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पहले पुजारियों पर उगला जहर, अब RSS को बता दिया 21वीं सदी का कौरव: राहुल गाँधी का नया झूठ- संघ वाले नहीं बोलते ‘हर हर महादेव’

कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी (Congress Leader Rahul Gandhi) द्वारा भारत को पुजारियों के बजाय तपस्वियों का देश बताने पर पुजारी समाज उन पर भड़का हुआ है। उधर, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राहुल के बयान को ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ बताया है।

इस बीच राहुल गाँधी ने सोमवार (9 जनवरी 2023) को एक बार फिर हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कहा कि RSS वाले हर-हर महादेव नहीं बोलते हैं, क्योंकि महादेव तपस्वी हैं और संघ वाले तपस्या भंग करने वाले लोग हैं। उन्होंने संघ को 21वीं सदी का कौरव और तपस्या भंग करने वाला बताया।

दरअसल, राहुल गाँधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा के तहत हरियाणा में पहुँचने पर कहा था कि कॉन्ग्रेस ‘तपस्या’ में विश्वास करती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ‘पूजा’ का संगठन है। उन्होंने आरोप लगाया था कि BJP-RSS लोगों को उनकी पूजा करने के लिए मजबूर करते है। उन्होंने कहा था कि भारत ‘तपस्वियों’ का देश है, न कि ‘पुजारियों’ का।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक बार फिर बोलते हुए राहुल गाँधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को कौरव बता दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत काल में कौरव हुए थे। वही कौरव इन दिनों RSS के रूप में मौजूद है। उन्होंने कहा कि पांडवों ने नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोली थी।

स्वामी दीपांकर ने कहा कि राहुल गाँधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा को अपनी ‘मोहब्बत की दुकान’ के रूप में वर्णित किया था, लेकिन अब ‘नफरत’ की बातें कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता को बोलने से पहले सोचना चाहिए। उन्होंने पूछा, “तो क्या पुजारियों को समुद्र में फेंक देना चाहिए?”

युवा तीर्थ पुरोहित महासभा के उज्ज्वल पंडित ने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने भारत की उन परंपराओं का अपमान किया है, जिसमें पुजारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता अपने शो के लिए सिर पर ‘जनेउ’ पहनते थे और तिलक लगाते थे। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की टिप्पणी ब्राह्मणों के खिलाफ है।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि राहुल गाँधी के बयान के कॉन्ग्रेस का हिंदू विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है और इसके लिए उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 70 वर्षों में हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने, मुस्लिम तुष्टीकरण करने और ईसाई मिशनरियों को बढ़ावा देने और अब हिंदू राष्ट्र के मद्देनजर अवसरवादी बनने के लिए कॉन्ग्रेस जिम्मेदार है।

‘कट्टर गुंडागर्दी है बॉलीवुड का बॉयकॉट करना’: ‘कांतारा’ में पुलिस ऑफिसर बने अभिनेता ने कहा – एक्टर्स के खिलाफ हो रही नफरत की राजनीति, एक हो फिल्म बिरादरी

कन्नड़ की सुपरहिट फिल्म कांतारा में वन अधिकारी मुरलीधर की भूमिका निभाने वाले एक्टर किशोर कुमार जी (Kishore Kumar G) ने ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ की तुलना गुंडागर्दी से की है। किशोर, हाल ही में, ट्विटर अकाउंट हैक होने और KGF-2 को ‘बेसिर पैर की फिल्म’ बताकर चर्चा में आए थे।

किशोर कुमार जी ने बॉयकॉट बॉलीवुड को लेकर इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में उन्होंने अखबार की एक कटिंग शेयर की है, जिसमें सुनील शेट्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से बॉयकॉट बॉलीवुड ट्रेंड से मुक्ति दिलाने की अपील की थी। इसके साथ ही, किशोर ने लिखा है कि अब समय आ गया है कि ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ के खिलाफ पूरा बॉलीवुड एकजुट हो।

उन्होंने लिखा है, “समय आ गया है कि पूरे देश की फिल्म बिरादरी बॉलीवुड फिल्मों के बहिष्कार, कट्टर गुंडागर्दी तथा एक्टर्स के खिलाफ नफरत की राजनीति की निंदा करके बॉलीवुड का समर्थन करे।”

