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ऑपइंडिया के हिंदी अकाउंट पर अजब सा ‘बैन’! कोड है टूटा या वोक कोई रूठा? देख लो इलौन भाई

जब एलन मस्क ने माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर को नहीं खरीदा था, तब भारत में कई दक्षिणपंथियों ने ये महसूस किया था कि उनके हैंडल को ‘शैडो बैन’ कर दिया जा रहा है। ‘शैडो बैन’, अर्थात फॉलोवर्स को उस हैंडल के ट्वीट्स न दिखना या बहुत कम दिखना। अब एलन मस्क ने ट्विटर को खरीद लिया है, जिसके बाद चीजें काफी बदली हैं। हालाँकि, अब ऑपइंडिया हिंदी का हैंडल ट्विटर के किसी ‘तकनीकी लोचे’ का शिकार बनता दिख रहा है।

या फिर कौन कहे कि ये अंदर ही अंदर किसी अधिकारी या अधिकारियों के समूह की साजिश हो, क्योंकि हालिया ‘ट्विटर फाइल्स’ में हमने देखा है कि कैसे डोनाल्ड ट्रम्प के ट्विटर हैंडल को बैन करने से लेकर जो बायडेन के बेटे हंटर के कारनामों को छिपाने तक, ट्विटर के अधिकारियों का एक समूह साजिशन ऐसी चीजों को अंजाम दे रहा था। विजय गड्डे (जिनकी अब छुट्टी हो गई है) जैसों का रवैया तो चर्चा में था ही। कश्मीर और पाकिस्तान पर भी ट्विटर के अधिकारियों का भारत विरोधी रवैया दिखा था।

अब आपको बताते हैं कि असल में हुआ क्या है। ट्विटर पर जब हम ‘OpIndia’ या ‘ऑपइंडिया’ लिख कर सर्च कर रहे हैं तो इसका आधिकारिक हैंडल दिख ही नहीं रहा है। क्या ये किसी प्रकार का बैन है? या फिर ‘तकनीकी खामी’? या फिर भारत विरोधी अधिकारियों द्वारा जानबूझ कर हमें परेशान करने के लिए की गई साजिश? OpIndia के अंग्रेजी हैंडल समेत कई मिलते-जुलते हैंडल सर्च में सजेशन में दिख रहे हैं, लेकिन हमारा हिंदी हैंडल नहीं। देख लीजिए:

‘OpIndia’ लिख कर सर्च किया, लेकिन हमारे हिंदी वाले हैंडल का कोई अता-पता नहीं

यहाँ तक कि हम अपने हैंडल का यूजरनेम, जो कि ‘OpIndia_In’ है, ये लिख कर सर्च कर रहे हैं फिर भी नीचे सजेशन में हमारा हिंदी हैंडल नहीं दिख रहा है। जब हमने हमारे एक यूआरएल को पेस्ट कर के सर्च किया, तब भी हमारा कोई लिंक नहीं मिला। जैसे, इस खबर को ले लीजिए – ‘अपने सारे मेडिकल बिल खुद भरते हैं PM मोदी: RTI से खुलासा – सरकारी खजाने से एक रुपया भी अपने स्वास्थ्य पर खर्च नहीं किया’।

हमारी खबर का यूआरएल डालने पर ट्विटर पर मिल ही नहीं रहा

हमने इस खबर को सोमवार (9 दिसंबर, 2022) को शाम 6:09 बजे शेयर किया था, लेकिन इसका यूआरएल सर्च करने पर हमें वो ट्वीट दिखा ही नहीं। अब इस खबर को लीजिए – ‘3000+ Km चले, पर बुद्धि वही बाइस पसेरी: ‘सर्दी से डरते हो’ से लेकर ‘देश पुजारियों का नहीं’, राहुल गाँधी का कहा भारत की ही समझ से परे’। ये हमें ट्विटर पर ट्वीट कर रखा है, लेकिन सर्च करने पर हमें दूसरे लोगों द्वारा शेयर की गई हमारी खबर तो मिल रही है, लेकिन हमारे आधिकारिक हैंडल से डाली गई ये खबर नहीं। देखिए:

