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‘समाधान यात्रा’ से पहले PK का नीतीश-तेजस्वी पर वार: कहा- बताएँ कौन देता है फंड, मैंने मुँह खोला तो धोती-पायजामा नहीं बचेगा

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) आजकल ‘जनसुराज यात्रा’ पर हैं। यात्रा के दौरान कई मौकों पर उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish kumar) और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पर निशाना साधा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर उनका मुँह खुल गया तो किसी का धोती-पायजामा भी नहीं बचेगा। वह यात्रा की फंडिंग पर उठ रहे सवालों का जवाब दे रहे थे।

प्रशांत किशोर ने पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता जनता को लूट कर अपना काम चला रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि वह गरीबों का पैसा लूटकर अपनी बर्थडे पार्टी चार्टर प्लेन में मना रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने कहा, “मैंने तो इन पार्टियों के लिए काम भी किया है। अगर मेरा मुँह खुल गया तो किसी का धोती-पायजामा भी नहीं बचेगा।” उन्होंने कहा कि मीडिया इन लोगों से क्यों नहीं पूछती है कि आखिर ये लोग इतना पैसा लाते कहाँ से हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश और तेजस्वी को बताना चाहिए कि किन लोगों से पैसा लेकर वे बिहार में इतनी बड़ी पार्टी चला रहे हैं।

वहीं जब उनसे पूछा गया कि उनकी ‘जनसुराज यात्रा’ के लिए पैसा कहाँ से आ रहा है तो उन्होंने कहा, “पैसा वहाँ से आ रहा है, जिन राज्यों में सरकार बनाने में मैंने मदद की थी। ऐसे 6 राज्य हैं। अब वो मेरी मदद कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि हर काम के लिए वे पैसों के लेन-देन को चेक के माध्यम से करते हैं।

उधर, नीतीश कुमार भी गुरुवार (5 जनवरी 2023) से ‘समाधान यात्रा’ निकाल रहे हैं, जो 7 फरवरी 2023 तक चलेगी। यात्रा के दौरान बिहार के 18 जिलों को कवर किया जाएगा। इसकी शुरुआत पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर के दरुआबारी गाँव से होगी। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री विकास कार्यों का जायजा लेंगे और ग्रामीणों से मिलेंगे।

प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की इस यात्रा को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि जिस यात्रा को वह करने जा रहे हैं, पेपरों पर तो यह उनकी 14वीं यात्रा है, लेकिन वास्तव में यह केवल एक प्रशासनिक यात्रा है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का जनता से कुछ लेना-देना नहीं है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार यात्रा के दौरान उन अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, जिनसे वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बात करते हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को पता है कि यह उनका अंतिम कार्यकाल है। अब उनके लिए कुछ नहीं बचा है। अब वे समय रहते रिटायर हो जाएँ, इसी में उनकी भलाई है।

हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, उत्तराखंड सरकार और रेलवे को नोटिस: कहा- 7 दिन में 50 हजार लोगों को नहीं हटा सकते

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर बसे लोगों को सात दिन के अंदर हटाने के हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इस मामले को मानवीय नजरिए से देखना चाहिए। इसके साथ ही उच्च न्यायालय के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और भारतीय रेलवे को नोटिस जारी की है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की जमीनों पर रह रहे लगभग 50 हजार लोग खुश हैं। पिछले कई दिनों से वे सड़कों पर उतर कर उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इस मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी 2023 को होगी।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रेलवे की याचिका पर सुनवाई करते हुए यहाँ बसे लोगों को अतिक्रमण बताया था और रेलवे को इस जमीन को सात दिन में खाली कराने के लिए कहा था। इसके बाद रेलवे इन इलाकों से अतिक्रमण हटाने के लिए तैयारी करने लगी थी। इसके बाद स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश सुप्रीम कोर्ट चले गए।

क्या है मामला

27 दिसम्बर 2022 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे। इसके लिए न्यायालय ने प्रशासन को सप्ताह भर की समय सीमा दी थी। इसी आदेश में कोर्ट ने प्रशासन से बनभूलपुरा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लाइसेंसी हथियार भी जमा करवाने को कहा था।

दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट भी रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण को लेकर चिंता जताते हुए इसे जल्द से जल्द खाली करवाने का आदेश दे चुका है। बता दें कि रेलवे की ओर से 2.2 किलोमीटर लंबी पट्टी पर बने मकानों और अन्य ढाँचों के कुल 4,365 अतिक्रमण हटाए जाने हैं। जहाँ अतिक्रमण हटाया जाना है, वहाँ 20 मस्जिदें हैं।

अपनी कार्रवाई के पीछे रेलवे ने तर्क दिया है कि अवैध कब्ज़े से न सिर्फ विकास में दिक्कत आ रही बल्कि विस्तार भी प्रभावित हो रहा है। रेलवे का यह भी कहना है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले अतिक्रमण करने वालों को कई नोटिस भेजी गई थी, लेकिन उस पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही किसी ने खुद से अतिक्रमण हटाया।

साल 2013 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में हल्द्वानी में बहने वाली रही गोला नदी में अवैध खनन को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। गोला नदी हल्द्वानी रेलवे स्टेशन और पटरी के बगल से बहती है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बसे गफूर बस्ती के लोग गोला नदी में अवैध खनन करते हैं, जिसके कारण रेल की पटरियों और गोला पुल को खतरा उत्पन्न हो गया है।

1975 से हो रहा अतिक्रमण

कहा जा रहा है कि हल्द्वानी में रेलवे की जमीनों पर अवैध कब्ज़े की शुरुआत साल 1975 से हुई थी। पहले कच्ची झुग्गियाँ बनाई गईं, जो बाद में पक्के निर्माण में तब्दील हो गए। बाद में इसी अवैध कब्ज़े में न सिर्फ इबादतगाहें बल्कि अस्पताल तक बना डाले गए। आरोप है कि यह सब देखने के बाद भी तत्कालीन रेलवे सुरक्षा बल खामोश रहा।

साल 2016 में हाईकोर्ट की कड़ाई के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अवैध कब्जेदारों के खिलाफ पहला केस दर्ज करवाया, लेकिन तब तक लगभग 50 हजार लोग अवैध तौर पर वहाँ रहना शुरू कर चुके थे। हाईकोर्ट के इस आदेश के चलते कब्जेदारों ने लम्बी मुकदमेबाजी की। हालाँकि, वो अपने कब्ज़े का कोई ठोस प्रमाण नहीं पेश कर पाए।

बताया जा रहा है कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ डेढ़ दशक पहले भी बड़ा अभियान चलाया गया था। तब भारी फ़ोर्स के साथ सिर्फ कुछ हिस्सों को खाली करवा पाया गया था। इस दौरान कब्जेदारों के घरों के नीचे रेलवे लाइनें तक निकली थीं। कुछ समय की शांति के बाद खाली करवाए गए स्थान पर फिर से अवैध कब्ज़ा हो गया।

कहा जाता है कि यहाँ पर अवैध रूप से बसाने की शुरुआत दिवंगत कॉन्ग्रेस नेत्री इंदिरा हृदयेश ने की थी। इसी राह पर अब उनके बेटे सुमित हृदयेश भी हैं। यहाँ ये जानना जरूरी है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ और कब्जेदारों के समर्थन में कैंडल मार्च निकाला है।

‘हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करती हो, नहीं देंगे कास्ट सर्टिफिकेट’: महाराष्ट्र के नांदेड़ में MBBS लड़की के साथ भेदभाव, लोग भड़के

महाराष्ट्र के नांदेड़ में महादेव कोली जनजाति की छात्रा को इसलिए जाति प्रमाण-पत्र नहीं दिया गया क्योंकि महिला और उसका परिवार हिंदू देवी-देवताओं की उपासना करता है। TV9 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक मयूरी कोली नाम की छात्रा को जाति प्रमाण-पत्र से वंचित किए जाने के बाद समाज का गुस्सा फूट पड़ा। समाज के लोगों ने सड़क पर उतर कर फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।

मामला नांदेड़ जिले के हडगाँव के खारतवाड़ी गाँव का है। गाँव की युवती मयूरी पुंजरवाड ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। मयूरी अब एमडी की पढ़ाई करना चाहती है। एमडी में दाखिले के सिलसिले में छात्रा अपना जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए जाति वैधता समिति (Caste Validity Committee) से निवेदन करती है। समिति के लोग यह कहते हुए उसे प्रमाण-पत्र देने से इनकार कर देते हैं कि वह देवी-देवताओं की पूजा करती है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि छात्रा मयूरी के पिता के पास कोली जनजाति का प्रमाण-पत्र है। वही प्रमाण पत्र अब उनकी बेटी को नहीं दिया जा रहा है।