किशोर ने यह भी कहा है कि यह सरकार की बड़ी चूक है कि वह बॉलीवुड जैसे बड़े उद्योग को शातिर हमलों से नहीं बचा पाई है। उन्होंने लिखा है, “यह सरकारों की विफलता है कि वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में किसी व्यवसाय या उद्योग की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते। फिर भी, फिल्म उद्योग के लोग बात नहीं कर रहे हैं, जहाँ डर का माहौल बनाया गया है।”

उन्होंने आगे लिखा है, “यह सब कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के लिए शर्म की बात है। साथ ही, यह स्पष्ट तौर पर कानून का उल्लंघन है जो समाज में जहर घोल रहा है। स्थानीय फिल्म उद्योग में भी आग फैलने से पहले इसे रोकने और दंडित करने की जरूरत है।”

बता दें कि कन्नड़ की सुपरहिट फिल्म कांतारा में वन अधिकारी मुरलीधर की भूमिका निभाने वाले किशोर कुमार जी ब्लॉकबस्टर फिल्म KGF-2 पर टिप्पणी कर चर्चा में आए थे। उन्होंने कहा था, “मुझे नहीं पता कि यह गलत है या सही, लेकिन मैंने KGF 2 नहीं देखी है। यह मेरे टाइप का सिनेमा नहीं है। यह पर्सनल चॉइस है। मैं इस फिल्म (केजीएफ 2) को देखने के बजाय कोई ऐसी छोटे बजट की फिल्म देखना पसंद करूँगा, जो भले ही हिट न हुई हो, लेकिन सीरियस मुद्दे पर हो। ऐसी फिल्म जो कहानी को दर्शाती हो न कि बेसिर पैर की कहानी हो।”

पंजाब में 2 अफगान सहित इंटरनेशनल ड्रग्स रैकेट के 16 गिरफ्तार, 60kg ड्रग्स और गोलियाँ बरामद: नाइट क्लब आदि में सिंडिकेट के लगे हैं पैसे, 30 संपत्तियाँ होंगी जब्त

राष्ट्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) ने सीमावर्ती राज्य पंजाब में अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी रैकेट के पूरे चेन का भंडाफोड़ किया है। इसमें दो अफगानी नागरिक सहित 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही 60 किलोग्राम ड्रग्स और कुछ गोला-बारूद बरामद किया गया है। इस रैकेट का संबंध दिल्ली के शाहीन बाग और यूपी के मुजफ्फरनगर से जुड़ा है।

यह इंटरनेशनल ड्रग कार्टेल पंजाब के लुधियाना से चलाया जा रहा था। यह सिंडिकेट अफगानिस्तान, पाकिस्तान आदि देशों और भारत के विभिन्न राज्यों में फैला हुआ है। रैकेट के लुधियाना समूह से जुड़े 60 से अधिक बैंक खातों को भी अब तक फ्रीज किया गया है।

NCB के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (उत्तरी क्षेत्र) ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि सिंडिकेट का भंडाफोड़ लगभग डेढ़ महीने की अवधि में किया गया था। उन्होंने कहा कि इसका संबंध दिल्ली के शाहीन बाग और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से है।

बता दें कि एजेंसी ने अप्रैल 2022 में वर्षों तक विवादों में रहे दिल्ली के शाहीन बाग से लगभग 50 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी। यहाँ भी भारत-अफगान ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया गया था। इसके साथ भी एजेंसी ने छह लोगों को गिरफ्तार भी किया था। वहीं, मुजफ्फरनगर में 35 किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई थी।

वहीं, पंजाब के लुधियाना सिंडिकेट मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने ऑपरेशन के दौरान लगभग 60 किलोग्राम हेरोइन और अन्य ड्रग्स बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने 31 गोलियाँ और एक मैगजीन भी बरामद की हैं। NCB की चंडीगढ़ यूनिट ने सिंडिकेट से पास से ड्रग्स बनाने के दो लैब का भी खुलासा किया है। 

DDG ज्ञानेश्वर सिंह ने आगे बताया कि हालिया मामले में जाँच नवंबर 2022 के मध्य में शुरू हुई थी। उस दौरान एनसीबी के चंडीगढ़ जोनल ब्यूरो ने लुधियाना में स्थित दो अवैध हेरोइन प्रसंस्करण लैब का भंडाफोड़ किया था। उस लैब को दो अफगान केमिस्ट द्वारा चलाया जा रहा था।