दूसरों ने हमारी खबर शेयर की, वो मिल रहा लेकिन हमारे हैंडल से डाली गई ट्वीट नहीं

इसी तरह हमारी अन्य खबरों के साथ भी हो रहा है। एंड्राइड फोन में जहाँ कोई सर्च रिजल्ट नहीं दिख रहा है, आईफोन के ट्विटर एप से सर्च करने पर हमें एकाध लिंक्स मिल रहे हैं जो दूसरों ने शेयर किए हैं। ऐसे में ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क से अपील है कि वो इस तकनीकी लोचे/साजिश का संज्ञान लें और इसे देखें। हमारे हिंदी हैंडल पर 2.40 लाख फॉलोवर्स हैं। ऐसे में हमारे हैंडल का सर्च रिजल्ट्स में न आना लोगों के एक बड़े समूह की अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन भी है।

दिल्ली में पहले शराब घोटाला, फिर केस लड़ने के लिए सरकारी खजाने से वकीलों पर फूँक दिए ₹28 करोड़: आधा से ज़्यादा इस कॉन्ग्रेस नेता को मिला

दिल्ली का शराब घोटाला न केवल अरविंद केजरीवाल सरकार बल्कि दिल्ली के सरकारी खजाने के लिए भी भरा पड़ रहा है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार शराब घोटाले में पैरवी करने वाले वकीलों को 25 करोड़ रुपए से अधिक दे चुकी है। वहीं, बीते 18 महीनों में वकीलों की फीस के रूप में 28.10 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि शराब घोटाले की पैरवी करने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा कॉन्ग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी को 18.97 करोड़ रुपए दिए हैं। वहीं, जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन की पैरवी करते दिखाई देने वाले वकील राहुल मेहरा को 5.30 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंघवी को साल 2021-22 के दौरान, पहले तो 14.85 करोड़ रुपए दिए गए। लेकिन, बाद में 4.1 करोड़ रुपए दिए गए हैं। मेहरा का भुगतान, जो 2020-21 में बयान की व्यय सूची में 2.4 लाख रुपए के रूप में दिखाया गया था, 2021-22 में बढ़कर 3.9 करोड़ रुपए हो गया और वर्तमान में 1.3 करोड़ रुपए दर्ज किया गया।

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि शराब घोटाला सामने आने से पहले, दिल्ली में आप सरकार का कुल खर्च केवल 6.70 करोड़ रुपए था। इसमें, अधिकांश खर्च सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) और स्वास्थ्य विभाग के लिए खर्च किया जाता था।

दिल्ली का शराब घोटाला

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के अंतर्गत शराब कारोबार में गुटबाजी और एकाधिकार चल रहा था। यह भी आरोप लगाया गया है कि नई आबकारी नीति के तहत शर्तों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को भी शराब के लाइसेंस अवैध रूप से वितरित किए गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल की अनिवार्य स्वीकृति के बिना ही एक्साइज पॉलिसी में बदलाव किए थे। सिसोदिया ने शराब विक्रेताओं द्वारा लाइसेंस के लिए भुगतान की जाने वाली लाइसेंस फीस पर ₹144.36 करोड़ की छूट दी थी। उन्होंने यह छूट कोविड-19 महामारी के नाम पर दी थी। यही नहीं, सिसोदिया ने बीयर पर प्रति पेटी 50 रुपए के आयात पास शुल्क को भी हटा दिया था। साथ ही, विदेशी शराब की कीमतों में संशोधन करके शराब विक्रेताओं को अनुचित तरीके से लाभ दिया था।

सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, एल-1 लाइसेंस अवैध रूप से जारी किए गए थे। इसके लिए वकायदा रिश्वत ली गई थी। यह भी सामने आया है कि एक व्यापारी ने मनीष सिसोदिया के सहयोगी द्वारा संचालित कंपनी को 1 करोड़ रुपए का दिए थे। जाँच में यह भी सामने आया है कि L-1 लाइसेंस के लिए व्यापरियों से करोड़ों रुपए लिए जा रहे थे।