मयूरी के पिता का कहना है कि समिति के कुछ लोगों ने उनके घर पर भगवान शिव और दूसरे देवी-देवताओं की मूर्तियाँ देखी। समिति के लोगों का कहना है कि मयूरी हिंदू-देवी देवताओं की पूजा करती है इसलिए वह महादेव कोली जनजाति से अलग है और उसे प्रमाण-पत्र नहीं दिया जा सकता।

जाति प्रमाण-पत्र न मिलने से आहत छात्रा का कहना है कि यदि हिंदू देवी देवताओं की पूजा करने से मुझे शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा तो वह देवी-देवताओं की पूजा नहीं करेगी। कास्ट सर्टिफिकेट न दिए जाने से नाराज महादेव कोली समाज के लोगों का भी कहना है कि यदि देवी-देवताओं की पूजा करने के लिए उन्हें जाति प्रमाण -पत्र से वंचित किया जाएगा तो वे कलेक्टर ऑफिस तक मार्च निकालेंगे और अपने घर में विराजमान देवी-देवताओं की तस्वीरें व मूर्तियों को अधिकारियों को सौंप देंगे।

मुस्लिम भीड़, आरफा बहन और मजहब, उर्दू नहीं… हिंदी में बोलो: हल्द्वानी में जमीन कब्जाए लोगों को पत्रकार ने दी ट्रेनिंग, बोला TheWire पर आएगा

हल्द्वानी में सरकारी जमीन कब्जा करके मुफ्त में रह रहे लोगों के लिए वामपंथी मीडिया लामबंदी में जुट गया है। एक जगह भीड़ को जमा करके उसके रोने-धोने वाले वीडियो बार-बार चलाए जा रहे। मानवता की दुहाई देकर सरकार से ही मुफ्त में और सुविधाएँ देने की अपील जारी है। भीड़ कहाँ से आ रही, कौन क्या बोल रहा, किससे क्या पूछा जा रहा – इन सबकी जाँच-पड़ताल के लिए ऑपइंडिया पहुँची ग्राउंड पर।

हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके की जिन गलियों के वीडियो वायरल किए गए, वहाँ पहुँचने पर हमें विरोध-प्रदर्शन वाली भीड़ गायब दिखी। सामान्य चहल-पहल थी। बहुत आश्चर्य हुआ। गलियों में समय बिताने पर असल बात का पता चल गया। अपने टाइप (वामपंथी) की मीडिया आने पर 100-50 की भीड़ जमा हो जाती, इनके अलावा अन्य मीडिया के सामने यहाँ के लोग कुछ भी नहीं बोलते, न ही भीड़ लगाते।

इन्हीं गलियों में घूमते हुए 8-10 लोगों की भीड़ एक जगह मुझे दिख गई। उत्सुकता हुई तो मैं भी शामिल हो गया उस भीड़ में। मोबाइल कैमरा लेकिन चालू कर लिया था। यहाँ एक आदमी था, जो लोगों को कुछ समझा रहा था। ठंड से बचने के लिए भूरे रंग की टोपी पहना यह शख्स लोगों से आरफा (खानम शेरवानी) का नाम लेकर कुछ कह रहा था। आरफा के मजहब से इस भीड़ (जमा हुए लोग में कुछ दाढ़ी रखे हुए, कुछ इस्लामी टोपी लगाए हुए थे) के मजहब को जोड़ रहा था। ‘आरफा कितना अच्छा बोलती हैं’ – यह कह कर लोगों से बोलने की अपील भी कर रहा।

इसके बाद भीड़ की नजरों में मेरा मोबाइल कैमरा चढ़ गया। मैंने उसे बंद करने में ही अपनी गनीमत समझी। चालाकी सिर्फ यह दिखाई कि ऑडियो रिकॉर्डिंग चालू कर दी। वीडियो से ज्यादा मजेदार बातें ऑडियो में रिकॉर्ड हुईं। भीड़ को क्या बोलना है, कैसे बोलना है, किस भाषा में बोलना है – सब कुछ यह कथित पत्रकार बता रहा था। इसी ऑडियो रिकॉर्डिंग में यह भी पता चला कि कथित पत्रकार TheWire पर भी इस खबर को चलवाएगा, यह भी बोल गया। सुनिए इस पत्रकार को, इसकी ट्रेनिंग देने वाली शैली को… जो यह हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके में अवैध रूप से सरकारी जमीन को कब्जाए लोगों को दे रहा है।