ज्ञानेश्वर सिंह के अनुसार, सिंडिकेट के सदस्यों द्वारा खरीदी गई 30 संपत्तियों की पहचान की गई है। इन्हें जब्त करने की कार्रवाई जल्दी शुरू की जाएगी। इनमें से कुछ आरोपितों द्वारा पंजाब में नाइट क्लब और रेस्तरां का कारोबार किया जा रहा है, जो जाँच के दायरे में है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा, सिंडिकेट के सदस्यों द्वारा शराब की दुकान, चावल मिल, घी व्यवसाय और प्रतिष्ठित ब्रांडों की विभिन्न एजेंसी जैसे फ्रंट बिजनेस चलाए जा रहे हैं। इस संबंध में इनके साझेदारी से भी बात की जा रही है।

यह सिंडिकेट सिर्फ ड्रग्स की तस्करी ही नहीं, बल्कि उसकी मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग, ट्रैफिकिंग आदि कामों में संलिप्त था। ड्रग्स को प्रोसेस करने के लिए इन लोगों ने लैब भी बना लिया था। ये लोग लंबे समय से इस धंधे से जुड़े हुए थे। ड्रग्स की कमाई का कई धंधों में इस्तेमाल कर मनी लॉन्ड्रिंग भी कर रहे थे।

एजेंसी ने संदीप सिंह उर्फ दीपू, हरसुखवीर सिंह उर्फ राजा, अक्षय कुमार छाबड़ा, अजय कुमार उर्फ गोरा ग्रोवर, जसपाल सिंह उर्फ गोल्डी, हितेश वर्मा, भुवनेश कपूर, संदीप सिंह उर्फ छाता, सुभाष गोयल, अमनदीप छनिया, गुरमेल सिंह उर्फ गैरी, रवलजीत उर्फ रवल वडाला, करीमुदुल्ला यूसुफ (केमिस्ट), मोहम्मद हकीम सलीमी (केमिस्ट), जैदी हैदर राजी और मोहम्मद इमरान शामिल हैं।

बता दें कि नवंबर 2022 में NCB ने बीते 15 नवंबर को इस इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया था। उस समय NCB ने लुधियाना से संदीप सिंह को 20.32 किलोग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद NCB ने इस रैकेट से जुड़े कई गिरफ्तारियाँ की। अब इस सिंडिकेट के पूरे चेन का खुलासा हुआ है।

ऑपइंडिया के हिंदी अकाउंट पर अजब सा ‘बैन’! कोड है टूटा या वोक कोई रूठा? देख लो इलौन भाई

जब एलन मस्क ने माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर को नहीं खरीदा था, तब भारत में कई दक्षिणपंथियों ने ये महसूस किया था कि उनके हैंडल को ‘शैडो बैन’ कर दिया जा रहा है। ‘शैडो बैन’, अर्थात फॉलोवर्स को उस हैंडल के ट्वीट्स न दिखना या बहुत कम दिखना। अब एलन मस्क ने ट्विटर को खरीद लिया है, जिसके बाद चीजें काफी बदली हैं। हालाँकि, अब ऑपइंडिया हिंदी का हैंडल ट्विटर के किसी ‘तकनीकी लोचे’ का शिकार बनता दिख रहा है।

या फिर कौन कहे कि ये अंदर ही अंदर किसी अधिकारी या अधिकारियों के समूह की साजिश हो, क्योंकि हालिया ‘ट्विटर फाइल्स’ में हमने देखा है कि कैसे डोनाल्ड ट्रम्प के ट्विटर हैंडल को बैन करने से लेकर जो बायडेन के बेटे हंटर के कारनामों को छिपाने तक, ट्विटर के अधिकारियों का एक समूह साजिशन ऐसी चीजों को अंजाम दे रहा था। विजय गड्डे (जिनकी अब छुट्टी हो गई है) जैसों का रवैया तो चर्चा में था ही। कश्मीर और पाकिस्तान पर भी ट्विटर के अधिकारियों का भारत विरोधी रवैया दिखा था।

