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वर्दी पहन कर रौब दिखाता था, करता था ठगी: यूपी पुलिस ने फर्जी दरोगा कासिम को दबोचा, महिला से लूट लिए ₹55000

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से पुलिस की वर्दी पहन रौब दिखाने वाला फर्जी दरोगा गिरफ्तार हुआ है। पुलिस ने यह कार्रवाई एक महिला की शिकायत पर की है। पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि आरोपित ने लोन दिलाने का झाँसा देकर उससे 55 हजार रुपए की ठगी की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरोहा में बरछायूँ थाना अंतर्गत चौखट गाँव में रहने वाली पीड़िता नसरीन जहाँ ने ठगी को लेकर पुलिस से शिकायत की थी। पीड़िता ने शिकायत में कहा था कि कासिम नामक व्यक्ति लोगों को फर्जी दरोगा बन कर लूटता है और उसके साथ ठगी की है।

इस पूरे मामले में डिप्टी एसपी अमरोहा सर्किल विजय कुमार राणा का कहना है कि आरोपित कासिम की मुलाकात पीड़िता नसरीन जहां के पति वारिस सैफी से हुई थी। कासिम ने खुद को पुलिस में दरोगा बताते हुए यूनियन बैंक से 10 लाख रुपए लोन दिलाने की बात कही थी। इस दौरान, उसने नसरीन हाई स्कूल व इंटर की मार्कसीट भी ले ली थी।

यही नहीं, लोन दिलाने के लिए उसने पैसे खर्च होने की बात कहते हुए पेटीएम, गूगल पे इत्यादि के माध्यम से 55 हजार रुपए भी ठग लिए। जब पीड़िता ने कासिम से लोन की बात कही तो वह टालमटोल करता रहा। साथ ही, जब उसे दिए गए 55 हजार रुपए वापस माँगे तो उसने गाली-गलौच करते हुए पैसे वापस देने से इनकार दिया।

डिप्टी एसपी राणा ने यह भी कहा है कि पीड़िता ने आरोप लगाया है कि कासिम ने उससे कहा था कि यदि उसने कहीं शिकायत की तो उसके पति अली वारिस सैफी को झूठे केस में फँसा कर जेल भिजवा देगा या जान से मार देगा।

उन्होंने आगे बताया है कि इसके बाद पीड़िता ने फर्जी दरोगा बने कासिम से तंग आकर मामले की शिकायत एसपी से की। शिकायत के आधार पर हुई जाँच में सामने आया है कि कासिम पुलिस की वर्दी पहनकर शहर में घूमता था। साथ हिज़ खुद को दरोगा बताकर लोगों के बीच रौब जमाता था। शनिवार (7 जनवरी, 2022) को भी वर्दी पहनकर घूम रहा था। तभी, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

हिंदुओं को दो हथियारों का लाइसेंस और सस्ती जमीन: J&K में सुरक्षा समिति बनाना वक्त की माँग, आतंकियों के रहनुमाओं को कुचलना होगा

कश्मीर घाटी (Jammu-Kashmir) में अब सरकार को आत्मरक्षात्मक होने की जगह आक्रामक होने का अवसर आ गया है। सरकार को आगे बढ़कर आतंकियों, उनके आकाओं, हिमायतियों और हमदर्दों की कमर तोड़नी चाहिए। आग में घी डालने वाले और आतंकियों को शह देने वाले महबूबा मुफ़्ती (Mehbooba Mufti) जैसे नेताओं उनका सही स्थान दिखाने का यही समय है। ऐसे लोगों का सही स्थान भारत की संसद या जम्मू-कश्मीर की विधानसभा नहीं, बल्कि जेल है।

जम्मू-कश्मीर में सरकार एवं सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही आतंकवाद निरोधक कार्रवाइयों के बावजूद नए साल की शुरुआत अत्यंत दुखद और दर्दनाक रही। राजौरी जिले के ढाँगरी गाँव में हुई आतंकवादी घटना में दो मासूम बच्चों सहित 6 नागरिकों की निर्मम हत्या कर दी गयी। इस आतंकी हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं।

सर्वाधिक परेशान करने वाली बात यह है कि हत्या से पहले मृतकों के आधार कार्ड देखकर उनकी धार्मिक पहचान सुनिश्चित की गई थी। इससे स्पष्ट हो जाता है कि हत्याओं का आधार धर्म-विशेष के लोगों (अल्पसंख्यकों) के प्रति घृणा-भाव था। यह घटना कश्मीर में की जा रही लक्षित हत्याओं (टार्गेटेड किलिंग) का ही विस्तार लग रही है।

कश्मीर घाटी के बाद जम्मू संभाग में इस प्रकार की वारदात को अंजाम देना आतंकियों के बढ़ते दुस्साहस का प्रमाण है। इस घटना ने न सिर्फ हिन्दू और सिख समाज में दहशत पैदा कर दी है, बल्कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को भी खुली चुनौती दी है। 

जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ती आंतकी घटनाओं के विरोध में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने आगे आकर आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। हालाँकि, दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि महबूबा मुफ़्ती इस घटना को ‘भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति’ से जोड़कर आतंक और आतंकवादियों को क्लीन चिट दे रही हैं।

महबूबा मुफ्ती नज़रबंदी से बाहर आने के बाद से लगातार केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर हल्ला बोल रही हैं। आतंकियों और अलगाववादियों की सबसे बड़ी हिमायती और हमदर्द महबूबा स्थानीय समाज को भड़काने और विभाजित करने का कोई भी अवसर हाथ से नहीं जाने देती हैं। 