“आपको लास्ट में कंक्लुजन में कहना है सुप्रीम कोर्ट से… क्योंकि टैगलाइन इसी पर होगी। मुँह में बात डाल रहा हूँ, बार-बार कह रहा हूँ… बोलो कि मैं सुप्रीम कोर्ट से कहना चाहता हूँ, हम भी भारत के नागरिक हैं, कृपया हम पर जो गुनाह हो रहा है… नहीं उर्दू शब्द नहीं बोलो, हिंदी वर्ड यूज करो… हम पर जो अन्याय हो रहा है, उस पर आप संज्ञान लें। भैया आप लोग कैमरे के सामने आओ।”

इतना समझाने के बाद भी भीड़ को आप अंत में सुन सकते हैं कि वो गड़बड़ कर देता है। लेकिन कथित पत्रकार के धैर्य को सलाम! वो भीड़ को फिर से समझाता है। जब अच्छे से घुट्टी पिला देता है, तब जाके फाइनल रिकॉर्डिंग होती है। अब सुनिए पूरी तरह से ट्रेनिंग पा चुकी भीड़ की पुकार – इसमें महिला, बच्चे, गर्भवती महिला, मानवता – सब शब्द घुसाए गए हैं। इसी में कथित पत्रकार भीड़ को शाबासी भी देता है, TheWire पर इसे पब्लिश करवाने का वादा भी करता है।

हल्द्वानी में वामपंथी मीडिया भीड़ के मुँह में बात डाल रहा है, चौंकिए मत लेकिन। यह इनका पुराना हथियार है, इसी से ये नैरेटिव बनाते आए हैं, बनाते रहेंगे। हमने पहले भी इनको बेनकाब किया है, आगे भी करते रहेंगे।

नहीं दिखेगी दीपिका पादुकोण की साइड, बेशरम रंग की ‘भगवा बिकनी’ पर सीन क्लियर नहीं: पठान को लगे 10 कट, भारत माता से ‘श्रीमती’ भी हटा

बॉलीवुड की फिल्म पठान के बेशरम रंग गाने के क्लोज अप बोल्ड शॉट्स, साइड पोज़ और कई डांस स्टेप्स को सेंसर कर दिया गया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने पठान फिल्म के साथ-साथ विवादित बेशरम रंग गाने में कई बदलावों का सुझाव दिया था। इसके अलावा कई डायलॉग और अन्य दृश्यों में भी बदलाव की बात कही गई थी। अभी भी फिल्म का विरोध जारी है। अहमदाबाद में बजरंगदल कार्यकर्ताओं ने एक मॉल में फिल्म के पोस्टर फाड़ डाले।

सीबीएफसी ने फिल्म में लगाए 10 कट

सेंसर बोर्ड ने दीपिका पादुकोण और शाहरुख खान पर फिल्माए बेशरम रंग गाने में ऐसे क्लोज-अप सीन हटाने को कहा है, जिनमें नग्नता प्रदर्शित हो रही है। बोर्ड ने गोल्ड स्विमसूट वाले शॉट को भी सेंसर किया है। गाने में आई “बहुत ही तंग किया” लाइन पर दीपिका के स्टेप पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई और इन स्टेप्स को सीमित करने के लिए कहा है। सेंसर ने डांस में कूल्हे के क्लोज-अप हटाने की भी बात कही गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार गाने के अलावा बोर्ड ने फिल्म के कुछ संवादों को भी बदलने की बात कही है। फिल्म में रॉ शब्द के स्थान पर ‘हमारे’, लंगड़े लुल्ले की जगह ‘टूटे फूटे’, पीएम की जगह ‘राष्ट्रपति या मंत्री’ और ‘पीएमओ’ शब्द हटा दिया गया है। इसके अलावा अशोक चक्र को ‘वीर पुरस्कार’, पूर्व-केजीबी को ‘पूर्व-एसबीयू’ और श्रीमती भारत माता को ‘हमारी भारत माता’ शब्दों से बदला गया है। इतने बदलाव के बाद इस फिल्म को यू/ए (U/A) सर्टिफिकेट दिया गया है। 2 घंटे 26 मिनट लंबी इस फिल्म का ट्रेलर 10 जनवरी तक आ सकता है वहीं फिल्म को 25 जनवरी 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज किए जाने की तैयारी है।