कपटपूर्ण धर्मांतरण को सुप्रीम कोर्ट ने माना गंभीर मामला, अटॉर्नी जनरल से माँगी राय: तमिलनाडु सरकार के विरोध पर लगाई फटकार, कहा- राजनीतिक रंग ना दें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 जनवरी। 2023) को जबरन और धोखे से धर्मांतरण के खिलाफ कदम उठाने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे गंभीर मुद्दा बताया। इसके साथ कोर्ट ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग ना देने की अपील करते हुए इस पर भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की सहायता माँगी है।

जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार की पीठ ने तंजावुर में एक छात्र की मौत की NIA जाँच की माँग के मामले में एक नई याचिका के खिलाफ तमिलनाडु सरकार के विरोध को भी खारिज कर दिया। तमिलनाडु सरकार के वकील पी विल्सन ने कहा कि नई याचिका निराधार है और अदालत को इस पर विचार नहीं करना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता विल्सन ने कहा, “यह राजनीति से प्रेरित जनहित याचिका है। तमिलनाडु में इस तरह के धर्मांतरण का कोई सवाल ही नहीं है। विधायिका को इस तरह की चीजों का फैसला करने दें।” हालाँकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को गंभीर मानता है और उसने पहले ही इस मुद्दे की जाँच करने का फैसला कर लिया है।

न्यायमूर्ति शाह ने कहा, “हम पूरे देश, सभी राज्यों के लिए चिंतित हैं। यदि यह आपके राज्य में हो रहा है तो यह बुरा है। यदि नहीं हो रहा है तो अच्छा है। इसे एक राज्य को निशाना बनाने के रूप में न देखें। इसे राजनीतिक न बनाएँ।” पीठ ने कहा कि वह याचिका में कुछ अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाएगी नहीं।

पिछली बार की सुनवाई के दौरान कुछ अल्पसंख्यक धार्मिक निकायों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि याचिका में अल्पसंख्यक धर्मों के खिलाफ कुछ अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं। हालाँकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि कुछ भी हटाया नहीं जाएगा।

दरअसल, भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका में जबरन धर्मांतरण से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की माँग की गई है। इसमें कहा गया है कि देश भर में कपटपूर्ण धर्म परिवर्तन बड़े पैमाने पर हो रहा है और केंद्र सरकार इसके खतरे को नियंत्रित करने में विफल रही है।

उधर, केंद्र सरकार ने अपने हलफनामा में कहा है कि संविधान के तहत किसी भी धर्म को मानने और उसका प्रचार करने के मौलिक अधिकार में लोगों को धर्मांतरण करने का अधिकार शामिल नहीं है। आज की सुनवाई में कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से सहायता करने के लिए कहा है।

कोर्ट ने AG से कहा “हम भारत के अटॉर्नी जनरल के रूप में आपकी सहायता चाहते हैं। बल, प्रलोभन या किसी अन्य चीज द्वारा धर्म परिवर्तन आदि … ये आरोप हैं। हम इस बात पर विचार नहीं कर रहे हैं कि यह वास्तव में हुआ है या नहीं। यदि वास्तव में ऐसा हो रहा है, क्योंकि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार और धर्मांतरण के अधिकार के बीच अंतर है। इसके तरीके या लालच से अगर ऐसा कुछ हो रहा है तो कब क्या किया जाना चाहिए? सुधारात्मक उपाय क्या हैं?”

खंडपीठ को अटॉर्नी जनरल ने सहायता करने का आश्वासन दिया और कहा कि वे इस मामले के रिकॉर्ड की जाँच करने के बाद कोर्ट को सूचित करेंगे। इस मामले में अब अगली सुनवाई 7 फरवरी 2023 को होगी।

तुनिशा शर्मा की ज़िंदगी में शीज़ान खान के बाद आया था अली! अपने Tinder मैच के साथ डेट पर गई, मौत से पहले 15 मिनट उससे की बात – सुनवाई में खुलासा

