने पर रोक लगा दिया था।

महिला सशक्तिकरण की प्रतीक थीं चंदा कोचर

एक समय था जब चंदा कोचर को भारत में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक माना जाता था। उन्‍हें ICICI  बैंक को ऊँचाइयों पर पहुँचाने वाली महिला के रूप में भी याद किया जाता है। विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिका फोर्ब्स ने उन्‍हें दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया था।

चंदा कोचर भारत में किसी बैंक की CEO बनने वाली पहली महिला थीं। बैंकिंग सेक्टर में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने चंदा कोचर को देश के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया है।  

कभी कमाती थी एक दिन में 2.18 लाख रुपए

जब मामले का खुलासा हुआ था, तब चंदा कोचर का एक दिन का वेतन करीब 2.20 लाख रुपए था। धोखाधड़ी, रिश्वत, मनी लॉन्ड्रिंग और NPA से जुड़े इस मामले ने चंदा कोचर के स्वर्णिम करियर को बर्बाद कर दिया।

चंदा कोचर ने साल 1984 में इंडस्ट्रियल क्रेडिट एवं इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में ज्वॉइन किया था। उस समय यह बैंक नहीं था। साल 1994 में ICICI बैंक बना। चंदा कोचर कोर टीम का हिस्‍सा बनीं और वह मैनेजमेंट ट्रेनी से सीधे सहायक जनरल मैनेजर बन गईं।

चंदा कोचर मैनेजमेंट ट्रेनी से डिप्टी जनरल मैनेजर बनीं, फिर डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर बनीं। साल 2009 में वह बैंक की प्रबंध निदेशक (Managing Director) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनीं। अपने पति की कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए चंदा कोचर ने वीडियोकॉन के साथ मिलकर इस बैंक फ्रॉड को अंजाम दे दिया।