राजौरी की घटना का गंभीर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को आतंकियों से निपटने की अपनी रणनीति की समीक्षा करने की आवश्यकता है। उल-जलूल और भड़काऊ बयानबाजी करने वाले ऐसे लोगों को तत्काल प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। आतंकवादी संगठनों को बढ़ावा और सहयोग देने वाले नेताओं और कर्मचारियों की पहचान करते हुए उनका सफाया किया जाना चाहिए।

ये राष्ट्रद्रोही जिस थाली में खा रहे हैं, उसमें ही छेद कर रहे हैं। राष्ट्र को छलने वाले इन गद्दारों को छलनी करने का यही समय है। आतंकवाद को समूल नष्ट करने और कश्मीरी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आक्रामक आतंकवाद विरोधी अभियानों की आवश्यकता है। 

जम्मू-कश्मीर में ‘अल्पसंख्यकों’ (गैर-मुस्लिमों) की हत्या से जुड़ी यह कोई पहली घटना नहीं है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, आतंकवादियों ने पिछले साल कश्मीर में कम-से-कम 29 नागरिकों की हत्या की है। ये लोग गैर-स्थानीय मजदूर और गैर-मुस्लिम सरकारी कर्मचारी हैं। इसके साथ ही, घाटी में तैनात सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड हमले सहित लगभग 12 हमले किए गए।

पिछले महीने ही घाटी में आतंकवाद से जुड़ी तीन बड़ी घटनाएँ सामने आयीं थीं। घाटी में खतरे के खौफनाक बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि कुछ आतंकवादी समूह ‘हिटलिस्ट’ जारी कर रहे हैं। कुछ समय पहले ही खतरनाक आतंकी संगठन ‘लश्कर-ए-तोयबा’ की कुख्यात शाखा ‘द रेज़िस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने सरकारी कर्मचारियों और राष्ट्रवादी पत्रकारों के नाम वाली तीन ‘हिटलिस्ट’ जारी की है।

ये सरकारी कर्मचारी कश्मीरी विस्थापितों के लिए प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के तहत नियुक्त किए गए हैं। इन सूचियों ने आतंकवादियों के साथ कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत को प्रमाणित किया है। ये सूची जारी करने वाले आतंकियों और उन्हें जानकारी मुहैया कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को अभी तक नहीं पकड़ा जा सका है। इसी प्रकार अभी तक ढाँगरी के हत्यारों का भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।

इससे जम्मू-कश्मीर जैसे अत्यंत संवेदनशील स्थान पर कार्यरत ख़ुफ़िया एजेंसियों की लापरवाही और अक्षमता भी जाहिर होती है। ख़ुफ़िया तंत्र को तत्काल अधिक सघन, सजग, सक्रिय, सक्षम और साधन सम्पन्न बनाने की आवश्यकता है। इन हमलों और हत्याओं से अल्पसंख्यकों का भयभीत होना स्वाभाविक है। भयभीत लोगों का पलायन सुरक्षा बलों और सरकार के शान्ति और विकास के प्रयासों को निष्फल कर सकता है।

पिछले साल सीमा-पार से होने वाली घुसपैठ को कम करने और आतंकवादियों को मार गिराने में भारतीय सेना को उल्लेखनीय सफलता मिली है। इसके बावजूद एक-के-बाद-एक होने वाले इन क्रूर हमलों ने इस काम को और मुस्तैदी से करने की जरूरत रेखांकित की है।

सरकार ने हवाला फंडिंग की कमर तो तोड़ दी है, परन्तु नशीले पदार्थों की तस्करी से आतंकियों को संजीवनी मिलती दिख रही है। उस पर अंकुश लगाना आवश्यक है। आतंकियों के रहनुमा पाकिस्तान पर निरंतर दबाव बढ़ाते हुए प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसके आतंकी चेहरे को उजागर करने की भी आवश्यकता है।

जिस दुस्साहस के साथ इस नरसंहार को अंजाम दिया गया, वह कश्मीर के बाद अब जम्मू संभाग में साम्प्रदायिक नफरत और आतंक के फैलाव को दर्शाता है। अपराधियों द्वारा पहले खुली धमकी देना और फिर अल्पसंख्यकों को चिह्नित करके निशाना बनाना पाकिस्तान प्रायोजित साजिश का हिस्सा है। यह ‘रलिब, चलिब, गलिब’ को दोहराने की कोशिश है। साम्प्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देते हुए शांति, सौहार्द्र और सह-अस्तित्व के भारतीय विचार को कुचला जा रहा है।

राजौरी की घटना ने 90 के दशक जैसे हालात की वापसी और भयावह पलायन की आशंका पैदा कर दी है। अनुच्छेद 370 और 35A की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर के अल्पसंख्यक समुदायों ने तीन दशक के निर्वासन के दंश से उबरना शुरू किया था और घाटी में अपनी जड़ों को खोजना शुरू कर दिया था। वे अपने घर-द्वार और खेत-खलिहान की सुध लेने लगे थे। आतंकियों और उनके आकाओं को भला यह कैसे सुहाता? इन टारगेट किलिंग्स ने ‘घर वापसी’ की योजनाओं को पलीता लगाने का काम किया है।

आम लोग एक ऐसे सुरक्षित और संरक्षित वातावरण में रहने-बसने की आकांक्षा रखते हैं, जहाँ वे बिना किसी डर के स्वतंत्र रूप से अपने दैनंदिन कार्यकलापों को पूरा कर सकें। इसीलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का प्राथमिक कर्तव्य है। अगर विस्थापित कश्मीरियों को घाटी से पलायन के लिए विवश किया गया तो आतंकियों और उनके आकाओं के मंसूबे पूरे हो जाएँगे।