कोर्ट में सुनवाई के दुराण खुलासा हुआ है कि अभिनेत्री तुनिशा शर्मा ने आत्महत्या से पहले अली नाम के शख्स से बात की थी, जिससे वो Tinder पर मिली थीं। असल में ‘अली बाबा: दास्तान-ए-काबुल’ के अपने सह-अभिनेता शीज़ान खान के साथ ब्रेअकप होने के बाद तुनिशा शर्मा ने डेटिंग के लिए टिंडर एप का सहारा लिया था और वहीं उन्हें अली नाम का व्यक्ति मिला था। अभिनेत्री की माँ को भी अली के साथ उनकी नजदीकी के बारे में पता था।

आत्महत्या से पहले तुनिशा शर्मा ने अली के साथ लगभग 15 मिनट तक फोन पर बातचीत की थी। शीज़ान खान के साथ ब्रेअकप के बाद टिंडर पर मिले अली के साथ वो डेट पर भी गई थीं। 21 दिसंबर, 2022 से लेकर 23 दिसंबर के बीच दोनों के बीच फोन कॉल पर बातचीत के सबूत मिले हैं। 23 दिसंबर को अभिनेत्री ने अपनी माँ से वीडियो कॉल पर बात की थी। लेकिन, खास बात ये है कि जिस फोन से उन्होंने कॉल किया वो अली का था।

मौत से पहले अली के साथ भी अभिनेत्री की वीडियो कॉल पर ही बात हुई थी। ये बातें शीज़ान खान के वकील ने कही हैं। उनका आरोप है कि तुनिशा शर्मा कुछ ऐसी दवाइयाँ ले रही थीं जिन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं खाना चाहिए। तुनिशा शर्मा के वकील का कहना है कि अगली सुनवाई में वो इन आरोपों का जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि अगर शीज़ान खान अभिनेत्री से टच में नहीं था, फिर उसे कैसे पता चला कि तुनिशा शर्मा किसी से बात कर रही हैं?

वहीं अब खबर आ रही है कि किसी अन्य अभिनेत्री को सोनी टीवी के शो ‘अली बाबा: दास्तान-ए-काबुल’ में ‘शहजादी मरियम’ के किरदार में लिया जा सकता है, जिसे तुनिशा शर्मा निभा रही थीं। पहले इसमें अवनीत कौर का नाम सामने आया था, हालाँकि अब पुष्टि हुई है कि ये महज एक अफवाह था। शीज़ान खान को भी सीरियल से रिप्लेस किया जा सकता है और उनकी जगह अभिषेक निगम को लिए जाने की चर्चाएँ हैं।

बुलाया सत्संग के नाम पर, थमा दिया क्रॉस: हरिद्वार में ईसाई बनने पर पैसे का लालच, पंजाब-तमिलनाडु के मिशनरियों पर दर्ज हुई FIR

देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार से ईसाई धर्मान्तरण के प्रयास का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए पैसों का भी लालच दिया जा रहा था। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने हंगामा किया। पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर के हिरासत में लिया है जिनसे पूछताछ की जा रही है। आरोपितों में एक महिला भी शामिल है। घटना रविवार (8 जनवरी 2023) की है।

यह मामला कनखल थानाक्षेत्र का है। मामले में शिकायतकर्ता का नाम सचिन सैनी है। पुलिस को दी गई शिकायत में सचिन ने बताया है कि शनिवार (7 जनवरी 2023) को वो कुछ व्यक्तिगत कार्य से रोशनाबाद स्थित समाज कल्याण ऑफिस गया था। यहाँ पर सचिन को दिनेश नाम का व्यक्ति मिला। दिनेश ने खुद को जगजीतपुर का रहने वाला बताया। शिकायत में बताया गया है कि दिनेश ने अपने घर पर एक सत्संग होने की जानकारी देते हुए अगले दिन उसमें सचिन को भी आने का न्यौता दिया।

शिकायत में सचिन ने लिखा है कि दिनेश ने अपने घर में होने वाले सत्संग से सभी दिक्क्तों के दूर होने की बात कही। दिनेश ने यह कथित सत्संग हर रविवार को होने की जानकारी दी। दिनेश की बात पर यकीन कर के सचिन अगले दिन रविवार को उसके घर गया। यह घर शिवडेल स्कूल के सामने वाली गली में था। यहाँ पर सचिन को पहले से 3 लोग मौजूद मिले जिसमें 2 पुरुष और 1 महिला थी। इन सभी ने अपना नाम जैबिस्टन, स्टैला व गिन्नी बताया।