अहमदाबाद में फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

आपको बता दें कि बेशरम रंग गाने में दीपिका के बोल्ड सीन और ड्रेस को लेकर काफी विवाद हुआ था। कई जगहों पर फिल्म रिलीज न होने देने तक की भी धमकी दी जा रही है। इसे लेकर अब भी विरोध जारी है। अहमदाबाद में बुधवार (04 जनवरी 2023) को शाहरुख खान की फिल्म पठान के प्रमोशन के दौरान जमकर हंगामा हुआ।

कर्णावती इलाके में स्थित अल्फावन मॉल में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने फिल्म पठान के पोस्टर फाड़ डाले। उन्होंने फिल्म को रिलीज नहीं करने की धमकी भी दी। हंगामे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने मॉल में विरोध प्रदर्शन करे रहे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म पठान शुरू से ही विवादों में रही है। फिल्म का गाना बेशरम रंग रिलीज होने के बाद जमकर बवाल हुआ था। लोगों को दीपिका पादुकोण के डांस स्टेप, पहनावे और भगवा रंग की बिकिनी से आपत्ति है। लोगों को शिकायत है कि फिल्म खास तौर पर बेशरम रंग गाने के माध्यम से अश्लीलता फैलाई जा रही है।

माना आप बच्चे की तरह करते हैं प्यार, पर आदमी नहीं है कुत्ता: बॉम्बे HC ने FIR रद्द कर पुलिस पर लगाया जुर्माना, मोड़ पर टक्कर में ठोक दिया था 279/337

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने एक महत्पूर्ण फैसले में कहा कि कोई व्यक्ति किसी कुत्ते को कितना भी अपनी औलाद की तरह माने, लेकिन वह इंसान नहीं बन सकते। इसलिए उनके लिए IPC की धारा 279 और 337 के तहत किसी पर आरोप नहीं लगाया जा सकता है। ये दोनों धाराएँ मानवीय जीवन को खतरे में डालने पर लगाई जाती हैं।

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और पृथ्वीराज चवन की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्विगी फूड डिलीवरी पार्टनर के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि पुलिस अधिकारियों ने आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 279, 337 और 449 के तहत मामला दर्ज कर ‘तर्क की अवहेलना’ की है।

इतना ही नहीं, इस तरह के अतार्किक व्यवहार के लिए कोर्ट ने अधिकारियों को दंडित भी किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ 20,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस जुर्माने की वसूली अधिकारियों के वेतन से किया जाएगा।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “इसमें कोई शंका नहीं है कि कुत्ते या बिल्ली के मालिकों द्वारा उन्हें बच्चे या परिवार के सदस्य के रूप में माना जाता है, लेकिन जीवविज्ञान का मूल सिद्धांत ये कहता कि वे इंसान नहीं हैं। IPC की धारा 279 और 337 मानव जीवन को खतरे में डालने या किसी इंसान को जख्मी करने से संबंधित है।”

दरअसल, डिलीवरी पार्टनर राइडिंग के दौरान रोड पार कर रहे एक कुत्ते से टकरा गया था। इसमें दोनों घायल हो गए। बाद में कुत्ते की मौत हो गई थी। इसके बाद मानस गोडबोले नाम के डिलीवरी पार्टनर के खिलाफ एक महिला ने मामला दर्ज कराया था। घटना के समय मानस की उम्र 18 वर्ष थी और वह ‘डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन’ अंतिम वर्ष का छात्र था।

मानवीय जीवन को खतरे में डालने वाली धाराओं के अलावा, मुंबई की मरीन ड्राइव पुलिस ने गोडबोले के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम की धाराएँ भी लगाई थीं। हालाँकि, इस कानून की धाराओं के तहत भी केस को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से यह हादसा हुआ, उसमें आरोपित का इरादा जानबूझकर नुकसान पहुँचाने की नहीं थी।