यह समय मैदान छोड़ने तथा आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे नरसंहारों के आगे घुटने टेकने का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनका मनोबल बढ़ाने का है। TRF जैसे आतंकवादी संगठनों की धमकियों का गंभीरता से संज्ञान लेने, उनके संचालकों की पहचान करने तथा उन्हें बेरहमी से कुचलने का समय आ गया है।

केंद्र सरकार को श्रीलंका से सबक सीखने की आवश्यकता है। ईंट का जवाब पत्थर से देकर ही श्रीलंका में लिट्टे का सफाया किया गया था। फिर भारत सरकार कब तक निर्दोष नागरिकों के नरसंहार की मूकदर्शक बने रहना चाहती है? क्या हमारे सुरक्षा बलों के पास शस्त्र, साहस और संकल्प नहीं है? सिर्फ इच्छाशक्ति के अभाव और छद्म मानवाधिकार संगठनों की परवाह के चलते ही आतंकी कश्मीर में निर्दोष नागरिकों का खून बहा रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) लोगों पर जुल्म-ओ-सितम ढाने वाला पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) आदि अन्याय वैश्विक मंचों पर जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन का रोना रोता रहता है। दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि एमनेस्टी इंटरनैशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, रेडक्रॉस, माइनॉरिटी राइट्स ग्रुप, ऑक्सफेम और एक्शन ऐड जैसे पश्चिमी जगत के तमाम मानवाधिकार संगठन POJK में पाकिस्तान की क्रूरता और चीन के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (COJK) में चीन की हरकतों को अनदेखा करते हैं>

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों- हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी आदि के साथ-साथ शिया और अहमदिया मुस्लिमों पर बेइंतिहा ज्यादतियाँ हो रही हैं। इसी प्रकार चीन के शिनजियांग प्रान्त में उइगर मुस्लिमों पर जारी अत्याचारों की सुध न तो ‘मुस्लिमों का सबसे बड़ा हमदर्द और हितैषी’ पाकिस्तान ले रहा है और न ही अन्याय मानवाधिकार संगठन आवाज़ उठा रहे हैं।

यहाँ तक कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNSC) भी पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में जारी दमन और उत्पीड़न का गंभीर संज्ञान नहीं ले रही है। यह चुनिन्दा चुप्पी मानवता को लज्जित करती है। अब भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को इन भाड़े के भोंपुओं से बेपरवाह होकर अपना काम करना चाहिए और अपने निर्दोष नागरिकों की रक्षा के लिए पूरी ताकत और संसाधन झोंक देने चाहिए।

घाटी में अल्पसंख्यकों की घरवापसी और विकास के लिए सुरक्षित आश्रयस्थलों का निर्माण किया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद से ग्रसित जिलों में सारी सुविधाओं से सम्पन्न बड़े-बड़े रिहायशी और व्यावसायिक परिसर बनाए जाए चाहिए। इन परिसरों में न सिर्फ कश्मीरी विस्थापितों को भूखंड आवंटित किए जाएँ, बल्कि सेना और अर्ध-सैनिक बलों के पूर्व कर्मियों को भी रियायती दर पर भूखंड आवंटित किए जाने चाहिए।

इन परिसरों में किसी भी भारतीय को रियायती दर पर भूखंड खरीदने का अधिकार दिया जाना चाहिए। इसी प्रकार कश्मीर में छोटे-बड़े उद्योग स्थापित करने वालों और अपना रोजगार शुरू करने वाले दुकानदारों, रेहड़ी-ठेले वालों आदि को रियायती ब्याज पर ऋण और सब्सिडी दी जानी चाहिए। उन्हें काम-धंधे/व्यवसाय के मुफ्त बीमे के अलावा जीवन बीमा की सुविधा भी दी जानी चाहिए।

इस साथ ही इन परिसरों में बसने वाले अल्पसंख्यक समुदाय (हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई, पारसी) लोगों को आसानी से लाइसेंस मुहैया कराते हुए सस्ते दामों पर शस्त्र उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इससे इन परिसरों में बसने वाले लोग अपनी सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वे अपनी सुरक्षा करने में स्वयं समर्थ होंगे।

पिछली सदी के आखिरी दशक में आतंकवाद अपने चरम पर था। उस वक्त भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जी के प्रयासों से प्रत्येक गाँव के स्थानीय नागरिक समाज को जोड़कर विलेज डिफेंस कमेटियों (VDC) का गठन किया गया था। एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में इन कमेटियों का पुनर्गठन करने की आवश्यकता है। इन्हें साधनों, संसाधनों और सुविधाओं से भी लैस किया जाना चाहिए।

ये कमेटियाँ आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम होंगी और स्थानीय समाज की विश्वास बहाली और सक्रिय भागीदारी का आधार भी बनेंगी। यह अकारण नहीं है कि ढाँगरी में आतंकियों द्वारा खेले गए खूनी खेल के बाद जोर-शोर से विलेज डिफेंस कमेटियों के गठन की माँग उठ रही है।

उल्लेखनीय है कि ऐसी ही VDC के सदस्य रहे कपड़ा दुकानदार बालकृष्ण उर्फ़ बाला ने अगर उस दिन अपनी राइफल न उठाई होती तो मृतकों की संख्या दर्जनों में हो सकती थी। दुर्भाग्यपूर्ण है कि महबूबा जैसे विषाक्त-बुद्धियों को VDC के गठन में भी साम्प्रदायिकता नज़र आ रही है।

जब तक सभी समुदायों का योगदान न हो, तब तक स्थिरता और शान्ति स्थापित नहीं हो सकती है। स्थानीय शांतिप्रिय मुसलमानों को भी विश्वास में लिया जाना चाहिए, क्योंकि उनका समर्थन और सहयोग उनके अल्पसंख्यक भाइयों-बहनों को खून के प्यासे आतंकवादियों से बचाने में मददगार होगा।