अब आपको बताते हैं कि असल में हुआ क्या है। ट्विटर पर जब हम ‘OpIndia’ या ‘ऑपइंडिया’ लिख कर सर्च कर रहे हैं तो इसका आधिकारिक हैंडल दिख ही नहीं रहा है। क्या ये किसी प्रकार का बैन है? या फिर ‘तकनीकी खामी’? या फिर भारत विरोधी अधिकारियों द्वारा जानबूझ कर हमें परेशान करने के लिए की गई साजिश? OpIndia के अंग्रेजी हैंडल समेत कई मिलते-जुलते हैंडल सर्च में सजेशन में दिख रहे हैं, लेकिन हमारा हिंदी हैंडल नहीं। देख लीजिए:

‘OpIndia’ लिख कर सर्च किया, लेकिन हमारे हिंदी वाले हैंडल का कोई अता-पता नहीं

यहाँ तक कि हम अपने हैंडल का यूजरनेम, जो कि ‘OpIndia_In’ है, ये लिख कर सर्च कर रहे हैं फिर भी नीचे सजेशन में हमारा हिंदी हैंडल नहीं दिख रहा है। जब हमने हमारे एक यूआरएल को पेस्ट कर के सर्च किया, तब भी हमारा कोई लिंक नहीं मिला। जैसे, इस खबर को ले लीजिए – ‘अपने सारे मेडिकल बिल खुद भरते हैं PM मोदी: RTI से खुलासा – सरकारी खजाने से एक रुपया भी अपने स्वास्थ्य पर खर्च नहीं किया’।

हमारी खबर का यूआरएल डालने पर ट्विटर पर मिल ही नहीं रहा

हमने इस खबर को सोमवार (9 दिसंबर, 2022) को शाम 6:09 बजे शेयर किया था, लेकिन इसका यूआरएल सर्च करने पर हमें वो ट्वीट दिखा ही नहीं। अब इस खबर को लीजिए – ‘3000+ Km चले, पर बुद्धि वही बाइस पसेरी: ‘सर्दी से डरते हो’ से लेकर ‘देश पुजारियों का नहीं’, राहुल गाँधी का कहा भारत की ही समझ से परे’। ये हमें ट्विटर पर ट्वीट कर रखा है, लेकिन सर्च करने पर हमें दूसरे लोगों द्वारा शेयर की गई हमारी खबर तो मिल रही है, लेकिन हमारे आधिकारिक हैंडल से डाली गई ये खबर नहीं। देखिए:

दूसरों ने हमारी खबर शेयर की, वो मिल रहा लेकिन हमारे हैंडल से डाली गई ट्वीट नहीं

इसी तरह हमारी अन्य खबरों के साथ भी हो रहा है। एंड्राइड फोन में जहाँ कोई सर्च रिजल्ट नहीं दिख रहा है, आईफोन के ट्विटर एप से सर्च करने पर हमें एकाध लिंक्स मिल रहे हैं जो दूसरों ने शेयर किए हैं। ऐसे में ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क से अपील है कि वो इस तकनीकी लोचे/साजिश का संज्ञान लें और इसे देखें। हमारे हिंदी हैंडल पर 2.40 लाख फॉलोवर्स हैं। ऐसे में हमारे हैंडल का सर्च रिजल्ट्स में न आना लोगों के एक बड़े समूह की अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन भी है।

दिल्ली में पहले शराब घोटाला, फिर केस लड़ने के लिए सरकारी खजाने से वकीलों पर फूँक दिए ₹28 करोड़: आधा से ज़्यादा इस कॉन्ग्रेस नेता को मिला

दिल्ली का शराब घोटाला न केवल अरविंद केजरीवाल सरकार बल्कि दिल्ली के सरकारी खजाने के लिए भी भरा पड़ रहा है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार शराब घोटाले में पैरवी करने वाले वकीलों को 25 करोड़ रुपए से अधिक दे चुकी है। वहीं, बीते 18 महीनों में वकीलों की फीस के रूप में 28.10 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि शराब घोटाले की पैरवी करने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा कॉन्ग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी को 18.97 करोड़ रुपए दिए हैं। वहीं, जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन की पैरवी करते दिखाई देने वाले वकील राहुल मेहरा को 5.30 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंघवी को साल 2021-22 के दौरान, पहले तो 14.85 करोड़ रुपए दिए गए। लेकिन, बाद में 4.1 करोड़ रुपए दिए गए हैं। मेहरा का भुगतान, जो 2020-21 में बयान की व्यय सूची में 2.4 लाख रुपए के रूप में दिखाया गया था, 2021-22 में बढ़कर 3.9 करोड़ रुपए हो गया और वर्तमान में 1.3 करोड़ रुपए दर्ज किया गया।