दरअसल, साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान गोडबोले 11 अप्रैल को खाने की डिलीवरी देने के लिए जा रहा था। रात 8 बजे के करीब एक महिला मरीन ड्राइव पर आवारा कुत्तों को कुछ खिला रही थी। इसी दौरान एक कुत्ता बाइक के नीचे आ गया। उसे बचाने के लिए स्पीड लिमिट में चल रहे राइडर ने ब्रेक लगाई और वह एक तरह गिर गया। उसी तरफ वह कुत्ता भी गिर गया। इससे कुत्ते को चोट लग गई और वह स्वर्ग सिधार गया।

लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि आरोपित स्पीड लिमिट में गाड़ी चला रहा था। वह फूड आइटम देने के लिए जा रहा था, इसी दौरान रास्ते में कुत्ता आ गया। इससे यह दुर्घटना हुई और आरोपित खुद बाइक से नीचे गिर गया और उसे भी चोट लगी। उसका कोई आपराधिक इरादा नहीं था।

अब नसीरुद्दीन शाह की बीवी ने बेचा ‘डर’, कहा- काम मिलने में हो रही दिक्कतें… लोग घर पर पत्थर फेंकने लगेंगे

वरिष्ठ अभिनेत्री रत्ना पाठक ने एक साक्षात्कार में अपने पति और अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बड़बोलेपन को लेकर बात की। उन्होंने स्वीकार करते हुए कहा कि वह अपने पति की अत्यधिक मुखरता से डरती हैं। उन्हें डर है कि शाह के बातों से आहत लोग अगर उनके घर पर पत्थर फेंकने लगे तो वह क्या करेंगी। इसलिए उन्होंने अपने पति को संयम के साथ बात करने की सलाह दी है।

पाठक ने सिद्धार्थ कानन के साथ अपने साक्षात्कार के दौरान यह टिप्पणी की। साक्षात्कार में 11:50 के बाद, पाठक ने शाह के बड़बोलेपन से लगने वाले डर के बारे में बात की और बताया कि कैसे वह उन्हें अपनी राय व्यक्त करने से रोक रही हैं।

यह पूछे जाने पर कि नसीरुद्दीन शाह डंके जी चोट पर अपनी बात कहते हैं, आप भी कहती हो, क्या आपने कभी उन्हें रोकने की कोशिश की है? इसपर उन्होंने कहा, “हाँ, मैं उन्हें रोकती हूँ। आज के जमाने में कोई भी घर के सामने पत्थर लेकर खड़ा हो जाएगा। फिर आप क्या करेंगे। वैसे भी हम सभी को काम मिलना मुश्किल हो रहा है। काम नहीं मिलने के कई कारण हैं।” हालाँकि उन्होंने कहा कि लोगों को सार्वजनिक रूप से अपनी राय व्यक्त करने में समझदारी दिखानी चाहिए और डरना नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा, “डर लगता है। पर क्या करें। दुनिया में बहुत कुछ गलत हो रहा है। अगर हम उन्हें नहीं बताएँगे तो वे कैसे सुधरेंगे।” इसके बाद सिद्धार्थ पूछते हैं कि एक विकल्प है कि या तो आप जो हैं वह रहें या फिर कुछ न बोलें और जिंदगी शांति से गुजर जाएगी। क्या आप दोनों बैठकर इस बारे में बात करते हैं। पाठक कहती हैं, ”सामान्य लाइन या है कि हम जो हैं, वही रहना चाहते हैं। जहाँ तक हो इसकी कोशिश करते हैं। हमें नहीं लगता कि हम अनावश्क खतरे को उठाने वाले हैं। अभी तक तो नैया डूबी नहीं है। आगे क्या होगा देखा जाएगा।बस इसी सोच के साथ जी रही हूँ।”

पाठक का यह नुपूर शर्मा केस के महीनों बाद आया है। पिछले साल जून में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को टाइम्स नाउ की एक डिबेट के दौरान अपने धार्मिक आस्था पर अडिग रहने के कारण इस्लामवादियों की ओर से सर कलम करने की सैकड़ों धमिकयाँ मिली थी। AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर जैसे लोगों ने मामले को भड़काने का काम किया था। तभी नसीरुद्दीन शाह का भी बयान आया था। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी उन लोगों को फॉलो करते हैं जो जहर फैलाते हैं। इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी और उनके पुराने बयान भी चर्चा में आए थे।

मदरसे में तालीम लेने आई नाबालिग, Video बना ब्लैकमेल कर रहा था मौलवी शहादत हुसैन: गिरफ्तार, दावा- मोबाइल में हजारों अश्लील फोटो मिले