मादर-ए-वतन भारत के दुश्मनों के नापाक मंसूबों को नाकाम करने के लिए जम्मू-कश्मीर की बहुसंख्यक जनता, यानि कि मुसलमानों को भी अल्पसंख्यकों के साथ खड़े होना चाहिए और शान्ति एवं साम्प्रदायिक सद्भाव का झंडा बुलंद करते हुए विकास एवं बदलाव की नयी इबारत लिखनी चाहिए।

(लेखक जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय में छात्र कल्याण विभाग के अधिष्ठाता हैं।)

अब हिजाब में भी दिखेंगी एयर होस्टेस: ‘ब्रिटिश एयरवेज’ ने 20 सालों बाद बदला नियम, अब महिला कर्मचारी पहन सकेंगी हिजाब

एक समय ‘ब्रिटिश एयरवेज’ की पहचान थी कर्मचारियों के यूनिफॉर्म को लेकर उसके सख्त नियम-कानूनों के कारण लेकिन अब उसने इसमें बदलाव किया है। 20 साल बाद हुए बदलाव में ‘ब्रिटिश एयरवेज’ ने अपनी महिला कर्मचारियों को हिजाब पहनने की अनुमति दे दी है। इससे पहले ‘वर्जिन अटलांटिक एयरवेज लिमिटेड’ ने अपने पुरुष कर्मचारियों को स्कर्ट और महिला कर्मचारियों को पजामा पहनने की अनुमति देते हुए नया नियम बनाया था।

डिजाइनर ओजवाल्ड बोटंग ने महिला कर्मचारियों के लिए हिजाब और ट्यूनिक ड्रेस भी डिजाइन किया है। हालाँकि, पेज पर डिजाइन बनाने से लेकर फैसले लेने और इसे वास्तविकता में बदलने में करीब 5 साल लग गए। बीच में 2 साल कोरोना वायरस महामारी के कारन नियमों में बदलाव नहीं किया जा सका। पुरुष कर्मचारियों के लिए थ्री पीस सूट तैयार किया गया है। वहीं महिलाओं को ड्रेस, स्कर्ट या ट्राउजर पहनने की छूट होगी।

‘ब्रिटिश एयरवेज’ के 30,000 कर्मचारियों पर ये नियम लागू होगा। ट्राउजर्स के मामले में छूट दी गई है कि ये स्किनी भी हो सकता है और सामान्य भी। महिला केबिन क्रू को पहले से ही नए यूनिफॉर्म दिए ज रहे हैं। इससे पहले ‘वर्जिन अटलांटिक’ ने बिना किसी लैंगिक भेदभाव के यूनिफॉर्म तैयार करने का दावा किया था। हालाँकि, इंग्लिश टीम के साथ क़तर गए क्रू पर ये नियम लागू नहीं हुआ था। वहीं BA का कहना है कि वो पहले से ही ट्रांसजेंडर कर्मचरियों की भर्ती करता रहा है।

‘ब्रिटिश एयरवेज’ के अध्यक्ष सीन डॉयले ने कहा कि हमारी यूनिफॉर्म हमारे ब्रांड का प्रतिनिधित्व करती है और भविष्य में भी ‘आधुनिक ब्रिटेन’ के लिए ये जारी रहेगा। कर्मचारी अब अपनी पुरानी यूनिफॉर्म को रिसाइकल या डोनेट कर सकेंगे। इससे पहले महिलाओं को मस्कारा और कान में कुंडल पहनने की अनुमति दी गई थी। बता दें कि हिजाब और बुर्के को लेकर दुनिया भर में बहस छिड़ी हुई है। कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब और बुर्का की अनुमति को लेकर कई दिनों तक प्रदर्शन और हिंसा तक की गई।

‘ठंड से कोई मरे, तो BJP का नाम लगा देना’ : भारत जोड़ो यात्रा में नंगे होकर नाचे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता, लोग बोले- ‘सब PM कैंडिडेट हैं’

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अभी तक जहाँ इतनी कड़ाके की ठंड में अकेले ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में बिन स्वेटर के घूम रहे थे, वहीं अब उनके कार्यकर्ता भी इस राह पर आगे बढ़े हैं। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इतनी ठंड में बस पर चढ़कर और शर्टलेस होकर डांस करके दिखाया है।

इनकी वीडियो सोशल मीडिया पर एएनआई ने 8 जनवरी 2023 को शेयर की है। इसमें दिखाई पड़ रहा है कि बस की छत पर खड़े होकर कॉन्ग्रेस समर्थक नाच रहे हैं। उनकी कमर पर सिर्फ एक ट्राउजर है और सिर पर गुलाबी पगड़ी है।

बता दें कि इससे पहले राहुल गाँधी के बिन स्वेटर घूमने पर कॉन्ग्रेस ने और वामपंथी मीडिया ने उनकी तारीफें की थी। किसी ने उन्हें तपस्वी कहा था तो किसी ने सुपरमेन। हालाँकि अब उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भी उनसे दो कदम आगे जाकर ऐसा कारनामा कर रहे हैं।

लोगों ने यह वीडियो देख बोला है- किसी को ठंड नहीं लगती, ये सब के सब पीएम कैंडिडेट हैं।

श्रद्धा शाह ने लिखा- चलो कुछ नहीं हो रहा तो कम से कम ये लोग मनोरंजन तो कर ही रहे हैं।

एक यूजर ने कहा, “अब अगर ठंड से कोई मर जाए तो कह देना ये बीजेपी वालों की गलती है।”