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि शराब घोटाला सामने आने से पहले, दिल्ली में आप सरकार का कुल खर्च केवल 6.70 करोड़ रुपए था। इसमें, अधिकांश खर्च सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) और स्वास्थ्य विभाग के लिए खर्च किया जाता था।

दिल्ली का शराब घोटाला

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के अंतर्गत शराब कारोबार में गुटबाजी और एकाधिकार चल रहा था। यह भी आरोप लगाया गया है कि नई आबकारी नीति के तहत शर्तों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को भी शराब के लाइसेंस अवैध रूप से वितरित किए गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल की अनिवार्य स्वीकृति के बिना ही एक्साइज पॉलिसी में बदलाव किए थे। सिसोदिया ने शराब विक्रेताओं द्वारा लाइसेंस के लिए भुगतान की जाने वाली लाइसेंस फीस पर ₹144.36 करोड़ की छूट दी थी। उन्होंने यह छूट कोविड-19 महामारी के नाम पर दी थी। यही नहीं, सिसोदिया ने बीयर पर प्रति पेटी 50 रुपए के आयात पास शुल्क को भी हटा दिया था। साथ ही, विदेशी शराब की कीमतों में संशोधन करके शराब विक्रेताओं को अनुचित तरीके से लाभ दिया था।

सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, एल-1 लाइसेंस अवैध रूप से जारी किए गए थे। इसके लिए वकायदा रिश्वत ली गई थी। यह भी सामने आया है कि एक व्यापारी ने मनीष सिसोदिया के सहयोगी द्वारा संचालित कंपनी को 1 करोड़ रुपए का दिए थे। जाँच में यह भी सामने आया है कि L-1 लाइसेंस के लिए व्यापरियों से करोड़ों रुपए लिए जा रहे थे।

कपटपूर्ण धर्मांतरण को सुप्रीम कोर्ट ने माना गंभीर मामला, अटॉर्नी जनरल से माँगी राय: तमिलनाडु सरकार के विरोध पर लगाई फटकार, कहा- राजनीतिक रंग ना दें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 जनवरी। 2023) को जबरन और धोखे से धर्मांतरण के खिलाफ कदम उठाने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे गंभीर मुद्दा बताया। इसके साथ कोर्ट ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग ना देने की अपील करते हुए इस पर भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की सहायता माँगी है।

जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार की पीठ ने तंजावुर में एक छात्र की मौत की NIA जाँच की माँग के मामले में एक नई याचिका के खिलाफ तमिलनाडु सरकार के विरोध को भी खारिज कर दिया। तमिलनाडु सरकार के वकील पी विल्सन ने कहा कि नई याचिका निराधार है और अदालत को इस पर विचार नहीं करना चाहिए।

वरिष्ठ अधिवक्ता विल्सन ने कहा, “यह राजनीति से प्रेरित जनहित याचिका है। तमिलनाडु में इस तरह के धर्मांतरण का कोई सवाल ही नहीं है। विधायिका को इस तरह की चीजों का फैसला करने दें।” हालाँकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को गंभीर मानता है और उसने पहले ही इस मुद्दे की जाँच करने का फैसला कर लिया है।

न्यायमूर्ति शाह ने कहा, “हम पूरे देश, सभी राज्यों के लिए चिंतित हैं। यदि यह आपके राज्य में हो रहा है तो यह बुरा है। यदि नहीं हो रहा है तो अच्छा है। इसे एक राज्य को निशाना बनाने के रूप में न देखें। इसे राजनीतिक न बनाएँ।” पीठ ने कहा कि वह याचिका में कुछ अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाएगी नहीं।

पिछली बार की सुनवाई के दौरान कुछ अल्पसंख्यक धार्मिक निकायों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि याचिका में अल्पसंख्यक धर्मों के खिलाफ कुछ अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं। हालाँकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि कुछ भी हटाया नहीं जाएगा।

दरअसल, भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका में जबरन धर्मांतरण से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की माँग की गई है। इसमें कहा गया है कि देश भर में कपटपूर्ण धर्म परिवर्तन बड़े पैमाने पर हो रहा है और केंद्र सरकार इसके खतरे को नियंत्रित करने में विफल रही है।