सचिन के मुताबिक, कुछ देर बाद जैबिस्टन और स्टैला उसे अकेले में ले गए। यहाँ उसे 1-2 लाख रुपए का लालच दिया गया और ईसाई बन जाने के लिए कहा गया। इस दौरान स्टैला ने सचिन को 4-5 ईसाई क्रॉस दिए। इसे घर में सबके गले में लटकाने के लिए कहा गया। जब सचिन ने धर्म बदलने से इनकार कर दिया तो उसे वापस भेज दिया गया। इस दौरान शोर शराबा हुआ और मौके पर पुलिस पहुँच गई। शिकायत पत्र में सचिन ने सभी पर FIR दर्ज कर के कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरिद्वार पुलिस ने 1 महिला समेत 3 आरोपितों पर FIR दर्ज कर ली। आरोपितों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक हिरासत में लिए गए आरोपितों में एक पंजाब और दूसरा तमिलनाडु का रहने वाला है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने पुलिस से कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

UCC पर गुजरात-उत्तराखंड ने बनाई समिति, इसके खिलाफ दर्ज याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द: कहा – राज्यों के पास अधिकार, इसमें गलत क्या?

उत्तराखंड और गुजरात सरकार ने ‘समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code)’ लागू करने के लिए समिति का गठन किया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में जनहित याचिका दायर हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि राज्य सरकार को समिति बनाने का अधिकार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (9 जनवरी, 2023) को देश के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा है कि समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए समिति बनाने में गलत क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत राज्यों को समिति बनाने का अधिकार है। इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्‍पणी के साथ उत्तराखंड और गुजरात में समान नागरिक संहिता को लागू करने के हर पहलू पर विचार करने के लिए गठित की गई समिति के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।

उत्तराखंड सरकार ने मई 2022 में बनाई थी समिति

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने चुनावी वादे के अनुसार, राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए मई 2022 में समिति बनाई थी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना देसाई को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। समिति में कुल 5 सदस्य हैं।

यह समिति राज्य में जगह-जगह जाकर सभी धर्मों, वर्गों और जातियों के प्रतिष्ठित लोगों से संपर्क और उनसे संवाद के आधार पर ड्राफ्ट तैयार करेगी। इसके लिए सरकार ने सदस्य सचिव की नियुक्ति भी कर दी है। इससे समय-समय पर कमिटी की बैठकें आयोजित की जा सकेंगी और प्रोग्रेस एवं प्रोसेस पर चर्चा हो सकेगी।

गुजरात सरकार ने भी बनाई है समिति …

उत्तराखंड सरकार की तरह पर गुजरात सरकार ने भी समान नागरिक संहिता की ओर कदम बढ़ाते हुए अक्टूबर 2022 में समिति बनाने का ऐलान किया था। इस कमेटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर जज करेंगे। हालाँकि फिलहाल, इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कमेटी बनाने का ऐलान कर चुके हैं।

क्या है समान नागरिक संहिता और क्यों मुस्लिम करते हैं विरोध

‘समान नागरिक संहिता’ को सरल अर्थों में समझा जाए तो यह एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, उसके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सब पर लागू किया, लेकिन शादी, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति आदि से जुड़े मसलों को सभी धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

इन्हीं सिविल कानूनों को में से हिंदुओं वाले पर्सनल कानूनों को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खत्म किया और मुस्लिमों को इससे अलग रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। वहीं, मुस्लिमों के लिए उनके पर्सनल लॉ को बना रखा, जिसको लेकर विवाद जारी है।

इसकी वजह से न्यायालयों में मुस्लिम आरोपितों या अभियोजकों के मामले में कुरान और इस्लामिक रीति-रिवाजों का हवाला सुनवाई के दौरान देना पड़ता है।