इसी तरह एक ने कहा, “ये लोग सच में राजनीतिक पार्टी के पैरोडी हैं।”

यहाँ स्पष्ट कर दें कि अभी ये बात साफ नहीं है कि ये कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गाँधी का समर्थन देने के लिए नंंगे हुए या फिर इन्हें सच में राहुल गाँधी से आगे बढ़कर पीएम प्रत्याशी बनना है।

भारतीयों को सबसे घटिया बताने वाला पत्रकार पढ़ लो- विदेशी तो हवाई जहाज में महिला के सामने हस्तमैथुन भी किए हैं

एयर इंडिया की फ्लाइट में 70 वर्षीया महिला सहयात्री पर पेशाब करने वाले आरोपित शंकर मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि, जज अनामिका ने पुलिस रिमांड की माँग को खारिज करते हुए 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, अमेरिकी की वेल्स फार्गो नामक वित्तीय कंपनी ने मिश्रा को नौकरी से भी निकाल दिया है।

शंकर मिश्रा के इस हरकत की हर तरफ आलोचना हो रही है। शंकर मिश्रा ने जिस वक्त ऐसी हरकत की थी उस वक्त वह शराब के घोर नशे में था। एक सामान्य आदमी से ऐसी हरकत की उम्मीद भी नहीं की सकती। लेकिन शंकर मिश्रा के नशे को आधार बनाकर ‘द प्रिंट’ नामक मीडिया समूह के संस्थापक संपादक शेखर गुप्ता और वरिष्ठ पत्रकार वीर संघवी ने सारे भारतीयों को ही गाली दे दी।

यहाँ गाली देने से तात्पर्य मिश्रा के समानांतर अन्य भारतीय यात्रियों की तुलना करने से है, जो शराब के नशे में किसी पर पेशाब कर सकते हैं। अगर उन्हें भारतीय फ्लाइट पैसेंजरों की तुलना करनी ही थी तो उन्हें भारतीय शराबियों से करनी चाहिए थी, नशे में होशो-हवास खोकर बहस जाते हैं। हालाँकि, गुप्ता ने ऐसा नहीं किया और उन्होंने देश के सारे नागरिकों को लपेटे में ले लिया।

ऐसा पहली बार नहीं है कि गुप्ता इस तरह से अपनी कुंठा निकाल रहे हों। जब क्रिकेटर रवींद्र जडेजा ने तलवार लेकर सोशल मीडिया पर खुद को ‘राजपूत बॉय’ लिखा था, तब भी इन्होंने अपनी कुंठा पूरे क्षत्रिय जाति पर उतारी थी। पिछड़ा वर्ग से आने वाली एक पत्रकार से स्टोरी के नाम पर राजपूतों को खूब गाली दिलवाई कि उन्होंने आजतक किया क्या है। अब जिन लोगों ने इतिहास नहीं पढ़ा है या जो जान-बूझकर नहीं पढ़ना चाहते हैं, उन्हें कौन जाकर बताए। हो सकता है कि जो ऐसा सवाल पूछ रहे हों वे कुंठा से ग्रसित हों।

ऐसा ही करनामा उन्होंने क्रिकेटर सुरेश रैना को लेकर किया था, जब उन्होंने खुद को ब्राह्मण बताया था। खुद को ब्राह्मण बताना गुनाह नहीं है, लेकिन मीडिया ने वो हंगामा खड़ा किया, जैसे ऐसा बोलकर उन्होंने कोई बहुत बड़ी गलती कर दी हो। क्विंट भी इससे अलग नहीं रहा था।

शेखर गुप्ता एक व्यक्ति के आधार पर पूरे समाज और देश को लपेटने में उस्ताद रहे हैं। इस बार भी शंकर मिश्रा को आधार बनाकर उन्होंने भारतीय लोगों को निशाने पर लिया है। अपने ट्वीट में शेखर गुप्ता ने लिखा, “एयर इंडिया की घटना से पता चलता है कि भारतीय दुनिया के सबसे खराब यात्री हैं और क्या समय आ गया है कि अन्य यात्रियों या चालक दल के साथ दुर्व्यवहार करने वालों पर जुर्माना लगाया जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए…।”

शेखर गुप्ता ने अपने मीडिया हाउस ‘द प्रिंट’ के एक वीडियो को शेयर करते हुए यह बात लिखी है। वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार वीर संघवी भारतीय पैसेंजरों को लेकर सवाल उठा रहे हैं और उन्हें सबसे खराब यात्री बता रहे हैं। यानी ये बात संघवी कह रहे हैं और शेखर गुप्ता अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से उसे शेयर कर रहे हैं।

लेकिन, इस तरह की घटनाएँ सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से आती रहती हैं, लेकिन व्यक्तिगत आचरण के आधार पर वहाँ की मीडिया पूरे देश के लोगों को गलत नहीं ठहराती। पूरे देश के लोगों को गलत ठहराने की मानसिकता खुद एलिट और दूसरों को कैटल क्लास समझने वाली मानसिकता है।

अब हम कुछ ऐसी ही घटनाओं की यहाँ चर्चा करेंगे, जो हवाई यात्रा के दौरान घटित हुई थीं। महत्वपूर्ण बात ये है कि ये घटनाएँ भारतीय पैसेेंजरों द्वारा अंजाम नहीं दी गईं। इन घटनाओं का जिक्र करने का हमारा मकसद शंकर मिश्रा की हरकतों की गंभीरता को कम करना नहीं है, बल्कि ये बताना है कि मिश्रा की गलती एक पूरी जाति या समूचे भारतीयों की गलती नहीं कही जा सकती।