उधर, केंद्र सरकार ने अपने हलफनामा में कहा है कि संविधान के तहत किसी भी धर्म को मानने और उसका प्रचार करने के मौलिक अधिकार में लोगों को धर्मांतरण करने का अधिकार शामिल नहीं है। आज की सुनवाई में कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से सहायता करने के लिए कहा है।

कोर्ट ने AG से कहा “हम भारत के अटॉर्नी जनरल के रूप में आपकी सहायता चाहते हैं। बल, प्रलोभन या किसी अन्य चीज द्वारा धर्म परिवर्तन आदि … ये आरोप हैं। हम इस बात पर विचार नहीं कर रहे हैं कि यह वास्तव में हुआ है या नहीं। यदि वास्तव में ऐसा हो रहा है, क्योंकि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार और धर्मांतरण के अधिकार के बीच अंतर है। इसके तरीके या लालच से अगर ऐसा कुछ हो रहा है तो कब क्या किया जाना चाहिए? सुधारात्मक उपाय क्या हैं?”

खंडपीठ को अटॉर्नी जनरल ने सहायता करने का आश्वासन दिया और कहा कि वे इस मामले के रिकॉर्ड की जाँच करने के बाद कोर्ट को सूचित करेंगे। इस मामले में अब अगली सुनवाई 7 फरवरी 2023 को होगी।

तुनिशा शर्मा की ज़िंदगी में शीज़ान खान के बाद आया था अली! अपने Tinder मैच के साथ डेट पर गई, मौत से पहले 15 मिनट उससे की बात – सुनवाई में खुलासा

कोर्ट में सुनवाई के दुराण खुलासा हुआ है कि अभिनेत्री तुनिशा शर्मा ने आत्महत्या से पहले अली नाम के शख्स से बात की थी, जिससे वो Tinder पर मिली थीं। असल में ‘अली बाबा: दास्तान-ए-काबुल’ के अपने सह-अभिनेता शीज़ान खान के साथ ब्रेअकप होने के बाद तुनिशा शर्मा ने डेटिंग के लिए टिंडर एप का सहारा लिया था और वहीं उन्हें अली नाम का व्यक्ति मिला था। अभिनेत्री की माँ को भी अली के साथ उनकी नजदीकी के बारे में पता था।

आत्महत्या से पहले तुनिशा शर्मा ने अली के साथ लगभग 15 मिनट तक फोन पर बातचीत की थी। शीज़ान खान के साथ ब्रेअकप के बाद टिंडर पर मिले अली के साथ वो डेट पर भी गई थीं। 21 दिसंबर, 2022 से लेकर 23 दिसंबर के बीच दोनों के बीच फोन कॉल पर बातचीत के सबूत मिले हैं। 23 दिसंबर को अभिनेत्री ने अपनी माँ से वीडियो कॉल पर बात की थी। लेकिन, खास बात ये है कि जिस फोन से उन्होंने कॉल किया वो अली का था।

मौत से पहले अली के साथ भी अभिनेत्री की वीडियो कॉल पर ही बात हुई थी। ये बातें शीज़ान खान के वकील ने कही हैं। उनका आरोप है कि तुनिशा शर्मा कुछ ऐसी दवाइयाँ ले रही थीं जिन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं खाना चाहिए। तुनिशा शर्मा के वकील का कहना है कि अगली सुनवाई में वो इन आरोपों का जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि अगर शीज़ान खान अभिनेत्री से टच में नहीं था, फिर उसे कैसे पता चला कि तुनिशा शर्मा किसी से बात कर रही हैं?

वहीं अब खबर आ रही है कि किसी अन्य अभिनेत्री को सोनी टीवी के शो ‘अली बाबा: दास्तान-ए-काबुल’ में ‘शहजादी मरियम’ के किरदार में लिया जा सकता है, जिसे तुनिशा शर्मा निभा रही थीं। पहले इसमें अवनीत कौर का नाम सामने आया था, हालाँकि अब पुष्टि हुई है कि ये महज एक अफवाह था। शीज़ान खान को भी सीरियल से रिप्लेस किया जा सकता है और उनकी जगह अभिषेक निगम को लिए जाने की चर्चाएँ हैं।