इन्हीं कानूनों को सभी धर्मों के लिए एक समान बनाने की जब माँग होती है तो मुस्लिम इसका विरोध करते हैं। मुस्लिमों का कहना है कि उनका कानून कुरान और हदीसों पर आधारित है, इसलिए वे इसकी को मानेंगे और उसमें किसी तरह के बदलाव का विरोध करेंगे। इन कानूनों में मुस्लिमों द्वारा चार शादियाँ करने की छूट सबसे बड़ा विवाद की वजह है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी समान नागरिक संहिता का खुलकर विरोध करता रहा है।

अपने सारे मेडिकल बिल खुद भरते हैं PM मोदी: RTI से खुलासा – सरकारी खजाने से एक रुपया भी अपने स्वास्थ्य पर खर्च नहीं किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) दुनिया के सबसे प्रसिद्ध नेताओं में शुमार हैं। उनकी बातों और कार्यों को लाखों लोग फॉलो करते हैं। देश को कोरोनाकाल याद होगा, जब उन्होंने शाम के वक्त दीप जलाने का आह्वान किया था और हर भारतीय उनकी अपील को कार्यान्वित किया था।

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। वे अपनी स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च खुद उठाते हैं। उन पर हवाले वाले मेडिकल बिल का भुगतान सरकारी खजाने से नहीं किया जाता है। प्रधानमंत्री के रूप में यह देश के लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल है।

यह सब एक RTI में खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र के पुणे के निवासी प्रफुल्ल सारदा ने RTI के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से पूछा कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके मेडिकल पर कितना खर्च हुआ है।

RTI के जवाब से खुलासा हुआ कि पीएम के स्वास्थ्य की देखभाल पर एक रुपए का भी खर्च नहीं हुआ है। RTI के जवाब में PMO ने कहा कि उसके द्वारा प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य पर खर्च को लेकर मेटेन किए जाने वाले डिटेल के अनुसार कोई खर्च नहीं हुआ है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव बिनोद बिहारी सिंह ने RTI का जवाब देते हुए कहा कि सरकारी बजट का एक रुपया भी पीएम के व्यक्तिगत चिकित्सा उपचार के भुगतान में उपयोग नहीं किया जाता है। पीएमओ ने साफ कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वास्थ्य पर देश और विदेश में 2014 से अब तक कोई व्यय नहीं किया गया है”।

कार्यकर्ता प्रफुल्ल ने कहा, “पीएम मोदी जी ने फिट इंडिया अभियान के माध्यम से न केवल एक मजबूत संदेश दिया, बल्कि वे खुद एक उदाहरण पेश कर 135 करोड़ भारतीयों को फिट रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल PMO के किसी भी निजी काम के लिए नहीं किया जा रहा है। इससे शासन में हमारा विश्वास बढ़ा है। सांसदों और विधायकों को भी अपने निजी चिकित्सा खर्च को वहन करके उसी रास्ते का पालन करना चाहिए।”

‘तुम्हें मुस्लिम बना कर अपनी बेगम बनाऊँगा’: अनस ने हिन्दू छात्रा को दी ‘सर तन से जुदा’ और एसिड अटैक की धमकी, जेल से छूटा तो कॉलेज में घुस किया प्रताड़ित

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिंदू युवती से जबरन निकाह करने और मुकदमा वापस लेने की धमकी देने का मामला सामने आया है। आरोपित अनस ने छात्रा के कॉलेज में घुसकर सबसे सामने उसे बेइज्जत किया। विरोध करने पर उसने छात्रा को तेजाब से नहलाने और उसका सिर तन से जुदा करने की धमकी दी। आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस कमिश्नरेट कानपुर नगर के थाना नौबस्ता की अपर पुलिस उपायुक्त ने जानकारी दी कि एक स्कूल में छात्रा के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया था, जिसमें अनस नाम का व्यक्ति स्कूल में घुसकर छात्रा को परेशान कर रहा था। मामले की गहनता से जाँच करने क बाद पता चला कि अनस पर रेल बाजार में ही इस तरह के तीन मामले इसी प्रकरण में कायम हैं। वो इस छात्रा को काफी दिनों से परेशान कर रहा है। थाना नौबस्ता में मामला दर्ज कर अनस को गिरफ्तार करने के लिए कई टीमें लगा दी गईं।