फ्लाइट में शौच कर सीट और पर्दों पर लगाया

बीते साल 7 अक्टूबर को ब्रिटेन के लंदन स्थित हीथ्रो हवाई अड्डे से नाइजीरिया के लागोस जा रही एक फ्लाइट में एक यात्री ने पैंट खोलकर फर्श पर शौच कर दिया। इतना ही नहीं, शौच करने के बाद वह उस पर बैठ गया और फिर मल को अगल-बगल के सीटों के साथ-साथ कालीन और पर्दों पर लगा दिया। इसके बाद वह उठा और फ्लाइट में इधर से उधर भागने लगा।

इसके कारण फ्लाइट में डीप क्लिनिंग की गई और पर्दे-सीटों के कवर और कालीन आदि बदलने पड़े। इस कारण फ्लाइट तीन घंटे से अधिक देर हो गई। बाद में ब्रिटिश एयरवेज के अधिकारियों ने यात्रियों से माफी माँगते हुए दूसरे विमान की व्यवस्था की और उन्हें गंतव्य तक रवाना किया।

महिला सहयात्री के सामने फ्लाइट में कई बार हस्तमैथुन

इसी तरह अप्रैल 2022 में फ्लाइट में यात्री महिला के सामने ही हस्तमैथुन करने लगा। यह फ्लाइट अमेरिका के सिएटल से फीनिक्स जा रही थी। तीन घंटे की इस उड़ान में पुरुष यात्री ने अपनी महिला सहयात्री सामने कम-से-कम चार बार हस्तमैथुन किया। बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। एंटोनियो मैक्ग्रिटी नाम के आरोपित ने पुलिस को बताया कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया था।

दरअसल, महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि उसके बगल में बैठा व्यक्ति अपनी पैंट खोलकर अपने निजी अंगों को बाहर निकालने से पहले उससे पूछा था कि अगर वह हस्तमैथुन करता है तो क्या उसे कोई दिक्कत है। तब महिला ने कहा कि उसे कोई दिक्कत नहीं है। इसके बाद वह व्यक्ति हस्तमैथुन करता रहा और जब वह सो गया तो महिला ने उसका फोटो खींचकर चालक दल को भेज दिया।

महिला द्वारा बार-बार अंडरगारमेंट उतारना

मार्च 2021 में एक फ्लाइट के दौरान 39 वर्षीय एक महिला बार-बार अपने अंडरगारमेंट उतार रही थी। इससे तंग आकर सहयात्रियों ने उसे सीट पर रस्सियों से बाँध दिया। रूस में व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) से नोवोसिबर्स्क (Novosibirsk) के लिए रवाना हुई इस फ्लाइट में महिला उड़ान के 15 मिनट के बाद अपने सीट से उठ गई और बिना किसी काम के इधर-उधर घूमने लगी। मेडिकल जाँच में पता चला था कि उसने ड्रग्स ले रखा था।

ये कुछ उदाहरण हैं। ऐसी तमाम घटनाएँ हैं, जो व्यक्तिगत व्यवहार को दिखाती हैं। इन घटनाओं के आरोपितों के लिए उस देश के सारे लोगों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। लेकिन, अपने यहाँ की मीडिया के कुछ स्वनामधन्य लोग भारत के आम लोगों को अपनी श्रेणी का नहीं समझते हैं, इसलिए जब ऐसी बातें आती हैं तो वे इसके लिए देश के लोगों पर भार डाल दूर को उनसे अलग दिखाने की कोशिश करते हैं। ये वर्ग राजनीति में ही नहीं, मीडिया में भी है।

‘अपने लोगों को मारना बंद करो’: हिजाब विरोधी प्रदर्शन में शामिल 2 और युवकों को ईरान ने सूली पर लटकाया, 11 को मिली है जेल की सजा

ईरान में दो प्रदर्शनकारियों को शनिवार (7 जनवरी 2023) को सूली पर चढ़ा दिया गया। दोनों युवकों पर आरोप था कि ये महसा अमिनी के साथ हुए अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और इस दौरान इनके कारण एक सुरक्षाकर्मी की जान चली गई। ऐसे मामलों में 3 अन्य लोगों को सजा-ए-मौत दी गई है जबकि 11 को जेल की सजा सुनाई गई है।

खबरों के मुताबिक, दोनों प्रदर्शनकारियों पर फैसला देते हुए न्यायपालिका ने कहा, “मोहम्मद मेहदी करमी और सैयद मोहम्मद हुसैनी, जिन दो लोगों के अपराधों के कारण रुहोल्लाह अजमियाँ शहीद हुए, उन्हें आज फाँसी पर लटका दिया गया है।”

इरोपीय यूनियन के शीर्ष राजनयिकों ने इस घटना की निंदा की। उन्होंने ईरान से कहा कि वो फौरन प्रदर्शनकारियों को सजा-ए-मौत देने पर रोक लगाएँ। ब्रिटिश के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवर्ली ने कहा कि ईरान को फौरन अपने लोगों को सजा-ए-मौत देने पर रोक लगानी चाहिए।

बता दें कि इससे पहले 12 दिसंबर 2022 को हिजाब विरोधी प्रदर्शन के दौरान 23 साल के एक युवक को फाँसी पर लटकाया गया था। युवक का नाम माजीदरेगा रेहनवर्द था। उसे शहर में सरेआम फाँसी दी गई थी। अंतिम वीडियो में रेहन ने कहा था कि उसकी मौत का मातम नहीं मनाया जाना चाहिए। उसकी मौत के बाद कोई कुरान न पढ़े। वीडियो को ईरानी ह्यूमन राइट एनजीओ के डायरेक्टर महमूद अमीरी ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया था। वीडियो में रेहनवर्द की आँखों पर पट्टी बँधी थी। दो नकाबपोश गार्डों ने उसे घेर रखा था।