बुलाया सत्संग के नाम पर, थमा दिया क्रॉस: हरिद्वार में ईसाई बनने पर पैसे का लालच, पंजाब-तमिलनाडु के मिशनरियों पर दर्ज हुई FIR

देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार से ईसाई धर्मान्तरण के प्रयास का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए पैसों का भी लालच दिया जा रहा था। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने हंगामा किया। पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर के हिरासत में लिया है जिनसे पूछताछ की जा रही है। आरोपितों में एक महिला भी शामिल है। घटना रविवार (8 जनवरी 2023) की है।

यह मामला कनखल थानाक्षेत्र का है। मामले में शिकायतकर्ता का नाम सचिन सैनी है। पुलिस को दी गई शिकायत में सचिन ने बताया है कि शनिवार (7 जनवरी 2023) को वो कुछ व्यक्तिगत कार्य से रोशनाबाद स्थित समाज कल्याण ऑफिस गया था। यहाँ पर सचिन को दिनेश नाम का व्यक्ति मिला। दिनेश ने खुद को जगजीतपुर का रहने वाला बताया। शिकायत में बताया गया है कि दिनेश ने अपने घर पर एक सत्संग होने की जानकारी देते हुए अगले दिन उसमें सचिन को भी आने का न्यौता दिया।

शिकायत में सचिन ने लिखा है कि दिनेश ने अपने घर में होने वाले सत्संग से सभी दिक्क्तों के दूर होने की बात कही। दिनेश ने यह कथित सत्संग हर रविवार को होने की जानकारी दी। दिनेश की बात पर यकीन कर के सचिन अगले दिन रविवार को उसके घर गया। यह घर शिवडेल स्कूल के सामने वाली गली में था। यहाँ पर सचिन को पहले से 3 लोग मौजूद मिले जिसमें 2 पुरुष और 1 महिला थी। इन सभी ने अपना नाम जैबिस्टन, स्टैला व गिन्नी बताया।

सचिन के मुताबिक, कुछ देर बाद जैबिस्टन और स्टैला उसे अकेले में ले गए। यहाँ उसे 1-2 लाख रुपए का लालच दिया गया और ईसाई बन जाने के लिए कहा गया। इस दौरान स्टैला ने सचिन को 4-5 ईसाई क्रॉस दिए। इसे घर में सबके गले में लटकाने के लिए कहा गया। जब सचिन ने धर्म बदलने से इनकार कर दिया तो उसे वापस भेज दिया गया। इस दौरान शोर शराबा हुआ और मौके पर पुलिस पहुँच गई। शिकायत पत्र में सचिन ने सभी पर FIR दर्ज कर के कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरिद्वार पुलिस ने 1 महिला समेत 3 आरोपितों पर FIR दर्ज कर ली। आरोपितों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक हिरासत में लिए गए आरोपितों में एक पंजाब और दूसरा तमिलनाडु का रहने वाला है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने पुलिस से कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

UCC पर गुजरात-उत्तराखंड ने बनाई समिति, इसके खिलाफ दर्ज याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द: कहा – राज्यों के पास अधिकार, इसमें गलत क्या?

उत्तराखंड और गुजरात सरकार ने ‘समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code)’ लागू करने के लिए समिति का गठन किया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में जनहित याचिका दायर हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि राज्य सरकार को समिति बनाने का अधिकार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (9 जनवरी, 2023) को देश के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा है कि समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए समिति बनाने में गलत क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत राज्यों को समिति बनाने का अधिकार है। इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्‍पणी के साथ उत्तराखंड और गुजरात में समान नागरिक संहिता को लागू करने के हर पहलू पर विचार करने के लिए गठित की गई समिति के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।

उत्तराखंड सरकार ने मई 2022 में बनाई थी समिति

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने चुनावी वादे के अनुसार, राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए मई 2022 में समिति बनाई थी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना देसाई को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। समिति में कुल 5 सदस्य हैं।

यह समिति राज्य में जगह-जगह जाकर सभी धर्मों, वर्गों और जातियों के प्रतिष्ठित लोगों से संपर्क और उनसे संवाद के आधार पर ड्राफ्ट तैयार करेगी। इसके लिए सरकार ने सदस्य सचिव की नियुक्ति भी कर दी है। इससे समय-समय पर कमिटी की बैठकें आयोजित की जा सकेंगी और प्रोग्रेस एवं प्रोसेस पर चर्चा हो सकेगी।