रविवार (8 जनवरी, 2023) को अनस को ​गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में अनस के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें गुंडा एक्ट के हिसाब से कार्रवाई कर उसे कानपुर पुलिस के द्वारा जिलाबदर भी किया जाएगा।

वहीं, पीड़िता ने 8 जनवरी, 2023 को नौबस्ता पुलिस में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। 18 वर्षीय बीबीए छात्रा रेल बाजार क्षेत्र की निवासी है। इलाके में रहने वाले पॉक्सो और यौन उत्पीड़न के आरोपित ने जमानत पर बाहर आने के बाद उसे धमकी दी और इतना परेशान किया कि दहशत में आकर पीड़ित परिवार को सस्ते में अपना घर बेचकर दूसरी जगह रहने को मजबूर होना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो साल पहले भी लड़की के पिता ने अनस पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज करवाया था। लेकिन जेल से छूटने के बाद भी वह नहीं माना और उसने फिर लड़की के साथ फिर छेड़छाड़ की और उसे अपना केस वापस लेने की धमकी दी। ऐसा न करने पर उसने उसे ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी दी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अनस ने उसका जीना दुश्वार कर दिया है। वह 2 साल से उसके पीछे पड़ा है।

पीड़िता ने उसके खिलाफ शिकायत भी की थी, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया था, लेकिन वहाँ से जमानत पर छूटने के बाद वह 2 जनवरी 2023 को उसके कालेज में घुस आया। लड़की ने आगे बताया, “क्लास रूम में सबके सामने उसने मेरा हाथ पकड़कर खींचा और मुझे बेइज्जत किया है। उसने मुझे धमकी दी कि अपना मुकदमा वापस ले, वरना चेहरे पर तेजाब डाल दूँगा। तेरा सिर तन से जुदा कर दूँगा। इसके साथ ही उसने मुझे निकाह करने की धमकी दी, कहा- तुम मेरी हो जाओ और निकाह कर लो। मैं तुम्हें मुस्लिम बनाकर अपनी बेगम बनाऊँगा। इस वजह से मैंने क्लास में जाना छोड़ दिया है।”

पुलिस ने लड़की का कांशीराम अस्पताल में मेडिकल भी कराया है। बता दें कि कुछ रिपोर्ट में छात्रा के कॉलेज की जगह स्कूल लिखा जा रहा है।

‘गाड़ी जाने दो वरना तौहीन-ए-रिसालत (ईशनिंदा) लगवा दूँगा’ : पाकिस्तान में ईसाई महिला सिक्योरिटी इंचार्ज को सलीम ने दी धमकी, बोला- तुम्हें काटकर फेंक दूँगा

पाकिस्तान में ‘ईशनिंदा का इल्जाम लगाना’ अल्पसंख्यकों को डराने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। हाल में एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है जिसमें ईसाई सिक्योरिटी गार्ड को एक मुस्लिम व्यक्ति धमका रहा है कि अगर उसने गाड़ी रोकी तो वह मौलाना को बुलाकर तौहीन-ए-रिसालत का इल्जाम लगा देगा। घटना वीडियो में कैद है इसलिए साफ पता चल रहा है कि महिला की कोई गलती नहीं थीं।

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पूरा मामला जिन्ना अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का है। जहाँ तैनात एक महिला सुरक्षा इंचार्ज ने बिन वैध पास और नंबर प्लेट के एक एजेंट के घुसने पर आपत्ति जताई और गाड़ी बाहर निकालने को कहा। महिला की इतनी बात सुन वो व्यक्ति और अन्य  सुरक्षाकर्मी भड़क गए जिन्होंने गाड़ी को अंदर जाने के लिए छोड़ा था। इसके बाद उन्हें धमकी दी जाने लगी।

वीडियो में साफ सुन सकते हैं कि एक व्यक्ति उनसे कहता है, “मैं पागल हूँ। मैं तो तुमको काटकर फेंक दूँगा अभी।” इसके अलावा इस आदमी को बार-बार मौलानाओं की धमकी देते सुना जा सकता है। ये कहता है- “मैं जा रहा हूँ मौलाना को बुलाने, तुम पर तौहीन-ए-रिसालत लगाऊँगा।”