उल्लेखनीय है कि ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन 16 सितंबर को 22 साल की एक लड़की महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुए थे। पुलिस ने महसा को हिजाब नहीं पहनने के लिए गिरफ्तार किया था। कस्टडी में उसकी जान चली गई थी। जब ईरान में इस घटना का विरोध शुरू हुआ तो लोगों में डर पैदा करने के लिए नौजवानों को सरेआम फाँसी दी जाने लगी। सबसे पहले मोहसिन शेखरी नाम के प्रदर्शनकारी को सूली पर चढ़ाया गया था। उन्हें रेहनवर्द से भी पहले 8 दिसंबर 2022 को फाँसी दी गई थी।

‘भगवा को राष्ट्रीय ध्वज बना देगी भाजपा, तिरंगा हटा देगी’: महबूबा मुफ्ती ने फिर रोया दुखड़ा, कहा- कश्मीर की पुरानी स्थिति लौटाओ

जब से जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में धारा 370 खत्म हुआ है, तब से वहाँ की मुख्यमंत्री रहीं महबूबा मुफ्ती (Ex CM Mehbooba Mufti) बदहवास हैं। वे कभी लोगों द्वारा बंदूक उठाने की धमकी देती हैं, कभी सरकार द्वारा डेमोग्राफी बदलने की कोशिश का डर दिखाती हैं। लोगों को इस बार उन्होंने देश का झंडा बदलकर भगवा करने का डर दिखाया है।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की चीफ महबूबा ने कहा कि भाजपा सरकार (BJP Government) ने जम्मू-कश्मीर का अपना झंडा छीना, संविधान छीना, 370 हटाकर विशेष दर्जा छीना और अब वह देश का जल्दी ही संविधान बदलने जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को बदलकर भगवा कर देगी।

भाजपा के साथ ही जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार चला चुकीं महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भाजपा ने देश के संविधान को बुलडोजर से कुचल कर रख दिया है। जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर केंद्रशासित प्रदेश पर भी उन्होंने अपना दुखड़ा रोया। महबूबा ने कहा कि लद्दाख जम्मू-कश्मीर का अभिन्न अंग है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की पुरानी स्थिति बहाल करने की माँग की।

इतना ही नहीं, महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर से सशस्त्र बलों और AFSPA की व्यवस्थित वापसी की भी माँग की। हालाँकि, राज्य में इस्लामी आतंकियों द्वारा किए जा रहे हमले और हिंदुओं के खिलाफ हो रही टारगेट कीलिंग का जिक्र नहीं किया और ना ही बताया कि सुरक्षा बलों के वापस लौटा लेने के बाद इन हिंदुओं की सुरक्षा कैसे होगी।

अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) के भारत के साथ गया था, नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) के भारत के साथ नहीं। PDP के संस्थापक अपने पिता को लेकर महबूबा ने कहा कि वे विशुद्ध भारतीय थे।

बेलगाम में श्रीराम सेना के जिलाध्यक्ष पर गोलियों से हमला, ड्राइवर घायल: पादरियों पर लगाया था धर्मांतरण का आरोप

कर्नाटक के बेलगाम में श्रीराम सेना के जिलाध्यक्ष रवि कोकिताकेरा पर गोली चलाने की घटना प्रकाश में आई है। मामला हिंदलगा गाँव के पास 7 जनवरी 2023 की देर रात का है। फायरिंग में अध्यक्ष के ड्राइवर के घायल होने की सूचना है।

अधिकारियों ने रविवार (8 जनवरी 2023) को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि श्रीराम सेना के जिलाध्यक्ष रवि कोकिताकेरा को किसी अज्ञात व्यक्ति ने गोली मारी। घटना में उनका ड्राइवर बुरी तरह घायल हो गया जबकि रवि बाल-बाल बचे।

पुलिस के अनुसार, दोनों को पास के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। दोनों खतरे से बाहर हैं। पुलिस अब उन अज्ञातों की तलाश में जुटी है जिन्होंने रवि पर फायरिंग की।

बताया जा रहा है कि रवि पर चलाई गई गोली उन्हें छूकर निकली, जो दूसरे व्यक्ति को लगी। वह भी इलाज के लिए अस्पताल में है। पुलिस की पूछताछ में अब तक सामने आया है कि जिलाध्यक्ष के साथ किसी की दुश्मनी नहीं थी। आगे पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञातों पर मुकदमा दर्ज किया है।

एक वीडियो सामने आया है जिसमें रवि बताते दिख रहे हैं कि उनपर हमला करने वाले बाइक पर आए थे और उसके बाद उन्होंने उनकी कार पर गोली चलाई। घटना में उनका ड्राइवर भी घायल हुआ है जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

बता दें कि रवि ने साल 2021 में बेलगाम में हो रहे हिंदू धर्मांतरण के लिए एक ईसाई पादरियों के समूह पर आरोप लगया था। उन्होंने कहा था कि बाहरी राज्य के पादरी आकर बेलगाम में हिंदुओं का धर्मांतरण कर रहे हैं।

दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति ने राष्ट्रगान के दौरान खड़े-खड़े पैंट में कर दिया पेशाब, वीडियो वायरल होने पर 6 पत्रकार गिरफ्तार

दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति द्वारा पैंट में पेशाब करने का वीडियो वायरल होने के बाद सुरक्षा बलों ने 6 पत्रकारों को हिरासत में लिया है। सुरक्षा बलों को संदेह है कि राष्ट्रगान के दौरान हुई इस घटना का फुटेज इन्हीं पत्रकारों ने वायरल किया है। पत्रकारों की हिरासत को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्था ने आपत्ति जताई है।