गुजरात सरकार ने भी बनाई है समिति …

उत्तराखंड सरकार की तरह पर गुजरात सरकार ने भी समान नागरिक संहिता की ओर कदम बढ़ाते हुए अक्टूबर 2022 में समिति बनाने का ऐलान किया था। इस कमेटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर जज करेंगे। हालाँकि फिलहाल, इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कमेटी बनाने का ऐलान कर चुके हैं।

क्या है समान नागरिक संहिता और क्यों मुस्लिम करते हैं विरोध

‘समान नागरिक संहिता’ को सरल अर्थों में समझा जाए तो यह एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, उसके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सब पर लागू किया, लेकिन शादी, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति आदि से जुड़े मसलों को सभी धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

इन्हीं सिविल कानूनों को में से हिंदुओं वाले पर्सनल कानूनों को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने खत्म किया और मुस्लिमों को इससे अलग रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। वहीं, मुस्लिमों के लिए उनके पर्सनल लॉ को बना रखा, जिसको लेकर विवाद जारी है।

इसकी वजह से न्यायालयों में मुस्लिम आरोपितों या अभियोजकों के मामले में कुरान और इस्लामिक रीति-रिवाजों का हवाला सुनवाई के दौरान देना पड़ता है।

इन्हीं कानूनों को सभी धर्मों के लिए एक समान बनाने की जब माँग होती है तो मुस्लिम इसका विरोध करते हैं। मुस्लिमों का कहना है कि उनका कानून कुरान और हदीसों पर आधारित है, इसलिए वे इसकी को मानेंगे और उसमें किसी तरह के बदलाव का विरोध करेंगे। इन कानूनों में मुस्लिमों द्वारा चार शादियाँ करने की छूट सबसे बड़ा विवाद की वजह है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी समान नागरिक संहिता का खुलकर विरोध करता रहा है।

अपने सारे मेडिकल बिल खुद भरते हैं PM मोदी: RTI से खुलासा – सरकारी खजाने से एक रुपया भी अपने स्वास्थ्य पर खर्च नहीं किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) दुनिया के सबसे प्रसिद्ध नेताओं में शुमार हैं। उनकी बातों और कार्यों को लाखों लोग फॉलो करते हैं। देश को कोरोनाकाल याद होगा, जब उन्होंने शाम के वक्त दीप जलाने का आह्वान किया था और हर भारतीय उनकी अपील को कार्यान्वित किया था।

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। वे अपनी स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च खुद उठाते हैं। उन पर हवाले वाले मेडिकल बिल का भुगतान सरकारी खजाने से नहीं किया जाता है। प्रधानमंत्री के रूप में यह देश के लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल है।

यह सब एक RTI में खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र के पुणे के निवासी प्रफुल्ल सारदा ने RTI के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से पूछा कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके मेडिकल पर कितना खर्च हुआ है।

RTI के जवाब से खुलासा हुआ कि पीएम के स्वास्थ्य की देखभाल पर एक रुपए का भी खर्च नहीं हुआ है। RTI के जवाब में PMO ने कहा कि उसके द्वारा प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य पर खर्च को लेकर मेटेन किए जाने वाले डिटेल के अनुसार कोई खर्च नहीं हुआ है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव बिनोद बिहारी सिंह ने RTI का जवाब देते हुए कहा कि सरकारी बजट का एक रुपया भी पीएम के व्यक्तिगत चिकित्सा उपचार के भुगतान में उपयोग नहीं किया जाता है। पीएमओ ने साफ कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वास्थ्य पर देश और विदेश में 2014 से अब तक कोई व्यय नहीं किया गया है”।

कार्यकर्ता प्रफुल्ल ने कहा, “पीएम मोदी जी ने फिट इंडिया अभियान के माध्यम से न केवल एक मजबूत संदेश दिया, बल्कि वे खुद एक उदाहरण पेश कर 135 करोड़ भारतीयों को फिट रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल PMO के किसी भी निजी काम के लिए नहीं किया जा रहा है। इससे शासन में हमारा विश्वास बढ़ा है। सांसदों और विधायकों को भी अपने निजी चिकित्सा खर्च को वहन करके उसी रास्ते का पालन करना चाहिए।”