बिहार के नवादा जिले में मदरसे के एक मौलवी को नाबालिग छात्रा से छेड़खानी के आरोप में गिरफ्तार किया है। मौलवी की पहचान शहादत हुसैन के तौर पर हुई है। उस पर नाबालिग बच्ची के साथ अश्लील हरकत करने और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप है।

मामला कौवाकोल थाना क्षेत्र के मदरसा नूरी मस्जिद का है। आरोपित मौलवी करीब 3 साल से यहाँ पढ़ा रहा था। पीड़ित छात्रा ने आरोप लगाया है कि मौलवी ने उसकी एक फोटो खींच ली थी और इसे वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ छेड़खानी करता था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि मौलवी ने मदरसे में भी उसके साथ छेड़खानी की थी। वहीं पीड़िता के भाई का कहना है कि मौलवी 6 अलग-अलग सिम कार्ड रखता था और उसके मोबाइल से हजारों अश्लील फोटोज-वीडियो मिले हैं।

मामले में पकरीबरावां के एसडीपीओ महेश चौधरी ने कहा, “कौवाकोल थाने में एक शिकायत मिली थी कि एक मदरसा शिक्षक नाबालिग छात्राओं का अश्लील वीडियो बनाता था और उन्हें ब्लैकमेल करता था। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले के संबंध में जाँच जारी है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोग पहले आरोपित मौलवी के बारे में पुलिस को सूचना नहीं देना चाहते थे। स्थानीय पंचायत में ही मामले का निपटारा कर देना चाहते थे। यहाँ तक कि पंचायत में पीड़िता के परिवार से ही पैसा माँग लिया गया था। मौलवी का कहना है कि वह निर्दोष है। जिसने उसपर आरोप लगाया है, उसके साथ उसका अफेयर था। उसे बेवजह फँसाया जा रहा है।

पापा (लालू यादव) ने इनको बहुत शौक से रखा है, प्यार से इनको मौलाना साहब कहते हैं: तेज प्रताप यादव ने दिखाई राबड़ी देवी के बंगले की बकरी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। बिहार के वन, पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव एलआर ब्लॉग नाम से यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं। उनके वीडियो के क्लिप अक्सर वायरल होते रहते हैं। ऐसे ही एक क्लिप में वे राबड़ी देवी के आधिकारिक आवास 10 सर्कुलर रोड की एक बकरी को दिखाते हुए बता रहे हैं कि पापा (लालू यादव) इन्हें प्यार से मौलाना साहब बुलाते हैं।

15 मिनट 43 सेकेंड का यह वीडियो कब का है यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन तेज प्रताप यादव ने 10 दिन पहले ही इस वीडियो को अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया है। वीडियो में 3 मिनट 12 सेकेंड से लेकर 4 मिनट 15 सेकेंड के बीच आप इस बकरी की चर्चा सुन सकते हैं।

इस वीडियो को तेज प्रताप यादव ने ‘एक छोटा सा वृंदावन हमारे घर में भी’ शीर्षक से अपलोड किया है। बंगले के मंदिर, काम करने वाले कुछ लोगों और पशुओं और पेड़-पौधों के बारे में इस वीडियो में बताया है। गार्डन से पशुशाला की तरफ बढ़ते हुए वे एक बकरी से लोगों का परिचय करवाते हैं। तेज प्रताप बकरी के पास जाते हैं और उसकी दाढ़ी दिखाते हुए कहते हैं कि पापा प्यार से इन्हें मौलाना साहब कहते हैं।

तेज प्रताप वीडियो में कहते हैं, “सबसे पहले आपको स्टार्टिंग में दिखाते हैं हमारे पास गोट है यहाँ पर। बकरी। इसको पापा ने बहुत शौक से रखा है। ये देखिए इनका दाढ़ी है यहाँ पर। पापा बहुत अच्छे प्यार से इनको बोलते हैं मौलाना साहब हैं। मौलाना साहब हैं। मौलाना साहब की जो दाढ़ी होती है, साधु बाबा की जो दाढ़ी होती है, बड़ी-बड़ी, उसी तरह से इनकी दाढ़ी है।” तेज प्रताप आगे कहते हैं कि बकरी समेत सभी जानवरों को वो अपने घर का सदस्य समझते हैं। तेज प्रताप खुद को भगवान कृष्ण का वंशज बताते हुए कहते हैं कि गाय से प्रेम तो होगा ही। उसके बाद वह अपनी गौशाला दिखाते हैं।