71 वर्षीय राष्ट्रपति सल्वा कीर का यह वीडियो क्लिप एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान फिल्माया गया है। दरअसल, वीडियो में सल्वा कीर राष्ट्रगान के लिए खड़ा दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान उनकी पैंट पर एक दाग फैल गया और यह दाग उनके पैरों तक फैल गया। कीर और उनके दल द्वारा नोटिस किए जाने के बाद कैमरा अचानक से दूर हो जाता है।

कीर की इस घटना का वीडियो वायरल हो गया। इसके बाद दक्षिण सूडान के नेशनल सिक्योरिटी सर्विसेज के अधिकारियों ने सरकारी चैनल दक्षिण सूडान ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (SSBC) के छह पत्रकारों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों को संदेह है कि फुटेज इन्हीं पत्रकारों ने जारी किया है।

पत्रकारों के हित के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने इन पत्रकारों को तुरंत रिहा करने की माँग की। संस्था के अधिकारियों को कहना है कि हिरासत में लेने का यह अफ्रीकी देशों वाला वही पैटर्न है, जब अधिकारियों को लगता है कि कवरेज उनके अनुसार नहीं है तो वे पत्रकारों को गिरफ्तार कर लेते हैं।

CJP ने बताया कि जिन पत्रकारों को हिरासत में लिया गया है, वे हैं- कंट्रोल रूम के निदेशक जोवाल टोम्बे, कैमरा ऑपरेटर और तकनीशियन विक्टर लाडो, कैमरा ऑपरेटर जोसेफ ओलिवर और जैकब बेंजामिन, कैमरा ऑपरेटर और तकनीशियन मुस्तफा उस्मान और कंट्रोल रूम तकनीशियन चेरबेक रूबेन हैं।

कीर का यह वीडियो पिछले महीने सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। वीडियो में राष्ट्रपति की हालत देखकर उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठने लगे थे और गरीबी एवं भुखमरी जूझ रहे दक्षिणी सूडान को चलाने की उनकी क्षमता पर सवाल उठने लगे थे। हालाँकि, अधिकारी उनके स्वास्थ्य को लेकर उठने वाले सवालों को हमेशा नकारते रहे हैं।

बता दें कि साल 2011 में स्वतंत्रता के बाद से कीर दक्षिण सूडान पर शासन कर रहे हैं। कीर के सत्ता सँभालने के बाद से देश में कभी चुनाव नहीं हुए हैं। हालाँकि, पहला चुनाव साल 2024 में निर्धारित किया गया है।

राजकोट में रात को भी चमका ‘सूर्य’: 45 गेंदों पर शतक जड़ के सूर्यकुमार यादव ने श्रीलंका को किया पस्त, बरसाए 9 छक्के

गुजरात के राजकोट में शनिवार (7 दिसंबर, 2022) को भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे तीसरे T20 अंतरराष्ट्रीय मैच में सूर्यकुमार यादव ने शानदार शतकीय पारी खेली। उन्होंने मात्र 45 गेंदों में अपना शतक पूरा कर दिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत की तरफ से चौथे नंबर पर उतर कर सूर्यकुमार यादव ने 51 गेंदों में 7 चौको और 9 छक्कों की मदद से 112 रनों की धुआँधार पारी खेली। ये उनका तीसरा अंतरराष्ट्रीय शतक है।

पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत की स्थिति ठीक नहीं थी और ईशान किशन मात्र 1 रन बना कर चलते बने। राहुल त्रिपाठी 16 गेंदों में 35 रन का तेज़ कैमियो खेल कर आउट हो गए। इसके बाद शुभमन गिल ने सूर्यकुमार यादव के साथ मिल कर पारी को आगे बढ़ाया और 111 रनों की साझेदारी की। अंत में कप्तान हार्दिक पंड्या और दीपक हुड्डा सस्ते में चलते बने, लेकिन अक्षर पटेल ने 9 गेंदों मर नाबाद 21 रन बना कर सूर्यकुमार यादव का बखूबी साथ दिया।

सूर्यकुमार यादव ने भी नाबाद पारी खेली। करुणारत्ने और मधुशंका, श्रीलंका के दोनों ही गेंदबाजों को 4 ओवर में 50 से अधिक रन पड़े। सूर्यकुमार यादव इससे पहले इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के खिलाफ T20 शतक जड़ चुके हैं। ये इस फॉर्मेट में भारत की तरफ से दूसरा सबसे तेज़ शतक है। रोहित शर्मा ने 2017 में श्रीलंका के खिलाफ ही 35 गेंदों में 100 रन पूरे किए थे। सूर्यकुमार यादव पहले ऐसे बल्लेबाज हैं, जो ओपनिंग न उतर कर भी T20 में 3 शतक बना चुके हैं।

श्रीलंका की शुरुआत तो तेज़ रही लेकिन 5वें, 6ठे और 7वें ओवर में एक-एक कर तीन विकेट गिर गए और टीम लड़खड़ा गई। 10वें ओवर में चौथा विकेट ढह गया। अक्षर पटेल ने भारत को पहली सफलता दिलाई। अंत में श्रीलंका की हार हुई। चूँकि भारत ने 228 रनों का पहाड़ सा स्कोर खड़ा किया था, श्रीलंका की हार की पटकथा इसके टॉप ऑर्डर के फेल होने के साथ ही लिखी जा चुकी थी, क्योंकि 12वें ओवर में आधी टीम पवेलियन में थी। सूर्यकुमार यादव ‘मैन ऑफ द मैच’ भी रहे।