ईसाई महिला और पुरुष के बीच हुई बातचीत में महिला बार-बार पूछती है कि आखिर तौहीन-ए-रिसालत कैसे हो गई। वह बोलती है- “तुम लोगों को ये बात बर्दाश्त नहीं होता कि एक ईसाई महिला काम कर रही है।” वीडियो से ही पता चलता है कि महिला को धमकाने वाले का नाम सलीम है।

सिविल एविएशन अथॉरिटी ने इस घटना की वीडियो देखने के बाद मामले की जाँच की और पाया कि गलती सलीम की ही थी। उसे नौकरी से फिलहाल डिसमिस कर दिया गया है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि आगे का एक्शन पूरी जाँच होने के बाद लिया जाएगा।

बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा को अल्पसंख्यकों के विरुद्ध कई बार इस्तेमाल किया गया है। 2021 में एक ईसाई मैनेजर को ईशनिंदा के इल्जाम में जलाकर मार डाला गया था। 2019 में एक हिंदू स्कूल प्रिंसिपल पर छात्र ने ईशनिंद का आरोप लगाया था जिसके बाद उन्हें जेल हुई थी।

जम्मू-कश्मीर: अब पुंछ में हिंदुओं के घरों पर पत्थरबाजी, नए साल पर राजौरी में आधार कार्ड देखकर मारी थी गोलियाँ

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में हिंदुओं के घरों पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई थी। इसके बाद से स्थानीय हिंदू डरे हुए हैं और सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। इसके पहले नए साल पर राजौरी में आधार कार्ड देखकर हिंदुओं को गोली मारी गई थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुंछ के बैछ गाँव में हिंदू घरों पर पत्थरबाजी की घटना रविवार (8 जनवरी 2023) देर रात हुई। पत्थरबाजी से लोगों के घरों की खिड़कियों में लगे काँच टूट गए हैं। दीवारों पर भी पत्थर के निशान देखे गए हैं। हालाँकि, पत्थरबाजी किसने की है, इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई है।

जिन हिंदुओं के घरों में पत्थरबाजी हुई है, वे बेहद डरे हुए हैं। पीड़ित हिंदू अपनी सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद पुंछ थाने के एसएचओ रंजीत सिंह राव पुलिस दल के साथ मौके पर पहुँचे और पीड़ित परिवारों से बात की। एसएचओ ने उचित कार्रवाई का भी आश्वासन दिया है।

साथ ही, अल्पसंख्यक संगठन के लोगों ने भी पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया है। कहा जा रहा है कि बैछ गाँव मुस्लिम बहुल है। यहाँ हिंदुओं के महज 35 घर हैं। ऐसे में, हिंदू डर के साए में जी रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं राजौरी जैसी घटना उनके साथ भी न हो जाए।

दरअसल, 1 जनवरी 2023 को राजौरी के डाँगरी गाँव में, हिंदुओं को टारगेट करते हुए आतंकियों ने तीन घरों में फायरिंग की थी। ये घर, 50 मीटर के दायरे में बने थे। आतंकियों द्वारा की गई इस फायरिंग में 5 लोगों की मौत हो गई थी। बाद में, यह सामने आया था कि आतंकियों ने आधार कार्ड देखकर हिंदुओं को गोली मारी थी। वहीं, 2 जनवरी को डाँगरी में ही फायरिंग वाली जगह के पास बम धमाका हुआ था। इसमें, एक बच्चे समेत 2 लोगों की मौत हो गई थी।

सुरक्षा बलों ने मार गिराए दो आतंकी

शनिवार (7 जनवरी 2023) की रात पुंछ के बालाकोट सेक्टर में आतंकी घुसपैठ कर रहे थे। सुरक्षा बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए 2 आतंकवादी मार गिराए थे। सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के पास से एक AK 47 राइफल, AK 56 राइफल, एक चीनी पिस्टल, दो चीनी हथगोले और दो IED बरामद किए थे।