आपको बता दें तेज प्रताप ने अपने माता पिता लालू यादव और राबड़ी देवी के नाम से LR VLOG शुरू किया है। इसे हजारों लोग फॉलो कर रहे हैं।

रेलवे में होती है लाइन, उसी की जमीन कब्जा कर गलियों के नाम भी रखे ‘लाइन’: हल्द्वानी से एक्सक्लुसिव रिपोर्ट

उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे जमीन से अतिक्रमण हटाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज (5 जनवरी 2023) को सुनवाई करेगी। उससे पहले हल्द्वानी में सन्नाटा दिख रहा है। उस लाइन नंबर 17 वनभूलपुरा में भी बुधवार (4 जनवरी 2023) को पूरी तरह सन्नाटा था, जहाँ हुए प्रदर्शन के वीडियो वायरल हैं।

लाइन नंबर 17 मुख्यतः किदवई नगर की मुख्य सड़क से हट कर है। जहाँ से महिलाओं और बच्चों के धरने का वीडियो आया था उसे आजाद नगर कहते हैं। बुधवार सुबह करीब 11 बजे ऑपइंडिया इस इलाके में पहुँची। अधिकतर दुकानें और मकान मुस्लिमों की है। महिलाएँ खरीदारी करती और पुरुष सड़क पर धूप सेंकते दिखे। आवाजाही सामान्य थी।

इसी गली में हुआ था धरना

इसलिए चुनी गई थी धरने की वो जगह

एक स्थानीय व्यक्ति ने हमें नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लाइन नंबर 17 ही वो बॉर्डर है, जहाँ तक रेलवे ने बुलडोजर चलाने के लिए जगह को चिन्हित कर रखा है। यहाँ एक सड़क बाजार को 2 हिस्सों में बाँटती है। बाईं तरफ का हिस्सा अतिक्रमण की जद में आ रहा, जबकि दाईं तरफ का हिस्सा बच सकता है। ऐसे में रेलवे की जमीन के बॉर्डर वाली सड़क को धरने के दिन प्रदर्शन के लिए चुना गया था।

वनभूलपुरा की गलियों को कहा जाता है ‘लाइन’

हल्द्वानी का वनभूलपुरा वो इलाका है, जहाँ गलियों के नाम ‘लाइन’ नंबर के तौर पर लिए जाते हैं। लाइन शब्द अमूमन रेलवे प्रयोग करता है। उदाहरण के लिए हल्द्वानी स्टेशन पर 3 लाइनें हैं। वनभूलपुरा क्षेत्र में जहाँ तक अतिक्रमण का क्षेत्र गिना गया है, उसे लाइन नंबर 17 कहा जाता है। इन लाइन नम्बरों में बाकायदा झुग्गियाँ और पक्के मकान बनवा लिए गए हैं।

गलियों को कहा जाता है लाइन

रेलवे ने लगा रखा है अतिक्रमण का लाल निशान

ऑपइंडिया ने उस चिह्न को भी खोज निकाला जिसे रेलवे ने अतिक्रमण के बॉर्डर के तौर पर चिह्नित कर रखा है। इस निशान में एक तीर का चिह्न बना हुआ है। जिस घर पर निशान लगा हुआ है वो घर बंद था। रेलवे लाइन से निशान के बीच तमाम दुकानें मौजूद थीं। उन दुकानों पर भी सामान्य काम धंधा होता दिखाई दिया।

रेलवे द्वारा लगा निशान

वनभूलपुरा और जाम

वनभूलपुरा से गुजरने वाली सड़क हल्द्वानी शहर से बाहर जाती है। न सिर्फ रेलवे मार्ग बल्कि यह सड़क भी अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है। किदवई नगर की शुरुआत में काफी चौड़ी यह सड़क रेलवे क्रॉसिंग पहुँचते-पहुँचते बिल्कुल संकरी हो जाती है। सड़क के दोनों तरफ अधिकतर मुस्लिमों की दुकाने हैं। ट्रेन गुजरने के दौरान इस रोड पर सिग्नल गिरा दिया जाता है जो अक्सर 10 से 15 मिनट तक बीच गिर जाता है। इस दौरान यहाँ काफी जाम लग जाता है। जाम की वजह से आने-जाने वाले राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ट्रैफिक जाम